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                <title>studies - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>झिकड़िया विद्यालय जर्जर, बच्चों की पढ़ाई बाधित</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चे जर्जर भवन और खतरे के साये में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग की लापरवाही से बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/jhikariya-school-dilapidated--children-s-studies-disrupted/article-124501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer21.png" alt=""></a><br /><p>मिश्रौली। जिलेभर में जर्जर स्कूल भवनों पर कार्रवाई के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। ग्राम पंचायत सिलेहगढ़ के गांव झिकड़िया का प्राथमिक विद्यालय महीनों से जर्जर स्थिति में है। हाल ही में हुई बारिश के कारण भवन टपकने लगा और बच्चों की कक्षाएं बाधित हो गईं। गाँव के लोग बताते हैं कि इस मुद्दे की जानकारी कई बार पंचायत, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुँचाई गई, लेकिन न पंचायत ने ध्यान दिया, न प्रशासन हरकत में आया और न ही कोई ठोस कदम उठाया। आखिरकार, बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप न हो, इसके लिए ग्रामीणों और शिक्षकों ने आपसी सहयोग से टीन शेड बनवाने का निर्णय लिया है। लगभग 60 से 70 हजार की लागत से टीन शेड तैयार होगा। जल्द ही इसी अस्थायी व्यवस्था में कक्षाएं शुरू होंगी। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति बेहद शर्मनाक है कि जब सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा का नारा दिया जाता है, तब जमीनी स्तर पर बच्चे जर्जर भवन और खतरे के साये में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग की लापरवाही से बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है।</p>
<p> हमने कई बार पंचायत और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब हम खुद सहयोग करके बच्चों के लिए टीन शेड बना रहे हैं।<br /><strong>-  मुकनलाल केवट ग्रामीण, झिकड़िया।</strong></p>
<p>हमारे बच्चें रोजाना खतरे में पढ़ाई करने जाते हैं, कई बार पंचायत व अधिकारियों को बताया लेकिन कोई सुनवाई नही हुई, इसलिए अब हमें ही सहयोग से टिनशेड बनाना पड़ रहा है।<br /><strong>-  मेहरबानसिंह ग्रामीण, झिकड़िया।</strong></p>
<p>मेरे द्वारा स्कूल में टीन शेड निर्माण के लिए ग्रामीणों द्वारा सहयोग राशि मैन्ंो मेरे निजी खर्चे के द्वारा प्रदान की गई है और इस स्कूल में बड़ा टीनशेड निर्माण के लिए कलक्टर साहब से बात कर के इसकी मांग करेंगे।<br /><strong>- रविन्द्र सिंह राठौड़, सरपंच, ग्राम पंचायत सिलेहगढ़।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 15:46:05 +0530</pubDate>
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                <title>विद्यालय में कमरों का टोटा, एक कमरे में दो-दो कक्षाओं का संचालन</title>
                                    <description><![CDATA[चीता की झोपड़िया गांव में सरकारी स्कूल का मामला, पढाने के लिए ब्लैक बोर्ड व शिक्षक है पर कमरें नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/shortage-of-rooms-in-school--two-classes-run-in-one-room/article-120041"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer12.png" alt=""></a><br /><p>देई। क्षेत्र के चीता की झोपड़ियां में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कमरों के अभाव में 1 ही कमरे में एक साथ 2 - 2 कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है, जिससे नौनिहाल बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। जबकि विद्यालय में 1 कमरे में प्रधानाध्यापक कक्ष व रसोई घर का संचालन किया जा रहा है। 2 कमरों में कक्षा 5-6 व 7-8 का एक साथ बैठाकर अध्ययन करवाया जा रहा है।</p>
<p><strong>बच्चे कटवा रहे टीसी</strong><br />विद्यालय में कलाश रूम की कमीं से बच्चों की पढ़ाई बाधित होने से कुछ बच्चें टीसी कटवाकर अन्यत्र जगह गए। इस स्कूल से पढ़कर कई विभागों में 45 सरकारी कर्मचारी हैं। प्रशासन द्वारा बच्चों के भविष्य को देखते हुए 5 नवीन कमरों की स्वीकृति जारी करने की मांग की है। स्कूल भवन निर्माण से पहले 8 कमरे थे। अब 3 कमरे है, जिसमें प्रधानाध्यापक कक्ष व रसोई घर संचालित है। ऐसे में बच्चों को पढने के लिए पर्याप्त कमरें नहीं है। ग्रामीणों ने जिला कलक्टर से नवीन कमरें का निर्माण करवाने की मांग की है। </p>
<p>बारिश के समय सभी कक्षाओं का संचालन कमरे में होता है। कक्षा 1से 5 तक एक कमरे शामिल व कक्षा 6,7,8 दूसरे कमरों में विद्यार्थियों को एक साथ बैठाया जाता है, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित होने से अभिभावक टीसी कटवाकर अन्यत्र जगह अपने बच्चों को भेज रहे है। राज्य सरकार जहां प्रवेशोत्सव अभियान चलाकर सरकारी विद्यालय में नामांकन बढ़ाने की बात करती हैं। शिक्षा के नाम करोड़ों रुपये का बजट पेश करती है। विद्यालय के पास भवन तक नहीं है।<br /><strong>- घनश्याम मीणा, निवासी चीता की झोपड़िया। </strong></p>
<p>विद्यालय में तीन कमरे उपलब्ध है, जिसमे दो कमरों में कक्षा संचालन व एक कमरे में प्रधानाध्यापक कक्ष व रसोईघर का संचालन किया जा रहा है। इसलिए एक कमरे में दो-दो कक्षाओं का संचालन करना पड़ रहा है। अन्य चार कक्षाओं का संचालन टिनशेड के नीचे किया जाता है। बारिश के दिनों में बहुत समस्या आती है, जिससे बच्चों की पढाई बाधित होने के कारण पूर्व की अपेक्षा नामांकन घट रहा है। पांच नवीन कमरों की आवश्यकता है।घनश्याम मीणा ने बताया कि विधालय में कक्ष नहीं होने से लगातार नामांकन घट रहा है। पढ़ाई भी बाधित होती है। जबकि पढाने के लिए अध्यापक 8 है। अब विधालय में कम से कम 5 कमरों अति आवश्यकता है।<br /><strong>- रास्वरूप मीणा, प्रधानाध्यापक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 15:33:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>समय से विद्यालय नहीं पहुंच रहे शिक्षक</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल में पंजीकृत कुल 1000 बच्चे हैं। समय पर शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की वजह से बच्चे इधर-उधर खेलते-घूमते रहते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/teachers-not-reaching-school-on-time/article-88092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/6633-copy11.jpg" alt=""></a><br /><p>कस्बाथाना। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। कई विद्यालयों में शिक्षकों का समय से नहीं पहुंचने का सिलसिला जारी है। जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके बाद भी लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई महज खानापूर्ति के लिए की जाती है। सरकार शिक्षा के प्रति सजग है और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित ना रहे इसके लिए प्रयास कर रही है। कस्बाथाना  के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी अध्यापक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते हैं। यहां एक वाइस प्रधानाचार्य और शिक्षक पदस्थ हैं। स्कूल में पंजीकृत कुल 1000 बच्चे हैं। समय पर शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की वजह से बच्चे इधर-उधर खेलते-घूमते रहते हैं। इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। दो साल से यंहा पर प्रधानाचार्य भी नहीं हैं। शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण अभिभावकों को परेशानी हो रही है। बच्चों का भविष्य कोचिंग के भरोसे चल रहा हैं। ग्रामीण मनीस, राजकुमार, सोनू, मोहन, रानू , सुरज , पंकज, कालू,सहित दर्जनों ग्रामीणों ने मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय पर शिक्षकों के स्कूल नहीं आने की वजह से बच्चे इधर-उधर खेलते-घूमते रहते हैं। इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। <br /><strong>- राजकुमार, ग्रामीण। </strong></p>
<p>शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण अभिभावकों को परेशानी हो रही है। बच्चों का भविष्य कोचिंग के भरोसे चल रहा हैं। <br /><strong>- पंकज, अभिभावक। </strong> </p>
<p>कस्बाथाना विद्यालय में शिक्षक समय पर नहीं आने का मामला सामने आया है। ऐसा मामला सामने आता है तो कार्यवाही की जाती है। समय पर आने और विद्यालय के सभी शिक्षकों को निर्देश दिया जाएगा। <br /><strong>- पीयूष शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, बारां।  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Aug 2024 16:47:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विद्यार्थियों को बेहतर पढ़ाई के लिए वितरित की जा रही है पुस्तक : दिलावर </title>
                                    <description><![CDATA[किरोडी लाल मीणा के इस्तीफे को लेकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक बड़ा संगठन है और इसमें छोटी-छोटी बातें चलती रहती है। शीर्ष स्तर पर इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-book-dilawar-is-being-distributed-to-students-for-better/article-83719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/madan-dilawar.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विद्यालय खुलने के प्रथम सप्ताह में समारोहपूर्वक निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जा रहा हैं। राज्य स्तरीय पाठ्य पुस्तक वितरण समारोह कार्यक्रम का शुभारम्भ शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के आतिथ्य में महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में किया गया। दिलावर ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू और भारतीय हैं, चाहे वह आदिवासी हो, चाहे कोई भी हो। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर पढ़ाई के लिए यह पुस्तक वितरित की जा रही है। किरोडी लाल मीणा के इस्तीफे को लेकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक बड़ा संगठन है और इसमें छोटी-छोटी बातें चलती रहती है। शीर्ष स्तर पर इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।</p>
<p>कार्यक्रम में शासन सचिव कृष्ण कुणाल एवं राज्य स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के बाद पंचायत स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन शुरू किया, जिसमें संभागी के रूप में पीईईओ/यूसीईईओ क्षेत्र के समस्त विद्यालयों के विद्यार्थी, अभिभावक, जनप्रतिनिधि एवं एसएमसी/एसडीएमसी सदस्य उपस्थित रहे। समारोह में वितरित पाठ्य पुस्तकों के वितरण की प्रविष्टि शाला दर्पण के एफटीबी मॉड्यूल में की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 18:36:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बोर्ड परीक्षार्थियों की पढ़ाई में खलल डाल रहा डीजे साउण्ड </title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन की ओर से परीक्षा की मध्यनजर कोलाहल अधिनियम के तहत भी ध्वनि विस्तार यंत्रों की सीमा तय करती है, लेकिन इस बार यह भी दिखाई नहीं दे रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dj-sound-is-disturbing-the-studies-of-board-candidates/article-72237"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/11111.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर क्षेत्र में इन दिनों देर रात शादी समारोह में तेज आवाज में बजने वाले डीजे बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। लोगों में जागरूकता की कमी के चलते शादियों में पूरी रात डीजे बज रहे हैं। इनसे कानों को नुकसान पहुंचाने वाली ध्वनि जो 80 डेसीबल से ऊपर की होती है जिसे खतरनाक शोर प्रदूषण माना जाता है, इससे लोगों की नींद भी हराम हो रही है। डीजे साउंड इतना तेज होता है कि हृदय से ग्रसित मरीजों के लिए भी घातक साबित हो रहा है। इसकी ध्वनि सीधी हृदय पर प्रभाव डालती है, जिससे हृदय की धड़कन तेज हो जाती है और हार्ट पेशेंट को डर लगा रहता है। खानपुर क्षेत्र एक बहुत बड़ी तहसील है, जहां पर दूर गांव से कमरे को किराए पर लेकर छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जहां गरीब तबके के व्यक्ति हैं जो पूरे साल कमाई कर बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं और यह समय बच्चों की पढ़ाई का मुख्य दिन है उनकी बोर्ड परीक्षा यदि सही तरीके से नहीं हुई तो उनकी पूरी साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। इसी के साथ छात्रों की मानसिकता भंग होती है तथा परीक्षा का तनाव व ऊपर से ध्वनि का तनाव रहता है, जिसके चलते बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो रहे है। </p>
<p><strong>रात 10 बजे बाद ध्वनि विस्तारक यंत्र प्रतिबंध का उल्लंघन</strong><br />सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार रात 10 बजे बाद ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन खानपुर क्षेत्र में देर रात तक ध्वनि विस्तारक यंत्र बज रहे हैं। इतना ही नहीं प्रशासन की ओर से परीक्षा की मध्यनजर कोलाहल अधिनियम के तहत भी ध्वनि विस्तार यंत्रों की सीमा तय करती आती है, लेकिन इस बार यह भी दिखाई नहीं दे रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेरे घर के आस-पास रात की 10 के बाद तेज ध्वनि से डीजे व बैंड बाजे निकालते रहते हैं जिससे मेरी पढ़ाई में बाधा आती है अत: निवेदन है कि 10 बजे बाद ध्वनि विस्तार यंत्रों पर अंकुश लगाया जाए। <br /><strong>- उमंग गुर्जर, </strong><strong>12वीं कृषि विज्ञान का छात्र </strong></p>
<p>अभी हमारे बोर्ड परीक्षा चल रही है, ऐसे में इस समय लाउडस्पीकर पर प्रशासन को विशेष ध्यान देने की जरूरत है, इसके अलावा समय व जरूरत के हिसाब से इन्हें चलाया जाना चाहिए, ताकि परीक्षार्थियों पर इसका बुरा असर न पड़े। <br /><strong>- पूजा सेन छात्रा </strong></p>
<p>मैं खानपुर में बड़े बाजार का निवासी हूं मेरे घर के सामने से रोजाना ही तेज ध्वनि विस्तारक यंत्र निकल रहे हैं, जिसके कारण मुझे मानसिक तनाव व चिंता बनी रहती है, जो मेरी परीक्षा में बाधा उत्पन्न कर रही है, अत: इन्हें नियम के अनुसार चलाया जाए। <br /><strong>- पुष्कर लक्ष्कार, छात्र  </strong></p>
<p>मैं एक गरीब छात्रा हूं जो एक गांव से खानपुर में कमरा किराया लेकर रहती हूं। मेरे पिताजी एक गरीब तबके के व्यक्ति हैं जो दिन-रात मजदूरी करके मुझे खानपुर में पढ़ाई करवा रहे हैं और उच्च शिक्षा दिलवा रहे हैं लेकिन ध्वनि विस्तारक यंत्र से पढ़ाई में बाधा पहुंच रही है। <br /><strong>- अनसूईया छात्रा  </strong></p>
<p>आए दिन हमारे घर के सामने से तेज आवाज में लाउडस्पीकर व बैंड बाजे निकलते रहते हैं जिसके कारण हम रात को अच्छे से सो भी नहीं पाते हैं अत: निवेदन है कि इन यंत्रों को नियमों के अनुसार चलाया जाए। <br /><strong>- दिनेश सोनी व्यापारी  </strong></p>
<p>दिनभर काम की थकान रहती है व रात को ही आराम मिलता है यदि रात्रि में ही ध्वनी प्रदूषण हो तो नींद कहां से आएगी। लाउडस्पीकर व डीजे साउंड ने हमारी नींद छीन ली है, अत: इन पर अंकुश लगाया जाए।<br /><strong>- केशव लक्ष्कार समाजसेवी </strong></p>
<p> निश्चित रूप से परीक्षार्थियों का ध्यान रखा जाएगा, नियम अनुसार ही डीजे व बैंड बाजे बजाए जाएंगे व रात्रि 10 बजे के बाद कोई ध्वनि विस्तार यंत्र नहीं बजेंगे<br /><strong>- श्याम सुंदर चेतीवाल , खानपुर</strong></p>
<p>बोर्ड परीक्षार्थियों का विशेष ध्यान रखा जाएगा और नॉर्म्स के अनुसार ही डीजे व बैंड बाजे बजेंगे और रात्रि 10 बजे के बाद कोई बैंड बाजे नहीं बजेंगे अन्यथा कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p><strong>- सत्यनारायण मालव थाना अधिकारी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Mar 2024 16:12:57 +0530</pubDate>
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                <title>बारिश होते ही स्कूल की छुट्टी, पढ़ाई ठप</title>
                                    <description><![CDATA[ बारिश में कक्षाएं संचालित करना हर दिन शिक्षकों के लिए चुनौती से कम नहीं होता। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/school-leave-as-soon-as-it-rains--studies-stalled/article-51850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/baarish-hote-hi-school-ki-chutti,-pdhayi-thap...kota-news-15-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक स्कूल ऐसा भी है, जहां एक भी क्लास रूम नहीं है। लेकिन, तिबारियां पूरी 5 हैं, वह भी छोटी-छोटी, पर इनका इतिहास देश की आजादी से भी पुराना है। इन्हीं रियासतकालीन तिबारियों में 225 विद्यार्थी एक साथ पढ़ते हैं। किसी में एक से पांच तो किसी में दो-दो कक्षाएं एक साथ चलती हैं। क्वालिटी एजुकेशन तो छोड़िए शोर-शराबे के बीच शिक्षक अपनी बात ठीक से बच्चों को समझा भी नहीं पाते। बरहाल, यह स्कूल कोई छोटा-मोटा नहीं है बल्कि सीनियर सैकंडरी है। यहां कक्षा एक से 12वीं तक की क्लासें संचालित होती है। हम बात कर रहे हैं, पाटनपोल क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ब्रजराजपुरा-1 की। यह स्कूल करीब 150 साल से किराए के भवन चित्तौड़ा का नोहरा में चल रहा है। बरसात के साथ हादसे का खतरा भी मंडरा रहा है। वहीं स्थानीय निवासियों का कहना है कि बरसात होने के दौरान बच्चों की छूट्टी कर दी जाती है।</p>
<p><strong>150 साल से तिबारियों में चल रहा स्कूल</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ब्रजराजपुरा-1 करीब 150 साल से चित्तौड़ा समाज के भवन में चल रहा है। यह दो मंजिला है लेकिन स्कूल पहली मंजिल में ही चलता है। यहां 5 तिबारियां व काल कोठरी जैसे 4 कमरे हैं, जिनमें एक कमरा मिल्क पाउडर व किताबों का ढेर लगा है। दूसरे में कुर्सियां, तीसरे में कुछ कम्प्यूटर रखे हैं। वहीं, एक कमरा प्राचार्य कक्ष है। जबकि, कक्षाएं लगाने के लिए एक भी कक्षा कक्ष नहीं है। 200 से ज्यादा बच्चे इन्हीं तिबारियों में पड़ने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>बरसात होते ही पढ़ाई ठप और भाग दौड़ शुरू</strong><br />स्थानीय निवासियों ने बताया कि बरसात होने के साथ ही स्कूल में पढ़ाई ठप हो जाती है। पानी से बचने की जद्दोजहद में भगदड़ मच जाती है। इस दौरान गिरते-पड़ते बच्चे अन्य बरामदों में शरण लेते हैं। अधिकतर बच्चे बारिश से खुद का बचाव नहीं पाते। ऐसे में विद्यार्थी और शिक्षक बारिश में भीगने से बीमार तक हो जाते हैं। बरसात के दौरान स्कूल की छुट्टी कर दी जाती है। </p>
<p><strong>टीनशेड के नीचे लगती एक साथ 5 क्लासें</strong><br />स्कूल के आंगन में करीब 30 फीट लंबी गैलरी है, यहां टीनशेड के नीचे कक्षा 1 से 5वीं तक की कक्षाएं एक साथ संचालित होती हैं। जबकि, वर्तमान में पांचों कक्षाओं को मिलाकर कुल 110 बच्चे अध्ययनरत हैं। वहीं, एक साथ पांच कक्षाएं संचालित होने से शोर-शराबा इतना होता है कि शिक्षक बच्चों को अपनी बात ठीक से समझा भी नहीं पाते। कक्षाएं संचालित करना हर दिन शिक्षकों के लिए चुनौती से कम नहीं होता।  </p>
<p><strong>कहां लगेगी 11वीं व 12वीं कक्षा, पता नहीं </strong><br />प्राचार्य कक्ष के सामने 12 फीट लंबी और 6 फीट चौड़ी गैलरी है, जो 6-6 फीट में दो भागों में बंटी हैं। एक में कक्षा 11वीं और दूसरी में 12वीं चलती हैं। जबकि, यहां पढ़ाने को दीवार पर बोर्ड तक नहीं है। कई बार कोई टॉपिक समझाने के लिए बोर्ड की जरूरत होती है तो क्लास लगाने के लिए बोर्ड लगी जगह ढूंढनी पड़ती हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि स्कूल आने के दौरान पता नहीं होता है कि आज 12वीं की कक्षाएं कहां लगेगी। </p>
<p><strong>8 फीट की गैलरी में 7वीं व 9वीं कक्षा</strong><br />स्कूल परिसर में 35 फीट लंबी और 8 फीट चौड़ी गैलरी है। जिसमें दो पंखें लगे हैं। दीवारों व छत से उठती सीलन की दुर्गंध के बीच एक साथ दो कक्षाएं संचालित होती हैं। तिबारीनुमा गैलरी में कक्षा 9 व 7वीं की क्लास एक साथ लगती है। दोनों कक्षाओं को मिलाकर करीब 55 से 60 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। क्वालिटी एजुकेशन मिलना तो दूर बच्चे ठीक से भी नहीं बैठ पाते।    </p>
<p><strong>किताबें व मिल्क पाउडर खराब होने का खतरा</strong><br />स्कूल में एक कमरा है, जिसकी पूरी दीवारों पर सीलन है और इसमें बच्चों को बांटने के लिए आई किताबों का ढेर लगा है वहीं, मिल्क पाउडर के पैकेट रखे हैं। छतें टपकने से इनके खराब होने का खतरा रहता है। </p>
<p>स्कूल में किसी भी तरह की कोई समस्या है तो वहां के प्रिंसिपल को हमसे सम्पर्क करना चाहिए। परेशानी बताएंगे तो हम समाधान जरूर निकालेंगे। हमारी तरफ से  स्कूलों की हर संभव मदद की जाती है। ब्रजराजपुरा स्कूल की प्रिंसिपल ने कभी कोई समस्या नहीं बताई और न ही कोई प्रस्ताव भिजवाया। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूलों में सभी जरूरी इंतजाम करवा रहे हैं। <br /><strong>- प्रदीप चौधरी, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग कोटा</strong></p>
<p>स्कूल में कक्षा-कक्ष नहीं होने से बारिश के दिनों में बच्चों को बिठाने में परेशानी होती है। बरामदों में पार्टेशन करवाना चाहते हैं ताकि पढ़ाई के दौरान व्यवधान न हो। बारिश से बचाव के लिए आंगन में टीनशेड करवाने की जरूरत है। इसके लिए फरवरी माह में रमसा को प्रस्ताव बनाकर भिजवाए थे। लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला। चित्तौड़ा समाज से ऊपरी मंजिल पर बने कमरे किराए पर देने की मांग की थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया।  <br /><strong>- बिंदू अग्रवाल, प्रिंसिपल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ब्रजराजपुरा-1</strong></p>
<p>समाज का निर्णय है, इसलिए स्कूल के ऊपर का भवन नहीं दे सकते। जमीन के बदले जमीन मिले तो हम यह जगह छोड़ने को तैयार हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी भी अधिकारी ने हमसे बात नहीं की। स्कूल वाले जरूर मांग करते हैं। <br /><strong>- पुरूषोत्तम चित्तौड़ा, अध्यक्ष, चित्तौड़ा समाज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2023 15:24:13 +0530</pubDate>
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                <title>स्कूल की छत से टपकता है पानी, कैसे होगी पढ़ाई?</title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्र के आजन्दा राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल के बच्चों को टपकती छत के नीचे बैठ पढ़ाई करने को मजबूर है। बरसात के कारण स्कूल परिसर में पानी भर गया है। यहीं नहीं स्कूल के कार्यालय, बरामदे व कक्षा कक्ष में भी पानी भर गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/water-is-dripping-from-the-roof-of-the-school--how-will-the-studies-be-done/article-16418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/school-paani-tapakta-kapren-news-bundi-27.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कापरेन। क्षेत्र के आजन्दा राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल के बच्चों को टपकती छत के नीचे बैठ पढ़ाई करने को मजबूर है। बरसात के कारण स्कूल परिसर में पानी भर गया है। यहीं नहीं स्कूल के कार्यालय, बरामदे व कक्षा कक्ष में भी पानी भर गया। जिसके चलते छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। संस्था प्रधान बजरंग लाल स्वामी ने बताया कि विद्यालय भवन काफी पुराना होने से बरसात का पानी छत में भरने पर टपकने लग जाता है। परिसर में पानी भरने से छात्रों को और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित रहती है। सोमवार को दिनभर बरसात का मौसम रहने से परिसर में पानी हो गया। झाड़ू लगाकर पानी निकालने का प्रयास किया गया। लेकिन छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान होने से कई छात्र स्कूल नही आते हैं। विद्यालय भवन को मरम्मत की दरकार हैं। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong> <br />विद्यालय भवन करीब आठ साल पुराना है । दीवारों में सीलन आने से खतरा बना हुआ है। बरसात में टपकने से छात्रों को परेशानी होती है। भवन की मरम्मत होनी चाहिए। <strong>-भैरु सिंह,ग्रामीण</strong> <br /><br />बारिश के समय स्कूल की छत टपकने से पढ़ाई नहीं कर पाते है। भवन जर्जर होने से गिरने का डर बना हुआ है।  <strong>-मुस्कान मीणा, छात्रा</strong><br /><br />स्कूल की छतें टपकने से वहां बैठने की जगह भी नहीं रहती है। मन में भय बना रहता है। <strong>- कमल कुमारी गुर्जर, छात्रा</strong><br /><br />बारिश के मौसम में स्कूल की छतें टपकने के कारण स्कूल जाने का भी मन नहीं करता है, क्योंकि वहां पर पुरी स्कूल की छतें टपकती है।   <strong>-भूपेंद्र सिंह, छात्र</strong><br /><br />बारिश होने के समय हमारी स्कूल की छतें टपकती है,जिस कारण पढ़ाई में मन भी नहीं लगता है। स्कूल परिसर में जगह-जगह पानी भरा रहता है।  <strong> -विशाल मीणा, छात्र</strong><br /><br />बरसात होने से स्कूल की छतें टपकती है जिसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। सरपंच को भी अवगत कराया गया है, पर अभी तक स्कूल की छतें सही करवाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है। <strong>-बजरंग स्वामी, प्रधानाध्यापक संस्कृत स्कूल आंजदा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Jul 2022 15:56:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> कोलवी स्कूल: पाठ्य पुस्तकें ना ही अध्यापक, कैसे होगी पढाई!</title>
                                    <description><![CDATA[ सरकार ने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कोलवी को महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूल में परिवर्तित कर दिया, लेकिन अभी तक छात्र छात्राओं को इसकी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विद्यालय में अभी तक पाठ्य पुस्तकें व स्टाफ नहीं आया है, जिस कारण उनकी पढ़ाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/kolvi-school--neither-the-textbook-nor-the-teacher--how-will-the-studies-be-done/article-15267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/kolvi-school-na-boks-na-hi-teachers-chomahla-news-jhalawad-19.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p> चौमहला। सरकार ने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कोलवी को महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूल में परिवर्तित कर दिया, लेकिन अभी तक छात्र छात्राओं को इसकी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विद्यालय में अभी तक पाठ्य पुस्तकें व स्टाफ नहीं आया है, जिस कारण उनकी पढ़ाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जिससे अभिभावकों में रोष है। महात्मा गांधी स्कूल कक्षा एक से 12 तक संचालित होना है। इस सत्र में इसे कक्षा एक से 8 वीं तक संचालित किया जा रहा है। अगले वर्ष कक्षा 9 वीं फिर क्रमश: कक्षा बढ़ती जाएगी, चार साल बाद यह कक्षा एक से बारह तक संचालित होगा। सरकार द्वारा ग्राम पंचायत कोलवी उर्फ मंडी राजेंद्रपुर चौमहला के कोलवी मिडिल स्कूल को महात्मा गांधी अंगे्रजी स्कूल में परिवर्तित कर दिया, लेकिन स्कूल खुलने के 18 दिन बाद भी विद्यालय में कोई नया स्टाफ नहीं आया। साथ ही विद्यालय में पाठ्य पुस्तकें भी उपलब्ध नहीं हो पाई, जिससे छात्र छात्राओं की पढ़ाई अभी तक शुरू नहीं होने से अभिभावकों में रोष है। <br /><br />विद्यालय में अभी हिंदी माध्यम का ही स्टाफ ही कार्यरत है, जो बच्चों को अंग्रेजी का प्रारंभिक ज्ञान दे रहे है। विद्यालय में इस वर्ष कक्षा एक से आठवीं तक 175 छात्र छात्राओं का एडमिशन हो चुका है। अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में का स्टाफ 23 लोगों का होगा, जिसमें एक प्रधानाचार्य, वरिष्ठ अध्यापक 6 पद,शारीरिक शिक्षक 1पद,वरिष्ठ सहायक 1पद, अध्यापक लेवल 2 के 2पद ,अध्यापक लेवल1 के 5 पद,पुस्तकालयाध्यक्ष 1पद, प्रयोगशाला सहायक 1 पद, कम्प्यूटर सहायक 1 पद, कनिष्ठ सहायक 1 पद, सहायक कर्मचारी के 3 पद होंगे, जिसमें से अभी तक एक भी पद नहीं भरा गया।<br /><br />सरकार ने मिडिल स्कूल को अंग्रेजी स्कूल में परिवर्तित तो कर दिया, लेकिन स्टाफ अभी तक नहीं लगाया, जिससे छात्रों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। मैंने अपने बच्चों को निजी स्कूल से निकालकर यहां भर्ती करवाया। <br /><strong>- सरदार सिंह कोलवी, अभिभावक</strong><br /><br />हम तीनों भाइयों ने चौमहला निजी स्कूल से निकालकर कोलवी में एडमिशन करवाया,  लेकिन अभी तक पाठ्यक्रम व अध्यापक नहीं आए, सरकार को शीघ्र अध्यापक नियुक्त करना चाहिए। <br /><strong>- विक्रम सिंह, अभिभावक</strong> <br /><br /> अभी तक इंग्लिश स्कूल की सुविधा उपलब्ध नहीं है बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है।  <strong>-चन्दर सिंह राणा कोलवी</strong><br /><br />चौमहला स्कूल से बच्चें को निकाल कर कोलवी अंगे्रजी स्कूल में भर्ती किया, लेकिन वहां अभी तक स्टाफ ही नहीं आया। चौमहला के कई अभिभावकों ने कोलवी स्कूल में बच्चे भर्ती किये है।<br /><strong>- अमित मोदी, चौमहला</strong><br /> <br /> विद्यालय में अभी तक 175 नामांकन हो चुके है , अभी तक नया स्टाफ व पाठ्यपुस्तकें नही आई है। उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, अभी मिडिल स्कूल का ही स्टाफ मौजूद है। <br /><strong>-आशुतोष वैष्णव, कार्यवाहक प्रधानाध्यापक</strong> <br /><br /> सरकार ने अध्यापको के इंटरवियू लिये है, शीघ्र स्टाफ आने की संभावना है। <br /><strong>- कालूराम शर्मा, पंचायत प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी चौमहला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 15:41:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जर्जर स्कूल भवन में कैसे होगी पढ़ाई ?</title>
                                    <description><![CDATA[शाहाबाद उपखंड मुख्यालय के सीनियर विद्यालय की हालत जर्जर हो रही है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को अध्ययन कार्य में समस्या का सामना करना पड़ रहा है।  
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/how-will-the-studies-be-done-in-the-dilapidated-school-building/article-13908"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/jarjar-school-bhavan-kaise-ho-padhai.jpg" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। शाहाबाद उपखंड मुख्यालय के सीनियर विद्यालय की हालत जर्जर हो रही है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को अध्ययन कार्य में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहीं गुरूवार को प्रिंसिपल के कमरे की छत का प्लास्टर उखड़ कर मेज पर आ गया हालांकि छत का प्लास्टर जब नीचे गिरा तब कार्यवाहक प्रिंसिपल लक्ष्मण सिंह कमरे में मौजूद नहीं थे।  प्रिंसिपल कमरे की छत का प्लास्टर पूरी तरह से उखड़ा हुआ है। कभी भी धराशाई हो सकता है। वर्तमान में 8 कमरे बने हुए हैं जो काफी वर्षों पुराने होने के कारण कमरों की दीवारों में दरारें आ चुकी है। बारिश के दिनों में बारिश होने पर सभी कमरों की छत टपकती है। छात्र-छात्राओं के दस्तावेज बचाना भारी पड़ जाता है।<br /><br />सभी छात्र कस्बे समेत हॉस्टलों के छात्र हैं जो यहां पर हॉस्टलों में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। अधिकतर सहरिया समाज के छात्र हैं। विद्यालय में शैक्षणिक 25 पद अशैक्षणिक 3 पद स्वीकृत है जिनमें से मात्र 16 पद ही भरे हुए हैं। स्वीकृत पद प्रिंसिपल सी बी ई ओ के पद का अतिरिक्त कार्यभार दिया हुआ है ऐसे में कार्यवाहक प्रिंसिपल के रूप में लक्ष्मण सिंह चैन पद संभाल रहे हैं। व्याख्याता 9 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से चार रिक्त हैं। अंग्रेजी अनिवार्य एक पद स्वीकृत हैं वह भी रिक्त है। राजनीति विज्ञान व्याख्याता का एक पद स्वीकृत है वह भी रिक्त है। जीवविज्ञान व्याख्याता का एक पद स्वीकृत है लेकिन वह भी रिक्त है। कृषि विज्ञान 1 पद स्वीकृत है वह भी रिक्त हैं। वरिष्ठ अध्यापक के 3 पद रिक्त हैं जिनमें अंग्रेजी उर्दू विषय के वरिष्ठ अध्यापक का पद रिक्त है।  2  3 पद स्वीकृत हैं एक पद रिक्त हैं। अध्यापक छ-1 के 2 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से एक पद रिक्त है। प्रयोगशाला सहायक के स्वीकृत पद तीन है लेकिन तीनों ही रिक्त है।एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्र में कला वर्ग, विज्ञान वर्ग, जीव विज्ञान, गणित, कृषि विज्ञान जैसे संकाय चलाई जा रही हैं। लेकिन उक्त विषय के व्याख्याताओं के रिक्त पड़े पदों के चलते कैसे पढ़ाई हो सकेगी। अंग्रेजी अनिवार्य व्याख्याता का एक पद स्वीकृत है लेकिन वह भी रिक्त जबकि यह पद 2018 से ही रिक्त पड़ा हुआ है।    <br /><br /><strong>टपकती है कमरों की छत</strong><br />शाहाबाद का विद्यालय नॉडल होने के कारण किताबों एवं साइकिलों का वितरण इसी भवन से होता है। जबकि विद्यालय में मात्र आठ कमरे ही मौजूद है। जिनके भी हालात सही नहीं है। जबकि कक्षा कक्ष एवं प्रयोगशाला समेत लगभग 20 कमरे होना अति आवश्यक है। तो वही उक्त वितरण सामग्री के लिए अलग से कमरे होना चाहिए जबकि जुलाई में ही किताबों का वितरण किया जाता है और ऐसे में कमरों की छत से टपकती है जिससे उक्त सामग्री खराब हो जाती है। उपखंड स्तर के राष्ट्रीय पर्व समेत कई कार्यक्रम विद्यालय परिसर में आयोजन होते हैं लेकिन विद्यालय भवन के कमरों की हालात सही नहीं है उक्त समस्या को लेकर कई बार कस्बे वासियों द्वारा लंबे समय से ही मांग करते आ रहे हैं। लेकिन आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं मिला। <br /><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की बिल्डिंग क्षतिग्रस्त अवस्था में है। छत से पानी आता है ऐसे में बच्चों का कमरा में बैठना मुश्किल हो जाता है। विद्यालय भवन पूरा नया बनना चाहिए। <br /><strong>- बालकिशन कश्यप, निवासी मुंगावली।     </strong><br /><br />शाहाबाद उपखंड मुख्यालय का स्कूल होने के बाद भी दुर्दशा का शिकार हो रहा है। जहां बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के बाद माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षा के बाद कॉलेज में दाखिला मिलता है लेकिन इस विद्यालय में उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए बिल्डिंग दुर्दशा का शिकार हो तो छात्र छात्राओं को शिक्षा कैसे मिलेगी। <br /><strong>- शिवदयाल शर्मा, निवासी सहरोल तलेटी।</strong><br /><br />विद्यालय भवन की बिल्डिंग काफी पुरानी हो चुकी है। पूरी बिल्डिंग को दोबारा बनाए जाना चाहिए गरीब बच्चे अध्ययन करते हैं, इसलिए सरकार को शिक्षकों की भी पूरी व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो। <br /><strong>- दुलीचंद माली, निवासी, शाहाबाद।     </strong><br /><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शाहाबाद की बिल्डिंग क्षतिग्रस्त है। छत से पानी आता है। विद्यालय भवन जर्जर स्थिति में है। उक्त समस्या को लेकर उच्च  अधिकारियों को अवगत करा रखा है एवं स्टीमेट बनाकर भी भेज रखा है। क्षेत्रीय विधायक को भी अवगत करा दिया गया है। <br /><strong>- कुंदन शाक्यवाल, प्रिंसिपल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, शाहाबाद।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 15:48:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा विभाग ने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई के पैटर्न में किया बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने पहली से आठवीं कक्षा तक के पढ़ाई के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया है। इस सत्र में इन कक्षाओं के बच्चों को पिछली दो कक्षाओं का कोर्स पढ़ाया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/jaipur-education-department-changed-pattern-of-studies-of-8th/article-12978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/46546546532.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने पहली से आठवीं कक्षा तक के पढ़ाई के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया है। इस सत्र में इन कक्षाओं के बच्चों को पिछली दो कक्षाओं का कोर्स पढ़ाया जाएगा। स्कूल में आठ में से चार पीरियड 2:20 घंटे पिछली दो क्लास और चार पीरियड वर्तमान क्लास की पढ़ाई होगी। इसके लिए बच्चों को वर्कबुक स्कूल की ओर से दी जा रही है। इन कक्षाओं में प्रदेश में 60 लाख से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। सरकार की मंशा है कि कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई नहीं होने से पुरानी क्लास का आधार खत्म हो गया है। ऐसे में स्टूडेंट्स का आधार वापस तैयार करने के लिए ब्रिज कोर्स करवाना पड़ रहा है। विभाग का मानना है कि पिछले दो साल में बच्चों ने कुछ खास नहीं सीखा, ऐसे में लर्निंग लॉस खत्म करने के लिए पुरानी क्लासेज पढ़ाना जरूरी हो गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने शिक्षा के बढ़ते कदम नाम से नया कार्यक्रम जारी किया है। पहली से आठवीं तक के बच्चों को विशेष तरह की वर्कबुक स्कूल से दी जा रही है, जो स्कूल तक पहुंच गई है, जबकि छठी से आठवीं तक की जल्द ही पहुंचेगी। इसी वर्कबुक में हर क्लास की पिछली क्लास का सिलेबस है। हिन्दी, गणित व अंग्रेजी विषय को वर्कबुक की सहायता से करवाया जाएगा।</p>
<p><strong>ब्रिज कोर्स जैसे होगी पढ़ाई</strong><br />कक्षा एक से आठ तक सभी सरकारी स्कूलों में ब्रिज कोर्स की तरह पढ़ाई होगी। इसमें कक्षा एक में एट ग्रेड लेवल वन, कक्षा दो में एट ग्रेड लेवल टू, कक्षा तीन में बिहाइंड ग्रेड लेवल एक व दो, कक्षा चार व पांच में बिहाइंड ग्रेड लेवल दो, तीन व चार, कक्षा छह व सात में बिहाइंड ग्रेड लेवल तीन, चार व पांच तथा कक्षा आठ में बिहाइंड ग्रेड लेवल पांच, छह व सात का पाठ्यक्रम शामिल होगा। प्रथम चरण में जुलाई से सितम्बर तक हर रोज सोमवार से शुक्रवार तक आठ में से चार पीरियड पुरानी क्लास की पढ़ाई के लिए तय किए हैं। द्वितीय चरण में दो पीरियड पुरानी क्लास और छह पीरियड वर्तमान क्लास के होंगे।</p>
<p><strong>बिहाइंड ग्रेड</strong><br />बिहाइंड ग्रेड से मतलब पिछली कक्षाओं का सिलेबस है। एट ग्रेड का आशय वर्तमान क्लास का सिलेबस है। ऐसे में कक्षा एक व दो में उसी क्लास का सिलेबस होगा, लेकिन तीसरी से आठवीं तक पुराना सिलेबस भी पढ़ना होगा। वर्कबुक क्लास एक से आठ तक होगी। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में ये ही पैटर्न लागू किया है। सरकारी स्कूल के लिए तो वर्कबुक की व्यवस्था की है।</p>
<p><strong>इनका कहना </strong><br />कोरोना काल में हुए लर्निंग गैप को दूर करने के लिए ब्रिज कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। जुलाई से बच्चों को ब्रिज कोर्स पढ़ाया जाएगा।<br /><strong>- अग्रवाल, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/jaipur-education-department-changed-pattern-of-studies-of-8th/article-12978</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 12:05:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पढ़ाई में बेटियां आगे, प्रदेश के कॉलेजों में 100 छात्रों पर 107 छात्राएं </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के कॉलेजों में छात्राओं के नामांकन के आंकड़े आए दिन बदल रहे हैं। पहले छात्रों की पढ़ाई पर ज्यादा फोकस रहता था, लेकिन हालात बदल गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-girls-ahead-in-studies-in-state/article-12605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/untitled-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के कॉलेजों में छात्राओं के नामांकन के आंकड़े आए दिन बदल रहे हैं। पहले छात्रों की पढ़ाई पर ज्यादा फोकस रहता था, लेकिन हालात बदल गए हैं। आंकड़ों की बात की जाए, तो 15 साल पहले जहां 100 छात्रों पर मात्र 63 छात्राएं ही स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई कर रही थीं। वहीं अब 100 छात्रों पर 107 बेटियां उच्च शिक्षा ले रही हैं।</p>
<p>इसके पीछे कारण राज्य सरकार द्वारा छात्राओं के लिए राजकीय निधि कोष की राशि माफ करने, पीजी कॉलेजों में सीट खाली रहने पर छात्राओं को न्यूनतम प्राप्तांक प्रतिशत में पांच प्रतिशत छूट देने, अनुसूचित जाति की उन छात्राओं को जिनके माता-पिता आयकर नहीं देते हैं को नि:शुल्क पुस्तकें देने जैसी कई योजनाएं हैं। गत कुछ वर्षों में बालिका शिक्षा का महत्वपूर्ण रोल समाज के सामने आया है। पहले ये स्थितियां नहीं थी। कम उम्र में शादी, सामाजिक कुरुतियां, घर के काम काज का जिम्मा बेटियों पर ही रहता था। अब वे दिन दूर हो गए हैं।</p>
<p><strong>वर्तमान वर्ष का आंकड़ा</strong><br />प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट कॉलेज मिलाकर 2022-23 में 13,02,485 नामांकन हुए हैं। इसमें यूजी- पीजी के 6,29,091 छात्र और 6,73,394 छात्राएं शामिल हैं। मौजूदा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 122 नए सरकारी कॉलेज खोले गए, जिनमें 32 महिला कॉलेज हैं। इस साल 13,02,485 छात्र-छात्राओं के नामांकन हुए हैं। पिछले साल 12,59,481 नामांकन हुआ था। यानि इस वर्ष 43 हजार ज्यादा एडमिशन हुए। प्रदेश में 2009 में जहां यूजी और पीजी करने वाली छात्राओं की संख्या 1.63 लाख थी। वह अब बढ़कर 6.73 लाख पहुंच गई है। 2008 में महिला कॉलेजों की संख्या 361 थी, जो अब 580 हो गई है।</p>
<table>
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;" colspan="3"><strong>संकाय के अनुसार आंकड़ा</strong></td>
</tr>
<tr>
<td>संकाय   </td>
<td>छात्र   </td>
<td>छात्राएं</td>
</tr>
<tr>
<td>कला   </td>
<td>404692   </td>
<td>484636</td>
</tr>
<tr>
<td>विज्ञान  </td>
<td>157147   </td>
<td>141260</td>
</tr>
<tr>
<td>वाणिज्य   </td>
<td>48098   </td>
<td>37534</td>
</tr>
<tr>
<td>लॉ   </td>
<td>15931   </td>
<td>6865</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table>
<tbody>
<tr style="height:41.8px;">
<td style="height:41.8px;text-align:center;" colspan="3">
<p><strong>दसवीं के परिणाम के अनुसार</strong></p>
<p><strong>जिले जहां छात्रों से ज्यादा छात्राएं पास हु</strong><strong>ई</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;"><strong>जिला         <br /></strong></td>
<td style="height:41px;"><strong> छात्र पास प्रतिशत      <br /></strong></td>
<td style="height:41px;"><strong>छात्राएं पास प्रतिशत</strong></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;">चित्तौड़गढ़   </td>
<td style="height:41px;">6198 (66.27)       </td>
<td style="height:41px;">6424(74.75)</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;">डूंगरपुर          </td>
<td style="height:41px;">9677 (85.95)      </td>
<td style="height:41px;">10,000 (88.14)</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;">कोटा             </td>
<td style="height:41px;">9079 (70.15)       </td>
<td style="height:41px;">9198 (78.64)</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;">गंगानर     </td>
<td style="height:41px;">10644 (80.63)       </td>
<td style="height:41px;">10639 (86.81)</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;">राजसमंद   </td>
<td style="height:41px;">6577 (75.71)   </td>
<td style="height:41px;">6597 (81.20)</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;">प्रतापगढ़    </td>
<td style="height:41px;">4491 (67.32)   </td>
<td style="height:41px;">4621 (72.79)</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table>
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;" colspan="3"><strong>यहां पर बेटियां बेटों से थोड़ा पीछे</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><strong>जिला   <br /></strong></td>
<td><strong> छात्र पास    <br /></strong></td>
<td><strong>छात्राएं पास </strong></td>
</tr>
<tr>
<td>अजमेर      </td>
<td>14958   </td>
<td>14185</td>
</tr>
<tr>
<td>अलवर    </td>
<td>27287   </td>
<td>23190</td>
</tr>
<tr>
<td>बांसवाड़ा    </td>
<td>11608    </td>
<td>11235</td>
</tr>
<tr>
<td>बाड़मेर    </td>
<td>20494    </td>
<td>16037</td>
</tr>
<tr>
<td>भरतपुर    </td>
<td>19453    </td>
<td>15416</td>
</tr>
<tr>
<td>बीकानेर    </td>
<td>17139    </td>
<td>15186</td>
</tr>
<tr>
<td>बूंदी    </td>
<td>6414    </td>
<td>5663</td>
</tr>
<tr>
<td>चूरू    </td>
<td>16724    </td>
<td>14695</td>
</tr>
<tr>
<td>जयपुर    </td>
<td>49590    </td>
<td>44774</td>
</tr>
<tr>
<td>जैसलमेर   </td>
<td>4640   </td>
<td>2890</td>
</tr>
<tr>
<td>जालौर   </td>
<td>13244    </td>
<td>10117</td>
</tr>
<tr>
<td>झुंझुनूं   </td>
<td>17083    </td>
<td>13905</td>
</tr>
<tr>
<td>झालावाड़    </td>
<td>7573    </td>
<td>7090</td>
</tr>
<tr>
<td>जोधपुर   </td>
<td>29479   </td>
<td>24332</td>
</tr>
<tr>
<td>नागौर    </td>
<td>26493    </td>
<td>23168</td>
</tr>
<tr>
<td>पाली    </td>
<td>11910   </td>
<td>10123</td>
</tr>
<tr>
<td>सवाई माधोपुर    </td>
<td>9269    </td>
<td>7230</td>
</tr>
<tr>
<td>सीकर    </td>
<td>22809    </td>
<td>19054</td>
</tr>
<tr>
<td>सिरोही    </td>
<td>5740    </td>
<td>4170</td>
</tr>
<tr>
<td>टोंक    </td>
<td>9408    </td>
<td>8521</td>
</tr>
<tr>
<td>धौलपुर   </td>
<td>8978   </td>
<td>6904</td>
</tr>
<tr>
<td>दौसा    </td>
<td>14260    </td>
<td>12418</td>
</tr>
<tr>
<td>बारां    </td>
<td>7142    </td>
<td>6340</td>
</tr>
<tr>
<td>हनुमानगढ़    </td>
<td>11711    </td>
<td>11087</td>
</tr>
<tr>
<td>करौली    </td>
<td>10930    </td>
<td>8172</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>   <br /><strong>विश्वविद्यालय में अच्छी संख्या</strong><br />प्रदेश के विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ ही छात्राओं की संख्या भी काफी अच्छी है। राजस्थान विश्वविद्यालय में 30 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें अकेले महारानी महाविद्यालय में करीब आठ हजार से छात्राएं पंजीकृत हैं। आरयू कैम्पस के पीजी कोर्सेज में भी बेटियों की संख्या काफी है। पीएचडी और एमफिल करने वाले शोधार्थियों की संख्या करीब छह हजार है, उनमें से छात्राओं की संख्या काफी ज्यादा है।</p>
<p><strong>स्कूलों की स्थिति</strong> <br />प्रदेश में 65 हजार सरकारी स्कूलों में 98 लाख से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। प्रारंभिक व उच्च प्रारंभिक में 40 लाख से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें 22 लाख छात्राएं हैं। वहीं कक्षा नौ से 12वीं तक के स्कूल में 32 लाख छात्र और 18 लाख छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं।</p>
<p>बेटियों के पहले पढ़ाई में पिछड़ने और अब आगे बढ़ने का कारण मनोसामाजिक है। समाज और परिवारों में एक बालिका के बारे में परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव ने उन्हें अध्ययन के लिए समान ध्यान और समान प्रेरणा के लिए प्रेरित किया है। इससे बेटियों में आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण उन्हें पढ़ाई और अन्य क्षेत्रों में भी उत्कृष्टता प्राप्त करने में मदद कर रहा है। <strong>- डॉ. प्रेरणा पुरी, प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय</strong> <br /><br /></p>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong> </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-girls-ahead-in-studies-in-state/article-12605</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 10:23:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>कोरोना में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों को शिक्षा से जोड़ेगा अभिभावक संघ </title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना काल में लगे लॉकडाउन से प्रदेश के विभिन्न परिवारों की आर्थिक स्थिति विकट हो गई थी, जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा बच्चों को उठाना पड़ा था। मजबूरी के चलते बहुत सारे बच्चों की पढ़ाई छूट गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/jaipur-union-will-connect-childrens-who-drop-out-of-studies-in-corona-with-education/article-9827"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/84464654.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोरोना काल में लगे लॉकडाउन से प्रदेश के विभिन्न परिवारों की आर्थिक स्थिति विकट हो गई थी, जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा बच्चों को उठाना पड़ा था। मजबूरी के चलते बहुत सारे बच्चों की पढ़ाई छूट गई। कई बच्चों की स्कूलों की मनमानी के चलते पढ़ाई छूटी। संयुक्त अभिभावक संघ ने ऐसे बच्चे जिनकी पढ़ाई छूट गई है, उन बच्चों को डाटा जुटाकर दोबारा से उनकी पढ़ाई शुरू कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए अभियान शुरू होगा।</p>
<p><strong>दस हजार अभिभावकों की लेंगे मदद  </strong><br />अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल और महामंत्री संजय गोयल ने कहा कि मध्यप्रदेश से सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को जिम्मेदारी देते हुए घर-घर जाकर उन बच्चों की जानकारी उपलब्ध करवाने और पढ़ाई दुबारा शुरू कराने के आदेश मध्य प्रदेश सरकार को दिए है। इसके साथ ही एक पोर्टल बनाकर ऐसे बच्चों का डाटा अपलोड करने को कहा था। इस आदेश की पालना होती है तो मध्य प्रदेश के लाखों बच्चे दुबारा शिक्षा से जुड़ पाएंगे। प्रवक्ता अभिषेक जैन ने कहा कि राजस्थान में भले ही राज्य सरकार शिक्षा को लेकर कोई कार्य ना करें लेकिन वह करेंगे। अभियान के लिए बाकायदा गूगल के साथ फॉर्म को डवलप कर संघ के सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के जरिए भरवाया जाएगा। इस कार्य में संघ से जुड़े 10 हजार से अधिक अभिभावकों की मदद ली जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/jaipur-union-will-connect-childrens-who-drop-out-of-studies-in-corona-with-education/article-9827</link>
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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 10:53:27 +0530</pubDate>
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