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                <title>बड़ा सवाल - कहां से हो रही आपूर्ति ? कोटा में रोजाना खप रहा 3 टन मावा और तीन लाख लीटर दूध ,विभाग कर रहा शुद्धता का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[सीएमएचओ बोले- 'बिक्री से लेकर निर्माण तक लगातार मॉनिटरिंग'।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-big-question--where-is-the-supply-coming-from--kota-consumes-3-tonnes-of-mawa--condensed-milk-solids--and-300-000-liters-of-milk-daily--the-department-claims-the-products-are-pure/article-163402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)43.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। महाराष्ट्र व गुजरात दोनों राज्यों में मिलावटी और नकली डेयरी उत्पादों (विशेषकर एनालॉग पनीर,बटर और चीज) के खिलाफ कड़ा प्रतिबंध और छापेमारी की कार्रवाई की गई है। दोनों राज्यों की सरकारों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर इन नान डेयरी प्रोडक्ट के निर्माण, भंडारण और परिवहन पर रोक लगा दी है। दोनों राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभागों ने विभिन्न डेयरियों और निर्माण इकाइयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर दूध, नकली पनीर,घी,और खतरनाक रसायन भारी मात्रा में जब्त किया है। महाराष्ट्र में तो मिलावटखोरों पर संगठित अपराध कानून मकोका जैसी सख्त धाराओं के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है।</p>
<p> इसी मामले को लेकर दैनिक नवज्योति ने कोटा शहर के मार्केट पर नजर दौड़ाई तो हालात यहां भी कमतर नजर नहीं आए। कोटा में भी कई प्लांट में सोया पनीर धडल्ले से बनाया जा रहा है । बावजूद इसके खाद्य सुरक्षा अधिकारी यह दावा करते नजर आए कि कोटा में कोई नकली सामग्री नहीं बिक रही है। कोटा शहर में जुलाई 2026 तक विभाग ने कुल 356 कार्यवाहियां की गईं । अकेले डेयरी प्रोडक्ट के 119 सैंपल लिए जिसमें से 26 फीसदी सैम्पल अमानक मिले। हालात यह है कि कोटा में सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन 3 से 5 हजार किलो (5 टन) मावा खपता है, वहीं त्यौहारी सीजन में यह मांग बढ़ जाती है। कोटा में लगभग 1900 से अधिक छोटी बड़ी निजी डेयरियां हैं। यह डेयरियां 1.5 लाख लीटर से अधिक दूध की आपूर्ति कर रही हैं। बड़ा सवाल यह है कि फिर अन्य प्रोडक्ट कहां से बन रहे हैं।</p>
<p><strong>कोटा-बूंदी सरस डेयरी शहर में बड़ा आपूर्ति कर्ता</strong><br />कोटा-बूंदी दुग्ध संघ (सरस डेयरी) प्लांट की क्षमता 1.5 लाख लीटर प्रतिदिन है। दूध आपूर्ति व बाय-प्रोडक्ट्स के रूप में प्रतिदिन 1 से 1.25 लाख लीटर दूध कोटा-बूंदी के शहरी बूथों पर सप्लाई होता है। शेष दूध से घी, बटर, लस्सी, छाछ, श्रीखंड, मिल्क पाउडर व 4 स्वादों में फ्लेवर्ड मिल्क तैयार किया जाता है।</p>
<p><strong>4 क्विंटल पनीर व मावा</strong><br />डेयरी प्रबंधन की और से बताया गया कि मावा बनाने के लिए प्लांट में 6 इकाइयां कार्यरत हैं। प्रतिदिन 400 से 500 किलो (4 से 5 क्विंटल) शुद्ध दुग्ध पनीर तैयार होता है। वही डेयरी चेयरमेंन चैनसिंह राठौर ने बताया कि प्लांट मे किसी रूप में सोया पनीर या कृत्रिम उत्पाद नहीं बनाए जाते है।</p>
<p><strong>बोराबास, रावतभाटा व गांधीसागर से मुख्य आपूर्ति</strong><br />कोटा मावा व्यापार संघ के अध्यक्ष भगवान मित्तल के अनुसार, कोटा संघ में 40 पंजीकृत दुकानदार हैं जो मावे का थोक व खुदरा व्यापार करते हैं। कोटा से मावे की आपूर्ति पूरे हाड़ौती अंचल में की जाती है। मुख्य रूप से मावा कोटा के ग्रामीण व समीपवर्ती क्षेत्रों जैसे बोराबास, रावतभाटा और गांधीसागर से आता है। ये मुख्यतः पशुपालक प्रधान क्षेत्र हैं जहां डेयरी कलेक्शन चेन नहीं होने के कारण मावे का निर्माण व्यापक स्तर पर होता है। मांग बढ़ने पर स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के अलावा बाहर से भी मावा मंगवाया जाता है।</p>
<p><strong>कोल्ड स्टोरेज संचालकों को सख्त निर्देश</strong><br />खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप अग्रवाल ने बताया कि मावा लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए वातानुकूलित कोल्ड स्टोरेज की आवश्यकता होती है। कोटा में वर्तमान में उपलब्ध दोनों कोल्ड स्टोरेज के संचालकों को सख्त हिदायत जारी की गई है कि वहां रखे जाने वाले प्रत्येक डेयरी प्रोडक्ट की पूरी जानकारी तुरंत विभाग को सूचित की जाए, ताकि शहर में कहीं से भी नकली या मिलावटी मावा प्रवेश न कर सके।<br /> <br /><strong>खाद्य विभाग का एक्शन</strong><br />कोटा में जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार एवं सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र नागर के पर्यवेक्षण में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों में संदीप अग्रवाल, अरुण सक्सेना, चंद्रवीर सिंह जादोन व मौजीलाल कुंभकार की टीम द्वारा लगातार निरीक्षण एवं सेंपलिंग की जा रही है। मिल्क एवं मिल्क प्रोडक्ट के कुल 119 सैंपल लिए गए। जिनमें से 26 प्रतिशत की रिर्पोर्ट फेल हुई है। हालांकि लैब टेस्ट में सेम्पल फेल होने के बाद विभाग ने अदालत में सम्बन्धित दुकानदारों के खिलाफ केस लगाया जिनमें अदालती फैसलाें के बाद जुर्माने की कार्यवाहियां की जा रही है।</p>
<p><strong>356 कार्यवाहियां की गईं</strong><br />-डेयरी प्रोडक्ट के नमूने लिए -119<br />-पास: 88 सैंपल<br />-फेल: 31 सैंपल<br />-निर्णय लंबित: 4 सैंपल<br />-2 महीनों में अदालत में 12 नए केस प्रस्तुत किए गए<br />-26 मुकदमों के निर्णयों में मिलावटखोरों पर कुल 14,25,000 (14.25 लाख रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना ठोका</p>
<p>मेरी दुकान मण्ड़ावर में है यहां की मावा मण्ड़ी से मावा ले जाते वर्षो हो गए कभी भी काेई शिकायत नहीं आई। कितने ही दुकानदारों से व्यापार कर चुका हुँ। क्वालिटी में मेरे ग्रहकों को कभी शिकायत का मौका नहीं मिला है।<br /><strong>-दिलीप, दुकानदार मण्ड़ावर झालावाड़</strong></p>
<p>साल भर कार्रवाई की जाती है। लगातार निरीक्षण एवं सेंपलिंग की जा रही है। हमारे चार अधिकारी लगातार नजर रखे हैं। हमारा प्रयास शहर में किसी प्रकार के मिलावटी पदार्थ बनने से लेकर बिक्री तक पर निगरानी रखी जा रही है।<br /><strong>-डा. नरेन्द्र नागर , सीएमएचओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 15:02:36 +0530</pubDate>
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