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                <title>behind - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>behind RSS Feed</description>
                
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                <title>महिला वर्ल्ड कप हॉकी: पिछड़ने के बाद वंदना के गोल से की बराबरी, भारत ने इंग्लैंड को ड्रॉ पर रोका </title>
                                    <description><![CDATA[एम्सतेलवीन। टोक्यो ओलिंपिक में चौथे स्थान पर रही भारतीय महिला हॉकी टीम ने एम्सतेलवीन में चल रहे वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ मैच 1-1 से ड्रॉ कर दिया। इंग्लैंड ने मैच के नौवें मिनट में इसाबेला पीटर के गोल की मदद से 1-0 की बढ़त बनाई। भारत की ओर से वंदना कटारिया ने 29वें मिनट में गोल कर मैच 1-1 से ड्रॉ कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/women-s-world-cup-hockey-after-falling-behind-vandana-s-goal--india-held-england-to-a-draw/article-13551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/hockey.jpg" alt=""></a><br /><p>एम्सतेलवीन। टोक्यो ओलिंपिक में चौथे स्थान पर रही भारतीय महिला हॉकी टीम ने एम्सतेलवीन में चल रहे वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ मैच 1-1 से ड्रॉ कर दिया। इंग्लैंड ने मैच के नौवें मिनट में इसाबेला पीटर के गोल की मदद से 1-0 की बढ़त बनाई। भारत की ओर से वंदना कटारिया ने 29वें मिनट में गोल कर मैच 1-1 से ड्रॉ कर दिया।</p>
<p><br /><strong>भारत को पहले मिनट में मिला पेनल्टी कॉर्नर</strong> : भारत ने मैच में अच्छी शुरुआत की और पहले ही मिनट में पेनल्टी कॉर्नर अर्जित किया। लेकिन भारतीय खिलाड़ली गोल करने में नाकाम रही। इसके त्जवाब में इंग्लैंड ने आक्रमण जारी रखे। इंग्लैंड ने खेल के 9वें मिनट में गोल बना 1-0 की बढ़त हासिल की।</p>
<p><br /><strong>वंदना ने दागा बराबरी का गोल </strong> : दूसरे क्वार्टर के ज्यादातर हिस्से में इंग्लैंड ने अपनी बढ़त बनाई रखी। 28वें मिनट में भारत को मैच का चौथा पेनल्टी कॉर्नर मिला। वंदना कटारिया ने रीबाउंड पर गोल कर टीम को बराबरी दिलाई। तीसरे और चौथे क्वार्टर में दोनों टीमों की ओर से कई हमले हुए लेकिन किसी को गोल करने में सफलता नहीं मिली।</p>
<p><br /><strong>भारत कल चीन से भिड़ेगा</strong> : भारतीय टीम पूल बी में अपने दूसरे मुकाबले में मंगलवार को चीन के खिलाफ मैच में उतरेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 12:10:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कोटा यूनिवर्सिटी के पीछे अनकंट्रोल ब्लास्टिंग</title>
                                    <description><![CDATA[आबादी क्षेत्र के नजदीक कोटा यूनिवर्सिटी के पीछे मनमर्जी से अनकंट्रोल ब्लास्टिंग की जा रही है। बारूद लगाकर चटटानों का सीना छलनी किया जा रहा है। धमाके के साथ हवा में उछलते चटटानों के बड़े-बड़े टुकडे़ 150 मीटर दूर मानो बम की तरह गिर रहे हैं। धमाके की गूंज आधा किमी तक गूंज रही है। हालात यह है, 250 मीटर दूर विश्वविद्यालय के अकेडमिक भवन की दीवारें हिल गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/uncontrolled-blasting-behind-kota-university/article-12696"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/kota-1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आबादी क्षेत्र के नजदीक कोटा यूनिवर्सिटी के पीछे मनमर्जी से अनकंट्रोल ब्लास्टिंग की जा रही है। बारूद लगाकर चटटानों का सीना छलनी किया जा रहा है। धमाके के साथ हवा में उछलते चटटानों के बड़े-बड़े टुकडे़ 150 मीटर दूर मानो बम की तरह गिर रहे हैं। धमाके की गूंज आधा किमी तक गूंज रही है। हालात यह है, 250 मीटर दूर विश्वविद्यालय के अकेडमिक भवन की दीवारें हिल गई। जबकि, बलास्टिंग स्थल से मात्र 50 मीटर दूर बॉयज हॉस्टल हैं, जिसकी दीवारों में दरारों के साथ खिड़कियों के कांच टूटकर बिखर गए।  प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुक्रवार शाम हुई बलास्टिंग का धमाका दो माह में अब तक का सबसे तेज धमाका था। करीब 700 मीटर तक गूंज सुनाई दी। वहीं, 500 मीटर तक भूकंप की तरह धमक महसूस हुई। दरअसल, विश्वविद्यालय की चारदीवारी के ठीक पीछे भारत विकास परिषद की ओर से कैंसर हॉस्टिल बनाया जा रहा है। भले ही परिषद द्वारा ब्लास्टिंग  की परमिशन ली गई हो, लेकिन तय मापदंड के अनुरूप नहीं हो रही। ब्लास्टिंग  का कोई समय निर्धारित नहीं है,। कोटा विश्वविद्यालय परिसर में गर्ल्स हॉस्टल फॉर्मेसी कॉलेज बन रहा है। जहां कार्य कर रहे मजदूर अनियमित ब्लास्टिंग  के दौरान उछले पत्थरों से चोटिल हो चुके हैं। विश्वविद्यालय की निर्माण एजेंसी आरएसआरडीसी व हॉस्टल के छात्रों ने  इमारतों व पढ़ाई में हो रहे नुकसान को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन को लिखित में शिकायत दी है। <br /><br /><strong>50 मीटर दूर ब्वायज हॉस्टल के छात्रों की पीड़ा</strong><br /><strong> कान के पर्दे भी हिले</strong><br />बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र चेतन सोनी, आर्यन शर्मा का कहना है, विश्वविद्यालय का ब्वायज हॉस्टल में 120 छात्रों का एडमिशन है, फिलहाल 100 बच्चे रह रहे हैं। ब्लास्टिंग स्थल से हॉस्टल की दूरी करीब 50 मीटर है। यहां दिन हो या रात अनकंटोल बलास्टिंग कर चटटानें तोड़ी जा रही है।  कमरों की दीवारों पर दरारों के साथ कांच टूट कर बिखर गए। न तो परीक्षा की तैयारी हो पा रही और न ही धमाकों से मुक्ति मिल पा रही है।  <br /><br /><strong>तनाव झेलने को मजबूर</strong><br />एमएससी फिजिक्स तृतीय वर्ष के छात्र मधुर तोमर, मंजीत मीणा ने कहा, एक तरफ परीक्षा तो दूसरी तरफ धमाकों की गूंज से अनावश्यक मानसिक तनाव बढ़ रहा है।  दिन में धमाकों के कारण पढ़ाई नहीं होती और रात को सुकून से सो भी नहीं पाते। कई बार रात को तेज धमाके से नींद उछट जाती है। नींद पूरी नहीं होने से चिड़चिड़ापन रहता है। दिन में नींद निकाले की पढ़ाई करें। परीक्षा चल रही है, इसलिए यहां रूके हैं। ऐसे हालातों में यहां कोई भी रूकना नहीं चाहता। विश्वविद्यालय प्रशासन को दो माह पूर्व लिखित में शिकायत दी थी, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। <br /><br /><strong>बाहर निकलने में लगता है डर</strong><br />बी फार्मा प्रथम वर्ष के छात्र अजय पारेता, आशिष मेहरा के चेहरों पर दहशत साफ झलक रही थी। उनका कहना था, हॉस्टल से बाहर निकलने में भी डर लगने लगा है। पता नहीं, ठेकेदार कब ब्लास्टिंग शुरू कर दें। धमाकों के साथ पत्थर के टुकड़े हवा में उछल दूर-दूर तक गिरते हैं। जिससे कभी भी हादसा घटित हो सकता है। दो महीने से यहां बलास्टिंग चल रही है। पूर्व में कुछ मजदूर घायल हो चुके हैं। पढ़ाई के साथ जान का नुकसान भी बना हुआ है। बाथरूम की खिड़की के सारे कांच टूट चुके हैं। <br /><br /><strong>लगता है जैसे भूकम्प आया हो</strong><br />छात्र गिर्राज सुथार, जसवंत ने बताया कि दिनभर में कभी भी बलास्टिंग शुरू हो जाती है। धमाके से दीवारें इस कदर हिलती है मानो भूकम्प आया हो। कई बार तो झटके से कमरे में रखी लोहे की आलमारी तक गिर गई। करीब एक माह पहले गांव गए थे तब निमार्णाधीन जगह समतल थी लेकिन लौटकर देखा तो यहां पत्थरों का पहाड़ नजर आया। जिम्मेदार अधिकारी परमिशन देने के बाद एक बार भी मौके पर आकर बलास्टिंग तय मापदंड के अनुरूप हो रही या नहीं, यह भी नहीं देखते।<br /><br /><strong>शिकायत के 2 माह बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई</strong> <br />एमएससी जुलॉजी तृतीय वर्ष के छात्र दिनेश चौधरी, राजेश सैनी, अमन का कहना है, हॉस्टल के पास अनकंटेल हो रही ब्लास्टिंग की शिकायत दो माह पूर्व विश्वविद्यालय प्रशासन से की थी। वहीं, निर्माण एजेंसी आरएसआरडीसी ने भी यूनिवर्सिटी की निर्माणाधीन इमारतों को हो रहे नुकसान की लिखित में शिकायत की थी। इसके बावजूद विवि प्रशासन ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। <br /><br /><strong>हर पल रहता है हादसे का डर</strong><br />बॉयज हॉस्टल के चौकीदार सुरेंद्र ने बताया कि शुक्रवार शाम 5.30 बजे  ब्लास्टिंग हुई थी। धमाका इतना तेज था कि करीब 500 मीटर दूर तक धमक महसूस हो रही थी। उस वक्त मैं यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट की तरफ था। धमाके की आवाज सुन तुरंत परिवार के पास पहुंचा, क्योंकि बच्चे बाहर खेलते हैं, ऐसे में उनकी चिंता होना लाजिमी था। पत्नी रेखा ने बताया कि बलास्टिंग का कोई समय निश्चित नहीं है। यहां कभी भी धमाका कर दिया जाता है। पत्थर उछलकर कमरे के बाहर लगे टीनशेड पर गिरते हैं। दिनभर बच्चों के पीछे साए की तरह रहती हूं। हर पल हादसे का डर लगा रहता है। <br /><br />यूनिवर्सिटी के पीछे ब्लास्टिंग हो रही है, जिससे पत्थर उछलकर विवि परिसर में आ रहे हैं, इमारतों को नुकसान पहुंचने के साथ श्रमिक घायल हो सकते हैं। यहां किसी तरह का कोई हादसा न हो इसलिए हमने विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित में शिकायत देकर कार्रवाई किए जाने की मांग की है। <br /><strong>-आशु गर्ग, प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरएसआरडीसी निर्माण एजेंसी</strong> <br /><br />यहां डायनामाइट बलास्टिंग हो रही है। पत्थरों के उछलकर कैम्पस में आने से हमारे कुछ श्रमिक चोटिल हो चुके हैं। वहीं, जेसीबी के कांच भी टूट गए। निमार्णाधीन फॉमेर्सी कॉलेज के सामने श्रमिकों की अस्थाई टापरियां बनी हुई है। बच्चे यहां खेलते हैं। ऐसे में ्ब्लास्टिंग के दौरान आने वाले पत्थर के टुकड़ों से श्रमिक परिवारों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। <br /><strong>-बीएल महावर, एईएन आरएसआरडीसी निर्माण एजेंसी</strong><br /><br />कोटा विश्वविद्यालय परिसर में इन दिनों गर्ल्स हॉस्टल, संविधान पार्क, फार्मेसी कॉलेज सहित अन्य निर्माण कार्य चल रहे हैं। निर्माण एजेंसी आरएसआरडीसी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने हमें लिखित शिकायत दी थी कि, यूनिवर्सिटी के पीछे हो रही बलास्टिंग से पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े उछलकर कैम्पस में आ रहे हैं जिससे निर्माणार्धीन इमारतों, वाहनों को नुकसान पहुंच रहा है। मैंने जिला प्रशासन के माध्यम से अनकंट्रोल ब्लास्टिंग के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शिकायती पत्र विवि के रजिस्टार को भेजा है। <br /><strong>- सुनील अग्रवाल, सम्पदा अधिकारी कोटा विश्वविद्यालय</strong><br /><br />यह बात सही है कि विश्वविद्यालय के पीछे कंट्रोल व अनकंट्रोल दोनों तरह की ब्लास्टिंग की जा रही है। इमारतों को नुकसान पहुंच रहा है। निर्माण एजेंसी आरएसआरडीसी व बॉयज हॉस्टल के छात्रों की लिखित मिली है। कुछ मजदूरों के चोटिल होने की जानकारी सामने आई है। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेज रहे हैं, ताकि यहां किसी तरह की कोई घटना न हो। <br /><strong>- राजकुमार उपाध्याय, रजिस्ट्रार कोटा विश्वविद्यालय</strong><br /><br />हमारी तरफ से कंट्रोल ब्लास्टिंग की जा रही है, अनकंट्रोल ब्लास्टिंग बिलकुल भी नहीं की जा रही। यदि, विश्वविद्यालय प्रशासन को किसी तरह की कोई शिकायत है तो हमसे बात करें, हम तुरंत समस्या का निराकरण करेंगे। वैसे, मैं कुछ दिनों से बाहर था, आज ही कोटा आया हूं। मैं खुद मौके पर जाकर देखता हूं क्या मामला है। <br /><strong>- श्याम शर्मा, चैयरमेन भारत विकास परिषद हॉस्पिटल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jun 2022 14:47:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे एक विराट स्याह अंधेरा, ख्वाबों के टूटने के सदमें में खुदकुशी कर लेती हैं अभिनेत्रियां</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता। टॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे एक विराट स्याह अंधेरा है। जिसका पता तब मालूम होता है, जब कोई सितारा असमय टूटता और बुझ जाता है। वहां लाइम लाइट के बाद गुमनामी के अंधेरे में खो जाने का डर सताता है। गर इंसान जहां तन्हा होता है। मोहब्बत में भावनाओं की सच्चाई नहीं होती। गरजपरस्ती होती है। और जब चारों ओर घना अंधेरा पसरता नजर आता है, तो पलायनवादी लड़कियां कई बार खुदकुशी का रास्ता अपना लेती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/kolkata-news-behind-the-gleam-of-tollywood-a-vast-dark-darkness/article-11991"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tollywood.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। टॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे एक विराट स्याह अंधेरा है। जिसका पता तब मालूम होता है, जब कोई सितारा असमय टूटता और बुझ जाता है। वहां लाइम लाइट के बाद गुमनामी के अंधेरे में खो जाने का डर सताता है। गर इंसान जहां तन्हा होता है। मोहब्बत में भावनाओं की सच्चाई नहीं होती। गरजपरस्ती होती है। और जब चारों ओर घना अंधेरा पसरता नजर आता है, तो पलायनवादी लड़कियां कई बार खुदकुशी का रास्ता अपना लेती हैं।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>खुद को मजबूत बताने के दस दिन बाद ही टूट गई विदिशा</strong></span> <br />कोलकाता की उभरती मॉडल विदिशा डे मजूमदार के पिता विश्वजीत डे मजूमदार बताते हैं कि अभिनेत्री पल्लवी डे की मौत के बाद अपनी बेटी को लेकर आशंकित हो गया था। वह भी पल्लवी की तरह अकेली रहती थी। ऐसे में वह कहीं कोई गलत फैसला न ले ले। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी भी संघर्ष से घबरा कर पलायन का रास्ता चुन लेगी। वह बताते हैं कि पल्लवी की मौत की खबर सुनने के बाद विदिशा की मां बहुत परेशान हो गई थीं और उन्होंने विदिशा से अपने मन का डर भी जताया था।</p>
<p>लेकिन तब विदिशा ने कहा था, अरे! पल्लवी ने बेवकूफी की है, मैं बहुत मजबूत लड़की हूं। आप एकदम बेफिक्र रहें। मैं ऐसा नहीं करूंगी।लेकिन ऐसा कहने वाली उस लड़की ने महज दस दिनों बाद ही अपनी इहलीला खत्म कर ली। उसके ठीक दो दिन बाद विदिशा की सहेली और एक अन्य मॉडल मंजूषा नियोगी ने भी इसी तरीके से अपनी जान दे दी। मंजूषा की मां बताती हैं, विदिशा की मौत के बाद से ही मेरी बेटी गहरे अवसाद में थी और बार बार उसी का जिक्र कर रही थी।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong> बांग्ला फिल्मोद्योग में चिंता का माहौल</strong></span><br />पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मई के आखिरी दो सप्ताह के दौरान छोटे परदे की तीन उभरती अभिनेत्रियों और एक मॉडल की मौत से टॉलीवुड के नाम से मशहूर बांग्ला फिल्मोद्योग में चिंता का माहौल है। इनमें से ज्यादातर मामलों को फिल्मी दुनिया की चमक दमक के नीचे पसरे अंधेरे और संघर्ष में नाकामी से जोड़ कर देखा जा रहा है। हालांकि एकाध मामलों में असफल प्रेम प्रसंग को कारण बताया जा रहा है। लेकिन इन चारों की मौत की मूल वजह मानसिक अवसाद ही है। इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है, लेकिन अब ज्यादातर लोग इन घटनाओं के बारे में खुल कर बात नहीं करना चाहते।</p>
<p>आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है। इन घटनाओं ने फिल्मों में रातोंरात कामयाब होने की जद्दोजहद, संघर्ष और पलायन को सतह पर ला दिया है। एक पखवाड़े के भीतर हुई इन चार मौतों ने बांग्ला फिल्म और धारावाहिकों की दुनिया को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आम धारणा  है कि बाहरी चमक से प्रभावित होकर तमाम लड़कियां इसकी ओर आकर्षित होती हैं, लेकिन भीतर की कालिख और कीचड़ देख कर उनके सपने जल्दी ही टूट जाते हैं। फिल्मोद्योग से जुड़े लोगों के अलावा मनोवैज्ञानिको ने भी इन पर गहरी चिंता जताई है और इससे सबक लेकर एहतियाती उपाय करने का अनुरोध किया है ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकी जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 12:02:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>पर्दे के पीछे भारत-पाकिस्तान बातचीत शुरू कश्मीर पर शहबाज</title>
                                    <description><![CDATA[ भारत और पाकिस्तान संबंधों में गतिरोध को दूर करने के लिए पर्दे के पीछे से बातचीत कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/-behind--scenes--india-pakistan--talks-started--shahbaz---kashmir/article-10883"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/pm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इस्लामाबाद।</strong> भारत और पाकिस्तान संबंधों में गतिरोध को दूर करने के लिए पर्दे के पीछे से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि पीएम मोदी शहबाज सरकार को कश्मीर पर कोई रियायत देने के मूड में नहीं हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच संबंध वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं और अगस्त 2019 में भारत ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द कर दिया था। इसके बाद परमाणु हथियारों से संपन्न दोनों देश के संबंध और खराब हो गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, तब से, राजनयिक संबंध खराब हो गए हैं, द्विपक्षीय व्यापार निलंबित कर दिया गया है और कोई सीधी वार्ता नहीं हुई है। वैसे, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के कार्यभार संभालने से पहले ही, दोनों देश एक-दूसरे से बिना किसी शोरगुल के बात कर रहे हैं। इन्हीं संपर्कों के कारण फरवरी 2021 में युद्धविराम समझौते का नवीनीकरण हुआ और तब से संघर्ष विराम जारी है और इसके उल्लंघन की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। लेकिन इस प्रक्रिया से दोनों देशों के बीच वार्ता की बहाली के मामले में कोई सफलता नहीं मिल सकी।</p>
<p><strong>दोनों देशों के समकक्ष लोग एक-दूसरे के संपर्क में</strong><br />द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्र के हवाले से कहा गया है, इसे बैक चैनल कहें, ट्रैक-2 या पर्दे के पीछे की बातचीत, मैं केवल इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि दोनों देशों के समकक्ष लोग एक-दूसरे के संपर्क में हैं। हालांकि, सूत्र ने कहा कि उनके पास उन संपर्कों का सटीक विवरण नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक कुछ ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक चचार्ओं को बनाए रखना ह्यबैक चैनलों का उद्देश्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में राजनीतिक अनिश्चितता और दोनों पक्षों की ओर से बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए कड़ी शर्तों को देखते हुए तत्काल सफलता की संभावना कम है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू हो सकता है। इससे पहले पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि वह भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं लेकिन कश्मीर पर पहले बात करनी होगी।</p>
<p><strong>कश्मीर के मुद्दे पर कोई रियायत देने के मूड में नहीं पीएम मोदी</strong><br />शहबाज शरीफ ने कहा था कि भारत को कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने के अपने फैसले को पलटना होगा ताकि दोनों ही देश बातचीत को फिर से शुरू कर सकें। पाकिस्तानी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बातचीत को फिर से शुरू करने का इच्छुक तो है लेकिन शहबाज शरीफ को कश्मीर के मुद्दे पर कोई रियायत देने के मूड में नहीं है। खबर में दावा किया गया है कि पश्चिमी देश जैसे अमेरिका और ब्रिटेन तनाव को कम करने और दोनों पड़ोसी देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 15:00:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा अनुमति की याचिका जिला जज को स्थानांतरित करने के पीछे की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने विवादित ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर 'श्रृंगार गौरी' की पूजा की अनुमति संबंधी याचिकाओं को वाराणसी के सिविल न्यायालय (सीनियर डिवीजन) से जिला न्यायाधीश के पास शुक्रवार को स्थानांतरित करने का आदेश दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/-story-behind-transferring-the-petition-for-permission-to-worship-at-gyanvapi-masjid-to-the-district-judge/article-10130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/sc1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने विवादित ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर 'श्रृंगार गौरी' की पूजा की अनुमति संबंधी याचिकाओं को वाराणसी के सिविल न्यायालय (सीनियर डिवीजन) से जिला न्यायाधीश के पास शुक्रवार को स्थानांतरित करने का आदेश दिया। न्यायालय ने स्थानांतरण आदेश के साथ-साथ इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर फैसला लेने को कहा है।न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाओं को स्थानांतरित करने के साथ-साथ विवादित स्थल की सुरक्षा संबंधी अपने पूर्व के अंतरिम आदेश को बरकरार रखने का  आदेश दिया।<br /><br />शीर्ष अदालत ने विवादित स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के साथ-साथ नमाज पढऩे वालों के लिए समुचित इंतजाम करने का जिला अधिकारी को निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित पक्षों से विचार विमर्श कर नमाजियों के लिए व्यवस्था करने का निर्देश दिया। पीठ ने गत मंगलवार को जारी अपने अंतरिम आदेश में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में उस क्षेत्र की रक्षा करने का राज्य सरकार को निर्देश दिया था, जहां हिंदू पक्ष के अनुसार एक 'शिवलिंग' पाया गया था।शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि किसी भी मुसलमान को ज्ञानवापी मस्जिद में 'नमाज' अता करने से न तो रोका जाएगा और न ही कोई बाधा उत्पन्न की जाएगी।<br /><br />मस्जिद पक्ष के वकील एच. अहमदी ने निचली अदालत में पेश की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर आपत्ति जताई। उन्होंने सर्वे के बाद इलाके को सील करने के कारण नमाज पढऩे में आ रही मुश्किलों का जिक्र करते हुए मस्जिद में 500 वर्षों से चली आ रही स्थिति बरकरार रखने का अनुरोध सर्वोच्च अदालत से किया। अदालत ने उनकी दलीलें सुनने के बाद जिला अधिकारी को  आदेश दिया संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद नमाज करने वालों के लिए समुचित व्यवस्था करें।याचिकाकर्ता राखी सिंह के नेतृत्व में पांच महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर पूजा करने की अनुमति के लिए निचली अदालत में याचिका दायर की थी। इन महिलाओं ने वाराणसी में  ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी मंदिर होने की मान्यता का हवाला देते हुए वहां  पूजा की अनुमति के लिए अदालत से गुहार लगाई थी।शीर्ष अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 19:02:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इटली में वर्ल्ड ब्रिज चैंपियनशिप पर कोरोना का साया, स्थगित करने पड़े सभी मुकाबले</title>
                                    <description><![CDATA[ क्वार्टर फाइनल के पहले दिन यूएसए से पिछड़ी भारतीय टीम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/---sports--news--corona-s-shadow-over-the-world-bridge-championship-in-italy--all-matches-had-to-be-postponed--indian-team-lags-behind-usa-on-first-day-of-quarter-final/article-7468"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/usa3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इटली के साल्सोमाजियोरे शहर में खेली जा रही 45वीं विश्व ब्रिज चैंपियनशिप में सोमवार को भारत की सीनियर टीम डी ओरसी ट्रॉफी सीनियर टीम चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल के पहले दिन यूएसए-1 टीम के खिलाफ पहले दिन के तीन सत्र के बाद सात अंकों से पिछड़ गई। शुरुआती दिन का स्कोर 80-73 से यूएसए टीम के पक्ष में रहा। क्वार्टर फाइनल के शेष तीन सत्र आज बुधवार को खेले जाएंगे।</p>
<p> </p>
<p>ब्रिज फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और राजस्थान ब्रिज एसोसिएशन के अध्यक्ष दीनबंधु चौधरी ने आज यहां बताया कि भारतीय सीनियर टीम ने यूएसए के खिलाफ अच्छी शुरुआत की। गैर खिलाड़ी कप्तान रामरत्नम कृष्णन की अगुवाई में राजेश दलाल, सुकामल दास, अशोक कुमार, अनिल पांडे और सुब्रत साहा की भारतीय टीम ने पहला सत्र 9-9 अंकों से बराबरी पर खेला और दूसरे सत्र में 34-27 के स्कोर के साथ कुल 43-36 से बढ़त हासिल कर ली। दिन के तीसरे सत्र में यूएसए टीम 44-30 से विजयी रही और दिन का समापन उसने 80-73 के स्कोर से 7 अंकों की बढ़त के साथ किया। अन्य क्वार्टर फाइनल मैचों में फ्रांस ने स्वीडन के खिलाफ 151-67 से, पोलैंड ने बल्गारिया पर 85-62 से और डेनमार्क ने यूएसए-2 पर 101-62 अंकों से बढ़त हासिल कर ली है।<br /><br /><strong>मंगलवार को नहीं हुए मैच</strong><br />इस बीच वर्ल्ड चैंपियनशिप पर मंगलवार को कोरोना का साया दिखा और सभी मुकाबले स्थगित कर दिए गए। इटली से भारतीय टीम के सदस्य सुब्रत साहा ने नवज्योति से बातचीत में कहा कि मंगलवार को टूर्नामेंट में कोई भी मैच नहीं खेला गया। कोविड-19 की स्थिति के मद्देनजर मैचों को स्थगित किया गया। उन्होंने कहा कि अब सभी खिलाड़ियों का कोविड टेस्ट कराया जाएगा और निगेटिव रिपोर्ट आने पर ही बुधवार को वे अपने मुकाबलों में हिस्सा ले सकेंगे। साहा ने कहा कि भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों का कोविड टेस्ट किया गया है, जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 12:39:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से भारत ने दूरी बनाने के पीछे क्या है कारण</title>
                                    <description><![CDATA[ तीन सदस्यों - भारत, चीन एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/what-is-the-reason-behind-india-withdrawing-from-security-council-resolution-condemning-russian-attack-on-ukraine/article-5080"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/news.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस एवं यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के लिए रूस की निंदा करने के लिए  देर रात एक प्रस्ताव पर मतदान से भारत ने खुद को दूर रखा और संबद्ध पक्षों का हिंसा को तुरंत रोक कर कूटनीतिक उपायों पर लौटने और देशों की संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करने का आह्वान किया।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन को लेकर शुक्रवार देर रात अमेरिका एवं अल्बानिया द्वारा पेश प्रस्ताव पर मतदान 11 सदस्यों ने पक्ष में मत दिया और तीन सदस्यों - भारत, चीन एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इस प्रस्ताव पर रूस ने वीटो के अधिकार का प्रयोग किया और इस प्रकार से प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। पक्ष में मतदान करने वालों में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, अल्बानिया, ब्राजील, गैबोन, घाना, आयरलैंड, केन्या, मैक्सिको एवं नॉर्वे हैं।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने मतदान के बाद भारत के निर्णय को लेकर एक स्पष्टीकरण जारी किया जिसमें संबद्ध पक्षों का हिंसा तुरंत रोकने, विवाद के समाधान के लिए कूटनीतिक उपायों पर लौटने तथा देशों की संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ टेलीफोन पर बातचीत में भी इन्हीं बिन्दुओं पर जोर दिया था।<br /><br />भारत ने कहा कि सभी सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र का सम्मान करना चाहिए क्योंकि इसी से आगे का रचनात्मक मार्ग खुलता है। भारत ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि कूटनीति का मार्ग त्याग दिया गया और ङ्क्षहसा का रास्ता अपनाया गया। भारत ने कहा कि वह यूक्रेन के हाल के घटनाक्रम से बहुत व्यथित है। उसका मानना है कि इंसानों की जान की कीमत पर कोई समाधान पर नहीं पहुंचा जा सकता है। मतभेदों एवं विवादों को सुलझाने का एकमात्र रास्ता संवाद ही है।<br /><br />भारत ने इस मसले पर एक सुसंगत, दृढ़ एवं संतुलित रुख अख्तियार किया है। भारत इससे जुड़े सभी पक्षों के संपर्क में है और सभी से लगातार अनुरोध कर रहा है कि वे बातचीत की मेज पर आएं। सूत्रों ने बताया कि भारत ने मतदान में भाग नहीं लेकर संबद्ध पक्षों से संपर्क करने और संवाद एवं कूटनीति के लिए बीच का रास्ता निकालने का विकल्प बरकरार रखा है।<br /><br />इससे पहले प्रस्ताव के एक मसौदे में संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के अध्याय 7 के अंतर्गत समाधान की बात कही गयी थी जिसमें सुरक्षा परिषद को बलप्रयोग का अधिकार मिलता लेकिन अंतिम मसौदे में इस बात का हटा दिया गया।    इस बीच एयर इंडिया भारतीयों को निकालने के लिए शनिवार सुबह तीन उड़ानें भरी गयीं हैं। आज तड़के मुंबई से एक और सुबह दिल्ली से दो बोइंग 787 विमान रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट और हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के लिए रवाना हो चुके हैं जो आज शाम से देर रात तक लौटेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Feb 2022 17:47:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूस और यूके्रन के विवाद की क्या है असली वजह</title>
                                    <description><![CDATA[रूस और यूक्रेन के विवाद में अमेरिका की अहम भूमिका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नई दिल्ली। पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर रूस और यूक्रेन में युद्ध क्यों हो रहा है? यह विवाद शुरू कहां से हुआ और क्यों अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध भी नाकाम रहे।  विवाद यह है कि यूक्रेन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो का सदस्य देश बनना चाहता है और रूस इसका विरोध कर रहा है। नाटो अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच एक सैन्य गठबंधन है, इसलिए रूस नहीं चाहता कि उसका पड़ोसी देश नाटो का मित्र बने। <br /> <br /> <strong>यूक्रेन का इतिहास </strong><br /> यूक्रेन के नाटो देश में शामिल होने की वजह 100 साल पुरानी है, जब अलग देश का अस्तित्व भी नहीं था। 1917 से पहले रूस और यूक्रेन रूसी साम्राज्य का हिस्सा थे। 1917 में रूसी क्रांति के बाद, यह साम्राज्य बिखर गया और यूक्रेन ने खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया. हालांकि यूक्रेन मुश्किल से तीन साल तक स्वतंत्र रहा और 1920 में यह सोवियत संघ में शामिल हो गया। यूक्रेन के लोग हमेशा से खुद को स्वतंत्र देश मानते रहे। 1991 में जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तो यूक्रेन सहित 15 नए देशों का गठन हुआ। सही मायनों में यूक्रेन को साल 1991 में आजादी मिली। हालांकि, यूक्रेन शुरू से ही समझता है कि वह रूस से कभी भी अपने दम पर मुकाबला नहीं कर सकता और इसलिए वह एक ऐसे सैन्य संगठन में शामिल होना चाहता है जो उसकी आजादी को महफूज रख सके। नाटो से बेहतर संगठन कोई और नहीं है जो यूक्रेन की रक्षा कर सके।<br /> <br /> रूस के सामने चुनौती यह है कि उसके कुछ पड़ोसी देश पहले ही नाटो में शामिल हो चुके हैं। इनमें एस्टोनिया और लातविया जैसे देश हैं, जो पहले सोवियत संघ का हिस्सा थे। अब अगर यूक्रेन भी नाटो का हिस्सा बन गया तो रूस हर तरफ से अपने दुश्मन देशों से घिर जाएगा और अमेरिका जैसे देश उस पर हावी हो जाएंगे। अगर यूक्रेन नाटो का सदस्य बन जाता है और रूस भविष्य में उस पर हमला करता है तो समझौते के तहत इस समूह के सभी 30 देश इसे अपने खिलाफ हमला मानेंगे और यूक्रेन की सैन्य सहायता भी करेंगे।</p>
<p><br /> रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन ने एक बार कहा था कि यूक्रेन को खोना रूस के लिए एक शरीर से अपना सिर काट देने जैसा होगा।  यही वजह है कि रूस नाटो में यूक्रेन के प्रवेश का विरोध कर रहा है। यूक्रेन रूस की पश्चिमी सीमा पर स्थित है। जब 1939 से 1945 तक चले द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रूस पर हमला किया गया तो यूक्रेन एकमात्र ऐसा क्षेत्र था जहां से रूस ने अपनी सीमा की रक्षा की थी। अब अगर यूक्रेन नाटो देशों के साथ चला गया तो रूस की राजधानी मास्को, पश्चिम से सिर्फ 640 किलोमीटर दूर होगी। <br /> <br /> <strong>विवाद का असली विलेन कौन?</strong><br /> रूस और यूक्रेन के विवाद में अमेरिका की अहम भूमिका है। अमेरिका ने अपने 3000 सैनिकों को यूक्रेन की मदद के लिए भेजा है और उनकी तरफ से यह आश्वासन दिया गया है कि वे यूक्रेन की मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। सच्चाई यह है कि मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, यूक्रेन का इस्तेमाल सिर्फ अपनी छवि मजबूत करने के लिए कर रहे हैं। पिछले साल अमेरिका को अफगानिस्तान से अपनी सेना बुलानी पड़ी थी। ईरान में अमेरिका कुछ हासिल नहीं कर पाया और प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया  मिसाइल परीक्षण भी कर रहा है। इन घटनाओं से अमेरिका की सुपर पॉवर इमेज को नुकसान पहुंचा है। यही वजह है कि बाइडेन यूक्रेन-रूस विवाद के साथ इसकी भरपाई करना चाहते हैं।<br /> <br /> अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने भी यूक्रेन का समर्थन किया है। इन देशों का समर्थन कब तक चलेगा यह एक बड़ा सवाल है क्योंकि यूरोपीय देश अपनी गैस की एक तिहाई जरूरत के लिए रूस पर निर्भर हैं। अब अगर रूस इस गैस की आपूर्ति बंद कर देता है तो इन देशों में भयानक पॉवर क्राइसिस होगा।<br /> <br /> <strong>किसके साथ खड़ा है भारत?</strong><br /> रूस-यूक्रेन के विवाद में भारत की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण है। रूस और अमेरिका दोनों भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत अभी भी अपने 55 फीसदी हथियार रूस से खरीदता है जबकि अमेरिका के साथ भारत के संबंध पिछले 10 वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। जिस देश में यूक्रेन ने सबसे पहले फरवरी 1993 में एशिया में अपना दूतावास खोला वह भारत था। तब से भारत और यूक्रेन के बीच व्यापारिक, रणनीतिक और राजनयिक संबंध मजबूत हुए हैं। यानी भारत इनमें से किसी भी देश को परेशान करने का जोखिम नहीं उठा सकता। रूस ने अब तक भारत-चीन सीमा विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया है।</p>
<p><br />  अगर भारत यूक्रेन का समर्थन करता है तो वह कूटनीतिक रूप से रूस को चीन के पक्ष में ले जाएगा। शायद यही कारण है कि हाल ही में जब अमेरिका सहित 10 देश संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन पर एक प्रस्ताव लेकर आए भारत ने किसी के पक्ष में मतदान नहीं किया। भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि इस समय यूक्रेन में करीब 20,000 भारतीय फंसे हुए हैं जिनमें से 18 हजार मेडिकल के छात्र हैं। यूक्रेन और रूस के रिश्ते को समझना बहुत मुश्किल है। यूक्रेन के लोग स्वतंत्र रहना चाहते हैं, लेकिन पूर्वी यूक्रेन के लोगों की मांग है कि यूक्रेन को रूस के प्रति वफादार रहना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/what-is-the-real-reason-behind-the-dispute-between-russia-and-ukraine--why-does-ukraine-want-to-join-nato/article-4968</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 12:24:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>टीकाकरण को लेकर बयानबाजी तेज : मोदी ने कहा -&quot;टीकाकरण में पिछड़ रहे राज्यों के नेतृत्व को जनता के स्वास्थ्य की परवाह नहीं&quot;: चिदम्बरम का कहना - &quot;बूस्टर डोज का भ्रम दूर होना जरूरी&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[ ''डबल इंजन सरकार हिमाचल प्रदेश में विकास के कामों को तेजी से जनता तक पहुंचा रही है - मोदी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C---%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%22%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%9B%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82%22--%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%A8%E0%A4%BE---%22%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80%22/article-3572"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/modi-chidmbram.jpg" alt=""></a><br /><p>मंडी/ नई दिल्ली। देश में कोरोना के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे है, कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते केस तीसरी लहर की आशंका की ओर इशारा कर रहे है। लेकिन बढ़ते कोरोना केसों के बीच टीकाकरण को लेकर सियासी बयानबाजी भी सर्द माहौल में सियासी गर्मी बढ़ा रही है। दरअसल एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे राज्यों की  सोमवार को तीखी आलोचना की जो कोविड टीकाकरण अभियान में पीछे हैं। उन्होंने ऐसे राज्यों के नेतृत्व को 'स्वार्थ और विलंब' की विचारधारा से प्रेरित करार देते हुए कहा कि उन्हें जनता के स्वास्थ्य की चिंता से ज्यादा अपनी और अपने परिवार की परवाह रहती है। <br /><br />प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के मंडी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए 15 से 18 वर्ष के आयु के बच्चों को तीन जनवरी से कोविड टीका लगाने और 10 जनवरी से स्वास्थकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर को टीके की अतिरिक्त खुराक देने के फैसले का जिक्र करते हुये कहा कि इससे लोगों की स्वास्थ्य की रक्षा के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मोदी ने हिमाचल प्रदेश में 11000 करोड़ रुपये की विभिन्न पनबिजली परियोजनाओं का रिमोट कंट्रोल से उद्घाटन एवंं शिलान्यास करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ''हमारे देश में आज सरकार चलाने के दो अलग मॉडल काम कर रहे हैं। एक मॉडल- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का हमारा मॉडल है। दूसरा मॉडल- खुद का स्वार्थ, परिवार का स्वार्थ और परिवार का विकास वाला मॉडल है।"<br /><br />उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पहले मॉडल पर चल रही सरकार ने अपना पूरा ध्यान लोगों के विकास और एक-एक आदमी को टीका लगाने पर केंद्रित किया है।  उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सभी वयस्क लोगों को कोविड टीके की पहली और दूसरी खुराक लग चुकी है। उन्होंने कहा, ''यह पहले मॉडल पर चलने वाली सरकार का लोगों के प्रति दायित्व का एहसास कराती है जिसमें दूर-दराज के इलाकों में जाकर लोगों को टीके लगवाएं ।"<br /><br /> मोदी ने इसी संदर्भ में टीकाकरण में पीछे चल रहे राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन राज्यों का नेतृत्व काम के दूसरे मॉडल का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा,'' उन राज्यों का वैक्सीन का रिकॉर्ड इस बात का गवाह है कि उन्हें अपने राज्य के लोगों के स्वास्थ्य की ङ्क्षचता नहीं है।"  <br /><br />सभा में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और हिमाचल  प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस बात का विशेष रूप का जिक्र किया कि हिमाचल प्रदेश पहला राज्य है, जिसने अपने सभी वयस्क प्रदेशवासियों को कोविड टीके की पहली और दूसरी खुराक लगाने का लक्ष्य हासिल किया है।<br /><br />प्रधानमंत्री ने कहा कि हर देश में अलग-अलग विचारधाराएं होती हैं लेकिन हमारे देश के लोग स्पष्ट रूप से दो विचारधाराओं को पहचानने लगे हैं, जिनमें एक 'विलंब की और दूसरी विकास की' है। मोदी ने कहा कि विलंब की विचारधारा का ही परिणाम है कि रोहतांग के लिए अटल टनल के निर्माण में वर्षों का और रेणुका जी पनबिजली परियोजना में तीन दशक का विलंब हुआ। उन्होंने कहा कि विकास की हमारी विचारधारा ने विकास की लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया है।<br /><br />उन्होंने कहा, ''डबल इंजन सरकार हिमाचल प्रदेश में विकास के कामों को तेजी से जनता तक पहुंचा रही है।" डबल इंजन सरकार में केंद्र का इंजन परियोजनाओं को शुरू करता है और राज्य सरकार का दूसरा इंजन उसको विस्तार देता है। मोदी ने इससे पहले राज्य में एक निवेशक सम्मेलन में भी भाग लिया जिसमें 28000 करोड़ रुपये से अधिक की औद्योगिक परियोजनाओं की औपचारिक रूप से शुरुआत की।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>बूस्टर डोज का भ्रम दूर होना जरूरी : चिदम्बरम</strong></span></span></span><br /><br />वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता था पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदमबरम ने कहा है कि हमारे यहां कोरोना महामारी से निपटने के लिए बूस्टर डोज कौन सा होगा इस संबंध में जारी असमंजस की स्थिति को दूर करना आवश्यक है। चिदम्बरम का यह बयान देश में बढ़ रहे कोरोना के मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन जनवरी से देश के वरिष्ठ नागरिकों को कोरोना से बचाव के लिए बूस्टर डोज लगाने के एलान के बाद आया है। उन्होंने कहा कि यह भ्रम टूटना चाहिए कि कोविशील्ड का यह टीका अगला टीका होगा या बूस्टर डोज होगा।      <br /><br />कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा ''बूस्टर डोज का प्रस्ताव असमंजस में है। कोविशील्ड का कौन सा टीका बूस्टर डोज होगा। उम्मीद है कि यह कोविशील्ड की एक और खुराक नहीं होगी।"<br /><br />उन्होंने कहा कि इस सच से रूबरू होना भी जरूरी है भले ही सरकार इस सच्चाई को सामने लाने को तैयार नहीं हो। तय है कि 31 दिसंबर तक सभी 94 करोड़ वयस्कों को टीकाकरण की पहली खुराक नहीं मिलेगी और इस तरह से देश सौ फीसदी कोविड टीकारण हासिल नहीं कर सकेगा और देश की बहुत बड़ी आबादी को इस साल के आखिर तक टीकाकरण की दूसरी खुराक नहीं मिल सकेगी।<br /><br /> चिदम्बरम ने फाइजर तथा मॉडर्ना की आपूर्ति नहीं किए जाने को लेकर भी सरकार पर हमला किया और कहा देश को आज समय पर टीके का ऑर्डर नहीं देने, भुगतान में देरी, फाइजर एंड मॉडर्ना को लाइसेंस न देने और टीके के पर्याप्त उत्पादन तथा आपूर्ति नहीं होने का खामियाजा भुगत रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Dec 2021 18:04:48 +0530</pubDate>
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                <title>क्लार्क्स आमेर होटल की चोरी का खुलासा, हाईप्रोफाइल चोर सलाखों के पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[आरोपी हर बार वारदात करने के बाद सिम नम्बर बदलने का है आदि।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61a8a1f45aaa7/article-2890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/chor.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर सर्किल थाना इलाके स्थित होटल क्लार्क्स आमेर में 2 करोड रुपए कीमत के ज्वेलरी चोरी करने के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से चोरी किए गए करोड़ों के डायमंड के सेट भी बरामद किए गए है। जवाहर सर्किल थाना पुलिस ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया है। अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अजय पाल लांबा ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि गिरफ्तार आरोपी जयेश रावजी सेजपाल जामनगर गुजरात का रहने वाला है। आरोपी 10वीं तक पढ़ा है। यह अब तक 20 साल में 1 दर्जन से अधिक होटलों में चोरी की वारदात कर चुका है।  आरोपी द्वारा शुरूआत में 20 वर्ष पूर्व शादी समारोह में कैटरिंग का काम करने के दौरान अपने साथी रमेश भानजी निवासी ठाणे मुम्बई के साथ इस तरह की वारदाते करना शुरू किया था। आरोपी शहरों में स्थित गेस्ट हाउस, हॉस्टलों में रुक कर टारगेट सेट करता है और वही से चोरी करने की शुरुआत कर देता है।  वारदात करने से पहले खुद का चालू मोबाइल ठहरने वाली जगह पर छोड़ देता है और हाथ में डमी मोबाइल लेकर होटल में घुस जाता है।  इस दौरान वह शादी में आए लोगों को चिन्हित करता है और उनके साथ मिलकर पूरी जानकारी जुटाकर वारदात करना शुरू कर देता है।  आरोपी ने  अब तक की वारदात के अलावा मुंबई, आगरा, लखनऊ, विशाखापट्टनम, चेन्नई, जोधपुर, उदयपुर, जयपुर, चंडीगढ़, जालंधर, कोलकाता, हैदराबाद, कोयंबटूर और कोच्चि में चोरी कर चुका है। इसमें अब तक होटल ताज, होटल हयात, होटल रमाडा, होटल टाउन प्लाजा, होटल नोवोटल, होटल मर्करी, होटल रेडिसन, ब्लू होटल टाइटन, होटल क्लार्क्स आमेर और होटल चंद्र इन में चोरी की है।  इसने यह चोरियां अपने साथी रमेश भांजी छग निवासी सोपारा पालंगधर ठाणे मुंबई के साथ मिलकर की हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>तरीका वारदात</strong><br /> आरोपी जयेश रावजी सेजपाल देश के विभिन्न शहरों में बस / ट्रेन से जनरल डिब्बों में सफर करके शहर विशेष में पहुंचकर रेल्वे स्टेशन / बस स्टेण्ड के आस-पास हॉटल / गेस्टहाउस में एक-दो दिन रूककर गुगल / जस्टडॉयल / गोईबीबो / मेक माई ट्रिप आदि एप के मार्फत स्टॉर हॉटलस् की तलाश करके ऑटो से संबंधित स्टार हॉटल में प्रवेश करता तथा वहां समय बिताता तथा हॉटल में चैक-इन करने वाले अतिथियों पर नजर रखता है जैसे ही कोई न्यू फैमली हॉटल में चैक-इन करने हेतू रिसेप्शन पर पहुचती तो आरोपी रिसेप्शन पर पहुंचकर पास में खड़ा होकर उनके नाम, रूम नम्बर आदि की जानकारी करता था उसके बाद हॉटल की लॉबी में रूककर गेस्ट के बाहर जाने इंतजार करता एवं गेस्ट के बाहर घुमने / प्रोग्राम के लिये जाते ही रूम के बाहर पहुंचकर इन्टरकॉम से रिसेप्शन से गेस्ट के नाम से फोन करके रूम की चाबी गुम होने अथवा परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा साथ ले जाने का बहाना कर मास्टर की मंगवाता तथा उसके बाद रूम खुलवाकर रूम में प्रवेश कर अतिथियों के सामान की तलाशी लेता और बहुमुल्य आभुषण चोरी करके पैदल-पैदल हॉटल के बाहर निकल लेता है। इसके अतिरिक्त यदि किसी हॉटल के रूम में सैफ (लॉकर) रखा हो तो उसका नम्बरिंग लॉक भुलने के बहाने रिसेप्शन पर कॉल करके टैक्नीकल व्यक्ति को बुलाकर सेफ का नम्बरिंग लॉक खुलवाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Dec 2021 17:31:47 +0530</pubDate>
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                <title>हिंदी को लेकर शाह का बड़ा बयान : कहा, मूल भाषा में शिक्षा दी जाती तो देश पिछड़ता नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[''हमारा देश पिछड़ गया, उसका मूल कारण है कि हमने अपनी पढ़ाई अपनी मूल भाषा नहीं की।''-अमित शाह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8---%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%9B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-2349"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/amit-shah-sambodhan.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आजादी के बाद देश पर पिछड़े होने का धब्बा लगने के पीछे अपनी मूल भाषा में शिक्षा दीक्षा नहीं होने को मुख्य वजह बताते हुये कहा है कि ''हमारा देश पिछड़ गया, उसका मूल कारण है कि हमने अपनी पढ़ाई अपनी मूल भाषा नहीं की।'' शाह ने शनिवार को यहां राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को स्वराज तो मिल गया अब इसे 'सुराज' में बदलना है, मगर, स्वदेशी और स्वभाषा, पीछे छूट गये हैं। उन्होंने आह्वान किया कि आजादी के अमृत महोत्सव में हम पीछे छूटे इन लक्ष्यों को पूरा करें। <br />  </p>
<p> शाह ने देश को आजादी मिलने के बाद भी मातृ भाषा सहित अन्य स्थानीय भाषाओं के साथ सौतेला व्यवहार किये जाने को ऐतिहासिक भूल बताते हुये कहा कि अब वह समय चला गया है जब अपनी मूल भाषा जानने वालों को शर्म का अहसास करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी भाषाओं को भुला देता है वह देश अपना मौलिक ङ्क्षचतन भी खो देता है। इसीलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंचों पर अपनी बात अपनी राजभाषा में ही रखी। <br />  </p>
<p>दो दिन के वाराणसी प्रवास पर आये शाह ने यहां स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुये यह बात कही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार बनने के बाद राजभाषा सम्मेलन को दिल्ली से बाहर ले जाने का जब फैसला किया तो यह सौभाग्य की बात है कि यह सम्मेलन अपने पहले पड़ाव के रूप में भाषाओं के गोमुख कहे जाने वाले शहर वाराणसी में पहुंचा।  <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 16:06:57 +0530</pubDate>
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