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                <title>आमजन के लिए खतरा सांड, फिर भी सड़कों पर बसेरा</title>
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                        <![CDATA[महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls--a-menace-to-the-public--yet-still-roaming-the-streets/article-149266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जिस तरह से आवारा कुत्ते और बंदर आमजन के लिए खतरा बने हुए हैं। उसी तरह से सड़कों पर घूमते सांड सबसे अधिक खतरनाक हैं। आए दिन राह चलते लोगों पर मवेशियों द्वारा किए गए हमलों में सबसे अधिक सांड ही हैं। इसके बावजूद भी नगर निगम के लिए सांड पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। शहर को एक तरफ तो कैटल फ्री बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सड़कों से मवेशियों का जमघट कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बंधा धर्मपुरा में करीब 300 करोड़ रुपए से देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई है। जहां पशु पालकों के साथ ही पशुओं को भी शिफ्ट किया गया है। उसके बाद भी शहर से मवेशियों की संख्या कम नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>सब्जीमंडी व भीड़भाड़ वाली जगह खतरा अधिक</strong><br />शहर में वैसे तो मवेशी हर जगह सड़कों पर घूमते हुए व समूहों में बैठे हुए देखे जा सकते हैं। सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों में भी सांड की संख्या अधिक है। निराश्रित गायों को तो नगर निगम की टीम आसानी से पकड़ भी लेती है। जबकि सांड पकड़ना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।जबकि शहर में हर जगह सब्जीमंडी हो या भीड़भाड़ वाले स्थान वहां इन सांड से खतरा अधिक हो रहा है। सब्जीमंडी में महिलाएं अधिक होने व उनके हाथ में सब्जी का थैला व अन्य वस्तु होने पर उन्हें खाने के प्रयास में सांड उन पर हमला तक कर रहे हैं। वहीं मुख्य मार्गों पर भी आए दिन सांड द्वारा लोगों को उठाकर फेंकने व उन पर हमला करने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। गत दिनों छावनी रामचंद्रपुरा में घर से निकलकर दुकान जा रहे एक बुजुर्ग पर सांड ने दूर से आकर हमला कर दिया था। जिससे उन्हें गम्भीर हालत में निजी अस्पतालमें भर्ती कराना पड़ा था। वहीं इस तरह की घटनाओं में कई लोगों की तो मौत तक हो चुकी है।</p>
<p><strong>घेरा डालकर पकड़ रहे मवेशी</strong><br />नगर निगम की ओर से सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकडऩे का ठेका दिया हुआ है। निगम अधिकारियों की मौजूदगी में संवेदक फर्म के कर्मचारियों के माध्यम से मवेशियों को पकडऩे का काम घेरा डालकर किया जा रहा है। वैसे तो अधिकतर समय मवेशियों को रात में पकड़ते हैं। लेकिन गत दिनों दिन के समय सकतपुरा में घेरा डालकर पकडऩे के दौरान कई मवेशी एक सरकारी स्कूल में घुस गए थे। जिससे वहां स्कूल समय में बड़ा हादसा होने से बच गया था।</p>
<p><strong>तीन माह में पकड़े करीब डेढ़ हजार मवेशी</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम टीम ने इस साल के शुरुआती तीन माह में करीब डेढ़ हजार मवेशी सड़कों से पकड़े हैं। उनमें गाय अधिक और सांड बहुत कम हैं।जनवरी में 408, फरवरी में 533 और मार्च में 532 समेत तीन माह में कुल 1473 मवेशी पकड़े गए हैं।</p>
<p><strong>गौशाला में करीब एक तिहाई सांड</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 22 सौ मवेशी हैं। इनमें से करीब एक तिहाई 700 सांड हैं। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में 188 मवेशी हैं।</p>
<p><strong>महानगरों की तरह हो शहर में व्यवस्था</strong><br />लोगों का कहना है कि कोटा में सड़कों पर गाय, सांड, कुत्ते, बंदर व अन्य कई तरह के मवेशी अधिक हो रहे हैं। जबकि महानगरों की तरह कोटा में भी सड़कों पर मवेशी नजर नहीं आने चाहिए।बसंत विहार निवासी शुभम् शर्मा का कहना है कि इस क्षेत्र में सड़कों पर व बाड़ों में पशुओं की संख्या काफी अधिक है। उनके कारण यहां सांड भी आते रहते हैं। जिनसे स्थानीय लोगों को अधिक खतरा बना हुआ है।तलवंडी निवासी योगेश जैन का कहना है कि जिस तरह से महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते। वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए। गायों को चारा डालने का धर्म करना है तो गौशालाओं में ही गायों को चारा डाला जाना चाहिए। सड़कों पर चारा डालना पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए।</p>
<p><strong>शिकायत पर एम्बूलेंस भेजकर पकड़ते हैं सांड</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि शहर में मवेशियों की संख्या काफी अधिक है। उनमें सांड भी काफी है। नगर निगम की ओर से रात के समय घेरा डालकर मवेशी पकड़े जा रहे हैं। सांड पकडऩा मुश्किल है। उनके लिए शिकायत आने पर अलग से एम्बूलेंस भेजकर उसमें पकड़कर लाते हैं। निगम गौशाला में वर्तमान में करीब 700 से अधिक सांड हैं। उसके बाद भी सड़कों से ये कम नहीं हो रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में सांड अधिक हैं। निराश्रित मवेशियों को पकडऩे का अभियान तो लगातार जारी है। इस महीने करीब 400 से 500 मवेशी पकड़े जा रहे हैं। मवेशियों को घेरा डालकर पकड़ते समय सांड पकडऩा मुश्किल ही नहीं किसी चुनौती से कम नहीं है।उसके बाद भी जान जोखिम में डालकर कर्मचारी सांड पकड़ रहे हैं।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी, गौशाला नगर निगम</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:29:14 +0530</pubDate>
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                <title>स्ट्रीट डॉग की जिम्मेदारी डॉग लवर्स को मिले तो श्वान समस्या से मिले मुक्ति</title>
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                        <![CDATA[देखभाल से लेकर उनके खिलाने-पिलाने तक की व्यवस्था की निभाएंगे जिम्मेदारी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-the-responsibility-for-street-dogs-is-given-to-dog-lovers--the-stray-dog-problem-can-be-solved/article-137267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर ही नहीं पूरे प्रदेश व दिल्ली तक में आमजन के लिए समस्या बने स्ट्रीट डॉग का अभी तक स्थानीय निकाय स्थायी समाधान नहीं निकाल सकें हैं। एक तरफ आए दिन श्वानों के हमले और काटने की गंभीर घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं से लोग परेशान हैं । दूसरी तरफ डॉग लवर्स भी इन बेजुबान प्राणियों की पूरी तरह से मदद नहीं कर पा रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए गत दिनों सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना पड़ा। इसके बावजूद स्ट्रीट डॉग लवर्स व पीड़ितों के बीच तनाव के मामले सामने आ रहे हैं। यदि स्ट्रीट डाग लवर्स को ही इलाके वार इन श्वानों की रखवाली करने की जिम्मेदारी देने के साथ साथ उन्हें कुछ सरकारी मदद दी जाए तो इस समस्या का निष्पादन हो सकता है।</p>
<p><strong>क्या किया जा सकता है</strong><br />1-डाग लवर्स को श्वानों की रखवाली की मौहल्लेवार जिम्मेदारी दे सकते हैं।<br />2- नगर निगम जो पैसा इन्हें पकड़ने,रखने और अन्य कामों पर खर्च करती है उसे डाग लवर्स के माध्यम से खर्च किया जा सकता है।<br />3- सुप्रीम कोर्ट ने एरियावाइज फीड़िंग जोन बनाने को कहा है। फीड जोन बनाकर निगम उसकी जिम्मेदारी डाग लवर्स को दे सकती है।<br />4- निगम पार्क, सामुदायिक भवन, पुराने भवन अथवा अन्य स्थान इन्हें रखने के लिए मौहल्लेवार उपलब्ध कराए और जिम्मेदारी डाग लवर्स को दे तो हमले और काटने जैसी घटनाएं नहीं हो पाएंगी।<br />5-मौहल्ले के लोग इन्हें फीड देने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। इससे दान का दान और घटनाओं पर अंकुश भी लगेगा। टीकाकरण और बधियाकरण भी डॉग लवर्स की निगरानी में नियमित होने से इनकी संख्या पर अंकुश लगने के साथ रैबीज का डर भी कम हो जाएगा।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं स्ट्रीट डाग लवर्स</strong><br /><strong>सरकारी जगह जो आमजन के लिए उपयोगी नहीं हो उसे आवंटित कर दें</strong><br />स्ट्रीट डॉग के लिए वैसे तो डॉग लवर्स अपने स्तर पर देखभाल व खिलाने की व्यवस्था कर रहे हैं। लेकिन वह अलग-अलग व निजी स्तर पर या संस्था के स्तर पर किया जा रहा है। जिसका स्थानीय लोगों द्वारा कई बार विरोध भी किया जाता है। यदि नगर निगम एरिया वाइस पार्क या सामुदायिक भवन में से कोई भी सरकारी जगह जो आमजन के लिए उपयोगी नहीं हो उसे आवंटित कर दे तो डॉग लवर्स अपने स्तर पर उन स्थानों पर क्षेत्र के स्ट्रीट डॉग को रखकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी लेने को तैयार है। हमारी संस्था से करीब पांच हजार डॉग लवर्स जुड़े हुए हैं जो इस जिम्मेदारी को पूरे शहर में अलग-अलग जगह पर निभाने को तैयार हैं। सहयोग निगम को करना होगा। साथ ही उनका टीकाकरण व बधियाकरण निगम को करवाना होगा।<br /><strong>- सोनल गुप्ता, स्ट्रीट डॉग लवर्स</strong></p>
<p><strong>डॉग लवर्स स्ट्रीट डॉग की एरिया वाइज देखभाल की जिम्मेदारी निभाने को तैयार</strong><br />स्ट्रीट डॉग यदि लम्बे समय तक एक ही जगह पर रह जाता है तो वह दूसरी जगह पर बहुत मुश्किल से जा पाता है। नगर निगम द्वारा पकड़कर ले जाने के बाद भी वे वापस उसी जगह पर आ जाते हैं। डॉग लवर्स अपने स्तर पर डॉग को रोटी खिलाने से लेकर उनके बीमार व चोटिल होने पर उनके इलाज तक की व्यवस्था कर रहे हैं। लेकिन यह हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में यदि नगर निगम एरिया वाइस जगह उपलब्ध करवा दे और उनके घायल होने पर पशु चिकित्सालय भिजवाने व उपचार की व्यवस्था कर दे तो डॉग लवर्स स्ट्रीट डॉग की एरिया वाइज देखभाल की जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं। यह अच्छा प्रयास रहेगा।<br /><strong>- वैशाली, स्ट्रीट डॉग लवर्स</strong></p>
<p><strong>समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है</strong><br />स्ट्रीट डॉग द्वारा लोगों को काटने की समस्या से अधिक आदमी द्वारा आदमी को काटने व मारने के मामले अधिक हो रहे हैं। स्ट्रीट डॉग को खिलाने व देखभाल करने वाले कई लोग हैं जो अपने स्तर पर उनकी देखभाल कर रहे हैं। लेकिन यदि नगर निगम उनके लिए हर क्षेत्र में जगह उपलब्ध करवा दे तो इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। नगर निगम इतने बड़े स्तर पर एक जगह पर सभी डॉग को रखकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। निगम डॉग पर अभी जो खर्चा कर रहा है उससे कम खर्च में लोग अपने स्तर पर इनकी देखभाल की जिम्मेदार निभा सकते हैं। जिससे स्ट्रीट डॉग का विरोध भी नहीं होगा।<br /><strong>- राकेश वर्मा, स्ट्रीट डॉग लवर्स</strong></p>
<p><strong>स्ट्रीट डॉग को तो शहर व आबादी क्षेत्र से दूर ही रखा जाना चाहिए</strong><br />स्ट्रीट डॉग कोटा शहर ही नहीं पूरे देश की समस्या बनी हुई है। वल्लभ नगर क्षेत्र में ही कुछ लोग स्ट्रीट डॉग को रोटी खिलाकर पाल रहे हैं। जिससे वहां न्यूसेंस होता है। इसका कई बार विरोध किया गया तो मामला पुलिस तक भी पहुंच गया। स्ट्रीट डॉग को तो शहर व आबादी क्षेत्र से दूर ही रखा जाना चाहिए। ये अधिकतर बच्चों और महिलाओं को अपना शिकार बना रहे हैं। डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं।<br /><strong>- सुरेश गुप्ता,स्ट्रीट डॉग से परेशान</strong></p>
<p><strong>श्वानों की समस्या का इससे अच्छा इलाज नहीं</strong><br />यदि श्वानों को मौहल्लेवार शेल्टर में रखा जाए तो इससे अच्छा इलाज कोई हो नहीं सकता। इनके खाने पीने की व्यवस्था सोसाइटी के रहवासी कर सकते हैं। साथ ही श्वानों के काटने, हमला करने की घटनाएं भी रुक जाएंगी।<br /><strong>- भगवान सिंह हाड़ा. अध्यक्ष, आदर्श नगर विस्तार हाउसिंग सोसाइटी बोरखेड़ा,</strong></p>
<p><strong>वफादार जानवर आराम से रह सकेगा</strong><br />सोसाइटी में एक निश्चित स्थान पर स्वानों को रखने का सुझाव बहुत अच्छा है। इससे आए दिन काटने, वाहनों के पीछे दौड़ने जैसी घटनाओं से तो निजात मिलेगी ही, इन्हें सोसाइटी से ही पर्याप्त भोजन भी मिलने लगेगा जिससे यह वफादार जानवर आराम से रह सकेगा।<br /><strong>- शैलेन्द्र सुमन.कैशवपुरा प्रगतिशील सोसाइटी,सेक्टर सात</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में श्वानशाला में स्ट्रीट डॉग का बधियाकरण व टीकाकरण तो किया ही जा रहा है। वहीं श्वानशाला के पास ही डॉग शेल्टर हाउस भी बनाया है। नगर निगम के पास जो जगह उपलब्ध है उसी का उपयोग किया जा रहा है वह भी शहर व आबादी से दूर। एरिया वाइज निगम के स्तर पर जगह उपलब्ध करवा पाना संभव नहीं है। पहले तो इतनी जगह नहीं है। दूसरी तरफ आबादी क्षेत्र में डॉग लवर्स से अधिक इनका विरोध करने वाले अधिक है। एक जगह पर कई डॉग के रहने पर उनके द्वारा किए जाने वाले एक साथ शोर से लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ेगा। कोर्ट का आदेश स्ट्रीट डॉग को आबादी क्षेत्र से दूर ही रखने का है।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त, नगर निगम कोटा</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 13:10:04 +0530</pubDate>
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                <title>विद्याधर नगर और जयसिंहपुरा खोर में बुजुर्ग महिलाओं को निशाना बना कर लूट, CCTV में कैद हुई वारदातें</title>
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                        <![CDATA[ विद्याधर नगर थाना इलाके में शुक्रवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकली एक बुजुर्ग महिला को बाइक सवार बदमाशों ने निशाना बना लिया]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-vidyadhar-nagar-and-jaisinghpura-khor-the-incidents-captured-in/article-119627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(10).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विद्याधर नगर थाना इलाके में शुक्रवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकली एक बुजुर्ग महिला को बाइक सवार बदमाशों ने निशाना बना लिया। सेक्टर-7 निवासी अचला गुप्ता (70) के गले से चेन तोड़कर बदमाश फरार हो गए। झपटमारी के दौरान महिला सड़क पर गिर पड़ी, जिससे उनके हाथ में फ्रैक्चर और गले पर गंभीर चोट आई है। यह पूरी वारदात एक घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस लुटेरों की पहचान में जुटी है।</p>
<p>उधर, जयसिंहपुरा खोर में भी इसी तरह की वारदात सामने आई है। वहां बाइक सवार बदमाश पानी पीने के बहाने पहुंचे और 64 वर्षीय तीजा देवी के गले से सोने की जोलिया झपट कर फरार हो गए। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।</p>
<p>दोनों ही मामलों में बदमाशों का तरीका एक जैसा होने से पुलिस एक ही गैंग के होने की आशंका जता रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Jul 2025 15:56:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बैंक धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी, लेकिन रकम में तीन गुना बढ़ोतरी</title>
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                        <![CDATA[देश में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान बैंक धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/decrease-in-bank-fraud-incidents-but-three-times-the-amount/article-115808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान बैंक धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन इनकी रकम में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। अपराधियों ने बैंक धोखाधड़ी के जरिए 36,014 करोड़ रुपए का चूना लगाया है। भारतीय रिजर्व बैंक की गुरुवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है। इसमें कहा गया है कि मार्च 2025 में समाप्त इस वित्त वर्ष में बैंकों से जुड़ी धोखाधड़ी की 23,953 घटनाएं हुईं। यह वित्त वर्ष 2024 से 34 प्रतिशत कम है। हालांकि, धोखाधड़ी में शामिल राशि बढ़कर 36,014 करोड़ रुपए हो गई। ज्यादातर मामले डिजिटल भुगतान में हुए हैं। </p>
<p><strong>निजी में मामले अधिक और सरकारी बैंकों में राशि अधिक :</strong></p>
<p>केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट के अनुसार बीते वित्त वर्ष में निजी क्षेत्र के बैंकों ने धोखाधड़ी के ज्यादा मामले दर्ज किए गये लेकिन सरकारी बैंकों का धोखाधड़ी की राशि में अधिकतम योगदान रहा। इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में 2024-25 के दौरान रिपोर्ट की गई कुल धोखाधड़ी में शामिल राशि में वृद्धि हुई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण पिछले वित्त वर्षों के दौरान रिपोर्ट किए गए 18,674 करोड़ रुपए की राशि के 122 मामलों का फिर से धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकरण किया जाना है। यह कदम 27 मार्च, 2023 को आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया। इन मामलों की दोबारा जांच की गई और चालू वित्त वर्ष के दौरान इन्हें नए सिरे से रिपोर्ट किया गया।</p>
<p><strong>निजी क्षेत्रों में 14,233 मामले दर्ज : </strong>केन्द्रीय बैंक ने कहा कि रिपोर्ट किए गए डेटा एक लाख रुपए और उससे ज़्यादा की धोखाधड़ी के लिए हैं। इसके अलावा, एक साल में रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी रिपोर्टिंग के साल से कई साल पहले हुई हो सकती है। वित्त वर्ष 2025 में निजी क्षेत्रों के बैंकों ने धोखाधड़ी के सबसे ज़्यादा 14,233 मामले दर्ज किए।</p>
<p><strong>सरकारी बैंकों में 6,935 मामले दर्ज : </strong>यह बैंकिंग सेक्टर के सभी मामलों का 59.4 प्रतिशत है। सरकारी बैंकों ने 6,935 मामले (29 प्रतिशत) दर्ज किए, लेकिन इसमें शामिल राशि 25,667 करोड़ (कुल का 71.3 प्रतिशत) ज़्यादा थी जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों ने 10,088 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की रिपोर्ट की।   </p>
<p><strong>डिजिटल भुगतान में वृद्धि से बैंक नोटों के मूल्य और जीडीपी अनुपात में गिरावट जारी : रिपोर्ट</strong></p>
<p>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रचलन में बैंक नोटों के मूल्य और जीडीपी अनुपात में गिरावट जारी है, क्योंकि वित्त वर्ष 2025 में यह घटकर 11.11 प्रतिशत रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024 में यह 11.5 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार दो साल पहले वित्त वर्ष 2023 में प्रचलन में बैंक नोटों का मूल्य जीडीपी अनुपात में 12.5 प्रतिशत था, जो देश में डिजिटल भुगतान की सफलता को दर्शाता है। गुरुवार को जारी इस वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार प्रचलन में बैंक नोटों का मूल्य वित्त वर्ष 2025 में 6 प्रतिशत बढ़कर 36.88 लाख करोड़ हो गया, जबकि पहले यह 34.78 लाख करोड़ था।  रिपोर्ट के अनुसार प्रचलन में मुद्रा, जिसमें बैंक नोट, सिक्के और डिजिटल रुपया (ई-रुपया) शामिल हैं, का विस्तार जारी रहा, जो डिजिटल विकल्पों को अपनाने के साथ-साथ नकदी की मांग से प्रेरित था। 2024-25 के दौरान प्रचलन में बैंक नोटों के मूल्य और मात्रा में क्रमश: 6.0 प्रतिशत और 5.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 500 रुपए के नोट मुद्रा परिदृश्य पर हावी रहे, जो मात्रा के हिसाब से सभी नोटों का 40.9 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 86 प्रतिशत था, इसके बाद मात्रा के हिसाब से 10 रुपए के नोट थे। कैशलेस भुगतान में वृद्धि के बावजूद, 10, 20 और 50 रुपए जैसे कम मूल्य वाले नोट अभी भी मात्रा के हिसाब से सभी नोटों का लगभग एक तिहाई हिस्सा बनाते हैं। </p>
<p><strong>2000 के 98.2% नोट आए :</strong> रिपोर्ट के अनुसार 2000 रुपए के नोटों को वापस लेने की प्रक्रिया में और तेज़ी आई। 31 मार्च, 2025 तक मूल रूप से प्रचलन में मौजूद 3.56 लाख करोड़ रु. में से 98.2 प्रतिशत बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गए। आरबीआई ने 2, 5 और 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद कर दी है जो अधिक बार इस्तेमाल किए जाने वाले मूल्यवर्ग की ओर बदलाव का संकेत है।  </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 May 2025 10:53:44 +0530</pubDate>
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                <title>कचरा व सूखी घास लगा रही आग, समय पर नहीं हो रही घास व झाड़ियों की कटाई</title>
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                        <![CDATA[अप्रैल का महीना शुरु होने के साथ ही जिस तरह से गर्मी ने अपना कहर ढाना शुरु कर दिया है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/garbage-and-dry-grass-is-not-getting-fire-is-not/article-110424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।अप्रैल का महीना शुरु होने के साथ ही जिस तरह से गर्मी ने अपना कहर ढाना शुरु कर दिया है। उससे इंसान ही नहीं सभी प्रभावित हो रहे हैं। यहां तक कि तापमान अधिक होने से शहर में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ी है। वहीं आग लगने का सबसे अधिक कारण है खाली भूखंडों में लगा सूखे कचरे का अम्बार व सूखी घास व झाड़ियां। शहर में मुख्य मार्गों से लेकर हाइवे और कॉलोनियों में बड़ी संख्या में भूखंड खाली पड़े हुए हैं। उन भूखंडों में लोग कचरा डाल रहे है। समय पर वह कचरा नहीं उठने और लम्बे समय तक पड़ा रहने से गर्मी में धूप में तेजी के कारण वह सूखकर पापड़ बन रहा है। जिससे गर्मी में वह कचरा आग पकड़ रहा है। वहीं किसी के भी द्वारा कोई गलती हुई चीज डालने से कचरे में आग लग रही है। तापमान अधिक होने से साथ ही दिन के समय हवा भी तेज चल रही है। जिससे आग तेजी से और अधिक एरिया में जल्दी फेल रही है। यह आग उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए तो परेशानी का कारण बन ही रही है।  साथ ही इससे आस-पास के अन्य स्थानों व सामानों के भी जलने का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>यहां है बुरी हालत</strong><br />यह हालत किसी एक इलाके की नहीं है। वरन् पूरे शहर की है। तलवंडी, जवाहर नगर, दादाबाड़ी, बसंत विहार, महावीर नगर विस्तार योजना, गोपाल विहार, न्यू गोपाल विहार, बजरंग नगर, आकाशवाणी कॉलोनी,झालावाड़ रोड समेत कई जगह पर खाली भूखंडों में कचरे का अम्बार लगा हुआ है।  इधर इन भूखंडों में आग लगने की सूचना पर नगर निगम के फायर अनुभाग की दमकलों की भी भागदौड़ बढ़ रही है। रोजाना दिन में कई जगह पर आग लगने की घटनाएं हो रही है। </p>
<p><strong>बड़ी-बड़ी घास सूखी</strong><br />शहर में बहुत सारे इलाके ऐसे भी हैं जहां बरसात के समय में घास उग जाती है और वह बड़ी-बड़ी हो रही है। लेकिन उसकी समय पर कटाई नहीं होने से वह 8 से 10 फीट तक ऊंची हो गई है। वहीं गर्मी के मौसम में यह घास सूख कर झाड़िंयां बन गई है। जिससे गर्मी में इनमें आग लगने की घटनाएं हो रही है। गर्मी के अलावा  जलती हुई बीड़ी सिगरेट या माचिक की तीली डालने से भी सूखी घास व झाड़ियों में आग तेजी से फेल रही है। </p>
<p><strong>यहां है ऐसी स्थिति</strong><br />झालावाड़ रोड पर अनंतपुरा पेट्रोल पम्प के पास खाली भूखंड पर बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है। जिसमें गत दिनों भीषण आग लग चुकी है।  उस आग से उसके आस-पास पेट्रोल पम्प को भी खतरा हो गया था। जिसे बुझाने के लिए नगर निगम के फायर अनुभाग के अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसी तरह से वर्तमान हवाई अड्डा परिसर में चार दीवारी के सहारे चारों तरफ भी बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है। यह गर्मी में सूखने से आग लगने का कारण बन रही है। दो साल पहले एयरपोर्ट परिसर की सूखी घास में भीषण आग लग गई थी। जिसे काबू पाने के लिए निगम की कई दमकलों को मशक्कत करनी पड़ी थी।  इसी तरह से स्टेडियम परिसर समेत कई जगह पर सूखी घास उगी हुई है। </p>
<p><strong>विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी</strong><br />शहर में खाली भूखंडों में कचरा साफ करने की नगर निगम और सूखी घास व झाड़ियों को कटवाने की संबंधित विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी है।  बजरंग नगर निवासी संजय साहू का कहना है कि जब हर साल गर्मी के सीजन में कचरे में व सूखी घास में आग लगती है तो गर्मी से पहले कचरा साफ करना और घास की कटाई करवानी चाहिए। जिससे इस तरह से समस्या ही नहीं हो। जिससे इनमें आग लगने पर लोगों को और फायर अनुभाग को समस्या का सामना भी नहीं करना पड़े।  नयापुरा निवासी लालचंद टांक का कहना है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर रहे है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। साथ ही आग फेलने पर उससे नुकसान भी होता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गर्मी के सीजन में ग्रामीण क्षेत्रों में तो खेत, नौलाई और भूसे में आग लगने की अधिक घटनाएं होती है। जबकि शहरी क्षेत्र में खाली भूखंडों में लगे कचरे के अम्बार व सूखी घास व झाड़ियों में अधिक आग लग रही है। हवा चलने से आग तेजी से फेलती है। जिसे काबू पाने के लिए दमकलों की भागदौड़ लगी रहती है। कचरा एकत्र न हो और घास की समय पर कटाई हो यह समय पर हो तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। <br /><strong>- राकेश व्यास, सीएफओ, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>एयरपोर्ट परिसर में सूखी घास को कटवाने का पूर्व में टेंडर किया गया था। लेकिन वित्त विभाग की आपत्ती के चलते उसे निरस्त करना पड़ा था। जिसकी दोबारा से प्रक्रिया की जा रही है। शीघ्र ही प्रक्रिया पूरी होने पर घास को कटवा दिया जाएगा। लेकिन उससे पहले जहां गर्मी में आग लगने की अधिक संभावना है वहां जेसीबी की सहायता से घास को कटवा दिया जाएगा। <br /><strong>- तुलसीराम मीणा, निदेशक कोटा हवाई अड्डा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 15:48:55 +0530</pubDate>
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                <title>गर्मी शुरु होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में फिर लगेगी आग : दमकलों की बढ़ जाती है भागदौड़, अधिकतर खेतों में नौलाई में लगती है आग</title>
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                        <![CDATA[गर्मी अधिक होने पर शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है। ग्रामीण  में आग अधिकतर खेतों  में नौलाई में लगती है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fires-will-occur-again-as-soon-as-summer-starts--red-army-is-ready/article-105493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(1)73.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । गर्मी का सीजन शुरु होने पर जिस तरह से जलदाय विभाग का काम बढ़ जाता है। उसी तरह से फायर अनुभाग का काम भी अन्य दिनों से अधिक हो जाता है। गर्मी में आग लगने की घटनाएं अधिक होने से दमकलों की भागदौड़ बढ़ जाती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नौलाई में आग की घटनाएं अधिक होती है। सामान्य तौर पर गर्मी का सीजन अप्रैल से माना जाता है। लेकिन इस बार अभी से ही जिस तरह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। उससे स्पष्ट है कि इस बार मार्च से ही गर्मी का सीजन शुरु हो जाएगा। गर्मी अधिक होने पर शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है। ग्रामीण  में आग अधिकतर खेतों  में नौलाई में लगती है। </p>
<p><strong>हर साल एक हजार से अधिक घटनाएं</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में हर साल गर्मी के सीजन में आग लगने की करीब एक हजार से अधिक घटनाएं होती है।  जिनमें शहर व ग्रामीण क्षेत्रों  में आग की घटनाएं शामिल है। शहर में जहां 15 अप्रैल के बाद तापमान में बढ़ोतरी अधिक होने पर आग लगती है। ये आग अधिकतर एसी में शॉर्ट सर्किट से लगती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मार्च में फसल कटाई के बाद खेतों में नौलाई को रखा जाता है। जिनमें भी कई बार गर्मी से तो कई बार किसानों द्वारा जानबूझकर उनमें आग लगाई जाती है। लेकिन हवा से यह आग अधिक फेल जाती है। उसके बाद सूचना मिलते ही दमकलें आग बुझाने के लिए दौड़ती रहती है। </p>
<p><strong>लगातार बढ़ रही घटनाएं</strong><br />शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं हर साल बढ़ रही है। नगर निगम कोटा उत्तर के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में जहां आग लगने की 278 घटनाएं हुई। इनमें से शहर में 258 व ग्रामीण में 20 घटनाएं थी। इनमें सबसे अधिक अप्रैल से जून के बीच रही। अप्रैल में 54, मई में 72 और जून में 23 घटनाएं हुई।  इसी तरह से वर्ष 2021-22 में 375 घटनाएं हुई। जिनमें से 346 शहरी क्षेत्र में व 29 ग्रामीण क्षेत्र की है। इस साल अप्रैल में 115, मई में 46 व जून में 37 घटनाएं हुई थी। वहीं वर्ष 2022-23 में 612 घटनाएं हुई। जिनमें से शहरी क्षेत्र में 593 व ग्रामीण में 19 घटनाएं हुई। इस साल अप्रैल में 171, मई में 182 व जून में 71 घटनाएं हुई। जबकि वर्ष 2023-24 में कुल564 घटनाएं हुई है। इसी तरह से कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में भी हर साल 500 से अधिक घटनाएं हो रही है। </p>
<p><strong>24 घंटे कंट्रोल रूम तैयार</strong><br />सीएफओ व्यास ने बताया कि निगम के लायर अनुभाग का कंट्रोल रूम 24 घंटे तैयार रहता है। सूचना मिलते ही कम से कम समय में दमकलों को मौके पर पहुंचाना प्राथमिकता रहती है। 15 मार्च के बाद कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया जाता है।  </p>
<p><strong>नौलाई में आग लगाना अवैध, फिर भी जला रहे</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि मार्च में फसल कटाने  के बाद से ही खेतों में नौलाई में आग की घटनाएं होने लगती है। गर्मी के कारण तो आग कम लगती है। लेकिन अधिकतर किसान खुद ही नौलाई में आग लगा देते है। व्यास ने बताया कि नौलाई में आग लगाना अवैध घोषित किया हुआ है।  संबंधित थाने की पुलिस ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। लेकिन उसके बाद भी हर साल नौलाई में आग की घटनाएं बढ़ रही है। व्यास ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही नगर निगम के फायर स्टेशनों से तुरंत दमकलों को रवाना किया जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र व खेत अधिक दूरी पर होने से दमकलों को पहुंचने में समय लगता है। कई बार खेत या रास्ता कच्चा होने से दमकलें बीच रास्ते में ही फंस जाती है। लेकिन फायर अनुभाग की प्राथमिकता आग को काबू करना रहता है।</p>
<p><strong>संसाधन व फायरमैन पर्याप्त</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि आग लगने की घटनाएं होने पर उन्हें तुरंत काबू करने के लिए नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण मिलकर काम करता है। निगम के फायर अनुभाग में छोटी-बड़ी विभिन्न क्षमताओं की 32 दमकलें व 2 हाइड्रोलिक लेडर दमकलें हैं। चार फायर स्टेशन हैं जिनमें से एक उत्तर में सब्जीमंडी का और तीन दक्षिण में श्रीनाथपुरम्,   भामाशाह मंडी व रानपुर का। यहां दोनों जगह पर 45-45 फायरमैन व 25-25 ड्राइवर है। साथ ही कोटा दक्षिण में  सिविल डिफेंस के 20 स्वयंसेवक अधिक है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी के अलावा दो अग् िनशमन अधिकारी व एक सहायक अग्निशमन अधिकारी भी है। वैसे कोटा उत्तर में देवेन्द्र मीणा को  मुख्य अग् िनशमन अधिकारी के पद पर लगाया गया है लेकिन उन्होंने अभी तक ज्वाइन नहीं किया है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 16:32:07 +0530</pubDate>
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                <title>चेन स्नेचिंग का पदार्फाश, मुख्य सरगना गिरफ्तार </title>
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                        <![CDATA[आरोपी अपनी  पहचान छुपाकर मनोहरथाना में रह रहा था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/chain-snatching-case-exposed--main-kingpin-arrested/article-95975"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/chain-sneching.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। विज्ञान नगर पुलिस ने कोटा शहर में लगातार हो रही चेन स्नेचिंग की घटनाओं का  पदार्फाश करते हुए मुख्य सरगना को बापर्दा गिरफ्तार किया है। आरोपी आशीष गुप्ता पुत्र लालू अपनी पहचान छुपाकर झालावाड़ जिले के मनोहर थाना में रह रहा था। वह मनोहर थाना से बाइक पर अपने साथी कैलाश के साथ  ग्रामीण रास्तों से होकर कोटा पहुंचता और  चेन स्नेचिंग की वारदात को अंजाम देकर वापस मनोहर थाना पहुंच कर गायब हो जाता था। आरोपी द्वारा कोटा शहर में कई चेन स्नेचिंग  की वारदातो को अंजाम दिया गया ।</p>
<p>एसपी कोटा सिटी ने बताया कि आरोपी से कोटा शहर के अलावा अन्य जिलों में की गई वारदातों व अन्य आरोपियों के बारे में पूछताछ की जा रही है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2024 17:26:18 +0530</pubDate>
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                <title>गाड़ियों में लग रही आग, अरमान हो रहे खाक</title>
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                        <![CDATA[छोटी-छोटी गलतियों की अनदेखी से हुआ बड़ा नुकसान। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vehicles-catch-fire--dreams-are-being-shattered/article-93363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/27rtrer-(4).png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> हाल ही में हुई प्रमुख घटनाएं - केस 1 - पार्किंग में खड़ी कार में लगी आग</strong><br />सब्जीमंडी क्षेत्र में बुधवार को सड़क पर खड़ी कार में अचानक आग लग गई। व्यस्तम मार्ग होने से लोगों में हड़कम्प मच गया। सब्जीमंडी फायर स्टेशन से मौके पर पहुंची दमकल की मदद से आग पर काबू पाया जा सका। कार मालिक परिवार के साथ इंद्रा मार्केट में खरीदारी करने गए थे, आकर देखा तो कार का अगला हिस्सा चल चुका था।</p>
<p><strong>केस 2 - कार आॅटो लॉक, कांच तोड़कर निकाला</strong><br />मंडाना टोल प्लाजा के पास नेशनल हाईवे-52 पर 7 अप्रेल 2024 को चलती कार में आग लग गई। बोनट से उठे धुआं देख चालक ने कार रोक बाहर निकलने का प्रयास किया लेकिन कार आॅटोलॉक हो गई। ऐसे में राहगीरों की मदद से कार में सवार लोगों ने साइड विंडो के कांच तोड़ बाहर निकले। थोड़ी ही देर में कार आग के गोले में तब्दील हो गई।  </p>
<p><strong>बाइक-कार से लेकर ट्रोले तक बने आग के गोले</strong><br />सड़कों पर दौड़ते वाहन अचानक आग के गोले में तब्दील हो रहे हैं। शहर में आए दिन चलती कारों में आग लगने की घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं। इससे न केवल कार चालक बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों व राहगीरों की भी जान संकट में पड़ जाती है। बीते कुछ दिनों में ही चार से पांच घटनाएं घटित हो चुकी हैं। जबकि, 1 जनवरी 2024 से 17 अक्टूबर तक करीब 25 से 30 कारों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। नवज्योति ने घटनाओं के कारणों की पड़ताल की तो सामने आया कि छोटी-छोटी गलतियों को नजर अंदाज करना ही कार में आग लगने का बड़ा कारण बनी। आइए, एक्सपर्ट से जानते हैं आग लगने के प्रमुख कारण।</p>
<p><strong>गाड़ी की मूल वायरिंग से छेड़छाड़ जानलेवा</strong><br />हर कम्पनी की गाड़ियों की डिजाइन अलग-अलग होती है, जिनमें वायरिंग उसी मापदंड के अनुरूप की जाती है। जब वायरिंग से छेड़छाड़ होती है, तो कार में आग की संभावनाएं प्रबल हो जाती है। क्योंकि, एडिशनल एसेसरीज लगाने के लिए बिछाई वायरिंग से लोड बढ़ता है, जिससे तार गर्म होकर आपस में चिपकने लगते हैं, जो स्पार्किंग के लिए जिम्मेदार होता है। वहीं, कंपनी तय मानकों के अनुसार कार में लाइट, साउंड फिटिंग, एसी, ब्लोअर, सीएनजी किट सहित अन्य एसेसीरीज लगा कर देती है। जब हम बाहर से उसमें अधिक एसेसीरीज जैसे  हैड लाइट, हूटर और हार्न लगवाते हैं तो वायरिंग पर ज्यादा जोर पड़ता है, जो शार्ट सर्किट का कारण बनता है।  </p>
<p><strong>बाल-बाल बची जान</strong><br />आरकेपुरम क्षेत्र में 27 मई को घटोत्कच सर्किल पर कार में आग लग गई। इंजन से उठे धुआ देख कार सवार तुरंत बाहर निकल दूर जाकर खड़े हो गए। चंद मिनटों में ही कार आग की लपटों से घिर गई। बाद में श्रीनाथपुरम फायर स्टेशन से दमकल मौके पर पहुंची लेकिन तब तक कार खाक हो चुकी थी।</p>
<p><strong>यह हैं सुझाव</strong><br />- कार में सफर करने से पहले गाड़ी का जनरल चेकअप जरूर करें। <br />- आगजनी की घटनाएं गर्मियों में अधिक होती है इसलिए 45 से 50 डिग्री तापमान में वाहन में सफर नहीं करें। <br />- फयूल लाइन के ज्वाइंट के आसपास रबरशील होती, जो कटी-फटी होने से लीकेज की संभावना रहती है। इसका ध्यान रखें।<br />- कार निमार्ता कम्पनियों को घरों में लगे एमसीबी बोर्ड की तरह कार में भी ऐसी डिवाइस लगाना चाहिए, ताकि शोर्ट सर्किट होेने पर एमसीबी ट्रिप होने से फयूल व गैस की सप्लाई बंद हो जाए। </p>
<p><strong>इन गलतियों को न करें नजर अंदाज - चलती कार में आग लगने के 5 मुख्य कारण हैं</strong><br />- पेट्रोल, डीजल व गैस लीकेज होना। <br />- वायरिंग में स्पार्किंग से शॉर्ट सर्किट का खतरा।<br />- वाहन में बैठकर धूम्रपान करना। <br />- गाड़ी में ज्वलनशील पदार्थ रखना, जैसे परफ्यूम सैनेटाइजर सहित अन्य तरह के स्प्रे रखना काफी खतरनाक है।<br />- वाहन को लग्जरी बनाने की होड़ में क्षमता से अधिक एसेसरीज लगवाना आग लगने का सबसे बड़ा कारण है। </p>
<p><strong>चलती कार में आग लगने के प्रमुख कारण</strong><br />- पेट्रोल पाइप लाइन की रबरशीट कट जाने से आगजनी की घटना हो सकती है। <br />- कार लगातार 100 किमी से अधिक चलाने से इंजन गर्म अधिक गर्म होता है, जिससे वजह से वायरिंग के उपर लगी प्लास्टिक कवर पिघलना लगता है, जो शोर्ट सर्किट की वजह बनता है।  <br />- गाड़ी में लगे सीएनजी किट के सिलिंडर की निर्धारित समय तीन साल में हाइड्रो टेस्टिंग नहीं करना। यह टेस्टिंग सिलिंडर की क्षमता का पता लगाने के लिए की जाती है, जो आरटीओ द्वारा तय एजेंसी करती है। <br />- वाहन में धूम्रपान आग लगने का सबसे प्रमुख कारण है। इंजन के साथ लगने वाले वायरिंग का कवर का फायर प्रूफ न होना। <br />- ओवर हीटिंग, फ्यूल लीकेज व वायरिंग में शार्ट सर्किट प्रमुख कारण है। <br />- सर्दियों में अधिकतम आधे घंटे से अधिक समय तक ब्लोअर यानी हीटर चलाने से ओवरहीट होती है। जिससे आग लग सकती है।  <br />- टायर व्हील जाम होेने से टायर पर दबाव पड़ता है और घर्षण से टायर में आग लग सकती है।  <br />- बाहर से गैस किट लगवाना भी आगजनी का प्रमुख कारण है। <br />- कार में खाद्यय पदार्थ का इस्तेमाल से चूहों की दस्तक बढ़ती है और वह वायरिंग को कुतर देते हैं।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जनवरी से अब तक करीब 45 से 50 वाहनों में आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें कारों के 25 से 30 मामले शामिल हैं। चलते वाहनों में आग लगने के मुख्य कारण शोर्ट सर्किट, अनावश्यक एसेसरीज लगवाना, कम्पनी निर्धारित वायरिंग से छेड़छाड़, धूम्रपान, ज्वलनशील पदार्थ जैसे परफ्यूम, सेनेटाइजर, एयर फ्रेशनर स्प्रे आदि मुख्य कारण है। सतर्कता व जागरूकता से ही हादसों से बचा जा सकता है। <br /><strong>- राकेश व्यास, मुख्य अग्निशमन अधिकारी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 14:57:09 +0530</pubDate>
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                <title> चोरी की 10 मोटरसाइकिल सहित दो गिरफ्तार, एक नाबालिक निरुद्ध</title>
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                        <![CDATA[आरोपी महंगे शौक पूरा करने के लिए शहर में भीड़भाड़ वाले स्थानों से वाहन चोरी  करते थे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/two-arrested-along-with-10-stolen-motorcycles--one-minor-detained/article-71643"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(11)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  शहर की  किशोरपुरा थाना पुलिस  ने शहर में दुपहिया वाहन चोरी की घटनाओं का खुलासा कर दो शातिर दुपहिया वाहन चोरों को गिरफ्तार कर एक बाल अपचारी को निरुद्ध किया है। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने चोरी की 10 मोटर साइकिल बरामद की। एसपी डॉ अमृता दुहन ने बताया कि पिछले साल 18 अक्टूबर को दशहरा मेला देखने गये फरियादी शम्भू दयाल की बाइक दशहरा मैदान के पास से कोई अज्ञात व्यक्ति चुरा ले गया था। मुखबिर एवं तकनीकी सूचना के आधार पर सन्दिग्ध मुलजिम की पहचान कर झालावाड़ जिले  के खानपुर थाना निवासी  महेंद्र कुमार मेघवाल पुत्र रामदयाल (26) एवं विकास मेघवाल पुत्र भीमराज (22)  को गिरफ्तार किया  ये दोनों आरोपी वर्तमान में कोटा के उद्योग नगर थाना इलाके के प्रेम नगर में रह रहे थे व एक नाबालिक को निरुद्ध किया गया। पूछताछ में इनसे दशहरा मैदान के बाहर से चुराई बाइक सहित 10 चोरी की बाइक जप्त की गई।शहर में हो रही वाहन चोरियों की घटनाओं पर अंकुश लगाने व वाहन चोरों की धर पकड़ के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय गुप्ता व सीओ भवानी सिंह के सुपरविजन एवं एसएचओ रामस्वरूप मीणा के नेतृत्व में टीम गठित की गई। गठित टीम द्वारा पुराने संपत्ति संबंधित चालान शुदा अपराधियों से पूछताछ की।  आरोपी अपने महंगे शौक पूरा करने एवं अमीर व्यक्ति जैसा लगने का दिखावा करने के लिये शहर में भीड़भाड़ वाले स्थानों से वाहन चोरी की घटना करते थे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Mar 2024 19:51:13 +0530</pubDate>
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                <title>नवीन और सुपर स्पेशलिटी में बढ़ रही चोरियां</title>
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                        <![CDATA[अस्पताल में गत दिनों में ही पार्किंग से एक संविदा कर्मचारी के वाहन चोरी होने की घटना सामने आई थी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thefts-are-increasing-in-new-and-super-specialties/article-68614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo-(2)5.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रंगबाड़ी स्थित मेडिकल कॉलेज नवीन चिकित्सालय के सुपर स्पेशलिस्ट ब्लॉक में पिछले कुछ दिनों में चोरी की वारदातें बढ़ने लगी हैं। चिकित्सालय परिसर में आए दिन किसी ना किसी जगह पर चोरी हो रही है। अस्पताल में दिखाने आने वाले तीमारदारों से लेकर स्टॉफ तक चिकित्सालय में कोई वर्ग ऐसा नहीं बचा जिसकी वस्तुएं चोरी ना हुई हो। चिकित्सालय के वार्डों में तीमारदारों के मोबाइल पर्स से लेकर पार्किंग में खड़ी गाड़ियां तक की चोरियां बढ़ती जा रही हैं। अस्पताल में गत दिनों में ही पार्किंग से एक संविदा कर्मचारी के वाहन चोरी होने की घटना सामने आई थी। इसके अलावा बीते 3 महीनों में ही अस्पताल से 3 वाहन और कई पर्स मोबाइल की वारदातें सामने आ चुकी हैं।</p>
<p><strong>बीते 3 महीने में 3 वाहन चोरी</strong><br />चिकित्सालय में स्टॉफ पार्किंग से 3 महीने में ही 3 वाहनों के चोरी होने की घटना सामने आ चुकी हैं। सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल की पार्किंग से 15 दिन के अंतराल में वाहन चोरी हो रहे हैं। नवीन चिकित्सालय में कार्यरत सुनील गुर्जर ने बताया कि उनका वाहन पिछले महीने की 18 तारीख को सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटलसे दोपहर में चोरी हो गया। लेकिन हॉस्पिटल की पार्किंग में सीसीटीवी कैमरा ना होने से चोरों का पता नहीं लग पाया उन्होंने इसकी रिपोर्ट महावीर थाने में भी दर्ज करवाई। एक दूसरे मामले में भी नवीन चिकित्सालय में कार्यरत मुकेश सैनी का वाहन भी 11 जनवरी को सुपर स्पेशलिस्ट ब्लॉक से चोरी हो गया था। इसकी भी रिर्पोट की गई लेकिन सीसीटीवी फुटेज नहीं होने के चलते अभी तक चोरों का पता नहीं चल सका। वहीं इससे पहले दिसम्बर माह में नवीन चिकित्सालय में दिखाने आए एक शख्स की बाइक चोरी हो चुकी है जिसका भी अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। गौरतलब है कि अस्पताल से हर महीने वाहन चोरी होने के घटनाक्रम सामने आते हैं।</p>
<p><strong>पर्ची काउंटर, लैब व कमरा संख्या 17 से सबसे ज्यादा चोरियां</strong><br />नवीन अस्पताल के दोनों पर्ची काउंटर, लैब और कमरा नं 17 से रोज चोरी की वारदात सामने आती है। इन स्थानों पर दिन भर भीड़ रहने के चलते चोरों का काम आसान हो जाता है। गेट नं 2 पर मौजूद ओपीडी पर्ची काउंटर पर पूरे दिन मरीजों व तीमारदारों का आना जाना रहता है जहां चोर लाइनों में लगकर बड़ी सफाई से अपने हाथ साफ कर देते हैं। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि अस्पताल में चोरी की सबसे ज्यादा वारदातें कमरा नं 17 के बाहर होती है क्योंकि वहां पूरे दिन भीड़ रहती है कमरे की सुरक्षा के लिए भी एक ही गार्ड तैनात रहता है। वहीं लैब के बाहर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं होने की वजह से भी चोरों को आसानी रहती है। </p>
<p><strong>वार्डों से भी होती हैं चोरियां</strong><br />अस्पताल के बाहरी क्षेत्रों को छोड़ दें तो अस्पताल के अंदर भी चोरी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। नाम ना छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि अस्पताल में चोरी होना आम बात हो चुकी है जहां रोज कहीं ना कहीं से चोरी की वारदात सामने आ रही है। कुछ दिन पहले ही आॅर्थोपेडिक वार्ड से एक तीमारदार का मोबाइल चोरी हुआ था जिसका भी सीसीटीवी फुटेज नहीं मिला। वहीं अगर किसी का कोई सामान चोरी भी हो जाए तो उसे सीसीटीवी फुटेज देखने के लिए एप्लीकेशन लिखना पड़ता है। </p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />अस्पताल में चोरी होना आम बात हो चुकी है आए दिन कहीं ना कहीं से चोरी की घटना सामने आती है। अस्पताल प्रशासन भी इन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। कई संवेदनशील जगहों पर तो सीसीटीवी कैमरा तक नहीं है। <br /><strong>- संदीप गुर्जर, नयागांव</strong></p>
<p>वार्ड में रात में रहते समय जागकर निकालनी पड़ती है क्योंकि यहां कब क्या चोरी हो जाए कोई भरोसा नहीं है अस्पताल प्रशासन से शिकायत करें भी तो वे पुलिस में मामला दर्ज कराने को कहते हैं ऐसे में पीड़ित के पास कोई चारा नहीं होता।<br /><strong>- अजय मेघवाल, अनंतपुरा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />एसएस हॉस्पिटल में आचार संहिता के चलते निविदा नहीं हो पाई है इस कारण पार्किंग का ठेका नहीं है जिससे कोई भी व्यक्ति अपना वाहन खड़ा कर सकता है। इसी वजह से वाहन चोरी होते हैं। वहीं पार्किंग में सीसीटीवी कैमरा लगवाने के लिए पत्र लिखा हुआ है बजट आंवटित होते ही लगा दिए जाएंगे। <br /><strong>- डॉ. निलेश जैन, अधीक्षक, सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल</strong></p>
<p>चोरियां रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और कहीं पर भी चोरी होने पर तुरंत उसकी जांच शुरू कर देते हैं। इन संवेदनशील स्थानों पर चोरों से सावधान रहने के बोर्ड भी चस्पा किए हुए हैं। जिन जगहों पर सीसीटीवी कैमरा नहीं है या चालू नहीं है उनके लिए पत्र लिखा हुआ है। चोरी होने पर पीड़ित को सीसीटीवी की फुटेज उपलब्ध करा दी जाती है। <br /><strong>- डॉ आरपी मीणा, अधीक्षक, नवीन चिकित्सालय</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jan 2024 16:32:32 +0530</pubDate>
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                <title>सड़कों पर दौड़ रहे ईवी स्कूटर बन रहे आग का गोला </title>
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                        <![CDATA[जानकारी के अनुसार, शहर के विभिन्न इलाकों में ईवी वाहनों में आगजनी की आधा दर्जन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ev-scooters-running-on-the-roads-are-becoming-a-ball-of-fire/article-64459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/ev-fire.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस 1 -</strong> 16 दिसम्बर 2023 : विज्ञान नगर थाना क्षेत्र में कॉमर्स कॉलेज चौराहे पर चलती इलेक्ट्रिक स्कूटी में आग लग गई। धुआं देखकर चालक प्रमोद ने सड़क किनारे स्कूटी खड़ी कर बैट्री दुकान पर जाकर कर्मचारी को लेकर आए तब तक मात्र 10 मिनट में स्कूटी  जलकर खाक हो चुकी थी। सूचना पर श्रीनाथपुरम की दमकल ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। </p>
<p><strong>केस 2 -</strong> 18 सितम्बर 2022: किशोरपुरा थाना क्षेत्र में एक दुकान के बाहर खड़े इलेक्ट्रिक स्कूटर में अचानक धुंआ निकलने लगा और देखते ही देखते आग भभक गई। पीछे का पूरा हिस्सा जलकर खाक हो गया। प्रत्यक्षदर्शी किशन भाटिया ने बताया कि वाहन चालक प्रिंस दुकान पर आया और स्कूटर खड़ा कर चला गया। थोड़ी ही देर में आग भभक गई और स्कूटर जलकर खाक हो गया। </p>
<p><strong>केस 3 - </strong>24 मार्च : 2022 : भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र में चलते इलेक्ट्रिक स्कूटर में धुआं निकलने लगा। इस पर वाहन चालक ने तुरंत सड़क किनारे खड़ा कर दूर हट गया। थोड़ी ही देर में वाहन आग की चपेट में आने से खाक हो गया। घटना के बाद इलाके में हड़कम्प मच गया। लोगों का कहना था कि बैट्रीपैक में शोर्ट सर्किट होने से आग लगी। </p>
<p>शहर में तेजी से दौड़ रहे इलेक्ट्रिक वाहन अब लोगों के लिए मुसीबत बनने लगे हैं। पिछले कुछ महिनों में हुई आगजनी की घटनाओं से लोग ईवी के प्रति आशंकित होने लगे हैं। डीजल-पेट्रोल वाहनोें के बाद अब इलेक्ट्रिक वाहनों में भी आगजनी के मामले सामने आने से सेफ्टी फीचर पर सवालिया निशान खड़े हो गए। घटनाओं से वाहन चालकों के साथ राहगीरों की भी जान खतरे में पड़ गई है। हालांकि, सबसे ज्यादा मामले ईवी दुपहिया वाहनों के आ रहे हैं। इसके बावजूद वाहन कम्पनियां न आग लगने के कारणों को तलाश रही और न ही तकनीकी खामियों को दुरुस्त कर रही। </p>
<p><strong>शहर में हो चुकी आधा दर्जन से ज्यादा घटनाएं</strong><br />जानकारी के अनुसार, शहर के विभिन्न इलाकों में ईवी वाहनों में आगजनी की आधा दर्जन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। ताजा मामला शनिवार को विज्ञान नगर इलाके में चलती स्कूटी में आग लग गई। समय रहते आग पर काबू पाए जाने से बड़ा हादसा टल गया। विशेषज्ञों का कहना है, ई-स्कूटरों में लिथियम-आॅयन बैटरियों का इस्तेमाल होता है, जो अन्य बैटरियों की तुलना में ज्यादा ताकतवर व हल्की मानी जाती हैं। हालांकि, इन बैटरियों से आग लगने का खतरा अधिक रहता है, जैसा कि ई-स्कूटरों में हाल के दिनों में नजर आया है। </p>
<p><strong>आग लगने के कारण </strong><br />- इलेक्ट्रिक वाहन में आग लगने के संभावित कारणों में बैटरी व इसकी सेल की गुणवत्ता काफी हद तक जिम्मेदार है। <br />- बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) का सही से काम न करना या खराब होना बड़ा कारण हो सकता है।<br />- बैट्री चार्ज करने के दौरान वाहन से बैट्री निकालना और वापस फिट करने के पैटर्न संबंधी कमियों से आग लगना संभव है।  <br />- ईवी को चार्ज करने के दौरान वायर में कट शॉर्ट सर्किट की वजह बन सकता है।<br />- चार्जर में ओवर कट आता है, जिसके खराब होने के बाद भी चार्जिंग करना। ओवर चार्जिंग होने से बैट्री फूल जाती है, जो हादसे का कारण बनती है। <br />- इन वाहनों में हैवी लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है, जिसके क्षतिग्रस्त होने या अन्य कमी की वजह से भी आग लगने का खतरा रहता है। <br />- ईवी का मैन्यूफेक्चरिंग डिफेक्ट भी आग लगने के लिए जिम्मेदार है।<br />- लगातार वाहन चलाना, बीच में रेस्ट न देने से ओवर हीटिंग होती है, जो हादसे का कारण बनती है। </p>
<p><strong>सावधानियां </strong><br />ईवी स्कूटर कम्पनी के सेल्स मैनेजर शैलेंद्र ने बताया कि कुछ बातों का ख्याल रखकर कंज्यूमर्स काफी हद तक आग लगने जैसे खतरे टाल सकते हैं। <br />- इलेक्ट्रिक व्हीकल को केवल कम्पनी द्वारा दिए गए रेकमेंड चार्जर से चार्ज करें।  <br />- इलेक्ट्रिक व्हीकल बहुत देर तक धूप में पार्क न करें।<br />- इलेक्ट्रिक व्हीकल की ओवर चार्जिंग से बचें।<br />- नमी व पानी, चार्जर और बैटरी दोनों के लिए खतरनाक है, इसलिए ईवी वाहन को इससे बचाएं।<br />- ईवी को कहीं से चलाकर आने के तुरंत बाद इसकी बैटरी को चार्ज न करें। <br />- लंबी दूरी पर लगातार वाहन चलाने के दौरान बीच-बीच में रेस्ट दें। <br />- वाहन चलाने से पहले वायरिंग जरूर देंखे, अक्सर चूहे वायरिंग काट देते हैं, जो शोर्ट सर्किट का बड़ा कारण है।</p>
<p>ईवी वाहनों में आगजनी की घटनाएं लगातार सामने आ रहीं हैं। सूचना मिलते ही दमकल मौके पर भेज देते हैं। पिछले कुछ महीनों में आधा दर्जन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। संभवत: आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट व बैट्री में तकनीकी खामियां हो सकती हैं। वास्तविक कारणों का पता तो जांच होने पर ही लग सकता है। <br /><strong>- राकेश व्यास, मुख्य अग्निशमन अधिकारी </strong></p>
<p>ईवी वाहनों में आग लगने के कारणों की जांच कम्पनी व डीलर के स्तर पर की जा सकती है, इसमें हमारा कोई रोल नहीं होता। रही बात रजिस्ट्रेशन की तो रजिस्ट्रेशन डीलर्स के द्वारा किया जाता है। जब कोई कस्टमर किसी को वाहन बेचता है तो सैकंड पार्टी रजिस्ट्रेशन हमारे यहां से होता है। <br /><strong>- प्रमोद लोधा, जिला परिवहन अधिकारी कोटा</strong></p>
<p><strong>5 साल में 4 हजार से अधिक ईवी  बिके</strong><br />परिवहन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 से 5 अप्रेल 2023 तक शहर में कुल 4 हजार 164 वाहन ही बिक पाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दुपहिया वाहनों की हैं। जिसमें 3 हजार 530 स्कूटर, 281 ई-रिक्शा आॅटो, 251 ई-कार्ड यानी छोटे थ्री-व्हीलर व 40 गुडस यानी लोडिंग वाहन ही रजिस्टर हुए हैं। वहीं, कारों की संख्या सबसे कम हैं। हालांकि, लोडिंग वाहनों से अधिक है।</p>
<p>ईवी वाहनों में आगजनी के कई कारण हो सकते हैं। देखने में आ रहा है, 2018 से 2020 तक के पुराने वाहनों में इस तरह के मामले आ रहे हैं। क्योंकि, उस समय सरकार की कोई गाइड लाइन नहीं थी। कम्पनियां बाहर से बैट्री इम्पोट करती थी। उनमें कुछ खामियां होने से हादसे की संभावना हो सकती है। वास्तविक कारणों का पता केस टू केस रिसर्च होने पर लग सकता है। वर्तमान में सरकार की सख्त गाइड लाइन है। नई गाड़ियों की बैट्रीपैक सेंसर से लैस होती है। ऐसे में इस तरह के मामले की गुंजाइश न के बराबर है। <br /><strong>- शैलेंद्र, सेल्स मैनेजर, ईवी स्कूटर कम्पनी </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Dec 2023 16:45:59 +0530</pubDate>
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                <title>काल का गाल बन रही शहर के बीच से निकल रही नहरें</title>
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                        <![CDATA[पिछले साल मार्च में भी नहर में डूबने की घटनाएं हुई थी जिसमें चार युवकों की मौत हो गई थी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-canals-coming-out-of-the-middle-of-the-city-are-becoming-the-cheek-of-time/article-60285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kaal-ka-gaal-ban-rahi-shahar-k-beech-se-nikal-rahi-naharei..kota-news..23.10.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर के बीच से निकल रही दांयी व बांयी मुख्य नहर में आए दिन लोगों के डूबने की घटनाएं हो रही हैं। उसके बाद भी न तो लोग समझ रहे हैं और न ही पुलिस व प्रशासन चेत रहे हैं। पिछले साल होली पर भी चार युवकों की नहर में डूबने से मौत हो चुकी है। बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में शनिवार को नहर में नहाते समय  दो युवक बह गए। यह पहला मौका नहीं है जब नहर में नहाते समय युवक डूबे हों। उसके बाद भी न तो पुलिस प्रशासन चेता है और न ही लोग सचेत हुए हैं। जिसका खामियाजा उस परिवार को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>यह हैं दुर्घटना का पॉइंट</strong><br />शहर के बीच से निकल रही दांयी व बायी मुख्य नहर में केवल एक दो जगह ही ऐसी नहीं है जहां लोग नहाते हैं। वरन् नहर  पर जगह-जगह इस तरह के दृश्य देखे जा सकते हैं। फिर चाहे वह कुन्हाड़ी क्षेत्र का इलाका हो या किशोरपुरा गोविंद धाम के पास। गुमानपुरा का क्षेत्र हो या नाग नागिन मंदिर रोड। बोरखेड़ा का क्षेत्र हो या थेगड़ा का।  थर्मल चौराहे से नांता रोड के बीच भी नहर  की चार दीवारी क्षतिग्रस्त हो रही है। शनिवार को भी कई जगह पर लोग नहाते हुए मिले। </p>
<p><strong>पिछले साल धुलंडी पर हुआ था हादसा</strong><br />पिछले साल मार्च 2022 में भी नहर में डूबने की घटनाएं हुई थी। जिसमें चार युवकों की मौत हो गई थी। धुलंडी के  दिन होली खेलने के बाद कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित बांयी मुख्य नहर में अलग-अलग जगह पर नहाने गए तीन युवकों का पैर फिसलने से डूबने पर मौत हो गई थी। जिससे त्योहार के दिन उन परिवारों में मातम छा गया था।  वहीं उद्योग नगर थाना क्षेत्र में भी एक युवक की डूबने से मौत हो गई थी। एक ही दिन में दो थाना क्षेत्रों में एक साथ चार युवकों की मौत से  पुलिस व प्रशासन के अधिकारी हरकत में आए थे। </p>
<p><strong>कलक्टर एसपी ने जारी किए थे आदेश</strong><br />मार्च 2022 में धुलंडी के दिन हुए हादसे के बाद तत्कालीन जिला कलक्टर व पुलिस अधीक्षक ने आदेश जारी दिए थे। जिसमें सभी संबंधित थाना अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नहर में कोई भी व्यक्ति नहाने नहीं जाए। इसके लिए थाने का जाब्ता नियमित गश्त करेगा और निगरानी रखेगा। इस आदेश की कुछ समय तक तो पालना हुई। लेकिन अधिकारियों के बदलने के साथ ही आदेश भी हवा हो गए।  जिससे फिर से वही पुराना ढर्रा शुरु हो गया। शहर में जगह पर लोग विशेष रूप से बच्चे व युवाओं को नहरों पर नहाते हुए देखा जा सकता है। </p>
<p><strong>क्षतिग्रस्त हो रही नहरें</strong><br />शहर के बीच से निकल रही नहर की चार दीवारी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। जिससे वहां से नहर में नीचे की तरफ जाने की लोगों को जगह मिल रही है। जिससे लोग काफी देर तक नहरों में नहाते रहते हैं। कई लोग नशा करने के बाद भी नहर में नहाने चले जाते हैं। जिससे उनके पैर फिसलने व डूबने की घटनाएं हो रही हैं। नाग नागिन मंदिर से 80 फीट रोड स्टिल ब्रिज के बीच नहर की चार दीवारी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। हालांकि सीएडी कीओर से कुछ समय पहले चार दीवारी को सही भी कराया गया था। लेकिन उसके बाद भी वह कई जगह से टूटी हुई है। जहां से लोग नहाने के लिए नीचे तक जा रहे हैं। उद्योग नगर थाना क्षेत्र में शिवाजी पार्क के पीछे कंसुआ और डीसीएम की तरफ जा रही नहर में कई जगह पर नहर के दीवारों में मोखे हो रहे हैं। जिससे लोग वहां नहाने के लिए जा रहे हैं।  थेगड़ा रोड पर भैरूजी मंदिर के पास भी नहर की चार दीवारी कई जगह से क्षतिग्रस्त है। बोरखेड़ा से काला तालाब की तरफ जाने वाले रास्ते में भी नहर की चार दीवारी काफी जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। वर्तमान में नहर में पानी छोड़ा हुआ है। जिससे लोग उसमें नहाने जा रहे हैं।  नांता की तरफ नहर में भी दिनभर बच्चों को कूदकर नहाते हुए देखा जा सकता है। </p>
<p>नहरों की समय-समय पर मरम्मत करवाई जाती है। लोगों को नहर में पानी छोड़ने के दौरान नहाने से मना किया हुआ है। लेकिन उसके बाद भी लोग नहीं समझते हैं। जिससे इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। बजट आने पर जहां से भी नहरें क्षतिग्रस्त हैं उन्हें सही करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- एम.पी. सामरिया, अधीक्षण अभियंता, सिचाई विभाग</strong></p>
<p>नहरों पर होली के समय में पुलिस की ओर से निगरानी व गश्त की जाती है। जिससे उस समय कोई नहर में नहाने नहीं जाए। जिससे हादसों को रोका जा सके। अन्य दिनों में यह काम सिचाई विभाग व निगम प्रशासन का है। नहर में नहाने से लोगों को बचना चाहिए।  <br /><strong>- शरद चौधरी, एसपी कोटा शहर </strong></p>]]>
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                <pubDate>Mon, 23 Oct 2023 16:04:07 +0530</pubDate>
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