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                <title>books - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>शिक्षा विभाग से नहीं आई पुस्तकें : कैसे घूमे पढ़ाई का पहिया, स्कूलों में किताबों का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकांश विद्यालयों में ना तो प्रिंटर की व्यवस्था है और ना ही ठीक-ठाक अवस्था में कम्प्यूटर है। शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बच्चों को न तो विषयवस्तु मिल रही है और न ही वे किसी प्रकार की होमवर्क या पुनरावृत्ति कर पा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/how-the-books-not-come-from-the-education-department/article-122448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/shiksha-sankul-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य के शिक्षा विभाग ने इस वर्ष कक्षा एक से 6 तक पाठ्यक्रम में बदलाव किया है, लेकिन स्कूलों में विद्यार्थियों को पुस्तकों नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। प्रदेश में स्कूल खुले एक माह से अधिक समय हो गया है, लेकिन विद्यार्थी बिना पुस्तकों के अध्ययन कर रहे हैं, जबकि 18 अगस्त से उनकी परीक्षाएं (प्रथम परख) शुरू हो जाएंगी। कक्षा 6 की पुस्तकें, तो विद्यालय तक पहुंच गई, लेकिन एक से पांचवीं कक्षा तक की पुस्तकें अभी छपाई के दौर में हैं। विद्यार्थियों के पुस्तकों की बार-बार मांग करने पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शाला दर्पण पोर्टल से पुस्तकों की सामग्री का प्रिंट निकालने का सुझाव दिया है। जबकि अधिकांश विद्यालयों में ना तो प्रिंटर की व्यवस्था है और ना ही ठीक-ठाक अवस्था में कम्प्यूटर है। शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बच्चों को न तो विषयवस्तु मिल रही है और न ही वे किसी प्रकार की होमवर्क या पुनरावृत्ति कर पा रहे हैं।</p>
<p><strong>पुरानी पुस्तकों से पढ़ाने लगे</strong><br />सरकारी स्कूलों में पहले ही नामांकन की परेशानी है, ऐसे में पाठ्यपुस्तकें नहीं होने से कुछ शिक्षकों ने पुरानी पुस्तकों से पढ़ाना शुरू किया है ताकि विद्यार्थियों का सरकारी स्कूलों के प्रति मोह कम ना हो। पुस्तकें नहीं होने अनेक स्कूलों से अभिभावकों ने अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना शुरू किया है। </p>
<p><strong>डेढ़ करोड़ पुस्तकों की डिमांड भेजी</strong><br />शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने कक्षा एक से 6 तक के विद्यार्थियों के लिए एक करोड़, 58 लाख, 15 हजार, 303 पुस्तकों की डिमांड पाठ्य पुस्तक मंडल को भेजी है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />- पुस्तकें शीघ्र ही स्कूलों में भेजी जा रही है और भेजी जाएगी।<br />-सीताराम जाट, निदेशक माध्यमिक एवं प्रारंम्भिक शिक्षा<br />केन्द्र और राज्य सरकार का शिक्षा पर फोकस नहीं है, यदि पाठ्यक्रम बदला है तो पुस्तकें तो जून माह में आ जानी चाहिए। बिन पुस्तकों के बच्चे कैसे अध्ययन करेंगे।<br /><strong>-डॉ.बनय सिंह, शिक्षक नेता, जयपुर</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 11:24:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान विवि : विभागीय पुस्तकालयों की स्थिति बदहाल, धूल फांक रहीं किताबें</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विश्वविद्यालय के कई विभागों में पुस्तकालय सुविधाएं महज नाम की रह गई हैं। पुस्तकालय भवन तो हैं, पर उनमें न तो पुस्तकालयाध्यक्ष हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-status-of-university-departmental-libraries-is-blowing-books/article-112933"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/6622-copy9.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षा और शोध के क्षेत्र में प्रदेश की प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है। विश्वविद्यालय के अधिकांश विभागीय पुस्तकालय इन दिनों बदहाल स्थिति में हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों से नियमित रूप से पुस्तकालय शुल्क तो ले रही है, लेकिन विडंबना यह है कि कई विभागों में पुस्तकालय लंबे समय से बंद पड़े हैं। कई विभागीय पुस्तकालयों के ताले नहीं खुले और पुस्तकें धूल फांक रही हैं। </p>
<p>राजस्थान विश्वविद्यालय के कई विभागों में पुस्तकालय सुविधाएं महज नाम की रह गई हैं। पुस्तकालय भवन तो हैं, पर उनमें न तो पुस्तकालयाध्यक्ष हैं, न सहायक स्टाफ और न ही किसी प्रकार की नियमित व्यवस्था है। पुस्तकालय बंद पड़े होने का मुख्य कारण है पुस्तकालयों में स्टाफ की कमी। कई विभाग ने एजेंसी के माध्यम से आदमी लगा रखा है लेकिन पूर्णकालिक व्यवस्था नहीं होने के कारण पुस्तकालय पूरी तरह से संचालित नहीं हो पाती है। कई विभागों के विभागाध्यक्ष ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण पुस्तकालय पूरी तरह से संचालित नहीं हो पा रही है। अगर स्टाफ की उपलब्धता हो जाएं तो पुस्तकालय पूरी तरह से खुल पाएगी।  पुस्तकालय बंद होने के कारण विद्यार्थियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। जहां उन्हें अपने विभागीय पुस्तकालयों में सहजता से पाठ्य और संदर्भ सामग्री मिलनी चाहिए, वहां वे जानकारी और अध्ययन सामग्री के लिए केंद्रीय पुस्तकालय (सेंट्रल लाइब्रेरी) की ओर रुख करने को मजबूर हैं। यह स्थिति केवल शैक्षणिक व्यवस्था की गुणवत्ता को ही प्रभावित नहीं कर रही, बल्कि विद्यार्थियों के अध्ययन और शोध कार्य में भी बाधा बन रही है। </p>
<p><strong>नवाचार: यहां शोधार्थियों ने किया संचालन</strong><br />पुस्तकालय की समस्या से निपटने के लिए म्यूजियोलॉजी विभाग ने नवाचार किया है। विभाग के 35 शोधार्थी मिलकर पुस्तकालय का ध्यान रखते हैं। शोधार्थियों की मदद से पुस्तकालय का संचालन किया जा रहा है। </p>
<p>हमारे विभाग का पुस्तकालय कई सालों से बंद पड़ा हुआ है। हमें बेसिक किताब लेने के लिए भी सेंट्रल लाइब्रेरी जाना पड़ता है। अगर विभाग की लाइब्रेरी खुल जाती है तो विद्यार्थियों को काफी सुविधा मिलेगी। <br /><strong>-गीता चौधरी, छात्रा, राजस्थान विवि  </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 May 2025 10:28:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा विभाग: 15 दिन में असल में लगे मात्र एक लाख पौधे, 2.5 लाख किताबों में सजे</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा विभाग तय लक्ष्य से चल रहा काफी पीछे,लक्ष्य 3.5 लाख का, लगे मात्र एक लाख।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/education-department--in-15-days--only-one-lakh-plants-were-actually-planted--2-5-lakh-are-kept-in-books/article-84870"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(6)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकार की ओर से चलाए जा रहे सघन पौधारोपण अभियान में शिक्षा विभाग का पौधारोपण लक्ष्य से पीछे चल रहा है। पौधारोपण अभियान के दौरान जिस गति से काम किया जाना है, विभाग उस तेजी से पौधारोपण नहीं कर पा रहा है। ऐसे में 8 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में विभाग द्वारा पौधारोपण के लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाएगा। ये संशय का विषय बना हुआ है। क्योंकि करीब एक महीने से ज्यादा चलने वाले पौधारोपण में लाखों की संख्या में पौधे लगने हैं जिनके लिए स्थान और देखरेख की कमी सबसे अधिक सामने आ रही है।</p>
<p><strong>अभी भी लक्ष्य से 50 फीसदी पीछे</strong><br />अभियान के दौरान कोटा जिला शिक्षा विभाग को करीब 7 लाख पौधे लगाने हैं। इस अभियान की शुरूआत 1 जुलाई से की गई थी। जिसकी माने तो अभी  विभाग द्वारा 50 फीसदी पौधे लग जाने चाहिए। लेकिन 15 दिन बाद भी विभाग केवल 1 लाख से कुछ अधिक पौधे लगा पाया है। ऐसे में 7 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य किस प्रकार से पूरा होगा इसका जवाब विभाग के पास भी नहीं है। दूसरे पहलू की बात करें तो शहर इलाके के कई विद्यालय ऐसे हैं जिनके द्वारा अभी पौधारोपण का स्थान तक चिन्हित नहीं किया जा सका है। इन विद्यालयों का प्रशासन अपने स्तर ही स्थानों का चिन्हित कर कुछ संख्या में पौधारोपण कर रहा है। </p>
<p><strong>पौधारोपण के बाद देखरेख बड़ी समस्या</strong><br />नाम नहीं छापने की शर्त पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार विद्यालय में पौधारोपण करने के बाद उनके देखभाल करने की बड़ी समस्या सामने है। एक विद्यालय द्वारा लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पौधारोपण तो किया जा रहा है। लेकिन उसके उनकी देखरेख और सुरक्षा करने में परेशानी हो रही है। विभाग का आदेश था की पौधारोपण किसी चारदीवारी या फेंसिंग के अंदर की जाए जिससे पशु पौधों को नुकसान ना पहुंचा सकें। लेकिन सूत्रों ने बताया कि कई विद्यालय ऐसे हैं जिनके पास चारदीवारी और फेंसिंग की जगह नहीं है और वे खुले में सड़क किनारे या नहर किनारे पौधारोपण कर रहे हैं। साथ ही विद्यालयों को पौधों की सुरक्षा के लिए किसी तरह के ट्री गार्ड या जाली उपलब्ध नहीं है, जिससे पौधों की सुरक्षा की जा सके। वहीं शिक्षकों का कहना है कि विद्यालयों द्वारा पौधारोपण दूर स्थानों पर किया गया है। ऐसे में उनकी देखभाल करें या बच्चों को पढ़ाएं।</p>
<p><strong>प्रवेशोत्सव से धीमी हुई रफ्तार</strong><br />विद्यालयों में पौधारोपण के साथ प्रवेशोत्सव भी चल रहा है। जहां शिक्षक विद्यालय में प्रवेश बढ़ाने के कार्य में भी लगे हुए हैं। जिसके चलते पौधारोपण और प्रवेशोत्सव में स्टाफ के बंट गया है जिसका असर पौधारोपण पर भी देखने को मिल रहा है। क्योंकि एक विद्यालय से एक दिन में 100 से 150 पौधे ही लगाए जा रहे हैं। जबकि समय पर लक्ष्य तक पहुंचने के लिए यह संख्या 500 तक होना आवश्यक है। </p>
<p><strong>अधिकारी ने अपने पैसे से लगाए ट्री गार्ड स्मैकची ले गए</strong><br />नाम ना बताने की शर्त पर विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि पिछले बुधवार को पौधारोपण अभियान के दौरान उनकी ओर से पौधों की सुरक्षा के लिए पांच ट्री गार्ड लगाए गए थे। लेकिन अगले ही दिन ये ट्री गार्ड पौधों से गायब थे। जब आसपास के कैमरे चैक किए तो पता चला कि इन ट्री गार्ड को स्मैक्ची उखाड़कर ले गए।</p>
<p><strong>पौधारोपण के प्रति विद्यालयों में उदासीनता</strong><br />जिले के शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में पौधारोपण के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने के चलते उनमें उदासीनता बनी हुई है। नाम न बताने की शर्त पर शहरी क्षेत्र के विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय के पास पौधारोपण के लिए कोई स्थान ही नहीं है जबकि विद्यालय में 300 से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विभाग की ओर से भी स्थान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में कुछ बच्चों के माध्यम से आस पास के पार्क और मंदिर में ही कुछ पौधों को लगाया है। नगर निकाय और प्रशासन की ओर से जमीन लिए बोला हुआ है। प्रवेशोत्सव के साथ में पौधारोपण चलने से दोनों कार्य धीमी गति से चल रहे हैं।</p>
<p><strong>इस तरह हो रही है मोनिटरिंग</strong><br />पौधारोपण की मोनिटरिंग करने के लिए शिक्षा विभाग ने हर ब्लॉक स्तर पर टीम बनाई है। जो संबंधित क्षेत्र में आने वाले विद्यालयों के पौधारोपण को वेरिफाई करने का कार्य करती हैं। साथ ही किस विद्यालय में कितने पौधे लगे इसकी जानकारी भी इन टीम के जरीए ही जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं मोनिटरिंग टीम की ओर से कितने विद्यालयों का सर्वे किया जाता है देखने वाली बात होगी।</p>
<p><strong>हर विद्यार्थी को लगाने हैं पांच पौधे</strong><br />कोटा जिले के सरकारी विद्यालयों में 1.5 लाख से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। शिक्षा विभाग के आदेशानुसार औसतन प्रत्येक विद्यार्थी को पांच पौधे लगाने हैं। ऐसे में कोटा जिले में 7 लाख से ज्यादा पौधे लगने हैं। हालांकि कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों को 1 पौधा, कक्षा 6 से 9 तक के विद्यार्थियों को 3 पौधा और कक्षा 10 से 12 तक के विद्यार्थियों को 5 पौधे या परिवार की सदस्यों की संख्या के अनुसार पौधे रोपित करने हैं। </p>
<p>पौधारोपण के लिए स्कूलों को निर्देशित किया हुआ है, समय पर लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश जारी है। जिन विद्यालयों के पास स्थान नहीं है उनके लिए वन विभाग और प्रशासन को स्थान उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा हुआ है। शहरी क्षेत्र में जमीन मिल जाए तो अभियान में और तेजी आएगी। <br /><strong>- के के शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jul 2024 17:14:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>छोटे विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में अलग-अलग किताबें</title>
                                    <description><![CDATA[इस दाम में कक्षा 6 से कक्षा 12वीं तक की किताबें मिलती हैं, उतने में ही केजी की किताबें मिल रही हैं। इससे अभिभावक हैरत में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/different-books-in-schools-for-younger-students/article-75182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer-(1)22.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2024-25 की कक्षाएं शुरू हो गई हैं। दाखिले की प्रक्रिया शुरू होते ही अभिभावकों की जेब खाली होनी भी शुरू होने लग गई है, क्योंकि नए सत्र से स्कूली फीस में 8 से 10 फीसदी तक वृद्धि हो गई। किताबों के दाम बढ़ने से अभिभावकों पर भार बढ़ेगा। बताया जा रहा है कि निजी स्कूलों में कक्षा 5वीं तक विद्यार्थियों को अपने स्तर पर किताबें खरीदने के लिए बोला जा रहा है। कक्षा 6 से कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी की किताबें खरीदी जा रही हैं। छोटे विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग स्कूलों में अलग- अलग किताबें हैं। ये किताबें केवल निश्चित दुकान पर ही मिल पाती हैं। इस दाम में कक्षा 6 से कक्षा 12वीं तक की किताबें मिलती हैं, उतने में ही केजी की किताबें मिल रही हैं। इससे अभिभावक हैरत में हैं।</p>
<p><strong>ऐसे बढ़ेगा अभिभावकों पर भार</strong><br />अगर कक्षा 8 के विद्यार्थी की फीस 30,000 रुपए प्रतिवर्ष मानी जाए तो इस सत्र में 10 फीसदी वृद्धि होने पर फीस में 2000 के बढ़ोतरी होगी। इसी प्रकार प्रतिवर्ष दो से तीन हजार रुपए की किताबों में भी 10 फीसदी की बढ़ोतरी होने के बाद 300 अतिरिक्त देने पड़ेंगे। इसके साथ ही विद्यार्थी की ओर से पहने जाने वाली स्कूल ड्रेस की राशि में भी वृद्धि होगी। शिक्षाविद् डॉ. आरबी कुमावत ने कहा कि निजी स्कूलों में अलग-अलग प्रकार की किताबें लागू करना अनिवार्य नहीं हैं। निजी स्कूलों की फीस इनकी समिति तय करती है। निजी स्कूल फीस बढ़ाने के बाद इसकी सूचना शिक्षा विभाग के पोर्टल पर देंगे और अनुमति मिलने के बाद इसे लागू करेंगे।</p>
<p><strong>फीस बढ़ोतरी से जेब पर बोझ</strong><br />स्कूलों की फीस भी अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ेगी। कई स्कूलों ने शैक्षणिक सत्र 2024-2025 के लिए फीस में बढ़ाई जा रही है। नए सत्र की दाखिला प्रक्रिया भी जल्द शुरू हो गए है। बताया जा रहा है कि कौनसी किताब खरीदनी हैं, यह स्कूल ने निर्धारित किया है। एनसीईआरटी के साथ ही निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदवाई जा रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Apr 2024 11:28:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोटा के कोने में छुपा है ज्ञान का भंडार</title>
                                    <description><![CDATA[इस किताबों के बाजार में दुकान लगाने वाले मोहम्मद फरीद कहते हैं कि इस बाजार में हर रोज करीब 1000 किताबें बिक जाती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-a-treasure-of-knowledge-hidden-in-the-corner-of-kota/article-63759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/gan-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। किताबें, अगर माने तो इंसान के जीवन की सबसे बड़ी साथी हैं जो हमें सही गलत से लेकर इतिहास तक की जानकारी देती हैं। बचपन में स्कूल से लेकर जवानी में कॉलेज तक फिर वृद्धावस्था में भगवान की भक्ति तक किताबें हमारे जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा होती हैं। चाहे पुरानी हो या नई हर किताब में एक कहानी छुपी होती है जो हमारे सामने कई प्रश्नों के उत्तर रखने के साथ कई सवाल खड़ा करती हैं। किताबें बातें करती हैं आज की कल की, खुशियों की दुखों की और जीत की हार की और कोटा में आर्य समाज रोड पर इन्हीं किताबों को छोटा सा बाजार है जहां आपको साहित्य से लेकर भारतीय लोक सेवा अयोग की परीक्षा की तैयारी की किताबें आसानी से मिल जाएंगी। यहां आप किताबें खरीद भी सकते हैं और किताबें बेच भी सकते हैं।</p>
<p><strong>रोज बिकती हैं हजारों किताबें</strong><br />इस किताबों के बाजार में दुकान लगाने वाले मोहम्मद फरीद कहते हैं कि इस बाजार में हर रोज करीब 1000 किताबें बिक जाती हैं। इन किताबों में सबसे अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में काम आने वाली होती उसके बाद साहित्य की किताबें बिकती हैं। लोग दूर दूर से यहां किताबें लेने आते हैं आपको कभी भी किसी भी जरूरत हो और यहां मौजूद ना हो तो बोल जाइए वो किताब आपको अगले दिन ही मिल जाएगी। फरीद ने आगे बताया कि इस मार्केट में छोटी बड़ी मिलाकर किताबों की करीब 20 दुकानें हैं और लगभग हर दुकान में हजारों किताबें मौजूद हैं। बाजार में प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा साहित्य, राजनीति, अर्थव्यवस्था और इतिहास से जुड़ी कई किताबे मिल जाएगी जो भारत ही नहीं दूनिया का भी एक अलग पक्ष बताती हैं।</p>
<p><strong>करीब 50 साल पुराना बाजार</strong><br />एक बुक डिपो के मालिक जितेन्द्र सैनी ने बताया कि ये बाजार करीब 50 साल पुराना है और शुरूआत में यहां सिर्फ 2 ही दुकाने हुआ करती थी। उस जमाने में अधिकतर किताबें पुरानी ही बिका करती थी, क्योंकि नई किताबें मंहगी हुआ करती थी और किताबें पढ़ने का शौक भी कोटा में चुनिंदा लोगों का था। लेकिन समय के साथ लोगों के किताबें पढ़ने का चलन भी बढ़ता चला गया और बढ़ती प्रतियोगिता प्ररीक्षाओं के चलते पाठकों की संख्या भी बढ़ती गई और आज यहां करीब 20 दुकाने हैं। सैनी आगे बताते हैं कि उनके परिवार की वो तीसरी पीढ़ी हैं जो किताबों की दुकान चला रही है। कई ऐसे मौके भी आए जब कोई किताब कोटा में कहीं नहीं मिल रही हो और पाठक को यहां मिल जाती है।</p>
<p><strong>जब भी आया किताब मिली</strong><br />सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे राजकुमार वर्मा ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा यहां इतिहास और साहित्य से जुड़ी किताबें भी यहां मिल जाती हैं। दूसरी ओर यूपीएससी की तैयारी करने वाली मेघा सारास्वत ने बताया कि वो पहले जयपुर में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही थी लेकिन अभी वापस कोटा आ गई हैं। जयपुर में तो यूपीएससी से जुड़ी सारी किताबें मिल जाती हैं लेकिन कोटा में दिक्कत आती है जब यहां के बारे में पता चला तो फिर यहीं से सारी किताबें ले जाती हूं और यहां पूरानी किताबें भी ली जाती हैं तो अच्छा रहता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Dec 2023 17:55:13 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी स्कूलों में घटा नामांकन, इस बार 11 हजार बच्चों ने नहीं लिया एडमिशन</title>
                                    <description><![CDATA[प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई का खर्च आसमान छू रहा है। इसके बावजूद अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने में ज्यादा रूचि दिखा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/enrollment-decreased-in-government-schools--this-time-11-thousand-children-did-not-take-admission/article-60107"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sarkari-school-mein-ghata-namankan,-es-baar-11-hajar-bachchon-ne-nahi-liya-admission-...kota-news-21-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा विभाग के अथक प्रयास के बावजूद सरकारी स्कूलों में नामांकन तेजी से घट रहा है। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 11 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने एडमिशन नहीं लिया। जबकि, वर्तमान में साढ़े तीन महीने चले प्रवेशोत्सव में कोटा जिले के 1 हजार से अधिक स्कूलों में 18 हजार विद्यार्थियों ने ही दाखिला लिया। जबकि, सरकार हर स्तर पर क्वालिटी एजुकेशन देने के साथ ड्रेस से कॉपी-किताबें तक मुफत दे रही है। वहीं, प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई का खर्च आसमान छू रहा है। इसके बावजूद अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने में ज्यादा रूचि दिखा रहे हैं। इससे सरकारी शिक्षण व्यवस्था पर कई सवाल उठते हैं, आखिर, महंगाई के दौर में इतनी सुविधाएं मिलने के बावजूद नामांकन में कमी क्यों हो रही।</p>
<p><strong>पिछले साल 1.63 लाख थी बच्चों की संख्या</strong><br />कोटा जिले में 1 हजार 56 सरकारी विद्यालय है। इनमें से कई स्कूलों में प्री प्राइमरी कक्षाएं भी संचालित हैं। शिक्षा सत्र 2022-23 में नर्सरी से 12वीं तक कुल 1 लाख 63 हजार 411 विद्यार्थियों का नामांकन था। जिसमें बालकों की संख्या 77 हजार 235 तथा बालिकाएं 86 हजार 175 थी। वहीं, 10वीं-12वीं बोर्ड कक्षाओं की बात करें तो कुल 25 हजार 138 विद्यार्थी थे, जिनकी संख्या वर्तमान में कम हो गई।</p>
<p><strong>इस वर्ष 11 हजार से ज्यादा की गिरावट</strong><br />राजकीय विद्यालयों में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 11 हजार 439 विद्यार्थियों का नामांकन कम हुआ है। सत्र 2023-24 में नर्सरी से 12वीं तक के कुल स्टूडेंट्स की संख्या 1 लाख 51 हजार 918 है। जबकि, गत वर्ष 1 लाख 63 हजार 411  था। इतना ही नहीं, पिछले साल की अपेक्षा इस बार बोर्ड कक्षाओं में भी 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन कम हुआ है। </p>
<p><strong>10वीं-12वीं बोर्ड कक्षाओं में भी घटी संख्या</strong><br />सरकारी स्कूलों में बोर्ड कक्षाओं में भी इस बार विद्यार्थियों की संख्या में 3 हजार 370 की गिरावट आई है। सत्र 2022-23 में  कक्षा 10वीं-12वीं में 25 हजार 138 विद्यार्थी थे, जिनमें 10वीं में बालकों की संख्या 5 हजार 708 व बालिकाएं 6 हजार 592 थी। इसी तरह 12वीं में छात्र 5 हजार 861 तथा छात्राओं का नामांकन 6 हजार 977 था। वहीं, सत्र 2023-24 में दोनों कक्षाओं को मिलाकर कुल 21 हजार 768 विद्यार्थी ही रह गए। इसमें 10वीं में बालकों की संख्या 5 हजार 211 तथा बालिकाएं 6 हजार 563 हैं। वहीं, 12वीं बोर्ड में छात्र 4 हजार 394 तथा छात्राओं की संख्या 5 हजार 800 ही रह गई। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />संजय नगर उड़िया बस्ती निवासी छात्र तुफेल अहमद, विभोर मेहरा का कहना है कि स्कूल में शिक्षकों की चुनाव सहित अन्य कार्यों में ड्यूटी लगी रहती है, जिसकी वजह से वे कक्षाएं नहीं ले पाते। समय पर सिलेबस पूरा नहीं होने से रिजल्ट प्रभावित होता है। इसलिए हमने निजी स्कूल में कक्षा 10वीं एडमिशन लिया है। वहीं, 11वीं की छात्रा फिरदौस खान, संतोष कुमारी, अल्का मेहरा का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंटर बनने से स्कूल संचालित नहीं होता। वहीं, शिक्षकों की कमी होने से क्लास नहीं लग पाती। ऐसे में अगले वर्ष 12वीं बोर्ड की बेहतर तैयारी हो सके, इसके लिए प्राइवेट स्कूल में दाखिला लिया है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक</strong><br />बजरंग नगर निवासी ज्ञानदेव नामा का कहना है, सरकारी स्कूल में बच्चों की रिपोर्ट कार्ड पर ठीक से फोकस नहीं किया जाता। जबकि, शिक्षक वेल क्वालिफाइड हैं। लेकिन वे भी कई कामों में उलझे रहते हैं, जिससे बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते। ग्रामीण पुलिस लाइन निवासी भूपेंद्र सिंह कहते हैं, 8वीं पास करने के बाद बेटे का प्राइवेट स्कूल में एडमिशन करवाया है, क्योंकि  स्कूल में पढ़ाई ठीक से नहीं करवाई जाती। अंगे्रजी की कॉपियों में गलत स्पेलिंग को भी कई बार जांच देते हैं। आगे बोर्ड कक्षा है, इसलिए पास के ही निजी स्कूल में पढ़ा रहे हैं।</p>
<p>नामांकन में कमी के एक नहीं कई कारण हो सकते हैं। सरकारी स्कूलों के प्रति वही पुरानी मानसिकता भी बड़ा कारण है।  सरकार क्वालिटी एजुकेशन देने का पूरा प्रयास कर रही है। लेवल-1 व लेवल-2 के शिक्षकों की भर्ती की है। जहां शिक्षकों की कमी है वहां ई-कंटेंट के जरिए पढ़ाया जा रहा है। स्मार्ट क्लास व कम्प्यूटर लैब सहित सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवा रहे हैं। ऐसे में अगले वर्ष नामांकन में वृद्धि देखने को मिलेगी।<br /><strong>- तेज कंवर, संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा कोटा संभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2023 19:12:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कलराज मिश्र ने एसपीपीपीयू की 3 पुस्तकों का किया लोकार्पण</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्यपाल ने कहा कि पुलिस आंतरिक सुरक्षा के साथ अपराध अन्वेषण की जिस संस्कृति से जुड़ी है, उसको इन पुस्तकों से गहरे से समझा जा सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/kalraj-mishra-launched-3-books-of-spppu/article-58452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/untitled-1-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र ने राजभवन में सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ  पुलिस सिक्योरिटी एंड क्रिमिनल जस्टिस जोधपुर की ओर से प्रकाशित बाल तस्करी और बाल श्रम पुलिस हैंड बुक, भारत और संयुक्त राष्ट्र के आलोक में बदलते संदर्भ और विश्वविद्यालय की तीन वर्ष की उपलब्धियों और किए प्रमुख कार्यों पर प्रकाशित 3 महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया।</p>
<p>इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि पुलिस आंतरिक सुरक्षा के साथ अपराध अन्वेषण की जिस संस्कृति से जुड़ी है, उसको इन पुस्तकों से गहरे से समझा जा सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से किए जाने वाले शोध और अनुसंधान का व्यापक जन हित में अधिकाधिक प्रसार किए जाने का आह्वान किया। यूनिवर्सिटी के कुलपति आलोक त्रिपाठी ने लोकार्पित पुस्तकों और पुलिस विश्वविद्यालय की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Oct 2023 10:48:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कम्प्यूटर टीचर तो लगाए, पढ़ाने को किताबें ही नहीं दी</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कक्षा 9वी व 10वीं में कम्प्यूटर शिक्षा मौखिक रूप से दी जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/appointed-a-computer-teacher--did-not-even-give-books-to-teach/article-56444"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/kota-computer-teacher.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सरकार ने साढ़े 6 हजार से ज्यादा कम्प्यूटर अनुदेशक तो लगा दिए लेकिन पढ़ाने के लिए किताबें ही नहीं भेजी। जबकि, स्कूलों में शिक्षण कार्य गत 24 जून से ही शुरू हो चुका है। स्कूलों से मिली जानकारी के अनुसार कम्प्यूटर शिक्षा के हाल बेहाल हैं, पिछले कुछ सालों से स्कूलों में कम्प्यूटर की किताबें नहीं पहुंची हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को स्वयं के स्तर पर ही किताबों की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वहीं, सिलेबस भी तैयार नहीं है। जबकि, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जहां वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक की नियुक्ति हैं, वहां विद्यार्थी कम्प्यूटर को ऑपशनल विषय के रूप में चुन सकते हैं। लेकिन किताबों के अभाव में कई विद्यार्थी परेशान हैं। </p>
<p><strong>कोटा में लगाए 176 कम्प्यूटर शिक्षक</strong><br />कोटा जिले में कुल 194 कम्प्यूटर अनुदेशक लगाए जाने हैं, जिनमें से अभी तक 176 शिक्षकों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। जबकि, 18 अनुदेशकों ने अभी तक स्कूलों में पदस्थापन नहीं किया है। जहां कम्प्यूटर शिक्षक लगे हैं वहां कक्षा 9वीं, से 12वीं तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर की बेसिक शिक्षा दी जा रही है। लेकिन, सिलेबस व किताबें नहीं आने से शिक्षकों व विद्यार्थियों को पढ़ाई में काफी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, शिक्षक पासबुक और नोट्स के जरिए बच्चों को पढ़ा रहे हैं।  </p>
<p><strong>किताबों के इंतजार में विद्यार्थी </strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कक्षा 9वी व 10वीं में कम्प्यूटर शिक्षा मौखिक रूप से दी जा रही है। लेकिन, जिन स्कूलों में कक्षा11वीं में कम्प्यूटर आॅपशनल विषय दिया गया है। वहां भी किताबें नहीं पहुंची हैं, हालांकि कम्प्यूटर प्रायोगिक विषय है लेकिन स्कूल के विद्यार्थियों को किताबों से पढ़ने की आदत होती है, ऐसे में विद्यार्थी किताबों के इंतजार में हैं। शिक्षा विभाग निदेशालय को जल्द ही स्कूलों में किताबें पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। </p>
<p><strong>अधिकतर स्कूलों में खराब पड़े कम्प्यूटर</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर कुछ स्कूलों के प्रिसिंपल व शिक्षकों ने बताया कि सरकार ने कम्प्यूटर अनुदेशक तो लगा दिए लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए किताबें ही मुहैया नहीं करवाई। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल बेसिक शिक्षा ही दे रहे हैं, वहीं कई विद्यालयों में कम्प्यूटर लैब खस्ताहाल में है। कम्प्यूर खराब हो रहे हैं। वहीं, हाल ही में भामाशाहों द्वारा जिन स्कूलों में कम्प्यूटर भेंट किए वहां के शिक्षकों को चुनाव व मोबाइल वितरण ड्यूटी में लगा दिया। जिसकी वजह से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सालों पहले बनाई गई लैब में कम्प्यूटर खराब पड़े हैं, जिन्हें सुधरवाया नहीं गया। इसके अलावा पिछले कुछ सालों से कम्प्यूटर विज्ञान की किताबें स्कूलों में नहीं पहुंची।  </p>
<p><strong>अभी किताबें प्रिंट करवाने का नहीं मिला ऑर्डर</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर क्षेत्रीय पाठ्य पुस्तक मंडल के अधिकारी ने बताया कि  शिक्षा विभाग निदेशालय बीकानेर द्वारा अभी तक पाठ्य पुस्तक मंडल को किताबें  प्रिंट करवाने का ऑर्डर नहीं मिला है। ऐसी संभावना है कि सिलेबस में बदलाव किया हो, इसलिए अभी पुस्तकें छपवाने का ऑर्डर नहीं दिया गया हो। बरहाल, जैसे ही ऑर्डर मिलेगा वैसे ही स्कूलों की आवश्यकतानुसार किताबों का प्रिंट करवाकर वितरण करवा दिया जाएगा। </p>
<p><strong>स्कूलों से आ रही डिमांड</strong><br />सरकारी स्कूलों में अभी तक कम्प्यूटर विषय की किताबें नहीं पहुंची हैं। पाठ्य पुस्तक मंडल जयपुर से जैसे ही मिलेगी, तुरंत स्कूलों तक पहुंचा दी जाएगी। हालांकि स्कूलों से डिमांड आ रही है, जिससे उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया है। <br /><strong>- डॉ. मोहन लाल बैरवा, सहायक निदेशक, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी, समग्र शिक्षा कोटा</strong></p>
<p>स्कूलों में अभी कम्प्यूटर की किताबें नहीं आई है। राजकीय विद्यालय इटावा में इस वर्ष से 11वीं में कम्प्यूटर विषय को आॅपशनल चलाया जा रहा है। किताब की जगह सॉफ्ट फाइल मिली है, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। वहीं, 9वी-10वीं में कम्प्यूटर विषय अनिवार्य नहीं है। हालांकि, बच्चों कम्प्यूटर की सामान्य जानकारी दी जा रही है। <br /><strong>- रामनारायण मीणा, प्राचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय इटावा</strong></p>
<p>सरकार ने जिस उद्देश्य के साथ स्कूलों में कम्प्यूटर अनुदेशक व वरिष्ठ अनुदेशक लगाए हैं वो वर्तमान में पूरा नहीं हो रहा है। क्योंकि, जिन स्कूलों में कम्प्यूटर अनुदेशक हैं, उन्हें शाला दर्पण व विभिन्न तरह की सूचनाएं एकत्रित करने व बनाने के काम में लगा रखा है। जिससे वे बच्चों को कम्प्यूटर जैसे महत्वपूर्ण विषय की शिक्षा नहीं दे पा रहे। वहीं, अधिकतर स्कूलों में अभी तक किताबें ही नहीं पहुंची हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे कैसे पढ़ाई करेंगे। इसके अलावा कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां कम्प्यूटर खस्ताहाल स्थिति में है। उन्हें जल्द से जल्द दुरुस्त करवाया जाना चाहिए। <br /><strong>- मनोज भारद्वाज, वरिष्ठ व्याख्याता, गवर्नमेंट महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम वोकेशनल स्कूल नयापुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Sep 2023 17:21:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जल्द बाजार में आ रही है हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब की नई किताब 'ब्यूटीफुल हेयर ब्यूटीफुल यू'</title>
                                    <description><![CDATA[उनका कहना है की बालों में केमिकल का कम से कम प्रयोग करना चाहिए और बालों को कलर और स्पा में प्रयोग किये जा रहे रासायनिक रंगों से कई बार चेहरे की त्वचा भी काली पड़ सकती है और बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/hairstylist-jawed-habibs-new-book-beautiful-hair-beautiful-you/article-46207"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/शीर्षक-रहित-(630-×-400-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब की नई किताब ब्यूटीफुल हेयर ब्यूटीफुल यू जल्द ही बाजार में आ रही है। मॉरिस स्कूल ऑफ हेयर डिजाइन लंदन में पढ़े और टाइम्स एवं फोब्र्स पत्रिका में स्थान पा चुके भारतीय हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने अपनी किताब के बारे में बताया कि इस किताब में भारतीय परिपेक्ष में बालों के बारे में लोगों के मन में भ्रम और शंकाओं को दूर करने की कोशिश की गई है। बालों की सेहत आदमी की व्यक्तिगत सोच/ मानसिक स्थिति पर ही ज्यादातर निर्भर करती है। उनका कहना है कि बालों की ज्यादातर समस्याएँ स्कैल्प में गन्दगी की वजह से होती हैं और रोज नियमित रूप से स्कैल्प की सफाई करने से बालों की ज्यादातर समस्याएँ होती ही नहीं हैं।</p>
<p>उनका कहना है कि बालों को अलग से पोषण प्रदान करने की परिकल्पना मात्र भ्रम है तथा यह कम्पनियों द्वारा अपने उत्पाद बेचने के लिए मार्केटिंग की रणनीति का हिस्सा है। वास्तव में बालों की सेहत आदमी के सम्पूर्ण स्वास्थ्य से जुडी है और अगर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ है तो त्वचा और बालों की सेहत खुद ही अच्छी हो जाती है और बालों की सेहत को किसी भी व्यक्ति के सम्पूर्ण स्वास्थ्य से अलग करके कभी प्राप्त नहीं किया जा सकता।</p>
<p>उनका कहना है की बालों में केमिकल का कम से कम प्रयोग करना चाहिए और बालों को कलर और स्पा में प्रयोग किये जा रहे रासायनिक रंगों से कई बार चेहरे की त्वचा भी काली पड़ सकती है और बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं। उनका कहना है ज्यादातर लोगों को बालों को कलर करने की सही तकनीक पता नहीं होती जिसकी बजह से उन्हें कलर करने से अनेक नुकसान झेलने पड़ते हैं। उनका कहना है कि बालों को कलर करने के लिए किसी सैलून की सेवाएं लेनी चाहिए और अगर यह महंगा लगे तो बालों को कलर करने के लिए अमोनिया और हाइड्रोजन परऑक्साइड को बराबर मात्रा में मिलाकर बालों पर मात्र आधा घण्टा ही लगाना चाहिए जबकि इससे ज्यादा देर तक रासायनिक पदार्थों को बालों पर लगा रहने से बालों और स्कैल्प को नुकसान हो सकता है। बाल पतले और कमजोर हो जाते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कंघी का चयन करते समय भी बालों की बनाबट को ध्यान में रखना चाहिए और घुंघराले बालों के लिए पतली कंघी का उपयोग करना चाहिए जबकि सीधे बालों के लिए सामान्य लकड़ी की कंघी उचित रहती है। उन्होंने कहा कि हेयर स्टाइलिंग की अवधि बालों की लम्बाई स्वास्थ्य के अनुरूप तय करनी चाहिए। अगर बाल छोटे हों तो यह अवधि पांच मिनट और लम्बे घने बालों को पन्द्रह मिनट तक हेयर स्टाइलिंग की जा सकती है और इससे ज्यादा समय तक हेयर स्टाइलिंग से बालों को नुकसान हो सकता है।</p>
<p>उन्होंने शैम्पू के बारे में भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि स्कैल्प साफ करने के लिए आप रोजाना माइल्ड शैम्पू का उपयोग कर सकते हैं और शैम्पू महंगा साबित हो रहा है तो सामान्य साबुन से भी बालों को साफ किया जा सकता है और दोनों के बराबर ही परिणाम सामने आते है। खादी भण्डार में बिकने बाले सामान्य आर्गेनिक शैम्पू और साबुन बालों के लिए सबसे बेहतर होते हैं और महँगे शैम्पू और साबुन का उपयोग मात्र पैसे की बर्बादी साबित होती है। उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र में सामान्यत प्रयोग में लाये जा रहे तेल को बालों पर उपयोग किया जा सकता है और कहा की उत्तर भारत में सरसों का तेल और दक्षिण भारत में नारियल का तेल बालों के लिए सबसे बेहतर साबित होगा। उन्होंने महंगे खुशबूदार /सुगन्धित तेलों को बालों पर उपयोग न करने की सलाह दी और कहा कि इन तेलों को ट्रीट करके बनाया जाता है जोकि कई बार बालों को नुकसान दे सकते हैं। उनका कहना है की एक बार सफेद हो चुके बालों को मात्र  केमिकल रंगों  के प्रयोग से ही काला किया जा सकता है और बालों को आयुर्वेदिक या अन्य आर्गेनिक तरीकों से काला करने की विधियाँ छलावा मात्र ही साबित होती हैं। सफेद और काले बाल  दोनों के लिए केवल एक जैसे उत्पाद ही बराबर उपयोगी साबित होते हैं और बालों की बनाबट में भिन्नता की बजह से अलग उत्पादों के उपयोग की परिकल्पना पूर्णतय गलत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 May 2023 16:22:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रतिभाओं के लिए प्राउड ऑफ बुक्स ऑफ रिकॉर्ड का होगा प्रकाशन </title>
                                    <description><![CDATA[यह प्राउड ऑफ राजस्थान बुक्स ऑफ रिकॉर्ड, जिस तरीके से देश-विदेश में गिनीज बुक आॅफ रिकॉर्ड लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड है उसी तरीके से राजस्थान की प्रतिभाओं के लिए प्राउड ऑफ राजस्थान बुक्स ऑफ रिकॉर्ड का निर्माण किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/books-of-records-will-be-published-for-talents--says-garg/article-41286"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/66-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मारवाड़ी इंटरनेशनल फेडरेशन(एमआईएफ) के संस्थापक सचिव सीए विजय गर्ग ने बताया कि राजस्थान स्थापना दिवस पर मारवाड़ी इंटरनेशनल फेडरेशन ने निर्णय लिया है कि ऐसी प्रतिभाएं जिन्होंने राजस्थान का नाम रोशन किया है। उन प्रतिभाओं के लिए प्राउड ऑफ राजस्थान बुक्स ऑफ रिकॉर्ड का प्रकाशन होगा। इस रिकॉर्ड बुक में विभिन्न क्षेत्रों जैसे राजनीति, खेल, शिक्षा, बिजनेस, व्यापार, उद्योग, प्रोफेशन, कला एवं साहित्य आदि क्षेत्रों में जिन्होंने राजस्थान का नाम रोशन किया है। उनका रिकॉर्ड इस बुक में रखा जाएगा। यह प्राउड ऑफ राजस्थान बुक्स ऑफ रिकॉर्ड, जिस तरीके से देश-विदेश में गिनीज बुक आॅफ रिकॉर्ड लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड है उसी तरीके से राजस्थान की प्रतिभाओं के लिए प्राउड ऑफ राजस्थान बुक्स ऑफ रिकॉर्ड का निर्माण किया जाएगा। इस रिकॉर्ड में शामिल होने के लिए कोई व्यक्ति, संस्था स्वयं भी आवेदन कर सकती है और फेडरेशन की एक विशेष कमेटी अपने स्वयं के स्तर पर भी ऐसी प्रतिभाओं को पहचान कर उनका नाम इस रिकॉर्ड बुक में डाल सकती है। गर्ग ने बताया कि इस रिकॉर्ड बुक प्राउड ऑफ राजस्थान में राजस्थान के लगभग 251 प्रतिभाओं का रिकॉर्ड रखा जाएगा एवं इस पुस्तक को प्रकाशित कर इस पुस्तक का वितरण किया जाएगा।</p>
<p>राजस्थान के 73 स्थापना दिवस के अवसर पर फेडरेशन के सदस्यों की बैठक हुई, जिसमें यह भी निर्णय लिया गया की मारवाड़ी की पहचान देश-विदेश में व्यापार के क्षेत्र में सर्वाधिक है एवं देश की अर्थव्यवस्था में मारवाड़ी का योगदान सर्वाधिक रहा है। राजस्थान की भौगोलिक स्थिति के अनुसार दूसरे प्रदेशों में राजस्थान के व्यापारी उद्योग-व्यापार के क्षेत्र में आगे रहे हैं एवं आज देश के लगभग हर जिले में राजस्थान के लोगों द्वारा व्यापार के क्षेत्र में अपना योगदान दिया जा रहा है। गर्ग ने बताया कि 21वीं शताब्दी से पहले मारवाड़ीयों का देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 19 प्रतिशत से अधिक योगदान था, लेकिन वर्तमान में यह घटकर लगभग 13 प्रतिशत के आसपास आ गया है। इस अवसर पर मीटिंग में महेश देवड़ा, आरआर रुंगटा, केएल जैन, अमित खाडल, विनय गर्ग, श्रवण गुप्ता, सुशील जालान, विनीत जैन, दिनेश कुमार, अभिषेक शर्मा आदि ने भी अपने विचार रखे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Mar 2023 11:30:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल युग में किताबों का डंका</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ ही सालों पहले लांच हुए किंडल पर लोगों का लगभग टूट पड़ना भी था। लोगों ने किंडल का जिस तरह से हाथोंहाथ स्वागत किया था, उसे देखकर किताबों के बार में यह आतंकित करने वाली टिप्पणी स्वाभाविक ही थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/bookshelf-in-the-digital-age/article-38354"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/site-photo-size-(35).jpg" alt=""></a><br /><p>इस निराशाजनक भविष्यवाणी के पीछे अमेजन द्वारा,कुछ ही सालों पहले लांच हुए किंडल पर लोगों का लगभग टूट पड़ना भी था। लोगों ने किंडल का जिस तरह से हाथोंहाथ स्वागत किया था, उसे देखकर किताबों के बार में यह आतंकित करने वाली टिप्पणी स्वाभाविक ही थी। क्योंकि किंडल के लांच के बाद 2008 से 2010 तक ई-बुक की लोकप्रियता आसमान छू रही थी। इसके बाद भी ई-बुक की अच्छी खासी बिक्री बनी रही। साल 2020 के लॉकडाउन के दौरान ब्रिटेन में ई-बुक की बिक्री में 24 फीसदी और ऑडियो बुक की बिक्री में भी अच्छा खासा उछाल देखा गया। लेकिन जल्द ही डिजिटल क्रांति द्वारा कागजी किताबों को लील लेने की जो भविष्यवाणी की गई थी, वो धुंधलाने लगी। साल 2021 में अमेरिका और ब्रिटेन जैसे दो सबसे बड़े टेक्नो फ्रेंडली देशों में कागजी किताबों की बिक्री ने सभी तरह के तकनीकी फॉमेर्टों में बिकने वाली किताबों से न सिर्फ बाजी मार ली बल्कि फिर से शीर्ष पर काबिज हो गई। कागजी किताबों की तरफ सिर्फ लोगों की बंपर वापसी ही नहीं हुई बल्कि आयरलैंड और यूरोप के कई दूसरे देशों में स्वतंत्र किताबों की दुकानों की संख्या भी काफी बढ़ोत्तरी हुई। साल 2021 का यह सिलसिला 2022 में भी जारी रहा और साल 2023 में भी किताबों के हर तरह के तकनीकी प्रारूपों से कागज की किताबों का कोई मुकाबला नहीं है।</p>
<p>तीन सालों बाद राजधानी दिल्ली में आगामी 25 फरवरी 2023 से शुरू हो रहे विश्व पुस्तक मेले को लेकर भी अगर सूचना के हर प्लेटफोर्म में किताबों की तूफानी चर्चा हो रही है तो समझा जा सकता है कि किस तरह से तमाम डिजिटल क्रांति के शोरशराबे के बीच कागजी किताबों का डंका बज रहा है? कागज की किताबों में छपने का जो रोमांच है और पाठकों के लिए इन किताबों को पढ़ने का जो अनिर्वचनीय सुख है, उसमें किसी तरह की कोई कमी देखने को नहीं मिल रही। कुछ साल पहले जरूर कई लोगों को लगा था कि नई पीढ़ी का कागज की किताबों से वैसा रिश्ता नहीं बनेगा, जैसा रिश्ता पुरानी पीढ़ियों का रहा है। लेकिन कुछ साल गुजरने के बाद ये अनुमान गलत साबित हो गये हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि आज किताबों की उपलब्धता, कई प्रारूपों में होने के कारण पाठकों तक इनकी पहुंच, पहले से ज्यादा आसान हुई है और अगर पढ़ने की गुणवत्ता की बजाय पढ़ने की गतिविधि को देखा जाए, तो देखने और निहारने के तमाम आरोपों के बावजूद आज भी पढ़े जाने की गतिविधि सबसे ज्यादा मजबूत है। </p>
<p>कागज की किताब के साथ पाठक एक खास तरह के स्वामित्व और अपनत्व की भावना महसूस करता है। किसी भी तकनीक के साथ दिल का वह ठहरा हुआ या कहें स्थायी रिश्ता नहीं बन पाता, जो रिश्ता कागज की किताबों को हाथ पर लेने में महसूस होता है। हम चाहे लैपटॉप में किताब पढ़ रहे हों या आईपैड में, एक आशंका हमेशा बनी रहती है कि किसी भी क्षण किसी तकनीकी वजह से यह पढ़ना बाधित हो सकता है, किसी भी पल यह किताब गायब हो सकती है। जबकि हाथ में पकड़ी गई कागज की किसी किताब को लेकर दिमाग में यह कभी ख्याल ही नहीं आता। कागज की किताब उसे हर पढ़ने वाले को अपनी स्थायी पूंजी लगती है। उसे लेकर एक ऐसा स्वामित्वबोध महसूस होता है जिसकी कल्पना किसी तकनीकी डिवाइस से संभव नहीं है। कागज की किताब को लेकर लगता है कि उसे जब मन करेगा, कहीं से भी पढ़ने लग जाएंगे। जबकि तकनीकी किताबों को पढ़ते समय उनके अस्तित्व को लेकर लगातार एक मानसिक कवायद से जूझना पड़ता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/bookshelf-in-the-digital-age/article-38354</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Feb 2023 11:55:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बच्चों पर किताबों और भारी बस्तों का बोझ कम करने की नीति, प्रदेश में नो बैग डे की शुरुआत </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शनिवार को नो बैग डे यानी की बिना बस्ते के स्कूल की शुरुआत हो गई। शहर में प्रतियोगी परीक्षा होने से ज्यादातर बड़े स्कूल में अवकाश है, लेकिन आठवीं तक के अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित हुए विद्यालय के स्टूडेंट्स ने शनिवार को इस अनोखे दिन का खूब आनंद लिया और जहां बच्चों को राजस्थान और भाषा कौशल के बारे में बताया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/policy-to-reduce-the-burden-of-books-and-heavy-bags/article-14018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/bag-bojh_school.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शनिवार को नो बैग डे यानी की बिना बस्ते के स्कूल की शुरुआत हो गई। शहर में प्रतियोगी परीक्षा होने से ज्यादातर बड़े स्कूल में अवकाश है, लेकिन आठवीं तक के अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित हुए विद्यालय के स्टूडेंट्स ने शनिवार को इस अनोखे दिन का खूब आनंद लिया और जहां बच्चों को राजस्थान और भाषा कौशल के बारे में बताया गया। भाषा कौशल में अंग्रेजी से हिंदी ट्रांसलेशन, नए मीनिंग, संस्कृत से हिंदी की जानकारी दी गई। टीचर भी इस पहल को <span style="color:#000000;">सकारात्मक </span>मानते हैं, उनका कहना है कि 6 दिन शिक्षण के बाद 1 दिन बिना किताबों के बातों-बातों और खेल-खेल में होने वाली पढ़ाई उनके मन और मस्तिष्क पर ज्यादा प्रभाव डालती है।</p>
<p><strong> बस्ते का बोझ कम करने की कवायद:</strong> केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों को स्कूल बैग का बोझ हल्का करने की गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार बच्चे के स्कूल बैग का बोझ उसके वजन के 10 फीसदी तक होना चाहिए। सप्ताह में एक दिन बिना बैग भी इसी कवायद का हिस्सा है। देश में राजस्थान से पहले मणिपुर, उत्तर प्रदेश भी सप्ताह में एक दिन नो बैग डे लागू कर चुका है।</p>
<p><strong> 2 साल बाद फिर बस्ता मुक्त हुए हम:</strong> राज्य सरकार ने 2020 में इसकी घोषणा की थी, जिसके अनुसार नए सत्र से अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को शनिवार को बस्ता लेकर स्कूल नहीं जाना है। इसलिए सभी सरकारी स्कूलों में शनिवार को नो बैग डे मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 20 फरवरी, 2020 को बजट भाषण के दौरान शिक्षा विभाग से संबंधित घोषणाओं में हफ्ते में एक दिन शनिवार को सरकारी स्कूलों में बैग नहीं ले जाने व उस दिन कोई अध्यापन कार्य नहीं किए जाने संबंधी फैसले का ऐलान किया था। सत्र 2022-23 में सप्ताह में प्रत्येक शनिवार को बस्ता मुक्त दिवस मनाया जा रहा है।े</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Jul 2022 15:15:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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