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                <title>abheda conservation reserve project - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>2 साल से फाइलों में अटका अभेड़ा कंजरर्वेशन रिजर्व, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा स्थित 1100 हैक्टेयर वनभूमि को कोटा वन्यजीव में शामिल करने का मामला।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/abheda-conservation-reserve-project-stalled-in-paperwork-for-two-years/article-159921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)44.png" alt=""></a><br /><p>कोटा में वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू करने के लिए अभेड़ा कंजरर्वेशन रिजर्व बनाने की योजना 2 साल बाद भी कागजों से बाहर नहीं निकल सकी। वन्यजीव विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव फाइलों में ही दबकर रह गए। जबकि, इसके लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद ट्यूरिज्म बढ़ाने को लेकर उच्चाधिकारियों द्वारा सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।<br />दरअसल, बायोलॉजिकल पार्क के सामने वन विभाग की जमीन है, जिसकी सीमा अभेड़ा से ग्रीन फिल्ड एयरपोर्ट के सामने हाइवे से पहले तक है, यह 1100 हैक्टयर वनभूमि है, जिसमें से करीब 900 हैक्टयर कोटा वनमंडल की है और लगभग 200 हैक्टयर भूमि बूंदी वनमंडल में आती है। जिसे वन्यजीव विभाग में शामिल करने के लिए वाइल्ड लाइफ डीएफओ ने दोनों डिविजन को प्रस्ताव भेजे थे, जिसमें से कोटा वनमंडल ने सहमति दे दी लेकिन बूंदी से अब तक सहमति नहीं मिली। इस वजह से यह प्रोजेक्ट अटका हुआ है। बता दें, वन्यजीव विभाग ने गत 20 जुलाई 2024 को विधानसभा सत्र-2 में विधायक संदीप शर्मा द्वारा लगाए सवालों के जवाब में इस योजना की जानकारी दी थी।</p>
<p><strong>अभेड़ा से एयरपोर्ट तक सफारी चढ़ी परवान</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से सटा वनक्षेत्र, प्रस्तावित कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शंभुपुरा तक 1100 हैक्टेयर में फैला हुआ है। इसमें बड़ी संख्या में शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों की मौजूदगी है। कंजरर्वेशन रिजर्व बनने से यह वनक्षेत्र संरक्षित हो जाएगा और जंगली-जानवरों व जंगल का प्रोटेक्शन भी बढ़ जाएगा। हालांकि, अभेड़ा से ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट तक वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू किए जाने की योजना परवान नहीं चढ़ सकी।</p>
<p><strong>जयपुर की तर्ज पर यहां भी शुरू हो लेपर्ड सफारी</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सकतपुरा वनखंड में भालू और लेपर्ड की संख्या अधिक है। इसके अलावा भेड़िया, चिंकारा, जैकाल, फॉक्स, नीलगाय, जंगली खरगोश, जंगली बिल्ली, जंगली सूअर, सिवेट, मोनिटर लिजार्ड सहित कई वन्यजीवों का बड़ी संख्या में बसेरा है। ऐसे में इस वनक्षेत्र में जयपुर के झलाना की तर्ज पर लेपर्ड सफारी शुरू की जा सकती है। जिससे न केवल सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा भी मजबूत हो सकेगी। लेकिन, यह अधिकारियों की इच्छा शक्ति से ही संभव हो सकेगा।</p>
<p><strong>अभेड़ा तालाब में 250 प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि अभेड़ा तालाब में 250 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा है। जिनमें मुख्य रूप से पेन्टेड स्टार्क, बार हैडेगूज, स्टेपी ईगल, हैरीयर सहित कई तरह के पक्षियों का बसेरा है। उपयुक्त वैटलैंड होने से यहां सर्दी-गर्मी में बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पक्षियों का कलरव गूंजता है। इधर, वन्यजीव प्रेमियों ने इस क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए कन्जरर्वेशन रिजर्व घोषित किए जाने के वन्यजीव विभाग के प्रयास को सराहा है।</p>
<p><strong>अवैध गतिविधियां रुकेगी, वन्यजीवों की सुरक्षा बढ़ेगी</strong><br />बायोलॉजिस्ट रवि नागर का कहना है कि यदि, इस वनक्षेत्र में अभेड़ा कंजरर्वेशन रिवर्ज बन जाता है तो यह संरक्षित हो जाएगा। क्योंकि, चारों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण होगा, जिससे अवैध खनन, संदिग्ध घुसपैठ व अवैध चराई जैसी गतिविधियों पर लगाम लगेगी। जिससे वहां ग्रासलैंड विकसित होगा। जिसका असर वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित होगा और शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। जिससे फू्रड चैन व पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।</p>
<p>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क स्थित कोटा वनमंडल के सकतपुरा वनखंड व बूंदी वनमंडल की 1100 हैक्टेयर वनक्षेत्र को वन्यजीव विभाग में शामिल किए जाने के प्रयास किए। इस क्षेत्र में चिंकारा,इंडियन वुल्फ सहित अन्य शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों का मूवमेंट है। यहां वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू किए जाने ट्यूरिज्म के साथ रोजगार भी बढ़ेगा। इसको लेकर पूर्व में दोनों फोरेस्ट डिविजन को प्रस्ताव भेजे थे, जिसमें से कोटा वनमंडल द्वारा अपनी जमीन वन्यजीव विभाग में शामिल किए जाने की सहमति दे दी है लेकिन बूंदी से अब तक सहमति नहीं मिली है।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, निर्वमान उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग</strong></p>
<p>ट्यूरिज्म बढ़ाने की दिशा में यह अच्छा प्रयास है। कोटा डीएफओ की ओर से सहमति मिल चुकी है लेकिन बूंदी से आना बाकी है। जैसे ही सहमति मिलती है तो प्रस्ताव बनाकर हैडक्वार्टर भेजा जाएगा।<br /><strong>-सुगनाराम जाट, मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक कोटा मुकुंदरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 14:48:48 +0530</pubDate>
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