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                <title>street lighting - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शहर में शामिल, फिर भी गांव जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[बोले- नगर निगम में शामिल होने के बाद भी नहीं मिलीं शहर जैसी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/included-in-the-city--yet-conditions-resemble-a-village/article-163224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा शहर की सीमा में शामिल होने के बावजूद वार्ड नंबर 1 से 5 तक के कई इलाकों की तस्वीर आज भी गांव जैसी नजर आती है। शहर का हिस्सा होने के बावजूद यहां रहने वाले लोगों को सड़क, पानी, बिजली, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई जगह मुख्य सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। सड़क पर जमा गंदा पानी पैदल राहगीरों के साथ वाहन चालकों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान और क्षेत्र के विकास की उम्मीद में जनप्रतिनिधि चुने, लेकिन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो पाया। कई इलाकों में आज भी विकास कार्यों की दरकार है। लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में आने के बाद भी यदि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलें तो शहर और गांव में अंतर ही क्या रह जाता है।</p>
<p><strong>कहीं सड़क बदहाल तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर</strong><br />इन वार्डों के कई क्षेत्रों में सड़कें लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। जगह-जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों और गलियों का पानी सड़क पर आ जाता है। इससे लोगों को पैदल निकलने में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। स्ट्रीट लाइटों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पोल तो लगे हैं, लेकिन लाइटें नियमित रूप से नहीं जलतीं। रात के समय अंधेरा रहने से लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीण क्षेत्र से शहर का हिस्सा बने इन इलाकों में तेजी से विकास की जरूरत है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उस गति से नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>शहर जैसी सुविधाओं की उम्मीद, विकास अंतिम छोर तक पहुंचे</strong><br />क्षेत्रों के लोगों की सबसे बड़ी मांग अब शहर जैसी मूलभूत सुविधाओं की है। लोगों का कहना है कि केवल वार्ड सीमा में शामिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि विकास का लाभ भी अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। मुख्य सड़कों की मरम्मत, नालियों की नियमित सफाई, जलभराव का स्थायी समाधान और खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करना प्राथमिकता होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को ऐसे प्रतिनिधि की उम्मीद है, जो उनके बीच रहकर समस्याएं सुने और अधिकारियों से समन्वय कर समाधान करवाए। लोगों का कहना है कि अब गांव जैसी बदहाली नहीं, बल्कि शहर जैसी सुविधाएं चाहिए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर और क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 1-</strong> शंभूपुरा, गिरधरपुरा एवं गोवर्धनपुरा ग्राम<br /><strong>वार्ड नंबर 2-</strong> कबीर आश्रम, विजय राजे सिंधिया चौराहा, ज्ञान सरोवर कॉलोनी, नयागांव उर्फ दौलतगंज, रोझड़ी का आंशिक भाग, पटवार ट्रेनिंग स्कूल, मोदी इंस्टीट्यूट, कौटिल्य कॉलेज आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 3- </strong>ग्राम आमली, रथकांकरा, बंधा, धरमपुरा की समस्त राजस्व सीमा, देवनारायण योजना, रोझड़ी राजस्व ग्राम का आंशिक भाग, धरमपुरा रोड की समस्त कॉलोनियां<br /><strong>वार्ड नंबर 4- </strong>रानपुर, पुनिया देवरी, रानपुर एजुकेशन एरिया, रेतिया चौकी, लखावा, जगपुरा, खेड़ा जगपुरा, भीमपुरा, उमेदपुरा, भामाशाह मंडी, रानपुर औद्योगिक क्षेत्र, कोयला तलाई आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 5-</strong> कंवरपुरा ग्राम, श्रीराम नगर, कच्ची बस्ती, कहारों की बस्ती, डीसीएम कॉलोनी, डीसीएम श्रीराम फैक्ट्री, श्रीराम कॉलोनी, उमेदगंज गांव का संपूर्ण क्षेत्र, राजनगर का आंशिक क्षेत्र, मानसरोवर कॉलोनी, कोटा क्लब, गायत्री विहार एवं रायपुरा क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>घर-घर पाइपलाइन पहुंचाने के साथ सड़क निर्माण, स्कूल निर्माण और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करवाया गया। वार्डवासियों की सुविधा के लिए पट्टे बनवाने का काम भी किया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड के लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करवाने का हरसंभव प्रयास किया गया और जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को गति दी गई।<br /><strong>-पवन मीणा,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>पार्षद कार्यकाल के दौरान राजनीतिक फेरबदल के कारण उनके साथ भेदभाव किया गया, जिसके चलते वार्ड में प्रस्तावित कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्राथमिकता हमेशा वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान करना रही।<br /><strong>- सोनू भील,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्ड की स्थिति आज भी गांव जैसी बनी हुई है। नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। जनप्रतिनिधियों के साथ निगम के अधिकारियों ने भी वार्ड की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके कारण स्थानीय लोगों को सड़क, सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-कपिल गुर्जर,वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में सड़कें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं और जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि वार्ड में रोड लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन कई जगह रात के समय ये जलती नहीं हैं। इससे अंधेरा रहने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।<br /><strong>- भागचंद,वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 14:31:12 +0530</pubDate>
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