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                <title>macron - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>ग्रीनलैंड के पास फ्रांस ने भेजा राफेल से लैस परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर, जबरन कब्जे की तैयारी में डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय एकजुटता दिखाते हुए फ्रांस ने परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को उत्तरी अटलांटिक की ओर तैनात किया, यूरोपीय संप्रभुता को समर्थन जताया और अमेरिका संदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-sends-rafale-equipped-nuclear-aircraft-carrier-to-greenland-in-preparation/article-141142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)11.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप के देश एकजुट होते दिख रहे हैं। अमेरिका को खुली चेतावनी देने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने ग्रीनलैंड के पास उत्तरी अटलांटिक महासागर में अपने एकमात्र परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को भेजा है। यह राफेल फाइटर जेट से लैस है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने इस तैनाती के बारे में ऐलान किया है। माना जा रहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सेना के हमले के खतरे को देखते हुए फ्रांसीसी नौसेना ऐक्शन में आई है। यही नहीं फ्रांसीसी राष्ट्रपति डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं से पेरिस में मिलने जा रहे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि मैक्रों यूरोपीय एकजुटता को एक बार फिर से अपना समर्थन जाहिर करेंगे। साथ ही डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकजुटता को भी अपना समर्थन देंगे।</p>
<p><strong>फ्रांसीसी स्ट्राइक कैरियर कहां जा रहा?</strong></p>
<p>फ्रांस, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता आर्कटिक में सुरक्षा खतरे, ग्रीनलैंड के आर्थिक तथा सामाजिक विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसको फ्रांस और यूरोपीय संघ दोनों ही सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि चार्ल्स डी गॉल को कहां तैनात किया जा रहा है, लेकिन समाचार एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि यह उत्तरी अटलांटिक की ओर बढ़ रहा है। हाल के दिनों में यह इलाका अमेरिका और यूरोप के बीच भूराजनीतिक तनाव का केंद्र बनकर उभरा है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नेवल एयर ग्रुप ओरियन 26 सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए तोउलोन नौसैनिक अड्डे से रवाना हो गया है। </p>
<p><strong>स्ट्राइक कैरियर के साथ पूरा बेड़ा</strong></p>
<p>फ्रांस के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में चार्ल्स डी गॉल और उसके विमान, साथ ही कई एस्कॉर्ट और सपोर्ट जहाज शामिल हैं। इसमें एक डिफेंस फ्रिगेट, एक सप्लाई शिप और एक हमलावर पनडुब्बी है। यह अभ्यास ऐसे समय में होने जा रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्तशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड को लगातार अमेरिका में मिलाने की धमकी दे रहे हैं।</p>
<p><strong>जंग के मूड में यूरोप, टूट सकता है नाटो </strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए कमर कस चुके हैं। अमेरिका की सेना इसके लिए लगातार तैयारी भी कर रही है। ट्रंप के इस रुख से 32 देशों की सदस्यता वाले सैन्य संगठन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानि नाटो के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ यूरोपीय देश एकजुट हो रहे हैं। ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी जैसे ताकतवर यूरोपीय देशों ने अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर चेतावनी भी दी है। </p>
<p>इस बीच नाटो चीफ ने चेतावनी दी है कि बिना अमेरिका के नाटो देश अपनी रक्षा नहीं कर सकते हैं। ग्रीनलैंड का प्रशासन डेनमार्क देखता है जो नाटो का सदस्य देश है। ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। दरअसल, अमेरिका यहां पर अपना गोल्डन डोम डिफेंस सिस्टम लगाना चाहता है ताकि रूस और चीन की मिसाइलों से अमेरिका को बचाया जा सके। </p>
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को दी टैरिफ की धमकी</strong></p>
<p>यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। नाटो का आर्टिकल 5 कहता है कि अगर एक सदस्य देश पर दुश्मन का हमला होता है तो यह सभी देशों पर अटैक माना जाएगा। यही नहीं इस जंग में नाटो के हर सदस्य देश को सैन्य सहायता देना होगा। </p>
<p>नाटो के महासचिव जनरल मार्क रट ने सोमवार को खुलासा किया कि अमेरिकी सैन्य सहायता के बिना यूरोप अपनी खुद की रक्षा नहीं कर सकता है। उन्होंने यूरोपीय सांसदों से कहा कि यूरोप और अमेरिका को एक-दूसरे की जरूरत है।</p>
<p><strong>जर्मनी-पोलैंड बनाना चाहेंगे परमाणु बम</strong></p>
<p>एक्सपर्ट के अनुसार अमेरिका ठीक इसी समय यूरोप को अपने ऊपर निर्भर बनाए रखेगा और उसे एक विरोधी ब्लॉक के रूप में उभरने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप के शासनकाल में नाटो के आंतरिक नियम बदलने जा रहे हैं। अगर अमेरिका नाटो से निकलता है तो यूरोपीय सुरक्षा ढांचा खंड-खंड हो जाएगा। </p>
<p>यूरोपीय देश सामूहिक सुरक्षा की जगह पर अपनी-अपनी सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर देंगे। उन्होंने कहा कि जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देश परमाणु बम हासिल करने पर बहस करने लगेंगे। वहीं ब्रिटेन और फ्रांस असलियत में अमेरिका की कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे। ये दोनों देश पूरे यूरोप की उस तरह से सुरक्षा नहीं कर पाएंगे जैसे कि अमेरिका करता है।</p>
<p><strong>अमेरिकी सेना का ग्रीनलैंड में बेस</strong></p>
<p>जैसे-जैसे वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, यह द्वीप भू-राजनीतिक दबाव का एक मापक बन गया है। इससे पता चलता है कि पुरानी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था किस तरह कमजोर पड़ने लगी है। इन सभी के केंद्र में पिटुफिक अंतरिक्ष ठिकाना है, जिसे पहले थुले एयरबेस के नाम से जाना जाता था। शीतयुद्ध के दौरान एक चौकी के रूप में इस्तेमाल यह बेस अब अमेरिकी सेना के अंतरिक्ष बल केंद्र का एक अहम हिस्सा है, जो मिसाइल का पता लगाने से लेकर जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने तक हर चीज के लिए आवश्यक है। ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि उस समय बढ़ रही है, जब युद्ध के बाद की नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था शांति और सुरक्षा बनाए रखने में तेजी से निष्प्रभावी साबित हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:26:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस को दी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी, सामने आई चौकाने वाली वजह</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने से इनकार करने पर फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ की धमकी दी है। उन्होंने मैक्रों का ग्रीनलैंड पर असहमति वाला निजी संदेश भी लीक किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/if-you-dont-join-the-board-of-peace-trump-threatens/article-140230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ समय सभी देशों पर ट्रेरिफ लगा रहे हैं, इससे पहले उन्होंने भारत को भी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसी बीच अब ट्रंप ने फ्रांस के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। बता दें कि यह चेतावनी फ्रांस द्वारा ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से इनकार करने के बाद सामने आई है। </p>
<p>मीडिया से रूबरू होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, अगर फ्रांस ने दुश्मनाना रवैया अपनाया तो भारी टैरिफ लगाया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि इससे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को बोर्ड में शामिल होने पर मजबूर होना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, इस विवाद को और हवा तब मिली जब ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर मैक्रों का एक निजी संदेश साझा किया। बता दें कि संदेश में ग्रीनलैंड को लेकर असहमति जताई गई थी और दावोस में G7 नेताओं के साथ मुलाकात का प्रस्ताव भी रखा गया था।</p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:16:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजरायल को हथियार आपूर्ति से वंचित करना मध्य पूर्व में लड़ाई रोकने का एकमात्र उपाय : मैक्रों </title>
                                    <description><![CDATA[यहां के अन्य नेताओं ने भी ऐसा ही किया है। हम सभी जानते हैं कि यही एकमात्र उपाय है जो इस लड़ाई को रोक सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/depriving-israel-of-arms-supplies-is-the-only-way-to-stop-war--invocation-of-export--says-emmanuel/article-92884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/emanuel-macron.jpg" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि मध्य पूर्व में लड़ाई रोकने का एकमात्र उपाय इजरायल को हथियार आपूर्ति से वंचित करना है, जिसका उपयोग वह गाजा और लेबनान में लड़ाई जारी रखने के लिए करता है। मैक्रों ने साइप्रस में यूरोपीय संघ के भू-मध्य सागरीय सदस्य-देशों के एक एमईडी शिखर सम्मेलन में कहा कि कि फ्रांस ने इन युद्ध क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले हथियारों के निर्यात को रोकने का आह्वान किया है।</p>
<p>यहां के अन्य नेताओं ने भी ऐसा ही किया है। हम सभी जानते हैं कि यही एकमात्र उपाय है जो इस लड़ाई को रोक सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मतलब इजरायल के पूर्ण निरस्त्रीकरण से नहीं है, क्योंकि वह अभी भी सुरक्षा जोखिमों के अंतर्गत है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sat, 12 Oct 2024 14:39:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इमैनुएल मैक्रों ने यूएनएससी में भारत की दावेदारी का किया समर्थन</title>
                                    <description><![CDATA[भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है। वर्तमान में सुरक्षा परिषद में सिर्फ पांच स्थायी सदस्य हैं, जिनके पास वीटो पावर होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/emmanuel-macron-supported-of-india-claim-in-unsc/article-91683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में अपने संबोधन में इस वैश्विक निकाय को और ज्यादा कुशल बनाने की मांग की। उन्होंने यूएनजीए में बोलते हुए ब्राजील, जर्मनी, जापान और अफ्रीका के दो देशों की उम्मीदवारी का भी समर्थन किया। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सही की मांग कर रहा है। वर्तमान में सुरक्षा परिषद में सिर्फ पांच स्थायी सदस्य हैं, जिनके पास वीटो पावर होता है।</p>
<p><strong>मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र में क्या कहा</strong><br />मैक्रों ने यूएनजीए में कहा कि आइए संयुक्त राष्ट्र को और अधिक कुशल बनाएं। हमें इसे और अधिक प्रतिनिधि बनाने की आवश्यकता है और इसीलिए फ्रांस सुरक्षा परिषद के विस्तार के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि जर्मनी, जापान, भारत और ब्राजील को स्थायी सदस्य होना चाहिए, साथ ही दो ऐसे देश होने चाहिए जिन्हें अफ्रीका उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए तय करेगा।</p>
<p><strong>यूएनएससी क्या है</strong><br />संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य अंगों में से एक के रूप में, सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। इसमें 15 सदस्य शामिल हैं: वीटो पावर वाले पांच स्थायी सदस्य (संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस और यूनाइटेड किंगडम) और दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए 10 गैर-स्थायी सदस्य। गैर स्थायी सदस्यों का कार्यकाल बदलता रहता है।</p>
<p><strong>सुरक्षा परिषद का काम क्या है</strong><br />संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्राथमिक कार्यों में संघर्षों की जांच, शांति अभियानों की स्थापना, प्रतिबंध लगाना और आवश्यकता पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का प्राधिकरण शामिल है।</p>
<p>यह वैश्विक संकटों और संघर्षों को संबोधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे यह अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में एक प्रमुख और प्रभावी समूह बन जाता है।</p>
<p><strong>यूएनएससी में सुधार समय की मांग क्यों हैं</strong><br />समान प्रतिनिधित्व का सवाल 1979 से ही संयुक्त राष्ट्र महासभा के एजेंडे में रहा है। हालांकि, दुनियाभर में बढ़ते संघर्ष के बीच सुधार की मांगें तेज हो गईं हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नवंबर 2022 में सुरक्षा परिषद पर अपनी चर्चा समाप्त की, जब सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए 15 सदस्यीय निकाय के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की थी। रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए यूएनएससी द्वारा प्रस्ताव पारित करने में विफल रहने के कारण, कुछ स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति पर सवाल उठाए गए थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Sep 2024 10:40:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान ने लुइस अर्नोद को किया रिहा, लंब समय बाद पहुंचे फ्रांस : मैक्रों</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस के बैंकिंग सलाहकार अर्नोद को सितंबर 2022 में ईरान की यात्रा के दौरान गिरफ्तार किया गया था। पिछले साल  उन्हें कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आरोपों में पांच साल जेल की सजा सुनाई गयी थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-releases-louis-arnaud-macron-arrives-in-france-after-a-time--says-macron/article-81408"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/emmanuel-macron.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ईरान ने फ्रांसीसी नागरिक लुइस अर्नोद को रिहा कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों में मैक्रों के हवाले से यह जानकारी दी गयी। रिपोर्टों के मुताबिक मैक्रों ने कहा कि लुईस अर्नोद रिहा हो गए हैं। ईरान में लंबे समय तक कैद रहने के बाद वह फ्रांस पहुंचेंगे।<br />उन्होंने अर्नोद को रिहा करने में मदद के लिए ओमान को धन्यवाद दिया और ईरान से  से तीन अन्य फ्रांसीसी नागरिकों को अविलंब रिहा करने का आग्रह किया।</p>
<p>फ्रांस के बैंकिंग सलाहकार अर्नोद को सितंबर 2022 में ईरान की यात्रा के दौरान गिरफ्तार किया गया था। पिछले साल  उन्हें कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आरोपों में पांच साल जेल की सजा सुनाई गयी थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jun 2024 14:25:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मैक्रॉन ने की इजरायली सेना हमले की निंदा </title>
                                    <description><![CDATA[मैं इन गोलीबारी की कड़ी निंदा करता हूं और सच्चाई, न्याय तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान का आह्वान करता हूं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/macron-condemned-the-israeli-army-attack/article-71590"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने गाजा शहर में मानवीय सहायता वाले ट्रकों के आसपास एकत्र हुए फिलिस्तीनी नागरिकों पर गोलियां चलाने के लिए इजरायली सेना की निंदा की। मैक्रॉन ने एक्स पर लिखा, गाजा से आ रही तस्वीरों पर गहरा आक्रोश है, जहां इजरायली सैनिकों द्वारा नागरिकों को निशाना बनाया गया है। </p>
<p>मैं इन गोलीबारी की कड़ी निंदा करता हूं और सच्चाई, न्याय तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान का आह्वान करता हूं। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने कहा कि इजरायली सेना ने मानवीय सहायता प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे लोगों की भीड़ पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम112 लोग मारे गए और 760 से अधिक घायल हो गए।इस बीच इजरायल ने दावा किया कि उसकी गोलियों से इतनी अधिक संख्या में लोग नहीं मारे गए हैं। अधिकांश लोग भीड़ के कुचलने से मारे गए क्योंकि लोगों ने सहायता से लदे ट्रकों पर हमला कर दिया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Mar 2024 12:41:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इमैनुएल मैक्रॉन ने गणतंत्र दिवस पर लोगों को दी शुभकामनाएं </title>
                                    <description><![CDATA[गणतंत्र दिवस परेड सुबह 10-30 बजे दिल्ली के विजय चौक से शुरू होगी। इस वर्ष समारोह में एक फ्रांसीसी दल की भागीदारी भी शामिल है। परेड में अन्य आकर्षणों में भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग प्रमुख हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/emmanuel-macron-give-best-wishes-of-peoples-on-republic-day/article-68214"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश के 75वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने भारत की लोगों को शुभकामनाएं दी है। मैक्रॉन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आइए जश्न मनाएं।</p>
<p>गणतंत्र दिवस परेड सुबह 10-30 बजे दिल्ली के विजय चौक से शुरू होगी। इस वर्ष समारोह में एक फ्रांसीसी दल की भागीदारी भी शामिल है। परेड में अन्य आकर्षणों में भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग प्रमुख हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jan 2024 12:33:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मैक्रों के साथ कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए मोदी पहुंचे जयपुर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी एकदिवसीय यात्रा पर गुरुवार सायं राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/modi-reached-jaipur-to-participate-in-programs-with-macron/article-68177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/untitled-design-(5).jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी एकदिवसीय यात्रा पर गुरुवार सायं राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचे।</p>
<p>राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने मोदी के जयपुर पहुंचने पर हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की। मिश्र एवं शर्मा ने मोदी को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।</p>
<p> मोदी अपनी यात्रा के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ यहां आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jan 2024 18:16:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मैक्रॉं यूक्रेन संकट पर चर्चा के लिए अप्रैल में चीन जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[मैक्रॉं ने उम्मीद जताई कि चीन ''रूस पर दबाव बनाने में हमारी मदद करेगा ताकि वह कभी भी रासायनिक या परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करे।"]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/macron-to-visit-china-in-april-to-discuss-ukraine-crisis/article-38358"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/emanuel-macron.jpg" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्राँ ने कहा है कि वह यूक्रेन संकट पर चर्चा करने के लिए अप्रैल की शुरुआत में चीन जाएंगे और बीजिंग से आग्रह करेंगे कि वह यूक्रेन के लिए हाल ही में जारी चीनी शांति योजना के तहत रुस पर दबाव बनाए।</p>
<p>मैक्रॉं ने पेरिस में एक कृषि मेले में कहा,''मुझे लगता है कि चीन शांति प्रयासों में संलग्न है, यह तथ्य अच्छा है। मैं खुद अप्रैल की शुरुआत में चीन जाऊंगा।"</p>
<p>मैक्रॉं ने उम्मीद जताई कि चीन ''रूस पर दबाव बनाने में हमारी मदद करेगा ताकि वह कभी भी रासायनिक या परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करे।"</p>
<p>चीन ने शुक्रवार को यूक्रेन संकट के राजनीतिक समाधान पर चीन की स्थिति शीर्षक से एक 12-बिंदु दस्तावेज जारी किया, जिसमें अन्य बातों के अलावा, सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान, शत्रुता की समाप्ति और यूक्रेन व रुस के बीच शांति (एजेंसी) की बहाली शामिल है।</p>
<p>इससे पहले फरवरी में मीडिया ने बताया कि एलिसी पैलेस अगले डेढ़ महीने में फ्रांस के राष्ट्रपति की चीन यात्रा की तैयारी कर रहा था, यह देखते हुए कि यह चीनी अधिकारियों के साथ संपर्क फिर से शुरू करने का समय है और संघर्ष जैसे वैश्विक मुद्दों पर बातचीत को पार्टियां नई गति देना चाहती हैं।</p>
<p>फरवरी के मध्य में केंद्रीय विदेश मामलों के आयोग कार्यालय के निदेशक वांग यी ने पेरिस का दौरा किया और मैक्रॉं द्वारा व्यक्तिगत रूप से उनका स्वागत किया गया। बैठक में वांग ने कहा कि बीजिंग यूक्रेनी मुद्दे पर एक उद्देश्यपूर्ण और निष्पक्ष स्थिति के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध था और सुलह और शांति (एजेंसी) में योगदान देने के लिए हमेशा उत्सुक था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Feb 2023 12:18:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम से गर्मजोशी से मिले मैक्रों, गले लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[ मोदी 24 अप्रैल को राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने वाले मैक्रों से मुलाकात करने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय नेता हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/macron-warmly-met-pm--hugged/article-9152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/modi2.jpg" alt=""></a><br /><p>पेरिस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फ्रांस को भारत के सबसे मजबूत सहयोगियों में से एक बताया।  मोदी फ्रांस के दौरे पर है। पेरिस पहुंचने पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों आत्मीयता से गते मिले।</p>
<p><br />इससे पहले मोदी ने ट्वीट कर कहा कि पेरिस पहुंच चुका हूं। फ्रांस भारत के सबसे मजबूत सहयोगियों में से एक हैं, जो हमारे देश के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग कर रहा है। मोदी 24 अप्रैल को राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने वाले मैक्रों से मुलाकात करने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय नेता हैं। <br /><br /><strong>मोदी ने की नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों से द्विपक्षीय बैठकें</strong><br />कोपेनहेगन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को यहां दूसरे भारत नॉर्डिक शिखर सम्मेलन से पहले आईसलैंड की प्रधानमंत्री कैटरीन जैकोब्स्डोतिर, स्वीडन के प्रधानमंत्री मैग्डालेना एंडरसन, नार्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर और फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मैरीन से अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकात की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/macron-warmly-met-pm--hugged/article-9152</link>
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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 12:36:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस राष्ट्रपति चुनाव : मैक्रों का जादू फिर चला</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव जीतने के बाद अब उनके सामने गठबंधन को बनाए रखने, जनता से किए गए वादों को पूरा करने, जलवायु नीति का नवनिर्माण, महंगाई और अर्थ-व्यवस्था को पटरी पर लाना, यूरोपीय संघ के महत्वाकांक्षी उद्देश्यों को हासिल करना, रूस-यूक्रेन युद्ध दौरान संतुलन को बनाए रखने की चुनौतियां भी मुंह बायें खड़ी हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/emmanuel-macron-win-in-election/article-8626"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/46546545.jpg" alt=""></a><br /><p>चुनाव जीतने के बाद अब उनके सामने गठबंधन को बनाए रखने, जनता से किए गए वादों को पूरा करने, जलवायु नीति का नवनिर्माण, महंगाई और अर्थ-व्यवस्था को पटरी पर लाना, यूरोपीय संघ के महत्वाकांक्षी उद्देश्यों को हासिल करना, रूस-यूक्रेन युद्ध दौरान संतुलन को बनाए रखने की चुनौतियां भी मुंह बायें खड़ी हैं। रूस के मौजूदा राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों ने राष्ट्रपति चुनाव में फिर जीत हासिल कर ली है। इस जीत के साथ उन्होंने वर्ष 2002 के बाद  दूसरी बार देश का राष्टÑपति बनने का ऐतिहासिक गौरव भी हासिल कर लिया है। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी, धुर दक्षिण पंथी नेशनल रैली पार्टी की प्रत्याशी मरीन ले पेन को लगातार दूसरी बार भी शिकस्त दी। चुनाव के दूसरे चरण में मैक्रों को जहां 586 फीसदी मत हासिल हुए, तो पेन को सिर्फ 42 फीसदी मत मिले। चुनाव पूर्व हुए तमाम चुनावी सर्वेक्षणों में पहले और दूसरे चरण दोनों में कड़े मुकाबलों का पूर्वानुमान लगाया गया था। जो काफी हद तक सटीक रहा। पहले दौर में जहां मैक्रों और पेन में मतों का अंतर मात्र तीन फीसदी रहा, जो दूसरे चरण में बढ़कर सोलह फीसदी रहा। मैक्रों की इस बार की जीत में मुस्लिमों के प्रति की गई नरमपंथी घोषणाओं का भी असर भी माना जा रहा है। उन्हें दूसरे दौर के चुनावों में एक करोड़ सत्यासी लाख उनहत्तर हजार आठ सौ नौ मत मिले। जबकि मरीन ले पेन को एक करोड़ बत्तीस लाख सत्यानवें हजार सात सौ अट्ठाईस हजार मत मिले। जबकि देश में कुल मतदाताओं की संख्या चार करोड़ सत्यासी लाख है।</p>
<p>मैक्रों ने मुस्लिमों के लिए अलग निकाय बनाने की घोषणा की थी। तो पेन ने सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। प्रतिबंध भी ऐसा कि हिजाब पहनने पर जुर्माना लगाया जाएगा जिस तरह कार में बेल्ट सीट नहीं लगाने पर किया जाता है। मैक्रों का मानना है पूरे पश्चिमी यूरोप में सबसे अधिक मुस्लिम फ्रांस में रहते हैं। ऐसे में व्यावहारिक नीतियां लागू करनी होंगी। दक्षिणपंथी कठोर नीतियों से भय पैदा होगा, जो बाद में गुस्से में तब्दील हो सकता है। इससे फ्रांस की एकजुटता पर असर पड़ सकता है। मैक्रों की इस जीत के कई मायने हैं। एक तो फ्रांस के पिछले बीस वर्षों के राजनीतिक इतिहास में वे जैक्स चिराग के बाद ऐसे शख्स रहे, जो लगातार दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बनने में सफल रहे हैं। दूसरा-ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद फ्रांस का कद इस संघ में काफी अहम हो गया है। कारण यह देश यूरोप में दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला जो है।  वर्ष 2017 से पूर्व नौसिखिया की छवि से हटकर उन्होंने अपनी कूटनीतिक सक्रियता के साथ स्वयं की छवि को एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया है। खासकर यूक्रेन-रूस के बीच युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों में वे गहराई से जुड़े रहे।</p>
<p>चुनाव जीतने के बाद अब उनके सामने गठबंधन को बनाए रखने, जनता से किए गए वादों को पूरा करने, जलवायु नीति का नवनिर्माण, महंगाई और अर्थ-व्यवस्था को पटरी पर लाना, यूरोपीय संघ के महत्वाकांक्षी उद्देश्यों को हासिल करना, रूस-यूक्रेन युद्ध दौरान संतुलन को बनाए रखने की चुनौतियां भी मुंह बायें खड़ी हैं।फ्रांस की मध्यम मार्गी ला रिपब्लिकन एन मार्च पार्टी से जुड़े मैक्रों भारत के समर्थक हैं। भारत को सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनाने के पक्षधर रहे हैं। कोरोना महामारी, रफाल विमान डील, सामरिक और कारोबारी रणनीति के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग का वातावरण बना। हालांकि परमाणु पनडुब्बी डील को लेकर आस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ संबंधों में तनाव की स्थितियां भी बनीं।</p>
<p>मैक्रो ने फ्रांस के संभ्रांत स्कूल इकोले नेशनल डी‘एडमिनिस्ट्रेशन में पढ़ाई की। वह पहले सिविल सर्वेंट थे। फिर कुछ वर्षों के लिए रोथ्सचाइल्ड में एक बैंकर के रूप में कार्य किया। उसके बाद वे समाजवादी राष्ट्रपति फ्रांसिस ओलांद के आर्थिक सलाहकार थे। वह 2014 से 2016 तक ओलांद की सरकार में अर्थ व्यवस्था मंत्री नियुक्त किए गए। में राजनीतिक परिदृष्य में सामने आए। राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा। अपनी प्रतिद्वंद्वी मरीन ले पेन को बत्तीस फीसदी मतों से पिछली बार शिकस्त दी थी। इस बार यह जीत सोलह फीसदी के अंतर से रही, जबकि पहले चरण में दोनों प्रमुख प्रत्याशियों के बीच मतों का अंतर मात्र तीन फीसदी ही था। पहले चरण में कुल बारह प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। प्रथम चरण में पहले दो स्थानों पर पहुंचे मैक्रों और पेन के बीच दूसरे चरण के चुनाव में मुकाबला रहा। समझा जाता है कि तीसरे स्थान पर रहे समाजवादी उम्मीदवार जीन-ल्यूक मेलेनचॉन के समर्थकों का अधिक हिस्सा मैक्रों के पक्ष में रहा। हालांकि चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार दौरान वामपंथियों ने मैक्रों और पेन दोनों को हराने को लेकर देशभर में रैलियां निकालकर विरोध प्रदर्शन भी किए थे। मैक्रों की जीत के समर्थन में जहां उनके समर्थक जश्न मना रहे हैं, तो कई जगह पर विरोध-प्रदर्शन और पुलिस से झड़पों के समाचार भी मिल रहे हैं। इस चुनाव के साथ पेन की इस पद पर यह लगातार तीसरी चुनावी हार है। यदि जीत गई होती तो पहली महिला राष्ट्रपति होतीं। वे अवैध अप्रवासियों को खदेड़ने और इस्लामी कट्टरपंथ पर लगाम लगाने की समर्थक हैं।</p>
<p><strong>- (ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Apr 2022 11:27:36 +0530</pubDate>
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                <title> इमैनुएल मैक्रों बनें फ्रांस के राष्ट्रपति: मोदी ने मैक्रों को दी बधाई</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार फ्रांस के राष्ट्रपति चुने जाने पर इमैनुएल मैक्रों को बधाई दी। मोदी ने ट्विट किया कि इमैनुएल मैक्रों को फ्रांस के राष्ट्रपति के रूप में फिर से चुने जाने पर बधाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-give-congratulates-of-macron/article-8590"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/4654464.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार फ्रांस के राष्ट्रपति चुने जाने पर इमैनुएल मैक्रों को बधाई दी। मोदी ने ट्वीट किया कि इमैनुएल मैक्रों को फ्रांस के राष्ट्रपति के रूप में फिर से चुने जाने पर बधाई। मैं भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखने के लिए तत्पर हूं।</p>
<p>मैक्रों ने राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में 18,779,641 मतों यानी 58.55 प्रतिशत मतों के साथ जीत हासिल की, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी, राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार एवं  राष्ट्रीय रैली पार्टी की नेता मरीन ले पेन को 13,297,760 मत यानी 41.46 प्रतिशत मत मिले।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 16:58:44 +0530</pubDate>
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