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                <title>मुख्यमंत्री के प्रयास हुए सफल : राजस्थान को मिलेगा 4 लाख मीट्रिक टन कोयला</title>
                                    <description><![CDATA[ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सक्रिय प्रयासों से छत्तीसगढ़ में फंसा 4 लाख मीट्रिक टन (लगभग 100 रैक्स) कोयला राजस्थान को मिलेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-ministers-efforts-successful-rajasthan-will-get-4-lakh-metric/article-82206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/bhajanlal-sharma.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सक्रिय प्रयासों से छत्तीसगढ़ में फंसा 4 लाख मीट्रिक टन (लगभग 100 रैक्स) कोयला राजस्थान को मिलेगा। इस कोयले से प्रदेश के पावर प्लांट्स में कोयले के भंडार बढ़ेंगे और आमजन को पर्याप्त बिजली उपलब्ध हो सकेगी।</p>
<p>राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने छत्तीसगढ़ के कोरबा में आर्यन कोल बेनिफिकेशन इंडिया लिमिटेड (एसीबीईएल) को एसईसीएल की माइन से सूरतगढ़ एवं छबड़ा थर्मल पावर प्लांट के लिए कोल सप्लाई का 5 वर्ष के लिए कार्यादेश दिया था, लेकिन जुलाई, 2022 में छत्तीसगढ़ के राज्य कर (जीएसटी) विभाग, खनिज विभाग, राजस्व विभाग एवं पर्यावरण विभाग की संयुक्त कार्यवाही के कारण एसीबीईएल की वाशरीज को सील कर दिया गया। इससे राजस्थान का लगभग 4 लाख मीट्रिक टन कोयला वाशरीज में फंस गया। मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण का तुरंत संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं केन्द्र सरकार से सम्पर्क किया और कोयले को रिलीज करने का आग्रह किया।  शर्मा के अथक प्रयासों के क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने कोल रिलीज करवाने में गंभीरता से त्वरित कार्यवाही की। हाल ही में जिला कलक्टर कोरबा ने उक्त 4 लाख मीट्रिक टन कोयले को रिलीज करने का आदेश दिया। इस 4 लाख मीट्रिक टन कोयले से राजस्थान को लगभग 100 कोल रैक्स की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे उत्पादन निगम के पावर प्लांट्स को कोयला भंडार बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jun 2024 18:46:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> शिक्षक भर्ती-2021 में सफल होने के बावजूद नियुक्ति नहीं देने का मामला, प्रमुख शिक्षा सचिव और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सहित अन्य से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2021 में सफल होने के बावजूद नियुक्ति नहीं देने पर प्रमुख शिक्षा सचिव और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सहित अन्य से जवाब मांगा है। वहीं अदालत ने एक पद याचिकाकर्ता के लिए रिक्त रखने को कहा है। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह ने यह आदेश कन्हैया लाल पाटीदार की याचिका पर दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-rajasthan-high-court--despite-being-successful-in-teacher-recruitment-2021--has-sought-a-reply-from-the-principal-secretary-and-director-of-elementary-education-including-others-for-not-giving-appointment/article-14367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/hc1.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p class="MsoNormal">जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2021 में सफल होने के बावजूद नियुक्ति नहीं देने पर प्रमुख शिक्षा सचिव और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सहित अन्य से जवाब मांगा है। वहीं अदालत ने एक पद याचिकाकर्ता के लिए रिक्त रखने को कहा है। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह ने यह आदेश कन्हैया लाल पाटीदार की याचिका पर दिए।<br /><br />याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि विभाग ने गत 31 दिसंबर 2021 को तृतीय श्रेणी शिक्षक पद के लिए भर्ती निकाली थी। याचिकाकर्ता 12वीं के साथ बीएसटीसी योग्यता रखता है। वहीं रीट के अंकों के आधार पर उसका चयन इस भर्ती में हो गया था, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए उसे नियुक्ति से इनकार कर दिया कि उसने बीएसटीसी के अंतिम वर्ष के साथ स्नातक की परीक्षा भी दी है। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने शिक्षक भर्ती के आवेदन में अपनी योग्यता बीएसटीसी और 12वीं दिखाई है। ऐसे में उसे स्नातक की परीक्षा के आधार पर नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए एक पद याचिकाकर्ता के लिए रिक्त रखने को कहा है।<br /><br /> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><br style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" /></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 16:23:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> शेयर बाजार में पिछले तीन सत्रों से जारी गिरावट पर ब्रेक, सेंसेक्स एवं निफ्टी बढ़त बनाने में सफल</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई।  वैश्विक स्तर से मिले सकारात्मक संकेतों के साथ ही घरेलू स्तर पर एफएमसीजी, बैंकिंग, वित्त जैसे समूहों में हुईं लिवाली के बल पर शेयर बाजार में पिछले तीन सत्रों से जारी गिरावट पर ब्रेक लग गया और सेंसेक्स एवं निफ्टी बढ़त बनाने में सफल रहे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/break--sensex-and-nifty-were-successful-in-making-gains-on-the-decline-in-the-stock-market-for-the-last-three-sessions/article-13603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/sensex-1612498717.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई।  वैश्विक स्तर से मिले सकारात्मक संकेतों के साथ ही घरेलू स्तर पर एफएमसीजी, बैंकिंग, वित्त जैसे समूहों में हुईं लिवाली के बल पर शेयर बाजार में पिछले तीन सत्रों से जारी गिरावट पर ब्रेक लग गया और सेंसेक्स एवं निफ्टी बढ़त बनाने में सफल रहे। <br /><br />बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 326.84 अंकों की बढ़त के साथ 53234.77 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 83.30 अंकों की तेजी लेकर 15835.35 अंक पर रहा। बीएसई का मिडकैप भी 0.82 प्रतिशत उठकर 22037.16 अंक पर और स्मॉलकैप 0.62 प्रतिशत बढ़कर 24954.54 अंक पर रहा। <br />बीएसई में बढ़त में रहने वालों में एफएमसीजी 2.49 प्रतिशत, बैंकिंग 1.08 प्रतिशत और वित्त 0.92 प्रतिशत प्रमुखता से शामिल है जबकि धातु 1.49 प्रतिशत की गिरावट में रहा। बीएसई में कुल 3566 कंपनियों में कारोबार हुआ जिसमें से 2020 हरे निशान में और 1365 लाल निशान में जबकि 181 में कोई बदलाव नहीं हुआ। <br /><br />अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़त में रहने वालों में ब्रिटेन 1.04 प्रतिशत, चीन 0.53 प्रतिशत, जापान 0.84 प्रतिशत और जर्मनी 0.39 प्रतिशत शामिल है जबकि हांगकांग का हैंगसेंग 0.13 प्रतिशत की गिरावट में रहा। बीएसई का सेंसेक्स 56 अंकों की गिरावट लेकर 52851.67 अंक पर खुला। सत्र के दौरान यह 53301.99 अंक के उच्चतम और 52674.81 अंक के निचले स्तर के बीच रहा। अंत में यह पिछले दिवस के 52907.93 अंक की तुलना में 0.62 प्रतिशत अर्थात 326.84 अंकों की बढ़त लेकर 53234.77 अंक पर रहा।</p>
<p>सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से 24 हरे निशान में जबकि छह लाल निशान में रही। निफ्टी 42 अंकों की गिरावट के साथ 15740.50 अंक पर खुला। सत्र के दौरान यह 15852.35 अंक के उच्चतम और 15661.80 अंक के निचले स्तर के बीच रहा। अंत में यह पिछले दिवस के 15752.05 अंक की तुलना में 83.30 अंक अर्थात 0.53 प्रतिशत बढ़कर 15835.35 अंक पर रहा। निफ्टी में शामिल 50 कंपनियों में से 14 मुनाफे जबकि 16 नुकसान में रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 18:57:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कन्हैया हत्याकांड के विरोध में कोटा बंद रहा सफल</title>
                                    <description><![CDATA[ उदयपुर में दुकानदार कन्हैया लाल की नृशंस हत्या के विरोध में शनिवार को कोटा बंद पूरी तरह से सफल रहा । वही सर्व  हिंदू समाज की ओर से संभागीय आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम संभाग आयुक्त को ज्ञापन दिया गया जिसमें कन्हैया के हत्यारों को फांसी देने की मांग की गई ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-closed-successful-in-protest-against-kanhaiya-murder/article-13475"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/45.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। उदयपुर में दुकानदार कन्हैया लाल की नृशंस हत्या के विरोध में शनिवार को कोटा बंद पूरी तरह से सफल रहा । वही सर्व  हिंदू समाज की ओर से संभागीय आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम संभाग आयुक्त को ज्ञापन दिया गया जिसमें कन्हैया के हत्यारों को फांसी देने की मांग की गई ।<br /><br />गत दिनों उदयपुर में एक दुकान में घुसकर आतंकवादी ताकतों द्वारा दुकानदार कन्हैया लाल की गला काटकर हत्या करने के विरोध में सर्व हिंदू समाज की ओर से शनिवार को कोटा बंद का आह्वान किया गया था । इसके तहत स्वत: स्फूर्त ही कोटा बंद रहा । सुबह से दोपहर बाद तक अधिकतर बाजारों में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। निजी स्कूलों में अवकाश रहा , सरकारी स्कूलों में भी उपस्थिति बहुत कम रही। वही भामाशाह मंडी ,कृषि उपज मंडी के अलावा चाय की थड़ी तक बंद रहे । मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र घंटाघर और शॉपिंग सेंटर स्थित मोटर मार्केट में भी पूरी तरह से सन्नाटा छाया रहा । इस हत्याकांड के विरोध में उद्वेलित कोटा के लोगों ने स्वत: ही अपने प्रतिष्ठान ,दुकानें बंद रखकर समर्थन किया। कोटा व्यापार महासंघ ,प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, कृषि उपज मंडी समिति ,शिवसेना, बजरंग दल ,विश्व हिंदू परिषद ,भारतीय जनता पार्टी के अलावा अन्य कई संगठनों ने भी बंद में समर्थन किया।<br /><br /> वही बंद के दौरान सर्व हिंदू समाज की ओर से सीएडी चौराहे पर एकत्रित होकर सभा का आयोजन किया ।इस सभा में महामंडलेश्वर हेमा सरस्वती, हरि नारायण दास ,गोदावरी धाम के संचालक शैलेंद्र भार्गव समेत कई अन्य संत -महात्मा शामिल हुए । उनके अलावा विधायक मदन दिलावर ,संदीप शर्मा ,कल्पना देवी, पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत ,हीरालाल नागर ,प्रहलाद गुंजल और विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल से दिनेश सोनी ,मुकेश जोशी, राजेंद्र जैन ,नेता खंडेलवाल समेत बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए । यहां सभा के बाद सभी लोग रैली के रूप में संभागीय कार्यालय पहुंचे । सर्व हिंदू समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में युवा महिला और पुरुष कन्हैया के हत्यारों को फांसी देने की मांग के नारे लगाते हुए संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे । यहां जोरदार प्रदर्शन किया गया । प्रदर्शन को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीण जैन, राजेश  मील  और उमा शर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था । एसटीएफ के जवान , आरएसी के जवान समेत पूरा संभागीय आयुक्त कार्यालय छावनी बना हुआ था । यहां संभागीय आयुक्त कार्यालय में प्रवेश करने को लेकर विधायक और कार्यकतार्ओं व पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई । वहीं अंदर कार्यालय में ज्ञापन देने गए प्रतिनिधिमंडल को भी पुलिस अधिकारियों ने 11 की संख्या में ही जाने की इजाजत दी जबकि प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि वह 25 लोग ही शामिल होंगे । 25 सदस्य प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति के नाम संभागीय आयुक्त दीपक नंदी को ज्ञापन सौंपा । प्रदर्शन के बाद सभी लोग शांति पूर्वक अपने गंतव्य स्थान को रवाना हो गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 18:20:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत के घातक ड्रोन की पहली बार सफल उड़ान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने पहली बार ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर को उड़ाया। यह उड़ान कर्नाटक के चित्रदुर्ग स्थित एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में की गई। अमेरिका के बी-2 बमवर्षक की तरह दिखने वाला ये विमान पूरी तरह से स्वचालित था। इसने खुद ही टेकऑफ लिया, वे प्वाइंट नेविगेशन और आसानी से लैंडिंग की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/first-successful-flight-of-indias-deadly-drone/article-13441"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/d-11.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने पहली बार ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर को उड़ाया। यह उड़ान कर्नाटक के चित्रदुर्ग स्थित एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में की गई। अमेरिका के बी-2 बमवर्षक की तरह दिखने वाला ये विमान पूरी तरह से स्वचालित था। इसने खुद ही टेकऑफ लिया, वे प्वाइंट नेविगेशन और आसानी से लैंडिंग की। यह उड़ान भविष्य के मानव रहित विमानों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को साबित करने के मामले में एक प्रमुख उपलब्धि है। यह देश की रक्षा को लेकर भी बड़ा कदम है। इसे बेंगलुरु स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट  ने बनाया है। यह एक छोटे टबोर्फैन इंजन से उड़ता है। विमान के लिए उपयोग किए जाने वाले एयरफ्रेम, अंडर कैरिज और संपूर्ण उड़ान नियंत्रण और एवियोनिक्स सिस्टम स्वदेशी हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ को बधाई देते हुए कहा कि यह स्वायत्त विमानों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।<br /><br /><strong>भारत का भविष्य है ये ड्रोन</strong><br />यूएवी को बीते साल के आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच हुए नागोर्नो-कराबाख संघर्ष के दौरान पहचान मिल गई है, जिसमें युद्ध के मैदान पर ड्रोन पूरी तरह से हावी हो गए थे। यूएवी यानी ड्रोन तकनीक तक अब आतंकियों की भी पहुंच बनती जा रही है। ये इनसे हमला करते हैं, लोगों को मारते हैं। नुकसान पहुंचाते हैं। देश में प्रभावी लड़ाकू ड्रोन बनाने के स्वदेशी प्रयास चल रहे हैं। चित्रदुर्ग में किया गया परीक्षण इसी प्रयास में एक बड़ा कदम है। इसका मतलब है ये कि भारतीय सेना तीन-चार साल में स्वदेशी स्टेल्थ ड्रोन की मदद से सीमाओं पर निगरानी करने लगेगा। <br /><br /><strong>पड़ोसी देश ड्रोन मामले में भारत से आगे</strong><br />भारत ड्रोन और यूएवी के मामले में पाकिस्तान से एक दशक और चीन से काफी ज्यादा पीछे है। पाकिस्तान और चीन लड़ाकू ड्रोन समेत कई हथियारों को विकसित करने और पाने के लिए एकदूसरे की मदद कर रहे हैं, इसलिए भारत ने बनाया है रहस्यमयी स्टेल्थ ड्रोन घातक। पिछले साल ही इसकी तस्वीर सामने आई थी। कुछ परीक्षण भी हुए थे। स्टेल्थ विंग फ्लाइंग टेस्टेड बुलाया जा रहा था, लेकिन इसकी जानकारियों को पूरी तरह से गुप्त रखा गया था।  भारतीय नौसेना में शामिल करने के लिए इसके एक डेक-आधारित लड़ाकू यूएवी वेरिएंट की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। साल 2025 से 2026 के बीच में स्टेल्थ ड्रोन घातक का प्रोटोटाइप लोगों के सामने आ सकता है। पिछली साल ही भारतीय सेना ने 75 लड़ाकू ड्रोन के साथ स्वार्म ड्रोन तकनीक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया था। यानी भारत ड्रोन के जरिए हमला करने में काबिल है।<br /><br /><strong>कैसा होगा घातक यूसीएवी?</strong><br />डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने इसके आकार, वजन, रेंज आदि के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन ये माना जा रहा है कि यह 30 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसका वजन 15 टन से कम है। इस ड्रोन से मिसाइल, बम और प्रेसिशन गाइडेड हथियार दागे जा सकते हैं। इसमें स्वदेशी कावेरी इंजन लगा है। यह 52 किलोन्यूटन की ताकत विमान को मिलती है। अभी जो प्रोटोटाइप है उसकी लंबाई 4 मीटर है। विंगस्पैन 5 मीटर है। यह 200 किलोमीटर की रेंज तक जमीन से कमांड हासिल कर सकता है। अभी एक घंटे तक उड़ान भर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 13:13:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा में पहली बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[मेडिकल कॉलेज कोटा में बुधवार को पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट किया गया जो सफल रहा। एक मां ने अपने बेटे को किड़नी दी। कोटा के 16 डॉक्टरों की टीम ने करीब पांच घंटे से अधिक समय में किडनी ट्रांसप्लांट किया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/first-successful-kidney-transplant-in-kota/article-9622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/safal-kidney-transplant.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज कोटा में बुधवार को पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट किया गया जो सफल रहा। एक मां ने अपने बेटे को किड़नी दी। कोटा के 16 डॉक्टरों की टीम ने करीब पांच घंटे से अधिक समय में किडनी ट्रांसप्लांट किया। इसके साथ ही कोटा मेडिकल कॉलेज की उपलब्धियों में एक नया अध्याय जुड़ गया।  <br /><br />बूंदी जिले के नैनवा निवासी 40 वर्षीय गुमान सिंह की दोनों किड़नी खराब थी। उसे किडनी की जरूरत थी। इसके लिए कई लोगों से सम्पर्क किया। लेकिन उसकी मां की किडनी उससे मैच हुई। इसके बाद करीब 6 माह तक वह मेडिकल कॉलेज कोटा में भर्ती रहा। इस दौरान उसकी व उसकी मां की सभी जांचें की गई। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बुधवार को जयपुर के दो डॉक्टरों की मौजूदगी में कोटा के डॉक्टरों ने पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया।  बुधवार को गुमान सिंह की मां की किडनी आॅपरेशन में करीब दो घंटे से अधिक और गुमान सिंह के आॅपरेशन में करीब 3 घंटे से अधिक समय लगा। <br /><br />मेडिकल कॉलेज कोटा के प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए चिकित्सा मानकों के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया अपनाई गई । जिसमें किडनी दान करने वाले व्यक्ति की सभी  आवश्यक  जांचे करवाई गई। रोगी को उसकी माँ ने अपनी किड्नी दान की जो सफलतार्पूक सम्पन्न हुई। इससे पहले दान करने वाले का ब्लड टेस्ट, एचएलए टेस्ट का मिलान किया गया, जो सभी सामान्य पाए गए। उन्होंने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए स्टेट लेवल ओथरिजेशन कमेटी से स्वीकृति भी प्राप्त की गई है। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर से बेकअप के लिए यूरोलोजी विभाग से डॉ. एस.एस यादव व डॉ. अनुपमा गुप्ता उपस्थित रही। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज कोटा की टीम से यूरोलोजी विभाग से डॉ. निलेश जैन, डॉ. शैलेंद्र गोयल, डॉ अंकुर, डॉ. शिव शंकर  और  नेफ्रÞोलोजी विभाग से डॉ विकास खंडेलिया  व  अनेस्थेसिया विभाग से डॉ. एस.सी दुलारा, डॉ. सीएल  खेड़िया और रेजिडेंट डॉ. द्वारा किड़नी ट्रांसप्लांट का सफलतार्पूक आॅपरेशन किया गया। <br /><br /><strong>संभागीय आयुक्त ने चिकित्सकीय टीम को दी बधाई</strong><br />न्यू मेडिकल कॉलेज के सुपरस्पेश्यलिटी चिकित्सालय में कोटा संभाग का पहला किडनी ट्रांसप्लांट का आॅपरेशन सफलतार्पूक करने पर बधाई दी।संभागीय आयुक्त दीपक नन्दी ने  मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना, सुपरस्पेश्यलिटी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. निलेश जैन और  उनकी पूरी टीम को प्रशस्ति पत्र जारी कर बधाई और शुभकामनाएं दी है । <br /><br /><strong>जुलाई 2021 में मिली थी स्वीकृति</strong><br />मेडिकल कॉलेज कोटा को किडनी प्रत्यारोपण की स्वीकृति 30 जुलाई 2021 को प्राप्त हुई थी। जिसमें आवश्यक सुविधाओं व उपकरणों का विस्तार किया गया। करीब 7 करोड़ रुपए की लागत से किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित की गई थी। यहां पूर्व में 22 अप्रैल को पहला किडनी ट्रांसप्लांट होना था। लेकिन उस समय डॉक्टरों की टीम जयपुर से कोटा नहीं आ सकी थी। जिससे ट्रांसप्लांट को टालना पड़ा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 May 2022 15:57:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>कामयाब रही प्रधानमंत्री की यूरोप-यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[तीन यूरोपीय देशों-जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क की यात्रा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वदेश लौट आए हैं। उनकी यात्रा कितनी कामयाब रही, इसे लेकर विश्व भर में उत्सुकता बनी रही। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/successful-tour-to-europe-of-modi/article-9508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/modi-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>तीन यूरोपीय देशों-जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क की यात्रा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वदेश लौट आए हैं। उनकी यात्रा कितनी कामयाब रही, इसे लेकर विश्व भर में उत्सुकता बनी रही। इसे काफी हद तक कामयाब कहा जा सकता है। यात्रा ऐसे समय पर हुई जब यूक्रेन-रूस के बीच युद्ध जारी है। इस युद्ध को लेकर रूस की निंदा नहीं करने और अपनाए गए भारतीय तटस्थ रवैये से नाराज पश्चिम की, भारत के प्रति बनी धारणा को बदलने में काफी मदद मिली है। इस यात्रा के दौरान यूरोप की दो प्रमुख आर्थिक शक्तियों जर्मनी, फ्रांस और चार नार्डिक देशों-डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड और नार्वे के समक्ष भारत ने इस युद्ध को लेकर अपने रुख को खुलकर स्पष्ट किया। युद्ध समाप्त होना चाहिए, यह किसी के भी पक्ष में हितकर नहीं, इसमें किसी भी पक्ष की जीत नहीं होगी। शांतिपूर्ण माहौल बने और वार्ता के जरिए समस्या का समाधान निकाला जाए। भारतीय रुख के प्रति सभी देशों ने सहमति जाहिर की। भारत की ओर से इन देशों से आर्थिक, रक्षा, जलवायु परिवर्तन, हरित, नवीन ऊर्जा से संबंधी द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के कई समझौते हुए, जो उल्लेखनीय तो रहे ही, भविष्य में इसके परिणाम सकारात्मक रूप से सामने आएंगे। यह धारणा भी स्पष्ट हुई कि भारत रूस से अपने घनिष्ठ संबंधों के रहते हुए भी वह यूरोपीय देशों से भी विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को तत्पर है। यहां गौर करने वाली बात यह भी रही कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में निर्बाध कारोबार और पारगमन और सुरक्षा के प्रति यूरोपीय देशों का सहयोगात्मक रूझान दिखाई दिया। यूरोपीय देश जहां रूसी आक्रामकता से, तो भारत चीन की बढ़ती आक्रामकता से चिंतित हैं। ऐसे में यूरोपीय देशों और भारत के बीच सहयोग आज की जरूरत है। यूक्रेन-रूस के युद्ध की समाप्ति के बाद ही सहयोग को किस हद तक अमलीजामा पहनाया जा सकेगा, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन जर्मनी और फ्रांस की ओर से भारत को अच्छे संकेत मिले हैं। यह भी एक तथ्य है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, शीतयुद्ध दौरान और आर्थिक उदारीकरण की नीति लागू करने के बावजूद कई कारणों से भारत के यूरोपीय देशों के बीच रिश्तों पर बर्फ जमी रही। लेकिन अब प्रधानमंत्री के ताजा दौरे के बाद संबंधों में जमी बर्फ पिघली है, बल्कि आने वाले दिनों में नए सिरे से गरमाहट बनी है। उम्मीद है, भविष्य में यही गरमाहट, रिश्तों को मजबूत करने में सहायक बनेंगी।</p>
<p>द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व में सोवियत संघ रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका दो महाशक्ति रहे हैं। लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद अमेरिका एक मात्र महाशक्ति के रूप रहा। इसे अब चीन की ओर से चुनौती मिल रही है। यानी अब विश्व, तीन महाशक्तियों में बंटा हुआ है। यह महाशक्तियां विकासशील और छोटे देशों को हथियारों और आर्थिक मदद और कर्ज के जरिए अपने पाले में लेने की होड़ में रहती हैं। ऐसे में इन्हें संतुलित रखने के लिए विश्व में अब एक मध्यम शक्ति के उदय की भी जरूरत है। इस दृष्टि से सोचा जाए तो यूरोप में जर्मनी और फ्रांस बड़ी ताकत है, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, आॅस्ट्रेलिया और जापान जैसे देश। यदि इनमें कोई गठबंधन होता है, तो यह मध्यम शक्ति भविष्य में इन तीन बड़ी महाशक्तियों की मनमानी और गैर जिम्मेदाराना व्यवहारों पर अंकुश और संतुलन बनाए रख सकती है। जरूरत है तो सिर्फ इस ओर पहल की है। क्योंकि पिछले दो विश्व युद्धों और मौजूदा यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे युद्ध के दुष्परिणामों से पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। विश्व के कई देशों को गेहूं, पेट्रोलियम पदार्थों, इस्पात और अन्य धातुओं के संकट से गुजरना पड़ रहा है। <br />प्रधानमंत्री की यात्रा यूरोप में सबसे सशक्त आर्थिक शक्ति जर्मनी से शुरू हुई। वह अब एक बड़ी ताकत के रूप में उभरना चाहता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर उसकी भी रणनीति है। कई यूरोपीय देश भी इस क्षेत्र की अहमियत समझते हुए सहयोग करना चाहते हैं। ऐसे में भारत के साथ जर्मनी के बीच सहमति बनना, उल्लेखनीय उपलब्धि रही। दोनों देश जलवायु परिवर्तन से जुड़े मसलों पर भी सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं। भारत का माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप समझौता हुआ। जर्मनी को भारतीय पेशेवरों को सख्त जरूरत है और तो दूसरी ओर भारत को अपना सेवा का दायरा बढ़ाने की जरूरत। आज जर्मनी तेल-गैस और भारत रक्षा के मामलों पर रूस पर निर्भर हैं। डेनमार्क यात्रा के दौरान जलवायु परिवर्तन और प्रौद्योगिकी संबंधी नवाचारों को लेकर नौ समझौते हुए, अब उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश का मकसद रही यह यात्रा। अक्षय, हरित ऊर्जा के मामले में यहां की तकनीक काफी उन्नत है। दूसरी बात नार्डिक देश जिसमें नार्वे, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड शामिल हैं, इन्हें अभी तक भारत ने ज्यादा अहमियत नहीं दी थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री की यात्रा से तवज्जो मिली है। यात्रा का अंतिम पड़ाव फ्रांस रहा। मोदी वहां दुबारा चुने गए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिले। बधाई दी, द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के संकेत मिले। फ्रांस हमारा अहम कूटनीतिक सहयोगी है। यूक्रेन को लेकर दोनों देशों का रूख समान है। आज मोदी और मैक्रों ही ऐसे वैश्विक नेता हैं, जो व्लादिमीर पुतिन से सीधे फोन पर बात कर सकते हैं। दोनों देशों का इस बात पर जोर रहा कि रूस के साथ बातचीत के रास्ते खुले रहने चाहिए।        <br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/successful-tour-to-europe-of-modi/article-9508</link>
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                <pubDate>Wed, 11 May 2022 10:36:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्वास्थ्य कार्मिकों से योजना के सफल क्रियान्वयन में भागीदार बनने का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, अधीक्षक एवं संबंधित अधिकारियों से किया संवाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--medical-minister-parsadi-lal-meena-called-upon-the-health-workers-to-be-partners-in-the-successful-implementation-of-the-scheme/article-8246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/parsadi.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, अधीक्षक एवं संबंधित अधिकारियों से संवाद किया । उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में जब 'मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना' का आगाज हुआ था, तब लोगों को इसके सफल होने पर आशंकाएं थी। चिकित्सा कार्मिकों के सहयोग से यह योजना आज देश भर के लिए मिसाल बन चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना का अभी ट्रायल चल रहा है, चिकित्सा कार्मिक यदि पूरे मनोयोग से सहयोग करेंगे तो प्रदेश एक बार फिर चिकित्सा के क्षेत्र में इबारत गढ़ेगा। </p>
<p>चिकित्सा मंत्री  परसादी लाल मीणा ने कहा कि 'मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान' योजना प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य के लिए क्रांतिकारी योजना है। उन्होंने प्रदेश के सभी स्वास्थ्य कार्मिकों, मेडिकल, पैरामेडिकल व संबंधित कार्मिकों को योजना के सफल क्रियान्वयन में भागीदार बनने का आह्वान किया।</p>
<p><br /> मीणा ने निर्देशित किया कि प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों में आईपीडी, ओपीडी की दवाएं और जांचें निशुल्क उपलब्ध कराना सुनिश्चित की जाए। आईपीडी में भर्ती मरीज के लिए बेड साइड ऐसा सिस्टम विकसित करें ताकि उन्हें दवा की पर्ची ही ना दी जाए। ओपीडी में आने वाले मरीज को भी संस्थान में उपलब्ध दवाई ही लिखी जाए। उन्होंने कहा कि दवाएं उपलब्ध ना होने पर वैकल्पिक दवा लिखकर जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है।<br /><br />मेडिकल शिक्षा प्रमुख शासन सचिव  वैभव गालरिया ने कहा कि अप्रैल माह तक प्रदेश में ट्रायल चल रहा है। 1 मई से प्रदेशभर में योजना विधिवत शुरू हो जाएगी। ऐसे में चिकित्सक आमजन को योजना के अनुरूप चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एसेंशियल ड्रग लिस्ट के अलावा दवाओं की जरूरत होने पर अधिकारीगण आरएमएससीएल या नियमनुसार रेट कांटेक्ट कर दवा खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से भी आवश्यकतानुसार दवाओं को क्रय किया जा सकता है।</p>
<p><br />वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उदयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर व अन्य मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों से इस महत्वाकांक्षी योजना पर बनाई कार्ययोजना पर चर्चा की गई। इस अवसर पर एसएमएस अस्पताल के डॉ अमरजीत सिंह मेहता ने योजना के तहत किए जा रहे कार्यों को भी पीपीटी के माध्यम से बताया। उन्होंने योजना को प्रभावी रूप से क्रियान्वयन किए जाने के लिए भी आश्वस्त किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 18:18:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मोटर व्हीकल एसआई भर्ती परीक्षा का परिणाम घोषित </title>
                                    <description><![CDATA[197 पदों के लिए तीन गुना यानी 601 परीक्षार्थी सफल, अब फिजिकल टेस्ट के आधार पर होगा फाइनल चयन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--news--motor-vehicle-si-recruitment-exam-result-declared--three-times-i-e--601-candidates-successful-for-197-posts--now-physical-final-selection-will-be-on-the-basis-of-test/article-7557"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/asi.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर ने बुधवार को मोटर व्हीकल सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। 197 पदों के लिए हुई भर्ती परीक्षा में 3 गुना से अधिक (601) परीक्षार्थियोंं का चयन हुआ है, जिन्हें मेडिकल और फिजिकल टेस्ट और डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन के बाद मेरिट के आधार पर फाइनल चयन किया जाएगा, इनमें से 168 पदों पर सामान्य जबकि 29 पदों पर अनुसूचित क्षेत्र के अभ्यर्थियों को पोस्टिंग दी जाएगी। गौरतलब है कि मोटर व्हीकल सब इंस्पेक्टर के 197 पदों के लिए दिसंबर में आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो 3 जनवरी तक चली थी। इसके बाद 12 और 13 फरवरी को संभाग स्तर पर भर्ती परीक्षा हुई।</p>
<p><br /><strong> यह होना जरूरी</strong><br />भर्ती के लिए उम्मीदवार की फिजिकल फिटनेस भी काफी जरूरी है। अभ्यर्थी की ऊंचाई 168 सेंटीमीटर होनी चाहिए, जबकि सीना बिना फुलाए 81 सेंटीमीटर और फुलाने पर 86 सेंटीमीटर से कम नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार द्वारा लागू सातवें वेतनमान के अनुसार मोटर व्हीकल सब इंस्पेक्टर को पे-मैट्रिक्स लेवल 10 के आधार पर सैलरी दी जाएगी। हालांकि प्रोबेशन पीरियड के दौरान सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सैलरी दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 15:11:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व वन्यजीव दिवस आज: स्लोथ बियर और हिप्पो में सफल प्रजनन प्रदेश में केवल नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क</title>
                                    <description><![CDATA[गुलाबी नगरी स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, झालाना लेपर्ड रिजर्व, हाथी गांव, लॉयन सफारी में वन्यजीवों को देखने की चाह लिए हजारों पर्यटक यहां की विजिट करते हैं। खासकर एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा हिप्पो परिवार विजिटर्स की पहली पसंद बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-wildlife-day-today--successful-breeding-in-sloth-bear-and-hippo-only-nahargarh-biological-park-in-the-state--beaver-can-be-brought-from-gujarat/article-5374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/nahargarh-biological-park.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, झालाना लेपर्ड रिजर्व, हाथी गांव, लॉयन सफारी में वन्यजीवों को देखने की चाह लिए हजारों पर्यटक यहां की विजिट करते हैं। खासकर एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा हिप्पो परिवार विजिटर्स की पहली पसंद बना हुआ है। प्रदेश में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ऐसी पहली जगह है, जहां विजिटर्स को हिप्पो देखने को मिलते हैं। इसके अतिरिक्त यहां 26 विभिन्न प्रजातियों के तकरीबन 270 से अधिक वन्यजीव रहवास कर रहे हैं।<br /><br /><strong>स्लोथ बियर का हुआ सफल प्रजनन</strong><br />प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघरों की बात करें तो जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रहवास कर रहे स्लोथ बियर में (कैप्टिविटी में) पहली बार सफल प्रजनन हुआ। दूसरे जिलों के बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघर में (कैप्टिविटी में) ऐसा अब तक नहीं हो पाया है। नर भालू शम्भू, मादा झुमरी और बच्चा गणेश अपने एन्क्लोजर में चहल-कदमी करते हुए देखे जा सकते हैं।<br /><br /><strong>एक जोड़ा लाए, अब संख्या तीन हुई</strong> <br />दिल्ली चिड़ियाघर से अगस्त, 2019 में हिप्पो का पहला और एकमात्र जोड़ा नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लाया गया। जहां 17 जुलाई, 2020 में इसका (कैप्टिविटी में) सफल प्रजनन हुआ। प्रदेश में इसकी उपस्थिति केवल जयपुर में देखने को मिलती है। साथ ही प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों के इतिहास में पहली बार इस प्रजाति के एनीमल में सफल प्रजनन भी यहीं हुआ है। अभी ये हिप्पो जोड़ा बायोलॉजिकल पार्क स्थित एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा है। साथ ही ये जोड़ा फिर से खुशखबरी दे सकता है। <br /><br /><strong>सबसे ज्यादा वुल्फ यहां</strong><br />प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों की बात करें तो सबसे ज्यादा वुल्फ नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में ही देखने को मिलते हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि यहां इनमें कैप्टिविटी में अच्छी ब्रीडिंग भी हो रही है। इसी का नतीजा है कि वन्यजीव एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत वुल्फ के बदले देश के विभिन्न बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघरों से जयपुर को अच्छ एनीमल्स मिले हैं। साथ ही स्लोथ बियर और हिप्पो में सफल प्रजनन केवल यहीं देखने को मिला है।<br /><br /><strong>8 विभिन्न प्रजातियों के हिरण भी यहां</strong><br />नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ऐसी पहली जगह है। जहां विजिटस को 8 विभिन्न प्रजातियों के हिरण देखने को मिलते हैं। इनमें चीतल, चिंकारा, सिक्का डियर, हॉक डियर, सांभर, ब्लैक बग, बारहसिंघा और चौसिंघा के नाम शामिल है। साथ ही इनमें सफल प्रजनन भी हो रहा है। खासकर चिंकारा में अच्छी ब्रीडिंग हो रही है। इन्हें एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत देश के अन्य चिड़ियाघरों में दिया जा चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 10:45:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों का कमाल : बिना हड्डी काटे छह साल के बच्चे के दिल में छेद का किया सफल ऑपरेशन, टोसिंग बिंग नामक बीमारी से ग्रसित था</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चे को टोसिंग बिंग यानि दिल में छेद की समस्या जन्म से ही थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amazing-of-doctors-of-sms-hospital--successful-operation-of-hole-in-the-heart-of-six-year-old-child-without-cutting-bone--was-suffering-from-a-disease-called-tossing-binge/article-4649"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/13.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। एसएमएस अस्पताल के कार्डियो थोरेसिक विभाग के चिकित्सकों ने एक छह साल के बच्चे के दिल में छेद की विकृति का बिना छाती की हड्डी काटे सफल ऑपरेशन किया है। बच्चे को टोसिंग बिंग यानि दिल में छेद की समस्या जन्म से ही थी। सामान्यतया ओपन हार्ट सर्जरी छाती की हड्डी (स्टर्नम) को काट कर की जाती है लेकिन इस केस में छाती में बांयी तरफ  छोटे से चीरे के जरिए बिना छाती की हड्डी काटे सर्जरी की गई है। विभाग के चिकित्सकों ने दावा किया है कि यह सर्जरी अपने आप में विश्व की पहली सर्जरी है और इसका मेडिकल जर्नल्स में अभी तक उल्लेख नहीं हैं।<br /><br /><strong>एक ही छोटे से चीरे से सर्जरी के फायदे</strong><br />    यह सर्जरी पारम्परिक उपकरणों से की जा सकती है और इसके लिए बहुत ज्यादा खर्चे और विशिष्ट उपकरणों की आवश्यकता नहीं है।<br />    बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम।<br />    सर्जरी के दौरान कम खून की आवश्यकता।<br />    छाती की हड्डी काटने से होने वाले इन्फेक्शन का कोई खतरा नहीं।<br />    जांघ में कोई अतिरिक्त चीरा नहीं लगाना पड़ता।<br />    मिनिमल इनवेसिव सर्जरी के दौरान जांघ में केन्युलेशन से होने वाले दुष्परिणामों से मुक्ति और पैरों में रक्त अवरोध से होने वाले नुकसान का कोई खतरा नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 14:35:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सफल टीकाकरण</title>
                                    <description><![CDATA[देश के लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान का एक साल पूरा हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3/article-4070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/vexination.jpg" alt=""></a><br /><p>देश के लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान का एक साल पूरा हो गया है। पिछले एक साल में भारत की वयस्क आबादी के 70 प्रतिशत लोगों को कोरोना के दोनों टीकों की खुराक दी जा चुकी है। जबकि 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को एक बार का टीका लगाया जा चुका है। इसके अलावा इस महीने से 15 से 18 साल के बीच की आयु के युवकों को भी टीका लगाना शुरू कर दिया गया है। टीकाकरण अभियान के ये आंकड़े यह दर्शाने को काफी है कि भारत संकट के समय एकजुट होकर हर संकट की चुनौती का सामना करने में सक्षम है। संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान मीडिया से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में इस बात पर चिंता व्यक्त की जा रही थी कि भारत अपनी बड़ी आबादी के टीकाकरण में कैसे सफल हो पाएगा, लेकिन केन्द्र की सरकार ने एक सुनियोजित टीका नीति बनाई और भरोसा दिलाया कि दिसंबर 2021 तक युद्ध स्तर पर कार्यक्रम चलाकर सभी को टीके लगा दिए जाएंगे। हालांकि अभी तक पूरी आबादी के टीके नहीं लगाए जा सके हैं, तो इसके पीछे कुछ लोग स्वयं ही जिम्मेदार हैं। आज देश में टीकों की उपलब्धता में कमी नहीं है, लेकिन काफी लोगों ने आज भी टीकों से दूरी बनाई हुई है। बहरहाल, जिन लोगों ने टीके की पहली व दोनों डोज ले ली हैं, उन्हें तात्कालिक तौर पर कोरोना से बचाव का सुरक्षा कवच मिल गया है और जान जोखिम में पड़ने से बची है। इसमें तो कोई संदेह नहीं कि कोरोना महामारी से जंग में टीका निर्णायक साबित हुआ है। तीसरी लहर के दौरान यह बात सामने भी आई है। इस बार मौतों के जितने भी मामले सामने आ रहे हैं, उनमें से अधिकतर वे लोग हैं, जिन्होंने टीके की एक भी डोज नहीं ली है। हालांकि दोनों डोज लगवाने वालों की भी मौतें हुई हैं, लेकिन उनमें अधिकांश लोग वे हैं, जो अन्य गंभीर बीमारियों से पहले से ही ग्र्रस्त थे। फिर भी टीकाकरण ने करोड़ों लोगों को सुरक्षा घेरे में ला दिया है। टीकाकरण में तेजी उस वक्त आई जब 1 मई 2021 को 18 साल से ऊपर की वयस्क आबादी को टीकों की घोषणा हुई। इसके बाद 3 जनवरी से 15 से 18 साल के किशोरों को टीका लगाने का काम शुरू हो चुका है। मार्च माह में 12 से 14 साल के बच्चों को भी टीके लगाने की घोषणा केन्द्र सरकार ने की है। टीकाकरण अभियान को पूरी गति से जारी रखा जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jan 2022 15:46:18 +0530</pubDate>
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