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                <title>Government Health Scheme - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Government Health Scheme RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सीजीएचएस नियमों में सख्ती: मोटापा एवं डायबिटीज की दवाओं के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी, जानें क्या है शर्ते ?</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य मंत्रालय ने केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत टिरज़ेपेटाइड और सेमाग्लूटाइड जैसी मोटापा एवं टाइप-2 मधुमेह रोधी दवाओं के उपयोग पर कड़े नियम लागू किए हैं। ये इंजेक्शन केवल उच्च बीएमआई और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे पात्र लाभार्थियों को विशेषज्ञों की अनुमति के बाद ही दिए जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/strictness-in-cghs-rules-instructions-issued-regarding-use-of-obesity/article-161271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत मोटापा और टाइप-2 मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट इंजेक्शन दवाओं के इस्तेमाल के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इन दवाओं की समीक्षा के बाद टिरज़ेपेटाइड (माउनजारो) को सीजीएचएस की प्रतिबंधित दवाओं की ऑनलाइन सूची में शामिल कर दिया है। अब माउनजारो और सेमाग्लूटाइड का उपयोग केवल तय शर्तों के अनुसार ही किया जा सकेगा।</p>
<p>नए नियमों के अनुसार, ये इंजेक्शन केवल उन सीजीएचएस और केंद्रीय सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 1944 के पात्र लाभार्थियों को दिए जा सकेंगे, जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 35 या उससे अधिक हो। इसके अलावा 32.5 या उससे अधिक बीएमआई वाले ऐसे मरीज भी इसके पात्र होंगे जिन्हें अनियंत्रित टाइप-2 मधुमेह, गंभीर स्लीप एपनिया, हृदय रोग, फैटी लीवर की गंभीर बीमारी या किडनी की पुरानी बीमारी जैसी समस्याएं हों। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मरीजों को पहले पैंक्रियाटाइटिस हो चुका हो, थायरॉयड कैंसर का व्यक्तिगत या पारिवारिक इतिहास हो, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं हों, गंभीर डायबिटिक रेटिनोपैथी, पेट की गंभीर बीमारी या बैरिएट्रिक सर्जरी का इतिहास हो, उन्हें ये दवाएं नहीं दी जाएंगी।</p>
<p>दवा शुरू करने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर को यह प्रमाणित करना होगा कि मरीज ने कम से कम तीन महीने तक जीवनशैली में बदलाव, खान-पान संबंधी परामर्श और नियमित शारीरिक गतिविधि का पालन किया है। इन दवाओं का पर्चा केवल सरकारी अस्पताल के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या आंतरिक रोग विशेषज्ञ ही लिख सकेंगे। हर पर्चे पर संबंधित विभागाध्यक्ष की मंजूरी जरूरी होगी और इसकी वैधता छह महीने तक रहेगी। इसके बाद इलाज जारी रखने के लिए फिर से विशेषज्ञ की सिफारिश और विभागाध्यक्ष की मंजूरी लेनी होगी।</p>
<p>दिशा-निर्देशों के अनुसार इलाज शुरू होने के बाद पहले तीन महीने तक हर महीने और उसके बाद हर तीन महीने में मरीज की जांच होगी। डॉक्टरों को वजन में कमी, इलाज का असर, दवा के दुष्प्रभाव, पैंक्रियाटाइटिस के संकेत, मांसपेशियों में कमी और अन्य दुष्प्रभावों का रिकॉर्ड रखना होगा। इलाज तभी जारी रहेगा जब मरीज को स्पष्ट लाभ मिल रहा हो और दवा सुरक्षित साबित हो। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी सीजीएचएस वेलनेस सेंटरों और संबद्ध अस्पतालों को इन दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि नियमों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:59:54 +0530</pubDate>
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                <title>आरजीएचएस में अनियमितताओं पर सरकार का सख्त एक्शन: 3 माह में 51 अस्पताल निलंबित, फर्जी क्लेम और वित्तीय गड़बड़ियों पर कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने आरजीएचएस योजना में फर्जी क्लेम और वित्तीय गड़बड़ियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत 51 अस्पतालों को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही ऑडिट में धांधली मिलने पर 24 अस्पतालों पर करीब तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governments-strict-action-on-irregularities-in-rghs-51-hospitals-suspended/article-160134"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/rghs.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बीते तीन माह में 51 संबद्ध अस्पतालों को योजना से निलंबित किया है। वहीं, गत एक माह के दौरान ऑडिट में अनियमितताएं पाए जाने पर 24 अस्पतालों पर करीब 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार आरजीएचएस में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वित्तीय दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और फर्जी क्लेम किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।</p>
<p>प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़  ने बताया कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत चिकित्सा विभाग लगातार आरजीएचएस योजना को मजबूत करने के साथ अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में ऑडिट के आधार पर 24 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 3 करोड़ रुपये की रिकवरी का निर्णय लिया गया। अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने सभी मामलों की विस्तृत सुनवाई और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद यह कार्रवाई की।</p>
<p><strong>जांच में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं</strong></p>
<p>ऑडिट के दौरान अस्पतालों में दस्तावेजों की डुप्लीकेसी, आवश्यकता से अधिक जांचें कराना, अधिक भुगतान प्राप्त करने के लिए एक ही पैकेज में शामिल सेवाओं को अलग-अलग दर्शाकर क्लेम करना, आवश्यक दस्तावेजों का अभाव तथा ओपीडी मरीजों को अनुचित तरीके से आईपीडी में बदलकर क्लेम प्रस्तुत करने जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इनसे योजना पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ने की पुष्टि होने पर नियमानुसार रिकवरी की कार्रवाई की गई।</p>
<p><strong>इन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई</strong></p>
<p>रिकवरी की कार्रवाई के दायरे में उदयपुर का पारस जेके हॉस्पिटल, डूंगरपुर का जील हॉस्पिटल, अजमेर का मार्बल सिटी हॉस्पिटल, जयपुर के मणिपाल हॉस्पिटल, सोनी हॉस्पिटल और इंडस हॉस्पिटलसहित कुल 24 अस्पताल शामिल हैं। राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने कहा कि योजना के संचालन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऑडिट प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है तथा भविष्य में भी फर्जी बिलिंग, अनियमित क्लेम, प्रक्रियागत उल्लंघन और वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 18:01:45 +0530</pubDate>
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