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                <title>division - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>वन्यजीवों के अन्तिम संस्कार के लिए बनाया यंत्र, पर्यावरण की दृष्टि से भी सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के पहले मिनी शवदाह गृह से रुकेगी अंग तस्करी , अवशेषों की खाद से महकेगी विभाग की नर्सरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/device-developed-for-the-dignified-cremation-of-wildlife%E2%80%94also-environmentally-safe/article-149692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। क्षेत्रीय वन्य जीव मंडल ने वन्यजीवों के सम्मानजनक निस्तारण की दिशा में एक अनूठी पहल की है। जिले में अब घायल वन्यजीवों और पक्षियों की मृत्यु के बाद उनके शवों को जमीन में दफनाने की पारंपरिक मजबूरी खत्म होगी। विभाग ने एक विशेष 'ओवननुमा शवदाह गृह' तैयार किया है, जो न केवल पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित है, बल्कि वन्यजीवों के अंगों की तस्करी को रोकने में भी अभेद्य कवच साबित होगा।</p>
<p><strong>विभाग ने बनाया प्रदेश का पहला मिनी शवदाह गृह</strong><br />प्रदेश में पहली बार अन्तिम संस्कार के लिए बने यंत्र से अंतिम संस्कार होगा। नयापुरा स्थित क्षेत्रीय वन्य जीव कार्यालय कोटा ने इसे बनाकर तैयार कर लिया है। जिसमें जिले भर से लाये गये घायल व इलाज के दौरान दम ताेड़ने वाले जानवराें, पक्षीयों का अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। कोटा मेें इस पहल की शुरूआत जल्द ही होने वाली है।</p>
<p><strong>अहमदाबाद से मिली प्रेरणा से बनाया मिनिएचर</strong><br />डीसीएफ (वाइल्डलाइफ) अनुराग भटनागर ने बताया कि गुजरात दौरे के दौरान उन्होंने देखा कि वहां हाथियों जैसे बड़े जानवरों के लिए विशाल शवदाह गृह बने हुए हैं। जिनमें वाहन से लाये गये बड़े से बड़े जानवर को सीधे ही रखा जा सकता है। राजस्थान में फिलहाल इसके लिए अलग से बजट उपलब्ध नहीं था। इसलिए कोटा टीम ने उसी तकनीक का एक मिनिएचर मॉडल स्थानीय स्तर पर तैयार करवाया। नयापुरा स्थित वन्य जीव कार्यालय में जमीन की कमी और बारिश में दुर्गंध की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।</p>
<p><strong>गैस आधारित कम खर्चीला व सुरक्षित</strong><br />इसे बनाने में विभाग के एडेप्टिव स्कीम से बचे पैसे से कुल 3.25 लाख रूपये की लागत में ही इसे तैयार कर लिया। इस शवदाह यंत्र की बनावट बेहद मजबूत है। जिसे आधुनिक और वैज्ञानिक मापदंडों पर तैयार किया गया है। इसमें अन्य छोटे जीवो के अलावा भेड़िया ,लोमड़ी ,बन्दर , व्यस्क चिंकारा , हिरण जैसे जानवरों का निस्तारण किया जा सकेगा। गैस आधारित संचालन प्रक्रिया को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए इसमें तीन गैस कनेक्शन का आवेदन किया गया है, ताकि शव को पूरी तरह भस्म किया जा सके।</p>
<p><strong>6 एमएम की लोहे की चादर से निर्मित</strong><br />विशाल आकार यह ओवननुमा यंत्र करीब 9 फीट लंबा, पौने चार फीट चौड़ा और साढ़े चार फीट ऊंचा है। इसका ढ़ांचा मोटी चद्दर की दोहरी परत से बनी हैं, जिससे इसकी कुल मोटाई 4 इंच हो जाती है। जिसमे एक साथ 6 बर्नर से ऐ साथ गैस ड़ाली जाती है यह संरचना उच्च तापमान को बर्दाश्त करने में सक्षम है।</p>
<p><strong>पर्यावरण संरक्षण तस्करी पर रोक</strong><br />परंपरागत रूप से जानवरों को जमीन में दफन करने पर हड्डीयों व अंगों की चोरी या दुरुपयोग का जोखिम बना रहता है। इस मशीन में शव पूरी तरह राख में तब्दील हो जाएगा, जिससे तस्करी की संभावनाएं शून्य हो जाएंगी। साथ ही, बारिश के मौसम में जमीन से आने वाली दुर्गंध और संक्रमण का खतरा भी टल जाएगा।</p>
<p><strong>वेस्ट टू वेल्थ हड्डियों के पाउडर से बढ़ेगी वन भूमि की उर्वरता</strong><br />चिड़ियाघर और बायोलॉजिकल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों के भोजन के बाद रोजाना करीब 80 से 85 किलो हड्डियां बचती हैं। पर्यावरण नियमों के तहत इन्हें बाहर नहीं फेंका जा सकता। अब इन हड्डियों को इस भट्टी में जलाने के बाद क्रशर मशीन से पीसा जाएगा। इस पाउडर का उपयोग विभाग की नर्सरी और वन भूमि में खाद के तौर पर होगा, जिससे पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलेगा और जानवरों के अवशेषों का कोई दुरुपयोग नहीं हो सकेगा।</p>
<p>बजट की कमी के बावजूद हमने वन्यजीवों के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए यह यंत्र तैयार करवाया है। इससे न केवल स्वच्छता रहेगी, बल्कि बहुमूल्य वन्यजीव अंगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीसीएफ वाइल्डलाइफ, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:16:39 +0530</pubDate>
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                <title>10वीं और 12वीं में नहीं मिलेगी डिस्टिंक्शन और डिवीजन</title>
                                    <description><![CDATA[ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने दसवीं और बारहवीं परीक्षा की डेटशीट रिलीज करने से पहले एक अहम फैसला किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/distinction-and-division-will-not-be-available-in-10th-and/article-63234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/cbse.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने दसवीं और बारहवीं परीक्षा की डेटशीट रिलीज करने से पहले एक अहम फैसला किया है। बोर्ड ने आगामी 10वीं और 12वीं परीक्षाओं 2024 के संबंध में जारी एक अहम सूचना में कहा है कि बोर्ड दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में कोई ओवरऑल डिवीजन या डिस्टिंक्शन नहीं देगा। </p>
<p>यह जानकारी परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज की ओर से दी गई है। सीबीएसई ने जारी नोटिस में कहा है कि को बोर्ड परीक्षाओं में स्टूडेंट्स के मार्क्स कैलकुलेट करने के लिए क्या क्राइटेरिया रहेगा।</p>
<p>इस संबंध में बोर्ड को कई अनुरोध प्राप्त हो रहे थे। इस बारे में यह सूचित किया जाता है कि परीक्षा उपनियमों के अध्याय-7 के सब सेक्शन 40.1 (111) के अनुसार, कोई समग्र डिवीजन/ डिस्टिंक्शन या एग्रीगेट नहीं दिया जाएगा। </p>
<p><strong>15 फरवरी से शुरू होनी है परीक्षाएं </strong><br />केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से सीबीएसई दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं फरवरी में आयोजित होनी है। यह एग्जाम 15 फरवरी, 2024 से शुरू होंगे जो कि अप्रैल तक चलेंगे। इसके लिए जल्द ही डेटशीट जारी होने की उम्मीद है। हालांकि, अभी बोर्ड ने इस संबंध में कोई जानकारी तो नहीं दी है लेकिन उम्मीद है कि इस महीने बोर्ड टाइमटेबल जारी कर देगा। इसलिए स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपनी तैयारी पूरी रखें, जिससे उन्हें एग्जाम की तैयारी के दौरान कोई मुश्किल न आए। </p>
<p><strong>तो प्रवेश देने वाली संस्था लेगी फैसला</strong><br />यदि किसी उम्मीदवार ने 5 से अधिक विषयों की पेशकश की है, तो सर्वोत्तम 5 विषयों को निर्धारित करने का निर्णय प्रवेश देने वाली संस्था या नियोक्ता द्वारा लिया जा सकता है। यदि उच्च शिक्षा या रोजगार के लिए अंकों का प्रतिशत आवश्यक है तो गणना, यदि कोई हो, प्रवेश संस्थान या नियोक्ता द्वारा की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Dec 2023 10:20:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉमर्स से उठा विश्वास, संभाग के आठ कॉलेजों में 60 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवेश प्रक्रिया के दो माह बीतने के बाद भी महज 40 प्रतिशत सीटें भर पाई हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/confidence-lost-in-commerce--more-than-60-percent-seats-vacant-in-eight-colleges-of-the-division/article-56821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/commerce-se-utha-viswas,-sambhag-k-8-colleges-mei-50-fisadi-se-zyada-seats-khaali...kota-news..11.9.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी कॉलेजों में वाणिज्य शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों का रुझान दिनोंदिन घटता जा रहा है। क्वालिटी एजुकेशन का अभाव व रोजगार के सीमित होते अवसर के चलते स्टूडेंट्स कॉमर्स लेने से कतरा रहे हैं। हालात यह हैं कि कोटा संभाग के 8 राजकीय महाविद्यालयों में वाणिज्य संकाय की 60 फीसदी सीटें खाली रह गई। प्रवेश प्रक्रिया के दो माह बीतने के बाद भी महज 40 प्रतिशत सीटें भर पाई हैं। कॉमर्स के प्रति विद्यार्थियों की बेरुखी से शिक्षाविदें ने चिंता जताई।</p>
<p><strong>1776 सीटें रह गई खाली</strong><br />हाड़ौती के 8 राजकीय महाविद्यालय जिनमें कॉमर्स संकाय संचालित हैं। जहां बीकॉम प्रथम वर्ष की कुल 2 हजार 940 सीटें हैं। जिनमें से 1 हजार 64 सीटें ही भर सकी हैं। जबकि, 1 हजार 776 सीटें खाली रह गई। जबकि, संभाग के सबसे बड़े गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेजों की स्थिति और भी खराब है। राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में सबसे ज्यादा 749 सीटें खाली रह गई। वहीं, जेडीबी कॉमर्स कॉलेज में 588 छात्राओं ने एडमिशन ही नहीं लिया। </p>
<p><strong>बूंदी गर्ल्स कॉलेज में एक भी एडमिशन नहीं</strong><br />हाड़ौती के बूंदी गर्ल्स कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष में एक भी छात्रा ने एडमिशन नहीं लिया। जबकि, प्रथम वर्ष में 100 सीटें है, जो पूरी तरह से खाली है। वाणिज्य शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों की बेरुखी से कॉलेज शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खडेÞ हो गए। शिक्षाविदों का कहना है, सरकारी शिक्षण संस्थानों में साधन-संसाधनों का अभाव व रोजगार के घटते अवसर के कारण विद्यार्थी कॉमर्स से दूर भाग रहे हैं। </p>
<p><strong>क्वालिटी एजुकेशन तो दूर पास होना ही चुनौती</strong><br />कोटा संभाग में करीब सात राजकीय पीजी महाविद्यालयों में कॉमर्स संकाय संचालित किया जा रहा है। जिनमें कोटा गवर्नमेंट कॉलेज, जेडीबी वाणिज्य, बूंदी, बारां, रामगंजमंडी, भवानीमंडी व झालावाड़ के एक-एक कॉलेज शामिल हैं। इन महाविद्यालयों में से केवल बारां और जेडीबी वाणिज्य कॉलेज में ही एक-एक बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की फैकल्टी है। शेष अन्य कॉलेजों में स्थाई शिक्षक नहीं है। ऐसे में इन महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन मिलना तो दूर उनका एग्जाम में पास होना ही चुनौती बन गया। हालात यह हैं कि विद्यार्थियों को प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में व्यापार प्रबंधन का पेपर बिना पढ़े ही देना पड़ा था। अब जुलाई के प्रथम सप्ताह में सेकंड सेमेस्टर के एग्जाम होना है। ऐसे में शिक्षक के बिना कैसे विद्यार्थियों की तैयारी होगी। </p>
<p><strong>6 कॉलेजों में व्यापार प्रबंधन के शिक्षक ही नहीं</strong><br />हाड़ौती के 8 कॉलेजों में से मात्र दो कॉलेजों में ही बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की एक-एक नियमित फैकल्टी है। इनमें जेडीबी कॉमर्स कोटा व राजकीय बारां महाविद्यालय शामिल है। इसके अलावा किसी भी कॉलेज में न तो नियमित फैकल्टी है और न ही विद्या संबल योजना में। ऐसे में विद्यार्थियों की क्लासें ही नहीं लग पाती। मजबूरन बच्चों को कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। समय पर कोर्स पूरे नहीं हो पाते। जबकि, कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय की लचर व्यवस्था के कारण विद्यार्थियों का कॉमर्स के प्रति रुझान घटता जा रहा है। </p>
<p><strong>विद्यार्थियों की पीड़ा- </strong><strong>सिलेबस अधूरे, पास होना ही चुनौती</strong><br />गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज कोटा के स्टूडेंट्स सुरभी व आशुतोष जादौन ने बताया कि वर्तमान में कॉलेजों में न तो पढ़ाने को शिक्षक है और न ही शैक्षणिक माहौल। वहीं, छात्रों को रोजगार से जोड़ने की भी कोई कार्ययोजना भी नहीं है। हालात यह हैं, इंडस्ट्री में किस स्किल की डिमांड है यह बताने वाला भी कोई नहीं है। कॉलेजों के विद्यार्थियों का पास होना ही मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>65 प्रतिशत कोर्स रह गया था अधूरा</strong><br />छात्र अजय व सुरेंद्र ने बताया कि बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त हैं। गत वर्ष एमकॉम प्रिवियस के प्रथम सेमेस्टर का 65 प्रतिशत से ज्यादा सिलेबस अधूरा रह गया था। वर्तमान में भी बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन पढ़ाने को शिक्षक नहीं है। विद्यार्थी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। </p>
<p><strong>70 किमी से अपडाउन फिर भी क्लास नहीं</strong><br />गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज की छात्रा प्रियंका का कहना है कि वे प्रतिदिन रावतभाटा से 70 किमी का सफर कर कॉलेज आती हैं, इसके बावजूद व्यापार प्रबंधन की क्लास नहीं मिलती।  वहीं, रोजगार से जोड़ने के लिए प्लेसमेंट कैम्प भी नहीं लगते और न ही इंडस्ट्री विजिट करवाई जाती है।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं शिक्षाविद्</strong><br />कॉमर्स के प्रति रुझान कम होने का सबसे प्रमुख कारण रोजगार के घटते अवसर हैं। बीकॉम-एमकॉम के बाद नौकरी के क्या अवसर हैं, छात्रों को इसकी जानकारी नहीं है।  प्रतियोगी परीक्षाओं में भी वाणिज्य वर्ग के लिए कोई मौका नहीं  है। विद्यार्थी शिक्षक बनना चाहते हैं लेकिन उन्हें बीएड करने के लिए पात्र नहीं माना जाता। जबकि, अकाउंटेंट भर्ती परीक्षाओं में आर्ट्स-साइंस के स्टूडेंट्स भी शामिल हो जाते हैं, जिससे उनके हाथ से सीट निकल जाती है। उच्च शिक्षा हो या प्रतियोगी परीक्षा हर जगह निराशा ही मिल रही है। ऐसे में स्टूडेंट्स कॉमर्स लेने के बजाए आर्ट्स लेना पसंद कर रहे हैं। वहीं, कॉलेजों में साधन-संसाधनों व शिक्षकों का अभाव भी बड़ी वजह है।<br /><strong>- सीमा राठौर, प्राचार्य, राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय कोटा</strong><br /><br />कॉमर्स के प्रति विद्यार्थियों का रुझान स्कूली शिक्षा से ही कम होता जा रहा है। क्योंकि, विद्यालयों में वाणिज्य से संबंधित विषय नहीं है।  10वीं पास करने के बाद छात्रों के सामने सभी विषय नए होते हैं। कोरर्पोरेट जगत में कॉमर्स की जरूरत बढ़ रही है, जिससे विद्यार्थियों को काउंसलिंग के जरिए अवगत कराने की जरूरत है। वहीं, कक्षा 6 से ही कॉमर्स पढ़ाई जानी चाहिए तभी छात्रों का रुझान बढ़ेगा। शिक्षकों की कमी दूर होना जरूरी है। <br /><strong>- डॉ. रघुराज सिंह परिहार, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, कॉलेज शिक्षा </strong></p>
<p>रोजगार को लेकर छात्रों व अभिभावकों का साइंस के प्रति माइंससेट है, जिसे बदलने की जरूरत है। कॉमर्स रोजगार देने और दिलाने वाला विषय है। दिल्ली-मुंबई में कॉमर्स का क्रेज है। स्कूली व कॉलेज शिक्षा में क्वालीटी एजुकेशन का अभाव है। आज भी परम्परागत पाठ्यक्रम चल रहे हैं, जिन्हें इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुरूप मोडराइजेशन करने की जरूरत है।  कोटा में वाणिज्य शिक्षा के डेडीकेटेड गवर्नमेंट कॉलेज होने के बावजूद सीटें खाली रहना चिंताजनक है। <br /><strong>-सीए शशांक गर्ग, पूर्व चैयरमेन, सीए ब्रांच कोटा </strong></p>
<p>पाठ्यक्रम में स्किल डवलपमेंट प्रोग्राम शामिल किया जाना चाहिए। कॉमर्स इंडस्ट्री के एक्सपर्ट को बुलाकर गेस्ट लेक्चर करवाए जाना जरूरी है ताकि विद्यार्थियों को पता लगे कि किन किन क्षेत्रों में उनके लिए रोजगार है। वहीं, किताबी ज्ञान के अलावा इंडस्ट्री विजिट करवाकर प्रैक्टिकली समझ विकसित की जाए तो घटता रुझान फिर से बढ़ाया जा सकता है। सीए इंस्टीट्यूड को कॉलेजों व स्कूलों में सेमिनार कर विद्यार्थियों को जागरूक करना चाहिए। <br /><strong>- सीए बद्रीविशाल माहेश्वरी, पूर्व अध्यक्ष, सीए ब्रांच कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Sep 2023 15:29:33 +0530</pubDate>
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                <title>संभाग में 1.36 लाख वोट ज्यादा मिले फिर भी सीटों में बराबरी पर कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[आरएलपी से नागौर में भाजपा को बड़ा घाटा हुआ था। यहां दो सीटों पर आरएलपी जीती थी, लेकिन वोटों के समीकरण अन्य 6 सीटों पर बिगाड़े थे। इसके चलते इन सीटों पर कांग्रेस जीतकर आई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/got-136-lakh-more-votes-in-the-division-yet-congress/article-47255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/630-400-size-(8)1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पीएम नरेन्द्र मोदी बुधवार को केन्द्र सरकार के नौ साल पूरे होने पर भाजपा के गढ़ माने जाने वाले अजमेर में पार्टी की बड़ी सभा के साथ राजस्थान चुनावों का शंखनाद करने जा रहे हैं। दो लाख की भीड़ लाने का दावा है, लेकिन संभाग की सीटों में भाजपा से कांग्रेस कमत्तर नहीं है। संभाग के चार जिलों अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर और अजमेर में कुल 29 विधानसभा सीटों में कांग्रेस और भाजपा दोनों की 13-13 सीटें हैं। जबकि भाजपा का वोट शेयर पिछले चुनावों में कांग्रेस से 1.36 लाख ज्यादा रहा था। संभाग में भाजपा की बड़ी चिंता नागौर और टोंक जिला है। दोनों जिलों में भाजपा के पास कुल 14 सीटों में से केवल 3 पर ही विधायक हैं। बाकी की 9 सीटों पर कांग्रेस है। आरएलपी से नागौर में भाजपा को बड़ा घाटा हुआ था। यहां दो सीटों पर आरएलपी जीती थी, लेकिन वोटों के समीकरण अन्य 6 सीटों पर बिगाड़े थे। इसके चलते इन सीटों पर कांग्रेस जीतकर आई थी। </p>
<p><strong>दो लाख की भीड़ लाने का दावा</strong><br />भाजपा हालांकि प्रदेशभर से दो लाख लोगों की भीड़ सभा में लाने का दावा कर रही है, लेकिन बड़ी भीड़ का टारगेट संभाग के चार जिलों से ही रखा गया है। अजमेर और भीलवाड़ा में भाजपा अपने गढ़ को बचाने और नागौर-टोंक में कांग्रेस-आरएलपी को कमजोर करने के लिए मोदी की सभा से माहौल बनाने की तैयारी में है। ऐसे में नागौर और टोंक जिले के भाजपाइयों को बड़ी संख्या में लोग लाने का टारगेट दिया गया है। मोदी की सभाओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी ने इन जिलों के पदाधिकारियों से गहन बैठकें भी की थी। </p>
<p><strong>चुनावों में चेहरा मोदी, उपलब्धियां केन्द्र के काम </strong><br />चुनावी रणभेरी ही राजस्थान में केन्द्र सरकार के कामों और मोदी के चेहरे से बजा रही है। साफ है कि मोदी की पापुलेरिटी को भुनाने में कोई कोर कसर चुनावों में नहीं छोड़ी जाएगी। वहीं केन्द्र सरकार के कामों को लेकर सभा स्थल पर एक किमी रास्ते में उपलब्धियों के बैनर-पोस्टर-होर्डिंग्स लगाने से साफ है कि विधानसभा चुनावों में केन्द्र की उपलब्धियों को फ्रंट में रखकर भाजपाई जनता के बीच जाएंगे। इसके पीछे रणनीति केवल राजस्थान के ही चुनाव नहीं, बल्कि इसके छह माह बाद लोकसभा चुनावों का भी साथ-साथ माहौल और वोट बनाना है। सीपी जोशी ने अपनी ताजपोशी के साथ ही यह साफ कर दिया था कि वे मोदी-केन्द्र के कामों से ही चुनाव मैदान में जाएंगे। </p>
<p><strong>मोदी को प्रदेश से भेजे मुद्दे, कांग्रेस को अंतकर्लह पर घेरेंगे</strong><br />सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय नेतृत्व ने सभा से पूर्व राजस्थान की गहलोत सरकार के खिलाफ मुद्दों और कांग्रेस के आपसी अंतकर्लह की सारी अपडेट मांगी गई थी। ऐसे में मोदी की सभा में केन्द्र की उपलब्धियां गिनाने के साथ ही कांग्रेस के आपसी झगड़े और गहलोत सरकार की विफलताओं पर घेरने की तैयारी है। </p>
<p><strong>जिलों में यूं रहा था वोट शेयर</strong><br />पिछले चुनावों में भाजपा को अजमेर में कांग्रेस से 72398, भीलवाड़ा में 153609 वोट ज्यादा मिले थे, लेकिन उसके उलट नागौर में कांग्रेस से 84730 और टोंक में 89758 वोटों से पीछे रही थी। संभाग में कुल वोटों में भाजपा को करीब 20.46 लाख वोट और कांग्रेस को 19.10 लाख वोट मिले थे।</p>
<p><strong>मंडल स्तर के भाजपाई आएंगे </strong><br />सभा में भाजपा ने प्रदेशभर से मंडल स्तर तक के पदाधिकारियों को भी बुलाया है ताकि वे मोदी की कहीं गई बात को अपने क्षेत्र में आगामी एक माह भाजपा के चलने वाले महासंपर्क अभियान में इन्हें घर-घर पहुंचा सकें। गौरतलब है कि इस अभियान में भाजपा केन्द्र की उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 10:33:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>व्यापार प्रबंधन पढ़े बिना पूरी हो रही वाणिज्य शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के 32 कॉलेजों में से मात्र दो कॉलेजों में ही बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की एक-एक नियमित फैकल्टी है। इनमें जेडीबी कॉमर्स व राजकीय बारां महाविद्यालय  शामिल है। इसके अलावा किसी भी कॉलेज में न तो नियमित फैकल्टी है और न ही विद्या संबल योजना में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/commerce-education-being-completed-without-studying-business-management/article-43984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/vyapar-prabandhan-padhe-bina-poori-ho-rahi-vanijya-shiksha..kota-news..27.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग के सबसे बड़े गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज में वाणिज्य शिक्षा का बुरा हाल है। यहां क्वालिटी एजुकेशन मिलना तो दूर विद्यार्थियों का एग्जाम में पास होना ही चुनौती बन गया। कॉलेज के बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में 12 पद स्वीकृत हैं लेकिन 5 साल से एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है। लंबे समय से यहां बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की क्लासें नहीं लग रही। जबकि, कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा दो माह बाद जुलाई में होनी है। ऐसे में क्लासें नहीं लगने से विद्यार्थी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। कॉलेज प्रशासन भी समस्या का लेकर गंभीर नहीं है। विद्यार्थी फर्स्ट सेमेस्टर की तरह सैकंड सेमेस्टर में भी सिलेबस अधूरा रहने को लेकर चिंतित हैं। </p>
<p><strong>संभाग में दो ही शिक्षक</strong><br />हाड़ौती के 32 कॉलेजों में से मात्र दो कॉलेजों में ही बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की एक-एक नियमित फैकल्टी है। इनमें जेडीबी कॉमर्स व राजकीय बारां महाविद्यालय  शामिल है। इसके अलावा किसी भी कॉलेज में न तो नियमित फैकल्टी है और न ही विद्या संबल योजना में है। ऐसे में विद्यार्थियों की क्लासें ही नहीं लग पाती। मजबूरन बच्चों को कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। समय पर कोर्स पूरे नहीं हो पाते। एमकॉम प्रिवियस के पहले सेमेस्टर में करीब 35 प्रतिशत ही कोर्स पूरा हो पाया था। राजकीय कॉमर्स कॉलेज कोटा में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की आखिरी क्लास 11 मार्च को लगी थी। इसके बाद विद्या संबल योजना के तहत लगे सहायक आचार्यों को सरकार ने हटा दिया था। </p>
<p><strong>क्यों नहीं हो रही नियमित व्याख्याताओं की नियुक्ति </strong><br />गत वर्ष आरपीएससी ने व्यवसायिक प्रशासन विषय में 127 पदों पर भर्ती निकाली थी। जिनके साक्षात्कार आयोग द्वारा ले लिए गए थे। लेकिन, आयोग ने नियमों के अनुरूप सिर्फ व्यवसायिक प्रशासन में एमकॉम योग्यताधारी अभ्यर्थियों को ही योग्य माना और एमबीए  स्नातकोत्तर करने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। जिससे नाराज एमबीए उत्तीर्ण अभ्यर्थी कोर्ट की शरण में चले गए और हाई कोर्ट से स्टे ले लिया। वर्तमान में मामला न्यालय में विचाराधीन है। </p>
<p><strong>इन विषयों की नहीं लग रही कक्षाएं</strong><br />विद्यार्थियों ने बताया कि एमकॉम फाइनल व प्रिवियस में कई ऐसे विषय हैं, जिनकी नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही। वहीं, कुछ विषयों की तो एक भी कक्षाएं नहीं लगी। एमकॉम फाइनल में मार्केटिंग मैनेजमेंट, इंटरनेशनल मार्केटिंग, रिसर्च मैथोलॉजी,  एचआरडी और यूनियन मैनेजमेंट रिलेशन विषय शामिल हैं। वहीं, प्रिवियस के द्वितीय सेमेस्टर में आॅर्गेनाइजेशन बिहेवियर, स्टेÑजिक मैनेजमेंट, एचआरडी, रिसर्च मैथोलॉजी सहित अन्य विषयों की कक्षाएं प्रथम सेमेस्टर के बाद से अभी तक नहीं लगी।  </p>
<p><strong>काम जयपुर में और तनख्वाह कोटा से </strong><br />राजकीय कॉमर्स कॉलेज में सरकारी रिकॉर्ड में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में एक शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर लगे हैं। लेकिन, वर्तमान में वे जयपुर आयुक्तालय में कार्यरत हैं और उनकी तनख्वाह कॉलेज से ही मिलती है। वहीं, गत वर्ष एक शिक्षिका का बारां जिले में ट्रांसफर हो गया। ऐसे में यहां 12 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। विद्यार्थियों की क्लासें नहीं लग पा रही। हालात यह हो रहे हैं कि कॉलेज में इस विषय को पढ़ाने वाला कोई शिक्षक नहीं है। जबकि, विद्यार्थियों ने इसकी शिकायत कई बार प्राचार्य से कर चुके हैं। इसके बावजूद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>65 प्रतिशत कोर्स रह गया था अधूरा</strong><br />स्टूडेंट्स सुरभी शर्मा व आशुतोष जादौन ने बताया कि एमकॉम प्रिवियस में फस्ट सेमेस्टर के एग्जाम 31 मार्च से शुरू हुए थे, जो 8 अपे्रल तक जारी रहे। इन दिनों व्यवसायिक प्रशासन विषय में करीब 35 प्रतिशत ही कोर्स पूरा हो पाया था। जबकि, 65 प्रतिशत से अधिक सिलेबस अधूरा रह गया था।आधी-अधूरी तैयारियों के बीच एग्जाम दिए हैं। ऐसे में रिजल्ट बिगड़ने की चिंता सता रही है। </p>
<p><strong>70 किमी से अपडाउन फिर भी क्लास नहीं</strong><br />छात्रा खुशबू कुमारी का कहना है कि वे प्रतिदिन रावतभाटा से 70 किमी का सफर कर कॉलेज आती हैं, इसके बावजूद बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की क्लास नहीं मिलती।  जबकि, यह विषय कॉमर्स संकाय में सबसे महत्वपूर्ण सब्जेक्ट है। इसमें इंडस्ट्रीज में समय के साथ क्या अपडेट हो रहा है, बिजनेस मैकेनिज्म में आए बदलाव की जानकारी दी जाती है। लेकिन, शिक्षकों के अभाव में इंडस्ट्रीज में नया क्या हो रहा है, बिजनेस की कला सहित कई बारीकियों से अनजान रहते हैं। ऐश्वर्य महावर ने बताया कि प्रतिदिन 200 से 250 रुपए खर्च कर पढ़ने को कॉलेज आते हैं लेकिन पढ़ाई नहीं होने से समय और पैसा दोनों ही बर्बाद हो रहा है। </p>
<p><strong>दो महीने बाद पेपर, कैसे करें तैयारी</strong><br />अजय सुमन ने बताया कि फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षाएं समाप्त होने के बाद 11 अप्रेल से सैकंड सेमेस्टर की क्लासें लगना शुरू हो गई। लेकिन, व्यवसायिक प्रशासन पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं होने से पीरियड खाली रहता है। अधिकतर विद्यार्थियों को तो सिलेबस का भी पता नहीं है।  कैसे इंटरनल एग्जाम की तैयारी होगी और कैसे मुख्य सेमेस्टर की पढ़ाई कर पाएंगे। </p>
<p>यह दुखद है कि संभाग के सबसे बड़े वाणिज्य महाविद्यालय में व्यवसायिक प्रशासन का एक भी शिक्षक नहीं है। जबकि, इस विभाग में 12 पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद न तो नियमित शिक्षक लगाए गए और न ही गेस्ट फैकल्टी।   हाड़ौती में इस विषय के 2 ही शिक्षक कार्यरत हैं। विद्यार्थियों को इंडस्ट्रीज में समय के साथ क्या बदलाव हुए, इसकी व्यवहारिक जानकारी नहीं मिल पा रही। <br /><strong>- अनुज विलियम, सहायक आचार्य विद्या संबल, व्यवसायिक प्रशासन</strong></p>
<p>यह बात सही है कि कॉलेज में व्यवसायिक प्रशासन विभाग में कोई फैकल्टी नहीं है। शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पूर्व में तीन बार उच्च शिक्षा आयुक्तालय को पत्र लिख चुके हैं।  लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। वहीं, आयुक्तालय के ज्वाइंट डायरेक्टर एचआरडी ताराचंद बैरवा को भी पत्र भेज मामले से अवगत करा चुके हैं। हमारे लिए विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है। उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं। वहीं, महाविद्यालय की विकास समिति से गेस्ट फैकल्टी लगाने के लिए भी उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मांगने का प्रयास किया जाएगा।  <br /><strong>- सीमा राठौर, प्राचार्य, कॉमर्स कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Apr 2023 14:52:38 +0530</pubDate>
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                <title>नई ओपीडी में बायोवेस्ट के बीच हो रहा इलाज</title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस की नई ओपीडी में पिछले चार दिनों से बायोवेस्ट और कचरा नहीं उठने से पर्ची काउंटर से लेकर वार्डो तक चहुंओर  कचरे के ढेर नजर आ रहे है। अस्पताल प्रशासन की ओर से इस और ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे मरीज के साथ परिजन भी संक्रमण फैलने से सहमे हुए है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/treatment-is-being-done-between-bio-waste-in-new-opd/article-43784"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/nai-opd-mei-biowaste-k-beech-ho-raha-ilaaj..kota-news..25.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल के हालात सुधरने का नाम नहीं नहीं ले रहे है। अस्पताल में पिछले चार दिनों से कचरे और बायोवेस्ट का निस्तारण नहीं होने से अस्पताल के वार्डो से लेकर गलियारों में चहुंओर कचरे के ढेर नजर आ रहे है। करोड़ की लागत से बनी नई ओपीडी बिल्डिंग में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। सफाई कर्मी कचरें को प्लास्टिक के बैग में संग्रह कर अस्पताल परिसर में इधर जमा कर रहे जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। अस्पताल के दवा काउंटर, पर्ची काउंटर से लेकर हर और कचरा ही कचरा दिखाई दे रहा है। कचरे के बीच मरीजों का इलाज किया जा रहा है। फर्स्ट फ्लोर से लेकर थर्ड फ्लोर तक कचरे के ढेर लगे हुए है। सफाई ठेकेदार द्वारा नियमित सफाई नहीं करने से कुछ दिनों  पूर्व में भी अधीक्षक जुर्माना लगा चुके उसके बावजूद सफाई व्यवस्था नहीं सुधारी उल्टे पिछले चार दिन से कचरे का निस्तारण नहीं होने से अस्पताल में कचरे जगह जगह ढेर लगे हुए है। </p>
<p><strong>नई बिल्डिंग से भी नहीं उठा कचरा</strong><br />एमबीएस की नई ओपीडी से 21 अप्रैल से ही बायोवेस्ट और कचरा नहीं उठने से पर्ची काउंटर से लेकर वार्डो तक चहुंचोर कचरे के ढेर लगे रहे। मरीजों के बैठने कुर्सियों पास तक दवाओं के कचरे के ढेर लगे रहे। जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। अस्पताल प्रशासन की ओर से इस और ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे मरीज के साथ परिजन भी संक्रमण फैलने से सहमे हुए है। </p>
<p><strong>फर्स्ट फ्लोर पर लगा गंदगी का ढेर</strong><br />मरीज विशाल वर्मा ने बताया कि एमबीएस की नई ओपीडी के फर्स्ट फ्लोर पर ही सभी विभागों की ओपीडी संचालित हो रही है। यहां मरीजों का सबसे ज्यादा आवगमन है, वहीं पर कचरे के ढेर लगे हुए। यहां लगी बैच के पास ही कचरे के ढेर लगा रखे है। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। सफाई कर्मियों ने यहीं पास में बने बने कमरे के बाहर कचरे के पॉइट बना कर प्लास्टिक बैग कचरा जमा कर रखा है। बदबू आ रही है। ओपीडी  चहुओर गंदगी फैली है।</p>
<p><strong>पार्किंग के गलियारे में फैली गंदगी</strong><br />बूंदी से मरीज के साथ आए परिजन रामनारायण मीणा ने बताया कि संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद चहुंओर गंदगी फैली है। लोग यहां बेहतर इलाज के लिए आते है लेकिन यहां फैली गंदगी से लोगों इलाज की जगह संक्रमण मिल रहा है। करोडो रुपए खर्च ओपीडी तो बना दी लेकिन लच्चर सफाई व्यवस्था यहां की व्यवस्था की पोल खोल रही है।  नई ओपीडी की पार्किंग के लिए बने गलियारे सामने कचरे लगा ढेर यहां की अव्यवस्था की पोल खोल रहा है।</p>
<p><strong>वाटर कूलर के पास रखा बायोवेस्ट </strong><br />नई ओपीडी बिल्डिंग में फर्स्ट फ्लोर पर मरीजों के पेयजल के लिए लगे वाटर कूलर के पास ही सफाई कर्मियों ने कचरे की थैलियां जमा कर रखी है। ऐसे में पानी पीने आए मरीजों को गंदगी से दोचार होना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>एमबीएस थर्ड फ्लोर बायोवेस्ट का लगा ढेर </strong><br />एमबीएस अस्पताल नई बिडिंग के तीसरे माले पर सर्जिकल वार्ड है। यहां पर भी पिछले छह दिन से कचरा नहीं उठा रहा है। सफाई कर्मी कचरा संग्रह कर थैलियों के ढेर को वहीं परिसर में जमा कर रख रहे है जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नई ओपीडी में कचरे का निस्तारण क्यों नहीं हो रहा है। जिसकी जांच कराकर संबंधी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>-डॉ. संगीता सक्सेना, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>सफाई कर्मी कचरा क्यों नहीं उठा रहे इसकी जांच कराकर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में ठेकेदार द्वारा कचरे का निस्तारण समय पर नहीं करने से उसके जुर्माना लगाया था। मंगलवार को सफाई कराकर संबंधी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-डॉ. दिनेश वर्मा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Apr 2023 14:40:22 +0530</pubDate>
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                <title> पारिवारिक बंटवारे के झगडे में मां, पत्नी, तीन बेटे घायल </title>
                                    <description><![CDATA[गांव गद्दीपुरा में बुधवार को पारिवारिक बंटवारे व नलकूप के तार काटने के बाद बुधवार को सुबह झगडे में मां, पत्नी व तीन बेटे घायल हो गए। मां और बेटे की हालत गंभीर होने के कारण राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/mother--wife--three-sons-injured-in-family-division-dispute/article-12837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/maa-beta.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हिण्डौन सिटी।</strong> गांव गद्दीपुरा में बुधवार को पारिवारिक बंटवारे व नलकूप के तार काटने के बाद बुधवार को सुबह झगडे में मां, पत्नी और तीन बेटे घायल हो गए। मां और बेटे की हालत गंभीर होने के कारण राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया। डॉ. जेपी मीना ने बताया कि गद्दीपुरा में पारिवारिक बंटवारे के विवाद के चलते सुबह बड़ा बेटा सतीश पुत्र नत्थी जाटव ने खेत पर लगे नलकूप का तार काट दिया, जिससे पानी की मोटर नीचे गिर गई।</p>
<p>इसी को लेकर मां रूकमणी देवी पत्नी नत्थीलाल पुत्र गौरव व राम सिंह ने नलकूप का तार काटने को लेकर कहासुनी हो गई। मां-बेटों में लाठी, डण्डे चल गए जिससें मां रूकमणी देवी, बेटा गौरव व रामसिंह घायल हो गए। दूसरे पक्ष का बेटा सुपीदा घायल हो गई। मां रूकमणी देवी व सतीश जाटव को गंभीर चोट लगने से दोनों को राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं दोनों भाई व भाभी बचाव के लिए आए तो उनके साथ भी मारपीट कर दी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>करौली</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/mother--wife--three-sons-injured-in-family-division-dispute/article-12837</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 13:14:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर डिस्कॅाम में नए डिवीजन एवं सब-डिवीजन कार्यालय बने</title>
                                    <description><![CDATA[
जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से ऊर्जा की बढती मांग को ध्यान में रखते हुए विद्युत वितरण प्रणाली के सुदृढीकरण हेतु जयपुर डिस्काॅम के क्षेत्राधीन नवीन डिवीजन व सब-डिवीजन कार्यालय खोलने के सम्बन्ध में बजट में की गई घोषणा की पालना में राज्य सरकार से स्वीकृृति के उपरान्त जयपुर डिस्काॅम में 4 नए डिवीजन एवं 5 नए सब-डिवीजन कार्यालय बनाए गए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-discom-has-new-division-and-sub-division-offices/article-12674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/jvvnl.jpg" alt=""></a><br /><p><br />जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से ऊर्जा की बढती मांग को ध्यान में रखते हुए विद्युत वितरण प्रणाली के सुदृढीकरण हेतु जयपुर डिस्काॅम के क्षेत्राधीन नवीन डिवीजन व सब-डिवीजन कार्यालय खोलने के सम्बन्ध में बजट में की गई घोषणा की पालना में राज्य सरकार से स्वीकृृति के उपरान्त जयपुर डिस्काॅम में 4 नए डिवीजन एवं 5 नए सब-डिवीजन कार्यालय बनाए गए है।</p>
<p>जयपुर डिस्काॅम के प्रबन्ध निदेशक अजीत कुमार सक्सैना ने बताया कि नए डिवीजन एवं सब-डिवीजन बनने से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेगी एवं कार्यों का शीघ्रता से निस्तारण संभव होगा। उन्होंने बताया कि नए डिवीजन एवं सब-डिवीजन बनने के उपरान्त अब जयपुर डिस्काॅम में 58 डिवीजन एवं 222सब-डिवीजन कार्यालय हो गए हैं। 4 नए डिवीजन कार्यालय- दौसा वृृत में सिकराय, भरतपुर वृृत में वैर, जयपुरजिला वृत में जमवा रामगढ एवं सवाईमाधोपुर वृृत में बौंली (बामनवास) 5 नए सब-डिवीजन- जयपुर जिला वृत में हाथोज, अलवर वृत में चिकानी, दौसा वृृत में रामगढ पचवारा, व बैजूपाडा एवं करौली वृृत में कैलादेवी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 17:00:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में गद्दे हो रहे भद्दे </title>
                                    <description><![CDATA[ संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल के इनडोर वार्डों में अधिकतर पलंगों पर बिछे गद्दों की हालत इतनी अधिक खराब हो रही है कि उन्हें देखने या तो उन पर लेटने का मन नहीं होगा। यदि मजबूरी में मरीज भर्ती होने से  लम्बे समय तक वहां रह गया तो उसे ठीक होने की जगह कमर दर्द व अन्य बीमारी का खतरा बना हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mattresses-are-getting-ugly-in-the-biggest-hospital-of-the-division/article-7942"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/654654641.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल के इनडोर वार्डों में अधिकतर पलंगों पर बिछे गद्दों की हालत इतनी अधिक खराब हो रही है कि उन्हें देखने या तो उन पर लेटने का मन नहीं होगा। यदि मजबूरी में मरीज भर्ती होने से  लम्बे समय तक वहां रह गया तो उसे ठीक होने की जगह कमर दर्द व अन्य बीमारी का खतरा बना हुआ है। एमबीएस अस्पताल में कोटा शहर ही नहीं दूरदराज तक से मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। मध्यप्रदेश व राजस्थान के सीमावर्ती अन्य प्रदेशों से भी मरीज यहां उपचार के लिए आ रहे हैं। उनमें से कई मरीजों  की बीमारी ऐसी है जिन्हें अस्पताल में अस्पताल में लम्बे समय तक भर्ती भी रहना पड़ रहा है।  अस्पताल में हर बीमारी के मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग-अलग वार्ड बने हुए हैं। जिनमें पलंग भी लगे हैं। उन पलंगों में से कई पलंगों की हालत ही खराब हो रही है। वहीं उन पर बिछे गद्दों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले कई सालों से उनकी सुध ही नहीं ली गई है। जिससे कई गद्दे फटे हुए हैं जिससे उनकी रूई व फोम बाहर निकल रही है। कई गद्दे इतने अधिक गंदे हो रहे हैं कि उनमें से दुर्गंध आ रही है। कई पुराने गद्दों के बीच में गड्ढ़े हो रहे हैं। हालत यह है कि गद्दों की उतनी खराब दशा होने के बाद भी उन पर चादर तक नहीं बिछाई जा रही है। जिससे उनकी दुर्दशा जग जाहिर हो रही है। <br /><br /><strong>750 बेड का अस्पताल, हर वार्ड में गद्दे खराब</strong><br />एमबीएस अस्पताल के इनडोर में 750 बेड हैं। ये बेड अलग-अलग वार्डों में उनकी क्षमता के अनुसार लगे हुए हैं। नेत्र वार्ड, मेल मेडिकल वार्ड, फीमेल मेडिकल वार्ड, मेल सर्जिकल वार्ड, फीमेल सर्जिकल वार्ड, पोस्ट आॅपरेटिव वार्ड, बर्न वार्ड, अस्थि वार्ड, न्यूरोलॉजी वार्ड, कैंसर वार्ड समेत कई वार्ड हैं। उन वार्डों में कमरों के अलावा  उनके आगे और पीछे की गैलेरियों तक में बेड लगे हैं। हर वार्ड में लगे बेड पर बिछे गद्दों में से अधिकतर की हालत खराब हो रही है। मजबूरी में मरीेज उन पर लेटे हुए भी हैं। अस्थि वार्ड व मेल सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीजों का कहना है कि उन्हें वार्ड में भर्ती हुए कई दिन हो गए हैं। उनके पलंग का गद्दा इतना अधिक  खराब हो रहा है कि उनकी कमर ही दुखने लगी है। साथ ही वह गंदा भी है। जिससे उन्हें दुर्गंध का तो सामना करना ही पड़ रहा है। साथ ही यहां उपचार करवाने के दौरान दूसरी बीमारी लगने का खतरा बना हुआ है। <br /><br /><strong>गद्दों पर चादरें तक नहीं</strong><br />इतने बड़े अस्पताल में हर पलंग पर गद्दा बिछा हुआ है। साथ ही उनके लिए अस्पताल में सफेद चादरें भी हैं। रोजाना चादरें बदलने का प्रावधान है। साथ ही उनके स्थान पर दूसरी सफेद चादर बिछाई जाती है। यह काम सुबह डॉक्टर के राउंड से पहले ही कर दिया जाता है। लेकिन अस्पताल के कई वार्डों में न तो रोजाना चादरें बदली जा रही हैं और न ही अधिकतर पलंगों पर अस्पताल प्रशासन द्वारा चादरें बिछाई जा रही है। हालत यह है है कि बुधवार को भी कई मरीज या तो बिना चादर बिछे पलंग पर सोते मिले या फिर कई मरीजों ने अपने घर की चादर बिछाई हुई थी। जबकि जानकारी  के अनुसार अस्पताल से रोजाना बड़ी संख्या में चादर धुलने के लिए अस्पताल की लॉनरी में जा रही है। </p>
<p>अस्पताल में 750 बेड हैं। जिनमें से सभी पर गद्दे लगे हुए हैं। उन पर सफेद चादर भी  रोजाना बदली जा रही है। हाल ही में आईसीयू में बैंक के सहयोग से 10 नए बेड व गद्दे लगाए गए हैं। वार्डों में गद्दे खराब होने की डिमांड संबंधित एचओडी द्वारा दी जाती है। जहां से भी डिमांड आती है वहां तुरंत गद्दे खरीदकर बदला देते हैं। फिर भी यदि कहीं गद्दे खराब हैं तो संबंधित एचओडी से डिमांड लेकर उन्हें बदला दिया जाएगा। इसके लिए बजट भी पर्याप्त है। <br />-डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Apr 2022 14:24:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> कोटा संभाग में जैविक खेती का बढ़ा  रुझान</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती संभाग में पिछले 5 वर्षों में ऑर्गेनिक (जैविक ) खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ा है। कोटा बूंदी झालावाड़ बारां जिलों में करीब 15 हजार से अधिक किसान जैविक खेती कर अपनी आय को दुगना कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/increased-trend-of-organic-farming-in-kota-division/article-7224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/9_new.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती संभाग में पिछले 5 वर्षों में ऑर्गेनिक (जैविक ) खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ा है। कोटा बूंदी झालावाड़ बारां जिलों में करीब 15 हजार से अधिक किसान जैविक खेती कर अपनी आय को दुगना कर रहे हैं।  कोटा जिले की बात करें तो यहां 5000 से अधिक किसान जैविक खेती के कृषि विभाग से प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुके हैं । इन किसानों के ऑर्गेनिक प्रोडक्ट इन दोनों बाजार में खासी धूम मचा रहे हैं । बूंदी जिले के नैनवां, हिंडौली क्षेत्र में करीब 2500 हैक्टेयर में किसान जैविक खेती कर अपनी आय को दुगुना कर रहे हैं। आॅर्गेनिक सब्जियों, दालों, अनाज में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व और बिना पेस्टीसाइड के उत्पादन मिलने से लोग आॅर्गेनिक उत्पाद महंगे होने के बावजूद पसंद कर रहे हैं। अभी ऑर्गेनिक उत्पादन का बाजार नहीं होने से 1250 किसान एक समूह बनाकर अपना उत्पादन बेच रहे हैं। समूह ने जैविक उत्पादन को बेचने के लिए सप्ताह में तीन दिन होम डिलीवरी सर्विस देना शुरू किया है। कोटा, बूंदी में किसानों को इसको अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।<br /><br />जिले में वर्तमान में करीब 2 लाख 70 हजार हैक्टेयर में किसान पारंपरिक खेती कर रहे हैं, जिसमें से 15000 हैक्टेयर में ऑर्गेनिक खेती की जा रही है। पिछले पांच साल से कृषि क्षेत्र में रासायनिक खाद के बढ़ते प्रयोग से होने वाले नुकसान को देखते हुए जीरो बजट खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है। जिले के किसान खेती में नवाचार कर अपनी आय बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। ऑर्गेनिक खेती से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली ग्रीन हाउस गैसों को रोकने में मदद मिलती है।<br /><br />कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी, वैज्ञानिक डॉ. हरीश वर्मा ने बताया कि हरित क्रांति के बाद उत्पन्न हुई परिस्थितियों के कारण किसानों ने परंपरागत विधि छोड़ कर नई दिशा में कदम बढ़ाने से इसका परिणाम अब पर्यावरण प्रदूषण के रूप में दिख रहा है। कभी सेलिनाइजेशन व यांत्रिकरण के नाम पर उपजाऊ शक्ति बढ़ाने वाली विद्या आज उर्वराशक्ति को घटा रही है। मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए जैविक खेती सबसे कारगर तरीका है। इस विधि से खेती करने पर जहां जैव विविधता में वृद्धि होती है, वहीं उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी होती है।<br /><br /><strong>ऐसे हुई जैविक खेती की शुरूआत</strong><br /> किसान चौथमल सैनी ने बताया कि 7 साल पहले वह जयपुर के घराना गांव गए, वहां जैविक खेती देखी वहां से प्रेरणा मिली। इसके बाद कोटा किसान मेले में कृषि वैज्ञानिकों से जानकारी लेकर सब्जियों, दालों का उत्पादन शुरू किया। जिंसों की मेचिंग चैन नहीं बनने से परेशानी होती थी, जिसके बाद ज्योतिबा फुले जैविक कार्य की कंपनी बनाई और किसानों को इससे जोड़ा। जिससे सब्जियों, जिंसों की वैरायटी तैयार हुई और बाजार तैयार किया। वर्तमान में कोटा में दो फार्म व तीन ब्रांच में माल बेचा जा रहा है। जैविक खेती में शुुरुआती दो साल तक तो उत्पादन सामान्य ही रहता है। इसके बाद उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है। गेहूं जहां सामान्य खेती 2000 रुपए प्रति क्विंटल बिकता है, वहीं जैविक गेहूं 3000 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक जाता है।<br /><br /><strong>ये यह होता है फायदा</strong><br />पौष्टिकता के साथ सब्जियों में बढ़ा स्वाद, कोटा और बूंदी में अच्छा रिस्पांस<br />कोटा  निवासी किसान रामराज गुर्जर  ने बताया कि वह तीन साल से जैविक खेती कर सब्जियां उगाकर बाजार में बेच रहे हैं। ऑर्गेनिक सब्जियों का बाजार नहीं होने से घरेलू बाजार में इनको बेचा जा रहा है। रासायनिक उर्वरकों की बजाए इन सब्जियों में स्वाद और पौष्टिकता के साथ ही पेस्टीसाइड नहीं होने से लोग ज्यादा पसंद करते हैं। मिट्टी में तत्वों की आपूर्ति के लिए गोबर से तैयार किए गए जैविक खाद, बायोगैस स्लरी, नाडेप कम्पोस्ट, फास्फो कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, नीलहरित शैवाल, एजोला का प्रयोग करते हैं।<br /> बीजोपचार में भी जैविक औषधियों का प्रयोग करते हैं। पेस्टीसाइड की जगह नीम के उत्पाद का उपयोग कीड़ों के नियंत्रण में करते हैं। परजीवी, परभक्षी, सूक्ष्म जीवों का उपयोग कीटव्याधि नियंत्रण के लिए करते हैं। नीम, करंज की पत्तियां, नीम के तेल, निंबोली का उपयोग पौधों के बचाव में किया जाता है, जिससे गेहूं, सब्जियों की पौष्टिकता के साथ स्वाद बढ़ता है और यह स्वास्थ्य को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है।<br /><br /><strong>गोमूत्र व घास से तैयार होती है कीटनाशक दवाएं</strong><br />जैविक खेती करने वाले किसान धर्मराज  मीणा का कहना है कि बाजार में महंगे दामों पर मिलने वाली रासायनिक दवाओं के स्थान पर गोमूत्र, गाय के गोबर, नीम पत्ते, घास एवं आसानी से घर पर ही उपलब्ध होने वाली चीजों से कीटनाशक दवाओं को तैयार किया जाता है। जिससे पैदावार बढ के साथ-साथ विभिन्न रोगों से छुटकारा मिल जाता है।<br /><br /><strong>सब्जियों के भी मिलते हैं दोगुने दाम</strong><br />स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डालने वाले रासायनिक अनाज एवं सब्जियों के स्थान पर लोग जैविक अनाज व सब्जियों को बढ़ावा दे रहे हैं। लोग किसानों से पकने से पहले ही गेहूं की बुकिंग कर जाते हैं।किसानों का कहना है कि बाजार में रासायनिक गेहूं 1800 से 2300 तक बिकता है, लेकिन जैविक गेहूं के लिए लोग चार से पांच हजार प्रति क्विटंल तक लेने को तैयार हो जाते हैं। कोटा ,झालावाड़, बारां, बूंदी जिले के अंदर धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर रुझान लोगों का बढ़ता जा रहा है।किसान प्रभु लाल साहू ने बताया कि  उसके खेत पर लोगों को रोजगार के साथ-साथ अच्छा मुनाफा मिल रहा है और इसको देखकर जैविक खेती की ओर लोग प्रेरित हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/increased-trend-of-organic-farming-in-kota-division/article-7224</link>
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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 17:46:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RAS भर्ती प्री परिणाम को रद्द करने के खिलाफ RPSC ने हाईकोर्ट में लगाई अपील,  2 बजे सुनवाई </title>
                                    <description><![CDATA[ आयोग की ओर से दो अपील पेश की गई हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-division-bench-of-cj-akil-qureshi-will-hear-at-2-pm/article-4841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/hc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट से बड़ी खबर है। आरएएस भर्ती के प्रारम्भिक परिणाम को रद्द करने के खिलाफ आरपीएससी की ओर से अपील पेश की गई है। महाधिवक्ता के साथ आयोग के वकील मिर्जा फैसल बेग ने अपील पेश की है। आयोग की ओर से दो अपील पेश की गई हैं। मामले में जल्द सुनवाई के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी है। सीजे अकील कुरेशी की खंडपीठ 2 बजे सुनवाई करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Feb 2022 11:06:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा मुद्दों की राजनीति नहीं करके धर्म और बंटवारे की राजनीति करती है: डोटासरा</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेसजनों ने अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88--%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE/article-2959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/dotasra.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा पर एक बार फिर से निशाना साधा है। गृह मंत्री अमित शाह की जयपुर में सभा में दिए बयानों पर भी आपत्ति जाहिर की है। पीसीसी में सोमवार को अंबेडकर की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि कार्यक्रम के बाद डोटासरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में इस समय महंगाई बड़ा मुद्दा है। इस मुद्दे से देश का हर आम आदमी, महिलाएं और नौजवान परेशान है। आम आदमी को सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भरोसा है कि वह केंद्र सरकार के खिलाफ इस मुद्दे पर उनकी आवाज उठाएंगे। इसीलिए जयपुर में महंगाई हटाओ रैली आयोजित की जा रही है। डोटासरा ने मोदी सरकार और भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार को सत्ता में आये 7 साल हो गए। जिन मुद्दों की बात उन्होंने की थी वो एक भी पूरा नही किया । वे आज भी राम मंदिर, 370 और हिंदुस्तान पाकिस्तान की बात करते रहे। भाजपा मुद्दों की राजनीति नही करती है, वो झूठे वादे ओर धर्म के आधार पर बांटने की राजनीति करती है। मोदी सरकार ने किसानों को 12 महीने तक परेशान रखा और अब बैक डोर से कृषि कानून बिल वापस ले लिए। उत्तर प्रदेश में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे ने किसानों को कुचल कर मार दिया था लेकिन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है। राजस्थान में भाजपा का जब शासन था यो 56 प्रतिशत गरीब और महिलाओं को कोर्ट से मामले दर्ज करवाने पड़ते थे आज 16 प्रतिशत रह गयी है। आज राजस्थान में मामले दर्ज होते है, चाहे उनमें बाद मे एफआर क्यों न लगे। महंगाई हटाओ रैली पर डोटासरा ने कहा कि आज देश में महंगाई एक बड़ा मुद्दा है इसीलिए हम राष्ट्रीय स्तर की यह रैली जयपुर में आयोजित कर रहे हैं इस रैली में देश के कोने-कोने से लोग आएंगे खासकर महिलाओं में इस रैली में आने के लिए बहुत उत्सुकता है। ओमिक्रोन वायरस के फैलने के डर के सवाल पर कहा कि हम रैली में सोशल डिस्टेंसिंग सेनीटाइजर मास्क आदि प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखेंगे इसके लिए बाकायदा कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p><strong>कांग्रेसजनों ने अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की</strong><br /> भारत रत्न और संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रेहाना रियाज, पीसीसी प्रवक्ता आर सी चौधरी, पूर्व राज्यसभा सांसद अश्क अली टाक, पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल, सादिक चौहान, राजेश चौधरी, सुशील शर्मा, नवरंग सिंह,मंजू शर्मा, राजू खान, शरीफ खान सहित अनेक कांग्रेस जनों ने अंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Dec 2021 12:48:38 +0530</pubDate>
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