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                <title>बिहार में खरीफ महाभियान-2026 का आगाज: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिखाई किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी; योजनाओं, तकनीक और अनुदान की जानकारी गांव-गांव पहुंचेगी</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने किसान जागरूकता और कृषि ज्ञान वाहनों को हरी झंडी दिखाई। यह वाहन किसानों को डिजिटल क्रॉप सर्वे, अनुदानित योजनाओं, उन्नत तकनीकों और फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक कर उनकी आय बढ़ाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kharif-maha-abhiyan-2026-started-in-bihar-chief-minister-samrat-choudhary/article-156965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/samrat1.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को 01 अणे मार्ग से किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 का शुभारंभ किया।श्री चौधरी ने इस दौरान शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 से संबंधित दो कृषि ज्ञान वाहन सहित सभी जिलों के लिए किसान जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सीएम चौधरी ने बताया कि किसान जागरूकता वाहन द्वारा किसानों को खरीफ मौसम से संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्हें जागरूक किया जाएगा। किसानों को खरीफ फसलों की तकनीकी जानकारी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि शारदीय (खरीफ) मौसम में कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं तथा खरीफ में अनुदानित दर पर उपादान वितरण की जानकारी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि किसानों का आय बढ़ाने, डिजिटल क्रॉप सर्वे / फार्मर रजिस्ट्री के बारे में अवगत कराने के साथ-साथ कृषि उपकरण की भी जानकारी दी जायेगी।</p>
<p>सीएम चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान प्रशिक्षण एवं विस्तार सेवाओं के बारे में किसानों को अवगत कराया जायेगा। साथ ही खेत बचाओ अभियान, प्रकृति तथा संतुलित उर्वरक की जानकारी एवं फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरुक किया जायेगा। कार्यक्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ.वीरेन्द्र प्रसाद यादव, पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जितेन्द्र राणा, कृषि विभाग के निदेशक सौरभ सुमन यादव, निदेशक, उद्यान अभिषेक कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 18:47:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>घरेलू एलपीजी सिलेंडर ₹29 महंगा: दिल्ली में अब ₹942 हुई कीमत, पश्चिम एशिया संकट का असर</title>
                                    <description><![CDATA[घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी की गई है, जिससे दिल्ली में अब इसकी कीमत ₹942 हो गई है। पश्चिम एशिया संकट के बाद यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। हालांकि, 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/domestic-lpg-cylinder-costlier-by-%E2%82%B9-29-now-priced-at/article-156246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/lpg.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर रविवार से 29 रुपये महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज से 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर 942 रुपये का हो गया है। हालांकि वाणिज्यिक इस्तेमाल वाले 19 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से घरेलू रसोई गैस के दाम दूसरी बार बढ़ाये गये हैं। इससे पहले 07 मार्च को इसमें 60 रुपये की बढ़ोतरी की गयी थी।</p>
<p>इस दौरान, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर के दाम में भारी-भरकम वृद्धि हो चुकी है। गत 01 जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत 42 रुपये बढ़ाकर 3,113.50 रुपये कर दी गयी थी। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से दिल्ली वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर के दाम 1,373 रुपये बढ़ चुके हैं। इस साल फरवरी में इसकी कीमत 1,740.50 रुपये थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 10:35:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदूषण पर सरकार का बड़ा प्रहार: दिल्ली-एनसीआर में पुराने कमर्शियल वाहनों को बदलने के लिए 9,585 करोड़ की योजना मंजूर, टैक्स में भारी छूट</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण घटाने के लिए ₹9,585 करोड़ की ऐतिहासिक योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत पुराने बीएस-4 या उससे पहले के ट्रकों और बसों को इलेक्ट्रिक या बीएस-6 वाहनों से बदला जाएगा। वाहन मालिकों को 5% ब्याज सब्सिडी, ईंधन वाउचर और टैक्स में भारी छूट मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-rekha-gupta-approves-plan-to-replace-old-trucks-and/article-155890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rekha-guprta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए पुराने बीएस-4 या उससे पुराने ट्रकों और बसों को बदलने हेतु 9,585 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। यह योजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) द्वारा लागू की जाएगी। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बुध्जवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक दो वर्षीय योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का वित्तपोषण आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) करेगी तथा इसका कार्यान्वयन सड़क परिवहन, राजमार्ग मंत्रालय और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। यह योजना दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से कार्यान्वित की जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए कुल 9,585 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 5,041 करोड़ रुपये और भागीदार राज्यों द्वारा कर छूट के रूप में अनुमानित 1,601 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पंजीकृत उन ट्रकों और बसों के मालिकों को प्रोत्साहित करना है जो बीएस-4 या उससे पहले के उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं, ताकि वे उन्हें बीएस-6 या उससे भी सख्त उत्सर्जन मानकों का पालन करने वाले वाहनों या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदल सकें। स्वच्छ परिवहन प्रौद्योगिकियों की ओर बदलाव को गति देकर इस योजना से वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण सर्दियों के मौसम में एक गंभीर जन स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) द्वारा अगस्त 2018 में प्रकाशित "एनसीआर में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और पीएम 10) के स्रोत निर्धारण" नामक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 का 14 प्रतिशत, कार्बन मोनोऑक्साइड का 40 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड का 63 प्रतिशत उत्सर्जन परिवहन क्षेत्र से होता है। परिवहन क्षेत्र में कुल वाहनों की संख्या का केवल 3 प्रतिशत होने के बावजूद ट्रक और बसें पीएम 2.5 उत्सर्जन का 36 प्रतिशत हिस्सा है। बीएस-III या उससे पुराने वाहनों के लिए पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं पर स्क्रैप कराना अनिवार्य है, जबकि बीएस-4 वाहनों को एनसीआर के बाहर गैर-एनसीएपीशहरों/कस्बों में स्क्रैप या बेचा जा सकता है। इसके बाद मालिकों को एनसीआर के भीतर बीएस-6 या उससे भी सख्त मानकों के अनुरूप या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना और पंजीकृत कराना होगा। दिल्ली में हालांकि इस योजना के तहत खरीदे गए हल्के मालवाहक वाहन इलेक्ट्रिक होने चाहिए, जबकि बसें केवल बीएस-6 सीएनजी या इलेक्ट्रिक होनी चाहिए। सरकारी वाहन इस योजना से बाहर हैं।</p>
<p>इस योजना में सरकार पांच साल के लिए ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, वाहन की श्रेणी के आधार पर 4,800 रुपये तक के मासिक ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने या जमा प्रमाणपत्र के व्यापार के लिए एकमुश्त लाभ प्रदान करेगी। राज्य सरकारें पंजीकरण शुल्क माफ करेंगी और नए वाहनों पर शत-प्रतिशत तक तथा पुराने वाहनों पर 50 प्रतिशत तक मोटर वाहन कर में छूट प्रदान करेंगी। यह छूट 10 वर्षों के लिए लागू होगी। राज्य सरकार योजना में शामिल पुराने वाहनों पर लंबित देनदारियों को भी माफ कर देगी। ऑटो निर्माता एक्स-शोरूम कीमतों पर 8 प्रतिशत की छूट प्रदान करेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसका कार्यान्वयन पूरी तरह से डिजिटल होगा और इसके लिए एक एकीकृत पोर्टल बनाया जाएगा, जो वास्तविक समय में पात्रता की जांच, स्वचालित ब्याज सब्सिडी दावों, मासिक ईंधन वाउचर क्रेडिट और प्रदूषण में कमी के परिणामों की निगरानी को सक्षम करेगा। केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले लाभ नए वाहन के पंजीकरण की तारीख से 5 वर्षों तक जारी रहेंगे, जिससे दो साल की नामांकन अवधि के बाद भी इसका निरंतर प्रभाव सुनिश्चित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:37:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, जनता की जेब पर डाका डालने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[1 जून से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में ₹42 की बढ़ोतरी हुई है, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत ₹3113.50 हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इसे जनता की जेब पर डाका बताते हुए कहा कि कच्चे तेल के दाम घटने के बावजूद कीमतें बढ़ाकर सरकार 'लूट का सिलसिला' चला रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-mp-tiwari-attacks-the-government-on-the-cost-of/article-155623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pramod-tiwari-i.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी होने के बाद कांग्रेस के राज्यसभा उपनेता और सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार पर जनता की जेब पर डाका डालने का आरोप लगाते हुए कहा है कि एक तरफ प्रधानमंत्री मन की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी सरकार गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है।</p>
<p>प्रमोद तिवारी ने सोमवार को कहा कि 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि कर दी गई है। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 3113.50 रुपये और कोलकाता में 3255.50 रुपये पहुंच गई है। उन्होंने यह भी कहा कि 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर के दाम में 11 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे छात्रों, मजदूरों और छोटे कारोबारियों पर सीधा असर पड़ेगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि जनवरी से जून के बीच 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में कुल 1560 रुपये और 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 323 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। </p>
<p>उन्होंने इसे “लूट का सिलसिला” बताते हुए कहा कि सरकार लगातार जनता पर महंगाई का बोझ डाल रही है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 116 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं, इसके बावजूद एलपीजी के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता की जेब काट रही है और लोग इस स्थिति को भली-भांति समझ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गैस कंपनियों ने 1 जून से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की बढ़ोतरी की है। इससे पहले 1 मई को भी कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़ाए गए थे। नयी कीमतें लागू होने के बाद होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायों की लागत बढ़ने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:29:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी रक्षा सब्सिडी का युग समाप्त: हेगसेथ की दोटूक, बोले- हमें साझेदारों की जरूरत है, न कि संरक्षित राज्यों की</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने 23वें शांग्री-ला डायलॉग में स्पष्ट किया कि अमीर देशों को सुरक्षा सब्सिडी देने का दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को निर्भर राज्यों के बजाय साझा जिम्मेदारी निभाने वाले साझीदार चाहिए। हेगसेथ ने दक्षिण कोरिया के रक्षा खर्च बढ़ाने के मॉडल की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-era-of-american-defense-subsidies-is-over-hegseth-warned/article-155490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)53.png" alt=""></a><br /><p>सिंगापुर। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सिंगापुर में आयोजित 23वां शांग्री-ला डायलॉग में स्पष्ट किया कि अमीर देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी रक्षा सब्सिडी मुहैया कराने का युग अब समाप्त हो गया है। हेगसेथ ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के रक्षा मंत्रियों और सैन्य प्रमुखों को संबोधित करते हुए एक संशोधित राष्ट्रीय रक्षा रणनीति की रूपरेखा पेश की। यह रणनीति शीत युद्ध के बाद के अमेरिका की सुरक्षा गारंटी मॉडल से एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाती है।</p>
<p>हेगसेथ ने कहा, "अमीर देशों की रक्षा के लिए अमेरिका द्वारा सब्सिडी देने का युग अब समाप्त हो गया है। हमें साझेदारों की जरूरत है, न कि संरक्षित राज्यों की। हम साझा जिम्मेदारी पर बने गठबंधन चाहते हैं, न कि निर्भरता पर।" पीट हेगसेथ ने कहा, "हम अपने गठबंधनों और साझेदारों के लिए एक नया रास्ता तैयार कर रहे हैं। एक ऐसा रास्ता जो शक्ति और हितों की वास्तविकताओं पर आधारित है। यह एक ऐसा रास्ता है जो अमेरिका को और मजबूत, हमारे सहयोगियों और साझेदारों को और अधिक सक्षम और प्रशांत क्षेत्र को और अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाएगा।"</p>
<p>उनके संबोधन का सबसे तीखा संदेश उन सहयोगियों के लिए था जो लंबे समय से वाशिंगटन की सुरक्षा छतरी पर निर्भर रहे हैं, लेकिन उसके निवेश के बराबर योगदान नहीं दिया है। हेगसेथ ने घोषणा की, कि अमीर देशों को अमेरिकी सुरक्षा का मॉडल अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। उन्होंने दक्षिण कोरिया को बतौर मॉडल पेश किया कि असली 'बोझ साझा करने' जैसा दिखता है। उन्होंने राष्ट्रपति ली के रक्षा खर्च को जीडीपी के 3.5 प्रतिशत तक बढ़ाने और अपनी पारंपरिक रक्षा की अधिक जिम्मेदारी लेने के फैसले की सराहना की। यह एक ऐसा पैमाना था जिसे वे हॉल में मौजूद अन्य लोगों के लिए भी तय करते दिखे।</p>
<p>बीजिंग में पिछले महीने हुए ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन के बाद से चीन को लेकर वाशिंगटन का लहजा अधिक संयमित रहा है लेकिन सचिव ने साफ तौर पर कहा कि क्षेत्रीय प्रभुत्व के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा, "किसी भी एक महाशक्ति के प्रभुत्व वाला प्रशांत क्षेत्र क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बिगाड़ देगा और उस संतुलन को कमजोर कर देगा जिसे हम सभी बनाए रखना चाहते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 17:19:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>परेशानी : पानी ने बुझाई सौर ऊर्जा की लौ, पानी 200 से 300 मीटर तक नीचे</title>
                                    <description><![CDATA[भूजल स्तर में गिरावट से सोलर पंप सब्सिडी पर संकट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-crisis--water-scarcity-douses-the-flame-of-solar-energy--water-table-drops-to-200%E2%80%93300-meters/article-154337"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)31.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा जिले सहित हाड़ौती अंचल के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कई इलाकों में पानी 200 से 300 मीटर तक नीचे पहुंच गया है। पानी पाताल में समाने जैसी स्थिति ने अब खेती और सिंचाई के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसका सबसे बड़ा असर सरकार की सोलर पंप योजना पर देखने को मिल रहा है, जिसके तहत किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी अब सीमित दायरे में सिमटती जा रही है। दरअसल वर्तमान नियमों के मुताबिक 100 मीटर तक की गहराई वाले नलकूपों पर ही सोलर पंप लगाने के लिए सब्सिडी का प्रावधान है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ के कई गांवों में जलस्तर इस सीमा से काफी नीचे जा चुका है। ऐसे में हजारों किसान योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>अब महंगी सिंचाई बनी मजबूरी</strong><br />जलस्तर गिरने के कारण किसानों को अब गहरे बोर करवाने पड़ रहे हैं, जिसकी लागत 2 से 5 लाख रुपए तक पहुंच रही है। इसके बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। सोलर पंप की सब्सिडी नहीं मिलने से किसान या तो बिजली कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं या डीजल पंप के सहारे सिंचाई कर रहे हैं, जिससे लागत कई गुना बढ़ गई है। कई किसानों का कहना है कि सोलर पंप योजना उनके लिए उम्मीद की किरण थी, लेकिन 100 मीटर की सीमा ने इस उम्मीद को अधूरा छोड़ दिया। जिन क्षेत्रों में पानी 150 मीटर से नीचे है, वहां यह योजना लगभग अप्रभावी हो चुकी है।</p>
<p><strong>अतिदोहन श्रेणी में पहुंचे कई ब्लॉक</strong><br />जानकारी के अनुसार कोटा संभाग के कई ब्लॉक अतिदोहनह्व (ओवर-एक्सप्लॉइटेड) श्रेणी में आ चुके हैं। इन क्षेत्रों में जितना पानी रिचार्ज होता है, उससे कहीं अधिक दोहन किया जा रहा है। परिणामस्वरूप हर साल जलस्तर औसतन 1 से 3 मीटर तक नीचे खिसक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम वर्षा, पारंपरिक जल स्रोतों की उपेक्षा और बढ़ती सिंचाई जरूरतों के कारण यह संकट और गहराता जा रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट भी गहरा सकता है।</p>
<p><strong>भौतिक सत्यापन में आवेदन हो रहे रिजेक्ट</strong><br />सरकार की सोलर पंप योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को सस्ती, स्वच्छ और निर्बाध ऊर्जा उपलब्ध कराना था, ताकि वे बिजली कटौती और महंगे डीजल से मुक्त हो सकें। लेकिन जलस्तर गिरने के कारण योजना का लाभ सीमित होता जा रहा है। भूजल स्तर 100 मीटर जाने के कारण अधिकांश किसान आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। और कुछ किसान आवेदन कर भी रहे हैं तो भौतिक सत्यापन में उनके आवेदन रिजेक्ट हो रहे हैं। किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग उठाई है कि सोलर पंप सब्सिडी के लिए निर्धारित 100 मीटर की सीमा को बढ़ाया जाए और इसे क्षेत्रवार जलस्तर के अनुसार तय किया जाए।</p>
<p>सरकार सोलर पंप दे रही है, लेकिन जब पानी ही नहीं है तो इसका फायदा कैसे मिलेगा? जलस्तर के अनुसार नियमों में बदलाव जरूरी है, ताकि अधिक किसान इससे लाभान्वित हो सके।<br /><strong>- महेंद्र सिंह, किसान</strong></p>
<p>वर्तमान नियमों के मुताबिक 100 मीटर तक की गहराई वाले नलकूपों पर ही सोलर पंप लगाने के लिए सब्सिडी का प्रावधान है। इस योजना के नियमों में बदलाव केन्द्र सरकार के स्तर पर ही हो सकता है।<br /><strong>-आर.के. शर्मा, कृषि विशेषज्ञ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 14:24:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली सरकार की बड़ी घोषणा: सीएम रेखा ने कहा-किसानों के साथ पूरी प्रतिबद्धता से खड़ी है सरकार, गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में विशेष छूट को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खराब मौसम से प्रभावित किसानों के लिए गेहूं खरीद मानकों में बड़ी छूट दी है। अब 70% लस्टर लॉस और 15% तक सिकुड़े दानों वाला गेहूं भी सरकारी केंद्रों पर खरीदा जाएगा। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-governments-big-announcement-cm-rekha-said-that-the-government/article-152079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rekha-guptta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गुप्ता ने आज कहा कि इस वर्ष प्रतिकूल मौसम के कारण गेहूं की फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों की परेशानी कम करने और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचने से बचाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने ठोस पहल की है। उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल से रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस) 2026-27 के लिए पूरी दिल्ली के सभी जिलों में गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में विशेष छूट को मंजूरी दी गई है, जो इस सीजन की शुरुआत से ही लागू होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संशोधित व्यवस्था के तहत अब गेहूं में चमक की कमी (लस्टर लॉस) को 70 प्रतिशत तक स्वीकार किया जाएगा। इसके साथ ही सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा को पहले के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक कर दिया गया है ताकि मौसम से प्रभावित फसल भी खरीद के दायरे में आ सके, हालांकि गुणवत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि टूटे और हल्के टूटे दाने मिलाकर 6 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छूट के तहत खरीदा गया गेहूं अलग तरीके से संभाला जाएगा। इस गेहूं को सामान्य स्टॉक से अलग रखकर उसका अलग भंडारण किया जाएगा और उसका पूरा हिसाब-किताब अलग से रखा जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने बताया कि इस तरह के गेहूं को प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले इस्तेमाल किया जाएगा, यानी इसे देर तक स्टोर नहीं रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार खरीदे गए गेहूं का उपयोग केवल दिल्ली के भीतर ही किया जाएगा, जिससे स्थानीय खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भंडारण के दौरान इस गेहूं की गुणवत्ता में कोई गिरावट आती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की होगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह निर्णय किसानों को राहत देने, उनकी मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस निर्णय से उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रकार के वित्तीय या संचालन संबंधी प्रभाव की पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार स्वयं वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, जिम्मेदार और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए ताकि इसका लाभ सीधे किसानों और उपभोक्ताओं तक पहुंचे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:07:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान में सौर ऊर्जा के प्रति उपभोक्ताओं का रुझान: रूफ टॉप सौर ऊर्जा में राजस्थान तीसरे स्थान पर, 1.44 लाख उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान रूफ टॉप सोलर के मामले में देश में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। पीएम सूर्यघर योजना के तहत प्रदेश में 2.45 लाख से अधिक संयंत्र लग चुके हैं, जिससे लाखों उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली मिल रही है। ₹78,000 तक की सब्सिडी और आसान ऋण सुविधाओं के कारण हर दिन लगभग 700 नए परिवार सौर ऊर्जा अपना रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/inclination-of-consumers-towards-solar-energy-in-rajasthan-rajasthan-ranks/article-151240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/solar.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में सौर ऊर्जा के प्रति उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में अब तक घरेलू, अघरेलू और औद्योगिक श्रेणी में 2.45 लाख से अधिक रूफ टॉप सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे 1.43 लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हो गया है। कुल 2090 मेगावाट क्षमता के साथ राजस्थान देश में रूफ टॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। पीएम सूर्यघर योजना के तहत राज्य में अब तक 1.77 लाख संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 686 मेगावाट है। प्रतिदिन औसतन 675 से 700 नए उपभोक्ता सौर ऊर्जा अपना रहे हैं। मार्च माह में 20,343 संयंत्र स्थापित हुए, जबकि एक दिन में सर्वाधिक 910 संयंत्र लगाए जाने का रिकॉर्ड भी बना। योजना के तहत उपभोक्ताओं को 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल रही है, जबकि 150 यूनिट योजना में 17 हजार रुपये अतिरिक्त अनुदान दिया जा रहा है। अब तक 1.52 लाख उपभोक्ताओं को 1185 करोड़ रुपये की सब्सिडी हस्तांतरित की जा चुकी है। साथ ही, बैंकों से लगभग 5.75 प्रतिशत ब्याज दर पर आसान ऋण और सरल प्रक्रियाओं के कारण प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना लगातार तेज़ी से बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:16:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषक कल्याण एवं कृषि विकास: किश्तों की राशि एक अप्रेल, 2026 से 30 सितम्बर, 2026 तक एकमुश्त जमा कराए जाने पर ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दिए जाने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में कृषि यंत्रों, तारबंदी, बीज, सिंचाई और डेयरी विकास हेतु हजारों करोड़ के अनुदान की घोषणा। लाखों किसान, पशुपालक और ग्रामीण उद्यमी लाभान्वित होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/announcement-of-100-interest-rebate-if-the-amount-of-farmer/article-142834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए किसान साथियों को विभिन्न कृषि यंत्रों यथा पावर, टिलर, डिस्क, कल्टीवेटर आदि के लिए 160 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 50 हजार कृषक लाभान्वित होंगे साथ ही, आगामी वर्ष 500 कस्टम हायरिंग सेंटर्स की 96 करोड़  रुपए की लागत से स्थापना की जाएगी। नीलगाय, जंगली जानवरों व निराश्रित पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आगामी वर्ष 50 हजार किसानों को 20 हजार किलोमीटर तारबंदी के लिए 228 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, सामुदायिक तारबंदी में कृषकों की न्यूनतम संख्या 10 से घटाकर 7 किया जाना प्रस्तावित है।आधुनिकतम तकनीकों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के आधार पर खेती करने में आसानी एवं क्षमता विकास के लिए उठाएं जाएंगे विभिन्न कदम</p>
<p><strong>एग्री स्टैक पीएमयू का होगा गठन</strong></p>
<ul>
<li>आगामी वर्ष 5 लाख कृषकों को मूंग, एक लाख कृषकों को मोठ तथा एक लाख कृषकों को ज्वार, बाजरा व बरसीम फसल के मिनिकिट का वितरण किया जाना प्रस्तावित है। इस के लिए 33 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। गुणवत्तायुक्त उन्नत बीज उत्पादन के लिए मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना अन्तर्गत 90 प्रतिशत अनुदान पर 70 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित हैै। इस योजनान्तर्गत 50 करोड़ रुपए का व्यय कर 3 लाख कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा।<br />  <br />छोटे बाजरे की बढ़ती मांग तथा जनजाति क्षेत्रों के किसानों की आय में वृद्धि के लिए कांगनी, कोदो, सांवा, कुटकी, चीना, रागी आदि छोटे बाजरे के 100 हेक्टेयर क्षेत्रा में प्रदर्शन आयोजित कर एक हजार कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन से कृषि भूमि के पोषक तत्वों पर होने वाले प्रभावों का आंकलन तथा मृदा उर्वरा शक्ति के प्रबन्धन के लिए आगामी वर्ष एक लाख 92 हजार मृदा नमूनों की जांच की जानी प्रस्तावित है।  </li>
<li>प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने के संकल्प को पूरा करने की दृष्टि से सर्वप्रथम 5 हजार से अधिक आबादी वाली 3 हजार 496 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। आगामी वर्ष, प्रथम चरण में 2 हजार 98 ग्राम पंचायतों में इस के लिए लगभग 270 करोड़ रुपए से अधिक का व्यय किया जाएगा। </li>
<li>कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रा में एआई/एमएल का वृहद स्तर पर उपयोग किए जाने व उत्पादकता वृद्धि के साथ-साथ कृषकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एग्री स्टैक पीएमयू का गठन किया जाएगा। राज किसान साथी पोर्टल 3.0 पर विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत आवेदन से अनुदान तक की गतिविधियों के ऑनलाइन मॉडयूल का उन्नयन किया जाएगा।  </li>
<li>कृषकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने, उनकी क्षमता वृद्धि करने के उद्देश्य से नॉलेज इनहांसमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आगामी वर्ष 3 हजार 300 किसानों को राज्य से बाहर एक्सपोजर विजिट करवाई जाएगी। मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वाले उत्पादकों व मधुमक्खी पराग के उत्पादन की जानकारी देने के लिए एक हजार मधुमक्खी पालकों को किट, वर्कशॉप व एक्सपोजर विजिट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।</li>
<li>डिजिटल कृषि मिशन के अन्तर्गत कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली राज-एम्स विकसित की जाएगी। इसके अन्तर्गेत कृषि में एआई/एमएल, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग एवं सेटेलाइट इमेजरी आदि तकनीकों द्वारा किसानों को जलवायु जोखिम से बचाव, मौसम आधारित बुवाई, फसल स्वास्थ्य की निगरानी सम्बन्धी सुविधायें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस के लिए 77 करोड़ रुपए व्यय किये जाएंगे। </li>
<li>उन्नत तकनीक के ग्रीन हाउस-पॉलीहाउस/शेडनेट, लो टनल, प्लास्टिक मल्च उपलब्ध करवाने के लिए आगामी वर्ष 4 हजार कृषकों को 200 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिए औषधीय पौधों व मसाला फसलों तथा फूल व सब्जी आदि की खेती संवर्द्धन के लिए विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे। ये कार्य हैं- </li>
<li>कृषि जोत भूमि के निरन्तर घटते जा रहे आकार को देखते हुए सब्जियों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन वृद्धि के लिए वर्टिकल सपोर्ट सिस्टम आधारित खेती के लिए 5 हजार कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। </li>
<li>उद्यानिकी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कृषकों को अनुदानित 500 सोलर क्रॉप ड्रायर्स उपलब्ध करवाए जाएंगे।  </li>
<li>पश्चिमी राजस्थान में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक हजार कृषकों को ईसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली, एलोवेरा आदि औषधीय पौधों के उन्नत बीज व आदान उपलब्ध कराये जायेंगे।  </li>
<li>प्रदेश में जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी आदि मसाला फसलों का 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्रा में विस्तार किए जाने के लिए अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लूज फ्लॉवर एवं पॉलीहाउस में डच रोज की 500 हेक्टेयर क्षेत्रा में खेती के लिए कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा।  </li>
<li>राज्य में एग्रो फॉरेस्ट्री के पौधे तैयार करने के लिए जोधपुर, पाली एवं कोटा में ही टेक नर्सरी की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>प्रदेश में चूरू सहित खारे पानी की उपलब्धता वाले जिलों में झींगा पालकों को राहत देने के लिए सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। </li>
<li>कृषि अनुसंधान, कृषि प्रसार शिक्षा तथा कृषि शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यों को और अधिक गति दिए जाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पद चरणबद्ध रूप से भरे जाने प्रस्तावित हैं। आगामी वर्ष 443 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। </li>
<li>दलहनी एवं तिलहनी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि तथा आत्मनिर्भरता के लिए मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन, सरसों, तिल एवं अरण्डी आदि फसलों के 70 हजार प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, 2 लाख 50 हजार से अधिक किसानों को दलहनी एवं तिलहनी फसलों के अनुदानित प्रमाणित बीजों का वितरण कर लाभान्वित किया जाएगा। इन पर 135 करोड़ रुपए का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। </li>
<li>प्रदेश में कृषि विकास के लिए उन्नत बीज, भूमि सुधार, बायो एजेंट्स एवं छोटे बाजरे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से होंगे विभिन्न कार्य  </li>
</ul>
<p><strong>मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना से होगा 3 लाख कृषकों को लाभ</strong></p>
<ul>
<li>राज्य में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार कृषकों को नेपियर घास का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>क्षारीय एवं लवणीय भूमि के सुधार तथा भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए 50 हजार ढैंचा बीज मिनिकिट का कृषकों को नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>कृषि उत्पादों के गुणवत्ता संवर्द्धन में बायो एजेंट्स की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए इनका उत्पादन 100 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 200 मीट्रिक टन किया जाना प्रस्तावित है।  </li>
<li>नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को बढ़ावा देने के लिए एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रा में इनके छिड़काव के प्रदर्शनों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में अनियमित एवं अनिश्चित वर्षा के कारण वर्षा जल का संग्रहण कर बिना छीजत के पानी का उपयोग सुनिश्चित किए जाने के लिए आगामी वर्ष 8 हजार डिग्गियों व 15 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइप लाइन सहित आगामी दो वर्षों में 36 हजार फार्म पोंड्स के लिए 585 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान दिया जाएगा। इससे 80 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।</li>
</ul>
<p><strong>कृषि विपणन एवं सहकारिता</strong></p>
<ul>
<li>ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरण योजना के अन्तर्गत आगामी वर्ष 35 लाख से अधिक किसान साथियों को 25 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए जाने की घोषणा। इस के लिए 800 करोड़ रुपए ब्याज अनुदान पर व्यय किए जाएंगे।</li>
<li>दीर्घकालीन सहकारी कृषि एवं नॉन फार्मिंग सेक्टर्स के लिए 590 करोड़ रुपए के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 26 हजार किसान एवं लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे। </li>
<li>एग्रो प्रोसेड प्रोडक्ट्स को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान तथा इनसे जुड़े कृषकों को बेहतर मूल्य दिलवाने की दृष्टि से मिशन राज गिफ्ट होगा प्रारंभ <br />प्रदेश में भण्डारण क्षमता वृद्धि, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग, क्षमता विकास, मण्डी विकास तथा आधारभूत संरचना निर्माण सम्बन्धी विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे।</li>
</ul>
<p><strong>गोदाम निर्माण, क्षमता संवर्द्धन, मण्डी सम्बन्धी कार्य</strong></p>
<ul>
<li>वर्ष 2047 तक 30 लाख मीट्रिक टन भण्डारण क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेश में 250 मीट्रिक टन एवं 500 मीट्रिक टन क्षमता के 50-50 गोदामों का निर्माण करवाया जाएगा। इस के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।</li>
<li>गुराडिया माना, सरोद (डग) व लावासल (मनोहरथाना)- झालावाड़ सहित 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के जीर्ण-शीर्ण गोदाम मय चारदीवारी के पुनर्निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।</li>
<li>ठीकरिया चारणान-बूंदी व गैलानी, सालरिया (झालरापाटन), बडाय (खानपुर), पाडलिया, चाडा, सुनारी (डग)- झालावाड़ सहित 200 नवगठित गोदाम विहीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम एवं कार्यालय भवन मय चारदीवारी निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे।  </li>
<li>प्याज की फसल को खराब होने से बचाने एवं मूल्य के उतार-चढ़ाव के नियंत्रण के लिए आगामी वर्ष तीन हजार किसानों को कम लागत की प्याज भण्डारण संरचनाओं के निर्माण के लिए लगभग 26 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
</ul>
<p><strong>मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस</strong></p>
<ul>
<li>प्रदेश में मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने की दृष्टि से आगामी वर्ष राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस का आयोजन किया जायेगा।  </li>
<li>अलवर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑनियन, श्रीगंगानगर में सेंटर  ऑफ एक्सीलेंस फॉर किन्नू तथा बांसवाड़ा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मैंगो खोले जाएंगे।</li>
<li>आमजन को जैविक कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने की दृष्टि से जोधपुर, कोटा व उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>कृषि जिन्सों के प्रोसेसिंग, व्यवसाय एवं निर्यात को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रदेश के चयनित जिलों में 2 हजार कृषकों, प्रोसेसर्स व्यापारियों व निर्यातकों को प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।  </li>
</ul>
<p>नवीन कृषि उपज अनाज मण्डी-बागीदौरा-बांसवाड़ा, सिकराय-दौसा, राजियासर स्टेशन (सूरतगढ़)-श्रीगंगानगर, कृषि उपज अनाज मण्डी में आवश्यक विकास कार्य-नदबई-भरतपुर, कोटपूतली-कोटपूतली बहरोड़, लोसल (धोद)-सीकर, राजलदेसर-चूरू थोक सब्जी मण्डी-नोखा-बीकानेर, सब्जी मण्डी-सवाई माधोपुर, बयाना-भरतपुर अनार मण्डी जीवाणा-जालोर में मूलभूत सुविधाओं का निर्माण कराया जाएगा। गौण मण्डी यार्ड, मूंडवा-नागौर में विशिष्ट पान-मैथी यार्ड तथा आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य ग्रामीण हाट (झालरापाटन)-झालावाड़ के लिए 10 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p><strong>समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र होंगे शुरू </strong></p>
<ul>
<li>उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त ग्रोसरी एवं अन्य खाद्य उत्पाद उपलब्ध करवाये जाने के लिए नवगठित जिलों में जिला सहकारी उपभोक्ता भण्डार स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र शुरू किए जाएंगे। </li>
<li>दूरदराज से कृषि उपज की बिक्री के लिए कृषि उपज मण्डियों में आने वाले किसानों को गर्मी एवं बरसात से बचाव के लिए शेड निर्माण सहित मण्डियों तक पहुंच मार्ग एवं यार्डों मेंअन्य आधारभूत कार्यों के लिए 350 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। </li>
</ul>
<p><strong>पशुपालन एवं डेयरी: 200 ग्राम पंचायतों में खोले जाएंगे पशु चिकित्सा उपकेन्द्र  </strong></p>
<p>न्यूनतम 3 हजार पशुधन वाली पशु चिकित्सा संस्था विहीन ग्राम पंचायतों में से गहनौली (नदबई)-भरतपुर, धांधोला (जहाजपुर), बांगोलिया (रायपुर)-भीलवाड़ा, पावली (राशमी)-चित्तौड़गढ़, गढ़ोरा (सिकराय)-दौसा, रतनपुरा (संगरिया) -हनुमानगढ़, सामोर (आंधी)-जयपुर, आलवाड़ा (सायला)-जालोर, रेवासा दलेलपुरा (नावां)-डीडवाना कुचामन, संगतडा-सलूम्बर, 17 एमडी (घड़साना) -श्रीगंगानगर सहित 200 ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोले जायेंगे। </p>
<p>ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में क्रमश: 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 3 हजार पशुधन की अनिवार्यता को प्राथमिकता देते हुए चतरपुरा (बानसूर)-कोटपूतली बहरोड़, मालपुर (गोविन्दगढ़)-अलवर, लीडी (पीसांगन)-अजमेर, बामडला (सेड़वा)-बाड़मेर, नवलपुरा (लाखेरी)-बूंदी, कौरेर-डीग, घोटािद (सागवाड़ा)-डूंगरपुर, मांडियाई खुर्द (तिंवरी)-जोधपुर, कितलसर (डेगाना), हरसोलाव (मेड़तासिटी)-नागौर, डाबरकलां, सिरोही, टोडा का गोठडा, सावतगढ़ (देवली)-टोंक, तलावड़ा (खण्डार)-सवाई माधोपुर, गोमावाली (विजयनगर)- श्रीगंगानगर, खिवाड़ा (राणी)-पाली सहित 25 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों को पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रा में 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा शहरी क्षेत्रा में 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 2 हजार पशुधन की पात्राता रखने वाले उपरेड़ा (बनेड़ा)-भीलवाड़ा, बिलोठी (सेवर)-भरतपुर, थांवला, राजमहल, चांदली (देवली)-टोंक, बान्दनवाड़ा (भिनाय)-अजमेर, अजबपुरा (नारायणपुर), बुद्ध विहार-अलवर, द्वारापुरा (बांदीकुई)-दौसा, जखराना-कोटपूतली बहरोड़, कठोती (जायल)-नागौर, कोटडी सिमारला (श्रीमाधोपुर)-सीकर, भालेरी (तारानगर)-चूरू, नेवरी व इन्द्रपुरा (उदयपुरवाटी)-झुंझुनूं सहित 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय से बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नयन- जमवारामगढ़-जयपुर, खेतड़ी-झुंझुनूं, फलौदी बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, झालरापाटन-झालावाड़ के भवन निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p>प्रदेश में डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारे द्वारा गठित राजस्थान सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष की राशि एक हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किये जाने की घोषणा। </p>
<p>सरस ब्राण्ड को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्राण्ड के रूप में स्थापित करने के लिए एनसीआर, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के आउटलेट्स खोले जायेंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।</p>
<p>दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत वर्तमान में 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है। आगामी वर्ष इस योजना में 700 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे। </p>
<p>विकसित राजस्थान @2047 के लिए प्रदेश में मिल्क प्रोसेसिंग कैपेसिटी 200 लाख लीटर प्रतिदिन तथा दूध और दुग्ध उत्पाद बिक्री केन्द्रों की संख्या एक लाख किये जाने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त दूध व मिल्क प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराने, मिल्क प्लांट्स की स्थापना, अपग्रेडेशन एवं विस्तार करने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जाएंगे। </p>
<p><strong>दुग्ध केन्द्र/संयंत्रा की स्थापना/संवर्द्धन कार्य  </strong></p>
<ul>
<li>ग्रामीण क्षेत्र में आगामी वर्ष होगी एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों स्थापना</li>
<li>आगामी वर्ष, ग्रामीण क्षेत्र में एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 200 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </li>
<li>बारां तथा सिरोही में के 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय किया जएगा।  </li>
<li>जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का सुदृढ़ीकरण करते हुए क्षमता 30 हजार लीटर से बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन की जायेगी। इस पर 25 करोड़ रुपये का व्यय होगा।  </li>
<li>ग्रामीण क्षेत्रा में दुग्ध व दुग्ध उत्पादों के विपणन के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराये जाने के लिए 500 डेयरी बूथ आवंटित किये जाएंगे।</li>
<li>एक लाख पशुपालकों को वेल्यू एडेड दुग्ध आधारित उत्पाद- शुद्ध घी, मावा, पनीर, मिठाई आदि तैयार किये जाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में मुर्गीपालन तथा गो उत्पादों को बढ़ावा दिये जाने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जायेंगे, जिनमें मुर्गीपालन/गोशाला संवर्द्धन सम्बन्धी विभिन्न कार्य प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, सिरोही, जालोर, पाली आदि में हैचरी, कोल्ड स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग यूनिट की सुविधायुक्त बैक यार्ड के 35 पॉलट्री के 35 क्लस्टर्स महिला शक्ति पोल्ट्री समूह के माध्यम से स्थापित किये जायेंगे। इसके अन्तर्गत प्रति ब्सनेजमत 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>उचित मूल्य पर मुर्गी दाना उपलब्ध करवाने के लिए तबीजी-अजमेर में पॉलट्री, फीड यूनिट स्थापित की जाएगी।  </li>
<li>गोशालाओं द्वारा उत्पादित गोकाष्ठ के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 100 गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवायी जाएंगी।  </li>
<li>गो उत्पादों को प्रोत्साहन देने व आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय प्रदर्शनी लगायी जाएगी।  </li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:39:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0: पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करवाने पर दिल्ली सरकार देगी 50,000 रुपए, जानें योजना लागू होने किसे मिलेगा इसका लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक (रेट्रोफिटिंग) कराने पर ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि देगी। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और 10-15 साल पुराने वाहनों को स्क्रैप होने से बचाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/delhi-government-will-give-rs-50000-for-converting-an-old/article-138524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/delhi-ev.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार नित नए कदम उठा रही है। अब एक और बड़ी तैयारी हो रही है। खबर है कि, नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के ड्राफ्ट के तहत पुराने पेट्रोल और डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने यानी रेट्रोफिट कराने पर प्रोत्साहन देने की योजना बनाई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि पुराने वाहन मालिक अपने गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराते हैं तो उन्हें इसके लिए सरकार की तरफ इंसेंटिव मिलेगा। इससे लोगों को अपनी पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने के बजाय इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने के लिए प्रेरित किया जाएगा।</p>
<p><strong>50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार पहली 1,000 पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2.0 के ड्राफ्ट में शामिल किया गया है। इसका मकसद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने के साथ-साथ पुराने वाहनों के इलेक्ट्रिक कन्वर्जन को भी बढ़ावा देना है।</p>
<p><strong>दिल्ली में पुराने वाहनों पर सख्त नियम</strong></p>
<p>दिल्ली में 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध है। यह नियम एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत लागू हैं ताकि वाहन प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। नियम तोड़ने पर चालान, वाहन को सीज करना और केवल अधिकृत स्क्रैपिंग या एनओसी के जरिए बाहर भेजने का विकल्प मिलता है।</p>
<p><strong>ईवी पॉलिसी 2.0 के अन्य प्रस्ताव</strong></p>
<p>ड्राफ्ट ईवी पॉलिसी 2.0 में स्क्रैपिंग के बाद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद पर प्रोत्साहन देने का भी सुझाव है। इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट फंड को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये करने, बैटरी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने जैसे सुझाव दिए गए हैं। इसके अलावा स्वैपिंग स्टेशनों पर ज्यादा सब्सिडी और ई-रिक्शा व ई-कार्ट के लिए सेफ्टी रेटिंग जैसे प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में एक पूर्व अधिकारी के हवाले से गया है कि,रेट्रोफिटिंग उन गाड़ियों के लिए ज्यादा बेहतर होगा जिनका इस्तेमाल सीमित होता है। इसकी कन्वर्जन की सफलता वाहन के मॉडल, इलेक्ट्रिक किट की कम्पैटिबिलिटी और गियरबॉक्स कंपोनेंट्स इत्यादि पर निर्भर करती है। हालांकि यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है कि, सरकार की ये नई प्लॉनिंग कितनी कारगर साबित होगी, क्योंकि यदि इस नए नियम को लागू किया जाता है तो भी शुरूआत में केवल 1,000 वाहनों के लिए ही ये सुविधा उपलब्ध होगी।</p>
<p><strong>क्या होता है रेट्रोफिटिंग</strong></p>
<p>रेट्रोफिटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पेट्रोल या डीजल इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और इससे संबंधित कंपोनेंट्स लगाए जाते हैं। जिससे कोई भी रेगुलर वाहन ईवी में कन्वर्ट हो जाती है। हालांकि ये प्रक्रिया महंगी है, लेकिन सरकार द्वारा मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से आम लोगों को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। पहले भी इस योजना को बढ़ावा देने की कोशिश की गई थी, लेकिन ज्यादा लागत के कारण लोगों की रुचि कम रही। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित सब्सिडी से यह प्रक्रिया किफायती बनेगी और लोग अपनी गाड़ियों का दोबारा उपयोग कर सकेंगे।</p>
<p>रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि, यह योजना खासतौर पर प्रीमियम और लग्जरी कार मालिकों को आकर्षित कर सकती है। 50 लाख या उससे ज्यादा कीमत की गाड़ियों को स्क्रैप करने पर बहुत कम कीमत मिलती है, जिससे मालिक हिचकते हैं। रेट्रोफिटिंग के जरिए वे अपनी महंगी गाड़ियों को भी इलेक्ट्रिक कारों में कन्वर्ट करा सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 11:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रसोई गैस सब्सिडी योजना : आधे से ज्यादा राशन कार्ड की मैपिंग बाकी, सबसे कम बांसवाड़ा तो सबसे ज्यादा कोटा में मैपिंग</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार की पीएम उज्ज्वला विस्तार के तहत 450 रुपए में गैस सिलेण्डर देने की सब्सिडी योजना में पात्र राशन कार्ड धारियों में महज 41.39 प्रतिशत राशन कार्ड की ही एलपीजी आईडी से मैपिंग हो पाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lpg-subsidy-scheme-more-than-half-of-the-ration-cards/article-97281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(22).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार की पीएम उज्ज्वला विस्तार के तहत 450 रुपए में गैस सिलेण्डर देने की सब्सिडी योजना में पात्र राशन कार्ड धारियों में महज 41.39 प्रतिशत राशन कार्ड की ही एलपीजी आईडी से मैपिंग हो पाई है। प्रदेशभर में पात्र लाभार्थियों के आधे से ज्यादा राशन कार्ड की मैपिंग बाकी के बीच सबसे कम मैपिंग बांसवाड़ा में 19.25 प्रतिशत और सबसे अधिक कोटा में 53.54 प्रतिशत हुई है। खाद्य मंत्री सुमित गोदारा की हाल ही में ली गई समीक्षा बैठक में यह आंकडे सामने आए। खाद्य विभाग ने रसोई गैस सिलेण्डर सब्सिडी योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र परिवारों की एलपीजी आईडी को आधार या राशनकार्ड से सीडिंग करने का काम राशन डीलर्स के माध्यम से शुरू किया। फिलहाल 10 दिसम्बर तक इसकी अंतिम तिथि तय की गई है। एलपीजी आईडी से राशनकार्ड मैपिंग के बाद ही लाभार्थियों को 450 रुपए में सिलेण्डर मिलेगा। आधार कार्ड या राशनकार्ड मैपिंग नहीं करवाने पर सब्सिडी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके साथ ही पात्र लाभार्थी परिवारों को राशनकार्ड में दर्ज सभी सदस्यों की ई-केवाईसी कराया जाना भी अनिवार्य है। पात्र लाभार्थियों ने 30 दिसम्बर तक ई केवाईसी नहीं कराई तो उनका नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटा दिया जाएगा। </p>
<p><strong>एलपीजी आईडी और राशन कार्ड मैपिंग की स्थिति</strong><br /> कुल जिले:                                                                                 33<br /> कुल राशनकार्ड                                                                       एक करोड़ सात लाख 48 हजार 351<br /> उज्ज्वला योजना में पात्र राशनकार्ड                                              39 लाख दो हजार 827<br /> रसोई गैस सब्सिडी योजना में पात्र राशनकार्ड                                  68 लाख 45 हजार 524<br /> एलपीजी आईडी से मैप हुए राशनकार्ड                                          28 लाख 33 हजार 131<br /> कुल प्रतिशत                                                                          41.39 प्रतिशत<br /> सबसे कम                                                                              बांसवाड़ा 19.25 प्रतिशत<br /> सबसे अधिक                                                                           कोटा 53.54 प्रतिशत</p>
<p>एलपीजी आईडी से राशनकार्ड से मैपिंग का काम जारी है। पात्र लाभार्थियों को मैपिंग के लिए राशन दुकान पर अपने साथ आधार कार्ड, जनाधार कार्ड, गैस डायरी और राशनकार्ड साथ लेकर जाना होगा। जिला रसद अधिकारियों को मैपिंग काम पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।<br /><strong>-पूनम प्रसाद सागर, अतिरिक्त खाद्य आयुक्त, खाद्य विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Dec 2024 10:47:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CRS स्थापित करने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी हुई 15.60 लाख रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[आयोजन में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के सामुदायिक रेडियो स्टेशन के संचालक-प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-subsidy-given-for-setting-up-crs-was-rs-1560/article-93832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सीआरएस के एडिशनल डायरेक्टर जी एस केसरवानी ने बताया कि भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सामुदायिक रेडियो स्टेशन (सीआरएस) स्थापित करने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 15.60 लाख रुपए कर दी है।</p>
<p>सीआरएस की अगुवाई अगर महिलाओं द्वारा की जाती है अथवा कोई सीआरएस अपने संचालन कार्य में हरित ऊर्जा का उपयोग करता है तो सब्सिडी राशि 18 लाख रुपए तक कर दी गई है। जो सीआरएस हरित ऊर्जा का उपयोग करते हैं और साथ ही उनका संचालन महिलाओं द्वारा किया जाता है, उनके लिए सबसे ज्यादा सब्सिडी 21 लाख रुपए निर्धारित की गई है।</p>
<p>भारत में सामुदायिक रेडियो के 20 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) नई दिल्ली के सहयोग से जयपुर में दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आईआईएमसी के अपर महानिदेशक डॉ. निमिष रुस्तगी ने कहा कि दो दिवसीय यह सम्मेलन सीआरएस की 20 साल की यात्रा का जश्न मनाने का अवसर है। इस आयोजन में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के सामुदायिक रेडियो स्टेशन के संचालक-प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।</p>
<p>सम्मेलन की संयोजक और भारतीय जनसंचार संस्थान की सीआरएस प्रमुख प्रोफेसर संगीता प्रणवेंद्र ने रेखांकित किया कि वर्तमान के डिजिटलीकरण युग में सीआरएस को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और इसका समाधान प्रशिक्षण और सहकर्मियों के साथ आपसी बातचीत जरिए ही निकालना होगा। कार्यक्रम में विभिन्न सत्र आयोजित हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Oct 2024 12:12:03 +0530</pubDate>
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