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                <title>SIT Investigation Status Report Deadline August 10 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>SIT Investigation Status Report Deadline August 10 RSS Feed</description>
                
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                <title>राम मंदिर दान चोरी मामले में 10 अगस्त से पहले एसआईटी की स्थिति रिपोर्ट पेश करने का सुप्रीम निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में गबन के आरोपों की जांच के लिए गठित एसआईटी ने काम शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच पर जोर देते हुए एसआईटी में फॉरेंसिक ऑडिट विशेषज्ञ चार्टर्ड अकाउंटेंट को शामिल करने और 10 अगस्त तक स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-directive-to-submit-status-report-of-sit-in-ram/article-161164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि अयोध्या में राम मंदिर में दान की चोरी की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है जिस पर न्यायालय ने एसआईटी को अपनी जांच की प्रगति पर स्थिति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एसआईटी से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगने के अलावा एसआईटी में फोरेंसिक ऑडिट का अनुभव रखने वाले एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को शामिल करने का सुझाव भी दिया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित एसआईटी का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. कर रहे हैं और इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल हैं।</p>
<p>न्यायालय ने टिप्पणी की, "हमें सूचित किया गया है कि एसआईटी ने कार्यभार संभाल लिया है। एसआईटी को अगली तारीख पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने दें। यदि एसआईटी को कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो भी हम आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेंगे।" न्यायालय ने एसआईटी को 10 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 100 रुपये से 500 रुपये तक की राशि का योगदान देने वाले श्रद्धालुओं को जारी की गई रसीदों को वेबसाइट पर अपलोड करने की मांग की।</p>
<p>कामत ने तर्क दिया कि इन रसीदों के माध्यम से एकत्र किया गया दान कथित तौर पर 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास (ट्रस्ट)' तक नहीं पहुंचा, जो मंदिर के निर्माण और प्रशासन की देखरेख करता है। उन्होंने आग्रह किया कि पारदर्शिता के हित में, न्यास द्वारा जारी की गई सभी रसीदों को उसकी वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए। न्यायालय ने हालांकि कहा कि फिलहाल उसका ध्यान चोरी के आरोपों की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने पर है तथा एसआईटी की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर आने के बाद पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया जायेगा।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "एसआईटी को अपनी रिपोर्ट देने दें। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी सुधारात्मक कदम उठाये जायेंगे। हम घटना की गुणवत्तापूर्ण जांच पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य निष्पक्ष, त्वरित और निष्पक्ष जांच कराना है।" सुनवाई की पिछली तारीख 20 जुलाई को पक्षों से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने का आग्रह करते हुए उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों वाले एक विशेष जांच दल की जांच का समर्थन किया था। न्यायालय ने चढ़ावे की कथित चोरी को 'अपराध का एक सीधा मामला' बताया था।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार ने 20 जुलाई को न्यायालय को बताया था कि एसआईटी को गबन के आरोपों की सत्यता का पता लगाने का काम सौंपा गया था और प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि धन की चोरी हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायालय को बताया था, "एसआईटी कोई जांच दल नहीं था; इसे आरोपों की जांच के लिए स्थापित किया गया था... इसका प्रथम दृष्टया निष्कर्ष यह है कि अपराध हुआ है। एक अलग पुलिस जांच चल रही है, प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।" </p>
<p>उच्चतम न्यायालय तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिनमें अलग-अलग लेकिन संबंधित अपील है। अधिवक्ताओं अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर पहली याचिका में राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के कथित गबन और हेरफेर की नियमित आपराधिक मामला दर्ज करने और समयबद्ध केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग की गयी है। यह सभी भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय रिकॉर्ड के संरक्षण की भी मांग करती है।</p>
<p>राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से दायर की गई दूसरी याचिका में मांग की गयी है कि इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई को सौंपी जाये। साथ ही, न्यास के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज पर नजर रखने के लिए अदालत की देखरेख में एक अस्थायी निगरानी समिति बनायी जाये। याचिका में यह भी कहा गया है कि न्यास के सभी वित्तीय और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं तथा दाताओं की पहचान गोपनीय रखते हुए समय-समय पर खातों, दान की रसीदों और धन के उपयोग का सार्वजनिक ब्योरा जारी किया जाये। तीसरे याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के तत्काल संरक्षण पर जोर दिया और सुनवाई के दौरान कहा कि जब तक जांच लंबित रहेगी, तब तक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 11:52:45 +0530</pubDate>
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