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                <title>supreme court news - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कंवरलाल मीणा की विधायकी जाना तय, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका </title>
                                    <description><![CDATA[इससे पहले अदालत मीणा को एसडीएम पर पिस्टल तानने और सरकारी संपत्ति को क्षतिग्रस्त करने के मामले में 3 साल की सजा सुना चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/supreme-court-rejected-kanwarlal-meena-to-go-to-the-legislature/article-113330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer24.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बारां के अंता विधायक भाजपा कंवरलाल मीणा की विधायकी जाना लगभग तय है। मीणा ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने उनकी सभी दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने मीणा को ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया है। </p>
<p>इससे पहले अदालत मीणा को एसडीएम पर पिस्टल तानने और सरकारी संपत्ति को क्षतिग्रस्त करने के मामले में 3 साल की सजा सुना चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 May 2025 15:19:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>नायडू को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट नौ अक्टूबर को करेगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस हिरासत के खिलाफ उनकी याचिका पर तत्काल विचार करने से इनकार कर दिया था, लेकिन मुकदमा रद्द करने की गुहार पर विचार के लिए सहमति व्यक्त की थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/no-relief-for-naidu-supreme-court-will-hear-on-october/article-58676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश में कौशल विकास केंद्रों की स्थापना में कथित घोटाले से संबंधित एक मामले में पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को तत्काल राहत देने की उनकी गुहार ठुकराते हुए मंगलवार को कहा वह इस मामले से उच्च न्यायालय में पेश दस्तावेज प्राप्त राज्य सरकार से होने के बाद नौ अक्टूबर को इस पर विचार करेगा।</p>
<p>न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने श्री नायडू की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं- वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, ए एम सिंघवी और सिद्धार्थ लूथरा और आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और रंजीत कुमार की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह इस मामले में सोमवार को विचार करेगी।</p>
<p>पीठ ने आंध्र प्रदेश सरकार से कहा कि वह इस मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों का पूरा संकलन शीर्ष अदालत के समक्ष पेश करे। शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर को  उनकी  पुलिस हिरासत के खिलाफ उनकी याचिका पर तत्काल विचार करने से इनकार कर दिया था, लेकिन मुकदमा रद्द करने की गुहार पर विचार के लिए सहमति व्यक्त की थी।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया था। पीठ ने कहा था कि यह अदालत निचली अदालत को चंद्रबाबू नायडू की पुलिस हिरासत की मांग करने वाले आवेदन पर विचार करने से नहीं रोकेगी।</p>
<p>लूथरा ने अदालत से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A को देखने का अनुरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को हिरासत में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि कोई भी पुलिस थाना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले लोक सेवक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।</p>
<p>इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि इस मामले को 3 अक्टूबर को एक पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। नायडू ने उच्च न्यायालय के 22 सितंबर के आदेश के खिलाफ पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें नौ दिसंबर 2021 को दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Oct 2023 19:45:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>EVM सोर्स कोड ऑडिट की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों EVM में इस्तेमाल किए गए सोर्स कोड के ऑडिट की मांग वाली एक जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-rejects-petition-for-evm-source-code-audit/article-57781"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/supreme-court--21.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सुनील अह्या की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर के स्रोत कोड को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे EVM के हैक होने का खतरा बढ़ जाएगा।</p>
<p>पीठ ने कहा, ''हम ऐसे नीतिगत मुद्दे पर याचिकाकर्ता द्वारा मांगे गए निर्देश जारी करने के इच्छुक नहीं हैं।  इस अदालत के समक्ष यह संकेत देने के लिए कोई तथ्य नहीं है कि चुनाव आयोग अपने आदेश को पूरा करने के लिए उचित कदम नहीं उठा रहा है।"</p>
<p>याचिकाकर्ता ने कहा कि यह सिर्फ EVM के सोर्स कोड के ऑडिट से संबंधित याचिका है। पीठ ने याचिकाकर्ता से सवाल पूछा कि इस पर संदेह करने के लिए क्या तथ्य है?</p>
<p>इस पर सुनील ने कहा कि चुनाव आयोग ने किसी विशेष मानक का पालन नहीं किया है। उसने किसी भी मानक का खुलासा नहीं किया है। कोई भी ऑडिट मान्यता प्राप्त मानक के अनुसार होना चाहिए। </p>
<p>उन्होंने दलील दी कि स्रोत EVM का दिमाग है और यह मामला लोकतंत्र के अस्तित्व से जुड़ा है।</p>
<p>पीठ ने कहा कि उसे पता है कि सोर्स कोड क्या होता है, क्योंकि जब कोई आवेदन शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर डाला जाता है तो उसे सुरक्षा ऑडिट से गुजरना पड़ता है।</p>
<p>जनहित याचिका में एक विशेष मानक IEEE 1028 को लागू करते हुए EVM के स्रोत कोड के स्वतंत्र ऑडिट की मांग की गई है। साथ ही मांग की कि स्रोत का स्वतंत्र रूप से ऑडिट किया जाना चाहिए और ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक किया  जाना  चाहिए।</p>
<p>पीठ ने आगे कहा कि याचिका 2019 के आम चुनाव से पहले और फिर अप्रैल 2019 में दायर की गई थी।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने तब कहा था कि वह आम चुनाव की पृष्ठभूमि के खिलाफ जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार नहीं कर सकती है। अदालत ने याचिकाकर्ता को स्वतंत्रता दी गई थी कि वह नये सिरे से आवेदन करें।</p>
<p>इसके बाद  सुनील ने 2020 में शीर्ष अदालत के समक्ष एक और जनहित याचिका दायर Sकी थी। इसके बाद उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी गई।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से कहा कि चूंकि चुनाव आयोग ने उनके तीन अभ्यावेदनों का जवाब नहीं दिया, इसलिए उन्हें फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-rejects-petition-for-evm-source-code-audit/article-57781</link>
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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 18:58:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने रियल इस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम को सही ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। रियल इस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम 2016(रेरा)को सही ठहराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का दूरगामी नतीजा सामने आना निश्चित है। उल्लेखनीय हैम कि यह फैसला उन सभी चालू रियल्टी परियोजनाओं के सम्बंध में है, जिन्हें उक्त कानून के प्रभावी होने तक पूरा होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस कानून में विहित राज्यों से सम्बंधित नियमों में भारी परिवर्तन होंगे।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%B2-%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%9F--%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8--%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A0%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-2428"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/sc2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>। रियल इस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम 2016(रेरा)को सही ठहराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का दूरगामी नतीजा सामने आना निश्चित है। उल्लेखनीय हैम कि यह फैसला उन सभी चालू रियल्टी परियोजनाओं के सम्बंध में है, जिन्हें उक्त कानून के प्रभावी होने तक पूरा होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस कानून में विहित राज्यों से सम्बंधित नियमों में भारी परिवर्तन होंगे।  उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को साफ कर दिया कि इस कानून के लागू होने की तिथि तक अपूर्ण रहे और पूरा होने का प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं करने वाली परियोजनाओं पर रेरा कानून लागू होगा। उल्लेखनीय है कि उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु के नियम इस निर्णय के अनुपकूल नहीं हैं। इन राज्यों को सभी चालू परियोजनाओं को रेरा के अंतर्गत लाने के लिए अपने नियमों में संशोधन करना पड़ सकता है।  वर्ष 2017 में तत्कालीन आवासन मंत्री वेंकैया नायडू ने विभिन्न राज्यों द्वारा रेरा कानून को कमजोर करने पर चिंता जताई थी।</p>
<p><br /> उन्होंने उन राज्यों से कहा था कि उन्हें ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने चालू परियोजनाओं और रेरा के क्षेत्राधिकार में टकराव के सम्बंध में कहा था कि जिन परियोजनाओं को एक मई 2017 तक पूरा होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला, उन्हें रेरा के अंतर्गत रहना होगा।</p>
<p><br /> मकान खरीदने वालों की संस्था कलेक्टिव एफोर्ट्स के अध्यक्ष अभय उपाध्याय नेम कहा कि सुप्रीम कोर्ट को फैसले ने इस कानून के लागू होते समय तक अपूर्ण सभी रियल इस्टेट परियोजनाओं पर रेरा के क्षेत्राधिकार की पुष्टि कर दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Nov 2021 12:56:15 +0530</pubDate>
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