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                <title>Sumit Roy BNSS Section 94 Notice - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Sumit Roy BNSS Section 94 Notice RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अभिषेक बनर्जी के करीबी सुमित रॉय पहुंचे हाईकोर्ट: 4 FIR को बताया राजनीतिक साजिश, जांच एजेंसियों पर मनमानी का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के सहयोगी सुमित रॉय ने अपने खिलाफ दर्ज चार एफआईआर को राजनीतिक से प्रेरित बताते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में उन्होंने इन प्राथमिकियों और बीएनएसएस की धारा 94 के तहत जारी नोटिसों को रद्द करने तथा किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से interim राहत की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sumit-roy-close-to-abhishek-banerjee-reached-the-high-court/article-162518"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)30.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता अभिषेक बनर्जी के सहयोगी सुमित रॉय ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अपने खिलाफ दर्ज चार प्राथमिकियों को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये मामले एक "सुनियोजित और राजनीतिक रूप से प्रेरित" आपराधिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने रॉय को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करने की अनुमति दे दी है। इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है। रॉय ने अपनी याचिका में चार प्राथमिकियों की वैधता के साथ-साथ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 94 के तहत उन्हें जारी किए गए नोटिस पर भी सवाल उठाए हैं।</p>
<p>रॉय ने अपनी याचिका में कालीतला आउटपोस्ट मामला, बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन के दो मामले और रवींद्रनगर पुलिस स्टेशन के मामले का जिक्र किया है। उनकी कानूनी टीम ने आरोप लगाया है कि प्राथमिकी में उनके द्वारा किए गए किसी भी कथित अपराध का कोई खास या स्पष्ट विवरण नहीं है। याचिका में दावा किया गया है कि ये आरोप "अस्पष्ट, बेबुनियाद और मूल रूप से त्रुटिपूर्ण" हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि राज्य में राजनीतिक हालात बदलने के बाद जांच एजेंसियों ने रॉय के खिलाफ मनमाने ढंग से कार्रवाई की है। इसमें एजेंसियों पर निष्पक्ष जांच करने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम करने का भी आरोप लगाया गया है।रॉय ने सभी चारों प्राथमिकी और बीएनएसएस की धारा 94 के तहत जारी नोटिस को रद्द करने की मांग की है।</p>
<p>उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक अदालत इस मामले का निपटारा नहीं कर देती, तब तक पुलिस या जांच एजेंसियों द्वारा उनके खिलाफ किसी भी कठोर कार्रवाई से उन्हें सुरक्षा दी जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 17:34:56 +0530</pubDate>
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