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                <title>25 साल पुराने खेल परिसर में टूटी सुविधाएं, विकास की राह देख रहा स्टेडियम</title>
                                    <description><![CDATA[वीर दुर्गादास राठौड़ स्टेडियम: चोरी और असुरक्षा से खिलाड़ियों का टूट रहा हौसला
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/facilities-in-the-25-year-old-sports-complex-in-disrepair/article-162062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक ओर शहर में खेलों को बढ़ावा देने और आधुनिक स्टेडियम विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ङऊअ के अधीन आने वाला वीर दुर्गादास राठौड़ स्टेडियम बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जो सरकारी व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े करता है। करीब 25 वर्ष पुराने इस स्टेडियम की हालत आज इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां खेल सुविधाओं से अधिक अव्यवस्थाएं नजर आती हैं। अव्यवस्थित मैदान, बदहाल शौचालय, खराब लाइटें, चोरी हो चुके उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था का अभाव खिलाड़ियों के उत्साह पर भारी पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी यह स्टेडियम क्षेत्र के युवाओं के लिए खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था, लेकिन वर्षों से रखरखाव नहीं होने के कारण इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। आज हालत यह है कि यहां आने वाले खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।</p>
<p><strong>सुरक्षा के अभाव में बढ़ रही चोरी की घटनाएं</strong><br />स्टेडियम में सुरक्षा व्यवस्था लगभग नदारद है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां आए दिन चोरी की घटनाएं होती रहती हैं। स्टेडियम में लगाया गया वाटर कूलर भी चोरों के निशाने से नहीं बच सका। कुछ माह पहले खिलाड़ियों की सुविधा के लिए बनाए गए ओपन जिम से भी अधिकांश उपकरण चोरी हो चुके हैं। स्टेडियम में मौजूद शौचालयों की स्थिति भी चिंताजनक है। कई स्थानों पर दीवारें जर्जर हो चुकी हैं और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। साफ-सफाई के अभाव में खिलाड़ियों और यहां आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं परिसर में लगी कई लाइटें टूटी हुई हैं, जिससे शाम के समय अभ्यास करना लगभग असंभव हो जाता है।</p>
<p><strong>नाम का फुटबॉल मैदान, बदहाल बास्केटबॉल कोर्ट</strong><br />खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम में फुटबॉल मैदान तो बना हुआ है, लेकिन उसकी स्थिति किसी पेशेवर खेल मैदान जैसी नहीं है। बास्केटबॉल कोर्ट भी रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुका है। कई स्थानों पर फर्श खराब है और खेल के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि मैदानों का नियमित रखरखाव हो और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो यहां से भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों का टूट रहा मनोबल</strong><br />क्षेत्र के खिलाड़ियों का कहना है कि वे सीमित संसाधनों में अभ्यास करने को मजबूर हैं। आधुनिक खेल सुविधाओं के अभाव में उनकी प्रतिभा पूरी तरह निखर नहीं पा रही। उनका मानना है कि यदि अभ्यास के लिए बेहतर मैदान, सुरक्षित वातावरण, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छ शौचालय और खेल उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तो क्षेत्र के कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।<br /><strong>-सरमन लबान, फुटबॉल खिलाड़ी</strong></p>
<p><strong>विकास की राह देख रहा स्टेडियम</strong><br />शहर के कई स्टेडियमों में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ऐसे में वीर दुर्गादास स्टेडियम भी विकास का हकदार है। खेल संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो यह स्टेडियम एक बार फिर क्षेत्र की खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है। परिसर में सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं, सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, फुटबॉल मैदान और बास्केटबॉल कोर्ट का नवीनीकरण हो, पेयजल और शौचालय की समुचित व्यवस्था की जाए तथा चोरी हुए ओपन जिम उपकरणों को पुनः स्थापित किया जाए।<br /><strong>-मयंक राज जेठी, स्थानीय खेल प्रेमी</strong></p>
<p>स्टेडियम के रखरखाव एवं आवश्यक मरम्मत कार्यों के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे खिलाड़ियों और स्थानीय नागरिकों को बेहतर एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके।<br /><strong>-अंकित अग्रवाल, अधिशासी अभियंता केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:33:11 +0530</pubDate>
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