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                <title>regulation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>PACS को बड़ी राहत: आदर्श उप नियमों के तहत गतिविधियों के लिए अलग अनुमति जरूरी नहीं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने PACS के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाते हुए नया आदेश जारी किया है। अब आदर्श उप नियमों के तहत आने वाली गतिविधियों के लिए अलग से अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, जिससे सहकारी समितियां अधिक स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-relief-to-pacs-separate-permission-is-not-necessary-for/article-151853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/nehru-sahakar-bhawann.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सहकारी क्षेत्र को गति देने के लिए रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, राजस्थान ने महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है। इसके तहत राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2001 के अंतर्गत पंजीकृत प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को बड़ी राहत प्रदान की गई है। जारी परिपत्र के अनुसार, PACS द्वारा अंगीकृत “आदर्श उप नियमों (Model Bye-laws)” में जिन गतिविधियों का उल्लेख पहले से किया गया है, उनके संचालन के लिए अब किसी अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये आदर्श उप नियम पूर्व से ही अनुमत माने जाएंगे।</p>
<p>सरकार का उद्देश्य इस निर्णय के माध्यम से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना और PACS को विविध गतिविधियां समय पर शुरू करने में सहूलियत प्रदान करना है। इससे सहकारी समितियों के कार्यों में तेजी आएगी और अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कमी होगी। रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा द्वारा जारी इस आदेश से प्रदेशभर की PACS को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 16:31:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉलोनियों के नियमन के लिए कट ऑफ डेट दिसंबर 2018 होगी</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बसी कच्ची बस्तियों के नियमन के लिए राज्य सरकार नई पॉलिसी लाएगी। इसका प्रारूप तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-cut-off-date-for-regulation-of-colonies-will-be-december-2018--government-will-bring-a-new-policy-for-regulation-of-raw-settlements/article-4644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/jaipur_kachi_basti_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बसी कच्ची बस्तियों के नियमन के लिए राज्य सरकार नई पॉलिसी लाएगी। इसका प्रारूप तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा। इसके साथ ही आवासन मण्डल क्षेत्राधिकार की कॉलोनियों में पट्टे देने के लिए बोर्ड अपने एक्ट में संशोधन करेगा ताकि बोर्ड के मकानों के बेचान के बाद आखिरी क्रेता के पक्ष में नियमितिकरण किया जा सके। बोर्ड का क्षेत्र ट्रांसफर होने के बाद निकाय इन कॉलोनियों में पट्टे देने के लिए बोर्ड से एनओसी मांग रहे थे। कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन के लिए कट ऑफ डेट को भी दिसंबर 2018 तक बढ़ाई जाएगी। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्रशासन शहरों के संग अभियान की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। अपने आवास पर हुई बैठक में धारीवाल ने नई नीति का प्रस्ताव करने करने के यूडीएच अधिकारियों को निर्देश दिए।<br /><br /><br /><strong>हाउसिंग बोर्ड एक्ट में संशोधन कर शेष कॉलोनियों में देगा पट्टे<br />कट ऑफ डेट बढ़ाने से मिलेगी राहत</strong><br />साथ ही नियमन के लिए मौजूदा कट ऑफ डेट को बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। अभी नियमन के लिए कॉलोनियों की कट ऑफ डेट 15 अगस्त, 2009 निर्धारित है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर दिसंबर 2018 करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के लिए 17 जून, 1999 है, जिसे भी बढ़ाकर दिसंबर 2018 किया जा सकता है। बैठक में बताया गया कि कट ऑफ डेट बढ़ाने के लिए भू-राजस्व अधिनियम में बदलाव जरूरी है, ऐसा होने से हजारों की तादाद में भूखण्डधारियों को राहत मिल सकेगी। भूखण्ड व सुविधा क्षेत्र में 60:40 के अनुपात की बजाय 70:30 अनुपात भी हो सकता है। साथ ही पट्टा लेने के लिए पहले की तुलना में कम राशि देनी होगी।<br /><br /><strong><br />नाम हस्तांतरण के मामलों में आर्थिक भार कम</strong><br />मकान व भूखण्ड का नाम हस्तांतरण के लिए विज्ञप्ति प्रकाशित कराने में विस्तृत ब्यौरा नहीं देने का निर्णय लिया गया ताकि आवेदक पर आर्थिक भार कम हो। प्रशासन शहरों के संग अभियान के कैम्प मार्च में फिर शुरू हो सकते है। इसके लिए धारीवाल-मुख्यमंत्री के बीच चर्चा कर समय तय किया जाएगा। <br /><br /><strong>चार सीई का पदोन्नति के बाद पदस्थापन</strong><br />नगरीय विकास विभाग ने पदोन्नति के बाद चार मुख्य अभियंता के पदस्थापन कर दिया है। इसमें सीई अशोक कुमार चौधरी को निदेशक जेडीए, महेन्द्र कुमार माथुर को निदेशक जेडीए, पीके जैन को अतिरिक्त परियोजना निदेशक आरयूआईडीपी और ओपी वर्मा को कोटा यूआईटी में पदस्थापित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 13:26:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दैनिक नवज्योति की ख़बर का असर : आरयू पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार ने बनाई जांच कमेटी</title>
                                    <description><![CDATA[आयोग रेग्यूलेसंश की सीएएस प्रक्रिया में अवहेलना का मामला : आरयू के सेवानिवृत्त शिक्षकों को दिया था पदोन्नति का लाभ, यूजीसी ने उठाए थे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A6%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%BC%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%B0---%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%80/article-2550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/khabar-ka-asar.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत बनाए गए 200 से ज्यादा प्रोफेसर्स का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता जा रहा है। अब राज्य सरकार ने आरयू पर अगली कार्रवाई के लिए जांच कमेटी बना दी है। हाल ही में इस मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी कठोर कदम उठाते हुए आरयू को कड़े शब्दों में लेटर लिखकर स्पटीकरण मांगा है। दैनिक नवज्योति ने 12 नवंबर को राजस्थान विश्वविद्यालय की मान्यता और ग्रांट पर मंडराया संकट और 14 अगस्त को ‘चयन समिति के प्रतिनिधि ने किया बहिष्कार, आरयू की सीएएस प्रक्रिया पर उठे सवाल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद राज्य सरकार और यूजीसी ने सीएएस चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी है।</p>
<p><strong>प्रो. त्रिवेदी की निगरानी में बनाई समिति</strong><br /> राज्य सरकार ने गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा के कुलपति प्रो. आईबी त्रिवेदी को संयोजक बनाते हुए कमेटी बनाई है। उच्च शिक्षा विभाग ग्रुप-4 के शासन सचिव एनएल मीना के अनुसार कमेटी में जयनारायण व्यास विवि जोधपुर के पूर्व कुलपति प्रो. श्याम लाल, मोहन लाल सुखाड़िया विवि उदयपुर के प्रो. घनश्याम सिंह, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली के संयुक्त सचिव गोपू कुमार, संयुक्त शासन सचिव वित्त विभाग राज्य सरकार को सदस्य बनाया गया है। यह जांच समिति यूसीसी रेगुलेशन्स के प्रावधानों और नियमों को देखते हुए परीक्षण कर जांच रिपोर्ट तथा राज्य सरकार के स्तर से की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में अपनी स्पष्ट अनुशंषा 15 दिन में राज्य सरकार को देगी। <br /> <strong><br /> यह था मामला</strong><br /> यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार सेवानिवृत शिक्षकों को सीएएस का लाभ नहीं मिल सकता है, लेकिन विवि प्रशासन उनको लाभ दे रहा है। विश्वविद्यालय की सिंडिकेट तथा चयन समिति में राज्य सरकार के प्रतिनिधि प्रो. रामलखन मीना ने सीएएस के सम्बन्ध में नियमों और प्रक्रियाओं के बारे में बताते हुए विश्वविद्यालय को नियमों की पालना के लिए लिखा था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्य सरकार के प्रतिनिधि की बात को नजर अंदाज करते हुए चयन प्रक्रिया की। इस पर प्रो. मीना ने यूजीसी, राज्य सरकार और राजभवन तीनों को अवगत कराया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Nov 2021 16:13:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने रियल इस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम को सही ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। रियल इस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम 2016(रेरा)को सही ठहराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का दूरगामी नतीजा सामने आना निश्चित है। उल्लेखनीय हैम कि यह फैसला उन सभी चालू रियल्टी परियोजनाओं के सम्बंध में है, जिन्हें उक्त कानून के प्रभावी होने तक पूरा होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस कानून में विहित राज्यों से सम्बंधित नियमों में भारी परिवर्तन होंगे।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%B2-%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%9F--%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8--%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A0%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-2428"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/sc2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>। रियल इस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम 2016(रेरा)को सही ठहराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का दूरगामी नतीजा सामने आना निश्चित है। उल्लेखनीय हैम कि यह फैसला उन सभी चालू रियल्टी परियोजनाओं के सम्बंध में है, जिन्हें उक्त कानून के प्रभावी होने तक पूरा होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस कानून में विहित राज्यों से सम्बंधित नियमों में भारी परिवर्तन होंगे।  उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को साफ कर दिया कि इस कानून के लागू होने की तिथि तक अपूर्ण रहे और पूरा होने का प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं करने वाली परियोजनाओं पर रेरा कानून लागू होगा। उल्लेखनीय है कि उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु के नियम इस निर्णय के अनुपकूल नहीं हैं। इन राज्यों को सभी चालू परियोजनाओं को रेरा के अंतर्गत लाने के लिए अपने नियमों में संशोधन करना पड़ सकता है।  वर्ष 2017 में तत्कालीन आवासन मंत्री वेंकैया नायडू ने विभिन्न राज्यों द्वारा रेरा कानून को कमजोर करने पर चिंता जताई थी।</p>
<p><br /> उन्होंने उन राज्यों से कहा था कि उन्हें ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने चालू परियोजनाओं और रेरा के क्षेत्राधिकार में टकराव के सम्बंध में कहा था कि जिन परियोजनाओं को एक मई 2017 तक पूरा होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला, उन्हें रेरा के अंतर्गत रहना होगा।</p>
<p><br /> मकान खरीदने वालों की संस्था कलेक्टिव एफोर्ट्स के अध्यक्ष अभय उपाध्याय नेम कहा कि सुप्रीम कोर्ट को फैसले ने इस कानून के लागू होते समय तक अपूर्ण सभी रियल इस्टेट परियोजनाओं पर रेरा के क्षेत्राधिकार की पुष्टि कर दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Nov 2021 12:56:15 +0530</pubDate>
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