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                <title>regulation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>regulation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दिल्ली हाई कोर्ट ने WFI को लगाई फटकार, कहा- मातृत्व का सम्मान होता है,  विनेश को आगामी एशियन गेम्स ट्रायल में शामिल करने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने पहलवान विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं से बाहर करने पर रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि मातृत्व का सम्मान होना चाहिए। अदालत ने केंद्र को विशेषज्ञ समिति बनाने और विनेश को आगामी एशियन गेम्स ट्रायल में शामिल करने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/delhi-high-court-reprimanded-wfi-said-motherhood-is-respected-should/article-154692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vinesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं से बाहर किए जाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने Wrestling Federation of India की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि मातृत्व का सम्मान किया जाना चाहिए और चयन नियमों में अचानक बदलाव कई सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि विनेश फोगाट के मामले की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई जाए और उन्हें आगामी एशियन गेम्स ट्रायल में हिस्सा लेने का अवसर दिया जाए।</p>
<p>मातृत्व अवकाश के बाद वापसी कर रहीं विनेश को डब्ल्यूएफआई ने अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए नोटिस जारी किया था। साथ ही 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर रोक लगा दी गई थी। इसी फैसले के खिलाफ विनेश ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट अब मामले में डब्ल्यूएफआई के जवाब और नियमों की वैधता पर सुनवाई कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 17:36:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला : सार्वजनिक जगहों पर पशु वध पर प्रतिबंध, जानें उल्लघंन पर कितनी होगी सजा ?</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अधिसूचना के अनुसार, केवल 14 वर्ष से अधिक आयु के "अनुपयुक्त" पशुओं का वध ही प्रमाणित बूचड़खानों में संभव होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-shubhendu-government-ban-on-slaughter-of-animals/article-153769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/west-bengal-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के चार दिन बाद भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर प्रतिबंध लगाने वाली अधिसूचना जारी की। अधिसूचना में राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 को पूरे राज्य में सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह कलकत्ता उच्च न्यायालय के 6 अगस्त, 2018 के फैसले और 8 जून, 2022 को जारी संबंधित सरकारी दिशानिर्देश के अनुसार जारी की गई है।</p>
<p>यह अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब आरोप लगे थे कि एक विशेष समुदाय सड़क पर पशुओं का वध कर रहा था, जिससे आस-पड़ोस में रहने वाले अन्य लोगों को असुविधा हो रही थी। आठ सूत्रीय निर्देश में, राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल के सभी वैध बूचड़खानों को पशु वध संबंधी कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। अधिसूचना के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को बैल, बछड़े, गाय, बछड़े, नर और मादा भैंस, भैंस के बच्चे और बधिया भैंस सहित किसी भी पशु का वध करने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि पशु को वध के लिए उपयुक्त घोषित करने वाला प्रमाण पत्र प्राप्त न हो जाए।</p>
<p>अधिसूचना में कहा गया है कि ऐसे प्रमाण पत्र नगरपालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के अध्यक्ष द्वारा सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी के साथ संयुक्त रूप से जारी किए जा सकते हैं। प्रमाण पत्र तब जारी किया जा सकता है जब अधिकारी लिखित रूप से संतुष्ट हों कि पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का है और प्रजनन या काम के लिए उपयुक्त नहीं है, या आयु, चोट, विकृति या बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया है।</p>
<p>इसमें आगे कहा गया है कि यदि ऐसे प्रमाण पत्र के लिए आवेदन अस्वीकृत कर दिया जाता है, तो प्रभावित व्यक्ति अस्वीकृति प्राप्त होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पशुओं के लिए वध प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, उनका वध केवल नगर निगम के वधशालाओं या स्थानीय प्रशासन द्वारा नामित वधशालाओं में ही किया जा सकता है। ऐसे पशुओं का खुले सार्वजनिक स्थानों पर वध करना सख्त वर्जित है।</p>
<p>अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि नगर निगम अध्यक्षों, पंचायत समिति अध्यक्षों, सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारियों या उनके द्वारा कानून के प्रवर्तन के लिए अधिकृत किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिनियम के तहत किए गए निरीक्षणों में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि 1950 के अधिनियम के तहत सभी अपराधों को गंभीर प्रकृति का माना जाएगा। अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि इस मामले से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय के प्रासंगिक निर्णय सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 13:23:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन ने निजी स्कूलों और ट्यूशन इंडस्ट्री पर कसा शिकंजा, 100 अरब डॉलर का कारोबार प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने शिक्षा का व्यवसायीकरण रोकने के लिए कक्षा 1 से 9 तक के निजी स्कूलों और मुनाफे वाली कोचिंग पर पाबंदी लगा दी है। बच्चों का मानसिक दबाव कम करने हेतु अब ट्यूशन कंपनियां विदेशी निवेश या शेयर बाजार से फंड नहीं जुटा सकेंगी। इस ऐतिहासिक फैसले से $100 अरब की ट्यूशन इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-tightens-screws-on-private-schools-and-tuition-industry-business/article-153583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china2.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अपनी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 6 से 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित लाभ कमाने वाले निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला प्राथमिक और जूनियर सेकेंडरी शिक्षा यानी कक्षा 1 से 9 तक लागू किया गया है। नई नीति के तहत अब स्कूल विषयों की पढ़ाई कराने वाली कंपनियां मुनाफा नहीं कमा सकेंगी, विदेशी निवेश नहीं ले सकेंगी और शेयर बाजार से पूंजी जुटाने पर भी रोक रहेगी। कई कंपनियों को गैर-लाभकारी संस्था में बदलने या संचालन बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>इस फैसले से चीन की करीब 100 अरब डॉलर की निजी ट्यूशन इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। कई बड़ीं शिक्षा कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सरकार ने सप्ताहांत और छुट्टियों में ट्यूशन, विदेशी पाठ्यक्रम और बच्चों पर अधिक होमवर्क जैसे मामलों पर भी रोक लगाई है।</p>
<p>चीन का कहना है कि बढ़ते शैक्षणिक दबाव और महंगी शिक्षा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और परिवारों पर असर डाल रही थी। हालांकि प्रतिबंधों के बावजूद देश में निजी ट्यूशन की मांग अब भी बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:05:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीकर में एलन कोचिंग के छात्र ने प्राइवेट हॉस्टल में किया सुसाइड : कुछ दिनों से तनाव में था छात्र,  फोन नहीं उठाने पर दरवाजा काट कर देखने पर चला आत्महत्या का पता</title>
                                    <description><![CDATA[सीकर में तनाव के चलते एलन कोचिंग के छात्र कुणाल ने सुसाइड कर लिया। इस घटना ने राजस्थान कोचिंग विनियमन विधेयक 2025 के लागू न होने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों की मानसिक सुरक्षा के लिए बना कानून अब भी अधर में है, जबकि कोचिंग हब में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sikar/allen-coaching-student-commits-suicide-in-private-hostel-in-sikar/article-153037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)29.png" alt=""></a><br /><p>सीकर। सीकर पिपराली रोड स्थित एलन कोचिंग संस्थान के छात्र ने मंगलवार को गले में फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली। वह प्राइवेट हॉस्टल में रहता था, जहां उसने खुदकुशी की।  पुलिस के अनुसार बानसूर निवासी कुणाल दो साल से एलन कोचिंग संस्थान में  आईआईटी की तैयारी कर रहा था। वह पिछले कुछ दिनों से तनाव में चल रहा था।  हॉस्टल संचालक द्वारा किए गए फोन को जब उसने नहीं उठाया तो दरवाजे को काट कर देखा गया। तब विद्यार्थी फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कल्याण अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया और सूचना उसके परिजनों को दी। बुधवार प्रात: पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया। कुणाल के दादा मातादीन ने बताया कि हमने यहां बच्चे को पढ़ने के लिए भेजा था, लेकिन हमें यह दिन देखना पड़ रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। उद्योगनगर थाना प्रभारी राजेश कुमार बुडरक ने बताया कि केशव कुंज हॉस्टल के संचालक ने सूचना दी थी कि एलन में कोचिंग कर रहा छात्र कुणाल हमारे हॉस्टल में रह रहा था, जिसने हमारे यहां आत्महत्या कर ली। आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। </p>
<p><strong>आठ महीने से अधर में बिल</strong></p>
<p>राजस्थान में कोचिंग स्टूडेंटस के बढ़ते आत्महत्या प्रकरणों को लेकर राज्य सरकार ने कानून बनाया था। राजस्थान कोचिंग सेंटर नियंत्रण और विनियमन विधेयक, 2025 को राजस्थान विधानसभा ने पिछले साल 3 सितम्बर को ध्वनिमत से पारित किया था। इस कानून का मकसद कोचिंग उद्योग खासतौर पर कोटा जैसे बडे कोचिंग हब को नियंत्रित करना है। छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना, आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाना और कोचिंग संस्थानों में बढ़ते व्यवसायीकरण को सीमित करना भी इसका उद्देश्य था। इस कानून को राज्यपाल ने भी मंजूरी दे दी, लेकिन आज तक यह लागू नहीं हो पाया।  जबकि इसी सप्ताह में कोटा और सीकर में तीन छात्रों ने आत्महत्या कर ली। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong></p>
<p>कोटा स्थित संस्थान के मुख्यालय पर एलन कोचिंग संस्थान के निदेशक गोविन्द माहेश्वरी,नवीन माहेश्वरी व नितेश शर्मा को फोन कर व वाट्सअप मैसेज देकर संस्थान का पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सीकर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 10:40:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सम्राट सरकार का बड़ा फैसला : नावों की ओवरलोडिंग पर सख्ती, नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पटना जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने नदियों में नावों की ओवरलोडिंग और अवैध परिचालन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाइफ जैकेट और अनिवार्य निबंधन के बिना चलने वाली नावों पर सख्ती बरती जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-samrat-government-strict-action-will-be-taken/article-152518"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bihar.png" alt=""></a><br /><p>पटना। पटना में नदियों में नावों की ओवरलोडिंग और अवैध परिचालन पर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पटना के ज़िलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने मामले का त्वरित संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को तय मानकों का उल्लंघन करने वाले नाव संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>ज़िलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम.ने स्पष्ट कहा कि जन सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ओवरलोडिंग या बिना अनुमति नाव संचालन करने वालों के खिलाफ विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिला परिवहन पदाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैँ कि वे नावों के निबंधन से जुड़ी शर्तों जैसे निर्धारित क्षमता (कैरियिंग कैपेसिटी), सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और अन्य आवश्यक प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले नाव मालिकों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें।</p>
<p>डॉ. त्यागराजन एस.एम.ने कहा कि नदियों में सुरक्षित नाव संचालन के लिए सभी नावों का निबंधन अनिवार्य है। निबंधन से पहले मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) द्वारा नावों की जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर यह जरूरी है कि नाव पर क्षमता से अधिक यात्री न बैठें और लाइफ जैकेट की पर्याप्त व्यवस्था हो। जिलाधिकारी ने कहा कि मानकों का उल्लंघन करने वाले नाव स्वामियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे नाव यात्रा के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करें। उन्होंने कहा कि अंचल अधिकारियों को इस संबंध में नियमित निगरानी और पर्यवेक्षण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 15:05:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>PACS को बड़ी राहत: आदर्श उप नियमों के तहत गतिविधियों के लिए अलग अनुमति जरूरी नहीं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने PACS के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाते हुए नया आदेश जारी किया है। अब आदर्श उप नियमों के तहत आने वाली गतिविधियों के लिए अलग से अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, जिससे सहकारी समितियां अधिक स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-relief-to-pacs-separate-permission-is-not-necessary-for/article-151853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/nehru-sahakar-bhawann.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सहकारी क्षेत्र को गति देने के लिए रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, राजस्थान ने महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है। इसके तहत राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2001 के अंतर्गत पंजीकृत प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को बड़ी राहत प्रदान की गई है। जारी परिपत्र के अनुसार, PACS द्वारा अंगीकृत “आदर्श उप नियमों (Model Bye-laws)” में जिन गतिविधियों का उल्लेख पहले से किया गया है, उनके संचालन के लिए अब किसी अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये आदर्श उप नियम पूर्व से ही अनुमत माने जाएंगे।</p>
<p>सरकार का उद्देश्य इस निर्णय के माध्यम से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना और PACS को विविध गतिविधियां समय पर शुरू करने में सहूलियत प्रदान करना है। इससे सहकारी समितियों के कार्यों में तेजी आएगी और अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कमी होगी। रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा द्वारा जारी इस आदेश से प्रदेशभर की PACS को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 16:31:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉलोनियों के नियमन के लिए कट ऑफ डेट दिसंबर 2018 होगी</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बसी कच्ची बस्तियों के नियमन के लिए राज्य सरकार नई पॉलिसी लाएगी। इसका प्रारूप तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-cut-off-date-for-regulation-of-colonies-will-be-december-2018--government-will-bring-a-new-policy-for-regulation-of-raw-settlements/article-4644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/jaipur_kachi_basti_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बसी कच्ची बस्तियों के नियमन के लिए राज्य सरकार नई पॉलिसी लाएगी। इसका प्रारूप तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा। इसके साथ ही आवासन मण्डल क्षेत्राधिकार की कॉलोनियों में पट्टे देने के लिए बोर्ड अपने एक्ट में संशोधन करेगा ताकि बोर्ड के मकानों के बेचान के बाद आखिरी क्रेता के पक्ष में नियमितिकरण किया जा सके। बोर्ड का क्षेत्र ट्रांसफर होने के बाद निकाय इन कॉलोनियों में पट्टे देने के लिए बोर्ड से एनओसी मांग रहे थे। कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन के लिए कट ऑफ डेट को भी दिसंबर 2018 तक बढ़ाई जाएगी। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्रशासन शहरों के संग अभियान की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। अपने आवास पर हुई बैठक में धारीवाल ने नई नीति का प्रस्ताव करने करने के यूडीएच अधिकारियों को निर्देश दिए।<br /><br /><br /><strong>हाउसिंग बोर्ड एक्ट में संशोधन कर शेष कॉलोनियों में देगा पट्टे<br />कट ऑफ डेट बढ़ाने से मिलेगी राहत</strong><br />साथ ही नियमन के लिए मौजूदा कट ऑफ डेट को बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। अभी नियमन के लिए कॉलोनियों की कट ऑफ डेट 15 अगस्त, 2009 निर्धारित है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर दिसंबर 2018 करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के लिए 17 जून, 1999 है, जिसे भी बढ़ाकर दिसंबर 2018 किया जा सकता है। बैठक में बताया गया कि कट ऑफ डेट बढ़ाने के लिए भू-राजस्व अधिनियम में बदलाव जरूरी है, ऐसा होने से हजारों की तादाद में भूखण्डधारियों को राहत मिल सकेगी। भूखण्ड व सुविधा क्षेत्र में 60:40 के अनुपात की बजाय 70:30 अनुपात भी हो सकता है। साथ ही पट्टा लेने के लिए पहले की तुलना में कम राशि देनी होगी।<br /><br /><strong><br />नाम हस्तांतरण के मामलों में आर्थिक भार कम</strong><br />मकान व भूखण्ड का नाम हस्तांतरण के लिए विज्ञप्ति प्रकाशित कराने में विस्तृत ब्यौरा नहीं देने का निर्णय लिया गया ताकि आवेदक पर आर्थिक भार कम हो। प्रशासन शहरों के संग अभियान के कैम्प मार्च में फिर शुरू हो सकते है। इसके लिए धारीवाल-मुख्यमंत्री के बीच चर्चा कर समय तय किया जाएगा। <br /><br /><strong>चार सीई का पदोन्नति के बाद पदस्थापन</strong><br />नगरीय विकास विभाग ने पदोन्नति के बाद चार मुख्य अभियंता के पदस्थापन कर दिया है। इसमें सीई अशोक कुमार चौधरी को निदेशक जेडीए, महेन्द्र कुमार माथुर को निदेशक जेडीए, पीके जैन को अतिरिक्त परियोजना निदेशक आरयूआईडीपी और ओपी वर्मा को कोटा यूआईटी में पदस्थापित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 13:26:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दैनिक नवज्योति की ख़बर का असर : आरयू पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार ने बनाई जांच कमेटी</title>
                                    <description><![CDATA[आयोग रेग्यूलेसंश की सीएएस प्रक्रिया में अवहेलना का मामला : आरयू के सेवानिवृत्त शिक्षकों को दिया था पदोन्नति का लाभ, यूजीसी ने उठाए थे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A6%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%BC%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%B0---%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%80/article-2550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/khabar-ka-asar.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत बनाए गए 200 से ज्यादा प्रोफेसर्स का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता जा रहा है। अब राज्य सरकार ने आरयू पर अगली कार्रवाई के लिए जांच कमेटी बना दी है। हाल ही में इस मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी कठोर कदम उठाते हुए आरयू को कड़े शब्दों में लेटर लिखकर स्पटीकरण मांगा है। दैनिक नवज्योति ने 12 नवंबर को राजस्थान विश्वविद्यालय की मान्यता और ग्रांट पर मंडराया संकट और 14 अगस्त को ‘चयन समिति के प्रतिनिधि ने किया बहिष्कार, आरयू की सीएएस प्रक्रिया पर उठे सवाल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद राज्य सरकार और यूजीसी ने सीएएस चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी है।</p>
<p><strong>प्रो. त्रिवेदी की निगरानी में बनाई समिति</strong><br /> राज्य सरकार ने गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा के कुलपति प्रो. आईबी त्रिवेदी को संयोजक बनाते हुए कमेटी बनाई है। उच्च शिक्षा विभाग ग्रुप-4 के शासन सचिव एनएल मीना के अनुसार कमेटी में जयनारायण व्यास विवि जोधपुर के पूर्व कुलपति प्रो. श्याम लाल, मोहन लाल सुखाड़िया विवि उदयपुर के प्रो. घनश्याम सिंह, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली के संयुक्त सचिव गोपू कुमार, संयुक्त शासन सचिव वित्त विभाग राज्य सरकार को सदस्य बनाया गया है। यह जांच समिति यूसीसी रेगुलेशन्स के प्रावधानों और नियमों को देखते हुए परीक्षण कर जांच रिपोर्ट तथा राज्य सरकार के स्तर से की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में अपनी स्पष्ट अनुशंषा 15 दिन में राज्य सरकार को देगी। <br /> <strong><br /> यह था मामला</strong><br /> यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार सेवानिवृत शिक्षकों को सीएएस का लाभ नहीं मिल सकता है, लेकिन विवि प्रशासन उनको लाभ दे रहा है। विश्वविद्यालय की सिंडिकेट तथा चयन समिति में राज्य सरकार के प्रतिनिधि प्रो. रामलखन मीना ने सीएएस के सम्बन्ध में नियमों और प्रक्रियाओं के बारे में बताते हुए विश्वविद्यालय को नियमों की पालना के लिए लिखा था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्य सरकार के प्रतिनिधि की बात को नजर अंदाज करते हुए चयन प्रक्रिया की। इस पर प्रो. मीना ने यूजीसी, राज्य सरकार और राजभवन तीनों को अवगत कराया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Nov 2021 16:13:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने रियल इस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम को सही ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। रियल इस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम 2016(रेरा)को सही ठहराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का दूरगामी नतीजा सामने आना निश्चित है। उल्लेखनीय हैम कि यह फैसला उन सभी चालू रियल्टी परियोजनाओं के सम्बंध में है, जिन्हें उक्त कानून के प्रभावी होने तक पूरा होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस कानून में विहित राज्यों से सम्बंधित नियमों में भारी परिवर्तन होंगे।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%B2-%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%9F--%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8--%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A0%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-2428"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/sc2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>। रियल इस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम 2016(रेरा)को सही ठहराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का दूरगामी नतीजा सामने आना निश्चित है। उल्लेखनीय हैम कि यह फैसला उन सभी चालू रियल्टी परियोजनाओं के सम्बंध में है, जिन्हें उक्त कानून के प्रभावी होने तक पूरा होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस कानून में विहित राज्यों से सम्बंधित नियमों में भारी परिवर्तन होंगे।  उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को साफ कर दिया कि इस कानून के लागू होने की तिथि तक अपूर्ण रहे और पूरा होने का प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं करने वाली परियोजनाओं पर रेरा कानून लागू होगा। उल्लेखनीय है कि उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु के नियम इस निर्णय के अनुपकूल नहीं हैं। इन राज्यों को सभी चालू परियोजनाओं को रेरा के अंतर्गत लाने के लिए अपने नियमों में संशोधन करना पड़ सकता है।  वर्ष 2017 में तत्कालीन आवासन मंत्री वेंकैया नायडू ने विभिन्न राज्यों द्वारा रेरा कानून को कमजोर करने पर चिंता जताई थी।</p>
<p><br /> उन्होंने उन राज्यों से कहा था कि उन्हें ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने चालू परियोजनाओं और रेरा के क्षेत्राधिकार में टकराव के सम्बंध में कहा था कि जिन परियोजनाओं को एक मई 2017 तक पूरा होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला, उन्हें रेरा के अंतर्गत रहना होगा।</p>
<p><br /> मकान खरीदने वालों की संस्था कलेक्टिव एफोर्ट्स के अध्यक्ष अभय उपाध्याय नेम कहा कि सुप्रीम कोर्ट को फैसले ने इस कानून के लागू होते समय तक अपूर्ण सभी रियल इस्टेट परियोजनाओं पर रेरा के क्षेत्राधिकार की पुष्टि कर दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Nov 2021 12:56:15 +0530</pubDate>
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