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                <title>cattle - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बदहाली की मार, बिना भवन-संसाधन एक (कंपाउंडर) के भरोसे पशु चिकित्सालय </title>
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                        <![CDATA[जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा चिकित्स्थासालय,मवेशियों के उपचार हेतु पशुपालक परेशान ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-scourge-of-disrepair--without-a-building-or-resources--the-veterinary-hospital-is-dependent-on-a-single-compounder/article-143155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/kkkkkkota.jpg" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के देईखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय बदहाली का दंश झेल रहा है। स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी अस्पताल को न स्थायी भवन मिल पाया है और न ही पर्याप्त स्टाफ व संसाधन उपलब्ध हो सके हैं। वर्तमान में पूरा चिकित्सालय केवल एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) के भरोसे संचालित हो रहा है। अस्पताल अस्थायी रूप से जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा है, जबकि इससे क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार नए भवन निर्माण के लिए कम से कम 100़100 फीट भूमि का पट्टा जारी होना आवश्यक है, लेकिन स्थानीय पंचायत प्रशासन द्वारा पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है। इसके चलते अस्पताल पूर्व में मर्ज किए जा चुके राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में संचालित करना पड़ रहा है।</p>
<p>देईखेड़ा पशु चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक, एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) तथा एक पशु परिचर (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल एक पशुधन निरीक्षक के भरोसे व्यवस्थाएं चल रही हैं। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि स्थायी भवन, उपकरण और पशु चिकित्सक के अभाव में मवेशियों के उपचार में परेशानी आ रही है। गंभीर बीमार पशुओं को सर्जरी अथवा विशेष उपचार के लिए दूरस्थ केंद्रों तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन और पशुपालन विभाग से शीघ्र भूमि आवंटन व रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के साथ बीमार मवेशियों का हर सम्भव उपचार किया जा रहा है। भूमि आवंटन के लिये पंचायत को लिखा जा चुका है। पंचायत ने भवन के स्थानांतरित करने के लिये मौखिक बोला गया है। समस्त स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। <br /><strong>-ओमप्रकाश नागर,  पशुधन निरीक्षक, देईखेड़ा। </strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय के लिए भूमि आवंटन के लिए प्रस्ताव ले रखे है। जल्द ही भूमि चिहिन्त कर आवंटन किया जाएगा। <br /><strong>- राहुल पारीक, ग्राम विकास अधिकारी, देईखेड़ा। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 15:00:37 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : हरकत में आया घाटोली पंचायत प्रशासन, गौ माता का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार</title>
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                        <![CDATA[ गौ माता के साथ अमानवीय  व्यवहार करने पर  कठोर कार्रवाई होगी। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---ghatoli-panchayat-administration-takes-action--respectful-last-rites-for-the-cow/article-141360"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/00332.png" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। रामगंजमंडी क्षेत्र की घांटोली पंचायत में दैनिक नवज्योति अखबार में 29 जनवरी को खबर, प्रकाशित होने के बाद पंचायत प्रशासन हरकत में आ गया। सोशल मीडिया पर मृत गौ माता को घसीटकर ले जाने का वीडियो वायरल होने और इस संवेदनशील मुद्दे को नवज्योति द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद पंचायत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरूवार को मृत गौ माता को सम्मानपूर्वक अंतिम</p>
<p>संस्कार स्थल तक पहुंचाया। घाटोली पंचायत सचिव ने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में किसी भी गौ माता की मृत्यु होने पर इसकी सूचना तुरंत पंचायत को देना अनिवार्य है। बिना पंचायत को सूचित किए यदि कोई व्यक्ति मृत गौ माता को घसीटते हुए या अमर्यादित तरीके से ले जाता है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। </p>
<p>पंचायत सचिव ने पशुपालकों से अपील की कि मृत मवेशी की सूचना समय पर पंचायत को दें, ताकि नियमानुसार और पूरी श्रद्धा के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जा सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में यदि किसी व्यक्ति द्वारा गौ माता के साथ अमानवीय या अनुचित व्यवहार किया गया, तो पंचायत स्तर पर उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले को दैनिक नवज्योति अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर का व्यापक असर देखने को मिला और गुरूवार को घाटोली पंचायत क्षेत्र में गौ माता की मृत्यु होने पर ग्राम पंचायत ने तत्परता दिखाते हुए सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित की।<br />    </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 18:10:15 +0530</pubDate>
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                <title>आड़ी बही पर कच्चा नाला बना होने से हादसों का खतरा, आमजन के लिए गंभीर खतरे का बना कारण</title>
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                        <![CDATA[आवारा मवेशियों के जमावड़े  व सुरक्षा दीवार के अभाव से लोग परेशान।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/unlined-drain-on-adi-bahi-poses-risk-of-accidents/article-140713"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)67.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। नगर क्षेत्र की आड़ी बही पर बना कच्चा नाला इन दिनों आमजन के लिए गंभीर खतरे का कारण बना हुआ है। नाले पर दिनभर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, वहीं सुरक्षा दीवार या रेलिंग नहीं होने से पैदल राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और दुकानदारों को भय के साए में आवाजाही करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी समय यहां बड़ा हादसा हो सकता है। उल्लेखनीय है कि गत दिनों आई बाढ़ में आड़ी बही पर बना पक्का नाला बह गया था। इसके बाद नगर पालिका प्रशासन ने अस्थायी रूप से कच्चे नाले का निर्माण तो करा दिया, लेकिन सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं करवाया । नाले के आसपास कुछ सफाई कर्मचारियों एवं नागरिकों द्वारा कचरा डाले जाने से स्थिति और अधिक बिगड़ गई है। गंदगी, दुर्गंध और फिसलन के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है।</p>
<p>दिनभर मवेशियों के जमावड़े से आसपास के दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मवेशियों के आपस में लड़ने से दुकानों का सामान खराब हो जाता है, वहीं राहगीर भी कई बार चपेट में आ जाते हैं। स्थानीय दुकानदार छगन बाबर ने बताया कि मवेशियों के कारण ग्राहक रुकने से कतराते हैं। पैदल राहगीर नर्सिंग राठौर ने रात के समय स्थिति को बेहद खतरनाक बताया। दोपहिया चालक सुनील गोयल ने मवेशियों के अचानक सामने आ जाने से दुर्घटना का डर जताया। बुजुर्ग कन्हैयालाल सेन ने बच्चों और बुजुर्गों के लिए रास्ते को असुरक्षित बताया।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong><br />इस संबंध में नगर पालिका अधिशासी अधिकारी प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया कि नाले में कचरा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तथा आड़ी बही पर जल्द ही सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जाएगा। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि समय रहते समस्या का समाधान होगा।<br /><strong>-प्रवीण कुमार शर्मा, नगर पालिका,अधिशासी अधिकारी कापरेन</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 17:01:27 +0530</pubDate>
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                <title>दुर्गंध के बीच कैसे करें उपचार, डॉक्टर खुद होने लगे बीमार, बदबू के कारण सांस लेना  हो रहा  मुश्किल </title>
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                        <![CDATA[राजकीय पशु चिकित्सालय से नहीं उठ रहे मृत मवेशी  चिकित्सालय सटाफ व पशुपालक हो रहे परेशान।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-to-provide-treatment-amidst-the-stench--doctors-themselves-are-falling-ill--breathing-is-becoming-difficult-due-to-the-foul-smell/article-137177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में बीते कई दिनों से मृत मवेशियों को नहीं उठाए जाने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अस्पताल परिसर में पड़े मृत पशुओं से उठ रही दुर्गंध के कारण न सिर्फ उपचार कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि चिकित्सक, स्टाफ और पशुपालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं, लेकिन परिसर में फैली बदबू के चलते वहां रुकना तक मुश्किल हो गया है। दुर्गंध के कारण कई पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। इसके बावजूद मृत मवेशियों के निस्तारण को लेकर जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।</p>
<p><strong>कई चिकित्सकों की बिगड़ी तबीयत</strong><br />अस्पताल में कार्यरत पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बताया कि लगातार दुर्गंध के संपर्क में रहने से उन्हें सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। कुछ चिकित्सकों को तो इलाज के बाद खुद चिकित्सकीय परामर्श लेना पड़ा है। एक चिकित्सक ने बताया कि मृत मवेशियों से निकलने वाली दुर्गंध में अमोनिया और सड़ांध की गैसें होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। लगातार ऐसे माहौल में काम करने से हमारी तबीयत बिगड़ रही है, फिर भी मजबूरी में हमें पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है। एक अन्य चिकित्सक ने कहा कि यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>पशु उपचार कार्य भी प्रभावित</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण में पशुओं का इलाज करना बेहद कठिन हो गया है। संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अन्य बीमार पशुओं की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। दुर्गंध और असहज वातावरण के चलते कई बार पशुओं का उपचार जल्दी-जल्दी निपटाना पड़ रहा है या फिर पशुपालकों को इंतजार करने को कहा जा रहा है। इससे गंभीर रूप से बीमार पशुओं के इलाज में देरी हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की स्थिति में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उपचार संभव नहीं हो पा रहा है। बदबू के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>अब संक्रमण का खतरा बढ़ा</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि मृत पशुओं के लंबे समय तक पड़े रहने से बैक्टीरिया और कीटाणुओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ अस्पताल परिसर अस्वच्छ हो रहा है, बल्कि अन्य बीमार पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है। दुर्गंध के कारण मक्खियों और अन्य कीटों की संख्या भी बढ़ गई है, जो बीमारियों को और फैलाने का कारण बन सकती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध इतनी तीव्र है कि उपचार कक्षों में लंबे समय तक रुकना मुश्किल हो गया है, जिससे नियमित जांच, इंजेक्शन, ड्रेसिंग और आॅपरेशन जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p>-हमारे पशु बीमार हैं, उन्हें आराम और साफ माहौल चाहिए, लेकिन यहां बदबू के कारण पशु भी बेचैन हो जाते हैं। प्रशासन को यहां की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए।<br /><strong>- रमेश गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>-राजकीय पशु चिकित्सालय में मृत मवेशियों को कई दिनों से नहीं उठाए जाने के कारण फैली दुर्गंध अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुकी है। बदबू के चलते पशुओं की उपचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई पशु चिकित्सकर्मियों की तबीयत तक बिगड़ चुकी है।<br /><strong>- डॉ. भंवर सिंह, वरिष्ठ पशु चिकित्सक</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:30:54 +0530</pubDate>
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                <title>श्वानों के लिए नगर निगम बनाएगा शेल्टर होम,  आवारा श्वानों से मिलेगी शहर वासियों को मुक्ति, पकड़े गए श्वानों को नहीं छोड़ेंगे उसी जगह पर</title>
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                        <![CDATA[आवारा श्वान व मवेशियों का मुद्दा दैनिक नवज्योति लगातार प्रमुखता से उठाता रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/municipal-corporation-to-build-shelter-homes-for-dogs--city-residents-to-get-relief-from-stray-dogs--captured-dogs-will-not-be-released-back-in-the-same-place/article-131807"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर समेत पूरे प्रदेश में लोगों को अब शीघ्र ही आवारा श्वानों से मुक्ति मिलेगी। अब शिक्षण संस्थान व अस्पतालों के आस-पास घूमने वाले आवारा श्वानों को पकड़कर शेल्डर होम में रखा जाएगा। साथ ही टीकाकरण के बाद उन्हें वापस उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाएगा।ऐसा सुप्रीम कोर्ट की ओर से शुक्ववार को जारी आदेश से होगा। दिल्ली एनसीआर समेत राजस्थान और अन्य प्रदेशों में आवारा श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता ही जा रहा है। श्वानों द्वारा आए दिन लोगों को विशेष रूप से छोटे मासूम बच्चों को शिकार बनाने की कई घटनाएÞं हो चुकी है।  इन घटनाओं को देखते हुए इन पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की पीठ ने शुक्रवार को दिशा निर्देश जारी किए हैं। </p>
<p><strong>अभी टीकाकरण के बाद वापस छोड़ रहे</strong><br />कोटा शहर में मुख्य मार्गों समेत गली मौहल्लों  में आवारा श्वानों का काफी आतंक है। हालत यह है कि श्वान मासूम बच्चों को काफी दूर तक घसीटकर ले जा रहे है। हालांकि नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला परिसर में श्वानशालाएं बनाई हुई है। जहां निजी फर्म के माध्यम से श्वानों को पकड़कर उन्हें निर्धारित समय के लिए रखा जा रहा है। वहां उनका बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। इसके बाद वापस उन श्वानों को जहां से पकड़ा गया था वापस वहीं छोड़ा जा रहा है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ऐसा नहीं होगा।  नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से करीब 150 से अधिक कैनल में श्वानों को रखा जा रहा है। अब तक हजारों श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा चुका है। उसके बाद भी शहर में न तो इनकी संख्या कम हो रही है और न ही लोगों को इनसे राहत मिल रही है। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। </p>
<p><strong>यह हैं हालात</strong><br />हालत यह है कि वर्तमान में चाहे नगर निगम कार्यालय  हो या कोटा विकास प्राधिकरण, एमबीएस अस्पताल हो या न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल। सीएमएचओ कार्यालय हो या अदालत परिसर। सरकारी स्कूलों तक में श्वानों को बैठे व घूमते हुए देखा जा सकता है। जहां स्कूलों में बच्चों के लिए और अस्पतालों में मरीजों व तीमारदारों के लिए ये खतरा बने हुए हैं। </p>
<p><strong>नवज्योति लगातार उठा रहा मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि आवारा श्वान व मवेशियों का मुद्दा दैनिक नवज्योति लगातार प्रमुखता से उठा रहा है। समाचार पत्र में 6 नवम्बर को पेज दो पर श्वानों का आतंक मिटा ना आवारा मवेशियों का’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें शहर में इन दोनों के कारण आमजन को हो रही परेशानी को बताया था। जिसके बाद कोटा दक्षिण निगम आयुक्त ने एक दिन पहले ही श्वानशाला का निरीक्षण भी किया था। उन्होंने निगम अधिकािरयों को श्वानों के बधियाकरण को बढ़ाने के निर्देश दिए थे। </p>
<p><strong>श्वानशाला में ही शेल्टर होम बनाने की योजना</strong><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब नगर निगम की ओर से इस संबंध में सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही श्वानशाला में ही शेल्टर होम बनाने की योजना है।  निगम की ओर से श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण तो कई सालों से किया जा रहा है। लेकिन पूर्व में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार ही उन्हें वापस उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा था। अब शिक्षण संस्थान व अस्पतालों के आस-पास से पकड़े गए श्वानों को शेल्टर होम में रखा जाएगा। उन्हें वापस उसी जगह पर नहीं छोड़ा जाएगा। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना की जाएगाी। विधि अधिकारी को इस संबंध में आदेशित किया गया है कि स्वास्थ्य अधिकारी के माध्यम से श्वानशाला में ही शेल्टर होम बनाने के संबंध में कार्यवाही की जाए।<br /><strong>-अशोक कुमार त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से आमजन को काफी राहत मिलेगी। नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अक्षरश: पालना की जाएगी। शिक्षण संस्थान व अस्पतालों के आस-पास से श्वानों को पकड़कर शेल्टर होम में रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए कोर्ट के निर्णय का अध्ययन कर उसके अनुसार शेल्टर होम बनाए जाएंगे। <br /><strong>-ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Nov 2025 16:53:18 +0530</pubDate>
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                <title>टोल वसूली पर ध्यान : संकट में हाईवे पर जान, मवेशियों को हाइवे पर आने से नहीं रोक पाया एनएचएआई</title>
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                        <![CDATA[अधिकारियों की घोर लापरवाही से हाइवे पर आए दिन हादसे हो रहे हैं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/focusing-on-toll-collection--lives-are-at-risk-on-the-highway--nhai-has-failed-to-prevent-cattle-from-crossing-the-highway/article-128893"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा से गुजर रही नेशनल हाइवे की सड़कों पर यात्रियों की जान संकट में रहती है। एनएचएआई कोटा संभाग के अधिकारियों का  सिर्फ टोल वसूलने पर ध्यान है, यात्रियों की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं है। जबकि, टोल चुकाने के बावजूद वाहन चालकों को खतरों से भरा सफर करना पड़ रहा है।  हालात यह है कि हाइवे पर जगह-जगह मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। जिसकी वजह से वाहन चालक हादसों के शिकार हो जाते हैं।   हालात यह है, हैंगिंग ब्रिज से बूंदी की ओर, जाखमूंड, बारां फोरलेन, कैथून, रायपुरा सहित हाइवे के अन्य मार्गों पर सुबह से रात तक मवेशियों का जमघट लगा रहता है।  </p>
<p><strong>टोल चुकाने के बाद भी जोखिम भरा सफर</strong><br />कोटा एनएचएआई सिर्फ टोल वसूलने में ही मशगुल है। जबकि, यात्रियों की सुरक्षा पर बिलकुल भी ध्यान नहीं है। हाइवे पर आवारा मवेशियों को आने से रोकने में अधिकारी पूरी तरह विफल रहे। स्पीड से गुजरते वाहनों के सामने अचानक  मवेशियों के आने से वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। अधिकारियों की घोर लापरवाही से हाइवे पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। पूर्व में कोटा-रावतभाटा हाइवे पर कई हादसे हो चुके हैं। </p>
<p><strong>मवेशियों पर न रिफ्लेक्टर लगे न ही रेडियम बेल्ट बंधी दिखी</strong><br />एनएचएआई के अधिकारियों द्वारा मवेशियों के रिफ्लेक्टर लगाए जाने व मवेशी मुक्त सड़क के दावे किए जाते हैं, लेकिन  हैंगिंग ब्रिज से बूंदी रोड पर हाइवे के दोनों तरफ मवेशियों का जमावड़ा लगा हुआ नजर आया। उनके ऊपर न तो रिफ्लेक्टर लगे हुए थे और न ही रेडियम बेल्ट बंधी हुई थी। दिन में तो मवेशी दिखाई दे जाते हैं लेकिन रात के समय अचानक मवेशियों के आने से वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। </p>
<p><strong>इन जगहों पर हादसे की रहती आशंका </strong><br /><strong>नेशनल हाईवे 52 : </strong>हैंगिंग ब्रिज से जाखमूंड के बीच,  जगपुरा, आलनिया, कसार, मंडाना,  सुकेत, अकतासा, असनावर तक खतरा बना रहता है। <strong>नेशनल हाईवे 27 : </strong>कैथून रोड, रायपुरा, हाथीखेड़ा, जगन्नाथपुरा, ताथेड़, पोलाई, सीमलिया, गड़ेपान, पलायथा, बमुलिया, रामपुरिया और समरानिया में मवेशियों के कारण हादसे का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>हैंगिंग ब्रिज से जाखमूंड तक रहता जमावड़ा</strong><br />एनएच-52 पर हैंगिंग ब्रिज पार करने के बाद जाखमूंड तक सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। जबकि, यहां से प्रतिदिन सैंकड़ों वाहन गुजरते हैं। इस मार्ग पर सड़क के दोनों ओर जंगल व खेत हैं। वहीं, जाखमूंड से बूंदी तक हाइवे किनारे कई गांव बसे हैं। जहां से बड़ी संख्या में मवेशी हाइवे पर आ जाते हैं।</p>
<p><strong>यात्री बोले-एनएचएआई को सिर्फ टोल वसूली से मतलब</strong><br />रायपुरा निवासी सत्येंद्र कुमार, ब्रजेश नागर, पप्पू मेघवाल का कहना है कि एनएचएआई को सिर्फ टोल वसूलने से मतलब है, उन्हें यात्रियों की जान की कोई परवाह नहीं है। सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। बारां फोरलेन पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे मवेशियों को सड़कों पर आने से रोका जा सके। </p>
<p><strong>कार के सामने आ गए मवेशी, बाल-बाल बची जान</strong><br />वाहन चालक बिल्लू ओसवाल, मजहर अंसारी, फुरकान मोहम्मद, भुवनेश नागर कहते हैं, कोटा से जयपुर जाने के लिए हैंगिंग ब्रिज पर टोल चुकाते हैं। ब्रिज पार करते ही जाखमूंड मार्ग पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा रहता है,जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।  डीसीएम निवासी जमना शंकर प्रजापति ने बताया कि गत वर्ष रात को जयपुर से कोटा लौट रहे थे। डाबी स्थित रामपुरिया गांव से हैंगिंग ब्रिज के बीच अचानक दो मवेशी कार के सामने आ गए। जिसे बचाने के लिए ब्रेक लगाए तो कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। जिससे कार का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो  गया।   </p>
<p><strong>शिकायतों पर भी नहीं होती कार्रवाई  </strong><br />मेडिकल व्यवसायी हितेश कुमावत का कहना है, दवा सेल्स के काम को लेकर हाड़ौती में आना-जाना रहता है। तीन माह पहले बारां फोरलेन से अंता से कोटा लौट रहा था। रात करीब 9 बजे डिवाइडर पार कर अचानक मवेशी कार के सामने आ गया। गनीमत रही की कार की स्पीड धीमी होने से दुर्घटना से बच गया। मानपुरा निवासी कौशल, यादराम मीणा, मनोज शर्मा ने कहा कि एनएचएआई द्वारा रात को सड़कों से मवेशियों को हटाने का दावा किया जाता है, जो पूरी तरह से झूठ हैं। कुछ माह पहले बूंदी से रात को कोटा लौट रहे थे। पूरे रास्ते में न तो पेट्रोलिंग टीम नहीं मिली।</p>
<p><strong>एनएचएआई प्रोजेक्ट मैनेजर ने फोन उठाया न मैैसेज का जवाब दिया</strong><br />मामले को लेकर नवज्योति ने एनएचएआई प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप अग्रवाल को फोन किया लेकिन उन्होंने अटैंड नहंी किया। इसके बाद उन्हें वाइस मैसेज कर उनका पक्ष जानना चाहा, उसका भी जवाब नहीं दिया। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:01:24 +0530</pubDate>
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                <title>खतरनाक सफर: नेशनल हाइवे 27 पर मौत के गड्ढे, अव्यवस्था से बढ़ रहे हादसे</title>
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                        <![CDATA[ अव्यवस्थित डिवाइडर और मवेशियों का जमावड़ा दुर्घटना का कारण]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/dangerous-journey--death-potholes-on-national-highway-27--accidents-increasing-due-to-chaos/article-126545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_400-px)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। कोटा-शिवपुरी नेशनल हाईवे 27 पर लगातार बढ़ती समस्याएं वाहन चालकों के लिए खौफनाक सफर का कारण बन रही हैं। खस्ताहाल सड़क, डिवाइडर में उगे पेड़-पौधे, गहरे गड्ढे और मवेशियों की मौजूदगी हाईवे को रोजाना खतरनाक बना रही है। कई वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी अब तक गंभीरता नहीं दिखा पाए हैं। </p>
<p><strong> गड्ढों से मौत कागढ़ बना हाईवे</strong><br />सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है। वाहन चालक अक्सर गहरे गड्ढों में फंस जाते हैं या अचानक घूमते मवेशियों से टकराकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। हादसों की संभावना दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।</p>
<p><strong>डिवाइडर में पेड़-पौधे, खतरे का कारण</strong><br />डिवाइडर में उगे पेड़-पौधों की कटाई महीनों से नहीं हुई। टहनियां सड़क पर झुक जाती हैं और अचानक वाहन चालकों के सामने आ जाती हैं। मवेशी भी इन्हीं पेड़ों के बीच छिपकर सड़क पर आ जाते हैं। इससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन विभाग ने ध्यान नहीं दिया है।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों की चुप्पी</strong><br />लोगों का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर मौन हैं। अब जनता उच्च अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।</p>
<p><strong> टोल वसूली लेकिन मरम्मत नहीं</strong><br />स्थानीय लोगों ने बताया कि टोल प्लाजा पर वसूली तो की जाती है, लेकिन मरम्मत व साफ-सफाई पर खर्च नहीं किया जाता। वाहन चालक भारत सिंह, राहुल, देवेंद्र, पवन, श्रीकृष्ण, अकरम खान, मूनब्बर खान ने कहा कि सड़क पर सुरक्षा संकेत बोर्ड भी नहीं लगे हैं।<br /> <br /><strong> दुर्घटनाओं का बढ़ता आंकड़ा</strong><br />कोटा से झांसी तक इस हाईवे पर प्रतिदिन दर्जनों दुर्घटनाएं होती हैं। कई हादसे जानलेवा साबित होते हैं। लोगों ने हाईवे विभाग के अधिकारियों से सड़क की मरम्मत, डिवाइडर की सफाई, संकेत बोर्ड लगाने और मवेशियों की रोकथाम की मांग की है।</p>
<p>कार्यकारी एजेंसी को दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। जल्द ही हाईवे पर बनी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।<br /><strong>- उमाकांत मीणा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 11 Sep 2025 14:59:20 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 24- गलियों में मनमर्जी के डिवाइडर से परेशान राहगीर, रात में श्वानों का आतंक </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बदहाली का आलम - पार्क पर ताला लगा होने से बच्चे निराश, कचरा पात्र के पास मंडरा रहे मवेशी]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-24---pedestrians-troubled-by-arbitrary-dividers-in-the-streets--terror-of-dogs-at-night/article-123320"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)25.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में नगर निगम कोटा दक्षिण वार्ड के 24 की कॉलोनियों में बने मनमर्जी के डिवाइडर से राहगीर परेशान है। वहीं रात्रि के समय श्वानों का आतंक रहता है। वार्ड में बनी नालियों में पानी की निकासी सही नहीं होने से बारिश के दिनों में पानी सड़क पर आ जाता है। वार्ड की मुख्य सड़क पर स्थित सामुदायिक भवन में कचरा फैला हुआ है। वार्ड के छोटा रामद्वारा के पास स्थित पार्क में ताला लगा होने की वजह से बच्चे खेल नहीं पाते है। एक अन्य पार्क में जहां गंदगी जगह-जगह बिखरी हुई थी वहां बच्चे खेल रहे थे। पार्क में बिजली के पोल से तार व बल्ब खराब हो रखे है। वार्डवासियों के अनुसार शहर के बीच में स्थित नगर निगम कोटा दक्षिण वार्ड के 24 में रात्रि के समय पर श्वानों के आतंक से राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।  वार्ड में बारिश के समय में नालियों छोटी होने से बारिश का पानी का नालियों से बाहर आ जाता हैं। इस कारण रहवासियों को बहुत दिक्कत होती है। नालियों का लेवल भी सही नहीं होने से पानी की निकासी नहीं हो पाती है। वार्ड में जगह-जगह बने डिवाइडर से राहगीरों व वाहनचालकों के चोटिल होने का खतरा हमेशा बना रहता है। वार्ड में बने सामुदायिक भवन में कार्यक्रम होने के बाद भी लोग साफ-सफाई नहीं करवाते है। वहां डिस्पोजल व अन्य चीजे हवा के कारण ईधर-उधर उड़ती रहती है। वार्ड के अंतिम छोर पर सड़क किनारे रखा कचरा पात्र में शाम तक कचरा पड़ा होने से उसे गायें इधर-उधर बिखेर देती है। कचरा होने से पशुओं का जमावड़ा बना रहता है। वार्ड के एक पार्क पर ताला लगा है तो दूसरे में गंदगी होने के बावजूद बच्चों को खेलना पड़ता है। पार्क में बिजली के पोल से तार व बल्ब सब खराब हो रहे थे।</p>
<p><strong>श्वान बने परेशानी</strong><br />वार्ड में रहने वाले जावेद, इरफान व अख्तर  ने बताया कि रात्रि के समय पर श्वानों का आतंक बना रहता है। राहगीरों के पीछे दौड़ते रहते है। रात के समय बच्चों व बुजुर्गोँ को काफी परेशानी होती है।</p>
<p><strong>सामुदायिक भवन में पड़ा कचरा बना मुसीबत  </strong><br />सामुदायिक भवन में हुए कार्यक्रम के बाद आयोजनकर्ताओं ने भवन के अंदर ही डिस्पोजल सहित अन्य कचरा वहीं पर पड़ा हुआ था। जिससे आसपास के लोगों ने बताया कि कचरा पड़ा होने से इसमें बदबू आ रही हैं।</p>
<p><strong>घरों के पास निकल रही विद्युत लाइन दे रही हादसे को दावत</strong><br />घोसी मोहल्ले में स्थित गालियों में कुछ मकानों के नजदीक से विद्युत लाईनें गुजर रही हैं। जिनसे बारिश के समय पर हादसे की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>खाली प्लाट को बना दिया कचरा पात्र</strong><br />वार्ड में स्थित खाली प्लॉट को लोगों ने इसको ही कचरा पात्र बना दिया है। कचरा पात्र भरा होने के कारण राहगीरों को दुर्गंध के कारण निकलना मुश्किल हो रहा है। कचरा पात्र के कारण पशु भी विचरण करते रहते है। </p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />किशोरपुरा, घोसी मोहल्ला इत्यादि क्षेत्र</p>
<p><strong>यह बोले वार्डवासी</strong><br />मेरी दुकान के सामने स्थित डिवाइडर होने से बारिश के समय पर पानी की निकासी होने में दिक्कत आती है। पानी दुकान के सामने ही इकट्ठा हो जाता हैं।<br /><strong>-अब्दुल अजीज</strong></p>
<p>वार्ड में रात्रि के समय पर श्वान परेशान करते हैं। रात्रि में अचानक बाइक सवार के पीछे भागने लगते है। श्वानों के आतंक को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों का शिकायत भी की है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला है। <br /><strong>-जावेद मोहम्मद </strong></p>
<p>रामद्वारा के पास स्थित पार्क को खोल दिया जाएं तो बच्चों को खेलने के लिए इधर-उधर नहीं जाना पड़ेगा। इसमें उगी घास की भी कटाई की जानी चाहिए क्योकि इसमें से रात्रि के समय पर जहरीले जानवरों के आने की आशंका रहती हैं। <br /><strong>-राजू </strong></p>
<p>सामुदायिक भवन की सफाई करवा दी जाएगी। वही श्वानों की समस्या के लिए हमने निगम को बोल रखा है जिसका समाधान निगम ही करेगा। वार्डवासियों की जो भी समस्या है उसका समाधान जल्द करवा देंगे।<br /><strong>- शाइना घोसी, पार्षद 24 कांग्रेस</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 14:44:42 +0530</pubDate>
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                <title>हादसों का कारण बन रही कैटल युक्त सड़कें</title>
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                        <![CDATA[लोगों ने बताया शहर में सांडों द्वारा लोगों को मारने व उठाकर पटकने की घटनाएं होने  से अधिक डर लगने लगा है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cattle-filled-roads-are-causing-accidents/article-121404"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/212142roer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में इन दिनों बरसात का सीजन चल रहा है। ऐसे में आए दिन रोड लाइटें बंद रहने से अंधेरा रहता है। उसी के साथ सड़कों पर बैठे मवेशियों के झुंड। ये सभी इन दिनों हादसों के कारण बन रहे हैं।  शहर को कैटल मुक्त बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। उसके बाद भी शहर  में जिस तरह से मुख्य मार्गों पर मवेशियों के झुंड दिन के समय ही नहीं रात में भी डेरा डाले हुए हैं। उससे शहर कैटल युक्त अधिक नजर आ रहा है। शहर के हर चौराहे व मुख्य मार्गों पर बरसात के इस सीजन में अधिक मवेशी नजर आ रहे है। इसका कारण स्थानीय मवेशियों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में फसल कटने के बाद अधिकतर पशु पालक व किसान अपने मवेशियों को शहर की तरफ भेज रहा है। कई मवेशी तो शहर से रात के समय निकल रहे हैं जबकि कई यहां आने के बाद सड़कों पर डेरा डालकर बैठे हुए हैं। </p>
<p><strong>रात के अंधेरे में नहीं आते नजर</strong><br />बरसात के समय में एक तो सड़कों पर गड्ढ़ों में भरा पानी और रोड लाइटें बंद होने से छाया अंधेरे में वाहन चालक सावधानी से वाहन चलाते है। ऐसे में रात के अंधेरे में सड़कों पर बैठे काले व गहरे रंग के मवेशी आसानी से नजर भी नहीं आते। ऐसे में अक्सर उन मवेशियों से टकराकर वाहन चालकों के हादसे होने का खतरा बना हुुआ है। </p>
<p><strong>सांड अधिक होने से खतरा</strong><br />शहर में सड़कों पर मवेशियों में गायों की तुलना में सांड अधिक हैं। सांड के सींग बड़े व ताकतवर होने से उसके द्वारा लोगों को उठाकर फेकने व उनकी तरफ दौड़ने से इनसे अधिक खतरा बना हुआ है।  लोगों का कहना है कि सांड सड़क के बीच में खड़े होने पर आसानी से हटते भी नहीं है। वाहन के सामने आने पर हॉर्न बजाने पर भी डटकर खड़े रहते हैं। उन्हें भगाने पर पलटकर वार करने का डर हमेशा बना रहता है। लोगों ने बताया कि जिस तरह से शहर में सांडों द्वारा लोगों को मारने व उठाकर पटकने की घटनाएं हुई हैं। उससे अधिक डर लगने लगा है। </p>
<p><strong>गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश</strong><br />शहर में निराश्रित हालत में घूमने वाले मवेीशियों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। लेकिन निगम अधिकारी उस जिम्मेदारी को सही ढंग से नहीं निभा पा रहे है। निगम ने मवेशी पकड़ने का ठेका दिया हुआ है। ठेकेदार अपनी मर्जी से  मवेशी पकड़कर लाते हैं और इतिश्री कर लेते हैं। जबकि यह शहर की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। हालत यह है कि निगम अधिकारी गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश होने से उन्हें रखने की जगह नहीं होने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने लगते हैं। </p>
<p><strong>मवेशी शहर की बड़ी समस्या</strong><br />शहर में इन दिनों सड़कों पर जहां देखो वहीं मवेशी अधिक नजर आ रहे हैं। बरसात के समय में इनकी संख्या अचानक से अधिक दिखने लगी है। निगम अधिकारियों को चाहिए कि वे इन्हें पकड़कर लोगों को हादसों से बचाए।<br /><strong>- राजू कहार, कैथूनीपोल</strong></p>
<p><strong>हादसों से लगने लगा डर</strong><br />शहर में निराश्रित गौवंश बड़ी समस्या है। जिस तरह से सांड द्वारा आए दिन लोगों को मारने की घटनाएं हो रही है। उससे सांड देखते ही डर लगने लगता है। मवेशी पकड़वाने की शिकायतों के बाद भी  जिस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए वह नहीं हो रही है। <br /><strong>- महेश योगी, साबरमती कॉलोनी</strong></p>
<p><strong>मवेशी पकड़ने से पहले करें व्यवस्था</strong><br />शहर में सड़कों पर निराश्रित गौवंश की समस्या गभ्भीर है। समय-समय पर उन्हें पकड़ते भी है। लेकिन निगम की गौशाला में क्षमता से अधिक  गौवंश है। जिससे उन्हें टहलने की पर्याप्त जगह नहीं मिलने से उनकी मृत्युदर बढ़ जाती है। अधिकारियों को चाहिए कि घेरा डालकर मवेशी पकड़ने से पहले गौशाला में व्यवस्था करें। <br /><strong>- जितेन्द्र सिंह, अध्यक्ष गौशाला समिति नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>गौशाला विस्तार के प्रयास</strong><br />निगम की गौशाला में पर्याप्त संख्या में गौवंश है। शिकायतों पर उन्हें पकड़ भी रहे हैं। साथ ही गौशाला विस्तार का भी प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए जमीन आवंटित हो चुकी है। उसका कब्जा मिलने के बाद उसका काम कराया जाएगा। <br /><strong>- महेश गोयल, उपायुक्त  नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Jul 2025 16:28:09 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा के ऐतिहासिक पशु मेले का खत्म हो रहा अस्तित्व, पहले जगह बदलने से फिर लम्पी ने लगाई रोक </title>
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                        <![CDATA[दशहरा मेले में इस बार भी पशु मेला लगना मुश्किल]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-existence-of-kota-s-historic-cattle-fair-is-coming-to-an-end/article-118595"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/458.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण व उत्तर की ओर से इस बार 132 वां राष्ट्रीय दशहरा मेला तो 22 सितम्बर से आयोजित किया जाएगा। लेकिन इसके साथ ही लगने वाला आकर्षण का केन्द्र पशु मेले का अस्तित्व खत्म होने से उसका लगना मुश्किल है।  नगर निगम की ओर से हर साल दशहरे पर आयोजित होने वाले मेले के दौरान सबसे अधिक आकर्षण का केन्द्र रहता था पशु मेला। इस मेले में शहर ही नहीं दूरदराज से पशु बिकने के लिए आते थे। पशु पालक न केवल पशुओं को बेचने वरन् उन्हें खरीदने वाले भी काफी लोग आते थे। पशु पालकों व किसानों का मेले में आने पर आकर्षण बने। इसके लिए पशु मेला स्थल पर ही निगम की ओर से किसान रंगमंच का आयोजन किया जाता था। जहां किसानों से संबंधित ही सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे। जानकारों के अनुसार दशहरा मेले के विजयश्री रंगमंच पर आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रमों की तरह ही किसान रंगमंच पर भी  काफी भीड़ रहती थी। देर रात तक लोग उन कार्यक्रमों का आनंद लेते थे।  लेकिन अब न तो पशु मेला लग रहा है और न ही किसानों के लिए कार्यक्रम हो रहे है। किसान रंगमंच बनता है और उस पर कार्यक्रम भी होते हैं लेकिन वह किसानों के लिए न होकर स्थानीय व आर्केस्ट्रा पार्टी के कार्यक्रम होने लगे हैं। </p>
<p><strong>निगम को होती थी आय</strong><br />जानकारों के अनुसार पशु मेले का आयोजन नगर निगम की ओर से किया जाता था। इसके लिए अलग से व्यवस्था व अधिकारियों कर्मचारियों की नियुक्ति होती थी। मेले में आने वाले पशु पालकों की पर्ची कटती थी। जिससे निगम को आय भी होती थी। हालांकि यह आय बहुत कम होती थी। वहीं पशुओं के लिए  चारा व भूसे का भी इंतजाम होता था। साथ ही बाहर से आने वाले लोगों के लिए दाल बाटी व देशी खाना बनता था। मेले में अलग ही आकर्षण रहता था। </p>
<p><strong>बंधा धर्मपुरा व देव नारायण में किया था शिफ्ट</strong><br />नगर निगम की ओर से पहले जहां दशहरा मैदान  के भाग पुलिस कंट्रोल रूम के पास ही पशु मेला लगता था। उस मैदान को अभी भी पशु मेला स्थल के नाम से ही जानते हैं। निगम की ओर से इस पशु मेले को पहले तो सीएडी रोड पर ही अतिक्रमण से मुक्त करवाई गई बकरा मंडी की जगह पर संचालित किया गया। लेकिन वहां पशु पालकों की संख्या काफी कम रही। इसके बाद इसे बंधा धर्मपुरा और फिर देव नारायण आवासीय योजना में शिफ्ट किया गया। लेकिन यह मेला वहां भी अपनी पहचान नहीं बना सका। उसके बाद एक बार पशुओं में आए लम्पी रोग को देखते हुए रा’य सरकार पशु पालक विभाग की ओर से पशु मेला लगाने पर रोक लगाई थी। उसके बाद दूसरे साल भी इसी रोग के कारण मेला नहीं लग सका। वहीं अब हालत यह है कि पशु मेला अपना अस्तित्व ही होता जा रहा है। जिससे इस बार भी पशु मेले लगना मुश्किल ही है। </p>
<p><strong>पशुओं से संबंधित सामानों की बिक्री भी हुई कम</strong><br />पशु मेला नहीं लगने  व किसानों के मेले में कम आने से अब पशुओं से संबंधित सामानों की बिक्री भी कम हो गई है। पशु पालक देवलाल गुर्जर का कहना है कि दशहरा मेले का आकर्षण होता था पशु मेला। लेकिन उसे धीरे-धीरे जबरन समाप्त किया  गया है। हालत यह है कि अब पशुओं से संबंधित सामान बेचने वाले कुछ पुराने लोग मेले में आते हैं लेकिन उनकी बिक्री तक कम होने से उनका खर्चा ही नहीं निकल पाता। पहले जेबड़ा, घंटी, दराती व अन्य सजावटी सामान भी खूब बिकते थे।  बंधा धर्मपुरा निवासी पशु पालक रामलाल गुर्जर का कहना है कि दशहरा मेले के साथ पशु मेला तो लगना चाहिए। वह भी दशहरा मेले के आस-पास ही। जिससे लोग मेला घूमने आएं तो पशु मेला भी देख ले। लेकिन देव नारायण या बंधा धर्मपुरा में पशु मेला लगाने का कोई मतलब नहीं है। यहां तो दशहरा मेले के अलावा कभी भी लगाया जा सकता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पशु मेले का आकर्षण धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। लम्पी रोग ने भी इस मेले में पशुओं को आने से रोका तो अब पशु पालकों की रूचि भी कम दिखने लगी है। ऐसे में दशहरा मेले में वही कार्यक्रम व आयोजन किए जा रहे हैं जिनका आकर्षण अधिक है। पशु मेले के आयोजन पर अभी तक कोई निर्णय तो नहीं हुआ है। फिर भी मेला समिति की अगली बैठक में पशु मेले पर चर्चा की जाएगी। समिति जैसा निर्णय करेगी उसके हिसाब से काम किया जाएगा। <br /><strong>- विवेक राजवंशी, अध्यक्ष मेला उत्सव व आयोजन समिति </strong></p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 15:15:44 +0530</pubDate>
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                <title>गौशाला व बंधा गांव में हजारों पशु, फिर भी नहीं है चिकित्सालय की सुविधा</title>
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                        <![CDATA[ गौशाला में बीमारियों का बढ़ रहा प्रकोप]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-animals-in-the-cowshed-and-bandha-village--yet-there-is-no-hospital-facility/article-112416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)43.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर से कई किलोमीटर दूर बंधा गांव और वहां स्थित नगर निगम की गौशाला में जहां हजारों पशु हैं। वहां पशु चिकित्सालय की सुविधा तक नहीं है। निगम की गौशाला में इन दिनों बीमारियों का प्रकोप होने के बावजूद गौशाला कम्पाउंडरों के भरोसे है। बंधा धर्मपुरा में नगर निगम की गौशाला है।  जहां शहर से लावारिस हालत में पकड़े गए गौवंश को रखा गया है। वर्तमान में यहां करीब 3 हजार से अधिक मवेशी हैं। जिनमें सांड से लेकर गाय व बछड़े तक शामिल है। हालत यह है कि लावारिस हालत में पकड़े गए इन गौवंश में से अधिकतर बीमार  व कमजोर हालत में आते हैं। जिन्हें पशु चिकित्सक की देखभाल की आवश्यकता रहती है। गौशाला में बीमार व कमजोर गायों को अलग बाड़े में रखा हुआ है। हालांकि यहां पशु चिकित्सा केन्द्र तो बनाया हुआ है। लेकिन चिकित्सालय की सुविधा नहीं है। केन्द्र में मात्र कम्पाउंडर ही कार्यरत हैं। जिनके भरोसे पूरी गौशाला में गौवंश की देखभाल व उपचार किया जा रहा है। बंधा में ही गायत्री परिवार की गौशाला भी है। साथ ही गांव में अन्य पशु पालकों के भी पशु है। ऐसे में उन सभी को  पशुओं के बीमार होने पर उपचार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>चक्कर खाकर गिरने का बढ़ रहा रोग</strong><br />नगर निगम की गौशाला में पहले जहां लम्पी रोग से ग्रसित मवेशी सबसे पहले पाए गए थे। वहीं अब इनमें एक नई बीमारी चक्कर खाकर गिरने  वाली प्रोेयेजोमा बढ़ रही है। जिससे गौवंश की मृत्युदर में बढ़ोतरी हुई है। हालत यह है कि इस रोग के होने के बाद भी वहां न तो  पशु चिकित्सक की सुविधा है और न ही चिकित्सालय की। जिससे रोजाना मरने वाले गौवंश की संख्या सामान्य से अधिक हो गई है। </p>
<p><strong>सेवानिवृत्त उप निदेशक कार्यरत</strong><br />नगर निगम की ओर से पशु चिकित्सालय से सेवानिवृत्त उप निदेशक डॉ. नंद किशोर वर्मा को नियुक्त किया हुआ है। लेकिन वे अधिकतर समय किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में ही सेवाएं देते हैं। जबकि गौशाला में कम्पाउंडर ही कार्यरत हैं।  हालांकि बोराबास पशु चिकित्सा केन्द्र से सरकारी डॉक्टर गौशाला में आते हैं लेकिन वह कभी-कभी ही आते हैं।  </p>
<p><strong>पशु चिकित्सालय व चिकित्सक हो</strong><br />निगम की गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश है।  इसके अलावा वहां निजी गौशाला व गांव में अन्य पशु भी हैं। ऐसे में वहां पशु चिकित्सालय और पशु चिकित्सक का होना आवश्यक है। जिससे इतने अधिक गौवंश के बीमार होने पर उन्हें समय पर तुरंत उपचार मिल सके। हालांकि गौशाला में कम्पाउंडर हैं लेकिन वे अपना काम तो कर रहे हैं जबकि डॉक्टर का काम तो डॉक्टर ही कर सकता है। <br /><strong>-डॉ. नंद किशोर वर्मा, रिटायर्ड उप निदेशक, पशु चिकित्सालय</strong></p>
<p><strong>आयुक्त समेत अधिकारियों को कई बार कराया अवगत</strong><br /> निगम की गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। यह क्षमता से काफी अधिक है। ऐसे में यहां शहर से लावारिस हालत में लाए जा रहे गौवंश को घूमने की पर्याप्त जगह तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में वर्तमान में गौशाला में प्रोयेजोमा बीमारी का प्रकोप बढ़ा है। जिसमें पशु चक्कर खाकर गिरते हैं और वापस उठ नहीं पाते। जिससे उनकी मृत्युदर अधिक हुई है। इस बीमारी से रोजाना 5 से 6 गौवंश की मौत हो रही है। इस बीमारी के उपचार और गौशाला में पशु चिकित्सक की सुविधा करवाने के सबंध में निगम आयुक्त व अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। लिखित में देने के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। गौशाला में कम्पाउंडरों से काम चलाया जा रहा है। बोराबांस से पशु चिकित्सक कभी-कभी आकर गौशाला का निरीक्षण करते हैं। जबकि यहां नियमित पशु चिकित्सक होना चाहिए। <br /><strong>-जितेद्र सिंह, अध्यक्ष गौशाला समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>डॉक्टर की साप्ताहिक विजिट</strong><br />गौशाला में स्थायी रूप से तो कम्पाउंडर लगाए हुए हैं। वे पूरे समय वहां सेवाएं दे रहे हैं। उनके अलावा किशोरपुरा कायन हाउस में सेवानिवृत्त डॉक्टर को भी लगाया हुआ है।साथ ही बोराबांस से सरकारी डॉक्टर सप्ताह में निगम की गौशाला का विजिट करते हैं। वर्तमान में जो बीमारी गौशाला में हुई है  उसकी दवाईयां व उपचार की व्यवस्था की जा रही है। <br /><strong>-महेश गोयल, उपायुक्त व प्रभारी गौशाला नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 15:14:31 +0530</pubDate>
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                <title>खतरनाक हो रहे मवेशी, लोग हो रहे जख्मी : शोभा यात्रा की भीड़ में घुसी गाय, लोगों का बाहर निकलना हो रहा मुश्किल</title>
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                        <![CDATA[तेज गति से निकलने वाले वाहनों से आए दिन इनके टकराने पर हादसे होने का खतरा बना हुआ है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cattle-are-becoming-dangerous--people-are-getting-injured/article-109311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सड़कों से अभी भी मवेशी नहीं हटे हैं। जगह-जगह मेन रोड पर लगे मवेशियों के झुंड लोगों के लिए खतरा बने हुए है। ये भीड़ में घुस रहे हैं और सड़कों पर दौड़ रहे हैं। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। शहर में सड़कों पर निराक्षित हालत में घूमने वाले मवेशियों को पकड़कर कायन हाउस व गौशाला में बंद करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। निगम की ओर से इस जिम्मेदारी को सही ढंग से नहीं निभाने के कारण सड़कों पर मवेशियों का झुंड बढ़ता ही जा रहा है। शहर का कोई भी मेन रोड, चौराहा, वीआईपी क्षेत्र, चम्बल पुलिया, फ्लाई ओवर ऐसा नहीं है जहां मवेशियों का जमघट नहीं देखने को मिले। नई धानमंडी के सामने और सब्जीमंडी में तो इतने अधिक मवेशी हैं कि वहां लोगों का जाना ही मुश्किल हो रहा है। इतना ही नहीं जिस निगम की जिम्मेदारी इन मवेशियों को पकड़ने की है उस निगम कार्यालय के आस-पास हौ इनका जमघट देखा जा सकता है। यहां तक की हाइवे पर भी मवेशियों के झुंड घूमते हुए देखे जा सकते है। जिससे तेज गति से निकलने वाले वाहनों से आए दिन इनके टकराने पर हादसे होने का खतरा बना हुआ है। कई बार मवेशी अचानक आने या रात के अंधेरे में नजर नहीं आने से हादसे हो भी रहे हैं। </p>
<p><strong>शोभा यात्रा की भीड़ में घुसी गाय</strong><br />हालत यह है कि सुनसान रोड पर ही नहीं भीड़भाड़ वाले इलाकों तक में पशु घुस रहे है। शहर में एक दिन पहले निकली विशाल शोभा यात्रा जिसमें हजारों महिलाएं और लोग शामिल थे। उस भीड़ तक में एक गाय घृस गई थी। जिससे लोगों के लिए खतरा हो गया था। गनीमत रही कि एक महिला को वह नजर आ गई। उसने गाय से बचाने के लिए महिलाओं को दूर हटाना शुरु कर दिया। जिससे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। वरना यदि कोई उस गाय को भगाता या गाय भीड़ में डरकर भागती तो कई महिलाएं चोटिल हो सकती थी।</p>
<p><strong>देव नारायण योजनासे पलायन</strong><br />शहर को कैटल फ्री बनाने व पशुओं को शहर से दूर करने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय में नगर विकास न्यास के माध्यम से करीब 300 करोड़ की लागत से बंधा धर्मपुरा में देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई थी। जहां पशु पालकों और पालतू पशुओं को उस योजना में शिफ्ट किया गया था। जानकारों के अनुसार योजना में सुविधाओं का अभाव होने से कई पशु पालक फिर से शहर में और पुरानी जगहों पर लौटने लगे है। जिससे फिर से मवेशी सड़कों पर नजर आ रहे है।  जानकारों का कहना है कि पशु पालक दूध निकालने के बाद पशुओं को खुला छोड़ देते हैं। जिससे वे सड़कों पर आकर हादसों का कारण बन रहे हैं। जबकि उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने पशुओं को बांधकर रखें। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा तो काफी समय से घेरा डालकर मवेशी कायन हाउस में लाए जा रहे है। नगर निगम कोटा उत्तर ने भी पकड़ना शुरु कर दिया है। हालत यह है कि रोजाना 50 से 60 पशुओं को कायन हाउस लाया जा रहा है। जिससे रोजाना दो से तीन चक्कर वाहनों में इन पशुओं को बंधा गौशाला में भेजा जा रहा है।  कायन हाउस व गौशाला दोनों जगह पर क्षमता से अधिक गौवंश हो गए हैं। उन्हें रखने की जगह तक नहीं होने से कई बार नए आने वाले पशुओं की मृत्युदर अधिक हो जाती है।  गौशाला विस्तार के लिए मिली 26 बीघा जमीन की चार दीवारी बनाने का 1.37 करोड़ का टेंडर किया है। जबकि जरूरत गौशाला में पशुओं के बाड़े बनाने की है। <br /><strong>-जितेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, गौशाला समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 17:51:32 +0530</pubDate>
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