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                <title>centenary - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सामाजिक समस्याओं पर सिर्फ दुख जताने के बजाय अपने घरों से बाहर निकलकर राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए एकजुट हों : मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने तिरुवनंतपुरम में लोगों से राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बताते हुए स्पष्ट किया कि यह धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सभ्यतागत मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने मजबूत राष्ट्र निर्माण के लिए 'धर्म' आधारित जीवन और सामाजिक संगठन पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mohan-bhagwat-instead-of-just-expressing-sorrow-over-social-problems/article-156945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/mohan-bhagwat.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लोगों से अपील की है कि वे सामाजिक समस्याओं पर सिर्फ दुख जताने के बजाय अपने घरों से बाहर निकलें और राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए एकजुट हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल एक संगठित समाज ही मजबूत बन सकता है और देश एवं मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर सकता है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत शनिवार को केरल की राजधानी तिरवनंतपुरम स्थित 'उदय पैलेस सभागार' में आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि संघ का कोई विरोधी नहीं है और वह हर व्यक्ति को एक संभावित स्वयंसेवक मानता है। उन्होंने भारत को एक 'हिंदू राष्ट्र' बताते हुए साफ किया कि इस शब्द का मतलब केवल धार्मिक पहचान से नहीं है, बल्कि यह देश के सांस्कृतिक मूल्यों और सभ्यता के जीने के तरीके को दर्शाता है।</p>
<p>सामाजिक एकजुटता के महत्व पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि ताकत सिर्फ संगठन से ही आती है। स्वामी विवेकानंद के इस कथन को याद करते हुए कि 'कमजोरी ही मृत्यु है', उन्होंने हिंदू समाज से एकजुट होने और इस विश्वास के साथ भाईचारा बढ़ाने का आग्रह किया कि भारत उनकी साझा मातृभूमि है और सभी भारतीय एक ही माँ की संतान हैं। सरसंघचालक ने कहा कि आज की दुनिया उन मूल्यों और सिद्धांतों की तलाश कर रही है जो भारत की सभ्यता की विरासत में गहराई से समाए हुए हैं और यह भारतीयों की जिम्मेदारी है कि वे इस ज्ञान को पूरी मानवता के साथ साझा करने के लिए खुद को तैयार करें।</p>
<p>मोहन भागवत ने कहा कि समाज को ताकत आपसी सहयोग और एक-दूसरे पर निर्भरता से मिलती है। उन्होंने यह कहा कि एक मजबूत, आत्मविश्वासी और संकटों से जूझने में सक्षम राष्ट्र के निर्माण के लिए 'धर्म' पर आधारित जीवन जरूरी है। संघ को लेकर लोगों की धारणाओं पर भागवत ने कहा कि शताब्दी व्याख्यान जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम लोगों को उस संगठन को समझने का मौका देते हैं जिसके बारे में अक्सर गलतफहमियां फैलाई गयी हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे सिर्फ किसी के प्रचार या बनायी गयी बातों पर भरोसा न करें, बल्कि सीधे अनुभव के आधार पर अपनी राय बनाएं।</p>
<p>मोहन भागवत ने कहा, "संघ को समझने के लिए केवल भाषण सुनना काफी नहीं हो सकता। किसी को भी अपनी राय बनाने से पहले शाखा जाना चाहिए, शिविर में हिस्सा लेना चाहिए, स्वयंसेवकों से बातचीत करनी चाहिए और संगठन के कामों को देखना चाहिए।" संघ की शुरुआत के बारे में बताते हुए भागवत ने कहा कि इस संगठन की स्थापना राष्ट्र के पुनर्निर्माण के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि अपार ताकत और संसाधन होने के बावजूद भारत सदियों तक विदेशी शासन के अधीन रहा। ब्रिटेन सातवीं ऐसी विदेशी ताकत था जिसने देश पर हमला किया और शासन किया।</p>
<p>सरसंघचालक ने ध्यान दिलाया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शुरू हुए कई आंदोलन आजादी के बाद धीमे पड़ गए, जबकि कई सामाजिक सुधार केवल समाज के सीमित हिस्सों तक ही सिमट कर रह गए। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार ने अपने अनुभवों और विचारों से यह निष्कर्ष निकाला था कि भारत अपनी सभ्यता के अनुरूप समाज को संगठित करके ही अपना पुराना गौरव वापस पा सकता है।</p>
<p>केरल के तीन दिवसीय दौरे पर शुक्रवार शाम तिरुवनंतपुरम पहुंचे भागवत ने आज 'उदय पैलेस सम्मेलन केंद्र' में आमंत्रित लोगों को संबोधित किया था। रविवार बाद में त्रिशूर के 'हयात रीजेंसी' में भी उनका ऐसा ही एक शताब्दी कार्यक्रम को संबोधित करने का कार्यक्रम है। कल शाम संघ प्रमुख ने अमृतपुरी जाकर आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी देवी से भी मुलाकात की थी। राज्य में अपने सभी कार्यक्रम पूरे करने के बाद भागवत सोमवार सुबह कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से बेंगलुरु के लिए रवाना होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 11:38:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अगले 25 साल देश के विधायी सदनों में गूंजे केवल ‘कर्त्तव्य’ का मंत्र' : PM मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[संसद एवं विधानमंडलों के अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के शताब्दी सम्मेलन का नई दिल्ली से वीडियो लिंक के माध्यम से उद्घाटन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A5%87-25-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A5%82%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%B2-%E2%80%98%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E2%80%99-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0----pm-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80/article-2473"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/modi.jpg" alt=""></a><br /><p>शिमला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद एवं देश के पीठासीन अधिकारियों का बुधवार को आह्वान किया कि आज़ादी के अमृत काल में अगले 25 साल तक सदनों में बार बार ‘कर्तव्य’ के मंत्र पर जोर दें तथा विधायी निकायों के सदनों में गुणवत्तापूर्ण परिचर्चा के लिए अलग से समय निर्धारित करें जिसमें मर्यादा, गंभीरता एवं अनुशासन हो तथा इससे स्वस्थ लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त हो।</p>
<p><strong>संसद एवं विधानमंडलों के अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के शताब्दी सम्मेलन का VC से उद्घाटन </strong> <br /> प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को यहां संसद एवं विधानमंडलों के अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के शताब्दी सम्मेलन का नई दिल्ली से वीडियो लिंक के माध्यम से उद्घाटन किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में 82वें पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का आयोजन 16, 17 एवं 18 नवंबर को यहां हो रहा है। देश के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की शुरुआत 1921 में हुई थी और पहला सम्मेलन शिमला में हुआ था। इसलिये शताब्दी सम्मेलन का आयोजन भी शिमला में किया जा रहा है।</p>
<p><strong>सदन में हमारा खुद का भी आचार-व्यवहार भारतीय मूल्यों के हिसाब से हो, ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है: मोदी</strong><br /> सम्मेलन में बिरला के साथ राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार, विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने भी संबोधित किया। सम्मेलन मेंदेश के सभी राज्यों के पीठासीन अधिकारी शामिल हुए। मोदी ने अपने संबोधन में सदन में नयी कार्यप्रणाली को लेकर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा, “हमारे सदन की परम्पराएँ और व्यवस्थाएं स्वभाव से भारतीय हों, हमारी नीतियाँ, हमारे कानून भारतीयता के भाव को, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने वाले हों, सबसे महत्वपूर्ण, सदन में हमारा खुद का भी आचार-व्यवहार भारतीय मूल्यों के हिसाब से हो, ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है।</p>
<p><strong>नकारात्मक भाव को कम करके उनसे जुड़ने और स्वयं राजनीति से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी</strong><br /> उन्होंने पीठासीन अधिकारियों के समक्ष विचारणीय प्रश्न रखते हुए कहा, “क्या साल में 3-4 दिन सदन में ऐसे रखे जा सकते हैं जिसमें समाज के लिए कुछ विशेष कर रहे जनप्रतिनिधि अपना अनुभव बताएं, अपने समाज जीवन के इस पक्ष के बारे में भी देश को बताएं। आप देखिएगा, इससे दूसरे जनप्रतिनिधियों के साथ ही समाज के अन्य लोगों को भी कितना कुछ सीखने को मिलेगा।” उन्होंने कहा कि इससे रचनात्मक समाज के लोगों को भी राजनीतिज्ञों के प्रति नकारात्मक भाव को कम करके उनसे जुड़ने और स्वयं राजनीति से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी। इस प्रकार से राजनीति में बहुत परिवर्तन आएगा।</p>
<p><strong>सदन में ताज़गी लाने और नयी कार्यप्रणाली विकसित करने की जरूरत</strong><br /> उन्होंने विधायी निकायों में परिचर्चा को स्वस्थ बनाने के लिए पीठासीन अधिकारियों को सुझाव देते प्रश्न किया, “हम गुणवत्तापूर्ण परिचर्चा के लिए भी अलग से समय निर्धारित करने के बारे में सोच सकते हैं क्या? ऐसी परिचर्चा जिसमें मर्यादा का, गंभीरता का पूरी तरह से पालन हो, वह राेजमर्रा की राजनीति से मुक्त हो और कोई किसी पर राजनीतिक छींटाकशी ना करे। एक तरह से वो सदन का सबसे स्वस्थ समय हो, स्वस्थ दिवस हो।” उन्होंने कहा कि सदन में ज्यादातर सदस्य पहली बार चुन कर आये होते हैं और उनमें जनता के मुद्दों को लेकर बहुत ऊर्जा होती है। सदन में ताज़गी लाने और नयी कार्यप्रणाली विकसित करने की जरूरत है। नए सदस्यों को सदन से जुड़ी व्यवस्थित ट्रेनिंग दी जाए। सदन की गरिमा और मर्यादा के बारे में उन्हें बताया जाए। हमें सतत संवाद बनाने पर बल देना होगा। राजनीति के नए मापदंड भी बनाने ही होंगे। इसमे सभी पीठासीन अधिकारियों की भूमिका भी बहुत अहम है।</p>
<p><strong>“वन नेशन-वन राशन कार्ड की तर्ज पर मेरा एक विचार ‘वन नेशन वन लेजिस्लेटिव प्लेटफॉर्म’ का है: मोदी</strong><br /> प्रधानमंत्री ने सदन की उत्पादकता को बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए नियमों में बदलाव के लिए एक समिति का गठन किया जाना चाहिए। हमारे कानूनों में व्यापकता तभी आएगी जब उनका जनता के हितों में सीधा जुड़ाव होगा। इसके लिए सदन में सार्थक चर्चा और परिचर्चा बहुत जरूरी है। सदन में युवा सदस्यों को, आकांक्षी क्षेत्रों से आने वाले जनप्रतिनिधियों को, महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा मौका मिलना चाहिए। उन्होंने तकनीक को भी प्रमुख स्थान दिये जाने पर बल देते हुए कहा, “वन नेशन-वन राशन कार्ड की तर्ज पर मेरा एक विचार ‘वन नेशन वन लेजिस्लेटिव प्लेटफॉर्म’ का है। एक ऐसा पोर्टल जो न केवल हमारी संसदीय व्यवस्था को जरूरी तकनीकी बल दे, बल्कि देश की सभी लोकतान्त्रिक इकाइयों को जोड़ने का भी काम करे।”</p>
<p><br /> मोदी ने आजादी के अमृतकाल से लेकर आजादी के शताब्दी वर्ष के बीच 25 वर्ष के दौरान देश में कर्त्तव्य को सर्वाधिक महत्व दिये जाने का आह्वान करते हुए कहा, “अगले 25 वर्ष, भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसमें हम एक ही मंत्र को चरितार्थ कर सकते हैं क्या - कर्तव्य, कर्तव्य, कर्तव्य।” उन्होंने कहा कि हर बात में कर्त्तव्य सर्वोपरि है। 50 साल की कार्यशैली में कर्त्तव्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सदनों में ये संदेश बार बार दोहराया जायेगा तो देश के नागरिकों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। यह 130 करोड़ भारतीयों को कर्त्तव्य का बोध कराके देश को कई गुना बढ़ाने का मंत्र है।</p>
<p><br /> प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लिए लोकतन्त्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं है। लोकतन्त्र तो भारत का स्वभाव है, भारत की सहज प्रकृति है। उन्होंने कहा कि हमें आने वाले वर्षों में, देश को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाना है, असाधारण लक्ष्य हासिल करने हैं। ये संकल्प ‘सबके प्रयास’ से ही पूरे होंगे। और लोकतन्त्र में, भारत की संघीय व्यवस्था में जब हम ‘सबका प्रयास’ की बात करते हैं तो सभी राज्यों की भूमिका उसका बड़ा आधार होती है।</p>
<p><br /> उन्होंने कहा कि चाहे पूर्वोत्तर की दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान हो, दशकों से अटकी-लटकी विकास की तमाम बड़ी परियोजनाओं को पूरा करना हो, ऐसे कितने ही काम हैं जो देश ने बीते सालों में किए हैं, सबके प्रयास से किए हैं। अभी सबसे बड़ा उदाहरण हमारे सामने कोरोना का भी है। उन्होंने कहा कि हमारा देश विविधताओं से भरा है। अपनी हजारों वर्ष की विकास यात्रा में हम इस बात को अंगीकृत कर चुके हैं कि विविधता के बीच भी, एकता की भव्य और दिव्य अखंड धारा बहती है। एकता की यही अखंड धारा, हमारी विविधता को संजोती है, उसका संरक्षण करती है। तीन दिन के इस सम्मेलन के समापन समाराेह के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 17 Nov 2021 16:08:43 +0530</pubDate>
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