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                <title>सुप्रीम कोर्ट का काशी विश्वनाथ मंदिर- ज्ञानवापी मस्जिद पर तत्काल कोई आदेश देने से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि कहा ,''संबंधित दस्तावेज देखने के बाद हम इसे सूचीबद्ध करेंगे।'']]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refuses-to-give-any-immediate-order-on-kashi-vishwanath-temple--gyanvapi-masjid/article-9706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी  मस्जिद परिसर में सर्वेक्षण कार्य रोकने की मांग संबंधी याचिका पर शुक्रवार को तत्काल कोई आदेश देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ''हमे मामले की जानकारी नहीं है। ऐसे में हम आदेश कैसे पारित कर सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि कहा ,''संबंधित दस्तावेज देखने के बाद हम इसे सूचीबद्ध करेंगे।''<br /><br />निचली अदालत के आदेश से पूर्व की यथास्थिति बनाए रखने की मांग कर रहे वरिष्ठ वकील एच अहमदी ने शीर्ष अदालत को बताया कि आज (13 मई) सर्वेक्षण हो रहा है। इस मामले पर तत्काल सुनवाई करने की जरूरत है। इस पर अदालत ने कहा कि वह अभी कोई आदेश पारित नहीं कर सकती। वह मामले को सूचीबद्ध करेगी। अहमदी ने विशेष उल्लेख के दौरान इस मामले को अति आवश्यक बताया था और तत्काल सुनवाई करते हुए सर्वेक्षण पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी।<br /><br />अंजुमन- ए- इंतेजामिया मस्जिद वाराणसी के प्रबंधन समिति ने सर्वेक्षण पर तत्काल रोक लगाने का आदेश देने की मांग संबंधी एक याचिका शीर्ष अदालत के समक्ष दायर की थी। प्रबंधन समिति ने अपनी याचिका में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 21 अप्रैल के आदेश की वैधता को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी। दीवानी अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश दिया था।<br /><br />अनेक हिंदुओं का मानना है कि काशी विश्वनाथ मंदिर- ज्ञानवापी  मस्जिद परिसर के अंदर मां श्रृंगार गौरी मंदिर है। इसी आस्था के चलते पांच ङ्क्षहदू महिलाओं ने  दैनिक पूजा की अनुमति देने की मांग करते हुए निचली अदालत में याचिका दायर की थी। संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पिछले महीने सर्वेक्षण का आदेश दिया था। अदालत ने गुरुवार को कहा था कि बेसमेंट और बंद कमरों समेत पूरी ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे जारी रहेगा। मुस्लिम पक्षकारों ने सर्वेक्षण करने के आदेश का विरोध किया था।</p>
<p><strong>ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी सर्वेक्षण शनिवार को सुबह आठ बजे से</strong><br /> उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शनिवार को सुबह आठ बजे से वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का काम शुरू होगा।  वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने शुक्रवार को बताया कि न्यायालय के निर्देश के अनुसार सर्वेक्षण का काम सुबह आठ बजे शुरू होकर दिन में 12 बजे तक चलेगा। जिलाधिकारी ने शनिवार को इस मामले से जुड़े दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की एक बैठक भी बुलायी है। प्रशासन ने सर्वेक्षण के काम में सभी से सहयोग करने तथा नगर में शांति व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करने की अपील की है।<br /><br /> इस बीच ज्ञानवापी मस्जिद में जुमे की नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हो गयी। पूरे परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम थे। गौरतलब है कि ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण मामले में शुक्रवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर ने वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का काम फिर शुरू करने का आदेश दिया था।  न्यायालय द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर दल को सर्वेक्षण रिपोर्ट 17 मई से पहले न्यायालय में पेश करनी है। न्यायालय में इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 17 मई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 May 2022 18:14:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रोहित जोशी मामले में बोले डोटासरा:  किसी मामले में एफआईआर दर्ज होने से किसी को दोषी नहीं माना जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्री महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी पर दुष्कर्म आरोप मामले में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा है कि जांच के बाद जोशी पर पार्टी कार्रवाई करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--dotasara-said-in-rohit-joshi-case--no-one-can-be-held-guilty-by-registering-an-fir-in-any-case/article-9433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/rohit-joshi--.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मंत्री महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी पर दुष्कर्म आरोप मामले में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा है कि जांच के बाद जोशी पर पार्टी कार्रवाई करेगी।</p>
<p><br />पीसीसी में मीडिया से बात करते हुए डोटासरा ने कहा कि किसी मामले में एफआईआर दर्ज होने से किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। हर मामले में जांच के बाद ही कार्यवाही की जाती है। रोहित जोशी पीसीसी सदस्य भी है तो इस सवाल पर डोटासरा ने कहा कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट के हिसाब से कार्यवाही करने का निर्णय लिया जाता है, यदि रोहित जोशी जांच में दोषी पाया जाता है तो संगठन से हटाने की कार्यवाही की जाएगी। ऐसे मामलों में चाहे मेरा बेटा हो या किसी मंत्री का बेटा हो, सभी पर समान कार्यवाही की जाएगी। हमारी पार्टी भाजपा की तरह नहीं है, वहां तो किसी को कुछ कहने का हक भी नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 17:19:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>किरोड़ी लाल मीणा बोले: मेरे पास पार्टी के स्टैंडिंग ऑर्डर है,  जहां भी किसी तरह की घटना हो  पहले आप तुरंत पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[ईडी की गहलोत के घर तक पहुंचेगी, इससे बौखला कर बयान दे रहे है: किरोड़ी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--kirori-lal-meena-said--i-have-the-party-s-standing-order--wherever-any-kind-of-incident-happens--you-must-reach-immediately/article-8245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/kirodi-lal-meena.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यसभा सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने कहा राज्य में किसी भी तरह की घटना होने पर पार्टी के मेरे पास स्टैंडिंग ऑर्डर है, कि आप तुरंत वहाँ पहुंचे। इसी के आधार पर में प्रदेश में जहां भी अत्याचारों की घटनाएं हुई, मैं वहां पहुंचा हूं। </p>
<p>डॉ. मीणा बुधवार को भाजपा मुख्यालय में प्रेस से रूबरू हो रहे थे। उन्होंने गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि किसी पुआरी को आग लगा दी जाए, आमागढ़ पर ध्वज फाड़ दिया जाए, थानागाजी में रेप की घटना पर पीड़ित के लिए न्याय मंगा जाए, रीट का मामला उठाया जाए, रामगढ़ बांध में अतिक्रमण हटाने की मांग की जाए तो क्या गलत है। गहलोत साहब ने तो  एक बार बैरीकेट तोड़कर सचिवालय के अंदर घुस गए थे, हमने तो ऐसा नही किया। भरतपुर से दलित पलायन कर रहे है, बाड़ी धौलपुर में एमएलए धमाल कर रहे है। </p>
<p>ईडी की गहलोत के घर तक पहुंचेगी, इससे बौखला कर बयान दे रहे है। मैं पार्टी के साथ ही आंदोलन कर रहे है। रीट मामले में पार्टी ने एक साथ मिलकर आंदोलन किया है। पार्टी के मेरे को स्टैंडिंग आदेश है, की आप जहां भी आंदोलन हो पहले आप वहाँ पहुंचे। इसी के अनुसार आंदोलन कर रहा हूँ,। गहलोत तो आजकल अहमद खान बन गए  है। पूर्वी राजस्थान नहर प्रोजेक्ट  के मामले में कहा कि पीएम ने जयपुर व अजमेर में चर्चा की थी, लेकिन 75 प्रतिशत की पानी उपलब्धि पर ही राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजे। एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने अपने क्षेत्र की नदियों से पानी देने पर आपति जताई गई। गहलोत से कहना चाहूंगा कि इसमें राजनीति नही करें, एमपी सरकार के पत्र की आपूर्ति करेंगे। हमारे यहां सात  सीएम पद के दावेदार है, जो अछी बात है, कांग्रेस में तो एक पायलट दावेदार थे, उसे भी हजार फीट नीचे गाड़ दिया। वैसे भी मुख्यमंत्री कौन नहीं बनना चाहता?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 18:07:24 +0530</pubDate>
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                <title>राज्य सरकार कर रही है भेदभाव पूर्ण तरीके से काम- रामलाल शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[कहा विधायक जो चाहे करें सरकार कोई कार्रवाई नहीं करेगी: रामपाल शर्मा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--state-government-is-working-in-a-discriminatory-manner--ramlal-sharma--bjp-state-chief-spokesperson-accused-the-congress-party-of-giving-a-free-hand-to-its-mlas--saying-whatever-the-mlas-want--the-government-will-not-take-any-action/article-7219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ram.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक रामलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की सरकार भेदभाव पूर्ण कार्य कर रही है और यह बात अब जगजाहिर होने लगी है। राजस्थान के अंदर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता अगर किसी आंदोलन के अंदर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करवाते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जेल की सलाखों के पीछे भेजने का काम करते हैं। लेकिन राजस्थान में यही कार्य कांग्रेस के विधायक करें तो वह बेखोफ होकर आमजन की तरह सरेआम घूम सकते हैं। सरकार कानून के दायरे के अंदर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने की मंशा नहीं रखती है और यह उदाहरण एक नहीं अनेकों मिलते हैं। चित्तौड़गढ़ के एक विधायक ने एसएचओ के विरुद्ध इतनी गालियां बकी है और एसएचओ ने परिवाद दर्ज करवाने के बावजूद भी सरकार उस विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और इसी तरीके से धौलपुर के एक विधायक ने किस तरीके से बिजली विभाग के एईएन व जेईएन के साथ मारपीट की, लेकिन उसके विरुद्ध भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।</p>
<p> </p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के समय कई विधायकों ने ऐसे कृत्य करने का साहस किया था लेकिन तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी ने कार्रवाई करते हुए एक नजीर पेश की थी। प्रदेश के अंदर प्रशासनिक तंत्र को बेखोफ होकर अपने कार्य को अंजाम देने का पूरा अधिकार है और अगर कोई व्यक्ति उसमे कोई बाधा उत्पन्न करता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी और उदाहरण के लिए कोटा के अंदर भी तत्कालीन विधायक पहलाद गुंजन जी ने जब एक सीएमएचओ के साथ कहासुनी सुनी हुई थी तो उसमें पार्टी ने उन्हें निष्कासित करने का काम किया था और देवी सिंह भाटी ने भी अपने ही सचिव के विरुद्ध हाथापाई की थी तो पार्टी ने उनको मंत्रिमंडल से हटाने का काम किया था। एक नहीं अनेकों उदाहरण इस प्रकार के है कि भारतीय जनता पार्टी ऐसे कृत्यों को कभी भी सहन नहीं करती। लेकिन राजस्थान की सरकार भेदभाव पूर्ण तरीके से विधायकों को इतनी खुली छूट दे रखी है कि उनके मन के अंदर जो आए वो करें, सरकार रोकने वाली कतई नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 16:12:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बाइडेन का यूक्रेन में अमेरिकी सेना की किसी भी संभावित तैनाती से खंडन</title>
                                    <description><![CDATA[पोलैंड में 82वें एयरबोर्न डिवीजन की अपनी यात्रा के दौरान बाइडेन ने कहा था कि अमेरिकी सैनिकों को यूक्रेनी बहादुरी के कई उदाहरण दिखाई देंगे, जब वे वहां होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/biden-denies-any-possible-deployment-of-us-forces-in-ukraine--no-us-military-deployment-in-ukraine--biden/article-6948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/joe-biden.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। यूक्रेन पर रूस के जारी हमले के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन का बयान सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन में अमेरिकी सेना की किसी भी संभावित तैनाती का खंडन करते हुए कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने पोलैंड में अमेरिकी सैनिकों द्वारा यूक्रेन के सैनिकों को प्रशिक्षित करने की बात कही थी।<br /><br />पोलैंड में 82वें एयरबोर्न डिवीजन की अपनी यात्रा के दौरान बाइडेन ने कहा था कि अमेरिकी सैनिकों को यूक्रेनी बहादुरी के कई उदाहरण दिखाई देंगे, जब वे वहां होंगे। बाइडेन ने अपनी पिछली टिप्पणियों के बारे में सोमवार को पूछे गए एक सवाल का जवाब में कहा, ''आप इस तरह से शब्दों की व्याख्या करते हैं। मैं सैनिकों से बात कर रहा था। हम सैनिकों को प्रशिक्षित करने में मदद करने के बारे में बात कर रहे थे। इसका मतलब है कि यूक्रेन के सैनिक जो पोलैंड में हैं।''<br /><br />रूस द्वारा रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा, ''इससे एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया शुरू होगी। दुनिया बहुत कुछ जानना चाहती है। मैं उन्हें यह नहीं बता रहा हूं कि प्रतिक्रिया क्या होगी।''</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 15:46:29 +0530</pubDate>
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                <title>ऐतिहासिक फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है: HC]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/sectarian--historic-verdict--karnataka-high-court--while-dismissing-five-petitions-seeking-permission-to-wear-the-hijab-in-the-classroom--has-ruled-that-the-hijab-is-neither-a-mandatory-part-of-islam-nor-does-its-non-wearing-violate-any-religious-right/article-6303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/hijab.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक हाई कोर्ट ने कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने की अपील करने वाली पांच याचिकाओं को खारिज करते हुए फैसला दिया है कि हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हिजाब न पहनने से निजता व शिक्षा के मूल अधिकार का हनन नहीं होता है। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि स्कूल वर्दी का नियम एक उचित पाबंदी है और संवैधानिक रूप से मान्य है। वर्दी के मामले में छात्राओं की आपत्ति उचित नहीं है। वास्तव में यह ऐसा रूढिवादीता फैसला है, जिसका मुस्लिम समाज के प्रगतिशील तबके को स्वागत करना चाहिए। यह एक ऐसा फैसला भी है, जिसके बाद हिजाब विवाद यहीं समाप्त हो जाना चाहिए, लेकिन लगता है ऐसा नहीं होगा क्योंकि याचिका दायर करने वाली छात्राओं के वकील ने कहा है कि मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाएंगे। दरअसल, कर्नाटक स्थित उड्डी के दो सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कुछ छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन द्वारा कक्षाओं में हिजाब पहनने पर रोक लगाने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। इससे पहले फरवरी के मध्य में हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक में फिर पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया। जब इस मामले का विरोध हुआ तो कुछ छात्र भगवा शॉल डालकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीति गर्म रही। तब इस विवाद के मूल में राजनीतिक निहितार्थ की बात कही गई। इसे लेकर मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने भी कहा कि अकादमिक सत्र के बीच में अचानक यह मुद्दा क्यों उठा? लगता है कि इसके पीछे किसी का हाथ है। निस्संदेह, अशांति पैदा करने व सद्भाव को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया गया। इस विवाद को लेकर आंदोलन में जगह-जगह पथराव, तोड़फोड़ की घटनाएं शुरू हो गईं। स्कूल-कॉलेज बंद तक करने की नौबत आ गई। धार्मिक स्वतंत्रता व निजता के अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई। लेकिन अंतत: अदालत ने इस सबसे इनकार कर दिया। लेकिन हिजाब की रस्म को जिस तरह मजहबी-चोला पहनाकर इस्लाम के मुल्ला व फतवा जारी करने वालों ने मुस्लिम महिलाओं के साथ न्याय नहीं किया। जबकि आज महिलाओं को सशक्त बनाने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 13:03:58 +0530</pubDate>
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                <title>गहलोत ने चेताया.....शरीर में कोई भी परेशानी होने पर उसे नजरअंदाज ना करें</title>
                                    <description><![CDATA[कोविड से ठीक होने के बाद भी नियमित तौर पर डॉक्टरों से सलाह लें ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-gehlot-warned------if-there-is-any-problem-in-the-body--do-not-ignore-it/article-4829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/ashok-g.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पिछले वर्ष कोविड के बाद मुझे भी हृदय संबंधी दिक्कतें हुईं , परन्तु प्रदेशवासियों की दुआओं से सही समय पर इलाज होने से बच गया था। कृपया ध्यान रखें कि कोविड से ठीक होने के बाद भी नियमित तौर पर डॉक्टरों से सलाह लें एवं शरीर में कोई भी परेशानी होने पर उसे नजरअंदाज ना करें।</p>
<p><br />गहलोत ने कहा कि डॉक्टरों के मुताबिक ऐसा देखा गया है कि पोस्ट कोविड कई लोगों में हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री एम गौतम रेड्डी के 50 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक से निधन पर शोक व्यक्त कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वे पिछले महीने कोविड संक्रमित भी हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Feb 2022 17:48:03 +0530</pubDate>
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                <title>चार जिलों में कोई भी अफसर ने राजनेताओं के प्रोटोकॉल में रहेंगे और नहीं मंच साझा करेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[24 दिसम्बर तक प्रभावी रहेगी आचार संहिता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61c073cc4e9e9/article-3385"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/secretariat_630x4003.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।प्रदेश के जिन चार जिलों में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव हो रहे हैं, उनके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सोमवार को आचार संहिता संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिए। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि बारां, करौली, कोटा और श्रीगंगानगर जिलों में 24 दिसम्बर तक कोई भी अधिकारी किसी भी जन प्रतिनिधि के प्रोटोकॉल नहीं रहेगा और नहीं उनके साथ मंच साझा करेगा।</p>
<p>आयोग की मुख्य निर्वाचन अधिकारी चित्र गुप्ता ने कहा है कि इन चारों जिलों में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के निर्वाचन के लिए आचार संहिता 24 दिसम्बर तक प्रभावी है। इसलिए आपका विश्वास-हमारा प्रयास जिला स्तरीय कार्यक्रम में निर्वाचनों से जुड़ा कोई भी अधिकारी मंत्री, विधायक एवं किसी भी दल के राजनीतिज्ञ के प्रोटोकॉल में उपस्थित नहीं हो सकता, ना ही मंच साझा कर सकता है। निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों की इन कार्यक्रमों में भागीदारी को आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Dec 2021 18:22:03 +0530</pubDate>
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                <title>सीएम सलाहकार नियुक्ति मामला : सीएम बोले:  हमें भी कानून पता, विपक्ष और मीडिया बेवजह मुद्दा बना रहे</title>
                                    <description><![CDATA[मैं चाहे कितने भी सलाहकार रखूं, उससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए : गहलोत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE---%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%87---%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE--%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A4%B9-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87/article-2811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/gehlot_dotasra.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। सीएम सलाहकार नियुक्ति पर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विपक्ष के आरोपों और मीडिया की खबरों पर अपना स्पष्टीकरण दिया है। पीसीसी में मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि आरोप लगाने वाले अगर थोड़ी गहराई में जाते तो उन्हें सारी बात समझ में आ जाती। हम सरकार चला रहें तो हमें भी तो कुछ जानकारी होगी। मीडिया का एक वर्ग और विपक्ष के लोग इसे बिना मतलब का मुद्दा बना रहे हैं। हमें भी पता है कि सलाहकार या संसदीय सचिव के मामले में कोर्ट से क्या निर्देश आ रखे हैं और उनमें क्या हुआ है। हमने इन नियुक्ति को लेकर अलग से वेतन भत्ते या सुविधाओं को लेकर कोई आदेश नहीं निकाला है। हम उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा या सुविधाएं देते तो जनहित में ये खबरें जारी हो सकती हैं। विपक्ष ऐसे माहौल बना रहा है, जैसे कोई जुर्म कर दिया हो। मैं चाहे कितने भी सलाहकार रखूं, उससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। यदि कोई सलाहकार जनता के बीच जाकर फीडबैक जुटाते हुए हमें सलाह देता है तो उसमें कुछ गलत नहीं है। <br /> <br /> सीएम के बयान से साफ हो गया है कि सलाहकार नाममात्र के होंगे। उन्हें या संसदीय सचिवों को मंत्री का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। ये सामान्य विधायक से ज्यादा दूसरा काम करने में सक्षम नहीं होंगे। ये सरकारी गोपनीय सूचना की पत्रावली ना देख सकते, ना ही पत्रावली चला सकते, क्योंकि यह आॅफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 के खिलाफ है। अब सरकार संसदीय सचिवों की नियुक्तियों का दुस्साहस भी नहीं कर सकेगी, क्योंकि राज्यपाल ने मेरी मांग पर सरकार से जवाब मांगा है। <br /> -<strong> राजेन्द्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष, विधानसभा </strong><br /> <br /> <strong>गुढ़ा की नाराजगी जायज: सभी को संतुष्ट करना संभव नहीं</strong><br /> राज्यमंत्री राजेन्द्र गुढ़ा के बयानों पर गहलोत ने कहा कि उनकी अपनी कोई नाराजगी हो सकती है, जो जायज भी है। उनकी अपेक्षाएं ज्यादा होंगी, लेकिन सभी को संतुष्ट कर पाना संभव नहीं हो पाता। गुढ़ा के मन में भी कुछ होगा तो वह धीरे-धीरे शांत होगा। मैं और डोटासरा उनसे बात करेंगे। कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे।<br /> <br /> <strong>सांसदों पर बोला हमला : मंत्री होने के बावजूद पैरवी नहीं करते</strong><br /> गहलोत ने कहा कि यहां से चार सांसद मंत्री बने बैठे हैं, लेकिन मोदी के सामने आवाज उठाने का साहस उनमें नहीं है। ईस्टर्न राजस्थान कैनाल को राष्टÑीय परियोजना घोषित कराने की मोदी खुद घोषणा कर चुके हैं। केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र शेखावत पीएम से यह घोषणा भी राजस्थान के हित में पूरी नहीं करवा पाए, उन्हें मंत्री बने रहने का अधिकार है क्या। बेरोजगार युवाओं के लखनऊ कूच पर गहलोत ने कहा किपिछले तीन साल में हमने एक लाख से अधिक नौकरियां दी हैं। नौकरी चाहने वाले तो पढ़ाई कर रहे हैं, जो पढ़ाई नहीं कर रहे, वे यूनियन बनाकर दबाव बनाने में लगे हैं।<br /> <br /> <strong>महंगाई बढ़ने के लिए भाजपा की गलत आर्थिक नीतियां जिम्मेदार</strong><br />  केन्द्र की गलत नीतियों से राज्यों को नुकसान, परिणाम पूरा देश भुगत रहा: गहलोत<br /> जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने महंगाई के मुद्दे पर केन्द्र सरकार पर जुबानी हमला बोलते हुए दिल्ली में 12 दिसम्बर को महंगाई हटाओ रैली में राजस्थान से ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल होने की अपील की। गहलोत और डोटासरा ने रविवार को पीसीसी में मीडिया से बातचीत में केन्द्र सरकार की नीतियों को संघवाद के खिलाफ बताया है।</p>
<p><strong><br /> राज्य मजबूत होंगे तो ही देश मजबूत होगा, राज्य सरकारें कर्जे में </strong><br /> मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि केन्द्र की गलत नीतियों के परिणाम पूरा देश भुगत रहा है। संघवाद के खिलाफ केन्द्र की कार्यशैली से राज्यों को कमजोर किया जा रहा है। राज्य सरकारें कर्जा लेकर काम चला रही हैं। राज्य मजबूत होंगे तो ही देश मजबूत होगा। अब तक एक्साइज ड्यूटी का पैसा सभी राज्यों के हिस्से में आता था, लेकिन अभी राज्यों को नुकसान हो रहा। लगाई गई स्पेशल और एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में भी राज्यों को हिस्सा नहीं दिया जा रहा। केन्द्र केवल अपना खजाना भरने में लगी है। पेट्रोल-डीजल की लगातार कीमतें बढ़ने से दूसरी चीजें भी महंगी होती हैं। अभी पांच राज्यों के चुनाव के कारण कीमतें रुकवा रखी हैं, लेकिन केन्द्र देश से एक साल तक कीमतें नहीं बढ़ने का वादा करे तो महंगाई पर अंकुश संभव है। कोरोनाकाल में हमारा 20 हजार करोड़ का राजस्व कम हुआ। केन्द्र सरकार वर्ष 2022 तक जीएसटी का पुनर्भरण कर रही थी, उसे 2027 तक आगे बढ़ाया जाए। राजस्थान के बकाया 5900 करोड़ का जीएसटी पुनर्भरण का भुगतान जल्दी हो।<br /> <br /> <strong>पीएम केवल लच्छेदार भाषण दे रहे हैं</strong><br /> पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि 12 दिसम्बर को दिल्ली में होने वाली महंगाई हटाओ रैली में राजस्थान से करीब 50 हजार कार्यकर्ता और लोग शामिल होंगे। केन्द्र सरकार महंगाई रोकने में विफल रही है। पीएम मोदी केवल लच्छेदार भाषण दे रहे हैं। गैस सब्सिडी खत्म कर दी। आम आदमी की थाली में दो वक्त की रोटी भी नहीं पहुंच रही। यूपीए सरकार में पेट्रोल 71 रुपए प्रति लीटर था जो अब 115 रुपए है। डीजल के उत्पाद शुल्क में 800 फीसदी बढ़ोतरी की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 11:42:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>पुस्तकालय किसी भी समाज के ज्ञान मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय  पुस्तकालय  सप्ताह  पर  विशेष]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0/article-2567"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/libary_pustkalay.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत में राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह 14-20 नवंबर को मनाया जाता है। भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय आंदोलन के प्रणेता आई। वी. रमैय्या द्वारा 1912 में 14 नवंबर को मद्रास में पुस्तकालय गोष्ठी का आयोजन किया गया था। 1968 से 14-20 नवंबर के बीच राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह का आयोजन किया जाता है। पुस्तकालय किसी भी समाज के ज्ञान के मंदिर की  तरह है। 15वीं शताब्दी में प्रेस मशीन के आविष्कार के साथ पुस्तकालयों की तस्वीर बदली और पुस्तकों, समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के प्रकाशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में इंपीरियल पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी। कुछ वर्षों तक यह पुस्तकालय केवल विशिष्ट व्यक्तियों के उपयोग तक ही सीमित था। लेकिन 1930 में इसे सामान्य लोगों के उपयोग के लिए मंजूरी दे दी गई। कोनीमारा पब्लिक लाइब्रेरी चेन्नई में और एशियाटिक सोसाइटी लाइब्रेरी मुंबई में खुली। इन पुस्तकालयों के विकास में अंग्रेजों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन ये पुस्तकालय भारतीय नागरिकों के लिए बहुत उपयोगी नहीं थे, क्योंकि इनमें रखी अधिकांश पुस्तकें विदेशी भाषाओं में थीं। हालांकि पुस्तकालय का उपयोग केवल शिक्षित लोग ही करते थे, खासकर वे लोग जिन्हें विदेशी भाषाओं का ज्ञान था। फिर भी इन पुस्तकालयों का भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान था। उदाहरण के लिए अन्य देशों के शासन और स्वतंत्रता के बारे में पुस्तकों में पढ़कर स्वतंत्र होने की भावना जागृत हुई।</p>
<p>पिछले दिनों राजस्थान के दूरदराज के गांव और ढ़ाणियों में बच्चों के लिए जोधपुर जिले के 30 गांवों में रूम टू रीड और जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय रीडिंग कैंपेन के तहत ऊंट गाड़ी पर पहली मोबाइल लाइब्रेरी शुरू हुई। इसमें करीब 1500 किताबें हैं, जिनमें सबसे ज्यादा स्टोरी और ड्राइंग की हैं। इस लाइब्रेरी में एक स्टोरी टेलर है, जो बच्चों को कहानियां सुनाएगा। लाइब्रेरी जहां जाती है, वहां यदि टीचर नहीं है तो पैरेंट्स को बच्चों को किताब पढ़कर विषय के बारे में समझाना होता है। यदि आसपास कोई टीचर होता है तो पैरेंट्स की जगह वह बच्चों को कहानियां पढ़कर सुनाता है और मतलब समझाता है। यह लाइब्रेरी जहां जाती है, वहां के स्कूल में किताबें रखकर आ जाती है। यदि किसी बच्चे को किताब पढ़ना हो तो स्कूल से इशू करा सकते हैं। विकासशील देशों की तुलना में विकसित देशों में अधिक शोध कार्य किया जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे विकसित देशों के पीछे रिसर्च की अहम भूमिका है। नए शोध के परिणामस्वरूप इन देश के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है, साथ ही इस तकनीक के अन्य देशों में स्थानांतरित हो जाने से अन्य देशों को भी लाभ मिल रहा है। इसलिए पुस्तकालय विभिन्न माध्यमों से अपने उपयोगकर्ताओं को नए शोधों के बारे में अद्यतन जानकारी प्रसारित करते रहते हैं।डिजिटल लाइब्रेरी के इस युग में शोधकर्ता न केवल अपने देश के पुस्तकालयों से बल्कि अन्य देशों के पुस्तकालयों से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पुस्तकालय अनुसंधान एवं विकास तथा उद्योग व व्यापार के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी देश का विकास उसके उद्योगों और व्यापार पर निर्भर करता है। उद्योगों के विकास के लिए निरंतर अनुसंधान की आवश्यकता होती है, जैसे-कम लागत, उत्पादित माल का उचित वितरण, उत्पाद गुणवत्तापरक, पर्यावरणीय क्षति से बचाव आदि। इस तरह उद्योग व व्यापार की ज्ञानपरक सूचनाएं देने का कार्य विशिष्ट पुस्तकालय ही करते हैं। अत: विशिष्ट पुस्तकालय किसी विशिष्ट समूह के लिए उनके आवश्यकतानुसार पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाते हैं। जैसे-उद्योग एवं व्यापार, शोध एवं तकनीकी विकास आदि के पुस्तकालय। वैज्ञानिकों को अपने शोध कार्यों में लगे रहने के कारण उनके पास समयाभाव रहता है। अत: नवीन प्रकाशित सूचनाएंउनके आवश्यकतानुसार छांटकर पुस्तकालय ही प्रदान करता है। इस तरह ये पुस्तकालय विषयानुसार सूचनाओं को अलग करके उनको संबद्ध प्रयोगकर्ताओं तक पहुंचाते हैं।वर्तमान में पुस्तकालयों का तेजी से विकास हुआ है। चाहे वह शैक्षणिक संस्थानों में पुस्तकालयों को अनिवार्य बनाने की बात हो या विभिन्न स्तरों पर सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना, जैसे कि जिला स्तर पर, ब्लॉक स्तर पर और ग्राम स्तर पर। जिन राज्यों में पुस्तकालय अधिनियम पारित किया गया है, वहां पुस्तकालयों का तेजी से विकास हो रहा है। सरकार पुस्तकालय शिक्षा पर अधिक जोर दे रही है। विश्वविद्यालय स्तर पर पुस्तकालय एवं सूचना विभाग खोला गया है। दूरस्थ शिक्षा प्रणाली में पुस्तकालय विज्ञान विभाग भी उपलब्ध है, जहां से पुस्तकालय में कार्यरत कर्मचारी अपनी उच्च शिक्षा जारी रख सकते हैं। आज पुस्तकालय नई सूचना संचार प्रौद्योगिकी को अपनाकर उपयोगकर्ताओं की विभिन्न प्रकृति की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करते हैं। पुस्तकालय भी आपसी सहयोग के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को संतुष्ट करने का प्रयास करते हैं।भारत के पुस्तकालय विज्ञान को एक अलग विषय के रूप में मान्यता देने में डॉ. एस.आर. रंगनाथन का विशेष योगदान है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अकादमिक पुस्तकालयों के विकास के लिए डॉ. एस.आर. रंगनाथन की अध्यक्षता में एक पुस्तकालय समिति का भी गठन किया। इस समिति के सुझावों ने पुस्तकालयों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद 1964 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कोठारी आयोग का गठन किया गया।<br />         <strong>-देवेन्द्रराज सुथार<br /> (ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /> <br /> जिसका सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यह था कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक केंद्रीय पुस्तकालय के साथ-साथ प्रत्येक विभाग के लिए एक विभागीय पुस्तकालय भी होना चाहिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 1991 में प्रोफेसर यशपाल की अध्यक्षता में सूचना और पुस्तकालय नेटवर्क की स्थापना की। जिसका उद्देश्य अकादमिक पुस्तकालयों का विकास करना है और पुस्तकालयों के बीच आपसी समन्वय हो ताकि पुस्तकालयों में संचालित होने वाले कार्यों की पुनरावृत्ति न हो, शैक्षणिक पुस्तकालयों के कार्यों में एकरूपता बनी रहे तथा सूचना संचार तकनीक का प्रयोग अधिकतम हो।<br /> <br /> <br /> प्राचीन काल से लेकर अब तक पुस्तकालयों का उत्तरोत्तर विकास हुआ है। आज पुस्तकालय में संग्रहित पुस्तकें सजावट के लिए नहीं बल्कि समाज के सभी वर्गों के उपयोग के लिए उपलब्ध है। पुस्तकालयों के तीव्र विकास के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना चाहिएए विशेषकर पुस्तकालय से संबंधित छात्रोंए अध्यापकों व अन्य कर्मचारियों तथा पुस्तकालय संगठन को। आधुनिक पुस्तकालय ज्ञान एवं सूचनाप्रद सामग्री का अधिग्रहण करके उनको इस तरह व्यवस्थित करें ताकि सूचनाओं का अधिकतम उपयोग हो सके। पुस्तकालय न केवल पठनीय सामग्री से भरपूर बल्कि पुस्तकालय भवन भी सुविधा संपन्न होना चाहिए ताकि पाठकों को आकर्षित कर सके। सूचना संचार एवं प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके पुस्तकालयों के सेवाओं को कंप्यूटरों तथा दूरसंचार नेटवर्क के माध्यम से अंतिम उपयोगकर्ता तक सूचना की पहुंच हो सकेए यही पुस्तकालयों की आधुनिक अवधारणा है। विकसित देशों की तुलना में भारत में पुस्तकालय का विकास धीमा रहा हैए इसके पीछे मुख्य कारण निरक्षरता है। निरक्षरता के कारण यहां के लोगों में पुस्तकालयों के प्रयोग और उपयोग की भावना विकसित नहीं हो सकी। दूसरा मुख्य कारण अनुदान की कमी है। आज भी अधिकांश रा’यों में पुस्तकालय अधिनियम पारित नहीं हुआ हैए इसलिए पुस्तकालयों के लिए अनुदान प्राप्त करने में कठिनाई आती है। जहां पुस्तकालय अधिनियम पारित किया गया हैए वहां पुस्तकालयों की स्थिति बेहतर हैं।<br /> <span style="color:#ff0000;"><br /> वर्तमान में पुस्तकालयों का तेजी से विकास हुआ है</span>। चाहे वह शैक्षणिक संस्थानों में पुस्तकालयों को अनिवार्य बनाने की बात हो या विभिन्न स्तरों पर सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना, जैसे कि जिला स्तर पर, ब्लॉक स्तर पर और ग्राम स्तर पर। जिन राज्यों में पुस्तकालय अधिनियम पारित किया गया है, वहां पुस्तकालयों का तेजी से विकास हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
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                <pubDate>Sat, 20 Nov 2021 14:06:00 +0530</pubDate>
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                <title>स्टूडेंट या स्टाफ  कोरोना पॉजिटिव मिला तो स्कूल नहीं केवल कमरा बंद होगा</title>
                                    <description><![CDATA[ जयपुर। राज्य के किसी भी सरकारी या गैर सरकारी स्कूल में कोरोना पॉजिटिव मिलता है तो उस स्कूल की छुट्टी नहीं होगी, बल्कि उस क्लास रूम को ही एक महीने के लिए बंद कर दिया जाएगा। स्कूल नियमित रूप से चलती रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%AB--%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%89%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%B5-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE/article-2404"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/shiksha-sankul2.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। राज्य के किसी भी सरकारी या गैर सरकारी स्कूल में कोरोना पॉजिटिव मिलता है तो उस स्कूल की छुट्टी नहीं होगी, बल्कि उस क्लास रूम को ही एक महीने के लिए बंद कर दिया जाएगा। स्कूल नियमित रूप से चलती रहेगी। ये नियम सोमवार से राज्य के सभी स्कूलों पर लागू होंगे। स्कूलों को माध्यमिक शिक्षा द्वारा जारी की गई एसओपी की सख्ती से पालन करने होंगी। प्री प्राइमरी से कक्षा 12 तक के सभी स्टूडेंट्स को सोमवार से स्कूल जाना होगा। अगर कोई स्टूडेंट या स्टाफ  सदस्य कोरोना पॉजिटिव आता है या उसमें कोई लक्षण मिलते हैं तो उस क्लास रूम को बंद कर दिया जाएगा, जिसमें वो बैठता है। स्टूडेंट में कोरोना के लक्षण होने पर उसे हॉस्पिटल पहुंचाने की जिम्मेदारी स्कूल की होगी। उसके लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था करनी होगी।<br /><br /><strong>फिर से हो सकेगी प्रार्थना सभा</strong> <br />नई व्यवस्था में अब स्कूल में प्रार्थना सभा फिर से हो सकेगी। पिछले डेढ़ साल से जब भी स्कूल ओपन हुए हैं, तब से इस पर रोक रही है। ऐसे में क्लास में ही प्रार्थना की व्यवस्था स्कूल स्तर पर लागू हो गई। अब स्कूल मैदान में प्रार्थना हो सकेगी। हालांकि इसके लिए भी सोशल डिस्टेंसिंग रखनी होगी। स्टूडेंट्स को दूरी बनाकर ही प्रार्थना करनी होगी। स्कूल में गेम्स एक्टिविटी की स्वीकृति दी है।</p>
<p><br /><strong>बंद रहेगी कैंटीन</strong><br />जिन स्कूल में कैंटीन संचालित हो रही है, वो फिलहाल बंद ही रहेगी। शिक्षा निदेशालय ने साफ  तौर पर कहा है कि कैंटीन अभी शुरू नहीं हो सकेंगे। इसी तरह जिन स्कूल में मिड डे मिल तैयार होता है, वहां भी अभी रोक रहेगी। मिड डे मिल के लिए अलग से निर्देश जारी किए जाएंगे।<br /><br />सोमवार से सौ फीसदी उपस्थिति के साथ विद्यालय खुलेंगे इससे बच्चों को काफी उत्साह है।  <br />-कुमुद शर्मा, प्रधानाचार्य महात्मा गांधी विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) गांधीनगर जयपुर<br />अब कोरोनावायरस का प्रकोप समाप्त हो चुका है और बच्चे सुचारू रूप से विद्यालय में आ रहे है।  <strong>-विपिन शर्मा, प्रदेश वरष्ठि उपाध्यक्ष</strong></p>
<p><br />राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा संघशिक्षा विभाग की एसओपी की पालना करते हुए 100 फीसदी बच्चों को स्कूल बुलाया है। वहीं कोरोना गाइड लाइन की भी पालना की जाएगी।<br /><strong>-ऊषा शर्मा, प्रिंसिपल राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय सांगानेर</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 16:05:38 +0530</pubDate>
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