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                <title>theater - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>20 साल बाद थिएटर में वापसी करेंगे अभिषेक बनर्जी, दिल्ली में स्टेज नाटकों से किया था सफर शुरू, कहा- थिएटर ने मुझे बतौर कलाकार साँस लेना सिखाया </title>
                                    <description><![CDATA[जाने-माने अभिनेता अभिषेक बनर्जी 20 साल बाद थिएटर में वापसी करने जा रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/after-20-years-abhishek-banerjee-will-return-to-the-theater/article-127111"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)4.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। जाने-माने अभिनेता अभिषेक बनर्जी 20 साल बाद थिएटर में वापसी करने जा रहे हैं। अभिषेक बनर्जी 20 साल बाद अपनी पहली मोहब्बत थिएटर में वापसी करने जा रहे हैं। बॉलीवुड और ओटीटी पर अपनी पहचान बनाने से पहले, अभिषेक ने दिल्ली में स्टेज नाटकों से अपना सफर शुरू किया था। अब दो दशक बाद, वह अपने पुराने थिएटर साथियों के साथ मिलकर ‘तू क्या है’ नामक व्यंग्यात्मक कॉमेडी का एकल मंचन करेंगे, जो इस महीने मुंबई के मशहूर राष्ट्रीय प्रदर्शन कला केन्द्र (एनसीपीए) में होगा।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी ने कहा- थिएटर ने मुझे बतौर कलाकार साँस लेना सिखाया। यह मुझे लय, सच्चाई और बिना डर के असफल होना सिखाता है। पिछले 20 सालों से मैं किरदारों का पीछा कर रहा था, कहानियाँ सुना रहा था और सिनेमा में करियर बना रहा था, लेकिन कहीं न कहीं मंच हमेशा मुझे वापस बुला रहा था। ‘तू क्या है’ मेरे लिए बहुत व्यक्तिगत है क्योंकि यह मेरी जिंदगी का आईना है और शायद उन सबके लिए भी है, जिन्होंने कभी खुद से सवाल किया हो। यह उस देर रात की फुसफुसाहट के बारे में है ‘तू क्या है’ - जब रोशनी बुझ जाती है और तालियाँ थम जाती हैं। पुराने थिएटर दोस्तों के साथ मंच पर लौटना एक सर्कल पूरा करने जैसा है, या शायद एक नया शुरू करने जैसा। मेरे लिए यह सिर्फ एक नाटक नहीं है, यह घर वापसी है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Sep 2025 14:19:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हास्य नाटक बगिया बांछाराम का मंचन रवीन्द्र मंच पर </title>
                                    <description><![CDATA[वहीं दूसरी ओर धरती को व्यापार का साधन बनाने व सामन्तवादी सोच परिलक्षित होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/comedy-drama-bagiya-banchharam-staged-on-rabindra-manch/article-97745"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(10).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हास्य नाटक बगिया बांछाराम की का मंचन रवीन्द्र मंच पर हुआ। मनोज मित्र के लिखे इस नाटक का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी राम सहाय पारीक ने किया। नाटक एक गरीब वृद्ध किसान बांछाराम की कहानी है, जिसने धरती के प्रति श्रद्धा और प्रेम के चलते जिन्दगी भर मेहनत करके अपनी बगिया को सजा के रखा है। गांव का जमींदार इस बाग को हड़पना चाहता है।</p>
<p>उसने बांछा को बहला फुसला के बाग अपने नाम लिखवा लिया। शर्त के अनुसार बांछा के मरने के बाद बाग जमींदार का हो जाएगा। इधर बांछा का इकलौता वारिस उसका नाती भी बाग को बेचकर व्यापार करना चाहता है। अंतत: जीत सच की होती है। नाटक में जहां एक ओर किसान की धरती के प्रति श्रद्धा चित्रित की गई है। वहीं दूसरी ओर धरती को व्यापार का साधन बनाने व सामन्तवादी सोच परिलक्षित होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 10:39:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कार्यशाला में थिएटर के साथ गवरी के गुर सीख रहे युवा</title>
                                    <description><![CDATA[ जवाहर कला केन्द्र में 45 दिवसीय आधुनिक रंगमंच एवं गवरी लोक नाट्य शैली आधारित कार्यशाला जारी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/youth-learning-the-tricks-of-gawari-along-with-theater-in/article-91381"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर कला केन्द्र में 45 दिवसीय आधुनिक रंगमंच एवं गवरी लोक नाट्य शैली आधारित कार्यशाला जारी है। इस विशेष कार्यक्रम में 40 प्रतिभागी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, जो गवरी की अद्वितीय परंपराओं और रंगमंच की विविधताओं का अनुभव कर रहे हैं। यह कार्यशाला युवा कलाकारों को लोक नाट्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।</p>
<p>गवरी नृत्य, जो मेवाड़ की एक प्राचीन परंपरा है, अपने आप में न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह समाज में पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता फैलाने का भी माध्यम है। वरिष्ठ नाट्य निर्देशक साबिर खान ने बताया कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों को प्रारंभिक स्तर से लेकर उन्नत तकनीकों तक का प्रशिक्षण देने के लिए डिज़ाइन की गई है। वे फिजिकल स्ट्रेंथ, एकाग्रता, कहानी, अभिनय, और वॉइस मॉड्यूलेशन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कार्यशाला में प्रतिभागियों को गवरी के गायन और नृत्य की मूल बातें सिखाई जा रही हैं, साथ ही मास्क निर्माण, पात्रों की पहचान और वेशभूषा पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। </p>
<p>गवरी लोकनाट्य के प्रशिक्षक गणेश लाल भील ने बताया कि गवरी शिव और पार्वती की ऐतिहासिक कथाओं को प्रस्तुत करता है, जिसमें समाज में देवीत्व स्थापित करने का संदेश है। इस कार्यशाला का उद्देश्य न केवल प्रतिभागियों को कला का प्रशिक्षण देना है, बल्कि उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक भी करना है। वे हरे पेड़ों की रक्षा और जीवों की सेवा के महत्व को भी समझेंगे। यह कार्यशाला गवरी जैसी विरासत को पुनर्जीवित करने और आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देने में सहायक होगी।</p>
<p>गवरी के माध्यम से, प्रतिभागी संघर्षों और बलिदानों की कहानियों को साझा करेंगे, जो समाज की सेवा और एकता का प्रतीक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 18:38:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बेहतर कहानी से पेपर लीक जैसे मुद्दों पर नाटक बनने की जरूरत : बेदी</title>
                                    <description><![CDATA[बेदी रवींद्र मंच पर 17वें कोलाज आफ किलकारी चिल्ड्रन्स-टीनेजर्स थिएटर वर्कशॉप के समापन समारोह में रूबरू हो रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-is-a-need-to-make-drama-on-issues-like/article-80975"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/rvindra-manch.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बॉलीवुड एक्टर राकेश बेदी ने कहा कि ओटीटी को कहां-कहां सेंसर करेंगे आप? बडे पर्दें पर कई अटैक हुए और लांछन लगे। जब टेलीविजन आया था तो लोगों ने कहा था कि बडे पर्दो खत्म हो जाएंगे। मेरे लिए तो फिल्में, सीरियल और थिएटर सब समान हैं और मैं किसी एक का चयन नहीं कर सकता हूं। बेदी ने यह बात रविवार को रवींद्र मंच पर मीडिया से रूबरू होने के दौरान कही। इस दौरान उन्होंने कई समसामायिक मुद्दों पर बात करते हुए अपनी जर्नी शेयर की।</p>
<p><strong>ओटीटी टैलेंट दिखाने का जरिया</strong><br />बेदी ने थिएटर के बारे में कहा कि जो थिएटर करते हैं वे करते ही हैं। कुछ और आ जाने से उनको ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। बात कि जाए ओटीटी की तो वह भी एक चैनल है पैसा कमाने या टैलेंट दिखाने का। फिर भी यदि आप थिएटर के लिए पेशनेट हैं तो आप वो करोगे ही। </p>
<p><strong>थिएटर नहीं लेता ज्यादा समय</strong><br />बेदी ने थिएटर के बारे में कहा कि ये भ्रम है कि थिएटर ज्यादा समय मांगता है। ऐसा कुछ भी नहीं है। आप एक प्ले 15 से 20 दिन में तैयार कर लेते हैं और फिर सिर्फ  एक शाम आपसे थिएटर मांगता है जब आप उसे प्ले करते हैं। मैंने भी बहुत प्ले लिखे और डायरेक्ट भी किए हैं। देखा जाए तो थिएटर आपको लाइव रखता है। इससे आदमी के रिएक्शन शार्प रहते हैं। </p>
<p><strong>सामाजिक मुद्दों पर नाटक होने चाहिए</strong><br />पेपर लीक पर नाटक बनने की जरूरत के सवाल पर उन्होंने कहा कि हां ऐसे नाटक बनने की जरूरत है। नाटक समाज का दर्पण हैं और एक-दूसरे के प्रतिबिंब हैं। उन्होंने अपनी पहली चॉइस के बारे में कहा कि फिल्म, थिएटर और सीरीयल्स में से किसी एक को चुनने का मतलब है कि तीन बच्चों में से किसी एक को चुनना। मेरे लिए सब समान हैं और सबके लिए समय-समय पर काम करता हूं। मूवी, थिएटर अ‍ैर सीरियल सब अपनी-अपनी जगह पर हैं। कुछ हो सकते हैं जो सिनेमा और ओटीटी के बाद थिएटर को अवॉइड करते हो मगर मैं ऐसा नहीं करता।</p>
<p><strong>यहां किया पार्टिसिपेट</strong><br />बेदी रवींद्र मंच पर 17वें कोलाज आफ किलकारी चिल्ड्रन्स-टीनेजर्स थिएटर वर्कशॉप के समापन समारोह में रूबरू हो रहे थे। कला संस्कृति विभाग राजस्थान, ललित कला अकादमी, क्यूरियो चिल्ड्रंस थिएटर, रवींद्र मंच और हिमालयीय यूनिवर्सिटी उत्तराखंड की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने विभिन्न एक्टिविटी की। लगभग 90 बच्चों ने रवींद्र मंच पर आउटडोर और मुख्य मंच पर क्रिएटिव नाटय प्रस्तुतियां दीं।</p>
<p><strong>तीन नाटकों का मंचन </strong><br />समापन समारोह में तीन नाटकों का मंचन हुआ। पहला कॉमेडी ड्रामा भूतों की धमाचौकड़ी रहा। इस नाटक की कहानी एक छोटे से गांव के एक किसान के ईद-गिर्द घूमती है। दूसरे नाटक मेहनत का इत्र और तीसरे अक्ल का जादू नाटक में भी बच्चों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से लोगों की वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का संचालन प्रियदर्शनी मिश्रा और गगन मिश्रा ने किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 09:53:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>थियेटर से निकले कलाकारों ने बॉलीवुड में किया तहलका </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के थियेटर से निकले कलाकारों ने ना सिर्फ बॉलीवुड में, बल्कि हॉलीवुड में भी तहलका किया है। थियेटर में कला सिखने वाले इला अरुण, असरानी, पिंचू कपूर, वैभव माथुर, अनूप सोनी, नरेन्द्र गुप्ता सहित अनेक कलाकारों ने रंगमंच की महक को देशभर में पहुंचाया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/actors-of-theater-panic-in-bollywood/article-6793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/russia-ukraine-war-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के थियेटर से निकले कलाकारों ने ना सिर्फ बॉलीवुड में, बल्कि हॉलीवुड में भी तहलका किया है। थियेटर में कला सिखने वाले इला अरुण, असरानी, पिंचू कपूर, वैभव माथुर, अनूप सोनी, नरेन्द्र गुप्ता सहित अनेक कलाकारों ने रंगमंच की महक को देश में पहुंचाया है। सरकारी उदासीनता और मनोरंजन के साधनों में आए बदलाव ने थियेटर और उसके कलाकारों को बुरे दौर में पहुंचा दिया है। आमतौर पर फिल्मों में एक शॉर्ट को पूरा करने के लिए कई रिटेक होते हैं। सिने अभिनेता कोई डायलॉग भूल जाए, तो पीछे से प्राम्पटिंग होती है, लेकिन थियेटर के कलाकार को अपना पूरा संवाद नहीं, तो दर्शक उसे उसी समय गरियाते हैं। आजादी से पहले गांव में नाटक मण्डलियां होती थी, उनके खाने-पीने की चिंता समाज करता था।</p>
<p>उस दौर में नाटक मण्डलियां ही मनोरंजन का साधन थी, लेकिन टीवी के आने से बदलाव आया और इंटरनेट की दस्तक ने तो नाटककारों को मुफलिसी के मुहाने पर पहुंचा दिया। हालात इतने बदहाल हैं कि रवीन्द्र मंच के कलाकारों को तो लाइट नहीं होने से मोबाइल की लाइट में मेकअप करने को मजबूर होना पड़ता है, जबकि चन्द साल पहले ही रवीन्द्र मंच के रिनोवेशन पर सरकार ने 14 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। राज्य सरकार ने रंगमंच और कलाकारों के विकास के लिए संगीत नाटक अकादमी और कला संस्कृति विभाग भी बनाया, लेकिन वह भी लालफिताशाही के जाल में उलझी हुई है।</p>
<p><strong>स्वर्णिम इतिहास रहा थियेटर का</strong><br />प्रदेश में रंगमंच का स्वर्णिम इतिहास रहा है। आजादी से पहले ही राजा रामसिंह ने रामप्रकाश थियेटर की स्थापना कर रंगमंच को नए आयाम दिए थे। बाद में मिर्जा इस्माइल ने इसे बंद कर सिनेमा हॉल में तब्दील कर दिया, लेकिन बाद की सरकारों ने थियेटर के विकास के लिए रवीन्द्र मंच और जवाहर कला केन्द्र की स्थापना की। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sun, 27 Mar 2022 11:36:26 +0530</pubDate>
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                <title>रंगमस्ताने के थिएटर स्पेस पर पहुंचें अभिनेता प्रतीक गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[ अभिनेता प्रतीक गांधी रंगकर्मी अभिषेक मुद्गल के ट्वीट से प्रभावित होकर  रंगमस्ताने के थिएटर स्पेस पर पहुंचें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%8F%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80/article-2469"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/23.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।इन दिनों अभिनेत्री तापसी पन्नू और स्कैम 1992 फेम प्रतीक गांधी जयपुर में अपनी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। और दिसंबर  तक जयपुर के अलग-अलग लोकेशंस पर शूट करेंगे। जयपुर के युवा रंगकर्मी अभिषेक मुद्गल ने ट्विट कर प्रतीक गांधी को अपने रंगमंच स्पेस पर आंमत्रित किया ।</p>
<p><br />चूंकि प्रतीक गांधी खुद थिएटर के एक कलाकार है और रंगमंच प्रेमी हैं इसी वजह से ट्विट पढ़ते ही उन्होंने अभिषेक मुद्गल को जवाब दिया एवं वे उसी दिन जयपुर में स्थित रंगमस्ताने थिएटर ग्रुप के स्पेस पर विजिट करने पहुंचें। वहां उन्होंने पूरे स्पेस को देखा और राजस्थान के प्रसिद्ध रंगकर्मी  सरताज नारायण माथुर  से आशीर्वाद लिया। अभिनेता ने अभिषेक मुद्गल निर्देशित नाटक रश्मिरथी भी देखा और उस पर ढेरों बात की उसमें उन्हें क्या अच्छा लगा और क्या बदलाव किए जा सकते है, बताया। इसके बाद अभिनेता ने अपने थिएटर से जुड़े किस्सों को कलाकारों के साथ साझां किया। साथ ही कलाकारों के प्रश्नों का भी जवाब दिया। रंगमस्ताने के निदेशक अभिषेक मुद्गल ने उन्हें उनके रंगमंच के समय का एक न्यूज कवरेज देकर सम्मानित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Nov 2021 14:56:50 +0530</pubDate>
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