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                <title>birth anniversary - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>टीकाराम पालीवाल की जयंती पर दी श्रद्धांजलि : किसान हित में भूमि सुधारों की थी ऐतिहासिक पहल, उनके विकास के प्रति समर्पण प्रेरणादायक</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल की जयंती पर प्रदेश ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। विपक्षी नेताओं ने उनके भूमि सुधारों और किसान हितैषी कार्यों की सराहना की। पालीवाल जी का सादगीपूर्ण जीवन और सामाजिक न्याय के प्रति उनका समर्पण आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tribute-paid-to-tikaram-paliwal-on-his-birth-anniversary-land/article-151575"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tikaram.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल की जयंती पर प्रदेशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। इस अवसर पर विधानसभा में विपक्ष के नेता ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि पालीवाल जी ने किसानों के हित में भूमि सुधारों की ऐतिहासिक पहल की, जिससे समाज में समानता और न्याय की नींव मजबूत हुई।</p>
<p>उनका सादगीपूर्ण जीवन और प्रदेश के विकास के प्रति समर्पण आज भी प्रेरणादायक है। नेताओं ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हुए उन्हें कोटि-कोटि नमन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:08:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मायावती ने कांशीराम को अर्पित की श्रद्धांजलि: कहा बसपा आंदोलन से जुड़कर बहुजन समाज बने ईमानदार और मिशनरी अम्बेडकरवादी </title>
                                    <description><![CDATA[बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांशीराम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए बहुजन समाज से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने समर्थकों से मिशनरी अंबेडकरवादी बनने और वोट की ताकत से 'मास्टर चाबी' हासिल करने का आह्वान किया। मायावती ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति ही कांशीराम का असली सपना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mayawati-paid-tribute-to-kanshi-ram-and-said-that-by/article-146578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mayawati.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित देते हुए बहुजन समाज से अपील की है कि वे बसपा आंदोलन से जुड़कर ईमानदार और मिशनरी अम्बेडकरवादी बनें। उन्होने कहा कि बहुजन समाज अपने वोट की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल कर सकता है, जिससे संविधान में दिए गए अधिकारों को जमीन पर लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि यही कांशीराम का मिशन और उनके जीवन का संदेश भी है।</p>
<p>मायावती ने रविवार को एक्स पर जारी संदेश में कहा कि मान्यवर कांशीराम ने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होने कहा कि कांशीराम ने डॉ. आंबेडकर की सोच और आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए देशभर में बहुजन समाज को संगठित किया। उन्होंने जाति के आधार पर उपेक्षित और पिछड़े लोगों को एकजुट कर उन्हें सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने का काम किया। उनके नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी ने सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति के मिशन को आगे बढ़ाया।</p>
<p>बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांशीराम के ऐतिहासिक प्रयासों के कारण बहुजन समाज में राजनीतिक जागरूकता आई और समाज के लोगों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा मिली। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे कांशीराम के विचारों और मिशन को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 16:33:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रियंका गांधी ने दी कांशी राम की जयंती पर श्रद्धांजलि, सामाजिक न्याय के महारथी और दलितों एवं अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों की सशक्त आवाज के रूप में किया याद</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने बहुजन आंदोलन के प्रणेता कांशी राम को उनकी जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कांशी राम को दलितों और पिछड़ों की सशक्त आवाज़ बताते हुए कहा कि उनके विचारों ने समानता और संवैधानिक न्याय को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। कांशी राम का राजनीतिक सशक्तिकरण और सामाजिक परिवर्तन का संघर्ष पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/priyanka-gandhi-pays-tribute-to-kanshi-ram-on-his-birth/article-146557"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/priyanka-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने रविवार को बहुजन आंदोलन के नेता कांशी राम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सामाजिक न्याय के महारथी और दलितों एवं अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों की सशक्त आवाज के रूप में याद किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सुश्री गांधी ने कहा कि कांशी राम के जीवन और विचारों ने समानता और न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>उन्होंने लिखा, सामाजिक न्याय की विचारधारा के महापुरुष और दलितों, हाशिए पर पड़े लोगों और शोषितों की सशक्त आवाज श्री कांशी राम जी की जयंती पर हार्दिक श्रद्धांजलि। अपने विचारों और आंदोलनों के माध्यम से उन्होंने समानता एवं न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके विचार हम सभी को सदा प्रेरित करते रहेंगे।</p>
<p>कांशी राम का जन्म 1934 में पंजाब में हुआ था। स्वतंत्रता के बाद के भारत में दलित आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की और हाशिए पर पड़े समुदायों को संगठित करने का काम किया, साथ ही ऐतिहासिक रूप से वंचित समूहों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं सामाजिक सशक्तिकरण की वकालत की।</p>
<p>उन्होंने पिछड़े एवं अल्पसंख्यक समुदाय कर्मचारी संघ (बीएएमसीईएफ) और बाद में दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (डीएस-4) जैसे संगठनों की भी स्थापना की, जिसने दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के बीच एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन की नींव रखी।</p>
<p>कांशी राम के प्रयासों ने उत्तर भारत में दलित राजनीति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया और मायावती जैसी नेताओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जो बाद में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। सामाजिक न्याय एवं राजनीतिक सशक्तिकरण में उनके योगदान को याद करने के लिए पूरे देश में उनके समर्थकों और राजनीतिक नेताओं द्वारा उनकी जयंती मनाई जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 12:28:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अटल जयंती 2025: सीएम नीतीश और पुष्कर सिंह धामी ने दी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें नमन किया। पटना के पाटलिपुत्र पार्क में राजकीय समारोह आयोजित हुआ, जहाँ गणमान्य लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-nitish-and-pushkar-singh-dhami-paid-emotional-tribute-to/article-137154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/atal-bihari-vajpayee-jayanti-2025.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरूवार को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर आयोजित राजकीय जयंती समारोह में यहां पाटलिपुत्रा पार्क, स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>इस अवसर पर दोनों उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, विधायक संजीव चौरसिया, रत्नेश कुशवाहा, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत मिश्रा, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नन्द किशोर यादव, बिहार राज्य नागरिक परिषद् के महासचिव अरविंद कुमार, बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य शिवशंकर निषाद सहित कई गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी स्व. अटल बिहारी वाजपेयी  की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के कलाकारों द्वारा आरती-पूजन, बिहार गीत एवं देश भक्ति गीतों का गायन भी किया गया।</p>
<p>इसके साथ ही बता दें कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्व अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर अपने शिविर कार्यालय में उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए नमन किया। सीएम धामी ने कहा कि वाजपेयी जी कुशल प्रशासक, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदृष्टा नेता थे, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण को नई दिशा प्रदान की। उनका संपूर्ण जीवन सुशासन, संवेदनशीलता एवं सर्वसमावेशी विकास के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाकर लोकहित को सबसे उपर रखा। इसके आगे उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी के विचार आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:24:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सांसदों ने की स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित, ओम बिरला, मंत्री जे.पी. नड्डा और उपसभापति हरिवंश रहे मौजूद</title>
                                    <description><![CDATA[ संसद सदस्यों, पूर्व सदस्यों, लोक सभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह, राज्य सभा के महासचिव पी.सी. मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-mps-did-the-swatantravir-vinayak-damodar-savarkars-birth-anniversary/article-115647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(3)33.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा और  राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने आज संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित की। संसद सदस्यों, पूर्व सदस्यों, लोक सभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह, राज्य सभा के महासचिव पी.सी. मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। </p>
<p>स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर, जिन्हें वीर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 28 मई 1883 को हुआ था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रमुख व्यक्तित्व होने के साथ-साथ वे एक क्रांतिकारी, कवि, लेखक और दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे। वीर सावरकर ने 20वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ प्रतिरोध की भावना को प्रज्वलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने युवा भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए एकजुट करने के उद्देश्य से क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना की। उनका अदम्य साहस अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की कुख्यात सेलुलर जेल में उनके कारावास के दौरान सबसे अधिक परिलक्षित हुआ, जहाँ उन्होंने अडिग संकल्प के साथ अपार कष्ट सहे। वीर सावरकर सामाजिक सुधारों और आधुनिकीकरण के कट्टर समर्थक थे। उन्होंने तर्कवाद, सामाजिक बुराइयों को खत्म करने और एक प्रगतिशील भारतीय समाज के निर्माण का समर्थन किया। </p>
<p>वीर सावरकर की विरासत उनके लेखन, राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए उनके अथक प्रयास और एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत के लिए उनके दृष्टिकोण के माध्यम से आज भी हमें प्रेरणा देती है। उनका जीवन देशभक्ति और समाजिक सुधार का एक द्योतक है। संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में लगाए गए स्वातंत्रवीर विनायक दामोदर सावरकर के चित्र को चंद्रकला कुमार कदम ने तैयार किया था और 26 फरवरी, 2003 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा आधिकारिक  तौर पर इसका अनावरण किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 May 2025 17:10:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संत गाडगे महाराज  की 150वीं जयंती मनाने की तैयारी बैठक आयोजित, स्वेच्छा सफाई अभियान चलाने पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[सेन्ट्रल पार्क में संत गाडगे महाराज जी की 150वीं जयंती को धूमधाम से मनाने के लिए विचार गोष्ठी आयोजित की गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/preparation-meeting-to-celebrate-the-150th-birth-anniversary-of-sant/article-108527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(1)35.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सेन्ट्रल पार्क में संत गाडगे महाराज जी की 150वीं जयंती को धूमधाम से मनाने के लिए विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में समाज के बुद्धिजीवियों और समाज बंधुओं ने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। समन्वय समिति के अध्यक्ष रामजीलाल ने विशेष रूप से जयंती के अवसर पर स्वेच्छा सफाई अभियान चलाने पर बल दिया। वहीं, सीताराम नारनोलिया ने कार्यक्रम को राज्य स्तर पर भव्य रूप से आयोजित करने की सलाह दी। पूर्व अध्यक्ष मदनलाल खाचरियावास ने आगामी विचार गोष्ठी का आयोजन मानसरोवर में करने का प्रस्ताव रखा।</p>
<p>पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं खादी ग्रामोद्योग सदस्य भाई राजेन्द्र पंवार ने जयंती कार्यक्रम को भव्य रूप से आयोजित कर सरकार को सामूहिक शक्ति दिखाने पर जोर दिया। राजेश तंवर (सांभर वाले) ने महिला शक्ति और युवा वर्ग को कार्यक्रम से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।<br />गोष्ठी में संत गाडगे महाराज के समाज सुधार और स्वच्छता अभियान को प्रमुखता देने का निर्णय लिया गया। जयंती कार्यक्रम को लेकर समाज में उत्साह और जोश का माहौल देखा गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 18:54:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>Birth anniversary: राष्ट्र निर्माण में एपीजे अब्दुल कलाम का अहम योगदान</title>
                                    <description><![CDATA[अखबार बेचकर अपनी पढ़ाई पूरी की और शैक्षणिक उपलब्धियों के शिखर तक पहुंचे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/birth-anniversary-%E2%80%8B%E2%80%8Bimportant-contribution-of-apj-abdul-kalam-in-nation/article-93096"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/apj-abdul-kalam.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जिन्हें प्यार से मिसाइल मैन के रूप में जाना जाता है, केवल एक वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपनी सादगी, विनम्रता और दूरदर्शिता से लाखों लोगों के दिलों को छुआ। भारतीय अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में उनके योगदान ने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>डॉ. कलाम का जीवन पूरी तरह से विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समर्पित था। उनके नेतृत्व में भारत ने पहली बार पृथ्वी, अग्नि और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों का सफलतापूर्वक विकास किया। इतने बड़े वैज्ञानिक और राष्ट्रपति होते हुए भी, डॉ. कलाम अपने सादे जीवन के लिए प्रसिद्ध थे।</p>
<p>15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम् में जन्मे डॉ. अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम का जीवन संघर्ष, समर्पण और स्वप्नों को साकार करने की प्रेरणादायक कहानी है। डॉ. कलाम का जन्म एक मछुआरे परिवार में हुआ था, जहां साधन सीमित थे, लेकिन सपनों की कोई कमी नहीं थी। उनके पिता नाविक थे और माता गृहिणी। बचपन में उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, मगर शिक्षा के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें उन मुश्किलों से बाहर निकाला। उन्होंने अखबार बेचकर अपनी पढ़ाई पूरी की और शैक्षणिक उपलब्धियों के शिखर तक पहुंचे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Oct 2024 12:54:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Birth Anniversary: सब इंस्पेक्टर बनकर मुंबई थे राजकुमार, जानिए कैसे खुले बॉलीवुड के दरवाजे</title>
                                    <description><![CDATA[ महान अभिनेता राजकुमार 03 जुलाई 1996 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/birth-anniversary-rajkumar-went-to-mumbai-as-a-sub-inspector/article-92585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। संवाद अदायगी के बेताज बादशाह कुलभूषण पंडित उर्फ राजकुमार का नाम फिल्म जगत की आकाश गंगा में ऐसे धुव्रतारे की तरह है, जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया। राजकुमार का जन्म पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में 8 अक्तूबर 1926 को एक मध्यम वर्गीय कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजकुमार मुंबई के माहिम पुलिस स्टेशन में बतौर सब इंस्पेक्टर काम करने लगे।</p>
<p>राजकुमार मुंबई के जिस थाने में कार्यरत थे वहां अक्सर फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का आना-जाना लगा रहता था। एक बार पुलिस स्टेशन में फिल्म निर्माता कुछ जरूरी काम के लिए आए हुए थे और वह राजकुमार के बातचीत करने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए। और उन्होंने राजकुमार से अपनी फिल्म 'शाही बाजार' में अभिनेता के रूप में काम करने की पेशकश की। राजकुमार सिपाही की बात सुनकर पहले ही अभिनेता बनने का मन बना चुके थे। इसलिए उन्होंने तुरंत ही अपनी सब इंस्पेक्टर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और निर्माता की पेशकश स्वीकार कर ली।</p>
<p>शाही बाजार को बनने में काफी समय लग गया और राजकुमार को अपना जीवनयापन करना भी मुश्किल हो गया। इसलिए उन्होंने वर्ष 1952 मे प्रदर्शित फिल्म 'रंगीली' में एक छोटी सी भूमिका स्वीकार कर ली। यह फिल्म सिनेमा घरों में कब लगी और कब चली गयी। यह पता ही नहीं चला। इस बीच उनकी फिल्म 'शाही बाजार' भी प्रदर्शित हुई। जो बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। शाही बाजार की असफलता के बाद राजकुमार के तमाम रिश्तेदार यह कहने लगे कि तुम्हारा चेहरा फिल्म के लिये उपयुक्त नहीं है। और कुछ लोग कहने लगे कि तुम खलनायक बन सकते हो।</p>
<p>वर्ष 1952 से 1957 तक राजकुमार फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। 'रंगीली' के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली राजकुमार उसे स्वीकार करते चले गए। इस बीच उन्होंने 'अनमोल', 'सहारा', 'अवसर', 'घमंड', 'नीलमणि' और 'कृष्ण सुदामा' जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई। महबूब खान की वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म 'मदर इंडिया' में राजकुमार गांव के एक किसान की छोटी सी भूमिका में दिखाई दिए। हालांकि यह फिल्म पूरी तरह अभिनेत्री नर्गिस पर केन्द्रित थी। फिर भी वह अपने अभिनय की छाप छोड़ने में कामयाब रहे। इस फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति भी मिली और फिल्म की सफलता के बाद वह अभिनेता के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गए।</p>
<p>वर्ष 1959 में प्रदर्शित फिल्म 'पैगाम' में उनके सामने हिन्दी फिल्म जगत के अभिनय सम्राट दिलीप कुमार थे, लेकिन राज कुमार यहां भी अपनी सशक्त भूमिका के जरिये दर्शकों की वाहवाही लूटने में सफल रहे। इसके बाद 'दिल अपना' और 'प्रीत पराई', 'घराना', 'गोदान', 'दिल एक मंदिर' और 'दूज का चांद' जैसी फिल्मों मे मिली कामयाबी के जरिये वह दर्शकों के बीच अपने अभिनय की धाक जमाते हुए ऐसी स्थिति में पहुंच गए जहां वह अपनी भूमिकाएं स्वयं चुन सकते थे। वर्ष 1965 में प्रदर्शित फिल्म 'काजल' की जबरदस्त कामयाबी के बाद राजकुमार ने अभिनेता के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली। बी.आर .चोपड़ा की 1965 में प्रदर्शित फिल्म 'वक्त' में अपने लाजवाब अभिनय से वह एक बार फिर से दर्शक का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे। फिल्म में राजकुमार का बोला गया एक संवाद 'चिनाई सेठ, जिनके घर शीशे के बने होते हैं, वो दूसरों के घर पे पत्थर नहीं फेंका करते' या 'चिनाई सेठ ये छुरी बच्चों के खेलने की चीज नहीं, हाथ कट जाये तो खून निकल आता है' दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए।</p>
<p>'वक्त' की कामयाबी से राजकुमार शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 'हमराज', 'नीलकमल', 'मेरे हुजूर', 'हीर रांझा' और 'पाकीजा' में रूमानी भूमिकाएं स्वीकार कीं. जो उनके फिल्मी चरित्र से मेल नहीं खाती थीं। कमाल अमरोही की फिल्म 'पाकीजा' पूरी तरह से मीना कुमारी पर केन्द्रित फिल्म थी। इसके बावजूद राजकुमार ने अपने सशक्त अभिनय के दम पर दर्शकों की वाहवाही लूटी। पाकीजा में उनका एक संवाद 'आपके पांव देखे बहुत हसीन हैं इन्हें जमीन पर मत उतारियेगा, मैले हो जायेगें' इस कदर लोकप्रिय हुआ कि लोग गाहे बगाहे उनके संवाद की नकल करने लगे। वर्ष 1978 में प्रदर्शित फिल्म 'कर्मयोगी' में राज कुमार के अभिनय और विविधता के नए आयाम दर्शकों को देखने को मिले। इस फिल्म में उन्होंने दो अलग-अलग भूमिकाओं में अपने अभिनय की छाप छोड़ी।</p>
<p>अभिनय में एकरूपता से बचने और स्वयं को चरित्र अभिनेता के रूप में भी स्थापित करने के लिए उन्होंने स्वयं को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। इस क्रम में 1980 में प्रदर्शित फिल्म 'बुलंदी' में वह चरित्र भूमिका निभाने से भी नहीं हिचके। इस फिल्म में भी उन्होंने दर्शकों का मन मोहे रखा।वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म 'सौदागर' में राजकुमार के अभिनय के नए आयाम देखने को मिले। सुभाष घई की निर्मित इस फिल्म में राजकुमार 1959 में प्रदर्शित फिल्म 'पैगाम' के बाद दूसरी बार दिलीप कुमार के सामने थे और अभिनय की दुनिया के इन दोनों महारथियों का टकराव देखने लायक था। नब्बे के दशक में राजकुमार ने फिल्मों मे काम करना काफी कम कर दिया। इस दौरान उनकी 'तिरंगा', 'पुलिस' और 'मुजिरम' इंसानियत के देवता, बेताज बादशाह, जवाब, गॉड और गन जैसी फिल्में प्रदर्शित हुयीं।</p>
<p>नितांत अकेले रहने वाले राजकुमार ने शायद यह महसूस कर लिया था कि मौत उनके काफी करीब है। इसीलिए अपने पुत्र पुरू राजकुमार को उन्होंने अपने पास बुला लिया और कहा ''देखो मौत और जिंदगी इंसान का निजी मामला होता है। मेरी मौत के बारे में मेरे मित्र चेतन आनंद के अलावा और किसी को नहीं बताना। मेरा अंतिम संस्कार करने के बाद ही फिल्म उद्योग को सूचित करना।' अपने संजीदा अभिनय से लगभग चार दशक तक दर्शकों के दिल पर राज करने वाले महान अभिनेता राजकुमार 03 जुलाई 1996 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 16:18:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>श्रीमोती डूंगरी गणेश मंदिर में जन्मोत्सव 7 सितम्बर को</title>
                                    <description><![CDATA[9 दिन चलने वाले इस उत्सव का आगाज 31 अगस्त को पुष्य नक्षत्र पर भगवान गणेश के पंचामृत अभिषेक के साथ होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/birth-anniversary-at-shrimoti-dungri-ganesh-temple-on-7th-september/article-88974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/21.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रथम पूज्य श्री मोती डूंगरी गणेश मंदिर में इस साल गणेश चतुर्थी पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी, शनिवार 7 सितम्बर को मनाया जाएगा। 9 दिन चलने वाले इस उत्सव का आगाज 31 अगस्त को पुष्य नक्षत्र पर भगवान गणेश के पंचामृत अभिषेक के साथ होगा। इस दिन भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा का 251 किलोग्राम दूध, 25 किलोग्राम बूरा, 50 किलोग्राम दही, 11 किलोग्राम शहद और 11 किलोग्राम घी से अभिषेक होगा।</p>
<p>-31 अगस्त को पुष्य नक्षत्र से होगा उत्सव का आगाज<br />-4 सितम्बर को सजेगी मोदकों की झांकी<br />-6 सितम्बर को सिंजारा और मेहंदी पूजन सिंजारे पर चांदी के सिंहासन पर विराजेंगे, स्वर्ण मुकुट धारण करेंगे<br />-7 सितम्बर को जन्मोत्सव, 8 सितम्बर को भव्य शोभा यात्रा<br />-9 दिन चलने वाले इस उत्सव के लिए तैयारियां शुरू</p>
<p>इस मौके पर 501 महिलाएं कलश यात्रा लेकर मोती डूंगरी पहुंचेगी। इस उत्सव के अगले दिन यानी 1 सितम्बर की शाम 7 बजे मंदिर परिसर में ध्रुपद गायन कार्यक्रम होगा। मान्यता है कि भगवान श्रीगणेश को ध्रुपद गायन सबसे प्रिय है, जिसके कारण इस दिन भजन संध्या ध्रुपद गायन के साथ शुरू की जाएगी। वहीं अगले दो दिन यानी 2 और 3 सितम्बर की शाम को कत्थक नृत्य का कार्यक्रम होगा।</p>
<p><strong>4 सितम्बर को सजेगी मोदकों की भव्य झांकी</strong><br />4 सितम्बर बुधवार को मोदकों की भव्य झांकी मंदिर में भगवान श्री गणेश के समक्ष सजाई जाएगी। इस झांकी के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए सुबह 5 बजे से शुरू हो जाएंगे। इस दिन मंदिर परिसर में बाहर से आया प्रसाद नहीं चढ़ाया जाएगा। झांकी का मुख्य आकर्षण 251-251 किलोग्राम के दो विशाल मोदक होंगे। इन दोनों के अलावा 51-51 किलोग्राम के 5 मोदक, 21-21 किलोग्राम के 21 मोदक, 1.25-1.25 किलोग्राम के 1100 मोदक और हजारों की संख्या में अन्य छोटे मोदक रखे जाएंगे।<br />इस पूरी प्रसादी को बनाने में करीब 2500 किलोग्राम शुद्ध घी, 3 हजार किलोग्राम बेसन, 9 हजार किलोग्राम शक्कर और करीब 100 किलोग्राम सूखे मेवों का उपयोग किया जाएगा।</p>
<p><strong>6 सितम्बर को सिंजारा और मेहंदी पूजन</strong><br />जन्मोत्सव के इस कार्यक्रम में 6 सितम्बर को प्रथम पूज्य का सिंजारा मनाया जाएगा। मोतीडूंगरी गणेश जी मंदिर के महंत कैलाश शर्मा के सानिध्य में इस दिन गणेश जी को 3100 किलो मेहंदी धारण कराई जाएगी। ये मेहंदी पाली के सोजत से मंगवाई जाएगी। मेहंदी धारण के बाद इसे श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा। मेंहदी प्रसाद वितरण की व्यवस्था मंदिर परिसर में पांच स्थानों पर होगी। मेहंदी वितरण पूजा के बाद रात्रि साढ़े 7 बजे से किया जाएगा। महिला एवं कन्याओं के लिए डोरा एवं मेहंदी की व्यवस्था अलग पंक्ति में होगी। मोती सूत्र महिलाएं एवं पुरुष मंदिर में बांध सकते हैं। इसी दिन भक्ति संध्या व रात्रि जागरण का आयोजन भी होगा। शयन आरती 10 बजे होगी।</p>
<p><strong>विराजेंगे चांदी के सिंहासन पर, धारण करेंगे स्वर्ण मुकुट<br /></strong>6 सितंबर को भगवान गणेश जी महाराज का विशेष श्रृंगार होगा। इसमें भगवान को स्वर्ण मुकुट भी धारण करवाया जाएगा। यह मुकुट साल में सिर्फ एक बार गणेश चतुर्थी के दिन ही भगवान को धारण कराया जाता है। भगवान को विशेष पोशाक धारण करवाई जाएगी। चांदी के सिंहासन पर विराजमान होंगे। श्रृंगार के दौरान गणेश जी को नौलखा हार जिसमें मोती, सोना, पन्ना, माणक आदि के भाव स्वरूप दर्शाए गए हैं. धारण कराया जाएगा। यह नौलखा हार महंत परिवार ने तीन महीने में तैयार किया है।</p>
<p><strong>7 सितम्बर को जन्मोत्सव, 8 सितम्बर को भव्य शोभा यात्रा<br /></strong>इस उत्सव के मुख्य दिन यानी 7 सितम्बर को जन्मोत्सव के दिन मंदिर परिसर में दर्शन सुबह चार बजे मंगला आरती के साथ शुरू हो जाएंगे। इसके बाद विशेष पूजन सुबह 11.20 बजे, श्रृंगार आरती 11.30 बजे, भोग आरती दोपहर 2.15 बजे, संध्या आरती शाम 7 बजे और शयन आरती रात्री 11.30 बजे होगी।</p>
<p>8 सितंबर को भगवान श्रीगणेश शहर भ्रमण पर निकलेंगे। इस दौरान मोती डूंगरी गणेश मंदिर से भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी। ये शोभा यात्रा शाम को मोती डूंगरी मंदिर से निकलकर एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार, नाहरगढ़ रोड होते हुए गढ़ गणेश मंदिर तक पहुंचेगी।</p>
<p><strong>07 सितम्बर जन्मोत्सव पर आरती का समय</strong></p>
<ul>
<li>मंगला आरती-सुबह 4 बजे ।</li>
<li>श्रृंगार आरती-सुबह 11:30 बजे।</li>
<li>भोग आरती- दोपहर 2:15 बजे ।</li>
<li>भोग के लिए दोपहर 1.30 से 2:00 बजे तक पट मंगल रहेंगे।</li>
<li>संध्या आरती - शाम 7 बजे ।</li>
<li>शयन आरती - रात्रि 11.30 बजे</li>
</ul>
<p><strong>दर्शनार्थियों की सुरक्षा के लिए लगाए नए कैमरे<br /></strong>सुरक्षा (कैमरे) एवं दर्शन व्यवस्था गणेश मन्दिर प्रन्यास प्रबन्धन की ओर से दर्शनार्थियों की सुरक्षा के लिए 6 डी.एफ.एम.डी. एवं 6 एच.एस. एम.डी. की व्यवस्था मन्दिर द्वारा दर्शनार्थियों के लिए की गई है।<br />मन्दिर द्वारा लगाये गये 62 क्लोज सर्किट कैमरे से सभी गतिविधियों पर नज़र रखी जायेगी एवं 30 दिनों की रिकार्डिंग भी की जायेगी। सभी कैमरे नये लगाये गये हैं।</p>
<p><strong>500 स्वयंसेवक लाइनोें की व्यवस्था संभालेंगे<br /></strong>दर्शन के लिए 6 लाईनें मन्दिर में आने की व 6 लाईनें मन्दिर से वापिस जाने की व्यवस्था की गई है। निशक्तजनों और वृद्धजनों के लिए विशेष रिक्शों की व्यवस्था की जायेगी। 500 स्वयंसेवक व्यवस्था के लिए लगाये जायेगें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Aug 2024 18:49:18 +0530</pubDate>
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                <title>Birth Anniversary Shreedevi: दमदार अभिनय से दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध</title>
                                    <description><![CDATA[ श्रीदेवी ने हिंदी फिल्मों के अलावा तेलगु, तमिल और मलयालम फिल्मों में भी काम किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/birth-anniversary-shreedevi-mesmerized-the-audience-with-her-powerful-acting/article-87537"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(5)15.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड में श्रीदेवी का नाम एक ऐसी स्टार अभिनेत्री के रूप में लिया जाता है जिन्होंने अपने दमदार अभिनय और दिलकश अदाओं से दर्शकों के दिल में अपनी खास पहचान बनाई। श्रीदेवी का मूल नाम श्रीयम्मा यंगर था। उनका जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मीनमपटी में हुआ था। श्रीदेवी ने अपने सिने करियर की शुरूआत महज चार वर्ष की उम्र में एक तमिल फिल्म से की थी। वर्ष 1976 तक श्रीदेवी ने कई दक्षिण भारतीय फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम किया। बतौर अभिनेत्री उन्होंने अपने करियर की शुरूआत तमिल फिल्म 'मुंदरू मुदिची' से की। वर्ष 1977 में प्रदर्शित तमिल फिल्म '16 भयानिथनिले' की व्यावसायिक सफलता के बाद श्रीदेवी स्टार अभिनेत्री बन गई। हिंदी फिल्मों में बतौर अभिनेत्री श्रीदेवी ने अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1979 में प्रदर्शित फिल्म 'सोलहवां सावन' से की लेकिन फिल्म असफल होने के बाद श्रीदेवी हिंदी फिल्म उद्योग छोड़ दक्षिण भारतीय फिल्मों की ओर लौट गई।</p>
<p>वर्ष 1983 में श्रीदेवी ने एक बार फिर फिल्म 'हिम्मतवाला' के जरिये हिंदी फिल्मों की ओर अपना रूख किया। फिल्म की सफलता के बाद बतौर अभिनेत्री वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गई। वर्ष 1983 में श्रीदेवी के सिने करियर की एक और अहम फिल्म 'सदमा' प्रदर्शित हुई। फिल्म हालांकि टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई लेकिन सिने दर्शक आज भी ऐसा मानते हैं कि यह श्रीदेवी के कैरियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में एक है। वर्ष 1986 में प्रदर्शित फिल्म 'नगीना' श्रीदेवी के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार की जाती है। इस फिल्म में श्रीदवी ने इच्छाधारी नागिन का किरदार निभाया। इस फिल्म में उन पर फिल्माया गीत 'मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा' में उन्होंने जबरदस्त नृत्य शैली का परिचय दिया। वर्ष 1987 में प्रदर्शित फिल्म 'मिस्टर इंडिया' श्रीदेवी की सबसे कामयाब फिल्म साबित हुई।</p>
<p>वर्ष 1989 में श्रीदेवी के सिने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म 'चालबाज' प्रदर्शित हुई। इस फिल्म में श्रीदेवी ने दो जुड़वा बहनों की भूमिका निभाई। श्रीदेवी के लिए यह किरदार काफी चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन्होंने अपने सहज अभिनय से न सिर्फ इसे अमर बना दिया बल्कि आने वाली पीढ़ी की अभिनेत्रियों के लिए उदाहरण के रूप में पेश किया।</p>
<p>वर्ष 1989 में ही श्रीदेवी की एक और सुपरहिट फिल्म 'चांदनी' प्रदर्शित हुई। यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में श्रीदेवी ने चांदनी की भूमिका निभाई। इस फिल्म में श्रीदेवी ने अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय देते हुए न सिर्फ चुलबुला किरदार निभाया बल्कि कुछ दृश्यों में अपने संजीदा अभिनय से दर्शकों को भावुक कर दिया। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये श्रीदेवी सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित भी की गई।</p>
<p>वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म 'लम्हे' श्रीदेवी के सिने करियर की अहम फिल्मों में शुमार की जाती है। इस फिल्म में उन्हें एक बार फिर से निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा के साथ काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म में श्रीदेवी ने मां और बेटी के रूप में दोहरी भूमिका निभाई थी। फिल्म में चुलबुले अंदाज से श्रीदेवी ने दर्शकों का दिल जीत लिया।वर्ष 1992 में प्रदर्शित फिल्म 'खुदागवाह' में श्रीदेवी दोहरी भूमिका में दिखाई दी। यूं तो पूरी फिल्म अमिताभ बच्चन के इर्द गिर्द घूमती है लेकिन श्रीदेवी ने अपनी दोहरी भूमिका से दर्शकों के दिलों पर अपने अभिनय की छाप छोड़ दी। वर्ष 1996 में निर्माता-निर्देशक बोनी कपूर के साथ शादी करने के बाद श्रीदेवी ने फिल्मों में काम करना काफी हद तक कम कर दिया।</p>
<p>वर्ष 1997 में प्रदर्शित फिल्म 'जुदाई' बतौर अभिनेत्री श्रीदेवी के सिने करियर की अंतिम महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में उनके अभिनय का नया रूप देखने को मिला। फिल्म इंडस्ट्री के रूपहले पर्दे पर श्रीदेवी की जोड़ी सदाबहार अभिनेता जितेन्द्र के साथ भी खूब जमी। जितेन्द्र के अलावा श्रीदेवी की जोड़ी अभिनेता अनिल कपूर के साथ भी काफी पसंद की गई।श्रीदेवी ने अपने तीन दशक लंबे सिने करियर में लगभग 200 फिल्मों में काम किया। श्रीदेवी ने हिंदी फिल्मों के अलावा तेलगु, तमिल और मलयालम फिल्मों में भी काम किया है।</p>
<p>श्रीदेवी ने वर्ष 2012 में प्रदर्शित फिल्म 'इंग्लिश विंग्लश' से कमबैक किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। वर्ष 2018 में श्रीदेवी की फिल्म 'मॉम' प्रदर्शित हुई। फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार, फिल्म फेयर पुरस्कार समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। अपनी दिलकश अदाओं से लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाली श्रीदेवी 24 फरवरी 2018 को इस दुनिया को अलविदा कह गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Aug 2024 13:13:49 +0530</pubDate>
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                <title>Birth Anniversary: बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे किशेार कुमार</title>
                                    <description><![CDATA[महान अभिनेता एवं गायक के.एल.सहगल के गानों से प्रभावित किशोर कुमार उनकी ही तरह गायक बनना चाहते थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/birth-anniversary-kishar-kumar-was-rich-in-versatile-talent/article-86776"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड में किशोर कुमार को ऐसी शख्सियत के तौर पर याद किया जाता हैं जिन्होंने ने सिर्फ अपनी आवाज के जादू से बल्कि फिल्म निर्माण और निर्देशन से भी सिने प्रेमियो का भरपूर मनोरंजन किया।</p>
<p>मध्यप्रदेश के खंडवा में 04 अगस्त 1929 को मध्यवर्गीय बंगाली परिवार में अधिवक्ता कुंजी लाल गांगुली के घर जब सबसे छोटे बालक ने जन्म लिया तो कौन जानता था कि आगे चलकर यह बालक अपने देश और परिवार का नाम रौशन करेगा। भाई बहनों में सबसे छोटे नटखट आभास कुमार गांगुली उर्फ किशोर कुमार का रूझान बचपन से ही पिता के पेशे वकालत की तरफ न होकर संगीत की ओर था।</p>
<p>महान अभिनेता एवं गायक के.एल.सहगल के गानों से प्रभावित किशोर कुमार उनकी ही तरह गायक बनना चाहते थे। सहगल से मिलने की चाह लिये किशोर कुमार 18 वर्ष की उम्र में मुंबई पहुंचे लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पायी। उस समय तक उनके बड़े भाई अशोक कुमार बतौर अभिनेता अपनी पहचान बना चुके थे। अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर नायक के रूप मे अपनी पहचान बनाये लेकिन खुद किशोर कुमार को अदाकारी की बजाय पाश्र्व गायक बनने की चाह थी। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा हालांकि कभी किसी से नहीं ली थी। बॉलीवुड में अशोक कुमार की पहचान के कारण उन्हें बतौर अभिनेता काम मिल रहा था।</p>
<p>अपनी इच्छा के विपरीत किशोर कुमार ने अभिनय करना जारी रखा। जिन फिल्मों में वह बतौर कलाकार काम किया करते थे उन्हें उस फिल्म में गाने का भी मौका मिल जाया करता था। किशोर कुमार की आवाज सहगल से काफी हद तक मेल खाती थी। बतौर गायक सबसे पहले उन्हें वर्ष 1948 में बाम्बे टाकीज की फिल्म जिद्दी में सहगल के अंदाज मे हीं अभिनेता देवानंद के लिये मरने की दुआएं क्यूं मांगू गाने का मौका मिला।किशोर कुमार ने वर्ष 1951 में बतौर मुख्य अभिनेता फिल्म आन्दोलन से अपने करियर की शुरूआत की लेकिन इस फिल्म से दर्शकों के बीच वह अपनी पहचान नहीं बना सके। वर्ष 1953 में प्रदर्शित फिल्म लड़की बतौर अभिनेता उनके कैरियर की पहली हिट फिल्म थी। इसके बाद अभिनेता के रूप में भी किशोर कुमार ने अपनी फिल्मों के जरिये दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।</p>
<p>किशोर कुमार ने 1964 में फिल्म दूर गगन की छांव में के जरिये निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने के बाद हम दो डाकू, दूर का राही, बढ़ती का नाम दाढ़ी, शाबास डैडी, दूर वादियों में कहीं, चलती का नाम जिंदगी और ममता की छांव में जैसी कई फिल्मों का निर्देशन भी किया। निर्देशन के अलावा उन्होंने कई फिल्मों में संगीत भी दिया जिनमें झुमरू, दूर गगन की छांव में, दूर का राही, जमीन आसमान और ममता की छांव में जैसी फिल्में शामिल है। बतौर निर्माता किशोर कुमार ने दूर गगन की छांव में और दूर का राही जैसी फिल्में भी बनायीं।</p>
<p>किशोर कुमार को अपने कैरियर में वह दौर भी देखना पड़ा जब उन्हें फिल्मों में काम ही नहीं मिलता था। तब वह स्टेज पर कार्यक्रम पेश करके अपना जीवन यापन करने को मजबूर थे। बंबई में आयोजित एक ऐसे ही एक स्टेज कार्यक्रम के दौरान संगीतकार ओ.पी.नैयर ने जब उनका गाना सुना तो उन्होंने भावविह्लल होकर कहा महान प्रतिभाएं तो अक्सर जन्म लेती रहती हैं लेकिन किशोर कुमार जैसा पाश्र्वगायक हजार वर्ष में केवल एक ही बार जन्म लेता है। उनके इस कथन का उनके साथ बैठी पाश्र्वगायिका आशा भोंसले ने भी सर्मथन किया।</p>
<p>वर्ष 1969 में निर्माता निर्देशक शक्ति सामंत की फिल्म आराधना के जरिये किशोर कुमार गायकी के दुनिया के बेताज बादशाह बने लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के आरंभ के समय संगीतकार सचिन देव वर्मन चाहते थे कि सभी गाने किसी एक गायक से न गवाकर दो गायकों से गवाएं जाएं। बाद में सचिन देव वर्मन की बीमारी के कारण फिल्म आराधना में उनके पुत्र आर.डी.बर्मन ने संगीत दिया। इस फिल्म के लिए मेरे सपनों की रानी कब आयेगी तू और रूप तेरा मस्ताना गाना किशोर कुमार ने गाया जो बेहद पसंद किया गया। रूप तेरा मस्ताना गाने के लिये किशोर कुमार को बतौर गायक पहला फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। इसके साथ ही फिल्म आराधना के जरिये वह उन ऊंचाइयों पर पहुंच गये जिनके लिये वह सपनों के शहर मुंबई आये थे।</p>
<p>हरदिल अजीज कलाकार किशोर कुमार कई बार विवादों का भी शिकार हुए। सन 1975 में देश में लगाये गये आपातकाल के दौरान दिल्ली में एक सांस्कृतिक आयोजन में उन्हें गाने का न्यौता मिला। किशोर कुमार ने पारिश्रमिक मांगा तो आकाशवाणी और दूरदर्शन पर उनके गायन को प्रतिबंधित कर दिया गया। आपातकाल हटने के बाद पांच जनवरी 1977 को उनका पहला गाना बजा दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना जहां नहीं चैना वहां नहीं रहना..। किशोर कुमार को उनके गाये गीतों के लिये आठ बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। किशोर कुमार ने अपने सम्पूर्ण फिल्मी कैरियर मे 600 से भी अधिक हिन्दी फिल्मों के लिये अपना स्वर दिया। उन्होंने बंगला, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी और उड़िया फिल्मों में भी अपनी दिलकश आवाज के जरिये श्रोताओं को भाव विभोर किया।</p>
<p>किशोर कुमार ने कई अभिनेताओं को अपनी आवाज दी लेकिन कुछ मौकों पर मोहम्मद रफी ने उनके लिये गीत गाये थे। इन गीतों में हमें कोई गम है तुम्हें कोई गम है, चले हो कहां कर के जी बेकरार, मन बाबरा निस दिन जाये, अजब है दास्तां तेरी ये जिंदगी, अपनी आदत हैं सबको सलाम करना शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि मोहम्मद रफी, किशोर कुमार के लिये गीत गाने के वास्ते महज एक रुपया पारिश्रमिक लिया करते थे।</p>
<p>वर्ष 1987 में किशोर कुमार ने निर्णय लिया कि वह फिल्मों से संन्यास लेने के बाद वापस अपने गांव खंडवा लौट जायेंगे। वह अक्सर कहा करते थे कि दूध जलेबी खायेंगे, खंडवा में बस जायेंगे लेकिन उनका यह सपना अधूरा ही रह गया। उन्हें 13 अक्टूबर 1987 को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया को अलविदा कह गये। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Aug 2024 14:34:19 +0530</pubDate>
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                <title>Birth Anniversary: जन्म के समय पिता मीना को अनाथालय छोड़ आये थे</title>
                                    <description><![CDATA[अपने संजीदा अभिनय से दर्शकों के दिल पर राज करने वाली मीना कुमारी 31 मार्च 1972 को अलविदा कह गयी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/birth-anniversary-father-left-meena-at-the-orphanage-at-the/article-86534"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/ocean-blue-minimalist-holiday-beach-photo-collage-(630-x-400-px).png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अपने दमदार और संजीदा अभिनय से सिने प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी को उनके पिता अनाथालय छोड़ आए थे।</p>
<p>एक अगस्त 1932 का दिन था। मुंबई में एक क्लीनिक के बाहर मास्टर अली बक्श नाम के एक शख्स बड़ी बेसब्री से अपनी तीसरी औलाद के जन्म का इंतजार कर रहे थे। दो बेटियों के जन्म लेने के बाद वह इस बात की दुआ कर रहे थे कि अल्लाह इस बार बेटे का मुंह दिखा दे, तभी अंदर से बेटी होने की खबर आयी तो वह माथा पकड़ कर बैठ गये। मास्टर अली बख्श ने तय किया कि वह बच्ची को घर नहीं ले जायेंगे और वह बच्ची को अनाथालय छोड़ आये लेकिन बाद में उनकी पत्नी के आंसुओं ने बच्ची को अनाथालय से घर लाने के लिये उन्हें मजबूर कर दिया। बच्ची का चांद सा माथा देखकर उसकी मां ने उसका नाम रखा माहजबीं। बाद में यही माहजबीं फिल्म इंडस्ट्री में मीना कुमारी के नाम से मशहूर हुई।</p>
<p>वर्ष 1939 में बतौर बाल कलाकार मीना कुमारी को विजय भटृ की लेदरफेस में काम करने का मौका मिला। वर्ष 1952 मे मीना कुमारी को विजय भटृ के निर्देशन में ही बैजू बावरा मे काम करने का मौका मिला। फिल्म की सफलता के बाद मीना कुमारी बतौर अभिनेत्री फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गई। वर्ष 1952 मे मीना कुमारी ने फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही के साथ शादी कर ली।वर्ष 1962 मीना कुमारी के सिने कैरियर का अहम पड़ाव साबित हुआ। इस वर्ष उनकी आरती,मै चुप रहूंगी और साहिब बीबी और गुलाम जैसी फिल्में प्रदर्शित हुई। इसके साथ हीं इन फिल्मों के लिये वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिये नामित की गई। यह फिल्म फेयर के इतिहास में पहला ऐसा मौका था जहां एक अभिनेत्री को फिल्म फेयर के तीन नोमिनेशन मिले थे।</p>
<p>वर्ष 1964 में मीना कुमारी और कमाल अमरोही की विवाहित जिंदगी मे दरार आ गई। इसके बाद मीना कुमारी और कमाल अमरोही अलग अलग रहने लगे। कमाल अमरोही की फिल्म पाकीजा के निर्माण में लगभग चौदह वर्ष लग गए। कमाल अमरोही से अलग होने के बावजूद मीना कुमारी ने शूटिंग जारी रखी क्योंकि उनका मानना था कि पाकिजा जैसी फिल्मों में काम करने का मौका बार बार नहीं मिल पाता है। मीना कुमारी के करियर में उनकी जोड़ी अशोक कुमार के साथ काफी पसंद की गई। मीना कुमारी को उनके बेहतरीन अभिनय के लिये चार बार फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से नवाजा गया है। इनमें बैजू बावरा,परिणीता,साहिब बीबी और गुलाम और काजल शामिल है।</p>
<p>मीना कुमारी यदि अभिनेत्री नहीं होती तो शायर के रूप में अपनी पहचान बनाती। हिंदी फिल्मों के जाने माने गीतकार और शायर गुलजार से एक बार मीना कुमारी ने कहा था , ये जो एक्टिग मैं करती हूं उसमें एक कमी है, ये फन, ये आर्ट मुझसे नही जन्मा है ख्याल दूसरे का किरदार किसी का और निर्देशन किसी का। मेरे अंदर से जो जन्मा है, वह लिखती हूं जो मैं कहना चाहती हूं वह लिखती हूं। मीना कुमारी ने अपनी वसीयत में अपनी कविताएं छपवाने का जिम्मा गुलजार को दिया जिसे उन्होंने नाज.. उपनाम से छपवाया। सदा तन्हा रहने वाली मीना कुमारी ने अपनी रचित एक गजल के जरिये अपनी जिंदगी का नजरिया पेश किया है।</p>
<p>चांद तन्हा है आसमां तन्हा<br />दिल मिला है कहां कहां तन्हा<br />राह देखा करेगा सदियों तक<br />छोड़ जायेगें ये जहां तन्हा</p>
<p>अपने संजीदा अभिनय से दर्शकों के दिल पर राज करने वाली मीना कुमारी 31 मार्च 1972 को अलविदा कह गयी। मीना कुमारी के करियर की अन्य उल्लेखनीय फिल्में है.. आजाद, एक हीं रास्ता, यहूदी, दिल अपना और प्रीत पराई, कोहीनूर, दिल एक मंदिर, चित्रलेखा, फूल और पत्थर, बहूबेगम, शारदा, बंदिश, भींगी रात, जवाब, दुश्मन आदि।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Aug 2024 16:25:42 +0530</pubDate>
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