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                <title>सीएचसी में मदर लैब शुरू नहीं होने से मरीज परेशान, नहीं मिल रहा उन्नत जांच सुविधाओं का लाभ </title>
                                    <description><![CDATA[मदर लैब के लिए मशीनें सीएचसी पहुंची लेकिन भवन अधूरा होने से  स्थापित नहीं की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patients-inconvenienced-as--mother-lab--fails-to-launch-at-chc--denied-access-to-advanced-diagnostic-facilities/article-150420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(16).png" alt=""></a><br /><p>कैथून। कैथून सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत बीपीएचयू भवन का निर्माण तय समय पर पूरा नहीं होने से मदर लैब शुरू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को मुफ्त जांच सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जानकारी के अनुसार कैथून सीएचसी में बीपीएचयू यूनिट वर्ष 2023 में स्वीकृत हुई थी, जिसके लिए 75 लाख रुपए मंजूर किए गए थे। योजना के अनुसार वर्ष 2024 तक भवन निर्माण पूरा कर हैंडओवर होना था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इसके चलते मदर लैब शुरू नहीं हो सकी और क्षेत्र के हजारों मरीज उन्नत जांच सुविधाओं से वंचित हैं। कैथून सीएचसी में आसपास के गांवों से सैकड़ों मरीज रोजाना उपचार के लिए आते हैं। भवन तैयार नहीं होने से कैंसर मार्कर, बायोप्सी और हार्मोनल टेस्ट सहित 145 प्रकार की जटिल जांचें शुरू नहीं हो पा रही हैं।</p>
<p><strong>मशीनें पहुंचीं, लेकिन स्थापना रुकी</strong><br />जानकारी के अनुसार मदर लैब के लिए ऑटोमैटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर, कोबास C-801 और इलेक्ट्रोलाइट एनालाइजर जैसी मशीनें सीएचसी पहुंच चुकी हैं, लेकिन भवन अधूरा होने के कारण इन्हें स्थापित नहीं किया जा सका। योजना के तहत पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से सैंपल लेकर मदर लैब भेजे जाने थे और रिपोर्ट ऑनलाइन मरीजों को उपलब्ध कराई जानी थी।</p>
<p><strong>विधायक से लगाई गुहार</strong><br />भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष हरिओम पुरी और देवेंद्र शर्मा ने मदर लैब शुरू कराने को लेकर विधायक कल्पना देवी से चर्चा की। इस पर विधायक ने संबंधित अधिकारियों को जल्द निर्माण कार्य पूरा कर लैब शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>शिफ्टिंग की चर्चा से बढ़ी चिंता</strong><br />स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि मदर लैब को कैथून के बजाय कोटा में कहीं अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जा सकता है। इस पर हरिओम पुरी ने लैब को कैथून में ही संचालित रखने और मशीनों को अन्यत्र नहीं भेजने की मांग की है। साथ ही लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि लैब को कहीं और स्थानांतरित किया गया तो इसका विरोध किया जाएगा।</p>
<p>ठेकेदार द्वारा समय पर कार्य पूरा नहीं करने से परियोजना रुकी हुई है। ठेकेदार को कई बार मौखिक रूप से निर्देश दिए गए हैं और उच्च अधिकारियों को पत्र भी भेजे गए हैं। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिला कलक्टर को भी इस स्थिति से अवगत कराया जा चुका है।<br /><strong>-डॉ. राजेश सामर, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, सीएचसी, कैथून</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 17:43:52 +0530</pubDate>
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                <title>सड़क खोदकर डाली मोटी गिट्टी, अधूरा छोड़ा निर्माण कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[छह माह से राहगीर तथा वाहन चालक हो रहे परेशान ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-dug-and-put-thick-gravel--construction-work-left-incomplete/article-115229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(1)14.png" alt=""></a><br /><p>कैथून। क्षेत्र के जाखोड़ा से कादीहेड़ा गांव तक बनाई जा रही सड़क आम राहगीरों व वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। गौरतलब है कि जाखोड़ा से कादीहेड़ा गांव के बीच सार्वजनिक निर्माण विभाग से नवीन सड़क निर्माण की स्वीकृति मिली थी। जिस पर ठेकेदार ने सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया था। साथ ही सड़क को खोदकर उसमें मोटी गिट्टी डाल दी थी। परंतु ठेकेदार द्वारा सड़क को खोदकर बीच में ही सड़क निर्माण का काम अधूरा छोड़ दिया गया है। जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व वार्ड पंच गिर्राज मीणा ने बताया कि ग्राम पंचायत जाखोड़ा से कादीहेड़ा गांव तक नॉनपेचेबल नवीन सड़क निर्माण का कार्य स्वीकृत हुआ था। परन्तु ठेकेदार ने सड़क निर्माण का काम बीच में ही अधूरा छोड़ दिया है। ठेकेदार ने सड़क खोदकर उसमें गिट्टी डाल दी है। जिसके कारण राहगीरों को आने जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाइक सवार सड़क पर फैली गिट्टी में फिसलकर आए दिन चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दीपावली के समय ही ठेकेदार ने सड़क को खोद दिया था। परन्तु 6 महीने से ज्यादा समय होने के बाद भी अभी तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ है। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। </p>
<p><strong>बारिश में आए दिन होंगे हादसे</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि 1 महीने के बाद बरसात का मौसम शुरू हो जाएगा। जिसके कारण सड़क पर कीचड़ फैल जाएगा। जिससे  इस सड़क पर चलना लोगों के लिए बड़ी समस्या का सबब बन जाएगा। आए दिन हादसे होंगे। </p>
<p><strong>अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत करा दिया है। परंतु  जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे। जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से ग्राम पंचायत जाखोड़ा से कादीहेड़ा गांव तक नवीन सड़क का बरसात से पूर्व शीघ्र निर्माण कार्य कराने की मांग की है। जिससे लोगों को जर्जर सड़क से राहत मिल सके।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />जाखोड़ा से कादीहेड़ा गांव तक सड़क पूरी तरह जर्जर हो गई है। जिसके कारण बरसात में जर्जर सड़क में गड्ढे हो जाएंगे और पानी भर जाएगा। जिसके कारण ग्रामीणों को आवाजाही में काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू किया जाए। <br /><strong>-उमा शंकर, ग्रामीण</strong></p>
<p> जाखोड़ा से कादीहेड़ा सड़क पूरी तरह जर्जर हो गई है। ठेकेदार ने सड़क को खोदकर बीच में ही काम छोड़ दिया है। जिससे राहगीरों को आवाजाही में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। <br /><strong>-गिर्राज मीणा, पूर्व वार्ड पंच</strong></p>
<p>ठेकेदार ने नवीन सड़क का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया है। जिसको लेकर विभाग को कई बार अवगत करा दिया है। आए दिन बाइक सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं। <br /><strong>-टीकम चंद सुमन, पूर्व सरपंच, जाखोड़ा -4075</strong></p>
<p>जाखोड़ा से कादीहेड़ा गांव तक नवीन सड़क निर्माण के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। टेंडर प्रकिया पूरी होने के बाद जल्दी ही सड़क का निर्माण करवाया जाएगा।<br /><strong>-लाखन मीणा, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 24 May 2025 16:07:53 +0530</pubDate>
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                <title>अनदेखी: दो साल से अधूरी डगर, आमजन को हो रही दिक्कत</title>
                                    <description><![CDATA[सड़क निर्माण में देरी की वजह से वाहन चालकों और आम लोगों को न केवल जाम का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि सड़क के गड्ढों से कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/neglect--the-road-is-incomplete-for-two-years--common-people-are-facing-problems/article-95148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>सुवांसा। तालेड़ा से सुवासा होते हुए केशवरायपाटन तक निमार्णाधीन पक्की सड़क का कार्य अब भी अधूरा पड़ा हुआ है, जिसके कारण लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। करीब दो साल पहले इस सड़क को खोदा गया था, लेकिन संवेदक द्वारा इसे समय पर पूरा नहीं किया गया, जिसके कारण सड़क पर गहरे गड्ढे बन गए हैं और स्थानीय लोग जूझ रहे हैं। दो साल से इस मार्ग पर धूल उड़ती रहती है जिससे आवाजाही करने वाले परेशान रहते है। कार्य धीमी गति से, गड्ढों की समस्या विकराल: लगभग डेढ़ साल से सड़क निर्माण का कार्य लटका पड़ा है। सड़क निर्माण में देरी की वजह से वाहन चालकों और आम लोगों को न केवल जाम का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि सड़क के गड्ढों से कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। संवेदक द्वारा सड़क की खुदाई कर छोड़ दी गई है, और इसमें से 8 किलोमीटर के चार हिस्से अभी भी अधूरे पड़े हैं। जबकि, प्रशासन ने कई बार संवेदक को समय सीमा में कार्य पूरा करने की चेतावनी दी थी, इसके बावजूद काम में कोई खास तेजी नहीं आई है।</p>
<p><strong>प्रशासन की लापरवाही, संवेदक की अनदेखी</strong><br />स्थानीय निवासी राम मुरारी शर्मा, बाजड़ सरपंच नाथूलाल बैरवा, पूर्व प्रधान नरेन्द्र पूरी ने बताया कि लगभग दो साल से सड़क का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे न केवल दुर्घटनाएं बढ़ी हैं, बल्कि लोगों की सेहत पर भी बूरा असर पड़ा है। प्रशासन ने कई बार संवेदक को सड़क पर पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए थे, ताकि धूल कम हो, लेकिन संवेदक की लापरवाही के कारण पानी का छिड़काव नहीं हो रहा है, और लोग धूल के कारण बीमार हो रहे हैं।</p>
<p><strong>45 करोड़ की सड़क योजना, फिर भी अधूरी</strong><br />तालेड़ा से केशवरायपाटन तक 22.5 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना के लिए राज्य सरकार ने 45 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की थी, और इसका निर्माण कार्य सितंबर 2023 तक पूरा होना था। इस योजना के तहत हर गांव में सीसी सड़क और बीच में डामर सड़क बननी थी, लेकिन संवेदक ने एक साल में केवल कुछ हिस्सों का ही काम पूरा किया है। सड़क के कई हिस्से अभी भी अधूरे पड़े हैं, जिससे लोगों को यात्रा करने में कठिनाई हो रही है।</p>
<p><strong>दुपहिया वाहन चालक परेशान</strong><br />सुवासा, बाजड़, चितावा, छपावदा, जमीतपुरा, रंगपुरिया और नयागांव जैसे क्षेत्रों में डामर सड़क का निर्माण अब भी अधूरा है। सड़क के बीच में जमा हो रही धूल और मिट्टी से दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी हो रही है। खासकर रात के समय, जब भारी वाहनों से उड़ी धूल के कारण दृश्यता बिलकुल कम हो जाती है, तब सड़क हादसों की संख्या बढ़ जाती है। जानकारी के अनुसार, कई लोग धूल से चोटिल हुए हैं और इससे सांस संबंधी बीमारियां भी फैल रही हैं।</p>
<p><strong>सरकारी योजनाओं में अव्यवस्था, अधिकारियों की उपेक्षा</strong><br />मौजूदा स्थिति पर ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिले के बड़े अधिकारी और पदाधिकारी इस रास्ते से गुजरने से बचते हैं। वे अक्सर बूंदी से केशोरायपाटन जाने के लिए कोटा होकर जाते हैं, क्योंकि तालेड़ा से केशोरायपाटन की सड़क खस्ता हालात में है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अधिकारी इस रास्ते से गुजरें तो उन्हें समझ में आएगा कि आम जनता कितनी समस्याओं का सामना कर रही है। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि सरकारी वाहन मिलने की वजह से अधिकारी इस सड़क पर चलने से बचते हैं, क्योंकि इसमें डीजल और पेट्रोल सरकार का खर्च है।</p>
<p><strong>कब होगी सड़क की मरम्मत, कब मिलेगा राहत ?</strong><br />प्रशासन की ओर से कई बार संवेदक पर जुमार्ना भी लगाया गया था, लेकिन इसका असर देखने को नहीं मिला। अब सवाल उठता है कि आखिर प्रशासन इस मुद्दे पर ठोस कदम क्यों नहीं उठा रहा? संवेदक पर कार्रवाई करने और जल्द कार्य पूरा कराने के बजाय, प्रशासन पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। इस लंबे समय से चली आ रही समस्या ने अब स्थानीय लोगों को परेशान कर दिया है, और वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए।</p>
<p><strong>सुवासा निवासी ग्रामीण अंशुल शर्मा</strong> ने बताया केशोरायपाटन और तालेड़ा के बीच में रोजाना 1000 करीब बाइक सवार निकलते हैं जिन्हें हादसे का खतरा रहता है, धूल मिट्टी और रोड पर गिट्टी होने के कारण कहीं बाइक सवार चोटिल हुए हैं।</p>
<p><strong>समाजसेवी सुवासा  निवासी बबलू जांगिड़</strong> ने बताया 2 साल बाद भी सड़क निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है जिस कारण आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, रात्रि में बाईक सवार लोगों को बड़े वाहनों के निकलने के बाद धूल मिट्टी के कारण कुछ नहीं दिखता है, जिस कारण धूल मिट्टी से कई लोगों को अस्थमा की शिकायतें हो चुकी है। </p>
<p><strong>चितावा निवासी ग्रामीण ब्रह्मानंद मीणा</strong> ने बताया 45 करोड रुपए की लागत से सीसी और डामर सडक निर्माण कार्य किया जाना था लेकिन सीसी का कार्य पूरा कर दिया गया है और डामर सड़क का काम अधूरा पड़ा हुआ है। 2 साल बाद भी अधूरी सड़क पूरी नहीं हो पाई है।अधूरी डामर सड़क पर मिट्टी और गिट्टी होने के कारण बड़े वाहन निकालने पर पानी का छिड़काव नहीं होने के कारण धूल मिट्टी उड़ती है जिससे रोजाना अप डाउन करने वाले कर्मचारियों और ग्रामीणों को साथ संबंधित बीमारियां होने लगी है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />संवेदक को जल्द कार्य पूरा करने के लिए निर्देश दे दिए गए हैं और 5 दिन बाद डामरीकरण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा और धूल मिट्टी ना उड़े इसके लिए संवेदक को पानी छिड़काव के लिए निर्देश दिए गए हैं। <br /><strong>- राजाराम मीणा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Nov 2024 15:26:14 +0530</pubDate>
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                <title>निर्माण की निर्धारित अवधि भी निकल चुकी</title>
                                    <description><![CDATA[ सड़क अधूरी होने से 100 गांवों की जनता भुगत रही खामियाजा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-scheduled-construction-period-has-also-passed/article-75907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/trer-(2)13.png" alt=""></a><br /><p>देई। स्टेट हाईवे 34 की जेतपुर से खटकड़ के बीच निमार्णाधीन सड़क मार्ग का कार्य तय अवधि निकलने के बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। जिससे आने जाने वाले 100 गांवों के ग्रामीण और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण 6 साल से इस सड़क का निर्माण पूरा होने की बाट जो रहे है। इस मार्ग से हर रोज आवाजाही करने वाले वाहनधारी भी अधूरी सड़क को लेकर परेशान है। लोगों ने सरकार से इस सड़क का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करवाने की मांग उठाई है। अगर शीघ्र निर्माण पूरा नही होता है तो लोगों को मजबूरन इस सड़क मार्ग के लिए एकबार फिर से आंदोलन करना पड़ेगा।  जेतपुर से खटकड़ तक सड़क निर्माण कार्य दो हिस्सों में है जिसमे जेतपुर की ओर से 8.75 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य 7 अगस्त 2023 को शुरू हुआ था। कार्य 6 अप्रेल 2024 को पूर्ण करना था लेकिन अभी तक कार्य पूर्ण नही हुआ है। वही दूसरे हिस्से में 9.9 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य 29 जुलाई 2023 को शुरू हुआ था और 28 मई 2024 को पूरा करना था।  सड़क निर्माण कार्य पूरा नही होने से क्षेत्र के करीब 100 गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>2880.90 लाख हो चुके है स्वीकृत</strong><br />8.75 किलोमीटर लंबी यह सड़क निर्माण कार्य के लिए 6 करोड़ 90 लाख 4 हजार 693 की राशि के कार्यादेश जारी हुए है। इस सड़क के लिए 2880.90 लाख की राशि स्वीकृत हो चुकी है। लेकिन अब तक निर्धारित समय निकलने के बावजूद इस सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। </p>
<p><strong>ग्रामीणों की यह हंै पीड़ा</strong><br />ग्राम विकास समिति परिषद तलवास सचिव मूलचंद शर्मा ने बताया कि जेतपुर से खटकड़ के मध्य सुगमता से निकला सके इसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग को शीघ्र कार्य पूरा करवाना चाहिए। सड़क मार्ग पर छोटे वाहन वालों को नुकसान उठाना पड़ रहा है वही काफी समय खराब हो रहा है। सड़क निर्माण के लिए पीपल्या मे दो बार चक्काजाम कई बार विरोध प्रदर्शनों के साथ ही क्षेत्र के अलग- अलग स्थानों से ज्ञापन दिए जा चुके है। क्षेत्र के लोग वर्ष 2018 से इस सड़क निर्माण की बाट जो रहे है। </p>
<p>देई निवासी संजय दीवाना ने बताया कि जेतपुर से खटकड़ के बीच लंबे समय से अधूरी सड़क अब परेशानी का कारण बन चुकी है। सार्वजनिक निर्माण विभाग के जिम्मेदारी से तय अवधि में सड़क कार्य पूर्ण करवाना चाहिए।</p>
<p>देई निवासी शिवा शर्मा ने बताया कि अधूरी सड़क से लोगों को आवागमन में बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना कही दुपहिया वाहन सवार चोटिल हो रहे हैं। सरकार को लोगों की समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है जिससे लोगों को आवागमन में समस्या नहीं उठानी पड़े। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />अवधि खत्म हो गई। ठेकेदार से पूरा काम करवाया जायेगा। अवधि खत्म होने पर जो भी कार्रवाही होती है तो सरकारी नियमानुसार कार्रवाही की जायेगी। जल्दी काम पूरा करवाने की कोशिश रहेगी। एक बार अवधि खत्म होने पर तीन माह की अवधि बढती है। अभी संवेदक का पेमेन्ट करना शेष है।<br /><strong>- मुकेश मुरडिया , एक्सईएन  सार्वजनिक निर्माण विभाग , नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Apr 2024 17:10:42 +0530</pubDate>
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                <title>लोकार्पण के चार माह बाद भी अधूरा पड़ा केनाल रोड </title>
                                    <description><![CDATA[उम्मेदगंज गांव के समीप पक्षी विहार होने से इस मार्ग पर डामरीकरण और निर्माण कार्य को लेकर वन विभाग ने आपत्ति दर्ज कराई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canal-road-remains-incomplete-even-after-four-months-of-inauguration/article-66738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दांयी मुख्य नहर के सहारे बन रहे केनाल रोड का काम उद्घाटन के चार महीने बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। नहर के किनारे बन रही इस सड़क के करीब 2 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण कार्य अभी भी अधुरा है। वहीं रायपुरा से उम्मेदगंज तक बनी 5 किलामीटर की सड़क पर 20 से 25 जानलेवा गड्ढे मौजूद हैं जो किसी भी बड़े वाहन को आसानी से पलट सकते हैं। ये सड़क स्टील ब्रिज से उम्मेदगंज तथा कैथून से रामनगर तक बनकर तैयार है लेकिन बीच में छूट रहे मात्र 2 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी बनने को बाकी है। जिस कारण इस रास्ते से गुजरने वाले वाहनों को गड्ढों और धूल मिट्टी का सामना करना पड़ता है। वहीं अधुरे पड़े कार्य के चलते कई वाहन मालिक इस मार्ग का उपयोग करने से भी बचते हैं।</p>
<p><strong>उम्मेदगंज तक बन चुकी सड़क</strong><br />नहर किनारे करीब 15 करोड़ की लागत से बन रही ये सड़क एक ओर स्टील ब्रिज से उम्मेदगंज गांव तो दूसरी ओर कैथून से रामनगर गांव तक बन चुकी है। लेकिन बीच में छूट रहे 2 किलामीटर का कार्य अभी भी पूरा नहीं हुआ है। जिस कारण जूलाई तक 70 फीसदी कार्य पूरा हो जाने के बाद भी इसका 20 फीसदी काम अभी भी बाकी है। इस सड़क का उम्मेदगंज तक 8 किलोमीटर और 10 मीटर चौड़ी सड़क का डामरीकरण हो चुका है। इसके अलावा उम्मेदगंज गांव के निकट इस सड़क पर स्थित ऐनिकट के ऊपर ब्रिज बनना है जिसका कार्य भी अभी तक अधुरा है। यह मार्ग कैथून व सांगोद से र्इंटों के ट्रैक्टर व किसानों के लिए अपनी फसल लेकर आने का माध्यम है जिससे भारी वाहन भी इस सड़क से गुजरते हैं, वहीं उम्मेदगंज गांव के निकट स्थित ऐनिकट पर ब्रिज चौड़ाई कम होने से दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा इस सड़क को नेशनल हाइवे 27 के जोड़ने का काम अभी कुछ तकनीकी खामियों के चलते अटका पड़ा है। </p>
<p><strong>वन विभाग की आपत्ति के चलते रुका था काम</strong><br />उम्मेदगंज गांव के समीप पक्षी विहार होने से इस मार्ग पर डामरीकरण और निर्माण कार्य को लेकर वन विभाग ने आपत्ति दर्ज कराई थी। जिस वजह से मार्ग पर पड़ने वाले कुछ किलोमीटर के हिस्से और एनीकट के उपर ब्रिज बनाने का कार्य अटक गया था। निर्माता कम्पनी के अधिकारियों ने बताया कि वन विभाग का कहना था कि इस मार्ग पर पक्का निर्माण होना पास ही स्थित पक्षी विहार में रहने वाले पक्षियों को प्रभावित करेगा, जिसके लिए विभाग द्वारा अनुमति आवश्यक है। कम्पनी के अनुसार पिछले महीने ही वन विभाग की ओर से इसे लेकर क्लीयरेंस मिलने से अब निर्माण हो सकेगा।</p>
<p><strong>जो बन चुकी उस पर गड्ढे ही गड्ढे</strong><br />उम्मेदगंज से तो सड़क अभी बनी ही नहीं है लेकिन जो सड़क बन चुकी है उस पर भी हर 10 से 20 मीटर पर एक गड्ढा मौजूद है और कुछ गड्ढों की लम्बाई और चौड़ाई तो इतनी बड़ी है कि उनमें ट्रक और ट्रैक्टर के पहिए तक फंस जाएं। रात के समय में इस सड़क कई बार हादसे भी हो चुके हैं लेकिन गड्ढे अभी वैसे ही बरकरार हैं। </p>
<p><strong>शहर का ट्रैफिक होगा कम</strong><br />शहर से ट्रैफिक कम करने के उद्देश्य से इस सड़क निर्माण किया जा रहा है जिससे कैथून की तरफ जाने वाला ट्रैफिक शहर के अंदर के स्थान पर नहर के सहारे वाली सड़क से बाहर निकल जाए। शहर से करीब हजारों वाहन एरोड्राम से डीसीएम व रायपुरा के रास्ते से कैथून की तरफ जाते हैं जिससे शहर की आंतरिक सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ जाता है। इस सड़क के निर्माण के बाद ये सारे वाहन शहर में अन्दर ना जाकर स्टील ब्रिज से सीधे कैथून निकल पाएंगे। वहीं इस सड़क के निर्माण से समय की भी बचत होगी और पहले की अपेक्षा कम समय में कैथून और सांगोद पहुंचा जा सकेगा। साथ ही ये सड़क धाकड़खेड़ी गांव के निकट नेशनल हाइवे संख्या 27 से भी कनेक्ट होगी जिसका सबसे ज्यादा फायदा कैथून, डीसीएम, कंसुआ, थेकड़ा, छावनी व रायपुरा के निवासियों को होगा जो हाइवे संख्या 27 पर पहुंचने के लिए जगपुरा तक नहीं जाकर इसी इंटरचेंज से पहुंच पाएंगे।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />मेरा गांव सांगोद के पास घानाहेड़ा है जहां आने जाने के लिए कैथून का ही मार्ग है, केनाल मार्ग पूरा नहीं बनने के कारण अभी भी अंदर होकर आना जाना पड़ता है। अगर इसका काम पूरा हो जाए कैथून तक कम समय में पहुंचा जा सकेगा।<br /><strong>- अक्षय पारेता, प्रेम नगर</strong></p>
<p>अभी इसका काम पूरा नहीं होने से कैथून शहर के अंदर होकर आना जाना पड़ता है गांव से आना जाना रहता है और गांव से भामाशाह मंडी में फसल भी लाना रहता है। अंदर होकर आने में ट्रैफिक के कारण बहुत समय लगता है।<br /><strong>- खिलोन श्याम, अंनतपुरा</strong></p>
<p>कैथून तक बने इन मार्ग पर अभी कम ट्रैफिक है बनने के बाद अच्छा ट्रैफिक होगा और कोटा से कैथून जाने में भी कम समय लगेगा हम तो 4 महीने से इसके बनने का इंतजार कर रहे हैं ताकी कैथून तक सफर आसान हो।<br /><strong>- गोविंद सुमन, डीसीएम</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है...</strong><br />पक्षी विहार की आपत्ति के चलते इस हिस्से का काम रूका पड़ा था। जिसे दूर कर लिया गया है। सड़क के डामरीकरण का काम सर्दी के कारण रूका हुआ है जिसे मौसम के ठीक होते ही शुरू कर दिया जाएगा। पुलिया का काम भी नहर में छोड़े गए पानी के चलते बंद था जिसे भी कुछ दिनों में बनाकर तैयार कर लिया जाएगा।<br /><strong>- मान सिंह मीणा,सचिव, यूआईटी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jan 2024 18:53:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>खस्ताहाल सड़क दे रही राहगीरों को दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[ठेकेदार द्वारा कोई संकेत चिन्ह नहीं लगाने कारण वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-dilapidated-road-is-causing-pain-to-the-pedestrians/article-57750"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/khastahaal-sadak-de-rhi-rhagiro-ko-drd...raipur,-jhalawar-news-22-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। रायपुर चंवली ,कोटा इंदौर, मार्ग से हिम्मतगढ़ धरोनिया 20 किलोमीटर तक साढ़े 4 साल से बन रहे एमडीआर श्रेणी के सीसी रोड पर काम अधूरा पड़ा था। इसकी वितरित स्वीकृति आने के बाद दोबारा अधूरा काम शुरू हो जाएगा। डिवीजन बनाकर विभाग में भेज रखा था, लेकिन वित्तीय स्वीकृति के भाव में अधूरा काम पूरा नहीं हो रहा था। जिसके चलते अधूरे सड़कों पर निर्माण कार्य सूचना बोर्ड नहीं लगाने के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो कई वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे है। बारिश के दिनों में हिम्मतगढ़ डैम पर जाने वाले पर्यटकों को भी इस रोड का फायदा नहीं मिला है । यह सड़क बन जाती तो चंवली से पिड़ावा जाने के लिए वाहन चालकों को मध्यप्रदेश सोयत होकर नहीं जाना पड़ता । जिसके कारण उनको अतिरिक्त 6 किलोमीटर ज्यादा जाना पड़ता है। चंवली से धरोनीया तक 15 गांव के ग्रामीणों को पिडावा व झालावाड जाने के लिए एमएमडीआर सड़क निर्माण प्रारंभ हुई थी तो ग्रामीणों में खुशी झलक रही थी, लेकिन 4 साल बाद भी इसका निर्माण कार्य अधूरा पड़ा रहने से एम डीआर सड़क का लाभ जनता को नहीं मिला है। एमडीआर श्रेणी के सी सी रोड का वाहन चालकों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। ठेकेदारों की लापरवाही व अधिकारियों की उदासीनता के चलते ठेकेदार ने कई जगह पुलों का निर्माण अधूरा छोड़ रखा है। तेलियाखेड़ी, हिम्मतगढ़, धरोनिया ,बानोर गांव के समीप बन रही पुलिया का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, तो कई जगह सीसी रोड के पास पटरी नहीं बनाने के कारण रात्रि में वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं । ठेकेदार द्वारा कोई संकेत चिन्ह नहीं लगाने कारण वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। कोटा इंदौर हाइवे से चंवली रोड पर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। 2018 मे संवेदक द्वारा कार्य प्रारंभ किया गया था। जिसकी नवंबर 2019 मे 38 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य पूरा होना था। कछुआ चाल से चलते हुए ठेकेदार द्वारा पुलिया सीसी रोड का काम भी बीच में अधूरा पड़ा है। पुलिया का निर्माण अधुरा नहीं होने कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p>4 साल में भी ठेकेदार ने एमडीआर सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया। जिससे वाहन चालकों को पिड़ावा जाने के लिए इस सड़क का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी रात को अधूरे पड़े सीसी रोड पर कोई चिन्ह नहीं लगाने के कारण वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। <br /><strong>- रामकरण दांगी, पूर्व प्रधान  </strong></p>
<p>पुलिया निर्माण में दुबारा बजट के लिए डेविसन बनाकर जयपुर भेजा था। जिसकी वित्तिय स्वीकृति आ गई है। शीघ्र ही काम शुरू कर दिया जाएगा। <br /><strong>- ऋषिकेश मीणा, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 15:31:41 +0530</pubDate>
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                <title>साढ़े चार साल से अधूरा पड़ा है सीसी रोड</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर-चंवली-कोटा-इंदौर मार्ग से हिम्मतगढ़-धरोनिया 20 किलोमीटर तक साढ़े 4 साल से बन रहे एमडीआर श्रेणी के सीसी रोड पर काम अधूरा पड़ा हुआ है। सड़क पर जगह-जगह हो रहे गड्ढों में बरसाती पानी भरने व सूचना बोर्ड नहीं लगाने के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/cc-road-is-incomplete-for-four-and-a-half-years/article-15441"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/adhura-cc-road(raipur).jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। रायपुर-चंवली-कोटा-इंदौर मार्ग से हिम्मतगढ़-धरोनिया 20 किलोमीटर तक साढ़े 4 साल से बन रहे एमडीआर श्रेणी के सीसी रोड पर काम अधूरा पड़ा हुआ है। सड़क पर जगह-जगह हो रहे गड्ढों में बरसाती पानी भरने व सूचना बोर्ड नहीं लगाने के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालक आए दिन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार चमोली से दरभंगा तक 15 गांवों के ग्रामीणों को पिड़ावा व जलवार जाने के लिए एमडीआर सड़क बन रही थी। ग्रामीण इसको लेकर काफी खुश थे। लेकिन साढ़े 4 साल बाद भी इसका निर्माण कार्य अधूरा पड़ा रहने से एमडीआर सड़क का लाभ जनता को नहीं मिला है।</p>
<p>एमडीआर श्रेणी के सीसी रोड का वाहन चालक उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। गत सरकार ने रायपुर से पिड़ावा जाने वाले वाहन चालकों को एमडीआर सड़क की सौगात दी थी। लेकिन ठेकेदार ने कई जगह पुलों का निर्माण अधूरा छोड़ रखा है। तेलियाखेड़ी, हिम्मतगढ़, धरोनिया, बानोर गांव के समीप बन रही पुलिया का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। कई जगह सीसी रोड के पास पटरी नहीं बनाने के कारण रात्रि में वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। ठेकेदार द्वारा कोई संकेतक नहीं लगाने कारण वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। कोटा इंदौर हाइवे से चंवली रोड पर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। <br /><br /><strong>नहीं मिल रहा सड़क का लाभ</strong><br />पूर्व प्रधान रामकरण दांगी ने बताया कि साढ़े 4 साल में भी ठेकेदार ने एमडीआर सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया। जिससे वाहन चालकों को पिड़ावा जाने के लिए इस सड़क का लाभ नहीं मिल पा रहा है। <br /><br /><strong>2019में होना था काम पूरा</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि 2018 में संवेदक द्वारा कार्य प्रारंभ किया गया था। जिसकी नवंबर 2019 मे 38 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य पूरा होना था। कछुआ चाल से चलते हुए ठेकेदार द्वारा पुलिया सीसी रोड का काम भी बीच में अधूरा छोड़ दिया गया है। पुलिया का निर्माण अधूरा होने के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। <br /><br /><strong>बजट आते ही शुरू करेंगे काम</strong><br />अभी मुझे रायपुर का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। पुलिया निर्माण में बजट के लिए प्रस्ताव बनाकर जयपुर भेज रखा है। बजट आते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। -<strong>विक्रम महरानीय, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Jul 2022 16:55:14 +0530</pubDate>
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                <title>दो माह पहले खोदी नाली का काम अब तक अधूरा पड़ा </title>
                                    <description><![CDATA[दो माह पूर्व खोदी गई नाली का कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। पक्की नाली अभी भी नही बनी हुई है, इस में नजदीक बारिश होने के कारण ग्रामीण लोग परेशान हो रहे हैं कि बारिश के दिनों में यह नाली गहरे गड्ढे में तब्दील हो जाएगी। जिससे आने जाने वाले राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-work-of-the-drain-dug-two-months-ago-was-still-incomplete/article-12032"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/2-maah-pehle-khodi-naali-ka-kaam-adhura.jpg" alt=""></a><br /><p>देवरी। अंधेर नगरी चौपट राजा, टकासेर भाजी टका सेर खाजा यह कहावत यहां सिद्ध होती है कि दो माह पूर्व खोदी गई नाली का कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। ग्राम पंचायत भोयल में एक नाली निर्माण के लिए और रास्ता खराब पर खरंजा करवाने के लिए भोयल गांव के लोगों ने सन 2020-2021 में  पंचायत भोयल पर जाकर ग्राम सभा की बैठक में एक प्रस्ताव दिया जो प्रस्ताव पंचायत कार्मिकों ने रजिस्टर में लिखा था। जबकी ग्रामीणों का आरोप है कि हम लोगो ने पंचायत मुख्यालय पर जाकर इस संदर्भ में कई बार लिखित में सूचना दी गई है। हालात अभी भी जस के तस बने हुए है। जबकि यह कार्य रास्ते पर खरंजा एवं पक्की नाली निर्माण कार्य 2021- 2022 में स्वीकृत हो गया। जिसकी स्वीकृत राशि 12.50 लाख रुपए की है। यह कार्य के ठेकेदार के दौरान नाली खुदाई निर्माण कार्य करीब दो माह पूर्व करा दिया लेकिन पक्की नाली अभी भी नही बनी हुई है, इस में नजदीक बारिश होने के कारण ग्रामीण लोग परेशान हो रहे हैं कि बारिश के दिनों में यह नाली गहरे गड्ढे में तब्दील हो जाएगी। जिससे आने जाने वाले राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ेगी।<br /><br />ग्रामीण मावेश मेहता, राजमल मेहता, नवसिंह मेहता, सरदार सहरिया, भगवान सिंह जाटव ,राजमल जाटव ,शिवचरण मेहता, सतीश मेहता,  बीरेंद्र सहरिया, सरदार शिकारी, चंदन शिकारीआदि ग्रामीणों ने बताया कि इस कार्य के लिए हमने बहुत बार ग्राम पंचायत मैं जाकर लिखित रूप से ग्राम पंचायत को अवगत करा रखा है। उसके बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। इन गहरे गड्ढों में गिरकर राहगीरों को चोटिल होने का अंदेशा लगा रहता है।<br /><br />कच्ची नाली हमारे बिना पूछे किसी ने खोद दी। जिसकी जानकारी हम लोगों को बाद में मिली। इस संदर्भ में मैंने विकास अधिकारी छुट्टनलाल मीणा से भी बात की और साथ में ही कृष्ण कुमार मंगल ने बताया कि इस कार्य की फाइनल वित्तीय स्वीकृति नहीं निकली। फाइनल वित्तीय स्वीकृति निकलते ही इस कार्य को जून के अंत में कराने की बात कहीं। <br /><strong>- कृष्ण कुमार मंगल, ग्राम विकास अधिकारी।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 16:01:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मदर्स-डे : ‘मां’ घर की धुरी, अधिकारों में अधूरी</title>
                                    <description><![CDATA[यह भी चिंतनीय है: 54.4 फीसदी एनीमिक, 19 फीसदी का बीएमआई खराब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mother-s-day--mother-is-the-axis-of-the-house--incomplete-in-rights/article-9326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/131.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में महिलाओं की आबादी 3.80 करोड़ यानी 48 फीसदी  है। करीब 2.50 करोड़ मांए है। वैसे तो मां के लिए कोई दिन तय नहीं हो सकता है, क्योंकि परिवार उसके बिना हर दिन अधूरा ही होता है। उसकी जिम्मेदारियां असीम होती है। लेकिन अधिकार इक्कसवीं सदी में भी अधूरे से ही नजर आते हैं। घर को संभालने में तो वे सदियों से संपूर्ण है, लेकिन अधिकारों-सशक्तिकरण में अपूर्ण सी ही हैं।</p>
<p><br />नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे रिपोर्ट की माने तों प्रदेश में 73.4 फीसदी घर की महिलाओं के पास संपत्ति के नाम पर ना जमीन है और ना ही कोई घर। आज भी इन पर पुरूषों का ही एकाधिकार है। 20.4 फीसदी महिलाओं के बैंक बैलेंस जीरों है, क्योंकि इने खाते तक नहीं है। गांवों में 21 फीसदी और शहरों में 18.3 फीसदी के बैंक खाते नहीं। इस डिजिटल युग में भी आधी 49.8 फीसदी महिलाओं के पास मोबाइल तक नहीं है। गांवों में 54.7 फीसदी और शहरों में 34.5 फीसदी ऐसी महिलाएं हैं। 2011 के अनुसार साक्षरता दर भी 52.66 फीसदी ही है। हालांकि 2018-19 में एनएसओ के अनुसार यह 57.6 फीसदी हुई है। लेकिन अभी भी 42.4 फसीद असाक्षर है।<br /><br /><strong><span style="background-color:#ff00ff;color:#ffff99;">यह भी चिंतनीय है: </span>54.4 फीसदी एनीमिक, 19 फीसदी का बीएमआई खराब</strong><br />प्रदेश में 49 साल की आधी से ज्यादा 54.4 फीसदी महिलाएं ऐसी है जिनमें खून की कमी यानी एनीमिक हैं। सही से पोषक खाद पदार्थ नहीं खा रही हैं। गांवों में 55.7 फीसदी और शहरों में 49.9 फीसदी महिलाएं सर्वे में ऐसी मिलीं। वहीं 19.6 फीसदी महिलाआें का वजन उसकी उम्र-लंबाई के मुताबिक कम है। गांवों में 21.3 और शहरों में 14 फीसदी महिलाओं का बॉडी मॉस इंडेक्स तय मापदंडों से कम है।<br /><br /><strong>सबके लिए त्याग-समर्पण लेकिन हिंसा की शिकार</strong><br />प्रदेश में 18-49 साल की शादीशुदा महिलाओं में से 24.3 फीसदी ऐसी हैं जो जीवन में कभी ना कभी घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। गांवों में 24.9 फीसदी और शहरों में 22.4 फीसदी ऐसी महिलाएं हैं।<br /><br /><strong>बाल विवाह से उड़ान अधूरी</strong><br />गांवों में 28.3 और शहरों 15.1 फीसदी बेटियां ऐसी है जिनके बाल विवाह हो रहे हैं और घर की जिम्मेदारियों का बोझ वे उठा रही हैं। गांवों में तो 4.2 फीसदी बेटियां 19 साल से पहले ही मां बन जाती है। शहरों में भी ऐसी मांओ की संख्या 1.8 फीसदी है। <br /><br /><strong>मां बनते ही 2886 दम तोड़ती हैं</strong><br />प्रदेश में हर साल 2886 महिलाएं मां बनते ही मर जाती हैं। परिवार की जिम्मेदारियां के चलते खुद के स्वास्थ्य से बेफ्रिक, परिजनों की चिकित्सकी सार-संभाल में बरती लापरवाही के कारण 46 फीसदी गर्भवती खून की कमी की शिकार हो जाती है। प्रसव के समय इसकी वजह से उनकी जान पर बन आती है। हर साल 17.60 लाख महिलाएं मां बनती हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि 44.7 फीसदी महिलाओं को तो प्रसव पूर्व परिजन चिकित्सकीय परामर्श को अस्पताल भी नहीं ले जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 May 2022 11:44:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कम सैलरी, अधूरी ट्रेनिंग, कमजोर मनोबल, रूसी सैनिकों की बगावत का इतिहास पुराना, यूक्रेन में भी नहीं मान रहे ऑर्डर्स</title>
                                    <description><![CDATA[कमजोर मनोबल के साथ कब तक लड़ेंगे रूसी सैनिक?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/kyiv--moscow--low-salary--incomplete-training--weak-morale--history-of-uprising-of-russian-soldiers-is-old--orders-are-not-being-obeyed-even-in-ukraine/article-7319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/sainik.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव/मॉस्को। हाल के दिनों में ऐसी खबरें आई हैं कि यूक्रेन में आगे बढ़ने से रोक दी गई और कई सैन्य नाकामियों का सामना कर रही रूसी सेना ने अपने खुद के उपकरण नष्ट कर दिए हैं और उसने युद्ध लड़ने और आदेशों का पालन करने से इनकार कर दिया है। एक खबर में यहां तक कहा गया है कि उन्होंने अपने ही कमांडर पर हमला कर दिया। नाटो का अनुमान है कि दो महीने से भी कम वक्त में इस संघर्ष के दौरान करीब 15,000 रूसी सैनिक मारे गए है, जो अफगानिस्तान में नौ वर्षों में मारे गए सोवियत संघ (अब विघटित हो चुके) के सैनिकों के बराबर है। ऐसा बताया जा रहा है कि सैनिकों का मनोबल गिर गया है। ऐसी स्थिति में रूसी सैनिकों के विद्रोह करने की संभावना है। लड़ाई छोड़कर भागने से सेना का शारीरिक और मनोवैज्ञानिक उत्साह कम हो जाएगा, जबकि पाला बदलने या दुश्मन की सेना में शामिल होने से यूक्रेन को मदद मिल सकती है। यह पहली बार नहीं है जब रूसी या सोवियत सैनिकों ने किसी संघर्ष में आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है। रूस-जापान युद्ध के दौरान रूसी सैनिकों ने जून 1905 में विद्रोह कर दिया था जो इतिहास की प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है।<br /><br /><strong>पहले भी बगावत कर चुके हैं रूसी सैनिक</strong><br />सुशिमा की लड़ाई में रूसी नौसेना का ज्यादातर बेड़ा नष्ट हो गया था और उसके पास कुछ गैर-अनुभव वाले लड़ाके बचे थे। बांसा मांस परोसे जाने समेत काम करने की खराब स्थितियों का सामना कर रहे 700 नाविकों ने अपने अधिकारियों के खिलाफ ही विद्रोह कर दिया था। द्वितीय विश्वयुद्ध में जोसेफ स्टालिन ने आत्मसमर्पण करने की ओर बिल्कुल बर्दाश्त न करने वाली नीति लागू करते हुए सैनिकों के बीच आज्ञाकारिता सुनिश्चित करने की कोशिश की थी। चेचन्या के साथ रूस के पहले संघर्ष (1994-96) में बड़ी संख्या में सैनिक जंग का मैदान छोड़कर भाग गए थे।<br /><br /><strong>कमजोर मनोबल के साथ कब तक लड़ेंगे रूसी सैनिक?</strong><br />युद्ध में पाला बदलना और मैदान छोड़कर भागना आम है। युद्ध की मुश्किलें, लड़ाई में खराब प्रदर्शन और युद्ध की वजह की वैचारिक प्रतिबद्धता के कम होने से सैनिक जंग का मैदान छोड़कर भाग सकते हैं। लेकिन रूसी सैनिक पहले ही मनोबल गिरने और सहयोग न मिलने की स्थिति को महसूस कर रहे हैं। अध्ययन से पता चलता है कि सैनिकों का मनोबल कम है, खासतौर से जिन्हें आधुनिक तकनीक नहीं आती हैं।<br /><br /><strong>अमेरिका की तुलना में 200 फीसदी कम वेतन पाते हैं रूसी सैनिक</strong><br />ऐसी खबरें हैं कि रूसी सेना अपनी संरचना में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है लेकिन इसके बावजूद रूस की अपनी सेना ने 2014 में बताया कि उसके 25 प्रतिशत से अधिक कर्मी अपनी इंफेंट्री के उपकरण नहीं चला पाए। हालांकि, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बदलावों के नतीजन सेना का बजट बढ़ गया लेकिन सैनिकों की तनख्वाह नहीं बढ़ी। अनुबंधित सैनिकों को उनके अमेरिकी समकक्षों के मुकाबले 200 प्रतिशत कम वेतन दिया जाता है।<br /><br /><strong>अपने सैनिकों का दिल नहीं जीत पा रहा रूस</strong><br />इन सभी कारणों से सैनिकों का मनोबल गिरा है और पाला बदलने तथा मैदान छोड़कर भागने की आशंका भी बढ़ी है। इससे निपटने के लिए रूसी जनरल अग्रिम मोर्चे पर जाकर लड़ रहे हैं ताकि सैनिकों को प्रोत्साहित किया जाए। इसके कारण कम से कम सात जनरल की मौत हो गई है, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से रूसी सेना में जनरलों की सबसे अधिक मृत्यु दर है। रूस न केवल यूक्रेन के लोगों के दिल और दिमाग जीतने में नाकाम रहा है, बल्कि अब वह अपने सैनिकों का मन जीतने के लिए संघर्ष करता प्रतीत हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 13:09:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर के गुलाल गोटे बिना अधूरी लगती है होली</title>
                                    <description><![CDATA[देश के कई राज्यों और विदेशों में भी है डिमांड ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/holi-seems-incomplete-without-the-gulal-gote-of-jaipur--the-work-of-making-gulal-gota-starts-by-planting-holi-danda--there-is-demand-in-many-states-of-the-country-and-also-abroad/article-5169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/gulal.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। होली आने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन बाजारों में ऐसे रंगों की भरमार हो गई है जो त्वचा, आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। हालांकि खाद्य पदार्थों में मिलावट को नियंत्रित करने के उपाय हैं, लेकिन हानिकारक रसायनों वाले रंगों को रोकने के लिए कम प्रयास किए हैं। हर साल एलर्जी और श्वसन संबंधी शिकायत के सैकड़ों मामले सामने आते हैं। प्रशासन उन मिलावतकर्ताओं पर नजर रखने के लिए भी तैयार है। जैविक रंग अच्छी आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। ग्राहक अक्षत मदान ने कहा कि मेरे लिए इतना पैसा खर्च करना संभव नहीं है, ये रंग सस्ते भी होने चाहिए। शहर के मनिहारों का रास्ता के मुस्लिम परिवार जो लाख की चूड़ियां बनाने में शामिल थे, वे भी जड़ी-बूटियों के रंगों से भरा गुलाल गोटा बनाने में लगे हुए हैं। इन परिवारों को उस तरह की बिक्री नहीं मिल रही है जैसी 1990 के दशक तक मिलती थी। यह लाल और हरे गोटा का उपयोग व्यापारिक और राज घरानों द्वारा उपहार पैक के लिए किया जाता है या यह हमारे मंदिरों में। गुलाल गोटे का उपयोग 300 से अधिक वर्षों से होली समारोह के दौरान किया जाता है। हालांकि होली रंगों की प्रचुरता के साथ पिंकसिटी में गुलाल गोटा भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है।<br /><br /><span style="background-color:#00ff00;"><strong>कोरोना के बाद अब मिली राहत</strong></span><br />गोटे के निर्माता कोरोना काल में बहुत परेशान थे। हालांकि अब आमजन को कुछ निजात मिली है, जिससे बाजारों और त्योहारों में रोनक देखने को मिलेगी। जयपुर के मनिहारों के रास्ता में महिला गुलाल गोटा निर्माता हिफाकत सुल्तान ने बताया आज गुलाल गोटे के बहुत कम लेने वाले हैं। लाख की चूड़ियां बनाने के अलावा गुलाल गोटा की तैयारी होली उत्सव के लिए हमारे पारंपरिक शाही परिवार से रहे हैं। यह अंदर से खाली है और गुलाल का नेतृत्व किया जाता है। इस गुलाल गोटे को लोगों पर फेंकते है, जब यह टूट जाता है तो गुलाल फैल जाता है।<br /><br /><span style="color:#ff6600;background-color:#ffff99;"><strong>यह पारंपरिक काम, लेकिन अब आकर्षक नहीं</strong></span><br />विक्रेता अमजद ने बताया कि बिक्री में गिरावट पहले से थी। अब रहा सहा व्यापार कोरोना से ठप हो गया। परिवारों की युवा पीढ़ी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक नहीं है। वे पढ़ाई में हैं और नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हम उन्हें सीमित करने के पक्ष में भी नहीं हैं। यह पारंपरिक काम है, जो अब आकर्षक नहीं है।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff00ff;"><strong>1990 के बाद से नहीं मिल रहे हैं पर्याप्त गुलाल गोटे के ग्राहक</strong></span><br /><br />    <span style="background-color:#ffff99;color:#ff00ff;"><strong>ऐसे बनाता है गुलाल गोटा</strong></span> <br />जयपुर का गुलाल गोटा लाख से बनाता है। करीब 2.3 ग्राम लाख की छोटी-छोटी गोलियों को एक बांसुरीनुमा नलकी में लगाकर फूंक मारते हुए घुमाया जाता है। धीरे-धीरे यह गुब्बारे की तरह फूल जाता है। फिर धीरे से इसको नलकी में से निकालकर पानी भरे हुए बर्तन में रख दिया जाता है। बाद में प्राकृतिक सुगंधित गुलाल भरी जाती है।</p>
<p><br />   <strong> <span style="background-color:#ffff99;color:#008000;">जयपुर स्थापना से चली आ रही परंपरा</span></strong><br />1727 में जब महाराजा जयसिंह द्वितीय ने जयपुर की स्थापना की थी। उस समय शाहपुरा के लखेर गांव से आमेर आए हुए इन कारीगरों के पूर्वज को मनिहारों के रास्ते में बसाया था। तब से आज तक यह गुलाल गोटा बनाने वाले कारीगर इस काम को करते आ रहे हैं। ये परिवार गुलाल गोटा बनाने का काम होली का डांडा रोपने से करते हैं।</p>
<p><br />   <span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"> <strong>उपहार में देने का बढ़ा प्रचलन</strong></span> <br />आजकल जयपुरवासी दूसरे शहरों में रहने वाले अपने संबंधियों को गुलाल गोटे के पैकेट उपहार स्वरूप भेजते हैं। यहां से भी कुछ लोग ऐसे हैं जो कि गुलाल गोटा खरीदकर दूसरे शहरों में होली मनाते हैं। गुलाल गोटा अहमदाबाद, सूरत, बड़ोदरा, मुबंई, नागपुर, पुणे, आगरा, मथुरा, वृंदावन जैसी जगहों पर भेजा जा रहा है। वहीं विदेशों में अमरीका, स्वीटजरलैण्ड, आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, इलैण्ड जैसे देशों तक लोग इसे ले जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Feb 2022 12:00:37 +0530</pubDate>
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                <title>पिछले बजट के संकल्प अधूरे, घोषणापत्र के वादे भी पूरे नहीं: पूनिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजस्थान सरकार के आगामी बजट से पूर्व घेरा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने पिछले बजट में लिए गए 7 संकल्पों को अभी तक पूरा नहीं किया है और ना ही चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों पर अच्छे से अमल हुआ है। </p>
<p><strong>इतिश्री कर ली</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले बजट में सरकार ने 7 संकल्प लिए थे जिसमें से पहला संकल्प निरोगी राजस्थान था, लेकिन राजस्थान में केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना को पूरे कोविड काल मे लागू नहीं किया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/last-budget-s-resolutions-incomplete--manifesto-promises-not-even-fulfilled--satish-poonia/article-4771"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/bjp.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजस्थान सरकार के आगामी बजट से पूर्व घेरा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने पिछले बजट में लिए गए 7 संकल्पों को अभी तक पूरा नहीं किया है और ना ही चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों पर अच्छे से अमल हुआ है। </p>
<p><strong>इतिश्री कर ली</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले बजट में सरकार ने 7 संकल्प लिए थे जिसमें से पहला संकल्प निरोगी राजस्थान था, लेकिन राजस्थान में केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना को पूरे कोविड काल मे लागू नहीं किया गया। वहीं जनता क्लिनिक के नाम पर 172 क्लिनिक खोलने का वादा भी पूरा नहीं हुआ । कुछेक क्लिनिक खोल कर इसमें इतिश्री कर ली गई। वहीं दूसरा संकल्प था कि किसानों को संपन्न बनाया जाएगा। लेकिन न तो किसानों की कर्ज माफी पूरी हुई और ना ही किसानों को बिजली की दरों से राहत दी गई। किसान प्रदेश में लगातार आत्महत्या कर रहे हैं।  इसी तरह अन्य संकल्पों में युवाओं ,महिलाओं बेरोजगारों इत्यादि पर बात की गई थी। लेकिन बेरोजगारों को न तो बेरोजगारी भत्ता मिला और ना ही युवाओं को पूरी भर्तियां दी गई, जो कि बजट में घोषित की गई थी। </p>
<p><strong>आधे वादों पर भी अभी तक काम नहीं हुआ: पूनिया</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि 70 फीसदी वादे चुनावी घोषणा पत्र के पूरे हो गए हैं। लेकिन उनका ठीक से विश्लेषण करेंगे तो आधे वादों पर भी अभी तक काम नहीं हुआ है। उन्होंने मांग की है कि बजट में मुख्यमंत्री किसानों की पूर्ण कर्ज माफी की घोषणा करें ।प्रदेश की कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने को लेकर कदम उठाएं और प्रदेश के 16 लाख से अधिक बेरोजगारों को भत्ता मुहैया करें। उन्होंने रीट पेपर प्रकरण में भाजपा के आगामी दिनों में बजट सत्र के दौरान आंदोलन की रणनीति को लेकर कहा कि 23 फरवरी को बजट के दिन ही तय किया जाएगा कि भाजपा का आगामी रुख इसे लेकर क्या रहेगा। पार्टी के आंदोलनों में कुछ विधायकों के नहीं आने को लेकर उन्होंने कहा कि जो विधायक आंदोलन के दौरान नहीं आते हैं वह अपना व्यक्तिगत नहीं आने का कारण पार्टी को पहले बता देते हैं। इसलिए इसमें कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे और सांसद दुष्यंत सिंह के घर पर भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा तोड़फोड़ को लेकर कहा कि मामले में जांच रिपोर्ट अभी अधूरी है उसमें रिपोर्ट आते ही पार्टी आलाकमान के निर्देश अनुसार आगे का कदम उठाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Feb 2022 14:42:15 +0530</pubDate>
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