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                <title>ai agents - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>JEE एडवांस्ड में बड़ा बदलाव संभव: 2030 तक अडैप्टिव टेस्टिंग लागू करने पर IITs कर रहे तैयारी, कोचिंग निर्भरता घटाने पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[आईआईटी संस्थान जेईई एडवांस्ड परीक्षा को 2030 तक अडैप्टिव टेस्टिंग सिस्टम में बदलने की योजना बना रहे हैं। इस व्यवस्था में उम्मीदवार के उत्तर के आधार पर प्रश्नों का कठिनाई स्तर तय होगा। कोचिंग पर निर्भरता घटाने और वास्तविक क्षमता के आकलन के लिए 4,000 छात्रों पर इसका पायलट प्रोजेक्ट पूरा किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-change-possible-in-jee-advanced-iits-are-preparing-to/article-164459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जेईई एडवांस्ड की परीक्षा व्यवस्था में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आईआईटी संस्थान 2030 तक परीक्षा को अडैप्टिव टेस्टिंग सिस्टम में बदलने पर विचार कर रहे हैं। इसके तहत अभ्यर्थी के प्रदर्शन के आधार पर परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों का कठिनाई स्तर बदलता रहेगा। इसका उद्देश्य छात्रों की वास्तविक क्षमता का बेहतर आकलन करना और कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता कम करना है।</p>
<p>इस प्रस्ताव को अब पायलट चरण में ले जाया गया है। हालिया पायलट प्रोजेक्ट में विभिन्न आईआईटी के करीब 4,000 प्रथम वर्ष के छात्रों को शामिल किया गया। छात्रों के प्रदर्शन और उनके जवाबों से संबंधित डेटा जुटाया जा चुका है, जिसका फिलहाल विश्लेषण किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, परीक्षा की शुरुआत में छात्रों को अलग-अलग स्तर के प्रश्न दिए जाएंगे। इसके बाद उनके प्रदर्शन के आधार पर अगले सवालों की कठिनाई तय होगी। आईआईटी कानपुर अलग-अलग स्तर के प्रश्न तैयार करने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम और एआई एजेंट्स के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाश रहा है।</p>
<p>आईआईटी काउंसिल ने इस बदलाव की व्यवहारिकता और प्रभाव का अध्ययन करने को कहा है। नई व्यवस्था लागू करने से पहले कम से कम तीन साल तक रिसर्च और वैलिडेशन किया जाएगा। 2030 में इसे लागू करना है तो 2027 की शुरुआत तक औपचारिक घोषणा करनी होगी। अंतिम निर्णय आईआईटी निदेशकों और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 11:50:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>एआई एजेंट: क्या ग्रामीण शिक्षा में ला सकते हैं नई क्रांति?</title>
                                    <description><![CDATA[ शिक्षकों की कमी के बीच नई उम्मीद, मानवीय मार्गदर्शन रहेगा सबसे अहम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ai-agents--can-they-spark-a-revolution-in-rural-education/article-161075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/31.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नई शिक्षा नीति और डिजिटल तकनीक पर लगातार जोर दिया जा रहा है, लेकिन आज भी हजारों सरकारी स्कूल और कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चुनौती अधिक गंभीर है, जहाँ संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री का अभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित करता है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एजेंट शिक्षा के क्षेत्र में एक नई संभावना बनकर उभर रहे हैं। हालांकि एआई शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि पढ़ाई का प्रभावी शैक्षणिक सहायक बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार पाठ्यक्रम आधारित एआई एजेंट विकसित कर विद्यार्थियों तक पहुँचाए, तो वे घर बैठे विषयों को समझने, अभ्यास करने, शंकाओं का समाधान पाने और परीक्षा की तैयारी में मदद कर सकते हैं। इससे विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक बेहतर पहुँच मिल सकती है।</p>
<p><strong>शिक्षक की भूमिका रहेगी सबसे अहम</strong><br />एआई एजेंट विद्यार्थियों को अभ्यास, पुनरावृत्ति और तकनीकी दक्षता विकसित करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन नैतिक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और मानवीय मार्गदर्शन के लिए शिक्षक की भूमिका हमेशा केंद्रीय रहेगी। इसलिए एआई एजेंट को शिक्षक का प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम के रूप में देखा जाना चाहिए।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया से पढ़ाई की ओर</strong><br />यदि मोबाइल में पाठ्यक्रम आधारित एआई एजेंट उपलब्ध हों, तो विद्यार्थियों का समय सोशल मीडिया के बजाय पढ़ाई, होमवर्क और परीक्षा की तैयारी में अधिक उपयोग हो सकता है। सही नीति और गुणवत्तापूर्ण सामग्री के साथ एआई एजेंट ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों विद्यार्थियों तक बेहतर शिक्षा पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी विषय पर दैनिक नवज्योति ने शिक्षा विशेषज्ञों की राय जानी।</p>
<p>शिक्षक को कोई भी रिप्लेस नहीं कर सकता। स्टडी मटेरियल आॅनलाइन यूट्यूब पर उपलब्ध कराया हुआ है, जिसे कहीं का भी विद्यार्थी पढ़ सकता है। यदि सरकार एआई एजेंट जैसी तकनीक को शिक्षा के क्षेत्र में लागू करती है, तो यह एक बहुत अच्छी पहल होगी।<br /><strong>-नवीन मित्तल, क्षेत्रीय सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय कोटा</strong></p>
<p> ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती है, वहां एआई एजेंट शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावी सहायक और समाधान बन सकते हैं। एआई एजेंट छात्रों के प्रश्नों का सरल भाषा में उत्तर देकर उन्हें इस प्रकार समझा सकता है, मानो कोई शिक्षक स्वयं पढ़ा रहा हो।  यदि पाठ्यक्रम के अनुरूप एआई शिक्षा ऐप विकसित किया जाए, जिसकी सामग्री विशेषज्ञों द्वारा तैयार की जाए, तो छात्रों को पाठ्यपुस्तक आधारित अध्ययन सामग्री हर समय उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।<br /><strong>- प्रो. हरीश शर्मा,कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग, आरटीयू, कोटा</strong></p>
<p>क्लासरूम टीचिंग का कोई विकल्प नहीं हो सकता और इसे कभी बंद नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम ही नहीं पढ़ाते, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मूल्य भी सिखाते हैं। तकनीक के इस दौर में एआई एजेंट एक प्रभावी सहायक की भूमिका निभा सकते हैं। मोबाइल के माध्यम से विद्यार्थी कभी भी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहाँ किसी कारणवश नियमित कक्षाएं या शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।  इससे विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।<br /><strong>-प्रो.सीमा चौहान, प्रिंसिपल राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p>यह एआई का दौर है। इसका प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ेगा। सिलेबस कवर करने, अभ्यास करने और तकनीकी एक्सपोजर देने में एआई व अन्य डिजिटल तकनीकें निश्चित रूप से मददगार हैं। हालांकि, स्कूल में शिक्षक की कमी केवल डिवाइस के माध्यम से पूरी नहीं की जा सकती। शिक्षक का विकल्प तकनीक पूरी तरह नहीं बन सकती। यदि सरकार एआई आधारित ऐसी कोई सुविधा विकसित कर बच्चों को उपलब्ध कराती है, तो इसका निश्चित रूप से उन्हें लाभ मिलेगा। <br /><strong>- आर.एस. तंवर, प्रिंसिपल, पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, कोटा</strong></p>
<p>हर छात्र की सीखने की क्षमता अलग होती है। एआई एजेंट विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत रूप से सीखने में मदद कर सकते हैं। किसी भी विषय को बार-बार समझाकर कमजोर छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं। शिक्षक के लिए प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत रूप से पर्याप्त समय देना हमेशा संभव नहीं होता,, जबकि एआई एजेंट 24 घंटे उपलब्ध रह सकता है। शिक्षक और एआई का संतुलित उपयोग शिक्षा को अधिक प्रभावी, व्यक्तिगत और गुणवत्तापूर्ण बना सकता है।<br /><strong>- सावित्री गुप्ता, निदेशक, शिवज्योति बाल विद्या निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गुमानपुरा</strong></p>
<p>कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनमें पढ़ाई को लेकर उत्सुकता तो होती है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उन्हें उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। ऐसे विद्यार्थियों के लिए एआई एजेंट किसी वरदान से कम नहीं होगा।  ग्रामीण क्षेत्रों में न तो ऐसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होती हैं और न ही हर परिवार ट्यूशन का खर्च उठा सकता है। ऐसे में एआई एजेंट विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान कर उन्हें सीखने और विषयों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।<br /><strong>- डॉ रानू अग्रवाल, फाउंडर एवं डायरेक्टर- पैरेंटिंग अलाय प्रिस्कूल, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:33:39 +0530</pubDate>
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