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                <title>शराबी यमदूत लील रहे जिंदगी, हादसों का जिम्मेदार कौन</title>
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                        <![CDATA[शराब पीकर वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ आज तक कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/drunken-messengers-of-death-are-taking-lives--who-is-responsible-for-accidents/article-143420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(23).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सड़कों पर शराब पीकर बेकाबू दौड़ते वाहन चालक लोगों के लए यमदूत बन रहे हैं। इन शराबी यमदूतों पर कोई लगाम नहीं लगा पा रहा। अपनों का दर्द उसे ही महसूस होता है जिसे अपना कोई छोड़कर चला जाता है। लेकिन आज तक हादसों में लोगों की मौत के बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा। सबसे बड़ी बात है कि शराब पीकर वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ आज तक कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई। अगर कोई हादसा होता है तो 185 एमवीएक्ट में कार्रवाई कर बाद मेंं छोड़ दिया जाता है।</p>
<p><strong>केस  नंबर एक</strong></p>
<p>जयपुर के हरमाडा क्षेत्र में तीन नंवबर 2025 को एक बेकाबू डंपर ने कई वाहनों को रौंंद दिया था। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी। डंपर तेज रफ्तार से लहराता आ रहा था और सड़क किनारे खड़े वाहनों को टक्कर मारते हुए चला जा रहा था। डंपर ने दस वाहनों को टक्कर मारी थी। डंपर एक किलो मीटर तक रास्ते में वाहनों को रौंदता चला आ रहा था। चालक शराब के नशे में था। इस दौरान डंपर की स्पीड करीब 100 किलो मीटर प्रति घंटा थी।</p>
<p><strong>केस नंबर दो</strong></p>
<p>जयपुर के ही बजाज नगर थाना क्षेत्र में 29 जनवरी 2026 को एक बेकाबू कार ने दोपहर के समय में कहर बरपाया और बेकाबू कार पांच वाहनों को टक्कर मारते हुए एक मॉल की दीवार से टकरा गई थी। हादसे में दो लोगों के चोट आई थी। कार चालक पूरी तरह से नशे में था। बाद में बजाज नगर पुलिस ने हिरासत में लिया था।</p>
<p><strong>केस नंबर तीन</strong></p>
<p>बूंदी जिले के डाबी थाना क्षेत्र में बुधवार रात को एक टे्लर की टक्कर से बाइक सवार तीन बच्चों की मौत हो गई थी। मदन बंजारा निवासी पराणा अपने बच्चों के साथ बाइक से डाबी उपचार के लिए जा रहे थे। रास्ते में देर रात करीब साढ़े नौ बजे तेज रफ्तार ट्रेलर ने दूधी कुडी कट के पास बाइक को जोर दार टक्कर मार दी। हादसे में सुमन उम्र 6, अंकित सात साल व भतीजे करण की मौत हो गई थी।</p>
<p><strong>केस नंबर चार</strong></p>
<p>नयापुरा थाना क्षेत्र में दस फरवरी को एक तेज रफ्तार ट्रक चलाक ने ट्रक को लहराते हुए कई वाहन चालकों को टक्कर मार दी। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। ट्रक चालक को पुलिस और आमजन ने पीछा कर जेडीबी कॉलेज के सामने रोक लिया और उसे नीचे उतारा गया तो वह जमीन पर ही लेट गया। पुलिस ने उसे तुरंत एमबीएस लेकर गई और जांच की गई तो वह शराब के नशे में था और कुछ बोल नहीं पा रहा था।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं जिम्मेदार</strong></p>
<p>ऐसे मामलों में यातायात पुलिस निरंतर कार्रवाई की जा रही है तथा एमवीएक्ट 185 में मुकदमा दर्ज किया गया है। शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान भी समय समय पर जागरुकता के लिए चलाया जाता है। कई बार ऐसे चालकों के लाइसेंस रदद करने के लिए आरटीओ को लिखा जाता है। हादसे ना हों इस पर विशेष फोकस रहता है।</p>
<p><strong>- तेजस्वनी गौतम, कोटा सिटी एसपी</strong></p>
<p>यातायात नियमों की जानकारी परिवहन विभाग और पुलिस के साथ संयुक्त रूप से दी जाती है। साथ ही ऐसे मामलों में यातायात पुलिस द्वारा ऐसे वाहन चालकों के लाइसेंस रद़्द करने के लिए अगर सिफारिश आती है तो निश्चित रूप से रद्द किए जाते हैं। हाइवे और स्टेट हाइवे पर निरंतर गश्त रहती है।</p>
<p><strong>- मनीष शर्मा, आरटीओ कोटा</strong></p>
<p>कोटा शहर के मुख्य स्थानों व पाइंटों पर पुलिस जवानों को तैनात किया गया है, जिससे शहर में बिना इजाजत के कोई भारी वाहन प्रवेश ना कर सके। शराब पीकर वाहन चालाने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान 185 एमवीएक्ट में कार्रवाई की जाती है। अब मुकदमा भी दर्ज किया जाता है और बार समझाइश के बाद भी नहीं मानने पर लाइसेंस रदद करवाने के लिए आरटीओे भेज दिया जाता है।</p>
<p><strong>- देवेश भारद्वाज, टीआई कोटा सिटी</strong></p>
<p>शराब पीकर वाहन चलाना केवल कानूनी अपराध नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और नैतिक जिम्मेदारी का प्रश्न है। दुर्घटनाएं रोकने के लिए सख्त प्रवर्तन ,तकनीकी निगरानी ,जन-जागरूकता , सामाजिक भागीदारी, समुदाय स्तर पर पुलिसझ्रनागरिक सहयोग मिलना चाहिए तथा स्कूल और कॉलेज में यातायात नियमों के प्रति जागरुक करने के साथ साथ जिम्मेदार ड्राइविंग का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस से देने पहले सड़क सूरक्षा के नियम और शराब पीकर वाहन चालने पर कानूूनी कार्रवाई को समझाना चाहिए।</p>
<p><strong>- नीलम मुकेश विजयवर्गीय, अध्यक्ष केट वीमेन विंग कोटा</strong></p>
<p>शराब के नशे या अन्य नशीले पदार्थ का सेवन कर वाहन चलाना एमवी एक्ट की 185 के तहत एक दण्डनीय अपराध है। ऐसा करने पर प्रथम बार अपराध करने पर 6 माह के करावास या 10,000 के जुमार्ने या दोनों से दण्डित किया जा सकता है , अपराध की पुनरावृति पर 15000 के जुमार्ने या 2 वर्ष के कारावास दण्डनीय है , किन्तु ये एक जमानती अपराध है अपराध की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसे गैर जमानती अपराध की श्रेणी में लाया जाना चाहिए ।</p>
<p><strong>- लोकेश नंदवाना, एडवोकेट</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 17:54:03 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिकल अनफिट चालकों को बस चलाने के आदेश पर रोक, अदालत ने कहा- रोडवेज का यह आदेश यात्रियों को खतरे में डालने वाला है </title>
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                        <![CDATA[याचिका में अधिवक्ता विनायक जोशी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता रोडवेज में चालक पद पर कार्यरत हैं। इस दौरान दुर्घटना होने के चलते किसी के पांव में तो किसी के हाथ में रॉड लगी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-the-order-of-driving-a-bus-to-medical-unfit/article-118643"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/court-22.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने रोडवेज के अलवर डिपो में मेडिकल अनफिट चालकों को बस चलाने के आदेश की क्रियान्विति पर रोक लगा दी है। जस्टिस सुदेश बंसल ने यह आदेश छतर सिंह व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान रोडवेज एमडी वीसी के जरिए अदालत में पेश हुए। वहीं रोडवेज की ओर से कहा गया कि मेडिकल अनफिट चालकों को रूट पर ड्यूटी लगाने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की जा रही है। इस पर अदालत ने कहा कि रोडवेज का यह आदेश यात्रियों को खतरे में डालने वाला है। </p>
<p>याचिका में अधिवक्ता विनायक जोशी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता रोडवेज में चालक पद पर कार्यरत हैं। इस दौरान दुर्घटना होने के चलते किसी के पांव में तो किसी के हाथ में रॉड लगी है। वहीं रोडवेज मुख्यालय के भी आदेश हैं कि अनफिट चालकों को रूट पर ड्यूटी लगाने से पहले मेडिकल जांच जरूरी है। ऐसे में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही उनकी रूट पर ड्यूटी लगाई जा सकती है। इसके बावजूद भी अलवर के चीफ  मैनेजर ने बिना मेडिकल जांच उनकी रूट पर ड्यूटी लगा दी। चीफ  मैनेजर ने आदेश जारी कर नियमों की अवहेलना की है वहीं दूसरी ओर यात्रियों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ताओं को रूट पर ड्यूटी लगाने के आदेश की क्रियान्विति पर रोक लगा दी है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jun 2025 10:05:22 +0530</pubDate>
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                <title>सड़कों पर मौत बनकर बेखौफ वाहन दौड़ा रहे नाबालिग</title>
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                        <![CDATA[नाबालिग किसकी अनुमति से सड़क पर वाहन दौड़ा रहे हैं, इस प्रश्न पर पुलिस, परिवहन अधिकारी, यातायात विभाग सभी चुप्पी साधे हैं, ट्रैफिक पुलिस को बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/minors-are-fearlessly-driving-as-death-on-the-roads/article-64547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/सड़कों-पर-मौत-बनकर-बेखौफ-वाहन-दौड़ा-रहे-नाबालिग.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के प्रमुख चौराहों पर नाबालिग खुलेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस की आंखों के सामने न केवल वाहन दौड़ा रहे बल्कि मोटरयान नियमों का भी मखौल उड़ा रहे हैं। जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के कारण नाबालिग खुद के साथ अन्य वाहन चालकों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं। जबकि, कुछ माह पहले ही गुमानपुरा फ्लाईओवर से गिरकर नाबालिग बाइक चालक की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इसके बावजूद न ट्रैफिक पुलिस और न ही अभिभावकों ने सबक लिया। नतीजन, चौराहों पर हर दिन हादसे हो रहे हैं। इसका ताजा उदारहण हाल ही में नाबालिग वाहन चालक द्वारा कार को टक्कर मारने के बाद कार सवार युवकों द्वारा अपहरण कर पिता से पैसे मांगने का मामला भी सामने आ चुका है। फिर भी पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।  शहरवासियों की लगातार मिल रही शिकायतों पर दैनिक नवज्योति ने सोमवार को शहर के व्यस्तम चौराहों का जायजा लिया तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। पेश हैं खबर के प्रमुख अंश...</p>
<p><strong>स्कूटी-बाइक से स्कूल जा रहे नाबालिग</strong><br />शहर के स्कूलों में नाबालिग छात्र बाइक और छात्राएं स्कूटी लेकर स्कूल पहुंच रहे हैं। दोपहर को छुट्टी होने के बाद मुख्य चौराहों पर बेखौफ फर्राटे भर रहे हैं। जबकि, नाबालिगों का वाहन चलाना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है, फिर भी न तो अभिभावकों को परवाह है और न ही शिक्षकों को। यही वजह है शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी नाबालिग वाहन चालकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। </p>
<p><strong>जिम्मेदारों की चुप्पी बर्बाद कर रही भविष्य</strong><br />नाबालिगों के वाहन चलाने के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है।  किशोर बगैर हेलमेट के तेज गति से बाइक चलाते सड़कों पर दिख रहे हैं लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। ये नाबालिग किसकी अनुमति से सड़क पर वाहन दौड़ा रहे हैं, इस प्रश्न पर पुलिस, परिवहन अधिकारी, यातायात विभाग सभी चुप्पी साधे हैं। ट्रैफिक पुलिस को बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है।</p>
<p><strong>हादसों का कारण बन रहे नाबालिग</strong><br />शहर के विभिन्न इलाकों नाबालिग छात्र पावर बाइक स्पीड से दौड़ा रहे हैं। आगे चल रहे वाहनों को ओवरटेक कर रोंग साइड आ जाते हैं। ऐसे में अपनी लेन में चल रहे वाहनों से टकरा जाते हैं। सड़कों पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। अधिकतर मामले समझाइश के कारण थाने तक नहीं पहुंचते। हालात यह है कि अभिभावकों ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के हाथों में बाइक व रेसिंग स्कूटर थमा दिए हैं। पिछले 9 माह पहले ही गुमानपुरा पुलिया से 40 फीट नीचे गिरने से 9वीं कक्षा के छात्र अंशु की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी, अभिभावक व स्कूल संचालक बेपरवाह बने हुए हैं। </p>
<p><strong>सीएडी से घोड़ा सर्किल तक बाइक दौड़ा रहे छात्र</strong><br />नवज्योति टीम दोपहर डेढ़ बजे सीएडी व घोड़ा सर्किल पर पहुंची। जहां कॉन्वेंट स्कूलों की छुट्टी होने के बाद बड़ी संख्या में नाबालिग वाहन चालक सीएडी से घोड़ा सर्किल तक बाइक दौड़ाते हुए नजर आए। जबकि,  यहां सर्किल पर ट्रैफिक पुलिस के जवान मौजूद थे। इसके बावजूद न तो उन्हें पाबंद किया और न ही स्कूल संचालकों से समझाइश की। </p>
<p><strong>स्कूल प्रबंधन भी लापरवाह </strong><br />शहर के अधिकतर निजी स्कूलों में बाइक व स्कूटी से छात्र-छात्राओं के स्कूल पहुंचने के नजारे आम है। निजी और सरकारी सभी स्कूल के साइकिल स्टैंड पर छात्र-छात्राओं की बाइक व स्कूटी खड़ी रहती हैं। हायर सेकेंडरी तक में पढ़ने वाले सभी बच्चे 18 से कम उम्र के रहते हैं। स्कूल प्रबंधन को यह भी पता होता है कि जो बच्चे बाइक या स्कूटी से आ रहे हैं, वे नाबालिग हैं इसके बावजूद एक्शन नहीं लिया जाता। </p>
<p><strong>समझाइश के बाद भी नहीं माने तो कार्रवाई</strong><br />नाबालिग बच्चों को स्कूल जाने के लिए बाइक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अभिभावकों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे बाइक लेकर बाहन न जाएं। अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों की समझाइश करेंगे। साथ ही स्कूलों में जाकर जागरूक करेंगे, संचालकोें को नाबालिग छात्रों को बाइक लेकर स्कूल न आने देने के लिए पाबंद करेंगे। इसके बावजूद नाबालिग वाहन चलाते मिले तो उनके अभिभावकों के खिलाफ उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। <br /><strong>- राजेश ढाका, पुलिस उपाधीक्षक, यातायात </strong></p>
<p><strong>बैठक में उठाएंगे मामला</strong><br />स्कूली छात्रों का वाहन चलाना चिंताजनक है। स्कूल एसोसिएशन की बैठक में यह मामला उठाएंगे। शाला संचालकों के साथ मिलकर प्रार्थना सभा में बच्चों को मोटर यान नियमों की जानकारी देकर जागरूक करने की पहल करेंगे। वहीं, पीटीएम में अभिभावकों की भी समझाइश करेंग कि वे अपने बच्चों को बाइक-स्कूटी देकर स्कूल न भेजे। <br /><strong>- जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ कोटा </strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू वाहन स्वामी पर 25 हजार तक का जुर्माना</strong><br />किसी भी सार्वजनिक स्थान पर 16 वर्ष की उम्र पूरी कर चुका किशोर 50सीसी  क्षमता तक का वाहन चला सकता है लेकिन इस सीसी के वाहन अब बंद हो चुके वहीं, 18 वर्ष से अधिक के युवक वाहन चलाने के लिए अनुज्ञा पत्र प्राप्त करके अधिकृत हो जाता है। यदि, इस उम्र के व्यक्ति के पास अनुज्ञा पत्र नहीं है तो उसे 3 माह तक का कारावास या 5000 तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। लेकिन कोई भी किशोर मोटरयान अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करता है तो ऐसी स्थिति में अपराध की गंभीरता बढ़ जाती है और वाहन स्वामी को 3 वर्ष तक का कारावास या 25000 तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। साथ ही ऐसा किशोर 25 वर्ष की उम्र से पहले लाइसेंस प्राप्त करने का अधिकार खो देगा और 12 माह की अवधि के लिए वाहन की आरसी भी रदद की जा सकती है। ट्रांसपोर्ट व्हीकल के लिए न्यूनतम उग्र 20 वर्ष है। <br /><strong>- विवेक नंदवाना, वरिष्ठ अधिवक्ता</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Dec 2023 18:05:46 +0530</pubDate>
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                <title>ड्राइविंग लाइसेंस धारक के लिए आवश्यक हो बीमा : पटेल</title>
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                        <![CDATA[भारतीय जनता पार्टी के आरके सिंह पटेल ने नियम 377 के तहत लोकसभा में यह मामला उठाया और कहा कि देश में बड़े स्तर पर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/news--insurance-is-necessary-for-driving-license-holder--rk-singh-patel/article-7524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/driving-licence-----copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को मांग की गई कि श्रमिकों के लिए कार्य क्षेत्र में दुर्घटना बीमा की तर्ज पर ड्राइविंग लाइसेंस के मामले में भी लाइसेंस धारक के लिए भी बीमा की व्यवस्था होनी चाहिए।  भारतीय जनता पार्टी के आरके सिंह पटेल ने नियम 377 के तहत लोकसभा में यह मामला उठाया और कहा कि देश में बड़े स्तर पर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं।</p>
<p><br />ऐसे में ड्राइवरों की मौत की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यदि दुर्घटना होती है तो ड्राइवर को पैसा नहीं मिलता जिसके कारण उसके परिवार के सदस्यों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। किसी ड्राइवर के परिजनों को उसकी मौत के बाद भटकना नहीं पड़े इसलिए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करते समय दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका कहना था कि श्रमिकों के लिए दुर्घटना बीमा योजना है तो ड्राइविंग लाइसेंस के समय भी बीमा किया जाना चाहिए और जब लाइसेंस बनता है तो लाइसेंसधारक का बीमा होना चाहिए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 11:47:36 +0530</pubDate>
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                <title>20 साल कॉलेज में पढ़ाने के बाद चला रहे ऑटो </title>
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                        <![CDATA[अगर कोई ऑटो चालक आपसे बहुत ही विनम्र तरीके से अंग्रेजी में बात करे तो आपको आश्चर्य तो होगा। बेंगलुरु की निकिता अय्यर ने ऐसा ही वाक्या साझा किया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/karnataka-one-man-driving-auto-after-20-years-teach-in-college/article-7044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/auto-driver-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलूरू। अगर कोई ऑटो चालक आपसे बहुत ही विनम्र तरीके से अंग्रेजी में बात करे तो आपको आश्चर्य तो होगा। बेंगलुरु की निकिता अय्यर ने ऐसा ही वाक्या साझा किया है। निकिता को अपने कार्यालय पहुंचने में देर हो रही थी, जो शहर के दूसरे छोर पर था। वह किसी वाहन का इंतजार कर रही थी। तभी एक ऑटो आकर रुका और उसका चालक जो 74 वर्षीय बुजुर्ग था, बड़े ही विनम्र शब्दों में अंग्रेजी में बोला कृपया अंदर आइए मैडम, आप जो चाहें भुगतान कर सकती हैं। इस वृद्ध के व्यवहार से अय्यर हैरान रह गई और उसने उत्सुकता से उससे पूछा कि वह इतनी अच्छी अंग्रेजी कैसे बोलते हैं। पताबी रमन ने जवाब दिया कि वह एक अंग्रेजी व्याख्याता हुआ करता था और उसने एमए और एम एड किया है। रमन ने तुरंत अय्यर से सवाल किया कि क्या आप मुझसे पूछने जा रहे हैं कि मैं ऑटो क्यों चला रहा हूं।</p>
<p><strong>कर्नाटक में नहीं मिली नौकरी</strong><br />रमन ने बताया कि वह 14 साल से ऑटो-रिक्शा चला रहा है। जाति के कारण कर्नाटक में नौकरी नहीं मिलने के कारण वह मुंबई चले गए और वहां के पवई कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाते थे। उन्होंने वहां 20 साल तक काम किया और 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो गए।</p>
<p><strong>700-1500 रुपए रोज कमा लेते हैं</strong><br />रमन ने बताया कि शिक्षकों को अच्छा वेतन नहीं मिलता है। आप अधिकतम 10 से 15 हजार कमा सकते हैं और चूंकि यह एक निजी संस्थान था, इसलिए मेरे पास पेंशन नहीं है। रिक्शा चलाने से मुझे एक दिन में कम से कम 700-1500 रुपए मिलते हैं जो मेरे और मेरी प्रेमिका के लिए काफी है। उसने बताया कि वह अपनी पत्नी को प्रेमिका कहते हैं।</p>
<p><strong>पत्नी को क्यों कहते हैं प्रेमिका</strong> <br />उन्होंने बताया कि जिस क्षण आप पत्नी कहते हैं, पति सोचते हैं कि वह एक दास है, जिसे आपकी सेवा करनी चाहिए, लेकिन वह किसी भी तरह से मुझसे कम नहीं है, वास्तव में, वह कभी-कभी मुझसे श्रेष्ठ होती है। हम कडुगोडी में वन बीएचके में रहते है, जहां मेरा बेटा 12 हजार रुपए किराया देने में मदद करता है, लेकिन इसके अलावा हम अपने बच्चों पर निर्भर नहीं हैं।वे अपना जीवन जीते हैं और हम खुशी से अपना जीवन जीते हैं। अब मैं जब चाहूं अपना ऑटो निकाल सकता हूं और जब चाहूं काम कर सकता हूं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Mar 2022 10:45:26 +0530</pubDate>
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                <title>ओवरस्पीड से मौत का तांडव : ड्राइविंग लाइसेंस होंगे स्थाई रूप से निरस्त</title>
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                        <![CDATA[परिवहन विभाग ने ओवरस्पीड के सेक्शन 183,184 के तहत कार्रवाई करने की तैयारी]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%93%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B5---%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%B8-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4/article-2307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/driving-licence.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। जोधपुर में ऑडी कार चालक द्वारा एक व्यक्ति को कुचलकर मौत के घाट उतारकर दस लोगों को घायल कर दिया गया था। चूंकि इस कार ड्राइवर का यह दूसरा हादसा था। इसलिए लोगों में खतरनाक ड्राइविंग करने वालों को लेकर रोष बढ़ गया है। परिवहन विभाग ने ओवरस्पीड से मौत का तांडव करने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस को स्थाई रूप से निरस्त करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए प्रदेशभर के आरटीओ और डीटीओ से इससे संबंधित केसों की जानकारी मांगी गई है। जोधपुर ऑडी कार घटना से पहले भी जयपुर में खासा कोठी सर्किल, सी स्कीम और रामबाग सर्किल पर ऐसे दर्दनाक हादसे हो चुके हैं। इससे परिवहन विभाग के ड्राइविंग लाइसेंस  देने की प्रक्रिया पर सवाल उठता है कि लाइसेंस बनाने के मापदंडों को पूरे किए बिना ही लाइसेंस बना दिए जाते हैं। विभाग में ऐसे लोगों के  डीएल स्थाई रूप से निरस्त करने के नियम होने के बावजूद रसूखवालों पर कार्रवाई नहीं होती। <br /> <br /> <br /> <strong>इस साल हो चुकी हैं 7,227 मौतें</strong><br /> जनवरी से सितंबर तक कुल 15,282 सड़क दुर्घटनाओं में 14096 लोग घायल हुए और 7,227 लोगों की मौतें हुई हैं। दुर्घटना प्रकरणों में परिवहन और पुलिस विभाग ने 28,238 केसों में ड्राइविंग लाइसेंस के निलम्बन की सिफारिश की है।  अभी तक 26,216 लाइसेंस तीन महीने के लिए निलम्बित किए जा चुके हैं।</p>
<p><br /> <strong>परिवहन विभाग के पास नहीं है पर्याप्त आंकड़े</strong><br />  हिट एंड रन केसों के आंकड़े पुलिस और परिवहन विभाग के बीच समय पर आदान प्रदान नहीं हो पाते है। इस वजह से ऐसे प्रकरणों पर कार्रवाई करने में देरी होती है। परिवहन विभाग के पास भी आरटीओ-डीटीओ के माध्यम से लाइसेंस निलम्बन और निरस्त की रिपोर्ट समय पर नहीं पहुंचती। परिवहन मुख्यालय में भी ऐसे केसों के पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं।</p>
<p><br /> <strong>इनका कहना है</strong><br /> - कानून की नजर में कोई रसूखदार नहीं है। किसी की जान लेने का किसी को भी नहीं है। मोटर व्हीकल एक्ट में ऐसे केसों में कार्रवाई के लिए जो भी सख्त प्रावधान हैं, हम उनको लागू करेंगे। परिवहन कानूनों की पालना के लिए हम राजस्थान में अनूठी मिसाल पेश करेंगे। जोधपुर ऑडी कार केस सहित अन्य प्रकरणों पर मंथन किया जा रहा है।<br /> महेन्द्र सोनी, परिवहन आयुक्त <br /> <strong><br /> तीन महीने के लिए सस्पेंड से बढ़ते हैं हौसले</strong><br /> सड़क दुर्घटना के लिए जिम्मेदार कारणों में अलग-अलग जुर्माने का प्रावधान हैं। रेड लाइट तोड़ना, ओवरस्पीड, मोबाइल पर बातचीत, ड्रंक एंड ड्राइव, ओवरलोड आदि पर पहली बार में पकड़े जाने पर सेक्शन 19 के तहत तीन महीने के लिए लाइसेंस निलम्बित होता है। दूसरी बार पकड़े जाने पर सेक्शन 183 (ओवरस्पीड),184 (खतरनाक ड्राइविंग), 185 (नशे में वाहन), 189 (रेसिंग),190 (अनसेफ कंडीशन में वाहन चलाना) के तहत लाइसेंस को हमेशा के लिए निरस्त करने तक की कार्रवाई है। रसूखदार दूसरी बार पकड़े जाने पर अपने रसूख से बच निकलते हैं।</p>]]>
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                <pubDate>Fri, 12 Nov 2021 13:11:44 +0530</pubDate>
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