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                <title>infection - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कांगो में इबोला का कहर गहराया : संक्रमितों की संख्या 1000 पार, 254 मौतों से बढ़ी वैश्विक चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला के पुष्ट मामले 1,003 हो गए हैं, जिनमें 254 लोगों की मौत हो चुकी है। मृत्यु दर 25.3% दर्ज की गई है। वर्तमान में 365 मरीज आइसोलेशन में हैं, जबकि 100 ठीक हो चुके हैं। संक्रमण रोकने के लिए निगरानी और सामुदायिक संपर्क तेज कर दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ebola-havoc-deepens-in-congo-number-of-infected-crosses-1000/article-157726"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ibola.png" alt=""></a><br /><p>किंशासा। लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गयी है और इस वायरस के संक्रमण से मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 254 पहुंच गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने रविवार को ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। डीआरसी (कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य) के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में इबोला संक्रमण के 1,003 पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 254 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि संक्रमण से मृत्यु दर (केस फेटेलिटी रेट) 25.3 प्रतिशत दर्ज की गई है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, कुल 365 मरीज वर्तमान में आइसोलेशन में या अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 100 मरीज ठीक हो चुके हैं। तीन प्रभावित प्रांतों में मरीजों के संपर्क में आये लोगों की निगरानी दर 58 प्रतिशत रही। अधिकारियों ने कहा कि मामलों में वृद्धि के बावजूद इबोला से निपटने के प्रयास सक्रिय हैं। इसके तहत निगरानी बढ़ायी गयी है। सामुदायिक संपर्क तेज किया गया है और मामलों के प्रबंधन तथा जांच क्षमता को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:06:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूरोप में तीन सालों में 80,000 नए HIV मामले और 9000 TB से मौतें होने की आशंका : ईसीडीसी</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (ECDC) ने चेतावनी दी है कि यूरोप में अगले तीन सालों में 80,000 नए एचआईवी संक्रमण के मामले आ सकते हैं। साथ ही, टीबी के कारण 9,000 से अधिक मौतें होने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में सिफलिस और गोनोरिया जैसे यौन संचारित रोगों की दरें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/80000-new-hiv-cases-and-9000-tb-deaths-expected-in/article-155932"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/europ.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। यूरोप में अगले तीन वर्षों में लगभग 80,000 नए एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आने और टीबी के कारण 9,000 से अधिक मौतें होने की आशंका है। यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (ईसीडीसी) की निदेशक पामेला रेंडी-वैगनर ने यह जानकारी दी है। गत 21 मई को ईसीडीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2024 में यूरोप में एक दशक से ज़्यादा समय में यौन संचारित संक्रमणों की सबसे ज़्यादा दरें देखी गईं, जिसमें सिफलिस और गोनोरिया शामिल हैं।</p>
<p>ईयू ऑब्जर्वर न्यूज़ एजेंसी ने बुधवार को रेंडी-वैगनर के हवाले से कहा, "हम यूरोप में आने वाले तीन सालों में 80,000 नए एचआईवी संक्रमण और टीबी से 9,000 से ज़्यादा मौतें देखेंगे।" रिपोर्ट में कहा गया है कि ईयू रेगुलेटर का अनुमान है कि टीबी और यौन संचारित संक्रमणों में तेज़ी से बढ़ोतरी होगी। साथ ही, इन बीमारियों की वजह से ईयू , आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे में हर साल 59,000 मौतें होती हैं। ईयू , आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे में अभी लगभग 800,000 लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:45:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MDM अस्पताल के ENT वार्डों में गर्मी का संकट: भीषण गर्मी में बंद पड़े पंखे-कूलर, मरीज घरों से पंखे लाने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के ईएनटी विभाग में भीषण गर्मी के बीच बदइंतजामी चरम पर है। कूलर और पंखे खराब होने के कारण मरीज और तीमारदार बेहाल हैं, जिससे लोग घरों से पंखे लाने को मजबूर हैं। कॉटेज वार्ड में भारी शुल्क के बावजूद कूलर में गंदा पानी जमा है, जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/heat-crisis-in-ent-wards-of-mdm-hospital-patients-forced/article-155310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)6.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। भीषण गर्मी के बीच जोधपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मथुरादास माथुर अस्पताल के ENT विभाग में मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दैनिक नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्ट में अस्पताल के वार्डों की बदहाल व्यवस्थाएं सामने आई हैं। वार्डों में कई पंखे बंद पड़े हैं, जबकि अधिकांश कूलर सही तरीके से काम नहीं कर रहे। हालात ऐसे हैं कि मरीजों के परिजन घरों से पंखे लाकर वार्डों में लगाने को मजबूर हैं। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ENT विभाग के सामान्य वार्डों के साथ-साथ कॉटेज वार्ड में भी व्यवस्थाएं खराब नजर आईं। कॉटेज वार्ड में मरीजों से प्रतिदिन हजारों रुपये तक का शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन वहां भी मरीजों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही। कई कूलरों में गंदा और बदबूदार पानी जमा मिला, जिससे वार्डों में दुर्गंध फैल रही है।</p>
<p>मरीजों और परिजनों का कहना है कि इस वातावरण में संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है। वार्डों में उमस और गर्मी के कारण मरीजों को बैठना तक मुश्किल हो रहा है। बुजुर्ग मरीज, छोटे बच्चे और ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीज सबसे अधिक परेशान दिखाई दिए। कई मरीज गर्मी से राहत पाने के लिए वार्डों से बाहर बरामदों में बैठने को मजबूर नजर आए। परिजनों ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण कूलर और पंखे खराब पड़े हैं। कुछ कूलरों में लंबे समय से पानी नहीं बदला गया, जिससे बदबू और गंदगी बढ़ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:35:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश में खसरे का कहर : पांच और बच्चों की मौत, कुल मौतों का आंकड़ा 464 पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप खतरनाक रूप ले चुका है। पिछले 24 घंटों में 5 और बच्चों की मौत के साथ कुल मौतों की संख्या 464 हो गई है। यह बीमारी देश के 61 जिलों में फैल चुकी है और अब तक 7,856 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। प्रभावितों में 80% मासूम बच्चे और शिशु हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/measles-wreaks-havoc-in-bangladesh-five-more-children-die-total/article-154321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bangladesh.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, सोमवार को पिछले 24 घंटों के दौरान इस बीमारी से जुड़े लक्षणों के कारण पांच और बच्चे इसका शिकार हो गये, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 464 हो गयी है। इसी अवधि के दौरान देश भर के अस्पतालों में खसरे जैसे लक्षणों वाले 1,405 मरीजों को भर्ती कराया गया था। इनमें से 89 मामलों में टेस्ट में खसरे की पुष्टि हुई।</p>
<p>इस बीमारी ने सबसे ज्यादा कहर ढाका संभाग पर बरपाया है, जबकि राजशाही, चट्टोग्राम और खुलना संभागों में भी इसके गंभीर मामले देखे गये हैं। यह बीमारी देश के 64 में से 61 जिलों में फैल चुकी है। अब तक 75 और बच्चों की इस बीमारी से मौत होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 389 अन्य बच्चों की मौत खसरे से मिलते-जुलते लक्षणों के कारण हुई है, जिससे कुल मौतों का आंकड़ा 464 पर पहुंच गया है।</p>
<p>स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च से 18 मई के बीच लैब टेस्ट के माध्यम से खसरे के कुल 7,856 मामलों की पुष्टि हुई। इसमें शिशु और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जो कुल मामलों का लगभग 80 प्रतिशत हैं। खसरे के 54,911 संदिग्ध मामलों की पहचान की गयी है, हालांकि वास्तविक संख्या इससे अधिक होने की संभावना जतायी गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/measles-wreaks-havoc-in-bangladesh-five-more-children-die-total/article-154321</link>
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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:25:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांगो और युगांडा में इबोला का प्रकोप: डब्ल्यूएचओ ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, महामारी के पूरे क्षेत्र में तेजी से फैलने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो और युगांडा में फैले इबोला के 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन को अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। सीमा पार संक्रमण, संदिग्ध मौतों और स्वीकृत टीकों की कमी के कारण यह कदम उठाया गया। WHO ने देशों को अलर्ट रहने, निगरानी बढ़ाने और बॉर्डर स्क्रीनिंग सख्त करने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ebola-outbreak-in-congo-and-uganda-who-declared-global-health/article-154151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ibola.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रविवार को कांगो और युगांडा में फैले 'बुंदीबुग्यो' वायरस स्ट्रेन के कारण इबोला प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने यह बड़ा फैसला सीमा पार संक्रमण की पुष्टि, संदिग्ध मौतों के बढ़ते आंकड़ों और इस महामारी के पूरे क्षेत्र में तेजी से फैलने की आशंका के मद्देनजर लिया है। यह वैश्विक घोषणा पूर्वी कांगो के इतूरी प्रांत और युगांडा की राजधानी कंपाला में प्रयोगशाला द्वारा पुष्टि किए गए इबोला मामलों के सामने आने के बाद की गई है, जिसमें कम से कम एक मौत भी शामिल है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस बीमारी का प्रकोप वर्तमान में पाए गए मामलों की तुलना में कहीं अधिक बड़ा हो सकता है। </p>
<p>डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 16 मई तक इतूरी प्रांत के कम से कम तीन स्वास्थ्य क्षेत्रों (बुन्या, वर्मपारा और मोंगबवालु) में 8 पुष्ट मामले, 246 संदिग्ध संक्रमण और 80 संदिग्ध मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। युगांडा ने पिछले 24 घंटों के भीतर कंपाला में इबोला के दो मामलों की पुष्टि की है, और ये दोनों मरीज कांगो से आए यात्री हैं। इनमें से एक मरीज की मौत हो चुकी है और दोनों को गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। इसके अलावा, इतूरी से लौटे एक यात्री में किन्शासा के भीतर भी एक अलग पुष्ट मामला पाया गया है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण फैलने की चिंताएं बहुत बढ़ गई हैं।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने अपने आपातकालीन निर्धारण में कहा, "यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीमारी के प्रसार के माध्यम से अन्य देशों के लिए एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती है।" हालांकि संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने इसे अभी 'महामारी' घोषित नहीं किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संचरण के जोखिम, कमजोर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन को निशाना बनाने वाले स्वीकृत टीकों या सटीक इलाज की अनुपस्थिति के कारण इसने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल के पैमाने को पार कर लिया है।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने बताया कि इतूरी और पड़ोसी उत्तर कीवू प्रांत में सामुदायिक स्तर पर मौतों और संदिग्ध मामलों के असामान्य क्लस्टर देखे गए हैं। वहीं, कम से कम चार स्वास्थ्य कर्मियों की भी ऐसी परिस्थितियों में मौत हुई है जो अस्पतालों के भीतर फैले संक्रमण की ओर इशारा करती हैं। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि पूर्वी कांगो में सुरक्षा की कमी (असुरक्षा), आबादी का विस्थापन, खुली सीमाएं और भारी क्षेत्रीय गतिशीलता इस प्रकोप को और तेज कर सकती है। यह स्थिति पूर्वी कांगो में 2018-19 के उस विनाशकारी इबोला संकट की याद दिलाती है जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने कहा कि संगठन अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत एक आपातकालीन समिति की बैठक बुलाएगा ताकि आगे के अस्थायी सुझाव दिए जा सकें। डब्ल्यूएचओ ने कांगो और युगांडा से आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को सक्रिय करने, निगरानी बढ़ाने, संपर्क ट्रेसिंग तेज करने और अस्पतालों व समुदायों में संक्रमण की रोकथाम के उपायों को मजबूत करने का आग्रह किया है।</p>
<p>एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमाओं की स्क्रीनिंग बढ़ाने, पुष्ट मामलों और उनके संपर्क में आए लोगों के अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगाने तथा प्रायोगिक टीकों व दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल में तेजी लाने का आह्वान किया है। हालांकि, इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ ने पड़ोसी देशों को सीमाएं पूरी तरह बंद करने या व्यापार प्रतिबंध लगाने के खिलाफ सलाह दी है। एजेंसी का कहना है कि ऐसे कदमों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इससे लोग अनौपचारिक (अवैध) रास्तों से आवाजाही शुरू कर देंगे, जिससे संकट और अधिक बिगड़ सकता है। कांगो की सीमा से लगे पड़ोसी देशों से प्रयोगशाला परीक्षणों को मजबूत करने, स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को तैनात करने सहित अपनी तैयारियों के स्तर को तुरंत बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। गौरतलब है कि इबोला का 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन पूर्व के बड़े प्रकोपों के लिए जिम्मेदार 'जायरे' स्ट्रेन की तुलना में कम आम है, लेकिन यह अभी भी उच्च मृत्यु दर के साथ गंभीर रक्तस्रावी बुखार का कारण बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:15:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बांग्लादेश में खसरे से हाहाकार : एक दिन में 17 लोगों की मौत; तेजी से बढ़ रहे केस, सरकार ने जारी किया अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में खसरे (Measles) ने कोहराम मचा रखा है, जहाँ एक ही दिन में 17 लोगों की जान चली गई। 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की संख्या 41,000 के पार पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने ढाका में सर्वाधिक मौतों की पुष्टि की है। टीकाकरण और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के जरिए इस संक्रामक बीमारी को रोकने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/outcry-due-to-measles-in-bangladesh-17-people-died-in/article-152714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/11.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में खसरा और खसरा से संबंधित जटिलताओं के कारण एक ही दिन में 17 लोगों की मौत हो गई। मार्च में इस अत्यधिक संक्रामक लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी के प्रकोप की शुरुआत के बाद से एक दिन में दर्ज मौत की यह सबसे अधिक संख्या है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्टों से मंगलवार को प्राप्त हुई। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, सोमवार सुबह आठ बजे तक दर्ज की गई 17 मौतों में से दो की पुष्टि खसरा से होने जबकि अन्य 15 को संदिग्ध मामलों के रूप में वर्गीकृत किया गया।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध मौतों में से सबसे अधिक 10 मौतें ढाका जिले में दर्ज की गईं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश में खसरा से होने वाली पुष्ट मौतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है। इसके अलावा, 15 मार्च से दर्ज किए जा रहे आंकड़ों के अनुसार इस बीमारी से संबंधित संदिग्ध मौतों की संख्या वर्तमान में 259 है। डीजीएचएस के अधिकारियों ने बताया कि इसी अवधि के दौरान खसरे के लगभग 1,302 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए, जिससे 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 41,793 हो गयी है।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून ने कहा कि इसी अवधि के दौरान, खसरा के 154 नए पुष्ट मामले सामने आए जिससे पुष्ट संक्रमणों की कुल संख्या 5,467 हो गई। प्राप्त रिपाेर्ट के अनुसार 15 मार्च तक खसरा के संदिग्ध मामलों में से 28,832 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 25,151 मरीज स्वस्थ हो गये और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 12:41:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में 33 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा,  साल 1992 के बाद 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[सीडीसी के अनुसार, साल 2025 में अमेरिका के 44 राज्यों में खसरे के 2,065 मामले दर्ज किए गए। 1992 के बाद यह सर्वाधिक आंकड़ा है, जिससे देश का उन्मूलन दर्जा खतरे में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/new-record-in-america-more-than-2000-cases-of-measles/article-138088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/measles-case-in-us.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिल्स। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए जो 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है। 30 दिसंबर तक, देश में खसरा के कुल 2,065 पुष्ट मामले सामने आए थे, जिनमें से लगभग 11 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, ये मामले अमेरिका के 44 राज्यों में दर्ज किए गए, साथ ही अमेरिका आने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में भी मामले सामने आए। यह आंकड़ा 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है, जब देश में खसरा के 2,126 मामले सामने आए थे।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, 2025 में पांच से 19 वर्ष की आयु के मरीजों की संख्या सबसे अधिक थी, जो कुल मामलों का लगभग 42 प्रतिशत थी। 2025 में अमेरिका में खसरा से तीन मौतें दर्ज की गईं। सीडीसी के अनुसार, 2000 में अमेरिका में खसरा को समाप्त घोषित कर दिया गया था, जिसका मतलब है कि देश में खसरा नहीं फैल रहा है और नए मामले केवल तभी पाए जाते हैं जब कोई व्यक्ति विदेश में खसरा से संक्रमित होता है और स्वदेश लौटता है।</p>
<p>पिछले साल खसरे के मामलों में हुई वृद्धि के साथ, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका जल्द ही अपना उन्मूलन दर्जा खो सकता है, जैसा कि कनाडा नवंबर 2025 में खो चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:36:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नहीं थम रहा कोरोना का संक्रमण : देश में सक्रिय मामलों की संख्या 7 हजार के करीब, अब तक 68 की मौत; जानें अभी तक किन राज्यों में संक्रमण नही ?</title>
                                    <description><![CDATA[देशभर में कोराना संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या मंगलवार सुबह तक 6815 पहुंच गई और पिछले 24 घंटों के दौरान इसके संक्रमण से 3 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या 68 पहुंच गई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-stop-infection-of-corona-has-to-know-about-68/article-116941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देशभर में कोराना संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या मंगलवार सुबह तक 6815 पहुंच गई और पिछले 24 घंटों के दौरान इसके संक्रमण से 3 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या 68 पहुंच गई है।</p>
<p>केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार आज सुबह 8 बजे तक 324 नए संक्रमण के मामले सामने आए, जिससे कुल सक्रिय मामलों की संख्या 6,815 हो गई और इस बीमारी के संक्रमण से 7644 मरीज स्वस्थ हो गए हैं। पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण से 3 और मरीजों की जान जाने से मृतकों की संख्या 68 हो गई है। इस अवधि में राष्ट्रीय राजधानी, केरल और झारखंड से एक-एक मरीज की मौत हुई है।</p>
<p>मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा मामले केरल में दर्ज किए गए हैं। देश में 30 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में कोरोना सक्रिय मामलों में वृद्धि हुई है। जिनमें से केरल, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।</p>
<p>कोरोना संक्रमण के मामले में केरल सबसे अधिक प्रभावित राज्य है, जहां आज सुबह तक 96 सक्रिय मामले बढ़ने के साथ इसका आंकड़ा दो हजार पार कर 2053 तक पहुंच गया और दिल्ली में लगभग 37 मामलों के घटने से संक्रमितों की कुल संख्या 691 रह गई।</p>
<p>इसके अलावा गुजरात में 1109, पश्चिम बंगाल में 747, महाराष्ट्र में 613, कर्नाटक में 559, तमिलनाडु में 207, उत्तर प्रदेश में 225, राजस्थान में 124, हरियाणा में 108, आंध्र प्रदेश में 86, पुड्डुचेरी में 9, सिक्किम में 36, मध्य प्रदेश में 52, छत्तीसगढ में 44, बिहार में 48, ओडिशा में 39, पंजाब में 30, जम्मू-कश्मीर में 9, झारखंड में 6, असम में 3, गोवा में 5, तेलंगाना में 10, उत्तराखंड में 6, हिमाचल प्रदेश 3, चंड़ीगढ़ में 2 और त्रिपुरा में एक सक्रिय मामले हैं। मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमण को कोई मामला सामने नहीं आया है।</p>
<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार देश में कोविड मामलों में मौजूदा उछाल ओमिक्रॉन के नए सब-वेरिएंट जैसे कि जेएन.1, एनबी.1.8.1, एलएफ.7 और एक्सएफसी के कारण है। इनमें संक्रमण की संभावना अधिक है, लेकिन इनमें लक्षण हल्के हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन्हें वर्तमान में निगरानी में रखे गए वेरिएंट के रूप में वर्गीकृत किया है - अभी तक चिंता का विषय नहीं है, लेकिन सावधानी बरतने की आवश्यकता है।</p>
<p>इस बीच, कोरान के लिए जिम्मेदार वायरस सार्स-सीओवी-2 खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह अब अप्रत्याशित आपातकाल की तरह व्यवहार नहीं करता है - बल्कि, यह फ्लू की तरह बीमारियों के आवर्ती चक्र का हिस्सा बन गया है। कोरोना के मामलों में वृद्धि के जवाब में, केंद्र सरकार ने अस्पतालों की तैयारी और ऑक्सीजन, आइसोलेशन बेड, वेंटिलेटर और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न राज्यों में मॉक ड्रिल शुरू की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jun 2025 12:53:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मरीजों की ट्रेवल हिस्ट्री खंगालने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[डब्ल्यूएचओ के मुताबिक निपाह वायरस चमगादड़ और सूअर जैसे जानवरों से इंसानों में फैलता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/instructions-for-checking-travel-history-of-patients/article-57752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/marizo-ki-travel-history-khangalne-k-nirdesh...kota-news-22-09-2023.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। केरल में निपाह वायरस के केस मिलने और मौत होने के बाद राज्य सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने भी इसको लेकर अलर्ट और एडवाइजरी जारी की है। इसमें राज्य सभी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और सभी जिलों के सीएमएचओ को अलर्ट जारी करते हुए जांच और ट्रीटमेंट के लिए हेल्थ वर्कर्स को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए है। साथ ही दक्षिण भारत खासकर उन राज्यों से जहां इस वायरस के केस मिल रहे हैं, वहां से आने वाले यात्रियों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं । मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट के डायरेक्टर से जारी एडवाइजरी के मुताबिक केरल में 7 केस मिलने और 2 मरीजों की मौत होने के बाद इसके फैलने का खतरा दूसरे राज्यों में बढ़ गया है। ऐसे में अगर कोई इस तरह के लक्षण वाला मरीज आता है तो उसके जांच के सैंपल लेकर उसे भिजवाए। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक निपाह वायरस चमगादड़ और सूअर जैसे जानवरों से इंसानों में फैलता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह वायरस एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है। हालांकि केरल में  मंगलवार को 71 सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजे गए थे जिसमें से सभी निगेटिव पाए गए हैं। इसके अलावा 200 से अधिक हाई रिस्क वालों की भी रिपोर्ट निगेटिव आई है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है सभी लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए प्रयास करते रहना चाहिए।</p>
<p><strong>30 शहरों में जोखिम को लेकर किया अलर्ट</strong><br />सीएमएचओं ने बताया कि दक्षिणी राज्य केरल इन दिनों गंभीर और जानलेवा निपाह वायरस की चपेट में है। संक्रमण के कारण अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, सात लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई थी। केरल का कोझिकोड जिला संक्रमण के सबसे ज्यादा चपेट में है, इसके अलावा करीब 30 शहरों में जोखिमों को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। केरल में संक्रमण के खतरे को देखते हुए आसपास के राज्यों को भी सतर्क किया गया है। विशेषज्ञो के अनुसार कोरोना की तुलना में निपाह गंभीर संक्रमण और जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है, इसका मृत्युदर भी अधिक हो सकता है, जो फिलहाल चिंता का विषय है।</p>
<p><strong>ट्रेवल हिस्ट्री पता करने के निर्देश</strong><br />सीएमएचओं डॉ. जगदीश कुमार सोनी ने बताया कि एडवाइजरी में अगर इस तरह का कोई लक्षण वाला मरीज हॉस्पिटल में दिखाने आता है तो उसकी ट्रैवल हिस्ट्री जाननी जाएगी। अगर वह केरल या उसके आसपास के स्टेट जहां इस वायरस के केस मिले हो तो उसकी तुरंत जांच के लिए सैंपल भिजवाने के निर्देश जारी किए है। </p>
<p><strong>ये  लक्षण दिखाई दें तो बरतें सावधानी</strong><br />डिप्टी सीएमएचओं डॉ. घनश्याम मीणा  ने बताया कि निपाह के जोखिमों को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। इसके लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान दें। संक्रमितों को शुरूआत में फ्लू जैसे लक्षण होते हैं। निपाह वायरस मुख्य रूप से फेफड़ों और मस्तिष्क पर अटैक करता है। इसके लक्षणों में खांसी और गले में खराश से लेकर तेजी से सांस लेने, बुखार-मतली और उल्टी जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में, इसके कारण इन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) हो सकती है, जो कोमा और मृत्यु के खतरे को बढ़ाने वाली मानी जाती है।इस मुख्य लक्षणों में बुखार आना, सिरदर्द, कफ बनना, गले में खराश होना, सांस में तकलीफ और उल्टी होना इस वायरस की चपेट में आए मरीज के सामान्य लक्षण है। </p>
<p><strong>कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों को रहना होगा सावधान</strong><br />विशेषज्ञों का कहना है कि इस जानलेवा संक्रमण का खतरा किसी को भी हो सकता है, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में इसके जोखिम देखे जाते रहे हैं। संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपर्क में आने वाले किसी भी व्यक्ति को यह बीमारी हो सकती है। जिन लोगों की रोग प्रतिरक्षा कमजोर है उनमें इस रोग के कारण गंभीर समस्याओं के विकसित होने का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है, ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। </p>
<p><strong>संक्रमण से बचाने को रखनी होगी सावधानी</strong><br />डॉक्टरों का कहना है कि  निपाह संक्रमण से बचाव के लिए कोई भी टीका उपलब्ध नहीं है, इसके अलावा संक्रमण से बचाव के लिए कोई विशिष्ट दवा भी नहीं है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को बचाव के लिए सुरक्षात्मक उपायों का पालन करते रहने की सलाह दे रहे है। निवारक उपायों में सावधानियां बरतने के साथ, हाथ की स्वच्छता का ध्यान रखकर जोखिमों को कम किया जा सकता है। जिन राज्यों में इसका जोखिम अधिक हैं वहां सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी गई है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सभी चिकित्सा अधिकारियों व सीएचसी पीएचसी पर निपाह वायरस को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय से जारी गाइड लाइन की पालना करने और दक्षिण भारत से आने वाले लोगों की केस हिस्ट्री की जानकारी लेने के निर्देश जारी किया है। साथ लोगों से अपील की जा रही है।  केरल व संक्रमित शहरों में जाने से बचने के लिए कहा जा रहा है। अस्पताल में निपाह के लक्षणों वाले मरीजों की जांच कराने के भी  निर्देश जारी किए। सभी को अलर्ट मोड पर रहने के लिए कहा गया। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओं कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 16:34:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चिकनगुनिया संक्रमण से उबरने के दौरान एंटीबॉडी अधिक प्रभावी: लांसेट अध्ययन</title>
                                    <description><![CDATA[चिकनगुनिया संक्रमण, मच्छरों द्वारा प्रसारित चिकनगुनिया वायरस से होता है, जिसमें बुखार और जोड़ों का दर्द होता है, और यह एक विश्वव्यापी स्वास्थ्य खतरा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/antibodies-more-effective-during-recovery-from-chikungunya-infection-lancet-study/article-56295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/capture12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। चिकनगुनिया से लड़ने के लिए शरीर में बनी एंटीबॉडी गंभीर संक्रमण से उबरने के दौर में कहीं अधिक प्रभावी होती है। यह खुलासा लांसेट के दक्षिण पूर्व क्षेत्रीय स्वास्थ्य जर्नल में प्रकाशितअध्ययन पत्र में हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भुवनेश्वर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), कर्नाटक के मणिपाल विषाणु रोग विज्ञान संस्थान और नयी दिल्ली के ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी’ (आईसीजीईबी) सहित भारतीय संस्थानों के अध्ययन में कहा गया है कि किसी निश्चित समय में रोग की गतिशीलता को समझने में अध्ययन के ये नतीजे महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लांसेट अध्ययन</strong>: इसमें कहा गया कि भले ही एंटीबॉडी वायरस से संक्रमण की वजह से उत्पन्न हुए लेकिन सीरोलॉजिकल विश्लेषण से पता चलाता है कि चिकनगुनिया के रोगियों के रक्त सीरम में मौजूद एंटीबॉडी की ताकत बीमारी से उबरने के दौरान अधिक होती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>चिकनगुनिया: </strong>चिकनगुनिया संक्रमण, मच्छरों द्वारा प्रसारित चिकनगुनिया वायरस से होता है, जिसमें बुखार और जोड़ों का दर्द होता है, और यह एक विश्वव्यापी स्वास्थ्य खतरा है। इस दौरान, रोगियों को सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में सूजन या दाने की दुष्प्रभाव का भी अनुभव हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 19:01:42 +0530</pubDate>
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                <title>आई फ्लू के बाद अब लेप्टोस्पायरोसिस का बढ़ रहा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण दूषित पानी के संपर्क में आने या तैरने की वजह से हो सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/after-eye-flu--now-the-risk-of-leptospirosis-is-increasing/article-54126"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/eye-flu-hindi-news.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बारिश के चलते मौसमी और मच्छर जनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ बढ़ रहा है। अभी लोग आई फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसी बीमारियों से जूझ रहे थे अब  लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारी भी लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। लेप्टोस्पायरोसिस कोई मामूली बीमारी नहीं है। इसका समय पर इलाज न होने से किडनी डैमेज, लिवर फेल, सांस संबंधी समस्या और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। अभी इस बीमारी के इक्का दुक्का मरीज ही आ रहे है लेकिन तालाब, नदी और नाले में नहाने से इस बीमारी के होने का खतरा रहता है। वहीं निजी में पांच से सात मरीज आ रहे है।</p>
<p><strong>बैक्टीरिया गर्म और उमस भरे वातावरण में तेजी से पनपते </strong><br />एमडी मेडिसन डॉ. ओपी मीणा ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस एक तरह का बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जो इंसानों और जानवरों दोनों को संक्रमित कर सकता है। यह लेप्टोस्पाइरा जीनस के बैक्टीरिया के कारण होता है। इंसानों में लेप्टोस्पाइरा के कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, जिनमें से कई अन्य बीमारियों के लक्षणों से मिलते हैं। इसके अलावा कई मरीजों में इसका एक भी लक्षण नजर नहीं आता। लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण दूषित पानी के संपर्क में आने या तैरने की वजह से हो सकता है। इसके अलावा दूषित खाना या पानी का सेवन से भी यह संक्रमण फैल सकता है। ये बैक्टीरिया गर्म और उमस भरे वातावरण में तेजी से पनपते हैं। वहीं बारिश के मौसम में पानी काफी दूषित हो जाता है। इसलिए बारिश के मौसम में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>कैसे होता है लेप्टोस्पायरोसिस इन्फेक्शन</strong><br />सीनियर फिजिशियन एम पी गुप्ता ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस का बैक्टीरिया संक्रमित जानवरों के मूत्र के माध्यम से फैलते हैं, जो पानी या मिट्टी में मिल सकते हैं और वहां हफ्तों से लेकर महीनों तक जीवित रह सकते हैं। इंसानों में यह इन्फेक्शन संक्रमित जानवरों के मूत्र या लार को छोड़कर शरीर के अन्य तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैल सकता है। लेप्टोस्पायरोसिस का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जा सकता है, जिन्हें बीमारी की शुरुआत में ही डॉक्टर से संपर्क कर के लिया जाना चाहिए। वहीं अधिक गंभीर लक्षणों वाले व्यक्तियों की जांच के बाद ही डॉक्टर इलाज और दवाएं तय करते हैं। </p>
<p><strong>लक्षण: सिर दर्द, पीलिया,दस्त</strong><br />लेप्टोस्पायरोसिस से संक्रमित इंसानों में इसके कुछ सामान्य लक्षण देखने को मिलते हैं, जिसमें तेज बुखार, सिर दर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी होना, पीलिया, लाल आंखें, पेट दर्द, दस्त आदि शामिल है। इस संक्रमण के संपर्क में आने और बीमार होने के बीच का समय 2 दिन से 4 सप्ताह तक हो सकता है। बीमारी आमतौर पर बुखार और अन्य लक्षणों के साथ अचानक शुरू होती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए हमारा स्वास्थ्य हमारी जिम्मेदारी अभियान का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो गया। अभियान के तहत मंगलवार चिकित्सा विभाग की 801 टीमों ने 17009 घरों का सर्वे किया। बुखार और बैक्टीरियल इन्फेक्शन के मरीजों को चिहिंत कर इलाज किया जा रहा है। सभी सीएचसी पीएचसी अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए है।<br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 15:54:51 +0530</pubDate>
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                <title>अनदेखी: गंदगी के ढेर से नगरवासी हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[नगर पालिका आने के बाद सभी नगर वासियों को साफ सफाई की समस्या से पूर्ण रूप से समाधान नहीं हो सका है  जिसके चलते हैं नगर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। नगर की सफाई व्यवस्था बिगड़ने लगी है कई मोहल्लों में गंदगी होने के कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-townspeople-are-getting-worried-due-to-the-pile-of/article-44762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/andekhi-gandagi-ke-dher-hone-ke-karan-nagar-vasi-ho-rahe-pareshan...kota-news-05-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। सुल्तानपुर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे होने के कारण नगर वासियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही कई वार्डों में एवं मोहल्लों में कचरा गाड़ी नहीं जाने के कारण मोहल्ले वासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिससे मोहल्ले वासी आम रास्ते पर ही कचरा डाल देते हैं जिससे आने जाने वाले लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नगर के अन्नपूर्णा माता मंदिर के पीछे की गली में आम रास्ते पर ही कचरे के ढेर पड़े होने के कारण मोहल्ले वासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओम प्रकाश गोस्वामी एवं हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि आम रास्ते पर खड़ा होने के कारण रास्ते से निकलना भी दुश्वार हो गया है। साथ ही मच्छर और मक्खी पैदा होने के कारण बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>पालिका नहीं दे रही सफाई पर ध्यान</strong><br />सुल्तानपुर में नगर पालिका आने के बाद सभी नगर वासियों को साफ सफाई की समस्या से पूर्ण रूप से समाधान नहीं हो सका है  जिसके चलते हैं  नगर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। नगर की सफाई व्यवस्था  बिगड़ने लगी है कई मोहल्लों में गंदगी होने के कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिन मोहल्लों में गंदगी होती है। उस  मोहल्ले के वासियों को गंदगी के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p> नगर के अन्नपूर्णा माता मंदिर मोहल्ला बॉस कॉलोनी  चामुंडा माता मंदिर के पास  पूर्व  उप जिला प्रमुख संतोष खंडेलवाल के मकान के पीछे  के मोहल्ले में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे होने से  मोहल्ले वासियों को परेशानियां होती है। सीसी सड़क इंटरलॉकिंग होने के बाद भी समय पर सफाई नहीं होने से जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं जिससे वार्ड वासी गंदगी में ही अपना जीवन यापन करने के लिए मजबूर है। अन्नपूर्णा माता मंदिर के मोहल्ले वासियों  ने बताया कि वार्ड में सफाई के लिए प्रतिदिन सफाई की आवश्यकता है  लेकिन प्रतिदिन सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह गंदगी फैली रहती है इससे बीमारियां और संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। वर्तमान में मौसमी बीमारियां चलने से लोग पहले ही दहशत में हैं और गंदगी से भी मच्छर मक्खियां पैदा होने से बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। उन्होंने वार्ड की प्रतिदिन सफाई कराने की मांग की। </p>
<p>संदीप शर्मा ने बताया कि बॉस कॉलोनी में पानी की निकासी नहीं होने के कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नालियों में साथ ही खाली पड़े प्लॉट में भी पानी भरा होने से उसमें मक्खी और मच्छर पैदा होते रहते हैं जिससे बीमारियां फैलने का खतरा हो रहा है। एक और तो कोरोना वायरस के चलते सरकार के द्वारा जागरूकता फैलाने के अभियान चलाए जा रहे हैं। दूसरी और साफ सफाई नहीं होने के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। साहिब लाल बैरवा ने बताया कि बॉस कॉलोनी में जगह-जगह पर कीचड़ व पानी भरा होने से कॉलोनी वासियों को समस्या का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर पालिका के द्वारा नगर वासियों को मूलभूत आवश्यकताओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही नगर में अगर कहीं सफाई की समस्या है तो उसे शीघ्र ही दुरुस्त किया जाएगा। नगर वासियों की कचरा गाड़ी की समस्या के लिए भी कचरा गाड़ियां बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। <br /><strong>- हेमलता शर्मा, नगर पालिका चेयरमैन </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 May 2023 14:19:03 +0530</pubDate>
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