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                <title>Scott Bessent - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Scott Bessent RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान पर अमेरिका का बड़ा आर्थिक वार: ट्रंप प्रशासन आज लगाएगानए प्रतिबंध; तेल, बैंकिंग और शिपिंग कंपनियां निशाने पर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ 'इकोनॉमिक डी-डे' का ऐलान करते हुए इतिहास के सबसे कठोर वित्तीय प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करना और उसके तेल व्यापार, वित्तीय संस्थानों और व्यापारिक नेटवर्क को पूरी तरह ठप्प करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/americas-big-economic-war-on-iran-trump-administration-will-impose/article-163776"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी वित्त मंत्रालय सोमवार को ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा करने जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन कई महीनों से जारी सैन्य टकराव और वार्ता में गतिरोध के बीच ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इन कदमों को 'किसी विरोधी के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला' करार दिया है, जबकि राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के लिए 'आर्थिक डी-डे' की चेतावनी दी है।</p>
<p>बेसेंट ने कहा कि ताजा कदमों का मकसद ईरानी अर्थव्यवस्था को 'कुचलना' और अपनी सेना तथा क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को वित्तपोषित करने की उसकी क्षमता को कम करना है। उन्होंने रविवार देर रात सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के सैन्य अभियान ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को 'काफी हद तक नष्ट' किया है और उसके परमाणु कार्यक्रम को कमजोर किया है। अब प्रशासन अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है और आर्थिक अभियान सोमवार सुबह से शुरू होगा।</p>
<p>ट्रम्प ने अलग से देशों को चेतावनी दी है कि वे ईरान को कोई आर्थिक 'संजीवनी' न दें। उन्होंने यह निर्दिष्ट किये बिना कि किन देशों को निशाना बनाया जा सकता है, 'अत्यधिक गंभीर आर्थिक परिणामों' की धमकी दी है। नये प्रतिबंध उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य वैश्विक वित्त, व्यापार और राजस्व तक ईरान की पहुंच को निशाना बनाकर उसे रियायतें देने के लिए मजबूर करना है। बेसेंट ने ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों से भी उससे दूरी बनाने का आग्रह किया और कहा कि उन्हें अमेरिका से नतीजों का सामना करने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।</p>
<p>इस बीच, ईरान ने अमेरिका के इस अभियान में शामिल होने वाले देशों को चेतावनी दी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसिन रजाई ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक पाबंदियों में भाग लेने वाले किसी भी देश को 'दुश्मन' माना जायेगा। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि ईरान उन देशों के हितों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है जो अमेरिका से दूरी बनाने से इनकार करते हैं। दोनों घोषणाओं के बावजूद प्रस्तावित आर्थिक कदमों का विस्तृत खाका अभी सामने नहीं आया है। बेसेंट के बयान से संकेत मिलता है कि अभियान में ईरान से तेल खरीदने वाले देशों और संस्थाओं, उसके वित्तीय लेनदेन से जुड़े संस्थानों, बैंकों, शिपिंग कंपनियों तथा अन्य वाणिज्यिक माध्यमों पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं। ये कदम पहले से जारी नौसैनिक नाकाबंदी के साथ लागू किये जा सकते हैं।</p>
<p>इस बीच, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने अमेरिकी दावों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक ओर ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को नष्ट करने का दावा कर रहा है और अब दूसरी ओर उसके खिलाफ इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय अभियान शुरू करने की जरूरत बता रहा है। गरीबाबादी ने कहा, "अगर ईरान की सैन्य क्षमता नष्ट हो चुकी है और उसका परमाणु कार्यक्रम खत्म हो चुका है, तो फिर उसी ईरान के खिलाफ इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय अभियान और अमेरिकी एजेंसियों की पूरी ताकत लगाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?"</p>
<p>उन्होंने सवाल किया कि यह अमेरिकी जीत है या फिर अमेरिका की हार की स्वीकारोक्ति। बहरहाल, अमेरिका के ये नये कदम ऐसे समय आये हैं, जब दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त करने की वार्ता बेनतीजा बनी हुई है और ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित कर रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। दशकों के अमेरिकी प्रतिबंधों और संघर्ष के प्रभावों के बाद ईरान पहले से ही गंभीर आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है। कीमतें आसमान छू रही हैं, क्रय शक्ति घटी है और कुछ आयातित वस्तुओं की किल्लत देखी जा रही है। आगे के प्रतिबंधों से ईरान की मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और भोजन, दवाओं, औद्योगिक आपूर्ति और अन्य आयातों की लागत बढ़ सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि इसका सबसे भारी असर कम आय वाले परिवारों, पेंशनभोगियों और छोटे व्यवसायों सहित आम ईरानियों पर पड़ेगा।</p>
<p>बहरहाल, ईरान ने प्रतिबंधों से बचने के लिए एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया है, जिसमें फ्रंट कंपनियां, दलाल, एक्सचेंज हाउस और तेल के परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शैडो टैंकर बेड़ा शामिल है। इसने चीन के साथ व्यापार को भी गहरा किया है और गैर-डॉलर लेनदेन के उपयोग का विस्तार किया है, जिससे अमेरिका के लिए ईरानी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से अलग-थलग करना मुश्किल हो गया है। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के तेल व्यापार को बड़े पैमाने पर सीमित करने के किसी भी प्रयास के तहत चीनी खरीदारों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने की आवश्यकता हो सकती है, जिससे अमेरिका-चीन के बीच तनाव पैदा हो सकता है।</p>
<p>विश्लेषक हालांकि इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या केवल आर्थिक दबाव ही ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर सकता है। ईरान ने वर्षों के प्रतिबंधों को झेला है और अपनी अर्थव्यवस्था को पाबंदियों के अनुकूल ढाला है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इसका बोझ अक्सर राजनीतिक रूप से जुड़े संस्थानों की तुलना में आम जनता पर अधिक पड़ा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 18:45:27 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका का बड़ा प्रतिबंध: भारतीय कंपनी समेत रूस, चीन और ईरान की छह कंपनियां ब्लैकलिस्ट,  क्षेत्रीय अभियानों में मदद का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान की प्रतिबंधित एयरलाइन महान एयर और आईआरजीसी को रसद व व्यावसायिक सहायता देने के आरोप में एक भारतीय कंपनी समेत छह वैश्विक संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि आतंकवादी नेटवर्क को मदद पहुंचाने वाली कंपनियों को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह बेदखल किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/americas-big-ban-including-indian-company-six-companies-of-russia/article-161545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान की मदद करने के आरोप लगाते हुए एक भारतीय कंपनी सहित दुनिया की अन्य छह कंपनियों पर प्रतिबंधित लगाने का एलान किया है। इनमें भारत की स्कीज़ ट्रैवल्स एंड लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड, रूस की एयर कार्गो प्रो लिमिटेड, ईरान की दादेनेगार स्टार्टअप स्टूडियो और चीन की तीन कंपनियां शंघाई विंग्स इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स कंपनी, शंघाई एलीट इंटरनेशनल ट्रैवल कंपनी और तांग शिन शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि इन्होंने ईरान की सैन्य रसद, हथियारों के हस्तांतरण और क्षेत्रीय अभियानों में मदद की है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की प्रतिबंधित एयरलाइन 'महान एयर' के लिए जनरल सेल्स एजेंट के रूप में कार्य करने वाली कंपनियां और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़ी एक कंपनी शामिल है। अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने कहा कि महान एयर, खुद को एक नागरिक की सेवा करने वाली एयरलाइन के रूप में पेश करने के बावजूद, लंबे समय से "दुनिया भर में आईआरजीसी के हथियारों, गुर्गों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही के लिए एक महत्वपूर्ण जरिया" रही है।</p>
<p>अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य आईआरजीसी को सहारा देने वाले समर्थन नेटवर्क को नष्ट करना है। उन्होंने कहा, "जो लोग आईआरजीसी या महान एयर को वित्तीय सेवाएं, रसद या व्यावसायिक सहायता प्रदान करते हैं, वे एक आतंकवादी उद्यम को बनाए रखने में मदद कर रहे हैं"। उन्होंने कहा, "वित्त विभाग ऐसे लोगों की पहचान करना, उन्हें बेनकाब करना और उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से अलग करना जारी रखेगा"।</p>
<p>अमेरिका के अनुसार, महान एयर ने आईआरजीसी-कुड्स फोर्स के कर्मियों को यात्रा सेवाएं प्रदान की हैं, सैन्य प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान की है, और ईरान के लिए अनमांड एरियल व्हीकल प्रणाली, हथियार और सैन्य उपकरण पहुंचाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ये प्रतिबंध राष्ट्रपति के उस कार्यकारी आदेश के तहत लगाए गए हैं, जो आतंकवादी संगठनों और उन्हें सामग्री सहायता प्रदान करने वालों को लक्षित करता है। प्रतिबंधों के तहत, अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में नामित व्यक्तियों और संस्थाओं की सभी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है और अमेरिकी नागरिकों को उनके साथ लेनदेन करने से प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा, इन संस्थाओं के साथ बड़े पैमाने पर लेन-देन करने वाले विदेशी वित्तीय संस्थानों पर भी द्वितीयक अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 14:13:06 +0530</pubDate>
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