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                <title>collusion - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>collusion RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यस बैंक लोन धोखाधड़ी मामला: मुंबई-दिल्ली समेत 17 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, कई अहम दस्तावेज जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यस बैंक ऋण मामले में मुंबई, दिल्ली और खंडाला के 17 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई सुरक्षा रियल्टी और ख्याति रियल्टर्स सहित प्रमोटरों के परिसरों पर की गई। ईडी लोन हेराफेरी, सर्कुलर ट्रांजैक्शन और संपत्तियों के कम मूल्यांकन की गहन जांच कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/yes-bank-loan-fraud-case-ed-raids-17-locations-including/article-157159"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/ed-raida.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यस बैंक ऋण आवंटन मामले में जुड़ी जांच के सिलसिले में मुंबई, खंडाला और नयी दिल्ली में कुल 17 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया है। ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय द्वारा की जा रही यह छापेमारी 'सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड', 'सुरक्षा रियल्टी लिमिटेड' और 'ख्याति रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड' से जुड़े परिसरों पर केंद्रित है। इसके अलावा जांच एजेंसी इन कंपनियों के प्रमोटरों, निदेशकों, कर्मचारियों और यस बैंक के एक पूर्व कर्मचारी के ठिकानों को भी खंगाल रही है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 के दौरान 'मैकस्टार मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड' तथा कुछ अन्य खातों के यस बैंक ऋणों के कथित तौर पर फर्जी हस्तांतरण से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी का आरोप है कि एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों और यस बैंक के बीच कथित मिलीभगत थी, जिसके तहत 'सर्कुलर ट्रांजैक्शन' (पैसे को घुमाने की प्रक्रिया) के जरिए बैंक की तनावग्रस्त संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा किया गया। ईडी इस कार्रवाई के जरिए इसी हेराफेरी से जुड़े सबूत जुटा रही है।</p>
<p>इसके साथ ही, एजेंसी नीलामी की गई संपत्तियों के जानबूझकर कम मूल्यांकन किए जाने, बढ़े-चढ़े या फर्जी दावों, एनसीएलटी की प्रक्रिया में लेनदारों के मतदान अधिकारों के दुरुपयोग और कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सिर्प) की पारदर्शिता को प्रभावित करने वाली कथित अनियमितताओं की भी गहन जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:20:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंचायतों की पीड़ा: करोड़ों का फंड बैंकों में अटका, टर्नओवर मेंटेंन के लिए बैंक और अफसरों के बीच होती है मिलीभगत!</title>
                                    <description><![CDATA[ गलत खाता संख्या और आईएफएससी कोड, बैंकों का विलय जैसे कारणों से यह पैसा ग्राम पंचायतों को समय पर नहीं मिल पा रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pain-of-panchayats--crores-of-funds-stuck-in-banks--there-is-collusion-between-bank-and-officers-for-turnover-maintenance/article-5171"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/news1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश की कई नवगठित ग्राम पंचायतों सहित सैकड़ों पुरानी पंचायतों के विकास फंड का पैसा बैंक खातों में अटका है। गलत खाता संख्या और आईएफएससी कोड, बैंकों का विलय जैसे कारणों से यह पैसा ग्राम पंचायतों को समय पर नहीं मिल पा रहा। करोड़ों रुपए का यह भुगतान छह महीने से ज्यादा समय से बैंकों के पास लम्बित है। ऐसे में ग्राम पंचायतों को कर्मचारियों का वेतन और ठेकेदारों को भुगतान करने में परेशानी हो रही है। नवगठित पंचायतों में विकास कार्यों के लिए फंड केन्द्र और राज्य प्रवर्तित योजनाओं के जरिए राष्ट्रीयकृत बैंक खातों में दिया जाता है। नवगठित 250 ग्राम पंचायतों और 550 पुरानी पंचायतों में फंड का पैसा नहीं मिलने की शिकायतें हैं। इनकी पुष्टि के बाद विभाग का कहना है कि पहले कुछ ग्राम पंचायतों में नवगठन के बाद राजस्व दस्तावेजों की समस्या थी, उसके अधिकांश मामले निस्तारित हो गए। अब कई ग्राम पंचायतों से जुड़ी बैंकों के विलय मामले में खातों की जानकारी अपडेट नहीं होने से परेशानी बनी हुई है। बैंकों के आईएफएससी कोड भी बदले तो भुगतान मामले अटक गए। वहीं, सरपंचों का कहना है कि पिछले छह महीने से इन ग्राम पंचायतों के पास कोई फंड नहीं आया। कई ग्राम पंचायतों ने फंड बैंक में पड़े रहने के कारण काम करा लिए, लेकिन अब तकनीकी खामियों की वजह से भुगतान में समस्या आ रही है।<br /><br /><strong>बैंक और अफसरों की सांठगांठ</strong><br />ग्राम पंचायतों के खाते राष्ट्रीयकृत सरकारी और निजी बैंकों में खुले हैं। सूत्रों का कहना है कि कई बैंकों की जिला शाखाओं में टर्नओवर मेंटेंन लायक पैसे नहीं रहते तो बैंक वाले पंचायतीराज विभाग के अफसरों से मिलीभगत करते हैं। इन खातों में पैसा कुछ महीनों के लिए डलवा दिया जाता है। निजी बैंक विभागीय अफसरों को ज्यादा प्रलोभन देते हैं। गलत आईएफएससी कोड और खाता संख्या की आड में इस पैसे की महीनों की ब्याज विभाग और ग्राम पंचायतों को नहीं मिलती और ग्राम पंचायतें भुगतान के लिए परेशान रहती हैं।<br /><br /><strong>ऐसे मिलता है भुगतान</strong><br />वित्त आयोग और केन्द्र-राज्य प्रवर्तित योजनाओं के मद में ग्राम पंचायतों को जो राशि मिलती है। उसमें 75 प्रतिशत सीधे ग्राम पंचायत के खाते में, 20 प्रतिशत पंचायत समिति के खाते में और पांच प्रतिशत जिला परिषद के खाते में जाती है। पंचायतों से जुड़े सभी विकास कार्यों का ऑनलाइन भुगतान होता है। सूत्रों के अनुसार पंचायतों के चुनाव से पहले वीडीओ ही सर्वेसर्वा होते थे, इसलिए भुगतान मामलों में बैंकों से मिलीभगत हुई। अब पंचायतों में सरपंच, प्रधान और प्रमुख चुनकर आ गए तो वीडिओ की मिलीभगत के प्रकरणों से धूल साफ होने लगी है।<br /><br />कई नई और पुरानी ग्राम पंचायतों में पिछले छह महीने से फंड राशि नहीं मिल पा रही है। फंड मिला, लेकिन गलत जानकारी की आड में बैंकों में अटका है। कर्मचारी तनख्वाह, ठेकेदारों और फर्मों को भुगतान नहीं कर पा रहे। -<strong> रफीक पठान, प्रवक्ता, राजस्थान सरपंच संघ</strong><br /><br />ग्राम पंचायतों को फंड देने की तय व्यवस्था के तहत हम संबंधित बैंक खातों में राशि रिलीज कर देते हैं। पैसे अटकने के मामले जब वीडिओ के माध्यम से हमारे पास आते हैं, तो हम संबंधित बैंकों से बातकर उनका निदान करवाते हैं। - <strong>एचआर पंवार, वित्तीय सलाहकार, पंचायतीराज विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Feb 2022 12:29:48 +0530</pubDate>
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                <title>राफेल घोटाले के मुद्दे पर केंद्र पर बरसे गौरव वल्लभ बोले भाजपा सर यंत्रों को कवरअप करने में जुटी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर।  कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने राफेल विमान घोटाले मैं केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर आरोप लगाते हुए 4 बड़े सवालों के जवाब मांगे हैं।प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए गौरव वल्लभ ने कहा कि मोदी सरकार का राफेल डील में भ्रष्टाचार, रिश्वत और मिलीभगत को दफनाने के लिए ऑपरेशन कवर अप फिर से उजागर हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/6193917f12727/article-2449"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/cong-pc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने राफेल विमान घोटाले मैं केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर आरोप लगाते हुए 4 बड़े सवालों के जवाब मांगे हैं।प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए गौरव वल्लभ ने कहा कि मोदी सरकार का राफेल डील में भ्रष्टाचार, रिश्वत और मिलीभगत को दफनाने के लिए ऑपरेशन कवर अप फिर से उजागर हो गया है। ऑपरेशन कवर अप में नित नए खुलासे से राफेल भ्रष्टाचार को दफनाने के लिए मोदी सरकार सीबीआई ईडी के बीच संदिग्ध सांठगांठ का पता चलता है। </p>
<p>4 अक्टूबर 2018 को भाजपा के दो पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और एक वरिष्ठ वकील ने राफेल सौदा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए निदेशक सीबीआई को शिकायत सौंपी।  11 अक्टूबर 2018 को मोरेश्वर सरकार ने अपने अटॉर्नी जनरल के माध्यम से राफेल सौदे से जुड़े कमीशन के कथित भुगतान के संबंध में सीबीआई को दस्तावेजों की आपूर्ति की थी। 23 अक्टूबर 2018 को पीएम मोदी की अगुवाई वाली एक समिति ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को मध्य रात्रि में तख्तापलट कर हटा दिया। </p>
<p>दिल्ली पुलिस के माध्यम से सीबीआई मुख्यालय पर छापा मारा और इसके नायक एम नागेश्वरराव को सीबीआई प्रमुख नियुक्त किया यह सीबीआई के माध्यम से राफेल भूत को दफनाने की एक और साजिश का हिस्सा था हमारा सवाल है कि मोदी सरकार और सीबीआई ने पिछले 36 महीनों से कमीशन और भ्रष्टाचार के सबूतों पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की। इस मामले को क्यों दफनाया गया और मोदी सरकार ने मध्य रात्रि तख्तापलट में सीबीआई प्रमुख को क्यों हटाया। राफेल घोटाला तथाकथित 60 से 80 करोड़ का कमीशन भुगतान नहीं है यह सबसे बड़ा रक्षा घोटाला है और केवल एक स्वतंत्र जांच ही घोटाले का खुलासा करने में सक्षम है। </p>
<p>फ्रांस की मीडिया के माध्यम से राफेल सऊदी में बिचौलिए सुशेन गुप्ता का पता लोगों को चला ईडी ने जब सुशेन गुप्ता के घर कार्यवाही की तो राफेल डील से जुड़े कई गोपनीय और अहम दस्तावेज गुप्ता के घर मिले जिसके बाद भाजपा सरकार ने आज तक कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई और ना ही जांच की। गुप्ता के घर हासिल हुए दस्तावेजों में राफेल कंपनी डेसोल्ड को लिखा एक पत्र भी मिला जिसमें गुप्ता ने राफेल डील में देश के पॉलिटिकल हाईकमान से मिलाने की बात कही थी यह जनता के सामने आना चाहिए कि वह पॉलिटिकल हाईकमान कौन है। भाजपा सरकार यह बताएं कि राफेल घोटाला मैं अपनी भूमिका की जांच के आदेश ना देकर सुशेन गुप्ता की रक्षा क्यों की गई केंद्र सरकार ने भारतीय वायु सेना से परामर्श किए बिना राफेल विमानों की संख्या को 126 से घटाकर 36 कैसे और क्यों कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Nov 2021 18:38:00 +0530</pubDate>
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