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                <title>असर खबर का - सरकारी विद्यालय के 87 बच्चों के बनाए जन्म प्रमाण पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[जन्म प्रमाण पत्र वितरण करने के बाद विद्यालय परिसर व आस-पास के क्षेत्र में पौधारोपण किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka---birth-certificates-made-for-87-children-of-government-school/article-122364"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम कोटा दक्षिण ने अनूठी पहल करते हुए घर-घर जाकर जन्म प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया के तहत रथकांकरा स्थित सरकारी स्कूल के 87 बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनाए। इन प्रमाण पत्रों का शुक्रवार को विद्यालय परिसर में वितरण किया गया और पौधे लगाए गए।  रथकांकरा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में  आयोजित कार्यक्रम के दौरान जन्म प्रमाण पत्र वितरण किए गए । कार्यक्रम में  नगर निगम कोटा दक्षिण महापौर राजीव अग्रवाल द्वारा 87 बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र वितरित किए गए। साथ ही ग्रामवासियों को अपने  बच्चों से संबंधित दस्तावेजों को समय पर बनाए जाने के लिए प्रेरित किया। जन्म प्रमाण पत्र वितरण करने के बाद विद्यालय परिसर व आस-पास के क्षेत्र में पौधारोपण किया गया।</p>
<p><strong>घरों पर जन्मे बच्चों की नहीं थी जानकारी</strong><br />गौरतलब है कि नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र के रथकांकरा स्थित  राजकीय विद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों का शिक्षा विभाग के यू-डाइस पोर्टल पर जन्म प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण नामांकन नहीं हो पा रहा था। घरों पर जन्म होने के कारण जानकारी के अभाव में इन बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र नहीं बने हुए थे। </p>
<p><strong>लोकसभा अध्यक्ष ने दिए थे निर्देश</strong><br />इस मामले की जानकारी मिलने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण आयुक्तों को निर्देश दिए थे कि वे घर-घर जाकर ऐसे बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनाएं जिनके प्रमाण पत्र अभी तक बने हुए नहीं है। लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद नगर निगम कोटा दक्षिण  व कोटा उत्तर के आयुक्तों ने इस संबंध में आदेश जारी किए थे। </p>
<p><strong>विद्यालय परिसर में लगाया था शिविर</strong><br />कोटा दक्षिण आयुक्त अनुराग भार्गव ने विशेष अभियान चलाकर ऐसे बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रथकांकरा में शिविर आयोजित किया था।  वहां जन्म प्रमाण पत्र के लिए वांछित दस्तावेज लिए गए। वहीं शिविर में जन्म प्रमाण पत्र संबंधित दस्तावेज जमा कराने से वंचित रहे बच्चों के घर-घर जाकर दस्तावेज एकत्र कर 10 नम्बर फार्म की जरूरी कार्यवाही करते हुए जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए।</p>
<p><strong>निगम अधिकारी व विद्यालय स्टाफ रहा मौजूद</strong><br />प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान नगर निगम कोटा दक्षिण आयुक्त अनुराग भार्गव, उपायुक्त दयावती सैनी, अधीक्षण अभियंता महेशचन्द गोयल, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रूकमणी नागर, अध्यापिका स्नेहलता शर्मा, कमलेश मीणा, भारती हाड़ा, एसएमसी अध्यक्ष राधेश्याम वर्मा, संदीप वार्ष्णेय समेत कई लोग मौजूद रहे। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि जन्म प्रमाण पत्र से वंचित बच्चों के घर-घर जाकर नगर निगम द्वारा प्रमाण पत्र बनाने संबंधी समाचार दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 20 जुलाई को पेज 5 पर‘ निगम कर्मचारी घर-घर जाकर जन्म प्राण पत्र से वंचितों की जुटाएंगे जानकारी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें  दोनों निगमों के क्षेत्र के साथ ही रथकांकरा सरकारी स्कूल के बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनाने की भी जानकारी दी गई थी। नगर निगम ने उसकी प्रक्रिया शुरु कर दी थी। जिसके तहत 87 बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर उन्हें शुक्रवार को वितरित किए गए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 14:02:28 +0530</pubDate>
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                <title>महिला ने दिया चार बच्चों को जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[जेल रोड स्थित निजी अस्पताल में रविवार सुबह किरण कंवर (28) ने 6 बजे चार जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. शालिनी अग्रवाल ने बताया कि मरीज किरण कंवर पत्नी मोहन सिंह, वजीरपुरा की रहने वाली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/woman-gave-birth-to-four-children/article-55649"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/tonk.png" alt=""></a><br /><p>टोंक। जेल रोड स्थित निजी अस्पताल में रविवार सुबह किरण कंवर (28) ने 6 बजे चार जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. शालिनी अग्रवाल ने बताया कि <img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-08/tonk.png" alt="tonk"></img>। वह पिछले 2 वर्षों से बच्चा नहीं होने से परेशान थी उसने कई जगह से इलाज लिया पर सफलता नहीं मिली। 10 महीने पहले किरण ने परामर्श लिया जिससे मरीज को पहली बार में ही 4 अण्डे बने तथा चारों ही फर्टिलाइज हो गए। इसके बाद जब सोनोग्राफी में 4 बच्चों का पता चला तो मरीज को चौथे महीने में सर्वाइकल एनसर्कलेज किया गया, क्योंकि चार बच्चों की प्रेग्नेन्सी में समय से पूर्व डिलीवरी होने का खतरा रहता है। अत: उससे बचने के लिए चौथे महीने में ही उसका बचाव कर लिया गया। मरीज की डिलीवरी को 8 महीने तक बढ़ाया जा सका। रविवार सुबह मरीज ने 6 बजे चार बच्चों (2 लड़के व 2 लड़की) को जन्म दिया। जच्चा और बच्चे स्वस्थ हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Aug 2023 09:56:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>शहर में रोजाना सवा सौ बच्चे ले रहे जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा इन हैल्प लाइन के माध्यम से इस साल के दस माह में करीब 35 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा चुके हैं। इससे जाहिर है कि हर महीने करीब 35 सौ और रोजाना करीब सवा सौ बच्चों का जन्म हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/one-hundred-and-fifty-children-are-being-born-daily-in-the-city/article-29571"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/shahar-mei-rozana-sawa-sau-bachche-le-rahe-janam...kota-news-14.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में रोजाना करीब सवा सौ बच्चों का जन्म विभिन्न अस्पतालों में हो रहा है। दस माह में ही 35 हजार से अधिक बच्चे जन्ग ले चुके हैं। इसका प्रमाण है नगर निगम की हैल्प लाइन। जहां इस साल के दस माह में ही 35 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा चुके हैं। नगर निगम द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार के साथ ही आमजन से जुड़े कार्यों को करने के लिए हैल्प लाइन बनाई हुई है। इस हैल्प लाइन के माध्यम से भी लोगों की हैल्प की गई है। कोटा में एक निगम होने से हैल्प लाइन भी एक ही थी। लेकिन दो निगम बनने के बाद कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण निगम की हैलप लाइन भी अलग-अलग कर दी गई। इस हैल्प लाइन के माध्यम से जन्म-मृत्यु व विवाह प्रमाण पत्र बनाने का काम किया जा रहा है।  नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा इन हैल्प लाइन के माध्यम से इस साल के दस माह में करीब 35 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा चुके हैं। इससे जाहिर है कि हर महीने करीब 35 सौ और रोजाना करीब सवा सौ बच्चों का जन्म हुआ है। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर से अधिक दक्षिण में जन्मे बच्चे</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर की तुलना में कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में अधिक बच्चे जन्मे हैं। नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर निगम में इस साल जनवरी से अक्टूबर तक 13 हजार 424 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए। जबकि कोटा दक्षिण निगम में इसी अवधि में 21 हजार 958  जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए। </p>
<p><strong>जन्म की तुलना में मृत्यु एक तिहाई</strong><br />कोटा में इस साल के दस माह में जन्म होने वाले बच्चों की तुलना में मौत करीब एक तिहाई हुई है। इसकी पुष्टि निगम की हैल्प लाइन द्वारा जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्र हैं। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा दस माह में कुल 13 हजार 200 मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए। जिनमें  कोटा उत्तर ने 3639 जबकि कोटा दक्षिण ने 9561 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए।  </p>
<p><strong>उत्तर से दोगुने विवाह पंजीयन दक्षिण में</strong><br />जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों के साथ ही नगर निगम द्वारा विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र भी बनाए जा रहे हैं। इस साल दोनों निगमों ने हैल्प लाइन के माध्यम से कुल 10 हजार 176 विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किए। जिनमें से कोटा उत्तर ने जहां 3057 प्रमाण पत्र बनाए वहीं कोटा दक्षिण निगम ने दोगुने 7119 विवाह प्रमाण पत्र जारी किए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हैल्प लाइन खोली ही लोगों की सुविधा के लिए है। यहा आवेदन करने वाले सभी लोगों का काम आसानी से किया जा रहा है। दस्तावेज पूरे होने पर बिना किसी परेशानी व देरी के जन्म, मृत्यु व विवाह प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p>हैल्प लाइन में आवेदन करने पर बिना किसी देरी के प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। हैलप लाइन कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि जन्म, मृत्यु जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र जारी करने में देरी नहीं की जाए। व्यक्ति को इसके माध्यम से बड़ी राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तर दक्षिण तो  व्यवस्था के लिए है लेकिन काम कहीं का भी हो सभी को बिना परेशानी के करवाने का प्रयास करते हैं। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Nov 2022 14:44:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अलर्ट: हो न जाए शावकों को जन्म देने की प्रक्रिया प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[ मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की सल्तनत ढाई साल से अपने सुल्तान का इंतजार कर रही है।  सुल्तान की गैरमौजूदगी में आमा घाटी की रानी टाइग्रेस एमटी-4 ने जंगल की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। विशेषज्ञों के अनुसार  लगातार नर बाघ से दूर रहने के कारण टाइग्रेस की फर्र्टिलिटी प्रभावित हो सकती है। लम्बे समय से टाइग्रेस अकेली है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/do-not-affect-the-process-of-giving-birth-to-cubs/article-12988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/alert--ho-na-jaaaye-shavako-ko-janam-dene-ki-prakriya-prabhavit-kota-news-25.6.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की सल्तनत ढाई साल से अपने सुल्तान का इंतजार कर रही है।  सुल्तान की गैरमौजूदगी में आमा घाटी की रानी टाइग्रेस एमटी-4 ने जंगल की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। विशेषज्ञों के अनुसार  लगातार नर बाघ से दूर रहने के कारण टाइग्रेस की फर्र्टिलिटी प्रभावित हो सकती है। लम्बे समय से टाइग्रेस अकेली है। अकेले रहने से तनाव बढ़ रहा है। उग्रता हावी होने पर वह नर बाघ को स्वीकार करेगी अथवा नहीं यह भी बड़ा सवाल है।  बाधिन की प्रजन्न क्षमता पर विपरीत असर पड़ने से साल में एक बार होने वाली मदचक्र (एस्ट्रस सायकल) व्यर्थ जाने से गर्भ धारण पर  विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका बन रही है।  दरअसल, 23 जुलाई 2020 को बाघ एमटी-3 की मौत के बाद से जंगल की सरकार बिना राजा के चल रही है। हालांकि, वन विभाग द्वारा मुकुंदरा में टाइगर लाने के प्रयास जारी हैं। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। यहां प्री-बेस बढ़ाने के लिए हाल ही में घना नेशनल पार्क से 184 चीतल लाए गए हैं। साथ जोधपुर के माचिया व उयदपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से 64 प्री-बेस लाए जाएंगे, जिसके आदेश जारी हो चुके हैं। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के मुताबिक अभी प्री-मानसून चल रहा है। परिस्थितियां अनुकूल होते ही प्रीबेस मुकुंदरा में शिफ्ट किए जाएंगे। <br /><br /><strong>जंगल में 14 तो चिड़ियाघर में 18 साल रहती टाइगर की उम्र</strong><br />मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के सहायक वन संरक्षक आरएस भंडारी के अनुसार जंगल में बाघ की अधितम उम्र 13 से 14 साल रहती है, जबकि चिड़ियाघर में 18 से 20 वर्ष रहती है। जंगल में उन्हें कई तरह के संघर्षों का सामना करना पड़ता है। वहीं, चिड़ियाघरों में वे लगातार निगरानी में रहते हैं। मौसम के हिसाब से उनकी डाइट में बदलाव किया जाता है।     <br /><br /><strong>रणथम्भौर से मुकुंदरा आएंगे बाघ, प्रक्रिया जारी</strong><br />मुकुंदरा में बाघ लाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। विभाग ने इसके लिए जरूरी तैयारियां भी पूरी कर ली है। <br />अधिकारियों के मुताबिक परिस्थतियां अनुकूल होने पर संबंधित अधिकारियों के बीच सामंजस्य स्थापित कर जल्द ही बाघों को मुकुंदरा में शिफ्ट करने की कवायद शुरू की जाएगी। <br /><br /><strong>एमटी-3 ने खुद किया अपनी सल्तनत का फैसला</strong><br />टाइगर एमटी-3 की कहानी दूसरों से बिलकुल अलग है। मुकुंदरा में बसने का चुनाव खुद टी- 98 ने किया। यह बाघ रणथम्भौर से निकलकर सुल्तानपुर के रास्ते मुकुंदरा पहुंचा था। एनक्लोजर के बाहर भी बाघ के हलचल की आहट मिली तो टाइगर वॉच टीम ने एनक्लोजर के बाहर कैमरे लगा बाघ को ट्रैक व मॉनीटरिंग करना शुरू किया। आखिरकार 10 फरवरी 2019 को एनक्लोजर के बाहर लगे कैमरा ट्रैप में उसकी फोटो कैद हो गई। यह टाइगर मुकुंदरा और रणथम्भौर के बीच प्राकृतिक बाघ गलियारे से होते हुए कई दिन सुल्तानपुर के जंगलों में रुका। इसके बाद अपने आप यहां पहुंचा। बाद में उसे मुकुन्दरा के तीसरे बाघ के रूप में स्वीकार करते हुए एमटी-3 नाम दिया गया।<br /><br /><strong>मुकुंदरा में कब कौन कहां से आया</strong><br /><strong>मुकुंदरा का पहला राजा मुकुन्दराज उर्फ एमटी-1</strong><br />आज से पांच साल पहले मुकुंदरा की वादियों में बाघ-बाघिनों के आने का सिलसिला शुरू हुआ था।  वर्षों के इंतजार के बाद 3 अप्रेल 2018 को मुकुंदरा को पहला बाघ टी-91 के रूप में मिला। निर्धारित तारीख को वन विभाग की एक टीम ने बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में टी-91 को ट्रेंकुलाइज किया और गले में रेडियो कॉलर लगाकर दरा के एनक्लोजर में छोड़ दिया। बाघ को मुकुंदरा आने पर मुकुन्दराज नाम मिला, जिसे बाद में एमटी-1 के नाम से जाना गया। फिलहाल वर्तमान में बाघ लापता है। <br /><br /><strong>यूं हुई रानी टाइग्रेस एमटी-2 की एंट्री</strong><br />रणथम्भौर की चार बाघिनों टी-102, टी-104, टी-105 और टी-106 को मुकुंदरा के लिए चिन्हित किया गया था। ये वो बाघिनें थी जो अपना नया क्षेत्र बनाने की कोशिश कर रही थीं या रणथम्भौर से निकलने की कगार पर थीं।  जिनमें से टी-106 को पुनर्वास के लिए चुना गया और 18 दिसम्बर 2018 को ट्रेंकुलाइज कर मुकुंदरा लाया गया, जहां इसका नाम एमटी-2 रखा गया।  <br /><br /><strong>रणथम्भौर की आमा घाटी से आई थी टाइग्रेस एमटी-4</strong><br />एमटी-3 के बाद मुकुन्दरा को एक और बाघिन टी-83, 12 अप्रेल 2019  को मिली। इसे रणथम्भौर के आमा घाटी से लाकर मुकुंदरा के एनक्लोजर में छोड़ा गया था, जिसे बाद में एमटी-4 के नाम से जाना गया।<br /><br /><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br /><strong>प्रजन्न क्षमता व गर्भ धारण पर विपरीत असर</strong><br />मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बाघिन एमटी-4 करीब तीन साल से अकेली है। ऐसे में प्रतिरोधी या साथी न होने से उसके स्वभाव में बदलाव आएगा, जिससे उसका व्यवहार उग्र होगा। वहीं, बाधिन की प्रजन्न क्षमता पर विपरीत असर पड़ सकता है। साल में एक बार होने वाली मदचक्र (एस्ट्रस सायकल) व्यर्थ जाने से गर्भ धारण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहेगी। <br /><strong>- कृष्नेंद्र सिंह नामा, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट व रिसर्च सुपरवाइजर</strong><br /><br />मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में रणथम्भौर से बाघ लाए जाएंगे, इसकी प्रक्रिया जारी है। मौसम के मध्यनजर परिस्थितियां अनुकूल होने पर संबंधित अधिकारियों में सामांजस्य बिठाकर इसकी कवायद तेज की जाएगी। <br /><strong>- आरएस भंडारी, सहायक वन संरक्षक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 12:42:11 +0530</pubDate>
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                <title>वे मांएं जिन्होंने गढ़ी वीर संतानें: मुझे कोख पर गर्व, एक और भगत सिंह को जन्म दे पाती तो उसे भी देश पर कुर्बान कर देती...</title>
                                    <description><![CDATA[च्चे का पहला गुरु ‘मां’ को माना गया है, मां के संघर्ष, त्याग और बलिदान की अनेक कहानियां हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/those-mothers-who-created-heroic-children-i-am-proud-of-my-womb--if-i-could-have-given-birth-to-another-bhagat-singh--i-would-have-sacrificed-that-too-on-the-country/article-9340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/17.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। संसार में ‘मां’ की अपनी महिमा है। बच्चे का पहला गुरु ‘मां’ को माना गया है, मां के संघर्ष, त्याग और बलिदान की अनेक कहानियां हैं। माना जाता है कि बच्चा जब जन्म लेता है तो वह पहला शब्द ही ‘मां’ बोलता है। भारतीय इतिहास में ऐसी अनेक माताएं हुई हैं, जिन्होंने अपने पुत्र के निर्माण में अपना पूरा जीवन खपा दिया। पुत्र को इस तरह तैयार किया कि उसने मुगलों की दास्ता स्वीकार नहीं की। अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भगतसिंह की मां विदयावती कौर का जीवन भी प्रेरणा देता है। बहरहाल, मशहूर शायर ताबिश ने लिखा है- ‘एक मुद्दत से मेरी मां सोई नहीं ताबिश, मैंने एक कहा था कि मुझे अंधेरे से डर लगता है।’ इन शब्दों में मां की ममता के आंचल की गहराई का पला चलता है।<br /><br /><strong>भगत सिंह की मां विद्यावती</strong><br />शहीदे आजम भगतसिंह को फांसी देने का दिन 23 मार्च, 1931 तय हुआ तो अपने लाल को एक नजर भर देखने के लिए मां विदयावती जेल में मिलने गर्इंं। बेटे से मिलकर वापस जाने लगी तो आंखों के कोर में काफी समय से कैद मोती झलक गए। यह देखकर पास खड़े जेल के सिपाही ने कहा कि शहीद की मां होकर रोती है? इस पर विदयावती ने कहा कि ‘मैं अपने बेटे की शहीदी पर नहीं रो रही हूं, यदि इस कोख ने एक और भगतसिंह दिया होता तो उसे भी देश पर कुर्बान कर देती।’ धन्य हैं ऐसी माताएं, जिन्होंने ऐसे पुत्र को जन्म दिया।<br /><br /><strong>शिवा को गढ़ा मां जीजाबाई ने</strong> <br />छत्रपति शिवा ने 1674 में जब स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की नींव रखी तो उसके पीछे उनकी मां जीजाबाई की प्रेरणा और उनके संस्कार ही थे। जीजाबाई को देश में तेजी से बढ़ते मुगल सामाज्य का शासन उनके सीने में कील की तरह चुभता था। उन्होंने अपने पुत्र शिवा का पुणे में इस कदर सैन्य, राजनीति, कूटनीति के सबक सिखाए, जो आगे चलकर दिल्ली दरबार के लिए नासूर बन गए। <br /><br /><strong>प्रताप को तराशा मां जयवंता बाई ने</strong> <br />दिल्ली मुगल दरबार की दासता स्वीकार नहीं करने वाले महाराणा प्रताप के खून में वीरता और स्वतंत्र रहने के संस्कार उनकी मां जयवंता बाई ने ही दिए थे। अकबर ने अपनी दासता स्वीकार कराने के लिए प्रताप पर हर तरीके आजमाए, लेकिन प्रताप ने अधिनता स्वीकार नहीं की। घनघोर विपरीत परिस्थितियों में जंगल-जंगल भटकते रहे, लेकिन मां के दूध पर आंच नहीं आने दी। चाहते तो आमेर के राजा मानसिंह की तरह दिल्ली दरबार में उच्च पद पा सकते थे, लेकिन 1576 में हल्दी घाटी का युद्ध लड़ा, जिसमें सामना आमेर के राजा मानसिंह से हुआ। राजस्थान के इतिहासकार श्रीकृष्ण जुगनू बताते हैं कि उनके पिता महाराणा उदयसिंह के व्यस्त होने से उनकी मां  जयवंता बाई ने ही उन्हें वीरता और महिलाओं के प्रति आदर के संस्कार दिए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 May 2022 14:38:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>पोलो के जन्मदाता देश में ही गिर रहा है पोलो का स्तर, पूरे भारत में 5 हैंडीकैप का अकेला खिलाड़ी है सिमरन शेरगिल</title>
                                    <description><![CDATA[देश में नौ और दस हैंडीकैप के खिलाड़ी हुए हैं, वहीं आज की तारीख में पांच गोल का भी सिर्फ एक ही खिलाड़ी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0--%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-5-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%A8-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%B2/article-4071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/simran-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत को मॉडर्न पोलो का जन्मदाता कहा जाता हो या जयपुर को पोलो का मक्का लेकिन हकीकत यह है कि आज देश में इस खेल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। जिस देश में नौ और दस हैंडीकैप के खिलाड़ी हुए हैं, वहीं आज की तारीख में पांच गोल का भी सिर्फ एक ही खिलाड़ी है। इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) की हैंडीकैप कमेटी की मिडटर्म मीटिंग के बाद अब भारत में सिर्फ सिमरन शेरगिल ही पांच गोल के एकमात्र खिलाड़ी हैं। उनका हैंडीकैप भी छह से घटाकर पांच किया गया है। सिमरन ने 2017 में छह हैंडीकैप हासिल किया और इसे पांच साल तक बरकरार भी रखा। सिमरन से पहले पूर्व भारतीय कप्तान समीर सुहाग, शमशीर अली और ध्रुवपाल गोदारा भी छह गोल पर खेल चुके हैं लेकिन ये तीनों भी अब चार हैंडीकैप के खिलाड़ी हैं।<br /> <br /> मिडटर्म कमेटी ने घटाए 8 खिलाड़ियों के हैंडीकैप<br /> आईपीए की कमेटी ने मिडटर्म मीटिंग में करीब आधा दर्जन से ज्यादा खिलाड़ियों के हैंडीकैप में कटौती की है, जो मुम्बई में चल रहे पोलो सत्र से ही प्रभावी हुए हैं। कमेटी ने सिमरन शेरगिल का हैंडीकैप 6 से घटाकर 5 किया है वहीं लेफ्टिनेंट कर्नल विशाल चौहान का 4 से 3, सलीम आजमी का 3 से 2, उदय कलान, रणशेर सिंह और अखिल सिरोही का 2 से 1 तथा अधिराज सिंह और अक्षय मलिक का हैंडीकैप एक से घटाकर शून्य किया है।<br /> <br /> इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और महंगे घोड़े हैं कारण<br /> पूर्व पोलो खिलाड़ी और भारत में फेडरेशन इंटरनेशनल पोलो के एम्बेसेडर रहे नरेन्द्र सिंह का कहना है कि बेशक खेल का स्तर नीचे आया है लेकिन इसके कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण देश में पोलो के इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और घोड़ों का महंगा होना है। लेकिन नई जेनरेशन में अच्छे कुछ अच्छे खिलाड़ी आ रहे हैं, जो अभी चार गोल पर खेल रहे हैं और जल्दी ही हाई हैंडीकैपर हो सकते हैं।<br /> <br /> क्या है हैंडीकैप<br /> पोलो के खेल में हैंडीकैप एक खिलाड़ी के खेल कौशल की तुलनात्मक रेटिंग है। एक नौसिखिया खिलाड़ी के हैंडीकैप की शुरुआत -2 से होती है और जैसे-जैसे उसके खेल में निखार आता है उसका हैंडीकैप भी बढ़ता जाता है। हैंडीकैप का निर्धारण खिलाड़ी के गोल या टूर्नामेंट जीतने से ही निर्धारित नहीं किया जाता इसके लिए उसकी खेल भावना, टीम गेम, हॉर्समैनशिप, खेल की रणनीति और खेल की जानकारी को भी देखा जाता है।<br /> <br /> दस हैंडीकैप के थे चंदा<br /> सिंह और जसवंत सिंह<br /> भांवरी (जोधपुर) के पूर्व पोलो खिलाड़ी ऋषिराज सिंह के अनुसार पूर्व में जोधपुर, अलवर, पटियाला और हैदराबाद में पोलो की मजबूत टीमें थीं और इन टीमों में नौ और दस गोल के खिलाड़ी थे। पटियाला के जसवंत सिंह और चंदा सिंह दस-दस गोल के खिलाड़ी थे, वहीं जयपुर के पूर्व महाराजा मानसिंह, जोधपुर को रावराजा हनूत सिंह और हरि सिंह ने नौ हैंडीकैप हासिल किया। जबर सिंह आठ और विजय सिंह, प्रेम सिंह, किशन सिंह और सबसे आखिरी में अस्सी के दशक में ब्रिगेडियर वीपी सिंह सात गोल के खिलाड़ी रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jan 2022 16:16:36 +0530</pubDate>
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                <title>'कप्तान साहब' की अमिट स्मृतियां</title>
                                    <description><![CDATA[चोर-डकैतों को पकड़ने में ‘नवज्योति’का योगदान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/-%E0%A4%95%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%AC--%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82/article-3317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/33.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>एक दिवाली ऐसी भी आई</strong><br /> एक दिवाली ऐसी भी आई जिस दिन हमारे पास एक पैसा भी नहीं था। फिकर हो गई, दिवाली कैसे मनाएं? इत्तफाक से छोटी लड़की के पास 10 रु. निकले जो स्कूल की फीस के लिए थे। उनसे दीपावली मनाई।<br /> <br /> <strong>अजमेर की दरगाह शरीफ को बचाया</strong><br /> 15 अगस्त को हिन्दुस्तान आजाद होने के बाद अजमेर से काफी संख्या में करीब 50 हजार मुसलमान पाकिस्तान चले गए। करीब 10 हजार रह गए। सिंध से सिंधी भाइयों का आना शुरू हो गया। उन्होंने बदले की भावना से मुसलमानों को भगाना, लूटना, मारना शुरू कर दिया, लेकिन कोई खास बड़ा नुकसान जान और माल का नहीं हुआ।<br /> इन्द्रकोट में तारा चंद पुलिस सिपाही जो वहां तैनात था उसको कुछ मुसलमानों ने जान से मारकर एक घर में गाड़ दिया। कुछ दिनों तक उसको मारने वालों का पता नहीं चला। मि. खलीलउद्दीन गोरी ने जो डिप्टी सुप. पलिस थे, मारने वालों का पता लगा दिया और लाश बरामद कर ली। हिन्दुओं ने सरकार से लाश की मांग की और कहा कि हम इसका दाह-संकार करेंगे। उनका इरादा था कि लाश का जुलूस दरगाह के सामने से ले जाया जाय और दरगाह के अंदर घुसकर मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार को तोड़फोड़ दिया जाय।<br /> सरकार को शंका तो थी कि कहीं कोई गड़बड़ी न हो। आर्य समाजी नेता पं. जियालाल और कांग्रेसी ज्वालाप्रसाद ने चीफ कमिश्नर से कहा कि हम कोई गड़बड़ नहीं होने देंगे और जुलूस शांति से निकलेगा। मुझे जुलूसियों के इरादे का पता चल गया था। इसलिए मैैंने पुलिस सुपररिन्टेडेंट सुघड़सिंह और चीफ कमिश्नर शंकरप्रसाद से कहा का आप जुलूस को किसी भी हालत में दहगाह के सामने से न जाने देना, वरना जुलूस वाले दरगाह को नष्ट-भ्रष्ट कर देंगे। दोनों नेताओं ने बहुत आश्वासन दिया कि कोई गड़बड़ न होगी, जुलूस दरगाह बाजार से ले जाने दिया जाय लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई। नए बाजार के कड़क्के चौक दरवाजे के सामने पुलिस तैनात कर दी और जुलूस को उधर से न जाने दिया और एक बड़ी घटना होने से टल गई।<br /> <br /> <strong>चोर-डकैतों को पकड़ने में ‘नवज्योति’का योगदान</strong><br /> कुछ वर्ष पूर्व अजमेर के सावित्री कालेज के सामने जब एक व्यक्ति स्टेट बैैंक से दर हजार रुपए लेकर स्कूटर में बैठकर जा रहा था कि सावित्री कालेज के सामने दो लुटेरे उसे लूटकर भाग गए। पुलिस डिप्टी सुप. श्री खलीलउद्दीन गोरी को खबर मिलते ही उन्होंने एक डाकू को तो पकड़ लिया जिसे अजमेर जेल में बंद कर दिया और दूसरा पकड़ नें नहीं आया। उसको पकड़ने की योजना बनाई। वे मेरे पास आए। कहा कि आप एक खबर छाप दीजिए कि फलां नाम का दूसरा डकैत भी पकड़ा गया। वह खबर अखबार में छपवाकर अखबार लेकर वे जेल गए और डकैत से कहा कि फलां नाम का दूसरा तुम्हारा साथी हमने गिरफ्तार कर लिया है तो उसने तुरन्त कहा कि फलां आदमी जिसे पकड़ा है बेकसूर है, फलां आदमी मेरे साथ डकैती में शामिल था। उसको भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सुप. गुप्ता को जब यह खबर बताई थी तो वे बड़े नाराज हुए थे, लेकिन गिरफ्तारी के बाद गोरी ने गुप्ता साहब से कहा कि दूसरा भी पकड़ा जाय इसलिए यह खबर छपाई थी।<br /> <br /> <br /> <strong>जब मैैं इक्कीस मंजिली इमारत पर सीढ़ियों से चढ़ गया</strong><br /> सन् 1982 की बात है। मैैं ‘नवज्योति के काम से कलकत्ता गया हुआ था। वहां विज्ञापन एजेंसियों से मिला। इसी सिलसिले में चौरंगी रोड पर एक विज्ञापन एजेंसी से मिलने गया। चौरंगी रोड पर एक इक्कीस मंजिल की इमारत पर उसका आफिस था। मेरे साथ हमारे दफ्तर का नवजवान साथी भी था। जब हम वहां पहुंचे तो इत्तफाक से बिजली बंद थी, जिससे लिप्ट काम नहीं कर रही थी। मेरे साथी ने कहा कि बिजली आएगी तब ऊपर चढ़ेंगे। मैंने कहा- नहीं, बिजली का इंतजार नहीं करना है और हमें चींटी की चाल से इक्कीस मंजिल चढ़ना है। हम दोनों चींटी की चाल से सीढ़ी दर सीढ़ी इक्कीस मंजिल पर चढ़ गए। मैं तो न थका  न मेरे कोई पसीना  आया। साथी थक कर पसीने से तर-बतर हो गया और हांफने लगा। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद हम आफिस में गए और मिल करके वापिस आए, तब भी लिफ्ट बंद थी। मैैंने कहा कि उतरने में क्या जोर आएगा। अपन सीढ़ियों से नीचे उतर सकते हैैं। मेरे साथी ने कहा-मेरी अब हिम्मत नहीं है, लिफ्ट जब चालू होगी तब ही चलेंगे।’ थोड़ी देर में लिफ्ट चालू हो गई, हम लोग उसके जरिए नीचे उतर आए। एक विज्ञापन एजेन्सी में  हमने यह सारी घटना सुनाई। पास में किसी न्यूज एजेन्सी के संवाददाता भी बैठे हुए थे। उन्होंने अपनी एजेन्सी द्वारा कलकत्ते के सारे अखबार वालों को हमारी यह न्यूज दी और दूसरे दिन वहां के सारे अखबारों में हमारी यह न्यूज छप गई। <br /> <br /> <strong>रात्रि में पहाड़ों पर तीस मील का सफर</strong><br /> सन् 1938  में जब मैं, माणिक्यलाल वर्मा, भोगीलाल पांड्या तथा हमारे पच्चीस साथी डूंगरपुर रियासत में महारावल के सहयोग से भीलों में रचनात्मक कार्य कररहे थे,उस समय भंयकर अकाल पड़ा था। भील लगान न दे पाएं तो दीवान ने सख्ती शुरू की। खडलाई पाल के क्षेत्र में जहां हम रहते थे, वहां हम लोगों को बुलाकर कहा कि आप भीलों से कहें कि वे लगान अदा करें। हमने कहा न तो हम लगान देने के लिए कहेंगे,क्योंकि यह माहे कार्य क्षेत्र के बाहर है। महारावल के पास ये बात पहुंचानी जरूरी थी। मगर हम वहां से डूंगरपुर रास्ते रास्ते जाते तो हमें दो दिन लगते। पहाड़ों-पहाड़ों पर चलने से हम शाम को रवाना होकर सुबह डूंगरपुर पहुंच सकते थे। इसलिए मैैं और वर्माजी चार भीलों को साथ लेकर शाम को रवाना हुए और तीस मील रात में पहाड़ों ही पहाड़ों पर चलकर सुबह डूंगरपुर पहुंच गए। वहां भोगीलालजी पांड्या को सारी स्थिति बताई। पांड्याजी ने महारावल से सारी बातें कहीं। महारावल नाराज हुए और दीवान को कहलवा दिया कि लगान वसूली के बारे में इनसे कोई बात न करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Dec 2021 12:55:04 +0530</pubDate>
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                <title>प्रेरणा के स्रोत कप्तान साहब</title>
                                    <description><![CDATA[कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी की जयंती पर विशेष...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/61bd792c33909/article-3313"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/15.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>‘‘कप्तान साहब’’ </strong></span></span></span><br /> के नाम से प्रसिद्ध दुर्गाप्रसाद जी चौधरी की गिनती भारत के उन महान सपूतों में की जाती है, जो जीवन पर्यन्त अन्याय और अत्याचार के खिलाफ रहे।<br /> <br /> देश को आजादी मिलने से पहले जहां उनकी लड़ाई ब्रिटिश साम्राज्य और देश की सामन्तशाही के खिलाफ रही, वहीं आजादी के बाद वे देश में  सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक मूल्यों के लिए अंतिम सांस तक संघर्षरत रहे। वर्ष 1936 में संस्थापित अपने समाचार पत्र ‘‘दैनिक नवज्योति’’ का भी कप्तान साहब ने अपने राजनीतिक, सामाजिक उद्देश्यों की प्राप्ति में बखूबी इस्तेमाल किया।  - <strong>अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री</strong><br /> <br /> र्गाप्रसादजी की प्रारम्भिक शिक्षा दीक्षा नीमकाथाना, जयपुर-सांभर, रामगढ़ शेखावाटी और कानपुर में हुई। मात्र 13 वर्ष की आयु में वह महात्मा गांधी के आह्वान पर अपनी पढ़ाई छोड़ ‘‘जनसहयोग आन्दोलन’’ में ऐसे कूदे कि सामाजिक और राजनीतिक कार्य उनसे जीवन पर्यन्त छोड़ते न बने, स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी के कारण दुर्गाप्रसाद जी को अनेक बार जेल जाना पड़ा। वर्ष 1930 से 1947 के दौरान कांग्रेस सेवादल द्वारा चलाए जा रहे आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण ही वे कप्तान के रूप में मशहूर हुए। कप्तान साहब ने ‘‘बिजौलिया सत्याग्रह’’ में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। उन दिनों राजस्थान में किसानों पर दोहरे अत्याचार थे। जहां एक और उन्हें ब्रिटिश हुकुमत की गुलामी झेलनी पड़ती थी, वहीं दूसरी और राज्य में सामंती प्रथा के चलते उनका जीवन अन्याय और अत्याचारों से भरपूर था उन्हें क्रूर अमानवीय यातनाओं को सहते रहने के बावजूद भारी कर चुकाने पड़ते थे। 20वीं सदी के दूसरे और तीसरे दशक के बीच विजयसिंह पथिक, मानिक लाल वर्मा, साधु सीताराम और प्रेमचन्द भील के नेतृत्व में किसानों की ओर  से एक प्रभावी आन्दोलन चलाया गया। बिजौलिया सत्याग्रह के नाम से जाने, जाने वाला इस ऐतिहासिक आन्दोलन की उपलब्धि मात्र यह नहीं थी कि किसान अपनी तत्कालीन समस्याओं से निजात पा गए, बल्कि किसानों द्वारा इस आन्दोलन को चलाए जाने के कारण उनमें समझ बढ़ी और अपने ऊपर विश्वास पैदा हुआ, जिसने उन्हें अपना महत्व समझाते हुए समाज और देश की मुख्य धारा में ला खड़ा किया।</p>
<p><strong>अभिवादन ग्रंथ स्वतंत्रता संग्राम एवं पत्रकारिता के कीर्ति पुरुष,कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी से साभार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Dec 2021 12:21:43 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चे को जन्म के साथ ही मिल जाएगा आधार नंबर</title>
                                    <description><![CDATA[यूआईडीएआई कर रही है तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0/article-3283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/kids-janadhar.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आधार कार्ड बनाने वाली अथॉरिटी यूआईडीएआई जल्द ही अस्पतालों में नवजात शिशुओं को आधार कार्ड देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अस्पतालों में जल्द ही एनरोलमेंट शुरू किए जाएंगे। यूआईडीएआई के सीईओ सौरभ गर्ग ने बताया कि अब हमारी कोशिश नवजात शिशुओं का नामांकन करने की है। हर साल दो से ढाई करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। हम उन्हें आधार में एनरोल करने की प्रक्रिया में हैं। हम नवजात शिशुओं को आधार नंबर देने के लिए बर्थ रजिस्ट्रार के साथ टाईअप करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक करीब 99 फीसदी वयस्क आबादी को आधार के दायरे में लाया जा चुका है। इसके तहत अब तक देश की 131 करोड़ आबादी को एनरोल किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 11:40:20 +0530</pubDate>
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                <title>नगर निगम जयपुर जारी किया फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। ज्योति नगर पुलिस ने रविवार को नगर निगम जयपुर में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले आरोपी लोकेन्द्र गोयल को गिरफ्तार किया है।टीम ने 12 नवम्बर, 2021 को लोकेन्द्र गोयल निवासी सीकर रोड मुरलीपुरा हाल बैनाड रोड करधनी को पकड़कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/619237fcadda3/article-2405"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/jaipur-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ज्योति नगर पुलिस ने रविवार को नगर निगम जयपुर में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले आरोपी लोकेन्द्र गोयल को गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त दक्षिण हरेन्द्र महावर ने बताया कि 15 अप्रैल, 2019 को परिवादी प्रदीप पारीक रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) नगर निगम लालकोठी जयपुर ने रिपोर्ट दी कि सीमा पत्नी रामबाबू ने 24 अप्रैल, 2017 को एक बच्चे को महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट जयपुर में जन्म दिया। जिसका जन्म पंजीयन चिकित्सालय ने 8 मई, 2017 को ऑनलाइन किया गया। 9 मई को जयपुर नगर निगम का कम्प्यूटर आईडी व पासवर्ड हाइजैक और चोरी कर लोकेन्द्र गोयल निवासी विजयबाड़ी सीकर रोड जयपुर ने अपनी पुत्री का पंजीयन उसी क्रमांक पर कर सभी प्रविष्ठियां बदल दी। इस रिपोर्ट पर जांच की तो वर्ष 2019 से अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए लोकेन्द्र फरार हो गया। टीम ने 12 नवम्बर, 2021 को लोकेन्द्र गोयल निवासी सीकर रोड मुरलीपुरा हाल बैनाड रोड करधनी को पकड़कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 16:25:21 +0530</pubDate>
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