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                <title>litigation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>टीसीएस को बड़ा झटका: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, कंपनी को भरना होगा $16.8 करोड़ का हर्जाना</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सॉफ्टवेयर तक अवैध पहुंच के मामले में TCS की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। प्रांतीय अदालत ने डीएक्ससी टेक्नोलॉजी के सॉफ्टवेयर से जुड़े विवाद में टीसीएस को 16.8 करोड़ डॉलर का हर्जाना भरने का आदेश दिया था। कंपनी चालू तिमाही में इसके लिए अतिरिक्त प्रावधान करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-relief-for-tcs-review-petition-rejected-in-us-supreme/article-157102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(4)13.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक दूसरी कंपनी के सॉफ्टवेयर तक अवैध पहुंच हासिल करने के एक मामले में भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनी टीसीएस की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। टीसीएस ने मंगलवार को शेयर बाजार को बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 15 जून को अमेरिकी प्रांतीय अपीलीय अदालत के फैसले के पुनरीक्षण के लिए दायर उसकी याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला अमेरिका की डीएक्ससी टेक्नोलॉजी कंपनी (पूर्व में कंप्यूटर साइंसेज कॉर्पोरेशन) से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि टीसीएस ने अपने यहां नियुक्त डीएक्ससी टेक्नोलॉजी के पूर्व कर्मचारियों के माध्यम से उसके जीवन बीमा सॉफ्टवेयर तक अवैध पहुंच हासिल की थी।</p>
<p>अमेरिका की प्रांतीय अपीलीय अदालत ने आरोप को सही ठहराते हुए टीसीएस को 16.8 करोड़ डॉलर का हर्जाना भरने का आदेश दिया था। टीसीएस ने शेयर बाजार को बताया है कि उसने पहले ही लेखा खाते में इस मामले के लिए 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान किया हुआ है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इस मद में सात करोड़ डॉलर का और प्रावधान किया जायेगा। इस राशि का इस्तेमाल मुकदमे से जुड़ी क्षतिपूर्ति, ब्याज और कानूनी लागत के भुगतान के लिए किया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:10:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बड़े खुलासे के संकेत! फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी पर सीआईडी का शिकंजा, तीसरी बार तलब करने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी से सीआईडी ने आठ घंटे तक कड़ी पूछताछ की। कुणाल घोष के सामने बैठाकर किए गए सवाल-जवाब में बनर्जी के बयानों में कई बड़े विरोधाभास मिले हैं। जांच से असंतुष्ट सीआईडी अब उन्हें तीसरा समन भेजने की तैयारी कर रही है, जबकि आज उन्हें ईडी के सामने भी पेश होना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/indications-of-big-revelations-preparation-to-summon-cid-for-the/article-157012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ईडी.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच कर रही अपराध जांच विभाग (सीआईडी) पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी को तीसरी बार तलब कर सकती है। रविवार को हुई पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी को उनके बयानों में कई विरोधाभास मिले हैं। अभिषेक बनर्जी इस मामले में दूसरे दौर की पूछताछ के लिए रविवार को सीआईडी के सामने पेश हुए थे, जहां करीब आठ घंटे तक उनसे पूछताछ चली। उनसे अकेले में भी पूछताछ की गयी और फिर तृणमूल नेता कुणाल घोष के सामने बैठाकर भी घंटों सवाल-जवाब किये गये। जांच एजेंसी के सूत्रों का आरोप है कि जब घोष की मौजूदगी में पूछताछ की गयी, तो अभिषेक बनर्जी कई अहम बातों पर अपने बयान से पलट गये। बताया जा रहा है कि आमने-सामने बैठाने से पहले सीआईडी अधिकारियों ने दोनों नेताओं से अलग-अलग पूछताछ की थी।</p>
<p>सीआईडी सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं को अभिषेक बनर्जी के अकेले के बयानों और दोनों नेताओं की मौजूदगी में दिये गये जवाबों में काफी अंतर मिला। जब बनर्जी से बयानों में इस बदलाव की वजह पूछी गयी, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये। माना जा रहा है कि रविवार की पूछताछ से जांच एजेंसी संतुष्ट नहीं है। ऐसे में जांच को आगे बढ़ाने के लिए तृणमूल सांसद को एक और समन भेजने पर विचार किया जा रहा है। उनकी पेशी की तारीख पर अभी हालांकि फैसला नहीं हुआ है।</p>
<p>कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी पिछले कई हफ्तों से सीआईडी की रडार पर हैं। इससे पहले उन्होंने अलग-अलग वजहें बताकर कई समन टाल दिये थे, जिसके बाद अदालत के दखल देने पर ही वह जांचकर्ताओं के सामने पेश हुए। सूत्रों का कहना है कि पहले दौर की पूछताछ में उन्होंने कई सवालों के जवाब में सिर्फ यही कहा था कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। यह नया घटनाक्रम ऐसे समय में आया है, जब अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई मामलों में घिरे हुए हैं। कथित भर्ती घोटाले के सिलसिले में सोमवार को उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश होना है। मंगलवार को, डीजे विवाद से जुड़ी अपनी कथित टिप्पणी के एक अलग मामले में भी उनके सीआईडी के सामने पेश होने की संभावना है।</p>
<p>इन मामलों के अलावा भी अभिषेक बनर्जी कई अन्य जांच और शिकायतों का सामना कर रहे हैं। कोयला तस्करी के मामले में भी उनका नाम लंबे समय से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, अम्फान राहत कोष के वितरण में गड़बड़ी को लेकर शनिवार को उनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी करने के मामले में सिलीगुड़ी में भी एक शिकायत दर्ज है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 13:26:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी सीआईडी के सामने पेश: भवानी भवन में कड़ी सुरक्षा, ईडी समन और अन्य जांचों के बीच बढ़ीं टीएमसी नेता की मुश्किलें</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन पहुंच गए हैं। कोर्ट के निर्देशानुसार जांच में सहयोग कर रहे बनर्जी से पूछताछ के लिए रविवार को भी अधिकारी तैनात रहे। उनके आवास पर हुई हालिया पुलिस छापेमारी के बाद इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/abhishek-banerjee-presented-before-cid-in-fake-signature-case-tight/article-156964"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी रविवार को राज्य पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के सामने पेश होने के लिए विभाग के मुख्यालय पहुंच गये हैं। इसके मद्देनजर कोलकाता के भवानी भवन स्थित मुख्यालय पर सुरक्षा व्यवस्था का कड़ी व्यवस्था की गयी है। इससे पहले डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी से सीआईडी ने गुरुवार रात को लगभग साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की थी। उस पूछताछ के बाद उन्हें दोबारा समन जारी कर रविवार सुबह पेश होने के लिए कहा गया था। अभिषेक बनर्जी ने पहले ही कहा था कि वह जांच में सहयोग करेंगे और निर्देशानुसार एजेंसी के सामने पेश होंगे।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें इन दिनों कई मामलों को लेकर बढ़ी हुई हैं। शुक्रवार को सीआईडी अधिकारियों ने उनके आवास पर जाकर साल्ट लेक में दर्ज एक शिकायत के मामले में एक और नोटिस चिपकाया है। यह मामला उनके एक बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्हें 16 जून को पेश होने के लिए कहा गया है। इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी प्राथमिक स्कूल भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में उन्हें 15 जून को तलब किया है। इन दोनों ही मामलों में उनके पास कोई कानूनी राहत या सुरक्षा नहीं है।</p>
<p>कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की सुनवाई करते हुए बनर्जी को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। हालांकि, अदालत ने सीआईडी को उनके खिलाफ दो सप्ताह तक कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया है। अदालत से मिली इसी अंतरिम राहत के बीच बनर्जी रविवार को सीआईडी के सामने पेश हो रहे हैं। आज छुट्टी का दिन होने के बावजूद सुबह से ही सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारी भवानी भवन पहुंचने लगे थे। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है।</p>
<p>यह बढ़ी हुई सुरक्षा शनिवार तड़के अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर हुई पुलिस की एक नाटकीय कार्रवाई के बाद देखने को मिली है। साल्बोनी थाने की पुलिस उनके करीबी सहयोगी सुमित रॉय की तलाश में वहां पहुंची थी, क्योंकि रॉय के मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन इसी आवास की मिली थी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने तड़के लगभग तीन बजे दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। सुबह करीब पांच बजे ताला तोड़ने के लिए आपदा प्रबंधन कर्मियों को बुलाया गया, जिसके बाद पुलिस ने अंदर घुसकर तलाशी ली। इस कार्रवाई की खबर मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वहां पहुंच गयी थीं। पुलिस सुबह करीब आठ बजे वहां से लौट गई, हालांकि उन्हें वहां न तो रॉय मिले और न ही कोई संदिग्ध सामग्री।</p>
<p>हस्ताक्षर जालसाजी का यह पूरा विवाद तृणमूल कांग्रेस विधायक दल द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए एक पत्र से जुड़ा है। यह पत्र शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के संबंध में था। बाद में आरोप लगे कि पत्र पर किए गए कई हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे थे। कुछ विधायकों ने दावा किया कि उन्होंने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर ही नहीं किए हैं, जबकि कुछ नाम बड़े अक्षरों में लिखे हुए थे। पार्टी के महासचिव होने के नाते इस विवादित पत्र पर अभिषेक बनर्जी के भी हस्ताक्षर थे। सीआईडी ने इससे पहले भी उन्हें कई समन जारी किए थे, लेकिन शुरुआत में वह पेश नहीं हुए और राहत के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय चले गए थे। अदालत के आदेश के बाद ही वह नयी दिल्ली से लौटे और गुरुवार को भवानी भवन में जांचकर्ताओं के सामने पेश हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 17:42:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>हेक्सावेयर को बड़ी राहत, अमेरिकी संघीय अदालत ने नैटसॉफ्ट के पेटेंट दावों को किया खारिज </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी संघीय अदालत ने हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज के खिलाफ पेटेंट उल्लंघन के मुकदमे को खारिज कर दिया है। नैटसॉफ्ट कॉर्पोरेशन द्वारा कंपनी के 'अमेज', 'टेनसाई' और 'रैपिडएक्स' प्लेटफॉर्म्स को दी गई चुनौती को कोर्ट ने निराधार माना। हेक्सावेयर के सीईओ ने कहा कि उन्हें अपने नवाचार और इंजीनियरों की मेहनत पर पूरा भरोसा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-relief-to-hexaware-us-federal-court-rejects-natsofts-patent/article-156774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/hexaware.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगंटन। वैश्विक आईटी कंपनी हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज के खिलाफ पेटेंट के एक मामले को अमेरिका की एक संघीय अदालत ने खारिज कर दिया है। हेक्सावेयर ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका के इलिनॉय प्रांत के उत्तरी जिले की जिला अदालत ने गत 09 जून को नैटसॉफ्ट कॉर्पोरेशन और उसकी संबद्ध कंपनी अपड्राफ्ट द्वारा हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनी हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज इंक के खिलाफ दायर मुकदमे के सभी दावों को खारिज कर दिया है। इनमें नौ पेटेंटों से संबंधित दावे भी शामिल थे।</p>
<p>हेक्सावेयर ने अपने 'अमेज', 'टेनसाई' और 'रैपिडएक्स' प्लेटफ़ॉर्मों में उपयोग की गयी तकनीकों के लिए अमेरिकी पेटेंट प्राप्त किये हैं। साथ ही टेनसाई से संबंधित एक अतिरिक्त अमेरिकी पेटेंट को भी हाल ही में स्वीकृति मिली है तथा उसके जल्द जारी होने की उम्मीद है। इन पेटेंटों को नैटसॉफ्ट ने अदालत में चुनौती दी थी। अदालत ने पाया कि जिन पेटेंटों का दावा किया गया था, वे किसी विशिष्ट और ठोस आविष्कार की बजाय व्यापक और अमूर्त विचारों का दावा करते हैं, इसलिए वे अमेरिकी कानून के तहत पेटेंट संरक्षण के योग्य नहीं हैं। चूंकि संघीय पेटेंट दावों को खारिज कर दिया गया, इसलिए अदालत ने संबंधित राज्य-स्तरीय दावों पर अधिकार क्षेत्र बनाये रखने से भी इनकार कर दिया और उन्हें भी खारिज कर दिया।</p>
<p>नैटसॉफ्ट को संशोधित शिकायत दाखिल करने के लिए समय दिया गया है। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो अदालत अंतिम निर्णय जारी करने की संभावना रखती है। हेक्सावेयर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीकृष्ण रामकार्तिकेयन ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कंपनी को पहले दिन से ही अपने पक्ष में फैसला आने का पूरा विश्वास था। ये प्लेटफ़ॉर्म कंपनी के अपने अनुसंधान और उसके इंजीनियरों के वर्षों के निवेश का परिणाम हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 18:27:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 'हस्ताक्षर जालसाजी' मामले में गिरफ्तारी पर 21 दिनों की लगाई रोक, दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को 21 दिनों तक दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी है। कोर्ट ने सीआईडी जांच में पूर्ण सहयोग की शर्त पर यह राहत दी, जिसके बाद वे भवानी भवन मुख्यालय में पेश होने के लिए सहमत हुए। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/abhishek-banerjee-gets-conditional-relief-from-calcutta-high-court/article-156706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को एक बड़ी राहत देते हुए कथित 'हस्ताक्षर जालसाजी' मामले में अगले 21 दिनों तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल-न्यायाधीश अवकाशकालीन पीठ ने साथ में यह साफ कर दिया है कि यह राहत पूरी तरह से इस शर्त पर निर्भर करेगी कि वे राज्य के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की जांच में पूरी तरह सहयोग करें।</p>
<p>यह आदेश तब आया जब बनर्जी के वकील अयान भट्टाचार्य ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि उनके मुवक्किल गुरुवार शाम 6 बजे ही कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में जांचकर्ताओं के सामने पेश होंगे और भविष्य में भी जब भी जरूरत होगी, वे सुबह 10 बजे से रात 10 बजे के बीच एजेंसी के समन का जवाब देंगे। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आज शाम की पूछताछ प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे वहां से जाने के लिए स्वतंत्र होंगे और अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें सीआईडी को अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी।</p>
<p>गौरतलब है कि यह पूरा कानूनी विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नामित करने वाले एक प्रस्ताव पत्र से जुड़ा है, जिसे 20 मई को विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था। इस पत्र पर बनर्जी के भी हस्ताक्षर थे, लेकिन टीएमसी के ही दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने शिकायत दर्ज कराई कि इस दस्तावेज़ पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि इस प्रस्ताव की तारीखों में भारी विसंगतियां हैं, क्योंकि रिकॉर्ड के अनुसार विधायकों ने 6 मई को हस्ताक्षर किए थे, जबकि बाद में कहा गया कि यह बैठक 19 मई को हुई थी। कई विधायकों ने जांचकर्ताओं को लिखित में दिया है कि 6 मई को ऐसी कोई बैठक ही नहीं हुई थी और न ही उन्होंने किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी द्वारा पहले भेजे गए तीन समन की अनदेखी की थी और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पेश नहीं हुए थे, जिसके बाद बार-बार मिल रहे नोटिस और गिरफ्तारी की आशंका के खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:22:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें : भगवान राम पर कथित टिप्पणी का मामला फिर पहुंचा अदालत, पढ़ें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी की विशेष अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भगवान राम पर की गई कथित टिप्पणी के मामले को पुनर्विचार के लिए निचली अदालत में स्थानांतरित कर दिया है। न्यूयॉर्क में दिए विवादास्पद बयान के खिलाफ दायर याचिका पर कोर्ट अब राहुल गांधी को नोटिस जारी कर तलब करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-problems-increased-the-matter-of-alleged-comment-on/article-156560"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/rahul-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। राहुल गांधी द्वारा भगवान राम पर की गई कथित टिप्पणी के मामले में बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने आदेश जारी करते हुए मामले की सुनवाई पुनः अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए कोर्ट) की अदालत में करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता हरिशंकर पाण्डेय ने बताया कि अब इस मामले की सुनवाई निचली अदालत में होगी, जिसकी अगली तारीख शीघ्र निर्धारित होगी।</p>
<p>पाण्डेय ने बताया कि अप्रैल 2025 में राहुल गांधी ने न्यूयॉर्क स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में भगवान राम तथा सनातन धर्म के प्रतीकों पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनके इस विवादास्पद बयान से सनातन धर्म का अपमान हुआ तथा वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को क्षति पहुंची, जिसके बाद यह याचिका दायर की गई थी। उन्होने बताया कि मई 2025 में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) की अदालत में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) ने यह कहते हुए परिवाद खारिज कर दिया था कि इसके लिए भारत सरकार से अनुमति लेकर आएं। उक्त आदेश के खिलाफ 26 सितंबर को जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी, जिसे जिला जज ने एमपी-एमएलए कोर्ट को स्थानांतरित कर दिया था।</p>
<p>आज पुनः अपर सत्र न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने सुनवाई करते हुए मामले की पुनः सुनवाई का आदेश निचली अदालत को दे दिया है। राहुल गांधी को तलब करने की प्रक्रिया के तहत नोटिस भी जारी किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:52:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बिटकॉइन मामला: कांग्रेस नेता नलपाद को ईडी का समन, कर्नाटक के मंत्री ने कार्रवाई को बताया 'राजनीति से प्रेरित'</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु में कुख्यात बिटकॉइन घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाद और उमर फारूक नलपाद को 11 जून के लिए समन जारी किया है। कर्नाटक सरकार के मंत्री यू टी खादर ने इसे 'राजनीति से प्रेरित' कार्रवाई बताया है। ईडी हैकर श्रीकी से जुड़े धन शोधन मामले की जांच कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ed-summons-congress-leader-nalapad-in-bitcoin-case-karnataka-minister/article-156582"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कथित बिटकॉइन घोटाले से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाद को समन भेजे जाने से बुधवार को कर्नाटक में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। राज्य के मंत्री यू टी खादर ने इस कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए इसे 'राजनीति से प्रेरित' करार दिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने मोहम्मद हारिस नलपाद और उनके भाई उमर फारूक नलपाद को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पूछताछ के लिए 11 जून को बेंगलुरु स्थित अपने कार्यालय में पेश होने के लिए समन जारी किया है। यह जांच कुख्यात हैकर कृष्ण रमेश उर्फ श्रीकी से जुड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले से संबंधित है।</p>
<p>इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री खादर ने सतर्क रुख अपनाया और कहा कि हालांकि वे इस समन पर अपनी आपत्ति जताते हैं, लेकिन जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने संवााददाताओं से कहा, "यह नोटिस राजनीति से प्रेरित प्रतीत होता है, लेकिन मुझे मामले के सभी तथ्यों की पूरी जानकारी नहीं है। किसी भी जांच एजेंसी के कामकाज पर टिप्पणी करना हमारे लिए उचित नहीं होगा। एजेंसी कानून के मुताबिक अपनी जांच करेगी। मैं अभी इस मुद्दे का अध्ययन कर रहा हूं।"</p>
<p>यह समन इस हाई-प्रोफाइल बिटकॉइन घोटाला जांच में नया घटनाक्रम है, जिसने कई प्रभावशाली व्यक्तियों के कथित संबंधों के कारण कर्नाटक में समय-समय पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ाई है। ईडी की जांच मुख्य रूप से वेबसाइटों को हैक करने, डिजिटल संपत्तियों (बिटकॉइन) की चोरी करने और इस अवैध गतिविधि से अर्जित धन को वैध बनाने (लांड्रिंग) के आरोपों पर केंद्रित है। नलपाद भाइयों से इससे पहले कर्नाटक पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी पूछताछ की थी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि केंद्रीय एजेंसी ने अप्रैल में कर्नाटक में कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें नलपाद भाइयों के परिसर भी शामिल थे। तब ईडी ने आरोप लगाया था कि मोहम्मद हारिस नलपाद और उमर फारूक नलपाद हैकर श्रीकी के करीबी सहयोगी थे और इस अपराध की कमाई के लाभार्थियों में शामिल थे। हालांकि, नलपाद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:01:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विधानसभा हस्ताक्षर विवाद: गिरफ्तारी से बचने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचे अभिषेक बनर्जी, शुक्रवार को सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने हस्ताक्षर विसंगति मामले में सीआईडी की दंडात्मक कार्रवाई और गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े इस पत्र में 14 विधायकों के फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/assembly-signature-dispute-abhishek-banerjee-reaches-calcutta-high-court-to/article-155858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/high-court.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति से संबंधित पत्र में कथित हस्ताक्षर विसंगतियों की जांच के सिलसिले में गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग करते हुए बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया। अभिषेक बनर्जी ने आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा जारी नोटिस को चुनौती देते हुए एजेंसी की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से कानूनी संरक्षण देने की मांग की है, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है।</p>
<p>मामले की सुनवाई शुक्रवार को न्यायमूर्ति अपूर्ब सिन्हा राय की पीठ के समक्ष होने की संभावना है। न्यायालय ने उन्हें याचिका दाखिल करने की अनुमति प्रदान कर दी है। विवाद उस पत्र को लेकर है, जिसे तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की ओर से विधानसभा में प्रमुख पदों के लिए पार्टी नेताओं के नाम प्रस्तावित करते हुए प्रस्तुत किया गया था। पत्र में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने की अनुशंसा की गयी थी।</p>
<p>आरोप है कि इस दस्तावेज में कई हस्ताक्षर या तो गायब थे, अथवा उनमें अनियमितताएं थीं। सूत्रों के अनुसार, पत्र में 70 विधायकों के नाम दर्ज थे, लेकिन इनमें से कम से कम 14 नाम केवल बड़े अक्षरों में लिखे गये थे और उनके साथ हस्ताक्षर नहीं थे। कुछ अन्य हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाये गये हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी। अभिषेक बनर्जी चूंकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, इसलिए पत्र पर उनके हस्ताक्षर भी मौजूद थे।</p>
<p>सीआईडी अधिकारियों ने शनिवार को उनके आवास पर जाकर जांच में सहयोग करने के लिए नोटिस दिया था और उन्हें सोमवार को भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में उपस्थित होने को कहा गया था। बनर्जी हालांकि निर्धारित तिथि पर जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने कथित तौर पर अतिरिक्त समय की मांग की थी। बुधवार को उन्होंने सीआईडी के नोटिस को चुनौती देते हुए तथा गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इससे पहले भी उन्होंने संकेत दिया था कि एजेंसी की कार्रवाई के खिलाफ वह कानूनी उपाय अपनाएंगे।</p>
<p>विवाद उस समय और गहरा गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के दो विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कथित हस्ताक्षर विसंगतियों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस से शिकायत की है। शिकायत मिलने के बाद विधानसभा ने मामले की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी थी। आरोप सार्वजनिक होने के कुछ ही समय बाद तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इस बीच, विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस बुधवार को विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर उत्पन्न गतिरोध पर चर्चा करने वाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 18:25:30 +0530</pubDate>
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                <title>सौरभ भारद्वाज की बढ़ी मुश्किलें : जनकपुरी पॉक्सो मामले में नाबालिग की पहचान उजागर करने पर प्राथमिकी दर्ज, स्कूल की शिक्षिका गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[जनकपुरी के पब्लिक स्कूल में 3 वर्षीय बच्ची से यौन उत्पीड़न मामले में 'आप' दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप है। पुलिस ने मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में स्कूल की महिला शिक्षिका को भी गिरफ्तार किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/saurabh-bhardwajs-troubles-increase-fir-registered-for-revealing-identity-of/article-155701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/saurabh-bhardwaj.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम दिल्ली के जनकपुरी इलाके स्थित एक पब्लिक स्कूल में यौन उत्पीड़न की शिकार तीन वर्षीय बच्ची की पहचान उजागर करने के मामले में जनकपुरी थाने में आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 72, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 23(4) के तहत दर्ज की गयी है, जो पीड़ित बच्चों की पहचान उजागर करने को प्रतिबंधित करती हैं।</p>
<p>यह घटनाक्रम जनकपुरी के एक पब्लिक स्कूल में नर्सरी की तीन वर्षीय छात्रा के यौन उत्पीड़न की जांच के दौरान सामने आया है। पीड़िता के परिवार ने इस संदर्भ में एक मई को शिकायत दर्ज करायी थी। इसके बाद इस मामले में विद्यालय के एक 57 वर्षीय केयर टेकर को गिरफ्तार किया गया था। बाद में आरोपी को द्वारका अदालत ने जमानत दे दी थी।</p>
<p>मामले में कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने सबूत जुटाने के बाद विद्यालय की एक महिला शिक्षिका को भी गिरफ्तार कर लिया है। अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए शिक्षिका को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में दिल्ली सरकार ने गंभीर रूख् अपनाया है और स्कूल प्रशासन को अपने हाथ में लेने पर विचार कर रही है, क्योंकि स्कूल बाल सुरक्षा और निगरानी तंत्र में गंभीर खामियों को लेकर शिक्षा विभाग के कारण बताओ नोटिस का जवाब देने में विफल रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:43:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राहुल गांधी मानहानि मामला : सत्यकी सावरकर की जिरह में कई अहम स्वीकारोक्तियां, 15 जून को होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पुणे की विशेष अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि 'स्वातंत्र्यवीर' कोई सरकारी उपाधि नहीं बल्कि एक सम्मानसूचक संबोधन है। उन्होंने यह भी माना कि उनके द्वारा संचालित 'हर घर सावरकर' अभियान का कोई आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-defamation-case-many-important-confessions-in-the-cross-examination/article-155702"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/rahul.png" alt=""></a><br /><p>पुणे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर कथित मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को विशेष सांसद-विधायक अदालत में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये। न्यायाधीश अमोल श्रीराम शिंदे की अदालत में शिकायतकर्ता एवं वीर सावरकर के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर से राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने जिरह की। जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि 'स्वातंत्र्यवीर' कोई सरकारी या कानूनी मान्यता प्राप्त उपाधि नहीं है, बल्कि एक कवि और नाटककार द्वारा इस्तेमाल किया गया सम्मानसूचक संबोधन है। उन्होंने यह भी माना कि इस प्रकार की उपाधियों के उपयोग पर कोई कानूनी रोक नहीं है।</p>
<p>सत्यकी ने कहा कि ऐसी उपाधियों का उपयोग व्यक्ति अपनी सार्वजनिक पहचान मजबूत करने के लिए कर सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी सम्मानसूचक उपाधि की उपयुक्तता तय करने के लिए कोई सरकारी या वैधानिक संस्था मौजूद नहीं है। उन्होंने इस दावे को खारिज किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने स्वयं 'स्वातंत्र्यवीर' की उपाधि अपनायी थी। मामले के खर्च पर उन्होंने बताया कि मुकदमेबाजी का पूरा खर्च वह स्वयं वहन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 'हर घर सावरकर' अभियान के तहत पुस्तकें, टी-शर्ट और अन्य सामग्री बेची जाती है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह समिति पंजीकृत संस्था नहीं है और इसके खातों या बैलेंस शीट का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।</p>
<p>सत्यकी सावरकर की जिरह पूरी नहीं हो सकी और मामले की अगली सुनवाई 15 जून 2026 को होगी। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2023 में सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया था। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने मार्च 2023 में लंदन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए वीर सावरकर के बारे में अपमानजनक और तथ्यहीन टिप्पणियां की थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:08:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>स्ट्रीट डॉग पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते हैं....</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर कहा कि किसी को नहीं पता कब कौन सा कुत्ता काट ले। अदालत ने पहले ही स्कूलों और अस्पतालों से कुत्तों को हटाने का आदेश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hearing-on-street-dog-supreme-court-said-that-dogs-cannot/article-138691"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/sc-on-st-d.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई की कार्रवाई जारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बोला कि कुत्तों के दिमाग के कोई भी नहीं पढ़ सकता है कि वो कब किसको काटेगा और किसको नहीं। बता दें​ कि इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया कर रहे हैं।  </p>
<p>इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने और उनकी नसबंदी करने तथा इसके साथ ही उनके रहने के लिए उचित व्यवस्था करने के आदेश दिए थे। इसके आगे आवारा कुत्तों पर सुनवाई के ​दौरान लास्ट टिप्पणी में सु्प्रीम कोर्ट ने कहा, 'इतनी याचिकाएं तो इंसानों के लिए भी नहीं आतीं है जितनी आवारा कुत्तों पर आई है।'</p>
<p>आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "कल को कोई भैंस ला सकता है और कह सकता है कि मैं पशु प्रेमी हूं।" इसके आगे जस्टिस नाथ ने आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई के दौरान कहा, "सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते हैं।"</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 12:33:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुकदमों का अंबार कम करने पर हो मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[ हमारे देश की अदालतों में ब्रिटेन आदि की अदालतों से कई गुणा अधिक मुकदमों की सुनवाई एक दिन में होती है। केन्द्रीय कानून मंत्री किरेन रिजूजू की माने तो इंग्लैण्ड में एक न्यायाधीश एक दिन में तीन से चार मामलों में निर्णय देते हैं, जबकि हमारे देश में प्रत्येक न्यायाधीश औसतन प्रतिदिन 40 से 50 मामलों में सुनवाई करते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/there-should-be-brainstorming-on-reducing-the-number-of-cases/article-16204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/cot.jpg" alt=""></a><br /><p>लाख प्रयासों के बावजूद देश की अदालतों में मुकदमों का अंबार कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक मोटे अनुमान के अनुसार देश की अदालतों में सात करोड़ से अधिक मुकदमें लंबित हैं। इनमें से करीब 87 फीसदी मुकदमें देश की निचली अदालतों में लंबित हैं, तो करीब 12 फीसदी मुकदमें राज्यों के उच्च न्यायालयों में लंबित चल रहे हैं। देश की सर्वोच्च अदालत में एक प्रतिशत मुकदमें लंबित हैैं। पिछले दिनों जयपुर में आयोजित एक समारोह के दौरान न्यायालयीय प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी करने वाले वकीलों की फीस को लेकार अच्छी खासी चर्चा हुई, जो मीडिया की शुर्किया भी बनी। वहीं अगस्त में कार्य भार संभालने वाले नए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति यूयू ललित द्वारा अदालत में सुबह साढ़े नौ बजे सुनवाई आरंभ करने की पहल पर भी वाद-विवाद का दौर जारी है। उधर सरकार ने मानसून सत्र में कुछ बदलावों के साथ मध्यस्थता विधेयक लाने का संकेत दिया है तो दूसरी और न्यायाधीशों की भर्ती में एकरुपता लाने के केन्द्र के प्रयास लगभग विफल हो गए हैं। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि न्यायालयों में मुकदमों का अंबार लगा हुआ है तो दूसरी और सभी पक्ष इसे लेकर चिंतित भी हैं। सवाल यह है कि मुकदमों के इस अंबार को कम करने के लिए कोई ऐसी रणनीति बनानी होगी, जिससे अदालतों का भार भी कम हो न्यायिक प्रक्रिया लंबी भी ना चले, लोगों को समय पर न्याय भी मिलें।</p>
<p>पिछले पांच साल में ही देश में लंबित मुकदमों की संख्या चार करोड़ से बढ़कर सात करोड़ हो चुकी है। हालांकि लोक अदालत के माध्यम से मुकदमों में कमी लाने की सार्थक पहल अवश्य की गई है पर लोक अदालतों में लाखों प्रकरणों के निबटने के बावजूद हालात में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। दरअसल लाखों की संख्या में इस तरह के मुकदमें हैं जिन्हें निपटाने के लिए कोई सर्वमान्य समाधान खोजा जा सकता है। मुकदमों की प्रकृति के अनुसार उन्हें विभाजित किया जाए और फिर समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर उन्हें निपटाने की कार्य योजना बने तो समाधान कुछ हद तक संभव है। कुछ इस तरह के मुकदमें हैं जिन्हें आसानी से निपटाने की कोई योजना बन जाए तो मुकदमों की संख्या में कमी हो सकती है। इनमें खासतौर से यातायात नियमों को तोड़ने वाले मुकदमों की ऑनलाईन निपटान की कोई व्यवस्था हो जाए तो अधिक कारगर हो सकती है। इसी तरह से चैक बाउंस होने के लाखों की संख्या में मुकदमें हैं जिन्हें एक या दो सुनवाई मेंं ही निस्तारित किया जा सकता है। इसी तरह से मामूली कहासुनी के मुकदमें जिसमें शांति भंग के प्रकरण शामिल हैं उन्हें भी तारीख दर तारीख के स्थान पर एक ही तारीख में निपटा दिया जाए तो हल संभव है। इसी तरह से राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर दर्ज होने वाले मुकदमों के निस्तारण की भी कोई कार्य योजना बन जाए तो उचित हो। इससे कम ग्रेविटी के मुकदमों का सहज निस्तारण संभव होगा, तो न्यायालयों का समय भी बचेगा।</p>
<p><br />देश में सबसे ज्यादा मुकदमे रेवेन्यू से जुड़े हुए हैं। गांवों में जमीन के बंटवारे या सीमा निर्धारण को लेकर देश की निचली अदालतों में अंबार लगा हुआ है। इस तरह के मुकदमों के निपटारे में ग्राम पंचायत की कहीं कोई भूमिका तय हो तो शायद कोई स्थाई समाधान संभव हो सकता है। पंच परमेश्वर की अवधारणा कहीं इस तरह के मुकदमों के निपटारे में अधिक सहायक हो सकती हैै। स्थानीय स्तर पर समझाईस से इस तरह के मुकदमोंं पर शीघ्र निर्णय की एक संभावना बनती है। हो यह रहा है कि रेवेन्यू के मुकदमें अपील दर अपील  पीढ़ी दर पीढ़ी चलते रहते हैं और मामूली सा सीमा विवाद लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझ कर रह जाता है। मीडिया ट्रॉयल पर भी अंकुश की आवश्यकता है, क्योंकि इससे कुछ हद तक निर्णय प्रभावित होने की संभावना बनती है। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारे देश की अदालतों में ब्रिटेन आदि की अदालतों से कई गुणा अधिक मुकदमों की सुनवाई एक दिन में होती है। केन्द्रीय कानून मंत्री किरेन रिजूजू की माने तो इंग्लैण्ड में एक न्यायाधीश एक दिन में तीन से चार मामलों में निर्णय देते हैं, जबकि हमारे देश में प्रत्येक न्यायाधीश औसतन प्रतिदिन 40 से 50 मामलों में सुनवाई करते हैं। यह इस ओर भी इंगित करता है कि हमारे देश में न्यायाधीशों के पास कार्यभार अधिक है। अधिक काम करने के बावजूद मुकदमों की संख्या कम होने का नाम ही नहीं लेती। पिछले कुछ समय से जिस तरह से पीएलआई को लेकर माननीय न्यायमूर्तियों द्वारा प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है और जुर्माना भी लगाया जा रहा है इसके भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगे है। इसी तरह से कोर्ट में केस दायर होने पर गवाह या याचिकाकर्ता के होस्टाइल होने को भी जिस तरह से अदालतों द्वारा गंभीरता से लिया जाने लगा है उसके भी परिणाम आने वाले समय मेंं और ज्यादा सकारात्मक होंगे।</p>
<p>   <strong>-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></p>
<p><strong>    ये लेखक के अपने विचार हैं </strong>     <br />                                                                                                                                                                                                              <br />        </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Jul 2022 12:36:03 +0530</pubDate>
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