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                <title>बदहाली की मार, बिना भवन-संसाधन एक (कंपाउंडर) के भरोसे पशु चिकित्सालय </title>
                                    <description><![CDATA[जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा चिकित्स्थासालय,मवेशियों के उपचार हेतु पशुपालक परेशान ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-scourge-of-disrepair--without-a-building-or-resources--the-veterinary-hospital-is-dependent-on-a-single-compounder/article-143155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/kkkkkkota.jpg" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के देईखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय बदहाली का दंश झेल रहा है। स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी अस्पताल को न स्थायी भवन मिल पाया है और न ही पर्याप्त स्टाफ व संसाधन उपलब्ध हो सके हैं। वर्तमान में पूरा चिकित्सालय केवल एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) के भरोसे संचालित हो रहा है। अस्पताल अस्थायी रूप से जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा है, जबकि इससे क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार नए भवन निर्माण के लिए कम से कम 100़100 फीट भूमि का पट्टा जारी होना आवश्यक है, लेकिन स्थानीय पंचायत प्रशासन द्वारा पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है। इसके चलते अस्पताल पूर्व में मर्ज किए जा चुके राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में संचालित करना पड़ रहा है।</p>
<p>देईखेड़ा पशु चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक, एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) तथा एक पशु परिचर (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल एक पशुधन निरीक्षक के भरोसे व्यवस्थाएं चल रही हैं। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि स्थायी भवन, उपकरण और पशु चिकित्सक के अभाव में मवेशियों के उपचार में परेशानी आ रही है। गंभीर बीमार पशुओं को सर्जरी अथवा विशेष उपचार के लिए दूरस्थ केंद्रों तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन और पशुपालन विभाग से शीघ्र भूमि आवंटन व रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के साथ बीमार मवेशियों का हर सम्भव उपचार किया जा रहा है। भूमि आवंटन के लिये पंचायत को लिखा जा चुका है। पंचायत ने भवन के स्थानांतरित करने के लिये मौखिक बोला गया है। समस्त स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। <br /><strong>-ओमप्रकाश नागर,  पशुधन निरीक्षक, देईखेड़ा। </strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय के लिए भूमि आवंटन के लिए प्रस्ताव ले रखे है। जल्द ही भूमि चिहिन्त कर आवंटन किया जाएगा। <br /><strong>- राहुल पारीक, ग्राम विकास अधिकारी, देईखेड़ा। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 15:00:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहर के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में उपस्थिति कम, एक केंद्र मिला बंद </title>
                                    <description><![CDATA[विभिन्न केंद्रों पर किए गए निरीक्षण में कई अव्यवस्थाएँ सामने आईं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/low-attendance-at-several-anganwadi-centers-in-the-city--with-one-center-found-closed/article-134666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य सुधार के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन कोटा शहर के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति इन दावों के विपरीत दिखाई दी। बुधवार को विभिन्न केंद्रों पर किए गए निरीक्षण में कई कमियां और अव्यवस्थाएँ सामने आईं। वहीं केंद्रों पर बच्चों के खेलने की सामग्री कुछ जगहों पर गोदरेज में रखी हुई है तो कुछ में अलमारी में रखी हुई।</p>
<p><strong>दुर्गा बस्ती स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय केंद्र : एक ही कमरे में पूरी व्यवस्था</strong><br />बुधवार सुबह करीब 11:40 बजे दुर्गा बस्ती में स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय केंद्र का स्कैन किया गया। यह केंद्र केवल एक कमरे में संचालित हो रहा है। केंद्र में 7 पंजीकृत बच्चों में से मौके पर सिर्फ 1 बच्चा ही मौजूद था। जब रिपोर्टर ने बाकी बच्चों के बारे में पूछा तो कार्यकर्ता सायरा मंसूरी और सहायिका जयंती राठौर ने बताया कि सर्दी के कारण बच्चे कम आ रहे हैं। दोनों ने यह भी जानकारी दी कि सुपरवाइजर किसी मीटिंग में गई हुई हैं।इस केंद्र में बच्चों के खेलने की सामग्री कमरे में बनी अलमारियों और टांड पर रखी हुई मिली। वहीं, उसी एक कमरे में बच्चों के लिए दूध गर्म करने के साथ-साथ दलिया और अन्य खाद्य सामग्री भी तैयार की जाती हैं, जिससे साफ-सफाई और जगह की कमी जैसी समस्याएँ साफ नजर आती हैं।</p>
<p><strong>सिंधी कॉलोनी द्वितीय केंद्र: व्यवस्थित लेकिन उपस्थिति फिर भी कम</strong><br />सरकारी स्कूल में संचालित सिंधी कॉलोनी द्वितीय आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण बुधवार दोपहर 12 बजे किया गया। यहां भवन की दीवारों पर ज्ञानवर्धक पेंटिंग बनी हुई थीं, जो बच्चों के लिए शिक्षाप्रद वातावरण बनाती हैं।केंद्र में 10 पंजीकृत बच्चों में से 7 बच्चे ही उपस्थित थे। कार्यकर्ता सीमा कुमारी ने बताया कि सोमवार से शनिवार तक बच्चों को 10 ग्राम दूध और 5 ग्राम चीनी गर्म करके दी जाती है। इसके अलावा सरकार द्वारा निर्धारित मेन्यू चार्ट के अनुसार बच्चों को खिचड़ी, दलिया, उपमा सहित अन्य पोषक आहार भी दिया जाता है।</p>
<p><strong>साजीहेड़ा केंद: निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद मिला</strong><br />साजीहेड़ा में एक निजी स्कूल के पास संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर जब संवाददाता बुधवार दोपहर 12:30 बजे पहुंचे, तो केंद्र बिल्कुल खाली और बंद मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि केंद्र पर उस समय कोई मौजूद नहीं था। मकान मालिक व अन्य ने जानकारी दी कि सहायिका कुछ देर के लिए केंद्र खोलकर आई थी और थोड़ी देर बाद ही चली गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र नियमित समय पर संचालित नहीं हो रहा है।</p>
<p>दुर्गा बस्ती स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय की सुपरवाईजर ट्रेनिंग में हैं। साथ हीआंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं की डयूटी एसआईआर में लगी हुई। जिसकी वजह से कुछ व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। और अन्य समस्याओं को दिखावाता हूं।<br /><strong>- आलोक शर्मा, सीडीपीओं कोटा शहर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 14:40:52 +0530</pubDate>
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                <title>सिंगल यूज प्लास्टिक बैन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में जनरेट होने वाले 1100 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे पर करीब 12 साल बाद एक बार फिर से रोक लगाने की मुहिम शुरू हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-single-use-plastic-ban-in-state/article-13340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/465465465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जनरेट होने वाले 1100 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे पर करीब 12 साल बाद एक बार फिर से रोक लगाने की मुहिम शुरू हुई है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के बाद इस मुहिम के तहत शहरों क्षेत्रों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने की मुख्य जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को दी गई है। इसके लिए सभी निकायों को स्वायत्त शासन विभाग ने अन्य विभागों के कॉर्डिनेशन के साथ इस वेस्ट को रोकने के निर्देश दिए है। हालांकि राज्य में 2010 में भी प्लास्टिक को बैन किया गया था। इसके लिए प्लास्टिक कैरी बैग का इस्तेमाल करने वालों का चालान कर जुर्माना वसूलने और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, लेकिन फिर से उपयोग होने लगा।</p>
<p><strong>इन पर लगी रोक</strong><br />गुब्बारों के लिए प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, थर्मोकोल, प्लास्टिक की प्लेट, कप, गिलास, कटलरी, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, मिठाई के डिब्बों को रैप या पैक करने वाली फिल्म, सिगरेट के पैकेट और 100 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक या पीवीसी बैनर।</p>
<p><strong>जुर्माना और जेल या दोनों होगी</strong><br />धारा 15 के तहत जुर्माना या जेल या दोनों की सजा हो सकती है। धारा 15 के तहत 7 साल तक की कैद और 1 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।</p>
<p><strong>कितना खतरनाक है प्लास्टिक</strong><br />पर्यावरण में जहरीले रसायन छोड़ते है, बारिश के पानी को भूमि के नीचे जाने से रोकता है, जिससे ग्राउंड वॉटर लेवल में कमी आती है।</p>
<p><strong>हर दिन निकलता है 26 हजार टन प्लास्टिक कचरा</strong> <br />केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक सर्वे बताता है कि 60 फीसदी को ही इकट्ठा किया जाता है, बाकी कचरा नदी-नालों में मिल जाता है।</p>
<p><strong>जयपुर में 280 एमटी प्लास्टिक वेस्ट</strong><br />एलएसजी के अनुसार प्रदेश में हर दिन जनरेट होने वाले कचरे में 20 प्रतिशत प्लास्टिक वेस्ट शामिल हैं।</p>
<p><strong>शहर का कुल वेस्ट</strong><br />प्लास्टिक वेस्ट 280 मीट्रिक टन है। 300 मीट्रिक टन के लिए आरडीएफ और 300-300 मीट्रिक टन के एमआरएफ  का टेंडर लगा रखा है। इसके अलावा 700 मीट्रिक टन कचरा वेस्ट टू एनर्जी में इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>
<p><strong>क्या हैं सिंगल यूज प्लास्टिक</strong><br />40 माइक्रो मीटर या उससे कम स्तर के प्लास्टिक को सिंगल यूज प्लास्टिक में शामिल किया गया है। अर्थात प्लास्टिक से बनी वह चीजें जो एक बार ही उपयोग के बाद फेंक दी जाती हैं। इनमें पॉलीथिन, कैरीबैग, प्लास्टिक कप, प्लास्टिक प्लेट और पानी की बोतल आदि है।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />निकायों ने सिंगल यूज प्लास्टिक को बंद करने के लिए काफी समय से जागरूकता अभियान चला रही थी। इसके लिए व्यापारियों से भी समझाइश की गई है। प्रतिबंध के बाद भी इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- डॉ. जोगाराम, सचिव एलएसजी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jul 2022 10:31:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इमरजेंसी विभागों में महिला डॉक्टरों की रुचि कम, गायनी और ऐनिस्थीसिया को देती हैं तरजीह</title>
                                    <description><![CDATA[ऑर्थोपेडिक्स, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी में एक भी महिला डॉक्टर नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/women-doctors-are-less-interested-in-emergency-departments--give-preference-to-gynecology-and-anesthesia--maximum-in-gynecology-department-of-sms-medical-college--not-a-single-female-doctor-in-orthopedics--nephrology--urology--endocrinology/article-4813"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/m.javed.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिकित्सा के क्षेत्र में भले ही महिलाओं की रूचि पहले से ज्यादा बढ़ गई हो, लेकिन अब भी अधिकांश मेडिकल स्टूडेंट्स इमरजेंसी वाले विभागों में सर्विस देने से कतराती हैं। यही कारण है कि ऑर्थोपैडिक्स, नेफ्रोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी जैसे विभागों में महिला मेडिकल स्टूडेंट्स करियर नहीं बनाती और न ही पीजी में स्पेशलाइजेशन करती है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज में मौजूद डॉक्टर्स और टीचिंग फैकल्टी की बात करें तो गायनोकोलॉजी विभाग में सबसे ज्यादा महिला डॉक्टर्स हैं, क्योंकि ये पूरा मामला महिलाओं के इलाज से जुड़ा है। इस सेक्शन में कुल फैकल्टी की 95 फीसदी महिला डॉक्टर्स हैं। वहीं दूसरे नंबर पर ऐनिस्थीसिया डिपार्टमेंट आता है जहां 40 के करीब टीचिंग और नॉन टीचिंग फैकल्टी है। इनके अलावा जनरल मेडिसन, जनरल सर्जरी, पीडियाट्रिक, पैथोलॉजी, एनाटॉमी, रेडियालॉजी में महिलाओं की ज्यादा दिलचस्पी देखी गई है।<br /><br /><strong>35 साल में केवल 2 ने की पीजी</strong><br />एसएमएस मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपैडिक्स डिपार्टमेंट की रिपोर्ट देखे तो पिछले 35 साल में यहां केवल 2 ही महिला स्टूडेंट्स ने अब तक पीजी की है। इससे पहले डॉ. पूर्णिमा पाटनी ऐसी महिला डॉक्टर थी, जिन्होंने ऑर्थो यानी अस्थि रोग विभाग में स्पेशलाइजेशन किया। ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. डीएस मीणा की मानें तो करीब 4 साल पहले पंजाब से आई एक महिला स्टूडेंट ने यहां से पीजी की और वापस चली गई। वर्तमान में हरियाणा से आई एक एमबीबीएस स्टूडेंट ऑर्थो में पीजी कर रही है। <br /><br /><strong>इसलिए कम आती हैं इमरजेंसी डिपार्टमेंट में महिलाएं</strong><br />एसएमएस मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर की मानें तो इसके पीछे कारण इमरजेंसी सर्विस में 24 घंटे ड्यूटी के लिए अलर्ट रहना है। ऑर्थो में ज्यादातर मामले इमरजेंसी ट्रोमा के आते हैं, जिसमें कई बार डॉक्टर्स को देर रात या अलसुबह सर्जरी करनी पड़ती है। इसके साथ ही इस विभाग में प्लास्टर बांधने, हड्डी जोड़ने जैसे कामों में शारीरिक श्रम भी ज्यादा लगता है। वहीं पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण भी महिलाएं इमरजेंसी सेवाओं में आने से बचती है।<br /><br />इन डिपार्टमेंट में इतनी महिलाएं<br />एसएमएस मेडिकल कॉलेज से लगते हॉस्पिटल में सर्विस दे रही महिला डॉक्टर्स में सबसे ज्यादा गायनोकोलॉजिस्ट हैं जो जनाना, सांगानेरी गेट महिला, गणगौरी और एसएमएस हॉस्पिटल में सेवाएं दे रही हैं। इनकी संख्या 80 से ज्यादा है। जबकि दूसरा नंबर ऐनिस्थीसिया डिपार्टमेंट का आता है जहां 40 से ज्यादा महिला डॉक्टर्स है। वहीं तीसरा नंबर माइक्रोबायोलॉजी का है, जहां 25 से ज्यादा महिला डॉक्टर्स है।<br /><br />एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रमुख डिपार्टमेंट्स में महिला डॉक्टरों की स्थिति<br />डिपार्टमेंट    संख्या<br />मेडिकल ऑन्कोलॉजी    3<br />कार्डियोलॉजी    1<br />कार्डियक सर्जरी    2<br />डेंटिस्ट    1<br />गेस्ट्रॉलोजी    1<br />जनरल सर्जरी    8<br />न्यूरोलॉजी    1<br />न्यूरोसर्जरी    0<br />नेफ्रोलोजी    0<br />जनरल मेडिसिन    7<br />पीडियाट्रिक्स    9<br />स्किन    2<br />ऑप्थेमोलॉजी    7<br />यूरोलॉजी    0<br />एनाटोमी    14<br />एंडोक्राइनोलोजी    0<br />प्लास्टिक सर्जरी    1<br />रेडियोडाइगनोसिस    13 <br />ईएनटी    3<br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Feb 2022 13:00:12 +0530</pubDate>
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                <title>9488 नए रोगी, तीन की मौत, एक ही दिन में 33% मरीज व 47.45% संक्रमण बढ़ा, जयपुर हुआ कोरोना सिटी : पहली लहर के पीक पर प्रदेश में 3314 मरीज थे, अकेले जयपुर में 3659 आए</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश की संक्रमण दर 13.86 फीसदी हुई, सीएम ऑफिस में भी 43 कमी-अधिकारी संक्रमित मिले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/9488-%E0%A4%A8%E0%A4%8F-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80--%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4--%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-33--%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%B5-47-45--%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%A3-%E0%A4%AC%E0%A5%9D%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%80---%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-3314-%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%A5%E0%A5%87--%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-3659-%E0%A4%86%E0%A4%8F/article-3968"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/corona7.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में कोरोना की रफ्तार अब और तेज हो गई है। एक दिन में बुधवार को 9,488 नए रोगी आए हैं। वहीं जयपुर में दो और सीकर में एक व्यक्ति की मौत कोरोना से हुई। बुधवार को एक ही दिन में कोरोना के मरीजों में 33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को 6,366 रोगी ही आए थे। वहीं संक्रमण भी एक ही दिन में 47.45 फीसदी बढ़ा है। बीते दिन जहां 8.67 फीसदी संक्रमण दर थीं, वहीं यह अब 13.86 फीसदी जा पहुंची है यानि हर सौ जांचों में प्रदेश में 23 लोग संक्रमित निकल रहे हैं। जयपुर में और भी बुरे हालात हैं। प्रदेश में पहली लहर में 24 नवम्बर 2020 को  3314 मरीज पर पीक था, उससे भी ज्यादा 3659 मरीज तो जयपुर में एक ही दिन में बुधवार को आ गए हैं। जयपुर में चौबीस घंटे में ही मरीजों की संख्या 1493 बढ़ी है। वहीं संक्रमण दर 14.45 से 47.33 फीसदी बढ़कर 23.02 फीसदी हो गई है। पांच जिलों अलवर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा में 700-400 तक, छह जिलों भरतपुर, बाडमेर, अजमेर, चित्तौड़गढ़, सीकर, भीलवाड़ा में 400-200 तक, चार जिलों पाली, सवाईमाधोपुर, गंगानगर, चूरू में 200 से कम लेकिन 100 से ज्यादा नए केस हैं।</p>
<p><br /> <strong>सीएम ऑफिस में 43 संक्रमित मिले</strong><br /> मुख्यमंत्री निवास के बाद अब सीएम ऑफिस भी में कोरोना के 43 कर्मी-अधिकारी संक्रमित मिले हैं। यहां बीते दिन 175 कर्मियों की सावधानी के चलते जांच हुई थी। जिनमें से यह संक्रमित निकले हैं। बुधवार को यहां 100 और कर्मियों के सैंपल लिए गए हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों सीएम अशोक गहलोत, उनकी पत्नी सुनीता गहलोत भी संक्रमित हुए थे। बाद में जांच में सीएम आवास पर कार्यरत कई कर्मी संक्रमित मिले थे।</p>
<p><br /> <strong>किस जिले में कितने रोगी</strong><br /> जयपुर में 3659, अलवर में 755, जोधपुर में 591, बीकानेर में 495, उदयपुर में 423, कोटा में 406, भरतपुर में 364, बाडमेर में 319, अजमेर में 287,चित्तौड़गढ़ में 267, सीकर में 254, भीलवाड़ा में 218, पाली में 166, सवाईमाधोपुर में 134, गंगानगर में 117, चूरू में 105, सिरोही में 96, राजसमंद में 95, दौसा में 92, डूंगरपुर में 86, झालावाड़ में 76,  जैसलमेर में 75, टोंक में 70, प्रतापगढ़ में 68, झुंझुनूं में 59, गंगानगर में 47, बारां में 46, नागौर में 44, बांसवाड़ा में 37, बूंदी में 26, धौलपुर में 11, जालौर, करौली में कोई नया रोगी नहीं।<br /> <br /> <strong>तीसरी लहर में मौतों से राहत : प्रति दस हजार मरीजों पर 4 ही मौतें</strong><br />  राजस्थान में कोरोना की तीसरी लहर की तीन जनवरी को जयपुर से एंट्री हुई थी। जैसा उम्मीद था कि ओमिक्रॉन से मौतों से राहत रहेगी, वैसा ही अभी तक का ट्रेंड रहा है। प्रति दस हजार संक्रमितों पर केवल 4 लोगों की जान अभी तक कोरोना से गई है। लहर के 11 दिन में प्रदेश में अब तक 40,693 नए केस आए हैं। इनमें से 17 लोगों की जान गई है। इस तरह मृत्यु दर मात्र 0.04 फीसदी ही रही है। इससे साफ है कि कोरोना की तीसरी लहर का बड़ा कारण माने जाने वाला ओमिक्रॉन वेरिएंट संक्रमितों के लिए डेल्टा वेरिएंट की तरह जानलेवा साबित नहीं हो रहा है। हालांकि मरीजों के आने की रफ्तार से रिकवरी नहीं हो पा रही है जो चिंता का विषय है। प्रदेश में लहर की इस समयावधि में अब तक नए मरीजों के मुकाबले केवल 4312 ही मरीज रिकवर हुए हैं यानि रिकवरी रेट केवल 10.59 फीसदी ही है। इसके चलते एक्टिव केस जो तीन जनवरी को 2084 थे, वे 94.58 फीसदी बढ़कर 38448 हो गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा एक्टिव केस जयपुर में 16919 हैं। <br /> <br /> <strong>संक्रमण दर 3.70 थी, वह 374 फीसदी बढ़ गई</strong><br /> प्रदेश में लहर के पहले दिन 3.70 फीसदी संक्रमण दर थी, यानि कि हर सौं जांचों में 3-4 लोग संक्रमित निकल रहे थे, लेकिन यह बुधवार तक 374 फीसदी बढ़कर 13.86 फीसदी जा पहुंची है। अब हर सौ जांच में 13-14 लोग कोरोना पॉजिटिव निकल रहे हैं। तीसरी लहर का पीक आने तक इसके 40 फीसदी के करीब पहुंचने की आशंका एक्सपर्ट जता रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jan 2022 11:22:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पार्षदों के चुनाव खर्च की रिकवरी हो गई, अब रैली के लिए उन्हें मंथली का एक-एक लिफाफा खर्च करना होगा: भाटी</title>
                                    <description><![CDATA[

कांग्रेस की बैठक में जिले के प्रभारी मंत्री मालवीय के सामने बयान से फैली सनसनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/61af146278089/article-2983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/cong_hemant-bhati.eps.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। महंगाई के विरोध में कांग्रेस की जयपुर रैली को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय के साथ कांगे्रसियों की बैठक में पीपीसी के पूर्व सदस्य व दो बार दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी का भाषण सर्वाधिक चर्चा में रहा। भाटी ने बैठक में प्रभारी मंत्री व अन्य नेताओं मौजूदगी में ये कहकर सनसनी फैला दी कि कांग्रेस के सभी पार्षदों को मंथली का एक-एक लिफाफा रैली के लिए खर्च करना होगा। उनके बयान ने एक बार इस चर्चा को हवा दे दी है कि नगर निगम में लिफाफा संस्कृति अब भी बदस्तूर जारी है। बैठक को संबोधित करते हुए भाटी ने प्रभारी मंत्री से कहा कि वह सभी को फोर्सफुली जिम्मेदारी दें। क्योंकि दावे तो बहुत होते हैं, लेकिन उतनी बसें जाती नहीं हैं। <br /><strong><br />बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल </strong><br />भाटी के इस बयान में मालवीय सहित सभी नेता चौंक गए। उनका यह बयान न केवल बैठक में मौजूद नेताओं की बीच चर्चा का विषय रहा। बल्कि किसी ने भाटी के बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस कारण कुछ देर बाद उनकी पूरे शहर में चर्चा होने लगी। <br /><br /><strong>लिफाफा संस्कृति फिर चर्चा में</strong><br />भाटी के बयान ने इस चर्चा को फिर हवा दे दी है कि नगर निगम में लिफाफा संस्कृति अब भी जारी है। इससे पूर्व निगम में भाजपा के पूर्व पार्षद चंद्रेश सांखला ने पिछले भाजपा बोर्ड की साधारण सभा के दौरान तत्कालीन मेयर धर्मेन्द्र गहलोत पर पार्षदों को लिफाफा बांटने का खुल्लम खुल्ला आरोप लगाया था। खास बात यह है कि वर्तमान में भी नगर निगम में भाजपा का ही बोर्ड है। <br /><br /><strong>प्रभारी मंत्री सबसे पहले पार्षदों टाइट करें </strong><br />उन्होंने पार्षदों के लिए कहा कि वह कांग्रेस के सिम्बल पर जीतते हैं, लेकिन पार्टी की बैठकों में उनकी संख्या बहुत कम रहती है, जिम्मेदारी लेने के समय भी उनकी यही स्थिति रहती है। इसलिए प्रभारी मंत्री सबसे पहले उन्हें टाइट करें। पार्षदों के कार्यकाल को समय भी बहुत हो गया और उनके खर्चे (चुनाव में किए गए) भी रिकवर हो गए हैं और यह सब सक्षम है। इसलिए सभी पार्षदों को एक-एक मंथली लिफाफा रैली के लिए खर्च करना चाहिए।<br /><br /><strong>झुनझुनवाला भरवाएंगे डीजल</strong><br />समारोह स्थल के बाद प्रभारी मंत्री मालवीय ने सर्किट हाउस में कांग्रेस नेताओं के साथ रैली में जाने वाले कार्यकर्ताओं और बसों की संख्या के सम्बंध में चर्चा की। इस दौरान बसों में भरवाए जाने वाले डीजल, पेट्रोल के भुगतान पर विवाद हो गया। स्थानीय नेताओं ने कहा कि मालवीय ने पहले तो आरटीओ से बसों उपलब्ध कराने के साथ ही पेट्रोल, डीजल भराने का खर्च की बात भी कही थी। अब यह जिम्मा स्थानीय नेताओं पर डाला जा रहा है। बाद में लोकसभा में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे रिजु झुनझुनवाला से बात की गई। बताया जाता है कि झुनझुनवाला ने आश्वस्त किया कि वह रैली में अजमेर से जयपुर जाने वाली सौ बसों के पेट्रोल, डीजल का खर्च वहन करेंगे। <br /><br />मैंने व्यंग्य में यह बात कही थी। मेरे बयान को गलत तरीके से लिया गया। मेरा आशय ये नहीं था कि पार्षद ऊपर की कमाई कर रहे हैं। कांग्रेस के सभी पार्षद ईमानदार और सेवाभावी हैं। मैं तो सिर्फ पार्षदों को रैली में अधिकाधिक भीड़ ले जाने के लिए प्रेरित करना चाहते था। -<strong>हेमन्त भाटी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Dec 2021 14:26:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बजरी माफिया से मिलीभगत के आरोपी आरपीएस को मिली जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[न्यायाधीश नरेन्द्र सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश आरोपी विजय सेहरा की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A4/article-2472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/hc4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान हाईकोर्ट ने बजरी माफिया से मिलीभगत करने के आरोप में गिरफ्तार दूदू के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक विजय सेहरा को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश नरेन्द्र सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश आरोपी विजय सेहरा की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए दिए।</p>
<p><br />जमानत याचिका में अधिवक्ता रजनीश गुप्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता प्रार्थी को मामले में राजनीतिक द्वेषता के चलते फंसाया गया है। मामले में दर्ज एफआईआर में उसका नाम भी नहीं है। इसके अलावा उसे पूर्व में ही एपीओ किया जा चुका था। इसके अलावा उससे कोई पूछताछ शेष नहीं है। ऐसे में उसे जमानत पर रिहा किया जाए। जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी पुलिस अधिकारी ने बजरी माफियाओं से मिलीभगत कर लाखों रुपए की वसूली की है। आरोपी दलालों के जरिए बजरी परिवहन करने वालों माफियाओं से प्रति गाड़ी के रुपए वसूल करता था। इसके अलावा प्रकरण में अनुसंधान लंबित है। यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया गया तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के साथ ही गवाहों को प्रभावित भी कर सकता है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि गत तीन नवंबर को एसओजी ने दूदू सीओ रहते हुए बजरी माफियाओं से मिलीभगत करने, उनकी गाड़ियों को पास कराने और बजरी कारोबारियों को संरक्षण देने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Nov 2021 15:53:46 +0530</pubDate>
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