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                <title>उत्तर चला रहा पुराने से काम, दक्षिण ने बढ़ाए कई गुना दाम</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा दक्षिण में सामुदायिक भवनों की पिछले तीन सप्ताह से बुकिंग ही नहीं हुई है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/north-is-running-the-same-old-work--south-has-increased-the-prices-several-times/article-111091"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(3)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  एक ही शहर में नगर निगम  कोटा उत्तर व दक्षिण के सामुदायिक भवनों के किराए में  इतना अधिक अंतर है कि उत्तर में किराया कम और दक्षिण में अधिक है। हालत यह है कि दक्षिण निगम में जब से सामुदायिक भवनों का किराया बढ़ाया गया है उसके बाद से एक भी सामुदायिक भवन की बुकिंग नहीं हुई है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में छोटे-बड़े करीब 15-15 सामुदायिक भवन है। जो बरसों पुराने होने से उनमें पर्याप्त सुविधाएं तक नहीं है। उसके बावजूद भी इनका किराया कम होने व छोटे- आयोजनों के लिए लोग निगम के सामुदायिक भवनों का उपयोग करते रहे हैं। निगम की तुलना में केडीए के सामुदायिक भवनों का किराया अधिक है। लेकिन केडीए के सामुदायिक भवन बड़े और सुविधा युक्त भी है। जिससे लोगों को उनका किराया अधिक होने पर भी बुक करवाने में कोई समस्या नहीं है।  बिना सुविधाओं के भी लोग निगम के सामुदायिक भवनों को बुक कर उनका उपयोग कर रहे थे। कोटा उत्तर निगम में अभी भी किया जा रहा है। लेकिन कोटा दक्षिण में सामुदायिक भवनों की पिछले तीन सप्ताह से बुकिंग ही नहीं हुई है। </p>
<p><strong>पार्षदों ने जताया विरोध, नहीं हुआ असर</strong><br />निगम आयुक्त द्वारा 24 मार्च को सामुदायिक भवनों का किराया बढ़ाने का आदेश जारी होने के साथ ही कांग्रेस पार्षदों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया था। पार्षद अनुराग गौतम, कपिल शर्मा, गफ्फार हुसैन, प्रफुल्ल पाठक समेत कई पार्षदों ने विरोध करते हुए किराए को कम करने की मांग की थी।  उनका कहना था कि इतना अधिक किराया बढ़ाकर निगम जनता पर आर्थिक भार डाल रहा है। जबकि निगम के सामुदायिक भवन सस्ते होने से अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग ही इनका उपयोग करते हैं।  पार्षदों का कहना है कि किराया बढ़ाने से न तो  सामुदायिक भवनों की बुकिंग हो रही है। जिससे  न तो लोगों को उसका लाभ मिल रहा है और न ही निगम को राजस्व प्राप्त हो रहा है। दोनों तरफ से नुकसान भुगतना पड़ रहा है। लेकिन अभी तक उस पर कोई निर्णय नहीं किया गया। </p>
<p><strong>24 मार्च से लागू किया बढ़ा किराया</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से गत माह 24 मार्च को आदेश जारी कर उनके क्षेत्र के सभी सामुदायिक भवनों, भीतरिया कुंड बारहद्वारी का ुकराया 5 से 10 गुना बढ़ा दिया है।  निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार सामदायिक भवनों की बुकिंग निगम के राजस्व अनुभाग के माध्यम से की जाती है। लेकिन किराया बढ़ाने के बाद 24 मार्च से कोटा दक्षिण निगम में न तो भीतरिया कुंड बारहद्वारी की बुकिंग हुई है और न ही सामुदिायिक भवनों की। जिससे कम किराए में निगम को जो राजस्व प्राप्त हो रहा था वह भी बंद हो गया है। </p>
<p><strong>जानकारी कर रहे लेकिन बुक नहीं</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार किराया बढ़ाने से पहले भीतरिया कुंड समेत अन्य सामुदायिक भवनों की नियमित बुकिंग हो रही थी। हालांकि बुकिंग आॅफ लाइन ही की जाती है। लेकिन हालत यह है कि सबसे अधिक आयोजनों के लिए बुक होने वाला भीतरिया कुंड तक में 24 मार्च के बाद कोई बुकिंग नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार लोग सामुदायिक भवन व भीतरिया कुंड की बारहद्वारी को बुक तो करना चाहते है। यही कारण है कि निगम में इसकी जानकारी भी कर रहे है। साथ ही यह भी पूछ रहे हैं कि  किराया कम हुआ या नहीं। जवाब नहीं मिलने पर वे दोबारा  लौटकर ही नहीं आ रहे। </p>
<p> नगर निगम के सामुदायिक भवन व भीतरिया कुंड के बारहद्वारी सस्ते होने से अधिक लोग इनका उपयोग कर पा रहे थे। लेकिन निगम ने बिना उनमें सुधार किए उनका किराया इतना अधिक बढ़ा दिया कि आम आदमी उनका किराया देखकर ही घबराने लगा है। निगम के सामुदायिक भवनों में सुविधाएं नहीं होने से साथ ही ये छोटे भी है। ऐसे में इनका किराया बढ़ाने से आम आदमी पर आर्थिक भार डाला जा रहा है। <br /><strong>- राजेन्द्र सिंह, शिवपुरा</strong></p>
<p>छावनी समेत कई जगह पर निगम के सामुदायिक भवन तो हैं लेकिन उनकी दशा इतनी अधिक खराब हो रही है कि उनका उपयोग करने से पहले लोग उसी दशा देखकर ही दूर भागते है। लेकिन किराया कम होने से कई लोग इनका उपयोग भी कर रहे थे। वहीं निगम ने बिना इनकी मरम्मत करवाए और सुविधाएं बढ़ाए बिना किराया बढ़ा दिया जिससे मध्यम व गरीब वर्ग के लोगों के लिए समस्या खड़ी कर दी है। वे इन्हें किराए पर लेना तो चाहते हैं लेकिन किराया पहले से कई  गुना बढ़ाने पर इनका उपयोग नहीं कर रहे हैं। <br /><strong>- वल्लभ अग्रवाल, छावनी</strong></p>
<p><strong>महापौर ने लिखा था यृू ओ नोट</strong><br />इधर आयुक्त द्वारा किराया बढ़ाए जाने का आदेश जारी होते ही कोटा दक्षिण निगम के महापौर राजीव अग्रवाल ने उसी दिन आयुक्त के नाम यू ओ नोट लिखा था। जिसमें बढ़ाए गए किराए को आगामी आदेश तक स्थगित रखने के लिए निर्देशित किया गया था।  लेकिन हालत यह है कि तीन सप्ताह होने के बाद भी न तो यू ओ नोट पर कोई कार्रवाई की गई और न ही उसका जवाब दिया गया। </p>
<p>निगम के सामुदायिक भवनों का किराया इतना अधिक बढ़ाना जनता पर सीधा आर्थिक भार डालना है। किराया बढ़ाने की जानकारी मिलते ही आयुक्त को यू ओ नोट लिख दिया था। जिसमें बढ़े हुए किराए को फिलहाल स्थगित रखने के लिए निर्देशित किया था। लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ना ही आयुक्त ने यू ओ नोट का कोई जवाब दिया है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>नगर निगम कोटा उत्तर में सामुदायिक भवनों का किराया नहीं बढ़ाया है। पुरानी दर से ही किराया लिया जा रहा है। वहीं निगम के सामुदायिक भवनों की नियमित बुकिंग भी हो रही है। <br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, उपायुक्त, नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 14:31:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आधी आबादी को मिला राजनीति में मौका,लेकिन नहीं छूट रहा चूल्हा चौका</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण ही नहीं जिला परिषद तक में महिला जनप्रतिनिधि चुनकर तो आ गई लेकिन उनमें से वास्तविक रूप में काम करने वालों की संख्या काफी कम है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/half-of-the-population-got-a-chance-in-politics--but-they-are-not-leaving-their-kitchens/article-60109"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/aadhe-abadi-ko-mila-rajaneti-mein-mauka,lekin-nahi-chhot-raha-choolha-chauka...kota-news-21-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस 1-</strong> नगर निगम कोटा उत्तर के वार्ड 13 से कांग्रेस के टिकट पर जीतकर तो महिला पार्षद बनी हैं मंजू अग्रवाल। वे दूसरी बार पार्षद चुनी गई है। लेकिन उनका सारा कामकाज उनका पुत्र शेखर अग्रवाल ही संभाल रहा है। वार्ड से लेकर निगम तक में हर काम वही करता है। </p>
<p><strong>केस 2-</strong> नगर निगम कोटा उत्तर में ही वार्ड 57 से निर्दलीय पार्षद चुनी गई है मेघा गुर्जर। लेकिन उनका सारा काम उनके पति मनीष गुर्जर ही संभाल रहे हैं। मेघा गुर्जर तो निगम की बैठकों में ही शामिल होती है। उनके अलावा जनता से मिलना और निगम में कोई भी काम करवाना हो तो उनके पति ही नजर आते हैं। </p>
<p><strong>केस 3-</strong> नगर निगम कोटा दक्षिण में वार्ड 66 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद तो चुनी गई हैं शीला पाठक। लेकिन उनका सारा काम उनका पुत्र प्रफुल्ल पाठक ही कर रहे हैं। वार्ड से लेकर निगम तक में वे ही नजर आते हैं। </p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं। नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण ही नहीं जिला परिषद तक में महिला जनप्रतिनिधि चुनकर तो आ गई लेकिन उनमें से वास्तविक रूप में काम करने वालों की संख्या काफी कम है। महिला आरक्षण बिल संसद में पारित हो चुका है। जिससे महिलाओं को आने वाले समय में राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा। वहीं वर्तमान में भी महिलाओं को  लोकसभा व विधानसभाओं के साथ ही शहरी व ग्रामीण सरकार में चुनकर आने का मौका मिला है। लेकिन हालत यह है कि उनमें से करीब 30 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो चुनकर तो आ गई लेकिन उनसे अभी भी चूल्हा चौके का मोह नहीं छूट रहा है। उनके पति और पुत्र ही उनका काम संभाल रहे हैं। नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में कुल निर्वाचित 150 पार्षद हैं। जिनमें से करीब 29 फीसदी 53 महिला पार्षद हैं। जबकि जिला परिषद में 23 सदस्यों में से करीब 50 फीसदी यानि 11 महिला सदस्य हैं। </p>
<p>42  प्रतिशत परिजन कर रहे काम दक्षिण में<br />40  प्रतिशत परिजन कर रहे उत्तर में<br />36  प्रतिशत परिजन कर रहे काम जिला परिषद में</p>
<p><strong>कोटा उत्तर में 25 महिला पार्षद</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर में कुल निर्वाचित पार्षद 70 हैं। जिनमें से 25 महिला पार्षद हैं। इनमें भाजपा व कांग्रेस के अलावा निर्दलीय भी शामिल हैं। कोटा उत्तर में तो महापौर भी महिला ही हैं। वे दूसरी बार पार्षद चुनी गई है। वे अपना काम स्वयं ही कर रही हैं। जबकि  इस निगम में करीब 30 फीसदी महिला पार्षदों के पति व पुत्र फील्ड में काम कर रहे हैं। वहीं इस निगम में 12 सहवरित पार्षद भी हैं जिनमें एक भी महिला नहीं है। </p>
<p><strong>कोटा दक्षिण निगम में 28 महिला पार्षद</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में 80 निर्वाचित पार्षद हैं। जिनमें से 28 महिला पार्षद हैं। इनमें से  करीब 75 फीसदी महिलाएं तो स्वयं काम कर रही हैं। जबकि  भाजपा और कांग्रेस की  करीब 25 फीसदी महिला पार्षद ऐसी हैं जिनके पति, जेठ व पुत्र फील्ड में काम कर रहे हैं। यहां 12 सहवरित पार्षद हैं। जिनमें से एक महिला पार्षद भी शामिल है।  कोटा में जब एक ही नगर निगम थी। उस समय पहली महापौर भाजपा से महिला थी। उसके बाद कांग्रेस से भी महिला महापौर रह चुकी हैं। इन सभी ने अपना काम स्वयं ही किया था। </p>
<p><strong>जिला परिषद में 11 महिलाएं</strong><br />शहरी सरकार नगर निगम के अलावा कोटा जिले में ग्रामीण सरकार जिला परिषद भी है। जिला परिषद में कुल 23 निर्वाचित सदस्य हैं। जिनमें से 11 महिलाएं हैं। जिला परिषद में अधिकतर महिलाएं दूर दराज के ग्रामीण परिवेश से हैं। इस कारण से महिला आरक्षण होने से उन्हें टिकट मिला तो वे जीत भी गई लेकिन उनके कल्चर में अभी भी चूल्हा चौके से बाहर आना नहीं लिखा है।  जिला परिषद में करीब 50 फीसदी महिलाएं होने के बावजूद उनमें से भी 30 फसिदी महिलाएं सिर्फ बैठकों में ही उपस्थित रहती है। वहां आने के बाद भी वे किसी मुद्दे को नहीं उठाती। जबकि 66 फीसदी महिलाएं पुरजोर तरीके से जनता के मुद्दों को बैठकों में उठा रही हैं। जिला परिषद में कमला मीणा भाजपा की जिला प्रमुख रह चुकी हैं। वे अपना काम स्वयं ं करती थी। पंचायत समिति लाड़पुरा में प्रधान कांति गुर्जर रह चुकी हैं। वे अपना काम स्वयं करती थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2023 16:56:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>विभागों में सामंजस्य नहीं,  पलीता लगा रहे आधे-अधूरे काम</title>
                                    <description><![CDATA[ वार्ड  में कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था बिल्कुल भी ठीक नहीं है।  वार्ड के इस इलाके  के नागरिक बताते हैं कि शहर में विकास के कई कार्य हो रहे हैं लेकिन यहां के हालातों की सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-no-coordination-in-the-departments--half-incomplete-work-is-being-sabotaged/article-43701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/vibhago-mei-saamanjasya-nahi-,-palita-laga-rahe-aadhe-adhure-kaam..kota-news-24.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। यूडीएच मंत्री शान्ति धारीवाल सरकार के करोड़ों रुपए खर्च करके शहर के विकास और सोन्दर्यकरण  में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वे शहर को चमकाने का हर प्रयास कर रहे है। शहर का शायद की ऐसा कोई प्रमुख चौराहा अब शेष रहा हो जहां कोई काम ना हुआ हो लेकिन शहर के आन्तरिक हिस्सों यानि वार्डाें की बात करें तो कई वार्डों में हुए काम स्मार्ट सिटी के नाम पर धब्बा बने हुए है। कारण चाहे पार्षद हो या ठेकेदार लेकिन शान तो शहर की खराब हो रही हैं। वार्ड में बनी अव्यवस्थाओं से परेशान तो वार्डवासी हो रहे हैं। वार्ड के दूसरे अच्छे कामों पर खराब हुए कार्य कालिक पोत रहे हैं। इसका एक छोटा सा उदाहरण है कोटा नगर निगम उत्तर के वार्ड नम्बर 61 में स्थित कृष्णा नगर के हालात। </p>
<p><strong>आधे अधूरे कार्य से लोग परेशान</strong><br />वार्ड 61 लोगों की माने तो शहर के अन्य वार्डों की भांति ही उनके वार्ड में सड़कें आदि के काम हुए है लेकिन वो काम उनके लिए राहत नहीं बल्कि आफत साबित हो रहे हैं। कारण उसका ये है कि ठेकेदार ने सड़कों का निर्माण कार्य कई स्थानों पर अधूरा छोड़ दिया है। कई आधी सड़क का निर्माण हुआ है तो कई स्थानों पर सड़कों के किनारों को बिना बनाए ही सड़कों का काम पूरा कर दिया गया है। सड़कों के ये आधे अधूरे काम अभी तो फिर भी एक सीमा तक ही परेशानी का कारण बने हुए हैं लेकिन जैसे ही बारिश का दौर प्रारम्भ हुआ, यहीं समस्या जानलेवा भी साबित होने की आशंका है। वार्ड के लोग बताते हैं कि हमारी कोई सुनवाई नहीं होती है। हम कह-कहकर परेशान हो चुके हैं। लोगों का कहना हैं कि बात सड़कों की ही नहीं है क्षेत्र के कई स्थानों पर रोड लाइटों के हालात खराब है, कई बार तो रोड लाइट रातभर नहीं जलती है तो कई बार रात 10 बजे के बाद गलियों में रोशनी नजर आती है और ये हालात कोढ़ में खाज वाले साबित होते हैं क्यों कि अंधेरे में गलियों में गाड़िया चलाना और वो भी सड़कों के बिना बने किनारों से दुर्घटना का कारण बन जाते हैं। वहीं वार्ड में कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था बिल्कुल भी ठीक नहीं है।  वार्ड के इस इलाके  के नागरिक बताते हैं कि शहर में विकास के कई कार्य हो रहे हैं लेकिन यहां के हालातों की सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। लोग बताते हैं कि ठेकेदार ने आधे अधूरे काम क्यों किए ये तो वो ही जाने या पार्षद ही लेकिन इन सबके बीच जनता तो पिस रही है। सड़कों के टूटे किनारों के कारण सफाई भी ढ़ंग से नहीं हो पाती है। इन खाली स्थानों पर कचरे के रूप में थेलियां, पानी की खाली बोतलें आदि नजर आती है। कई दिनों तक झाड़ियों को साफ नहीं किया जाता हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं...</strong><br />ठेकेदार में सड़कों के काम आधे-अधूरे छोड़े हुए हैं। सड़कों से ऊपर तो सीवरेज के चैंबर है जो दुर्घटना का कारण बने हुए हैं। सड़कें कई स्थानों से टूटी हुई हैं। ठेकेदार मटेरियल भी ऐसे ही छोड़ गया है जो रह रह कर नालियों में जाता रहता है। जिससे नालियां कई बार जाम हो जाती हैं। पार्षद की ओर से कोई कमी नहीं है लेकिन ठेकेदार ही ना जाने कैसे हैं। अभी हाल ही में नालियों की मरम्मत को कार्य चला था वो भी अब बीच में ही छोड़ दिया गया हैं। <br /><strong>- मेहताब काजी, क्षेत्रवासी। </strong></p>
<p>ठेकेदार में सड़कों के काम अधूरे छोड़कर परेशानी पैदा कर दी हैं। टूटी सड़कें दुर्घटना का कारण बनी हुई है। सड़कों के किनारों को यूं का यूं छोड़ दिया गया है। जिससे वाहन चालकों को परेशान किया हुआ है। क्षेत्र में झाड़ियों की सफाई नहीं हुई है।<br /><strong>- मनोज कुमार वर्मा, क्षेत्रवासी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Apr 2023 15:27:36 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तर निगम के वार्ड 4 में लोगों को मिली बिना मालिकों के वीरान, क्षतिग्रस्त मकानों से मुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड में कई स्थानों पर आज भी खुली और जाम नालियां नजर आ जाएगी। इन नालियों की सफाई टाइम पर नहीं होती हैं। कई बार गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। ये लोग कहते हैं कि वार्ड की हर गली में श्वानों की भरमार हैं। श्वानों के कारण रात में घर से निकलने में भी डर लगता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/in-ward-4-of-north-corporation--people-got-rid-of-deserted--damaged-houses-without-owners/article-43232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/utter-nigam-k-ward-4-mei-logo-ko-mili-bina-maaliko-k-viraan,-shatigrast-makaano-se-mukti..kota-news..19.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हमारे पार्षद ने यूंतो वार्ड में कई ऐसी समस्याओं का समाधान करवाया है जो सालों से वार्डवासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी लेकिन सबसे बढ़िया काम उन्होंने वार्ड के 3 या 4 उन घरों को निगम के माध्यम से ध्वस्त करवाकर किया है जिनका कोई मालिक नहीं था और जो बरसों से वीरान और पूरी तरह क्षतिग्रस्त थे। जो कभी भी बडेÞ हादसे का कारण बन सकते थे। यह कहना हंै नगर निगम कोटा उत्तर के वार्ड नम्बर 4 के कुछ लोगों का। लोग बताते हैं कि पार्षद यंग है तो पूरी तरह काम करवाने को लेकर सक्रिय हैं और निगम के अधिकारियों से उनके रिश्ते भी ठीक है तो काम करवाने में कोई परेशानी नहीं आती है। वहीं दूसरी ओर वार्ड के कुछ लोग ये भी कहते हैं कि काम भले ही वार्ड में हुए है लेकिन आज भी वार्ड के कुछ स्थानों पर लोगों ने जो अतिक्रमण किया हुआ हैं उनकी ओर निगम का ध्यान नहीं है। वार्ड के कुछ हिस्सों की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। </p>
<p> नगर निगम उत्तर के इस वार्ड में गंधीजी की पुल, लक्ष्मी होटल, भेरू गुदड़ी, चित्तोड़ा का स्कूल, होली का खूट, गजेश्वर महादेव, टिप्पन की चौकी, बम्बूलियां चौक तथा लुहारो का मंदिर आदि इलाकें आते हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोग कहते हैं कि पहले वार्ड की सड़कें टूटी हुई थी, कई स्थानों पर तो 1-1 फीट के गड्ढेंÞ बने हुए थे लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल गए हैं। वार्ड के लगभग हर हिस्से में सीसी रोड बन चुके हैं। अच्छी बात तो ये है कि पार्षद खुद साइड पर जाकर काम देखते और गुणवत्ता पूर्ण कार्य करवाते हैं। वहीं कुछ वार्डवासी ये भी कहते हैं कि वार्ड में अधिकांश कार्य उन स्थानों पर हुए हैं जहां पार्षद के समर्थक या पार्टी के कार्यकर्ता रहते हैं। काम कई हुए हैं लेकिन निर्माण सामग्री ढंग की काम में नहीं ली गई है। वार्ड में कई स्थानों पर आज भी खुली और जाम नालियां नजर आ जाएगी। इन नालियों की सफाई टाइम पर नहीं होती हैं। कई बार गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। ये लोग कहते हैं कि वार्ड की हर गली में श्वानों की भरमार हैं। श्वानों के कारण रात में घर से निकलने में भी डर लगता है।</p>
<p>वार्डवासियों का कहना हैं कि पार्षद ने वार्ड में बहुत अच्छे काम करवाएं हैं। पार्षद नियमित रूप से वार्ड में समय देते हैं। किसी भी समस्या को लेकर उनको फोन करो तो वे जरुर आते हैं और यथा संभव उस समस्या को सुलझाने का प्रयास करते हैं। वार्ड में पार्क का जीर्णाेद्धार करवाकर उन्होंने वार्ड के बच्चों के घूमने के लिए एक जगह की व्यवस्था की हैं। वार्ड के बड़े-बुजुर्ग भी कुछ देर जाकर इस पार्क में बैठते हैं। इन इलाकों के कुछ लोगों का कहना है कि वार्ड पार्षद ने वार्डवासियों को हर मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास किया है। पहले वार्ड में सफाई व्यवस्था बिल्कुल खराब थी लेकिन अब दोनों टाइम सफाई होती है और कचरा लेने के लिए टिपर आते हैं। पार्षद खुद वार्ड में हो रहे कार्यों की मोनेटरिंग करते है। पहले वार्ड के कुछ हिस्सों में रोडलाइट के अभाव में रातभर अंधेरा पसरा रहता था लेकिन अब ऐसा नहीं है।  वार्ड पार्षद का कहना है कि जहां तक संभव हुआ हैं मेरी नजर में आया है मैने वार्ड में विकास का हर कार्य करवाया है। वार्ड के हर नागरिक की समस्या के समाधान करने का प्रयास किया है। कोशिश ये रहती है कि मेरे वार्ड के किसी भी व्यक्ति को वार्ड की समस्या को लेकर निगम नहीं जाना पड़े। कुछ छोटी-छोटी समस्याएं हैं जिनका भी समाधान जल्द हो जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />वार्ड में सभी जगह रोड का काम हुआ है। यहां पर श्रीपुरा गर्ल्स स्कूल के सामने एक कचरा पांइट था जिसे हटवा दिया गया है। पाइप लाइन बिछवाई है। वार्ड की सफाई व्यवस्था पहले से काफी ठीक हो चुकी है। टिप्पन चौकी के पास पार्क का निर्माण करवाया है। जहां जरुरत थी वहां वाटर कूलर भी लगावाएं हैं। <br /><strong>-अजय कुमार सुमन, वार्ड पार्षद। </strong></p>
<p>वार्ड में विकास का हर कार्य हुआ है। वार्ड में 6 इंच की पाइप लाइन बिछाने के बाद जिन हिस्सों में पीने के पानी की समस्या थी वो खत्म हो चुकी है। नाली पटान का काम हुआ है। श्वानों की समस्या को लेकर निगम में फोन करते है तो वे पकड़कर ले जाते हैं। नियमित रूप से साफ-सफाई हो रही है। रोड लाइट लगभग हर जरुरत की जगह पर लग चुकी है। <br /><strong>-मनीष शर्मा, वार्डवासी। </strong></p>
<p>ने वार्ड के विकास में कोई कमी नहीं रखी हैं। अब छोटी-मोटी समस्याएं तो चलती रहती हैं लेकिन वार्ड में ऐसी कोई समस्या फिलहाल तो नहीं है जो लोगों की परेशानी का कारण हो। वार्ड के कुछ मंदिरों का जीर्णोद्धार भी पार्षद ने करवाया है। वार्ड में सीसी रोड और नाली पटान का काम लगभग हो चुके हैं। <br /><strong>-निम्बल भारद्वाज, वार्डवासी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Apr 2023 14:39:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वार्ड 13 : संकरे रोड हुए चौड़े, नालियों की भी मिटी समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ वार्डवासी बताते हैं कि पार्षद कांग्रेस के है तो काम हुए हैं लेकिन निर्माण में जो सामग्री काम में ली गई है वो गुणवत्तापूर्ण नहीं है। वार्ड की गलियों में अभी भी काम होने बाकी है। कई स्थानों पर आज भी कचरे के ढेÞर लगे नजर आ जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ward-13--narrow-road-widened--problem-of-drains-also-solved/article-43048"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/ward-13--sankare-road-hue-chaude,-naliyo-ki-bhi-miti-samasya..kota-news..17.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कुछ समय पहले तक जहां रोड संकरे थे, नालियां टूटी हुई थी और अधिकतर गलियों में रात को अंधेरा पसरा रहता था आज उन स्थानों के हालात बदल चुके हैं। ये कहना हैं नगर निगम उत्तर के वार्ड नम्बर 13 के लोगों का। यहां के लोग कहते हैं कि निगम में बोर्ड कांग्र्रेस का है तो पार्षद ने वार्ड में अच्छे काम करवाएं है। वार्ड की कुछ ऐसी समस्याओं का समाधान भी उन्होंने करवाया है जो सालों से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। वार्ड बड़ा होने के बाद भी हमारे यहां पर अव्यवस्थाएं ना के बराबर हैं। वहीं वार्ड के कुछ लोगों का ये भी कहना हैं कि वार्ड के कई हिस्सों में आज भी लोग पीने के पानी की समस्या को लेकर काफी परेशान हैं। पानी या तो आता ही नहीं है या इतने कम प्रेशर और इतने कम समय कि या पीने का पानी भर लो या खाना बनाने के लिए। नगर निगम उत्तर के इस वार्ड में मल्टी मेटल, नागपाल बस्ती, राजपूत कॉलोनी का सम्पूर्ण भाग, झीरी के हनुमान मंदिर का क्षेत्र, आजाद बस्ती, कंसुआ अर्फोडेबल, चन्द्रशेखर अर्फोडेबल तथा गत्ता फैक्ट्री के आमने-सामने का हिस्सा आदि क्षेत्र आदि हैं। इन इलाकों के लोग बताते हैं कि हमारे इलाके की एक बड़ी समस्या थी कि वार्ड के कई हिस्सों में सड़कें बहुत संकरी थी लेकिन पार्षद ने सड़कों को चौड़ा करवाकर इस परेशानी से निजात दिलवाई है। </p>
<p>इतना ही नहीं पार्षद प्रतिनिधि को कोई भी समस्या बताओ वो खुद मौके पर आकर उसे देखते है और जितना जल्दी हो सके उसको सुलझाने का प्रयास करते हैं।  लोग बताते हैं कि वार्ड पार्षद ने वार्ड में अच्छे काम करवाएं हैं। वार्डवासियों को हर मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास किया है। पहले वार्ड में सफाई व्यवस्था बिल्कुल खराब थी लेकिन अब दोनों टाइम सफाई होती है और कचरा लेने के लिए टिपर आते हैं। पार्षद प्रतिनिधि खुद वार्ड में हो रहे कार्यों की मोनेटरिंग करते है। जहां भी कमी नजर आती है तुरन्त टोक कर उसे ठीक तरीके से करवाते हैं। पहले वार्ड के कुछ हिस्सों में रोड लाइट के अभाव में रातभर अंधेरा पसरा रहता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। </p>
<p>वही कुछ वार्डवासी बताते हैं कि पार्षद कांग्रेस के है तो काम हुए हैं लेकिन निर्माण में जो सामग्री काम में ली गई है वो गुणवत्तापूर्ण नहीं है। वार्ड की गलियों में अभी भी काम होने बाकी है। कई स्थानों पर आज भी कचरे के ढेÞर लगे नजर आ जाएंगे। साफ-सफाई टाइम पर नहीं होती है। टिपर कभी आते हैं-कभी नहीं आते है। वार्ड में कई स्थानों पर नालियों की समस्या बनी हुई है। वार्ड के कुछ इलाकों में आवारा मवेशी दिनभर सड़कों पर बैठे नजर आते हैं। रातभर श्वान लड़ते रहते हैं। निगम का इस ओर ध्यान नहीं  हैं।  इन इलाकों के लोग बताते हैं कि वार्ड के कई स्थानों पर सीसी रोड बन चुके हैं। वार्ड में लगभग हर जरुरत की जगह रोडलाइट लगवा दी गई हैं। कई स्थानों पर पोल भी लगे हैं। कुछ समस्याएं ऐसी है जो अभी बनी हुई हैं लेकिन उनका भी जल्द ही समाधान होने की उम्मीद है। पार्षद प्रतिनिधि वार्ड में नियमित रूप से समय देते हैं। जो भी समस्या उनको बताते हैं वो उसके समाधान का पूरा प्रयास करते हैं। निगम की योजनाओं की जानकारी वार्डवासियों को बताते रहते है। पीने के पानी की समस्या काफी हद तक कम हो गई है। जल्द ही वार्ड में पार्क बनने की संभावना है। श्वानों की समस्या जरूर बनी हुई है लेकिन इसमें पार्षद भी क्या करें जब कोर्ट ने श्वानों के पकड़ने पर रोक लगा रखी है।  वहीं वार्ड पार्षद का कहना है कि जहां तक बन पा रहा है वार्ड में विकास का हर कार्य करवा रहा हंू। वार्ड के हर नागरिक की समस्या के समाधान का प्रयास करता हंू। कोशिश ये रहती है कि किसी भी व्यक्ति को समस्या को लेकर निगम नहीं जाना पड़े। जिस उम्मीद के साथ लोगों ने मुझे पार्षद बनाया है उन उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करती हूं। कुछ छोटी-छोटी समस्याएं हैं जिनका भी समाधान जल्द हो जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है...</strong><br />कंसुआ में सीसी रोड बनवाएं हैं। जेके के पीछे वाले रोड की चौड़ाई बहुत थी इसके चौड़ा करने की मांग काफी समय से थी और ये डामर का था लेकिन अब इसे चौड़ा करने के साथ सीसी भी करवाया गया है। वार्ड में आरसीसी के नालों का निर्माण करवाया है। करीब 60 से अधिक रोडलाइट लगवाई है। पीने के पानी की कुछ समस्या है लेकिन वो निगम की नहीं जलदाय विभाग है। जिसके लिए कई बार कह चुकी हंू। <br /><strong>- मंजू अग्रवाल, वार्ड पार्षद। </strong></p>
<p>सीसी रोड बने हैं। नालों का निर्माण हुआ है। वार्ड में अभी भी कार्य चल रहे हैं। जहां-जहां आवश्यकता थी वहां रोडलाइट लगाई गई हैं। पाइपलाइन के कारण कुछ स्थानों पर पानी की समस्या बनी हुई है। साफ-सफाई टाइम पर और नियमित रूप से होती है। फिलहाल वार्ड में कोई बड़ी समस्या नहीं है। <br /><strong>- गोविन्दा सुमन, वार्डवासी।</strong> </p>
<p>वार्ड में बहुत सारे कार्य हुए हैं। अभी भी चल रहे हैं। नालों को आरसीसी का करवाकर अच्छा कार्य किया है। नालियों के हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं। वार्ड के लगभग हर हिस्से में रोडलाइट लग चुकी हैं। सफाई व्यवस्था ठीक हैं। पार्षद प्रतिनिधि को समस्या बताते ही उसके समाधान का प्रयास करते है। <br /><strong>- रामबाबू गुर्जर, वार्डवासी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Apr 2023 15:34:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 27 : चमचमाती सड़कें और ढकी हुई नालियां, हुए कई विकास कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड के कुछ हिस्सें ऐसे भी हैं जहा नियमित सफाई नहीं होने के कारण कई बार सड़क किनारों पर कचरा फैला रहता है। टिपर कभी आते हैं, कभी नहीं। आवारा मवेशियों और श्वानों के कारण बहुत परेशानी है। रातभर श्वान लड़ते रहते हैं। वार्ड के कई स्थानों पर दुकानदारों ने दुकानों आगे अतिक्रमण किया हुआ है। निगम का इस ओर ध्यान नहीं हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-27--gleaming-roads-and-covered-drains--many-development-works-done/article-41818"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/kota-utter-ward-27--chamchamati-sadke-aur-dhaki-hui-naaliya-,-hue-kai-vikaas-karya-..kota-news..5.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सालों से हमारे वार्ड में आधुनिक शौचालय का आवश्यकता थी। जिसके कारण लोगों को खासा परेशान होना पड़ता था लेकिन वार्ड पार्षद ने हमारी इस समस्या का समाधान कर दिया है। यह शौचालय लगभग बनकर तैयार हो चुका है। वैसे भी हमारे वार्ड में समस्याएं ना के बराबर थी जो थी जिनका समाधान लगभग हो चुका है। सही मायनों में हमारे वार्ड को अगर शहर का सबसे विकसित वार्ड कहा जाए तो कोई गलती नहीं होगी। पूर्व में भी कांग्रेस के कई पार्षदों ने इस वार्ड का प्रतिनिधित्व किया है लेकिन वर्तमान पार्षद ने उस सबसे हटकर कार्य करवाएं हैं। यह कहना है कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड नम्बर 27 के लोगों का। वहीं कुछ लोग ये भी कहते हैं कि वार्ड में काम तो हुए हैं लेकिन आज भी आवारा मवेशी और श्वान वार्ड की ऐसी समस्याएं है ंजिनका समाधान तत्काल करवाया जाना चाहिए। नगर निगम उत्तर के इस वार्ड में माडल टाउन, आदर्श कॉलोनी, तिलक कॉलोनी, विवेकानन्द कॉलोनी  आदि इलाके आते हैं। इन इलाकों के लोगों का कहना हैं कि वार्ड में कोई समस्या नहीं है। वार्ड में नालियों का निर्माण हो चुका है। नाली पटान का काम हो चुका है। सबसे बढ़िया काम पार्षद ने वार्ड के कचरा पांइट की दशा सुधरवाकर किया है। वरना तो पहले सड़कों पर कचरा फैला रहता था। इसे अलावा खेडली फाटक क्षेत्र में मेनरोड का काम हुआ है। कुछ समय पहले तक इस सड़क पर इतने गड्ढेंÞ थे कि वाहन चलाना तो दूर की बात पैदल चलने तक में पैर मुड़ने का डर बना रहता था। इसी इलाके में मुक्तिधाम का जीर्णोद्धार करवाया गया। पार्षद ने वार्ड में अच्छे काम करवाएं हैं। वार्डवासियों को हर मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास किया है। वार्ड में सफाई व्यवस्था पहले से काफी बेहतर हुई है। दोनों टाइम सफाई होती है और कचरा लेने के लिए टिपर आते हैं।  वहीं वार्ड के कुछ लोगों का कहना हैं कि निगम में बोर्ड कांग्रेस का है और पार्षद अनुभवी है तो काम हुए हैं लेकिन अभी भी वार्ड में कुछ कार्य होने आवश्यक है। </p>
<p>वार्ड के कुछ हिस्सें ऐसे भी हैं जहा नियमित सफाई नहीं होने के कारण कई बार सड़क किनारों पर कचरा फैला रहता है। टिपर कभी आते हैं, कभी नहीं। आवारा मवेशियों और श्वानों के कारण बहुत परेशानी है। रातभर श्वान लड़ते रहते हैं। वार्ड के कई स्थानों पर दुकानदारों ने दुकानों आगे अतिक्रमण किया हुआ है। निगम का इस ओर ध्यान नहीं हैं। केवल वहीं पर काम हो रहे हैं जहां या तो पार्टी या पार्षद के समर्थक रहते हैं। वार्डवासी बताते हैं कि सबसे अच्छी बात ये है कि पार्षद वार्ड के हर कार्य की खुद मोनेटरिंग करते हैं। खड़ा रहकर कार्य करवाते हैं। जिससे ठेकेदार निर्माण सामग्री में कोई गड़बड़ी ना करे। लोग बताते हैं कि पार्षद को कोई भी समस्या बताओ वो खुद मौके पर आकर उसे देखते है और जितना जल्दी हो सके उसको सुलझाने का प्रयास करते हैं। वार्ड में सीसी रोड बन चुके हैं। वार्ड में लगभग हर जरुरत की जगह रोडलाइट लगवा दी गई हैं। कई स्थानों पर पोल भी लगे हैं। कुछ समस्याएं ऐसी है जो अभी बनी हुई हैं लेकिन उनका भी जल्द ही समाधान होने की उम्मीद है। वहीं वार्ड पार्षद बताते है कि मेरा वार्ड तो वैसे ही विकसित वार्ड है। जो थोड़े बहुत काम बाकी थे जैसे नाली पटान और कुछ स्थानों पर सीसी रोड वो बन चुके हैं। वार्ड में विकास का हर कार्य करवा रहा हंू। वार्ड के हर नागरिक की समस्या के समाधान का प्रयास करता हंू। कोशिश ये रहती है कि किसी भी व्यक्ति को समस्या को लेकर निगम नहीं जाना पड़े। अगर जरुरत पड़ती भी है तो मैं खुद लोगों के साथ जाकर निगम के संबंधित अधिकारी को बताता हंू। इस बात का पूरा प्रयास करता हंू कि लोगो को हर वो सुविधा मिले जिसके वो हकदार है। </p>
<p><strong>कोई समस्या नहीं है</strong><br />वार्ड में कोई समस्या नहीं है। वार्ड कुछ हिस्सों में रोड और नालियों का काम था जो करीब-करीब हो चुका है। हर उस स्थान पर रोड लाइट लगाई जा चुकी हैं जहां जरुरत थी। पार्षद वार्ड में पूरा समय देते है। व्यवहार और कार्यशैली बहुत अच्छी है। जहां तक उनकी सीमा होती है वो हर कार्य करवाते है। <br /><strong>-सतीश शर्मा, वार्डवासी।</strong></p>
<p><strong>पार्कों का जीर्णोद्धार किया</strong><br />वार्ड में सभी कार्य हो चुके हैं। पार्कों का जीर्णाद्धार भी हुआ है। लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए ओपन जिम की भी लगवाया गया है। सफाई व्यवस्था बढ़िया है। पार्षद वार्ड के हर नागरिक की समस्या का समाधान करने का प्रयास करते है। वार्ड में जानवर दूसरे वार्डों की अपेक्षा कम है लेकिन श्वानों का आतंक है।<br /><strong>- दिनेश सोनी, वार्डवासी। </strong></p>
<p><strong>शीघ्र करता हूं समाधान</strong><br />सीसी रोड से लेकर नाली पटान तक के कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। कोई समस्या मुझे नजर आती है या कोई आकर कहता है तो शीघ्रता से उसके समाधान का प्रयास करता हंू। मैंने किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया है। अब श्वानों की समस्या से तो पूरा शहर परेशान है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद ही इन्हें कहीं छोड़ा जा सकता है। <br /><strong>- नंदकिशोर शर्मा, वार्ड पार्र्षद। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Apr 2023 12:57:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उत्तर निगम के वार्ड 22 में काम तो हुए लेकिन अभी भी समस्याएं बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ वार्डवासी कहते हैं कि वार्ड के कुछ हिस्सों को देखने के बाद लगता ही नहीं कि हम शहर में रह रहे हैं। वार्ड के कई हिस्सों में श्वानों का आतंक है। लोगों ने पशुओं को घर पर बांधने की बजाय छोड़े हुए हैं। कई मौकों पर ये आवारा मवेशी और श्वान दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/work-done-in-ward-22-of-north-corporation-but-problems-still-persist/article-41681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/utter-nigam-k-ward22-mei-kaam-to-hue-lekin-abhi-bhi-samasyaei-barkarrar..kota-news..4.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कुछ समय पहले तक जहां कई सड़कें खुदी थी, सड़कों किनारे कचरे के ढ़ेर नजर आते थे आज उन्ही स्थानों पर आज साफ-सुथरी सड़कें दिख रही है। यह कहना है कोटा नगर निगम उत्तर के वार्ड नम्बर 22 के कुछ लोगों का। वार्ड के लोग बताते हैं कि पहले वार्ड में कई प्रकार की अव्यवस्थाएं थी, समस्याएं बनी हुई थी लेकिन वर्तमान वार्ड पार्षद ने उनमें से कई समस्याओं का समाधान करवा दिया है। वार्ड के कुछ लोग ये भी कहते हैं कि वार्ड की कुछ गलियों में रोड के हालात आज भी बहुत बुरे हैं। उन सड़कों पर वाहन निकालने का मतलब वाहनों से दुश्मनी निकालना हैं। लोगों का कहना हैं कि रोड ही नहीं इसके अलावा भी वार्ड में अभी कार्यों की दरकार हैं। नगर निगम उत्तर के इस वार्ड में पुराना भदाना, भदाना की टापरियां, आरके कॉलोनी, शहीद भगत सिंह कच्ची बस्ती, सरस्वती कॉलोनी का आशिंक भाग आदि इलाके आते हैं। इन स्थानों के लोग कहते हैं कि वार्ड में विकास कार्य खूब हुए हैं। पार्षद को कोई भी समस्या बताओं वे उसका समाधान करवाने का पूरा प्रयास करते हैं। वार्ड के कई हिस्सों में सीसी सड़कें बन चुकी है। जहां पहले सड़कों पर गड्ढेंÞ नजर आते थे आज वहां सपाट रोड नजर आ रहे हैं। साफ-सफाई टाइम पर हो रही है। टिपर समय पर आते हैं। रोडलाइट कई स्थानों पर नई भी लगवाई गई हैं और जो क्षतिग्रस्त थी उनको ठीक भी करवाया गया है। पीने के पानी का प्रेशर ठीक है। पार्षद वार्ड में नियमित समय देते हैं। लोगों की समस्याओं को मौके पर जाकर देखते हैं।  वहीं कुछ वार्डवासी कहते हैं कि वार्ड के कुछ हिस्सों को देखने के बाद लगता ही नहीं कि हम शहर में रह रहे हैं। वार्ड के कई हिस्सों में श्वानों का आतंक है। लोगों ने पशुओं को घर पर बांधने की बजाय छोड़े हुए हैं। कई मौकों पर ये आवारा मवेशी और श्वान दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं।  </p>
<p>वार्ड के कुछ हिस्सों को छोड़कर लगभग हर हिस्से में कई काम बाकी हंै। लोग अपनी समस्याओं का समाधान अपने ही हिसाब से करवाते हैं। विशेषतौर से कोई भाजपा समर्थकों और कार्यकर्ताओं के काम तो घूमते-घूमते भी नहीं होते हैं। वार्ड में विकास का ऐसा कोई बड़ा काम नहीं हुआ है जिसे निगम की उपलब्धि बताया जा सकें। वार्डवासियों का कहना हैं कि पार्षद ने बहुत अच्छे काम करवाएं है, वार्ड की बरसों से चली आ रही समस्याओं को खत्म करवाया है। पीने के पानी की कोई समस्या नहीं है। अन्य वार्ड की अपेक्षा हमारे यहां सड़कों पर मवेशी कम ही नजर आएंगे। नाली हो या सीसी रोड का निर्माण सभी में गुणवत्तापूर्ण निर्माण सामग्री का उपयोग हुआ है। पार्षद ने कभी किसी के काम के लिए मना नहीं किया है। किसी दल का समर्थक हो सबके काम हुए हैं। वार्ड में जरूरत के लगभग सभी काम हो चुके हैं। टूटी रोडलाइट को हटाकर नई लगवाई गई है। जहां रोडलाइट के अभाव में अंधेरा रहता था आज वहां रातभर उजाला रहता है, चोरियां होने का खतरा कम हो गया है। वार्ड पार्षद का कहना है कि मैने वार्ड में लगभग हर विकास कार्य करवाया है। सबकी समस्याओं को ध्यान से सुनता हूंू और यथासंभव उनको सुलझाने का प्रयास करता हंू। कभी किसी के काम के लिए मना नहीं किया है। बिना भेदभाव के लोगों के कार्य करवाता हंू। अब वार्ड में हर इंसान मेरे कार्यों से सन्तुष्ट हो ये संभव भी नहीं है। वार्ड में कई काम हो चुके हैं। जो थोड़े बहुत बचे हैं वो भी करवाने का पूरा प्रयास है। मंत्री धारीवाल को वार्ड में पार्क का अभाव बताया जिसके बाद वार्ड की ही आरके कॉलोनी में यूआईटी की जमीन पर पार्क बनने की संभावना है। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं...</strong><br />वार्ड में विकास के कार्य लगभग-लगभग सभी करवाएं है। आवारा जानवरों और श्वानों की समस्या को भी सुलझाने का प्रयास किया है। वार्ड में निगम और यूआईटी की ओर से कार्य करवाएं हैं। पानी की टंकी का निर्माण हो चुका है। सरस्वती कॉलोनी सहित वार्ड के लगभग हर कॉलोनी में रोड और नाली का काम हो चुका है। लेबर पर्याप्त होने के कारण वार्ड में नियमित रूप से साफ-सफाई हो रही है। रोड लाइट की कोई समस्या नहीं है।<br /><strong>- गुंजन कुमार, वार्ड पार्षद। </strong></p>
<p>वार्ड के लगभग हर हिस्से में सीसी रोड और नालियों के काम हो चुके हैं। पानी के प्रेशर की कोई दिक्कत नहीं है। सबसे बढ़िया काम ओवर ब्रिज से भदाना तक मेनरोड बनवाकर किया है। पार्षद को कोई भी समस्या बताओं वो सुलझाने का प्रयास करते हैं। वार्ड में टंकी बन चुकी है जिससे पीने की पानी की समस्या का समाधान हो जाएगा। <br /><strong>-मुकेश खंगार, वार्डवासी।</strong></p>
<p>वार्ड में कोई ऐसी समस्या अभी नहीं है कि लोगों को परेशान होना पड़े। रोड और नालियों के काम हो चुके हैं। साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक है। जहां जरुरत थी वहां रोड लाइट लग चुकी हैं। अब श्वान तो पूरे शहर में ही हैं।<br /><strong>-जहीर खान, वार्डवासी।  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Apr 2023 12:26:22 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तर के वार्ड 28 में चहुंओर अव्यवस्थाएं : सड़कें बनी तो सीवरेज कार्यों ने बिगाड़ दी सूरत</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ इलाकों में तो पीने के पानी तक के लिए लोग परेशान हैं। जलदाय विभाग कार्यालय पर जाकर बोला, लिखकर दिया तो भी तीन महीनों में पीने के पानी की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। पूरा वार्ड आवारा मवेशियों से भरा पड़ा है। आवारा सांड दिनभर सड़कों पर घूमते रहते हैं और कई बार वाहन चालक इनकी चपेट में आकर चोटिल हो चुके हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/chaos-all-around-in-ward-28-of-north--sewerage-works-spoiled-the-appearance-when-roads-were-built/article-41566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/utter-k-ward-28-mei-chahuor-awaywasthai--sadke-banito-sewerage-karyo-nei-igad-di-surat..kota-news-3.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बीजेपी का पार्षद होने के कारण हमारे वार्ड के साथ निगम की ओर से भेदभाव किया जाता है। फिर भी पार्षद ने जहां तक हो सका हैं, वार्ड में विकास कार्य करवाएं ही हैं। हालात ये हैं कि रोडलाइट तक के लिए हमें निगम के चक्कर लगाने पड़े हैं लेकिन उसके बाद भी रोडलाइट नहीं लगी। हां, कांग्रेस के कार्यकर्ता जरुर खुद का काम एक बार में करवा लाते हैं। यह कहना हैं कोटा नगर निगम उत्तर के वार्ड नम्बर 28 के लोगों का। वहीं खुद पार्षद ये कहती है कि भले ही मैं भाजपा की हंू लेकिन वार्ड के नागरिक तो इसी शहर के हैं इनको कम से कम मूलभूत सुविधाएं तो मिलनी ही चाहिए। उत्तर निगम के इस वार्ड में आदर्श नगर, सुमन विहार, बालाजी टाउन प्रथम व द्वितीय, कैलाशपुरी, पार्श्वनाथ एनक्लेव, गिरधर एनक्लेव, पार्वतीपुरम तथा बालिता गांव आदि इलाकें आते हैं और यहां करीब 7 हजार से अधिक मतदाता रहते हैं। इन इलाकों के लोग बताते हैं कि विकास कार्यों को लेकर हमारे वार्ड या क्षेत्र के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता हैं जैसे हम यहां के नहीं किसी अन्य शहर के लोग हैं। लोग बताते हैं कि वार्ड में सड़कें तो बनी लेकिन उनके किनारों के काम आज तक नहीं हुए है। हर नाली को गलत तरीके से बनाया गया है। नालों के हालात तो नालियों से भी ज्यादा बुरे हैं। उनका ढलान सही नहीं बनाने के कारण हमेशा भरे रहते हैं। नालियों में सीमेंट का इस्तेमाल ना के बराबर किया गया हैं। कच्ची नालियां बनाई गई हैं। </p>
<p>वार्डवासी बताते हैं कि पार्षद वार्ड में काम करवाने के हर संभव प्रयास करती है लेकिन जब निगम में उनकी ही कोई नहीं सुनता तो वे क्या करें। वार्ड के क्षेत्रफल के हिसाब से निगम की ओर से लेबर ही उपलब्ध नहीं करवाई गई है। यहीं कारण है कि पूरे वार्ड की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। पार्षद को जाकर कहते हैं तो वे कहती है कि निगम की ओर से कोई सहयोग ही नहीं किया जा रहा है। यहां के लोगों का कहना हैं कि कुछ इलाकों में तो पीने के पानी तक के लिए लोग परेशान हैं। जलदाय विभाग कार्यालय पर जाकर बोला, लिखकर दिया तो भी तीन महीनों में पीने के पानी की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। पूरा वार्ड आवारा मवेशियों से भरा पड़ा है। आवारा सांड दिनभर सड़कों पर घूमते रहते हैं और कई बार वाहन चालक इनकी चपेट में आकर चोटिल हो चुके हैं। </p>
<p>वार्ड के कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि अगर पैसे लगते हो तो हम देने के लिए तैयार हैं लेकिन इन श्वानों को यहां से पकड़कर ले जाओ। इनके कारण हम बच्चों को बाहर खेलने तक के लिए नहीं भेज सकते हैं। क्षेत्र के खाली पड़े प्लॉटों को लोगों ने कचरा पाइंट बना दिया है। जिससे बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। ना निगम वाले सुनते हैं और ना यूआईटी वाले। हम कहे भी तो किसे। वार्ड में बनी परेशानियों को लेकर जिला प्रशासन तक को शिकायती पत्र लिख चुके हैं लेकिन कही कोई सुनवाई आज तक तो नहीं हुई है। पार्षद प्रतिनिधि वार्ड में अपना पूरा समय देते हैं, यहां की समस्याओं को लेकर हमारे साथ निगम भी जाते है लेकिन कोई मतलब नहीं निकला। ना जाने यहां के जनप्रतिनिधि किस आधार पर खुद को स्मार्ट सिटी का बताते हैं। हम तो यहां बिजली-पानी तक के लिए परेशान हैं। वहीं वार्ड पार्षद का कहना हैं कि वार्ड में काम जरुर हुए हैं लेकिन लोग सन्तुष्ट नहीं है। वार्ड में नालियां भी बनवाई हैं और सीसी रोड भी बनवाएं है। मवेशियों के लिए मैं खुद फोन करते-करते थक गई हंू। मेरे से जितना हो सकता है मैं काम करवा रही हंू। कई कार्यों को अधूरा छोड़ा हुआ है। कई बार लिखित और मौखिक रूप से कह चुकी हंू लेकिन सुनवाई ही नहीं होती है। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं...</strong><br />पूरा वार्ड कचरा पात्र बना हुआ है। कोई सफाई व्यवस्था नहीं है। जब पार्षद को सफाईकर्मी ही पर्याप्त नहीं दिए हैं तो सफाई कैसे होगी। वार्ड के कुछ हिस्सों में रोड लाइट के अभाव में रातभर अंधेरा फैला रहता है। पानी की समस्या है। <br /><strong>- प्रगेश ठाकुर, वार्डवासी। </strong></p>
<p>नालियां जाम हैं। ठेकेदार ने वार्ड में जो भी काम किए हैं वो सभी कार्य बेढंग से हुए है। रोड साइडों का काम बकाया है। श्वानों से बहुत परेशानी है। नाले-नालियों की ढलान को उल्टा-सीधा बना दिया गया। <br /><strong>- विपिन भास्कर, वार्डवासी। </strong></p>
<p><strong>सीवरेज के काम में फिनिशिंग नहीं</strong><br />वार्ड के क्षेत्रफल और आबादी के हिसाब से निगम की ओर से लेबर उपलब्ध नहीं करवाए जाने के कारण वार्ड की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। सीवरेज के काम में कोई फिनिशिंग नहीं है। फिलहाल वार्ड में एक स्थान पर रोड का काम चल रहा है। <br /><strong>- पूजा सुमन, वार्ड पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Apr 2023 14:52:51 +0530</pubDate>
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                <title>शहर प्रति दिन पैदा कर रहा 500 टन कचरा</title>
                                    <description><![CDATA[दो नगर निगम बनने के बाद से कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण दोनों निगमों में सफाई का अलग-अलग बजट है। शहर में सफाई पर हर साल करीब 220 करोड़ रुपए खर्चा किया जा रहा है। शहर में जितनी सफाई दिखनी चाहिए वह नजर नहीं आ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/city-generating-500-tons-of-garbage-per-day/article-41323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/firee11-copy4.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। करीब 15 लाख की आबादी वाले कोटा शहर में प्रति दिन 500 टन कचरा पैदा हो रहा है। जिसके निस्तारण पर रोजाना 70 लाख रुपए से अधिक का खर्चा किया जा रहा है। उसके बाद भी शहर में जितनी सफाई दिखनी चाहिए वह नजर नहीं आ रही है। इतना अधिक खर्चा करने के बाद भी सफाई के मामले में कोटा इंदौर की बराबरी नहीं कर पा रहा है। कोटा में पहले जहां एक ही नगर निगम और वार्डों की संख्या 65 थी। नए परिसीमन के बाद  दो नगर निगम उत्तर व दक्षिण बनने के साथ ही वार्डों की संख्या करीब ढाई गुना अधिक 150 कर दी गई है। कोटा उत्तर में 70 और दक्षिण में 80 वार्ड बनाए गए हैं। दो नगर निगम बनने के बाद से ही शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के दावे तो किए जा रहे थे लेकिन वह अभी तक हकीकत में नहीं बदल सका है। नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा शहर से रोजाना करीब 450 से 500 टन कचरा निकल रहा है। यह कचरा रोजाना नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पर पहुंचाया जा रहा है। इस पूरे कचरे को घरों से लेकर ट्रेचिंग ग्राउंड तक पहुंचाने में हर साल करीब 220 करोड़ रुपए यानि रोजाना करीब 70 लाख रुपए का खर्चा नगर निगम द्वारा किया जा रहा है।  इतना अधिक खर्चा होने के बाद भी अभी तक गीला और सूखा कचरा अलग-अलग नहीं किया जा रहा। </p>
<p><strong>सफाई पर सालाना 220 करोड़ रुपए खर्च</strong><br />दो नगर निगम बनने के बाद से कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण दोनों निगमों में सफाई का अलग-अलग बजट है। शहर में सफाई पर हर साल करीब 220 करोड़ रुपए खर्चा किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में कोटा उत्तर का सफाई का कुल बजट 114 करोड़ रुपए और कोटा दक्षिण में 105 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था। हालांकि दोनों निगमों में पूरे साल में खर्चा करीब 154 करोड़ रुपए ही हो सका। जिसमें से कोटा उत्तर में 79 करोड़ और कोटा दक्षिण में 75 करोड़ रुपए शामिल हैं। वहीं आगामी वित्त वर्ष 2023-24 के लिए कोटा उत्तर में सफाई का बजट 96 करोड़ रुपए और कोटा दक्षिण में 127 करोड़ रुपए रखा गया है। </p>
<p><strong>यह है सफाई की व्यवस्था</strong><br />शहर के हर घर में जो कचरा निकल रहा है। उसे घर-घर कचरा संग्रहण के माध्यम से टिपरों से एकत्र किया जा रहा है। नगर निगम कोटा उत्तर के 70 वार्डों में से हर वार्ड में 3-3 टिपर यानि 210 टिपर लगे हुए हैं। जबकि कोटा दक्षिण के 80 वार्डों में 2-2 टिपर यानि 160 टिपरों से कचरा एकत्र किया जा रहा है। उस कचरे को दोनों निगम क्षेत्रों के कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर पहुंचाया जा रहा है। साथ ही शहर के कचरा पॉइंट पर जो कचरा डाला जा रहा है उसे ट्रेक्ट्रर ट्रॉलियों के जरयिे ट्रांसफर स्टेशन पर पहुंचाया जा रहा है। कोटा दक्षिण में करीब 50 ट्रैक्टर ट्रॉलिा इस काम में लगाई गई है। नगर निगम द्वारा इस कार्य का ठेका दिया हुआ है। वहीं ट्रांसफर स्टेशनों से यह कचरा डम्परों व कंटेनरों के माध्यम से नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पर पहुचाया जा रहा है। नगर निगम कोटा उत्तर में फिलहाल अस्थायी कचरा ट्रांसफर स्टेशनों से डम्परों से और कोटा दक्षिण में आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशनों से कंटेनर व कैप्सूल से कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। </p>
<p><strong>करीब 27 सौ से अधिक सफाई कर्मचारी</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में करीब  27 सौ से अधिक स्थायी सफाई कर्मचारी हैं। जिनमें से कोटा उत्तर में करीब 14 सौ व कोटा दक्षिण में 1250 से अधिक कर्मचारी शामिल हैं। इनके अलावा अस्थायी श्रमिकों से भी वार्डों में सफाई का कार्य कराया जा रहा है।  नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के साथ ही रोड स्वीपर मशीनों से भी सफाई करवाई जा रही है। कोटा उत्तर व दक्षिण में दो-दो रोड स्वीपर मशीनें हैं। हालांकि इनका उपयोग कभी कभार ही किया जा रहा है।  </p>
<p><strong>पुराने कचरे का निस्तारण</strong><br />नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में कई सालों से कचरे के ढेर लगे हुए हैं। जिससे वहां कचरे का पहाड़ लग चुका है। उस पुराने कचरे के निस्तारण के लिए करीब 20 करोड़ रुपए का बजट पारित किया गया था। जिसमें से 15.90 करोड़ रुपए का कार्यादेश जारी किया गया है। जिससे पहले चरण में 5 लाख क्यूबिक घन मीटर कचरे का निस्तारण किया जाएगा। यह काम एक साल में होना है। इस कचरे को छटनी कर साफ किया जा रहा है। </p>
<p><strong>अगले माह आएगी सर्वेक्षण टीम</strong><br />स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर साल होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 के भौतिक सत्यापन के लिए केन्द्रीय टीम का अप्रैेल के मध्य तक कोटा आने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसे देखते हुए  दोनों निगमों ने सफाई की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। हालत यह है कि वर्ष 2016 से हो रहे सर्वेक्षण में कोटा अभी तक पहले 100 स्थान तक भी नहीं पहुंच सका है। जबकि मध्य प्रदेश का  इंदौर शहर हर साल पहले स्थान पर आ रहा है। </p>
<p><strong>कर रहे हैं हर संभव प्रयास </strong><br />नगर निगम का मुख्य काम ही सफाई का है। निगम अपने स्तर पर हर संभव प्रयास कर रहा है। नाला सफाई से लेकर मेन रोड व वार्डों में सफाई नियमित करवाई जा रही है। टिपरों से लेकर ट्रेक्टर ट्रॉलियों से कचरा भी उठवाया जा रहा है। निगम के साथ ही आमजन को भी सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए व्याोपार संघों के सहयोग से जागकता अभियान चलाया जा रहा है। जिसे पूरे शहर में किया जाएगा। स्वच्छता सर्वेक्षण से संबंधित काम भी किए जा रहे हैं। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>संवेदकों को कर रखा है पाबंद</strong><br />शहर को साफ रखने के लिए पार्षदों से लेकर सफाई निरीक्षक और अधिकारी तक सभी काम कर रहे हैं। घरों से कचरा लेने के लिए नियमित टिपर वार्डों में जा रहे हैं। संवेदकों को भी समय पर कचरा उठाने के लिए पाबंद किया हुआ है। नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में पुराने कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। करीब 5लाख क्विकि घन मीटर कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण से संबंधित काम भी किए जा रहे हैं। <br /><strong>-मंजू मेहरा, महापौर नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Mar 2023 15:16:30 +0530</pubDate>
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                <title>वार्ड 32 : वार्डवासी बोले विकास का दावा करने वाले यहां की गलियों के हालत देखें</title>
                                    <description><![CDATA[वार्डवासियों का कहना हैं कि कोटा तो बसता ही गलियों में हैं और कोई हमारी गलियों को आकर देखे कि यहां क्या हालात है। लोग भले ही कोटा में विकास के दावें करते हो लेकिन हम तो सफाई तक के लिए तरसते हैं। कोटा में सिर्फ चौराहों पर विकास हुआ है, बाकी तो हालात कोई ज्यादा नहीं सुधरे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ward-32--ward-residents-said--those-who-claim-development--see-the-condition-of-the-streets-here/article-40946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/ward-32-wardwasi-bole-vikas-ka-dawa-karne-wale-yaha-ki-galiyo-k-haalat-dejhe...kota-news-27.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा उत्तर के वार्ड 32 में आधे अधूरे विकास कार्यो से वार्डवासियों को काफी आक्रोश है। वार्ड के लोग ही नहीं स्वयं वार्ड पार्षद भी वार्ड में हुए कार्यों से बिल्कुल भी सन्तुष्ट नहीं है।  वार्ड में अव्यवस्थाओं पोल वहां के आधे अधुरे विकास कार्य खोल रहे है। दरअसल कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड नम्बर 32 की प्रतिनिधित्व भाजपा की पूजा केवट करती हैं और वो खुद बताती है कि मेरे वार्ड में तो काम ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं की देखरेख में हो रहे हैं। मुझे तो लगता ही नहीं कि मैं वार्ड पार्षद हंू। लोग बताते हैं कि वार्ड के अधिकांश हिस्सों के लोगों को मूलभूत आवश्यकताओं तक के लिए मुंह देखना पड़ता है, दूसरी अन्य सुविधाएं तो दूर की बात है। उत्तर निगम के इस वार्ड में सरकारी स्कूल, धुआखाला, देवनारायण सामुदायिक भवन, हवाई का चौक, कालीटेक का हनुमान मंदिर, सुलभ शौचालय, मस्जिद गली, नागर फ्लोर मिल, नारायण भवन तथा जैन मंदिर आदि इलाकें आते हैं। इन इलाकों में रहने वाले कुछ लोगों का कहना हैं कि वार्ड में कुछ स्थानों पर रोड बने हैं, नालियां भी बनी हैं लेकिन सब काम बेतरबीत तरीके और घटिया क्वालिटी का हुआ है। परन्तु इसमें वार्ड पार्षद की कोई गलती नहीं है क्योंकि कोई भी काम उनकी देखरेख में हो ही नहीं रहा है। पार्षद के वश में तो वार्ड के लिए पर्याप्त लेबर उपलब्ध कर पाना तक नहीं है। अगर उनको जाकर हम ये कहते हैं कि हमारी गली में सफाई नहीं हो रही है तो जवाब मिलता है कि लेबर ही नहीं हैं। तो सफाई व्यवस्था कैसे दुरुस्त होगी। वहीं वार्ड के कुछ लोग ये भी बताते हैं कि सीसी रोड तो बने लेकिन उन स्थानों पर जहां पार्षद नहीं दूसरे लोग चाहते हैं। अगर दूसरे स्थानों पर सड़कें बनी भी हैं तो किनारों को छोड़ दिया गया हैं। सड़कों के साथ जहां नालियां बननी थी वहां नहीं बनी परिणाम ये हैं कि पानी सड़कों पर बहता रहता है और गली-मौहल्ले में गंदगी बनी रहती है। वार्ड के कुछ हिस्सों में रोडलाइट नहीं होने के कारण रातभर अंधेरा पसरा रहता है। चोरी होने की आशंका बनी रहती है। इतना ही नहीं रात को आवारा मवेशी और श्वान सड़कों पर बैठे रहते हैं तो वाहन चालकों को उनसे टकराने का डर बना रहता है। इन श्वानों और मवेशियों के कारण महिलाएं और बच्चे घरों से निकलने में भी डरते हैं। </p>
<p>वार्डवासियों का कहना हैं कि कोटा तो बसता ही गलियों में हैं और कोई हमारी गलियों को आकर देखे कि यहां क्या हालात है। लोग भले ही कोटा में विकास के दावें करते हो लेकिन हम तो सफाई तक के लिए तरसते हैं। कोटा में सिर्फ चौराहों पर विकास हुआ है, बाकी तो हालात कोई ज्यादा नहीं सुधरे हैं। जब यहां के जनप्रतिनिधि खुद शहर को दो हिस्सों में बांट चुके हैं। वार्ड में सीवरेज के काम हुए तो आधे-अधूरे, सीवरेज के चैंबर सड़कों से ऊपर बना दिए जिससे यहां के कुछ स्थान एक्सीडेंट जोन बन गए हैं। कई बार पानी की भी किल्लत रहती है। सड़कों पर दिनभर आवारा मवेशी और श्वानों का जमावड़ा लगा रहता हैं। कचरा फैला रहता है। अब पार्षद तो अपनी ओर से हर संभव प्रयास करती है कि वार्ड में काम हो लेकिन जब उनकी चलती ही नहीं तो वे भी क्या करे।  वार्ड पार्षद का कहना है कि वार्ड में छोटे-मोटे हुए हैं लेकिन मुझे नहीं पता कि कहा-कहा कौनसे काम हुए हैं। भाजपा का होने के कारण मेरे वार्ड के साथ भेदभाव किया गया है। लेकिन भेदभाव करने वालों को ये तो सोचना चाहिए कि जनता तो कोटा की हैं किसी अन्य शहर की नहीं। निगम की ओर से लोगों को कम से कम वे सुविधाएं तो उपलब्ध करवानी चाहिए जो जरुरत की है। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं...</strong><br />वार्ड में निम्न स्तर के काम हुए हैं। सीवरेज के काम हुए लेकिन बेकार तरीके से। सारे काम कांग्रेस कार्यकर्ताओं की देखरेख में हो रहे हैं। नालों का ढलान सही नहीं है। सीसी रोड के साथ नालियां बनवानी थी लेकिन नहीं बनवाई। कोई विकास नहीं हुआ है। रोड लाइट कम है। मंत्री के दौरे के बाद वार्ड की सफाई व्यवस्था कुछ ठीक हुई है लेकिन अभी भी सुधार करने की जरुरत है। <br /><strong>-पूजा केवट, वार्ड पार्षद। </strong></p>
<p>हमारे वार्ड में कोई विकास कार्य नहीं हुए हैं। हमारी गली में रोड नहीं ना है। क्योंकि ये बीजेपी वालों की ली है। पार्षद को सफाई की बोलते है तो वे कहती है कि लेबर नहीं है। रोड लाइट फिर भी ठीक है। नालियों का कचरा 6-6 महीनों तक साफ नहीं होता है। आवारा मवेशियों और श्वानों का आतंक है। <br /><strong>-विजय टांक, वार्डवासी। </strong></p>
<p>सीवरेज के कारण रोड खोद दिए गए लेकिन उसका काम भी आधा-अधूरा और बेतरबीत तरीके से हुआ है। चैंबर सड़कों से ऊपर बना दिए है। गलियों में सुअरों और श्वानों का आतंक है। दो घंटे पानी की सप्लाई होती है। दूसरी मंजिल पर तो पानी पहुंचता ही नहीं है। वार्ड के सफाईकर्मियों को कभी रिवर फ्रंट पर भेज दिया जाता है तो कभी कही अन्य स्थान पर। <br /><strong>-विकास तंवर, वार्डवासी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 15:05:36 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर क्षेत्र में लगाए जागरूकता बैनर </title>
                                    <description><![CDATA[शहर की सड़कों को साफ रखने के लिए नगर निगम कोटा उत्तर ने रोड स्वीपर मशीन का भी उपयोग करना शुरू कर दिया है। शहर के मुख्य मार्गों पर, डिवाइडर रोड पर रोड स्वीपर मशीन से सफाई की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/awareness-banner-put-up-in-kota-north-zone/article-40208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/whatsapp-image-2023-03-18-at-16.06.04.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से हर साल किए जाने वाले स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीम का कोटा दौरा प्रस्तावित है । ऐसे में नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है । नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से शहर के विभिन्न स्थानों पर जागरूकता संदेश के लिए बैनर लगाए गए हैं । किशोर सागर तालाब की पाल , बड़ तिराहा और जेडीबी कॉलेज समेत कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में जगह-जगह पर बैनर लगाए गए हैं । जिनमें स्वच्छता सर्वेक्षण 2007 और गीला और सूखा कचरा अलग-अलग डस्टबिन में डालने के लिए लोगों को जागरूक किया गया है । नगर निगम कोटा उत्तर इस जागरूकता संदेश के माध्यम से नगर निगम कोटा उत्तर को स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन बनाने की अपील कर रहा है।  नगर निगम कोटा उत्तर ने सार्वजनिक शौचालय की साफ-सफाई , मरम्मत और उन पर पेंटिंग का काम शुरू किया है जिसमें सफाई से संबंधित संदेश लिखे जा रहे हैं ।  शहर की सड़कों को साफ रखने के लिए नगर निगम कोटा उत्तर ने रोड स्वीपर मशीन का भी उपयोग करना शुरू कर दिया है। शहर के मुख्य मार्गों पर, डिवाइडर रोड पर रोड स्वीपर मशीन से सफाई की जा रही है।  नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से भी सड़क पर कचरा व मलबा डालने वालों के खिलाफ जुमार्ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। </p>
<p> नगर निगम कोटा दक्षिण के उपायुक्त राजेश डागा ने बताया कि कोई भी व्यक्ति चाहे मकान में रहने वाला हो या दुकानदार ,व्यवसायिक प्रतिष्ठान संचालक हो या शोरूम संचालक ,फल सब्जी के ठेले वाला हो या पालतू कुत्तों को सड़क पर लघु शंका करवाने का मामला यदि सड़क पर किसी भी तरह की गंदगी फैलाई गई तो उन पर 100 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक के जुमार्ने का प्रावधान किया गया है । उन्होंने बताया कि एक  दिन पहले एक मकान मालिक ने मकान का मलबा नाले में डालकर नाले को अवरुद्ध कर दिया था जिसकी जानकारी मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए 5000 रुपए का जुमार्ना लगाया गया है । </p>
<p>गौरतलब है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से स्वच्छता सर्वेक्षण का भौतिक सत्यापन करने के लिए मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल में केंद्रीय टीम के कोटा आने का कार्यक्रम प्रस्तावित है । उसे देखते हुए दोनों ही नगर निगमों की ओर से सफाई के प्रयास तेज कर दिए गए हैं । गत वर्ष कोटा उत्तर नगर निगम की तुलना में कोटा दक्षिण नगर निगम की स्वच्छता रैंकिंग में कुछ सुधार था ।जबकि कोटा उत्तर की रैंकिंग काफी पिछड़ी हुई थी। इसे देखते हुए इस बार दोनों नगर निगम सफाई को बेहतर बनाने के प्रयास में जुटे हुए हैं । नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से सिटीजन फीडबैक और दस्तावेजों को आॅनलाइन फीडिंग के लिए प्राइवेट कंपनी का सहारा लिया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Mar 2023 16:11:31 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर में भी तैयार हो रही निगम की नर्सरी</title>
                                    <description><![CDATA[दो निगम बनने के बाद कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में अब लक्खी बुर्ज में ही नर्सरी विकसित की जा रही है।  लक्खी बुर्ज में सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है।  जिसके साथ ही नीचे पानी की टंकी की तरफ खाली जगह में नर्सरी विकसित की जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/corporation-s-nursery-is-also-getting-ready-in-kota-north/article-40179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/kota-utter-mei-bhi-taiyaar-ho-rahi-nigam-ki-nursary...kota-news..18.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र की तरह ही कोटा उत्तर क्षेत्र में भी निगम की नर्सरी बनाई जा रही है। लक्खी बुर्ज परिसर में तैयार हो रही नर्सरी के ग्रीन हाउस में पौधों को रखा जाएगा। नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में गांधी उद्यान में निगम की नर्सरी बनी हुई है। यहां पौधे  तैयार करने के साथ ही वन विभाग से लाकर उनका नि:शुल्क वितरण भी आमजन में किया जाता है। जबकि कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में निगम की कोई नर्सरी नहीं थी। अस्थायी रूप से लक्खी बुर्ज में ही पौधे रखे जा रहे थे। लेकिन बिना नर्सरी के उन पौधों की सही ढंग से देखभाल नहीं हो पा रही थी। दो निगम बनने के बाद कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में अब लक्खी बुर्ज में ही नर्सरी विकसित की जा रही है।  नगर निगम कोटा उत्तर के अधिशाषी अभियंता पी.पी. गर्ग ने बताया कि लक्खी बुर्ज में सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है।  जिसके साथ ही नीचे पानी की टंकी की तरफ खाली जगह में नर्सरी विकसित की जा रही है। करीब 30 गुणा 50 वर्ग फीट जगह में तैयार हो रही नर्सरी के बीच में एक हट नुमा ग्रीेन हाउस भी बनाया गया है। यहां पौधे तैयार करने के साथ ही वन विभाग से आने वाले पौधों को सुरक्षित रखा जा  सकेगा। यहां से कोटा उत्तर निगम क्षेत्र के लोगों को पौधो का वितरण किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि अभी तक कोटा दक्षिण में ही नर्सरी होने से लोगों को पौधे लेने के लिए गांधी उद्यान जाना पड़ रहा था। लेकिन अब कोटा उत्तर के लोगों को इतनी दूर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि लक्खी बुर्ज में बंशी पहाड़पुर के पत्थर लगाने, सीढ़ियों को बरसात में फिसलने से बचाने और रैलिंग की टूटफूट, रंग रोगन और कैंटीन के शेड को सही करवाने का कार्य कराया जा रहा है। करीब 32 लाख की लागत से चल रहे इन काम के 15 अप्रेल तक पूरा होने की संभावना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Mar 2023 14:34:42 +0530</pubDate>
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