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                <title>तपन ने की खिलाड़ियों की प्रैक्टिस किक आउट : स्कूल टाइम बदले, मैदान सूने, गर्मी ने थाम दी रफ़्तार </title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी का कहर: बदली कोटा की रफ़्तार, दिनचर्या से खेल तक सब प्रभावित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/scorching-heat-knocks-out-athletes--practice-sessions/article-152191"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tapan-ne-ki--khiladiyon-ki-praiktis-kik-aaut...kota-news-30.04.2026.jpg-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। तापमान ने पिछले 25 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सुबह 10 बजे के बाद ही तेज धूप और लू के थपेड़े महसूस होने लगते हैं। दोपहर होते-होते हालात ऐसे हो जाते हैं कि शहर के प्रमुख मार्गों कोटड़ी सर्किल, घोड़ा वाला बाबा सर्किल और तलवंडी क्षेत्र — पर सन्नाटा छा जाता है। भीषण गर्मी का असर खेल गतिविधियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। छत्र विलास गार्डन और किशोर सागर तालाब जैसे क्षेत्रों में जहां पहले सुबह-शाम रौनक रहती थी, अब वहां लोगों की आवाजाही कम हो गई है। खेल मैदानों में भी खिलाड़ियों की संख्या घटी है। खिलाड़ी अब सुबह 4:30 से 5 बजे के बीच ही अभ्यास कर लेते हैं या फिर देर शाम का इंतजार करते हैं।</p>
<p>पहले सुबह 6 बजे तक मैदान खिलाड़ियों से भर जाता था, लेकिन अब गर्मी के कारण सभी को जल्दी अभ्यास खत्म करना पड़ रहा है। इससे खिलाड़ियों की स्टैमिना और प्रदर्शन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।<br /><strong>-प्रितम सिंह, सचिव बॉक्सिंग संघ</strong></p>
<p>दोपहर में अभ्यास करना अब संभव नहीं है, इसलिए पूरी दिनचर्या बदलनी पड़ी है। बढ़ती गर्मी से थकान जल्दी होती है और अभ्यास का समय भी घट गया है।<br /><strong>-पुष्पेन्द्र गुर्जर, खिलाड़ी</strong></p>
<p><strong>स्वास्थ्य पर भी खतरा</strong><br />लगातार बढ़ती गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामलों में भी इजाफा हो रहा है। गर्मी ने न केवल पारा बढ़ाया है, बल्कि कोटा की जीवनशैली और रफ्तार को भी पूरी तरह बदल दिया है। आने वाले दिनों में राहत नहीं मिली तो हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।<br /><strong>-तिरथ सांगा, सचिव फुटबॉल संघ</strong></p>
<p><strong>डॉक्टर की सलाह: ऐसे रखें खुद को सुरक्षित</strong><br /><strong>डॉ यावर खान</strong> के अनुसार, खिलाड़ियों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अभ्यास से पहले और बाद में पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेना जरूरी है, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सीधी धूप में अभ्यास से बचें और संभव हो तो सुबह या शाम के समय ही ट्रेनिंग करें। उन्होंने सलाह दी कि अत्यधिक थकान, चक्कर या सिरदर्द महसूस होने पर तुरंत आराम करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:26:40 +0530</pubDate>
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                <title>एस्ट्रोटर्फ तो दूर, शहर में नहीं हॉकी मैदान,कैसे तैयार होंगे ध्यानचंद</title>
                                    <description><![CDATA[संसाधनों का अभाव फिर भी  खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना संजोए हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/forget-astroturf--there-s-not-even-a-proper-hockey-field-in-the-city--how-will-future-dhyan-chands-be-produced/article-136383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । भारत का राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद शहर में खिलाड़ियों के लिए एक ढंग का हॉकी मैदान तक नहीं मिल पा रहा है। एस्ट्रो टर्फ जैसी आधुनिक सुविधा की बात करना तो दूर, अभ्यास के लिए भी मैदान उपलब्ध नहीं हो पा रहा। परिणामस्वरूप, प्रतिभाशाली खिलाड़ी संसाधनों के अभाव में अपनी क्षमता का पूरा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। यह शहर के हॉकी खिलाड़ियों के लिए किसी विडंबना से कम नहीं है। शहर के हॉकी कोच दीपक नीनामा ने बताया कि वे कच्चे मैदानों या साझा खेल परिसरों में अभ्यास करने को मजबूर हैं, जहां न तो मानक मापदंड पूरे होते हैं और न ही सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था। बारिश के दिनों में मैदान की हालत और बदतर हो जाती है, जिससे अभ्यास बाधित होता है। कई बार चोटिल होने का खतरा भी बना रहता है। इसके बावजूद, खिलाड़ियों का उत्साह कम नहीं हुआ है। वे सीमित संसाधनों में भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना संजोए हुए हैं।</p>
<p><strong>खिलाड़ी अन्य शहरों की ओर रुख करने को मजबूर </strong><br />उन्होंने बताया कि हॉकी को बढ़ावा देने के लिए सरकार और खेल संघों द्वारा समय-समय पर घोषणाएं जरूर होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग ही तस्वीर पेश करती है। शहर में न तो स्थायी कोचिंग व्यवस्था है और न ही नियमित प्रतियोगिताओं का आयोजन। नतीजतन, खिलाड़ी अन्य शहरों की ओर रुख करने को मजबूर होते हैं, जहां बुनियादी ढांचा अपेक्षाकृत बेहतर है। इससे न केवल स्थानीय प्रतिभा का पलायन होता है, बल्कि शहर की खेल पहचान भी प्रभावित होती है। खेल प्रेमियों और अभिभावकों का कहना है कि यदि शहर में एक मानक हॉकी स्टेडियम और एस्ट्रो टर्फ मैदान विकसित किया जाए, तो यहां से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं। स्कूल-कॉलेज स्तर पर हॉकी को प्रोत्साहन देने, प्रशिक्षित कोच उपलब्ध कराने और नियमित लीग प्रतियोगिताएं शुरू करने की भी आवश्यकता है। यह निवेश केवल खेल सुविधा नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य में निवेश होगा।</p>
<p><strong>हॉकी भारत की पहचान</strong><br />ठोस योजना बनाकर समयबद्ध तरीके से काम शुरू करें। हॉकी भारत की पहचान रही है और यदि शहर में इसे सम्मान नहीं मिला, तो यह केवल खिलाड़ियों का नहीं, पूरे खेल तंत्र का नुकसान होगा। उम्मीद है कि जिम्मेदार अधिकारी जल्द जागेंगे और शहर के हॉकी खिलाड़ियों को उनका हक मिलेगा।<br /><strong>- दीपक नीनामा, कोच, कोटा</strong></p>
<p><strong>अलग से हॉकी का मैदान जरूरी</strong><br />कोटा शहर शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी अपनी पहचान बना रहा है। वहीं राष्ट्रीय खेल हॉकी को बढावा देने के लिए अलग से मैदान भी जरूरी है, ताकि प्रतिभवान खिलाड़ी तैयार हो सके।<br /><strong>- सुधीर कुमार, खिलाड़ी कोटा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में हॉकी खिलाड़ियों के लिए उपयुक्त और आधुनिक ग्राउंड का अभाव आज भी एक कड़वी सच्चाई है। बेहतर सुविधाओं के बिना प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हमारा दृढ़ प्रयास है कि खेलो इंडिया जैसी राष्ट्रीय योजना के माध्यम से शहर को एक अत्याधुनिक एस्ट्रो टर्फ हॉकी मैदान की सौगात मिले, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को नया मंच और नई पहचान मिल सके। यह सपना लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल से ही साकार हो सकता है, जो शहर के खेल भविष्य को नई दिशा देगा।<br /><strong>- वाई बी सिंह, जिला खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 14:43:38 +0530</pubDate>
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                <title>3 साल से गड्ढ़ों में फुटबॉल मैदान, प्रेक्टिस को भटक रहे खिलाड़ी </title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती का एकमात्र राजकीय फुटबॉल छात्रावास वाकेशनल स्कूल का खेल मैदान जिम्मेदारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/football-ground-in-potholes-for-3-years--players-wandering-for-practice/article-99800"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(24).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती का एकमात्र राजकीय फुटबॉल छात्रावास वाकेशनल स्कूल का खेल मैदान जिम्मेदारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। छात्रावास का फुटबॉल ग्राउंड पिछले 3 सालों से गड्ढ़ों में तब्दील है, जबकि इसके डवलपमेंट के लिए बजट भी मिला हुआ है। इसके बावजूद खेल और खिलाड़ियों के प्रति  जिम्मेदारों ने लापरवाहपूर्ण रवैया अपनाया हुआ है। हालात यह है कि इस छात्रावास में प्रदेशभर से खिलाड़ी आते हैं, जिन्हें खेलने के लिए मैदान नहीं मिलता। ऐसे में प्रेक्टिस के लिए उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।  </p>
<p><strong>97 लाख का बजट कराया था उपलब्ध</strong><br />नयापुरा स्थित राजकीय फुटबॉल छात्रावास में खेल मैदान है, जो वर्तमान में खेलने लायक नहीं है। मैदान में जगह-जगह गड्ढ़े हो रहे हैं। जिसकी वजह से हॉस्टल के फुटबॉल खिलाड़ी अपने ही मैदान में पिछले तीन साल से प्रेक्टिस नहीं कर पा रहे। जबकि, तत्कालीन सरकार ने  हॉस्टल डवलपमेंट के लिए 97 लाख का बजट केडीए (पूर्व में यूआईटी) को उपलब्ध करवा दिया था। इसके बावजूद मैदान को डवलप नहीं किया गया। हालांकि, गत वर्ष हॉस्टल में नए कमरे बनाए गए थे और मैदान में मिट्टी भरवाकर समतलीकरण किया जाना था, जो अब तक नहीं करवाया गया। </p>
<p><strong>हर रोज ग्राउंड पहुंचने के लिए  होती है मशक्कत</strong><br />शारीरिक शिक्षक प्रवीण विजय ने बताया कि पिछले तीन साल से छात्रावास का मैदान में गड्ढ़े हो रहे हैं। जिसमें खिलाड़ियों का प्रेक्टिस करना संभव नहीं है। ऐसे में उन्हें स्टेडियम जाना पड़ता है, जहां कई बार खेलने के लिए जगह नहीं मिल पाती, क्योंकि वहां पहले से ही कई अकेडमियों की टीमें प्रेक्टिस कर रही होती है। ऐसे में टीम को खेलने से पहले हर रोज ग्राउंड ढूंढने की मशक्कत करनी पड़ती है। जबकि, खिलाड़ियों को हर रोज दो से ढाई घंटे प्रेक्टिस करनी होती है, जो ग्राउंड के अभाव में नहीं हो पाती। समस्या से अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया लेकिन समाधान नहीं हुआ।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों के पैदल स्टेडियम जाने-आने में हादसे का खतरा</strong><br />संभाग का एकलौता राजकीय फुटबॉल छात्रावास नयापुरा जेकेलोन अस्पताल के सामने वोकेशनल स्कूल में है।   यहां खेल मैदान नहीं होने से 20 खिलाड़ियों को करीब 500 मीटर स्टेडियम में पैदल-पैदल जाना-आना पड़ता है। जबकि, इस रोड पर ट्रैफिक अधिक रहता है। ऐसे में हादसे की आशंका बनी रहती है। वहीं, अव्यवस्थाओं का असर उनके खेल पर भी पड़ता है। जबकि, राज्य के विभिन्न जिलों से खिलाड़ी अच्छी खेल सुविधा के भरोसे में कोटा आते हैं। ऐसे में उन्हें अव्यवस्थाओं से जूझना पड़े तो प्रदेश में कोटा की छवि पर गलत प्रभाव पड़ेगा। </p>
<p><strong>मैदान में झाड़-झाड़ियों </strong><br />का लगा ढेरफुटबॉल छात्रावास का खेल मैदान करीब 100 गुना 100 साइज का है। जिसमें से प्रेक्टिस एरिया 100 गुना 80 है। जिसमें झाड़-झाड़ियों उगी होने से जंगल हो रहा है। जिसमें जहरीले जीव जंतुओं की मौजूदगी बनी रहती है। वहीं, जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। हॉस्टल के नवनिर्मित कमरों के निर्माण के बाद मैदान में मिट्टी भरवाकर जमीन समतलीकरण की जानी थी, जो अब तक पूरा नहीं हो सका। हालांकि, मैदान में केवल सीढ़ियां ही बनी है। </p>
<p><strong>अभावों के बावजूद उप विजेता रही टीम </strong><br />शारीरिक शिक्षक प्रवीण विजय ने बताया कि छात्रावास की फुटबॉल टीम गत वर्ष सितम्बर माह में बारां में आयोजित हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उप विजेता रही है। वहीं, नेशनल टीम में एक बच्चे का चयन हुआ है। इसके अलावा 17 व 19 वर्षीय फुटबॉल स्टेट टूर्नामेंट इसी साल होना है। जिसमें अधिकतर खिलाड़ी छात्रावास के ही होंगे। ऐसे में इनकी नियमित प्रेक्टिस जरूरी है। अधिकारियों को हस्तक्षेप कर ग्राउंड विकसित करवाया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>कैसे निखरेगी प्रतिभाएं</strong><br />प्रदेशभर के अलग-अलग जिलों से चयनित खिलाड़ी कोटा आते हैं। लेकिन छात्रावास में खेलने के लिए मैदान ही नहीं है। रोजाना पैदल-पैदल स्टेडियम जाना होता है, फिर वहां खेलने के लिए जगह ढूंढनी पड़ती है। इतनी मशक्कत के बाद कभी जगह मिलती हो तो प्रेक्टिस हो पाती है, कई बार तो बैरंग लौटना पड़ता है। अभावों में खेल प्रतिभाएं कैसे निखरेगी।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं खिलाड़ी</strong><br />खुद के ही कैम्पस में खेल नहीं पा रहे। मैदान में इतने गड्ढ़े हैं कि प्रेक्टिस करने की सोच भी नहीं सकते। जबकि, बोर्ड परीक्षा के बाद स्टेट टूर्नामेंट होने वाला है, ऐसे में प्रेक्टिस की सख्त आवश्यकता है लेकिन स्टेडियम में भी कई बार जगह नहीं मिल पाती। जिसकी वजह से पे्रक्टिस नहीं हो पाती। अधिकारियों को खेल सुविधाएं विकसित करनी चाहिए।<br /><strong>- सुरेंद्र गोयल (परिवर्तित नाम) खिलाड़ीं</strong></p>
<p> यह बहुत पुराना फुटबॉल ग्राउंड है, जो मरम्मत के अभाव में खेलने लायक नहीं बचा है। इस एरिया में फुटबॉल खेलना बंद सा हो गया है। जिम्मेदार अधिकारियों को इसके विकास पर ध्यान देना चाहिए ताकि, प्रतिभाएं निखर सके। क्योंकि शहर में पहले ही खेल मैदानों की कमी है, ज्यादा मैदान होंगे तो कोटा को ज्यादा खिलाड़ी मिल सकेगी।<br /><strong>- तीरथ सांगा, सचिव, जिला फुटबॉल संघ कोटा</strong></p>
<p>स्कूल खुलने पर जिला शिक्षाधिकारी की मौजूदगी में प्रिंसिपल व कोच की बैठक कर समस्या क्या है, मैदान डवलप क्यों नहीं हो पा रहा, इसकी जानकारी करेंगे और मिलकर समाधान करवाएंगे।<br /><strong>- शिवराज सिंह चौधरी, उप जिला शिक्षाधिकारी, शारीरिक शिक्षा</strong></p>
<p>आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। मंगलवार को स्कूल खुलने पर मैं स्वयं खेल मैदान का निरीक्षण करुंगा। यदि, मैदान डवलपमेंट के लिए बजट आया हुआ है फिर भी काम नहंी करवाया गया तो गंभीर बात है। मामले की पूरी जानकारी कर प्राथमिकता से समाधान करवाएंगे।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक कोटा </strong></p>
<p>राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है। छात्रावास के फुटबॉल ग्राउंड को डवलप करवाने व समस्या के समाधान के लिए जिला शिक्षाधिकारी व एडीपीसी को निर्देशित किया है। <br /><strong>- सतीश गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 17:33:55 +0530</pubDate>
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                <title>ICC T-20 World Cup : भारतीय टीम ने न्यूयॉर्क में शुरू किया अभ्यास</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और वेस्टइंडीज की सह मेजबानी में चार जून से शुरु होने वाले टी-20 विश्वकप के लिए न्यूयॉर्क पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम के अधिकतर खिलाड़ियों ने अभ्यास सत्र में भाग लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/icc-t-20-world-cup-indian-team-started-practice-in-new/article-79798"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/practice-indian-cricket-team.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका और वेस्टइंडीज की सह मेजबानी में चार जून से शुरु होने वाले टी-20 विश्वकप के लिए न्यूयॉर्क पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम के अधिकतर खिलाड़ियों ने अभ्यास सत्र में भाग लिया। हालांकि स्टार बल्लेबाज विराट कोहली अभी तक टीम से नहीं जुड़े हैं।</p>
<p>इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मुकाबलों में खेलने के कारण भारतीय टीम टुकड़ों में न्यूयॉर्क पहुंची है। खिलाड़ियों ने वॉर्मअप किया, दौड़ लगाई, कुछ हल्की स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग का काम किया और फिर फुटबॉल से थोड़ा अभ्यास किया।</p>
<p>टीम के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच सोहम देसाई ने अभ्यास सेशन पर कहा कि ये खिलाड़ी ढाई महीने तक राष्ट्रीय टीम से दूर रहे हैं। सबको साथ लाकर पता किया जा रहा है कि वे कहां खड़े हैं और विश्व कप से पहले क्या किया जाना चाहिए यही लक्ष्य है। लक्ष्य यही है कि मैदान पर 45 मिनट से एक घंटा बिताया जाए ताकि आगे बढ़ा जा सके।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हम उन्हें चलते देखना चाहते हैं। हम उन्हें दौड़ते देखना चाहते हैं ताकि हर व्यक्ति के लिए पहले मैच से पहले पर्याप्त काम किया जा सके।</p>
<p>भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि अपनी रूटीन में आसानी से ढल रहे हैं और हम केवल यह करना चाह रहे थे कि खिलाड़ी टाइम जोन के आदी हो जाएं।</p>
<p>जसप्रीत बुमराह ने कहा कि हमने अभी क्रिकेट नहीं खेला है। हम यहां टीम के साथ गतिविधि के लिए आए थे। उम्मीद है कि यह अच्छा होगा। मौसम काफी अच्छा है।</p>
<p> भारत को विश्व कप में पहला मैच पांच जून को आयरलैंड के साथ खेलना है और उसके बाद नौ जून को उनका मुकाबला पाकिस्तान से होगा। 12 जून को अमेरिका और 15 जून को कनाडा के साथ खेलेंगे। पहले तीन मैच न्यूयॉर्क और अंतिम फ्लोरिडा में खेला जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 15:35:19 +0530</pubDate>
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                <title>हेरत अंगेज व परंपरागत करतब दिखाएंगे पट्टेबाज</title>
                                    <description><![CDATA[इस अखाड़े में पहले कुश्ती का दंगल का अखाड़ा हुआ करता था बाद में यहां व्यायामशाला और शस्त्रों के अखाड़े कि शुरूआत हुई और लड़के आने लगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patter-will-show-traditional-and-traditional-stunts/article-58244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/herat-angez-va-parampragat-kartab-dikhayenge-pattebaz...kota-news-28-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अखाड़े और व्यायामशालाएं जानी जाती हैं उनके द्वारा किए जाने वाले हैरतंगेज करतबों और कलाबाजियों से पर एक अखाड़ा ऐसा भी है जो सिर्फ प्रशासन द्वारा तय किए गए और उसके द्वारा तय किए गए दिशा निर्देशों के अनुसार प्रदर्शन करके भी प्रसिद्ध है। बोट के बालाजी मंदिर स्थित महाबली व्यायामशाला में कल होने वाले प्रदर्शन को शानदार बनाने के लिए लड़के जी जान से लगे हुए हैं और सुबह से ही करतबों और शस्त्रों को चलाने का अभ्यास कर रहे हैं ताकि प्रदर्शन के समय कोई चूक ना हो। व्यायामशाला के व्यवस्थापक अशोक गोयल ने बताया कि इस व्यायामशाला में 250 से भी ज्यादा लड़के हर दिन सभी तरहों के शस्त्रों को चलाने का अभ्यास करते हैं और साथ ही कुश्ती और बुशू कि भी प्रैक्टिस करते हैं। अनंत चतुर्दशी को लेकर लड़कों में इस बार काफी उत्साह है क्योंकि पिछले कुछ सालों से कोरोना के चलते लड़के अपने करतबों का प्रदर्शन खुलकर नहीं कर पा रहे थे। यहां 8 साल के बच्चे से लेकर 40 साल तक के पुरूष भालों तलवारों और चक्करों को अपनी उंगलियों पर घुमाने का हुनर रखते हैं। </p>
<p><strong>170 साल पुराना अखाड़ा</strong><br />अखाड़े के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने बताया कि इस अखाड़े में पहले कुश्ती का दंगल का अखाड़ा हुआ करता था बाद में यहां व्यायामशाला और शस्त्रों के अखाड़े कि शुरूआत हुई और लड़के आने लगे। आज भी इस व्यायामशाला में कलाबाजों और पहलवानों के लिए मिट्टी से बना अखाड़ा और कसरत करने के लिए जिम और योग के लिए प्रांगण बना हुआ है जहां हर दिन सुबह लड़के आकर पहले कसरत करते हैं फिर करतबों का अभ्यास करते हैं। ये अखाड़ा करीब 170 साल पुराना है और इस का नाम बालाजी के नाम महाबली पर रखा गया था। तब से ही इसे ही महाबली अखाड़ा कहा जाता है। </p>
<p><strong>समिति के सदस्य ही संचालित करते हैं</strong><br />अखाड़े के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने बताया कि व्ययामशाला का सारा खर्चा अखाड़ा समिति ही व्यय करती है जिसमें सिर्फ 25 वर्ष से उपर कि आयु वालों से सदस्यता शुल्क के रूप में योगदान लिया जाता है। वहीं अखाड़े के जिम, योगा स्थल और मिट्टी के अखाड़े का व्यय वहां पर अभ्यास करने वालों से सदस्यता शुल्क के रूप में लिया जाता है।</p>
<p><strong>सिर्फ पारम्परिक करतबों का ही प्रदर्शन</strong><br />इस बार अखाड़े के लड़कों द्वारा चाकू , बनेठी को एक उंगली से घुमाने का प्रदर्शन किया जाएगा वहीं इसके साथ ही अखाड़े समिति के द्वारा इस साल कोई भी जानलेवा या जिससे किसी को नुकसान पहुंचे ऐसा करतब या स्टंट नहीं दिखाने का निर्णय लिया गया है, अखाड़े के लड़के सिर्फ पारम्परिक रूप से किए जाने वाले करतबों का ही लोंगों के बीच प्रदर्शन करेंगें जिससे पारम्परिक शस्त्र विद्या के बारे में लोगों को बता सके। </p>
<p><strong>अखाड़े से शस्त्र प्रतियोगिता का पहला हाड़ौती केसरी</strong><br />अखाड़े के व्यवस्थापक अशोक गोयल ने बताया कि इस अखाड़े से तलवार बाज लोकेश शर्मा 2023 में कोटा में आयोजित शस्त्र प्रतियोगिता में हाड़ौती केसरी का खिताब जीतने कामयाब हुए जिसमें लोकेश ने 8 तरह के शस्त्रों का लगातार प्रदर्शन किया। वहीं इसके साथ ही लोकेश 2018 में उदयपुर में, 2019 में श्रीगंगानगर में और 2021 में बाड़मेर में आयोजित वुशु स्टेट चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल के विजेता रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 17:40:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तलवार और अग्नि चक्कर के करतब से चौंकाने की कर रहे तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[इस अखाड़े में करीब 100 लड़के हर दिन प्रैक्टिस करने आते हैं और हर साल अनंत चर्तुदशी से 1 महीने पहले प्रैक्टिस करना शुरू कर देते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparing-to-surprise-with-sword-and-fire-tricks/article-58157"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/talwar-or-agni-chakkr-k-kartab-s-chokane-ki-kr-rhe-tyyari...kota-news-24-09-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सारा शहर अनंत चर्तुदशी कि तैयारियों में जुट गया है जिसमें कहीं शोभायात्राओं के स्वागत के लिए गेट खड़े हो गए हैं तो कहीं पूरे बाजारों को सजा दिया गया है और इसी क्रम में अखाड़ों ने भी अपने प्रर्दशन को लेकर तैयारी तेज़ कर दी हैं। कोटा के सबसे पुराने अखाड़ों में से एक पट्टा बुर्ज अखाड़ा के लड़के भी दिन भर अपने प्रर्दशन और करतबों को निखारने में पूरे दम खम से जुटे हुए हैं। अखाड़े में कोई दोनों हाथों में तलवार लेकर करतब कि प्रैक्टिस कर रहा है तो कोई बनेठी को शरीर के चारों तरफ हैरतंगेज ढंग से चला रहा है। वहीं कोई अखाड़े में लौहे के बने पट्टे से रस्सी कूद खेल रहा है। </p>
<p><strong>अग्नि चक्कर का होगा प्रदर्शन </strong><br />अखाड़े के उस्ताद शम्भु सिंह ने बताया कि इस अखाड़े में करीब 100 लड़के हर दिन प्रैक्टिस करने आते हैं और हर साल अनंत चर्तुदशी से 1 महीने पहले प्रैक्टिस करना शुरू कर देते हैं। लड़के कीलों से बने पट्टे पर लेटकर सीने पर पत्थर फोड़ना, निम्बु को पेट पर रखकर तलवार से काटना या तलवारों को चलाते समय आपस में बदलना सभी तरह के करतबों कि यहां प्रैक्टिस कर रहे हैं। अनंत चर्तुदशी से 1 महीने पहले अखाड़े कि रौनक ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि इस महीने में नए लड़कों के साथ पुराने लड़के भी प्रैक्टिस करने के लिए आने लग जाते हैं। जो पुराने हैं वो नए लड़कों को करतब सिखाते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं। सिंह ने आगे बताया कि इस बार प्रदर्शन में लड़के सिर्फ उनके अखाड़े के द्वारा किया जाने वाला करतब अग्नि चक्कर प्रदर्शन भी करेंगें जिसमें कलाबाज लड़का चक्कर पर लगे 16 गुट्टों को डीजल में भीगोकर उसे जलाकर उससे करतब दिखाएगा जो बहुत मुश्किल करतब है। वहीं कलाबाज धारिया, लौहे का पट्टा, दो हाथ कि बनेठी और लौहे के चक्कर के साथ करतब दिखाते हुए नजर आएंगे। </p>
<p><strong>150 साल पुराना अखाड़ा</strong><br />व्यवस्थापक प्रीतम सिंह ने बताया कि अखाड़ा अनंत चर्तुदशी पर अपनी झांकी और करतबों का प्रर्दशन साल 1984 से करते आ रहे हैं वहीं अखाड़ा लगभग 150 साल पुराना है। अखाड़े नाम के सवाल पर प्रीतम सिंह ने बताया कि अखाड़ा कोटा के पट्टा बुर्ज के पास है और इस अखाड़े कि शुरूआत करने वाले उस्ताद गणपत सिंह अंग्रेजों के जमाने में बुर्ज पर स्थित पतेह जंग तोप का संचालन किया करते थे। उन्होंने इस बुर्ज के पास मन्दिर और अखाड़े कि स्थापना बुर्ज के नाम पर ही की जो आज भी संचालित है। अखाड़े का संचालन अखाड़ा पट्टा बुर्ज समिति के द्वारा किया जाता है और सामिति के द्वारा ही पुरा खर्चा व्यय किया जाता है साल भर में सिर्फ एक बार ही समाज से सहयोग लिया जाता है। </p>
<p><strong>12 मिनट बहुत कम समय</strong><br />वहीं प्रशासन द्वारा तय किए गए पॉइन्टों और समय पर राय जानी जो उनके मुताबिक पॉइन्ट बनाना तो ठीक है लेकिन समय को सीमित करना जायज नहीं क्योंकि एक अखाड़े को लय बनाने और करतबों के लिए पर्याप्त जगह बनाने में ही 10 मिनट लग जाते हैं तो फिर कलाबाज करतब क्या दिखाएंगे। वहीं उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से ही निगम ने भी प्रोत्साहन राशि देना बंद कर दिया है जिससे अखाड़े चलाने में परेशानी भी आ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2023 12:01:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चाकू से लगाएंगें आंखों में काजल, पलकों से उठाएंगें सूई</title>
                                    <description><![CDATA[यह अखाड़ा कोटा का सबसे पुराना अखाड़ा है जिसकी स्थापना उस्ताद चौथमल द्वारा करीब सौ साल पहले की गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/will-apply-kajal-in-the-eyes-with-a-knife--will-lift-the-needle-from-the-eyelashes/article-58063"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/ch.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बाइक को आग के गोले से निकालना, चाकू से आँख में काजल डालना या आखों कि पलकों से सूई को उठाना सब सुनकर कैसा लगा बहुत खतरनाक और जोखिम भरा है। आज हम बात कर रहे हैं छोटी समाध स्थित उस्ताद चौथमल अखाड़ा कि जो कोटा शहर सबसे पुराना अखाड़ा है और एक सदी से भी ज्यादा समय से यहां के कलाबाज और उस्ताद कोटा के निवासीयों को दांतों तले उंगली चबाने को मजबूर कर रहे हैं। अखाड़ा और उसमें प्रैक्टिस करने वाले सभी लडकें एक से बढ़कर एक हैरतंगेज करतबों कि जमकर प्रैक्टिस कर रहे हैं जो किसी का भी मुहं खुला का खुला रहने पर मजबूर कर दे। इस बार करने वाले हैं रोंगटे खड़े कर देने वाले करतब व्यायामशाला के संरक्षक उस्ताद बालकिशन बरथूनिया ने बताया कि व्यायामशाला के लड़के सामान्य करतबों को करने के साथ साथ इस बार अपनी क्षमताओं से थोड़ा आगे जाकर कुछ ऐसे करतब करने जा रहे हैं जो दर्शकों कि सोचने पर मजबूर कर देंगे।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस बार अखाड़े से लड़के एक साथ, सात हथियारों को चलाएगा जो बहुत ही मुश्किल होगा और ऐसा अभी तक किसी ने नहीं किया है इसके साथ ही अखाड़े के लड़के आंखों पर काली पट्टी बांध कर हाथौड़े से पत्थर तोड़ने का करतब भी करेंगे। ऐसे ही आग कि रिंग से बाइक पर इस बार एक कि जगह दो कलाबाज बैठकर करतब दिखाएंगें वहीं इसके साथ ही चाकू से आंख में काजल लगाने वाला करतब भी अखाड़े के कलाबाजों द्वारा दिखाया जाएगा। संरक्षक बरथूनिया ने आगे बताया कि लड़के आंखों कि पलकों से सुई भी उठाएंगें जिसकी प्रैक्टिस वो लगातार कर रहे हैं। ये सारे करतब जितने बात करने में मुश्किल हैं उससे कहीं ज्यादा करने में मुश्किल हैं और व्यायामशाला के कलाबाज इन सभी करतबों को प्रशासन द्वारा निर्धारित किए गए सभी चिन्हों पर प्रर्दशित करेंगें। </p>
<p><strong>सहयोगियों के दम पर चल रहा है अखाड़ा</strong><br />अखाड़े के संरक्षक उस्ताद बालकिशन बरथूनिया ने बताया कि इस अखाड़े के संचालन के लिए वो साल भर में एक बार ही सामाजिक सहयोग लेते हैं और साल भर का खर्चा व्यायामशाला कि समिति ही उठाती है उनका कहना है कि अखाड़ा इतना पुराना होने और इतने पहलवान देने के बावजूद भी उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिलती है। जहां एक ओर अखाड़ा हर बार प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान पर रहता है वहीं दुसरी ओर उसे विजेता के रूप में प्रोत्साहन राशी भी नहीं मिलती। साथ अखाड़े को एक कुश्ती सिखाने के लिए एक कोच कि जरूरत है जिसके लिए भी प्रशासन से अपील कि गई है पर आगे कि कोई कारवाई नहीं है।</p>
<p><strong>व्यायामशाला से जुडे है कोटा के कई मशहूर पहलवान और कलाबाज</strong><br />व्यायामशाला के संचालक शशी नामा ने बताया कि ये अखाड़ा कोटा का सबसे पुराना अखाड़ा है जिसकी स्थापना उस्ताद चौथमल द्वारा करीब सौ साल पहले की गई थी। उस्ताद चौथमल कोटा के पहले उस्ताद थे जिन्होंने कोटा में अखाड़े कि शुरूआत की थी जिसके बाद इसी अखाड़े से निकलकर कई पहलवानों और सदस्यों ने अपनी अपनी व्यायामशाला और अखाडेÞ खोले। नामा ने आगे बताया कि इस अखाड़े के उस्ताद चौथमल कोटा ही नहीं बल्कि भारत में भी प्रसिद्ध थे जिस कारण उनके समय के विश्वविजता पहलवान उस्ताद चौथमल का आशीर्वाद लेने आते थे। इस अखाड़े में प्रसिद्ध पहलवान और विश्वविजेता दारा सिंह, पहलवान चंदगीराम, पहलवान सकपाल सिंह, पहलवान विश्वनाथ भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं जो सभी उस्ताद चौथमल का आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेकर गए। वहीं इनके साथ ही अखाड़े से कोटा के प्रसिद्ध पहलवान गणेश पहलवान, राम पहलवान, पहलवान सुरेन्द्र भोलू, पहलवान सिकन्दर, पहलवान रामचन्द्र चौहान स्वतंत्रता सेनानी गुलाबचन्द शर्मा और मोहनलाल शर्मा भी निकले जिन्होंने पहलवानी खुब नाम कमाया। वहीं इस अखाड़े के पहलवान गोपाल तलवार को अपनी कमर पर बांधकर हवा में उछाल कर मुंह से पकड़ने का करतब दिखाया करते थे जो आज भी कोई कलाबाज नहीं दिखा पाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Sep 2023 11:23:13 +0530</pubDate>
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                <title>तलवार, चक्कर और भाला चलाने में माहिर हैं यह लड़कियां</title>
                                    <description><![CDATA[लडकियां तलवार, भाला घुमाने और अखाड़े के साथ साथ मलखम्ब और कुश्ती की भी यहां प्रैक्टिस करती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/these-girls-are-expert-in-using-sword--javelins-and-spear/article-57988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/talwar-chakkar-or-bhala-chlane-me-mahir-h-yeh-ladkiya...kota-news-25-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनन्त चर्तुदर्शी आने को है और शहर के सारे अखाड़े पूरे जोर शोर के साथ तैयारियों में लगे हैं और आज इसी क्रम में हम लेकर आएं है छावनी रामचन्द्रपुरा स्थित श्री मंशापूर्ण हनुमान महिला अखाड़ा। आप इस अखाड़े के अन्दर प्रवेश करते ही पाएंगे कि एक लड़की भाले को हैरतंगेज ढ़ंग से घुमा रही है तो दूसरी तलवार के साथ ऐसे करतब कर  रही होगी जैसे उगंली पर चाबी का छल्ला घुमा रही हो। यहां कि लड़कियां हर कदम पर लड़कों के करतबों को कमतर साबित कर रहीं हैं। महिला संचालिका दीपमाला पंवार ने बताया कि वैसे व्यायामशाला 25 वर्ष पुरानी है और महिला अखाड़े कि शुरूआत 2018 में ती  गई लेकिन आज व्यायामशाला में देखकर लगता है कि लड़कियां लड़कों के पहले से ये सारे करतब करती आ रहीं हैं।</p>
<p><strong>दंगल भी खेलती हैं लड़कियां</strong><br />वहीं व्यायामशाला कि बालिका विनिता राठौर साल 2022 में आयोजित हाड़ौती केसरी दंगल की विजेता रहीं अन्य बालिका मोना राठौर इसी साल मई माह में उज्जैन में आयोजित मलखम्ब प्रतियोगिता कि विजेता रहीं। व्यायामशाला कि बालिका लक्ष्मी गुर्जर ने बताया कि पहले वो अखाड़े में ज्यादा रुचि नहीं लेती थी लेकिन जब साथ कि लडकियों को करते देखा तो उन्हें भी हौसला मिला और आज वो 2 साल से अखाड़े में जा रही हैं और आगे कुश्ती खेलना चाहती हैं। बालिका राठी सोलंकी ने बात करने पर बताया कि वो भी कुश्ती खेलना चाहती हैं मगर आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से कोचिंग नहीं जा सकती इसीलिए यहां खेलती हैं। वहीं एक बालिका मुस्कान अभी 9 साल कि ही हैं और अखाडेÞ के सारे दांवपेंच और मलखम्ब सीखना चाहती हैं। </p>
<p><strong>करतब देख हैरत में पड़ जाते हैं दर्शक</strong><br />हर दिन लड़कियां ऐसे ऐसे करतब कर रहीं हैं जिन्हें देखकर हम भी हैरत में पड़ जाते हैं। जिस तरह से लडकियां पिरामिड बनाकर उस पर चक्कर और तलवार घुमाती हैं वो कभी कभी हमें भी मुश्किल लगता है। लडकियां तलवार, भाला घुमाने और अखाड़े के साथ साथ मलखम्ब और कुश्ती की भी यहां प्रैक्टिस करती हैं।</p>
<p><strong>दो लडकियों से अखाड़ा किया शुरू</strong><br />व्यायामशाला के महामंत्री जयप्रकाश तुसिया ने बताया कि इस महिला व्यायामशाला कि शुरूआत उस्ताद लालचन्द तुसिया ने दो लडकियों हिना प्रजापति व विनिता राठौर के साथ की थी जहां इस व्यायामशाला का प्रारम्भ इलाके कि लड़कियों को कुश्ती, दंगल और अन्य प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से किया गया था। शुरूआत में दो लडकियों से शुरूआत के बाद आज यहां करीब 70 लडकियां अखाडेÞ के दांव पेंच सीख रही हैं। </p>
<p><strong>खुद उठाती है खर्च</strong><br />महिला संचालिका दीपमाला पंवार ने बताया कि यहां कि अधिकतर लडकियां गरीब परिवार से आती हैं और प्रैक्टिस का सारा खर्चा खुद ही उठाती हैं अपनी बचत के पैसों से ही प्रैक्टिस के सामान लाती हैं। स्थाई जगह नहीं होने के कारण व्यायामशाला को बार बार प्रैक्टिस कि जगह भी बदलनी पड़ती है जिससे लड़कियों कि प्रैक्टिस पर भी असर पड़ता है। इस विषय पर नगर निगम कोटा को भी एक उपयुक्त जगह के लिए पत्र भी लिखा गया पर अभी भी प्रैक्टिस के लिए कोई जगह नहीं है और मंदिर प्रांगण में ही प्रैक्टिस करनी पड़ती है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Sep 2023 18:18:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नन्ही बेटियां ही नहीं साड़ी पहनकर महिलाएं भी चलाती हैं यहां तलवार</title>
                                    <description><![CDATA[व्यायामशाला में 2 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक कि बालिकाएं व महिलाएं हर दिन शाम होते ही घर के काम खत्म कर अभ्यास में जुट जाती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-only-little-daughters-but-women-wearing-saree-also-wield-swords-here/article-57674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/nanhi-betiya-hi-nhi-sari-pehnkr-mahilaye-bhi-chlati-h-yha-talwar...kota-news-21-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। लड़कियों को हर मुसीबत, हर परेशानी का डटकर मुकाबला करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए और उस तैयारी के लिए जरूरी है शारीरिक रूप से मजबूत होना । ये मानना था शहर के पहली महिला व्यायामशाला यानि दुर्गाशक्ति व्यायामशाला कि उस्ताद सीतादेवी सुमन का। सीता देवी तो नहीं रहीं लेकिन आज भी उनके द्वारा स्थापित अखाड़ा आबाद है। इस अखाड़ें में पांच साल की बच्ची कोमल से लेकर प्रौढ़ संतोष सुमन तक तलवार, बल्लम और चकरी चला कर सबको अचंभित कर देती हैं। अब संतोष सुमन इस अखाड़े का कार्यभार संभाल रही हैं। स्वर्गीय सीतादेवी के नक्शे कदम पर चलते हुए आज उनकी बेटियां और बहुएं इस परम्परा को आगे बढ़ा रहीं हैं। शहर के केशवपुरा इलाके में स्थित दुर्गाशक्ति व्यायामशाला में हर साल कि तरह इस साल भी अनन्त चतुर्दशी पर निकाले जाने वाले जुलूस को लेकर महिलाओं ने तैयारी शुरू कर दी है और पूरे जोर शोर के साथ अपनी कलाबाजियों को निखार रहीं हैं। व्यायामशाला में 2 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक कि बालिकाएं व महिलाएं हर दिन शाम होते ही घर के काम खत्म कर अभ्यास में जुट जाती हैं। इस बार जुलूस के प्रदर्शन को और अच्छा बनाने के लिए वो त्रिशूल के साथ अभ्यास कर रहीं हैं वहीं त्रिशुल के साथ कलाबाजी व्यायामशाला कि ओर से पहली बार की जाएगी। अखाड़े कि सभी महिलाएं और बालिकाएं सभी तरह के करतब की हर दिन साड़ी पहनकर अभ्यास करती हैं जो अपने आप में ही एक मुश्किल काम है। </p>
<p><strong>सास से बहु ने सीखा व्यायामशाला चलाना</strong><br />व्यायामशाला में गणेश चतुर्थी और नवरात्रा आने के साथ ही उत्साह का माहौल शुरू हो जाता है और महिलाएं दस दिन तक अनन्त चतुर्दशी कि तैयारियों में जुट जाती हैं। उस्ताद संतोष सुमन ने बताया कि उनकि सास ने इस व्यायामशाला कि शुरूआत सन् 1985 में तब की थी जब वो पहली बार एक महिला के तौर पर जिला कुश्ती संघ में शामिल हुई थी। वहां उन्होंने पुरूष पहलवानों को कुश्ती करता देखकर महिलाओं के लिए भी व्यायामशाला चलाने का ठान लिया। शुरूआत में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा पर उन्होंने हार ना मानते हुए इसे चलाए रखा और आज इस व्यायामशाला में करीब 150 बालिकाएं या महिलाएं हर दिन हैरतंगेज करतबों का प्रदर्शन करती हैं। </p>
<p><strong>ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें </strong><br />व्यायामशाला कि दीपलता सुमन ने बताया कि वो 2005 से इस व्यायामशाला में अभ्यास कर रहीं हैं और शादी के बाद भी उनका अभ्यास जारी है। दीपलता हर साल आयोजित होने वाले अखाड़े में भाग लेती हैं। दीपलता सुमन साल 1992 व 1993 में हिसार में आयोजित हुए नेशनल जूडो चैपिंयनशिप के 26 किग्रा में विजेता भी रहीं है। वहीं सीतादेवी कि दूसरी बेटी पिंकलता का कहना है कि मां ने हमेशा हर मुसीबत और परेशानी से डटकर मुकाबला करना सिखाया है और आज हम भी हमारे बच्चों को यही शिक्षा देते हैं, मां ने घर के काम ना करवाकर हमें अखाड़े और कुश्ती के दांव पेंच सिखाए जिससे हम आत्म निर्भर बन सकें। व्यायामशाला में अभ्यास करने वाली ज्योति सुमन ने बताया कि छोटे होने पर पहले हमें करतबों से डर लगता था पर जब सीतादेवी के बारे में सुना तो हम भी अपने डर को भुलाकर कुश्ती व अखाड़े का अभ्यास करना शुरू कर दिया और आज हम खुदको बहुत मजबूत महसूस करते हैं जो किसी भी परेशानी का सामना कर सकते हैं। </p>
<p><strong>खुदको मजबूत बना पाते हैं</strong><br />बालिका कोमल ने बताया कि यहां आना और अखाड़े कि प्रैक्टिस करना बहुत अच्छा लगता है और पै्रक्टिस से हम खुदको मजबूत बना पाते हैं। वहीं व्यायामशाला में प्रैक्टिस करने वाली महिलाओं का कहना है कि व्यायामशाला कि उस्ताद सीतादेवी शहर कि पहली महिला पहलवान थी जिन्होंने महिला अखाड़े कि शुरूआत की और प्रशासन को उन्हें सम्मान देते हुए शहर में उनकी मुर्ति कि स्थापना करनी चाहिए ताकि और महिलाएं प्रोत्साहित हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Sep 2023 15:45:59 +0530</pubDate>
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                <title>अव्यवस्था की फुटबॉल को अंधाधुंध मिल रही किक</title>
                                    <description><![CDATA[टैंक बनने के बाद कई विशेषज्ञ इसे सिर्फ एथलीटों का ही स्टेडियम मान रहे हैं और कह रहे हैं कि अन्य खेलों वाले खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए अन्यत्र स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाना चाहिए वरना कभी कोई बड़ी घटना भी हो सकती है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/football-of-disorder-getting-kicks-indiscriminately/article-45703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/avyavstha-ki-football-ko-andhadhoon-mil-rhi-kick...kota-news-16-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बीते कुछ दिनों से श्रीनाथपुरम स्टेडियम में विभिन्न खेलों का अभ्यास करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यहां तक की जयपुर आदि शहरों के कुछ खिलाड़ी भी अपने प्रशिक्षकों के साथ यहां प्रैक्टिस के लिए आने लगे हैं लेकिन अब स्टेडियम में एक अलग ही स्थिति पैदा हो गई है और वो है कि इस स्टेडियम में कौन-कौन से खेल के खिलाड़ी अभ्यास करें और कौन नहीं। इसी बात को लेकर स्टेडियम में कुछ मौकों पर खिलाडियों तक में लड़ाई-झगड़े तक की स्थिति पैदा हो जाती है। टैंक बनने के बाद कई विशेषज्ञ इसे सिर्फ एथलीटों का ही स्टेडियम मान रहे हैं और कह रहे हैं कि अन्य खेलों वाले खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए अन्यत्र स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाना चाहिए वरना कभी कोई बड़ी घटना भी हो सकती है।  दरअसल ट्रैक बनने से पहले यहां फुटबॉल सहित कुछ अन्य खेलों के खिलाड़ी भी प्रैक्टिस करते थे। चूंकि अब ये एथलीट का स्टेडियम बन चुका है तो यहां एथलीट में शामिल खेलों के खिलाड़ियों को अभ्यास करवाने वालों का कहना है कि फुटबॉल वाले अब भी इसी ग्राउंड में अभ्यास करना चाह रहे हैं। जबकि उन लोगों को अभ्यास के लिए अन्यत्र मैदान उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। इन लोगों का कहना हैं कि अब ये स्टेडियम अन्तरराष्टरीय स्तर का बन चुका है और इससे हमारे एथलीटों को अभ्यास में काफी सुविधा होगी लेकिन अगर फुटबाल और अन्य खेलों के खिलाड़ी यहां अभ्यास करेंगे तो उनको नुकसान ही होगा और ग्राउंड खराब होगा वो अलग। इसके पीछे वो तर्क देते हैं कि ग्राउंड में फुटबाल के खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं और इधर टेÑक पर भी धावक दौड़ रहें और फुटबाल टेÑक पर आ गई और कोई धावक गिर गया तो उसे बड़ी चोट का सामना भी करना पड़ सकता है।  </p>
<p>एथलीटों को अभ्यास करवाने वालों का ये भी कहना है कि स्टेडियम में भाला फैंकने वाले, गोला फैंकने वाले और डिस्कस थ्रो फैंकने वाले अभ्यास कर रहे है और उसी समय फुटबाल या अन्य खेलों के खिलाड़ी भी अभ्यास कर रहे हैं और भाला फैंकने या अन्य फैंका गया कोई उपकरण उन खिलाड़ियों के लग गया तो जान तक जा सकती है। ये लोग बताते हैं कि कई बार तो खिलाड़ियों में लड़ाई-झगड़े तक की नौबत आ जाती है। इन्ही में से कुछ का कहना है कि सभी खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए मैदान की आवश्यकता होती हैं और ये अच्छी बात है कि लोकसभा अध्यक्ष के प्रयासों से कोटा को एक बड़ी सौंगात मिली तो सभी को इसका सम्मान करना चाहिए और सभी को अपने मैदान, अपने ग्राउंड का भी सम्मान करना चाहिए। ये लोग बताते हैं कि ये व्यवस्थाएं कोई ओर नहीं बल्कि वहां अभ्यास के लिए आने वाले ही मिलकर बनाएंगे। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं</strong><br />इस बात की मांग की जाएगी कि फुटबॉल  के लिए अलग मैदान की व्यवस्था की जाए ताकि वो भी बराबर प्रैक्टिस कर सकें। जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। फुटबॉल एसोसिएशन से बात करके, आपसी सहमति बनाकर रास्ता निकाल लिया जाएगा। <br /><strong>- विशाल शर्मा, अध्यक्ष,जिला एथलेटिक्स संघ। </strong></p>
<p>सिन्थेटिक टेÑक पर नॉर्मल वॉक करने वाले आएंगे तो एथलीट अभ्यास कैसे करेगा। वाकई भाला और गोला फेंकना काफी रिस्की है। टाइमिंग अलग होनी चाहिए। बात फुटबॉल ग्राउंड की है तो फुटबॉल ग्राउंड के चारों ओर लगभग 2 मीटर ऊची जाली बना दी जाए या बेरिकेट्स लगा दी तो टेÑक पर अभ्यास करने वालों या अन्य खेलों का अभ्यास करने वालों को फुटबाल डिस्टर्ब नहीं करेगी और विरोधाभास की स्थिति पैदा होगी। <br /><strong>- उज्जवल शर्मा, शारीरिक शिक्षक, एनआईएस बास्केटबॉल कोच। </strong></p>
<p>दरअसल ये सारी बातें पहले ही साफ होनी चाहिए थी कि स्टेडियम में कौन-कौन से खेलों का अभ्यास किया जाएगा या एन्ट्री दी जाएगी। बात बिल्कुल सही है दुर्घटना का डर तो बना रहता ही है। प्रशासन को इसके अन्दर सिर्फ एथलीटों को ही एन्ट्री देनी चाहिए। फुटबॉल के लिए कोटा में श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्टेडियम सहित एक-दो मैदान और है जहां प्रैक्टिस की जा सकती है। फुटबॉल या कोई चीज ट्रेक पर आकर गिरेगी तो नुकसान तो होगा ही। <br /><strong>- तरूण शर्मा, एनआईएस एथलेटिक्स कोच। </strong></p>
<p>खिलाड़ियों में विरोधाभास की स्थित पैदा नहीं होनी चाहिए। हर खिलाड़ी को अपने ग्राउंड का सम्मान करना चाहिए। मैदान भी हमारा ही है और व्यवस्थाएं भी हमें ही बनानी हैं। <br /><strong>- राकेश शर्मा, सचिव, जिला एथलेटिक्स संघ। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 May 2023 14:24:57 +0530</pubDate>
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                <title>शहर को मिली सौगात को अब संभालने की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में इस ट्रेक की उपलब्धता बहुत अच्छी बात है परन्तु इसको संभालने की आवश्यकता भी बहुत है। कई लोगों को इस ट्रेक पर अभ्यास करने की पूर्ण जानकारी नहीं है। यह ट्रेक नियमित घूमने या दौड़ने के लिए नहीं है बल्कि प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए उपयोगी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/need-to-handle-the-gift-received-by-the-city/article-45283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/shahar-saugat-ko-ab-sambhalane-ki-jarorat-ban-gaya-hai...kota-news-11-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गत 7 मई को कोटा को सिन्थेटिक ट्रेक की सौगात मिली है जो शहर के खिलाड़ियों, जिला संघ के सदस्यों और शहरवासियों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे संभाग के खिलाड़ियों के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। कोटा का ये टेÑक राज्य का 5वां सिन्थेटिक ट्रेक है। इस सिन्थेटिक ट्रेक को लेकर कुछ पूर्व खिलाड़ियों और वर्तमान कोच सहित एथलेटिक्स संघ के सदस्यों ने उपयोग में लेते समय काफी सावधानी और तकनीकी जानकारी की बात कही है तभी इस ट्रेक को सुरक्षित रखा जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे आम जनता केवल घूमने का ट्रैक नहीं समझें। इससे उनको शारीरिक परेशानी हो सकती है। इस सिन्थेटिक ट्रेक पर आज लोग घूम रहे है तो गद्दों को कारण भले ही ठीक लग रहा है लेकिन वे इस बात को नहीं समझ रहे कि उनके पैरों पर ज्यादा जोर पड़ रहा है। इससे पैर अकड़ सकते हैं। शरीर टाइट हो सकता है। इस सिन्थेटिक ट्रेक पर कोई चप्पलों में तो कोई नंगे पैर ही घूम रहा है जबकि सच्चाई तो ये है कि खिलाड़ी तक को भी इस ट्रेक पर खास मौकों पर ही दौड़ना या अभ्यास करना चाहिए। काफी मेहनत और प्रयास के बाद कोटा को सिन्थेटिक टेÑक की सौगात मिली है। जो कि हाड़ौती का प्रथम व राजस्थान का पांचवा नम्बर का है। ये तय है कि इस टेÑक के बनने के बाद शहर सहित संभाग के एथलीटों को अभ्यास करने में कोई समस्या नहीं आएगी। खिलाड़ी राष्टÑीय और अन्तरराष्टÑीय प्रतियोगिताओं में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे।  इनका कहना हैं कि इस ट्रेक की बात करें तो ये काफी महंगा ट्रेक है और प्रशासन और संबंधित एजेन्सी को चाहिए कि इस ट्रेक की संभाल अच्छे से करें। शहर में इस ट्रेक की उपलब्धता बहुत अच्छी बात है परन्तु इसको संभालने की आवश्यकता भी बहुत है। कई लोगों को इस ट्रेक पर अभ्यास करने की पूर्ण जानकारी नहीं है। यह ट्रेक नियमित घूमने या दौड़ने के लिए नहीं है बल्कि प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए उपयोगी है।  इस ट्रेक पर बिना जाने ट्रेनिंग करने से घुटने में दर्द की समस्या व पैरों की मांसपेशियों में खिचाव व चोटिल होने की समस्या हो सकती है। सिन्थेटिक ट्रेक पर अभ्यास करने से पूर्व यह सभी खिलाड़ियों और लोगों को जानकारी होनी चाहिए कि वह जब ही इस पर दौड़े जब वह कोई कोच व जानकार की देखरेख में अभ्यास कर रहे हो नहीं तो चोट का शिकार भी हो सकता है।  ये लोग कहते हैं कि सिन्थेटिक टेÑक के गुण-दोष को लेकर बात करने के साथ ही इस बात को नहीं भुलाया जा सकता कि ये कोटा को एक बहुत ही अभूतपूर्व सौगात मिली है। जिसके लिए लोकसभा अध्यक्ष बिरला और यूडीएच मंत्री धारीवाल का जिला एथलेटिक्स संघ व संभाग के सभी खिलाड़ी आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हमे अपने इस टेÑक को अचछी जरह से संभालने की आवश्यकता है। सात करोड़ की लागत से बनने वाले इस टेÑक को हर हाल में संभालकर और सुरक्षित रखने की आवश्यकता है और इस बात का ध्यान ना शहरवासियों बल्कि ट्रैक पर जाने वाले खिलाड़ी को भी रखना होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं...</strong><br />इस सिन्थेटिक ट्रेक पर आज लोग घूम रहे है तो गद्दों को कारण भले ही ठीक लग रहा है लेकिन वे इस बात को नहीं समझ रहे कि उनके पैरों पर ज्यादा जोर पड़ रहा है। मुझे कईयों ने कहा है कि हमारे पैर अकड़ चुके हैं। शरीर टाइट हो रहा है। इस सिन्थेटिक ट्रेक पर कोई चप्पलों में तो कोई नंगे पैर ही घूम रहा है जबकि सच्चाई तो ये है कि खिलाड़ी तक को भी इस ट्रेक पर खास मौकों पर ही दौड़ना या अभ्यास करना चाहिए। <br /><strong>- खजान सिंह, राष्ट्रीय खिलाड़ी। </strong></p>
<p>इस ट्रेक की सार्थकता कोटा में तभी होगी जब यहां अभ्यास करने वाले राष्टÑीय व अन्तरराष्टÑीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर शहर का नाम रोशन करें ताकि खेलों के लिए सकारात्मक वातावरण बन सकें। <br /><strong>- राकेश शर्मा, सचिव, जिला एथलेटिक्स संघ, कोटा। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 May 2023 15:25:26 +0530</pubDate>
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                <title>योगा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बना चुकी हैं कोटा की कई बेटियां</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा की बेटियों को योग की शिक्षा देने वालों का कहना है कि योगा का अभ्यास करने वाली कोटा की बेटियों में से 5 लड़कियां नेशनल लेवल पर और करीब डेढ़ दर्जन लड़कियां स्टेट लेवल पर अपनी छाप छोड़ चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/many-daughters-of-kota-have-made-yoga-an-integral-part-of-life/article-44551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/yoga-ke-jeevan-ka-sabse-bada-hissa-kota-ki-kayi-betiyan-hain...kota-news-03-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। योगा एक ऐसा माध्यम जिससे लोग तनाव भी दूर करते हैं और अपने स्वास्थ्य की देखभाल भी करते हैं लेकिन कोटा की बेटियों ने इसी योगा को खेल माना और इस खेल की कई राष्टÑीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में ना केवल स्वयं का बल्कि शहर का भी नाम रोशन किया। अच्छी बात ये है कि इस खेल को कोटा की 6 वर्ष से अधिक उम्र की लाडलियां इस कदर अपने जीवन में शमिल कर चुकी हैं कि महज कुछ ही महीनों के अभ्यास के बाद वे स्वयं शिक्षक बनकर योगा को दूसरे को सिखाने को तैयार हैं। कोटा की बेटियों को योगा का अभ्यास करवाने वालों का कहना हैं कि आज से लगभग 7 साल पहले तक कोटा की बेटियों में इस खेल का कोई क्रेज नहीं था। महज 8-10 लड़कियों ने इसका अभ्यास शुरू किया और आज देखते-देखते कई बेटियां योगा को अपनी दैनिक जीवनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बना चुकी हैं। प्रशिक्षक बताते हैं कि वर्तमान समय में करीब 100 लड़कियां नियमितरूप से योगा क्लासेज और अन्य स्थानों पर हर मौसम में करीब 2 से 3 घंटे प्रतिदिन अभ्यास कर रही हैं।</p>
<p>प्रशिक्षक बताते हैं कि अभ्यास के दौरान इन लड़कियों की लगन, मेहनत और एकाग्रता देखकर ऐसा लगता है कि वो अपने जीवन में इस खेल की हर ऊचाई तक पहुंचना चाहती हैं। इनमें से कुछ बेटियां तो ऐसी है जो परीक्षा के दौरान भी अभ्यास का ना तो समय कम करती है और ना क्रम तोड़ती है। वो हर हाल में भले स्वयं के घर ही सही लेकिन योगा का अभ्यास करती है। अच्छी बात तो ये है कि छोटी बच्चियों के माता-पिता उनकी हौसला अफजाई में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। स्वयं बच्चियों को अभ्यास स्थल पर लाते और ले जाते हैं। कोटा की बेटियों को योग की शिक्षा देने वालों का कहना है कि योगा का अभ्यास करने वाली कोटा की बेटियों में से 5 लड़कियां नेशनल लेवल पर और करीब डेढ़ दर्जन लड़कियां स्टेट लेवल पर अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। प्रशिक्षक बताते हैं कि इन लड़कियों को अभ्यास के लिए सरकार की ओर से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं। अगर इन लड़कियों को सुविधाएं मिले तो बेटियां राष्टÑीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अन्तरराष्टÑीय स्तर पर इस शहर नाम रोशन कर सकती हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं...</strong><br />पहले कोटा की लड़कियों में योगा का के्रज ज्यादा नहीं था लेकिन एक को देखकर दूसरी लड़की इस खेल से जुड़ी और आज यहां की बेटियां इस खेल में अपने जीवन का प्रमुख हिस्सा बना चुकी हैं। योगा को इंटरनेशनल लेवल पर भी शामिल कर लिया गया है। इस खेल में शारीरिक और मानसिक लाभ के अलावा भी कई फायदें हैं। खासकर लड़कियों को जब वो 15 से 17 उम्र के बीच होती हैं। <br /><strong>- निमिषा कसेरा, योग शिक्षिका। </strong></p>
<p>एक वर्ष से अधिक समय से योगा का अभ्यास कर रही हंू। रोजाना लगभग तीन घंटे योग के लिए जाती हंू। स्टेट लेवल तक खेल चुकी है अब नेशनल और उसके बाद इंटरनेशनल लेवल तक इस गेम में पहुंचना चाहती हंू। पढ़ाई पर योगाअभ्यास का कोई फर्क नहीं पड़ता है उल्टा एकाग्रता और मन लगाकर पढ़ाई करती हंू। <br /><strong>- कशिश प्रजापति। </strong></p>
<p>मैं करीब तीन साल से योग का अभ्यास कर रही हंू। रोजाना 3 से 4 घंटे क्लास में जाती हंू। योगा से मानसिक और शारारिक मजबूती मिलती हैं। मैं इस खेल में अच्छी प्लेयर बनाना चाहती हंू। पापा है नहीं लेकिन मम्मी मेरा पूरा सपोर्ट करती हैं। <br /><strong>- रौनक राठौड़।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 May 2023 13:00:33 +0530</pubDate>
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