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                <title>subsidy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>कृषक कल्याण एवं कृषि विकास: किश्तों की राशि एक अप्रेल, 2026 से 30 सितम्बर, 2026 तक एकमुश्त जमा कराए जाने पर ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दिए जाने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में कृषि यंत्रों, तारबंदी, बीज, सिंचाई और डेयरी विकास हेतु हजारों करोड़ के अनुदान की घोषणा। लाखों किसान, पशुपालक और ग्रामीण उद्यमी लाभान्वित होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/announcement-of-100-interest-rebate-if-the-amount-of-farmer/article-142834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए किसान साथियों को विभिन्न कृषि यंत्रों यथा पावर, टिलर, डिस्क, कल्टीवेटर आदि के लिए 160 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 50 हजार कृषक लाभान्वित होंगे साथ ही, आगामी वर्ष 500 कस्टम हायरिंग सेंटर्स की 96 करोड़  रुपए की लागत से स्थापना की जाएगी। नीलगाय, जंगली जानवरों व निराश्रित पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आगामी वर्ष 50 हजार किसानों को 20 हजार किलोमीटर तारबंदी के लिए 228 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, सामुदायिक तारबंदी में कृषकों की न्यूनतम संख्या 10 से घटाकर 7 किया जाना प्रस्तावित है।आधुनिकतम तकनीकों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के आधार पर खेती करने में आसानी एवं क्षमता विकास के लिए उठाएं जाएंगे विभिन्न कदम</p>
<p><strong>एग्री स्टैक पीएमयू का होगा गठन</strong></p>
<ul>
<li>आगामी वर्ष 5 लाख कृषकों को मूंग, एक लाख कृषकों को मोठ तथा एक लाख कृषकों को ज्वार, बाजरा व बरसीम फसल के मिनिकिट का वितरण किया जाना प्रस्तावित है। इस के लिए 33 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। गुणवत्तायुक्त उन्नत बीज उत्पादन के लिए मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना अन्तर्गत 90 प्रतिशत अनुदान पर 70 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित हैै। इस योजनान्तर्गत 50 करोड़ रुपए का व्यय कर 3 लाख कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा।<br />  <br />छोटे बाजरे की बढ़ती मांग तथा जनजाति क्षेत्रों के किसानों की आय में वृद्धि के लिए कांगनी, कोदो, सांवा, कुटकी, चीना, रागी आदि छोटे बाजरे के 100 हेक्टेयर क्षेत्रा में प्रदर्शन आयोजित कर एक हजार कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन से कृषि भूमि के पोषक तत्वों पर होने वाले प्रभावों का आंकलन तथा मृदा उर्वरा शक्ति के प्रबन्धन के लिए आगामी वर्ष एक लाख 92 हजार मृदा नमूनों की जांच की जानी प्रस्तावित है।  </li>
<li>प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने के संकल्प को पूरा करने की दृष्टि से सर्वप्रथम 5 हजार से अधिक आबादी वाली 3 हजार 496 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। आगामी वर्ष, प्रथम चरण में 2 हजार 98 ग्राम पंचायतों में इस के लिए लगभग 270 करोड़ रुपए से अधिक का व्यय किया जाएगा। </li>
<li>कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रा में एआई/एमएल का वृहद स्तर पर उपयोग किए जाने व उत्पादकता वृद्धि के साथ-साथ कृषकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एग्री स्टैक पीएमयू का गठन किया जाएगा। राज किसान साथी पोर्टल 3.0 पर विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत आवेदन से अनुदान तक की गतिविधियों के ऑनलाइन मॉडयूल का उन्नयन किया जाएगा।  </li>
<li>कृषकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने, उनकी क्षमता वृद्धि करने के उद्देश्य से नॉलेज इनहांसमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आगामी वर्ष 3 हजार 300 किसानों को राज्य से बाहर एक्सपोजर विजिट करवाई जाएगी। मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वाले उत्पादकों व मधुमक्खी पराग के उत्पादन की जानकारी देने के लिए एक हजार मधुमक्खी पालकों को किट, वर्कशॉप व एक्सपोजर विजिट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।</li>
<li>डिजिटल कृषि मिशन के अन्तर्गत कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली राज-एम्स विकसित की जाएगी। इसके अन्तर्गेत कृषि में एआई/एमएल, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग एवं सेटेलाइट इमेजरी आदि तकनीकों द्वारा किसानों को जलवायु जोखिम से बचाव, मौसम आधारित बुवाई, फसल स्वास्थ्य की निगरानी सम्बन्धी सुविधायें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस के लिए 77 करोड़ रुपए व्यय किये जाएंगे। </li>
<li>उन्नत तकनीक के ग्रीन हाउस-पॉलीहाउस/शेडनेट, लो टनल, प्लास्टिक मल्च उपलब्ध करवाने के लिए आगामी वर्ष 4 हजार कृषकों को 200 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिए औषधीय पौधों व मसाला फसलों तथा फूल व सब्जी आदि की खेती संवर्द्धन के लिए विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे। ये कार्य हैं- </li>
<li>कृषि जोत भूमि के निरन्तर घटते जा रहे आकार को देखते हुए सब्जियों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन वृद्धि के लिए वर्टिकल सपोर्ट सिस्टम आधारित खेती के लिए 5 हजार कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। </li>
<li>उद्यानिकी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कृषकों को अनुदानित 500 सोलर क्रॉप ड्रायर्स उपलब्ध करवाए जाएंगे।  </li>
<li>पश्चिमी राजस्थान में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक हजार कृषकों को ईसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली, एलोवेरा आदि औषधीय पौधों के उन्नत बीज व आदान उपलब्ध कराये जायेंगे।  </li>
<li>प्रदेश में जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी आदि मसाला फसलों का 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्रा में विस्तार किए जाने के लिए अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लूज फ्लॉवर एवं पॉलीहाउस में डच रोज की 500 हेक्टेयर क्षेत्रा में खेती के लिए कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा।  </li>
<li>राज्य में एग्रो फॉरेस्ट्री के पौधे तैयार करने के लिए जोधपुर, पाली एवं कोटा में ही टेक नर्सरी की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>प्रदेश में चूरू सहित खारे पानी की उपलब्धता वाले जिलों में झींगा पालकों को राहत देने के लिए सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। </li>
<li>कृषि अनुसंधान, कृषि प्रसार शिक्षा तथा कृषि शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यों को और अधिक गति दिए जाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पद चरणबद्ध रूप से भरे जाने प्रस्तावित हैं। आगामी वर्ष 443 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। </li>
<li>दलहनी एवं तिलहनी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि तथा आत्मनिर्भरता के लिए मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन, सरसों, तिल एवं अरण्डी आदि फसलों के 70 हजार प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, 2 लाख 50 हजार से अधिक किसानों को दलहनी एवं तिलहनी फसलों के अनुदानित प्रमाणित बीजों का वितरण कर लाभान्वित किया जाएगा। इन पर 135 करोड़ रुपए का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। </li>
<li>प्रदेश में कृषि विकास के लिए उन्नत बीज, भूमि सुधार, बायो एजेंट्स एवं छोटे बाजरे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से होंगे विभिन्न कार्य  </li>
</ul>
<p><strong>मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना से होगा 3 लाख कृषकों को लाभ</strong></p>
<ul>
<li>राज्य में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार कृषकों को नेपियर घास का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>क्षारीय एवं लवणीय भूमि के सुधार तथा भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए 50 हजार ढैंचा बीज मिनिकिट का कृषकों को नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>कृषि उत्पादों के गुणवत्ता संवर्द्धन में बायो एजेंट्स की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए इनका उत्पादन 100 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 200 मीट्रिक टन किया जाना प्रस्तावित है।  </li>
<li>नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को बढ़ावा देने के लिए एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रा में इनके छिड़काव के प्रदर्शनों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में अनियमित एवं अनिश्चित वर्षा के कारण वर्षा जल का संग्रहण कर बिना छीजत के पानी का उपयोग सुनिश्चित किए जाने के लिए आगामी वर्ष 8 हजार डिग्गियों व 15 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइप लाइन सहित आगामी दो वर्षों में 36 हजार फार्म पोंड्स के लिए 585 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान दिया जाएगा। इससे 80 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।</li>
</ul>
<p><strong>कृषि विपणन एवं सहकारिता</strong></p>
<ul>
<li>ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरण योजना के अन्तर्गत आगामी वर्ष 35 लाख से अधिक किसान साथियों को 25 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए जाने की घोषणा। इस के लिए 800 करोड़ रुपए ब्याज अनुदान पर व्यय किए जाएंगे।</li>
<li>दीर्घकालीन सहकारी कृषि एवं नॉन फार्मिंग सेक्टर्स के लिए 590 करोड़ रुपए के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 26 हजार किसान एवं लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे। </li>
<li>एग्रो प्रोसेड प्रोडक्ट्स को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान तथा इनसे जुड़े कृषकों को बेहतर मूल्य दिलवाने की दृष्टि से मिशन राज गिफ्ट होगा प्रारंभ <br />प्रदेश में भण्डारण क्षमता वृद्धि, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग, क्षमता विकास, मण्डी विकास तथा आधारभूत संरचना निर्माण सम्बन्धी विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे।</li>
</ul>
<p><strong>गोदाम निर्माण, क्षमता संवर्द्धन, मण्डी सम्बन्धी कार्य</strong></p>
<ul>
<li>वर्ष 2047 तक 30 लाख मीट्रिक टन भण्डारण क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेश में 250 मीट्रिक टन एवं 500 मीट्रिक टन क्षमता के 50-50 गोदामों का निर्माण करवाया जाएगा। इस के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।</li>
<li>गुराडिया माना, सरोद (डग) व लावासल (मनोहरथाना)- झालावाड़ सहित 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के जीर्ण-शीर्ण गोदाम मय चारदीवारी के पुनर्निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।</li>
<li>ठीकरिया चारणान-बूंदी व गैलानी, सालरिया (झालरापाटन), बडाय (खानपुर), पाडलिया, चाडा, सुनारी (डग)- झालावाड़ सहित 200 नवगठित गोदाम विहीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम एवं कार्यालय भवन मय चारदीवारी निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे।  </li>
<li>प्याज की फसल को खराब होने से बचाने एवं मूल्य के उतार-चढ़ाव के नियंत्रण के लिए आगामी वर्ष तीन हजार किसानों को कम लागत की प्याज भण्डारण संरचनाओं के निर्माण के लिए लगभग 26 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
</ul>
<p><strong>मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस</strong></p>
<ul>
<li>प्रदेश में मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने की दृष्टि से आगामी वर्ष राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस का आयोजन किया जायेगा।  </li>
<li>अलवर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑनियन, श्रीगंगानगर में सेंटर  ऑफ एक्सीलेंस फॉर किन्नू तथा बांसवाड़ा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मैंगो खोले जाएंगे।</li>
<li>आमजन को जैविक कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने की दृष्टि से जोधपुर, कोटा व उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>कृषि जिन्सों के प्रोसेसिंग, व्यवसाय एवं निर्यात को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रदेश के चयनित जिलों में 2 हजार कृषकों, प्रोसेसर्स व्यापारियों व निर्यातकों को प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।  </li>
</ul>
<p>नवीन कृषि उपज अनाज मण्डी-बागीदौरा-बांसवाड़ा, सिकराय-दौसा, राजियासर स्टेशन (सूरतगढ़)-श्रीगंगानगर, कृषि उपज अनाज मण्डी में आवश्यक विकास कार्य-नदबई-भरतपुर, कोटपूतली-कोटपूतली बहरोड़, लोसल (धोद)-सीकर, राजलदेसर-चूरू थोक सब्जी मण्डी-नोखा-बीकानेर, सब्जी मण्डी-सवाई माधोपुर, बयाना-भरतपुर अनार मण्डी जीवाणा-जालोर में मूलभूत सुविधाओं का निर्माण कराया जाएगा। गौण मण्डी यार्ड, मूंडवा-नागौर में विशिष्ट पान-मैथी यार्ड तथा आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य ग्रामीण हाट (झालरापाटन)-झालावाड़ के लिए 10 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p><strong>समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र होंगे शुरू </strong></p>
<ul>
<li>उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त ग्रोसरी एवं अन्य खाद्य उत्पाद उपलब्ध करवाये जाने के लिए नवगठित जिलों में जिला सहकारी उपभोक्ता भण्डार स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र शुरू किए जाएंगे। </li>
<li>दूरदराज से कृषि उपज की बिक्री के लिए कृषि उपज मण्डियों में आने वाले किसानों को गर्मी एवं बरसात से बचाव के लिए शेड निर्माण सहित मण्डियों तक पहुंच मार्ग एवं यार्डों मेंअन्य आधारभूत कार्यों के लिए 350 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। </li>
</ul>
<p><strong>पशुपालन एवं डेयरी: 200 ग्राम पंचायतों में खोले जाएंगे पशु चिकित्सा उपकेन्द्र  </strong></p>
<p>न्यूनतम 3 हजार पशुधन वाली पशु चिकित्सा संस्था विहीन ग्राम पंचायतों में से गहनौली (नदबई)-भरतपुर, धांधोला (जहाजपुर), बांगोलिया (रायपुर)-भीलवाड़ा, पावली (राशमी)-चित्तौड़गढ़, गढ़ोरा (सिकराय)-दौसा, रतनपुरा (संगरिया) -हनुमानगढ़, सामोर (आंधी)-जयपुर, आलवाड़ा (सायला)-जालोर, रेवासा दलेलपुरा (नावां)-डीडवाना कुचामन, संगतडा-सलूम्बर, 17 एमडी (घड़साना) -श्रीगंगानगर सहित 200 ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोले जायेंगे। </p>
<p>ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में क्रमश: 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 3 हजार पशुधन की अनिवार्यता को प्राथमिकता देते हुए चतरपुरा (बानसूर)-कोटपूतली बहरोड़, मालपुर (गोविन्दगढ़)-अलवर, लीडी (पीसांगन)-अजमेर, बामडला (सेड़वा)-बाड़मेर, नवलपुरा (लाखेरी)-बूंदी, कौरेर-डीग, घोटािद (सागवाड़ा)-डूंगरपुर, मांडियाई खुर्द (तिंवरी)-जोधपुर, कितलसर (डेगाना), हरसोलाव (मेड़तासिटी)-नागौर, डाबरकलां, सिरोही, टोडा का गोठडा, सावतगढ़ (देवली)-टोंक, तलावड़ा (खण्डार)-सवाई माधोपुर, गोमावाली (विजयनगर)- श्रीगंगानगर, खिवाड़ा (राणी)-पाली सहित 25 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों को पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रा में 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा शहरी क्षेत्रा में 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 2 हजार पशुधन की पात्राता रखने वाले उपरेड़ा (बनेड़ा)-भीलवाड़ा, बिलोठी (सेवर)-भरतपुर, थांवला, राजमहल, चांदली (देवली)-टोंक, बान्दनवाड़ा (भिनाय)-अजमेर, अजबपुरा (नारायणपुर), बुद्ध विहार-अलवर, द्वारापुरा (बांदीकुई)-दौसा, जखराना-कोटपूतली बहरोड़, कठोती (जायल)-नागौर, कोटडी सिमारला (श्रीमाधोपुर)-सीकर, भालेरी (तारानगर)-चूरू, नेवरी व इन्द्रपुरा (उदयपुरवाटी)-झुंझुनूं सहित 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय से बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नयन- जमवारामगढ़-जयपुर, खेतड़ी-झुंझुनूं, फलौदी बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, झालरापाटन-झालावाड़ के भवन निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p>प्रदेश में डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारे द्वारा गठित राजस्थान सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष की राशि एक हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किये जाने की घोषणा। </p>
<p>सरस ब्राण्ड को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्राण्ड के रूप में स्थापित करने के लिए एनसीआर, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के आउटलेट्स खोले जायेंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।</p>
<p>दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत वर्तमान में 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है। आगामी वर्ष इस योजना में 700 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे। </p>
<p>विकसित राजस्थान @2047 के लिए प्रदेश में मिल्क प्रोसेसिंग कैपेसिटी 200 लाख लीटर प्रतिदिन तथा दूध और दुग्ध उत्पाद बिक्री केन्द्रों की संख्या एक लाख किये जाने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त दूध व मिल्क प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराने, मिल्क प्लांट्स की स्थापना, अपग्रेडेशन एवं विस्तार करने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जाएंगे। </p>
<p><strong>दुग्ध केन्द्र/संयंत्रा की स्थापना/संवर्द्धन कार्य  </strong></p>
<ul>
<li>ग्रामीण क्षेत्र में आगामी वर्ष होगी एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों स्थापना</li>
<li>आगामी वर्ष, ग्रामीण क्षेत्र में एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 200 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </li>
<li>बारां तथा सिरोही में के 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय किया जएगा।  </li>
<li>जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का सुदृढ़ीकरण करते हुए क्षमता 30 हजार लीटर से बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन की जायेगी। इस पर 25 करोड़ रुपये का व्यय होगा।  </li>
<li>ग्रामीण क्षेत्रा में दुग्ध व दुग्ध उत्पादों के विपणन के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराये जाने के लिए 500 डेयरी बूथ आवंटित किये जाएंगे।</li>
<li>एक लाख पशुपालकों को वेल्यू एडेड दुग्ध आधारित उत्पाद- शुद्ध घी, मावा, पनीर, मिठाई आदि तैयार किये जाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में मुर्गीपालन तथा गो उत्पादों को बढ़ावा दिये जाने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जायेंगे, जिनमें मुर्गीपालन/गोशाला संवर्द्धन सम्बन्धी विभिन्न कार्य प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, सिरोही, जालोर, पाली आदि में हैचरी, कोल्ड स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग यूनिट की सुविधायुक्त बैक यार्ड के 35 पॉलट्री के 35 क्लस्टर्स महिला शक्ति पोल्ट्री समूह के माध्यम से स्थापित किये जायेंगे। इसके अन्तर्गत प्रति ब्सनेजमत 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>उचित मूल्य पर मुर्गी दाना उपलब्ध करवाने के लिए तबीजी-अजमेर में पॉलट्री, फीड यूनिट स्थापित की जाएगी।  </li>
<li>गोशालाओं द्वारा उत्पादित गोकाष्ठ के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 100 गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवायी जाएंगी।  </li>
<li>गो उत्पादों को प्रोत्साहन देने व आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय प्रदर्शनी लगायी जाएगी।  </li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:39:06 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0: पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करवाने पर दिल्ली सरकार देगी 50,000 रुपए, जानें योजना लागू होने किसे मिलेगा इसका लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक (रेट्रोफिटिंग) कराने पर ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि देगी। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और 10-15 साल पुराने वाहनों को स्क्रैप होने से बचाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/delhi-government-will-give-rs-50000-for-converting-an-old/article-138524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/delhi-ev.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार नित नए कदम उठा रही है। अब एक और बड़ी तैयारी हो रही है। खबर है कि, नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के ड्राफ्ट के तहत पुराने पेट्रोल और डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने यानी रेट्रोफिट कराने पर प्रोत्साहन देने की योजना बनाई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि पुराने वाहन मालिक अपने गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराते हैं तो उन्हें इसके लिए सरकार की तरफ इंसेंटिव मिलेगा। इससे लोगों को अपनी पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने के बजाय इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने के लिए प्रेरित किया जाएगा।</p>
<p><strong>50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार पहली 1,000 पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2.0 के ड्राफ्ट में शामिल किया गया है। इसका मकसद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने के साथ-साथ पुराने वाहनों के इलेक्ट्रिक कन्वर्जन को भी बढ़ावा देना है।</p>
<p><strong>दिल्ली में पुराने वाहनों पर सख्त नियम</strong></p>
<p>दिल्ली में 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध है। यह नियम एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत लागू हैं ताकि वाहन प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। नियम तोड़ने पर चालान, वाहन को सीज करना और केवल अधिकृत स्क्रैपिंग या एनओसी के जरिए बाहर भेजने का विकल्प मिलता है।</p>
<p><strong>ईवी पॉलिसी 2.0 के अन्य प्रस्ताव</strong></p>
<p>ड्राफ्ट ईवी पॉलिसी 2.0 में स्क्रैपिंग के बाद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद पर प्रोत्साहन देने का भी सुझाव है। इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट फंड को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये करने, बैटरी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने जैसे सुझाव दिए गए हैं। इसके अलावा स्वैपिंग स्टेशनों पर ज्यादा सब्सिडी और ई-रिक्शा व ई-कार्ट के लिए सेफ्टी रेटिंग जैसे प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में एक पूर्व अधिकारी के हवाले से गया है कि,रेट्रोफिटिंग उन गाड़ियों के लिए ज्यादा बेहतर होगा जिनका इस्तेमाल सीमित होता है। इसकी कन्वर्जन की सफलता वाहन के मॉडल, इलेक्ट्रिक किट की कम्पैटिबिलिटी और गियरबॉक्स कंपोनेंट्स इत्यादि पर निर्भर करती है। हालांकि यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है कि, सरकार की ये नई प्लॉनिंग कितनी कारगर साबित होगी, क्योंकि यदि इस नए नियम को लागू किया जाता है तो भी शुरूआत में केवल 1,000 वाहनों के लिए ही ये सुविधा उपलब्ध होगी।</p>
<p><strong>क्या होता है रेट्रोफिटिंग</strong></p>
<p>रेट्रोफिटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पेट्रोल या डीजल इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और इससे संबंधित कंपोनेंट्स लगाए जाते हैं। जिससे कोई भी रेगुलर वाहन ईवी में कन्वर्ट हो जाती है। हालांकि ये प्रक्रिया महंगी है, लेकिन सरकार द्वारा मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से आम लोगों को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। पहले भी इस योजना को बढ़ावा देने की कोशिश की गई थी, लेकिन ज्यादा लागत के कारण लोगों की रुचि कम रही। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित सब्सिडी से यह प्रक्रिया किफायती बनेगी और लोग अपनी गाड़ियों का दोबारा उपयोग कर सकेंगे।</p>
<p>रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि, यह योजना खासतौर पर प्रीमियम और लग्जरी कार मालिकों को आकर्षित कर सकती है। 50 लाख या उससे ज्यादा कीमत की गाड़ियों को स्क्रैप करने पर बहुत कम कीमत मिलती है, जिससे मालिक हिचकते हैं। रेट्रोफिटिंग के जरिए वे अपनी महंगी गाड़ियों को भी इलेक्ट्रिक कारों में कन्वर्ट करा सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 11:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रसोई गैस सब्सिडी योजना : आधे से ज्यादा राशन कार्ड की मैपिंग बाकी, सबसे कम बांसवाड़ा तो सबसे ज्यादा कोटा में मैपिंग</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार की पीएम उज्ज्वला विस्तार के तहत 450 रुपए में गैस सिलेण्डर देने की सब्सिडी योजना में पात्र राशन कार्ड धारियों में महज 41.39 प्रतिशत राशन कार्ड की ही एलपीजी आईडी से मैपिंग हो पाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lpg-subsidy-scheme-more-than-half-of-the-ration-cards/article-97281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(22).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार की पीएम उज्ज्वला विस्तार के तहत 450 रुपए में गैस सिलेण्डर देने की सब्सिडी योजना में पात्र राशन कार्ड धारियों में महज 41.39 प्रतिशत राशन कार्ड की ही एलपीजी आईडी से मैपिंग हो पाई है। प्रदेशभर में पात्र लाभार्थियों के आधे से ज्यादा राशन कार्ड की मैपिंग बाकी के बीच सबसे कम मैपिंग बांसवाड़ा में 19.25 प्रतिशत और सबसे अधिक कोटा में 53.54 प्रतिशत हुई है। खाद्य मंत्री सुमित गोदारा की हाल ही में ली गई समीक्षा बैठक में यह आंकडे सामने आए। खाद्य विभाग ने रसोई गैस सिलेण्डर सब्सिडी योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र परिवारों की एलपीजी आईडी को आधार या राशनकार्ड से सीडिंग करने का काम राशन डीलर्स के माध्यम से शुरू किया। फिलहाल 10 दिसम्बर तक इसकी अंतिम तिथि तय की गई है। एलपीजी आईडी से राशनकार्ड मैपिंग के बाद ही लाभार्थियों को 450 रुपए में सिलेण्डर मिलेगा। आधार कार्ड या राशनकार्ड मैपिंग नहीं करवाने पर सब्सिडी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके साथ ही पात्र लाभार्थी परिवारों को राशनकार्ड में दर्ज सभी सदस्यों की ई-केवाईसी कराया जाना भी अनिवार्य है। पात्र लाभार्थियों ने 30 दिसम्बर तक ई केवाईसी नहीं कराई तो उनका नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटा दिया जाएगा। </p>
<p><strong>एलपीजी आईडी और राशन कार्ड मैपिंग की स्थिति</strong><br /> कुल जिले:                                                                                 33<br /> कुल राशनकार्ड                                                                       एक करोड़ सात लाख 48 हजार 351<br /> उज्ज्वला योजना में पात्र राशनकार्ड                                              39 लाख दो हजार 827<br /> रसोई गैस सब्सिडी योजना में पात्र राशनकार्ड                                  68 लाख 45 हजार 524<br /> एलपीजी आईडी से मैप हुए राशनकार्ड                                          28 लाख 33 हजार 131<br /> कुल प्रतिशत                                                                          41.39 प्रतिशत<br /> सबसे कम                                                                              बांसवाड़ा 19.25 प्रतिशत<br /> सबसे अधिक                                                                           कोटा 53.54 प्रतिशत</p>
<p>एलपीजी आईडी से राशनकार्ड से मैपिंग का काम जारी है। पात्र लाभार्थियों को मैपिंग के लिए राशन दुकान पर अपने साथ आधार कार्ड, जनाधार कार्ड, गैस डायरी और राशनकार्ड साथ लेकर जाना होगा। जिला रसद अधिकारियों को मैपिंग काम पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।<br /><strong>-पूनम प्रसाद सागर, अतिरिक्त खाद्य आयुक्त, खाद्य विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Dec 2024 10:47:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CRS स्थापित करने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी हुई 15.60 लाख रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[आयोजन में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के सामुदायिक रेडियो स्टेशन के संचालक-प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-subsidy-given-for-setting-up-crs-was-rs-1560/article-93832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सीआरएस के एडिशनल डायरेक्टर जी एस केसरवानी ने बताया कि भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सामुदायिक रेडियो स्टेशन (सीआरएस) स्थापित करने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 15.60 लाख रुपए कर दी है।</p>
<p>सीआरएस की अगुवाई अगर महिलाओं द्वारा की जाती है अथवा कोई सीआरएस अपने संचालन कार्य में हरित ऊर्जा का उपयोग करता है तो सब्सिडी राशि 18 लाख रुपए तक कर दी गई है। जो सीआरएस हरित ऊर्जा का उपयोग करते हैं और साथ ही उनका संचालन महिलाओं द्वारा किया जाता है, उनके लिए सबसे ज्यादा सब्सिडी 21 लाख रुपए निर्धारित की गई है।</p>
<p>भारत में सामुदायिक रेडियो के 20 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) नई दिल्ली के सहयोग से जयपुर में दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आईआईएमसी के अपर महानिदेशक डॉ. निमिष रुस्तगी ने कहा कि दो दिवसीय यह सम्मेलन सीआरएस की 20 साल की यात्रा का जश्न मनाने का अवसर है। इस आयोजन में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के सामुदायिक रेडियो स्टेशन के संचालक-प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।</p>
<p>सम्मेलन की संयोजक और भारतीय जनसंचार संस्थान की सीआरएस प्रमुख प्रोफेसर संगीता प्रणवेंद्र ने रेखांकित किया कि वर्तमान के डिजिटलीकरण युग में सीआरएस को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और इसका समाधान प्रशिक्षण और सहकर्मियों के साथ आपसी बातचीत जरिए ही निकालना होगा। कार्यक्रम में विभिन्न सत्र आयोजित हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Oct 2024 12:12:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषकों को फार्म पौंड के लिए 1.35 लाख रुपए तक अनुदान</title>
                                    <description><![CDATA[जिस कृषक के पास स्वयं के नाम एक ही स्थान पर न्यूनतम 0.3 हेक्टेयर एवं संयुक्त खातेदारी की स्थिति में भी 0.3 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि हो, वे अनुदान के पात्र होंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/grant-up-to-rs-135-lakh-for-farm-pounds-to/article-83728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(10)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में गिरते भूजल स्तर का खेती किसानी पर सीधा असर पड़ रहा है। सिंचाई की समस्या से निपटने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। गिरते भूजल स्तर के कारण जल के सर्वेक्षण व कुशलतम उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ और अदर इन्टरवेंशन योजना के अन्तर्गत फॉर्म पौण्ड (खेत तलाई) का निर्माण करवाया जा रहा है।</p>
<p>आयुक्त कृषि कन्हैया लाल स्वामी ने बताया कि योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं सीमान्त कृषकों को 1200 घन मीटर पर इकाई लागत का 70 फीसदी या अधिकतम 73500 रुपए कच्चे फार्म पौण्ड पर एवं इकाई लागत का 90 फीसदी या 1 लाख 35 हजार रुपए प्लास्टिक लाईनिंग फॉर्म पौण्ड और अन्य श्रेणी के कृषकों को लागत का 60 फीसदी या अधिकतम 63 हजार रुपए कच्चे फार्म पौण्ड तथा इकाई लागत का 80 फीसदी या 1 लाख 20 हजार रुपए प्लास्टिक लाईनिंग फार्म पौण्ड पर जो भी कम हो, अनुदान देय है। न्यूनतम 400 घन मीटर क्षमता की खेत तलाई पर ही अनुदान देय है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जिस कृषक के पास स्वयं के नाम एक ही स्थान पर न्यूनतम 0.3 हेक्टेयर एवं संयुक्त खातेदारी की स्थिति में भी 0.3 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि हो, वे अनुदान के पात्र होंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 13:02:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ती महंगाई के बीच जनता को राहत: पेट्रोल-डीजल सस्ता,  घरेलू गैस सिलेंडर पर 200 रुपए की सब्सिडी </title>
                                    <description><![CDATA[सालभर में 12 सिलेंडरों पर मिलेगी सब्सिडी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/relief-to-the-public-amid-rising-inflation--petrol-diesel-cheaper--subsidy-of-rs-200-on-domestic-gas-cylinder/article-10192"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/petrol.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों को पेट्रोल-डीजल की कीमते घटाकर और घरेलू गैस सिलेंडर पर सब्सिडी देकर राहत दी है। पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम की है। जिससे पेट्रोल 9.50 रुपए और डीजल 7 रुपए सस्ता होगा। </p>
<p>वहीं घरेलू गैस पर भी केंद्र सरकार ने जनता को बड़ी राहत देते हुए एलपीजी गैस सिलेंडर पर भी दाम घटाए हैं। घरेलू गैस सिलेंडर पर 200 रुपए की सब्सिडी दी है। यह सब्सिडी सालभर में 12 सिलेंडरों पर मिलेगी। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी मिलेगी। इससे 9 करोड़ लाभार्थियों को सीधा फायदा होगा। बढ़ती महंगाई के बीच इस चुनावी माहौल से पहले बड़ा मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। हालांकि बात करें जनता कि तो जनता ने बढ़ती महंगाई के बीच इस राहत के लिए मोदी सरकार को धन्यवाद दिया है। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 May 2022 19:32:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> होम लोन के ब्याज पर सब्सिडी खत्म, निवेश पर भी कैंची</title>
                                    <description><![CDATA[एक अप्रैल यानी आज से वित्त वर्ष 2022-23 शुरू हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/home-loan-interest-subsidy-ends--investment-also-scissors--these-changes-will-happen-with-the-beginning-of-the-new-financial-year/article-7136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/home-lone.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। एक अप्रैल यानी आज से वित्त वर्ष 2022-23 शुरू हो रहा है। इसके साथ ही कई नियम भी बदल जाएंगे। इनका असर हमारी कमाई, खर्च और निवेश पर पड़ेगा। आइए जानते हैं बदलावों के बारे में जो आपकी जेब पर असर डालेंगे।<br />प्रॉविडेंट फंड: जिन कर्मचारियों ने पीएफ अकाउंट में 2.5 लाख रुपए से ज्यादा जमा किया है, उन्हें ब्याज पर इनकम टैक्स देना होगा। टैक्स कैलकुलेशन के लिए अमाउंट को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। एक में छूट वाला योगदान, तो दूसरे में 2.5 लाख रुपए से ज्यादा का योगदान रहेगा, जो टैक्सेबल होगा। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपए रहेगी।</p>
<p><br /><strong>किफायती घर:</strong> अगर आपने पहली बार किफायती घर खरीदा हैए तो चुकाए गए ब्याज पर धारा 80 ईईए के तहत 1.5 लाख की अतिरिक्त कटौती का लाभ नहीं मिलेगा। घर की कीमत 45 लाख से कम है, तो अब तक ब्याज भुगतान में डेढ़ लाख तक की कटौती का दावा कर सकते थे। यह कटौती या छूट धारा 24 बी के तहत मिल रही 2 लाख रुपए की छूट के अलावा थी। यह लाभ उन्हीं टैक्सपेयर्स के लिए था, जिन्होंने घर खरीदने के लिए एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 के बीच कर्ज लिया हो।<br />क्रिप्टोकरेंसी: वर्चुअल करेंसी पर भी एक अप्रैल से कर संबंधी स्पष्ट नियम लागू होंगे। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स या क्रिप्टो पर 30 फीसदी टैक्स लगेगा। किसी व्यक्ति को क्रिप्टो करेंसी बेचने पर फायदा होता है, तो उसे टैक्स देना होगा। बिक्री पर एक जुलाई से एक फीसदी टीडीएस भी काटा जाएगा।</p>
<p><br /><strong>दवाएं:</strong> नए फाइनेंशियल ईयर में हेल्थकेयर भी महंगा हो जाएगा। करीब 800 लाइफ  सेविंग ड्रग्स के दाम 10 फीसदी तक बढ़ेंगे, जिससे इलाज के खर्च में बढ़ोतरी होगी।</p>
<p><br /><strong>पैन:</strong> पैन को आधार से लिंक नहीं करने पर पेनल्टी लगेगी। यह 30 जून 2022 तक 500 रुपए रहेगी। इसके बाद 1000 रुपए पेनल्टी देनी होगी। 31 मार्च 2023 के बाद भी लिंक न करवाने पर पैन नंबर निष्क्रिय हो जाएगा।</p>
<p><br /><strong>जीएसटी:</strong> 20 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारी अनिवार्य ई-इनवॉइसिंग के दायरे में आएंगे। हर बिजनेस टू बिजनेस ट्रांजैक्शन के लिए ई-इनवॉइस जारी होगा। इसके न होने पर ट्रांसपोर्ट के दौरान माल जब्त किया जा सकता है। साथ ही, खरीदार को मिलने वाला इनपुट टैक्स क्रेडिट भी खतरे में पड़ जाएगा।</p>
<p><br /><strong>ऑडिट ट्रेल:</strong> हर कंपनी को अकाउंट सॉफ्टवेयर में ऑडिट ट्रेल फीचर जुड़वाना होगा। ऑडिट ट्रेल का उद्देश्य कंपनी के लेन-देन में एंट्री के बाद किए जाने वाले परिवर्तन का रिकॉर्ड रखना होता है। मांगे जाने पर ऑडिट ट्रेल उपलब्ध कराना होगा।</p>
<table style="width:655px;">
<tbody>
<tr>
<td style="width:652px;text-align:center;" colspan="2"><strong><span style="background-color:#ccffcc;color:#008000;">एनपीएसए म्यूचुअल फड संबंधी बदलाव</span></strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:47.55px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:604.45px;"> राज्य कर्मचारी अपने एम्प्लॉयर के एनपीएस योगदान पर ज्यादा कटौती का दावा कर सकेंगे। दो साल बाद तक अपडेटेड आयकर रिटर्न भर सकेंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:47.55px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:604.45px;">कोरोना के इलाज के लिए मिली 10 लाख रुपए तक की राशि पर टैक्स नहीं लगेगा।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:47.55px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:604.45px;">म्यूचुअल फंड में निवेश सिर्फ यूपीआई या नेटबैंकिंग के जरिए ही हो सकेगा।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:47.55px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:604.45px;"> 75 साल से ऊपर के बुजुर्गों को रिटर्न भरने से छूट।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><br /><br />   <br />    <br />    <br />   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 12:35:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूफटॉप सोलर पर सब्सिडी का और करना पड़ेगा इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[सब्सिडी के लिए डिस्कॉम स्तर पर टेंकर प्रक्रिया की कवायद, दो महीने का लग सकता है समय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AB%E0%A4%9F%E0%A5%89%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A1%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%9C%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-2317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/solar.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। घरों में रूफटॉप सोलर प्लांट लगाकर बिजली बिल में बचत की उम्मीद करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी के लिए करीब दो महीने और इंतजार करना पड़ सकता है। अभी प्रदेश में सोलर प्लांट पर केन्द्र सरकार के स्तर से सब्सिडी बंद है। इसलिए राजस्थान डिस्कॉम के जरिए उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने पर कवायद की जा रही है। डिस्कॉम में जारी इस कवायद को अभी दो महीने का समय लग सकता है। रूफटॉप सोलर प्लांट पर मिलने वाला अनुदान केन्द्र सरकार की ओर से पिछली 31 अगस्त से बंद है। अब यह काम राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के जरिए नहीं होकर राजस्थान डिस्कॉम के माध्यम से होगा।</p>
<p><br /> इसके पीछे तर्क यह है कि सब्सिडी वाले सोलर प्लांट में नेट मीटरिंग की कार्रवाई डिस्कॉम के माध्यम से होती है। उपभोक्ताओं को डिस्कॉम के जरिए ही सब्सिडी वाला सोलर प्लांट लगाया जा सकता है। डिस्कॉम के स्तर पर टेंडर प्रक्रिया चल रही है, जिसमें करीब दो महीने का समय और लग सकता है। <br /> <strong><br /> पहले मिलती थी ये सब्सिडी</strong>: केन्द्र सरकार ने राजस्थान सहित अन्य राज्यों में रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने के लिए 20 से 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दी है। प्रदेश में दस जून 2020 से 31 अगस्त तक कनेक्शनों पर ग्रांट या सब्सिडी दी, जिसमें जयपुर डिस्कॉम को 25 हजार किलोवाट, जोधपुर डिस्कॉम को 15 हजार किलोवाट और अजमेर डिस्कॉम को पांच हजार किलोवाट क्षमता तक सब्सिडी वाले सोलर प्लांट लगाने का टारगेट मिला। योजना के तहत राजस्थान में दस सितम्बर तक घरेलू बिजली उपभोक्ताओं से आवेदनों के आधार पर सोलर प्लांट लगाने का काम पूरा हो चुका है। केन्द्र की सब्सिडी रोक की वजह से नए आवेदन पिछले दो महीने से बंद कर रखे हैं।</p>
<p><strong><br /> प्राइवेट कम्पनियों से नहीं मिलती सब्सिडी</strong>: राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के पैनल में शामिल कम्पनी या एजेंटों के माध्यम से सब्सिडी वाले सोलर प्लांट लगाने का काम होता है। सब्सिडी बंद के बाद उपभोक्ता इन निजी कम्पनियों और एजेंटों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनसे सब्सिडी नहीं मिलती। इन कम्पनियों और एजेंटों को पहले दस सितम्बर तक आवेदन लेने की छूट दी थी, ताकि वे तीन दिसम्बर तक ये प्लांट लगा सकें।</p>
<p><strong><br /> अब केवल घरेलू उपभोक्ताओं को ही सब्सिडी</strong>:केन्द्र सरकार ने फरवरी 2015 में सोलर प्लांट लगाने की स्कीम शुरू की। राजस्थान में छह हजार किलोवाट बिजली रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने का टारगेट तय हुआ। शुरूआत में यह सब्सिडी घरेलू, संस्थानिक, वाणिज्यिक और सामाजिक संस्थाओं को दी गई। फरवरी 2019 में बदलाव हुआ और अब केवल घरेलू उपभोक्ताओं को ही सोलर प्लांट पर सब्सिडी दी जाती है। रूफटॉप सोलर प्लांट लगवाने पर तीन किलोवाट तक के प्लांट पर घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को सरकार 40 प्रतिशत सब्सिडी देती है,वहीं तीन से दस किलोवाट तक सरकार 20 प्रतिशत सब्सिडी देती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Nov 2021 16:30:38 +0530</pubDate>
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