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                <title>bench - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ओबीसी आरक्षण पर बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: मौजूदा ओबीसी उप-वर्गीकरण रद्द, 66 समुदाय सूची में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने ओबीसी सूची का उप-वर्गीकरण ढांचा रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट बैठक के बाद जारी अधिसूचना के अनुसार, अब केवल 66 समुदायों को 7% आरक्षण का लाभ मिलेगा। सरकार पिछली तृणमूल सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्रों की नए सिरे से समीक्षा करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-west-bengal-government-existing-obc-sub-categorization-canceled/article-154454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bengal-cm.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बुधवार को राज्य सरकार की नौकरियों और पदों में आरक्षण से जुड़े अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची के मौजूदा उप-वर्गीकरण ढांचे को रद्द कर दिया। इसके साथ ही सरकार ने सात प्रतिशत आरक्षण के लिए ओबीसी श्रेणी के तहत केवल 66 समुदायों को बनाए रखने का फैसला किया है। यह अधिसूचना मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में नबन्ना (सचिवालय) में हुई दूसरी कैबिनेट बैठक के एक दिन बाद आई है। इस बैठक में राज्य सरकार ने ओबीसी सूची की दोबारा जांच करने और पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जारी किए गए प्रमाण पत्रों की समीक्षा करने का निर्णय लिया था।</p>
<p>मंत्रिमंडल की दूसरी बैठक में लिए गए इस फैसले को इसके कानूनी और राजनीतिक निहितार्थों के कारण नए प्रशासन का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। सोमवार को हुई बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा था, "मंत्रिमंडल ने ओबीसी श्रेणी के भीतर मौजूदा उप-वर्गीकरण प्रणाली को समाप्त करने, पश्चिम बंगाल सरकार के तहत ओबीसी समुदायों के लिए आरक्षण के प्रतिशत की समीक्षा करने और राज्य की ओबीसी सूची की नए सिरे से जांच करने का निर्णय लिया है।"</p>
<p>पॉल ने कहा था, "इस मामले की नए सिरे से जांच की जाएगी। राज्य सरकार उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के निर्देशों के अनुसार ही जातियों या समूहों को सूची में शामिल करने के बारे में फैसला करेगी।"राज्यपाल के निर्देश पर मंगलवार को जारी एक अधिसूचना में नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने घोषणा की कि 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी के तहत सात प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा। पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण और उप-वर्गीकरण से जुड़ा यह विवाद वाम मोर्चा सरकार के अंतिम दौर और मार्च 2010 से मई 2012 के बीच तृणमूल कांग्रेस सरकार के पहले कार्यकाल के समय का है। उस अवधि के दौरान, राज्य में 77 समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया था। इनमें से वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल के दौरान 42 मुस्लिम समुदायों को शामिल किया गया था। इसके बाद आरोप लगे कि आरक्षण का लाभ धर्म के आधार पर दिया जा रहा है, जिससे यह मामला कानूनी विवादों में फंस गया।</p>
<p>ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद ओबीसी सूची में 35 और समुदायों को जोड़ा, जिससे यह संख्या बढ़कर 77 हो गई, जिनमें से 75 मुस्लिम समुदाय से थे। वर्ष 2023 में, ममता सरकार ने एक नया ओबीसी आरक्षण कानून बनाया, जिसके तहत सभी 77 समुदायों को इसके दायरे में ले आया गया। इसके परिणामस्वरूप, राज्य में ओबीसी समुदायों की कुल संख्या बढ़कर 179 हो गई थी। इस नए आरक्षण कानून को हालांकि अदालत में चुनौती दी गई, जहां याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि धर्म के आधार पर दिए गए आरक्षण को रद्द किया जाना चाहिए।</p>
<p>इसके बाद, 22 मई 2024 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य की ओबीसी सूची में 113 समुदायों को शामिल करने के फैसले को रद्द कर दिया, जबकि 66 समुदायों को सूची में बने रहने की अनुमति दी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि कई समुदायों को शामिल करने का काम मुख्य रूप से धार्मिक आधार पर किया गया था। इस फैसले के बाद वर्ष 2010 से जारी किए गए लगभग पांच लाख ओबीसी प्रमाणपत्र अमान्य हो गए थे। तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बाद में उच्च न्यायालय के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। मार्च 2025 में, पिछली राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग एक नया सर्वेक्षण करेगा और एक संशोधित ओबीसी सूची तैयार करेगा।</p>
<p>इसी साल जून में, ममता सरकार ने 76 नए समुदायों को शामिल करते हुए एक नई सूची जारी की, जिससे कुल ओबीसी श्रेणियों की संख्या 140 हो गई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने संशोधित सूची के माध्यम से व्यावहारिक रूप से लगभग सभी पुराने समुदायों को वापस शामिल कर लिया है। पिछले साल 17 जून को, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उस संशोधित अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस रोक के आदेश को चुनौती देते हुए फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। पिछले साल जुलाई में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी थी और वर्तमान में यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष लंबित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:21:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिग्नल पैनल पर आ बैठा कोबरा सांप, स्टेशन मास्टर डर के मारे बेंच पर चढ़ बैठा  </title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा जिले के दिल्ली- मुंबई रेलमार्ग पर कोटा मंडल के रावठा रोड स्टेशन पर बुधवार अलसुबह सिग्नल पैनल पर 4 फि ट लंबा कोबरा सांप आ बैठा । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-cobra-snake-sitting-on-the-signal-panel--the-station-master-climbed-on-the-bench-in-fear/article-10966"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/signal-panel-snake-mandana-kota.jpg" alt=""></a><br /><p>मंडाना।  कोटा जिले के दिल्ली- मुंबई रेलमार्ग पर कोटा मंडल के रावठा रोड स्टेशन पर बुधवार अलसुबह सिग्नल पैनल पर 4 फिट लंबा कोबरा सांप आ बैठा । अचानक ट्रेन संचालन कर रहे स्टेशन मास्टर केदार प्रसाद मीणा सांप को देख डर की वजह से पीछे रखी टेबल पर बैठ गए। इसकी सूचना स्टेशन मास्टर केदार प्रसाद ने कोटा कन्ट्रोलर को दी और उच्चाधिकारियों व आईसीडी साइडिंग में लोड चेक कर रहे पॉइंसमैन ललित बौरासी को दी। ललित कुछ ही देर में स्टेशन पहुंचे और सिग्लन पैनल के ऊपर बैठे कोबरा प्रजाति के सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया। इसके बाद स्टेशन मास्टर केपी मीणा ने सिग्नल पैनल संभाला व ट्रेनें संचालित की। आॅन ड्यूटी स्टेशन मास्टर ने बताया कि सांप स्टेशन के अंदर व किसी उपकरण में नही घुसा वरना ट्रेन संचालन करने में दिक्कत आ सकती थी। पॉइंसमैन ललित बौरासी वन्यजीव प्रेमी है जिन्होंने सांप को स्टेशन से रेस्क्यू किया और वनविभाग के बताये गये वन क्षेत्र में छोड़ दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 15:03:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>10 साल बाद भी नहीं खुली उपभोक्ता सर्किट बेंच, मंत्री बोले पूर्ववर्ती सरकार पांच साल क्या भजन कीर्तन कर रही थी? </title>
                                    <description><![CDATA[सवाल के जवाब में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार क्या 5 साल भजन कीर्तन कर रही थी?  सर्किट बेंच के लिए भूमि आवंटन क्यों नहीं किया? ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/consumer-circuit-bench-did-not-open-even-after-10-years--the-minister-said-what-bhajan-kirtan-was-the-previous-government-doing-for-five-years/article-6577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/anita-bhadel].jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने अजमेर एवं भरतपुर संभाग में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की सर्किट बेंच के बजट घोषणा के 10 साल बाद भी नहीं खुलने पर सरकार से घेरने की कोशिश की। सवाल के जवाब में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार क्या 5 साल भजन कीर्तन कर रही थी?  सर्किट बेंच के लिए भूमि आवंटन क्यों नहीं किया? <br /><br />भाजपा विधायक अनिता भदेल ने यह मामला उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल वर्ष 2008 से 2013 के दौरान अजमेर एवं भरतपुर संभाग मुख्यालय पर राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की सर्किट बेंच स्थापित करने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक इन बैंचों की स्थापना नहीं हो सकी है। इससे उपभोक्ता मामलों के निस्तारण को लेकर स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही भदेल ने सरकार ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष के 50% पदों का वकील कोटे से बढ़ने की मंशा भी जानना चाही। जवाब में खाचरियावास ने कहा कि  मुख्‍यमंत्री की वर्ष 2012-13 की बजट घोषणा में सर्किट बेंच स्‍थापित करने की घोषणा की गई थी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता मामले विभाग की ओर से 18 मई 2012 से सर्किट बेंच जोधपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर एवं भरतपुर की अधिसूचना जारी की गई है। वर्तमान में सर्किट बेंच जोधपुर, कोटा, बीकानेर एवं उदयपुर क्रियाशील है। भूमि एवं भवन की उपलब्‍धता के अभाव में अजमेर एवं भरतपुर में सर्किट बेंच क्रियाशील नही है। इसके लिए राज्‍य सरकार प्रयासरत है। जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, अजमेर में वर्ष 2015 तक के मामले अभी तक लम्बित रहने के लिए राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद  प्रतितोष आयोग से प्राप्‍त सूचना अनुसार अभिभाषकगण की ओर से बहस के लिए बार बार अवसर चाहना, विभिन्‍न अवधि में अध्‍यक्ष, जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, अजमेर का पद रिक्‍त  होने से अतिरिक्‍त कार्यभार अन्‍य आयोगों के अध्‍यक्षों  के पास होना, विगत 02 वर्षो में कोरोना महामारी से नियमित सुनवाई ना होना आदि कारण बताए गए है। उपभोक्‍ता  संरक्षण (राज्‍य आयोग और जिला आयोग के अध्‍यक्ष और सदस्‍यों  की नियुक्ति  के लिये अर्हता, भर्ती की पद्धति, नियुक्ति की प्रक्रिया, कार्यकाल, पद से त्‍यागपत्र और हटाना) नियम, 2020 के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।  खाटूवास ने कहा कि भैंस स्थापित करने के लिए जिला संबंधित जिला कलेक्टर को भूमि आवंटन को लेकर निर्देश प्रदान कर दिए गए हैं। अजमेर और भरतपुर में जल्दी ही उपभोक्ता सर्किट बेंच की स्थापना कर दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 13:26:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>RAS भर्ती प्री परिणाम को रद्द करने के खिलाफ RPSC ने हाईकोर्ट में लगाई अपील,  2 बजे सुनवाई </title>
                                    <description><![CDATA[ आयोग की ओर से दो अपील पेश की गई हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-division-bench-of-cj-akil-qureshi-will-hear-at-2-pm/article-4841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/hc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट से बड़ी खबर है। आरएएस भर्ती के प्रारम्भिक परिणाम को रद्द करने के खिलाफ आरपीएससी की ओर से अपील पेश की गई है। महाधिवक्ता के साथ आयोग के वकील मिर्जा फैसल बेग ने अपील पेश की है। आयोग की ओर से दो अपील पेश की गई हैं। मामले में जल्द सुनवाई के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी है। सीजे अकील कुरेशी की खंडपीठ 2 बजे सुनवाई करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Feb 2022 11:06:27 +0530</pubDate>
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                <title>बजरी माफिया से मिलीभगत के आरोपी आरपीएस को मिली जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[न्यायाधीश नरेन्द्र सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश आरोपी विजय सेहरा की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A4/article-2472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/hc4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान हाईकोर्ट ने बजरी माफिया से मिलीभगत करने के आरोप में गिरफ्तार दूदू के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक विजय सेहरा को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश नरेन्द्र सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश आरोपी विजय सेहरा की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए दिए।</p>
<p><br />जमानत याचिका में अधिवक्ता रजनीश गुप्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता प्रार्थी को मामले में राजनीतिक द्वेषता के चलते फंसाया गया है। मामले में दर्ज एफआईआर में उसका नाम भी नहीं है। इसके अलावा उसे पूर्व में ही एपीओ किया जा चुका था। इसके अलावा उससे कोई पूछताछ शेष नहीं है। ऐसे में उसे जमानत पर रिहा किया जाए। जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी पुलिस अधिकारी ने बजरी माफियाओं से मिलीभगत कर लाखों रुपए की वसूली की है। आरोपी दलालों के जरिए बजरी परिवहन करने वालों माफियाओं से प्रति गाड़ी के रुपए वसूल करता था। इसके अलावा प्रकरण में अनुसंधान लंबित है। यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया गया तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के साथ ही गवाहों को प्रभावित भी कर सकता है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि गत तीन नवंबर को एसओजी ने दूदू सीओ रहते हुए बजरी माफियाओं से मिलीभगत करने, उनकी गाड़ियों को पास कराने और बजरी कारोबारियों को संरक्षण देने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Nov 2021 15:53:46 +0530</pubDate>
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