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                <title>वन अपराध दिखा फिर भी नहीं रोका, कार्रवाई में देरी से सवालों के घेरे में अफसरों की कार्य प्रणाली</title>
                                    <description><![CDATA[एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी द्वारा टाइगर रिजर्व के बफर में पत्थरों का अवैध स्टॉक व  विद्युत पोल  का मामला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/forest-offense-observed-but-not-halted--officials--conduct-under-scrutiny-due-to-delayed-action/article-162617"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)50.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन में एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी केसीसी बिल्डकॉन द्वारा किए कथित वन अपराध के मामले में अब वन विभाग के डाबी अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे आ गई। दैनिक नवज्योति की पड़ताल में सामने आए साक्ष्यों के अनुसार, एयरपोर्ट की डायवर्टेड भूमि से बाहर वनभूमि पर कथित अवैध खनन, पत्थरों का अवैध स्टॉक और विद्युत लाइन बिछाने की जानकारी डाबी रेंज के तत्कालीन फोरेस्टर व वर्तमान रेंजर को 24 जून के पहले से थी। इसके बावजूद समय वन अपराध नहीं रोका गया। जब 3 जुलाई को दैनिक नवज्योति ने मामले को उजागर किया तब विभाग ने आनन-फानन में निर्माण एजेंसी के खिलाफ नोटिस जारी कर मुकदमा दर्ज किया। लेकिन, अब तक इससे आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बता दें, जाखमूंड वनखंड रामगढ़ टाइगर रिजर्व का बफन जोन है, जो बूंदी वनमंडल के नियंत्रण में आता है।</p>
<p><strong>300 मीटर बाहर फॉरेस्ट लैंड पर  खनन व  स्टॉक</strong><br />नवज्योति के पास मौजूद साक्ष्यों के अनुसार, एयरपोर्ट की डायवर्टेड भूमि से 250 से 300 मीटर बाहर फॉरेस्ट लैंड पर करीब 130 से 150 बीघा क्षेत्र में कथित अवैध खनन, परिवहन व जगह-जगह भारी मात्रा में पत्थरों का स्टॉक किया गया। बिना सक्षम अनुमति जेसीबी से विद्युत लाइन बिछाने की गतिविधि भी सामने आई। इसकी जानकारी तत्कालीन रामपुरिया नाका प्रभारी फॉरेस्टर व वर्तमान डाबी रेंजर द्वितीय को थी। मौके का जायजा लेने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>एसीएफ के कार्रवाई निर्देशों को किया अनदेखा</strong><br />डाबी रेंज के सहायक वन संरक्षक नितिन सैनी ने 24 जून को रामपुरिया नाका क्षेत्र के जाखमूंड वनखंड का निरीक्षण किया था, जिसमें एयरपोर्ट के लिए प्रत्यावर्तित भूमि के बाहर नियम विरुद्ध वनभूमि पर पत्थरों का अवैध स्टॉक और 50 से अधिक विद्युत पोल लगे होने की पुष्टी हुई। इस पर एसीएफ ने संबंधित रेंजर को निर्माण एजेंसी व जेवीवीएनएल के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं की गई।</p>
<p><strong>अब तक न सर्वे, न नुकसान का आकलन</strong><br />खबर प्रकाशित होने के बाद से अब तक वन अफसरों द्वारा वनभूमि को हुए नुकसान का सर्वे और आकलन नहीं कराया गया। वहीं, निर्माण एजेंसी के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भी आगे की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।</p>
<p>एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी द्वारा फोरेस्ट लैंड में किए कथित वन अपराध की जानकारी 24 जून को डाबी एसीएफ के निरीक्षण के दौरान लगी थी। नाकेदार (फॉरेस्टर) को मौके की वास्तविक स्थिति, नुकसान व संबंधित एजेंसी के अधिकारियों की जानकारी जुटाने में एक-दो दिन लगे। इसके बाद नोटिस जारी कर एफआईआर दर्ज की गई। इसके आगे फिलहाल अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है, स्थिति यथावत है।<br /><strong>-मनीष शर्मा, रेंजर द्वितीय डाबी रेंज बूंदी वन मंडल</strong></p>
<p><strong>एयरपोर्ट ऑथोरिटी से मांगा जवाब, जांच जारी</strong><br />मामला जानकारी में आते ही एफआईआर व नोटिस जारी करने की कार्रवाई की है। एयरपोर्ट निर्माण फर्म केसीसी बिल्ड कॉन ने नोटिस का जवाब दिया है, जिससे हम संतुष्ट नहीं हैं। जवाब एयरपोर्ट ऑथोरिटी से आना चाहिए था, डायवर्जन उन्हीं के स्तर से हुआ है। हम उनसे जवाब मांग रहे हैं। जेवीवीएनएल से अभी जवाब नहीं आया है। उन्हें रिमांडर लिख रहे हैं। सर्वे करवाकर वनभूमि को हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा। वर्तमान में मामले की जांच जारी है, यदि एफसीए कानून का उल्लंघन हुआ तो उसकी भी धाराएं जोड़ी जाएंगी।<br /><strong>-डॉ. आलोक गुप्ता, उप वन संरक्षक बूंदी</strong></p>
<p>मैं बाहर हूं, इस मामले में क्या अपडेट है, जानकारी नहीं है। इस संबंध में आप एयरपोर्ट ऑथोरिटी से बात कर सकते हैं।<br /><strong>-जितेंद्र कुमार, लाइजनिंग ऑफिसर केसीसी बिल्डकॉन कंपनी</strong></p>
<p>सहायक वन संरक्षक डाबी के निरीक्षण के बाद निर्माण एजेंसी द्वारा किया गया वन संरक्षण अधिनियम एवं डायवर्जन शर्तो का उल्लघंन और वन अपराध, बूंदी डीएफओ के संज्ञान में आ गया था। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं करना, प्रकरण में उनकी भूमिका को संदिग्ध बनाता है।<br /><strong>-तपेश्वर सिंह भाटी, एडवोकेट एवं पर्यावरणविद्</strong></p>
<p><strong>तत्कालीन फॉरेस्टर राजेश सेन ने नहीं दिया जवाब</strong><br />मामले में पक्ष जानने के लिए नवज्योति ने जाखमूंड वनखंड के रामपुरिया नाका प्रभारी वनपाल राजेश सेन से फोन पर संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया और न ही मैसेज का जवाब दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 14:51:02 +0530</pubDate>
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