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                <title>infection - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>अमेरिका में 33 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा,  साल 1992 के बाद 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[सीडीसी के अनुसार, साल 2025 में अमेरिका के 44 राज्यों में खसरे के 2,065 मामले दर्ज किए गए। 1992 के बाद यह सर्वाधिक आंकड़ा है, जिससे देश का उन्मूलन दर्जा खतरे में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/new-record-in-america-more-than-2000-cases-of-measles/article-138088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/measles-case-in-us.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिल्स। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए जो 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है। 30 दिसंबर तक, देश में खसरा के कुल 2,065 पुष्ट मामले सामने आए थे, जिनमें से लगभग 11 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, ये मामले अमेरिका के 44 राज्यों में दर्ज किए गए, साथ ही अमेरिका आने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में भी मामले सामने आए। यह आंकड़ा 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है, जब देश में खसरा के 2,126 मामले सामने आए थे।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, 2025 में पांच से 19 वर्ष की आयु के मरीजों की संख्या सबसे अधिक थी, जो कुल मामलों का लगभग 42 प्रतिशत थी। 2025 में अमेरिका में खसरा से तीन मौतें दर्ज की गईं। सीडीसी के अनुसार, 2000 में अमेरिका में खसरा को समाप्त घोषित कर दिया गया था, जिसका मतलब है कि देश में खसरा नहीं फैल रहा है और नए मामले केवल तभी पाए जाते हैं जब कोई व्यक्ति विदेश में खसरा से संक्रमित होता है और स्वदेश लौटता है।</p>
<p>पिछले साल खसरे के मामलों में हुई वृद्धि के साथ, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका जल्द ही अपना उन्मूलन दर्जा खो सकता है, जैसा कि कनाडा नवंबर 2025 में खो चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:36:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नहीं थम रहा कोरोना का संक्रमण : देश में सक्रिय मामलों की संख्या 7 हजार के करीब, अब तक 68 की मौत; जानें अभी तक किन राज्यों में संक्रमण नही ?</title>
                                    <description><![CDATA[देशभर में कोराना संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या मंगलवार सुबह तक 6815 पहुंच गई और पिछले 24 घंटों के दौरान इसके संक्रमण से 3 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या 68 पहुंच गई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-stop-infection-of-corona-has-to-know-about-68/article-116941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देशभर में कोराना संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या मंगलवार सुबह तक 6815 पहुंच गई और पिछले 24 घंटों के दौरान इसके संक्रमण से 3 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या 68 पहुंच गई है।</p>
<p>केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार आज सुबह 8 बजे तक 324 नए संक्रमण के मामले सामने आए, जिससे कुल सक्रिय मामलों की संख्या 6,815 हो गई और इस बीमारी के संक्रमण से 7644 मरीज स्वस्थ हो गए हैं। पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण से 3 और मरीजों की जान जाने से मृतकों की संख्या 68 हो गई है। इस अवधि में राष्ट्रीय राजधानी, केरल और झारखंड से एक-एक मरीज की मौत हुई है।</p>
<p>मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा मामले केरल में दर्ज किए गए हैं। देश में 30 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में कोरोना सक्रिय मामलों में वृद्धि हुई है। जिनमें से केरल, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।</p>
<p>कोरोना संक्रमण के मामले में केरल सबसे अधिक प्रभावित राज्य है, जहां आज सुबह तक 96 सक्रिय मामले बढ़ने के साथ इसका आंकड़ा दो हजार पार कर 2053 तक पहुंच गया और दिल्ली में लगभग 37 मामलों के घटने से संक्रमितों की कुल संख्या 691 रह गई।</p>
<p>इसके अलावा गुजरात में 1109, पश्चिम बंगाल में 747, महाराष्ट्र में 613, कर्नाटक में 559, तमिलनाडु में 207, उत्तर प्रदेश में 225, राजस्थान में 124, हरियाणा में 108, आंध्र प्रदेश में 86, पुड्डुचेरी में 9, सिक्किम में 36, मध्य प्रदेश में 52, छत्तीसगढ में 44, बिहार में 48, ओडिशा में 39, पंजाब में 30, जम्मू-कश्मीर में 9, झारखंड में 6, असम में 3, गोवा में 5, तेलंगाना में 10, उत्तराखंड में 6, हिमाचल प्रदेश 3, चंड़ीगढ़ में 2 और त्रिपुरा में एक सक्रिय मामले हैं। मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमण को कोई मामला सामने नहीं आया है।</p>
<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार देश में कोविड मामलों में मौजूदा उछाल ओमिक्रॉन के नए सब-वेरिएंट जैसे कि जेएन.1, एनबी.1.8.1, एलएफ.7 और एक्सएफसी के कारण है। इनमें संक्रमण की संभावना अधिक है, लेकिन इनमें लक्षण हल्के हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन्हें वर्तमान में निगरानी में रखे गए वेरिएंट के रूप में वर्गीकृत किया है - अभी तक चिंता का विषय नहीं है, लेकिन सावधानी बरतने की आवश्यकता है।</p>
<p>इस बीच, कोरान के लिए जिम्मेदार वायरस सार्स-सीओवी-2 खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह अब अप्रत्याशित आपातकाल की तरह व्यवहार नहीं करता है - बल्कि, यह फ्लू की तरह बीमारियों के आवर्ती चक्र का हिस्सा बन गया है। कोरोना के मामलों में वृद्धि के जवाब में, केंद्र सरकार ने अस्पतालों की तैयारी और ऑक्सीजन, आइसोलेशन बेड, वेंटिलेटर और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न राज्यों में मॉक ड्रिल शुरू की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jun 2025 12:53:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मरीजों की ट्रेवल हिस्ट्री खंगालने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[डब्ल्यूएचओ के मुताबिक निपाह वायरस चमगादड़ और सूअर जैसे जानवरों से इंसानों में फैलता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/instructions-for-checking-travel-history-of-patients/article-57752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/marizo-ki-travel-history-khangalne-k-nirdesh...kota-news-22-09-2023.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। केरल में निपाह वायरस के केस मिलने और मौत होने के बाद राज्य सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने भी इसको लेकर अलर्ट और एडवाइजरी जारी की है। इसमें राज्य सभी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और सभी जिलों के सीएमएचओ को अलर्ट जारी करते हुए जांच और ट्रीटमेंट के लिए हेल्थ वर्कर्स को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए है। साथ ही दक्षिण भारत खासकर उन राज्यों से जहां इस वायरस के केस मिल रहे हैं, वहां से आने वाले यात्रियों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं । मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट के डायरेक्टर से जारी एडवाइजरी के मुताबिक केरल में 7 केस मिलने और 2 मरीजों की मौत होने के बाद इसके फैलने का खतरा दूसरे राज्यों में बढ़ गया है। ऐसे में अगर कोई इस तरह के लक्षण वाला मरीज आता है तो उसके जांच के सैंपल लेकर उसे भिजवाए। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक निपाह वायरस चमगादड़ और सूअर जैसे जानवरों से इंसानों में फैलता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह वायरस एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है। हालांकि केरल में  मंगलवार को 71 सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजे गए थे जिसमें से सभी निगेटिव पाए गए हैं। इसके अलावा 200 से अधिक हाई रिस्क वालों की भी रिपोर्ट निगेटिव आई है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है सभी लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए प्रयास करते रहना चाहिए।</p>
<p><strong>30 शहरों में जोखिम को लेकर किया अलर्ट</strong><br />सीएमएचओं ने बताया कि दक्षिणी राज्य केरल इन दिनों गंभीर और जानलेवा निपाह वायरस की चपेट में है। संक्रमण के कारण अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, सात लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई थी। केरल का कोझिकोड जिला संक्रमण के सबसे ज्यादा चपेट में है, इसके अलावा करीब 30 शहरों में जोखिमों को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। केरल में संक्रमण के खतरे को देखते हुए आसपास के राज्यों को भी सतर्क किया गया है। विशेषज्ञो के अनुसार कोरोना की तुलना में निपाह गंभीर संक्रमण और जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है, इसका मृत्युदर भी अधिक हो सकता है, जो फिलहाल चिंता का विषय है।</p>
<p><strong>ट्रेवल हिस्ट्री पता करने के निर्देश</strong><br />सीएमएचओं डॉ. जगदीश कुमार सोनी ने बताया कि एडवाइजरी में अगर इस तरह का कोई लक्षण वाला मरीज हॉस्पिटल में दिखाने आता है तो उसकी ट्रैवल हिस्ट्री जाननी जाएगी। अगर वह केरल या उसके आसपास के स्टेट जहां इस वायरस के केस मिले हो तो उसकी तुरंत जांच के लिए सैंपल भिजवाने के निर्देश जारी किए है। </p>
<p><strong>ये  लक्षण दिखाई दें तो बरतें सावधानी</strong><br />डिप्टी सीएमएचओं डॉ. घनश्याम मीणा  ने बताया कि निपाह के जोखिमों को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। इसके लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान दें। संक्रमितों को शुरूआत में फ्लू जैसे लक्षण होते हैं। निपाह वायरस मुख्य रूप से फेफड़ों और मस्तिष्क पर अटैक करता है। इसके लक्षणों में खांसी और गले में खराश से लेकर तेजी से सांस लेने, बुखार-मतली और उल्टी जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में, इसके कारण इन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) हो सकती है, जो कोमा और मृत्यु के खतरे को बढ़ाने वाली मानी जाती है।इस मुख्य लक्षणों में बुखार आना, सिरदर्द, कफ बनना, गले में खराश होना, सांस में तकलीफ और उल्टी होना इस वायरस की चपेट में आए मरीज के सामान्य लक्षण है। </p>
<p><strong>कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों को रहना होगा सावधान</strong><br />विशेषज्ञों का कहना है कि इस जानलेवा संक्रमण का खतरा किसी को भी हो सकता है, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में इसके जोखिम देखे जाते रहे हैं। संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपर्क में आने वाले किसी भी व्यक्ति को यह बीमारी हो सकती है। जिन लोगों की रोग प्रतिरक्षा कमजोर है उनमें इस रोग के कारण गंभीर समस्याओं के विकसित होने का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है, ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। </p>
<p><strong>संक्रमण से बचाने को रखनी होगी सावधानी</strong><br />डॉक्टरों का कहना है कि  निपाह संक्रमण से बचाव के लिए कोई भी टीका उपलब्ध नहीं है, इसके अलावा संक्रमण से बचाव के लिए कोई विशिष्ट दवा भी नहीं है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को बचाव के लिए सुरक्षात्मक उपायों का पालन करते रहने की सलाह दे रहे है। निवारक उपायों में सावधानियां बरतने के साथ, हाथ की स्वच्छता का ध्यान रखकर जोखिमों को कम किया जा सकता है। जिन राज्यों में इसका जोखिम अधिक हैं वहां सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी गई है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सभी चिकित्सा अधिकारियों व सीएचसी पीएचसी पर निपाह वायरस को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय से जारी गाइड लाइन की पालना करने और दक्षिण भारत से आने वाले लोगों की केस हिस्ट्री की जानकारी लेने के निर्देश जारी किया है। साथ लोगों से अपील की जा रही है।  केरल व संक्रमित शहरों में जाने से बचने के लिए कहा जा रहा है। अस्पताल में निपाह के लक्षणों वाले मरीजों की जांच कराने के भी  निर्देश जारी किए। सभी को अलर्ट मोड पर रहने के लिए कहा गया। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओं कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 16:34:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चिकनगुनिया संक्रमण से उबरने के दौरान एंटीबॉडी अधिक प्रभावी: लांसेट अध्ययन</title>
                                    <description><![CDATA[चिकनगुनिया संक्रमण, मच्छरों द्वारा प्रसारित चिकनगुनिया वायरस से होता है, जिसमें बुखार और जोड़ों का दर्द होता है, और यह एक विश्वव्यापी स्वास्थ्य खतरा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/antibodies-more-effective-during-recovery-from-chikungunya-infection-lancet-study/article-56295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/capture12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। चिकनगुनिया से लड़ने के लिए शरीर में बनी एंटीबॉडी गंभीर संक्रमण से उबरने के दौर में कहीं अधिक प्रभावी होती है। यह खुलासा लांसेट के दक्षिण पूर्व क्षेत्रीय स्वास्थ्य जर्नल में प्रकाशितअध्ययन पत्र में हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भुवनेश्वर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), कर्नाटक के मणिपाल विषाणु रोग विज्ञान संस्थान और नयी दिल्ली के ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी’ (आईसीजीईबी) सहित भारतीय संस्थानों के अध्ययन में कहा गया है कि किसी निश्चित समय में रोग की गतिशीलता को समझने में अध्ययन के ये नतीजे महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लांसेट अध्ययन</strong>: इसमें कहा गया कि भले ही एंटीबॉडी वायरस से संक्रमण की वजह से उत्पन्न हुए लेकिन सीरोलॉजिकल विश्लेषण से पता चलाता है कि चिकनगुनिया के रोगियों के रक्त सीरम में मौजूद एंटीबॉडी की ताकत बीमारी से उबरने के दौरान अधिक होती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>चिकनगुनिया: </strong>चिकनगुनिया संक्रमण, मच्छरों द्वारा प्रसारित चिकनगुनिया वायरस से होता है, जिसमें बुखार और जोड़ों का दर्द होता है, और यह एक विश्वव्यापी स्वास्थ्य खतरा है। इस दौरान, रोगियों को सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में सूजन या दाने की दुष्प्रभाव का भी अनुभव हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 19:01:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आई फ्लू के बाद अब लेप्टोस्पायरोसिस का बढ़ रहा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण दूषित पानी के संपर्क में आने या तैरने की वजह से हो सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/after-eye-flu--now-the-risk-of-leptospirosis-is-increasing/article-54126"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/eye-flu-hindi-news.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बारिश के चलते मौसमी और मच्छर जनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ बढ़ रहा है। अभी लोग आई फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसी बीमारियों से जूझ रहे थे अब  लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारी भी लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। लेप्टोस्पायरोसिस कोई मामूली बीमारी नहीं है। इसका समय पर इलाज न होने से किडनी डैमेज, लिवर फेल, सांस संबंधी समस्या और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। अभी इस बीमारी के इक्का दुक्का मरीज ही आ रहे है लेकिन तालाब, नदी और नाले में नहाने से इस बीमारी के होने का खतरा रहता है। वहीं निजी में पांच से सात मरीज आ रहे है।</p>
<p><strong>बैक्टीरिया गर्म और उमस भरे वातावरण में तेजी से पनपते </strong><br />एमडी मेडिसन डॉ. ओपी मीणा ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस एक तरह का बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जो इंसानों और जानवरों दोनों को संक्रमित कर सकता है। यह लेप्टोस्पाइरा जीनस के बैक्टीरिया के कारण होता है। इंसानों में लेप्टोस्पाइरा के कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, जिनमें से कई अन्य बीमारियों के लक्षणों से मिलते हैं। इसके अलावा कई मरीजों में इसका एक भी लक्षण नजर नहीं आता। लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण दूषित पानी के संपर्क में आने या तैरने की वजह से हो सकता है। इसके अलावा दूषित खाना या पानी का सेवन से भी यह संक्रमण फैल सकता है। ये बैक्टीरिया गर्म और उमस भरे वातावरण में तेजी से पनपते हैं। वहीं बारिश के मौसम में पानी काफी दूषित हो जाता है। इसलिए बारिश के मौसम में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>कैसे होता है लेप्टोस्पायरोसिस इन्फेक्शन</strong><br />सीनियर फिजिशियन एम पी गुप्ता ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस का बैक्टीरिया संक्रमित जानवरों के मूत्र के माध्यम से फैलते हैं, जो पानी या मिट्टी में मिल सकते हैं और वहां हफ्तों से लेकर महीनों तक जीवित रह सकते हैं। इंसानों में यह इन्फेक्शन संक्रमित जानवरों के मूत्र या लार को छोड़कर शरीर के अन्य तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैल सकता है। लेप्टोस्पायरोसिस का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जा सकता है, जिन्हें बीमारी की शुरुआत में ही डॉक्टर से संपर्क कर के लिया जाना चाहिए। वहीं अधिक गंभीर लक्षणों वाले व्यक्तियों की जांच के बाद ही डॉक्टर इलाज और दवाएं तय करते हैं। </p>
<p><strong>लक्षण: सिर दर्द, पीलिया,दस्त</strong><br />लेप्टोस्पायरोसिस से संक्रमित इंसानों में इसके कुछ सामान्य लक्षण देखने को मिलते हैं, जिसमें तेज बुखार, सिर दर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी होना, पीलिया, लाल आंखें, पेट दर्द, दस्त आदि शामिल है। इस संक्रमण के संपर्क में आने और बीमार होने के बीच का समय 2 दिन से 4 सप्ताह तक हो सकता है। बीमारी आमतौर पर बुखार और अन्य लक्षणों के साथ अचानक शुरू होती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए हमारा स्वास्थ्य हमारी जिम्मेदारी अभियान का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो गया। अभियान के तहत मंगलवार चिकित्सा विभाग की 801 टीमों ने 17009 घरों का सर्वे किया। बुखार और बैक्टीरियल इन्फेक्शन के मरीजों को चिहिंत कर इलाज किया जा रहा है। सभी सीएचसी पीएचसी अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए है।<br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 15:54:51 +0530</pubDate>
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                <title>अनदेखी: गंदगी के ढेर से नगरवासी हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[नगर पालिका आने के बाद सभी नगर वासियों को साफ सफाई की समस्या से पूर्ण रूप से समाधान नहीं हो सका है  जिसके चलते हैं नगर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। नगर की सफाई व्यवस्था बिगड़ने लगी है कई मोहल्लों में गंदगी होने के कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-townspeople-are-getting-worried-due-to-the-pile-of/article-44762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/andekhi-gandagi-ke-dher-hone-ke-karan-nagar-vasi-ho-rahe-pareshan...kota-news-05-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। सुल्तानपुर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे होने के कारण नगर वासियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही कई वार्डों में एवं मोहल्लों में कचरा गाड़ी नहीं जाने के कारण मोहल्ले वासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिससे मोहल्ले वासी आम रास्ते पर ही कचरा डाल देते हैं जिससे आने जाने वाले लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नगर के अन्नपूर्णा माता मंदिर के पीछे की गली में आम रास्ते पर ही कचरे के ढेर पड़े होने के कारण मोहल्ले वासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओम प्रकाश गोस्वामी एवं हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि आम रास्ते पर खड़ा होने के कारण रास्ते से निकलना भी दुश्वार हो गया है। साथ ही मच्छर और मक्खी पैदा होने के कारण बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>पालिका नहीं दे रही सफाई पर ध्यान</strong><br />सुल्तानपुर में नगर पालिका आने के बाद सभी नगर वासियों को साफ सफाई की समस्या से पूर्ण रूप से समाधान नहीं हो सका है  जिसके चलते हैं  नगर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। नगर की सफाई व्यवस्था  बिगड़ने लगी है कई मोहल्लों में गंदगी होने के कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिन मोहल्लों में गंदगी होती है। उस  मोहल्ले के वासियों को गंदगी के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p> नगर के अन्नपूर्णा माता मंदिर मोहल्ला बॉस कॉलोनी  चामुंडा माता मंदिर के पास  पूर्व  उप जिला प्रमुख संतोष खंडेलवाल के मकान के पीछे  के मोहल्ले में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे होने से  मोहल्ले वासियों को परेशानियां होती है। सीसी सड़क इंटरलॉकिंग होने के बाद भी समय पर सफाई नहीं होने से जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं जिससे वार्ड वासी गंदगी में ही अपना जीवन यापन करने के लिए मजबूर है। अन्नपूर्णा माता मंदिर के मोहल्ले वासियों  ने बताया कि वार्ड में सफाई के लिए प्रतिदिन सफाई की आवश्यकता है  लेकिन प्रतिदिन सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह गंदगी फैली रहती है इससे बीमारियां और संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। वर्तमान में मौसमी बीमारियां चलने से लोग पहले ही दहशत में हैं और गंदगी से भी मच्छर मक्खियां पैदा होने से बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। उन्होंने वार्ड की प्रतिदिन सफाई कराने की मांग की। </p>
<p>संदीप शर्मा ने बताया कि बॉस कॉलोनी में पानी की निकासी नहीं होने के कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नालियों में साथ ही खाली पड़े प्लॉट में भी पानी भरा होने से उसमें मक्खी और मच्छर पैदा होते रहते हैं जिससे बीमारियां फैलने का खतरा हो रहा है। एक और तो कोरोना वायरस के चलते सरकार के द्वारा जागरूकता फैलाने के अभियान चलाए जा रहे हैं। दूसरी और साफ सफाई नहीं होने के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। साहिब लाल बैरवा ने बताया कि बॉस कॉलोनी में जगह-जगह पर कीचड़ व पानी भरा होने से कॉलोनी वासियों को समस्या का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर पालिका के द्वारा नगर वासियों को मूलभूत आवश्यकताओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही नगर में अगर कहीं सफाई की समस्या है तो उसे शीघ्र ही दुरुस्त किया जाएगा। नगर वासियों की कचरा गाड़ी की समस्या के लिए भी कचरा गाड़ियां बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। <br /><strong>- हेमलता शर्मा, नगर पालिका चेयरमैन </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 May 2023 14:19:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कहीं आनुवांशिक बीमारी के शिकार तो नहीं प्रदेश के बाघ-बाघिन!</title>
                                    <description><![CDATA[ पूर्व में नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ बॉयोलोजिकल साइसेंस बैंगलुरू की एक टीम ने देश के कई टाइगर रिजर्व का सर्वे कर बाघ बाघिनों के नमूने एकत्र किए थे। जिसके अध्ययन के बाद यह सारांश आया था कि एक ही जीन पूल के बाघ-बाघिनों में कई तरह की बीमारी व समस्या होने की आशंका रहती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/are-the-tigers-and-tigresses-of-the-state-victims-of-genetic-disease/article-44458"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/kahi-bhi-bimari-ke-shikar-to-nahi-pradesh-ke-bagh-baghin...kota-news-02-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रणथम्भौर को यूं तो बाघों की नर्सरी कहा जाता है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व को भी रणथम्भौर के ही बाघ- बाघिनों ने ही आबाद किया है। लेकिन, रणथम्भौर के बाघ-बाघिनों में एक ओर चीज कॉमन नजर आ रही है। यहां के बाघ-बाघिनों को बार-बार पेट संबंधी खासकर मल त्याग नहीं कर पाने की बीमारी से जूझना पड़ा है। इसका ताजा मामला मुकुंदरा में देखने को मिला है। यहां पर बाघिन एमटी-4 यानि लाइटनिंग की भी तबीयत मल त्याग नहीं कर पाने के कारण बिगड़ी है। ऐसे में अब एक बार फिर से वन्यजीव प्रेमियों व वन अधिकारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। </p>
<p><strong>बाघिन एमटी-4 की भांजी रिद्दी भी रही परेशान</strong><br />24 मई 2022 को रणथंभौर में रिद्दी नाम से मशहूर बाघिन टी-124 भी स्केट पास नहीं करने की समस्या से जूझ चुकी है। इसकी वजह से उसकी बड़ी आंत में इंफेक्शन हो गया था। एनटीसीए के प्रोटोकॉल के अनुसार उसे ट्रैंकुलाइज कर इलाज करना पड़ा था। उसके ऐनस में घाव व सूजन थी। बाघिन की मॉनिटरिंग के दौरान पाया गया था कि वह काफी प्रयास के बाद भी स्टूल पास (मल त्याग) नहीं कर पा रही थी। इससे वह वोमिटिंग (उल्टियां) करने से परेशान हालात में थी। उसे भी ट्रैंकुलाइज कर एनीमा दिया था। गौरतलब है कि बाघिन रिद्दी बाघिन एमटी-4 की बहन की बेटी है। ऐसे में रिद्दी टाइग्रेस एमटी-4 यानी लाइटिंग की भांजी हुई और लाइटिंग मछली की पौती और रिद्दी पड़पौत्री है। </p>
<p><strong>रणथम्भौर के बाघ-बाघिन झेल चुके दर्द</strong><br />प्रदेश के हर टाइगर रिजर्व में रणथम्भौर से ही बाघ बाघिनों को शिफ्ट किया गया है। इनमें से अधिकतर बाघ-बाघिनों का संबंध रणथम्भौर की मशहूर बाघिन टी-16 यानि मछली से ही रहा है। ऐसे में पेट की बीमारी या मल त्याग में आ रही समस्या के जैनेटिक होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। पूर्व में नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ बॉयोलोजिकल साइसेंस बैंगलुरू की एक टीम ने देश के कई टाइगर रिजर्व का सर्वे कर बाघ बाघिनों के नमूने एकत्र किए थे। जिसके अध्ययन के बाद यह सारांश आया था कि एक ही जीन पूल के बाघ-बाघिनों में कई तरह की बीमारी व समस्या होने की आशंका रहती है। </p>
<p><strong>बाघ टी-57 को देनी पड़ी थी फ्लूड थैरेपी</strong><br />वर्ष 2022 में बाघ टी-57 पेट की तकलीफ के कारण तबीयत खराब हो गई थी। बाघ टी-57 को भोजन पचाने में परेशानी हो रही थी। साथ ही वह मल त्याग नहीं कर पा रहा था। इसके चलते बाघ चल-फिर नहीं पा रहा था। उपचार के दौरान उसे फ्लूड थैरेपी देनी पड़ी और ड्रिप चढ़ाकर पाचन क्रिया को ठीक करने वाली दवाएं तथा विटामिन दिए गए थे। हालांकि, बाद में वन विभाग की ओर से रिपोर्ट जारी की गई थी, जिसमें उसकी मौत का कारण कैंसर से होना बताया गया था।</p>
<p><strong>रणथम्भौर में पहले भी सामने आ चुके हैं कई मामले </strong><br />रणथम्भौर के बाघ-बाघिन पहले भी पेट की बीमारी खास तौर पर मल त्याग नहीं कर पाने की बीमारी से जूझ चुके हैं। इन सभी का बाघिन मछली से कोई न कोई संबंध जरूर है। वर्ष 2014-15 के बीच सबसे पहले रणथम्भौर के खूंखार बाघ टी-24 यानि उस्ताद को मल त्याग में परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वन विभाग की ओर से बाघ को तीन दिनों तक पिंजरे में रखकर उसका उपचार किया था। तब कहीं जाकर बाघ की हालत में सुधार हुआ था। बाघ उस्ताद मां मछली और पिता बाघ टी-20 यानी झुमरू का बेटा था। <br />- वर्ष 2017-18 के बीच बाघिन टी-8 यानी लाडली का शावक भी इसी प्रकार की बीमारी से जूझ चुका है।</p>
<p><strong>मुकुंदरा की बाघिन एमटी-4 दर्द से गुजरी</strong><br />रणथम्भौर की लाइटिंग यानी मुकुंदरा की रानी बाघिन एमटी-4 हाल ही में 28 अप्रेल से पेट की तकलीफ से गुजरी है। वह पिछले कुछ दिनों से मल त्याग नहीं कर पाने की वजह से दर्द में थी। चिकित्सकों की टीम ने सोमवार को ट्रैंकुलाइज कर उसके मलाश्य से दो सूखे मल के टुकड़े 4.5 तथा 2.5 इंच के टुकड़े निकाल उपचार किया। ये टुकड़े पत्थर की तरह सख्त थे।  बता दें, एमटी-4 बाघिन मछली की पौती है। </p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू...</strong><br />समान जीन पूल के बाघ बाघिनों में कई प्रकार की आनुवांशिक बीमारी होने की आशंका रहती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। कई संस्थाओं की ओर से इस दिशा में शोध भी किए जा रहे हैं।<br /><strong>-आरएन महरोत्रा, पूर्व पीसीसीएफ, वन विभाग जयपुर।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 May 2023 14:10:44 +0530</pubDate>
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                <title>नगर निगम ने दांव पर लगाई एक हजार लोगों की जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[यूडीएच मंत्री शहर को स्मार्ट सिटी बनाने में ताकत झौंक रहें हैं वहीं, नगर निगम व पार्षद वार्डों को सड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। प्रेम नगर द्वितीय की बस्ती चारों ओर से गंदे पानी से घिरी हुई है। घर के खिड़की दरवाजा खुलते ही गंदगी से सामना करना होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/municipal-corporation-put-the-lives-of-one-thousand-people-at-stake/article-21973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/4565465.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वार्डो के विकास को लेकर न तो नगर निगम गंभीर है और न ही पार्षद। चुनाव आते ही जनप्रतिनिधि गंदे पानी में कूदकर भी मतदाताओं तक वोट मांगने पहुंच जाते हैं लेकिन जीतने के बाद वार्ड की जनता कितनी तकलीफों में जी रही, इसकी सुध तक नहीं लेते। एक ओर जहां यूडीएच मंत्री शहर को स्मार्ट सिटी बनाने में ताकत झौंक रहें हैं वहीं, नगर निगम व पार्षद वार्डों को सड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। प्रेम नगर द्वितीय की बस्ती चारों ओर से गंदे पानी से घिरी हुई है। घर के खिड़की दरवाजा खुलते ही गंदगी से सामना करना होता है। हवा के साथ दुर्गंध घरों में प्रवेश करती है। बस्ती में कॉन्वेंट स्कूल भी है। जहां पहुंचने के लिए बच्चों को कीचड़ और गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। इलाके का चौराहा गंदे नाले का रूप ले चुका है। स्कूल जाते समय एक 5 वर्षीय छात्रा फिसलकर गिरने से एक आंख गंवा बैठी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों व पार्षद को वार्डवासियों की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है। दैनिक नवज्योति टीम कोटा उत्तर नगर के वार्ड 15 पहुंची तो हालात भयावह थे। हजारों लोग संक्रमण व खतरनाक बीमारियों के बीच जीने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़</strong><br />स्कूल स्थित बस्ती में एक हजार की आबादी है। घर से बाहर जाने का रास्ता तक नहीं बचा। बस्ती के चारों ओर सीवरेज का पानी जमा हो रहा है। बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। घरों में गंदा पानी घुस जाता है। पानी में जानलेवा मच्छर पनप रहे हैं। जिससे इलाके में डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार सहित मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। पार्षद व नगर निगम की अनदेखी से हजारों लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। जिला कलक्टर से शिकायत के बाद तहसीलदार, यूआईटी सचिव  व निगम के अधिकारी मौका मुआयना करने आए थे, तब उन्होंने नालियों की गहराई 4 फीट गहरी करने का सुझाव देते हुए जल्द काम शुरू करवाने का भरोसा दिलाया था लेकिन दो माह बाद भी इस दिशा में कुछ काम नहीं हुआ। <br /><strong>- रेखा, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>संक्रमण के खतरे में 60-70 परिवार</strong><br />प्रेम नगर द्वितीय में कॉन्वेंट स्कूल स्थित इलाके में करीब 60-70 परिवारों की बस्ती है। एक हजार की आबादी का इलाका गंदे नाले में तब्दील हो चुका है। चौराहे की सीसी सड़कें कीचड़ व पानी में डूब चुकी है। मकानोें की नींव तक का हिस्सा पानी में डूबा है। गंदगी, कीचड़ और दुर्गंध से लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया। पैदल चलना तो दूर बाइक से गुजरना भी खतरे से खाली नहीं है। वार्ड के ऊपरी इलाके की सड़कों की ऊंचाई नालियों से ज्यादा है और गहराई भी कम है। ऐसे में घरों में से निकलने वाला गंदा पानी ढलान वाला इलाका स्कूल वाली गली में आकर जमा हो रहा है। यहां पानी की निकासी नहीं होने से सड़क नाले में तब्दील हो गई। गंदे पानी में मच्छर पनप रहे हैं। खतरनाक बीमारियों के साथ संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। <br /><strong>- कुंज बिहारी, वार्ड 15 निवासी</strong></p>
<p><strong>मासूम छात्रा गंवा बैठी एक आंख</strong><br />प्रेम नगर द्वितीय का चौराहा नाले में तब्दील हो चुका है। गोविंद नगर, जागा बस्ती, रामदेवरा व देवनारायण मंदिर मोहल्ला ऊपरी इलाके में आते हैं। यहां के घरों का गंदा पानी कॉन्वेंट स्कूल स्थित बस्ती की ओर आता है। यहां नालियों की गहराई 3 से 4 इंच है। ऐसे में पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर घुटनों से नीचे तक पानी जमा रहता है। इस इलाके के लोगों व बच्चों को गंदे पानी व कीचड़ से होकर ही स्कूल जाना-आना पड़ता है। गत वर्ष स्कूल जाते समय एक 5 वर्षीय छात्रा फिसलकर गिर गई थी। आंख में चोट लगने से मासूम एक आंख गंवा बैठी। इसके अलावा कई स्कूली बच्चे गिरकर चोटिल हो चुके हैं। वहीं, आए दिन बाइक सवार जख्मी हो रहे हैं। पार्षद से लेकर जिला कलक्टर तक को समस्या बताई। जिला प्रशासन की टीम मौका मुआयना करने भी आई लेकिन आश्वासन देकर समाधान करना भूल गई।  - लक्ष्मीनारायण, वार्डवासी</p>
<p><strong>सांस लेना तक हो रहा मुश्किल</strong><br />इलाके में चारों तरफ गंदगी-कीचड़ का ढेर लगा है। सुबह आंख खुलते ही घर के सामने कीचड़-गंदगी के ढेर से सामना होना रोज की बात हो गई। दरवाजे-खिड़की खोलते ही दुर्गंध हवा के साथ घर में घुस जाती है। बदबू के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो गया। बुजुर्गों व बच्चों का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया। सीवरेज की बदबू से जीना मुहाल हो रहा है। बच्चे खेलने के लिए बाहर जाने की जिद करते हैं लेकिन दहलीज पर जमा पानी व कीचड़ की वजह से जाने नहीं देते। बच्चों को स्कूल पहुंचाना और सुरक्षित घर लाना किसी चुनौती से कम नहीं है। मोहल्लेवासियों ने पार्षद से लेकर जिला कलक्टर, यूआईटी और नगर निगम अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, सब आश्वासन देते हैं लेकिन काम कोई नहीं करता।                          <br /><strong>  - मीना महावर, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>यह समस्या 6 साल पुरानी है। लोगों ने अतिक्रमण कर नाले का प्राकृतिक स्वरूप  बदल दिया और मकान बना लिए, जिससे पानी की निकासी अवरुद्ध हो गई। बरसात के दिनों में हालात भयावह होते हैं। घरों में गंदा पानी घुस जाता है। समाधान के लिए नगर निगम, यूआईटी और जिला कलक्टर को 10 से 15 बार लिखित में शिकायत दे चुके हैं। इसके बावजूद समाधान नहीं हुआ। बाद में यूआईटी उप सचिव चंदन दुबे से अतिक्रमण हटवाकर नाला बनवाने की मांग की तो उन्होंने 7 दिन में कार्य करने का भरोसा दिलाया। लेकिन, काम नहीं होने पर दोबारा मिले तो उन्होंने इस संबंध में बात करने से इंकार कर दिया। स्कूल स्थित बस्ती में 50 मीटर लंबा, 5 फीट चौड़ा और 4 फीट गहरा नाला बना दिया जाए तो पानी की निकासी होने के साथ समस्या खत्म हो जाएगी। नाला निर्माण के लिए लोग अपना मकान तोड़ने को भी राजी हैं, इसके बावजूद यूआईटी अधिकारी काम नहीं कर रहे। इलाके के समाजसेवी रोहित चावला ने यूडीएच मंत्री की जनसुनवाई में मामला उठाया था लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब धरना-प्रदर्शन ही अंतिम विकल्प बचा है। .वार्डवासियों को साथ लेकर यूआईटी कार्यालय में भूख हड़ताल करेंगे। <br /><strong>- सुशील त्रिपाठी, पार्षद वार्ड 15</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Sep 2022 14:52:42 +0530</pubDate>
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                <title>वायरल फीवर बना बहरुपिया, मरीजों को ठीक होने में लग रहे दस दिन</title>
                                    <description><![CDATA[सर्दी-खांसी के बढ़ते मरीजों के बीच में वायरल फीवर भी संक्रमण की तरह फैलता जा रहा है। सामान्य चार से पांच दिन में ठीक होने वाला मरीज 10 से 12 दिन बाद ठीक हो रहा है। वायरल के इन बदले लक्षणों के कारण चिकित्सक भी हैरान है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/viral-fever-becomes-bahrupiya-patients-are-taking-ten-days-to-recover/article-22004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/viral-fever-bana-..kota-news-7.9.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग में पिछले दिनों हुई लगातार बारिश का दौर धीमा पड़ने के साथ ही अब मौसमी बीमारियों के मरीजों के अस्पताल में आने का सिलसिला शुरू हो गया है। प्रदेश में हो रही बम्पर बारिश के सीजन में होने वाले वायरल ने स्वरूप बदल लिया है। सर्दी-खांसी के बढ़ते मरीजों के बीच में वायरल फीवर भी संक्रमण की तरह फैलता जा रहा है। सामान्य चार से पांच दिन में ठीक होने वाला मरीज 10 से 12 दिन बाद ठीक हो रहा है। वायरल के इन बदले लक्षणों के कारण चिकित्सक भी हैरान है। ओपीडी में आने वाले करीब 50 प्रतिशत मरीजों की टाइफाइड व डेंगू,विडाल और कल्चर की जांच कराई जा रही है। एमबीएस अस्पताल में बुखार, खांसी सर्दी जुकाम के मरीजों की संख्या दुगनी हो  गई है। 1800 ओपीडी 2500 पर पहुंच चुकी है। बारिश थमने के बाद सड़कों से उड़ती धूल के कारण एलर्जी, अस्थमा व दमा के रोगी बहुत ज्यादा आ रहे हैं। बारिश के सीजन में खाना पचना मुश्किल हो रहा है इससे डायरिया, उल्टी के मरीज भी आ रहे हैं। मौसम के बदलाव से त्वचा पर असर पड़ता है इससे चर्म रोगों की समस्या बढ़ गई है। गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से एबीएस अस्पताल, नवीन चिकित्सालय मेडिकल कॉलेज, सीएचसी, पीएचसी का आउटडोर करीब ढाई हजार पार तक चल रहा है। कमोबेश यहीं स्थिति जेकेलोन अस्पताल और निजी अस्पतालों की है।</p>
<p><strong>सर्दी, खांसी, बुखार की चपेट में आ रहे लोग</strong><br />शहर में आज कल दिन में तेज धूप और रात सर्द होने की वजह से लोग वायरल इन्फेक्शन से पीड़ित होने लगे हैं।  तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बुखार, सर्दी-जुकाम और सास लेने में परेशानी व खांसी के मरीज बढ़ गए हैं।  जिन लोगों की इम्युनिटी कम होती है, उन्हें सर्दी होने पर वह खांसी की चपेट में आ रहे हैं।  गर्म और सर्द के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से यह समस्या लोगों को झेलनी पड़ रही है।  बुजुर्ग लोग इस बीमारी की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। </p>
<p><strong>बदलते मौसम में लापरवाही पड़ रही भारी</strong><br />डॉ. ओपी मीणा ने बताया कि बदलते मौसम में थोड़ी सी लापरवाही से लोग मुसीबत में पड़ रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ दिनों से मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है और इसके चलते सबसे ज्यादा लोगों में सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायतें मिल रही हैं।  बारिश तो कभी दिन में तेज धूप, शाम में सिहरन और रात में ठंड के चलते तापमान में तेजी से आ रहे उतार-चढ़ाव की वजह से ऐसी स्थिति बन रही है। जिसके चलते सर्दी, खांसी, बुखार के मरीज बढ़े हैं। खासकर अस्थमा और पेट के रोगियों को ज्यादा परेशानी जा रही है। अस्पताल के ओपीडी कक्ष में पिछले एक सप्ताह में मरीजों की संख्या में 40 से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। </p>
<p>ओपीडी में सबसे अधिक सर्दी और जुखाम के मरीज आ रहे हैं। इनमें सर्दी और जुखाम के मरीजों की संख्या है।  इस सीजन में सबसे ज्यादा वायरल होता है नाक से वायरस प्रवेश करता है और शरीर में पहुंच जाता है। यह मौसम उसके लिए ठीक होता है। इस दौरान वायरस से बचने के लिए शरीर का तापमान बनाए रखने की जरुरत होती है। इस सीजन में व्यक्ति शरीर में पानी की मात्रा कम न करें भाप लेते रहें और गर्म कुनकुना पानी पिएं। जिससे कुछ हद तक राहत मिल सकती है। चिकित्सक के अनुसार 15 दिन पहले तक वायरल इन्फेक्शन से गले में आवाज बैठने की तकलीफ ज्यादा रही। अब मौसम बदलने से खांसी के मरीज बढ़ गए है। ओपीडी में प्रतिदिन पहुंच रहे मरीजों में ज्यादातर सर्दी-खांसी और वायरल फीवर से पीड़ित होते हैं। </p>
<p><strong>सेल्फ मेडिकेशन के कारण बीमारी ठीक होने में लग रहा समय</strong><br />डॉक्टरों का कहना है कि आज कल सेल्फ मेडिकेशन का चलन बढ़ गया है। सर्दी, खांसी जुकाम, शरीर में दर्द से राहत के लिए लोग सेल्फ मेडिकेशन चुनते है। इसके पीछे उनका मानना है कि इलाज का ये सस्ता और सुविधा जनक जरिया है। इलाज के सरल माध्यम की प्रक्रिया पर उन्हें विश्वास होता है। उनकी सोच होती है कि दुकानदार से स्थिति बताकर दवाईयों का सेवन कर लिए जाए। लेकिन ये शरीर के लिए खतरनाक है। </p>
<p><strong>वायरल इन्फेक्शन होने पर बरतें सावधानी</strong><br />मौसम में परिवर्तन से वायरल इन्फेक्शन होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सर्दी-जुकाम, बुखार के साथ खांसी की तकलीफ बढ़ी है। बच्चे व बुजुर्गों की इम्युनिटी कम होती है वे बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। वायरल इंफेक्शन से लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।  डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवाइयां लें, सर्दी-जुकाम होने पर घर में रहे।  पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।  विटामिन सी वाले फल खाएं जिससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे। <br /><strong>डॉ. गोपीकिशन शर्मा, उप अधीक्षक, जेके लोन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Sep 2022 14:36:58 +0530</pubDate>
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                <title>रूस में कोरोना संक्रमण का जोर, 24 घंटों में 3,500 से अधिक नये मामले, 45 मरीजों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[मॉस्को। देश-दुनिया में कोरोना एक बार फिर तेजी से बढ़ रहा है। रूस में कोरोना संक्रमण फिर जोर पकडऩे लगा है और पिछले 24 घंटों में 3,500 से अधिक नये मामले सामने आये हैं वहीं 45 मरीजों की मौत हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/corona-infection-in-russia--more-than-3-500-new-cases-in-24-hours--45-patients-died/article-14011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/corona101.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। देश-दुनिया में कोरोना एक बार फिर तेजी से बढ़ रहा है। रूस में कोरोना संक्रमण फिर जोर पकडऩे लगा है और पिछले 24 घंटों में 3,500 से अधिक नये मामले सामने आये हैं वहीं 45 मरीजों की मौत हुई है। <br /><br />फेडरल रिस्पांस सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक देश में कोविड-19 के 3,539 नये मामलों की पुष्टि हुई है। जिनमें 1100 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी अवधि में 45 मरीज अपनी जान गंवा बैठे। नये मामलों में 600 नये मामले राजधानी मॉस्को में ही दर्ज किये गये हैं और सात लोगों की यहां मौत हुई है जबकि 345 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गयी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Jul 2022 11:50:59 +0530</pubDate>
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                <title>एक बेड पर तीन तीन मरीज, संक्रमण का खतरा बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के बड़े अस्पताल जेकेलोन में मौसमी बीमारियों के साथ उल्टी दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या दुगनी हो गई है। संभाग का बड़ा अस्पताल होने से यहां कोटा के अलावा बूंदी,बारां, झालावाड़ से मरीज रेफर होकर आते है। ऐसे में एक बेड पर तीन बच्चों को लेटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/three-patients-on-one-bed--increased-risk-of-infection/article-10485"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/jk-lone-ek-bed-par-teen-kota-news-26.5.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  मई माह की शुरुआत के साथ ही संभाग के बड़े अस्पताल जेकेलोन में मौसमी बीमारियों के साथ उल्टी दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या दुगनी हो गई है। संभाग का बड़ा अस्पताल होने से यहां कोटा के अलावा बूंदी,बारां, झालावाड़ से मरीज रेफर होकर आते है। ऐसे में एक बेड पर तीन बच्चों को लेटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही है। वहीं अस्पताल प्रशासन इसको सामान्य स्थिति बता रहा है। जबकि हकीकत ये है कि अस्पताल के जनरल वार्ड में एक बेड पर दो और तीन बच्चों के साथ उनकी मां भी लेटी है। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। अस्पताल में मरीजों के साथ आए तीमारदार भी वार्ड में रूके होने से अस्पताल में भीड़ के हालत बने हुए है। <br /><br /><strong>एक बेड पर दो से तीन बच्चों का हो रहा इलाज</strong><br />जेकेलोन अस्पताल में नवजात शिशुओं के साथ इन दिनों मौसमी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। अस्पताल के जनरल वार्ड में एक बेड पर दो और तीन बच्चों को लेटाकर इलाज किया जा रहा है। शहर में गर्मी बढ़ने के साथ ही उल्टी दस्त, पेट दर्द, बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल के सभी वार्ड इन दिनों फुल चल रहे है। <br /><br /><strong>मरीजों के साथ आए तीमारदारों का होेता है जमावड़ा</strong><br />जेकेलोन के सभी वार्ड में मरीजों संख्या से ज्यादा संख्या तीमारदारों की नजर आ रही है। एक बेड पर पहले ही दो बच्चे सो रहे उसकी देखभाल के लिए मां और उसके साथ दो से तीन तीमारदार वार्ड में बैठ हुए जिससे गर्मी के चलते वार्ड में सफकैशन जैसे हालात बने हुए है। अभी कोरोना संक्रमण गया नहीं हुआ ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ।  अस्पताल में पहले गंभीर रूप होने पर ही जेकेलोन अस्पताल में बच्चे आते उस पर लोगों के जमावड़े से वार्ड अनहाईजेनिक हो रहा है । जिससे संक्रमण के हालात बन सकते है। <br /><br /><strong>पर्ची काउंटर  पर मरीजों को  करना पड़ रहा इंतजार</strong><br />जेकेलोन अस्पताल में पर्ची काउंटर से लेकर जांच और दवा काउंटर हर जगह लाइनों से मरीजों को दोजार होना पड़ रहा है। पर्ची बनाने के लिए एक मरीज को 15 से 20 मिनट कतार में इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पाताल में निर्माण कार्य चलने से पहले ही मुख्य द्वार बंद ऐसे में मरीजों को घूमकर अस्पताल पहुंचना पड़ता   है। अस्पताल के प्रवेश द्वार पर नालिया टूटी होने से लोगों गंदे पानी से होकर अस्पताल में प्रवेश करना पड़ता जिससे हर समय संक्रमण का खतरा बना हुआ है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में मई पहले पखवाडे के साथ ही बढोत्तरी हुई है। अस्पताल में पर्याप्त सुविधा है। बेड की अभी कोई परेशानी नहीं है। तीमारदारों की भीड़ को कम करने के लिए सुरक्षा गार्ड को पाबंद किया जाएगा। <br /><strong>- डॉ. एच एल मीणा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 15:12:12 +0530</pubDate>
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                <title>संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल इलाज कम, संक्रमण दे रहा ज्यादा   </title>
                                    <description><![CDATA[संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल एमबीएस इन दिनों खुद बीमार हैं ।अस्पताल में चारों तरफ  फैली गंदगी संक्रमण फैला रही हैं । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-largest-hospital-of-the-division-is-giving-less-treatment--more-infection/article-10059"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/untitled-1-copy4.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल एमबीएस इन दिनों खुद बीमार हैं ।अस्पताल में चारों तरफ  फैली गंदगी संक्रमण फैला रही हैं । अस्पताल के मुख्य द्वार से लेकर पूरे परिसर में गंदी नालियों का पानी रोड पर बह रहा है जिसके कारण अस्पताल में लोग कीचड़ से सने पैर ले जाकर संक्रमण फैला रहे हैं ।<br /><br />संभाग का बड़ा अस्पताल होने से प्रतिदिन यहां ढाई से तीन हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में गंदगी और कीचड़ से गुजरकर लोग अस्पताल में पहुंच रहे हैं। जिसे वार्डों में भर्ती मरीजों को संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है । वहीं अस्पताल में जगह-जगह निर्माण कार्य के चलते दीवारे टूटी होने से लावारिस मवेशी स्वान और सूअर गंदगी फैला रहे हैं । अस्पताल के मुख्य गेट पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है जिससे वाहन धारियों को अस्पताल में प्रवेश करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है । दो बार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अधिकारियों को निर्देश देने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं । बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताने के बाद भी अस्पताल प्रशासन नहीं जागा जिसके चलते मरीजों को गंदगी से  दो-चार  होना पड़ रहा है।<br /><br /><strong>सीटी स्कैन यूनिट वार्ड के बाहर भरा गंदा पानी</strong><br />एमबीएस अस्पताल के सिटी स्कैन यूनिट वार्ड के बाहर नालियां क्षतिग्रस्त होने से उनका गंदा पानी रोड पर जमा हो रहा है। मरीजों व तीमारदारों को इस गंदे पानी से होकर अस्पताल में प्रवेश करना पड़ रहा है।<br />ऐसे में अस्पताल में गंदगी और संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।<br /><br /><strong>अस्पताल के मुख्य गेट पर अतिक्रमण</strong> <br />एमबीएस अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर लोगों ने अस्थाई हाथ ठेले व खानपान की गुमटियां लगाने से अस्पताल में एंबुलेंस व अन्य वाहनों के प्रवेश में भारी परेशानी हो रही हैं। अस्पताल के बाहर लगी चाय की थड़ी पर भीड़ के चलते लोगों को पता ही नहीं चलता अस्पताल का गेट कहां है। गेट के बाहर सवारियों के लिए इंतजार करते आॅटो रास्ता रोक देते हैं । ऐसे में कई बार एंबुलेंस को प्रवेश करने में भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 May 2022 17:14:03 +0530</pubDate>
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