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                <title>दीपक गौतम कांग्रेस सीए सेल राजस्थान के प्रदेश सचिव नियुक्त, लंबे समय से  निभा रहे है सक्रिय भूमिका</title>
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                        <![CDATA[गठनात्मक कार्यों में उनकी प्रतिबद्धता और योगदान सराहनीय रहा है। नियुक्ति के बाद दीपक गौतम ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा तथा नितिन व्यास का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/deepak-gautam-congress-ca-sale-has-been-playing-active-role/article-118891"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/6622-copy63.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) सेल में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय लेते हुए कांग्रेस पार्टी ने सीए दीपक गौतम को प्रदेश सचिव (सीए सेल) के पद पर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति राज्य कांग्रेस सीए सेल अध्यक्ष नितिन व्यास ने की है। सीए दीपक गौतम, बनेठा (जिला टोंक) के निवासी हैं, और एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में पहचाने जाते हैं। वे कांग्रेस पार्टी की विचारधारा, सामाजिक न्याय, और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p>संगठनात्मक कार्यों में उनकी प्रतिबद्धता और योगदान सराहनीय रहा है। नियुक्ति के बाद दीपक गौतम ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा तथा नितिन व्यास का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। यह मेरे लिए गौरव का विषय है और मैं इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी, प्रतिबद्धता और निष्ठा के साथ निभाने के लिए पूर्ण रूप से तत्पर हूँ। इस नियुक्ति से पार्टी के पेशेवर प्रकोष्ठ को एक नई दिशा और सशक्त नेतृत्व मिलने की आशा है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Jun 2025 17:13:05 +0530</pubDate>
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                <title>सत्व, रज व तम के समन्वयक हैं दीपक</title>
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                        <![CDATA[दीपावली का अर्थ ही पंक्ति में रखे हुए दीपकों से होता है, लेकिन अब दीपावली पर मिट्टी के दीपक कम, चाइनीज लाइटें, लड़ियां, रंग-बिरंगे बल्ब, एलईडी लाइटें अधिक जलती नजर आती हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/deepak-is-the-coordinator-of-satva-raja-and-tama/article-94164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(6)7.png" alt=""></a><br /><p>हर वर्ष हम कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली का पावन त्योहार बहुत ही हर्ष, खुशी, उमंग व उल्लास के साथ मनाते हैं। त्योहार कोई भी हो, हंसी-खुशी, समृद्धि, सकारात्मकता, पवित्रता व असीम ऊर्जा का प्रतीक होता है। आज भी दीपावली मनाई जाती है, पहले भी मनाई जाती थी, लेकिन समय का रंग हमारे सभी त्योहारों पर ऐसा चढ़ गया है कि अब हर त्योहार आधुनिकता, शहरीकरण, दिखावे,  बनावटीपन व पाश्चात्य संस्कृति के रंग में रंगते चले जा रहे हैं। दीपावली का त्योहार भी इन सबसे अछूता नहीं रहा है।</p><p> दीपावली का अर्थ ही पंक्ति में रखे हुए दीपकों से होता है, लेकिन अब दीपावली पर मिट्टी के दीपक कम, चाइनीज लाइटें, लड़ियां, रंग-बिरंगे बल्ब, एलईडी लाइटें अधिक जलती नजर आती हैं। दीपावली रोशनी का त्योहार है, जो हमारे जीवन में रोशनी लाता है। कहना गलत नहीं होगा कि दिवाली के त्योहार का धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। प्रकाश का यह पर्व हम सभी को सीख देता है कि केवल बाहरी चकाचौंध ही नहीं, अपने मन के भीतर भी प्रकाश उत्पन्न करना जरूरी है। रोशनी के इस पवित्र त्योहार पर पंच तत्वों के प्रतीक मिट्टी के दीपक आज जलते तो हैं, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। जो बात मिट्टी के दीपकों में है, वह चाइनीज लाइटों, झालरों व बल्बों में कहां है, हमारी भारतीय सनातन संस्कृति और हमारे शास्त्रों में मिट्टी के दीपक को तेज, शौर्य और पराक्रम का प्रतीक माना गया है। जब भगवान श्रीराम चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, तब अध्योध्यावासियों ने मिट्टी के दीये जलाकर उनका स्वागत व अभिनंदन किया था। वास्तव में, दिवाली पर मिट्टी के दीपक जलाने के पीछे धार्मिक महत्व भी है।</p><p> मिट्टी के दीपक न केवल हमारे पर्यावरण व प्रकृति का ध्यान रखते हैं, अपितु यह हमारी सादगी, संपन्नता, सुख-समृद्धि, शांति व ऐश्वर्य के भी प्रतीक हैं। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि इस संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना पंचतत्वों से हुई है, जिसमें जल, वायु, आकाश, अग्नि और भूमि शामिल हैं। वास्तव में, मिट्टी का दीपक भी इन पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है। मिट्टी का दीपक वर्तमान का प्रतीक माना गया है। जब हम रुई की बाती डालकर दीप प्रज्ज्वलित करते हैं तो वह आकाश, स्वर्ग और भविष्यकाल का प्रतिनिधित्व करती है। आज दीपावली इलेक्ट्रिक लाइटों का त्योहार हो गई है। सच तो यह है कि आधुनिकता, शहरीकरण की चकाचौंध में हमारे प्राचीन रीति-रिवाज आज बहुत पीछे छूट रहे हैं। हिंदू धर्म में मिट्टी के दीपकों का बहुत महत्व है। पूजा-अर्चना से लेकर जन्म-मरण के विधि-विधानों में मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा हमारे देश में रही है। दीपक में ईश्वर का वास माना जाता है, इनमें देवी-देवताओं का तेज होता है, सकारात्मक ऊर्जा होती है। ऋग्वेद काल से लेकर हर युग व काल में दीपकों का महत्व किसी से छुपा नहीं है। हमारे वेदों, उपनिषदों में गाय के घी से दीपक जलाने के अनेक वर्णन मिलते हैं। वर्णन मिलता है कि द्वापर युग में कृष्ण के नरकासुर राक्षस वध के बाद वहां के वासियों ने दीपक जलाकर जीत की खुशी को प्रकट किया था। मिट्टी का दीपक वास्तु दोष को समाप्त करने की अद्भुत क्षमता रखता है। मिट्टी के दीपक दुख, आलस्य, निर्धनता को दूर करके जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, खुशी, आनंद, ऐश्वर्य लाते हैं। आज मिट्टी के दीपकों से भले ही महंगाई के कारण, आधुनिकता व पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति के प्रभाव के कारण, मिट्टी के दीपकों में तेल-बाती डालने के झंझटों के कारण भले ही मोह भंग हो गया हो, लेकिन मिट्टी के दीये के मुकाबले इलेक्ट्रिक लाइटें, झालरें, लड़ियों के प्रकाश की आभा कहीं भी नहीं ठहरती है। मिट्टी के दीपक जहां कीट-पतंगों का नाश करते हैं और हमारे पर्यावरण को शुद्ध बनाते हैं वहीं इलेक्ट्रिकलाइटें यह सब संभव नहीं कर पाती हैं। आज चाइनीज लाइटों, झालरों, लड़ियों के उपयोग से हम अपने देश की अर्थव्यवस्था पर भी कहीं न कहीं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डाल रहे होते हैं।</p><p> पर्यावरण संरक्षण तो दूर की बात,इसलिए रह जाती है क्योंकि दिवाली पर होने वाले पटाखों के प्रदूषण को हम मिट्टी के दीपक जलाकर रोकते नहीं है। हमारा संपूर्ण ध्यान आधुनिक चकाचौंध पर होता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि मिट्टी का एक छोटा सा दीया गहरे अंधकार में भी उजास की लौ जलाकर रखता है। मिट्टी हमारे पर्यावरण, हमारे परिवेश का अहम् और महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला हो या माता पार्वती के जन्म की कहानी, मिट्टी का हर युग में वर्णन मिलता है। भारतीय संस्कृति में दीपों का इतिहास अति प्राचीन है। विशेषज्ञों व इतिहासकारों के मत के अनुसार शुरुआत में दीपक पत्थर को तराशकर बनाए गए होंगे, लेकिन धीरे-धीरे सभ्यता के विकास के साथ मिट्टी के दीपक बने। ऐसी जानकारी मिलती है कि घरों में रोशनी के लिए मशालों, दीपकों और लालटेनों का विकास प्राचीन भारत, चीन और मिस्र की सभ्यताओं में हो गया था। पुरातत्वविदों को सिंधु घाटी सभ्यता से आगे हर सभ्यता व विभिन्न राजवंशों के पुरवशेषों की खुदाई में विभिन्न प्रकार के दीये प्राप्त हुए हैं। <br /><strong></strong></p><p><strong>-सुनील कुमार महला </strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Oct 2024 10:40:06 +0530</pubDate>
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                <title>दीये जलाएं, परंपरा को जीवंत बनाएं</title>
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                        <![CDATA[ आधुनिकता की आंधी में हम अपनी पौराणिक परंपरा को छोड़कर दीपावली पर बिजली की लाइटिंग के साथ तेज ध्वनि वाले पटाखे चलाने लगे हैं। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/light-lamps-and-bring-tradition-alive/article-94024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/deepak.jpg" alt=""></a><br /><p>आज की भागती दौड़ती जिन्दगी में लोग अपनी परंपरा को भूलते जा रहे हैं। इसका परिणाम है कि आज देश में पर्यावरण संकट के साथ-साथ कई तरह की समस्या उत्पन्न हो रही है। जिसके चलते सभी लोगों और जीव-जंतुओं के जीवन पर संकट है। इन परंपराओं  में एक दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीये जलाना भी है। जिसको आज लोग भूलते जा रहे हैं और उसकी जगह पर इलेक्ट्रिक लाइटों का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन जो सुंदरता मिट्टी के दीये जलने पर दिखती है वह इलेक्ट्रिक लाइटों के जलने से नहीं। इस बात को स्वयं लोग भी स्वीकार कर रहे हैं और इस परंपरा को लोगों के भूलने पर चिंता भी व्यक्त कर रहे हैं। मिट्टी के दीये जलाना हमारी परंपरा और संस्कृति है। अपनी संस्कृति को कोई कैसे भूल सकता है। इसका सभी लोगों को ध्यान रखना चाहिए। मिट्टी के दीये जलाने के कई लाभ हैं। जिसका उल्लेख कई जगहों पर देखने और सुनने को मिलता है। इसलिए सभी लोग मिट्टी के दीये जलाएं।</p>
<p>दीपावली का त्यौहार मिट्टी के दीये से जुड़ा हुआ है। यह हमारी संस्कृति में रचा-बसा हुआ है। दीया जलाने की परंपरा आदि काल से रही है। भगवान राम की अयोध्या वापसी की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने घर-घर दीप जलाया था। तब से ही कार्तिक महीने में दीपों का यह त्यौहार मनाए जाने की परंपरा रही है। पिछले दो दशक के दौरान कृत्रिम लाइटों का क्रेज बढ़ा है। आधुनिकता की आंधी में हम अपनी पौराणिक परंपरा को छोड़कर दीपावली पर बिजली की लाइटिंग के साथ तेज ध्वनि वाले पटाखे चलाने लगे हैं। इससे एक तरफ  मिट्टी के कारोबार से जुड़े कुम्हारों के घरों में अंधेरा रहने लगा, तो ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों को अपना कर अपनी सांसों को ही खतरे में डाल दिया। अपनी परंपराओं से दूर होने की वजह से ही कुम्हार समाज अपने पुश्तैनी धंधे से दूर होता जा रहा है। दूसरे रोजगार पर निर्भर होने लगे हैं। एक समय था जब दीपावली पर्व को लेकर लोग मिट्टी के दीये खरीदने के लिए पहले ही कुम्हार को ऑर्डर कर देते थे। दीपावली पर्व पर कई लोगों के आर्डर को पूरा करने में दिन रात एक कर मेहनत करते थे। हालांकि उस समय उतनी आमदनी नहीं होती थी, लेकिन कुम्हारों को भी एक रुचि रहती थी कि इस परंपरा को जीवंत रखना है। लेकिन आज लोगों ने मिट्टी के दीये जलाना धीरे-धीरे कम कर दिया है, इससे अब कुम्हार भी इसमें रुचि नहीं ले रहे। जिसका नतीजा है कि आज दीपावली पर्व में लोग घर में दो-चार मिट्टी के दीये जला कर सिर्फ एक परंपरा का किसी तरह निर्वहन कर रहे हैं। ज्यादातर लोग इलेक्ट्रिक  लाइटों, झालर और अन्य लाइटों को जला कर ही दीपावली पर्व में अपने घर को रोशनी से जगमग करने की कोशिश कर रहे हैं। हम सभी अब दीपावली के नाम पर पर्यावरण को खराब कर रहे हैं।</p>
<p>अब हमें पुन: अपनी परंपरा को समझना होगा। हमें मिट्टी के दिये जलाने की परंपरा की पुन शुरुआत करनी होगी। इससे कीड़े मकोड़े मरते हैं। झालर और लाइट से कीड़े नहीं मरते। हमारी संस्कृति सरसों के तेल के दिये जलाना है, अच्छे पकवान बनाना, मिठाइयां खाना और पड़ोसी को भी खिलाना, लोगों को उपहार देना आदि है। लेकिन लोग अब उतने समझदार नहीं हैं इसलिए पटाखे छूटेंगे। लोग मिट्टी के दीये जलाएं। इससे प्रदूषण भी नहीं होगा और परंपरा भी जीवंत रहेगी। दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीये जलाना पूर्वजों के द्वारा बनाई गई परंपरा है। इसे हम सभी लोगों को बरकरार रखना चाहिए। दिवाली में मिट्टी के दीये जलाना हमारी संस्कृति और प्रकृति से जुड़ने का बहुत ही सुगम साधन है। यह भारतीय संस्कृति में बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। मिट्टी के दीये प्रेम, समरसता और ज्ञान के प्रतीक हैं। सामाजिक व आर्थिक आधार पर भी दीयों की खूबसूरती जगजाहिर है। इस बार दीपावली के दिन मिट्टी के दीये जलाने का संकल्प लेकर संस्कृति का बचाव करना है। सभी लोग मिट्टी के दिये ही जलाएं। आज की युवा पीढ़ी इलेक्ट्रिक लाइटों के प्रति अधिक रुचि रख रही है। घरों को सजाने से लेकर दीये जलाने में इलेक्ट्रिक लाइटों का ही उपयोग कर रही है। जबकि यह सोचना चाहिए कि हमारी संस्कृति और परंपरा का निर्वहन करना युवाओं के कंधे पर ही है। गांव या किसी शहर में जो कुम्हार है वह आज भी मिट्टी  के दीये बनाते हैं। इसमें उन्हें आमदनी का लालच नहीं होता बल्कि उनमें अपनी परंपरा को बरकरार रखने का उत्साह होता है। लेकिन लोग इसे भूलते जा रहे हैं।</p>
<p>पंरपरा व पर्यावरण के संरक्षण के लिए  मिट्टी के दीये जलाना है। इनसे कोई प्रदूषण नहीं होता। कृत्रिम रोशनी आंखों और त्वचा के लिए हानिकारक होती है। मिट्टी के दीये की रोशनी आंखों को आराम पहुंचाती है। दिवाली पर इसे जलाकर हम अपनी परंपराओं को याद रखते हैं। मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों को प्रोत्साहित करने का भी यह अच्छा मौका है। इस दीपावली, हम सभी मिलकर मिट्टी के दीये जलाएं और एक स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण बनाने में अपना योगदान दें। लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। वर्तमान में अपनी परंपरा को बरकरार रखने और पर्यावरण बचाने के लिए इस दीपावली मिट्टी की दीये जलाने के प्रति लोगों खास कर बच्चों व युवाओं को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाएं। <br /><strong>-प्रियंका सौरभ </strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Oct 2024 11:34:18 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>दीपक चाहर चोट के कारण आईपीएल से बाहर</title>
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                        <![CDATA[चार बार के आईपीएल विजेता चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को बड़ा झटका लगा है। टीम के महत्वपूर्ण ऑलराउंड खिलाड़ी दीपक चाहर चोट से न उभर पाने के कारण आईपीएल सीजन से बाहर हो गए है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/deepak-outside-to-ipl/article-7972"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/462465465465.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। चार बार के आईपीएल विजेता चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को बड़ा झटका लगा है। टीम के महत्वपूर्ण ऑलराउंड खिलाड़ी दीपक चाहर चोट से न उभर पाने के कारण आईपीएल सीजन से बाहर हो गए है। आईपीएल ने इसकी पुष्टि की। आईपीएल की ओर से जारी बयान के मुताबिक सीएसके के दीपक चाहर चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गए है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Apr 2022 17:37:46 +0530</pubDate>
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                <title>मंगेतर जया को दिखाया वह विकेट, जहां शुरू किया अपना रणजी करियर</title>
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                        <![CDATA[दीपक को न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज की भारतीय टीम में शामिल किया गया है, जिसका पहला मुकाबला 17 नवम्बर को जयपुर में खेला जाएगा।]]>
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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 14:58:31 +0530</pubDate>
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