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                <title>खुद अपनी बदहाली की कहानी कह रहा 15 साल पहले बना श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम </title>
                                    <description><![CDATA[खेल गतिविधियां लगभग ठप, शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा; खिलाड़ी बोले- जल्द हो जीर्णोद्धार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shyama-prasad-mukherjee-stadium--built-15-years-ago--tells-a-tale-of-neglect/article-161533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के पॉश इलाके तलवंडी में स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। करीब 15 वर्ष पहले खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इस स्टेडियम की हालत अब इतनी खराब हो चुकी है कि शहर के अधिकांश लोगों को इसके अस्तित्व तक की जानकारी नहीं है। कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) के अधीन आने वाला यह स्टेडियम वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। इसकी हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह खुद चीख-चीखकर कह रहा हो कि मुझे भी मरम्मत और देखभाल की जरूरत है। </p>
<p>स्टेडियम का मैदान पूरी तरह उजाड़ नजर आता है। मैदान में कहीं भी घास दिखाई नहीं देती। जगह-जगह मिट्टी, गड्ढे और कंकड़ फैले हुए हैं। पहली नजर में यह समझना भी मुश्किल हो जाता है कि यह मैदान आखिर किस खेल के लिए बनाया गया था। नियमित रखरखाव के अभाव में यहां खेल गतिविधियां लगभग बंद हो चुकी हैं। स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि खराब मैदान के कारण अभ्यास के दौरान चोट लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।</p>
<p><strong>सुरक्षा व्यवस्था नदारद, असामाजिक तत्वों का बना अड्डा</strong><br />स्टेडियम में सुरक्षा व्यवस्था लगभग न के बराबर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। कई बार चोरी की घटनाएं भी हो चुकी हैं। स्टेडियम के मुख्य गेट के पास लगा लाइट पोल भी क्षतिग्रस्त अवस्था में है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। परिसर में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से शाम के बाद यहां आना लोगों के लिए असुरक्षित महसूस होता है। स्टेडियम में दर्शकों के बैठने के लिए बनाई गई सीढ़ियां कई जगह से टूट चुकी हैं। बैठने की व्यवस्था भी जर्जर हो चुकी है। वहीं शौचालयों की हालत बेहद खराब है। नियमित सफाई नहीं होने से उनमें दुर्गंध रहती है और वे उपयोग योग्य भी नहीं बचे हैं। परिसर में चारों तरफ गंदगी फैली रहती है, जिससे खेल परिसर की गरिमा भी प्रभावित हो रही है।</p>
<p><strong>खिलाड़यों ने कहा ये व्यवस्थाएं होना जरूरी</strong><br />- मैदान में नई घास लगाकर समतलीकरण कराया जाए।<br />-मुख्य गेट पर सुरक्षा गार्ड की नियमित तैनाती हो।<br />- पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।<br />- क्षतिग्रस्त लाइट पोल हटाकर नई हाईमास्ट लाइट लगाई जाए।<br />- दर्शक दीर्घा और टूटी सीढ़ियों की मरम्मत कराई जाए।<br />- शौचालयों का पुनर्निर्माण एवं नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।<br />-नियमित सफाई और बागवानी कर स्टेडियम को व्यवस्थित बनाया जाए।<br />- खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति कर नियमित प्रशिक्षण शुरू किया जाए।<br />- केडीए द्वारा स्टेडियम के रखरखाव के लिए स्थायी बजट और निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।</p>
<p><strong>स्थानीय खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा अभ्यास का बेहतर मंच</strong><br />यदि इस स्टेडियम का जीर्णोद्धार कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, मैदान विकसित किया जाए और नियमित रखरखाव हो तो यह शहर के खिलाड़ियों के लिए एक बेहतरीन अभ्यास केंद्र बन सकता है। उन्होंने केडीए से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की।<br /><strong>-प्रीतम सिंह, जिला बॉक्सिंग सचिव</strong></p>
<p>आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि शहर के बीचों-बीच होने के बावजूद इस स्टेडियम की अनदेखी समझ से परे है। लोगों ने प्रशासन और केडीए से जल्द आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की मांग की है।<br /><strong>-प्रीतपाल सिंह यहां आने वाले खिलाड़ी</strong></p>
<p>स्टेडियम बनने पर लगा था कि बच्चों और युवाओं को अच्छा खेल मैदान मिलेगा, लेकिन आज इसकी हालत देखकर दुख होता है। यहां सुरक्षा नहीं होने से लोग बच्चों को भेजने से भी डरते हैं।<br /><strong>- राजेश शर्मा, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>यह स्टेडियम पूरे तलवंडी क्षेत्र की पहचान बन सकता है, लेकिन रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।<br /><strong>-सविता जैन, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />स्टेडियम की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर जल्द ही उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी और आवश्यक सुधार कार्य शुरू कराने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।<br /><strong>- वाई.बी. सिंह, जिला खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:57:06 +0530</pubDate>
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                <title>सवा करोड़ खर्च, फिर भी अधर झूल में तैर रहा  स्विमिंग पूल</title>
                                    <description><![CDATA[ 5 से 8 फीट गहराई से बच्चों और नए तैराकों की सुरक्षा पर चिंता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/%E2%82%B91-25-crore-spent--yet-the-swimming-pool-project-remains-in-limbo/article-161184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पुलिस लाइन में जवानों और उनके परिवारों के लिए वर्ष 2019 में शुरू की गई आधुनिक स्विमिंग पूल परियोजना करीब सात वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। इस परियोजना पर अब तक लगभग सवा करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन सुविधा आज भी उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परियोजना के तहत 40 फीट चौड़ा और 82 फीट लंबा स्विमिंग पूल, चेंजिंग रूम, शॉवर रूम, टॉयलेट, बाउंड्री वॉल, सीसी रोड और फिल्ट्रेशन प्लांट का निर्माण कराया गया। बावजूद इसके पूल का संचालन शुरू नहीं हो सका। सबसे बड़ी आपत्ति इसकी गहराई को लेकर है। पूल की गहराई 5 से 8 फीट रखी गई है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार प्रशिक्षण के लिए शुरुआती हिस्सा कम गहराई वाला होना चाहिए, ताकि बच्चे और नए तैराक सुरक्षित अभ्यास कर सकें।</p>
<p><strong>पूर्व एसपी ने भी जताई थी आशंका</strong><br />राष्ट्रीय स्तर के तैराक प्रमोद यादव का कहना है कि प्रशिक्षण आधारित स्विमिंग पूल की गहराई सामान्यतः साढ़े तीन फीट से शुरू होकर छह फीट तक होनी चाहिए। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमृता दुहन ने भी अधिकारियों को पूल में कम गहराई वाला भाग बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन उनके तबादले के बाद मामला आगे नहीं बढ़ा।</p>
<p><strong>जवानों को सुविधा का इंतजार</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के निदेशक अभियांत्रिकी रविंद्र माथूर ने बताया कि पहले चरण में 77 लाख रुपए और दूसरे चरण में करीब 50 लाख रुपए की राशि से निर्माण कार्य कराया गया। हालांकि सवाल यह बना हुआ है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जवानों और उनके परिवारों को अब तक इस सुविधा का लाभ क्यों नहीं मिल पाया। वहीं पुलिस लाइन में रहने वाले जवानों का कहना है कि नई बैरकों की अधिक आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान बैरकें जर्जर हो चुकी हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पुलिस जवानों व उनके परिजनों के लिए करीब एक डेढ़ साल पूर्व पुलिस लाइन में स्विमिंग पूल का निर्माण कराया गया था, लेेकिन टक्निकल कमी के कारण शुरु नहीं किया जा सका है। स्विमिंग पूल एक तरफ गहरा ज्यादा है, जिससे छोटे बच्चों के स्नान करने में मुश्किल हाेगी तथा जानमाल की दृष्टि से भी उचित नहीं है। हमने नगर निगम को भी अबगत करवा दिया है। इस बारे में नगर निगम या फिर पीडब्ल्यूडी के अधिकारी बता पाएंगे।<br /><strong>- तेजस्विनी गौतम, कोटा सिटी एसपी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:29:03 +0530</pubDate>
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                <title>चिकित्सक विहीन अस्पतालए मरीजों की बढ़ी परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[दो दर्जन गांवों की आबादी उपचार को मोहताज।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/hospital-lacks-doctors--patients-face-increased-hardship/article-157988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)1.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के प्रमुख राजकीय अस्पताल देईखेड़ा में स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। 30 बेड क्षमता वाले इस अस्पताल में लंबे समय से चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हैंए जिससे मरीजों को सामान्य उपचार के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। गंभीर रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद अन्य अस्पतालों के लिए रेफर करना मजबूरी बन गया है।</p>
<p>इस अस्पताल का महत्व इसलिए अधिक है कि यह मेगा हाईवे तथा दिल्ली.मुंबई एक्सप्रेस.वे से जुड़े क्षेत्र का प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। इन मार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को सबसे पहले इसी अस्पताल में लाया जाता है। हालांकि चिकित्सकों की कमी के कारण घायलों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में कठिनाई होती है और उन्हें अन्य अस्पतालों में भेजना पड़ता है।</p>
<p>देईखेड़ाए घाट का बरानाए लबानए चहिचाए झपायताए कोटड़ीए आजन्दाए बलदेवपुराए लबान कोटाखुर्दए गुहाटा और छप्पनपुरा सहित दो दर्जन से अधिक गांवों की आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है। ग्रामीणों का कहना है कि रिक्त पदों के कारण अस्पताल अपनी क्षमता के अनुरूप सेवाएं नहीं दे पा रहा है। दुर्घटनाए प्रसूति और गंभीर बीमारियों के मामलों में मरीजों को तत्काल अन्य अस्पतालों में भेजना पड़ता है।</p>
<p>ग्रामीण हनुमान गुर्जरए अजय मीणा और शुभम नंदवाना ने सरकार तथा चिकित्सा विभाग से अस्पताल में स्थायी चिकित्सकों की शीघ्र नियुक्ति की मांग की हैए ताकि क्षेत्रवासियों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />देईखेड़ा अस्पताल में व्यवस्था के लिए लगाए गए चिकित्सक ने कार्य से त्यागपत्र दे दिया है। सरकार के स्तर पर चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। वर्तमान में अन्य अस्पताल से चिकित्सक लगाकर व्यवस्था करना संभव नहीं है।<br /><strong>- जितेंद्र सेंगरएब्लॉक सीएचएमओ।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 18:00:12 +0530</pubDate>
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                <title>कोचिंग में सेंसर डोर बन रहे मौत का रास्ता, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[फायर अनुभाग ने शुरु की कोचिंग में आग से सुरक्षा की जांच
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sensor-operated-doors-at-coaching-centers-turning-into-death-traps/article-157951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित अलीगंज की जिस कोचिंग संस्थान में एक दिन पहले आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई। उनमें अधिकतर छात्र थे। उस कोचिंग संस्थान में फायर सिस्टम तो था ही नहीं लेकिन सेंसर डोर होने से वे समय पर नहीं खुले। यही बच्चों की मौत का कारण बने। उसी तरह की हालत कोटा शहर में भी है।</p>
<p>कोचिंग नगरी कोटा में जहां सैकड़ों की संख्या में छोटे बड़े कोचिंग संस्थान है। उनमें से अधिकतर बड़े कोचिंग संस्थान जिनमें हजारों बच्च एक साथ मेडिकल व इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे हैं। उन सभी कोचिंग परिसर में प्रवेश करने से लेकर गैलेरी और कक्षा कक्षों तक, ऑफिस स्टाफ के कक्ष समेत अधिकतर स्थानों पर सेंसर डोर लगाए हुए हैं। ये डोर या तो फेस दिखाने पर या कार्ड लगाने पर ही खुलते हैं।</p>
<p>हालांकि कोचिंग संस्थानों ने ये व्यवस्था वहां पढऩे वाले छात्रों व स्टाफ की सुरक्षा के लिए लगाए हुए हैं। जिससे बिना आईडी प्रुफ के कोई भी न तो अंदर प्रवेश कर सकेगा और न ही बाहर निकल सकेगा। लेकिन आग लगने पर धुंआ उठने या आग लगने पर लाइट बंद होने से डोर का सेंसर काम करना बंद कर देता है। जिससे अंदर के लोग न तो बाहर निकल पाते हैं और न ही बाहर के लोग अंदर जा पाते हैं। जिससे धुएं से दम घुटने पर कई लोग मौत का शिकार हो चुके हैं। अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में भी इसी तरह की घटना ने कई बच्चों की जान ली है।</p>
<p><strong>पहले भी हो चुकी हैं इस तरह की घटनाएं</strong><br />यह पहला मामला नहीं है जब इस तरह की घटना हुई हो। दिल्ली स्थित बेसमेंट लायब्रेरी में पानी भरने पर भी वहां का दरवाजा सेंसर लॉक हो गया था। जिससे वह सय पर नहीं खुल सका और वहां प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे कई लोगों की जान चली गई थी।<br />कोटा में भी कुछ समय पहले एक परिवार ने बच्चों की सुरक्षा के लिए मकान में कमरे को साउंड प्रुफ व दरवाजों को सेंसर लॉक वाला बनाया हुआ था। जिससे माता पिता के घर से बाहर होने व घर में आग लगने पर कमरे का दरवाजा इंटर लॉक हो गया। जिससे वह नहीं खुल सका। साथ ही बच्चों के चिल्लाने की आवाज बाहर तक नहेीं आई। बच्चों की सुरक्षा के लिए की गई यह व्यवस्था ही उनकी मौत का कारण बन गई।इसी तरह से होटल, हॉस्टल या कोचिंग संस्थानों में भी सेंसर लॉक या डिजिटल लॉक वाले डोर मौत का कारण बन सकते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे डोर होना गलत</strong><br />नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि चाहे आग लगने की घटना हो या बरसात में पानी भरने जैसी आपदा। बिल्डिंग में सेनसर व डिजिटल लॉक वाले दरवाजे अक्सर बंद हो जाते हैं। वे बिना किसी कार्ड, फेस रीडर या सेंसर के नहीं खुलते हैं। जबकि आग लगने पर धुएं के कारण लाइट बंद होने पर सेंसर काम करना बंद कर देता है।<br />व्यास ने बताया कि कोचिंग संस्थान हो या हॉस्टल या फिद्दर ऐसी जगह जहां बुजुर्ग लोग रहते हैं। वहां इस तरह के लॉक वाले दरवाजे नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां तक कि कई बार कारों में भी सेफ्टी लॉक नहीं खुलने पर कई लोग आग लगने पर उन कारों में ही जिंदा जल चुके हैं। व्यास ने बताया कि जहां भी इस तरह के लॉक व डोर हैं। उन सभी को समझाइश की जाएगी।</p>
<p><strong>कोचिंग में जांच शुरु, नहीं हैं सुरक्षा इंतजाम:</strong><br />सीएफओ व्यास ने बताया कि लखनऊ की घटना के बाद कोटा में भी फायर अनुभाग ने सतर्कता शुरु कर दी है। मंगलवार को एएफओ सीता चौबदार के नेतृत्व में नदी पार लैंक मार्क, बालिता व पाश्र्वनाथ समेत कई जगह पर कोचिंग संस्थान में आग से सुरक्षा के इंतजामों की जांच की गई।<br />एएफओ चौबदार ने बताया कि अधिकतर जगह पर दो से तीन मंजिला कोचिंग संस्थान है। उनमें एक-एक कक्षा में कई-कई बच्चे पढ़ रहे हैं। लेकिन उन कोंिचंग में न तो आग से सुरक्षा के नाम पर फायर सिस्टम है और न ही एनओसी। यहां तक कि प्रवेश व निकास के लिए एक ही दरवाजा है वह भी काफी संकरा है। इतना ही नहीं कक्षा कक्ष में जाने की गैलुरी तक काफी संकरी है। जिससे एक साथ कई बच्चे तक नहीं निकल सकते। ऐसे में कभी कोई हादसा हो जाए तो बच्चों का जीवन कतरे में पड़ सकता है। सीएफओ व्यास ने बताया कि कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा जांच का यह अभियान लगातार जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 15:32:52 +0530</pubDate>
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                <title>एयर फोर्स के विमान की जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग, मरीज को पहुंचाया आर्मी अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय वायु सेना के विमान ने एक गंभीर मरीज को सूरतगढ़ से जयपुर सफलतापूर्वक एयरलिफ्ट किया। जयपुर एयरपोर्ट पर विशेष परिस्थितियों में फुल लैंडिंग कराकर, प्रशासन के बेहतरीन समन्वय से मरीज को तत्काल एम्बुलेंस द्वारा आर्मी अस्पताल पहुंचाया गया। समय पर की गई इस कार्रवाई से मरीज को त्वरित इलाज मिल सका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/emergency-landing-of-air-force-plane-at-jaipur-airport-patient/article-156966"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/airport-jaipur.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय वायु सेना के एक विमान की रविवार को जयपुर एयरपोर्ट पर विशेष परिस्थितियों में फुल लैंडिंग करवाई गई। यह विमान सूरतगढ़ से एक मरीज को लेकर जयपुर पहुंचा था। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एयर फोर्स द्वारा एयरलिफ्ट किया गया। विमान के जयपुर एयरपोर्ट पर पहुंचते ही एयरपोर्ट प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने त्वरित समन्वय करते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।</p>
<p>एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से मरीज को विमान से सुरक्षित बाहर निकालने तथा उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए विशेष सहायता उपलब्ध करवाई गई। इसके बाद मरीज को एंबुलेंस के जरिए जयपुर स्थित आर्मी अस्पताल भेजा गया, जहां उसका उपचार शुरू किया गया। पूरे ऑपरेशन के दौरान एयर फोर्स, एयरपोर्ट प्रशासन और चिकित्सा टीमों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। समय पर की गई इस कार्रवाई से मरीज को शीघ्र चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सकी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 17:02:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीषण गर्मी में आमजन को राहत ! समाजसेवी जीत गोविंद ने लगावाया घाटगेट पर वॉटर कूलर, गर्मी में राहगीरों और ग्रामीणों को मिलेगी ठंडे पानी की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[समाजसेवी जीत गोविंद उर्फ जीतू जी ने घाटगेट चौराहे पर वॉटर कूलर लगवाकर जनसेवा की अद्भुत मिसाल पेश की है। भीषण गर्मी में राहगीरों और ग्रामीणों को इससे ठंडा और स्वच्छ पेयजल मिलेगा। इससे पहले उन्होंने आपसी भाईचारे को बढ़ावा देते हुए पूरे महीने रोजा इफ्तारी भी करवाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/relief-to-the-common-people-in-the-scorching-heat-social/article-156926"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/water-collar.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जीत गोविंद उर्फ जीतू जी ने एक बार फिर से समाजसेवा की मिसाल पेश करते हुए मुख्य चौराहे पर वॉटर कूलर की व्यवस्था की गई। गर्मी के बीच यह पहल आमजन और राहगीरों को ठंडे पानी की सुविधा प्रदान कर रही है। इसके बारे में जीतू ने कहा कि, घाटगेट के मुख्य चौराहे से रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण, राहगीर गुजरते हैं। ठंडे और स्वच्छ पेयजल की यह व्यवस्था उन्हें काफी सुविधा प्रदान करेगी। इसके बारे में जब राहगीरों से बात की गई तो उन्होंने इस पहल को जनसेवा की भावना का प्रतीक बताया।</p>
<p>जीत गोविंद के पास में काम करने वाले लोगों से जब इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब लोग अपने निजी कार्यों में व्यस्त रहते हैं, उस समय जीत गोविद जी ने समाज के लिए समय और संसाधन लगाकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। जानकारी के अनुसार, ये पहला मौका नहीं है जब जीत गोविंद से समाज के लिए कुछ किया, इससे पहले इन्होंने भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए पूरे महीने रोजे इफ्तारी करवाई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 10:49:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : खानपुर प्रशासन ने दिखाई तत्परता, शौचालय सुविधा से मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों ने कहा  सार्वजनिक शौचालय  की उपलब्धता से उनकी लंबे समय से चली आ रही परेशानी दूर हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-the-report--khanpur-administration-shows-promptness--toilet-facility-brings-relief/article-155981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। झालावाड़ रोड स्थित क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय हटाए जाने के बाद व्यापारियों, ग्राहकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई थी। मामले को 31 मई को नवज्योति टीम ने प्रमुखता से उठाए जाने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शौचालय सुविधा पुनः उपलब्ध करा दी है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार शौचालय हटने के बाद क्षेत्र में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी, जिससे विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। मानसून के मौसम को देखते हुए यह समस्या और भी गंभीर हो गई थी। समस्या सामने आने के बाद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी धर्म कुमार मीणा ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए। </p>
<p>उनके निर्देशों पर नगर पालिका प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित कर आमजन को राहत प्रदान की। शौचालय सुविधा बहाल होने से स्थानीय व्यापारियों और क्षेत्रवासियों में संतोष का माहौल है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा की उपलब्धता से उनकी लंबे समय से चली आ रही परेशानी दूर हो गई है। उन्होंने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए अधिशासी अधिकारी धर्म कुमार मीणा का आभार व्यक्त किया । व्यापारियों ने कहा कि जनहित से जुड़ी समस्याओं पर समय पर कार्रवाई होने से लोगों का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:32:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - दैनिक नवज्योति में मुद्दा उठते ही जागा प्रशासन:  पिंक टॉयलेट निर्माण ने पकड़ी रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[24 अप्रैल को हाट चौक स्थित एकमात्र पुराने शौचालय को ध्वस्त कर दिया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/impact-of-the-report-%E2%80%93-administration-springs-into-action-after-dainik-navjyoti-highlights-the-issue--construction-of--pink-toilet--gains-momentum/article-153059"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/2.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। अटरू कस्बे के व्यस्ततम हाट चौक में 'पिंक टॉयलेट' निर्माण में हो रही देरी और आमजन को हो रही परेशानी को लेकर दैनिक नवज्योति द्वारा 6 मई को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद तुरंत प्रशासन और ठेकेदार हरकत में आए। ख़बर का संज्ञान लेते हुए ठेकेदार ने बुधवार से निर्माण स्थल पर निशान रंगत करवाकर नींव की खुदाई का कार्य प्रारंभ कर दिया। 15 दिन से मलबे में तब्दील था। गौरतलब है कि महिलाओं को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से प्रशासन ने 24 अप्रैल को हाट चौक स्थित एकमात्र पुराने शौचालय को ध्वस्त कर दिया था। वादा था कि यहां जल्द आधुनिक पिंक टॉयलेट बनेगा, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के पुराने ढांचे को गिराने से भीषण गर्मी के बीच व्यापारियों, राहगीरों और विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी।</p>
<p><strong>पिंक टॉयलेट निर्माण के बीच अस्थायी शौचालय की मांग तेज</strong><br />हालांकि निर्माण शुरू हो गया है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि जब तक पिंक टॉयलेट तैयार नहीं होता, तब तक हाट चौक के पास मोबाइल टॉयलेट या अस्थाई शौचालय की व्यवस्था की जाए। प्रशासन द्वारा बताए गए महिला पार्क स्थित सुलभ शौचालय की दूरी अधिक होने के कारण बुजुर्गों और महिलाओं को वहां जाने में असमर्थता हो रही है।</p>
<p><strong>साप्ताहिक बाजार में ग्रामीण क्षेत्र से खरीदारी करने आती है महिलाएं</strong><br />हाटचौक कस्बे का मुख्य व्यावसायिक केंद्र है, जहां साप्ताहिक बाजार के दौरान अटरू सहित दर्जनों गांवों से ग्रामीण महिलाएं खरीदारी के लिए आती हैं। शौचालय की अनुपलब्धता के कारण उन्हें भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय दुकानदारों ने भी रोष जताते हुए कहा था कि प्रशासन ने ढांचा तोड़ने में जितनी फुर्ती दिखाई, निर्माण में उतनी ही सुस्ती बरती।</p>
<p><strong>खबर प्रकाशित होने के बाद मामले ने पकड़ा तूल</strong><br />नवज्योति में खबर प्रकाशित हीने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। जिसके बाद ज़िम्मेदार अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई। ठेकेदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार से कार्य नींव की खुदाई के साथ ही निर्माण धरातल पर शुरू कर दिया गया है। नींव की खुदाई के साथ ही निर्माण में तेजी लाई जाएगी।</p>
<p><strong>समस्या का त्वरित समाधान होने पर नवज्योति का जताया आभार</strong><br />समस्या का त्वरित समाधान होने पर क्षेत्रवासियों ने 'दैनिक नवज्योति' का आभार जताया। लोगों का कहना है कि नवज्योति ने उनकी आवाज को प्रमुखता से उठाया, जिससे प्रशासन हरकत में आया।लंबे समय से चली आ रही परेशानी का समाधान शुरू होना आमजन के लिए राहत भरा है। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई कि आगे भी जनहित के मुद्दों को इसी तरह उठाया जाता रहेगा।</p>
<p>एक-दो दिन के भीतर निर्माण कार्य पूर्ण रूप से सुचारू करवा दिया जाएगा ताकि जनता को राहत मिले।<br /><strong>- योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी, ईओ, नगरपालिका अटरू </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:51:45 +0530</pubDate>
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                <title>नगर निगम कैथून में भी बनाएगा गौशाला, आयुक्त ने अधिकारियों के साथ देखी जमीन</title>
                                    <description><![CDATA[कैथून नगर पालिका और तीन पंचायतें नगर निगम में शामिल हुई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/municipal-corporation-to-establish-a-gaushala-in-kathun-as-well/article-152080"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)46.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से कैथून में भी गौशाला बनाने की योजना है। इसके लिए नगर निगम आयुक्त ने अधिकारियों के साथ कई जगह पर जमीन देखी है।नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने सोमवार को कैथून क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने नगर पालिका और कोटा विकास प्राधिकरण की कई जमीनों को देखा। जहां गौशाला बनाई जा सकती है।</p>
<p>आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि कैथून नगर पालिका और तीन पंचायतें नगर निगम में शामिल हो गई है। ऐसे में यहां भी बड़ी संख्या में निराश्रित मवेशी हैं। उन्हें यहां से पकड़कर बंधा धर्मपुरा स्थित निगम की गौशाला में ले जाना काफी भारी पड़ रहा है। कैथून से गौशाला की दूरी करीब पचास किमी. है। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कैथून में ही गौशाला की संभावना तलाशने के निर्देश दिए थे। उनके निर्देशों की पालना में ही यहां कई जगह पर जमीन देखी है।</p>
<p><strong>एक हजार गायों के लिए बनेगी गौशाला</strong><br />आयुक्त मेहरा ने बताया कि कैथून में करीब एक हजार गायों को रखने के लिए गौशाला बनाने की योजना है। जिससे इस क्षेत्र से निराक्षित गौवंश को पकड़कर यहीं रखा जा सकेगा। उन्हें बंधा गौशाला नहीं ले जाया जा सकेगा। इसके लिए उतनी बड़ी जमीन की तलाश की जा रही है। कुछ जमीन देखी हैं उन पर विचार कर निर्णय किया जाएगा।</p>
<p><strong>बंधा गौशाला में होंगे एक करोड़ के काम</strong><br />इधर नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में करीब एक करोड़ रुपए के कार्य करवाए जाएंगे।आयुक्त मेहरा ने बताया कि वर्तमान में करीब 28 लाख रुपए के टेंडर तो हो चुके हैं। 80 लाख रुपए और स्वीकृत करवाए जाएंगे। जिनसे यहां शेड, पानी की टंकी, प्रशासनिक भवन, टॉयलेट्स , चार दीवारी निर्माण समेत अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।</p>
<p><strong>डेढ़ हजार की क्षमता होगी विस्तारित गौशाला की</strong><br />आयुक्त मेहरा ने बताया कि निगम की बंधा गौशाला में वर्तमान में करीब दो हजार गौवंश हैं। वहीं इसके पास ही करीब 25 बीघा जमीन केडीए से प्राप्त हुई है। जिसका विस्तार किया जा रहा है। इस विस्तारित गौशाला में भी करीब डेढ़ हजार गौवंश को रखा जाएगा। इस तरह से बंधा गौशाला की क्षमता भी बढ़ जाएगा।</p>
<p><strong>गर्मी से बचाव के इंतजाम किए जा रहे</strong><br />शहर में पड़ रही भीषण गर्मी का असर जहां इंसानों पर हो रहा है। वहीं जानवर भी इससे अधूते नहीं है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा गौशाला और किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में गौवंश को गर्मी से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कायन हाउस में ग्रीन नेट लगाई गई है। जबकि गौशाला में पुरानी नेट तो लगी हुई है। नई ग्रीन नेट भी लगाई जा रही है। साथ ही गौशाला में अलग-अलग बाड़ों के हिसाब से 20से अधिक पंखे व कूलर भी लगाए गए हैं।</p>
<p> शहर की तुलना में बंधा की तरफ तापमान अधिक रहता है। ऐसे में जहां गौवंश को गर्मी से राहत के इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं ट्रेक्टर से फव्वारा पद्धति से गौवंश पर व बाड़ों में पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है।<br /><strong>-जितेन्द्र सिंह ,पूर्व अध्यक्ष गौशाला समिति</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:00:28 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 38- मंदिर परिसर को लोगों ने बनाया पार्किंग स्थल, डिवाइडर ऊंचे होने से राहगीरों को हो रही परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[नालियों में पानी की निकासी की व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित है जिससे बरसात मे सड़कों पर पानी भरता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-38---residents-have-turned-the-temple-complex-into-a-parking-lot--causing-inconvenience-to-pedestrians-due-to-the-high-divider/article-129077"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(1)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर निगम उत्तर क्षेत्र के वार्ड 38 में मूलभूत सुविधाओं का अभाव लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। सड़क, सफाई, पार्क और सामुदायिक भवन जैसी बुनियादी जरूरतें अब भी अधूरी हैं। वार्ड के रहवासी कई वर्षों से इन समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन हालात में सुधार नहीं हो सका है। हालात यह हैं कि वार्ड का प्रमुख धार्मिक स्थल भी अब पार्किंग स्थल में तब्दील होता जा रहा है। वार्ड में सुविधा कॉम्प्लेक्स में नल भी लगे हुए नहीं है। वार्ड में बने मंदिर पसिर में लोगों ने पार्किंग स्थल बना दिया है जिसके कारण यहां आने वाले श्रद्धालु काफी परेशान हो रहे है।</p>
<p><strong>मंदिर परिसर में खड़े रहते वाहन से श्रद्धालु परेशान</strong><br />वार्ड के प्रमुख श्रीराम मंदिर, हनुमान और गायत्री देवी मंदिर बने हुए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में प्रवेश करते ही वाहनों की कतार नजर आती है। मंदिर के भीतर तक गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे श्रद्धालुओं को न केवल असुविधा होती है बल्कि मंदिर परिसर की पवित्रता भी प्रभावित हो रही है। श्रद्धालु बताते हैं कि शहर के अन्य इलाकों में पार्किंग की व्यवस्था मंदिरों के बाहर होती है, लेकिन यहां निगम की अनदेखी  के कारण पूरा परिसर ही पार्किंग स्थल बन गया है। इससे श्रद्धालुओं के आने-जाने में कठिनाई होती है और परिसर की स्वच्छता भी बिगड़ रही है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />हरिजन बस्ती, खटीको का मोहल्ला, राधाकृष्ण मन्दिर, बैरवा मोहल्ला, आमेरा भवन के आस पास का ऐरिया, आदिनाथ नमकीन, बाबा रामदेव मन्दिर का क्षेत्र शामिल है। </p>
<p><strong>ऊंचे डिवाइडर बने मुसीबत</strong><br />इंदिरा गांधी नगर में नालियों की निकासी की व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित है। बरसात के दौरान सड़कों पर पानी भर जाता है, जिससे पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। कई बार जलभराव के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल पाते। उन्होंने बताया कि कॉलोनियों के बीच बने डिवाइडर इतने ऊंचे हैं कि बुजुर्गों और दोपहिया चालकों को आने-जाने में कठिनाई होती है। इस कारण दुर्घटनाओं की संभावना भी बनी रहती है।<br /><strong>- कैलाशी देवी, रहवासी</strong></p>
<p><strong>बच्चों के खेलने की जगह नहीं</strong><br />इलाके में बच्चों के खेलने के लिए कोई पार्क नहीं है और न ही सामाजिक कार्यक्रमों के लिए कोई सामुदायिक भवन है। स्थानीय लोगों को किसी भी सामुदायिक आयोजन के लिए दूसरे वार्डों पर निर्भर रहना पड़ता है। नालियों की सफाई महीनों से नहीं हुई है। कई जगहों पर नालियों पर ढकान होने से सफाई कार्य मुश्किल हो गया है। कुछ लोगों ने नालों के ऊपर अस्थायी निर्माण कर रखे हैं, जिससे बरसात के समय पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो जाती है। यह स्थिति न केवल अस्वच्छता को बढ़ाती है, बल्कि मच्छरों के पनपने और बीमारियों के फैलने का भी खतरा पैदा करती है।<br /><strong>- मोहम्मद सलीम, रहवासी</strong></p>
<p><strong>सड़कों पर फैला कचरा</strong><br />वार्ड के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। नालियों में गंदगी और कचरा भरा पड़ा है। ढकान लगे होने से सफाईकर्मी नियमित सफाई नहीं कर पा रहे। स्थानीय निवासी कांतिबाई ने बताया कि निगम की अनदेखी से वार्ड में लोगों ने सड़कों को ही कचरा प्वाइंट बना रखा है।<br /><strong>- कांति बाई, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में स्थित कॉम्प्लेक्स के बारे में कई बार अधिकारियों को शिकायत दि है। मगर अभि तक कोई जवाब नहीं आया। वार्ड में सफाई रोजाना होती है, <br /><strong>- महेन्द्र वर्मा, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Oct 2025 15:41:50 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान के अंतिम गांव के हालात : 78 साल बाद भी बिस्लाई गांव में नहीं पहुंचा नल का पानी, ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[जहां मवेशी स्नान करते हैं वहीं मृत जानवरों को किनारे फेंक देते है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-situation-in-rajasthan-s-last-village--even-after-78-years--bislai-village-has-not-received-tap-water/article-127339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(31).png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र की सहजनपुर ग्राम पंचायत का बिस्लाई गांव आज भी बदहाली की दास्तां कह रहा है। आजादी के 78 साल बाद भी यहां पेयजल की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को अब भी नदी से पानी ढोकर लाना पड़ता है। महिलाएं हर रोज कई किलोमीटर दूर नदी तक जाती हैं और सिर पर मटकी रखकर परिवार के लिए पानी लाती हैं। वही नदी, जहां मवेशी स्नान करते हैं और मृत जानवरों को किनारे फेंक दिया जाता है। मजबूरी में ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना, ट्यूबवेल और टैंकर की घोषणाएं केवल कागजों में सिमट गईं। सरपंच से लेकर विधायक-सांसद तक गुहार लगाने के बावजूद हालात जस के तस हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि हर चुनाव में नेताओं ने वादे किए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई इस गांव की सुध लेने तक नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा।</p>
<p><strong>नेता व प्रशासन की प्रतिक्रिया</strong><br />बिस्लाई गांव की तस्वीरें साफ दिखा रही हैं कि सरकार और प्रशासन ने यहां की समस्याओं की अनदेखी की है। 78 साल बाद भी अगर ग्रामीणों को नदी से पानी ढोना पड़ रहा है तो यह सरकार की नाकामी है।<br /><strong>-  प्रेम सिंह मीणा, कांग्रेस नेता</strong></p>
<p>इस मामले का जल्द संज्ञान लिया जाएगा। <br /><strong>- अभिमन्यु सिंह कुंतल, उपखंड अधिकारी छीपाबड़ौद।</strong></p>
<p><strong>ग्रामीणों का दर्द उनके ही शब्दों में</strong></p>
<p>आजादी को 78 साल हो गए, लेकिन हमारे गांव में आज तक नल का पानी नहीं आया। जानवर जिस नदी में नहाते हैं, उसी से हमें पीने का पानी भरना पड़ता है। .<br /><strong>- घनश्याम बैरवा, ग्रामीण</strong></p>
<p>जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सबको कहा, लेकिन किसी ने नहीं सुना। गंदा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां फैल रही हैं। <br /><strong>- राम भरोस, ग्रामीण</strong></p>
<p>सुबह से दोपहर तक नदी से पानी लाना हमारी मजबूरी है। बारिश में स्थिति और भी विकट हो जाती है। <br /><strong>- नीलू बाई, महिला ग्रामीण </strong></p>
<p>बरसों से सुन रहे हैं कि नल-जल योजना आएगी, पाइप लाइन डलेगी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।<br /><strong>- सूखना बाई, महिला ग्रामीण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 17:48:34 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - रेल यात्रियों को फिर मिली एस्केलेटर की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[सभी यात्रियों को प्लेटफार्म पर आने-जाने के लिए आसानी रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---railway-passengers-again-get-escalator-facility/article-122697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के हृदयस्थल स्थित कोटा रेलवे स्टेशन पर सोमवार को रेलयात्रियों के लिए तकनीकी खराबी के चलते बंद हुए एस्केलेटर को पुन: चाल कर दिया गया है। रेलवे प्रशासन ने दैनिक नवज्योति में प्रकाशित शीर्षक कोटा स्टेशन पर स्केलेटर की खराबी के चलते यात्री हो रहे परेशान के बाद हरकत में आया तथा रेल यात्रियों की सुविधा के लिए पुन: तकनीकी खराबी को सही करवा चालू करवा दिया।</p>
<p>रेलवे जनसंपर्क अधिकारी शिव शंकर शाह ने बताया कि रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए पुन: स्केलेटर (स्वचालित सीढी) चालू कर दिया है। स्टेशन पर विकलांग, वृद्धजन, महिलाओं व जरूरतमंद सभी यात्रियों को प्लेटफार्म पर आने-जाने के लिए आसानी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 14:22:03 +0530</pubDate>
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