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                <title>आर्टेमिस-कक मिशन : चार एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा के चारों ओर बनाएंगे विशाल, 4 अंतरिक्ष यात्री ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट से उड़ान भरेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[नासा का आर्टेमिस-2 मिशन फरवरी 2026 में संभावित है। चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन यान से चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेंगे और भविष्य के लूनर अभियानों की नींव रखेंगे ऐतिहासिक।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/artemis-cuck-mission-will-carry-four-astronauts-around-the-moon-giant/article-141392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/(1200-x-600-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नासा का आर्टेमिस-कक मिशन इतिहास रचने वाला है। 50 साल से ज्यादा समय बाद पहली बार इंसान चंद्रमा के आसपास जाएंगे। यह मिशन अक्टूबर 2022 में हुए अनक्रूड आर्टेमिस-क के बाद पहला मानवयुक्त मिशन है। चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट से उड़ान भरेंगे। लॉन्च की तारीख फरवरी 2026 की शुरूआत में संभावित है (सबसे पहले 6 फरवरी), लेकिन अभी फाइनल नहीं हुई। क्रू अभी क्वारंटाइन में हैं।</p>
<p>सुरक्षा टेस्ट: ओरियन के हीट शील्ड 40,000 किमी/घंटा की स्पीड से एंट्री पर 2760 डिग्री सेंटीग्रेड तक गर्म होगा - यह चेक होगा। <br />रिकॉर्ड: अंतरिक्ष यात्री अपोलो-13 से ज्यादा दूर (230,000+ मील) जाएंगे। <br />चंद्रमा का नजारा: फार साइड से अर्थराइज (पृथ्वी का उगना) देखेंगे, क्रेटर्स का क्लोज व्यू।  <br />भविष्य की तैयारी: आर्टेमिस-ककक में पहली महिला और रंगीन व्यक्ति चंद्रमा पर उतरेंगे। यह मिशन लूनर बेस और मंगल मिशन की नींव रखेगा। आर्टेमिस-कक मानवता को फिर से चंद्रमा के करीब ले जाएगा। यह सिर्फ उड़ान नहीं, बल्कि नई स्पेस एरा की शुरूआत है।</p>
<p><strong>मिशन का रास्ता क्या है? फिगर-8 क्यों?</strong></p>
<p>यह कोई सीधी उड़ान नहीं है। अंतरिक्ष यात्री फिगर-8 (आठ जैसा बड़ा लूप) बनाएंगे। इसे फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी कहते हैं।</p>
<p><strong>कैसे काम करता है?  </strong></p>
<p>लॉन्च के बाद: एसएलएस रॉकेट ओरियन को पृथ्वी की ऊंची एलिप्टिकल आॅर्बिट में डालेगा।  <br />पहले 24 घंटे: पृथ्वी की ऊंची आॅर्बिट (लगभग 70,000 किमी तक) में रहेंगे। यहां ओरियन के लाइफ सपोर्ट सिस्टम, हीट शील्ड आदि की जांच होगी। अगर कोई समस्या हो तो जल्दी वापस आ सकते हैं।<br />ट्रांस-लूनर इंजेक्शन: इंजन जलाकर चंद्रमा की ओर भेजा जाएगा। यह 4 दिन की यात्रा होगी।<br />चंद्रमा के पास: चंद्रमा की ग्रैविटी से स्लिंगशॉट इफेक्ट होगा। स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के फार साइड (पीछे वाले हिस्से) से गुजरेगा, 6000 से 10000 किमी ऊपर। यहां से फिगर-8 का लूप पूरा होगा।  <br />वापसी: चंद्रमा की ग्रैविटी खुद ही स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की ओर मोड़ देगी। अगर इंजन फेल भी हो जाएं, तो ग्रैविटी के कारण सुरक्षित वापस आएंगे - कोई अतिरिक्त बर्न की जरूरत नहीं।<br />यह ट्रैजेक्टरी सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अपोलो मिशन्स में भी यही इस्तेमाल हुआ था। यह फिजिक्स का कमाल है - ग्रैविटी खुद सेफ्टी नेट बन <br />जाती है।</p>
<p><strong>कू्र मेंबर कौन हैं? </strong></p>
<p>कमांडर: रीड वाइजमैन - अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री।  <br />पायलट: विक्टर ग्लोवर -अमेरिकी।<br />मिशन स्पेशलिस्ट: क्रिस्टिना कोच - अमेरिकी।<br />मिशन स्पेशलिस्ट: जेरेमी हैंसेन- कनाडाई स्पेस एजेंसी के पहले अंतरिक्ष यात्री जो चंद्रमा के पास जाएंगे।<br />यह टीम चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेगी, लेकिन लैंडिंग नहीं करेगी। मिशन कुल 10 दिन का होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 11:15:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>साल का आखिरी चंद्रग्रहण : सुधाकर पर चढ़ी लालिमा की चादर, सबसे पहले तमिलनाडु में दिखा</title>
                                    <description><![CDATA[इस दौरान पृथ्वी सूर्य और चांद के बीच जब आई तो और उसकी चांद पर छाया पड़ी और चांद लाल-नारंगी रंग का दिखाई देने लगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-last-lunar-eclipse-of-the-year-climbed-on-sudhakar/article-126170"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(13).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अपनी गति से चल रहे चांद के सामने जब रात 9 बजकर 56 मिनिट पर अवरोध के रूप में ग्रहण आया तो शशि ने रक्तिम रूप धर लिया। यूं लगा कि अपने चलायमान और शीतल स्वभाव में आए अवरोध को देखकर चांद पहली बार गुस्से से आग बबूला हो गया हो। ग्रहण के दौरान रक्तिम हुए सुधाकर को देख लगा कि गगन पर किसी ने लालिमा का आभूषण टोक दिया हो। चन्द्रमा की यह मोहक आभा शाम से ही बेसब्री से इंतजार कर रहे खगोलप्रेमियों को खूब आकर्षक लगी और लोग दूरबीन से या कहीं-कहीं नंगी आखों से इसे टकटकी लगाए देखते रहे।<br />रविवार को साल का दूसरा और आखिरी चंद्रग्रहण था।</p>
<p>यह पूर्ण ग्रहण देश ही दुनिया में कई स्थानों पर देखा गया। वर्ष 2022 के बाद भारत में दिखने वाला यह सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण था। चंद्रग्रहण रात 9:56 बजे शुरू हुआ जो 3 घंटे 28 मिनट तक चला। 82 मिनट तक तो पूर्ण चंद्रग्रहण रहेगा। इस दौरान पृथ्वी सूर्य और चांद के बीच जब आई तो और उसकी चांद पर छाया पड़ी और चांद लाल-नारंगी रंग का दिखाई देने लगा। यह 27 जुलाई, 2018 के बाद पहली बार ग्रहण को देश के सभी हिस्सों से देखा जा रहा था। हालांकि कई जगह बादल छाए रहने के कारण लोग इसे लम्बे इंतजार के बाद भी नहीं देख पाए। </p>
<p><strong>यहां देखा गया चन्द्रग्रहण </strong><br />ग्रहण भारत, एशिया, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और यूरोप समेत दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई दिया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 09:39:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शरद पूर्णिमा कल: चंद्रमा की शीतल किरणों में रखेंगे खीर</title>
                                    <description><![CDATA[समाज के लोग ठाकुर जी को रास, चौपड़ और पासे के पद गाकर रिझाएंगे। रात्रि 11 बजे के बाद भक्तों को प्रसाद के रुप में खीर का वितरण किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/kheer-will-be-kept-in-the-cool-rays-of-the/article-93081"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(9)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आश्विन पूर्णिमा बुधवार 16 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी। शरद पूर्णिमा रात 8.40 बजे शुरू होगी और गुरुवार शाम 4.55 बजे तक रहेगी। मंदिरों में ठाकुरजी का धवल शृंगार किया जाएगा। ठाकुरजी को चांदी के पात्र में खीर का भोग लगाया जाएगा। मान्यता है कि चांद की किरणों में इतनी शक्ति होती है कि वे कई रोगों को नष्ट करने की क्षमता रखती हैं। आराध्य गोविंददेवजी मंदिर शरद पूर्णिमा महोत्सव पर सुबह ठाकुर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक किया जाएगा।</p>
<p>ठाकुर श्रीजी को शरद पूर्णिमा की सुनहरे गोटे की सफेद पार्चा जामा पोशाक धारण कराकर विशेष अलंकार शृंगार एवं मुकुट धारण कराया जाएगा। संध्या झांकी बाद महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में शाम सवा सात से साढ़े सात बजे तक ठाकुर श्रीजी की शरद उत्सव की विशेष झांकी के दर्शन होंगे। ठाकुर श्रीजी को खीर और खीरसा का भोग लगाया जाएगा। उनके समक्ष शरदोत्सव में विशेष खाट सजाई जाएगी। इसमें शतरंज, चौसर की बाजी सजाई जाएगी। </p>
<p><strong>रास के पदों से ठाकुरजी को रिझाएंगे<br /></strong>छोटी चौपड़ स्थित श्री सीतारामजी मंदिर में बुधवार को शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को फूलों से सजाया जाएगा। मंदिर के महंत नंदकिशोर ने बताया कि ठाकुरजी का पंचामृत से स्नान कराकर नई पोशाक धारण कराएंगे। समाज के मंत्री रामबाबू झालानी ने बताया कि शरद पूर्णिमा की शाम को ही खीर मंदिर के आगे चंद्रमा की रोशनी में रखी जाएगी। समाज के लोग ठाकुर जी को रास, चौपड़ और पासे के पद गाकर रिझाएंगे। रात्रि 11 बजे के बाद भक्तों को प्रसाद के रुप में खीर का वितरण किया जाएगा।</p>
<p><strong>यहां भी होंगे आयोजन <br /></strong>शरद पूर्णिमा पर पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथजी मंदिर, सुभाष चौक स्थित सरस निकुंज, चौड़ा रास्ता के राधा दामोदर, मदन गोपाल, रामगंज बाजार के लाड़लीजी, जगतपुरा स्थित अक्षयपात्र, चित्रकूट स्थित अक्षरधाम, धौलाई स्थित इस्कॉन मंदिर सहित अन्य सभी मंदिरों में शरद पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन होगा।</p>
<p><strong>मां भक्तों पर बरसाएगी कृपा</strong><br />ज्योतिषाचार्य डॉ.महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि शरद पूर्णिमा को जागरी पूर्णिमा और कौमुदी व्रत भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ गरुड़ पर सवार होकर पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। शरद पूर्णिमा का चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। यह वर्ष की 12 पूर्णिमा तिथियों में सबसे विशेष मानी जाती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Oct 2024 14:42:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन 11 साल में चंद्रमा पर बना लेगा अपना बेस</title>
                                    <description><![CDATA[अब चीन इस प्रोजेक्ट में लीड ले चुका है। उसने हाल ही में अनहुई में हुए इंटरनेशनल डीप स्पेस एक्स्प्लोरेशन कॉन्फ्रेंस में अपना प्लान बताया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-will-build-its-base-on-the-moon-in-11-years/article-90828"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/27rtrer-(11).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चीन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानी बेस बनाने जा रहे हैं। लूनर बेस कहिए या मून बेस। चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी चीन की स्पेस एजेंसी सीएनएसए ने अपना प्लान जगजाहिर कर दिया है। चीन ने बताया कि उनका मून बेस दो हिस्सों में बनेगा। पहले 2030 और दूसरा 2035। इस प्लान में रूस मदद कर रहा है। चीन और रूस मिलकर  इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन बनाने जा रहे हैं। साल 2030 से 2035 के बीच पांच सुपर हैवीलिफ्ट रॉकेटों से सामान वगैरह पहुंचाए जाएंगे। वहां पर बेसिक रोबोटिक मून बेस बनाया जाएगा। लेकिन अब चीन इस प्रोजेक्ट में लीड ले चुका है। उसने हाल ही में अनहुई में हुए इंटरनेशनल डीप स्पेस एक्स्प्लोरेशन कॉन्फ्रेंस में अपना प्लान बताया। </p>
<p><strong>साउथ पोल पर प्राइमरी बेस, एक्सटेंडेड बेस ज्यादा एडवांस</strong><br />ये खुलासा किया है चीन के डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट के चीफ डिजाइनर वू यानहुआ ने। वू ने बताया कि एक्सटेंडेड मॉडल में लूनर स्टेशन नेटवर्क होगा। जो लूनर आॅर्बिट स्टेशन के सेंट्रल हब की तरह काम करेगा। साथ ही यह दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद प्राइमरी बेस से संपर्क में रहेगा। इसके अलावा चंद्रमा के अंधेरे वाले हिस्से में नोड बनाए जाएंगे। नोड यानी मोबाइल ढांचे जो रिसर्च के लिए वहां जाएंगे। जरूरत पड़ने पर तेजी से रोशनी वाले हिस्से में आ जाएं। </p>
<p><strong>एनर्जी के लिए सोलर, रेडियोआइसोटोप और न्यूक्लियर पावर</strong><br />वू ने बताया कि ये लूनर स्टेशन और बेस सभी कुछ सौर ऊर्जा और न्यूक्लियर जेनरेटर से एनर्जी हासिल करेंगे। इसके बाद चंद्रमा पर हाई स्पीड लूनर सरफेस कम्यूनिकेशन नेटवर्क बनाया जाएगा। इसमें हॉपर, मानवरहित लंबी दूरी की गाड़ियां, प्रेशराइज्ड और अनप्रेशराइज्ड मानवयुक्त रोवर भी होंगे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Sep 2024 10:16:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन का चांग-6 जांच लैंडिंग मॉड्यूल चंद्रमा पर उतरा</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट में कहा कि लगभग दो किलोग्राम (चार पाउंड) मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर पहुंचाए जाएंगे। चांग ई-6 में एक कक्षीय मॉड्यूल एक पुन: प्रवेश वाहन और एक लॉन्च मॉड्यूल शामिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-change-6-probe-landing-module-lands-on-the-moon/article-80191"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/6633-copy12.jpg" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन का चांग-6 नाम का चन्द्र जांच लैंडिंग मॉड्यूल बालू इकट्ठा करने के लिए चंद्रमा के पीछे की ओर सफलतापूर्वक उतर गया है। चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) के हवाले से सूचना दी है। रिपोर्ट में कहा कि 3 मई को चीन के वाहक रॉकेट लॉन्ग मार्च-5 वाई 8 को चांग ई-6 चंद्र जांच के साथ हैनान द्वीप पर वेनचांग अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल से पृथ्वी-चंद्रमा पारगमन कक्षा में प्रक्षेपित किया गया था। यदि मिशन सफल रहा तो चांग ई-6 मानव इतिहास में पहली बार चंद्रमा के पिछले हिस्से से बालू पृथ्वी पर लाएगा। </p>
<p>रिपोर्ट में कहा कि लगभग दो किलोग्राम (चार पाउंड) मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर पहुंचाए जाएंगे। चांग ई-6 में एक कक्षीय मॉड्यूल एक पुन: प्रवेश वाहन और एक लॉन्च मॉड्यूल शामिल है। यह एक लैंडिंग कैमरा, एक पैनोरमिक कैमरा, एक खनिज वर्णक्रमीय विश्लेषण उपकरण और एक चंद्र बालू संरचना विश्लेषण उपकरण के पेलोड से सुसज्जित है। चंद्र जांच अंतरराष्ट्रीय पेलोड ले जा रही है, जिसमें पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह की सतह पर रेडॉन गैस और उसके क्षय उत्पादों की एकाग्रता को मापने के लिए फ्रांसीसी डिटेक्टर डीओआरएन, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एनआईएलएस नकारात्मक आयन विश्लेषक, इटली के लेजर कॉर्नर रिफ्लेक्टर और पाकिस्तान के आईसीयूबीई-क्यू उपग्रह शामिल हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jun 2024 11:39:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस-चीन चांद पर लगाएंगे न्यूक्लियर पावर प्लांट, डिजाइन तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[ साल 2021 में ही रूस और चीन ने मिलकर चंद्रमा पर साइंटिफिक स्टेशन बनाने का रोडमैप तैयार कर लिया था। इसके लिए डेडलाइन 2035 है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russia-china-will-install-nuclear-power-plant-on-the-moon-design/article-72023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(8)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चीन और रूस मिलकर चांद पर परमाणु प्लांट बनाना चाहते हैं। इसके लिए दोनों मिलकर काम करेंगे। रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस के प्रमुख यूरी बोरिसोव ने कहा कि 2033-35 में रूस और चीन मिलकर चांद की सतह पर न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाएंगे। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट ऑटोमेटेड मोड में तैनात किया जाएगा। चांद पर पावर प्लांट लगाने के दौरान किसी भी इंसान को चांद पर नहीं भेजा जाएगा। पावर प्लांट बनाने की तकनीक पूरी हो चुकी है। इस पावर प्लांट को चांद की सतह तक पहुंचाने के लिए रूस न्यूक्लियर पावर से चलने वाला रॉकेट ज्यूस बनाएगा।<br />ज्यूस एक कार्गो रॉकेट होगा। यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक होगा। इसे चलाने के लिए किसी तरह से भी इंसान की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ लॉन्चिंग और रास्ते मैन्यूवरिंग पर ध्यान देना होगा। साल 2021 में ही रूस और चीन ने मिलकर चंद्रमा पर साइंटिफिक स्टेशन बनाने का रोडमैप तैयार कर लिया था।</p>
<p><strong>रोवर और रोबोट्स भी जाएंगे चांद पर</strong><br />प्रोजेक्ट में टेक्निकल लूनर रोवर रहेंगे। जो रिसर्च करेंगे, कूदने वाले रोबोट्स रहेंगे और कुछ स्मार्ट मिनी-रोवर्स होंगे जो चांद की सतह की जांच-पड़ताल करेंगे। हालांकि रूसी स्पेस एजेंसी के प्रमुख बोरिसोव ने कहा कि हम ऊर्जा के लिए परमाणु संयंत्र चांद पर लगा रहे हैं। अंतरिक्ष में किसी तरह का परमाणु हथियार नहीं भेज रहे हैं। बोरिसोव ने कहा कि स्पेस में न्यूक्लियर हथियार नहीं होने चाहिए। इससे पता चलता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 1 मार्च 2024 को देश के सिक्योरिटी काउंसिल मेंबर्स की मीटिंग में क्या कहा होगा। उन्होंने यह कहा था कि रूस का अंतरिक्ष में कोई परमाणु हथियार भेजने की योजना नहीं है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Mar 2024 11:13:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा जापान का अंतरिक्ष यान</title>
                                    <description><![CDATA[ रोबोटिक एक्सप्लोरर एक पिनपॉइंट लैंडिंग की कोशिश करेगा, जिसका लक्ष्य सटीकता के साथ सॉफ्ट लैंडिंग करना होगा। चांद पर उतरने के बाद यह चंद्रमा की चट्टानों के बारे में डेटा इकट्ठा करेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/japan-spacecraft-reaches-orbit-of-moon/article-65321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/mmd8.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान की ओर से चांद को लेकर चलाए जा रहे मिशन में एक बड़ी कामयाबी मिली है। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जेक्सा की ओर से विकसित किया गया चंद्रमा लैंडर मून स्नाइपर ने चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। यह एक मील का पत्थर है जो पहली बार चंद्रमा की सतह पर एक रोबोटिक एक्सप्लोरर को उतारने के लक्ष्य के करीब लाता है। अपने वर्तमान पथ के हिसाब से लगभग 6 घंटे 40 मिनट में यह चंद्रमा का एक चक्कर पूरा कर रहा है। अगले कुछ हफ्तों में यह लैंडर धीरे-धीरे कक्षा के अंदर जाएगा। जनवरी में यह अंतरिक्ष यान एक ऐतिहासिक टचडाउन प्रयास करेगा। सफल होने पर जापान चंद्रमा पर पहुंचने वाला पांचवां और 21वीं सदी में उतरने वाला तीसरा देश बन जाएगा। 21वीं सदी में चंद्रमा पर भारत और चीन ही जा सके हैं। जापान का रोबोटिक एक्सप्लोरर एक पिनपॉइंट लैंडिंग की कोशिश करेगा, जिसका लक्ष्य सटीकता के साथ सॉफ्ट लैंडिंग करना होगा। चांद पर उतरने के बाद यह चंद्रमा की चट्टानों के बारे में डेटा इकट्ठा करेगा। यह डेटा वैज्ञानिकों को चंद्रमा के गठन को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है।</p>
<p>मून स्राइपर 19 जनवरी को करेगा लैंड: जेक्सा ने 25 दिसंबर को घोषणा की कि लैंडर को एक अंडाकार कक्षा में स्थापित किया गया है। जो चांद से लगभग 600 किमी से 4000 किमी की ऊंचाई पर है। यह चांद के उत्तरी-दक्षिणी ध्रुव के ऊपर से गुजरेगा। अगले साढ़े तीन सप्ताह तक अंतरिक्ष यान अपनी दूरी लगातार कम करेगा। तब यह सतह से 15 किमी ऊपर तक होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Dec 2023 12:25:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पूरे भारत में दिखाई देगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण </title>
                                    <description><![CDATA[हम दो तरह के ग्रहण को जानते हैं, पहला है सूर्य ग्रहण और दूसरा चंद्र ग्रहण। हमारे सौरमंडल में सूर्य अपनी जगह पर है और लगभग हर खगोलीय पिंड इसका चक्कर लगा रहा होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-last-lunar-eclipse-of-the-year-will-be-visible-in-country/article-59738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(8)4.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अक्टूबर का महीना खगोलीय घटनाओं से भरा हुआ है। अमेरिका में लोगों ने 14 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण देखा था। अब दो हफ्ते के बाद एक और ऐसी ही घटना का दुनिया गवाह बनेगा। ये घटना है चंद्र ग्रहण की। सूर्य ग्रहण तब लगा था जब भारत में रात हो गई थी, इस कारण यह हमें नहीं दिखा था, लेकिन अक्टूबर में ही होने वाले चंद्रग्रहण को भारत और एशिया का एक बड़ा हिस्सा देख सकेगा। यह चंद्र ग्रहण 28-29 अक्टूबर को लगेगा। हम दो तरह के ग्रहण को जानते हैं, पहला है सूर्य ग्रहण और दूसरा चंद्र ग्रहण। हमारे सौरमंडल में सूर्य अपनी जगह पर है और लगभग हर खगोलीय पिंड इसका चक्कर लगा रहा होता है। पृथ्वी और चांद भी एक साथ इसका चक्कर लगाते हैं। हालांकि खास बात है कि चांद इस दौरान पृथ्वी का भी चक्कर लगाता है। जब चांद पृथ्वी का चक्कर लगाता है तो कई बार ऐसा होता है कि वह पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। इस प्रक्रिया को सूर्य ग्रहण कहते हैं।</p>
<p>कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण: सूर्य ग्रहण जहां एक छोटे इलाके में दिखता है तो चंद्र ग्रहण दुनिए के एक बड़े हिस्से को दिखेगा। हमें यह यूरोप, एशिया, आॅस्ट्रेलिया, अफ्रीका, प्रशांत, अटलांटिंक, हिंद महासागर में भी दिखेगा। पूरे भारत में भी यह दिखाई देगा। हालांकि इसे देखने के लिए आपको देर रात तक जगना पड़ेगा। चंद्र ग्रहण भारतीय समय के मुताबिक 29 अक्टूबर की रात 1:06 बजे पर शुरू होगा और 2:23 बजे पर खत्म होगा।</p>
<p><strong>क्या होता है चंद्र ग्रहण</strong><br />सूर्य ग्रहण के दौरान चांद की एक बड़ी परछाई धरती पर पड़ती है। जिस जगह परछाई पड़ती है सूर्य ग्रहण उन इलाकों में साफ दिखता है। इन जगहों पर सूर्य पूरा ढका या फिर आधा ढका दिखता है। वहीं अगर चंद्र ग्रहण की बात करें तो इसमें चांद, सूर्य और धरती एक लाइन में आ जाते हैं। सूर्य और चांद के बीच धरती होती है। धरती की परछाई चांद पर पड़ती है। लेकिन यह सूर्य ग्रहण की तरह पूरा काला नहीं हो जाता। बल्कि इसका रंग लाल दिखता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 10:46:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Mission Chandryaan 3: चन्द्रयान के लैंडर ने चांद की पहली फोटो ली, इसरो ने ट्वीट कर शेयर किया वीडियों</title>
                                    <description><![CDATA[चन्द्रयान 3 के सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद विक्रम लैंडर ने चांद की सतह का पहला फोटो लिया है इसका वीडियों इसरो ने ट्वीट कर जारी किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mission-chandryaan-3-chandrayaans-lander-took-the-first-photo-of/article-55394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/lander-video.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चन्द्रयान 3 के सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद विक्रम लैंडर ने चांद की सतह का पहला फोटो लिया है इसका वीडियों इसरो ने ट्वीट कर जारी किया है। दरअसल, चन्द्रयान को 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Here is how the Lander Imager Camera captured the moon's image just prior to touchdown. <a href="https://t.co/PseUAxAB6G">pic.twitter.com/PseUAxAB6G</a></p>
— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1694713817916473530?ref_src=twsrc%5Etfw">August 24, 2023</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>इसरो ने 14 जुलाई को 3 बजकर 35 मिनट पर चन्द्रयान 3 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था। चन्द्रयान 3.84 लाख की दूरी तय करके चांद की सतह पर पहुंचा है। जिससे आज सुबह लैंडर से रोवर अलग हुआ है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Aug 2023 20:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चन्द्रयान-3 ने चौथा चरण पार किया, पहुंचा चन्द्रमा के और करीब</title>
                                    <description><![CDATA[भारत का तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 बुधवार सुबह चौथा चरण पार कर अपनी मंजिल के और करीब पहुंच गया। चंद्रयान के लिए यह प्रक्रिया काफी अहम थी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chandrayaan-3-crossed-the-fourth-stage-reached-closer-to-the-moon/article-54730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/chandrayaan.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारत का तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 बुधवार सुबह चौथा चरण पार कर अपनी मंजिल के और करीब पहुंच गया। चंद्रयान के लिए यह प्रक्रिया काफी अहम थी और कल (17 अगस्त को) चन्द्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल (एलएम) को प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) से अलग होगा।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी कि चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक चांद की कक्षा के एक और गोलाकार चरण को पूरा कर लिया है और अब वह चांद के और करीब वाली कक्षा में पहुंच गया है। चंद्रयान-3 अब चांद के चौथे ऑर्बिट में प्रवेश कर गया है।  चंद्रयान अंतरिक्ष यान अब चंद्रमा की सतह से सिर्फ 163 किमी दूर है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:<br /><br />Today’s successful firing, needed for a short duration, has put Chandrayaan-3 into an orbit of 153 km x 163 km, as intended.<br /><br />With this, the lunar bound maneuvres are completed.<br /><br />It’s time for preparations as the Propulsion Module and the Lander Module… <a href="https://t.co/0Iwi8GrgVR">pic.twitter.com/0Iwi8GrgVR</a></p>
— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1691655268449603770?ref_src=twsrc%5Etfw">August 16, 2023</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>इसरो ने कहा कि अब तैयारियों का समय आ गया है क्योंकि प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अपनी अलग-अलग यात्राओं के लिए तैयार हैं। आज चंद्रयान-3 एक और कक्षा लांघ कर चांद के और करीब पहुंच गया। वहीं 17 अगस्त का दिन मिशन के लिए अहम होगा क्योंकि इस दिन चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल को लैंडर से अलग किया जाएगा।</p>
<p>इसरो ने ट्वीट किया कि आज की सफल फायरिंग के बाद चंद्रयान-3 को 153 किमी गुणा 163 किमी की कक्षा में स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही चन्द्रयान-3 चंद्रमा से जुड़ी एक और प्रक्रिया को पूरा कर आगे बढ़ गया है।</p>
<p>इसरो ने कहा कि यह तैयारियों का समय है क्योंकि प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अपनी अलग-अलग यात्रा के लिए तैयार हैं। पांच अगस्त को चन्द्रयान-3 के चंद्र कक्षा में प्रवेश करने के बाद इस अंतरिक्ष यान ने अब तक के चार चरणों को पार कर लिया है और चन्द्रमा के बेहद करीब पहुंच गया है। इसके बाद 23 अगस्त को चंद्रयान-3 को चांद की सतह पर उतरना है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाह होगी।  </p>
<p>अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि चंद्रयान-3 आशा के अनुरूप सामान्य तरह से काम रहा है। इस पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान की यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जेपीएल डीप स्पेस एंटीना के सहयोग से लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2023 14:39:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>चंद्रमा का सबसे रहस्यमय हिस्सा दक्षिणी ध्रुव, कोई भी नहीं सुलझा पाया यह पहेली</title>
                                    <description><![CDATA[नासा का कहना है कि यह वह जगह है जो बता सकती है कि जीवन की शुरूआत कैसे हुई होगी। पिछले कई वर्षों से दुनिया के अलग-अलग देशों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कई मिशन लॉन्च करने की कोशिशें की हैं और इसके बारे में पता लगाने का प्रयास किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/south-pole-is-the-most-mysterious-part-of-moon-no-one-could-solve-this-puzzle-chandrayaan-3-hindi-news/article-53914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/630-400-size-की-कॉपी-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>फ्लोरिडा। भारत का चंद्रयान 3 चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर गया है। अगर अगले कुछ दिनों में इसने लैंडर और रोवर को चंद्रमा की सतह पर स्थापित कर दिया तो चांद के दक्षिणी ध्रुव या साउथ पोल पर उतरने वाला भारत पहला देश बन जाएगा। साथ ही अमेरिका, रूस और चीन के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग हासिल करने वाला केवल चौथा होगा। इस मिशन में चांद के उस हिस्से के बारे में जानने की कोशिशें की जाएंगी जो अभी तक रहस्य है। यूं तो चंद्रमा हमेशा से ही वैज्ञानिकों, दार्शनिकों, अंतरिक्ष प्रेमियों और आम लोगों के बीच हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। मगर इसका दक्षिणी ध्रुव वह जगह है जो विज्ञान में रूचि रखने वालों के लिए हमेशा से रहस्य रहा है।<br /><br /><strong>चांद पर एकदम ठंडी जगह</strong><br />चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिकों के लिए हमेशा से विशेष रुचि का विषय रहा है। यह वह जगह है जहां पर कुछ हिस्सों में एकदम अंधेरा है तो कुछ जगहों पर छाया रहती है। स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों में बर्फ जमा होने की बातें कही गई हैं। इसके अलावा यहां पर ऐसे कई गड्ढे हैं जो अपने आप में खास हैं क्योंकि सूरज की रोशनी उनके अंदरूनी हिस्सों तक नहीं पहुंच पाती है। अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था नासा का दावा है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के कुछ गड्ढों पर तो अरबों वर्षों से सूरज की रोशनी नहीं पहुंची है। इन गड्ढो वाली जगह का तापमान-203 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।<br /><br /><strong>मिल सकता है बड़ा सुराग</strong><br />इसी वजह से ये क्रेटर बहुत ठंडे हैं। नासा की मानें तो यहां पर हाइड्रोजन, बर्फ और बाकी वाष्पशील पदार्थों का ऐसा जीवाश्म रिकॉर्ड है जो सौर मंडल के शुरू होने से जुड़ा हुआ है। बहुत ज्यादा ठंड और यहां के तापमान की वजह से चांद के इस हिस्से में बहुत सालों में कोई बदलाव नहीं देखा गया है।</p>
<p>नासा का कहना है कि यह वह जगह है जो बता सकती है कि जीवन की शुरूआत कैसे हुई होगी। पिछले कई वर्षों से दुनिया के अलग-अलग देशों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कई मिशन लॉन्च करने की कोशिशें की हैं और इसके बारे में पता लगाने का प्रयास किया है।<br /><br /><strong>क्या है गड्ढों के नीचे</strong><br />कुछ वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के नीचे, पूरे सौर मंडल में अब तक बने सबसे बड़े प्रभाव वाले गड्ढे हैं। इन गड्ढों के के नीचे कोइ विशाल चीज छिपी हुई है। वैज्ञानिकों को पता नहीं है कि यह क्या हो सकता है। मगर उनका मानना है कि यह निश्चित रूप से इतना बड़ा है कि चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल को प्रभावित कर सकता है। अभी तक नासा भी इस पहली को सुलझा नहीं पाया है। नासा ने इस साल की शुरूआत में अपने मानव मिशन आर्टमिस थर्ड का ऐलान किया था। इस मिशन के तहत वह साउथ पोल की 14 जगहों का अध्ययन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 11:26:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आकाश में शुक्र, बृहस्पति  और चंद्रमा आए एक साथ </title>
                                    <description><![CDATA[ यूके स्पेस एजेंसी और यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने इसकी फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/venus-jupiter-and-moon-come-together-in-the-sky/article-38248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/s-10.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। खगोलीय हादसों में लोगों को अंतरिक्ष से जुड़े बेहतर नजारे देखने को मिलते है। ऐसा ही एक नजारा पिछले दिनों नजर आया, जब आकाश में शुक्र, बृहस्पति और चंद्रमा एक साथ आए। इसके हादसे से जुड़ी तस्वीरे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यूके स्पेस एजेंसी और यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने इसकी फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की है। इन तस्वीरों में वीनस, जूपिटर और मून एक साथ मिलते हुए नजर आ रहे है। यह तस्वीरे 22 फरवरी की शाम की है। इससे भी अधिक अनोखा नजारा अब 1 मार्च को नजर आएगा। इस दिन इनका कंजक्शन होगा। दोनों ग्रह एक ही दिशा में आने वाले है। इससे ऐसा लगेगा कि वह मिल रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Feb 2023 10:42:33 +0530</pubDate>
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