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                <title>यह दुर्लभ ग्रंथों का समंदर, रखवाली के लिए इंतजाम बूंद भर</title>
                                    <description><![CDATA[सदियों पुरानी विरासत को उचित संरक्षण की दरकार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-vast-ocean-of-rare-texts--yet-only-a-drop-of-resources-for-their-care/article-163411"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)70.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को अपने भीतर समेटे राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का कोटा केंद्र इन दिनों संसाधनों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। नयापुरा क्षेत्र के बृजविलास भवन में संचालित इस प्रतिष्ठान में करीब दस हजार हस्तलिखित एवं दुर्लभ ग्रंथों का अनमोल संग्रह मौजूद है, लेकिन इतनी बड़ी विरासत के संरक्षण, रखरखाव और शोधार्थियों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन नहीं हैं। ऐसे में सदियों पुरानी ज्ञान-संपदा के संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ रही है। राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का उद्देश्य हस्तलिखित ग्रंथों की खोज, सर्वेक्षण, संरक्षण, अप्रकाशित ग्रंथों का संपादन-प्रकाशन तथा शोधार्थियों को अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराना है। राज्य में इसकी कोटा सहित विभिन्न शाखाएं हैं और प्रतिष्ठान में सदियों पुरानी पाण्डुलिपियों का विशाल भंडार सुरक्षित है।</p>
<p><strong>लिपिक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे व्यवस्था</strong><br />इतने बड़े संग्रह की तुलना में कोटा केंद्र में कर्मचारियों की स्थिति बेहद कमजोर है। जानकारी के अनुसार वर्तमान में केवल एक लिपिक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे व्यवस्था चल रही है। कई पद पहले से खाली हैं और कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के साथ समस्या और गंभीर होती जा रही है। पूर्व में यहां पर एक वरिष्ठ अधिकारी, दो लिपिक, जिल्दसाज, चौकीदारी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद थे। पाण्डुलिपियों के संरक्षण में केवल उन्हें अलमारी में रखना पर्याप्त नहीं होता। पुराने कागज, भोजपत्र और ताड़पत्र को नमी, धूल, कीड़े, तापमान और अन्य पर्यावरणीय प्रभावों से बचाने के लिए विशेष परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। नियमित निरीक्षण, वैज्ञानिक संरक्षण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण और सुरक्षित भंडारण भी जरूरी है</p>
<p><strong>एक कमरे में सिमटा हजारों ग्रंथों का संसार</strong><br />कोटा केंद्र में विभिन्न विषयों से संबंधित दुर्लभ पाण्डुलिपियां और हस्तलिखित ग्रंथ सुरक्षित हैं। इनमें वेद, पुराण, उपनिषद, सूत्र, न्याय, योग, दर्शन, धर्मशास्त्र, कर्मकांड, इतिहास, ज्योतिष, आयुर्वेद, कामशास्त्र, सुभाषित, कोश, तंत्र-मंत्र, व्याकरण, संगीत, साहित्य तथा वास्तु जैसे विषयों की सामग्री शामिल है। इन ग्रंथों में कागज, कपड़े, भोजपत्र और ताड़पत्र पर लिखी गई पाण्डुलिपियां भी हैं। राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में सदियों से चली आ रही पाण्डुलिपि लेखन और संरक्षण की परंपरा ने इस संग्रह को अत्यंत समृद्ध बनाया है। शोध की दृष्टि से भी इन ग्रंथों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि इनमें तत्कालीन समाज, धर्म, चिकित्सा, ज्योतिष, साहित्य और जीवन-पद्धति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं।</p>
<p><strong>ताड़पत्र से भोजपत्र तक अनूठी विरासत मौजूद</strong><br />कोटा शाखा के संग्रह की विशेषता इसकी विविधता है। यहां ताड़पत्र पर लिखे ग्रंथों के साथ भोजपत्र पर लिखी पाण्डुलिपियां भी संरक्षित हैं। राजस्थान सरकार के हाड़ौती विरासत संबंधी दस्तावेज में भी कोटा के प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में ताड़पत्र पर लिखे 168 पत्रों के तेलुगू ग्रंथ और भोजपत्र पर लिखी दुर्गा सप्तशती की पाण्डुलिपि का उल्लेख मिलता है। यह संग्रह केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है। इसमें प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान की अनेक शाखाओं से संबंधित सामग्री उपलब्ध है। यही कारण है कि इतिहास, साहित्य, संस्कृति, धर्म, ज्योतिष और भारतीय ज्ञान पर शोध करने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए यह केंद्र महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p>यहां संग्रह में मौजूद सामग्री केवल संरक्षण के लिए नहीं, बल्कि शोध और प्रकाशन के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। अब इन पाण्डुलिपियों का व्यवस्थित डिजिटलीकरण और सूचीकरण करने की जरूरत है।<br /><strong>-रामकरण प्रभाती, पुराविद्</strong></p>
<p>दुर्लभ ग्रंथों के संरक्षण के लिए विभाग की ओर से पूरा प्रयास किया जाता है। सेवानिवृत्ति के बाद कई कर्मचारियों के पद रिक्त हो गए हैं। रिक्त पदों पर कर्मचारियों की तैनाती का मामला सरकार के स्तर का हैं।<br /><strong>-हेमेन्द्र कुमार, अधीक्षक, पुरातत्व एवं  संग्रहालय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 15:07:38 +0530</pubDate>
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