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                <title>हिन्द प्रशांत में नियम आधारित व्यवस्था हितधारकों की सुरक्षा के लिए जरूरी : आसियान के साथ भारत का रणनीतिक जुड़ाव दीर्घकालिक और सिद्धांत आधारित, राजनाथ सिंह ने कहा- दबाव से मुक्त रहना चाहिए क्षेत्र  </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन, किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी क्षेत्रीय हितधारकों के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rules-based-order-in-the-indian-pacific-is-necessary-for-the/article-131181"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/6622-copy4.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था और नौवहन तथा उड़ान की स्वतंत्रता का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा है कि भारत का यह विचार किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसमें सभी क्षेत्रीय हितधारकों के सामूहिक हितों की रक्षा निहित है। सिंह ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों की 12 वीं एडीएमएम-प्लस बैठक में अपने संबोधन में कहा कि भारत का कानून के शासन पर जोर, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन, किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी क्षेत्रीय हितधारकों के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने एडीएमएम-प्लस के 15 के वर्ष पर चिंतन और भविष्य का रास्ता तैयार करना विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आसियान के साथ भारत का रणनीतिक जुड़ाव लेन-देन संबंधी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और सिद्धांत-आधारित है। यह इस साझा विश्वास पर आधारित है कि हिन्द-प्रशांत क्षेत्र खुला, समावेशी और दबाव से मुक्त रहना चाहिए। सिंह ने समावेशीता और स्थिरता को मौजूदा समय में प्रासंगिक बताते हुए कहा कि सुरक्षा में समावेशिता का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि आकार या क्षमता की परवाह किए बिना सभी राष्ट्रों की क्षेत्रीय सुरक्षा को आकार देने में भूमिका हो। उन्होंने कहा कि स्थिरता का तात्पर्य ऐसे सुरक्षा ढांचे का निर्माण करना है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति लचीले हों, उभरते खतरों के अनुकूल हों और अल्पकालिक के बजाय दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित हों। उन्होंने कहा कि भारत के लिए ये सिद्धांत उसके अपने रणनीतिक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। हिन्द-प्रशांत के लिए भारत का सुरक्षा दृष्टिकोण रक्षा सहयोग को आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी में साझेदारी और मानव संसाधन उन्नति के साथ एकीकृत करता है। सुरक्षा, विकास और स्थिरता के बीच अंतर्संबंध आसियान के साथ साझेदारी के लिए भारत के दृष्टिकोण को परिभाषित करते हैं।</p>
<p>एडीएमएम-प्लस को भारत की एक्ट ईस्ट नीति और व्यापक हिन्द-प्रशांत दृष्टिकोण का अनिवार्य घटक बताते हुए सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आसियान और प्लस देशों के साथ रक्षा सहयोग को क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और क्षमता निर्माण में योगदान के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि एडीएमएम-प्लस 16वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, भारत मतभेदों के समाधान के लिए संवाद और शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने वाले क्षेत्रीय तंत्रों को मजबूत करने के लिए आपसी हित के सभी क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने को तैयार है। एडीएमएम-प्लस और आसियान के प्रति भारत का दृष्टिकोण समावेशी सहयोग, क्षेत्रीय स्वामित्व और सामूहिक सुरक्षा के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत महासागर यानी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति की भावना के साथ संवाद, साझेदारी और व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से रचनात्मक योगदान जारी रखने के लिए तैयार हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 17:28:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>हे भगवान, जान की कीमत पैसों से ज्यादा कब होगी,कोटा शहर में  लगभग 80 बसें रजिस्टर्ड, सुरक्षा नियमों की नहीं कर रहे पालना</title>
                                    <description><![CDATA[परिवहन विभाग ने की पांच बसों पर कार्रवाई, मानक अनुरूप नहीं थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/oh-god--when-will-life-be-more-valuable-than-money--nearly-80-buses-are-registered-in-kota-city--yet-they-are-not-following-safety-rules/article-129846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/5246.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर एसी बस में शॉर्ट-सर्किट से लगी आग में 22 यात्रियों की मौत के बाद प्रशासन नींद से जागा है। वहीं, परिवहन विभाग ने कोटा सहित पूरे राजस्थान में सभी परमिटधारी बसों की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि  दैनिक नवज्योति ने कई प्रमुख खबरों का प्रकाशन कर ऐसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नकारा संसाधन निजी बसों की मनमानी को लेकर चेताया था। वहीं कोटा शहर में स्लीपर और एसी बसों की सुरक्षा हालात अभी भी चिंताजनक हैं। दैनिक नवज्योति ने जब जांच-पड़ताल की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई बसें बिना परमिट या अपूर्ण फिटनेस सर्टिफिकेट के सड़कों पर दौड़ रही थीं। फायर सेफ्टी उपकरण का अभाव, संकरी गैलरी और ठीक से न खुलने वाले शटर यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बता दें कि कोटा शहर में लगभग 80 बसें रजिस्टर्ड है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निजी बसों में जान-माल का सर्वाधिक खतरा बना रहता है। डीटीओ सुरेन्द्रसिंह राजपुरोहित ने बताया कि कोटा में जांच की गई बसों में इमरजेंसी गेट या निकासी द्वार पर अवरोध पाया गया। नाकाबंदी के दौरान ऐसे बसों पर कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को हुई नाकाबंदी में पांच बसों को यात्रियों की सुविधा के अनुरूप न पाए जाने पर कार्रवाई की गई।</p>
<p><strong> दैनिक नवज्योति लगातार चेता रहा, नहीं दिया जा रहा ध्यान</strong><br />दैनिक नवज्योति निजी स्लीपर बसों में दुर्घटना के खतरे को लेकर दो साल से लगातार चेता रहा है। स्थिति  यह है कि 8 जुलाई 2023 को ही दैनिक नवज्योति ने अलर्ट प्रकाशित किया था, एक पल में मौत की नींद सुला सकती हैं बसें शीर्षक से खबर प्रकाशित कर संभावित खतरे से आगाह किया था। इसके बाद 16 दिसम्बर को फिर स्लीपर बसों में मुसाफिरों की जान खतरे में शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इतना ही नहीं इसके बाद लगातार नवज्योति ने इस मुद्दे पर यातायात प्रशासन और बस मालिक, चालक, यात्री सभी की सुरक्षा को लेकर संभावित खतरा टालने को कई समाचार प्रकाशित किए।   </p>
<p><strong>बिना सेफ्टी दौड रही बसों को रोकने की जिम्मेदारी किस की? कैसे चल रही थी? </strong><br />राज्य में हाल ही में हुई बस दुर्घटनाओं के बाद सुरक्षा जांच और मानकों को लेकर बस संचालकों ने विरोध जताया है। बस संचालकों का कहना है कि उनकी सभी बसों में इमरजेंसी गेट और फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि जो भी कमी हो, उन्हें बताई जाए ताकि वे उसे सुधार सकें। बस यूनियन के सत्यनारायण शाहू ने नवज्योति से विशेष बातचीत में बताया कि वर्तमान में बीएस-6 और यूरो-6 इंजन की वायरिंग इतनी जटिल हो गई है कि स्पार्किंग से आग लग सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई बस मानक पर खरी नहीं उतरती, तो उसे पास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी गेट हटाकर सीट बढ़ाना गलत है और इसके विरोध में हैं। उन्होंने बताया कि एक दुर्घटना के कारण पूरे राजस्थान के बस संचालकों को परेशान किया जा रहा है, जबकि दीपावली के मौके पर यात्रियों को आवागमन में परेशानी हो रही है। बुधवार को जोधपुर, जैसलमेर और जयपुर की कई बसें रद्द हो चुकी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके विरोध को नहीं सुना गया तो पूरे राजस्थान में चक्का जाम किया जाएगा।</p>
<p><strong>फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी</strong><br />- बस में कम से कम दो अलग-अलग प्रकार के फायर एक्सटिंग्विशर अनिवार्य हैं।<br />- सभी फायर एक्सटिंग्विशरों की जांच हर छह महीने में जरूरी है।<br />- बस में धुआं और आग का अलार्म होना चाहिए।<br />- कम से कम दो आपातकालीन दरवाजे और खिड़कियां होनी चाहिए, जो आसानी से खुलने योग्य हों।<br />- दरवाजे और खिड़कियों के रास्ते में शटर या जंजीर जैसी बाधाएं नहीं होनी चाहिए। <br />- चालक और स्टाफ को फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकासी का प्रशिक्षण अनिवार्य है।<br />- आग बुझाने और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का नियमित अभ्यास होना चाहिए।<br />- आपातकालीन निकास के पास स्पष्ट संकेत और निर्देश होने चाहिए।<br />- दिव्यांग यात्रियों के लिए सर्विस गेट के पास आरक्षित सीट अनिवार्य है।</p>
<p><strong>स्लीपर बसों में खतरे के कई कारण</strong><br />- ड्राइवर की थकावट भी हादसों की बड़ी वजह है। रातभर 300-1000 किमी की दूरी तय करने वाले ड्राइवर अक्सर नींद में गायब हो जाते हैं।<br />- अधिकांश बसों में ड्राउजीनेस अलर्ट सिस्टम नहीं होता।<br />- स्लीपर बसें आरामदायक सोने की सुविधा देती हैं, लेकिन हिलने-डुलने की जगह बेहद कम होती है।<br />- बसों की ऊंचाई भी खतरे का कारण बनती है। अतिरिक्त लगेज डिग्गी लगने से ऊंचाई 10-12 फीट तक बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>इमरजेंसी गेट हटाकर लगाई अतिरिक्त सीटें</strong><br />नवज्योति ने बस के ड्राइवर से इमरजेंसी गेट के बारे में पूछा, तो बताया कि गेट पीछे की ओर है। लेकिन, कई बसों में इसे बंद करवाकर अतिरिक्त सीटें लगा दी गई हैं। दोनों तरफ सीटें होने से बस की गैलरी संकरी हो जाती है। आगजनी की स्थिति में यात्रियों के लिए खिड़कियों से कूदना ही एकमात्र विकल्प बचता है, जो जानलेवा हो सकता है।</p>
<p> सभी बसों की मानक अनुरूप मापदंड को लेकर चैकिंग की जा रही है। अब तक पांच बसों पर कार्रवाई की गई है। इन बसों की जांच में यह पाया गया कि ये मानक के अनुरूप नहीं हैं। इन बसों में इमरजेंसी गेट या निकासी द्वार पर अवरोध था। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। <br /><strong>    -सुरेन्द्रसिंह राजपुरोहित, डीटीओ, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Oct 2025 15:39:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सफाई कर्मचारी सेवा नियमों में संशोधन, संतोषजनक सेवा होने पर ही हो सकेंगे स्थायी</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 337 और 335 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए राजस्थान नगरपालिका नियम, 2012 में संशोधन किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amendment-in-cleaning-service-service-rules-will-be-permanent-only/article-102639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/6622-copy.jpg4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 337 और 335 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए राजस्थान नगरपालिका (सफाई कर्मचारी सेवा) नियम, 2012 में संशोधन किया है। इस संशोधन को 2025 के नियमों में शामिल कर लिया गया है।</p>
<p>संशोधन के तहत, नियम 8 को पूरी तरह से बदल दिया गया है। अब नए नियम के अनुसार, सफाई कर्मचारी सेवा में सीधी भर्ती के लिए चयनित उम्मीदवार का संविदा काल और चरित्र ऐसा होना चाहिए, जो सेवा में स्थायी नियुक्ति के योग्य हो। नियुक्ति प्राधिकारी की ओर से सफल उम्मीदवार के चरित्र और पिछले रिकॉर्ड की जांच नियुक्ति आदेश जारी करने से पहले अनिवार्य रूप से की जाएगी।</p>
<p>यह संशोधन नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इस कदम का उद्देश्य सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। डीएलबी आयुक्त एवं सचिव कुमार पाल गौतम ने इसकी अधिसूचना जारी की है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से सफाई कर्मचारी सेवा में भर्ती प्रक्रिया की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 12:30:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप ने बदले नियम तो गुरुद्वारों में पहुंची अमेरिकी पुलिस, अवैध प्रवासी छुपे होने के शक में जांच, सिख संगठन भड़के</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बने के बाद से अवैध प्रवासियों को ढूंढ़ने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। अमेरिकी पुलिस और एजेंसियां प्रवासियों को पकड़कर डीपोर्ट कर रही हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trump-changed-the-rules-then-the-us-police-reached/article-102284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बने के बाद से अवैध प्रवासियों को ढूंढ़ने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। अमेरिकी पुलिस और एजेंसियां प्रवासियों को पकड़कर डीपोर्ट कर रही हैं। ये कार्रवाई धार्मिक स्थलों पर भी पहुंच गई है। अमरीकी पुलिस ने न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में कुछ गुरुद्वारों में जांच की है। पुलिस ने गुरुद्वारों में जाने के पीछे तर्क दिया है कि धार्मिक स्थलों में प्रवासी छुप सकते हैं। पुलिस के धार्मिक स्थलों की शुचिता का ख्याल ना करने पर सिख संगठनों ने चिंता जताई है। यूएस डिपार्टमेंट आॅफ होमलैंड सिक्योरिटी के अधिकारियों ने रविवार को न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी जैसे शहरों में गुरुद्वारों का दौरा किया। अवैध अप्रवासियों की मौजूदगी की जांच के लिए की गई इस कार्रवाई सपर सिख संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजुकेशन फंड ने इस कदम पर गहरी चिंता जताते हुए कि इससे सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है। साथ ही अप्रवासी समुदाय के भीतर भी डरावना संदेश जाता है।</p>
<p><strong>डीएचएस ने कार्रवाई पर दिया बयान</strong><br />डीएचएस प्रवक्ता की ओर से कहा गया है कि यह कार्रवाई आव्रजन कानूनों को सख्ती से लागू करते हुए अवैध रूप से आए आपराधिक विदेशियों को निकालना है, जिनमें हत्यारे और बलात्कारी भी शामिल हैं। प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस तरह के अपराधी अब गिरफ्तारी से बचने के लिए अमेरिका के स्कूलों, गुरुद्वारों, चर्चों या दूसरे धार्मिक स्थलों में नहीं छिप पाएंगे। हम ऐसी जगहों से भी उनको ढूंढ़कर पकड़ लेंगे। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन के समय के संवेदनशील क्षेत्रों में कानून प्रवर्तन कार्रवाई पर रोक के दिशानिर्देशों को वापस ले लिया है। इस बदलाव से एजेंसियों को गुरुद्वारों और चर्च जैसे पूजा स्थलों में जाने की इजाजत मिल गई है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी धार्मिक स्थलों पर आव्रजन छापेमारी की संभावना को खारिज नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा के लिए ये जरूरी हो जाता है।</p>
<p><strong>सिख संगठनों में चिंता</strong><br />सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजुकेशन फंड की कार्यकारी निदेशक किरण कौर गिल ने कहा है कि हम होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के गुरुद्वारों जैसे पूजा स्थलों को निशाना बनाने के फैसले से हम चिंतित हैं। इस तरह की कार्रवाइयों से सिख धर्म के पूजा स्थलों की पवित्रता को खतरा है। सिख संगठनों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई सिखों की धार्मिक प्रथाओं के अनुसार जमा होने और एक दूसरे के साथ जुड़ने की स्वतंत्रता को कम करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2025 12:44:40 +0530</pubDate>
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                <title>रूफटॉप रेस्टोरेंट में नहीं हो रही नियमों की पालना</title>
                                    <description><![CDATA[दो बार नोटिस देकर निगम ने की इतिश्री।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rooftop-restaurants-are-not-following-the-rules/article-88297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बड़ी संख्या में होटल व मॉल में रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। लेकिन उनमें से अधिकतर रेस्टोरेंट में न तो नियमों की पालना हो रही है और न ही वे निगम से परमीशन लेकर संचालित हो रहे हैं। करीब 95 फीसदी रूफटॉप रेस्टोरेंट बिना स्वीकृति के संचालित हो रहे हैं। नगर निगम ने भी ऐसे रेस्टोरेंट को दो बार नोटिस देकर इतिश्री कर ली है। शहर में भीमगंजमंडी से लेकर राजीव गांधी नगर तक करीब तीन दर्जन से अधिक रूफ टॉप रेस्टोरेंट  संचालित हो रहे हैं। हालांकि नगर निगम के पास ऐसे रेस्टोरेंट का पूरा डाटा तक नहीं है। फिर भी कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में ही निगम के पास दो दर्जन रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालित होने की जानकारी है। उनमें से भी अधिकतर द्वारा नियमों की पालना नहीं करने पर नगर निगम के राजस्व अनुभाग की ओर से रेस्टोरेंट सचालकों को एक साल में दो बार नोटिस जारी किए गए। उसके बाद भी न तो रेस्टोरेंट संचालकों ने नियमों की पालना की और न ही निगम से स्वीकृति प्राप्त की। बोर्ड बैठक में उठाया था मुद्दा : नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की गत वर्ष आयोजित बोर्ड बैठकों में शहर में अवैध रूप से संचालित रूफटॉप रेस्टोरेटंट पर कार्रवाई करने का मुद्दा उठाया गया था। दोनों निगमों के नेता प्रतिपक्ष ने यह मामला उठाया था। लेकिन उसके बाद भी निगम अधिकारियों ने रेस्टोरेंट संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। </p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हो रहा संचालन</strong><br />जानकारी के अनुसार कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में बल्लभबाड़ी, एरोड्राम, गुमानपुरा, झालावाड रोड, महावीर नगर प्रथम, तलवंडी, केशवपुरा, राजीव गांधी नगर, डीसीएम रोड, श्रीनाथपुरम् व ट्रांसपोर्ट नगर में रूफ टॉप रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। जिनकी आॅनलाइन जानकारी होने के बाद व नियमों की पालना नहीं करने के बावजूद निगम अधिकारी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे।  लोगों का कहना है कि कई रूफटॉप रेस्टोरेंट तो रिहायशी इलाकों में हैं। जहां देर रात तक छतों पर डीजे बजते रहे हैं और शोर होने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी होती है। इस बारे में थानों में शिकायत करने पर की कोई कार्रवाई नहीं होती। </p>
<p><strong>जांच में मिली अनियमितताएं</strong><br />पुलिस प्रशासन, आबकारी व नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से एक दिन पहले एरोड्राम चौराहा स्थित एक मॉल के रूफटॉप रेस्टोरेंट में ओचक जांच की गई। जांच में वहां फायर से लेकर आबकारी तक की कई अनियमिताएं पाई गई। सूत्रों के अनुसार यहां फायर एनओसी तो है लेकिन 10 में से अधिकतर सिलेंडरों की रिफलिंग नहीं हो रही थी। होजरील कार्यशील अवस्था में नहीं थी। उसके अलावा भी कई कमियां पाई गई। जिसके आधार पर पुलिस प्रशासन कार्रवाई करेगा।  सूत्रों के अनुसार मॉल में संचालित रूफटॉप रेस्टोरेंट में बार का लाइसेंस है वह तभी मिलता है जब फायर एनओसी होती है। जबकि कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में ही ऐसे दो दर्जन से अधिक रूफटॉप रेस्टोरेंट सचालित हो रहे हैं। उन्हें निगम की ओर से जून 2023 व फरवरी 2024 में नोटिस भी दिए जा चुके हैं। लेकिन उन नोटिस का भी संचालकों पर कोई असर नहीं हुआ। निगम अधिकारियों ने भी उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की।  जबकि कुछ समय पहले तलवंडी स्थित एक रूफटॉप रेस्टोरेंट में आग भी लग चुकी है। हालांकि निगम के फायर अनुभाग ने उसे उसी समय बंद करवा दिया था। </p>
<p><strong>चार साल पहले सरकार ने जारी किया था नोटिफिकेशन</strong><br />शहर में रूफटॉप रेस्टोरेंट तो पिछले कई सालों से संचालित हो रहे हैं। महानगरों की तर्ज पर कोटा में भी इनका चलन बढ़ा है। हालांकि लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं। ऐसे  में रा’य सरकार की ओर से जनवरी 2020 में एक नोटिफिकेशन जारी  किया था। जिसमें रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालकों को नगर निगम से स्वीकृति लेने और नियमों की पालना करने के लिए पाबंद किया गया था। नोटिफेशन के अनुसार रूफटॉप रेस्टोरेंट में एक निर्धारित स्थान पर ही कवर एरिया होगा। वहां का फर्नीचर लकडी का नहीं होकर स्टील एलुमीनियम के फ्रेम में होगा। रेस्टोरेंट में नीचे की तरफ पार्किंग की सुविधा होगी। फायर एनओसी लेना आवश्यक है। इसके लिए यूडी टैक्स जमा करवाना होगा।  </p>
<p><strong>निगम को राजस्व का नुकसान</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में अवैध रूप से रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए वे बोर्ड बैठक में भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं। स्वीकूति नहीं लेने व फायर एनओसी, यूडी टैक्स जमा नहीं करवाने से निगम को भी राजस्व की हानि हो रही है। लेकिन अधिकारी उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।  इधर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर में संचालित करीब 95 फीसदी रूफटॉप रेस्टोरेंट में न तो नियमों की पालना हो रही है और न ही उन्होंने परमीशन ले रखी है। यूडी टैक्स जमा नहीं होने से उनके पास फायर एनओसी तक नहीं है। हालांकि निगम अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में आग लगने वाले रूफटॉप रेस्टोरेंट को बंद कराया गया है। साथ ही सभी को दो बार नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Aug 2024 15:08:27 +0530</pubDate>
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                <title>ड्रोन उड़ाने की सोच रहे हैं तो हो जाएं सावधान </title>
                                    <description><![CDATA[जानिए कोटा में कौनसे इलाके हैं ड्रोन के प्रतिबंधित क्षेत्र। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/be-careful-if-you-are-thinking-of-flying-a-drone/article-74363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/drone-udane-ki-soch-rhe-h-to-ho-jaiye-savdhan...kota-news-03-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है और हर क्षेत्र में नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी नई तकनीक में शामिल है ड्रोन, जो वर्तमान में फसलों में कीटनाशक छिड़कने से लेकर शादियों में वीडियोग्राफी करने तक में काम आ रहे हैं। कोटा शहर में भी फसलों पर कीटनाशक के छिड़काव के साथ लेकिन लोग इसके लिए निर्धारित नियमों की जानकारी के बिना ही ड्रोन को उड़ा रहे हैं। ऐसे में ड्रोन उड़ाने के नियम के अलावा आज कोटा के उन इलाकों पर भी बात करेंगे जहां ड्रोन को उड़ाने प्रतिबंध है।</p>
<p><strong>कोटा के इन क्षेत्रों में ड्रोन पर प्रतिबंध</strong><br />ड्रोन उड़ाने के लिए कोटा को भी चार जोन में बांटा गया है हालांकि इनमें से एक श्रेणी अस्थाई रेड जोन कोटा को छाड़कर कोटा में रेड, यलो और ग्रीन जोन तीनों मौजूद हैं। कोटा में एयरपोर्ट, आर्मी एरिया, थर्मल प्लांट और रावतभाटा स्थित परमाणु बिजलीघर से 5 किलोमीटर दायरे की परिधी को रेड जोन घोषित किया हुआ है। वहीं इन स्थानों से 5 से 8 किलोमीटर दायरे के भीतर यलो जोन बनाया हुआ है जहां 200 फीट तक ड्रोन उड़ा सकते हैं। इसके अलावा 8 से 12 किलोमीटर परिधी में मौजूद एयरस्पेस में 400 फीट की उंचाई तक ड्रोन उड़ा सकते हैं। इन तीनों जोन के अलावा कोटा के सभी इलाके ग्रीन जोन के भीतर आते हैं।</p>
<p><strong>ड्रोन उड़ाने के लिए ये हैं नियम</strong><br />- ड्रोन उड़ाने से पहले पायलट को ड्रोन का नागरिक उड्डयन महानिदेशक के पोर्टल पर डिजिटल पंजीकरण कराना आवश्यक है।<br />- नागरिक उड्डयन महानिदेशक द्वारा पंजीकरण कराने के पश्चात प्रत्येक ड्रोन की एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूएनआई) होती है, इस नंबर को संभलकर रखना आवश्यक होता है। <br />- ड्रोन उड़ाने के लिए किसी भी संस्थान या व्यक्ति को ड्रोन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है, जिसे क्वालिटी काउंसिल आॅफ इंडिया या केंद्र सरकार की ओर से जारी किया जाता है।<br />- ड्रोन उड़ाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशक से पायलट का लाइसेंस लेना आवश्यक होता है जिसे महानिदेशक पोर्टल पर आवेदन कर प्राप्त किया जा सकता है, बिना लाइसेंस के ड्रोन उड़ाने पर 1 लाख तक जुर्माना हो सकता है।<br />- ड्रोन की उपस्थिति और उसकी उड़ान के बारे में स्थानीय पुलिस को 24 घंटे पहले सूचित करने के बाद नागरिक उड्डयन विभाग और स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेना आवश्यक है।<br />- यूएनआई नए और पहले से मौजूद सभी यूएवी के लिए अनिवार्य है।<br />- ड्रोन को बेचने की स्थिति में पंजीकरण रद्द कराना आवश्यक होता है।</p>
<p><strong>ड्रोन के लिए एयर स्पेस में चार जोन</strong><br />भारतीय नागरिक उड्डयन महानिदेशक की ओर से ड्रोन उड़ाने के लिए एयर स्पेस को चार हिस्सों रेड जोन, अस्थाई (टेम्पररी) रेड जोन, यलो जोन और ग्रीन जोन में बांटा गया है। ड्रोन को उड़ाने के लिए अलग जोन में अलग नियम हैं। <br /><strong>रेड जोन: </strong>इस जोन में ड्रोन उड़ाने पर बिल्कुल प्रतिबंध होता है। यहां आप किसी भी सूरत में ड्रोन नहीं उड़ा सकते हैं। फिर भी आपको इस क्षेत्र में किसी विषम परिस्थिति में ड्रोन उड़ाना है तो उसके लिए आपको केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी जो गृह मंत्रालय के क्लीयरेंस के बाद ही मिल पाएगी। इस जोन के अंदर आप ड्रोन को 60 मीटर की उंचाई तक ही उड़ा सकते हैं इससे ऊपर उड़ाने पर कारवाई हो सकती है। रेड <strong>जोन सामान्यत: </strong>किसी एयरपोर्ट, सैनिक छावनी, परमाणु बिजलीघर या अत्याधिक संवेदनशील इलाकों के ऊपर मौजूद एयर स्पेस होता है।<br /><strong>टेम्परी या अस्थाई रेड जोन: </strong>टेम्परी या अस्थाई रेड जोन भी सामान्य रेड जोन की तरह ही होता है। रेड जोन के तमाम नियम इस जोन में भी लागू होते हैं। इस जोन का निर्माण संवेदशील इलाकों, किसी बड़े आयोजन या सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के टहराव के समय किया जाता है। जिसे बाद में हटा लिया जाता है।<br /><strong>यलो जोन: </strong>यलो जोन के भीतर भी दो तरह के जोन होते हैं जिसमें एक जोन के तहत आप ड्रोन को किसी एयरपोर्ट, सैनिक छावनी, परमाणु बिजलीघर या अत्याधिक संवेदनशील इलाकों से 5 किलोमीटर दूर मौजूद एयर स्पेस में 200 फीट की उंचाई तक और दूसरे जोन में आप ड्रोन को इन इलाकों से 8 किलोमीटर दूर के एयर स्पेस में 400 फीट की उंचाई तक उड़ा सकते हैं।<br /><strong>ग्रीन जोन: </strong>इस जोन में आप बिना किसी की अनुमति के ड्रोन उड़ा सकते हैं, बशर्ते ड्रोन का कुल वजन 500 किलो से ज्यादा ना हो ऐसा होने पर अपको प्रशासन से अनुमति लेनी होगी जिसके बाद ही आप ड्रोन उड़ा सकते हैं। बिना परमिशन के ड्रोन उड़ाने पर 1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।</p>
<p><strong>पांच कैटगरी में बांटा गया है ड्रोन को</strong><br /><strong>नैनो ड्रोन: </strong>ऐसे ड्रोन जिनका वजन 250 ग्राम के भीतर होता उन्हें नैनो ड्रोन की श्रेणी में रखा गया है। इस तरह के ड्रोन को उड़ाने लिए किसी परमिशन की आवश्यकता नहीं होती है।<br /><strong>माइक्रो ड्रोन: </strong>इस कैटगरी के तहत 250 ग्राम से 2 किलो वजन तक के ड्रोन शामिल है। इन्हें उड़ाने के लिए भी किसी प्रकार की परमिशन की आवश्यकता नहीं होती है। शादियों में अधिकांश रूप ये इन्हीं का उपयोग किया जाता है। <br /><strong>स्मॉल ड्रोन: </strong>इस कैटगरी में 2 किलो से 25 किलो तक के ड्रोन शामिल हैं। जिन्हें उड़ाने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी, पुलिस व जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होती है जिसके बाद ही आप ड्रोन उड़ा सकते हैं।<br />मीडियम ड्रोन: इस श्रेणी में 25 किलो से लेकर 150 किलो तक के ड्रोन को शामिल किया गया है। इन्हें उड़ाने के लिए भी एयरपोर्ट अथॉरिटी, पुलिस व जिला प्रशासन से अनुमति लेनी की आवश्यकता होती है।<br /><strong>हेवी ड्रोन: </strong>इस कैटगरी के तहत 150 किलो से अधिक भार वाले ड्रोन को शामिल किया गया है। इन ड्रोन का उपयोग विशेष कार्यों के लिए किया जाता है इन्हें उड़ाने के लिए केंद्र सरकार से परमिशन लेनी होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 14:46:16 +0530</pubDate>
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                <title>8 वीं बोर्ड के बदले नियम, अब 33 प्रतिशत से कम आए नम्बर तो होंगे फेल</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा विभाग ने 8वीं और 5वीं कक्षा की सप्लीमेंट्री परीक्षाओं की तैयारियां शुरू कर दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rules-changed-for-8th-board--now-marks-less-than-33--will-fail/article-53791"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/athvi-board-k-bdle-niyam,-ab-33-pratishat-s-kam-aye-to-number-to-hone-fail...kota-news-05-08-2023.png" alt=""></a><br /><p>क ोटा। 8वीं बोर्ड परीक्षा में 33 प्रतिशत से कम नम्बर आने पर अब विद्यार्थियों को फेल घोषित किया जाएग। उन्हें फिर से आठवीं कक्षा में ही पढ़ना होगा। सरकार ने आठवीं बोर्ड परीक्षा के नियम में बदलाव कर यह व्यवस्था की है। ताकि, विद्यार्थी व अभिभावक पढ़ाई के प्रति गंभीरता बरते और फेल होने की चिंता के चलते बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देंगे। इसके दो बड़े फायदे होंगे, बच्चे व अभिभावक फेल न होने की मानसिकता से बाहर आएंगे। परीक्षा में बोर्ड की गरिमा बनी रहने से विद्यार्थी पढ़ाई के प्रति गंभीर होंगे। वहीं, आगे 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में रिजल्ट सुधरेगा। साथ ही उनका शैक्षणिक स्तर भी मजबूत होगा। </p>
<p><strong>ई-ग्रेड वाले अगली कक्षा में नहीं होंगे क्रमोन्नत </strong><br />आठवीं बोर्ड की पूरक परीक्षा में 33 फीसदी से कम अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को फेल घोषित किया जाएगा। ऐसे में इन्हें वापस आठवीं कक्षा में ही अध्ययन करना होगा। वहीं, निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2019(संशोधित)  के तहत पिछले सत्र से आठवीं कक्षा में यह नया प्रावधान लागू कर दिया गया था। इस बार आठवीं कक्षा की पूरक परीक्षा में अनुत्तीर्ण यानी ई-ग्रेड प्राप्त विद्यार्थियों को आगामी कक्षा में क्रमोन्नत नहीं किया जाएगा। हालांकि, पांचवी कक्षा में अनुत्तीर्ण करने का प्रावधान नहीं है।</p>
<p><strong>8वी-5वीं की पूरक परीक्षाएं 10 को </strong><br />शिक्षा विभाग ने 8वीं और 5वीं कक्षा की सप्लीमेंट्री परीक्षाओं की तैयारियां शुरू कर दी है। इन दोनों कक्षाओं की पूरक परीक्षाएं अगले सप्ताह 10 अगस्त से शुरू होंगी, जो 17 अगस्त जारी रहेंगी। हालांकि, 5वीं की परीक्षाएं एक दिन पहले 16 अगस्त को ही खत्म हो जाएगी। वहीं, 8वीं की पूरक परीक्षा में राज्यभर से 69 हजार अभ्यर्थी शामिल होंगे। जबकि, पांचवी में 37 हजार अभ्यर्थी शामिल होंगे। </p>
<p><strong>वर्ष 2020 को जारी हुआ था गजट नोटिफिकेशन </strong><br />विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को फेल नहीं करने का नियम हैं। हालांकि इसमें ग्रेडिंग सिस्टम निर्धारित किया हुआ है। आठवीं कक्षा के लिए अब नियम बदल गए हैं। केंद्र व राज्य सरकार का गजट नोटिफिकेशन के जरिए यह बदलाव किए हैं। 16 सितंबर 2020 को गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ था। जिसमें बताया था कि आठवीं में अब विद्यार्थी फेल भी हो सकेंगे। इस संबंध में केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी की थी। इसके अनुसार आठवीं कक्षा की मुख्य परीक्षा में यदि कोई विद्यार्थी पास नहीं होता है तो उसे सप्लीमेंट्री घोषित किए जाने का प्रावधान तय हुआ है। सप्लीमेंट्री परीक्षा का आयोजन 60 दिन के भीतर होगा। इसमें फेल होने पर विद्यार्थी को कक्षा नवीं में दाखिला नहीं दिया जाएगा। ऐसे विद्यार्थियों को फिर से कक्षा आठवीं पढ़नी होगी।</p>
<p><strong>यह है ग्रेडिंग का फॉमूर्ला</strong><br />कक्षा एक से आठवीं तक परीक्षा परिणाम में डिविजन की बजाए ग्रेडिंग सिस्टम निर्धारित किया हुआ है। जिसके तहत 86 से 100 प्रतिशत तक मार्क्स आने पर अभ्यर्थियों को ए ग्रेड मिलती है। इसी तरह 71 से 85 प्रतिशत अंक पर बी ग्रेड, 51 से 70 प्रतिशत अंक लाने पर सी ग्रेड, 33 से 50 प्रतिशत तक लाने वाले स्टूडेंटस को डी ग्रेड दिया जाता है। वहीं, 33 प्रतिशत से कम यानी 0 से 32 प्रतिशत अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को ई-ग्रेड दी जाती है। जिसे प्रावधान के अनुसार फेल घोषित किया जाएगा। </p>
<p>8वीं बोर्ड की पूरक परीक्षा में किसी विद्यार्थी के 33 प्रतिशत से कम अंक आते हैं तो उसे प्रावधान के तहत फेल घोषित किया जाएगा।ो विद्यार्थियों का 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट में सुधार आएगा।शैक्षणिक स्तर भी मजबूत होगा। वहीं, 8वीं और 5वीं की पूरक परीक्षाएं 10 अगस्त से शुरू होंगी। जिसकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई है।<br /><strong>- यतीश विजय, अतिरिक्त जिला शिक्षाधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2023 18:11:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>  एनएचएआई के नियमों की धज्जियां उड़ा रहा हैंगिंग ब्रिज टोल प्लाजा</title>
                                    <description><![CDATA[चंबल हैंगिग ब्रिज टोल प्लाजा पर एनएचएआई नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ने शिवा कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड को टोल संचालन का ठेका दे रखा है। यहां फास्ट टैग सुविधा होने के बावजूद टोलकर्मी लोहे के बेरिकेड लगाकर वाहनों को रोक रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hanging-bridge-toll-plaza-is-flouting-the-rules-of-nhai/article-13802"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/nhai-ke-rules-hanging-bridge-toll-plaza.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल हैंगिग ब्रिज टोल प्लाजा पर एनएचएआई नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ने शिवा कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड को टोल संचालन का ठेका दे रखा है। यहां फास्ट टैग सुविधा होने के बावजूद टोलकर्मी लोहे के बेरिकेड लगाकर वाहनों को रोक रहे हैं। जिससे जाम के हालात बने रहते हैं। वाहनों की लंबी कतारें लगी होने से चालक परेशान हो रहे हैं। इमरजेंसी लेन नहीं होने के कारण एम्बुलेंस सहित अन्य इमरजेंसी वाहनों को साधारण लेन से ही निकाला जाता है। जिसकी वजह से कई बार इमरजेंसी वाहन जाम में फंसे रहते है। वहीं, एनएचआई द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार वाहनों के पीक समय पर भी एक गाड़ी पर 10 सेकंड से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए और फास्ट टैग सुविधा होने के बावजूद अगर टोल प्लाजा पर किसी भी कारण से वाहनों की कतार 100 मीटर से अधिक होती है तो इस स्थिति में सभी वाहनों को बिना टोल दिए जाने की इजाजत होती है। लेकिन, हैंगिग ब्रिज टोल प्लाजा पर नियमों के विपरीत काम हो रहा है। बेरीकेड लगाकर वाहनों को रोक टोल वसूल रहे हैं। इस प्रक्रिया में एक वाहन को करीब पैंच मिनट से ज्यादा रोका जा रहा है। <br /><br /><strong>फास्ट टैग वाहनों को भी रोक रहे </strong> <br />नेश्नल हाइवे-27 पर बना हैगिंग ब्रिज टोल प्लाजा 17 मार्च 2018 को शुरू हुआ था। वाहनों के बढ़ते दबाव के कारण एनएचआई ने यहां फास्ट टैग सुविधा अनिवार्य की थी। ताकि, वाहन चलाकों को जाम की परेशानी से निजात मिल सके। लेकिन, ठेका फर्म ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किए। हालांकि, दोनों लेन पर फास्ट टैग स्केन के लिए सेंसर तो लगवाए लेकिन आॅटोमेटिक बेरिकेड नहीं लगवाए। ताज्जूब की बात तो यह है, टोल कर्मी लोहे के बेरिकेड लगाकर फास्ट टैग वाहनों को रोक रहे हैं और कम्प्युटर सिस्टम से फास्टैग भुगतान का मिलान करने पर ही वाहनों को निकलने की अनुमति दी जाती है। इस कारण कई बार टोल कर्मचारियों व वाहन चालकों के बीच विवाद की स्थित बन जाती है।<br /><br /><strong>आधी-अधूरी व्यवस्था और टोल पूरा</strong>  <br />टोल प्लाजा पर वाहनों से पूरी टोल वसूली की जाती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। वाहन सवारों को टोल पर होने वाली दिक्कतों को लेकर जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं, जिसके कारण लोगों में टोल प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश है। यहां से गुजर रहे वाहन चालकों ने बताया कि किसी वाहन चालक के फास्ट टैग अकाउंट में बैलेंस कम हो तो उससे टोल के साथ जुर्माना भी वसूला जाता है। पैसा पूरा ले रहे हैं लेकिन जाम से राहत के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे। फास्ट टैग लगे होने के बावजूद गाड़ियों को रोका जा रहा है, समय बर्बाद कर रहे है। यहां दो लेने, बड़े और छोटे वाहन उसी में फंसे रहते हैं। इसके अलावा दुपहिया वाहनों के लिए अलग से कोई लेन नहीं है। <br /><br /><strong>सुबह-शाम लगता है लंबा जाम</strong><br />टोल प्लाज से प्रतिदिन करीब दो हजार से ज्यादा वाहनों का आवागमन रहता है। वाहनों की बढ़ती संख्या के मुकाबले यहां मात्र दो ही लेन है। वहीं, टोल मैनेजमेंट सही नहीं होने से वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती है। जिससे समय और ईंधन की बर्बादी हो रही है। बुधवार दोपहर को भी यही हालात बने हुए थे और 100 मीटर से अधिक दूरी तक वाहनों की कतारें लगी हुई थी। जबकि, एनएचएआई का दावा है, टोल प्लाजा पर फास्टैग वाहनों को नहीं रोका जाएगा। लेकिन, हकीकत दावों के ठीक उलट है।   <br /><br /><strong>100 मीटर दूर खींची जाती है पीली लाइन</strong> <br />गाइड लाइन के अनुसार, सभी टोल नाकों पर 100 मीटर की दूरी का पता लगाने के लिए पीले रंग की एक लकीर बनाने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य टोल प्लाजा आॅपरेटरों में जवाबदेही की भावना पैदा हो। <br /><br /><strong>100 मीटर लंबी लाइन तो नहीं लगेगा टैक्स</strong><br />टोल प्लाजा पर यातायात का प्रवाह सुचारू रहे, इसके लिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी ने गाइड लाइन जारी की हुई है। जिसके तहत टोल प्लाजा पर किसी कारण वाहनों की कतार 100 मीटर से अधिक होती है तो इस स्थिति में सभी वाहनों को बिना टोल दिए जाने की इजाजत होगी। <br /><br /><strong>कोटा-बूंदी के वाहनों का फास्टैग से कट रहा टोल</strong><br />हैंगिंग ब्रिज पर कोटा और बूंदी के वाहन चालकों के लिए टोल फ्री है। लेकिन, फास्टैग से टोल कट रहा है। फास्टैग से कटा टोल, कंपनी की ओर से लौटाया भी नहीं जा रहा। हालांकि कोटा-बूंदी के लोगों का टोल न कटे इसके लिए अलग से स्लीप लेन के रूप में सड़क निकाल रखी है लेकिन सभी वाहन चालकों को वहां से निकालना संभव नहीं है, क्योंकि वाहनों के दबाव के कारण जाम के हालात बने रहते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से दोनों जिलों के वाहन चालकों के लिए टोल फ्री करवाया था। लेकिन, फास्टैग शुरू होने से फिर से वाहन मालिकों का टोल कटना शुरू हो गया। <br /><br /><strong>बिना फास्टैग वाहनों से वसूला जाता है दोगुना टोल</strong><br />टोलकर्मी अमित टांक ने बताया कि टोल क्रॉस करने के लिए गाड़ियों में फास्टैग होना अनिवार्य है। जिन वाहनों में फास्टैग नहीं होता उनसे दो गुना टोल वसूला जाता है। दोगुना से तात्पर्य, टोल की राशि के बराबर ही जुमार्ना वसूला जाता है। हर वाहन का अलग-अलग टोल चार्ज होता है। वहीं, वाहनों के फास्टैग डेमेज होने के कारण सेंसर टैग को स्केन नहीं कर पाता। ऐसे में वाहन मालिक से मैनअली ही टोल लिया जाता है, जिसके कारण जाम की स्थिति बनती है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा-बूंदी के वाहनों को फ्री जरूर कर रखा है, लेकिन इसके कोई लिखित आदेश हमारे पास नहीं है।  फास्टैग से आॅटोमेटिक टोल कट जाता है। ऐसे में कटे हुए पैसे वापस नहीं हो सकते। वहीं, ट्रैफिक जाम के लिए फास्टैग अकाउंट में पैसा नहीं होना, फास्टैग डेमेज होना सहित अन्य कारण जिम्मेदार हैं। ऐसे वाहनों को रोककर मैनुअली बनाते है, जिससे जाम लगता है। <br /><strong>-अमित टांक, टोल सुपरवाइजर</strong><br /><br /><strong>नहीं दिया कोई जवाब</strong><br />एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर ए.के गुप्ता को कई बार फोन किए लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jul 2022 14:31:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पदोन्नति के नए नियमों का विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[व्याख्याता पदों पर पदोन्नति के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए नियमों के विरोध में पिछले 11 दिनों से अध्यापकों का अनिश्चितकालीन धरना क्रमिक भूख हड़ताल में बदल गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-opposed-the-new-rules-of-promotion/article-11777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/dsc_1064-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। व्याख्याता पदों पर पदोन्नति के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए नियमों के विरोध में पिछले 11 दिनों से अध्यापकों का अनिश्चितकालीन धरना क्रमिक भूख हड़ताल में बदल गया है। पदोन्नति संघर्ष समिति के बैनर तले पांच वरिष्ठ अध्यापक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वहीं 11 जून को होने वाली कैबिनेट की बैठक में वरिष्ठ अध्यापकों के पक्ष में कोई फैसला नहीं होने पर वरिष्ठ अध्यापकों ने आमरण अनशन की चेतावनी दी है। गत तीन अगस्त 2021 को शिक्षा विभाग द्वारा नया नियम लाते हुए व्याख्याता पदों पर होने वाली पदोन्नति में सेवारत वरिष्ठ अध्यापकों द्वारा यूजी और पीजी एक विषय में होने की अनिवार्यता लागू की गई। इससे प्रदेश के करीब एक लाख अध्यापक व्याख्याता पदों पर पदोन्नति से बाहर हो गए हैं।</p>
<p><strong>एक भर्ती में दो नियम लागू नहीं हो सकते</strong> <br />वरिष्ठ अध्यापकों का कहना है कि एक ही भर्ती में दो नियम लागू नहीं हो सकते हैं, जहां व्याख्याता के 50 फीसदी पद जो भर्ती प्रक्रिया से भरे जाएंगे उन पर यूजी-पीजी के विषयों की अनिवार्यता नहीं है। वहीं पदोन्नति से भरे जाने वाले 50 फीसदी पदों पर यूजी-पीजी समान विषय से रहने की अनिवार्यता रखी गई है। ऐसे में 3 अगस्त 2021 से पहले लगे सेवारत वरिष्ठ अध्यापकों को इस नियम से राहत देनी चाहिए। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jun 2022 10:35:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेबी ने सख्त किए IPO नियम: बैंक अकाउंट में बिना जरूरी फंड रखे नहीं लगा सकेंगे बोली</title>
                                    <description><![CDATA[अगर आप भी प्राइमरी मार्केट में इंटरेसट रखते हैं और आगे कंपनियों के आने वाले आईपीओ में निवेश करने की सोच रहे हैं तो यह खबर जरूरी है। अब आईपीओ में सिर्फ सब्सक्रिप्शन बढ़ाने के मकसद से बोली लगाना आसान नहीं रह गया है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने आईपीओ में बोली लगाने के नियम सख्त कर दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/mumbai-news--business-news--sebi--tightens--ipo--rules--share-market--stock-market---business-world/article-11000"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/sebi-logo.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><strong>मुंबई।</strong> अगर आप भी प्राइमरी मार्केट में इंटरेसट रखते हैं और आगे कंपनियों के आने वाले आईपीओ में निवेश करने की सोच रहे हैं तो यह खबर जरूरी है। अब आईपीओ में सिर्फ सब्सक्रिप्शन बढ़ाने के मकसद से बोली लगाना आसान नहीं रह गया है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने आईपीओ में बोली लगाने के नियम सख्त कर दिए हैं। सेबी का कहना है कि आईपीओ के एप्लिकेशन को तभी प्रॉसेस किया जाएगा</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जब उसके लिए जरूरी फंड निवेशक के बैंक अकाउंट में होगा</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">यह नियम एक सितंबर से सभी तराह की कटेगिरी के निवेशकों पर लागू होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><strong>इस नियम के क्या हैं मायने</strong> <br /></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">सेबी का उद्देश्य यह है कि सिर्फ सब्सक्रिप्शन डाटा बढ़ाने के लिए जो निवेशक या संस्थान बोली लगाते हैं</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">उन पर रोक लगाई जा सके</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">सिर्फ वहीं निवेशक अब बोली लगा सकते हैं</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जो वास्तव में कंपनी के शेयर खरीदना चाहते हैं। इस मामले में मार्केट रेगुलेटर को कई शिकायतें मिली थीं</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जिसके बाद सर्कुलर जारी किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><strong>सर्कुलर में क्या है ?</strong></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">सेबी ने सर्कुलर में यह साफ किया है कि आईपीओ में एएसबीए व्यवस्था के तहत किए गए आवेदनों को तभी मंजूरी दी जाएगी। ए जब निवेशक के बैंक खातों में आवेदन की राशि रोककर रखी गई हो। यानी स्टॉक एक्सचेंज अपने इलेक्ट्रॉनिक बुक बिल्डिंग प्लेटफॉर्म में एएसबीए आवेदन को केवल तभी स्वीकार करेंगे</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जब रोकी गई आवेदन राशि पर अनिवार्य पुष्टि मिल जाए। यह व्यवस्था सभी कटेगिरी के निवेशकों यानी रिटेल इन्वेस्टर्स</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">क्यूआईबी और एनआईआई पर एक सितंबर से लागू होगा अभी एएसबीए के आधार पर फंड ब्लॉक किए जाने से क्यूआईबी और एनआईआई का के कुछ छूट है।</span></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/mumbai-news--business-news--sebi--tightens--ipo--rules--share-market--stock-market---business-world/article-11000</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 16:20:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हेलमेट और फर्राटे में उड़ा दिए करोड़ों रुपए, फिर भी नहीं सुधरे</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के लोग ट्रैफिक रूल मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि सिर्फ हेलमेट नहीं पहनने के चलते ही कोटा ट्रैफिक पुलिस पिछले ढाई सालों में 1 करोड़ 33 लाख 6 हजार 300 रुपए का जुर्माना वसूल चुकी है। करोड़ों रुपए गंवाने के बावजूद कई लोग  न तो हेलमेट लगा रहे और न ही अपनी रफ्तार कम कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/crores-of-rupees-were-spent-in-helmet-and-over-speed--still-not-improved/article-10309"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/helmet-nahi.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के लोग ट्रैफिक रूल मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि सिर्फ हेलमेट नहीं पहनने के चलते ही कोटा ट्रैफिक पुलिस पिछले ढाई सालों में 1 करोड़ 33 लाख 6 हजार 300 रुपए का जुर्माना वसूल चुकी है। इतना ही नहीं ओवरस्पीड के मामलों में भी 1 करोड़ 14 लाख 18 हजार 800 रुपए वसूले गए हैं। करोड़ों रुपए गंवाने के बावजूद कई लोग  न तो हेलमेट लगा रहे और न ही अपनी रफ्तार कम कर रहे हैं। ऐसे में सैकड़ों लोग अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। <br /><br /><strong>हेलमेट और ओवरस्पीड में वसूले करोड़ों रुपए</strong><br />बिना हेलमेट वाहन चलाना और हवा से बातें करना, जैसे बाइक चालकों का फैशन बन गया है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2020 से अप्रेल 2022 तक पुलिस ने बिना हेलमेट पहनने वाले 44 हजार 350 लोगों के चालान बनाए। जिनसे 13306300 का जुर्माना वसूला। वहीं, ओवर स्पीड के 14318 लोगों के चालान बनाकर 11418800 रुपए जुर्माना वसूला गया। हादसे का सबसे बड़ा कारण मोबाइल पर बात करना यातायात अधिकारियों के मुताबिक सड़क हादसे का सबसे बड़ा कारण मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना है। क्योंकि, मोबाइल के कारण चालक का ध्यान भटक जाता है, जो हादसे की वजह बनता है। पुलिस ने इन ढाई सालों में 1250 लोगों का चालान बनाकर 10 लाख 90 हजार 500 रुपए का जुर्माना वसूला है। इसमें इसमें सभी तरह के वाहन शामिल हैं। <br /><br /><strong>यहां देखें किसका कितना जुर्माना</strong><br />यातायात पुलिस के अनुसार मोबाइल पर बात करने पर 1000 रुपए, बाइक-स्कूटर पर तीसरी सवारी बैठाने पर 1000, सीट बेल्ट नहीं लगाने पर 1000, बिना हेलमेट 1000, तेज रफ्तार ड्राइविंग पर 1000, खतरनाक ड्राइविंग पर 1000 रुपए (पहली बार), 10 हजार (दूसरी बार), बिना बीमा- बाइक पर 1000 और चौपहिया वाहन पर 2000 रुपए, रेड लाइट क्रॉस करने पर दुपहिया वाहन के 100 और चौपहिया वाहन के 200 रुपए जुर्माने का प्रावधान है।<br /><br /><strong>नो-पार्किंग के 52,214 चालान</strong> <br />ट्रैफिक नियम जानते हुए भी शहरवासी रूल तोड़ रहे हैं। नो-पार्किंग में वाहन खड़ा कर देते हैं। जिससे जाम की समस्या बन जाती है। कई बार तो हादसे तक हो जाते हैं। शहरभर में नो-पार्किंग में वाहन खड़े करने के 52 हजार 214 चालान काटे गए हैं। <br /> <br /><strong>रॉन्ग साइड के बने 37669 चालान</strong> <br />आंकड़ों के मुताबिक लोगों में जरा भी ट्रैफिक सेंस नहीं है। गत ढाई सालों में हेलमेट के बाद सबसे ज्यादा चालान रोंग साइड़ के बने हैं। वर्ष 2020 से अप्रेल 2022 तक 37 हजार 669 लोग चालान कटवाकर लाखों रुपए भुगत चुके। इनमें सबसे ज्यादा संख्या बाइकर्स की है। आलम यह है, शहर में जिन सडकों पर दांए से बाएं जाने के लिए कोई कट नहीं बना हुआ है और यू-टर्न लेने के लिए लंबा चक्कर से बचने को बाइक सवार रोंग साइड में घुस जाते हैं। जिन सड़कों पर कंजेक्शन ज्यादा रहता है वहां तो यह टेंÑड आम हो चला है। शहर के मुख्य मार्ग एरोडाÑम सर्कल, अंटाघर, जेल चौराहा, घोडेÞ वाले चौराहे पर हर दिन ऐसे ही हालात बने रहते हैं।<br /><br /><strong>सीट बेल्ट नहीं, 42,61200 वसूले</strong><br />बाइकर्स के अलावा चौपहिया वाहन चालक भी अपनी सुरक्षा को लेकर सजग नहीं है। पुलिस ने 9447 चालान बनाकर 42 लाख 61 हजार 200 रुपए का जुर्माना किया है।  <br /><br /><strong>तीन सवारी बैठाकर दौड़ाते हैं बाइक</strong><br />शहर में बिना हेलमेट के अलावा तीन सवारी बैठाकर बाइक दौड़ाने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इन्हें न तो अपनी और न ही दूसरों की जान की परवाह है। पिछले तीन सालों में 9 हजार 145 बाइकर्स के चालान बनाकर 9 लाख 14 हजार 500 रुपए जुर्माना वसूला। <br /><br /><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />  2020<br />चालान: 127242<br />जुर्माना :26373250</p>
<p><br />2021<br />चालान: 149035<br />जुर्माना : 34072200</p>
<p><br />2022 अप्रैल तक<br />चालान: 25044<br />जुर्माना : 5380850<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />हेलमेट लगाना और यातायात नियमों का पालन करना वाहन चालक व उसके परिवार के हित में है, न की ट्रैफिक पुलिस के। नियमों का पालन करवा रहे हैं, उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हैं। <br /><strong>- राजेंद्र कविया, यातायात निरीक्षक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 17:16:14 +0530</pubDate>
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                <title>शहर आपका, जान आपकी, फिर मौत से आंख मिलाना क्यूं</title>
                                    <description><![CDATA[वाहन चालक यातायात नियमों की अनदेखी कर ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ रहे हैं। शहर के चौराहों पर खड़े होकर यातायात व्यवस्थित करने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मी अपने अनुभव के आधार पर बताते हैं कि शहर में 50-55 फीसदी वाहन चलाने वाले चालक ट्रैफिक नियमों की परवाह नहीं करते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/your-city--your-life--then-why-make-eye-contact-with-death/article-9986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/shahar-aapka.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर आपका अपना है, जान भी आपकी है। फिर क्यों बेतरतीब ढंग से वाहन चलाकर अपनी और अपनों की जान जोखिम में डालते हो। वाहन चालक यातायात नियमों की अनदेखी कर ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ रहे हैं। शहर के चौराहों पर खड़े होकर यातायात व्यवस्थित करने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मी अपने अनुभव के आधार पर बताते हैं कि शहर में 50-55 फीसदी वाहन चलाने वाले चालक ट्रैफिक नियमों की परवाह नहीं करते हैं। चालकों की जागरूकता के बिना ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार आना मुश्किल है। पुलिस अपनी ओर से ट्रैफिक व्यवस्था दुरूस्त करने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन जिम्मेदारी तो वाहन चलाने वालों की भी बनती है कि वो यातायात नियमों का पालन कर जागरूक नागरिक का कर्तव्य निभाएं। हालांकि ट्रैफिक पुलिस नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई में ढिलाई भी बरती है। जिसकी वजह से ऐसे लापरवाह चालकों के हौसले बढ़ जाते हैं। <br /><br /><strong>ऐसे नियम तोड़ रहे वाहन चालक</strong><br /><br />सीन-1 : दोपहर 1.45 पर छावनी से गुमानपुरा की ओर आॅटो जा रहा था, जो मल्टीपरपज स्कूल की बगल से रावतभाटा रोड की तरफ निकल रहे रास्ते की ओर घूम गया। ऐसे में पीछे आ रहा बाइक सवार आॅटो से टकराते बाल-बाल बचा। आॅटो चालक ने मुड़ने से पहले न तो एंडीगेटर दिया और न ही स्पीड धीमी की। <br /> <br />सीन-3 शाम 5 बजे तलवंडी से विज्ञान नगर चौराहे की ओर एक बाइक पर सवार होकर चार युवक निकल रहे थे। उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने स्पीड बढ़ा दी। ऐसे लापरवाह वाहन चालक अपने साथ दूसरों की जिंदगी भी जोखिम में डाल रहे हैैं। वहीं, तलवंडी से जवाहर नगर कि ओर बाइक सवार जेब से मोबाइल निकाल नंबर डायल करता हुआ नजर आया। <br /><br />सीन-5 शाम 5:30 बजे करीब सीएडी सर्कल से एयरोड्रम सर्किल की ओर रोंग साइड से आ रहा बाइक सवार कंधे के सहारे कान पर मोबाइल लगा बात कर रहा था। जबकि इस मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन रहता है। ऐसे में दुर्घटनाओं की संभावनाएं ज्यादा बढ़ जाती है।  <br /><br />सीन - शाम 6.41 बजे संजय नगर स्थित पेट्रोल पम्प के पास डीसीएम की ओर जा रहे मार्ग पर डिवाइडर कट है, जहां वाहन चालक रोंग साइड जाकर रोड क्रॉस करते हैं। दिनभर में कई बार जाम और हादसे के हालात बने रहते हैं। पूर्व में हादसे की संभावना को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने इस क्रॉसिंग कट को बंद करवा दिया था लेकिन वाहन चालकों ने डिवायडर के पत्थर निकालकर फिर से एक कट खोल दिया।<br /><br /><strong>सख्ती बरतने पर जनता करती है नियमों का पालन</strong><br />यातायात व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस पर है, लेकिन वह अपनी इच्छानुसार ही कार्रवाई करती है। सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान ही अभियान चलाती है और सात दिन बाद ही अभियान बंद हो जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जनता सख्ती बरतने पर नियम का पालन करती है। ऐसे में पुलिस को अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाले लापरवाहों के खिलाफ सख्ती बरतनी चाहिए। <br /><br /><strong>डीएसपी ट्रैफिक धमार्राम गिला से सीधी बात </strong><br /><br /><strong> कानून तोड़ने वालों की न करें मदद</strong><br /><br />- ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ पुलिस की अनियमित कार्रवाई भी जिम्मेदार है<br />- ऐसा नहीं है, ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ पुलिस नियमित कार्रवाई करती है। इसी का नतीजा है, अधिकतर बाइक सवार हेलमेट लगाकर ही घर से निकलते हैं। वहीं, चौपहिया वाहन चालक भी सीट बेल्ट लगाते नजर आते हैं। ये बात अलग है, कभी-कभी जवान वीआईपी और लॉ एंड आॅर्डर डयूटी में व्यस्त हो जाते हैं। वैसे पुलिस यातायात व्यवस्था बनाए रखने की पूरी कोशिश करती है। साथ ही लापरवाहों के खिलाफ कार्रवाई भी करती है। <br /><br />-  शहर में कितने फीसदी लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते <br />- इस बारे में कोई सर्वे तो नहीं हुआ है लेकिन चौराहों पर ड्यूटी करने वाले पुलिस जवानों के अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है कि 50 से 55 फीसदी वाहन चालक नियमों का पालन नहीं करते। <br /><br />-  वाहन चालकों में ट्रैफिक सेंस आए, इसके लिए क्या किया जाना चाहिए।<br />- ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले लोग लापरवाह होते हैं। कुछ अनजाने में नियम तोड़ते हैं तो कुछ जानबुझ कर। ऐसे लोगों की सिफारिश नहीं की जानी चाहिए। इससे लोगों में ट्रैफिक सैंस पैदा होने की उम्मीद की जा सकती है। <br /><br /><strong>कार्रवाई का डर जरूरी</strong><br />वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. एमएल अग्रवाल के मुताबिक अहम यानी ईगो की वजह से व्यक्ति के मन में कानून के उल्लंघन का भाव आता है। लोगों के मन में समान कार्रवाई का डर हो तो ट्रैफिक सेंस आ सकता है। इसके अलावा स्वयंसेवी संस्थाओं को लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने का काम करना चाहिए। समय-समय जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि शहरवासियों के मन में ट्रैफिक पालना की सोच पैदा हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 May 2022 15:11:55 +0530</pubDate>
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