<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/article-162/tag-88024" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Article 162 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/88024/rss</link>
                <description>Article 162 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पीड़ित परिवारों को अनुकंपा नौकरी देने पर मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें करूर भगदड़ त्रासदी के पीड़ितों के परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले में आगे की सुनवाई तय की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-big-decision-in-karur-stampede-case-stay-on/article-162930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/superme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें करूर भगदड़ त्रासदी के पीड़ितों के परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार और अन्य की याचिका पर नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है।</p>
<p>तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी ने संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने के राज्य के फैसले का बचाव किया। सिंघवी ने मद्रास उच्च न्यायालय के दखल पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की नीति को किसी ने चुनौती नहीं दी थी। वहीं, एक राजनीतिक दल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ए. वेलन ने हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार की इस नीति का विरोध किया।</p>
<p>सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पारदीवाला ने इस आपत्ति पर सवाल उठाया और पूछा कि सरकार किसी पीड़ित के जीवित आश्रितों को रोजगार क्यों नहीं दे सकती, खासकर तब जब मृतक ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति रहा हो। इसके साथ ही, न्यायमूर्ति चंद्रन ने इस मामले में राजनीति को बीच में लाने से बचने की चेतावनी दी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय ने इन नियुक्तियों को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि ये संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती हैं। उच्च न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि इस तरह के फैसले से भविष्य में ऐसे दावों की बाढ़ आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-big-decision-in-karur-stampede-case-stay-on/article-162930</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-big-decision-in-karur-stampede-case-stay-on/article-162930</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 18:24:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/superme-court.png"                         length="1375391"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        