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                <title>controversy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: कांग्रेस का भाजपा-आरएसएस पर तीखा हमला, आलोक शर्मा ने कहा- जिन लोगों ने प्रभु श्रीराम को नहीं छोड़ा, वे देश को क्या छोड़ेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा ने देहरादून में भाजपा-आरएसएस पर राम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे में वित्तीय अनियमितताओं और कमीशनखोरी का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने यूपी सरकार की एसआईटी जांच को लीपापोती बताते हुए ट्रस्ट को भंग करने और सुप्रीम या हाई कोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ram-temple-offering-theft-controversy-congresss-sharp-attack-on-the/article-157862"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/alok-sharma.png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने मंगलवार को उत्तराखंड के देहरादून में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "जिन लोगों ने प्रभु श्रीराम को नहीं छोड़ा, वे देश को क्या छोड़ेंगे।" शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार देश के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े कार्य का श्रेय स्वयं लेते हैं, इसलिए राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले और चढ़ावे में हुई डकैती की नैतिक जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रभु श्रीराम के नाम पर सत्ता तक पहुंची और अब उसी आस्था के नाम पर भ्रष्टाचार और लूट का संरक्षण कर रही है। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म को सबसे बड़ा खतरा बाहरी शक्तियों से नहीं, बल्कि भाजपा और आरएसएस की कथित राजनीति और उनके संरक्षण में पनप रहे भ्रष्टाचार से है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) का उद्देश्य वास्तविक दोषियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि बड़े लोगों को बचाना और मामले पर पर्दा डालना है।</p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि स्वयं राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ ट्रस्टी चढ़ावे में अनियमितताओं की बात उठा रहे हैं, लेकिन भाजपा और आरएसएस इस गंभीर विषय पर मौन साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की जानकारियां सामने आ रही हैं, उससे यह मामला अत्यंत गंभीर और व्यापक प्रतीत होता है। इससे पूर्व भी ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर भूमि खरीद में अनियमितताओं के आरोप लगे थे, लेकिन उन मामलों में गठित जांच समितियों की कार्रवाई का परिणाम आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े एक इंजीनियर द्वारा 40 प्रतिशत कमीशनखोरी के आरोप लगाए गए थे तथा जो लोग इन मुद्दों को उठाने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान जांच भी केवल लीपापोती कर बड़े मगरमच्छों को बचाने का प्रयास प्रतीत होती है।</p>
<p>शर्मा ने सवाल उठाया कि देशभर में भाजपा और आरएसएस के भव्य एवं महलनुमा कार्यालयों के निर्माण में कहीं राम मंदिर के नाम पर जुटाई गई धनराशि अथवा चढ़ावे के धन का दुरुपयोग तो नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है। उन्होंने पार्टी की ओर से उन्होंने मांग की कि श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए, कथित घोटाले में शामिल सभी लोगों के विरुद्ध तत्काल आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं, मंदिर से संबंधित सभी बैंक खातों का विवरण तथा सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय के किसी वर्तमान (सिटिंग) न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराई जाए। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी, देहरादून के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, मनोज सैनी, देवेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 18:32:06 +0530</pubDate>
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                <title>नीट पुनर्परीक्षा पर सियासी संग्राम तेज: कांग्रेस ने केंद्र को घेरा, परीक्षा गड़बड़ियों पर जवाबदेही की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा को लेकर कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने केंद्र सरकार पर प्रशासनिक विफलता और जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया। जहां कांग्रेस ने छात्रों की मदद के लिए टीम गठित की है, वहीं एनटीए और पीआईबी ने पेपर लीक के दावों को 'फर्जी' करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-battle-intensifies-over-neet-re-examination-congress-surrounds-center-demands/article-157766"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/bk-hariprashad.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा से जुड़ा विवाद कर्नाटक में तीखे राजनीतिक टकराव में बदल गया है। कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ियों की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप लगाया है। कर्नाटक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और विधान परिषद में विपक्ष के नेता बीके हरिप्रसाद ने सोमवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में हुई चूकों से ध्यान भटकाने के लिए 'आरोप-प्रत्यारोप का खेल' खेल रहा है।</p>
<p>बेंगलुरु में पत्रकारों को संबोधित करते हुए हरिप्रसाद ने नीट जैसी बड़े पैमाने की परीक्षाओं के संचालन को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाये। इसके साथ ही उन्होंने पेपर लीक और प्रशासनिक विफलताओं के बार-बार लगते आरोपों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि जहां कांग्रेस ने परीक्षा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने और छात्रों की परेशानी को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक एहतियाती कदम उठाये थे, वहीं केंद्र सरकार इस व्यवस्था से जुड़ी कमियों को दूर करने में पूरी तरह विफल रही।</p>
<p>हरिप्रसाद ने आरोप लगाया, "हमने सभी सावधानियां बरती थीं। अगर हम ऐसा नहीं करते तो हजारों छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता। भाजपा ने क्या एहतियात बरती है? यह केवल एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का खेल है। वे अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।" कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने बेंगलुरु में पुनर्परीक्षा प्रक्रिया के दौरान यातायात नियंत्रित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय किया था, ताकि छात्रों को कोई असुविधा न हो।</p>
<p>उन्होंने यूपीएससी और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े पिछले विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का बार-बार होना परीक्षा प्रणाली की गहरी ढांचागत समस्याओं को दर्शाता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद अब तक जवाबदेही क्यों तय नहीं की गयी है। उन्होंने यह घोषणा भी की कि कांग्रेस उन छात्रों की शिकायतों की जांच के लिए समर्पित टीम का गठन करेगी, जिन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था और आवश्यकतानुसार सहायता देने का वादा किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "अगर इन परिस्थितियों के कारण किसी भी बच्चे को परेशानी उठानी पड़ी है, तो हम उसकी जांच करेंगे। हम छात्रों को हुई दिक्कतों को समझने के लिए टीम भेजेंगे। यदि मुआवजे की आवश्यकता होगी तो हम वह भी प्रदान करेंगे।" इस बीच गड़बड़ियों के आरोपों के बाद बढ़ी सतर्कता और कड़ी निगरानी के बीच पूरे भारत और कुछ चुनिंदा विदेशी केंद्रों पर नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा आयोजित की गयी।</p>
<p>राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और केंद्र सरकार के सोशल मीडिया पर चल रहे प्रश्नपत्र लीक के दावों को 'फर्जी' और निराधार बताकर खारिज करने के बाद यह विवाद और गहरा गया। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की तथ्य अन्वेषण इकाई ने भी टेलीग्राम पर पेपर लीक का दावा करने वाले वायरल वीडियो को भ्रामक और गलत सूचना करार देते हुए खारिज कर दिया। दोनों पक्षों की ओर से लग रहे आरोपों-प्रत्यारोपों के कारण नीट का मुद्दा एक बार फिर से राजनीतिक रूप से संवेदनशील और बड़ा विवाद बन गया है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा संचालन व्यवस्था और जवाबदेही की ओर सबका ध्यान खींचा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:36:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>67 की उम्र में फिर बजे शहनाई के सुर: घासी राम ने 28 साल की सुनीता से रचाई शादी, पहली पत्नी बनीं सबसे बड़ी समर्थक</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के सिरोली गांव में 67 वर्षीय घासी राम मीणा की शादी चर्चा का विषय बनी है। उन्होंने 28 वर्षीय सुनीता के साथ विवाह किया है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी पहली पत्नी किशनी ने न केवल इस रिश्ते का समर्थन किया है, बल्कि वह उन्हें छोटी बहन की तरह रखेंगी। गांव में इसे एक 'फिल्मी सरप्राइज' माना जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/at-the-age-of-67-ghasi-ram-played-the-tune/article-157774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jaipur3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जहां आमतौर पर लोग 60 की उम्र पार करते ही पूजा-पाठ, तीर्थयात्रा और पोते-पोतियों के साथ समय बिताने की बातें करते हैं, वहीं जयपुर जिले की सांगानेर तहसील के सिरोली गांव के 67 वर्षीय घासी राम मीणा ने ऐसा कदम उठाया है कि पूरे इलाके में उनकी ही चर्चा हो रही है। घासी राम ने 28 वर्षीय सुनीता मीणा के साथ विवाह कर लिया है और सबसे दिलचस्प बात यह है कि उनकी पहली पत्नी किशनी भी जीवित हैं तथा इस शादी के लिए उनकी सहमति भी बताई जा रही है।</p>
<p>गांव की चौपाल से लेकर चाय की दुकानों तक, हर जगह इसी विवाह की चर्चा सुनाई दे रही है। लोग हैरानी भी जता रहे हैं और मुस्कुराते हुए इस अनोखे रिश्ते पर अपने-अपने अंदाज में टिप्पणियां भी कर रहे हैं। किसी का कहना है कि “घासी राम ने साबित कर दिया कि दिल की उम्र नहीं होती”, तो कोई मजाक में कह रहा है कि “जब लोग रिटायरमेंट प्लान बनाते हैं, तब घासी राम ने शादी प्लान बना लिया।”</p>
<p>बताया जा रहा है कि विवाह पारिवारिक सहमति और सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार 19 जून को प्रताप नगर के सामुदायिक केन्द्र में संपन्न हुआ। खास बात यह रही कि पहली पत्नी ने भी इस फैसले का विरोध नहीं किया, बल्कि परिवार की सहमति से ही यह रिश्ता तय हुआ। यही कारण है कि यह शादी सिर्फ गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा और कौतूहल का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया पर भी इस विवाह को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत निर्णय बताते हुए शुभकामनाएं दे रहे हैं, तो कुछ इसे आश्चर्यजनक और अनोखा विवाह करार दे रहे हैं।</p>
<p>फिलहाल सिरोली गांव में यह शादी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लग रही। गांव वालों का कहना है कि उन्होंने कई शादियां देखी हैं, लेकिन इतनी चर्चा शायद ही किसी विवाह की हुई हो। एक बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, “घासी राम की शादी ने साबित कर दिया कि जिंदगी में सरप्राइज का कोई रिटायरमेंट नहीं होता!” इस संबंध में घासी राम मीणा ने कहा कि हम दोनों के परिजनों और रिश्तेदारों की सहमति के बाद ही शादी करने का निर्णय लिया है। शादी में दोनों पक्षों के निकट रिश्तेदार शामिल हुए हैं । मैं दोनों पत्नियों को खुश रखूँगा । दुनिया वाले क्या चर्चा करते हैं, इसकी हमें कोई परवाह नहीं है। घासी राम की पहली पत्नी किशनी ने बताया कि यह शादी मेरी सहमति से हुई है । मैं इसे सौतन नहीं बल्कि छोटी बहन की तरह रखूँगी। सुनीता भी इस शादी से बहुत खुश है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:19:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भरत तिवारी की संदिग्ध मौत पर कांग्रेस ने की निंदा, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सोशल मीडिया संयोजक अंकुश सिंह ने भरत तिवारी की मृत्यु पर सरकार को घेरा। पुलिसिया विरोधाभासों और निलंबन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक जांच की मांग की। कांग्रेस यूथ विंग ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय व मुआवजा देने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-strongly-condemns-the-suspicious-death-of-bharat-tiwari-demands/article-157657"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress1.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कांग्रेस सोशल मीडिया के जिला संयोजक अंकुश सिंह ने कहा कि भरत तिवारी की मृत्यु से जुड़े घटनाक्रम ने पूरे प्रदेश में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस मामले में लगातार विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हों, पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया हो और हर प्रश्न का उत्तर केवल "जांच जारी है" बताया जा रहा हो, उससे जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। कांग्रेस की युवा यूथ इस दुखद घटना की कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। यदि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण किया था तो बल प्रयोग क्यों किया गया? यदि पूरी कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी तो संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित क्यों किया गया? और यदि किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी त्रुटि हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार न्यायालय को है, न कि किसी को बिना निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के जीवन से वंचित करने का। कानून का शासन तभी मजबूत होगा जब हर नागरिक को न्याय मिले और सत्ता में बैठे लोग भी जवाबदेह हों। हम राज्य सरकार से मांग करते हैं कि मामले की न्यायिक अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।मृतक परिवार को न्याय और उचित सहायता प्रदान की जाए।दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।जनता जानना चाहती है कि आखिर भरत तिवारी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। जब तक सच सामने नहीं आता, सवाल बाकी रहेंगे और न्याय की मांग जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:26:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी मानहानि मामला : सत्यकी सावरकर की जिरह में कई अहम स्वीकारोक्तियां, 15 जून को होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पुणे की विशेष अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि 'स्वातंत्र्यवीर' कोई सरकारी उपाधि नहीं बल्कि एक सम्मानसूचक संबोधन है। उन्होंने यह भी माना कि उनके द्वारा संचालित 'हर घर सावरकर' अभियान का कोई आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-defamation-case-many-important-confessions-in-the-cross-examination/article-155702"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/rahul.png" alt=""></a><br /><p>पुणे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर कथित मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को विशेष सांसद-विधायक अदालत में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये। न्यायाधीश अमोल श्रीराम शिंदे की अदालत में शिकायतकर्ता एवं वीर सावरकर के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर से राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने जिरह की। जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि 'स्वातंत्र्यवीर' कोई सरकारी या कानूनी मान्यता प्राप्त उपाधि नहीं है, बल्कि एक कवि और नाटककार द्वारा इस्तेमाल किया गया सम्मानसूचक संबोधन है। उन्होंने यह भी माना कि इस प्रकार की उपाधियों के उपयोग पर कोई कानूनी रोक नहीं है।</p>
<p>सत्यकी ने कहा कि ऐसी उपाधियों का उपयोग व्यक्ति अपनी सार्वजनिक पहचान मजबूत करने के लिए कर सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी सम्मानसूचक उपाधि की उपयुक्तता तय करने के लिए कोई सरकारी या वैधानिक संस्था मौजूद नहीं है। उन्होंने इस दावे को खारिज किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने स्वयं 'स्वातंत्र्यवीर' की उपाधि अपनायी थी। मामले के खर्च पर उन्होंने बताया कि मुकदमेबाजी का पूरा खर्च वह स्वयं वहन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 'हर घर सावरकर' अभियान के तहत पुस्तकें, टी-शर्ट और अन्य सामग्री बेची जाती है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह समिति पंजीकृत संस्था नहीं है और इसके खातों या बैलेंस शीट का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।</p>
<p>सत्यकी सावरकर की जिरह पूरी नहीं हो सकी और मामले की अगली सुनवाई 15 जून 2026 को होगी। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2023 में सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया था। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने मार्च 2023 में लंदन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए वीर सावरकर के बारे में अपमानजनक और तथ्यहीन टिप्पणियां की थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:08:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जीतू पटवारी पर टिप्पणी से भड़की युवक कांग्रेस: सीएम का फूंका पुतला, जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर की गई टिप्पणी के विरोध में देवास में प्रदर्शन हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री की भाषा को अमर्यादित बताते हुए जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला फूंका। नेताओं ने चेतावनी दी कि जनहित के मुद्दों को दबाने नहीं दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/youth-congress-enraged-by-the-comment-on-jitu-patwari-burnt/article-155592"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/mohan-yadav.png" alt=""></a><br /><p>देवास। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के संबंध में की गई टिप्पणी के विरोध में देवास जिले के सतवास नगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी तथा कांग्रेस के विभिन्न मोर्चा संगठनों के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री की टिप्पणी का विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने इसे अमर्यादित और अशोभनीय बताते हुए कहा कि इस प्रकार की भाषा प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष लाला पटेल ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी किसानों, युवाओं और आम जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार की टिप्पणियां की जाती रहीं तो कांग्रेस का विरोध और तेज किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:45:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी का सीबीएसई पर बड़ा हमला, बोले- शिक्षा को कारोबार बनाना सभी बुराईयों का आधार, कीमत बच्चों को पड़ती है चुकानी </title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई द्वारा री-इवैल्यूएशन और डिजिटल कॉपी के लिए वसूले जा रहे शुल्क की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि बोर्ड की गलतियों की सजा छात्रों को आर्थिक रूप से भुगतनी पड़ रही है। शिक्षा को सेवा के बजाय कारोबार बनाना बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-big-attack-on-cbse-said-making-education/article-155608"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gandhi2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पर उसकी गलतियों के लिये छात्रों से शुल्क वसूली को लूट करार देते हुए कहा है कि जब शिक्षा को सेवा के बजाय कारोबार बना दिया जाता है तो उससे अनेक बुराइयां जन्म लेना शुरू कर देती हैं। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा, "सीबीएसई की गलती से नंबर गलत आएं तो उसकी कीमत छात्रों को चुकानी पड़ती है। डिजिटल स्कैन कॉपी, री-टोटलिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए अलग-अलग शुल्क देना पड़ता है। अपनी ही उत्तर पुस्तिका की सही जांच कराने के लिए एक छात्र को हजारों रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।"</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में त्रुटियों का बोझ छात्रों पर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि गलती सीबीएसई करती है और इसकी सज़ा बच्चे को मिलती है और सरकार इससे कमाई करती है। कांग्रेस नेता ने कहा "जब शिक्षा को सेवा नहीं बल्कि कारोबार बना दिया जाता है तो गलतियां सुधरने के बजाय व्यवस्था का हिस्सा बन जाती हैं और इसकी सबसे बड़ी कीमत बच्चों को अपने समय, आत्मविश्वास और भविष्य से चुकानी पड़ती है।" गौरतलब है कि सीबीएसई बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल प्रति, पुनर्गणना तथा पुनर्मूल्यांकन की सुविधा शुल्क पर उपलब्ध कराने को लेकर हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर बहस तेज हुई है, जिसे लेकर राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 13:17:06 +0530</pubDate>
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                <title>एजाज अहमद का JDU पर बड़ा हमला, बोले- राबड़ी देवी का बंगला खाली कराने के बहाने प्रदेश में दलित कार्ड खेल रही सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का बंगला मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित करने पर नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजद का आरोप है कि सरकार इसके जरिए दलित कार्ड खेल रही है और विपक्ष को अपमानित कर रही है। राबड़ी देवी ने बंगला जबरन खाली कराने की चुनौती दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ajaz-ahmeds-big-attack-on-nda-said-bihar-government/article-155563"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rabdi-devi-new-home.png" alt=""></a><br /><p>पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के बंगले को खाली करने के आदेश को सवालों के घेरे में खड़ा किया और कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार ने प्रदेश की राजनीति में दलित कार्ड खेलने के लिए इस बंगले का आबंटन मंत्री नंदकिशोर राम के नाम से किया गया है। अहमद ने यूनीवार्ता से कहा कि इसी महीने की 11 तारीख को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार आठ मंत्रियों निशांत कुमार, भगवान सिंह कुशवाहा,कुमार शैलेन्द्र, शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, श्वेता गुप्ता, मिथिलेश तिवारी, रामचंद्र प्रसाद के साथ नंद किशोर राम को भी बंगला आबंटित किया गया। उन्होंने कहा कि आदेश के अनुसार श्री राम को 21, हार्डिंग रोड का बंगला आबंटित किया गया था।</p>
<p>राजद प्रवक्ता अहमद ने कहा कि मंत्री राम को जब पहले से बंगला आबंटित था, तो पुनः 27 मई को एक नया आदेश जारी कर उन्हें वही बंगला आबंटित करने की ऐसी कौन सी आपात स्थिति बन गई थी, जिसमे विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी रहती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम साफ करता है कि उसे मंत्री श्री राम को बंगला आबंटित करने से ज्यादा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को अपमानित करने और प्रदेश की राजनीति में दलित कार्ड खेलने की ज्यादा पड़ी थी। उम्होने कहा कि एक ऐसे मंत्री जिसे पहले से बंगला आबंटित हो गया था, उन्हें बंगला बदल कर आबंटित करना और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को परेशान करना सरकार की मानसिकता को स्पस्ट करता है।</p>
<p>अहमद ने कहा कि आखिर बार-बार राज्य सरकार और उसका भवन निर्माण विभाग श्री राम के आवास को क्यों बदल रहा है। उन्होंने कहा कि कहीं रामचंद्र राम को राजद के खिलाफ दलित राजनीति का मोहरा तो नहीं बनाया जा रहा है। इस मामले में राजद के प्रमुख प्रदेश प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि अलग अलग पदों के लिए तय बंगलों में सरकार ने पहले ही फेरबदल किये हैं, जिनमे विधानसभा अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री के बंगले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नियमों की दुहाई सिर्फ राबड़ी देवी के लिए नही, सभी जगहों पर दी जानी चहिये। उन्होंने कहा कि उसी रोड पर एक पूर्व मुख्यमंत्री को बंगाल आबंटित किया गया है और दूसरे को अपमानजनक तरीके से हटाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष ने स्पस्ट किया है कि वह इस अपमान के खिलाफ खड़ी होंगी और सरकार चाहे तो जबरदस्ती बंगला खाली करवा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 16:44:47 +0530</pubDate>
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                <title>CBSE का दावा: सिस्टम सुरक्षित और ऑडिटेड, राजनाथ सिंह के घर पर मीटिंग से बढ़ी हलचल, धर्मेंद्र प्रधान बोले- तय होगी जवाबदेही</title>
                                    <description><![CDATA[सीबीएसई 12वीं बोर्ड के डिजिटल मूल्यांकन (OSM) विवाद पर सरकार एक्शन मोड में है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गड़बड़ियों को माना। कॉपियों की तकनीकी जांच के लिए आईआईटी कानपुर और मद्रास को जोड़ा गया है, वहीं विपक्ष ने न्यायिक जांच की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cbse-claims-the-system-is-safe-and-audited-meeting-at/article-155268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rajnath-singh-news.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई अहम बैठक में पीएमओ, सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे मामले पर चर्चा की। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियां सामने आई हैं और सरकार इस मामले में जवाबदेही तय करेगी।</p>
<p>छात्रों ने आरोप लगाए हैं कि स्कैन की गई कॉपियां उनकी हैंडराइटिंग से मेल नहीं खा रहीं और कई उत्तरों की जांच अधूरी दिखाई दे रही है। बढ़ते विवाद के बीच सीबीएसई ने आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास को तकनीकी निगरानी में शामिल किया है। वहीं राहुल गांधी ने मामले में एसआईटी और न्यायिक जांच की मांग की है। फिलहाल सरकार ने छात्रों की शिकायतों के समाधान और रिवैल्यूएशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का भरोसा दिया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 16:39:41 +0530</pubDate>
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                <title>झारखंड राज्यसभा चुनाव: दो सीटों पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, गठबंधन की गणित पर टिकी नजर, भाजपा कर रही एक सीट पर दावा</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून 2026 को मतदान होगा। जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत है। 56 विधायकों के साथ सत्तारूढ़ महागठबंधन का पलड़ा भारी है, जबकि 24 विधायकों वाले एनडीए ने भी प्रत्याशी उतारने का एलान किया है। झामुमो ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) की कोशिश का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jharkhand-rajya-sabha-elections-political-activity-increased-on-two-seats/article-155048"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/tripura-bjp.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड के राज्यसभा की दो सीटों को लेकर राजनीतिक तपिश बढ़ गई है। पार्टी मुख्यालयों में बैठकों का दौर चल रहा है। राज्य की दो सीटों में एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हो जाएगा। वहीं चुनाव आयोग के जारी कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी होगी, 8 जून तक नामांकन और 11 जून तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी। 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना होगी।</p>
<p>राज्यसभा के दोनों सीटों का गणित सीधा नहीं बल्कि गठबंधन और समीकरणों पर निर्भर है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं, जहां एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 वोट जरूरी हैं। मौजूदा स्थिति में सत्तारूढ़ महागठबंधन के पास 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है। इसमें झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दल शामिल हैं। ऐसे में अगर महागठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ता है तो दोनों सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि चुनौती तब पैदा होगी, जब घटक दल अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं। ऐसी स्थिति में वोट बंटने का खतरा बढ़ जाएगा। जीत का समीकरण बिगड़ सकता है।</p>
<p>झामुमो के पास कुल 34 सीट है। जबकि दो सीटों के लिए 56 वोट की जरूरत होगी। ऐसे में अगर झामुमो दो प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उत्तारता है तो एक सीट पर तो जीत पक्की है। लेकिन दूसरी सीट फंस जाएगी। क्योंकि उसके पास सिर्फ छह वोट ही बचेंगे। उसे और 22 वोटों की जरूरत पड़ेगी, जो जुटाना मुश्किल होगा। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि दोनों सीटों पर गठबंधन का प्रत्याशी होगा। गठबंधन की बैठक में इसका फैसला होगा।</p>
<p>वहीं, कांग्रेस की बात करें तो उनके 16 विधायक हैं। एक सीट के लिए 28 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में अगर कांग्रेस अलग से प्रत्याशी उतारती है तो अकेले दम पर जीतना मुश्किल होगा। क्योंकि उसे 12 और विधायकों की जरूरत होगी। ऐसे में गठबंधन में दरार आ सकती है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने कहा कि कांग्रेस-झामुमो एक-एक सीट पर प्रत्याशी देगा। सीएम से जल्दी बात करेंगे। वहीं एनडीए की बात करें तो उनके पास कुल 24 वोट हैं। वहीं अकेले भाजपा के पास 21 वोट हैं। ऐसे में एनडीए प्रत्याशी को जीत के लिए चार वोट कम पड़ेंगे। वैसे जेएलकेएम फिलहाल किसी पार्टी के साथ नहीं है। ऐसे में अगर भाजपा उसे भी साथ लेती है तो भी तय वोट से तीन वोट पीछे रह जाएगी। इससे चुनाव रोचक हो जाएगा।</p>
<p>सोमवार को भाजपा चुनाव समिति की बैठक भी हुई थी। बैठक बाद प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने साफ कहा कि चुनाव में भाजपा अपना प्रत्याशी उतारेगी और जीत जरूर होगी। ऐसे में यहां दूसरे सीट पर चुनाव रोचक हो सकता है। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा की दलगत स्थिति सत्तारूढ़ महागठबंधन के पक्ष में साफ बढ़त दिखाती है, जहां 81 सदस्यीय सदन में एक सीट के लिए 28 वोट जरूरी हैं और सत्ता पक्ष के पास कुल 56 विधायक हैं। झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (4) और भाकपा माले (2) के इस संयुक्त आंकड़े के आधार पर दोनों सीटों पर जीत आसान मानी जा रही है, बशर्ते गठबंधन एकजुट रहे।</p>
<p>दूसरी ओर विपक्ष की स्थिति कमजोर है, जहां भाजपा के 21 और सहयोगियों को मिलाकर कुल 24 विधायक ही हैं, जो एक सीट के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि जेएलकेएम के एक विधायक का रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है। हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पत्र लिख कर सीधे भारत निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक बेहद संवेदनशील पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद वह उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है, जो सीधे तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) और अनैतिक दबाव बनाने की कोशिशों की ओर इशारा करता है।</p>
<p>जिसके बाद भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारना हर राजनीतिक दल का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि भाजपा उम्मीदवार उतारने की घोषणा करती है तो झामुमो को इसमें “लोकतंत्र पर खतरा” क्यों दिखाई देने लगता है? क्या झामुमो यह मान चुका है कि उसके विधायक स्वेच्छा से भी उसके खिलाफ मतदान कर सकते हैं?उन्होंने कहा कि झामुमो का पूरा पत्र डर, भ्रम और राजनीतिक हताशा से भरा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 15:08:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>'कॉकरोच जनता पार्टी' पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर: सीबीआई जांच की मांग; उच्चतम न्यायालय का सुनवाई से इंकार, कहा- इतना भावुकता से न लें</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने "कॉकरोच जनता पार्टी" आंदोलन के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि इसे इतनी भावुकता से न लें। यह व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन अदालत की एक टिप्पणी के बाद फर्जी वकीलों और डिग्रियों के विरोध में शुरू हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/petition-filed-in-supreme-court-on-cockroach-janata-party-demand/article-154971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cockroach1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। यह व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की हालिया "कॉकरोच" टिप्पणी के बाद उभरा था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एन के गोस्वामी ने सोमवार को तर्क दिया कि "कॉकरोच जनता पार्टी" न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी एम पंचोली की पीठ ने जवाब देते हुए कहा, "इसे इतना भावुकता से न लें।"</p>
<p>एक अन्य अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता फर्जी कानून की डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, साथ ही यह भी तर्क दिया कि अदालत में होने वाली बातचीत का व्यावसायिक रूप से दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इस दलील पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "ऐसी कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है। हम देखेंगे।" "कॉकरोच जनता पार्टी" इस महीने की शुरुआत में एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में उभरी, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, विशेष रूप से युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल की। इस आंदोलन की शुरुआत 15 मई को उच्चतम न्यायालय में हुई कार्यवाही से हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बेरोजगार युवा वकीलों के वकालत छोड़कर सोशल मीडिया और आरटीआई सक्रियता की ओर रुख करने पर चिंता व्यक्त की थी।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी, "ऐसे युवा तिलचट्टों की तरह हैं जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन गये हैं।" मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी फर्जी योग्यताओं और फर्जी डिग्रियों के माध्यम से पेशे में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों पर लक्षित थी, न कि सामान्य रूप से बेरोजगार युवाओं पर।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पेपर लीक मामला: कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला, जयराम बोले-केंद्रीय शिक्षा मंत्री दे इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने फरवरी 2024 के परीक्षा विरोधी कानून को विफल बताते हुए आरोप लगाया कि ऊंचे दामों पर 'गेस पेपर' लीक किए गए। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और एनटीए में व्यापक सुधार की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/paper-leak-case-congress-attacks-central-government-jairam-said/article-154984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jairamm-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामलों को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि उत्तर प्रदेश में लगातार हुए पेपर लीक और नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम पारित किया था। कांग्रेस संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि सरकार ने इस कानून को "ऐतिहासिक" बताया था, लेकिन विपक्ष ने उसी समय चेताया था कि यह कानून "गेस पेपर" और अन्य तरीकों से होने वाले पेपर लीक को रोकने में नाकाम रहेगा। </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि केंद्र सरकार का यह कानून पेपर लीक रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि भले ही केंद्र सरकार शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सामने नीट 2026 में पेपर लीक से इनकार कर रही हो, लेकिन कथित तौर पर 'गेस पेपर' ऊंची बोली लगाने वालों तक पहुंचाया गया। पिछले दो वर्षों में लाखों छात्रों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी है। जयराम रमेश ने इस मामले में तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए, एनटीए में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए और सार्वजनिक परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया, प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर मूल्यांकन तक के लिए एक फुलप्रूफ प्रोटोकॉल तैयार किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार छात्रों के हित और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बचाने के लिए ठोस कदम उठाएंगी या फिर मौजूदा स्थिति को जारी रखेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 17:34:35 +0530</pubDate>
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