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                <title>विद्यालय के आगे ग्रामीणों का अतिक्रमण, छात्रों को खेलने के लिए भी नहीं है जगह </title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों के परिजनों का कहना है कि अब तो विद्यालय में बच्चों में सांप और अन्य जानवरों का भय रहता है। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/encroachment-of-villagers-in-front-of-school/article-14634"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/neww-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>सिकराय। ग्राम पंचायत पाटन के बूजोट गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भवन के आगे ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर लिया है। इसके कारण स्कूल में आने वाले छात्रों को विद्यालय आने में भी भय रहता है। छात्र-छात्राओं को खेलने के लिए भी जगह नहीं है। विद्यालय के आगे गांव के लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। सरकार भले ही स्कूलों को अच्छे बनाने में लगी हो, लेकिन बूजोट गांव के स्कूल को देखकर बच्चे स्कूल नहीं जाते है। विद्यालय में आने जाने में भी छात्र-छात्राओं को भय रहता है।</p>
<p>बच्चों के परिजनों का कहना है कि अब तो विद्यालय में बच्चों में सांप और अन्य जानवरों का भय रहता है। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्कूल के आगे मैदान से अतिक्रमण नहीं हटाया, तो आंदोलन करेंगे। विद्यालय में कक्षाओं के क्षतिग्रस्त होने के कारण कक्षा में ताला लगा रहता है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jul 2022 12:25:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>संकट में उद्धव</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र में शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद महाराष्ट्र में सियासी संकट गहरा गया है। राज्य विधानसभा में शिवसेना के 55 विधायकों में से 34 विधायक शिंदे के साथ चले गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/uddhav-thackeray-in-crisis/article-12901"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/454654653.jpg" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र में शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद महाराष्ट्र में सियासी संकट गहरा गया है। राज्य विधानसभा में शिवसेना के 55 विधायकों में से 34 विधायक शिंदे के साथ चले गए हैं। शिंदे गुट की तरफ से दावा किया जा रहा है चार निर्दलीय विधायक भी उनके साथ हैं। अभी शिवसेना के 34 विधायक गुवाहाटी डेरा डाले हुए हैं। शिंदे की मांग है कि उद्धव अब कांग्रेस और राकांपा का साथ छोड़ें और भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाएं। इसके अलावा शिंदे यह भी दावा कर रहे हैं कि वे ही असली शिवसेना हैं। उनका दावा है कि 47 विधायक उनके साथ हैं और बागी विधायकों ने शिंदे को अपना नेता चुन लिया है। परिस्थितियों को प्रतिकूल देखते हुए उद्धव ठाकरे ने परिवार सहित मुख्यमंत्री आवास वर्’ को खाली कर अपने निजी निवास मातोश्री चलेगए। अब सवाल है कि महाविकास आघाडी सरकार कितने दिन सत्ता में टिक पाएगी।</p>
<p>शिंदे काफी मजबूत स्थिति में हैं। यदि 37 से 37 विधायक उनके साथ हैं, तो उन पर दलबदल कानून भी लागू नहीं हो सकता। इतने विधायकों के साथ शिंदे दल बदलकर भाजपा में शामिल होते हैं, तो भाजपा बहुमत में आ जाएगी और उद्धव ठाकरे सत्ता से बाहर हो जाएंगे। शिंदे आगे की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और जल्दी में कोई कदम नहीं उठाना चाहते। वर्तमान संकट पर गौर से विचार किया जाए तो शिवसेना दो फाड़ होने के कगार पर हैं। ऐसे हालात आखिर क्यों बनें, तो इसका जवाब भी साफ है कि शिवसेना पर ठाकरे की पकड़ कमजोर पड़ने लगी है। कैसे इतने विधायक सूरत पहुंच गए और किसी को भी कुछ पता नहीं चला। यह सब कुछ अचानक तो संभव नहीं हो सकता। इसके लिए लंबी तैयारी चल रही थी और आखिर एकनाथ शिंदे सत्ता बदलने की तैयारी में सफल रहे। भाजपा और शिवसेना ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। गठबंधन को बहुमत भी मिल गया था, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर तकरार शुरू हो गई। आखिर शिवसेना ने राकांपा व कांग्र्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई। उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनकर अपनी महत्वाकांक्षा पूरी कर ली, लेकिन अब शिंदे की बगावत के बाद सरकार संकट में पड़ गई है। अब उद्धव सरकार का जाना लगभग संभव है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 10:33:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अनुचित आचरण</title>
                                    <description><![CDATA[सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना के विरोध में देश के विभिन्न भागों में भीषण और राष्ट्र विरोधी अराजकता हो रही है, वह न केवल चिंतनीय है, बल्कि निंदनीय भी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/improper-conduct-of-youth/article-12609"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ag-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना के विरोध में देश के विभिन्न भागों में भीषण और राष्ट्र विरोधी अराजकता हो रही है, वह न केवल चिंतनीय है, बल्कि निंदनीय भी है। सेना में भर्ती की आकांक्षा रखने वाले युवक ही सेना में भर्ती की नई योजना के खिलाफ अपने विरोध की आड़ में ट्रेनों एवं बसों को आग लगा रहे हैं, सामान से भरे ट्रकों को फूंक रहे हैं, पुलिस व पुलिस चौकियों पर हमले कर रहे हैं और अन्य सरकारी व गैर सरकारी सम्पत्ति को ऐसे नष्ट कर रहे हैं, जैसे राष्ट्र विरोधी तत्व करते हैं। आखिर ऐसे युवक सेना में भर्ती होने के पात्र कैसे हो सकते हैं। इन युवाओं के साथ देश की आम जनता व विपक्षी दलों को यह समझना जरूरी है कि सेना का आधुनिकीकरण अति आवश्यक हो चुका है, क्योंकि युद्ध के तौर-तरीके बदल चुके हैं। अब सैनिकों का तकनीकी रूप से दक्ष होना और उन्हें हर तरह के कौशल से लैस होना अनिवार्य हो गया है। भविष्य के युद्धों में सेनाएं आमने-सामने नहीं होंगी। युद्ध तकनीक के जरिए लड़े जाएंगे, जिनमें मिसाइलों, ड्रोन आदि की भूमिका अधिक होगी। भारतीय सेना को युद्ध की नवीनतम तकनीक से तभी सुसज्जित किया जा सकता है जब सैनिकों की संख्या में कटौती करने और उनके वेतन एवं पेंशन खर्च कम किए जाएंगे। ऐसा करके ही सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक धनराशि का प्रबंध किया जा सकता है।</p>
<p>इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अग्निपथ जैसी योजना तैयार की गई है। अभी हमारे देश में कुल बजट का 56 फीसदी तक सेना पर खर्च हो रहा है, इतने खर्च के बाद भी सेना का आधुनिकीकरण रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। सेना को जारी बजट का बड़ा हिस्सा वेतन व पेंशन पर खर्च हो जाता है। इस लिहाज से देखें तो अग्निपथ योजना समय की मांग है, लेकिन विरोध कर रहे युवाओं की भी कुछ चिंताएं सही लगती है। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार देश में करीब डेढ़ लाख युवक सेना में भर्ती की लिखित परीक्षा की प्रतिक्षा कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने फिजीकल व स्वास्थ्य संबंधी टेस्ट पूरे कर लिए हैं। इन युवकों ने सेना में भर्ती की पूर्णकाल्कि 19 साल की सेवा की उम्मीद लगा रखी है और वे चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें पेंशन मिलती रहे। अग्निपथ योजना में उनको भविष्य असुरक्षित लग रहा है। हालांकि सरकार ने अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ घोषणाएं की हैं, लेकिन आक्रोशित युवक संतुष्ट नहीं हैं। आक्रोश को खत्म करना जरूरी है और अब सरकार को देखना है कि वह क्या नया फैसला लेती है? फिर भी युवकों के राष्ट्र विरोधी आचरण को उचित नहीं ठहराया जा सकता।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 10:43:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट को मिले दो नए न्यायाधीश </title>
                                    <description><![CDATA[हाईकोर्ट को 2 नए न्यायाधीश मिले हैं। अधिवक्ता कोटे से कुलदीप माथुर और न्यायिक अधिकारी शुभा मेहता को हाईकोर्ट न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-high-court-get-2-new-judge/article-11251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/46545456465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हाईकोर्ट को 2 नए न्यायाधीश मिले हैं। अधिवक्ता कोटे से कुलदीप माथुर और न्यायिक अधिकारी शुभा मेहता को हाईकोर्ट न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन से दोनों के वारंट जारी होने के बाद केन्द्र सरकार ने उनके नियुक्ति आदेश जारी कर दिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अपनी तरह का एक इतिहास भी बना लिया है। हाईकोर्ट में अब जज दंपती मामलों की सुनवाई करेंगे। शुभा मेहता के पति गोयल पहले से ही हाईकोर्ट में न्यायाधीश हैं। गोयल को अधिवक्ता कोटे से न्यायाधीश नियुक्ति किया था।</p>
<p><strong>23 पद अभी भी रिक्त</strong> <br />कुलदीप माथुर और शुभा मेहता की नियुक्ति के बाद अब हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। हाईकोर्ट में जजों के 50 पद स्वीकृत हैं। ऐसे में अभी भी हाईकोर्ट में जजों के 23 पद खाली चल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 09:46:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि अवसंरचना कोष से किसान होंगे समृद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारतीय कृषि का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। कृषि क्षेत्र में बदलाव का श्रेय निश्चित रूप से किसानों की कड़ी मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों की कुशलता और केंद्र सरकार की किसान हितैषी नीतियों को जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/farmers-will-be-prosperous-to-agriculture-fund/article-10927"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/465465465.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारतीय कृषि का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। कृषि क्षेत्र में बदलाव का श्रेय निश्चित रूप से किसानों की कड़ी मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों की कुशलता और केंद्र सरकार की किसान हितैषी नीतियों को जाता है। पिछले आठ वर्षों में मोदी सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में उठाए गए प्रभावी कदमों के सद्परिणाम अब परिलक्षित हो रहे हैं। इस दौरान सरकार ने कृषि एवं किसान कल्याण की अनेक योजनाओं की सौगातें दी है। नि:संदेह जब सरकार एवं मंत्रालय की दिशा और लक्ष्य एक हो जाता है, तब योजनाओं, कार्यक्रमों, गतिविधियों के बेहतर संयोजन से आशानुरूप परिणाम आने लगते हैं। हमारे किसान भाई-बहन आज नवोन्मेषी बन रहे है, वे नवाचारों से रूबरू होते हुए बेहतर जीवन के लिए कृषि को पेशेवर रूप में अपना रहे हैं। योजनाओं में ये झलक साफ दिखाई देती है कि कृषि मंत्रालय सहित भारत सरकार किसानों के प्रति समर्पण तथा ईमानदारी से कार्य कर रही है। योजनाओं की इसी कड़ी में, कृषि क्षेत्र की बड़ी गैप भरते हुए, गांव-गांव, खेतों के पास तक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए, प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) योजना की शुरूआत मई-2020 में एक लाख करोड़ रुपए के प्रावधान के साथ हुई। इस वृहद योजना के अन्तर्गत प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां, किसान उत्पादक संगठनों, कृषि उद्यमियों, स्टार्टअप आदि को एआईएफ से परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही हैं।</p>
<p>कृषि विकास को गति देने और उसे नए मुकाम तक पहुंचाने के लिए कुछ बुनियादी आवश्यकताएं किसानों की प्राथमिकता के रूप में है। किसान तभी बेहतर अवसर पा सकता है, जब उसके उत्पाद को अधिकतम मूल्य मिलें और उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान से उसे बचाया जा सके व उपज का अधिकतम उपयोग कर सके। इस मुद्दे पर सरकार की रचनात्मक सोच का परिणाम है कि एआईएफ स्कीम के अन्तर्गत फार्मगेट इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की शुरूआत हुई। कृषि अवसंरचना विकास से मानव संसाधन विकास व भूमि संसाधन का उपयोग हुआ है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने कटाई उपरांत प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचे और सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों से संबंधित व्यवहारिक परियोजनाओं में निवेश के लिए एक मध्यम-दीर्घकालिक ऋण सुविधा जुटाने के लिए यह योजना किसानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर बनाई है। आंकडेÞ बताते हैं कि देश की आबादी में लगभग 58 प्रतिशत लोगों की प्राथमिक आय का स्रोत कृषि और कृषि से संबंधित गतिविधियां ही हैं। देश में दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले लगभग 85 प्रतिशत किसान है और वे तकरीबन 45 प्रतिशत कृषि भूमि का प्रबंधन करते हैं, जिनमें अधिकांश किसानों की वार्षिक आय कम है। पूर्व की सरकारों के समय देश में कृषि में निवेश लगभग स्थिर रहा है, जिसे देखते हुए इस प्रकार की योजना को किसान हित में बनाना प्रासंगिक बन गया।</p>
<p>देश में कृषि अवसंरचना में सुधार के लिए प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता के माध्यम से कटाई उपरांत प्रबंधन द्वारा किसानों की आय में वृद्धि का नया द्वार खुला है। अब किसान अपने उत्पादन को इन कृषि अवसंरचना में कटाई उपरांत रख सकेगा और उचित मूल्य मिलने पर बगैर बिचौलियों के, किसी भी बाजार में अधिकतम मूल्य में बेच सकेगा। निश्चित ही सरकार का यह कदम किसानों की आय में सुधार को नया आयाम देगा। ये कदम किसानों को स्वतंत्र बनाएगा व उन्हें बाजार तक पहुंचने में समर्थ भी करेगा। केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों के सहयोग से क्रियान्वित इस योजना में आधुनिक पैकेजिंग और कोल्ड स्टोरेज सिस्टम की उपलब्धता के कारण किसान बाजार में अपने उत्पाद कब बेचे, इस पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा, जो उसकी बेहतर जीविकोपार्जन की दिशा में सही एवं निर्णायक कदम है। यह योजना सामुदायिक कृषि संपत्तियों में वृद्धि करेगी और किसानों के कृषि इनपुट की लागत में कमी लाएगी। स्कीम के तहत दो करोड़ रुपए तक का लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। ब्याज अनुदान के रूप में तीन प्रतिशत तक की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा योजना के तहत क्रेडिट गारंटी सहायता भी उपलब्ध है। <br />कटाई उपरांत प्रबंधन परियोजना के तहत आपूर्ति शृंखला सेवाओं सहित ई-मार्केटिंग प्लेटफार्म, गोदाम, साईलोस, पैक हाउसेज, परख इकाइयां यूनिट छंटाई और श्रेणीकरण इकाइयां, कोल्ड चेन्स, लाजिस्टिक सुविधा, प्राथमिक प्रसंस्करण केन्द्र एवं पकने वाले कक्ष आदि के ढांचे बनाने की सुविधा इस योजना में निहित है। इसी प्रकार सामुदायिक कृषि परिसंपत्ति बनाने के लिए व्यवहार्य परियोजना के अन्तर्गत जैव आदानों का उत्पादन, जैव उत्तेजक उत्पादन इकाइयां, स्मार्ट व सटीक कृषि के लिए बुनियादी ढांचा, निर्यात समूहों सहित फसलों के समूह के लिए आपूर्ति शृंखंला एवं अवसंरचना प्रदान करने के लिए चिन्हित परियोजनाएं आदि भी इसमें लाए हैं।</p>
<p><strong>- कैलाश चौधरी</strong><br /><strong>(केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री) </strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 10:49:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गंभीर जल संकट से दिल्ली के लोग है परेशान </title>
                                    <description><![CDATA[पिछले कई दिनों से गंभीर जल संकट से दिल्ली के लोग परेशान है। परेशानी का सबब यह है कि पानी पहुंचाने वाले टैंकरों को कड़ी सुरक्षा में चलाया जा रहा है, ताकि पानी को लेकर हिंसा ना हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/lack-of-water-in-area-of-delhi/article-10459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/2-copy4.jpg" alt=""></a><br /><p>पिछले कई दिनों से गंभीर जल संकट से दिल्ली के लोग परेशान है। परेशानी का सबब यह है कि पानी पहुंचाने वाले टैंकरों को कड़ी सुरक्षा में चलाया जा रहा है, ताकि पानी को लेकर हिंसा ना हो। दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र में पानी की कमी से जूझ रहे लोग पानी की टंकियों और हेंडपंपों से बूंद-बूंद पानी इकट्ठा कर रहे हैं और अपने-अपने पानी के डिब्बों को जंजीर से बांधकर रख रहे हैं। ऐसा ही नजारा मंगलवार को वसंत विहार के कुसुमपुर पहाड़ी इलाके में देखने को मिला। यह चिंताजनक इसलिए है कि अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो यह जल संकट कभी भी जल संघर्ष एवं हिंसा में बदल सकता है।  भीषण गर्मी और हरियाणा में नदी में कम पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। दिल्ली के जल-संकट को जल्दी-से-जल्दी दूर करना सरकार की प्राथमिकता होनी ही चाहिए। दिल्ली में जल संकट वैसे तो हर वर्ष गर्मी की समस्या है, लेकिन इसका प्रभाव साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि बढ़ती जनसंख्या की वजह से दिल्ली में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। अगर हम आंकड़ों पर गौर करें तो यह बात काफी हद तक सच भी है। दिल्ली की जनसंख्या में बीते दो दशकों में अत्यधिक वृद्धि हुई है। केवल जनसंख्या में वृद्धि ही दिल्ली में साल दर साल गहराते जल संकट का कारण नहीं है। विश्व के किसी भी शहर एवं खासकर राजधानी क्षेत्र की जनसंख्या में वृद्धि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, पर इससे उपजने वाली विभिन्न समस्याओं एवं जल संकट का मूल आबादी की बजाय, आबादी द्वारा चुनी गई सरकार एवं उसके लिए कार्य करने वाली संस्थाएं हैं, जोकि जीवन के मूलभूत तत्वों एवं जीवन निर्वाह की मूल जरूरतों में से एक जल भी उपलब्ध नहीं करवा पाती है। यह सरकार की नाकामी को दर्शाता है।</p>
<p>यह कैसी सरकार है, जिसके शासन में एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोग रात-रात भर जाग रहे हैं। जहां पानी पहुंच रहा है वहां लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। जिनके पास पानी खरीदने को पैसे नहीं हैं, वे गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जो खरीद सकते हैं, वे मुंहमांगा दाम दे रहे हैं। ऐसा नहीं कि ये हाल कुछेक इलाकों का है। आधी से ज्यादा दिल्ली पानी के लिए इसी तरह तरस रही है। यह हर साल का रोना है। लेकिन विडंबना यह है कि जल संकट के स्थायी समाधान के लिए क्या हो, इसकी फिक्र किसी को नहीं दिखती। दिल्ली में जल-संकट का कारण राजनीति भी है। पानी को लेकर विवाद दूसरे राज्यों में भी होते रहते हैं। नदियों के पानी पर किसका और कितना हक हो, यह मुद्दा जटिल तो है ही, राज्यों की राजनीति ने इसे और पेचीदा बना डाला है। दिल्ली को अतिरिक्त पानी देने को लेकर उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के साथ चर्चा करीब तीन साल से चल रही है। हरियाणा सरकार के साथ भी लंबे समय से बात चल रही है। पर अब तीनों राज्यों ने अपनी मजबूरी जता दी है। दिल्ली में पानी का संकट तब खड़ा होता है, जब यमुना में पानी कम हो जाता है। ताजा स्थिति यह है कि यमुना नदी का जलस्तर सामान्य से छह फीट नीचे चला गया है। यहां पानी हरियाणा से आता है। हरियाणा तर्क यह दे रहा है कि पंजाब उसे उसके हिस्से का पानी नहीं दे रहा। यानी जब पंजाब हरियाणा को पानी देगा, तब वह दिल्ली को देगा। अगर वाकई ऐसा है तो यह बेहद गंभीर बात है। इससे तो यही लग रहा है कि पानी को लेकर सरकारें राजनीति कर रही हैं।</p>
<p>दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, जबकि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भाजपा की, जबकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है और उसी की सरकार पंजाब में है तो वह समस्या के समाधान के लिए तत्पर क्यों नहीं होती। पंजाब हरियाणा को पानी दे तो दिल्ली को पानी मिल सकता है, लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए गंभीरता क्यों नजर नहीं आ रही है। क्यों जल पर राजनीति की जा रही है। क्यों जनता को पानी के लिए त्राहि-त्राहि करने पर विवश किया जा रहाहै। ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे राजनीतिज्ञ, जिन्हें सिर्फ वोट की प्यास है और वे अपनी इस स्वार्थ की प्यास को इस पानी से बुझाना चाहते हैं। पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली का यह जल-विवाद आज हमारे लोकतांत्रिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दे उससे पूर्व आवश्यकता है, तुच्छ स्वार्थ से ऊपर उठकर व्यापक राष्ट्रीय हित एवं जनता के हित के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए। जीवन में श्रेष्ठ वस्तुएं प्रभु ने मुफ्त दे रखी हैं- पानी, हवा और प्यार। और आज वे ही विवादग्रस्त, दूषित और झूठी हो गर्इं। बहुत हो चुका है। अब बस। 2022 दिल्ली के जन-संकट का समाधान का वर्ष हो। भारत की नदियां शताब्दियों से भारतीय जीवन का एक प्रमुख अंग बनी हुई हैं। इन्हीं के तटों से ऋयों-मुनियों की वाणी मुखरित हुई थी, जहां से सदैव शांति एवं प्रेम का संदेश मिलता था। इसमें तो पूजा के फूल, अर्घ्य और तर्पण गिरता था अब वहां निर्दोषों का खून गिरता है।</p>
<p><strong>- ललित गर्ग </strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 11:25:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रशासन शहरों के संग अभियान का दूसरा चरण शुरू </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश सरकार की ओर से प्रशासन शहरों के संग अभियान के पहले चरण की सफलता के बाद जनता को राहत पहुंचाने के लिए फिर से प्रशासन शहरों के संग अभियान का दूसरा चरण शुरू किया है, लेकिन इस दूसरे चरण में विभिन्न विभागों के कार्मिक रुचि लेते दिखाई नहीं दे रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dholpur/second-phase-start-of-campaign-of-govt/article-9198"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/444-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>बाड़ी। प्रदेश सरकार की ओर से प्रशासन शहरों के संग अभियान के पहले चरण की सफलता के बाद जनता को राहत पहुंचाने के लिए फिर से प्रशासन शहरों के संग अभियान का दूसरा चरण शुरू किया है, लेकिन इस दूसरे चरण में विभिन्न विभागों के कार्मिक रुचि लेते दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में कैम्पों में काम के लिए पहुंच रहे नागरिक परेशान हो रहे हैं। शहर में प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत वार्ड 22 के हथियापोर स्कूल में कैंप लगाया गया। कैंप में पालिका के कुछ कर्मचारियों के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी नदारद रहे। शिविर शुरू होने के बाद काफी समय तक अधिकारी, कर्मचारी नहीं आए।</p>
<p>इस दौरान अपने समस्याओं का समाधान की आस लेकर आए लोग मायूस हो कर लौट गए। शिविर में टेंट का पंडाल व उसमें रखी खाली कुर्सियां ही देखने को मिली। जिनकी टेबिल पर विभिन्न विभागों के जिम्मेदारों के पद की तख्तियां तो लगाई गई, लेकिन उन पर जिम्मेदार नदारद दिए। शिविर में पालिका के जिम्मेदार अधिकारी, जलदाय विभाग, बिजली निगम, आंगनबाड़ी सहित अन्य कई विभागों के अधिकारी नहीं होने से लोगों को निराश लौटना पड़ा। धौलपुर के बाड़ी के वार्ड 22 के निवासी पूर्व अध्यापक एवं वरिष्ठ नागरिक उमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि वे कैंप में अपना पट्टा लेने के लिए आए थे। उन्होंने पट्टे को लेकर एक हजार रुपए भी जमा कराए थे। गुरुवार को पट्टा  देने की बात हुई थी। 1 घंटे से कैंप में बैठे हैं, लेकिन एक-दो कर्मचारियों के अलावा कैंप में कोई नहीं आया है। वार्ड 22 के नागरिक सुनील कुमार, संतोष शुक्ला, प्रदीप गौड़, पप्पे वैश्य, चेतन शर्मा सहित कई अन्य ने बताया कि कैंप को लेकर ना तो कोई प्रचार-प्रसार किया गया है ना ही कैंप में अधिकारियों कर्मचारी रुचि ले रहे हैं। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धौलपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 May 2022 11:09:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत 6.44 लाख को दिया जाएगा बेरोजगारी भत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में कांग्रेस की पिछले चुनावों में की गई युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत सरकार की पांच साल की अवधि पूरा होने तक सब योग्य युवाओं को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/6-44-lakh-will-be-given-unemployment-allowance/article-7817"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ashok03-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस की पिछले चुनावों में की गई युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत सरकार की पांच साल की अवधि पूरा होने तक सब योग्य युवाओं को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। वहीं बेरोजगार जो प्रतियोगी परीक्षा दे रहा है, उनको इंटर्नशिप में भी छूट देने की तैयारी है, ताकि उसे पढ़ाई का समय मिले और वह भत्ते से भी वंचित ना हो। हालांकि इसके आदेश अभी नहीं हुए हैं, लेकिन उच्च स्तर पर इसका प्रस्ताव तैयार हो चुका है। इसे जल्द मंजूरी मिल सकती है। हालांकि प्रदेश में 16 लाख पंजीकृत बेरोजगार हैं, लेकिन योजना के तहत 6.44 लाख ऐसे युवा बेरोजगार हैं जो ग्रेज्यूएट हैं और बेरोजगारी भत्ता लेने के लिए योग्य हैं। इनमें से सरकार ने अब तक 3.97 लाख बेरोजगारों को भत्ते का फायदा दे दिया है। अब अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल की शेष बची बीस माह की अवधि में शेष 2.47 लाख बेरोजगारों को भी भत्ता दे दिया जाएगा। हर साल अभी अधिकतम दो लाख बेरोजगारों को भत्ते की राशि दी जा रही है। योजना के तहत पहले युवकों को 3 हजार और युवतियों को 3500 रुपए का भत्ता देय था, जिसे सरकार ने बाद में बढ़ाकर क्रमश: 4 हजार और 4500 कर दिया था।</p>
<p><strong>इंटर्नशिप खत्म करने से मिलेगी राहत</strong> <br />भत्ता लेने के लिए बेरोजगार को जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा प्रदेश के 23 विभिन्न विभागों में कार्य दिवस के दौरान रोजाना 4 घंटे इंटर्नशिप के रूप में काम करना पड़ता है। इस राइडर के चलते प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा भत्ते से परहेज कर रहे हैं या फिर जो आर्थिक तंगी के चलते इसे ले रहे हैं, उनकी इंटर्नशिप के चलते परीक्षा तैयारी बाधित हो रही है। परीक्षार्थियों को इंटर्नशिप से राहत देने की तैयारी है ताकि भत्ते के साथ परीक्षा की भरपूर तैयारी कर सके।</p>
<p>तय मापदंडों के अनुसार सभी योग्य रजिस्टर्ड बेरोजगारों को भत्ता देने की कार्य योजना है। सरकार की शेष अवधि तक लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। इंटर्नशिप में रियायत को लेकर क्या प्रस्ताव है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है।<br /><strong>- भानु प्रकाश अटरू, सचिव, श्रम व नियोजन</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 10:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार को लोगों को ईंधन की कमाई का देना चाहिए हिसाब : कांग्रेस </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाने पर प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने पिछले छह दिन में पांचवी बार ईंधन की कीमत बढ़ाई है और वह लगातार लोगों को लूटने का काम कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/govt-should-give-account-of-fuel-income-of-peoples--says-congress/article-6808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/congress-copy9.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाने पर प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने पिछले छह दिन में पांचवी बार ईंधन की कीमत बढ़ाई है और वह लगातार लोगों को लूटने का काम कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता संजय निरुपम और पवन खेड़ा ने पार्टी मुख्यालय में कहा कि मोदी सरकार ने 157 दिन तक तेल के दाम इसलिए नहीं बढ़ाएं, क्योंकि विधानसभा चुनाव चल रहे थे और तब इसका नकारात्मक परिणाम मिल सकता था, लेकिन अब वह लगातार तेल के दाम बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि तेल पर कर से सरकार ने 26 लाख करोड़ रुपये कमाए हैं और उसे देश के लोगों को इस कमाई का हिसाब देना चाहिए।</p>
<p>कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पेट्रोल के दाम 50 पैसे बढ़ाए गए हैं और मोदी भक्त इस बात से खुश है कि ईंधन के दाम 80 पैसे की बजाय 50 पैसे बढ़ाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस वृद्धि का लगातार विरोध करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Mar 2022 15:33:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षित,सुरक्षित,स्वस्थ नारी,प्राथमिकता हमारी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार का संकल्प है कि प्रदेश की प्रत्येक बालिका एवं महिला को शिक्षित, सुरक्षित और स्वस्थ जीवन प्रदान करने के लिए समुचित अवसर और सुविधाएं दी जाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/govt-has-set-up-fund-to-empower-women/article-5676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/011-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>राजस्थान सरकार का संकल्प है कि प्रदेश की प्रत्येक बालिका एवं महिला को शिक्षित, सुरक्षित और स्वस्थ जीवन प्रदान करने के लिए समुचित अवसर और सुविधाएं दी जाएं। इसी का सुपरिणाम है कि प्रदेश में सशक्त नारी की अवधारणा फलीभूत हो रही है और महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार ने महिलाओं का सशक्तिकरण करने के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1000 करोड़ रूपये की निधि स्थापित की है। जिसके तहत महिलाओं के सशक्तिकरण की विभिन्न योजनाएं संचालित है। वहीं राज्य में लगातार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से नारी सशक्तिकरण साकार रूप ले रहा है। सामाजिक व्यवस्था में पुरूष पारम्परिक रूप से परिवार का मुखिया होता है। इस अवधारणा से इतर प्रदेश में जनआधार कार्ड में महिला को परिवार की मुखिया के रूप में पहचान मिली है। प्रदेश में लिंगानुपात 929 से बढ़कर 946 हो गया है। महिलाओं को समूचे रूप से आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश में उनके शिक्षण-प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, सुरक्षा ,संरक्षण को सुनिश्चित करने के साथ ही उन्हें स्वावलंबी बनाने एवं संबल प्रदान करने के लिए राज्य सरकार कार्य कर रही है।</p>
<p><strong>शिक्षण एवं प्रशिक्षण</strong><br />आज के दौर में यदि महिलाओं को पुरूषों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढाना है, तो इसके लिए जहां उनको बेहतर शिक्षा के अवसर प्रदान किया जाना है,  वहीं उनमें विद्यमान आत्म कौशल को निखारना भी आवश्यक है। आधुनिक तकनीक को समाहित करते हुए महिलाओं को प्रशिक्षित किए जाने की विशेष आवश्यकता है। इसी को केन्द्र में रखकर प्रदेश में आई एम शक्ति प्रशिक्षण एवं कौशल संवर्धन योजना के माध्यम से महिलाओं के शिक्षण और प्रशिक्षण को सुनिश्चित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य के लिए उड़ान</strong> <br />पहला सुख निरोगी काया कहावत महिलाओं के लिए भी उतनी ही आवश्यक है जितनी पुरूष प्रधान समाज में इसकी मान्यता है। राज्य सरकार महिलाओं को स्वस्थ रखने के लिए पूर्ण संवेदनशीलता के साथ प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योेजना के द्वारा उपलब्ध करवाई गई स्वास्थ्य सुविधा के साथ ही प्रदेश सरकार ने समस्त किशोरियों एवं महिलाओं को नि:शुल्क सेनेटरी नेपकीन उपलब्ध करवाने के लिए उड़ान योजना को शुरू किया है। माहवारी में स्वच्छता संबंधी जानकारी के अभाव तथा स्वच्छता प्रबंधन न होने के कारण कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से महिलाओं को जूझना पड़ता है।</p>
<p><strong>सुरक्षा एवं संरक्षण</strong><br />महिलाओं को सुरक्षा तथा संरक्षण दिया जाना वैसे तो सम्पूर्ण समाज की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार भी पूर्ण संवेदनशीलता के साथ महिलाओं के लिए सुरक्षा एवं संरक्षण का वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में अभय कमाण्ड सेन्टर तथा महिला सुरक्षा गश्ती दल कार्यरत है। सिरोही जिले के अभय कमाण्ड सेंटर पर कार्यरत कांसटेबल लाभू सिंह की तत्परता ने सुरक्षा के लिए सजगता का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वयं फोन करके उनकी इस सजगता के लिए शाबाशी दी हैे। राज्य में  महिलाओं को सखी वन स्टॉप सेन्टर अथवा अपराजिता केन्द्र, महिला सुरक्षा सलाह केन्द्र और त्रिस्तरीय महिला समाधान समिति द्वारा सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान किया जा रहा है।</p>
<p><strong>स्वावलम्बन</strong><br />इसी प्रकार महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने के लिए आई एम शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना संचालित है। जिसमें महिलाओं को स्वयं का उद्यम स्थापित करने के लिए अनुदानित ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। योजनान्तर्गत अधिकतम ऋण सीमा एक करोड़ है तथा अधिकतम ऋण अनुदान राशि 15 लाख है। योजनान्तर्गत स्वीकृत ऋण राशि का 25 प्रतिशत अनुदान देय है। विशेष श्रेणी विधवा,परित्यक्ता,हिंसा से पीड़ित महिला दिव्यांग,अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के अवेदकों को स्वीकृत ऋण राशि का 30 प्रतिशत ऋण अनुदान देय है। इसी प्रकार महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने के लिए ही जागृति बैक टू वर्क योेजना शुरू की गई है।</p>
<p><strong>संबल</strong><br />मुख्यमंत्री राजश्री योजना के माध्यम से छह चरणों में 50 हजार रूपए की वित्तीय सहायता देकर संबल प्रदान किया जाता है। वहीं सामूहिक विवाह नियमन एवं अनुदान योजना भी महिलाओं को संबल प्रदान करने की राज्य सरकार की मंशा को पुष्ट करती है।</p>
<p><strong>प्रोत्साहन एवं सम्मान</strong> <br />प्रदेश में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मान देने हेतु आई एम शक्ति प्रोत्साहन एवं सम्मान योजना भी संचालित है। प्रत्येक वर्ष 8 मार्च अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यह सम्मान तीन श्रेणियों में दिया जाता है। इसके अन्तर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति,संस्थाएं, महिला एवं बाल विकास कर्मी जिसके अन्तर्गत सर्वश्रेष्ठ महिला एवं बाल विकास कर्मी, श्रेष्ठ दानदाता,श्रेष्ठ सीएसआर कम्पनी को दिया जाता है।</p>
<p>-<strong> गजाधर भरत</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं।)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 12:10:16 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्ववर्ती सरकारों के कारण दशकों तक देश का विकास रहा प्रभावित : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। मोदी ने कहा कि महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर कहा कि दशकों तक देश का विकास प्रभावित रहा। मोदी ने यहां पुणे मेट्रो रेल परियोजना के उद्घाटन के मौके पर कहा कि देश में दशकों तक ऐसी व्यवस्था रही, जिसके कारण महत्वपूर्ण परियोजनाओं के पूरा होने में लंबा समय लगता रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/development-was-affected-due-to-govt--says-modi/article-5591"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/modi.jpg02-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>पुणे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। मोदी ने कहा कि महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर कहा कि दशकों तक देश का विकास प्रभावित रहा। मोदी ने यहां पुणे मेट्रो रेल परियोजना के उद्घाटन के मौके पर कहा कि देश में दशकों तक ऐसी व्यवस्था रही, जिसके कारण महत्वपूर्ण परियोजनाओं के पूरा होने में लंबा समय लगता रहा। उन्होंने कहा कि किसी भी देश में विकास के लिए गति महत्वपूर्ण है। दशकों से हमारे देश में ऐसी व्यवस्था रही, जिसके कारण बड़ी योजनाओं को पूरा करने में काफी समय लगता था।</p>
<p>मोदी ने पुणे मेट्रो रेल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्घाटन एक संदेश है कि किसी भी परियोजना को समय पर पूरा किया जा सकता है। उन्होंने केंद्र की पूर्ववर्ती सरकार पर हमला करते हुए कहा कि पहले आधारशिला तो रखी जाती थी, लेकिन उसका उद्घाटन कब होगा, इसकी कोई निश्चित समय नहीं था। केंद्र सरकार सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो संपर्क पर विशेष ध्यान दे रही है। समाज के हर वर्ग को मेट्रो में यात्रा करने की आदत डालनी चाहिए। हमारा प्रयास है कि देश में अधिक इलेक्ट्रिक बसें, इलेक्ट्रिक कार और दोपहिया वाहन हो।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Mar 2022 16:52:21 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश सरकार एक टाइगर पर 50 लाख कर रही है खर्च  </title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र और प्रदेश सरकार एक टाइगर पर मिलकर करीब 50 लाख 85 हजार रुपए प्रति वर्ष खर्च कर रही है। दरअसल, प्रदेश के तीनों बाघ अभयारण्यों में अभी करीब 90 बाघ हैं, जिन पर केन्द्र और राज्य सरकार ने मिलकर 45 करोड़, 85 लाख रुपए खर्च किए हैं। जिसमें केन्द्र सरकार ने वर्ष 2021-22 में  करीब 21 करोड़, 85 लाख रुपए खर्च किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-govt-doing-expenditure-50-lakh-at-one-tiger/article-5560"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/5mar52.u-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केन्द्र और प्रदेश सरकार एक टाइगर पर मिलकर करीब 50 लाख 85 हजार रुपए प्रति वर्ष खर्च कर रही है। दरअसल, प्रदेश के तीनों बाघ अभयारण्यों में अभी करीब 90 बाघ हैं, जिन पर केन्द्र और राज्य सरकार ने मिलकर 45 करोड़, 85 लाख रुपए खर्च किए हैं। केन्द्र सरकार ने  करीब 21 करोड़, 85 लाख रुपए खर्च किए। तीनों बाघ परियोजना में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों को राज्य सरकार ने वेतन के तौर पर 24 करोड़ रुपए दिए हैं।</p>
<p>केन्द्र सरकार प्रतिवर्ष एक निश्चित राशि देती है। इस राशि से बाघों के संरक्षण के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन का विकास होता है।<br /><strong>- डॉ. डीएन पाण्डेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक   </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Mar 2022 11:43:21 +0530</pubDate>
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