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                <title>dialogue - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>गाज़ा शांति रोडमैप योजना : हमास ने फ़िलिस्तीनी गुटों का जवाब संयुक्त राष्ट्र को सौंपा, ट्रंप योजना पर दिया सकारात्मक जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[हमास और अन्य फिलिस्तीनी गुटों ने गाजा शांति रोडमैप पर अपनी संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र को सौंप दी है। काहिरा बैठक के बाद तैयार इस रुख में मानवीय सहायता, सैन्य कार्रवाई रोकने, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और गाजा पुनर्निर्माण को पहले चरण में पूरी तरह लागू करने की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/gaza-peace-roadmap-plan-hamas-submits-response-to-palestinian-factions/article-157021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)19.png" alt=""></a><br /><p>काहिरा। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने कहा है कि उसने गाजा शांति रोडमैप योजना पर फिलिस्तीनी गुटों की संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र के पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया के विशेष समन्वयक निकोलाय म्लादेनोव को सौंप दी है। हमास ने यमन की मीडिया को जारी बयान में कहा कि पिछले सप्ताह काहिरा में मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थों की मौजूदगी में विभिन्न फिलिस्तीनी गुटों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। इन बैठकों के बाद एक साझा राष्ट्रीय रुख तैयार किया गया, जिसे एक दिन पहले औपचारिक रूप से पेश कर दिया गया।</p>
<p>हमास ने कहा कि फिलिस्तीनी गुटों ने इस रोडमैप को "जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच" के साथ देखा है। संगठन के अनुसार सभी गुटों ने इस बात पर जोर दिया कि योजना के पहले चरण को पूरी तरह लागू किया जाए, खासकर मानवीय सहायता व्यवस्था और गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई रोकने के मामले में। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने राष्ट्रपति ट्रंप की योजना के दूसरे चरण को लागू करने संबंधी रोडमैप पर गंभीरता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार किया। उन्होंने पहले चरण के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से मानवीय सहायता और गाजा में सभी तरह की आक्रामक कार्रवाइयों को समाप्त करने के मुद्दे पर।"</p>
<p>हमास ने कहा कि गुटों ने रोडमैप में शामिल अन्य बिंदुओं पर भी अमल की मांग की है। इनमें प्रशासनिक समिति की तैनाती, गाजा से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और पुनर्निर्माण प्रक्रिया शामिल है। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने इस बात पर भी जोर दिया कि रोडमैप में उल्लिखित प्रशासनिक समिति के प्रवेश, गाजा पट्टी से पूर्ण इजरायली वापसी और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को लागू किया जाए, ताकि फिलिस्तीनी जनता अपने राज्य की स्थापना और आत्मनिर्णय के अधिकार के लक्ष्य को हासिल कर सके।"</p>
<p>हमास ने बताया कि उसका प्रतिनिधिमंडल काहिरा में मध्यस्थों और अन्य फिलिस्तीनी गुटों के साथ आगे भी बैठकें जारी रखेगा, ताकि सहमति वाले बिंदुओं को लागू करने की दिशा में प्रगति हो सके। उल्लेखनीय है कि निकोलाय म्लादेनोव ने मई में "राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापक गाजा शांति योजना के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए रोडमैप" सार्वजनिक किया था। 15 बिंदुओं वाली इस योजना में सुरक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती, इजरायली सैनिकों की वापसी और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल हैं। अक्टूबर 2025 से लागू युद्धविराम समझौते के तहत शुरुआती चरण में कैदियों की अदला-बदली, गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति और कुछ इलाकों से इजरायली सैनिकों की आंशिक वापसी शामिल थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>उत्तर कोरिया का बड़ा ऐलान: अमेरिका-दक्षिण कोरिया की निरस्त्रीकरण मांग ठुकराई; कहा- न्यूक्लियर ताकत के रूप में हमारी स्थिति अब स्थायी</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर कोरिया ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की बैठकों के बाद परमाणु निरस्त्रीकरण को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने इसे "हमेशा के लिए तय हो चुका" मामला बताते हुए साफ किया कि वह अपने परमाणु हथियार कभी नहीं छोड़ेगा और अपनी परमाणु शक्ति की स्थिति को बरकरार रखेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/north-koreas-big-announcement-rejected-us-south-koreas-demand-for-disarmament/article-156963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kim-jong.png" alt=""></a><br /><p>सोल। उत्तर कोरिया ने रविवार को परमाणु निरस्त्रीकरण को "हमेशा के लिए तय हो चुका" मामला बताया और कहा कि वह कभी भी अपने परमाणु हथियार नष्ट नहीं करेगा। उत्तर कोरिया का यह जवाब दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच हुई हालिया बैठक के जवाब में आया है, जिसमें उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को फिर से दोहराया गया था। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच गुरुवार को हुई द्विपक्षीय 'परमाणु परामर्श समूह' की बैठक में साझा लक्ष्य को फिर से दोहराए जाने के बाद उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के एक अज्ञात प्रवक्ता ने इसकी आलोचना की।</p>
<p>मीडिया द्वारा जारी एक बयान में प्रवक्ता ने कहा, "दूसरे युद्धरत पक्ष के परमाणु हथियारों को खत्म करने की बात करना बेतुका और कोरी कल्पना है।" प्रवक्ता ने कहा, "उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की बेकार की बयानबाज़ी और उसे परमाणु ख़तरे में डालने के लिए उनका सहयोग, परमाणु हथियार वाले देश के तौर पर हमारी पक्की स्थिति को कभी नहीं बदल सकता। 'परमाणु हथियारों को खत्म करने' (निरस्त्रीकरण) का मामला हमेशा के लिए तय हो चुका है।"</p>
<p>प्रवक्ता ने पिछले हफ़्ते अमेरिका और जापान के बीच हुई 'एक्सटेंडेड डेटरेंस डायलॉग' पर भी आपत्ति जतायी, जिसमें दोनों देशों ने उत्तर कोरिया को "पूरी तरह परमाणु-मुक्त" बनाने के अपने संकल्प को दोहराया। प्रवक्ता ने कहा, "अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया चाहे कितनी भी बहस कर लें, वे परमाणु हथियार वाले देश के तौर पर उत्तर कोरिया की मौजूदा स्थिति को कभी नहीं बदल पाएंगे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 18:00:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया दौरा: प्योंगयांग पहुंचे चीनी राष्ट्रपति, किम जोंग उन ने हवाई अड्डे पर किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर उत्तर कोरिया पहुंचे। प्योंगयांग एयरपोर्ट पर किम जोंग उन ने स्वयं उनका ऐतिहासिक स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच आर्थिक सहयोग, कोरियाई प्रायद्वीप और रूस के साथ रणनीतिक समन्वय पर द्विपक्षीय वार्ता होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/xi-jinping-visits-north-korea-after-7-years-north-korea/article-156371"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/south-korea.png" alt=""></a><br /><p>प्योंगयांग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर उत्तर कोरिया पहुंचे। करीब सात वर्षों बाद प्योंगयांग की उनकी यह यात्रा हो रही है। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने स्वयं हवाई अड्डे पर पहुंचकर उनका स्वागत किया, जो एक दुर्लभ और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किम के निमंत्रण पर शी प्योंगयांग पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव कार्यालय के निदेशक छाई ची तथा विदेश मंत्री वांग यी भी मौजूद थे।</p>
<p>चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी द्वारा प्रसारित दृश्यों में किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल-जू को प्योंगयांग हवाई अड्डे पर शी जिनपिंग और पेंग लियुआन का व्यक्तिगत रूप से स्वागत करते हुए देखा गया। विमान से उतरने के बाद दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया, जबकि उत्तर कोरियाई बच्चों ने चीनी राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को फूलों के गुलदस्ते भेंट किये। शी के स्वागत के लिए हवाई अड्डे पर लाल कालीन बिछाया गया था और टर्मिनल भवन पर चीन तथा उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित किये गये थे। शी ने प्योंगयांग के किम इल-सुंग स्क्वायर में आयोजित भव्य स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उत्तर कोरियाई सेना ने 21 तोपों की सलामी दी, जबकि सैन्य बैंड ने दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाये।</p>
<p>किम के साथ शी ने उत्तर कोरिया की तीनों सेनाओं के सम्मान गार्ड का निरीक्षण भी किया। स्वागत समारोह के बाद चीन के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को कुमसुसान स्टेट गेस्ट हाउस ले जाया गया। रास्ते में बड़ी संख्या में लोग सड़कों के दोनों ओर खड़े होकर उनका स्वागत करते नजर आये। दिन में दोनों नेताओं के बीच वार्ता होने की संभावना है। बातचीत में आर्थिक सहयोग, कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति तथा रूस के साथ दोनों देशों के रणनीतिक समन्वय जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हो सकते हैं।</p>
<p>दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार, शी की यात्रा से पहले पूरे प्योंगयांग को विशेष रूप से सजाया गया था। शहर की सड़कों पर शी के चित्र, चीन और उत्तर कोरिया के झंडे तथा दोनों देशों की पारंपरिक मित्रता का उल्लेख करने वाले बैनर लगाये गये थे। शी इससे पहले 20-21 जून 2019 को उत्तर कोरिया गये थे। वह दिसंबर 2012 में चीन के राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी पहली प्योंगयांग यात्रा थी। दोनों नेताओं की सबसे हालिया मुलाकात सितंबर में बीजिंग में हुई थी, जब किम जोंग उन चीन के विजय दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। उस अवसर पर वह शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सैन्य परेड में मौजूद थे। दिसंबर 2011 में अपने पिता किम जोंग-इल की मृत्यु के बाद सत्ता संभालने के पश्यात किम जोंग उन अब तक पांच बार चीन जाकर शी जिनपिंग से मुलाकात कर चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:35:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डिजिमोहे फ्यूचर इम्पैक्ट टेक अवॉर्ड्स 2026 में मुख्य अतिथि होंगे बालमुकुंद आचार्य, युवाओं और नवाचार को मिलेगा नया मंच</title>
                                    <description><![CDATA[डिजिमोहे फ्यूचर इम्पैक्ट टेक अवॉर्ड्स 2026 के लिए आयोजकों ने हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य को आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 27 जून 2026 को होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश के होनहार स्टार्टअप्स, डिजिटल क्रिएटर्स और तकनीकी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/balmukund-acharya-will-be-the-chief-guest-at-digimohe-future/article-156226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डिजिमोहे फ्यूचर इम्पैक्ट टेक अवॉर्ड्स 2026 के आयोजन के संबंध में आज जयपुर संभाग के आयोजकों पंकज गुप्ता जी एवं मानव जैन जी द्वारा हाथोज धाम के स्वामी एवं हवामहल विधानसभा क्षेत्र के विधायक  से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारने का सादर निमंत्रण प्रदान किया गया। श्री बालमुकुंद आचार्य महाराज ने इस आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति देने की सहमति प्रदान की।</p>
<p>बालमुकुंद आचार्य महाराज के कार्यक्रम में शामिल होने की स्वीकृति से आयोजन को विशेष प्रेरणा एवं गरिमा प्राप्त होगी। आयोजन समिति ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन युवाओं को राष्ट्र निर्माण, संस्कृति संरक्षण एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि डिजिमोहे फ्यूचर इम्पैक्ट टेक अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन आगामी 27 जून 2026 को जयपुर स्थित Rajasthan International Centre में किया जाएगा। यह कार्यक्रम राजस्थान के युवाओं, स्टार्टअप्स, डिजिटल क्रिएटर्स, नवाचारकर्ताओं एवं तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p>आयोजन समिति ने बताया कि इस मंच के माध्यम से राजस्थान के युवा उद्यमियों एवं डिजिटल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में तकनीक, नवाचार, डिजिटल मीडिया, स्टार्टअप एवं सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 09:39:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेपाली प्रतिनिधिमंडल ने की भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात: नवीन ने किया लामिछाने का गर्मजोशी से स्वागत, शासन मॉडल और जनसम्पर्क जैसे मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल की सत्तारूढ़ आरएसपी के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने भाजपा मुख्यालय में नितिन नवीन से मुलाकात की। पांच दिवसीय भारत यात्रा पर आए लामिछाने दोनों दलों के बीच संगठनात्मक कार्यप्रणाली और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं। वे पीएम मोदी और विदेश मंत्री से भी मुलाकात कर सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nepalese-delegation-met-bjp-president-naveen-warmly-welcomed-lamichhane-issues/article-155754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/nepal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने मंगलवार को यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। यहां के दीनदयाल मार्ग पर स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंचने पर श्री नवीन ने श्री लामिछाने का गाजे-बाजे के साथ भव्य स्वागत किया। उनके सम्मान में वहां नृत्य और वाद्य संगीत आयोजित किया गया था। आरएसपी के नेता श्री लामीछाने के सम्मन में राजधानी में रह रहे नेपाली समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।</p>
<p>लामिछाने पांच दिवसीय भारत यात्रा पर आए हैं। उनके साथ नेपाली संसद के कई अन्य नेता और प्रतिनिधि भी मौजूद हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भाजपा और आरएसपी के बीच संवाद स्थापित करना, संगठनात्मक कार्यप्रणाली और जन-केंद्रित राजनीतिक पहुंच पर विचारों का आदान-प्रदान करना है। इसके साथ ही नेपाली प्रतिनिधिमंडल लोकतांत्रिक व्यवस्था, शासन मॉडल और जनसम्पर्क जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करेगा।</p>
<p>लामीछाने ने इस मुलाकात में भाजपा अध्यक्ष को कुछ सांस्कृतिक उपहार भेट किये। इन औपचारिकताओं के बाद दोनों पक्षों की बैठक हुई। भाजपा के पदाधिकारियों के अनुसार दोनों नेताओं ने भारत-नेपाल के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए परस्पर सहयोग बढ़ाने के बारे में बातचीत की। भाजपा ने उम्मीद जतायी है कि इस मुलाकात से दोनों राजनीतिक दलों के बीच सार्थक संवाद और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लामिछान के नेतृत्व में आया प्रतिनिधनमंडल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर सकता है। उल्लेखनीय है कि नवीन ने 26 मई को भाजपा को जानिए पहल के तहत 12 देशों के राजनयिक मिशनों के प्रमुखों से मुलाकात की थी। इस मुलाकात का उदेश्य विदेशी मिशनों के साथ संवाद तंत्र को मजबूत करना था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:53:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जयराम रमेश का बड़ा हमला: पश्चिम एशिया संकट और तेल कीमतों पर केंद्र की खामोशी अनुचित, कहा- भारत का बहुत कुछ दांव पर</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान वार्ता और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर केंद्र सरकार की चुप्पी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल की कीमतों पर पड़ेगा, इसलिए सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jairam-rameshs-big-attack-centres-silence-on-west-asia-crisis/article-155704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jairamm-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-अमेरिका वार्ता का भारत पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसमें भारत का बहुत कुछ दाव पर लगा हुआ है और ऐसे में केंद्र सरकार की चुप्पी को उचित नहीं कहा जा सकता है। पार्टी का कहना है कि यदि वार्ता सफल होती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है और वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव कम होगा, जिसका सीधा लाभ भारत को मिलेगा।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने के लिए बातचीत चल रही है लेकिन इस बीच इज़रायल की लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई के कारण किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों पर नाराजगी जता चुके हैं और दुनिया के कई अन्य देश भी लेबनान में इज़रायली अभियान की आलोचना कर रहे हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि ऐसे समय में जब इज़रायल की कार्रवाई संभावित अमेरिका-ईरान समझौते को प्रभावित कर सकती है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:31:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>'टैलेंट हंट' पहल के ज़रिए राहुल गांधी कर रहे एक नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत, युवाओं को मिलेगा बड़ा मौका : महेश गौड़</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने कहा कि राहुल गांधी राजनीति में 'टैलेंट हंट' के जरिए नई संस्कृति की शुरुआत कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और राष्ट्रीय मुद्दों की गहरी समझ रखने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को सीधे पार्टी प्रवक्ता बनाना और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mahesh-gaur-rahul-gandhi-is-starting-a-new-political-culture/article-155624"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/22.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने कहा है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ताओं की नियुक्ति के लिए "टैलेंट हंट" (प्रतिभा खोज) पहल शुरू करके एक नयी राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत कर रहे हैं। गांधी भवन में मीडिया समिति के अध्यक्ष समा राममोहन रेड्डी, पशुधन विकास निगम के अध्यक्ष चरण कौशिक यादव, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) समन्वयक शरण पटेल के साथ सोमवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री गौड़ ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों की पहचान करना है जिन्हें राष्ट्रीय और राज्य दोनों तरह की राजनीति की गहरी समझ हो। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में ऐसे व्यक्तियों के चयन पर भी ध्यान दिया जाएगा जो धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और जनसेवा के प्रति समर्पित हों, चाहे वे किसी भी पारंपरिक पार्टी पृष्ठभूमि से आते हों। इस कार्यक्रम को महत्वाकांक्षी युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर बताते हुए प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा कि श्री गांधी युवा पीढ़ी के लिए अधिक अवसर पैदा करने और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने कहा, "टैलेंट हंट पहल का उद्देश्य उन सक्षम युवाओं को प्रोत्साहित करना है जो सामाजिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ राजनीति में प्रवेश करना चाहते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 16:05:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-नेपाल सीमा विवाद : केवल भारत ही नहीं ; नेपाल ने भी किया भारतीय जमीन पर कब्जा, बालेन्द्र ने कहा- कूटनीतिक वार्ता से निकाला जाएगा समाधान </title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा कि केवल भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा विवाद को इतिहासकारों और सर्वेक्षकों की संयुक्त टीम के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-nepal-border-dispute-not-only-india-but-nepal-also-occupied/article-155577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/nepal-election.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रविवार को संसद में एक विवादित बयान देते हुए कहा कि जैसे भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, वैसे ही नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। जानकारी के अनुसार, नेपाल के प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी के सीमा विवाद को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद आरेन राय के संसद में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए शाह ने कहा, प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है। </p>
<p><strong>सीमा विवाद सुलझाने को बनेगी संयुक्त टीम</strong></p>
<p>शाह ने बताया कि नेपाल इस संबंध में भारत को पहले ही एक आधिकारिक कूटनीतिक नोट भेज चुका है और वहां से जवाब भी मिल गया है। उन्होंने कहा, भारत से मिले जवाब में कहा गया है कि दोनों सरकारें इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और क्षेत्र के जानकारों को शामिल कर टीमें बनाएंगी और बातचीत के जरिए इसका समाधान तलाशेंगी।</p>
<p><strong>सीमा मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन से भी बातचीत</strong></p>
<p>नेपाल के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि नेपाल ने इस सीमा विवाद को लेकर चीन और ब्रिटेन के साथ भी कूटनीतिक चर्चा की है, क्योंकि यह मुद्दा उस समय का है, जब अंग्रेज इस क्षेत्र को छोड़कर गए थे, इसलिए ब्रिटेन को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:18:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार का अमेरिका दौरा: मार्को रूबियो से करेंगे मुलाकात, अमेरिका- ईरान के बीच शांति समझौते पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मिलने अमेरिका रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौता कराना है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के समर्थन से पाकिस्तान खुद को कूटनीतिक मध्यस्थ के रूप में पेश कर क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना चाहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ishaq-dar-visits-america-will-meet-marco-rubio-a-permanent/article-155378"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ishaq-dar-pakistan-foreign-minister.jpg" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार शुक्रवार को अमेरिका के लिए रवाना होंगे, जहाँ वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ बातचीत करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच एक स्थायी शांति समझौते के लिए बातचीत को सुविधाजनक बनाना है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह मुलाक़ात पहले गुरुवार को होने वाली थी, लेकिन बाद में इसका समय बदल दिया गया। मंत्रालय के अनुसार डार और रूबियो "द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।"</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने बताया, "चर्चाओं का मुख्य केंद्र प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करना होगा, साथ ही बातचीत और कूटनीति के ज़रिए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के पाकिस्तान के प्रयासों पर भी ध्यान दिया जाएगा।" मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह दौरा "अमेरिका के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही व्यापक साझेदारी को और गहरा करने के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है," पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क स्थापित करने के प्रयासों में खुद को एक मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है। हाल के हफ़्तों में, वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी अमेरिका और ईरान दोनों जगहों के सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क बनाए हुए हैं।</p>
<p>इससे पहले गुरुवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद, अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर नए हमले किए। बैठक के दौरान, रूबियो ने कहा कि प्रशासन को उम्मीद है कि "अगले कुछ घंटों या दिनों में" कोई प्रगति देखने को मिलेगी, साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर कूटनीति विफल रहती है तो अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता की पहल को प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का भी सार्वजनिक समर्थन मिला है। उन्होंने ईद के अवसर पर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से बात की और उम्मीद जताई कि जल्द ही एक ऐसा शांति समझौता हो सकता है जो ईरान के "सम्मान और गरिमा" को बनाए रखेगा। शरीफ़ ने कहा कि ऐसा समझौता ईरान की आर्थिक क्षमता को उजागर करने में मदद कर सकता है और पूरे क्षेत्र को व्यापक लाभ पहुँचा सकता है। डार के शुक्रवार देर शाम तक इस्लामाबाद लौटने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 14:43:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत दौरे पर मार्को रुबियो: पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात, बोले-ईरान के साथ समझौता अब भी संभव, 'काफी मज़बूत' प्रस्ताव मेज़ पर </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत में कहा कि ईरान के सामने एक "काफी मजबूत" शांति प्रस्ताव रखा गया है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु वार्ता शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई खराब समझौता नहीं करेंगे और कूटनीति को सफल होने का पूरा अवसर दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/marco-rubio-will-meet-pm-modi-during-his-visit-to/article-154916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/marco-robio.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान के साथ समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है और इस दिशा में एक "काफी मजबूत" प्रस्ताव वार्ता मेज पर रखा गया है। रुबियो ने भारत यात्रा के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रस्ताव में ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने तथा परमाणु मुद्दों पर वास्तविक, महत्वपूर्ण और समयबद्ध वार्ता में शामिल होने की बात शामिल है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि हम इसे सफल बना लेंगे। इसे खाड़ी देशों और वैश्विक स्तर पर व्यापक समर्थन प्राप्त है। जिन भी देशों से हमने इस पर चर्चा की, उनका मानना है कि यह न केवल बेहद उचित बल्कि दुनिया के हित में भी है।" रुबियो ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर जल्दबाजी में समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति कोई गलत समझौता नहीं करेंगे। हम देखेंगे कि आगे क्या होता है। कूटनीति को सफल होने का पूरा अवसर दिया जाएगा, उसके बाद ही अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।"</p>
<p>समझौते में देरी के संबंध में पूछे जाने पर रुबियो ने कहा कि अब सब कुछ ईरान की प्रतिक्रिया पर निर्भर है। उन्होंने कहा, "ईरानी व्यवस्था को जवाब देने में थोड़ा अधिक समय लगता है। उन्होंने दोहराया, "राष्ट्रपति खराब समझौता नहीं करेंगे। या तो अच्छा समझौता होगा, या फिर हमें इस मुद्दे से किसी अन्य तरीके से निपटना पड़ेगा। हालांकि हमारी प्राथमिकता अच्छा समझौता ही है।" लेबनान के मुद्दे पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका उस विषय पर अलग से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि समस्या इजरायल या लेबनान सरकार नहीं, बल्कि हिजबुल्लाह है, जो लेबनान की जनता को नुकसान पहुंचा रहा है। रुबियो ने कहा कि इज़रायल को अपनी सुरक्षा का अधिकार हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा, "यदि हिजबुल्ला मिसाइल दागता है या ऐसा करने की तैयारी करता है, तो इजरायल को जवाब देने और इसे रोकने का पूरा अधिकार है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 14:06:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की ओर : अमेरिका-ईरान में बनी सहमति; वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिलने के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक ढांचागत समझौता 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके तहत दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने और 30 दिनों के भीतर रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमत हुए हैं। फिलहाल परमाणु वार्ता को स्थगित रखा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/strait-of-hormuz-will-open-soon-america-and-iran-agreed/article-154910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran2.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका और ईरान ने एक प्रारंभिक समझौते के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई है। ‘वाशिंगटन’ पोस्ट ने एक अज्ञात राजनयिक के हवाले से यह जानकारी दी। मीडिया ने एक अज्ञात ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका-ईरान के प्रारंभिक शांति समझौते में परमाणु वार्ता को बाद की तारीख तक स्थगित करने का भी प्रावधान है। अखबार ने एक अज्ञात राजनयिक के हवाले से बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच प्रारंभिक ढांचागत समझौते को अभी तक ईरानी पक्ष द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका-ईरान ढांचागत समझौता "95 प्रतिशत पूरा हो चुका है", हालांकि वार्ताकार अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य और तेहरान के परमाणु भंडार से संबंधित शब्दों पर बहस कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान के साथ समझौते पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है और अंतिम पहलुओं और विवरणों पर चर्चा चल रही है, जिनकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने चैनल को पुष्टि की, कि ईरान ने सैद्धांतिक रूप से समझौते के ढांचे पर सहमति दे दी है।</p>
<p>एक अधिकारी ने ब्रॉडकास्टर को बताया, "हम 95 प्रतिशत तक पहुँच चुके हैं। परमाणु भंडार और होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमारा समझौता हो चुका है, लेकिन हम भाषा पर बातचीत कर रहे हैं।" 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिनमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। 8 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:14:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर अमेरिका- ईरान के बीच बन सकती है सहमति, होर्मुज जलडमरूमध्य से हटेंगी बारूदी सुरंगें : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के युद्धविराम समझौते का मसौदा तैयार हो गया है। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य शुल्क मुक्त खुलेगा और ईरान वहां से बारूदी सुरंगें हटाएगा। बदले में अमेरिका तेल बिक्री पर नाकेबंदी हटाएगा। समझौते में परमाणु कार्यक्रम रोकने और हिजबुल्लाह-इजरायल संघर्ष विराम भी शामिल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/an-agreement-can-be-reached-between-america-and-iran-on/article-154856"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका और ईरान 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और इस अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा। एक्सियोस ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है। इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है और इसके अंतिम पहलुओं तथा विवरणों पर चर्चा चल रही है, जिसकी जल्द घोषणा की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ने दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन का मसौदा साझा किया है।</p>
<p>इसके तहत दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए वैध समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा तथा ईरान वहां बिछाई गयी बारूदी सुरंगों को हटाने पर सहमत होगा, ताकि जहाजों की आवाजाही निर्बाध रूप से जारी रह सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाएगा और ईरान को तेल की स्वतंत्र बिक्री की अनुमति देने के लिए कुछ रियायतें देगा। रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि ईरान जितनी जल्दी होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाकर जहाजरानी बहाल करेगा, उतनी ही जल्दी नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी। एक्सियोस ने बताया कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में ईरान की ओर से कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता, यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को निलंबित करने तथा उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने पर बातचीत करने का प्रावधान मिल है।</p>
<p>स्थिति के जानकार दो सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को संवर्धन कार्यक्रम निलंबित करने और परमाणु सामग्री छोड़ने को लेकर रियायतों के दायरे पर ‘मौखिक आश्वासन’ दिये हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैन्य बल अगले 60 दिनों तक वहीं बने रहेंगे और यदि तेहरान अंतिम रूप से समझौता स्वीकार कर लेता है तो क्षेत्र से हट जाएंगे। एक्सियोस ने यह भी कहा कि अंतिम समझौता होने की स्थिति में अमेरिका 60 दिनों के भीतर ईरान की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने पर चर्चा के लिए तैयार है। प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में हिज्बुल्ला और इजरायल के बीच सशस्त्र संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान भी शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:52:57 +0530</pubDate>
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