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                <title>असर खबर का .... जर्जर नहरों की होगी सफाई, मिलेंगे 25 करोड़</title>
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                        <![CDATA[नवज्योति ने जर्जर नहरों का प्रमुखता से उठाया था मामला।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---dilapidated-canals-will-be-cleaned--25-crore-rupees-will-be-provided/article-144900"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य विधानसभा में शुक्रवार को एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कोटा सहित संभाग के लिए कई घोषणाएं की। विधानसभा में घोषणा के अनुसार कोटा-बूंदी जिले में चंबल की दायीं और बायीं सहित अन्य नहरों की सफाई एवं ड्रेनेज संबंधी कार्य किए जाएंगे। कोटा-बूंदी जिले में इन नहरों की सफाई एवं ड्रेनेज संबंधी कार्य के लिए 25 करोड़ रुपए दिए गए हैं। चंबल की दोनों नहरों की पर्याप्त सफाई नहीं होने से टेल क्षेत्र तक समय पर पानी नहीं पहुंच पाता है। इससे किसानों को परेशानी को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति ने गत 12 नवंबर को वितरिकाओं की नहीं हुई सफाई, कैसे पहुंचेगा टेल तक पानी शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। अब सरकार ने नहरों के लिए 25 करोड़ रुपए मंजूर कर किसानों को राहत दी है। इसके अलावा नगर पालिका रामगंजमंडी, इटावा सुल्तानपुर में विभिन्न विकास कार्य होंगे। सिनोता (पीपल्दा ) में नवीन पशु चिकित्सालय खोला जाएगा।</p>
<p><strong>कोटा सहित संभाग के लिए यह हुई घोषणाएं</strong><br />-संभाग में टाउन प्लानिंग योजना लाई जाएगी।<br />-कोटा और बूंदी जिले की मिसिंग लिंक सड़कों के लिए 70 करोड़ की घोषणा।<br />-सावनभादो से कनवास के रास्ते पर अरु नदी पर पुलिया निर्माण कार्य (सांगोद) 2 करोड़।<br />-मानसगांव पंचायत मानसगांव गोपीलाल यादव के खेत से बावड़ी के हनुमान जी तक सड़क निर्माण का कार्य 3 किमी (लाडपुरा) 2 करोड़।<br />-रामराजपुरा पंचायत मानस गांव से रामराजपुरा से भीमपुरा माताजी तक सड़क 3.8 किमी (लाडपुरा) 3 करोड़ 80 लाख।<br />-कोटा- बूंदी जिले में एमएलसी और आरएमसी व अन्य नहरों की सफाई एवं ड्रेनेज संबंधी कार्य (25 करोड)।<br />-कोटा में नगरपालिका रामगंजमंडी,सुल्तानपुर, इटावा में विभिन्न विकास कार्य के लिए 15 करोड।<br />-कोटा सांगोद (50 बेड क्षमता) सावित्रीबाई फुले छात्रावास।<br />-कोटा और बूंदी जिले में तीन-तीन नए उप स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे। 3 उप स्वास्थ्य केंद्र आयुष्मान आरोग्य मंदिर में, 3 प्राथमिक स्वास्थ्य केदो को सामुदायिक केदो में कमोन्नत किया जाएगा।<br />-बावड़ी खेड़ा में स्कूल के पीछे चिवड़िया के खाल पर एनिकट निर्माण कार्य (लाडपुरा) 70 लाख।<br />-सिनोता (पीपल्दा ) में नवीन पशु चिकित्सालय खोला जाएगा।<br />-केशोरायपाटन बूंदी में शुगर मिल के पीपीपी मोड पर संचालन के आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 11:42:02 +0530</pubDate>
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                <title>कोहरे के बीच भी रात को हो रही मेन रोड की सफाई</title>
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                        <![CDATA[ऐसे में कभी भी रात के समय तेज गति से आने वाले वाहनों के कारण  दुर्घटना हो सकती है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/main-roads-being-cleaned-at-night-even-amidst-the-fog/article-138579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से दिन के समय ही नहीं रात में भी मेन रोड की सफाई काफी समय से करवाई जा रही है। हालत यह है कि इन दिनों रात के समय पड़ रहे घने कोहरे के बीच भी सफाई जारी है।शहर में सुबह-शाम निकल रहे कचरे को देखते हुए निगम की ओर से दोनों समय पर वार्डों में ही नहीं मेन रोड पर भी सफाई करवाई जा रही है। सुबह बाजार खुलने पर दुकानदारों को सफाई नजर आए। इसे देखते हुए रात के समय ही मेन रोड की सफाई करवाई जा रही है। फिर चाहे डीसीएम रोड हो या सीएडी रोड। स्टेशन रोड या नयापुरा का क्षेत्र। पिछले काफी समय से यह कार्य किया जा रहा है।वही सिलसिला अभी भी बना हुआ है। </p>
<p>शहर में रविवार व सोमवार को सुबह के समय ही नहीं रात के समय भी घना कोहरा छाया हुआ था। उस कोहरे में बिजिबिलिटी इतनी कम थी कि पास के वाहन व रोड लाइटें तक नजर नहीं आ रही थी। उस कोहरे के बीच भी निगम के सफाई कर्मचारी महिलाएं और पुरुष दोनों मेन रोड पर झाडू लगाने से लेकर एकत्र कचरे को ट्रॉली में भरने में जुटे हुए थे।रात के समय मेन रोड से गुजरने वाले वाहन चालक सफाई कर्मचारियों के इस जज्बे को देखकर आश्चर्य करने लगे। लोगों का कहना था कि इतना घना कोहरा है कि उसमें न तो सफाई कर्मचाी नजर आ रहे थे और न ही ट्रेक्टर ट्रॉली। बिल्कुल नजदीक आने पर ही पता चल रहा था कि यहां कोई है। सफाई कर्मचारियों की रेडियम वाली यूनिफार्म तक दूर से नजर नहीं आ रही थी। पास आने पर भी उसकी चमक नहीं दिख रही थी। लोगों का कहना है कि ऐसे में कभी भी रात के समय तेज गति से आने वाले वाहनों के कारण सफाई कर्मचारियों की दुर्घटना हो सकती है। या फिर कोई वाहन ट्रेक्टर ट्रॉली से टकराकर घायल हो सकता है। लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से रात के समय सफाई करवाना अच्छा है। लेकिन कोहरे की अधिकता व मानवीय पहलू को देखते हुए कोहरा अधिक होने पर कर्मचारियों को राहत दी जानी चाहिए।</p>
<p>इधर नगर निगम कोटा के आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा का कहना है कि शाम को दुकानें बंद होने के बाद रात को सड़कों पर कचरा अधिक रहता है। ऐसे में रात के समय सफाई करवाई जा रही है। जिससे सुबह सड़कें साफ दिखे। कोहरा तो अभी कुछ समय का है। रात से अधिक दिन के समय हादसों का खतरा अधिक रहता है। साथ ही रात में एक बार सफाई बंद करवाने पर फिर से उसे शुरू करने में परेशानी हो सकती है। फिर भी कोहरा लगातार या अधिक समय तक रहा तो उसके हिसाब से निर्णय किया जा सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 15:33:18 +0530</pubDate>
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                <title>पंचायत मुख्यालय पर शोपीस बने जनसुविधाघर</title>
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                        <![CDATA[पानी की सुविधा नहीं होने से  नियमित सफाई नहीं हो रही]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/public-toilets-at-panchayat-headquarters-become-showpieces/article-137179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(5)7.png" alt=""></a><br /><p>दबलाना। क्षेत्र के धाबाइयों का नया गांव पंचायत मुख्यालय स्थित अटल सेवा केंद्र में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत निर्मित जन सुविधा घर पंचायत की अनदेखी के चलते बदहाली का शिकार हो गए हैं। सुविधाओं के अभाव और जमा गंदगी के कारण ये जनसुविधाघर उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं और महज शोपीस बनकर रह गए हैं।बाथरूम के ऊपर पानी की टंकी का अभाव है, वहीं टंकी से आने वाला पाइप क्षतिग्रस्त है और नल भी गायब है। पानी की सुविधा नहीं होने से महिलाओं एवं पुरुषों के लिए बने सुविधाघरों में नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। जमा गंदगी और दुर्गंध के कारण ग्राम सभा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान पंचायत मुख्यालय आने वाले ग्रामीणों को शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। पंचायत परिसर में लगी बोरिंग की मोटर लंबे समय से खराब पड़ी है। बरसात के बाद क्यारियां तो बनाई गईं, लेकिन मोटर खराब होने से अब तक पौधारोपण नहीं हो सका। दीवारों की कालिमा और गंदगी स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत बयां कर रही है।</p>
<p><br />ग्राम विकास अधिकारी परमेश्वर प्रजापत ने बताया कि बोरिंग की मोटर शीघ्र ठीक करवाई जाएगी तथा टूटी टंकी के स्थान पर नई टंकी रखवाई जाएगी।<br /><strong>-परमेश्वर प्रजापत,ग्राम विकास अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 15:20:19 +0530</pubDate>
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                <title>बिना सफाई कैसे पहुंचेगा टेल क्षेत्र तक पानी, हर साल मरम्मत व सफाई के नाम पर खानापूर्ति, दायीं नहर में 1050 क्यूसेक छोड़ा पानी</title>
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                        <![CDATA[लाखों रुपए खर्च कर जो पक्का कार्य करवाया गया, वह अभी से उखड़ने लग गया। 
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                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-will-water-reach-the-tail-end-without-cleaning--every-year--only-a-superficial-repair-and-cleaning-is-done--and-only-1050-cusecs-of-water-is-released-into-the-right-canal/article-132162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11120.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मौसम साफ होने के बाद रबी फसलों की बुवाई का कार्य शुरू हो गया है। हाड़ौती के किसान खेती के काम में जुट गए हैं। इसके चलते सीएडी प्रशासन ने मंगलवार को कोटा बैराज की दायीं नहर में जलप्रवाह शुरू कर दिया है। वहीं बायीं नहर में फिलहाल पानी नहीं छोड़ा गया है। दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। पूर्व में इनकी साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य किया गया था, लेकिन यह खानापूर्ति तक सीमित होने से टेल क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचने में विलम्ब हो सकता है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। इस साल भी क्षतिग्रस्त वितरिकाओं के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>पाटन ब्रांच की जर्जर हो रही स्थिति</strong><br />बायीं नहर से जुड़े केशवरायपाटन के सिंचित क्षेत्र के किसानों को उम्मीद थी कि नहरें पक्की होने के बाद सुविधाएं मिलेगी, लेकिन नहरों की ब्रांचों, वितरिकाओं व माइनरों सही ढंग से नहीं हो पाई है। किसान रोशनलाल और राजेन्द्र का कहना है कि पूर्व में नहरों के सुदृढ़ीकरण के दौरान सीएडी विभाग ने अलग-अलग हिस्सों में काम करवाया गया। संवेदक नहरों के पक्का करने के नाम पर लीपापोती कर चले गए। पाटन ब्रांच में नहरों के नालों के पास कच्ची जगह छोड़ दी गई। इस ब्रांच में अण्दपुरा नाले के पास कच्चा छोड़ दिया, जो कार्य किया वह निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं किया। लाखों रुपए खर्च कर जो पक्का कार्य करवाया गया, वह अभी से उखड़ने लग गया। </p>
<p><strong>खरपतवार रोक सकती है अमृत की राह</strong><br />अब तक टेल क्षेत्र में वितरिकाओं की साफ - सफाई का कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे जल प्रवाह शुरू करने के बाद टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचना मुश्किल लग रहा है। टेल के रामपुरा, जखाना, मंडित्या, छावनियां, बीचडी, हणुतीया आदि वितरिकाओं की हालत खराब है। सभी खरपतवार से भरी पड़ी है। हालांकि बरसात रुकने के बाद सीएडी विभाग ने समय रहते बूंदी ब्रांच सहित वितरिकाओं में मनरेगा के तहत श्रमिक लगाकर साफ-सफाई और जंगल कटिंग का कार्य शुरू कर दिया है, जिससे लोगों को समय पर टेल में पानी पहुंचने की उम्मीद दिखाई दी है, लेकिन अब मांग बढ़ने की संभावना बनी हुई है। सीएडी विभाग किसानों की मांग पर जल प्रवाह शुरू करता है तो टेल में पानी पहुंचना मुश्किल लग रहा है।</p>
<p><strong>हाड़ौती का नहरी तंत्र</strong><br />- 2.14 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है हाड़ौती की<br />- 2.29 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है मध्यप्रदेश की<br />- 29 हजार हैक्टेयर में लिफ्ट परियोजनाओं से होती है सिंचाई<br />- 6656 क्यूसेक दायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />- 1500 क्यूसेक बायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />- 03 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित</p>
<p><strong>दायीं नहर में छोड़ा पानी, बायीं में अभी इंतजार</strong><br />रबी सीजन के तहत अब खेतों में गेहूं की बुवाई का कार्य शुरू हो गया है। इस कारण सीएडी प्रशासन ने मंगलवार को दायीं नहर में जलप्रवाह शुरू कर दिया है। अभी नहर में 1050 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। अभी मध्यप्रदेश से नहरी पानी की डिमांड नहीं आई है। इसलिए यह पानी हाड़ौती के किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। मध्यप्रदेश से डिमांड आने के बाद दायीं नहर में जलप्रवाह की मात्रा बढ़ाई जाएगी। वहीं अभी बायीं नहर में जलप्रवाह शुरू नहीं किया गया। इस समय बूंदी जिले में वितरिकाओं की मरम्मत और साफ-सफाई का कार्य चल रहा है। यदि समय रहते कार्य पूरा नहीं हुआ तो टेल क्षेत्र के किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p>दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए इंतजार करना पड़ता है। <br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>फिलहाल टेल में पानी की मांग नहीं है। नहर में जल प्रवाह शुरू करने से पूर्व वितरिकाओं और मुख्य केनाल में मनरेगा के श्रमिकों से साफ -सफाई और जंगल कटिंग कार्य करवाया जा रहा है। <br /><strong>- नाथूलाल, सहायक अभियंता, सीएडी </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 14:46:16 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - भगवानपुर गांव में नालियों और मुख्य मार्ग की सफाई शुरू, पूरे गांव को स्वच्छ बनाने की तैयारी</title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया ग्राम पंचायत प्रशासन।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---cleaning-of-drains-and-main-road-begins-in-bhagwanpur-village--preparations-underway-to-make-the-entire-village-clean/article-130927"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/11135.png" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। दीगोद उपखंड के भगवानपुर गांव में बुधवार को सफाई व्यवस्था सुचारू करने का कार्य शुरू किया गया। यह कार्रवाई दैनिक नवज्योति के 29 अक्टूबर के अंक में प्रकाशित खबर के बाद हुई। जिसमें ग्रामीणों ने गांव में फैली गंदगी और लचर सफाई व्यवस्था की समस्या उठाई थी। बुधवार को ग्राम पंचायत प्रशासन ने गांव के मुख्य मार्ग की नालियों की सफाई कराई। साथ ही खुरंजों में अवरुद्ध नालियां भी साफ की गर्इं। ग्राम विकास अधिकारी अरुण शर्मा ने बताया कि पूर्व में भी पंचायत द्वारा समय-समय पर सफाई कराई जाती थी। लेकिन कुछ परिवारों में आपसी रंजिश के कारण सफाई कर्मचारियों को काम नहीं करने दिया जाता था। उन्होंने बताया कि अब सफाई कार्य नियमित रूप से शुरू कर दिया गया है और शीघ्र ही पूरे गांव को स्वच्छ बना दिया जाएगा। </p>
<p><strong>यह थी मुख्य समस्या </strong><br />भगवानपुर गांव कोटसुवां ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला लगभग 600 की आबादी वाला  क्षेत्र है। यहां लंबे समय से सफाई व्यवस्था चरमराई हुई थी। गांव के मुख्य मार्ग पर कीचड़ और गंदगी जमी थी। नालियों पर मिट्टी-पत्थर डालकर अतिक्रमण कर दिया गया था। ग्रामीणों ने बताया था कि गंदगी के कारण बच्चों और बुजुर्गों का निकलना दूभर हो गया था और बीमारियों का खतरा बढ़ गया था। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 12:41:55 +0530</pubDate>
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                <title>शहर में मुख्य मार्ग व कचरा पॉइंटों पर लगे कचरे के ढेर : रोजाना निकल रहा एक हजार टन कचरा, घर को साफ कर बाहर से ला रहे गंदगी </title>
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                        <![CDATA[दीपावली की सफाई के चलते शहर में कचरे की मात्रा दोगुनी होकर 900–1000 टन पहुंच गई है। नगर निगम ने सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सफाईकर्मी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां तैनात की हैं। दशहरा मेले से भी भारी मात्रा में कचरा निकल रहा है। निगम द्वारा कचरा त्वरित रूप से उठवाने की कार्रवाई जारी है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/piles-of-garbage-pile-up-on-main-roads-and-garbage-points-in-the-city--1-000-tons-of-garbage-is-being-generated-daily--people-are-cleaning-their-homes-and-bringing-in-dirt-from-outside/article-129759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में इन दिनों अधिकतर घरों में साफ सफाई और रंगाई पुताई का काम तेजी से चल रहा है। जिससे निकलने वाला कचरा सड़कों पर ही डाला जा रहा है। हालत यह है कि घर तो साफ हो रहे हैं और मुख्य मार्गों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। दीपावली सफाई के दौरान शहर में इन दिनों सामान्य दिनों की तुलना में करीब दोगुना कचरा निकल रहा है। दस दिन तक गणपति की आराधना और नौ दिन तक देवी मां की भक्ति करने के बाद अब मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने की बारी है। 5 दिवसीय दीपोत्सव को मनाने के लिए शहर में अधिकतर घरों को साफ करने व चमकाने का काम चल रहा है। नवरात्र समाप्त होने के बाद से ही कई घरों व प्रतिष्ठानों में साफ सफाई का काम शुरु हो गया था। वहीं अधिकतर घरों में पिछले कुछ दिन से सफाई चल रही है। </p>
<p><strong>500 टन की तुलना में दोगुना कचरा</strong><br />नगर निगम की ओर से घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। इसके लिए हर वार्ड में दो से तीन टिपर लगे हुए हैं। वे वार्डों  में घर-घर व दुकानों से कचरा एकत्र कर रहे हैं। हालांकि अभी ये एक समय सुबह ही चल रहे है। उस कचरे को कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर लाया जा रहा है। वहां से नांता सिथत ट्रेचिंग ग्राउंड पर भेजा जा रहा है। हालत यह है कि सामान्य दिनों में जहां शहर से रोजाना करीब 450 से 500 टन कचरा निकल रहा है। वहीं दीपावली पर घरों में हो रही सफाई के दौरान निकलने वाले हर तरह के कचरे की मात्रा बढ़कर करीब दो गुनी 900 से 1000 टन तक हो गई है। यह स्थिति नवरात्र के समय से शुरु हुई है जो अभी भी बनी हुई है। </p>
<p><strong>दशहरा मेले से भी निकल रहा कचरा</strong><br />शहर में 2 अक्टूबर से ही दशहरा मेला भी चल रहा है। ऐसे में वहां भी रोजाना हजारों लोग पहुंच रहे है। फूड जोन में खाने-पीने के साथ ही दुकानों से निकलने वाला कचरा भी मैदान में एकत्र हो रहा है। हालांकि उस कचरे को तीन पारियों में सफाई कर्मचारियों के माध्यम से साफ कराया जा रहा है। लेकिन वहां से भी टनों कचरा रोजाना निकल रहा है। </p>
<p><strong>सफाई श्रमिक व संसाधन बढ़ाए</strong><br />इधर नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से शहर में सफाई के लिए श्रमिक व संसाधन बढ़ाए हैं। नगर निगम कोटा दक्षिण आयुक्त द्वारा आदेश जारी कर हर वार्ड में संवेदक के माध्यम से 5-5 सफाई श्रमिक 17 से 31 अक्टूबर तक और 15 से 30 अक्टूबर तक हर सेक्टर में एक-एक ट्रेक्टर ट्रॉली अतिरिक्त लगाएं हैं। मोतीलाल चौधरी स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि पहले जहां संवेदक दो चक्कर में कचरा उठा रहा था। वहीं अब चाहे तीन हों या चार चक्कर एक बार में पूरा कचरा उठाना होगा। </p>
<p>वैसे तो निगम के स्तर पर नियमित सफाई की जा रही है। कचरा भी उठाया जा रहा है। लेकिन त्योहार पर निकलने वाले अतिुरक्त कचरे को साफ करनेी व उठाने के लिए अतिरिक्त श्रमिक व संसाधन लगाए हैं। जिससे सफाई होने के साथ समय पर कचरा उठ सके। वहीं जहां से भी शिकायत मिल रही है। वहां तुरंत टीम भेजकर सफाई भी कवाई जा रही है। वहीं नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से हर सेक्टर में एक-एक ट्रेक्टर ट्रॉली अतिरिक्त लगाई है। साथ ही संवेदक की ट्रेक्टर ट्रॉली द्वारा कचरा उठाने के फेरे बढ़ाए हैं। <br /><strong>- ऋचा गौतम स्वास्थ्य अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 16:03:37 +0530</pubDate>
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                <title>सफाई व्यवस्था चौपट : लगे गंदगी व कचरे के ढेर, नियमित नहीं हो रही सफाई</title>
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                        <![CDATA[स्थानीय निवासियों का कहना है कि बदबू और मच्छरों-मक्खियों के कारण वहाँ से निकलना मुश्किल हो गया है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-sanitation-system-is-in-shambles--with-piles-of-filth-and-garbage-abounding--and-regular-cleaning-is-not-being-done/article-128898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news20.png" alt=""></a><br /><p>डग। डग में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। स्वच्छता को लेकर बढ़े बढे दावे जमीनी स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं। डग नगर में चारों ओर पसरी गंदगी, जाम नालियाँ और कचरे के ढेर नगर पालिका की चरमराई सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। नगर के कई वार्डों में नियमित सफाई नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि नगरपालिका गठन के बाद से अब तक सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। नागरिकों का कहना है कि अब तो यह भी समझ नहीं आता कि शिकायत किससे करें, क्योंकि सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। भाजपा के पूर्व युवा मोर्चा मंडल उपाध्यक्ष के घर के सामने से गुजरने वाले रास्ते से महावीर चौक से कुंड मंदिर और जैन स्थानक तक जाने वाले मार्ग पर आए दिन नालियाँ जाम रहती हैं। इस रास्ते से होकर मंदिर या स्थानक जाने वाले लोगों को नहा-धोकर गंदगी के बीच से गुजरना पड़ता है। सफाई कर्मचारी कभी-कभार सफाई करते भी हैं तो नालियों से निकाली गंदगी को सड़क किनारे ही छोड़ देते हैं, जिससे और अधिक गंदगी फैल जाती है।वहीं, जगदीश मंदिर के सामने वाली गली में आम रास्ते के किनारे और बीचोंबीच कचरे के ढेर जमा हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बदबू और मच्छरों-मक्खियों के कारण वहाँ से निकलना मुश्किल हो गया है। हालात यह हैं कि मोहल्ले में रहना दूभर हो गया है जो नगरपालिका प्रशासन की अनदेखी को दर्शा रहा है।</p>
<p>जगदीश मंदिर के सामने से महावीर चौक की गली जिसमें निकलने वाले की तो ठीक उससे ज्यादा रहवासियों की हालत खराब है, गंदगी के बीच रहने के लिए मजबूर हो चुके हैं।  दुर्गंध और बीमारियां फैल रही है कई बार शिकायत करने के बाद सफाई होती है पर फिर गंदगी ज्यों की त्यों हो जाती है।<br /><strong>- कृष्ण कांत शर्मा, स्थानीय निवासी डग</strong></p>
<p>गंदगी और दुर्गन्ध से जीना दूभर हो चुका है घर से निकलते हैं तो गंदगी का सामना करना पड़ता है नालियां जाम है।<br /><strong>- महावीर जैन, स्थानीय निवासी डग</strong></p>
<p>सफाई कर्मचारियों द्वारा सफाई तो कर दी जाती है लेकिन कचरा रहवासियों के घरों के सामने फेंक दिया जाता है जिससे की स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है इसका उपाय के लिए डस्टबिन की व्यवस्था की जाए ताकि सफाई कर्मचारी कचरे को डस्टबिन में ही डाल कर जाए। रविवार को भी जब सफाई कर्मचारी सफाई कर रहे थे तो ठीक से सफाई न करने पर एड मनीष मीणा को कॉल किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।<br /><strong>- आशुतोष अग्रवाल स्थानीय निवासी डग</strong></p>
<p>गंदगी को लेकर जो भी समस्या है उसका समाधान कर दिया जाएगा । साथ ही कचरा संग्रहण गाड़ी समय पर कचरा व गंदगी सफाई के लिए नियमित भेज दी जाएगी। <br /><strong>- ईओ मनीष मीणा, नगरपालिका डग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:32:55 +0530</pubDate>
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                <title>गंदे नालों में देशी-विदेशी पक्षियों का बसेरा, शहर के अधिकतर नाले गंदे, नियमित नहीं हो रही सफाई</title>
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                        <![CDATA[पक्षियों को प्राकृतिक आवासों में पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण वे अवांछित स्थानों जैसे नालों में भोजन की तलाश में जा रहे हैं।
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                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dirty-drains-are-home-to-both-native-and-foreign-birds--and-most-of-the-city-s-drains-are-dirty-and-lack-regular-cleaning/article-127770"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहरी क्षेत्र में वैटलेंड लगातार घट रहे हैं। कहीं अतिक्रमण तो कहीं विकास की भेंट चढ़ गए। नतीजन,  देश-विदेश से आने वाले परिंदों के सामने भोजन व रहवास का संकट गहरा गया। ऐसे में गंदे नाले उनकी शरणस्थली <br />बन गई। जहां भोजन के साथ अनगिनत बैक्टीरिया, वायरस, संक्रमण, रसायन भी मिल रहे हंै, जो न केवल पक्षियों के जीवन चक्र को बीमारियों की जद में ला रहा बल्कि उनकी उम्र भी घटा रहा है। जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण माइग्रेट बर्ड्स की संख्या में भी कमी देखी जा रही है। शहर के कई इलाकों के नाले नियमित सफाई के अभाव में गंदगी से अटे पड़े हैं। जिनमें साजीदेहड़ा, एलबीएस मार्ग स्थित नाला, केशवपुरा, डीसीएम रोड, देवली अरब सहित कई नाले शामिल है। जहां गंदगी के बीच भोजन ढृूंढ रहे देसी-विदेशी पक्षियों को होने वाले नुकसान, कारण, सुझाव पर पक्षी विशेषज्ञों से जाना। पेश है रिपोर्ट के प्रमुख अंश...</p>
<p><strong>नालों में भोजन से परिंदों को संभावित नुकसान</strong><br /><strong>बीमारियां व संक्रमण : </strong>नालों का पानी अक्सर गंदा और प्रदूषित होता है। इसमें बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी होते हैं, जो पक्षियों को संक्रमण देकर बीमार कर सकते हैं। </p>
<p><strong>रसायन व अपशिष्ट पदार्थ :</strong> सीवेज या नालों में औद्योगिक व घरेलू कचरे से निकलने वाले रसायन और भारी धातुएं (लेड, पारा, आर्सेनिक आदि) पक्षियों के शरीर में जमा होकर उनकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डालते हैं। जिससे अंडे देने की क्षमता भी प्रभावित होती है। </p>
<p><strong>प्लास्टिक और कचरे का खतरा :</strong> नालों में कई ऐसे अपशिष्ट पदार्थ, रासायनिक व अपचनीय सामग्री भी प्रवाहित होती हैं, जिन्हें पक्षी भोजन समझकर निगल लेते हैं, जो पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाती हैं और कई बार उनकी मृत्यु तक हो सकती है।</p>
<p><strong>धागे व तार में उलझने से घायल:</strong> नालों में हर तरह का कचरा आता है। जिनमें तार, बैलून से बंधे धागे भी होते हैं। कई बार फिडिंग के दौरान उनके शरीर में जाकर फंस जाते हैं और पंजों व पंखों में उलझने से घायल हो जाते हैं। वहीं,  गंदे पानी में पनपने वाले कीड़े व परजीवी पक्षियों की चोंच, आंखों व पैरों पर भी विपरीत असर डालते हैं।</p>
<p><strong>जीवन दर घटने की आशंका : </strong>यदि, प्रवासी पक्षी लगातार गंदे नालों या प्रदूषित जलाशयों पर निर्भर होने लगे तो उनकी जीवित रहने की दर घट सकती है और उनकी संख्या में गिरावट आ सकती है।</p>
<p><strong>आलनिया तालाब वैटलेंड, पेटा काशत बने मुसीबत</strong><br />पक्षी विशेषज्ञ बताते हैं, आलनिया डेम का तालाब पक्षियों के लिए बेहतरीन वेटलैंड है,यहां हर साल हजारों देसी-विदेशी पक्षी आते हैं। लेकिन, यहां पेटा काश्त परिंदों के लिए मुसीबत बनी है। तालाब में जब पानी कम होता है तो यहां लोग अतिक्रमण कर तालाब की जमीन पर पेटा काश्त करते हैं।  जिसका सीधा असर प्रवासी पक्षियों पर पड़ता है। यहां आने वाली माइगे्रटरी बर्ड्स जमीन पर अंडे देते हैं क्योंकि डेम की भूमि में नमी होती है। वहीं, आसपास झाड़ियों में घौंसला बनाकर रहते हैं, जिसे पेटाकाश्त करने वाले लोग नष्ट कर देते हैं।</p>
<p><strong>शहर में वैटलेंड हो विकसित</strong><br />पक्षियों को प्राकृतिक आवासों में पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है, जिसके कारण वे अवांछित स्थानों जैसे नालों में भोजन की तलाश में जा रहे हैं। वन विभाग को शहरी क्षेत्र में वैटलेंड डवलप करवाए जाने चाहिए। साथ ही रहवास सुरक्षित हो, यह सुनिश्चित की जानी चाहिए। नगर निगम को भी नालों की नियमित सफाई करवानी चाहिए।  <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर </strong></p>
<p>अतिक्रमण पर कार्रवाई हो तो रुके पक्षियों का पलायन आलनिया तालाब बेहतर वैटलैंड है, यहां की परिस्थितियां पक्षियों के अनुकूल है। भोजन पानी की उपलब्धता भी पर्याप्त है लेकिन तालाब पर पेटा काश्तकारों के अतिक्रमण बड़ी समस्या है। प्रशासन को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि, परिंदों को गंदे जलाश्यों पर आश्रित न रहना पड़े और उनका पलायन रुके।<br /><strong>- रवि नागर, बायोलॉजिस्ट </strong></p>
<p>पक्षी नालों में फिडिंग के आदी हो गए हैं। क्योंकि, यहां कीड़े-मकोड़े भोजन के रूप में मिल जाते हैं। ऐसी परिस्थितियां क्यों बनी, इसके कारण विभाग को तलाशने चाहिए। प्रदूषित जलस्रोतों  में कई तरह के बैक्टीरिया होते हैं, जो उनके जीवन चक्र को  प्रभावित करता है।  ऐसे में वेटलैंड्स (आर्द्रभूमियों) का संरक्षण बेहद जरूरी है।<br /><strong>- डॉ. अंशु शर्मा, पक्षी विशेषज्ञ </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गंदगी में रहने से पक्षियों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव जरूर पड़ता है। बर्ड्स वहां रहती है तो वह स्थान एक तरह से उनका रहवास है। कीट, पतंगे, कीड़े-मकोड़े खाकर वायरस, संक्रमण फैलने से रोकती है,जो इंसानों को बीमारियों से बचाव के लिए अहम रोल अदा रही है। लेकिन, मनुष्य पक्षियों के प्रति अपना फर्ज नहीं निभा रहा है। नालों की नियमित सफाई होनी चाहिए ताकि, अपशिष्ट व रसायनिक पद्धार्थ को बहने से रोका जा सके। रही बात वैटलेंड की तो हमारे क्षेत्र में डवलप कर रहे हैं। जिनमें अभेड़ा तालाब, जोहरा बाई का तालाब, उम्मेदगंज पक्षी विहार, बायोलॉजिकल पार्क सहित भैंसरोडगढ़ व शेरगढ़ सेंचुरी के कई क्षेत्र शामिल हैं।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>
<p>नगर निगम द्वारा नालों की समय-समय पर सफाई करवाई जाती है। यदि, कहीं गंदगी की शिकायत मिलती है तो तुरंत  सफाई करवा दी जाएगी।<br /><strong>- अशोक त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 15:44:48 +0530</pubDate>
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                <title>पर्यटन स्थलों पर अब गॉब्लर मशीनों से होगी सफाई : सड़कों से उठाया जा सकेगा कचरा, सफाई व्यवस्था होगी और अधिक सुदृढ़ </title>
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                        <![CDATA[अब शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वैक्यूम बेस्ड लिटर पिकर गॉब्लर मशीनों से सफाई होगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cleaning-will-be-picked-up-from-the-roads-will-now/article-124284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नगर निगम ग्रेटर आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के निर्देशानुसार अब शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वैक्यूम बेस्ड लिटर पिकर गॉब्लर मशीनों से सफाई होगी। शुरुआत में दो गॉब्लर मशीनों को अल्बर्ट हॉल, जवाहर सर्किल सहित अन्य प्रमुख स्थलों पर लगाया जाएगा।</p>
<p>आयुक्त डॉ. सैनी ने बताया कि इन मशीनों से फुटपाथों और सड़कों के किनारे पड़े प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को वैक्यूम तकनीक से तुरंत उठाया जा सकेगा। इससे सफाई व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। झालाना गैराज में आयुक्त ने गॉब्लर मशीन की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया और मौके पर स्वयं मशीन को संचालित कर देखा। इस दौरान अधिशासी अभियंता (गैराज) भी मौजूद रहे।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 16:28:08 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 53 - सड़कें सही नहीं, बारिश में रहता है जलभराव</title>
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                        <![CDATA[उपमहापौर के वार्ड के हाल बेहाल।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-53---roads-are-not-good--waterlogging-remains-in-the-rain/article-123087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/6622-copy19.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  कोटा उत्तर नगर निगम वार्ड 53 में मुख्य सड़कें तो ठीक है लेकिन अंदर कॉलोनियों में सड़कों का लेवल समानीकरण नहीं है। जिसके चलते बारिश के दिनों में वार्डवासियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। सड़कों पर बने ब्रेकर भी बड़े है जिससे वाहनचालकों व राहगीरों के चोटिल होने की संभावना बनी रहती है। इस वार्ड में कचरा संग्रहण गाड़ी रोजाना आती है। यह वार्ड नगर निगम के उपमहापौर का है। यहां स्मार्ट सिटी की झलक केवल चौराहों पर ही नजर आ रही है। जबकि, वार्ड की नालियों कचरा अटा पड़ा है। इस वार्ड में नए सामुदायिक भवन का निर्माण भी हुआ है। शहर के कई वार्ड ऐसें हैं, जिनका आधा भाग नगर निगम में तो आधा यूआईटी के दायरे में आता है। जिसका खामियाजा वार्डवासियों को भी भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />रेमण्ड शोरूम, शनि मन्दिर, हम्मालों का चौक, चश्मे की बावडी, कुरेशी जमात खाना, कब्रिस्तान, नारायण पान गली, देवनारायण मन्दिर, हुसैन चौक, तेलियों की चोकडी, बजाज खाना, कत्थैया पाड़ा का आंशिक भाग, बन्डी पहलवान का मकान, मौमिनो की बडी मस्जिद जाकिर नाई, रघु पान की गली, इस्माईल भाई का मकान, गौरी होटल की गली, इकबाल चौक, मुसाफिर खाना, बम्बोला मन्दिर शामिल है। शुक्रवार को दैनिक नवज्योति की टीम ने वार्ड पहुंच कर लोगों से बात की तो उन्होंने परेशानियां खुलकर साझा की। पेश है लाइव रिपोर्ट....</p>
<p>वार्ड में बारिश के दिनों सड़कों में उतार-चढ़ाव ज्यादा होने के कारण जलभराव की स्थिति बन जाती है। ऐसे में रहवासियों को घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। जलभराव होने से खतरनाक बीमारियों का लार्वा भी पनपने का डर रहता है। भोजन की तलाश में बेसहारा मवेशियों का जमावड़ा भी रहता है जो कचरा सड़कों पर फैला देते हैं। बारिश में पानी के बहाव के साथ नालियों में कचरा भी जमा हो रहा है।  <br /><strong>- शकीला, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में बिजली के तार काफी नीचे की ओर झूल रहे हैं। तेज हवा चलने से तार आपस में टकराते हैं, जिससे स्पार्किंग होने से शॉर्ट सर्किट व करंट का खतरा बना रहता है। हाल यह है, बड़े वाहनों के यहां से गुजरने के दौरान तार टूटने का भी डर बना रहता है। बिजली आने-जाने का समय भी निर्धारित नहीं है। दिनभर में कई बार बिजली गुल हो जाती है। कॉल सेंटर पर फोन करने के बावजूद सुनवाई नहीं होती। <br /><strong>- उमर सीआईडी, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड की प्रमुख मार्गों पर कई लोगों अतिक्रमण भी है। दुकानदार सड़क भी सामान रख रहे है। वार्डो की कुछ गलियां संकरी होने के कारण जाम की स्थिति भी बनी रहती है।  वार्ड में रोड लाइटें नहीं होने शाम को गलियों में अंधेरा हो जाता है। सड़कों पर गड्ढे हो रहे हैं, जो अंधेरे के कारण दिखाई नहीं देने से वाहन चालक हादसे के शिकार हो जाते हैं। <br /><strong>-रहीमुद्दीन कुरेशी, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड में कचरा समय समय पर उठवा दिया जाता है, सफाई भी प्रतिदिन होती है। कुछ समस्याए वार्डवासीयो का आती है तो उसका समाधान भी समय समय पर करवा दिया जाता है।<br /><strong>- फरीदुद्दीन सोनू कुरैशी, उपमहापौर कोटा उत्तर </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Aug 2025 15:01:24 +0530</pubDate>
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                <title>कचरा गाड़ी आती है पर हार्न नहीं बजाती है</title>
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                        <![CDATA[वार्डवासियों को कचरा बाहर डालना पड़ता है साथ झूलते बिजली के तारों से हादसे का अंदेशा रहता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-garbage-vehicle-comes-but-does-not-blow-the-horn/article-119286"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा दक्षिण के वार्ड एक  में वैसे तो अनेक विकास के कार्य हुए पर वार्ड की समस्या में छोटी नालियां व टूटे डिवाइडर वहीं छोटी कचरा गाड़ी आती है पर वहां हॉर्न नहीं लगाती ना ही आवाज लगाती है। जिसे वार्डवासियों को कचरा बाहर डालना पड़ता है साथ झूलते बिजली के तारों से हादसे का अंदेशा रहता है। और कुछ जगह पर प्लास्टिक के लगे हुए डिवाइडर टूट गए है जिसे बारिश में बाइक सवारों के फिसलने का अंदेशा बना रहता है। </p>
<p><strong>यहां है वार्ड का इलाका  </strong><br />अफीम गोदाम, पट्टा बुर्ज अखाड़ा, रेतवाली, पदमनाथ मंदिर,नीलकंठ मंदिर, कैथूनीपोल थाना।</p>
<p><strong>कॉम्पलेक्स की नल की टोटियां गायब </strong><br />वार्डवासी तीर्थराज गोदवानी ने बताया कि वार्ड में स्थित महिला स्रान घर पर ताला लगा हुआ है। जिसे महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।  साथ ही कॉम्पलेक्स के नल की टोटियां गायब व दरवाजों को मरम्मत की दरकार है।  वहीं कैथूनीपोल थाने के पास सड़क को खोद व केबल डालकर खुदी सड़क की मरम्मत करना भूल गए। </p>
<p><strong>वार्ड में पक्की नालियों की दरकार </strong><br />वार्ड में कुछ हिस्सों में नालियां छोटी - छोटी व कच्ची बनी हुई है। जिसे बारिश का पानी निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। व वार्ड की अधिकतर नालियों पर ढकान करके गाड़िया खड़ी करने लगा गए है। जिसे नालियों की सफाई करने में परेशान का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>टूटे डिवाइडर दे रहे दर्द</strong><br />वार्ड में कुछ स्थानों पर डिवाइडर टूटे हुए जिसे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। और टूटे डिवाइडर लोगों को परेशानी व दर्द दे रहे है।  वहीं वार्डवासियों ने बताया कि बारिश के समय टूटे डिवाइडर से बाइक सवारों को फिसलने का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>पार्क का कचरा पात्र गंदगी से भरा पड़ा</strong><br />पार्क में घूमने आने वाले दिनेश, अरविंद ने बताया कि पार्क के कचरा पात्र में खाली बोतल, डिस्पोजल,  वेस्ट पेपर सहित अन्य बेकार की वस्तुएं पड़ी हुई है। पार्क के कुछ हिस्सें में पेड़ की कटी हुई लकड़िया व पत्ते रख हुए है साथ ही बिजली का पैनल बॉक्स भी खुल है जिसे  पार्क में खेलने आने वालों के साथ हादसे का अंदेशा रहता है। </p>
<p><strong> छोटी कचरा गाड़ी को माइक की आवश्यकता</strong><br />वार्ड में रहने वाले ने बताया कि हमारे मकान तक छोटी कचरा गाड़ी आती है, पर वहां कचरें के लिए आवाज नहीं लगाती है और ना ही किसी प्रकार का जो अन्य जगहों पर कचरे वाला गाना बजता है वहां भी नहीं बजता है। जिसे हमें परेशानी का सामना करना पड़ता है व छोटी कचरा गाड़ी को भी माइक देना चाहिए। <br /><strong>- अब्दुल रशीद, वार्ड वासी </strong></p>
<p>वार्ड वासी ने बताया कि वार्ड मे समय - समय पर सफाई होती है साथ ही लाइट व नल भी समय पर आता है।<br /><strong>- बंटी वार्डवासी</strong></p>
<p>मेरे मकान के सामने जो जर्जर भवन है उसमें से बारिश में प्लास्टर गिरता है जिसे नीचे खड़े राहगीरों को परेशानी होती है साथ ही हम भी डर के साये में जी रहे है। साथ ही कई बार अधिकारियों को शिकायत कर दी पर कोई ध्यान नहीं देता है। <br /><strong>- भुवनेश मोदी, वार्ड वासी</strong> </p>
<p>वार्ड में अधिकतर बंदरों का आतंक हमारे तरफ केकिस भी घर पर खाने पीने की चीज यदि खुले में रख हुई है तो वह अचानक से आकर बंदर ले जाते है। जिसे कई बार डर का माहौल बना रहता है। <br /><strong>महावीर सुमन, वार्डवासी </strong></p>
<p>मेरे वार्ड में विकास के काम करीब - करीब हो चुके है साथ ही पार्क भी पूर्ण रूप से विकसित है। महिला स्रान गृह को पट्टा बुर्जुग में शिफ्ट कर दिया है। कुछ जगहों पर अधूरी नालियों को पूर्ण कर दिया जाएगा। <br /><strong>- दिलीप अरोड़ा, वार्ड पार्षद 1</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Jul 2025 16:00:16 +0530</pubDate>
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                <title>मौसम हो रहा गर्म, वाटर नहीं हुआ कूल</title>
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                        <![CDATA[शहर में वाटर कूलर तो अब जगह-जगह पर हर थोड़ी दूरी पर लगे हुए हैं। लेकिन उनकी स्थिति काफी खराब है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/weather-is-getting-hot--water-is-not-getting-cool/article-106743"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer35.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में आने वाले समय में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ने वाला है। ऐसे में राहगीरों को पीने के लिए ठंडे पानी की जरूरत होगी। लेकिन हालत यह है कि सड़क किनारे मेन रोड पर जगह-जगह लगे अधिकतर वाटर कूलर या तो खराब हैं या बंद पड़े हुए हैं। जिससे उनका ठंडा पानी लोगों को नहीं मिल पा रहा है। गर्मी का सीजन शुरु होने के साथ ही पहले शहर में जगह-जगह प्याऊ लगाई जाती थी।  नगर निगम की गौशाला के माध्यम से प्याऊ का संचालन किया जाता  था। लेकिन पिछले कई सालों से निगम ने प्याऊ लगाना तो बंद कर दिया। उनके स्थान पर अब वाटर कूलर लगने लगे हैं। नगर निगम के अलावा विधायक व सांसद कोष से और स्वयंसेवी संस्थाओं व समाज सेवियों के माध्यम से शहर में वाटर कूलर तो लगाए गए हैं। लेकिन हालत यह है कि उनमें से कई वाटर कूलर खराब या बंद हैं। </p>
<p><strong>करीब 500 से अधिक वाटर कूलर</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण क्षेत्र में करीब 500 से अधिक वाटर कूलर लगे हुए हैं। पार्क, मंदिर, धार्मिक स्थल, मेन रोड, मार्केट, बस स्टैंड समेत कई जगह पर वाटर कूलर लगे हुए हैं। नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर निगम द्वारा पार्षदों की अनुशंसा पर और विधायक कोष से उनकी अनुशंसा पर नगर निगम के माध्यम से वाटर कूलर लगाए गए हैं। ये वाटर कूलर हर साल गर्मी के सीजन में काम में आते हैं।</p>
<p><strong>यह है वाटर कूलर की स्थिति</strong><br />शहर में वाटर कूलर तो अब जगह-जगह पर हर थोड़ी दूरी पर लगे हुए हैं। लेकिन उनकी स्थिति काफी खराब है। शहर में शॉपिंग सेंटर में बैंक के सामने वाटर कूलर ही गायब है। ऐसे में उसका ठंडा पानी लोगों को मिलना ही संभव नहीं है। फर्नीचर मार्केट में लगा वाटर कूलर बंद पड़ा हुआ है।  वहीं मल्टीपरपज स्कूल के कॉर्नर पर वाटर कूलर तो लगा हुआ है लेकिन वह बंद है। छावनी चौराहे पर एलआईसी बिल्डिंग के सामने वाटर कूलर का स्ट्रक्चर तो बना हुआ है। लेकिन वहां न पानी की टंकी है और न ही वाटर कूलर है। इसी तरह एक होटल के सामने लगा वाटर कूलर बंद पड़ा हुआ है। संजय नगर स्थित नए बस स्टैंड पर वाटर कूलर नाम मात्र व दिखावे है। यह स्थिति तो कुछ ही वाटर कूलर की है। पूरे शहर में ऐसे दर्जनों वाटर कूलर हैं जिनमें या तो नल गायब हैं या टंकी गायब है। किसी में चालू होने से पानी तो आ रहा है लेकिन उसका विद्युत कनेक् शन नहीं होने से गर्म पानी आ रहा है। नए कोटा शहर से लेकर भीमगंजमंडी तक इस तरह के कई वाटर कूलर देखे जा सकते हैं। </p>
<p><strong>नगर निगम करवाता सफाई व मेंटेनेंस</strong><br />सूत्रों के अनुसार वाटर कूलर चाहे नगर निगम ने लगवाएं हो या विधायक कोष से लगे हों। निगम क्षेत्र में लगे वाटर कूलरों की मेंटेंनस और पानी की टंकियों की सफाई नगर निगम द्वारा करवाई जाती है। जबकि संस्थाओं द्वारा संचालित कूलरों की सफाई उनके द्वारा ही करवाई जाती है। हालत यह है कि नगर निगम के विद्युत अनुभाग में तकनीकी स्टाफ की कमी होने से इन पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर के निगम क्षेत्र में लगे वाटर कूलरों की मेंटेनेंस व टंकी की सफाई नगर निगम के माध्यम से करवाई जाती है। अभी गर्मी शुरु होने से पहले सभी की मेंटेनेंस करवाने के आदेश जारी कर दिए हैं। या तो वे सही हो गए होंगे या हो रहे होंगे। गर्मी तेज पड़ने से पहले सभी को सही करवा दिया जाएगा। जिससे लोगों को गर्मी में शीतल जल मिलता रहे। <br /><strong>- अशोक त्यागी, आयुक्त, नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Mar 2025 16:29:40 +0530</pubDate>
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