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                <title>mafia - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>mafia RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अवैध खनन पर कार्रवाई करने पहुंची तीन विभागों की टीम पर पथराव, कई अधिकारी चोटिल, 4 आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[बू नरावता गांव में अवैध खनन पर कार्रवाई करने पहुंची पुलिस और खनिज विभाग की टीम पर माफियाओं ने हमला कर दिया। एसडीएम ने वाहन और जेसीबी जब्त कर चार आरोपियों को पकड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/stones-pelted-on-the-team-of-three-departments-which-arrived/article-138302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/mundwa.png" alt=""></a><br /><p>मूण्डवा। निकटवर्ती बू नरावता  गांव में अवैध खनन पर कार्रवाई करने गए प्रशासन पर खनन से जुड़े लोगों ने पथराव कर दिया। दोपहर करीब डेढ़ बजे खनिज विभाग राजस्व विभाग व पुलिस विभाग की ओर से अवैध माइनिंग होने की सूचना पर कार्रवाई करने के लिए तीनों विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम के खान पर पहुंचते ही मौके पर काम करने वाले लोग इधर-उधर भाग गए, कुछ वाहन और कुछ लोग मौजूद थे। करीब पौने 3 बजे एक स्थान से लोग एकत्रित होकर वाहन ललेकर खान पर आ गए और अचानक वहां खड़ेअधिकारियों व पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।</p>
<p>अधिकारियों व पुलिस ने गाड़ियों के पीछे छिपकर जान बचाई। बदमाशों ने टीम के वाहनों को जोरदार टक्कर भी मारी। सूचना पर एसडीएम व सीआई सुरेश चौधरी मय जाब्ता वहां पहुंचे और मौके से एक डंपर, एक जेसीबी व 9 बाइक जब्त करचार व्यक्तियों को पुलिस ने पकड़ लिया,  जिनसे पूछताछ कर रही है। जानकारी के अनुसार अधिकारियों के मामूली चोटें आई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:46:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>असर खबर का - रामगढ़ टाइगर रिजर्व से लकड़ियां चोरी करवाने के मामले में रेंजर निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[ जांच में नवज्योति की खबर पर लगी मुहर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-impact-of-the-news---ranger-suspended-in-the-case-of-getting-wood-stolen-from-ramgarh-tiger-reserve/article-122154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/1ne1ws5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से माफियों को ट्रक भरकर लकड़ियां चोरी करवाने के मामले में जेतपुर रेंज के रेंजर चंद्रकांत शर्मा को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन, बल प्रमुख) ने बुधवार को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, रेंजर शर्मा के खिलाफ विस्तृत जांच करवाई जाएगी। निलंबन काल में इनका मुख्यालय संभागीय मुख्य वन संरक्षक कोटा में रहेगा। </p>
<p><strong>यह था मामला :</strong> रामगढ़ टाइगर रिजर्व की जेतपुर रेंज में पापड़ा चौक है, जो कोर एरिया है। जहां वनकर्मियों ने माफियाओें से मिलीभगत कर दिनदहाड़े ट्रकों में बबूल की लकड़ियां  चोरी करवाई। जबकि, इस जगह पर टाइगर का मूवमेंट रहता है। अपने स्वार्थ के लिए वनकर्मियों ने टाइगर की सुरक्षा भी दांव पर लगाई। भ्रष्टाचार का यह खेल पिछले ढाई महीने से चल रहा था। दैनिक नवज्योति ने सिलसिलेवार खबर प्रकाशित कर जघन्य वन अपराध का पर्दाफाश किया था।  </p>
<p><strong>नवज्योति ने उजागर किया था मिलीभगत का खेल</strong><br />दैनिक नवज्योति ने गत 15 जुलाई को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक भरकर बेची जा रही लकड़ियां...शीर्षक से खबर प्रकाशित कर मिलीभगत का खेल उजागर किया था। मामले की जांच प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन्यजीव प्रतिपालक शिखा मेहरा के आदेश पर सीसीएफ वन्यजीव टी-मोहनराज ने मामले की जांच की थी। जिसमें रेंजर की माफियाओं के साथ मिलीभगत पाई गई। मामले में फोरेस्टर को भी दोषी माना गया है। </p>
<p><strong>नवज्योति की खबर पर किया निलंबित</strong><br />प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) द्वारा जारी किया गया निलंबन आदेश में दैनिक नवज्योति की खबर का हवाला दिया गया है। आदेश में बताया गया  कि दैनिक नवज्योति में गत 15 जुलाई को ‘टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक भरकर बेची जा रही लकड़ियां’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। जिसकी प्रारंभिक जांच में रेंजर चंद्रकांत शर्मा मिलीभगत पायी गई है। इस पर शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। </p>
<p><strong>बाघ व शावकों की जान से किया खिलवाड़</strong><br />वन विभाग के मुखिया होफ द्वारा की गई कार्रवाई से जंगल का सौदा करने वाले भ्रष्ट वनकर्मियों व अधिकारियों में डर बनेगा और जंगल के प्राणियों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। जहां चार बाघों का मूवमेंट रहता है वहां वनकर्मी माफियाओं से सांठगांठ कर ट्रकों में लकड़ियां भरवाकर बेच रहे थे। जिससे जंगल के साथ बाघों की सुरक्षा भी दांव पर लग गई थी। कार्रवाई से वन अपराध पर अंकुश लगेगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ दमदारी से आवाज उठाने पर दैनिक नवज्योति का बहुत-बहुत आभार। नवज्योति की खबरों से ही जांच में वनकर्मियों का माफियाओं से सांठगांठ का खुलासा हुआ।  <br /><strong>- विट्ठल सनाढ्य, पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक बूंदी </strong></p>
<p>रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में वन विभाग जहां बोघों का मूवमेंट बताकर वन्यजीव प्रेमियों व मडियाकर्मियों को प्रवेश नहीं देते। वहीं, दूसरी ओर बाहरी व्यक्तियों को ट्रकों में लकड़ियां भरवाकर अवैध परिवहन की इजाजत देता है, जो गलत है। मामले में अन्य दोषियों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि तेजी से उभरते इस टाइगर रिजर्व में दोबारा ऐसा वन अपराध न हो। जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ सार्थक प्रयास के लिए दैनिक नवज्योति का आभार। <br /><strong>- पृथ्वी सिंह राजावत, सदस्य कोर-बफर निर्धारण समिति आरवीटीआर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Jul 2025 16:11:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक भर कर बेची जा रही लकड़ियां, बंबूल का जंगल बेच रहे वनकर्मी</title>
                                    <description><![CDATA[ वनकर्मियों की मिलीभगत से माफिया न केवल टाइगर के कोर एरिया में ट्रक लेकर घुस रहे बल्कि प्रतिदिन हजारों टन लकड़ियां चोरी कर ले जा रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/truck-loads-of-wood-are-being-sold-in-the-core-area-of-tiger-reserve/article-117549"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/258642.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में दिनदहाड़े बबूल की लकड़ियां बेची जा रही हैं। वनकर्मियों की मिलीभगत से माफिया न केवल टाइगर के कोर एरिया में ट्रक लेकर घुस रहे बल्कि प्रतिदिन हजारों टन लकड़ियां चोरी कर ले जा रहे हैं। जबकि, इस जगह पर टाइगर का मूवमेंट रहता है। हालात यह हैं, अपने स्वार्थ के लिए वनकर्मी टाइगर की सुरक्षा दांव पर लगाने से भी नहीं चूक रहे। भ्रष्टाचार का यह खेल पिछले ढाई महीने से चल रहा है। जघन्य वन अपराध का खुलासा शुक्रवार को जीपीएस कोर्डिनेट के साथ तस्वीरें सामने आने से हुआ। दरअसल, मामला आरवीटीआर की जेतपुर रेंज के पापड़ा चौक का है, जो रिजर्व का कोर एरिया है। इतना ही नहीं, इस इलाके में टाइगर का मूवमेंट रहता है। इसके बावजूद वनकर्मी माफियाओं से सांठगांठ बबूल का जंगल बेच रहे हैं।</p>
<p><strong>बाघ व शावकों की जान से खिलवाड़</strong><br />वन्यजीव प्रेमी विट्ठल सनाढ्य ने बताया कि जेतपुर रेंज का पापड़ा चौक, बांदरा पोल से रामगढ़ महल के बीच स्थित है। यहां बाघ आरवीटीआर-1 का मूवमेंट रहता है। इसके बावजूद यहां से प्रतिदिन 5 से 7 ट्रक लकड़ियां भर-भर कर बेची जा रही है। जबकि, इस जगह से रामगढ़ महल और टाइगर रिलोकेशन एनक्लोजर   बिलकुल नजदीक है, जहां रणथम्भौर या अन्य जगहों से लाए जाने वाले टाइगर को रखा जाता है। वर्तमान में मृत बाघिन आरवीटीआर-2 की दोनों मादा शावक व अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से शिफ्ट किए गए नर शावक की मौजूदगी भी इसी क्षेत्र में है। वन अधिकारियों व माफियाओं के गठजोड़ से बाघों की सुरक्षा दांव पर लग गई है। </p>
<p><strong>प्रतिदिन 5 से 7 ट्रक बेची जा रही लकड़ियां </strong><br />वन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जेतपुर रेंज में  ग्रासलैंड डवलप करने के लिए गत वर्ष ज्यूलीफ्लोरा उनमूलन का टेंडर किया गया था। संबंधित फर्म ने बबूल के पेड़ों की कटाई की थी। ऐसे में यहां लकड़ियों का ढेर पड़ा है। जिसे वनकर्मियों द्वारा माफिओं को बेचा जा रहा है। जबकि, टाइगर रिजर्व व नेशनल पार्क से किसी भी प्रजाति की लकड़ियां न तो बेची जा सकती और न ही नीलाम की जा सकती है। इसके बावजूद कोर एरिया से प्रतिदिन 5 से 7 ट्रक लकड़ियां माफिया भिवाड़ी-हरियाणा ले जा रहे हैं। </p>
<p><strong>वन सुरक्षा समिति के नाम पर माफियाओं से कटवाया बंबूल</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर वनकर्मचारी ने बताया कि रिकॉर्ड में ज्यूलीफ्लोरा उन्मूलन का कार्य वन सुरक्षा समिति के श्रमिकों से करवाना दिखाया गया है। जबकि, हकीकत में माफियाओं से जंगल कटवाया गया और उन्हें ही लकड़ियां बेची जा रही है। हालात यह है, 1 अप्रेल 2025 से 11 जून तक टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से ट्रक भरकर लकड़ियां भिवाड़ी व हरियाणा जा रही है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, नेशनल पार्क या टाइगर रिजर्व से लकड़ियों की नीलामी नहीं की जा सकती। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अवैध परिवहन जघन्य अपराध है। </p>
<p>मामला संज्ञान में आ गया है। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ से जांच करवाकर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि वन अपराध में स्टाफ की संलिप्ता व मिलीभगत तो नहीं है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। टाइगर रिजर्व या नेशनल पार्क में कटी हुई लकड़ियों की नीलामी किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। चाहे वो बबूल की लकड़ियां ही क्यों न हो। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक </strong></p>
<p>टेंडर तो पहले का था, एक-दो जगहों से शिकायत आई है। हमने टीम बनाकर मौके पर जांच के लिए भेज दी है। मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>- अरविंद कुमार झा, डीएफओ रामगढ़ टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक को अनुमत किया जाना टाइगर की सुरक्षा के साथ समझौता है, जो घातक है। जूलीफ्लोरा घोटाला रामगढ़ टाइगर रिजर्व में नया नहीं है। वर्तमान व पूर्व के जिम्मेदार अधिकारियों  द्वारा करोड़ों रुपए मूल्य का जूलीफ्लोरा बेच चुके हैं, जिसकी राशि जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली जानी चाहिए।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, पर्यावरणविद् एवं एडवोकेट </strong></p>
<p>जेतपुर रेंज का पापड़ा वनक्षेत्र आरवीटीआर का कोर एरिया है। 11 जून की तस्वीर में जिस जगह ट्रक में लकड़िया लोड हो रही है, वो रामगढ़ महल और टाइगर रिलोकेशन एनक्लोजर के बिलकुल नजदीक है। इस इलाके में बाघ आरवीटीआर-1, मृत बाघिन आरवीटीआर-2 की मादा शावकों का मूवमेंट है। इसके बावजूद वन अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा टाइगर टेरीटरी में माफियाओं की घुसपैठ करवाकर वन सम्पदा चोरी करवा रहे हैं। जघन्य अपराध में लिप्त वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी  चाहिए। <br /><strong>- विट्ठल सनाढ्य, वन्यजीव प्रेमी बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Jun 2025 16:23:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>धरती का सीना छलनी कर रहे पत्थरमाफिया, सरेआम बिक रही है पत्थर की ट्रोलियां </title>
                                    <description><![CDATA[पत्थरों का लगातार हो रहा अवैध खनन आसपास के इलाकों को भी खोखला कर रहा है, पर्यावरण के रक्षक ही भक्षक बने हुए है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/stone-mafia-is-ripping-the-earth-apart/article-115230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर।  पृथ्वी दिवस को निकले अभी एक महीना भी नहीं बीता और 5 जून को पर्यावरण दिवस आने वाला है, फिर भी वनों के चौकीदार बने लोगों की मिली भगत से पृथ्वी को खोखला किया जा रहा है। इसी के साथ-साथ पर्यावरण को भी नष्ट किया जा रहा है, पत्थरों का लगातार हो रहा अवैध खनन आसपास के इलाकों को भी खोखला कर रहा है, पर्यावरण के रक्षक ही भक्षक बने हुए है। </p>
<p><strong>कहां से आ रहा है पत्थर</strong><br />वन विभाग के कर्मचारियों की माने तो खानपुर के आसपास ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां किसी पत्थर की खान को लीज पर देकर उसे पर राजस्व की प्राप्ति हो रही हो, यहां पर पहुंचने वाली पत्थर की ट्रोलियां बड़ी मात्रा में खानपुर के पास स्थित बारहपाटी के जंगल, नयागांव, बलड़ावदा क्षेत्र से पत्थरों को लाकर सरकार को चूना लगा रही है। इसी प्रकार पनवाड़ क्षेत्र में चलेट कालीस्ािंध नदी में हो रहे अवैध खनन को करते हुए रोजाना पत्थरों से भरे ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>सरेआम बिक रही है पत्थर की ट्रोलियां</strong><br />खानपुर क्षेत्र में पत्थरों के ट्रैक्टर टोलियां 2000 से लेकर2200 तक बिक रही है। पत्थर की भरी हुई ट्रॉलियों पर अंकुश लगाने वाला कोई भी नहीं है और यदि इनकी शिकायत की जाती है तो इनके और फायदा होता है पत्थरों की रेट बढ़ा दी जाती है और यह रेट उपभोक्ताओं के ऊपर भारी पड़ती है। ट्रैक्टर इतनी तेज गति से निकलते हैं कि गांव के अंदर जो रोड बने हुए हैं उनमें निकासी पानी की जालियां भी तोड़ जाते हैं।</p>
<p><strong>बिना नंबरों के सरपट दौड़ते पत्थरों के ट्रैक्टर</strong><br />खानपुर इलाके में अवैध खनन करने वाले वाहनों पर ना कोई नंबर प्लेट है और ना ही वाहनों को चलाने वाले ड्राइवरों के पास लाइसेंस। कम उम्र के ड्राइवर धड़ल्ले से बजरी व अवैध पत्थर के ट्रैक्टर ट्रॉली सड़क पर बैखोफ दौड़ा रहे है। इन वाहनों पर कोई अंकुश नहीं है।   इन ट्रैक्टरों की सरपट दौड़ को देखते देखते हुए ऐसा लगता है कि 25 दिन बाद जब स्कूल खुलेंगे तो बच्चे भी रोड पर आएंगे, उन बच्चों का क्या होगा , एक्सीडेंट होने की संभावना बनी हुई है यह ट्रैक्टर रात को भी चलते हैं और सुबह तड़काओं सड़कों पर चलते हैं। </p>
<p><strong>ट्रैफिक जाम की स्थिति</strong><br />छोटे बच्चों द्वारा ट्रैक्टर चलाए जा रहे हैं जिनका कोई लाइसेंस प्राप्त नहीं है तो ट्रैफिक जाम तो होने ही है।  अवैध खनन पर थोड़े समय के लिए अंकुश लग जाता है और फिर वापस से चालू हो जाते हैं, जिसका नुकसान एक आम आदमी को भुगतना पड़ता है जो ट्रॉली 2200 की आएगी, यदि अंकुश लगा दिया गया तो वह फिर 2500 में आएगी। <br /><strong>-कुलदीप सैनी, ग्रामीण  </strong></p>
<p> एक तरफ तो पृथ्वी दिवस मनाया जाता है, ऊंची ऊंची बातें की जाती है कि पृथ्वी की रक्षा की जाएगी और यहां पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। <br /><strong>-राजेंद्र कुमार, ग्रामीण  </strong></p>
<p>सरकार ने अभी पत्रों पर कोई लीज नहीं दे रखी है तो यह पत्थर खनन अवैध है, इन पर अंकुश लगाया जाए। जुलाई में स्कूल खुल जाते हैं और छोटे बच्चे रोड पर चलते हैं यह उनके लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। <br /><strong>-रमेश शर्मा, ग्रामीण  </strong></p>
<p>पत्थरों से भरे ट्रैक्टर इतनी तेज रफ्तार से निकलते हैं कि एक्सीडेंट होने की संभावना बनी रहती है। <br /><strong>- राहुल कुमार, ग्रामीण  </strong></p>
<p>मैं एक प्रकृति प्रेमी हूं, मैं नहीं चाहता कि वन संपदा खत्म हो और पर्यावरण खराब हो। जब पर्यावरण खराब होगा तो शुद्ध आॅक्सीजन नहीं मिलेगी और व्यक्ति का जीवन यापन ढंग से नहीं हो पाएगा। <br /><strong>-विजय नागर, पर्यावरणप्रेमी  </strong></p>
<p>वन बचाओ पर्यावरण की सुरक्षा करो और यहां पर तो पर्यावरण ही बिगाड़ दिया। खनन कर पत्थरों को खोदकर जंगल समाप्त कर दिए, इन पर अंकुश लगाया जाए। <br /><strong>-राजकुमार, ग्रामीण  </strong></p>
<p>अवैध खनन को लेकर सुबह शाम गश्त करवा रहे हैं और फिर भी अगर ऐसे में खनन कर अवैध पत्थर के वाहन पाए जाते है तो कार्रवाई कर पाबंदी लगाई जाएगी। <br /><strong>-अभिषेक मीणा, (रेंज फॉरेस्ट आॅफिसर) खानपुर।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 May 2025 16:28:55 +0530</pubDate>
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                <title>माफिया खा गए मुकुंदरा का पहाड़, बना दिया टीला</title>
                                    <description><![CDATA[अपना इलाका छोड़ दूसरे क्षेत्र में माइग्रेट कर रहे वन्यजीव ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mafia-ate-up-mukundra-s-mountain--turned-it-into-a-mound/article-82659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/photo-size-(9)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा<strong> </strong>। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व माफियाओं के हत्थे चढ़ चुका है। अवैध घुसपैठ से लेकर खनन तक हो रहा है। लगातार वनसम्पदा चोरी हो रही है और वन अधिकारी आंखें मूंदे पड़े हैं। अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही से न केवल वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा बल्कि वन सम्पदा भी लगातार चोरी हो रहा है। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा व जंगल की रक्षा के लिए कोई प्रबंधन नहीं किए गए। जिससे माफियाओं का हौंसला और संदिग्ध गतिविधियां बढ़ रही है।  दरअसल, रावतभाटा रोड स्थित मुकुंदरा की बोराबांस रैंज में दौलतगंज स्थित डायवर्जन चैनल से निकला मलबा लगातार खनन माफिया चुरा रहे हैं। वर्ष 2017 तक यहां मबले के करीब 50 से 60 फीट ऊंचे पहाड़ थे जो वर्तमान में करीब 6 से 8 फीट के टीले बनकर रह गए। </p>
<p><strong>वर्ष 2007 में बना था डायवर्जन चैनल</strong><br />दौलतगंज के बाशिंदों ने बताया कि नए कोटा के जवाहर नगर, तलवंडी, विज्ञान नगर, संजय नगर सहित अन्य इलाकों को बाढ़ से बचाने के लिए सरकार ने वन भूमि पर वर्ष 2002 में डायवर्जन चैनल का निर्माण शुरू करवाया था, जो 2007 में बनकर पूरा हुआ। खुदाई के दौरान निकले पत्थर, मिट्टी व कंक्रीट  का ढेर बोराबांस के जंगल में रखवाया गया। यहां 50 से 60 फीट ऊंचे पहाड़ खड़े हो गए, जो वन अधिकारियों की लापरवाही व सुरक्षा के अभाव में खनन माफिया चोरी कर गए। वर्तमान में यह पहाड़ टीले बनकर रह गए। </p>
<p><strong>नहीं होती गश्त, बेधकड़ चल रहा खनन</strong><br />नयागांव निवासी ग्यारसी, कुंज बिहारी व कजोड़ लाल (परिवर्तित नाम) ने बताया कि नयागांव से बोराबांस गांव तक मुकुंदरा के जंगलों में अवैध खनन होता है। रातभर जेसीबी से खुदाई की जाती है और दिन में मजदूर लगाकर हथौड़ों से पत्थर तोड़े जाते हैं। वन रक्षक से लेकर रैंजर तक को इसकी जानकारी है, इसके बावजूद खननकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। </p>
<p><strong>माफियाओं का नेटवर्क मजबूत</strong><br />अवैध खनन करने वाले माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत है कि अपने आसपास कोई संदिग्ध नजर आए तो तुरंत अलर्ट कर दिया जाता है। आरोपियों की धरपकड़ के लिए फलाइंग के पहुंचने से पहले ही सूचना पहुंच जाती है। इतना ही नहीं, किसी अधिकारी या संदिग्ध वाहन नजर आने पर अवैध खननकर्ता भाग जाते हैं या फिर उन पर हमला कर देते हैं। पूर्व में भी माफियाओं ने फोरेस्ट गार्डों पर हमला कर जख्मी कर दिया था।   </p>
<p><strong>वन विभाग के लिए मलबा, माफियाओं के लिए सोना</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है, रावतभाटा रोड के दोनों तरफ जंगल है। रोड के एक तरफ वन मंडल और दूसरी तरफ मुकुंदरा टाइगर रिजर्व का जंगल है। दोनों ही वनक्षेत्रों में जमकर अवैध गतिविधियां हो रही है। यह वन सम्पदा वन विभाग के लिए महज मलबा है, जबकि यही मलबा माफियाओं के लिए सोने से कम नहीं है। शहर में विकसित हो रही नई कॉलोनियों में यह मलबा जमकर बिक रहा है। हालात यह हैं, वन अधिकारियों द्वारा वन सम्पदा की सुरक्षा के लिए कोई उचित प्रबंध नहीं किए गए हैं। </p>
<p><strong>दीमक की तरह माफिया चट कर रहा वन सम्पदा</strong><br />दौलतगंज निवासी दया, राम कुमार (परिवर्तित नाम) ने बताया कि नयागांव से लेकर बोराबास चौकी तक रोड किनारे जंगल मुकुंदरा टाइगर रिजर्व का बफर जोन है। यहां दिन रात अवैध गतिविधियां होती रहती है। डायवर्जन चैनल की चट्टाने व कंक्रीट का मलबा लगातार चोरी हो रहा है। पूर्व में यहां मलबे के बड़े-बड़े पहाड़ थे जो आज टीले बनकर रह गए। हर दूसरे-तीसरे दिन में 25 से 30 ट्रॉली मलबा चुराकर बेचा जाता है। </p>
<p><strong>खत्म हो रहा वन्यजीवों का हैबीटॉट</strong><br />बोराबांस रैंज के जंगलों में लेपर्ड, हिरण, लोमड़ी, भालू, हायना, नीलगाय सहित कई वन्यजीवों का नेचुरल हैबीटॉट है। अवैध खनन, संदिग्ध घुसपैठ, वाहनों का शौर, पत्थर तोड़ने की आवाज, सहित अन्य गतिविधियों से उनका प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। साथ ही जैव विविधता भी खत्म हो रही है। <br /><strong>- रवि कुमार, रिसर्चर वाइल्ड लाइफ</strong></p>
<p><strong>सफारी रुट पर अवैध खनन</strong><br />माइनिंग व तस्करी का काला खेल मिलीभगत से चल रहा है। माफियाओं का गिरोह लगातार मुकुंदरा में सक्रिय है। दिन-रात जंगलों में बेधड़क ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ती हैं। आम आदमी बिना इजाजत जंगल में चला जाए तो वन कर्मचारी उनसे जुर्माना वसूलते हैं लेकिन खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। जबकि, बोराबांस रैंज के इस क्षेत्र में जंगल सफारी का रुट प्रस्तावित है। <br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, अध्यक्ष, पगमार्क फाउंडेशन्</strong></p>
<p><strong>खत्म हो गए पहाड़</strong><br />17 साल पहले डायवर्जन चैनल से निकले मलबे के करीब एक दर्जन ऊंचे-ऊंचे पहाड़ थे, जो अब खत्म हो गए। खननकर्ता पत्थर, मिट्टी, कंक्रीट चुराकर ले गए। अधिकारियों ने न तो वन सम्पदा की सुरक्षा की और न ही खननकर्ताओ पर कार्रवाई की। नतीजन, माफियाओं का हौसला बढ़ा और अवैध गतिविधियां बढ़ने लगी। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p><strong>मिलीभगत के बिना चोरी संभव नहीं</strong><br />अधिकारियों को तुरंत मलबे का निस्तारण करना चाहिए। इसे नीलाम कर सरकार की आय बढ़ाते या फिर इन पत्थरों से मुकुंदरा की टूटती दीवारों की मरम्मत करवाते। डायवर्जन में फोरेस्ट की जमीन जाने पर रेस्टोरेशन के लिए विभाग को पैसा मिला होगा, जिससे वानिकी का विकास करवाना चाहिए था। वनरक्षक से रैंजर तक की मिलीभगत के बिना अवैध गतिविधियां नहीं हो सकती। <br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, अध्यक्ष मुकुंदरा एवं पर्यावरण समिति </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यहां चौकी बनाकर बेरियर लगाया जाएगा। यह रुट जंगल सफारी के लिए प्रस्तावित है। यहां चौकी बनाने व दीवार की मरम्मत के लिए बजट मांगा है, जिसके प्रस्ताव भेजे गए हैं। वन्यजीव व जंगल सुरक्षा के बेहतर प्रबंधन किए जाएंगे।  <br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, उपवन संरक्षक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। जिसे दिखवाकर मलबे की सुरक्षा के उचित प्रबंध किए जाएंगे। दीवारों की मरम्मत भी करवाई जाएगी।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 16:29:29 +0530</pubDate>
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                <title>प्लांटेशन का सीना चीर रहा माफिया, तमाशा देख रहा वन विभाग </title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिदिन चार से छह ट्रॉली पत्थरों की हो रही चोरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mafia-is-ripping-apart-the-plantation--forest-department-is-watching-the-show/article-76212"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/plantation-ka-seena-chir-rha-mafia,-tamasha-dekh-rha-van-vibhag...kota-news-29-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रावतभाटा रोड पर डायवर्जन चैनल स्थित आवंली-रोजड़ी प्लांटेशन माफियाओं के हत्थे चढ़ चुका है। पांच किमी सुरक्षा दीवार चोरी करने के बाद अब माफिया प्लांटेशन का सीना चीर रहा है। दिनदहाड़े अवैध खनन कर चट्टाने तोड़ी जा रही है। इसके बावजूद वन विभाग कार्रवाई के बजाए तमाशा देख रहा है। हालात यह हैं, 50 हैक्टेयर वनखंड में तीन-तीन फीट गहरे गड्ढ़े हो रहे हैं। जमीन से मिट्टी और पत्थर निकाल बाजारों में बेचा जा रहा है। जबकि, इस वन खंड में रैंजर से लेकर बीट गार्ड तक दर्जनों वनकर्मियों की तैनाती रहती है। इसके बावजूद सरकारी सम्पति की चोरी हो रही है। विशेषज्ञों का मत है, अधिकारियों व कर्मचारी खुद ही माफियाओं से सांठगांठ कर अवैध खनन करवा रहे हैं और प्लांटेशन बर्बाद कर रहे हैं। </p>
<p><strong>ब्लास्टिंग कर तोड़ रहे चट्टानें</strong> <br />स्थानीय निवासियों ने बताया कि आवंली-रोजड़ी वनखंड में माफिया ब्लास्टिंग कर चट्टाने तोड़ रहे हैं। दिनभर हथौड़ों व घनों से पत्थरों के टुकड़े किए जाते हैं। रात को ब्लास्टिंग की आवाजे आती हैं, कई बार नींद तक उछड़ जाती है। प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली पत्थर निकाले जाते हैं। जबकि, यहां नाकेदार सहित बीट गार्डों की तैनाती रहती है। इसके बावजूद खनन पर रोक नहीं लग रही। माफियाओं ने पूरा प्लांटेशन बर्बाद  कर दिया है।</p>
<p><strong>सरकार को 1.29 करोड़ का नुकसान </strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रत्येक 50 हैक्टेयर में प्लांटेशन के लिए सरकार की ओर से कोटा वन मंडल को चार किस्तों में 43 लाख रुपए का बजट मिला था। ऐसे में 50-50 हैक्टेयर के तीनों प्लांटेशन को मिलाकर कुल 1 करोड़ 29 लाख का रुपए मिले थे। इस राशि से 30 हजार पौधे लगाना, पत्थरों की दीवार बनाना, पानी की व्यवस्था करना सहित अन्य देखरेख के कार्य करने थे। इसके लिए रैंजर सहित नाकेदार की प्लांटेशन की रक्षा करने की जिम्मेदारी थी, इसके बावजूद वर्ष 2022 जून से जुलाई 2023 के बीच 5 किमी पत्थरों की दीवार ही चोरी हो गई। वहीं, प्लांटेशन भी सूखी झाड़ियों में तब्दील हो गए। वनकर्मियों की लापरवाही से सरकार को 1.29 करोड़ का नुकसान हुआ है।</p>
<p><strong>पत्थर और मिट्टी का खनन</strong><br />कोटा वन मंडल की लाडपुरा रैंज में आवंली रोजड़ी वनखंड में अवैध खनन की शिकायत पर नवज्योति 4 व 7 अप्रेल को मौके पर पहुंची। यहां हालात चौंकाने वाले थे। प्लांटेशन की 50 हैक्टेयर वन भूमि पर जगह-जगह दो से तीन फीट गहरे गड्ढ़े हो रहे थे।  माफियाओं ने मिट्टी व पत्थरों का खनन कर वनसम्पदा लूट ले गए। हैरानी की बात यह है, 50-50 हैक्टेयर के तीन प्लांटेशन  बर्बाद हो गया। सरेआम अवैध खनन हो रहा है। इसके बावजूद यहां तैनात कर्मचारियों ने रोकने तक का प्रयास नहीं किया। जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध नजर आती है। </p>
<p><strong>वनप्रेमी बोले  -</strong><br /><strong>वनकर्मी ही माफियाओं से मिल करवा रहे खनन</strong><br />कोटा वन मंडल के आवंली-रोजड़ी वनखंड में सुरक्षा दीवार की चोरी व अवैध खनन वन अधिकारी व कर्मचारी खुद करवा रहे हैं। रैंजर से बीट गार्ड तक की माफियाओं से सांठगांठ है, मामला उजागर होने के बावजूद रैंजर, नाकेदार, बीट गार्ड के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि जांच के नाम पर लीपापोती कर बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि, इनके खिलाफ विभाग को निष्पक्ष विभागीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लानी चाहिए। <br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, अध्यक्ष, मुकुंदरा वन्यजीव एवं पर्यावरण समिति</strong></p>
<p>जिन पर प्लांटेशन की रक्षा की जिम्मेदारी थी, उन्हीं के इशारों पर माफियाओं ने 150 हैक्टेयर के प्लांटेशन की सुरक्षा दीवार चोरी कर ली। वहीं, प्लांटेशन की वनभूमि में अवैध खनन करवाकर राजकीय सम्पति की चोरी करवा रहे हैं। जबकि, इस वनखंड के आगे वर्तमान में प्लांटेशन कार्य चल रहे हैं, जिसकी देखरेख के लिए कर्मचारी आते-जाते चोरी होते देखते रहे, सरकार से तनख्वाह लेने के बदले फर्ज नहीं निभाने वाले लापरवाह कार्मिकों के खिलाफ अनुशानात्मक कार्रवाई नहीं किया जाना संदेह के घेरे में है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। <br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, अध्यक्ष, पगमार्क फाउंडेशन</strong></p>
<p>हाल ही में मुख्य वन संरक्षक एवं फिल्ड निदेशक ने मौके का निरीक्षण किया था। जहां उन्होंने अवैध खनन व प्लांटेशन की सुरक्षा दीवार चोरी होने की बात स्वीकारी है। इसके बावजूद जिम्मेदार वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, राजकीय सम्पति चोरी होने की न तो वन अधिनियम में मामला दर्ज किया गया और न ही पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया गया। वन विभाग की जमीन पर वनकर्मियों की इजाजत के बगैर कोई पैर भी नहीं रख सकता तो अवैध खनन कैसे हो रहे हैं। इसकी जांच की होनी चाहिए।<br /><strong>- रवि नागर, वाइल्ड लाइफ रिसर्चर</strong></p>
<p>मामला उजागर होने के बाद मेने मौके पर पहुंच निरीक्षण किया  था। अवैध खनन और प्लांटेशन की दीवार चोरी होना सामने आया है। डीएफओ से इसकी जांच करवाई थी, उनकी तथ्यात्मक रिपोर्ट मिल गई है। अब मामले में वनकर्मियों की मिलीभगत व अवैध खनन के लिए दोषी कौन है, इसकी जांच के लिए उड़नदस्ता   डीएफओ को जांच के निर्देश दे दिए हैं। उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी ।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग कोटा</strong></p>
<p>आंवली रोजड़ी में अवैध खनन के इश्यू हैं। यहां पुराने समय से ही खनन चला आ रहा है, जो गुगल अर्थ में भी नजर आ रहा है। यहां प्लांटेशन भी इसी मकसद से करवाया गया था कि आगे जाकर खनन पर रोक लग सके लेकिन जब प्लांटेशन का पीरियड खत्म हुआ और स्टाफ यहां से हटा तो संधारण वर्ष के एक-दो साल बाद खनन के इश्यू होने लगे। हालांकि, खनन रोकने के लिए पूरे जिले में कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में डाढ़देवी वनक्षेत्र में पिछले तीन दिनों में माफियाओं के 10 डम्पर पकड़े हैं। <br /><strong>- अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, डीएफओ, कोटा वनमंडल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Apr 2024 15:38:21 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा वन मंडल की नाक के नीचे बेधड़क जंगल साफ कर रहा माफिया</title>
                                    <description><![CDATA[शिकायत करने के बावजूद अधिकारी सुनते नहीं है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mafia-fearlessly-clearing-the-forest-right-under-the-nose-of-kota-forest-division/article-70938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/kota-van-mandal-ki-naak-k-niche-bedhadak-jungle-saaf-kr-rha-mafia...kota-news-23-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी से सटा कोटा वन मंडल का पीपल्दा सेंड वनखण्ड माफियाओं का अडडा बन गया है। वन विभाग की नाक के नीचे माफिया जंगल साफ कर रहा है। कटर मशीनों से धड़ाधड़ पेड़ काटे जा रहे हैं। वहीं, वन्यजीवों का आशियाना उजाड़ा जा रहा है। हालात यह हैं, मजदूरों ने टापरी बनाकर जंगल में डेरा डाल दिया, जो दिनरात पेड़ों पर कुल्हाड़ी बरसा रहे। इसके बावजूद वन विभाग आंखें मूंदे पड़ा है। हैरानी की बात यह है, यह इलाका रामगढ़ टाइगर रिजर्व, चंबल घड़ियाल सेंचुरी और कोटा वनमंडल के अधिकार क्षेत्र में है। इसके बावजूद वन अपराध को अनदेखा करना मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।  दरअसल, सुल्तानपुर रैंज के पीपल्दा वनखंड में चंबल का एक किमी का एरिया राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी का हिस्सा है, जो रामगढ़ टाइगर रिजर्व में आता है। वहीं, शेष वन क्षेत्र कोटा वनमंडल के दायरे में है। </p>
<p><strong>कटर मशीनों से काटे जा रहे पेड़</strong><br />पीपल्दा सेंड वनखंड के जंगलों में दिनदहाड़े कटर मशीनों से बबूल के पेड़ काटे जा रहे हैं। वहीं, जेसीबी से झाड़ियां साफ कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां के आने-जाने का रास्ता बना रहे हैं। जबकि, इन इलाकों में बीट गार्ड से लेकर रैंजर तक तैनात हैं। इसके बावजूद वनकर्मी जंगल में अवैध कटान व संदिग्ध गतिविधियों को रोक नहीं रहे। </p>
<p><strong>प्रतिदिन कट रहे दर्जनों पेड़</strong><br />झांड़गांव ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच ओमप्रकाश मीणा ने बताया कि जंगल में प्रतिदिन दर्जनों पेड़ काटे जा रहे हैं। कटर मशीनों के जरिए पेड़ों के छोटे-छोटे टुकड़े कर लुग्दी-बुरादा बनाकर ट्रॉलियां भरी जा रही है। देर रात दो दर्जन से अधिक ट्रॉलियां जंगल से बाहर निकलती है और सड़क किनारे खड़े ट्रकों में लोड कर दी जाती है, जो मंडावरा एक्सप्रेस-वे से होते हुए हरियाणा की ओर निकल जाते हैं। जबकि, मंडावरा में वन नाका है, जहां वनकर्मी तैनात रहते हैं, इसके बावजूद उन्हें लकड़ियों से भरे ट्रक दिखाई नहीं देते।  </p>
<p><strong>जंगल में टापरियां, नष्ट हो रहा हैबीटॉट</strong><br />मंदारिया निवासी मुकेश मीणा व धनराज का कहना है, कोटा वन मंडल के पीपल्दा सेंड वनखंड में माफियाओं के इशारे पर मजदूरों ने अस्थाई टापरियां बनाकर डेरा डाल रखा है, जो रात-दिन पेड़ काट जंगल बर्बाद कर रहे हैं। जबकि, इन इलाकों में वन्यजीवों का हैबीटॉट है, जो अवैध गतिविधियों के कारण नष्ट हो रहा है। </p>
<p><strong>रात 10 बजे के बाद लोड होते हैं ट्रक</strong><br />झाड़गांव के ग्रमीणों का कहना है, लकड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रात 10 बजे के बाद जंगल से निकलती हैं और सड़क किनारे खड़े ट्रकों में माल लोड़ करवाया जाता है। इसके बाद ट्रक मंडावरा होते हुए 8-लेन से हरियाणा-भिवाड़ी की ओर निकल जाते हैं। शिकायत करने के बावजूद अधिकारी सुनते नहीं है।  </p>
<p><strong>सैंकड़ों बीघा में पेड़ों की जगह बचे ठूंठ</strong><br />कोटा वन मंडल के पीपल्दा सेंड वनखंड करीब 548 हैक्टेयर में फैला है, जो चंबल घड़ियाल सेंचूरी से सटा घना वन क्षेत्र है। यहां सैंकड़ों बीद्या वनभूमि पर पेड़ों के ठूंठ ही नजर आ रहे हैं। वहीं, कई जगहों पर लकड़ियों के गट्ठे पड़े हुए हैं। पेड़ों के ठूंठ देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन इलाकों में अवैध कटान लंबे समय से जारी है। वन विशेषज्ञों का तर्क है, इतने बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई बिना मिलीभगत के संभव नहीं है। </p>
<p><strong>60 क्विंटल लकड़ियों से भरे पकड़े थे 4 ट्रक</strong><br />कोटा वन मंडल ने गत 9 फरवरी को 60 क्विंटल लकड़ियों से भरे 4 ट्रक पकड़े थे। यह लकड़ियां पीपल्दा सेंड वनखंड से काटी गई थी। ट्रकों को एस्कोर्ट कर रही कार को भी सीज कर दो लोगों को हिरासत में लिया था। सभी वाहन मंडावरा एक्सप्रेस-वे से होते हुए हरियाणा की ओर जा रहे थे। लेकिन, विभाग ने जुमार्ना वसूल छोड़ दिया। सख्त कार्रवाई नहीं होने से हरियाणा के तस्कर फिर से सक्रिय हो गए। </p>
<p><strong>राजस्व का नुकसान </strong><br />पगमार्क फाउंडेशन के संस्थापक देवव्रत सिंह हाड़ा का कहना है, वनकर्मियों की मिलीभगत से माफिया पीपल्दा वनखंड से भारी मात्रा में वन सम्पदा चोरी कर रहे हैं। जिससे सरकार के राजस्व को  नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस इलाके में दिनभर जेसीबी व कटर मशीनों के चलने की आवाजें गूंजती है, जो मेने रोड से गुजरने वाले राहगीरों तक को सुनाई देती है लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों को सुनाई नहीं देती। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि</strong><br />पीपल्दा सेंड वन खण्ड सघन वनक्षेत्र है। जिसका कुछ हिस्सा राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी में आता है और शेष कोटा वन मंडल के अधिकार क्षेत्र में है। यहां लंबे समय से अवैध कटान चल रहा है। दिनदहाड़े कटर मशीनों से बबूल के पेड़ काटे जा रहे हैं। प्रतिदिन पांच-छह ट्रक लकड़ियों की तस्करी की जा रही है, जो मिलीभगत के बगैर संभव नहीं है। हमने कई बार वन विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में तत्कालीन डीएफओ द्वारा पकड़े गए हरियाणा के चार ट्रक तस्करी के गठजोड़ का उदाहरण है।   </p>
<p><strong>ओम प्रकाश मीणा, पूर्व सरपंच, झाड़गांव ग्राम पंचायत </strong><br />मामला आपके द्वारा जानकारी में आया है। यदि, पीपल्दा सेंड वनभूमि पर अवैध कटान हो रहा है तो चिंताजनक है। अधिकारियों को निर्देशित कर मामले की जांच करवाएंगे और इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।<br /><strong>- चेतन पटेल, विधायक, पीपल्दा</strong></p>
<p>यदि ऐसा हो रहा है तो बिलकुल गलत है। मामले की जांच करवाकर सख्ती से निपटेंगे और अवैध कटान बंद करवाएंगे। <br /><strong>- प्रेमचंद गोचर, भाजपा देहात जिलाध्यक्ष</strong></p>
<p><strong>अधिकारियों का कहना</strong><br />संयुक्त सर्वे करवाकर यह पता लगाया जाएगा की यह इलाका किसके अधिकार क्षेत्र में आता हैं। क्योंकि, पीपल्दा सेंड वनखंड में रामगढ़ टाइगर रिजर्व, चंबल घड़ियाल सेंचुरी, कोटा वनमंडल व सिवायचक क्षेत्र भी है। ऐसे में सर्वेयर से सर्वे करवाकर जमीन का पता लगवाएंगे। इसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचकर उचित कार्रवाई करेंगे।<br /><strong>- अपूर्वा कृष्ण श्रीवास्तव, उप वन संरक्षक, कोटा वन मंडल </strong></p>
<p>चंबल घड़ियाल सेंचूरी का यह इलाका हमारे क्षेत्र में नहीं आता बल्कि रामगढ़ टाइगर रिजर्व में आता है। <br /><strong>- अनील यादव, एसीएफ, राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी सवाई माधोपुर</strong></p>
<p>पीपल्दा सेंड वनखंड में चंबल नदी से एक किमी का एरिया हमारे क्षेत्र में आता है और शेष वनक्षेत्र कोटा वनमंडल के दायरे में आता है।<br /><strong>- सुमीत कनेरिया, रेंजर, रामगढ़ टाइगर रिजर्व </strong></p>
<p>आपके माध्यम से अवैध कटान का मामला संज्ञान में आया है। डीसीएफ को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर उचित कार्रवाई करवाएंगे।<br /><strong>- रामकरन खैरवा, मुख्य वन संरक्षक, वन मंडल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Feb 2024 18:17:57 +0530</pubDate>
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                <title>500 मीटर में 53 जगह से टूटी मुकुंदरा की सुरक्षा दीवार </title>
                                    <description><![CDATA[माफियाओं का गिरोह लगातार मुकुंदरा में सक्रिय है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-security-wall-broken-at-53-places-in-500-meters/article-70368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/500-meter-me-53-jgh-s-tuti-mukundara-ki-suraksha-diwar...kota-news-17-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व माफियाओं के हत्थे चढ़ चुका है। यहां न तो जंगल सुरक्षित है और न ही बेजुबान वन्यजीवों की जिंदगी। हालात यह हैं, 500 मीटर के दायरे में 53 जगहों से मुकुंदरा की सुरक्षा दीवार माफियाओं ने तोड़ दी और जंगल में आने-जाने का रास्ता बना दिया। यह जानते हुए भी वन विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। नतीजन, माफिया मुकुंदरा का दामन नोंच रहा। वन सम्पदा चोरी कर बेजुबान वन्यजीवों का आशियाना भी उजाड़ रहा है। इसके बावजूद वन विभाग आंखे मूंदे बैठा है। दरअसल, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की बोराबांस रेंज में नयागांव से डायवर्जन चैनल तक जगह-जगह से सुरक्षा दीवार माफियाओं ने तोड़ रास्ता बना दिया है।</p>
<p><strong>नयागांव से डायवर्जन चैनल तक टूटी दीवारें</strong><br />मुकुंदरा की बोराबांस रैंज 12 हजार 684 हैक्टेयर में फैली हुई है। नयागांव से डायवर्जन चैनल तक करीब 500 मीटर के दायरे में जंगल की 53 जगहों से सुरक्षा दीवार टूटी हुई है। माफियाओं ने दीवारें तोड़ आने-जाने का रास्ता बना लिया है। इस इलाके में रात के अंधेरे में खनन होता है और दिन के उजाले में पत्थर, मिट्टी, ग्रेवल ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर चोरी कर रहे हैं। वहीं, अवैध कटान व मवेशियों की चराई हो रही है। </p>
<p><strong>प्रभावित हो रहा  वन्यजीवों का जीवन चक्र </strong><br />बोराबांस रैंज के जंगलों में लेपर्ड, हिरण, लोमड़ी, भालू, हायना, नीलगाय सहित कई वन्यजीवों का नेचुरल हैबीटॉट है। अवैध खनन, वाहनों का शौर, पत्थर तोड़ने की आवाज, घुसपैठ सहित अन्य संदिग्ध गतिविधियों से उनका प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। साथ ही जैव विविधता भी खत्म हो रही है। वन्यजीवों का जीवन चक्र प्रभावित होने से उनका अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है।</p>
<p><strong>दिन-रात बेधड़क दौड़ती ट्रैक्टर-ट्रॉली</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर स्थानीय निवासियों ने बताया कि बोराबांस रैंज में कई वर्षों से अवैध खनन, पेड़ों की कटाई, मिटटी व पत्थरों की चोरी सहित अन्य अवैध गतिविधियां चल रही हैं। इसकी जानकारी अधिकारियों को भी है। माइनिंग व तस्करी का काला खेल मिलीभगत से चल रहा है। माफियाओं का गिरोह लगातार मुकुंदरा में सक्रिय है। दिन-रात जंगलों में बेधड़क ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ती हैं।<br />  <br /><strong>टाइगर की टेरीटरी में चर रहे मवेशी </strong><br />मुकुंदरा में वर्तमान में दो टाइगर है। दोनों बाघ-बाघिन का मूवमेंट बोराबांस के वनक्षेत्र सेल्जर में रहता है। रावतभाटा रोड स्थित सेल्जर के पिछले हिस्से की दीवारें टूट रही है। जहां ग्रामीणों के मवेशी चर रहे हैं। मवेशियों को लाने-ले जाने के लिए पशुपालक अंदर तक घुस जाते हैं। जिससे टाइगर और इंसानों के बीच संघर्ष की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी </strong><strong>मिलीभगत से चल रहा खेल</strong><br />नयागांव से जवाहर सागर तक रैंजर, वनपाल, सहायक वनपाल, फोरेस्ट गार्ड, बॉर्डर होमगार्ड बड़ी संख्या में तैनात रहते हैं। जब ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आती हैं तब एक भी कर्मचारी नजर आता है। ऐसे में वन अधिकारियों की माफियाओं से सांठ-गांठ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जंगल और जंगल के प्राणियों की सुरक्षा के लिए स्थानीय स्टाफ गंभीर नहीं है। लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।  <br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, संस्थापक, पगमार्क फाउंडेशन  </strong></p>
<p>बोराबांस रैंज के जंगलों में लेपर्ड, हिरण, लोमड़ी, भालू, हायना, नीलगाय सहित कई वन्यजीवों का नेचुरल हैबीटॉट है। ऐसे में जंगल में लगातार अवैध गतिविधियां होने से पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ता है और वन्यजीव वहां से पलायन कर जाते हैं, फिर कभी लौटकर नहीं आते। ऐसे में उन्हें दूसरी जगह अपना वजूद कायम रखने के लिए अनगिनत संघर्षों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बोराबांस रेंज की 150 हैक्टेयर वनभूमि पर क्लोजर बनाने के लिए प्रपोजल भेजा हुआ है। यहां लोगों ने अवैध बाड़े बनाकर अतिक्रमण कर रखा है। जिसे पुलिस व जिला प्रशासन के सहयोग से पहले अतिक्रमण हटाए जाएंगे। इसके बाद ही दीवार बनाई जाएगी।<br /><strong> - जनक सिंह, रेंजर, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व </strong></p>
<p>नए अधिकारी के न आने तक मैं कार्यवाहक के रूप में जिम्मेदारी निभा रहा हूं। यदि, ऐसी गतिविधियां चल रही है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। जंगल और जंगल के प्राणियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीसीएफ, एवं कार्यवाहक डीएफओ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Feb 2024 16:17:53 +0530</pubDate>
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                <title>अब माफियाओं से पत्थर खरीदा तो खानी पड़ेगी जेल की हवा</title>
                                    <description><![CDATA[वन मंडल द्वारा दिए गए लीगल नोटिस में क्रेशर संचालकों को चेतावनी दी है कि श्रमिकों को खनन करने से रोके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-if-you-buy-stones-from-mafia--you-will-have-to-go-to-jail/article-69423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/ab-mafiyao-s-patthar-khrida-to-khani-pdegi-jail-ki-hawa...kota-news-07-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। खनन माफियाओं से पत्थर खरीदना क्रेशर संचालकों को महंगा पड़ सकता है। उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। कोटा वन मंडल ने माफियाओं के बाद अब क्रेशर संचालकों के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। शहर में संचालित 6 क्रेशर संचालकों को लीगल नोटिस थमाकर खनन माफियाओं से पत्थर न खरीदने की सख्त हिदायत दी है। आदेशों की अवेहलना पर क्रेशर मशीनों व परिसर को जब्त करने और राजस्थान वन अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।  दरअसल, शहरभर में वन भूमि से सटे भू-भाग पर आधा दर्जन क्रेशर संचालित हो रहे हैं। जहां माफिया द्वारा वन भूमि से निकाले पत्थर बेचे जा रहे हैं। जिन्हें खरीदकर क्रेशर संचालक अवैध खनन को बढ़ा दे रहे हैं। ऐसे में वनमंडल ने माफियाओं से पत्थर न खरीदने को पाबंद किया है। </p>
<p><strong>क्रेशर मशीनें होंगी जब्त </strong><br />वन मंडल द्वारा दिए गए लीगल नोटिस में क्रेशर संचालकों को चेतावनी दी है कि श्रमिकों को खनन करने से रोके, अवैध खनन किए पत्थरों को खरीदना बंद करें और वन भूमि पर कब्जा कर बनाए अवैध ढांचों को तुरंत हटवाएं। ऐसा नहीं करने पर क्रेशर संचालकों के खिलाफ राजस्थान वन अधिनियम की धारा 32,33,52 के तहत क्रेशर मशीनें व परिसर जब्त किया जाएगा। जिसके जिम्मेदार वे स्वयं होंगे। </p>
<p><strong>अवैध विस्फोटक का मामला भी दर्ज करेंगे</strong><br />डीएफओ मेहरा ने बताया कि माफिया वन भूमि, यूआईटी व सिवायक भूमि पर अवैध खनन करते हैं। जहां से निकले पत्थर क्रेशर संचालक खरीद रहे हैं। जिससे खननकर्ताओं का हौसला बढ़ रहा है। श्रमिकों को भी खनन कार्य में लगाया जाता है, अवैध रूप से वनभूमि पर बसाकर उनसे वन सम्पदा चोरी करवा रहे हैं। ऐसे में के्रशर संचालकों को लीगल नोटिस भेज स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अवैध गतिविधियां नहीं रोकी तो उनके खिलाफ आईपीसी एवं विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 के तहत राजकीय सम्पति की चोरी व अवैध विस्फोटक पदार्थ का उपयोग करने का अलग से मुकदमा दर्ज करवाए जाएंगे। </p>
<p><strong>क्रेशर संचालक करवा रहे अवैध खनन</strong><br />कोटा वन मंडल के डीएफओ तरुण कुमार मेहरा ने बताया कि लखावा वन क्षेत्र-ए से सटी जमीनों पर क्रेशर संचालित हो रहे हैं। जहां काम करने वाले श्रमिकों व उनके परिजनों द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जे कर मकान बना लिए हैं और वन भूमि से अवैध खनन कर क्रेशर संचालकों को बेच रहे हैं। वहीं, खनन माफियाओं से भी भारी मात्रा में अवैध पत्थर खरीदा जा रहा है। जिससे अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है तथा उनके ईशारे पर खनन करवाया जा रहा है। जिसके पर्याप्त सबूत वन मंडल के पास मौजूद हैं। ऐसे में क्रेशर संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। </p>
<p><strong>क्रेशर से 200 डम्पर पत्थर जब्त </strong><br />लाडपुरा वन क्षेत्रीय अधिकारी संजय नागर ने बताया कि हाल ही में के्रशर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 200 डम्पर पत्थर जब्त किया है।  साथ ही संचालक के खिलाफ वन अधिनियम में मामला दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि कोटा-बारां हाइवे स्थित संचालित क्रेशर पर 200 डम्पर पत्थरों का ढेर लगा हुआ था, संचालक के पास इन पत्थरों का मालिकाना हक या कागजात नहीं मिले। ऐसे में पत्थर जब्त कर राज. अधिनियम 1953 की धारा 32,33 व (53) के तहत कार्रवाई की गई। </p>
<p><strong>क्रेशर बस्ती में मिले थे विस्फोटक सामग्री </strong><br />गत माह क्रेशर बस्ती में सघन तलाशी अभियान चलाया गया था। वहां चट्टानों में छिपाई गई अवैध विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। खननकर्ताओं द्वारा बलास्टिंग कर जमीनों से पत्थरों को निकाला जा रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में संचालित हो रहे क्रेशर संचालक माफियाओं से पत्थर खरीद रहे हैं। जिससे अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में 6 क्रेशर संचालकों को लीगल नोटिस देकर चेतावनी दी है कि उनके श्रमिकों को अवैध खनन करने से रोके, अवैध खनन कर निकाले गए पत्थर खरीदना बंद करें, नहीं तो इनके खिलाफ राजस्थान वन अधिनियम के साथ आईपीसी के तहत कठोर कार्रवाई कर क्रेशर मशीनों को जब्त किया जाएगा।  साथ ही साथ राजकीय सम्पति की चोरी एवं अवैध विस्फोटक पदार्थो का उपयोग करने का भी मामला दर्ज किया जाएगा।<br /><strong>- तरुण मेहरा, उपवन संरक्षक, कोटा वनमंडल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Feb 2024 16:48:58 +0530</pubDate>
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                <title>वन भूमि पर उठाई आंख तो माफियाओं की खैर नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[गत दो माह में ही वनमंडल ने माफियाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए लाखों का जुर्माना वसूला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mafias-are-in-trouble-if-they-raise-their-eyes-on-forest-land/article-66737"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा वन मंडल एक्शन मोड़ में आ गया है। वनभूमि की सुरक्षा के लिए रात्रि गश्त बढ़ा दी गई है। वनखंड़ों में फ्लैग मार्च, गश्त बढ़ाकर वनमंडल ने माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले दो माह से  धड़ाधड़ हो रही कार्रवाई से वन माफियाओं में खलबली मची हुई है। वन क्षेत्रों से जुड़े संवेदनशील इलाकों में वनकर्मियों के बढ़ते कदम अपराधियों के लिए सख्त हिदायत है कि वन भूमि पर अतिक्रमण, अवैध कब्जा या वनों को नुकसान पहुंचाया तो उनके खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। गत दो माह में ही वनमंडल ने माफियाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए लाखों का जुर्माना वसूला। जिससे सरकार के राजस्व में इजाफा हुआ है। </p>
<p><strong>दो माह में 17.50 का वसूला जुर्माना</strong><br />कोटा वनमंडल के डीएफओ तरुण मेहरा ने गत वर्ष 1 नवम्बर को कार्यभार ग्रहण किया था। इसके बाद से ही वन अपराधियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धड़ाधड़ कार्रवाई कर 17.50 लाख का जुर्माना वसूला। उप वन संरक्षक मेहरा ने बताया कि अवैध खनन, प्रतिबंधित लकड़ियों का परिवहन,  वन भूमि पर अतिक्रमण, वनभूमि से पत्थर निकाल अवैध परिवहन, अवैध आरा मशीनों का संचालन करने सहित अन्य अपराधों पर नकेल कसते हुए कार्रवाई कर जुर्माना राशि वसूली। उन्होंने बताया कि वनभूमि की सुरक्षा के लिए प्रत्येक रेंज में गश्ती दल बनाए गए हैं, जो पूरी रात वनखंड़ों में गश्त कर वनभूमि की हिफाजत कर रहे हैं। </p>
<p><strong>प्रत्येक रेंज में चार गश्ती दल गठित :</strong> डीएफओ तरुण मेहरा ने बताया कि जिले में वनमंडल की सभी रेंजों में रात्रि गश्त के लिए 44 जवानों की टीम बनाई गई है। प्रत्येक रेंज में 4-4 गश्ती दल गठित किए हैं। एक दल में 7 से 8 जवान शामिल हैं, जो कड़ाके की ठंड में वनक्षेत्रों में रात्रि गश्त कर वनभूमि की सुरक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा रेंज कार्यालय का गश्ती दल भी सुबह-शाम अपने-अपने इलाकों में गश्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p><strong>जवानों की टॉस्क आॅरियंटेड गश्त </strong><br />जानकारी के अनुसार वनरक्षक से लेकर रेंजर तक टॉस्क आॅरियंटेड गश्त कर रहे हैं। उन्हें प्रत्येक दिन अलग-अलग वनखंडों में गश्त करवाई जा रही है। गश्त के दौरान जवानों के साथ जीप, कार, बोलेरो कैम्पर सहित अन्य वाहन भी उपलब्ध कराए गए हैं। संवेदनशील इलाके बरड़ा बस्ती, क्रेशर बस्ती व जगपुरा वनखंडों में फ्लैग मार्च व गश्त की जा रही है। </p>
<p><strong>अप्रेल से अब तक 30 लाख का रेवन्यू</strong><br />वन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वनमंडल ने अप्रेल से अब तक कुल 30 लाख का जुर्माना वसूला है। जिसमें से 17.50 लाख का जुर्माना तो डीएफओ मेहरा के कार्यभार ग्रहण करने के दो माह में ही वसूला गया। इस अवधि में अपराधियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई अमल में लाई गई।  जिससे माफियाओं में हड़कम्प मचा हुआ है। </p>
<p><strong>60 टन लकड़ियों से भरा ट्रक जब्त</strong><br />डीएफओ मेहरा ने बताया कि लाडपुरा रेंज के विभिन्न वन खंडों से गत दो माह में वनकर्मियों ने 60 टन लकड़ियों से भरे दो ट्रक जब्त किए हैं। संबंधित व्यक्तियों द्वारा इनकी पैनल्टी जमा नहीं करवाए जाने पर नीलामी की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि हाल ही में कैथून इलाकों में अवैध रूप से संचालित आरा मशीनों पर छापा मार आरा मीशन व भारी मात्रा में लकड़ियां जब्त की थी। जिनका जुर्माना जमा नहीं करवाए जाने पर नीलाम कर पैनल्टी  वसूली जाएगी।</p>
<p>कोटा जिले की सभी रेंजों में 44 जवानों की टीम रात्रि गश्त कर रही है। प्रत्येक रेंज में 4-4 गश्ती दल बनाए गए हैं, जो तेज सर्दी में सभी वनखंडों में रात्रि गश्त कर वनमूमि की सुरक्षा कर रहे हैं। वनभूमियों पर अतिक्रमण, कब्जे, खनन, पेड़ों की कटाई सहित अन्य अवैध कार्य नहीं होने दिए जाएंगे। वन माफियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं, जो आगे भी जारी रहेगी। <br /><strong>- तरुण मेहरा, उप वन संरक्षक, कोटा मंडल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jan 2024 18:22:28 +0530</pubDate>
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                <title>चोरी हो रहा मुकुंदरा का पहाड़</title>
                                    <description><![CDATA[अवैध खनन करने वाले माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत है कि अपने आसपास कोई संदिग्ध नजर आए तो तुरंत अलर्ट कर दिया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundara-mountain-being-stolen/article-51578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/chori-ho-rha-h-mukundara-ka.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नीरो बांसुरी बजाता रहा और रोम जलता रहा....इतिहास की कड़वी कहावत मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के अधिकारियों पर सटीक बैठती है। इधर, खनन माफिया खुलेआम मुकुंदरा का आंचल नोंचते रहे और जंगल के रखवाले आंखें मूंदे पड़े रहे। नतीजन, वनसम्पदा चोरी हो गई और जंगल का चीरहरण हो गया। जब आंख खुली तो मुकुंदरा का पहाड़ गायब हो गया। अब गैर जिम्मेदारी का ठीकरा स्टाफ की कमी पर फोड़कर बला टाली जा रही है। दरअसल, मुकुंदरा की बोराबांस रैंज में दौलतगंज स्थित डायवर्जन चैनल से निकला मलबा खनन माफिया चुरा ले गए। वर्ष 2017 तक यहां मबले के टीलेनुमा करीब 40 से 50 फीट ऊंचे पहाड़ थे जो वर्तमान में करीब 8 से 10 फीट ही रह गए। </p>
<p><strong>वर्ष 2007 में बना था डायवर्जन चैनल</strong><br />दौलतगंज के बाशिंदों ने बताया कि नए कोटा के जवाहर नगर, तलवंडी, विज्ञान नगर, संजय नगर सहित अन्य इलाकों को बाढ़ से बचाने के लिए सरकार ने वन भूमि पर वर्ष 2002 में डायवर्जन चैनल का निर्माण शुरू करवाया था, जो 2007 में बनकर पूरा हुआ। खुदाई के दौरान निकले पत्थर, मिट्टी व कंक्रीट  का ढेर बोराबांस के जंगल में रखवाया गया। यहां 40 से 50 फीट ऊंचे करीब टीलेनुमा पहाड़ खड़े हो गए, जो वन अधिकारियों की देखरेख व सुरक्षा के अभाव में खनन माफिया चोरी कर गए।</p>
<p><strong>माफियाओं का नेटवर्क मजबूत</strong><br />अवैध खनन करने वाले माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत है कि अपने आसपास कोई संदिग्ध नजर आए तो तुरंत अलर्ट कर दिया जाता है। आरोपियों की धरपकड़ के लिए फलाइंग के पहुंचने से पहले ही सूचना पहुंच जाती है। इतना ही नहीं, किसी अधिकारी या संदिग्ध वाहन नजर आने पर अवैध खननकर्ता भाग जाते हैं या फिर उन पर हमला कर देते हैं। पूर्व में भी माफियाओं ने फोरेस्ट गार्डों पर हमला कर जख्मी कर दिया था। क्षेत्र में माफियाओं का दबदबा होने से अधिकारी भी कार्रवाई करने से हिचकते हैं।</p>
<p><strong>नहीं होती गश्त, बेधकड़ चल रहा खनन</strong><br />नयागांव निवासी ग्यारसी व कजोड़ लाल (परिवर्तित नाम) ने बताया कि नयागांव से बोराबांस गांव तक मुकुंदरा के जंगलों में अवैध खनन होता है। रातभर जेसीबी से खुदाई की जाती है और दिन में मजदूर लगाकर हथौड़ों से पत्थर तोड़े जाते हैं। वन रक्षक से लेकर रैंजर तक को इसकी जानकारी है, इसके बावजूद खननकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।   </p>
<p><strong>दिनरात चोरी हो रहा मलबा और पत्थर </strong><br />दौलतगंज निवासी भोला (परिवर्तित नाम) ने बताया कि मुकुंदरा के बोराबांस रेंज से गुजर रहे डायवर्जन चैनल की चट्टाने व कंक्रीट का मलबा लगातार चोरी हो रहा है। पूर्व में यहां मलबे के बड़े-बड़े पहाड़ थे जो वर्तमान में आधे से भी कम रह गए हैं। प्रतिदिन 25 से 30 ट्रॉली मलबा चुराकर बेचा जा रहा है। वहीं, चट्टानों के बड़े पत्थरों को हथौड़ों से तोड़ ट्रॉलियां भरी जा रही है। जिन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। माफिया दीमक की तरह की जंगल की सम्पदा चट कर रहा है और स्थानीय अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। </p>
<p><strong>अवैध गतिविधि रोकने की कर रहे कोशिश</strong><br />हमारे पास जितना स्टाफ है, उसी से अवैध गतिविधियों को रोकने की पूरी कोशिश  कर रहे हैं। पहले भी स्टाफ के ऊपर हमला हो चुका है, उस समय भी पुलिस से शिकायत की थी। समय-समय पर पुलिस से सहयोग भी मांगते हैं। <br /><strong>- बीजो रॉय, डीएफओ, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व कोटा</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं एक्सपर्ट</strong><br /><strong>खत्म हो रहा हैबीटॉट</strong><br />बोराबांस रैंज के जंगलों में लेपर्ड, हिरण, लोमड़ी, भालू, हायना, नीलगाय सहित कई वन्यजीवों का नेचुरल हैबीटॉट है। अवैध खनन, वाहनों का शौर, पत्थर तोड़ने की आवाज, घुसपैठ सहित अन्य संदिग्ध गतिविधियों से उनका प्राकृतिक आवास नष्ट होता है। साथ ही जैव विविधता भी खत्म होगी।<br /><strong>- सोहिल ताबिश, बायोलॉजिस्ट </strong></p>
<p><strong>मिलीभगत का खेल</strong><br />माइनिंग व तस्करी का काला खेल मिलीभगत से चल रहा है। माफियाओं का गिरोह लगातार मुकुंदरा में सक्रिय है। दिन-रात जंगलों में बेधड़क ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ती हैं। आम आदमी बिना इजाजत जंगल में चला जाए तो वन कर्मचारी उनसे जुर्माना वसूलते हैं लेकिन खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। <br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, अध्यक्ष, पगमार्क फाउंडेशन </strong></p>
<p><strong>खत्म हो गए पहाड़</strong><br />16 साल पहले डायवर्जन चैनल से निकले मलबे के करीब एक दर्जन ऊंचे-ऊंचे टीलेनुमा पहाड़ थे, जो अब खत्म हो गए। खननकर्ता पत्थर, मिट्टी, कंक्रीट चुराकर ले गए।  अधिकारियों ने न तो वन सम्पदा की सुरक्षा की और न ही खननकर्ताओ पर कार्रवाई की। नतीजन, माफियाओं का हौसला बढ़ा और अवैध गतिविधियां बढ़ने लगी। <br /><strong>-एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p><strong>सहमति के बिना चोरी नहीं</strong><br />पहले यहां 40 से 50 फीट ऊंचे मलबे के टीलेनुमा पहाड़ थे, जो लगातार चोरी होने से आज करीब 10 से 11 फीट ही रह गए। अधिकारियों को तुरंत मलबे का निस्तारण करना चाहिए। इसे नीलाम कर सरकार की आय बढ़ाते या फिर इन पत्थरों को मुकुंदरा के दीवार व अन्य निर्माण में काम में ले सकते थे। डायवर्जन में फोरेस्ट की जमीन जाने पर रेस्टोरेशन के लिए विभाग को पैसा मिला होगा, वानिकी का विकास करवाना चाहिए था। वनरक्षक से रैंजर तक की सहमति के बिना अवैध गतिविधियां नहीं हो सकती। <br /><strong>-तपेश्वर सिंह भाटी, अध्यक्ष मुकन्दरा वन्यजीव एवं पर्यावरण समिति</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jul 2023 16:25:17 +0530</pubDate>
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                <title>वन विभाग टीम पर माफिया का हमला, चार घायल</title>
                                    <description><![CDATA[मामले में पुलिस ने अवैध खनन कर्ताओं के खिलाफ वन विभाग की टीम पर जानलेवा हमला, राजकार्य में बाधा सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच डिप्टी एसपी को सौंप दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mafia-attack-on-forest-department-team--four-injured/article-44182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/van-vibhag-ki-team-par-maafia-ka-hamla...kota-news..29.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनंतपुरा थाना क्षेत्र में आए दिन मिल रही शिकायतों के बाद शुक्रवार को अवैध खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए पहुंची वन विभाग की टीम पर अवैध खनन माफियों ने पत्थर, डंडा तथा सरिया से हमला कर दिया। जिससे जगपुरा नाका चौकी प्रभारी सहित तीन होमगार्ड के जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलोें को एमबीएस अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। सभी घायलों का निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है।  एएसआई प्रमोद कुमार ने बतया कि फरियादी रैत्या वन नाका चौकी प्रभारी धर्मराज बैरवा ने रिपोर्ट दी। जिसमें बताया कि उसके पास पिछले कई दिनों से भामाशाहमंडी के पीछे खेड़ा जगपुरा वन खंड में खनन माफियों द्वारा खुलेंआम खनन करने की शिकायत मिल रही थी। इस पर सुबह करीब आठ बजे वह 10-12 होमगार्ड के साथ मौके पर पहुंंचा तो वहां अवैध खनन करने वाले करीब 40-50 लोग पत्थर काट रहे थे। तभी उन्होेंने अपने तीन होमगार्ड जवानों के साथ अवैध खनन कर रहे अवैध खनन माफियाओं को ललकारा तथा रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने पत्थर, डंडा, लकड़ी तथा लोहे के सरिया से उन पर हमला कर दिया। जिससे धर्मराज बैरवा के हाथों की दो अंगुलिया, चार पसली फैक्चर हो गई। इसके अलावा उनके हाथ-पैर में भी गंभीर चोट आई है तथा दो इंच का कोहनी में गहरा घाव हो गया। जबकि कई होमगार्ड जवानों के हाथ-पैर तथा शरीर में कई स्थानों पर चोट आई। किसी तरह से अवैध  खनन माफियों से अपनी जान बचाकर भागे तथा रेंजर तथा वन विभाग के अधिकारियों तथा पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मौके से खनन माफियाओं के 12 ट्रैक्टर, 3 कम्प्रेसर, 2 कट्टे बारुद, ब्लास्टिंग का सामान जब्त किया है। इस मामले में पुलिस ने अवैध खनन कर्ताओं के खिलाफ वन विभाग की टीम पर जानलेवा हमला, राजकार्य में बाधा सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच डिप्टी एसपी को सौंप दी गई है।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शुक्रवार सुबह अवैध खननकर्ताओं ने हमला कर वनकर्मियों को गंभीर घायल कर दिया है। मौके से खनन माफियाओं के 12 ट्रैक्टर, 3 कम्प्रेशर, 2 कट्टे बारुद, ब्लास्टिंग का सामान जब्त किया है।  वन विभाग ने वन एक्ट के तहत 26, 41, 42 धाराओं में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वन भूमि पर अवैध गतिविधियां रोकथाम के लिए नियमित गश्त की जा रही है। खनन माफियाओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। <br /><strong>- जयराम पांडे, डीएफओ, वनमंडल कोटा</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी के पीछे जगपुरा वन क्षेत्र में सुबह 8 बजे खनन माफिया द्वारा अवैध माइनिंग करने की सूचना मिली थी। इस पर नाका प्रभारी धर्मराज बैरवा तीन होमगार्ड जवानों के साथ मौके पर पहुंचे तो वहां मौजूद 30 से 40 लोगों ने उन पर सरियों, लाठियों व पत्थरों से हमला कर गंभीर घायल कर दिया। बाद में सूचना मिलने पर मैं 8.40 बजे संयुक्त लाडपुरा रेंज टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचा। लेकिन तब तक  सभी आरोपी मौके से फरार हो चुके थे। हालांकि, टीम ने 12 ट्रैक्टर, 3 कम्पे्रसर, बारूद और ब्लास्टिंग का सामान जब्त कर लिया है। आरोपियों के खिलाफ अनंतपुरा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। इन आरोपियों पर पूर्व में भी अवैध खनन के मामले दर्ज हैं। <br /><strong>- कुंदन सिंह, रैंजर, लाडपुरा रेंज कोटा वनमंडल </strong></p>
<p>अवैध खनन के मामले में हम टीम के साथ रोजाना गश्त करते रहते हैं तथा पुलिस को रोजाना तो साथ नहीं ले जाया जा सकता है। इसलिए रुटीन वर्क गश्त का था। इसलिए पुलिस को जानकारी नहीं दी गई। हम तो चेकिंग करने गए थे वहां एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर- ट्रोली तथा मजदूर सहित चालीस -पचास लोग थे। हमने उन्हें खनन से रोका तो हमला कर दिया। जिससे घायल हो गए। <br /><strong>-धर्मराज बैरवा, रैत्या  वन नाका चौकी प्रभारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Apr 2023 14:49:23 +0530</pubDate>
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