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                <title>litigation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सौरभ भारद्वाज की बढ़ी मुश्किलें : जनकपुरी पॉक्सो मामले में नाबालिग की पहचान उजागर करने पर प्राथमिकी दर्ज, स्कूल की शिक्षिका गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[जनकपुरी के पब्लिक स्कूल में 3 वर्षीय बच्ची से यौन उत्पीड़न मामले में 'आप' दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप है। पुलिस ने मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में स्कूल की महिला शिक्षिका को भी गिरफ्तार किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/saurabh-bhardwajs-troubles-increase-fir-registered-for-revealing-identity-of/article-155701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/saurabh-bhardwaj.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम दिल्ली के जनकपुरी इलाके स्थित एक पब्लिक स्कूल में यौन उत्पीड़न की शिकार तीन वर्षीय बच्ची की पहचान उजागर करने के मामले में जनकपुरी थाने में आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 72, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 23(4) के तहत दर्ज की गयी है, जो पीड़ित बच्चों की पहचान उजागर करने को प्रतिबंधित करती हैं।</p>
<p>यह घटनाक्रम जनकपुरी के एक पब्लिक स्कूल में नर्सरी की तीन वर्षीय छात्रा के यौन उत्पीड़न की जांच के दौरान सामने आया है। पीड़िता के परिवार ने इस संदर्भ में एक मई को शिकायत दर्ज करायी थी। इसके बाद इस मामले में विद्यालय के एक 57 वर्षीय केयर टेकर को गिरफ्तार किया गया था। बाद में आरोपी को द्वारका अदालत ने जमानत दे दी थी।</p>
<p>मामले में कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने सबूत जुटाने के बाद विद्यालय की एक महिला शिक्षिका को भी गिरफ्तार कर लिया है। अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए शिक्षिका को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में दिल्ली सरकार ने गंभीर रूख् अपनाया है और स्कूल प्रशासन को अपने हाथ में लेने पर विचार कर रही है, क्योंकि स्कूल बाल सुरक्षा और निगरानी तंत्र में गंभीर खामियों को लेकर शिक्षा विभाग के कारण बताओ नोटिस का जवाब देने में विफल रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:43:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राहुल गांधी मानहानि मामला : सत्यकी सावरकर की जिरह में कई अहम स्वीकारोक्तियां, 15 जून को होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पुणे की विशेष अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि 'स्वातंत्र्यवीर' कोई सरकारी उपाधि नहीं बल्कि एक सम्मानसूचक संबोधन है। उन्होंने यह भी माना कि उनके द्वारा संचालित 'हर घर सावरकर' अभियान का कोई आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-defamation-case-many-important-confessions-in-the-cross-examination/article-155702"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/rahul.png" alt=""></a><br /><p>पुणे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर कथित मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को विशेष सांसद-विधायक अदालत में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये। न्यायाधीश अमोल श्रीराम शिंदे की अदालत में शिकायतकर्ता एवं वीर सावरकर के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर से राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने जिरह की। जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि 'स्वातंत्र्यवीर' कोई सरकारी या कानूनी मान्यता प्राप्त उपाधि नहीं है, बल्कि एक कवि और नाटककार द्वारा इस्तेमाल किया गया सम्मानसूचक संबोधन है। उन्होंने यह भी माना कि इस प्रकार की उपाधियों के उपयोग पर कोई कानूनी रोक नहीं है।</p>
<p>सत्यकी ने कहा कि ऐसी उपाधियों का उपयोग व्यक्ति अपनी सार्वजनिक पहचान मजबूत करने के लिए कर सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी सम्मानसूचक उपाधि की उपयुक्तता तय करने के लिए कोई सरकारी या वैधानिक संस्था मौजूद नहीं है। उन्होंने इस दावे को खारिज किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने स्वयं 'स्वातंत्र्यवीर' की उपाधि अपनायी थी। मामले के खर्च पर उन्होंने बताया कि मुकदमेबाजी का पूरा खर्च वह स्वयं वहन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 'हर घर सावरकर' अभियान के तहत पुस्तकें, टी-शर्ट और अन्य सामग्री बेची जाती है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह समिति पंजीकृत संस्था नहीं है और इसके खातों या बैलेंस शीट का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।</p>
<p>सत्यकी सावरकर की जिरह पूरी नहीं हो सकी और मामले की अगली सुनवाई 15 जून 2026 को होगी। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2023 में सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया था। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने मार्च 2023 में लंदन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए वीर सावरकर के बारे में अपमानजनक और तथ्यहीन टिप्पणियां की थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:08:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>स्ट्रीट डॉग पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते हैं....</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर कहा कि किसी को नहीं पता कब कौन सा कुत्ता काट ले। अदालत ने पहले ही स्कूलों और अस्पतालों से कुत्तों को हटाने का आदेश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hearing-on-street-dog-supreme-court-said-that-dogs-cannot/article-138691"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/sc-on-st-d.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई की कार्रवाई जारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बोला कि कुत्तों के दिमाग के कोई भी नहीं पढ़ सकता है कि वो कब किसको काटेगा और किसको नहीं। बता दें​ कि इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया कर रहे हैं।  </p>
<p>इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने और उनकी नसबंदी करने तथा इसके साथ ही उनके रहने के लिए उचित व्यवस्था करने के आदेश दिए थे। इसके आगे आवारा कुत्तों पर सुनवाई के ​दौरान लास्ट टिप्पणी में सु्प्रीम कोर्ट ने कहा, 'इतनी याचिकाएं तो इंसानों के लिए भी नहीं आतीं है जितनी आवारा कुत्तों पर आई है।'</p>
<p>आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "कल को कोई भैंस ला सकता है और कह सकता है कि मैं पशु प्रेमी हूं।" इसके आगे जस्टिस नाथ ने आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई के दौरान कहा, "सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते हैं।"</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 12:33:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुकदमों का अंबार कम करने पर हो मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[ हमारे देश की अदालतों में ब्रिटेन आदि की अदालतों से कई गुणा अधिक मुकदमों की सुनवाई एक दिन में होती है। केन्द्रीय कानून मंत्री किरेन रिजूजू की माने तो इंग्लैण्ड में एक न्यायाधीश एक दिन में तीन से चार मामलों में निर्णय देते हैं, जबकि हमारे देश में प्रत्येक न्यायाधीश औसतन प्रतिदिन 40 से 50 मामलों में सुनवाई करते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/there-should-be-brainstorming-on-reducing-the-number-of-cases/article-16204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/cot.jpg" alt=""></a><br /><p>लाख प्रयासों के बावजूद देश की अदालतों में मुकदमों का अंबार कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक मोटे अनुमान के अनुसार देश की अदालतों में सात करोड़ से अधिक मुकदमें लंबित हैं। इनमें से करीब 87 फीसदी मुकदमें देश की निचली अदालतों में लंबित हैं, तो करीब 12 फीसदी मुकदमें राज्यों के उच्च न्यायालयों में लंबित चल रहे हैं। देश की सर्वोच्च अदालत में एक प्रतिशत मुकदमें लंबित हैैं। पिछले दिनों जयपुर में आयोजित एक समारोह के दौरान न्यायालयीय प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी करने वाले वकीलों की फीस को लेकार अच्छी खासी चर्चा हुई, जो मीडिया की शुर्किया भी बनी। वहीं अगस्त में कार्य भार संभालने वाले नए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति यूयू ललित द्वारा अदालत में सुबह साढ़े नौ बजे सुनवाई आरंभ करने की पहल पर भी वाद-विवाद का दौर जारी है। उधर सरकार ने मानसून सत्र में कुछ बदलावों के साथ मध्यस्थता विधेयक लाने का संकेत दिया है तो दूसरी और न्यायाधीशों की भर्ती में एकरुपता लाने के केन्द्र के प्रयास लगभग विफल हो गए हैं। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि न्यायालयों में मुकदमों का अंबार लगा हुआ है तो दूसरी और सभी पक्ष इसे लेकर चिंतित भी हैं। सवाल यह है कि मुकदमों के इस अंबार को कम करने के लिए कोई ऐसी रणनीति बनानी होगी, जिससे अदालतों का भार भी कम हो न्यायिक प्रक्रिया लंबी भी ना चले, लोगों को समय पर न्याय भी मिलें।</p>
<p>पिछले पांच साल में ही देश में लंबित मुकदमों की संख्या चार करोड़ से बढ़कर सात करोड़ हो चुकी है। हालांकि लोक अदालत के माध्यम से मुकदमों में कमी लाने की सार्थक पहल अवश्य की गई है पर लोक अदालतों में लाखों प्रकरणों के निबटने के बावजूद हालात में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। दरअसल लाखों की संख्या में इस तरह के मुकदमें हैं जिन्हें निपटाने के लिए कोई सर्वमान्य समाधान खोजा जा सकता है। मुकदमों की प्रकृति के अनुसार उन्हें विभाजित किया जाए और फिर समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर उन्हें निपटाने की कार्य योजना बने तो समाधान कुछ हद तक संभव है। कुछ इस तरह के मुकदमें हैं जिन्हें आसानी से निपटाने की कोई योजना बन जाए तो मुकदमों की संख्या में कमी हो सकती है। इनमें खासतौर से यातायात नियमों को तोड़ने वाले मुकदमों की ऑनलाईन निपटान की कोई व्यवस्था हो जाए तो अधिक कारगर हो सकती है। इसी तरह से चैक बाउंस होने के लाखों की संख्या में मुकदमें हैं जिन्हें एक या दो सुनवाई मेंं ही निस्तारित किया जा सकता है। इसी तरह से मामूली कहासुनी के मुकदमें जिसमें शांति भंग के प्रकरण शामिल हैं उन्हें भी तारीख दर तारीख के स्थान पर एक ही तारीख में निपटा दिया जाए तो हल संभव है। इसी तरह से राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर दर्ज होने वाले मुकदमों के निस्तारण की भी कोई कार्य योजना बन जाए तो उचित हो। इससे कम ग्रेविटी के मुकदमों का सहज निस्तारण संभव होगा, तो न्यायालयों का समय भी बचेगा।</p>
<p><br />देश में सबसे ज्यादा मुकदमे रेवेन्यू से जुड़े हुए हैं। गांवों में जमीन के बंटवारे या सीमा निर्धारण को लेकर देश की निचली अदालतों में अंबार लगा हुआ है। इस तरह के मुकदमों के निपटारे में ग्राम पंचायत की कहीं कोई भूमिका तय हो तो शायद कोई स्थाई समाधान संभव हो सकता है। पंच परमेश्वर की अवधारणा कहीं इस तरह के मुकदमों के निपटारे में अधिक सहायक हो सकती हैै। स्थानीय स्तर पर समझाईस से इस तरह के मुकदमोंं पर शीघ्र निर्णय की एक संभावना बनती है। हो यह रहा है कि रेवेन्यू के मुकदमें अपील दर अपील  पीढ़ी दर पीढ़ी चलते रहते हैं और मामूली सा सीमा विवाद लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझ कर रह जाता है। मीडिया ट्रॉयल पर भी अंकुश की आवश्यकता है, क्योंकि इससे कुछ हद तक निर्णय प्रभावित होने की संभावना बनती है। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारे देश की अदालतों में ब्रिटेन आदि की अदालतों से कई गुणा अधिक मुकदमों की सुनवाई एक दिन में होती है। केन्द्रीय कानून मंत्री किरेन रिजूजू की माने तो इंग्लैण्ड में एक न्यायाधीश एक दिन में तीन से चार मामलों में निर्णय देते हैं, जबकि हमारे देश में प्रत्येक न्यायाधीश औसतन प्रतिदिन 40 से 50 मामलों में सुनवाई करते हैं। यह इस ओर भी इंगित करता है कि हमारे देश में न्यायाधीशों के पास कार्यभार अधिक है। अधिक काम करने के बावजूद मुकदमों की संख्या कम होने का नाम ही नहीं लेती। पिछले कुछ समय से जिस तरह से पीएलआई को लेकर माननीय न्यायमूर्तियों द्वारा प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है और जुर्माना भी लगाया जा रहा है इसके भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगे है। इसी तरह से कोर्ट में केस दायर होने पर गवाह या याचिकाकर्ता के होस्टाइल होने को भी जिस तरह से अदालतों द्वारा गंभीरता से लिया जाने लगा है उसके भी परिणाम आने वाले समय मेंं और ज्यादा सकारात्मक होंगे।</p>
<p>   <strong>-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></p>
<p><strong>    ये लेखक के अपने विचार हैं </strong>     <br />                                                                                                                                                                                                              <br />        </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Jul 2022 12:36:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>PM मोदी की सुरक्षा चूक मामले में जनहित याचिका दायर, SC में संभवत: कल होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी की सुरक्षा चूक की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/61d692d690851/article-3837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/sc_modi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले में भरी सर्दी में सियासी गर्माहट जारी है। वहीं अब  उच्चतम न्यायालय ने पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक पर सवाल खड़े करने वाली याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए गुरुवार को सहमत हो गई। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने ‘विशेष उल्लेख’ के तहत सुनवाई का अनुरोध किया है।</p>
<p> सिंह ने पंजाब के भटिंडा में बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी के सड़क मार्ग से जाने के दौरान सुरक्षा चूक से जुड़े मामले को अत्यावश्यक बताते इससे संबंधित याचिका पर शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई है। इसके बाद पीठ ने इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करने के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।<br /> <br /> पीठ ने 'वकीलों की आवाज' की ओर से दायर इस याचिका की एक प्रति पंजाब सरकार के वकील को देने का निर्देश देते हुए कहा कि वह इस मामले पर कल सुनवाई करेगी। याचिका में भविष्य में प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक की पुनरावृत्ति से बचने के लिए पूरे प्रकरण की ‘कुशल और पेशेवर’ जांच की मांग की गई है। याचिका में शीर्ष अदालत से भटिंडा के जिला न्यायाधीश को सुरक्षा उल्लंघन से संबंधित पूरे रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेने का निर्देश देने की गुहार लगाई है।</p>
<p><strong>मोदी की सुरक्षा चूक की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन</strong></p>
<p>वहीं पंजाब सरकार ने बुधवार को फिरोजपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, कमेटी तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मेहताब सिंह गिल और गृह मामलों और न्याय के प्रमुख सचिव अनुराग वर्मा शामिल होंगे।<br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jan 2022 13:26:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सियासी रैलियों से हटे संकट के बादल : भाजपा और कांग्रेस की प्रस्तावित रैली के खिलाफ जनहित याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और विनोद भारवानी की खंडपीठ ने यह आदेश पूनम चंद भंडारी की जनहित याचिका पर दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B2---%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C/article-2912"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/cong_hc_bjp-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट ने भाजपा और कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित रैलियों के आयोजन के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और विनोद भारवानी की खंडपीठ ने यह आदेश पूनम चंद भंडारी की जनहित याचिका पर दिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा की रैलियां आयोजित करने में कौनसे कानून की अवहेलना है। इसके अलावा याचिकाकर्ता कैसे अनुमान लगा सकता है की रैलियों में कितने लोग आएंगे।</p>
<p><br /> याचिका में कहा गया कि भाजपा की ओर से 5 दिसंबर को रैली प्रस्तावित है। वहीं कांग्रेस पार्टी की ओर से आगामी 12 दिसंबर को महंगाई हटाओ रैली का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कांग्रेस पार्टी के आला नेताओं सहित देशभर से करीब दो लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है। याचिका में कहा गया कि कोरोना का नया वेरिएंट कई देशों में आ चुका है। यह पुराने वेरियंट से कई गुणा घातक और फैलने वाला है। याचिका में कहा गया कि रैलियों के आयोजन से कोरोना बढ़ने की पूरी संभावना है। कोरोना के नए वेरिएंट मिलने के चलते इसकी तीसरी लहर आने की भी संभावना हो गई है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा रैली का आयोजन लोगों की जान कीमत पर किया जा रहा है और यह रैलियां लोगों के जीवन के लिए खतरा साबित हो सकती है। याचिका में गुहार की गई है की रैलियों के आयोजन पर रोक लगाई जाए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Dec 2021 17:21:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भाजपा और कांग्रेस की प्रस्तावित रैली के खिलाफ जनहित याचिका पेश, सुनवाई 2 बजे बाद</title>
                                    <description><![CDATA[सवाल : क्या कोरोना संक्रमण फैलने का डर नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%B6--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88-2-%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6/article-2901"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/cong_hc_bjp-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भाजपा और कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित रैलियों के आयोजन के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका पेश की गई है। जिस पर जस्टिस एमएम श्रीवास्तव की खंडपीठ आज दोपहर 2 बजे बाद सुनवाई करेगी।पूनम चंद भंडारी की ओर से पेश इस जनहित याचिका में प्रमुख गृह सचिव, प्रमुख स्वास्थ्य सचिव और जिला कलेक्टर को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में कहा गया कि भाजपा की ओर से 5 दिसंबर को रैली प्रस्तावित है। वहीं कांग्रेस पार्टी की ओर से आगामी 12 दिसंबर को महंगाई हटाओ रैली का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कांग्रेस पार्टी के आला नेताओं सहित देशभर से करीब दो लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है। याचिका में कहा गया कि कोरोना का नया वेरिएंट कई देशों में आ चुका है। यह पुराने वेरियंट से कई गुणा घातक और फैलने वाला है। याचिका में कहा गया कि रैलियों के आयोजन से कोरोना बढ़ने की पूरी संभावना है। कोरोना के नए वेरिएंट मिलने के चलते इसकी तीसरी लहर आने की भी संभावना हो गई है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा रैली का आयोजन लोगों की जान कीमत पर किया जा रहा है और यह रैलियां लोगों के जीवन के लिए खतरा साबित हो सकती है। याचिका में गुहार की गई है की रैलियों के आयोजन पर रोक लगाई जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 03 Dec 2021 12:28:49 +0530</pubDate>
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                <title>हाईकोर्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें पढ़े यहां......</title>
                                    <description><![CDATA[मिरासी समुदाय को एमबीसी में शामिल करने को लेकर राज्य सरकार चार माह में करें निर्णय-हाईकोर्ट : बिना तैयारी पेश की गई जनहित याचिका पर कोर्ट नहीं ले सकती प्रसंज्ञान-हाईकोर्ट : बिना वैक्सीन लगवाए प्रवेश से रोकना जनहित में सही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%96%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%82----/article-2355"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/hc2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>NEWS1.</strong> <strong>बिना तैयारी पेश की गई जनहित याचिका पर कोर्ट नहीं ले सकती प्रसंज्ञान-हाईकोर्ट</strong><br />जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सिलिकोसिस पीडित खान श्रमिकों के लिए बने डीएमएफटी फंड का उपयोग नहीं करने से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका में दखल से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका के जरिए महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है, लेकिन बिना तैयारी और आवश्यक सूचनाएं एकत्रित किए बिना पेश प्रकरण पर सुनवाई की अनुमति नहीं दी जा सकती। सीजे अकील कुरैशी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने यह आदेश बाबूलाल जाजू की जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हम याचिकाकर्ता के लिए कोर्ट के दरवाजे हमेशा के लिए बंद नहीं कर रहे हैं। यदि याचिकाकर्ता मामले में आवश्यक दस्तावेज और पूरी तैयारी के साथ आते हैं तो अदालत ज्यादा गंभीरता से उस पर विचार करेगी।</p>
<p><br />जनहित याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने खनन कार्य में लगे श्रमिकों और सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ितों की देखभाल के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट बना रखा है। इसके तहत राज्य सरकार ने एक फंड का गठन किया है। डीएमएफटी नियम, 2016 के तहत फंड का साठ फीसदी बजट उच्च वरीयता वाले मदों पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण आदि के लिए और चालीस फीसदी अन्य वरीयता में शामिल मदों में करने का प्रावधान है। इसके बावजूद राज्य सरकार उच्च वरीयता के मदों में फंड को खर्च नहीं कर रही है। जिससे खान श्रमिकों के हितों का हनन हो रहा है।<br /><br /><br /><strong>NEWS2. बिना वैक्सीन लगवाए प्रवेश से रोकना जनहित में सही</strong><br />जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि कोरोना से बचाव के लिए एक भी वैक्सीन नहीं लगवाने वाले व्यक्ति का हाईकोर्ट में प्रवेश रोकना व्यापक जनहित में है। इसके अलावा परिसर में प्रवेश देने के लिए इस तरह की शर्त लगाना अव्यवहारिक भी नहीं है। अदालत ने कहा कि दो बार मौका देने के बाद भी न तो याचिकाकर्ता और ना ही उनके वकील अदालत में पैरवी के लिए पेश हुए हैं। इससे लगता है कि याचिकाकर्ता को इस मुद्दे पर कोई दिलचस्पी नहीं है। ऐसे में अदालत मामले में स्व प्रेरणा से प्रसंज्ञान नहीं ले सकती। सीजे अकील कुरैशी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने यह आदेश परमेश्वर पिलानिया की जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में चुनौती दी गई अधिसूचना वकीलों, पक्षकारों और नियमित रूप से आने वाले कोर्ट स्टाफ की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। ऐसे में इस तरह की शर्त को अव्यवहारिक नहीं कहा जा सकता। जनहित याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट प्रशासन ने गत एक जुलाई को नोटिफिकेशन जारी कर कोरोना वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगवाने वालों का प्रवेश हाईकोर्ट में प्रतिबंधित कर दिया था। जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि अदालत को मामले में स्व प्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।</p>
<p> </p>
<p><strong>NEWS3. मिरासी समुदाय को एमबीसी में शामिल करने को लेकर राज्य सरकार चार माह में करें निर्णय-हाईकोर्ट</strong><br />जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मिरासी समुदाय को एमबीसी में शामिल करने के मामले में कहा है कि किसी भी जाति या समुदाय विशेष को एमबीसी में शामिल करने या नहीं करने के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकार को है। हाईकोर्ट को इस संबंध में दखल का अधिकार नहीं है। वहीं इस मुद्दे को अंतहीन समय तक लंबित भी नहीं रखा जा सकता। ऐसे में राज्य सरकार को निर्देश दिए जाते हैं कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए जाने वाले विस्तृत अभ्यावेदन का परीक्षण कर चार माह में उचित निर्णय लिया जाए। न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और न्यायाधीश फरजंद अली की खंडपीठ ने यह आदेश राजकुमार मिरासी की ओर से दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिए।<br /><br />याचिका में कहा गया कि कई दशकों से समारोह में गा-बजाकर लोगों का मनोरंजन करने वाले लोगों को मुस्लिम मिरासी नाम दिया गया है। इस वर्ग के लोग शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी पिछडे हुए हैं। ऐसे में उन्हें एमबीसी वर्ग में शामिल कर लाभान्वित किया जाए। इस संबंध में आवश्यक दस्तावेजों के साथ राज्य सरकार को कई बार अभ्यावेदन भी दिया जा चुका है, लेकिन उन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाए। जिसका निस्तारण करते हुए खंडपीठ ने इस संबंध में याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए जाने वाले अभ्यावेदन को चार माह में निस्तारित करने को कहा है।</p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 18:30:40 +0530</pubDate>
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