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                <title> दो बेटों का गला दबाकर हत्या के बाद खुद फंदे से झूली मां</title>
                                    <description><![CDATA[ एक बार टूटा फंदा, वापस फिर लगाई फांसी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/financial-crisis-and-domestic-dispute-became-the-reason-for-murder-and-suicide--mother-hanged-herself-after-strangling-two-sons-to-death--once-the-noose-was-broken--hanged-again/article-4739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/1_1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। सोडाला इलाके में फुटल्या बाग पोस्ट ऑफिस के पीछे किराए के मकान में रहने वाली महिला ने रविवार शाम को दो बेटों की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद महिला खुद फंदे से झुल गई। बेटों के मारने के बाद फंदे से लटकते समय एक बार फंदा टूट गया, लेकिन महिला ने वापस दूसरा फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया।</p>
<p><br />पुलिस की शुरुआती जांच में सुसाइड और हत्या की वजह घरेलू विवाद और आर्थिक तंगी सामने आई है। घटना के समय महिला का पति ऑटो ठीक कराने चार नंबर डिस्पेंसरी गया हुआ था। पुलिस ने एफएसएल टीम की मदद से साक्ष्य जुटाने के बाद पोस्टमार्टम के लिए शव एसएमएस अस्पताल में रखवाया है। मौके पर पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला है। एसीपी भोपाल सिंह भाटी ने बताया कि मृतका कन्या देवी (37), उसके बेटे रोहित (12) और पवन (8) फुटल्या बाग में लालचंद शर्मा के मकान में किराए से रहते थे।</p>
<p><br />महिला का पति महावीर प्रसाद साहू मूल रूप से कालीतलाई बूंदी का रहने वाला है। वह यहां ऑटो चलाता है। फुटल्या बाग में करीब पांच महीने से परिवार सहित रह रहा है। इससे पहले महावीर दस साल सुशीलपुरा में किराए के मकान में रहा था। महावीर का ऑटो करीब सात दिन से खराब था। रविवार को उसका व्रत था। इसलिए सुबह ऑटो ठीक कराने लिए चार नंबर डिस्पेंसरी गया था। व्रत होने पर वह शाम को दाल-बाटी बनाने की कहकर गया था।<br /><br /><strong>पानी भरने बाहर नहीं आई महिला, तब चला पता</strong><br />पुलिस के अनुसार महिला दिनभर से बेटों के साथ कमरे में थी। शाम करीब 6:30 पानी आया था। जब मृतका पानी भरने बाहर नहीं आई तो मकान मालिक को शक हुआ। उसने दरवाजा खटखटाया तो अंदर से बंद था। इसके बाद पति को बुलाया गया। पति के आने के बाद लोहे के सरिए से दरवाजा चौड़ा कर देखा तो महिला फंदे से झुली हुई थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने जब दरवाजा तोड़ा तब दोनों बेटे पलंग पर मृत अवस्था में पड़े थे। बड़े बेटे राहुल के मुंह में कपड़ा ठूसा हुआ था और कन्या देवी फंदे से झुल रही थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Feb 2022 10:38:50 +0530</pubDate>
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                <title>रीट को लेकर सदन में दो घंटे हुई चर्चा,  सरकार के जवाब से नाराज विपक्ष ने एक बार फिर  शुरू की नारेबाजी, वेल में पहुंचे भाजपा विधायक</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा विधायकों ने सदन से किया वॉकआउट, सरकार ने माना प्रदीप पाराशर के नियुक्ति के अलावा नहीं हुई कोई गलती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%8B-%E0%A4%98%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%88-%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%BE---%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0--%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80--%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%95/article-4456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/dhariwal-2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा के बजट सत्र में शुरुआती 3 दिन तक चले गतिरोध के बाद चौथे दिन सोमवार को रीट परीक्षा के मुद्दे पर सदन में दो घंटे चर्चा हुई, लेकिन विपक्ष ने सरकार के जवाब से असंतुष्टि जाहिर करते हुए वेल में आ गए और फिर से रीट की सीबीआई जांच की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के बीच ही सदन की कार्यवाही जारी रही और राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस जारी रही। भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।<br /><br />हुआ यूं कि सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होरे ही रीट पर  चर्चा को लेकर सहमति बनी।  मौजूदा सत्र में लंबे समय बाद ऐसा पहली बार हुआ जब प्रश्नकाल को स्थगित किया गया हालांकि प्रश्नकाल स्थगित करने से पहले ही विधानसभा अध्यक्ष ने कह दिया था कि यह अपवाद स्वरूप ही स्थगित किया जा रहा है। स्पीकर ने रीट के मुद्दे पर 2 घंटे चर्चा का समय तय किया पक्ष और विपक्ष को एक 1 घंटे का समय दिया गया। विपक्ष की तरफ से लगाए गए आरोपों का जवाब पहले सरकार की तरफ से शिक्षा मंत्री बीड़ी कल्ला ने दिया, तो उसके बाद संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने सीबीआई से जांच नहीं कराने के पीछे अपने तर्क सदन में रखें। धारीवाल ने कहा कि आखिर विपक्ष को एसओजी की जांच से एतराज क्या है ? उन्होंने विपक्ष से ही सवाल करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता सीबीआई जांच की मांग तो करते रहे हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक एसओजी की जांच में क्या खामी रही यह नहीं बताया?  धारीवाल ने पूछा क्या एसओजी ने इसमें कोई कमी रखी है ? अभी तक इसके साथ ही उन्होंने पूर्व में हुए शिवानी जडेजा तेजाब कांड का भी जिक्र किया।  धारीवाल ने कहा कि पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के समय 1997 में मुख्यमंत्री रहे भैरों सिंह शेखावत ने खुद इस सदन में कहा था कि अगर शिवानी जडेजा कांड की जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, तो इसमें कुछ ठोस तथ्य आते और दोषियों को सजा मिल पाती। धारीवाल ने कहा कि सीबीआई में भी इस धरती के लोग ही काम करते हैं। एसओजी के काम की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि यह राजस्थान की एसओजी ही है,  जो सदन के 18 विधायकों को नोटिस देने की हिम्मत रखती है।  उन्होंने कहा कि एसओजी ने मुख्यमंत्री सहित 18 विधायकों के अलावा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी नोटिस दिया है।</p>
<p><br />अपने तर्क रखते हुए धारीवाल ने कहा कि सरकार रीट परीक्षा की जांच सीबीआई से इसलिए भी नहीं करना चाहती, क्योंकि सरकार सीबीआई सिर्फ शिक्षा संकुल और बोर्ड के दफ्तर को सील करके दिल्ली जाकर बैठ जाएगी। धारीवाल ने कहा की बीजेपी के नेताओं की मंशा में खोट दिख रहा है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में भी कई घटनाएं हुई है जिनकी जांच सीबीआई से कराने की बजाय राज्य की एसआईटी गठित करके ही कराई गई है। लखीमपुर खीरी में किसानों पर गाड़ी चढ़ाने समेत अन्य मामलों का जिक्र भी धारीवाल ने किया। उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में जांच सीबीआई से कराने की बजाय एसआईटी से कराने को प्राथमिकता देता रहा है। धारीवाल ने सीबीआई को पिंजरे का तोता बताते हुए कहा कि सीबीआई की कार्यशैली मामले को लंबित करने वाली रही है उन्होंने कहा कि सरकार एसओजी से ही रीट मामले की जांच कराएगी।<br /><br />विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए धारीवाल ने कहा कि यह इतिहास में पहली बार नहीं हुआ है कि शिक्षा संकुल में रीट के पेपरों का स्ट्रांग रूम बनाया गया। इससे पहले भाजपा सरकार के समय भी ऐसा हुआ है। धारीवाल ने कहा कि बीजेपी सरकार के समय तो रीट के पेपर आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में रखे गए थे। साथ ही धारीवाल ने  प्राइवेट आदमियों को परीक्षा का समन्वय बनाने के सवाल पर भी बीजेपी को घेरते हुए कहा कि 2016 और 2018 की रीट परीक्षा में एबीवीपी और आरएसएस के लोगों को जिला समन्वयक बनाया गया था। धारीवाल ने कहा कि एक व्यक्ति पाराशर की वजह से राजीव गांधी स्टडी सर्किल को बदनाम नहीं किया जा सकता, अगर ऐसा होता है तो r.s.s. तो पूरी तरह से बदनाम है क्योंकि निंबाराम बीवीजी कंपनी को भुगतान कराने के मामले में सामने आ चुके हैं।  धारीवाल के जवाब का विरोध करते हुए भाजपा विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया और नारेबाजी करते हुए बैल में आ गए,  लेकिन सदन की कार्रवाई हंगामे के बीच की जारी रही।  सभापति राजेंद्र पारीक ने राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस शुरू करवा दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 14 Feb 2022 14:56:48 +0530</pubDate>
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                <title>हवा में जहर</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख अपनाने के बाद चेती दिल्ली सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बार फिर स्कूलों को एक हफ्ते तक बंद करने का फैसला लिया है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों से घर से ही काम करने को कहा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%B9%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A4%B9%E0%A4%B0/article-2439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/polution_sc1.jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख अपनाने के बाद चेती दिल्ली सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बार फिर स्कूलों को एक हफ्ते तक बंद करने का फैसला लिया है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों से घर से ही काम करने को कहा गया है। निजी संस्थानों को भी ऐसा कदम उठाने को कहा है। इसके अलावा दिल्ली में निर्माण गतिविधियों को तीन दिन के लिए प्रतिबंधित किया गया है। ऐसा नहीं है कि दिल्ली में पहली बार ही प्रदूषण का संकट गहराया है, बल्कि पिछले कई सालों से अक्टूबर-नवंबर के महीने में हवा में जहर घुलने का सिलसिला चल रहा है। दिल्ली सरकार ने पिछले सालों में प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के कई प्रयोग किए हैं, लेकिन कोई अपेक्षित नतीजा नहीं निकला। दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है और यहां से केन्द्रीय सत्ता भी चलती है, लेकिन केन्द्र सरकार दिल्ली के प्रदूषण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाती। अक्सर हर साल दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण की जिम्मेदारी पड़ोसी राज्यों के किसानों के कंधों पर कह दिया जाता है कि उनके पराली जलाने से हवा में धुआं घुल जाता है जिसकी वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला देते हुए मान लिया है कि पराली के धुएं का केवल 30 प्रतिशत ही योगदान है, जबकि 70 प्रतिशत अन्य स्थानीय कारणों से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण की वजह से आसपास के राज्यों पर पड़ रहा है। खबर है कि राजस्थान की राजधानी जयपुर, कोटा, उदयपुर के अलावा भिवाड़ी का प्रदूषण स्तर भी काफी बिगड़ा हुआ है। राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के कई बड़े शहरों की आबोहवा अच्छी तरह सांस लेने वाली नहीं रह गई है। प्रदूषण दिल्ली का ही नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकट बन चुका है, जिससे केन्द्र सरकार को ही कोई ठोस योजना बनानी होगी और प्रदूषण से मुक्ति दिलानी होगी। हकीकत यह है कि प्रदूषण को लेकर राज्य सरकारें और केन्द्र की सरकार कतई गंभीर नहीं हैं। समय रहते ही आवश्यक कदम उठा लिए जाते तो दिल्ली ही नहीं, बल्कि हर शहर को प्रदूषण का ज्यादा दंश नहीं झेलना पड़ता। सरकारें एक्शन प्लान बनाती जरूर है, लेकिन क्रियान्वयन पर ध्यान नहीं दिया जाता, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना होता है और अनेक प्रकार की बीमारियों की पीड़ा झेलनी पड़ती है। केन्द्र व राज्यों को कारगर योजना बनानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Nov 2021 14:56:46 +0530</pubDate>
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                <title>सतरंगी सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के नेताओं की ओर से तीखी और बेसुरी बयानबाजी हो रही। सलमान खुर्शीद और राशिद अल्वी के बयानों के मायने क्या? मतलब यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ रहा। कोई कम नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A4/article-2413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/qutub-minar,delhi,india1.jpg" alt=""></a><br /><p>देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के नेताओं की ओर से तीखी और बेसुरी बयानबाजी हो रही। सलमान खुर्शीद और राशिद अल्वी के बयानों के मायने क्या? मतलब यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ रहा। कोई कम नहीं। सलमान खुर्शीद की पुस्तक ‘सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन आवर टाइम्स’ आजकल चर्चा में। उन्होंने आरएसएस एवं हिन्ुत्व के बहाने आतंकी संगठन बोको हराम और आईएसआईएसआई का जिक्र कर डाला। सीधा कहें तो तुलना कर डालीं। सो, चुनावी सियासत में उबाल आना ही है। साल 1984 के सिख विरोधी दिल्ली दंगों के बाद उनके द्वारा लिखी एक पुस्तक के कुछ पन्ने भी आजकल चर्चा में। इसके बाद एक और पार्टी नेता राशिद अल्वी ने जय श्रीराम बोलने वालों को राक्षस बता डाला। मतलब दोनों ही ओर से चुनाव में ध्रुवीकरण की साफ कोशिश! यानी आ गए वहीं के वहीं। उसी की गर्मीं दिल्ली से लेकर सभी ओर बढ़ रही। लेकिन क्या इसका फायदा किसी को मिलेगा? हां, नुकसान किसका होगा, यह बताने की जरुरत नहीं।</p>
<p><br /> <strong>कितनी चर्चा बाकी?</strong><br /> राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का मसला एक बार फिर चर्चा में। सीएम गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम पायलट पार्टी आलाकमान से खुलकर गुफ्तगू जो कर चुके। हां, अभी शायद राहुल गांधी से चर्चा बाकी। ऐसे संकेत। इस बारे में प्रियंका गांधी भी जोर आजमाइश कर चुकीं। फिर केसी वेणुगोपाल एवं अजय माकन तो कई बार दिल्ली से लेकर जयपुर तक दौड़ लगा चुके। गहलोत एवं पायलट कांग्रेस आलाकमान का निर्णय मोनेंगे। ऐसा दावा। वैसे, पंजाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी सोनिया गांधी से वार्ता होने के बाद बाहर आकर यही बोले थे। बाद में रायता इतना फैला कि संभाले नहीं संभल रहा। हालांकि मरुधरा में फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं। फिर भी भविष्य में क्या होगा? इसे लेकर कोई आश्वस्त नहीं। हां, हर दिन नए-नए कयास, चर्चाएं, बातें, फार्मूले। मतलब सभी चकरघन्नी हुए जा रहे। अब कौन किसकी फिरकी ले रहा। आशार्थियों की समझ से परे। फिर भी उनकी उम्मीदें कायम। यही राजनीति। पिुर भी एक ही सवाल। और कितनी चर्चा बाकी?</p>
<p><br /> <strong>भारत का रूआब..</strong><br /> भारत का दुनियां के फलक पर कूटनीतिक रूआब लगातार बढ़ रहा। अफगानिस्तान के मसले पर हालिया ‘दिल्ली डायलॉग’ इसका पुख्ता संकेत एवं संदेश। दुनियां की बड़ी ताकतें अब भारत की पहल को नजरअंदाज करने की हैसियत में नहीं। रूस के एनएसए की मौजूदगी इसका प्रमाण। जबकि चीन ने भी इसमें हिस्सा लेने से सीधे इनकार नहीं किया। हां, पाक से उम्मीद भी क्या? लेकिन ईरान के एनएसए ने ‘दिल्ली डायलॉग’ में भाग लेकर भारत के सामने पाक को जरुर उसकी हैसियत बता दी। बची खुची कसर तालिबान ने पूरी कर दी। कहा, कोई आपत्ति नहीं, भारत का प्रयास अच्छा। उसे भारत से मदद की आस। फिर पांच मध्य एशियाई देशों की चर्चा में उपस्थिति भारत के प्रभाव की बानगी एवं प्रमाण। फिर इन सभी का पीएम मोदी से शिष्टाचार भेंट करना। अपने आप में नई कहानी बता रहा। वैसे भी अगुवाई अगर अजित डोभाल करें। तो कहीं शक की कोई गुंजाईश नहीं। बात सुरक्षा एवं आतंकवाद की ही नहीं। भारत की कूटनीतिक आभा की भी।</p>
<p><strong><br /> बढ़ रहा सियासी कद!</strong><br /> जब से योगीजी यूपी के सीएम बने। अपने अभिनव कामों से वह राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरते रहे। खासकर उन्होंने कानून व्यवस्था के मामले में जो नजीर पेश की। उसके कई कायल। अब संगठन के भीतर भी उनका कद बढ़ रहा। पार्टी में उन्हें भविष्य का नेता बताया जा रहा। हालांकि उनकी तमाम चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशश। कहा, उनकी कोई राष्टÑीय महत्वाकांक्षा नहीं। वह यूपी में ही काम करके ही खुश। लेकिन परिस्थितियां कहां किसी के रोकने से रूकतीं। हालात अपने आप बदलते चले जाते। दिल्ली में हाल में संपन्न बीजेपी की राष्टÑीय कार्यकारिणी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया। कहा जा रहा योगीजी पीएम मोदी की राह पर। करीब दो दशक पहले मोदीजी ने भी ऐसे ही राजनीतिक प्रस्ताव रखा था। सो, इसके मायने निकाले जा रहे। क्योंकि ऐसी बैठकों में यह काम पार्टी के राष्टÑीय नेता करते रहे। लेकिन योगीजी को इस काम के लिए आगे करना। अपने आप में संकेत। यानी योगीजी भाजपा की टॉप लीडरशिप में शुमार।</p>
<p><br /> <strong>क्यों हो रहे लाल-पीले?</strong><br /> महामहिम सत्यपाल मलिक आजकल खासे लाल पीले हो रहे? इसी फेर में संवैधानिक पद की मर्यादा भी लांध रहे। लेकिन महत्वाकांक्षा क्या से क्या न करवाए! वह कैसी भी हो सकती है। ऐसा लग रहा, कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना। यूपी चुनाव नजदीक। और किसान आंदोलन के नेता टिकैत भी उसी क्षेत्र के निवासी जहां से मलिक। फिर दोनों ही जाट समुदाय से। मलिक की पृष्ठभूमि समाजवादी। तिस पर कश्मीर के राज्यपाल रह चुके। सो, सरकार और पीएम मोदी को घुड़की देते नहीं मान रहे। लेकिन इन सबमें असल बात क्या? हां, वह कभी लोकसभा सांसद रह चुके। राज्यसभा की भी शोभा बढ़ा चुके। कहीं ऐसा तो नहीं? राजभवन में अब मन नहीं लग रहा हो। यदि परेशान होकर सरकार ही पद से हटा दे तो शहीद कहलाएंगे। इसीलिए सरकार भी बर्दाश्त कर रही! आखिर ऐसी बयानबाजी का क्या मतलब? लेकिन लाल पीले होने से भी तो बात नहीं बनेगी न। किसान आंदोलन अपनी जगह। आखिर संवैधानिक पद और उसकी मर्यादा का क्या?</p>
<p><strong><br /> एक चर्चा यह भी!</strong><br /> बस कयास, सुगबुगाहट, आशंका, अनुमान...! राजस्थान में भाजपा के फिर से सक्रिय होने की चर्चा। असल में, कांग्रेस सरकार में संभावित बदलाव के बाद विधायकों में बगावत की आशंका जताई जा रही। सो, भाजपा फिर से ताक में! यानी ‘ऑपरेशन लोटस पार्ट टू’। पिछले साल भी भाजपा ने कोशिश की थी। ऐसा आरोप कांग्रेस का। जबकि भाजपा ने इससे इनकार किया था। पर अफवाह कब सच हो जाए। कोई कुछ नहीं कह सकता। प्रभारी प्रदेश भी तफरी लेने आए बताए। लेकिन बात कहां तक पहुंचेगी। अभी भविष्य के गर्भ में। आखिर इन सबमें कौन लाभ में? जिनको पद प्रतिष्ठा चाहिए वह या जो इसे रोके हुए। फिर इधर का हाल भी उपचुनाव के बाद ठीक नहीं। हो सकता है उसकी कसर अब पूरी हो जाए। इस बार चूकने का मौका भी दोनों ओर से नहीं रहेगा। आखिर इधर-उधर तैरती चर्चाओं को कौन रोके? धुंआं भी तभी उठता। जब कहीं आग लगती है। लेकिन यह लगी किधर है? इसका भी इंतजार किया जाना चाहिए!     <strong>-दिल्ली डेस्क</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 16:48:47 +0530</pubDate>
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