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                <title>जिन्हें स्कूलों को श्वान मुक्त करने की सौंपी जिम्मेदारी, उन्हीं के ऑफिस में पल रहे कुत्ते</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा निदेशालय ने शिक्षा अधिकारियों को शिक्षण संस्थाएं श्वान फ्री करने के जारी किए आदेश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-very-officials-entrusted-with-making-schools-dog-free-are-harboring-dogs-in-their-own-offices/article-138970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा निदेशालय बीकानेर द्वारा जिन शिक्षा अधिकारियों को शैक्षणिक संस्थाएं व स्कूलों को श्वान फ्री करने के आदेश दिए हैं, उन्हीं के ऑफिसों में ही कुत्ते पल रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी हो या संयुक्त शिक्षा निदेशक, विभाग के दोनों ही कार्यालयों के परिसरों में गुरुवार को कुत्ते घूमते नजर आए। कर्मचारी इन्हीं के बीच से गुजरते रहे लेकिन उन्हें कार्यालय से बाहर करने की जहमत नहीं उठाई। जबकि, शिक्षा विभाग में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए शैक्षणिक संस्थाओें को श्वान फ्री करने के आदेश दिए हैं। उसी आदेश की पालना में शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने सभी शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों को श्वान मुक्त रखने के निर्देश जारी किए हैं। जिसकी अवहेलना पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। लेकिन, शहर के जिला शिक्षा अधिकारियों व संयुक्त शिक्षा अधिकारी के कार्यालयों में स्थिति इसके ठीक विपरीत मिली।</p>
<p><strong>डीईओ ऑफिस परिसर में घूमते रहे श्वान</strong><br />गुमानपुरा रावतभाटा रोड स्थित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में दोपहर को दो कुत्ते घूम रहे थे। जबकि, कर्मचारी भी वहीं खड़े हुए थे। वहीं, पास में ही एक मादा श्वान अपने पिल्लों के साथ घूम रही थी। कर्मचारियों ने पिल्लों के लिए भोजन पानी की व्यवस्था भी कर रखी थी। कर्मचारियों से इस संबंध में शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी किए आदेश के बारे में पूछा तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई।</p>
<p><strong>लेखा व कैशियर अनुभाग के बाहर बैठा रहा श्वान</strong><br />जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय में शाम 4 बजे करीब लेखा व कैशियर अनुभाग के बाहर कोरिडोर में श्वान बैठा रहा। उनके पैर में जख्म हो रहा था। इस कोरिडोर में अलग-अलग कई अनुभाग बने हुए हैं, जिनमें कर्मचारी काम रहे थे, उनका इस कोरिडोर से भी आना-जाना लगा रहा। इसके बावजूद श्वान को किसी ने भी श्वान को ऑफिस से बाहर नहीं भगाया। ऐसे में स्कूल कैसे श्वान मुक्त होंगे, यह समझ से परे हैं।</p>
<p><strong>जेडी ऑफिस में भी बैठे रहे श्वान</strong><br />संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय के मुख्य दरवाजे के बाहर व ऑफिस के अंदर श्वान बैठे मिले। हालात यह है कि जेडी के चैम्बर के सामने गार्डन है, जहां अलाव जला हुआ था, वहीं श्वान बैठा हुआ था। पास में ही दो कर्मचारी भी बैठे हुए थे लेकिन किसी ने भी श्वान को कार्यालय से बाहर नहीं किया।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के यह हैं आदेश</strong><br />सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया द्वारा 7 नवंबर को जारी आदेश जिसमें राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों और भारत सरकार के सभी संवेदनशील क्षेत्रों, जिसमें शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं, जिन्हें आवारा कुत्तों के प्रवेश से सुरक्षित करने और कुत्ते के काटने की घटनाओं को रोकने के उपायों को मजबूत करने के लिए सख्त और समयबद्ध निर्देश जारी किए हैं। उसी की पालना में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने राज्य के सभी संयुक्त निदेशकों को उक्त आदेश की पालना में दिशा निर्देश जारी किए हैं।</p>
<p><strong>अब गुरुजी के कंधों पर कुत्ते भगाने की जिम्मेदारी</strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षक पहले से ही गैर- शैक्षणिक कार्यों में उलझे हुए हैं, अब उनके कंधों पर अब एक और जिम्मेदारी आ गई है। शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसरों में घूम रहे आवारा कुत्तों को भगाने और संबंधित विभागों से समन्वय कर उन्हें पकड़वाने की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपी है। विभाग के अनुसार यह कदम विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ को आवारा कुत्तों के संभावित हमलों से बचाने के लिए उठाया गया है, ताकि स्कूल परिसर में कोई अप्रिय घटना न हो।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /><strong>शिक्षकों को राहत प्रदान करें सरकार</strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों को पहले से ही गैर शैक्षणिक कार्यों जिनमें बीएलओ,चुनाव ड्यूटी, जनगणना, स्वास्थ्य अभियान (टीकाकरण), सर्वे, डाटा फीडिंग (प्रेरणा पोर्टल, आधार, बैंक खाता),मिड-डे-मील प्रबंधन, छात्रवृत्ति वितरण, स्कूल चलो अभियान, स्वच्छता अभियान, और स्कूल प्रबंधन से जुड़े कई प्रशासनिक आदि कार्य शिक्षकों से करवाएं जा रहे जिससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं ।अब कुत्ते भगाने व पकड़वाने की नई जिम्मेदारी दे दी गई है, जिससे शिक्षकों को राहत देनी चाहिए।<br /><strong>-मोहर सिंह सलावद,प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा</strong></p>
<p>हमने सभी सीबीईओ को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने ब्लॉक के समस्त स्कूलों को श्वान मुक्त बनाए रखने के लिए टीम गठित करें। साथ ही श्वानों को कैम्पस में आने से रोकने व पकड़वाने के लिए संबंधित संस्था से सम्पर्क कर निस्तारण करें। वहीं, हमारा कार्यालय श्वान मुक्त है।<br /><strong>-रामचरण मीणा, जिला शिक्षाधिकारी कोटा माध्यमिक</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Jan 2026 14:41:07 +0530</pubDate>
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                <title>श्वानों के लिए नगर निगम बनाएगा शेल्टर होम,  आवारा श्वानों से मिलेगी शहर वासियों को मुक्ति, पकड़े गए श्वानों को नहीं छोड़ेंगे उसी जगह पर</title>
                                    <description><![CDATA[आवारा श्वान व मवेशियों का मुद्दा दैनिक नवज्योति लगातार प्रमुखता से उठाता रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/municipal-corporation-to-build-shelter-homes-for-dogs--city-residents-to-get-relief-from-stray-dogs--captured-dogs-will-not-be-released-back-in-the-same-place/article-131807"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर समेत पूरे प्रदेश में लोगों को अब शीघ्र ही आवारा श्वानों से मुक्ति मिलेगी। अब शिक्षण संस्थान व अस्पतालों के आस-पास घूमने वाले आवारा श्वानों को पकड़कर शेल्डर होम में रखा जाएगा। साथ ही टीकाकरण के बाद उन्हें वापस उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाएगा।ऐसा सुप्रीम कोर्ट की ओर से शुक्ववार को जारी आदेश से होगा। दिल्ली एनसीआर समेत राजस्थान और अन्य प्रदेशों में आवारा श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता ही जा रहा है। श्वानों द्वारा आए दिन लोगों को विशेष रूप से छोटे मासूम बच्चों को शिकार बनाने की कई घटनाएÞं हो चुकी है।  इन घटनाओं को देखते हुए इन पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की पीठ ने शुक्रवार को दिशा निर्देश जारी किए हैं। </p>
<p><strong>अभी टीकाकरण के बाद वापस छोड़ रहे</strong><br />कोटा शहर में मुख्य मार्गों समेत गली मौहल्लों  में आवारा श्वानों का काफी आतंक है। हालत यह है कि श्वान मासूम बच्चों को काफी दूर तक घसीटकर ले जा रहे है। हालांकि नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला परिसर में श्वानशालाएं बनाई हुई है। जहां निजी फर्म के माध्यम से श्वानों को पकड़कर उन्हें निर्धारित समय के लिए रखा जा रहा है। वहां उनका बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। इसके बाद वापस उन श्वानों को जहां से पकड़ा गया था वापस वहीं छोड़ा जा रहा है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ऐसा नहीं होगा।  नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से करीब 150 से अधिक कैनल में श्वानों को रखा जा रहा है। अब तक हजारों श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा चुका है। उसके बाद भी शहर में न तो इनकी संख्या कम हो रही है और न ही लोगों को इनसे राहत मिल रही है। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। </p>
<p><strong>यह हैं हालात</strong><br />हालत यह है कि वर्तमान में चाहे नगर निगम कार्यालय  हो या कोटा विकास प्राधिकरण, एमबीएस अस्पताल हो या न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल। सीएमएचओ कार्यालय हो या अदालत परिसर। सरकारी स्कूलों तक में श्वानों को बैठे व घूमते हुए देखा जा सकता है। जहां स्कूलों में बच्चों के लिए और अस्पतालों में मरीजों व तीमारदारों के लिए ये खतरा बने हुए हैं। </p>
<p><strong>नवज्योति लगातार उठा रहा मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि आवारा श्वान व मवेशियों का मुद्दा दैनिक नवज्योति लगातार प्रमुखता से उठा रहा है। समाचार पत्र में 6 नवम्बर को पेज दो पर श्वानों का आतंक मिटा ना आवारा मवेशियों का’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें शहर में इन दोनों के कारण आमजन को हो रही परेशानी को बताया था। जिसके बाद कोटा दक्षिण निगम आयुक्त ने एक दिन पहले ही श्वानशाला का निरीक्षण भी किया था। उन्होंने निगम अधिकािरयों को श्वानों के बधियाकरण को बढ़ाने के निर्देश दिए थे। </p>
<p><strong>श्वानशाला में ही शेल्टर होम बनाने की योजना</strong><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब नगर निगम की ओर से इस संबंध में सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही श्वानशाला में ही शेल्टर होम बनाने की योजना है।  निगम की ओर से श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण तो कई सालों से किया जा रहा है। लेकिन पूर्व में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार ही उन्हें वापस उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा था। अब शिक्षण संस्थान व अस्पतालों के आस-पास से पकड़े गए श्वानों को शेल्टर होम में रखा जाएगा। उन्हें वापस उसी जगह पर नहीं छोड़ा जाएगा। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना की जाएगाी। विधि अधिकारी को इस संबंध में आदेशित किया गया है कि स्वास्थ्य अधिकारी के माध्यम से श्वानशाला में ही शेल्टर होम बनाने के संबंध में कार्यवाही की जाए।<br /><strong>-अशोक कुमार त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से आमजन को काफी राहत मिलेगी। नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अक्षरश: पालना की जाएगी। शिक्षण संस्थान व अस्पतालों के आस-पास से श्वानों को पकड़कर शेल्टर होम में रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए कोर्ट के निर्णय का अध्ययन कर उसके अनुसार शेल्टर होम बनाए जाएंगे। <br /><strong>-ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Nov 2025 16:53:18 +0530</pubDate>
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                <title>आधे शहर को मिलेगी आवारा श्वानों से मुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[रिहायशी इलाकों से पकड़े जाएंगे स्ट्रीट डॉग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/half-the-city-will-get-rid-of-stray-dogs/article-124056"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(4)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । आधे शहर को  शीघ्र ही आवारा श्वानों से मुक्ति मिलने वाली है।  नगर निगम कोटा दक्षिण आयुक्त ने सोमवार को आदेश जारी कर आवारा श्वानों को पकड़ने के वाहनों की संख्या बढ़ाकर  पकड़े गए श्वानों को डॉग शेल्टर में सुरक्षित रखने को कहा है। इस आदेश के अनुसार अब बधियाकरण व टीकाकरण के लिए पकड़े गए श्वानों को फिलहाल वापस उसी जगह पर नहीं छोड़ा जाएगा।  शहर में आए दिन आवारा श्वानों द्वारा छोटे बच्चों व महिलाओं और बुजुर्गों को काटने व उन पर हमला करने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। लगातार घटनाएं होने से आमजन काफी भयभीत है। कई लोग तो अपने छोटे बच्चों को घर से बाहर तक भेजने व खेलने जाने देने से घबराने लगे है। सोमवार को जयपुर में भी घर के बाहर खेल रहे छोटे बच्चों पर श्वानों ने हमला कर उसे घायल कर दिया। श्वानों की समस्या कोटा शहर ही नहीं पूरे प्रदेश व देश में है।  वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली एनसीआर को दिए गए आदेश व राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा भी इस संबंध में आदेश जारी कर आवारा श्वानों को शेल्टर होम में रखने को कहा गया है।  नगर निगम कोटा दक्षिण के आयुक्त अनुराग भार्गव ने सोमवार को महाराष्ट्र के ओशामाबाद स्थित अरिहंत वेलफेयर सोसायटी के नाम आदेश जारी किया है। उस आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि नगर निगम द्वारा संस्था को आवारा श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण करने का कार्यादेश दिया हुआ है। वहीं वर्तमान में शहर में आवारा श्वानों द्वारा आमजन को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में निर्देशित किया जाता है कि आवारा श्वानों के बधियाकरण व टीकाकरण के लिए तत्काल प्रभाव से डॉग पकड़ने वाले 5 वाहनों का संचालन किया जाए।  वहीं पकड़े गए श्वानों को नियमानुसार बंधा धर्मपुरा स्थित डॉग शेल्टर में सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाए। नियमों की अवहेलना पाए जाने पर निविदा शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।  सूत्रों के अनुसार अभी तक जहां बधियाकरण व  टीकाकरण के लिए पकड़े गए श्वानों को निर्धारित समय बाद वापस उसी जगह पर छोड़ा जा रहा था जहां से पकड़ा गया था। लेकिन कोटा दक्षिण आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब ऐसा नहीं होगा। अब श्वानों को फिलहाल श्वानशाला के शेल्टर में ही रखा जाएगा। जब तक इस संबंध में कोई अग्रिम आदेश नहीं आ जाता। </p>
<p><strong>गिनती के कैनाल, सीमित डॉग रखे जाएंगे</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की श्वानशाला में फिलहाल 33 ही कैनल बनी हुई है। जहां बधियाकरण व टीकाकरण वाले श्वानों को कुछ दिन रखा जाता है। यहां सीमित डॉग को रखा जा सकेगा। जबकि अधिक श्वानों को रखने के  लिए अलग से व्यवस्था करनी होगी।  बधियाकरण व टीकाकण करने वाली फर्म के प्रतिनिधियों का कहना है कि आयुक्त का आदेश देर से प्राप्त हुआ। उसकी पालना की जाएगी। लेकिन नियमित प्रक्रिया के तहत अभी तक एक -दो वाहनों से ही श्वान पकड़ रहे थे। अब इनकी संख्या बढ़ाकर 5 कर दी जाएगी।</p>
<p><strong>पशु प्रेमियों में हडकम्प, आमजन में खुशी</strong><br />कोटा दक्षिण आयुक्त द्वारा जारी आदेश की जानकारी मिलते ही जहां पशु प्रेमियों में हडकम्प मच गया है। वहीं आमजन ने इससे राहत महसूस की है। पशु प्रेमियों ने सोमवार को ही नगर निगम कार्यालय पहुंचकर इस संबंध में जानकारी लेने व इससे संबंधित काम को स्वयं करने की इच्छा जाहिर  की है। वहीं लोगों का कहना है कि इस  तरह का आदेश काफी समय पहले ही जारी कर दिया जाना चाहिए था। कम से कम शहर से श्वानों की संख्या तो कम होगी। श्वानों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाए लेकिन उन्हें शहर से दूर किया जाए।  सूत्रों के अनुसार इस आदेश से श्वानों को रिहायशी इलाकों से हटाया जाएगा।  बधियाकरण व टीकाकरण करने वाली फर्म के प्रतिनिधियों का कहना है कि आदेश के तहत फिलहाल जिन श्वानों को पकड़ा गया है उन्हें शेल्टर  में ही रखा जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आयुक्त द्वारा यह आदेश जनहित में है। इस संबंध में उन्होंने यू ओ नोट भी लिखा था। लेकिन श्वानों को रखने के लिए शेल्टर की व्यवस्था करनी होेगी। निगम के पास बंधा में जगह है जहां टीनशेड बना हुआ है और एंगल भी लगी हुई है। वहां फेसिंग करवाकर जितने श्वानों को रखा जा सकता है उन्हें रखेंगे। साथ ही टेंडर जारी कर अलग से व्यवस्था करने के आदेश भी दिए गए हैं। यदि कोई संस्था निगम द्वारा किए जा रहे खर्च से कम खर्च में शेल्टर होग की व्यवस्था संभालने को तैयार होगी तो उस पर भी विचार किया जाएगा। निगम का मकसद श्वानों को नुकसान पहुंचाना या पशु प्रेमियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। लेकिन आमजन को राहत देने के लिए उनके हित में भी काम करना आवश्यक है। इसके लिए जो भी संभव होगा किया जाएगा। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो आदेश दिया था वह दिल्ली एनसीआर के लिए था। हालांकि उस पर भी पुन: विचार किया जा रहा है। फिलहाल कोटा उत्तर में श्वानों को शेल्टर में रखने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। रा’य सरकार द्वारा जो भी आदेश प्राप्त होगा। उसके अनुसार श्वानों को रखने, खिलाने व उनकी देखभाल कीपुख्ता व्यवस्था करने के बाद भी आगे की कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>-अशोक त्यागी, आयुक्त, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 15:16:03 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 59- क्लीन कोटा, ग्रीन कोटा की तर्ज पर हो रहे वार्ड के काम</title>
                                    <description><![CDATA[स्ट्रीट डॉग से हो रहे वार्डवासी परेशान, रात के समय बना रहता डर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-59--ward-work-is-being-done-on-the-lines-of-clean-kota--green-kota/article-124015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws65.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा उत्तर वार्ड 59 क्लीन कोटा, ग्रीन कोटा की तर्ज पर साफ-सफाई के मामले में काफी ठीक है लेकिन वार्ड में स्ट्रीट डॉग से लोगो हर समय खतरा बना रहता है। जिसके चलते वाहनचालकों व राहगीरों में काफी डर बना रहता है। वहीं माला रोड स्थित सरकारी क्वार्टरों के आस-पास जंगली घास उगी हुई है। वहा के लोगो का कहना है कि जहरीले जीव कई बार क्वार्टर में भी आ चुके है। यहां लोगों ने कचरा प्वाइंट बना रखा है। वार्ड में कचरा संग्रहण गाड़ी रोजाना आती है लेकिन कॉलोनिवासी खाली पड़ी जगह में कचरा डाल रहे है। स्थानीय निवासी राजेश मीणा ने बताया कि क्वार्टर में लगे पेड़ भी जर्जर है इसकी भी छंगाई करवानी चाहिए। सड़क के पास ही नाला ओवर फ्लो होने से पानी कई बार क्वार्टरों में भी आ जाता है। नाले में साफ-सफाई नहीं होने से हमेशा दुर्गंध बनी रहती है। पास ही सामाजिकारिता विभाग का छात्रावास भी स्थित है। दूर-दराज से आने वाले बच्चे भी यहीं रहकर अध्ययन करते हैं। रात में यहां मच्छरों का प्रकोप होने से बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना हुआ है। वार्ड के  लिए सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम के लिए सामुदायिक भवन भी नहीं है। वैसे यहां के निवासी वार्ड पार्षद से काफी संतुष्ट है। उनके अनुसार उनकी वार्ड की समस्याओं का निस्तारण फोन पर बताने के बाद तुरंत हो जाता है। वैसे पार्षद भी वार्ड की कॉलोनियों में जाते रहते है। कुछ कॉलोनियों में जरूर नालियों की सफाई को लेकर शिकायतें है। वार्ड की सभी नालियां ढकी हुई है। रहवासियों के अनुसार कुछ ब्लॉक खुले होने के कारण कचरा भी जमा हो रखा है, इस कारण सफाई करने में काफी दिक्कत आती रहती है। </p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />महाराव भीमसिंह कॉलोनी, बाल मंदिर स्कूल, पोस्ट आॅफिस रोड, जैन मंदिर, नानक पैलेस, श्रीनाथ अपार्टमेन्ट, सनफ्लार रेस्टोरेन्ट, मंगलायतन, उम्मेद भवन, आंशिक आर्मी क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>पैसे देकर भी करवाते है सफाई</strong><br />माला रोड पर स्थित चम्बल कॉलोनी के लोगों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि मुख्य सड़क पर कचरा फैला रहता है लेकिन हमें कई बार पैसे देकर साफ सफाई करवानी पड़ती है। वहीं मकान के बाहर जंगली झाड़ियां उगी हुई है। जंगली झाड़ियों के कारण कई बार जहरीले जीव क्वार्टरों में आ चुके है। आए दिन जहरीले जीवों के कारण काटने का खतरा बना रहता है। कॉलोनी की सड़क पर कैमरा भी हमने लगवाया है ताकि चोरी नहीं हो।</p>
<p><strong>रहवासी बोले- वार्ड में कम है समस्या</strong><br />स्थानीय निवासियों ने बताया कि हमारा वार्ड काफी साफ एवं स्वच्छ है। यहां के पार्षद सभी की समस्या सुनते है। फोन करने पर भी कई बार समस्याओं का समाधान हो जाता है। इस वार्ड में नालियां ढकी हुई है। यहां की सड़कें काफी अच्छी बनी हुई है। यहां सड़कों पर कई बार मवेशियों का जरूर जमावड़ा रहता है। वार्ड में स्थित दुकानों के मालिको ंने भी वार्ड को काफी साफ व स्वच्छ बताया। सभी रहवासी संतुष्ट है।</p>
<p><strong>मंदिर परिसर में लगी है लॉकिंग टाइलें</strong><br />माला रोड पर स्थित कॉलोनी में महादेव का मंदिर बना हुआ है। यहां आने वाली महिलाओं ने बताया कि यहां मंदिर परिसर में लॉकिंग टाइले लगी हुई है। यहां साफ-सफाई रोजाना होती है। हर त्योहार में धार्मिक कार्यक्रम होते है। यहां होने वाले हर कार्यक्रम में कॉलोनिवासियों का सहयोग बना रहता है।<br /><strong>-मंजू सुमन, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>लोगों के काम होते हैं </strong><br />हमारे वार्ड में सड़कों व नालियों की सफाई व्यवस्था ठीक है। यहां पार्षद कॉलोनियों में आते रहते है। सभी लोगों को रहवासियों से वार्ड की समस्याओं के बारे में जानकारी लेते रहते है। यह शहर का काफी अच्छा वार्ड है। <br /><strong>-पापा राव</strong></p>
<p><strong>नाले की नहीं हो रही सफाई</strong><br />हमारे क्वार्टरों में लगे पेड़ काफी पुराने व जर्जर है। इनकी टहनियों का फैलाव ज्यादा है तथा गिरने का भी डर बना रहता है। माला रोड पर बने नाले में पानी की निकासी व्यवस्था सही नहीं है। नाले में हमेशा दुर्गंध बनी रहती है। आने-जाने वाले राहगीरों को भी काफी परेशानी होती है।<br /><strong>-राजेश कुमार मीणा, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />क्लीन कोटा, ग्रीन कोटा की तर्ज पर साफ-सफाई को लेकर वार्ड को काफी बेहतर बनानें की कोशिश रहती है। वार्ड में स्ट्रीट डॉग की समस्या ज्यादा है, जिसके लिए अधिकारीयों को अवगत करवाया गया है। वार्ड के लोगों की समस्यों का समाधान उचित पर कर दिया जाता है। वार्ड को बेहतर बनाने के लिए वार्ड में कई विकास कार्य किये गए है।<br /><strong>-लव शर्मा, पार्षद, नेता प्रतिपक्ष भाजपा </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 15:02:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली-एनसीआर से जल्द हटाएं आवारा कुत्ते : बाधा डालने वालों पर की जाएगी अवमानना कार्यवाही, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शहर में नहीं दिखना चाहिए आवारा कुत्ता </title>
                                    <description><![CDATA[पीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि कुत्तों के काटने से रेबीज होने की समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/remove-stray-dogs-from-delhi-ncr-will-be-taken-those/article-123278"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के आवारा कुत्तों को सार्वजनिक जगहों से जल्द से जल्द से हटाने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने इससे संबंधित एक खबर पर स्वत: संज्ञान सुनवाई करते हुए यह भी चेतावनी दी है कि आवारा कुत्तों को हटाने में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन पर अवमानना कार्यवाही सहित अन्य कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>पीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि कुत्तों के काटने से रेबीज होने की समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के संबंधित नगर निगमों को अदालती आदेश पर शीघ्र अमल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि 8 हफ्तों के भीतर लगभग 5,000 आवारा कुत्तों के रखने की व्यवस्था के तहत आश्रय गृह स्थापित किए जाएं। </p>
<p>पीठ ने आगाह करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने एक समाचार की खबर के आधार पर दर्ज स्वत: संज्ञान मामले पर विचार करते हुए निर्देश दिया कि आवारा कुत्तों को आश्रय गृहों में रखा जाए और उन्हें बस्तियों में न छोड़ा जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों से सोसाइटियाँ मुक्त होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि शहर के किसी भी इलाके या बाहरी इलाके में एक भी आवारा कुत्ता घूमता हुआ नहीं दिखना चाहिए। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Aug 2025 16:56:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा में 90 हजार से अधिक स्ट्रीट डॉग, हर दिन लोगों को कर रहे घायल, लोग खतरे से चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[खूंखार श्वान आए दिन बना रहे लोगों को शिकार, सैकड़ों हो चुके घायल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-90-thousand-street-dogs-in-kota--injuring-people-every-day--people-worried-about-the-danger/article-120037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  शहर में स्ट्रीट डॉग की समस्या नासूर बनती जा रही है। स्ट्रीट डॉग आए दिन किसी ना किसी कॉलोनी में खतरनाक घटना को अंजाम दे रहे हैं। सैकड़ों लोग डॉग बाइट के शिकार हो चुके हैं। हाल ही विवेकानन्द कॉलोनी में एक डेढ़ वर्षीय बच्चे को श्वानों द्वारा नोचने की घटना ने शहर भर को हतप्रभ कर दिया था। श्वान ना केवल बच्चों को अपितु युवा और बुजुर्गों पर भी आए दिन हमला कर रहे हैं। श्वान काटने से रैबीज रोग की संभावना बढ़ जाती है। विडंबना है कि कोटा शहर में आवार श्वानों का वैक्सीनेशन नाम मात्र का हो रहा है।  स्ट्रीट डॉग का बधियाकरण व टीकाकरण तो किया जा रहा है लेकिन उसकी धीमी गति से जहां इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार कोटा शहर में 90 हजार से अधिक स्ट्रीट डाग हैं। इनकी संख्या में प्रतिवर्ष 15 फीसदी से ज्यादा वृद्धि हो रही है। नगर निगम की ओर से श्वानों का बधियाकण व टीकाकरण करने के बाद ये और अधिक खूंखार होकर लोगों पर हमले कर रहे है।  श्वानों के काटने पर सबसे अधिक खतरा रेबीज बीमारी के फे लने का रहता है। </p>
<p><strong> 25 से 30 हजार डॉग्स का ही वैक्सीनेशन</strong><br />नगर निगम की ओर से श्वानशाला का निर्माण 2021 में कराया गया था। उसके बाद 2022 में इसकी शुरुआत कर दी थी। उसके  बाद से अभी तक तीन साल में करीब 25 से 30 हजार श्वानों का ही बधियाकरण किया जा सका है। कोटा उत्तर में अप्रैल 2022 से मार्च 2024 तक 15084 श्वानों का, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 8725 का और अप्रैल 2025 से जुलाई तक करीब 550 श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा सका है। जबकि शहर में  बिना वैक्सीनेशन वाले श्वानों की संख्या दोगुनी से अधिक है। </p>
<p><strong>साल में दो बार बच्चे देती है मादा श्वान</strong><br />नगर निगम की ओर से आवारा श्वानों का वैक्सीनेशन व बधियाकरण करने के बाद भी इनकी संख्या कम होने की जगह अधिक होती जा रही है। निगम की कार्रवाई का असर शहर में नजर ही नहीं आ रहा है। इसका कारण है मादा श्वान का साल में दो बार हर छह माह में बच्चे देना है। वह भी एक बार में 7 से 8 यानि एक मादा श्वान साल में करीब 15 से 16 बच्चों को जन्म देती है। </p>
<p><strong>बधियाकरण के समय ही वैक्सीनेशन हो रहा</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा श्वानों के बधियाकण व टीकाकरण का कार्य निजी फर्म को दिया हुआ है। फर्म की टीम मौहल्लों में जाकर वहां से श्वानों को पकड़ती है। उन्हें नगर निगम द्वारा बंधा धर्मपुरा में निमित श्वानशाला  में ले जाकर वहां अलग-अलग कैनल में रखते हैं। वहां पकड़े गए नर व मादा श्वान का  पशु चिकित्सकों की निगरानी में बधियाकरण किया जाता है। उसी दौरान उनका रेबीज बीमारी से बचाव का टीकाकरण भी किया जाता है। स्ट्रीट डॉग का टीकाकरण एक बार ही किया जा रहा है। </p>
<p><strong>पहचान के लिए टैग</strong><br />शहर में हजारों श्वानों में से किन का बधियाकरण व टीकाकरण हुआ है और किनका नहीं। इसकी पहचान के लिए टीकाकरण के समय ही श्वानशाला में उनके कान पर या गले पर एक टैग लगाया जाता है। जिससे उसकी पहचान की जा सके। </p>
<p><strong>पालतू श्वानों का साल में दो बार टीकाकरण</strong><br />एक ओर जहां स्ट्रीट डॉग का जीवन में एक बार ही टीकाकरण किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पालतू श्वानों का साल में दो बार टीकाकरण किया जाता है। श्वान के जन्म के बाद  सवा से डेढ़ महीने में वैक्सीनीशन शुरु हो जाता है और 4 बार टीके लगाए जाते हैं। उसके बाद बड़ा होने पर उन्हें साल में दो बार टीके लगाए जाते हंै। </p>
<p><strong>श्वानों का हो स्थायी समाधान</strong><br />शहर के विभिन्न इलाकों में रहने वाले घृताची शर्मा,मृदुला मनोहर,मुकेश सिंह,शैलेन्द्र सिंह, करन खींची का कहना है कि आवारा श्वान आए दिन लोगों पर हमले कर रहे हैं। बच्चे व महिलाएं तो घर से बाहर निकलने में डरने लगे हैं।  गत दिनों जिस तरह से छोटे बच्चे को काटा उसे देखकर तो रोंगटे खड़े हो गए थे। लोगों का कहना है कि नगर निगम व जिला प्रशासन को श्वानों का स्थायी समाधान करते हुए उन्हें शहर से दूर छोड़ना चाहिए। </p>
<p><strong>टीकाकरण की गति धीमी</strong><br />स्ट्रीट डॉग का बधियाकरण व टीकाकारण का काम निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित श्वानशाला में किया जा रहा है। यहां कोटा उत्तर की श्वान शाला में 76 व कोटा दक्षिण की श्वान शाला में  30 कैनाल है। इस तरह से एक बार में करीब 100 श्वानों का ही बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। साथ ही एक श्वान को टीकाकरण के बाद 4 से 5 दिन निगरानी में रखा जाता है।  इस तरह से टीकाकरण की गति  जिस तेजी से होनी चाहिए वह काफी धीमी है।  </p>
<p><strong>टीकाकरण के बाद रेबीज का खतरा नहीं</strong><br />पशु चिकित्सक व पशु चिकित्सालय के पूर्व उप निदेशक डॉ. नंद किशोर वर्मा ने बताया कि स्ट्रीट डॉग को बार-बार पकड़ पाना संभव नहीं है। ऐसे  में उनका तो एक बार बधियाकरण के समय ही टीकाकरण किया जा रहा है। जबकि पालतू श्वानों में छोटे बच्चों का 4 बार व बड़े होने पर साल में दो बार टीकाकरण कराना आवश्यक है।  उन्होंने बताया कि एक बार रेबीज का टीका लगने के बाद श्वान द्वारा किसी को काटने पर उसे रेबीज का खतरा नहीं रहता है। लेकिन यदि किसी श्वान का टीकाकरण नहीं हुआ है और उसे रेबीज है तो उसके द्वारा काटने पर 10 से 15 फीसदी रेबीज होने का खतरा रहता है। रेबीज वाले श्वान द्वारा अधिक लोगों को काटने पर यह बढ़ सकता है। वैसे सामान्य तौर पर यह संभावना कम रहती है। लेकिन  श्वान के काटने पर रेबीज के खतरे से बचने के लिए लोगों को अस्पताल जाकर तुरंत इंजेक्शन लगवाना चाहिए।</p>
<p><strong>शहर में स्ट्रीट डॉग की संख्या-70 हजार से अधिक</strong><br />- नगर निगम द्वारा वैक्सीनेशन किया गया-25 हजार का<br />- मादा श्वान साल  में बच्चों को जन्म दे रही-2 बार<br />- एक मादा साल में बच्चे दे रही-15 <br />- निगम एक बार में श्वानों का कर रहा वैक्सीनेशन-100 </p>
<p><strong>डॉग लवर्स का विरोध बड़ी समस्या</strong><br />शहर में आवारा श्वानों की समस्या काफी गम्भीर है। हालांकि नगर निगम द्वारा उनका बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है।  लेकिन इसके लिए श्वानों को पकड़कर श्वानशाला लाना पड़ता है। हालत यह है कि श्वान पकड़ने जाते ही टीम को डॉग लवर्स के विरोध का सामना करना पड़ता है। हाल ही में स्वामी विवेकानंद नगर में भी डॉग पकड़ने के दौरान टीम के सदस्यों को महिलाओं के विरोध का सामना करना पड़ा। श्वानों के बधियाकरण व टीकाकरण की गति को बढ़ाया जा सकता है। <br /><strong>-विवेक राजवंशी, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>मादा श्वानों का बधियाकरण करना अधिक कारगर</strong><br />मादा श्वान साल में दो बार बच्चों को जन्म देती है। वह भी एक बार में 7 से 8 श्वानों को। ऐसे में निगम द्वारा श्वानों का बधियाकरण तो किया  जा रहा है। लेकिन मादा श्वानों का बधियाकरण करना अधिक कारगर है। उसी से इनकी संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। टीकाकरण होने के बाद श्वानों के काटने पर रेबीज का खतरा नहीं रहता। बिना टीकाकरण वाले श्वानों के काटने पर भी 10 से 15 फीसदी ही रेबीज का खतरा रहता है। <br /><strong>-डॉ. नंद किशोर वर्मा, सेवा निवृत्त उप निदेशक पशु  चिकित्सालय</strong></p>
<p><strong>टीकाकरण के बाद लगा रहे टैग</strong><br />नगर निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। स्ट्रीट डॉग का टीकाकण एक बार ही बधियाकरण के समय किया जाता है। उसके साथ ही उनके कान व गले पर टैग व निशान लगाया जाता है। जिससे उसके वैक्सीनेट होने की पहचान की जाती है। श्वानों को जिस जगह से लाया जाता है टीकाकरण के बाद वापस उसी जगह पर छोड़ने का आदेश है। जिससे इनकी संख्या कम नहीं दिख रही। जबकि बधियाकरण  करने का मकसद ही इनकी संख्या पर नियंत्रण करना है। इसका असर कुछ समय बाद नजर आएगा। कोटा उत्तर निगम में अब तक करीब 25 हजार से अधिक श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा चुका है। इसी तरह से कोटा दक्षिण में भी किया जा रहा है। <br /><strong>- मोतीलाल चौधरी, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p><strong>निगम बोर्ड में पहली बार लिया था निर्णय</strong><br />श्वानों के काटने की  समस्या शहर में काफी गम्भीर  है। उसे देखते हुए निगम का वर्तमान बोड बनने के बाद बोर्ड बैठक में निर्णय लेकर श्वान शाला का निर्माण किया। यहां सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। लेकिन उन्हें वापस उसी जगह पर छोड़ने से इनकी संख्या कम नहीं दिख रही है। वैसे सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन में संशोधन करवाने के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष से निवेदन किया हुआ है। नगर निगम श्वानों को श्वानशाला में रखकर उनकी देखभाल व खाने-पीने की व्यवस्था करने को तैयार है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौरनगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 15:07:35 +0530</pubDate>
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                <title>भूखे भेडिये की तरह झपट रहे हैं श्वान,आमजन परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के हर गली मौहल्ले व एरिया में आए दिन इस तरह के मामले हो रहे हैं। वहीं केवल कोटा शहर में ही नहीं अन्य शहरों में भी श्वानों के हमले हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dogs-are-attacking-like-hungry-wolves--common-people-are-troubled/article-118592"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/9632.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में इन दिनों श्वान काफी खूंखार हो रहे हैं।  गली मौहल्ले ही नहीं मुख्य मार्गों तक  पर आवारा श्वानों के झुंड राह चलते लोगों पर हमले कर रहे हैं। जिससे आमजन इतना अधिक परेशान हो चुके हैं कि अब तो श्वानों के झुंड देखते ही उनमें दहशत होने लगी है। हालत यह है कि शहर में रोजाना आधा दर्जन से अधिक मामले अस्पतालों में श्वानों के काटने के पहुंच रहे हैं। स्वामी विवेकानंद नगर में एक दिन पहले श्वानों के झुंड ने डेढ़ साल के मासूम बालक को घेरकर उस पर हमला कर दिया था। श्वानों ने उस बच्चे के शरीर पर न केवल काटा वरन् उसे काफी दूर तक घसीटकर भी ले गए। जिससे बच्चे की हालत खराब हो गई। वह चीखने चिल्लाने लगा तो लोगों ने श्वानों को भगाकर बालक को बचाया। ऐसा केवल इस बालक के साथ ही नहीं हुआ है। शहर के हर गली मौहल्ले व एरिया में आए दिन इस तरह के मामले हो रहे हैं। वहीं केवल कोटा शहर में ही नहीं अन्य शहरों में भी श्वानों के हमले हो रहे हैं। बुधवार को भी राज्य में कई जगह पर श्वानों के हमले के वीडियो वायरल हुए जिनमें श्वान लोगों पर झपटकर उन्हें काटते हुए दिख रहे हैं। घर से बाहर निकलते ही चाहे महिलाएं हो या बुजुर्ग या फिर छोटे बच्चे श्वान उन्हें देखते ही उन पर भूखे भेडिये की तरह झपट रहे हैं और उन्हें शिकार बना रहे हैं। श्वानों के हमले व काटने के कई मामले तो उजागर हो रहे हैं लेकिन ऐसे भी कई मामले हैं जिनकी तो जानकारी तक नहीं मिल पाती। अस्पतालों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में सरकारी व निजी अस्पतालों में रोजाना 6 से 7 मामले श्वानों के काटने के आ रहे हैं। </p>
<p><strong>श्वानशाला बनाई, कारगर नहीं हो पाई:</strong> शहर में श्वानों के बढ़ते आतंक व हमलों को देखते हुए नगर निगम की ओर से श्वानशाला तो बना दी गई। नगर निगम के वर्तमान बोर्ड का गठन होने के बाद वर्ष 2021 में पहले कोटा दक्षिण निगम  में और फिर कोटा उत्तर निगम में श्वानशाला का निर्माण किया गया। यहां श्वानों को लाकर रखा जाता है। उनका बधियाकरण व टीकाकरण किया जाता है। उसके बाद निर्धारित अवधि दो से तीन दिन में उन श्वानों को फिर से उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा है जहां से उन्हें पकड़कर लाया जाता है। ऐसे में न तो शहर में श्वानों की संख्या कम हो रही है और न ही निगम की कार्रवाई का असर नजर आ रहा है। श्वान शाला निर्माण और श्वानों के बधियाकरण व टीकाकरण पर हर साल लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद यह उतनी कारगर नहीं हो पाई जितनी होनी चाहिए थी।  वरन् हालत यह है कि बधियाकरण व टीकाकरण के बाद श्वान अधिक खूंखार हो रहे हैं। </p>
<p><strong>महापौर पुत्र व महिला पार्षद को बना चुके शिकार</strong><br />श्वानों द्वारा राह चलते लोगों पर हमले किए जा रहे हैं फिर चाहे वह कोई भी हो। नगर निगम कोटा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल के पुत्र पर साइकिल से जाते समय ही साबरमती कॉलोनी में श्वान हमला कर चुके हैं। जिससे उनके पैर में काट लिया था। इतना ही नहीं स्कूटी पर घर जाते समय नगर निगम कोटा दक्षिण की भाजपा पार्षद रीता सलूजा तक को श्वान शिकार बना चुके हैं। उनके भी पैर में श्वानों ने काट लिया था। बजरंग नगर, केसर बाग और बोरखेड़ा समेत कई क्षेत्रों  में भी पूर्व में कई लोगों को श्वानों द्वारा काटने के मामले होे चुके हैं। </p>
<p><strong>निगम कार्यालय तक में श्वानों का जमघट</strong><br />शहर के मुख्य मार्ग और गलियों में ही नहीं, श्वानों को पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने वाले नगर निगम कार्यालय तक में श्वानों का जमघट लगा हुआ है। यहां करीब 3 से 4 श्वान ऐसे हैं जो पूरे कार्यालय में ऊपर से नीचे तक घूमते रहते हैं। सबसे अधिक श्वान तो कार्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित सभागार में घूमते रहते हैं। जहां आमजन की आवाजाही सबसे अधिक रहती है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों के लिए भी ये श्वान खतरा बने हुए हैं। </p>
<p><strong>तीन साल में 24 हजार से अधिक का बधियाकरण </strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्वानशाला बनने के बाद से नगर निगम तीन साल में 24 हजार से अधिक श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण करवा चुका है। उसके बाद भी अभी तक बड़ी संख्या में ऐसे श्वान हैं जिनका बधियाकरण नहीं हुआ है।  नगर निगम की ओर से श्वानशाला का निर्माण तो वर्ष 2021 में करवा दिया था। लेकिन बधियाकरण का काम एनिवल सोसायटी के माध्यम से अप्रैल 2022 को शुरु किया था। अप्रैल 2022 सेमार्च 2024 तक 15 हजार से अधिक, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 8700 और अप्रैल 25 से अभी तक जून में 550 श्वान यानि करीब 24 हजार 300 से अधिक श्वानों का बधियाकरण किया जा चुका है। </p>
<p><strong>कोर्ट का आदेश हो तो बाड़े में रखने को तैयार निगम</strong><br />शहर में श्वानों की समस्या काफी गम्भीर है। उसे देखते हुए ही बोर्ड बनने के बाद श्वानशाला बनवाई गई। जहां सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन  की पालना करते हुए शवानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। कोर्ट का आदेश श्वानों को पकड़ने में आड़े आ रहा है। यदि कोर्ट निगम को आदेश दे या पूर्व के आदेश में संशोधन होता है तो नगर निगम आवारा श्वानों को शहर से दूर अलग बाड़े में रखने को तैयार है। श्वानों के खाने व उनकी देखभाल की जिम्मेदारी व व्यवस्था भी निगम के स्तर पर करने को तैयार है। जिससे श्वानों को भी कोई नुकसान नहीं होगा और लोगों को भी राहत मिलेगी। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 15:02:55 +0530</pubDate>
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                <title>निगम में श्वानों का बसेरा : लोगों को काटने का खतरा, अब तक समाधान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[शहर से श्वान कम होना तो दूर नगर निगम कार्यालय तक में इनका बसेरा हो रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dogs-residing-in-the-corporation/article-111094"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जिन आवारा श्वानों ने आतंक मचाया हुआ है। लोगों को काटकर घायल कर रहे है। उन श्वानों को पकड़ने वाले जिम्मेदार नगर निगम की हालत यह है कि शहर ही नहीं निगम कार्यालय तक में श्वानों का बसेरा है। जिससे वहां आने वाले लोगों को भी इनके द्वारा काटने का खतरा बना हुआ है। शहर में आवारा श्वानों की संख्या कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। नगर निगम द्वारा करवाए जा रहे वैक्सीनेशन व बधियाकरण के बाद भी इनकी संख्या में कमी होने की जगह लगातार बढ़ती ही जा रही है। वर्तमान में शहर का कोई भी एरिया या मेन रोड ऐसी नहीं है जहां श्वान झुंड में नजर नहीं आते हो। हालत यह है कि रात के समय तो लोगों का विशेष रूप से वाहन चालकों का निकलना मुश्किल हो रहा है। वाहन नजर आते ही श्वान उनके पीछे दौड़ पड़ते है। जिससे उनसे बचने के प्रयास में कई वाहन चालक संतुलन बिगड़ने से गिरकर घायल तक हो चुके है। उस स्थिति में शहर से श्वान कम होना तो दूर नगर निगम कार्यालय तक में इनका बसेरा हो रहा है। निगम कार्यालय के प्रशासनिक भवन सभागार से लेकर कोटा उत्तर महापौर कक्ष के सामने पॉर्च में, भवन के ए ब्लॉक से लेकर पहली मंजिल पर स्थित अभियंताओं के कक्ष के बाहर गैलेरी तक में श्वानों को  बेधड़क घूमते हुए देखा जा सकता है। बुधवार को भी निगम कार्यालय में कई जगह पर श्वान घूमते रहे। जबकि कई दिन बाद कार्यालय खुलने पर बड़ी संख्या में लोग अपने काम से निगम कार्यालय आए थे। ऐसे  में उन श्वानों को घूमता देख आश्चर्य करने के साथ ही डरने भी लगे। </p>
<p><strong>जब निगम में ही श्वान तो शहर से कैसे होंगे काम</strong><br />खेड़ली फाटक निवासी रमेश लोधा ने बताया कि नगर निगम की जिम्मेदारी है कि जिस तरह से सड़कों से मवेशियों को पकड़कर गौशाला में बंद किया जाता है। उसी तरह से इन आवारा श्वानों को भी पकड़कर श्वानशाला में बंद किया जाए या शहर से दूर जंगल में छोड़ा जाए।  लेकिन जिस तरह से नगर निगम  में ही श्वान खुले आग घूम रहे हैं उसे देखकर तो लगता है जब निगम में ही घूम रहे हैं तो शहर से कैसे कम होंगे। इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि निगम में श्वान काफी समय से है लेकिन अभी तक किसी को भी नुकसान पहुंचाने की कोई घटना नहीं हुई है। श्वानों को निगम में आने से रोकने की कोई व्यवस्था भी नहीं है। मुख्य द्वार पर तो होमगार्ड तैनात हैं लेकिन श्वान कहीं से भी दीवार फांदकर अंदर आ जाते है। </p>
<p><strong>श्वान देखते ही डर लगने लगा</strong><br />नगर निगम कार्यालय में विवाह प्रमाण पत्र बनवाने आए किशोरपुरा निवासी दम्पति इकबाल मोहम्मद व रूबीना ने बताया कि आए दिन जिस तरह से शहर में श्वानों द्वारा काटने की घटनाएं हो रही है। उनके बारे में सुनते रहते है। लेकिन निगम कार्यालय में ही जब श्वानों को घूमते हुए देखा तो डर लगने लगा कहीं ये काट नहीं ले। जितनी देर निगम में रहे उतनी देर पूरा ध्यान श्वानों पर ही टिका रहा। कहीं वह नजदीक न आ जाए। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 14:31:52 +0530</pubDate>
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                <title>श्वानों का समाधान नहीं, और विकराल हुई समस्या, निगम है जिम्मेदार </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम द्वारा इस समस्या का अभी तक भी कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। जबकि हर व्यक्ति इससे परेशान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-solution-to-the-problem-of-dogs--the-problem-has-become-more-severe/article-104369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में श्वानों की समस्या लगातार बनी हुई है। आए दिन श्वान लोगों को काट रहे हैं। इसके लिए नगर निगम जिम्मेदार होने के बाद भी वह अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। नगर निगम द्वारा इस समस्या का समाधान करने की जगह श्वानों का बधियाकरण व वैक्सीनेशन करने वाली फर्म का कार्यादेश निरस्त कर इस समस्या का समाधान करने के स्थान पर उसे और विकराल  बना दिया है। शहर में हर गली मौहल्ले और मुख्य मार्ग पर श्वानों का जमघट लगा हुआ है। श्वानों का इतना अधिक आतंक है कि कोई भी व्यक्ति उनके पास से चाहे वाहन लेकर निकल जाए या पैदल वे उसके पीछे काटने के लिए दौड़ते हुए देखे जा सकते है। यह समस्या बरसों से बनी हुई है। लेकिन नगर निगम द्वारा इस समस्या का अभी तक भी कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। जबकि हर व्यक्ति इससे परेशान है। </p>
<p><strong>श्वानशाला बनाकर की इतिश्री</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से लाखों रुपए खर्च कर बंधा धर्मपुरा में श्वानशाला तो बना दी। श्वानों को पकड़कर उनका वैक्सीनेशन व बधियाकरण करने का ठेका भी कर दिया। लेकिन सिर्फ उन श्वानों को वैक्सीनेशन व बधियाकतण के बाद उसी जगह पर छोड़ना होता है। जिससे श्वानों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। </p>
<p><strong>एक को किया डीबार, दूसरी का कार्यादेश निरस्त</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में श्वानों के बधियाकरण व वैक्सीनेशन का काम दो फर्म ने किया। जिनमें से पूर्व में पुणे की एक फर्म को कोटा दक्षिण की तत्कालीन आयुक्त सरिता सिंह ने कार्यादेश में शर्तो का उल्लंघन बताते हुए उसे डीबार कर दिया था। उसके बाद काफी समय तक कोई फर्म नहीं आई। कई बार टेंडर जारी किए गए। बड़ी मुश्किल से पंजाब पटियाला की फर्म ने टेंडर डाला। अगस्त 2024 में ही फर्म ने काम शुरु किया था। अब दक्षिण के आयुक्त अनुराग भार्गव ने इस फर्म का कार्यादेश यह कहते हुए कि शर्तों का उल्लंघन करने पर कार्यादेश निरस्त किया जाता है। 12 फरवरे से ही आदेश प्रभावी कर दिया गया। जिससे वर्तमान में कोटा दक्षिण निगम में अब श्वानों के बधियाकरण व वैक्सीनेशन का काम बंद हो गया  है। </p>
<p><strong>मुख्यमंत्री के कोटा आगमन पर हुई घटनाएं</strong><br />सूत्रों के अनुसार कोटा दक्षिण में दोनों फर्म के खिलाफ जो कार्रवाई हुई वह मुख्यमंत्री के कोटा आगमन के दौरान हुई। पिछली बार हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान एक श्वान एयरपोर्ट पर आ गया था। वहीं इस बार दशहरा मैदान में  मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान श्वान दशहरा मैदान में आ गया था। जिसके कारण संबंधित फर्म के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।  जानकारों के अनुसार संबंधित फर्म ने मुख्यमंत्री के प्रस्तावित मार्ग व कार्यक्रम स्थल से 15 श्वानों को पकड़ा था। फर्म द्वारा अगस्त 2024 से जनवरी 2025 तक करीब 4 हजार श्वानों का बधियाकरण किया जा चुका है। </p>
<p><strong>श्वानों के समाधान के लिए निगम जिम्मेदार</strong><br />विज्ञान नगर निवासी रुद्धाक्ष शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में श्वानों की समस्या काफी गम्भीर है। आए दिन बच्चों को काट रहे हैं। लेकिन नगर निगम  कुछ नहीं कर रहा। जबकि नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वह श्वानों को पकड़कर लोगों को उनसे राहत दिलाए।  बसंत विहार निवासी नीरज महावर का कहना है कि इस क्षेत्र की हर गली व मेन रोड तक पर श्वान ही श्वान घूमते रहते हैं। शाम होते ही महिलाओं व बच्चों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।  आर.के. पुरम् निवासी माही सिंह का कहना है कि स्कूटी पर जाते समय आए दिन श्वान उनके पीछे भागते हैं। जिससे उनके काटने का शर बना रहता है। श्वानों को देखकर उनसे बचने के प्रयास में कई बार स्कूटी का संतुलन बिगड़ चुका है। नगर निगम को चाहिए कि वह इन्हें पकड़कर एक स्थान पर रखे। जिससे लोगों को राहत मिल सके। </p>
<p><strong>कई बार लिखित में देने पर भी सुनवाई नहीं</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के पार्षद अनुराग गौतम, कपिल शर्मा, पी.डी. गुप्ता, अब्दुल गफ्फार का कहना है कि दक्षिण के हर वार्ड में श्वानों का आतंक है। आए दिन श्वान लोगों को काट रहे हैं। नगर निगम आयुक्त को श्वानों की समस्या के समाधान के  लिए लिखित में पत्र दिए गए। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। नगर निगम की जिम्मेदारी है कि श्वानों को पकड़कर उनसे लोगों को राहत दिलाए। लेकिन जो फर्म काम कर रही थी उसका टेंडर निरस्त करने से समाधान करने के स्थान पर इसे और विकराल बना दिया है।  कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष जोगेन्द्र बीरवाल जोंटी का कहना है कि हाल ही में विज्ञान नगर में श्वानों ने एक बालक को काट लिया। उसे इतना लहुलुहार कर दिया कि वह काफी डरा हुआ है। घर से बाहर निकलने  में डरने लगा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> श्वानों की समस्या से आमजन को राहत दिलाने के लिए लाखों रुपए खर्च कर बंधा धर्मपुरा में नगर निगम द्वारा पहली बार श्वानशाला बनवाई गई। श्वानों के बधियाकरण व वैक्सीनेशन के लिए टेंडर किया गया। पहले एक फर्म को तत्कालीन आयुक्त ने डीबार कर दिया था। अब दूसरी फर्म को आयुक्त ने कार्यादेश निरस्त कर दिया। कायारदेश निरस्त करने की जानकारी उन्हें आयुक्त द्वारा नहीं दी गई। लोगों के फोन आने पर इसकी जानकारी मिली। जबकि संबंधित फर्म को एक माह का नोटिस देना चाहिए था। उस दौरान नया टेंडर जारी करते। नयी फर्म के आने पर भले ही कार्यादेश निरस्त कर दिया जाता। अब कोटा दक्षिण में श्वानों का वैक्सीनेशन करने का काम पूरी तरह से ठप हो गया है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Feb 2025 17:07:12 +0530</pubDate>
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                <title>12 हजार से अधिक श्वानों का बधियाकरण, फिर भी सड़कों पर भरमार</title>
                                    <description><![CDATA[श्वानशाला पर लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी लोगों को नहीं राहत ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-12-thousand-dogs-have-been-sterilized--still-there-is-a-lot-of-dogs-on-the-roads/article-95146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम द्वारा श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण कराने के  बाद भी न तो इनकी संख्या में कमी नजर आ रही है और न ही इनके द्वारा  लोगों को काटने के मामलों में।  श्वानशाला बनने के बाद से अब तक कोटा दक्षिण निगम करीब 12 हजार से अधिक श्वानों का बधियाकरण करवा चुका है। उसके बावजूद लोगों को इनकी स्थायी समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। शहर का कोई भी मौहल्ला हो या मुख्य मार्ग। संकरी गली हो या चौड़ा रास्ता। यहां तक कि नगर निगम से लेकर किसी भी सरकारी कार्यालय तक में श्वान झुंड के रूप में देखे जा सकते हैं। हालत यह है कि शहर में श्वानों की संख्या कम होने की जगह लगातार बढ़ती ही जा रही है। नतीजा श्वान राह चलते लोगों विशेष रूप से महिलाओं व बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं। जिससे लोगों में श्वानों के प्रति दहशत लगातार बढ़ रही है। गत दिनों भी बजरंग नगर में श्वानों द्वारा एक बालक को काटने की घटना हो चुकी है। </p>
<p><strong>निगम ने लाखों रुपए खर्च कर बनवाई श्वान शाला</strong><br />शहर में श्वानों की समस्या के समाधान की मांग लम्बे समय से की जा रही थी। इसे देखते हुए नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से लाखों रुपए खर्च कर बंधा धर्मपुरा में श्वानशाला बनवाई। कोटा उत्तर की श्वानशाला पर करीब 75 लाख रुपए और कोटा दक्षिण की श्वान शाला पर 50 लाख रुपए खर्च हुए। कोटा उत्तर की श्वानशाला में श्वानों को रखने के 125 कैनल व कोटा दक्षिण की श्वानशाला में 33 कैनल हैं।  साथ हीआॅपरेशन थियेटर भी बनाया हुआ है।  इसके बाद निगम ने एनिमल वेलफेयर सोसायटी को श्वानों को पकड़कर उनका बधियाकरण व टीकाकरण करने का टेंडर दिया। उस पर भी हर साल लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन न तो श्वानों की संख्या कम हो रही है और न ही काटने के मामले। </p>
<p><strong>आए दिन हो रहे काटने  के मामले</strong><br />शहर में श्वानों के काटने के मामले लगातार हो रहे हैं। साबरमती कॉलोनी, महावीर नगर, सब्जीमंडी,बजरंग नगर से लेकर कुन्हाड़ी सकतपुरा तक  श्वान ही श्वान सड़कों पर देखे जा सकते है।  हालत यह है कि घर के बाहर खेलते बच्चों को भी श्वान कई बार निशाना बना चुके हैं। कुछ समय पहले श्वानों ने बजरंग नगर में पूर्व पार्षद के पुत्र को गर्दन पर काट लिया था। जिससे उसकी हालत इतनी अधिक खराब हो गई थी कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।  </p>
<p><strong>12 हजार 645 का किया बधियाकरण</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्वानशाला में  कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र से  12 हजार 645  श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा चुका है। बधियाकरण के बाद तीन से चार दिन श्वानों को वहां रखकर वापस उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा है जहां से पकड़कर लाए थे। जिससे निगम के प्रयासों का जनता को लाभ ही नहीं मिल रहा है।  </p>
<p><strong>राज्य सरकार ने पहले दिया आदेश, फिर लिया वापस</strong><br />श्वानों की बढ़ती समस्या को देखते हुए रा’य सरकार ने कुछ समय पहले खतरनाक श्वानों को शहर से पकड़कर दूर जंगल में या बाड़े में छोड़ने के आदेश दिए थे। जैसे ही यह आदेश आया वैसे ही श्वान प्रेमी संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। जिससे सरकार को बैकफुट पर आकर उस आदेश को वापस लेना पड़ा। </p>
<p><strong>शहर से बाहर हो, तभी समाधान</strong><br />शहर वासियों का कहना है कि श्वानों की समस्या गम्भीर है। इसका स्थायी समाधान होना चाहिए। भीमगंजमंडी निवासी घनश्याम नामा का कहना है कि श्वानों को बधियाकरण करके वापस छोड़ने का कोई मतलब नहीं है। इन्हें स्थायी रूप से वहीं रखा जाए। पाटनपोल निवासी घनश्याम शर्मा का कहना है कि  श्वानों का इतना अधिक डर है कि उन्हें देखते ही महिलाएं घर से बाहर निकलने में डरने लगी है। बच्चे घर के बाहर नहीं खेल पाते। निगम लाखों रुपए खर्च कर रहा है लेकिन उसका लोगों को कोई लाभ नहीं हो रहा है। श्वानों को शहर से दूर किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />श्वानों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइन लाइन की पालना करने की बाध्यता है। उसके हिसाब से ही पकड़कर बधियाकरण करने की प्रक्रिया की जा रही है  निगम श्वानों को रखने, बधियाकरण व टीकाकरण और उनके खाने पर खर्चा कर ही रहा है। श्वानों को श्वानशाला में  स्थायी रूप से रखकर वहीं खाना पीना दिया जाए तभी शहर वासियों को इससे छुटकारा मिलेगा। वरना साल में दो बार इनके बच्चे होते हैं। यदि किसी एरिया से 20 में से 15 का बधियाकरण कर भी दिया और शेष 5 रह गए तो साल में दो बार उनके बच्चे होने से संख्या कम होना मुश्किल है। साथ ही ये 5 से 6 माह में बड़े हो जाते हैं।<br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Nov 2024 16:27:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले सेना के जांबाज श्वानों को आमजन ले सकेंगेें गोद</title>
                                    <description><![CDATA[सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इन श्वानों की सूंघने तथा आभास करने की अछ्वुत क्षमता होती है और इसका कोई विकल्प हाल फिलहाल नजर नहीं आता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/common-people-will-be-able-to-adopt-the-brave-dogs/article-89347"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(11).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आप चाहें, तो सैनिकों की तरह ही देश की रक्षा में अपनी जान की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटने वाले सेना के जांबाज श्वानों को गोद लेकर अपने पास रख सकते हैं। जी हां, आपको यह सुनकर हैरानी होगी, लेकिन यह बात सही है कि सेना ने पिछले कुछ वर्षों से यह प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें कोई भी सेना से सेवानिवृत होने वाले इन जांबाज और बहादुर श्वानों को अपने पास रख कर अपने घर की शोभा बढाने के साथ- साथ उसकी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकता है। </p>
<p>सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सेना के सेवानिवृत श्वानों को आसानी से गोद लिया जा सकता है। इसके लिए कोई विशेष शर्तें नहीं हैं, लेकिन इतना जरूरी है कि आपको कुत्तों से विशेष लगाव और जुड़ाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया बेहद आसान और सरल है। यदि कोई इन श्वान को गोद लेना चाहता है, तो उसे सेना को पत्र लिखकर आवेदन करना होगा और अपने बारे में बताना होगा। पत्र में व्यक्ति को अपना पता, पहचान और अन्य विवरण भी देना होता है। सेना आपके आवेदन पर विचार करने और संतुष्ट होने के बाद आपको सेवानिवृत श्वान को अपने साथ ले जाने की इजाजत दे देती है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इन श्वानों की सूंघने तथा आभास करने की अछ्वुत क्षमता होती है और इसका कोई विकल्प हाल फिलहाल नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले लंदन में प्रौद्योगिकी के आधार पर एक प्रकार के रोबोट में श्वान की तरह सूंघने तथा आभास करने की क्षमता पैदा करने की कोशिश की गयी, लेकिन यह कारगर नहीं पायी गयी। </p>
<p>सेना में श्वानों को लंबे समय से रखा जा रहा है और उनके लिए विशेष इकाईयां भी हैं, जहां इन्हें गहन प्रशिक्षण देकर विभिन्न कार्यों में प्रशिक्षित किया जाता है। इन श्वानों को बारूदी सुरंगों और विस्फोटकों का पता लगाने , ट्रेकिंग, हमला करने, गश्त और विभिन्न तरह के खोजी तथा बचाव अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इनका अपने ट्रेनर तथा हैंडलर के साथ इतना अधिक लगाव हो जाता है कि ये उनके लिए अपनी जान देने से कभी भी पीछे नहीं हटते। </p>
<p>रणबांकुरें सैनिकों की तरह सेना में इन जांबाज श्वानों का भी गौरवशाली इतिहास है और इन्होंने समय समय पर देश की रक्षा से जुड़े अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है तथा प्राणों का बलिदान भी दिया है। इसके लिए इनके योगदान के अनुसार इन्हें स्वतंत्रता दिवस तथा गणतंत्र दिवस जैसे मौकों पर सैनिकों के साथ साथ वीरता पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जाता है। </p>
<p>करीब 08 से दस वर्ष की समर्पित सेवा के बाद सेना से सेवानिवृत होने वाले इन श्वानों को सेवानिवृत सैनिकों की तरह पूरा सम्मान दिया जाता है और उन्हें जीवन के अगले पड़ाव के लिए सेना की मेरठ स्थित रिमाउंट और वेटनरी कोर में सम्मान के साथ रखा जाता है। सेवानिवृत श्वानों को ट्रेन में प्रथम श्रेणी के वातानुकूलित कोच में उनके गंतव्य तक पहुंचाया जाता है। </p>
<p>सेवानिवृत होने के बाद इन श्वानों में से कुछ को इनके हैंडलर या सेना के कुछ अन्य अधिकारी अपने पास रख लेते हैं। कुछ गैर सरकारी संगठन भी इन श्वानों को अपना लेते हैं और बाकी को सेना की इस विशेष कोर में रखा जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Sep 2024 17:44:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>श्वान और बंदरों से जनता त्रस्त, निगम अधिकारी कार्यालय में मस्त </title>
                                    <description><![CDATA[जनहित के मुद्दों पर भी आचार संहिता का रोड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/public-troubled-by-dogs-and-monkeys--corporation-officials-are-busy-in-their-offices/article-79310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/shvan-or-bndaro-s-janta-trast,-nigam-adhikari-kryalaye-me-mst...kota-news-25-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में आए दिन श्वान लोगों को विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं को शिकार बना रहे हैं। बंदरों का भी आतंक बना हुआ है। जनता इन सबसे त्रस्त हो रही है लेकिन निगम अधिकारियों को जनता की परवाह नहीं होने से वे मस्त हो रहे हैं। जनहित के मुद्दों पर भी आचार संहिता का रोड़ा आड़े आ रहा है।  कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। एक दिन हले भी श्वान ने दस साल के बच्चे को बुरी तरह से नोच दिया। जिससे उसकी हालत गम्भीर बनी हुई है। उसी तरह से विज्ञान नगर में कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग को राह चलते काट लिया था। श्वान राह चलते लोगों पर आए दिन हमले कर रहे हैं। किसी के पैर में तो किसी के चेहरे पर काट रहे हैं। जिससे लोगों में श्वानों के प्रति दहशत बढ़ती ही जा रही है। शहर मे सड़कों पर और गली मोहल्लों में श्वानों के झुंड दिखते ही लोग डरने लगे हैं। श्वानों के पास से निकलने में डर लगने लगा है। लेकिन निगम अधिकारियों द्वारा श्वानों की समस्या का कोई स्थायी समाधान तक नहीं किया जा रहा। वहीं निगम अधिकारी चुनाव की आचार संहिता का बहाना बनाकर नए टेंडर भी नहीं कर रहे हैं।  </p>
<p><strong>बंदर पकड़ने का ठेका खत्म, नया हुआ नहीं</strong><br />इसी तरह से नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में बंदरों की संख्या भी काफी अधिक हो गई है। आए दिन उनके द्वारा लोगों के घरों में घुसने, खाने की सामग्री ले जाने और लोगों पर हमले करने के मामले हो रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि बंदर पकड़ने का ठेका मथुरा की फर्म को दिया हुआ था। वह ठेका भी समाप्त हो गया। लेकिन अधिकारियों ने समय रहते नया ठेका नहीं किया। अब अधिकारियों के पास चुनाव आचार संहिता का बहाना है। जिससे नए टेंडर भी नहीं किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>फर्म को किया डीबार, अब जनता परेशान</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में पुणे की निजी फर्म द्वारा श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा था। लेकिन कोटा दक्षिण निगम में आयुक्त द्वारा उसे फरवरी-मार्च में डीबार कर दिया था। उसके बाद से फर्म ने काम बंद कर दिया। जिससे क्षेत्र की जनता परेशान हो रही है। जानकारों के अनुसार जबकि वही फर्म कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में काम कर रही है।  कोटा दक्षिण के पार्षदों का कहना है कि   तलवंडी, जवाहर नगर, छावनी, बल्लभबाड़ी और बोरखेड़ा क्षेत्र में श्वानों का आतंक अधिक है। समाचार पत्रों में व प्रशासन के सामने तो बहुत कम मामले आ रहे हैं जबकि घटनाएं काफी अधिक हो रही है। लेकिन निगम अधिकारियों का जनता की समस्याओं पर कोई ध्यान ही नहीं है।  लोगों का कहना है कि श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण करने के बाद ये अधिक खूंखार हो रह हैं। जिससे ये लोगों पर हमले कर रहे हैं। </p>
<p><strong>लावारिस मवेशी तक नहीं पकड़े जा रहे</strong><br />शहर की सड़कों पर लावारिस मवेशियों का जमघट इतना अधिक हो गया है कि जगह-जगह पर ये झुंड में खड़े देखे जा सकते हैं। जिससे हादसों का तो खतरा बना हुआ है साथ ही लोगों पर हमले की घटनाएं भी हो रही है। विशेष रूप से सब्जीमंडी में और मेन रोड पर इनकी समस्या अधिक है।  लोगों का कहना है कि शहर में आवारा मवेशी अधिक होने के बाद भी उन्हें नहीं पकड़ा जा रहा है। निगम अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>श्वानशाला में सिर्फ बधियाकरण व टीकाकरण</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला परिसर में श्वानशाला बनाई गई है। यहां पुणे की निजी फर्म द्वारा श्वानों को लाकर उनका बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। कुछ दिन रखने के बाद उन्हें वापस उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा है जहां से पकड़कर लाए। जिससे श्वानों का खतरा कम नहीं हो रहा है। गली मोहल्लों में इनकी संख्या कम भी नहीं हो रही है। जबकि निगम अधिकारियों का कहना है कि बधियाकरण से इनकी संख्या नहीं बढ़ रही है और टीकाकरण से इनके काटने पर भी रैबीज फेलने का खतरा नहीं रहता। </p>
<p><strong>श्वानों की समस्या का हो समाधान</strong><br />नए कोटा क्षेत्र के जवाहर नगर व तलवंडी समेत सभी जगह पर श्वानों का इतना अधिक आतंक है कि लोग डर के कारण रात के समय तो घर से बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं। बच्चे आस-पास पार्क में खेल नहीं पा रहे हैं। लेकिन निगम अधिकारी चुनाव आचार संहिता का बहाना बनाकर बच रहे हैं।<br /><strong>- सुरेन्द्र सिंह, जवाहर नगर</strong></p>
<p>श्वानों की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। जहां भी श्वान नजर आ जाते हैं वहां से रास्ता ही बदलना पड़ता है। आए दिन लोगों को काटने की घटनाएं होने पर बच्चों को घर से बाहर अकेले भेजने तक में डर लगने लगा है। निगम अधिकारियों को चाहिए कि इनका समाधान करे।<br /><strong>- गरिमा सोनी, तलवंडी</strong></p>
<p>सड़कों पर जहां देखो वहां श्वान ही श्वान दिखते हैं। सुबह के समय मंदिर जाते समय कई बार श्वान पीछे पड़ गए उस समय बड़ी मुश्किल से जान बचाई। महिलाओं व बच्चों के लिए तो इनसे बचना मुश्किल हो रहा है। निगम अधिकारियों को जनता के मुद्दों में तो आचार संहिता की आड़ नहीं लेनी चाहिए। समय रहते टेंडर करते तो ऐसी समस्या नहीं होती।<br /><strong>- महेन्द्र जैन, दादाबाड़ी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />निजी फर्म द्वारा सही ढंग से काम नहीं करने पर उसके खिलाफ शिकायतें आ रही थी। जांच में दोषी मानते हुए उसे डीबार कर दिया था। उसके बाद टेंडर किए लेकिन कोई फर्म नहीं आई। फिर लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई। इस दौरान नया टेंडर नहीं कर सकते। ऐसे में अब अगले महीने आचार संहिता हटने के बाद ही नए टेंडर होंगे। जिससे श्वान, बंदर व अन्य सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। <br /><strong>- सरिता सिंह, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 14:22:35 +0530</pubDate>
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