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                <title>हरिद्धार: कड़ाके की ठंड के बावजूद मौनी अमावस्या पर हर की पैड़ी में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[हरिद्वार में मौनी अमावस्या पर कड़ाके की ठंड के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने हर की पैड़ी पर पावन स्नान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/despite-the-harsh-cold-of-haridhar-a-large-number-of/article-139997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/mauni-amavasya-2025-10.webp" alt=""></a><br /><p>हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्धार में रविवार को मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर हर की पैड़ी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों की आस्था मौसम पर भारी पड़ती नजर आई। प्रात:काल से ही गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन बना रहा।</p>
<p>वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, हरिद्वार के निर्देशन में हरिद्वार पुलिस द्वारा व्यापक सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए। पुलिस बल द्वारा श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से गंगा स्नान कराया गया तथा उन्हें सकुशल उनके गंतव्य स्थान की ओर रवाना किया गया। भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस बल पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात रहा, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।</p>
<p>हरिद्वार पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 17:15:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कपिल मिश्रा का गंभीर आरोप, बोलें-आतिशी ने की गुरुओं के खिलाफ की बेअदबी, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्री कपिल मिश्रा ने आतिशी की सिख गुरुओं पर टिप्पणी को बेअदबी और पाप बताया, माफी की मांग की और विधानसभा गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kapil-mishras-serious-allegation-says-atishi-has-committed-disrespect-against/article-139432"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/atishi-and-kapil-mishra.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के कला एवं संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने सिख गुरुओं के लिए जो शब्द बोले गये वह बेअदबी, गुनाह और पाप हैं तथा उनका कोई औचित्य नहीं था। मिश्रा ने मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन कर कहा कि छह जनवरी को दिल्ली विधानसभा में एक अभूतपूर्व और गंभीर पाप हुआ। गुरु तेग बहादुर जी, भाई सतीदास जी, भाई मतीदास जी और भाई दयाला जी की शहादत के 350 वर्ष पूरे होने पर चल रही चर्चा के दौरान आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा बोले गए शब्द बेअदबी, गुनाह और पाप हैं तथा उनका कोई औचित्य नहीं था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि घटना के बाद आतिशी मीडिया, जनता और विधानसभा से लगातार अनुपस्थित रहीं। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता द्वारा बार-बार बुलाए जाने के बावजूद उन्होंने  सदन में आकर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की। कैबिनेट मंत्री ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर इस मामले को दबाने के लिए पंजाब सरकार के संसाधनों और पंजाब पुलिस का दुरुपयोग किया गया। इस मामले में झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए और डराने की कोशिश की गई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीति का नहीं, बल्कि आस्था और सदन की गरिमा से जुड़ा विषय बताया गया। इस मामले में पूर्व सीएम केजरीवाल को चाहिए था कि वह आतिशी से माफी मंगवाते। पंजाब पुलिस को इस पूरे मामले से दूर रखा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि आतिशी को भागने या छुपने के बजाय मीडिया और जनता के सामने आना चाहिए। उन्हें विधानसभा की विशेषाधिकार समिति  और कानूनी प्रक्रिया का सामना चाहिए।</p>
<p>कपिल मिश्रा ने कहा कि सात जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा वीडियो का शब्दश: सदन में पढ़ा गया, जिस पर किसी ने आपत्ति नहीं जताई। इसके बावजूद बाहर जाकर पंजाब पुलिस से झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई गई। उन्होंने पंजाब पुलिस को राजनीतिक कार्यों के बजाय राज्य की सुरक्षा में लगाने की अपील की गई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 13:25:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मर जाना स्वीकार है, किसी अन्य की बंदगी नहीं : अरशद मदनी</title>
                                    <description><![CDATA[संसद में वंदे मातरम पर चल रही बहस के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को इसे गाने पर आपत्ति इसलिए है क्योंकि इसके कुछ अंश पूजा से जुड़े हैं, जो उनकी आस्था के खिलाफ है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dying-is-acceptable-not-worshiping-anyone-else-arshad-madani/article-135436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/madni.png" alt=""></a><br /><p>सहारनपुर। संसद में इस समय वंदे मातरम पर चर्चा चल रही है। ऐसे में जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी का भी इस पर बयान आया है। उन्होंने कहा है कि हमें किसी के वंदे मातरम पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता।</p>
<p>मदनी ने कहा, हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं! मदनी ने इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी है। इसमें उन्होंने कहा है, हमें किसी के वंदे मातरम पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और वंदे मातरम का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है। </p>
<p>इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर दुर्गा माता से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही मां, मैं तेरी पूजा करता हूं यही वंदे मातरम का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।</p>
<p><strong>वतन से मोहब्बत अलग बात, इबादत अलग</strong></p>
<p>वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियां इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हैं। हाल ही में राजनीतिक दलों के बीच राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर आरोप प्रत्यारोप हुए हैं। बीजेपी की ओर से कहा गया कि कांग्रेस ने 1937 में सांप्रदायिक एजेंडे के तहत इसके संक्षिप्त संस्करण को देश के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया, जिससे न सिर्फ इस गीत का बल्कि पूरे देश का अपमान हुआ। वहीं कांग्रेस ने पलटवार के तौर पर कहा कि बीजेपी और आरएसएस इस गीत से बचते रहे हैं। उन्होंने कभी वंदे मातरम नहीं गाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 12:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> गोपालपुरा माताजी मंदिर- लकवा पीड़ितों की आस्था का केंद्र, 400 साल से अधिक पुराना है चमत्कारी मंदिर  </title>
                                    <description><![CDATA[यहां नवरात्र के अलावा शनिवार व रविवार को श्रद्धालुओं का तांता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gopalpura-mataji-temple---a-center-of-faith-for-those-suffering-from-paralysis--the-miraculous-temple-is-over-400-years-old/article-128300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)45.png" alt=""></a><br /><p> मंडाना। मंडाना के पास गोपालपुरा गांव में स्थित गोपालपुरा माताजी मंदिर लगभग 400 साल पुराना रियासतकालीन मंदिर है, जो बीजासन माता और कंकाली माता के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर को लकवा (पैरालिसिस) पीड़ितों की आस्था का केंद्र माना जाता है। मंडाना कस्बे से 7 किमी दूर नेशनल हाइवे 52 से 250 मीटर दूर गोपालपुरा गांव मे स्थित है मां राजराजेश्वरी बिजासन माता का चमत्कारी मन्दिर मान्यता है कि है कि लोग यहां रोते रोते आते है व हंसते हंसते जाते है। माँ का ऐसा अद्धभुत चमत्कार है की यहाँ लकवा पैरालाइज अन्य बीमारियां से पीड़ित मरीज ठीक हो जाते है। नवरात्रा के अलावा हर शनिवार व रविवार को श्रद्धालु आते है। </p>
<p><strong> मान्यताएं और महत्व</strong><br />मान्यता है कि शनिवार और रविवार को यहां दर्शन करने से लकवाग्रस्त मरीजों को राहत मिलती है। मरीज माता की परिक्रमा करते हैं और पाठ (मंत्रोच्चार) करते हैं, जिससे स्वास्थ्य में सुधार होने की बात कही जाती है।  भक्त इसे चमत्कारिक स्थल मानते हैं, जहाँ मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>
<p><strong> मंदिर की विशेषताएँ</strong><br />मंदिर में दो प्रतिमाएँ है। मंदिर में बीजासन माता और कंकाली माता की प्रतिमाएं विराजमान हैं। अखंड हवन भक्तों के सहयोग से यहाँ 24 घंटे अखंड हवन प्रज्वलित रहता है।  रियासतकालीन विरासत यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है और उस समय की स्थापत्य कला की झलक दिखाता है</p>
<p><strong> सेवाएं और सुविधाएं</strong><br /> भंडारा नवरात्र के दौरान प्रतिदिन भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें एक हजार से अधिक भक्त प्रसादी ग्रहण करते हैं। प्रतिदिन सुबह 4 बजे मंगला आरती और शाम 7 बजे शयन आरती होती है।  धर्मशाला भक्तों के ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां लोग 9 दिन तक रहकर आरती और पूजा में भाग लेते हैं। नवरात्र और अन्य पर्वों पर मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में भक्त पहुँचते हैं। दूर-दराज से आने वाले लकवा पीड़ित यहाँ दर्शन कर अपनी बीमारी से राहत पाने की आशा रखते हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 14:43:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> आलनिया माता मंदिर : माता की कृपा से मिलता है संतान सुख और समृद्धि, श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा का केंद्र </title>
                                    <description><![CDATA[यहां यात्रियों को रात में रुकने और विश्राम करने की सुविधा उपलब्ध है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/alaniya-mata-temple--the-blessings-of-the-mother-goddess-bring-happiness-and-prosperity-through-her-children/article-128042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news43.png" alt=""></a><br /><p>कसार। कोटा झालावाड़ नेशनल हाईवे 52 के समीप स्थित नाहर सिंही माता का विशाल मंदिर, जिसे आलनिया माताजी के नाम से भी जाना जाता है, क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि नि:संतान दंपतियों को संतान सहजता से प्राप्त हो जाती है। मंदिर में कालका माता व नाहर सिंही माता की प्राचीन प्रतिमाएं लगभग 500 साल पुरानी हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इन्हें बूंदी जिले के मेनाल से दो साधु लेकर आए थे और जंगल में एक पेड़ के नीचे स्थापित किया। धीरे-धीरे आसपास का क्षेत्र बसा और श्रद्धालु दर्शन के लिए आने लगे।</p>
<p><strong>विशाल सिंह द्वार बनाया जाने की मांग: </strong> हाइवे किनारे स्थित आलनिया माता मंदिर पर माता के दर्शन मात्र से ही मानव के दुख दूर हो जाते हैं। नवरात्रि के दौरान दूर-दराज से श्रद्धालुओं का ताता लगता है। रविवार व सोमवार को भी काफी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर समिति ने बताया कि यदि सर्विस रोड के समीप विशाल सिंहद्वार बनाया जाए तो हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों की नजरें मंदिर पर पड़ेगी और दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ेगी।</p>
<p><strong>परिसर में विशाल भोजनशाला, 10 कमरे, दो वाटर कूलर </strong><br />मंदिर अब ट्रस्ट द्वारा संचालित है। परिसर में विशाल भोजनशाला, 10 कमरे, दो वाटर कूलर और राहगीरों के लिए पेयजल टंकी व शौचालय बनाए गए हैं। यात्रियों को रात में रुकने और विश्राम करने की सुविधा उपलब्ध है।</p>
<p><strong>नौ दिनों तक माता का होता है आकर्षक श्रृंगार </strong><br />श्रद्धालुओं का विश्वास है कि दुनिया की कठिनाइयों से थककर माता के दरबार में आने से मनोकामना पूर्ण होती है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक माता का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और दुर्गा शतचंडी पाठ व पालकी नगर भ्रमण आयोजित होता है। मंदिर पुजारी रामनिवास सुमन ने बताया कि उनकी चार पीढ़ियां वर्षों से माता की पूजा अर्चना करती आ रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 14:50:44 +0530</pubDate>
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                <title>नवरात्र विशेष : आस्था का द्वार कुन्हाड़ी बीजासन माता धाम, दूर होती है लकवा व हकलाने की बीमारी</title>
                                    <description><![CDATA[राव चंद्रसेन ने कराया था निर्माण, सारबाग के इमली के पेड़ के नीचे से लाए थे मूर्ति
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/navratri-special--kunhadi-bijasan-mata-dham--a-gateway-to-faith--cures-paralysis-and-stammering/article-127837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(10)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के रेलवे स्टेशन से करीब 9 किलोमीटर तथा बस स्टैंड से मात्र 2 किलोमीटर दूर स्थित कुन्हाड़ी माता अर्थात बीजासन माता मंदिर स्थित है। यह मंदिर करीब 500 साल पुराना है। यह रियासतकालीन के दौरान बना हुआ है। इस मंदिर की माता कुन्हाड़ी ठिकाना राजपरिवार की कुलदेवी है। इस मूर्ति को राव चंद्रसेन ने सारबाग के इमली के पेड़ से लाकर यहां स्थापित किया था। यह चमत्कारी मंदिर अपने आप में अनूठा मंदिर है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है। अधिकतर यहां आने वाले श्रद्धालु लकवा, जिनको बोलने में समस्या होती है या फिर जिनके हाथ-पैर में दर्द जैसी कई समस्याएं होती है। जो श्रद्धालु इस मंदिर आकर 2 से 7 परिक्रमा सीधी लगाता है उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। कुछ श्रद्धालु मन्नत पूरी होने तक यहीं रहते है। अपने विश्वास का दीया लगाए रखते है। पुजारी भूपेन्द्र शर्मा व छित्तरलाल ने बताया कि धार्मिक आस्था का ऐसा संगम जहां श्रद्धालु अपनी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ आते हैं और मां की चौखट से खाली नहीं लौटते। बीजासन माता मंदिर, जिसे कुन्हाड़ी ठिाकाना की कुलदेवी माना जाता है, आज भी आस्था का सबसे बड़ा केन्द्र है। श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि यह मंदिर न केवल कोटा और बूंदी, बल्कि पूरे हाड़ौती अंचल के लिए आस्था का अद्भुत धाम बन चुका है।</p>
<p><strong>होती है मन्नत पूरी</strong><br />श्रद्धालुओं के अनुसार मनोकामना पूरी होने के बाद उल्टा साखिया बनाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ग्रामीण मान्यता है कि अगर कोई सच्चे मन से मां के दरबार में आता है, अपनी मनोकामना रखता है और परिक्रमा करता है, तो माता उसकी झोली जरूर भरती है। श्राद्धालुओं के अनुसार इस मंदिर में लकवा जैसी बीमारी में भी काफी फायदा मिलता है। </p>
<p><strong>राव चंद्रसेन ने कराया था निर्माण</strong><br />श्रद्धालुओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण लगभग 500 साल पहले राव चंद्रसेन ने कराया था। वे इस मंदिर को कुन्हाड़ी ठिकाना की कुलदेवी के रूप में लेकर आए थे। कहा जाता है कि सारवाड़ से इमली के पेड़ के नीचे से मां की प्रतिमा को लाकर यहां स्थापित किया गया। तभी से बीजासन माता को कुन्हाड़ी ठिकाना राज परिवार की कुलदेवी के रूप में पूजा जाने लगा। कुन्हाड़ी ठिकाना के राजपरिवार के लोग आज भी यहां दर्शन करने आते हैं। इसे सिर्फ ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि राजघराने की आस्था से भी जुड़ा स्थान माना जाता है। बीजासन माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की ऐसी धारा है जो पूरे हाड़ौती को जोड़ती है। यहां हर वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। खासतौर पर नवरात्रि और पूर्णिमा के दिन यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है। नवरात्रि में यहां नौ दिन का भव्य मेला लगता है। इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि मंदिर परिसर और आसपास का इलाका पूरा आस्था के रंग में रंग जाता है। पंचमी और अष्टमी के दिन सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिन मंदिर परिसर में ही डेरा डालते हैं।</p>
<p><strong>मंदिर के आसपास का वातावरण</strong><br />मंदिर हरे-भरे वातावरण में स्थित है। आसपास के क्षेत्र में मेला लगने पर बड़ी संख्या में दुकानें सजती हैं। श्रद्धालु यहां से माता की प्रतिमाएं, नारियल, चुनरी और अन्य पूजा सामग्री खरीदते हैं। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि बीजासन माता शक्ति स्वरूपा हैं। यहां साधना करने से मानसिक शांति मिलती है। यही कारण है कि कई श्रद्धालु दिन-रात मंदिर में भजन-कीर्तन करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजन और हवन का आयोजन किया जाता है। माता के दरबार को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। बीजासन माता मंदिर सिर्फ धार्मिक धाम नहीं, बल्कि यह समर्पण और विश्वास का केन्द्र है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और मां से आशीर्वाद लेकर जाते हैं।</p>
<p><strong>यह बोले श्रद्धालु</strong><br />कुन्हाड़ी बीजासन माता में मेरी पूरी आस्था है, खड़ीपुर चित्तौड़ रोड से आया हंू। मेरे माताजी देवबाई को चलने में दिक्कत हो रही थी। तीन दिन से यहां रूके हुए है। रोज परिक्रमा भी कर रहे है। माता की कृपा से अब ठीक है।<br /><strong>-उच्छबलाल गुर्जर, खडीपुर, गरडिया महादेव के पास</strong></p>
<p>मैं अपनी पत्नी सेनाबाई के साथ आया हूं। मेरी पत्नी के दोनों हाथों में काफी दिक्कत थी। हम करीब 16 दिन से यहां रुके हुए है।  माता रानी की कृपा से अब काफी सुधार है।<br /><strong>-भोजराज, लठूरा, सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 15:21:22 +0530</pubDate>
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                <title>श्रद्धापूर्वक किया गया कार्य ही श्राद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धापूर्वक किया गया कार्य, जिससे पितरों को शांति मिलती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/shraddha-is-done-with-reverence/article-126729"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_400-px)-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धापूर्वक किया गया कार्य, जिससे पितरों को शांति मिलती है। श्राद्ध की उत्पत्ति पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता से हुई है, जिसकी शुरुआत वैदिक काल से मानी जाती है। महाभारत के अनुसार सबसे पहले महर्षि निमि ने अत्रि मुनि के उपदेश से श्राद्ध किया और यह परंपरा धीरे-धीरे प्रचलित हुई। पितृ दोष होने पर व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है,इसलिए पितृपक्ष में पितरों का स्मरण और पूजन करना आवश्यक है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पितर संबंधित कार्य करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस पक्ष में विधि-विधान से पितर संबंधित कार्य करने से पितरों का आर्शावाद प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>श्राद्धादि कर्म :</strong></p>
<p>श्राद्ध सूक्ष्म शरीरों के लिए वही काम करते हैं, जो कि जन्म के पूर्व और जन्म के समय के संस्कार स्थूल शरीर के लिए करते हैं। इसलिए शास्त्र पूर्व जन्म के आधार पर ही कर्मकाण्ड में श्राद्धादि कर्म का विधान निर्मित करते हैं। सभी संस्कारों विवाह को छोड़कर श्राद्ध ही ऐसा धार्मिक कृत्य है, जिसे लोग पर्याप्त धार्मिक उत्साह से करते हैं। विवाह में बहुत से लोग कुछ विधियों को छोड़ भी देते हैं। परन्तु श्राद्ध कर्म में नियमों की अनदेखी नहीं की जाती है, क्योंकि श्राद्ध का मुख्य उद्देश्य परलोक की यात्रा की सुविधा करना है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होकर करीब 16 दिनों तक चलने वाले श्राद्ध में अश्विन मास की अमावस्या तक पितृ पृथ्वी पर वास करेंगे। इन 16 दिनों तक पितरों को प्रसन्न करने के लिए उन्हे यज्ञ, जल से तर्पण दिया जाएगा। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए जगह-जगह पिंडदान, नारायण बलि, जल तर्पण आदि कर्मकांड़ों से उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश की जाती है।</p>
<p><strong>पितृप्राण पृथ्वी पर :</strong></p>
<p>आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक ब्रह्माण्ड की ऊर्जा तथा उस उर्जा के साथ पितृप्राण पृथ्वी पर व्याप्त रहता है। धार्मिक ग्रंथों में मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति का बड़ा सुन्दर और वैज्ञानिक विवेचन भी मिलता है। पुराणों के अनुसार पितृपक्ष में, जो तर्पण किया जाता है, उससे वह पितृप्राण स्वयं आप्यापित होता है। पुत्र या उसके नाम से उसका परिवार जौ तथा चावल का पिण्ड देता है। उसमें से अंश लेकर वह अम्भप्राण का ऋण चुका देता है। ठीक आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से वह चक्र उर्ध्वमुख होने लगता है। 15 दिन अपना-अपना भाग लेकर शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पितर उसी ब्रह्मांडीय उर्जा के साथ वापस चले जाते हैं। इसलिए इसको पितृपक्ष कहते हैं और इसी पक्ष में श्राद्ध करने से पित्तरों को प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>पूर्वजों के कारण :</strong></p>
<p>श्राद्ध पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता अभिव्यक्त करने तथा उन्हें याद करने के निमित्त किया जाता है। इसके पीछे मान्यता है कि जिन पूर्वजों के कारण हम आज अस्तित्व में हैं। जिनसे गुण हमें विरासत में मिलें हैं। उनका हम पर न चुकाए जा सकने वाला ऋण हैं। पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में जो तर्पण किया जाता है। उसके पीछे धार्मिक मान्यता है कि इससे पितरों को स्वर्ग प्राप्त होता है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। मंदिरों और नदियों के किनारे पितरों को तर्पण देने की सदियों से चली आ रही धार्मिक परम्परा आज भी अनवरत रूप से जारी है। श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धा सच्चा विश्वास और प्रेम से किया जाने वाला कर्मकांड, जो मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए किया जाता है। यह उनके प्रति कृतज्ञता, सम्मान और स्मरण भाव को व्यक्त करने का एक तरीका है, और इसके माध्यम से उन्हें संतुष्ट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।</p>
<p><strong>वैज्ञानिक पहलू भी :</strong></p>
<p>श्राद्ध का वैज्ञानिक पहलू भी है। वेदों में, दर्शन शास्त्रों में, उपनिषदों एवं पुराणों आदि में हमारे ऋषियों ने इस विषय पर विस्तृत विचार किया है। श्रीमद्भागवत गीता में भी स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जन्म लेने वाले की मृत्यु और मृत्यु को प्राप्त होने वाले का जन्म निश्चित है। यह प्रकृति का नियम है। शरीर नष्ट होता है मगर आत्मा कभी भी नष्ट नहीं होती है। वह पुन: जन्म लेती है और बार-बार जन्म लेती है। इस पुन: जन्म के आधार पर ही कर्मकाण्ड में श्राद्ध कर्म का विधान निर्मित किया गया है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है। श्रद्धया इदं श्राद्धम, अर्थात जो श्रद्धा से किया जाए वही श्राद्ध है। श्राद्ध प्रथा वैदिक काल के बाद शुरू हुई और इसके मूल में इसी श्लोक की भावना है। उचित समय पर शास्त्र सम्मत विधि द्वारा पितरों के लिए श्रद्धा भाव से मन्त्रों के साथ जो दान-दक्षिणा आदि दिया जाय वही श्राद्ध कहलाता है।</p>
<p><strong>विधान का उल्लेख :</strong></p>
<p>पुराणों में इसके आयोजन को लेकर कई कथाएं हैं। जिसमें कर्ण के पुनर्जन्म की कथा प्रचलित है। हिन्दू धर्म में सर्वमान्य श्री रामचरित में भी श्री राम के द्वारा राजा दशरथ और जटायु को गोदावरी नदी पर जलांजलि देने का उल्लेख है। भरत के द्वारा दशरथ हेतु दशगात्र विधान का उल्लेख भरत कीन्हि दशगात्र विधाना तुलसी रामायण में हुआ है। भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण प्रमुख माने गए हैं- पितृ ऋण, देव ऋण तथा ऋषि ऋण। इनमें पितृ ऋण सर्वोपरि है। पितृ ऋण में पिता के अतिरिक्त माता तथा वे सब बुजुर्ग भी सम्मिलित हैं, जिन्होंने हमें अपना जीवन धारण करने तथा उसका विकास करने में सहयोग दिया। पितृपक्ष में हिन्दू लोग मन कर्म एवं वाणी से संयम का जीवन जीते हैं। पितरों को स्मरण करके जल चढ़ाते हैं। निर्धनों एवं ब्राह्मणों को दान देते हैं। देश में श्राद्ध के लिए हरिद्वार, गंगासागर, जगन्नाथपुरी, कुरुक्षेत्र,चित्रकूट, पुष्कर, बद्रीनाथ सहित कई स्थानों को महत्वपूर्ण माना गया है। लेकिन गया का स्थान उसमें सर्वोपरि कहा गया है।</p>
<p><strong>-रमेश सर्राफ धमोरा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 12:10:55 +0530</pubDate>
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                <title>देव दीपावली पर जलाए आस्था के दीपक</title>
                                    <description><![CDATA[कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को देव दीपावली के रूप में मनाई गई। श्रद्धालुओं ने सुबह गलता तीर्थ में डुबकी लगाई, जो श्रद्धालु गलता या अन्य तीर्थ पर स्नान नहीं कर पाए उन श्रद्धालुओं ने तारों की छांव में घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dev-lit-the-lamp-of-faith-on-diwali/article-63013"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/dev-diwali.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को देव दीपावली के रूप में मनाई गई। श्रद्धालुओं ने सुबह गलता तीर्थ में डुबकी लगाई, जो श्रद्धालु गलता या अन्य तीर्थ पर स्नान नहीं कर पाए उन श्रद्धालुओं ने तारों की छांव में घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया। कार्तिक पूर्णिमा के साथ ही कार्तिक स्नान का समापन हुआ। स्नान के बाद सूर्य भगवान का मंत्र जप करते हुए अर्घ्य दिया। मंदिर में जाकर भोलेनाथ का अभिषेक किया। शाम को घरों और मंदिरों में दीपदान किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी और व्रत रखा। कई जगह व्रत का उद्यापन हुआ। </p>
<p>ज्योतिषाचार्य डॉ. महेंद्र मिश्रा ने बताया कि देव दिवाली पर रवि, परिघ और शिव तीन योग रहने से श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु का पूजन किया। प्रदोष काल में शाम को भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया। पूर्णिमा पर दान-पुण्य किया गया। श्रद्धालुओं ने बढ़ चढकÞर फल, अनाज, दाल, चावल, गर्म वस्त्रों का दान किया। कई श्रद्धालुओं ने गोशाला में हरी घास और धन का दान किया। शाम को छोटीकाशी के सभी मंदिरों में दीपदान होने से देवालय दिवाली की तरह जगमगा उठे। तुलसी के पौधों, चौराहों और पीपल के पेड़ पर दीपदान किया गया।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Nov 2023 12:39:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बागौरी माता का चमत्कार, चोर-डकैत अपनी योजना में रहते हैं विफल </title>
                                    <description><![CDATA[ भौनावास ग्राम के पास बागौरी की ढाणी की पहाड़ी में स्थित बागौरी माता का मंदिर करीब 500 साल से अधिक पुराना है। ग्रामीणों के अनुसार बागौरी माता के प्रताप से क्षेत्र में होने वाली अनहोनी की सूचना क्षेत्र वासियों को मिल जाती थी जिससे वे लोग सर्तक हो जाते थे। इस क्षेत्र में डकैतों की योजना विफल रहती थी जिससे डकैतों ने बागौरी माता की प्रतिमा की गर्दन पर वार किया जिसके बाद से प्रतिमा की गर्दन को पानी की जलहरी में रखा जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/miracle-of-bagori-mata--thieves-and-dacoits-fail-in-their-plan/article-12105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/13prag01.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रागपुरा।</strong> भौनावास ग्राम के पास बागौरी की ढाणी की पहाड़ी में स्थित बागौरी माता का मंदिर करीब 500 साल से अधिक पुराना है। ग्रामीणों के अनुसार बागौरी माता के प्रताप से क्षेत्र में होने वाली अनहोनी की सूचना क्षेत्र वासियों को मिल जाती थी जिससे वे लोग सर्तक हो जाते थे। इस क्षेत्र में डकैतों की योजना विफल रहती थी जिससे डकैतों ने बागौरी माता की प्रतिमा की गर्दन पर वार किया जिसके बाद से प्रतिमा की गर्दन को पानी की जलहरी में रखा जाता है। बागौरी नव युवक मंडल अध्यक्ष सतापाल सिंह ने बताया कि बागौरी माता का मदिर करीब 1800 मीटर की ऊंचाई पर था। ग्राम की एक वृद्धा जो माता की सेवक  थी। </p>
<p>वह मंदिर की चढ़ाई चढ़ने में परेशान होती थी तो उन्होंने माता से नीचे आने की विनती की। जिस पर माता करीब 100 मीटर नीचे आई, वहां उनका मंदिर बनाया गया। ग्रामजनों के अनुसार राजा आसकरण को माता ने दर्शन देकर यहां होने का सबूत दिया। नवरात्रा में प्रतिवर्ष महाराष्टा, पश्चिम  बंगाल, उड़ीसा, पंजाब सहित विभिन्न राज्यों के  दूरस्थ स्थानों से मंदिर में हजारों भक्त दर्शन व जात  जडूले करने आते हैं। अष्टमी को यहां विशाल मेला लगता है। ग्राम के पूर्व सरपंच व भामाशाह विशम्भर दयाल गोयल ने करीब 1000 मीटर तक सड़क व इसके  बाद  की चढ़ाई को सुगम बनाने</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 13:30:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के मौलाना इलियास द्वारा एक न्यूज चैनल में  देवाधिदेव महादेव के बारे में की गई अभद्र एंव आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष गिरीराज गौतम के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल द्वारा शिकायत दर्ज कराई एवं  देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/playing-with-faith-in-the-name-of-freedom-of-expression-cannot-be-tolerated/article-11667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/456.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । उत्तर प्रदेश के मौलाना इलियास द्वारा एक न्यूज चैनल में  देवाधिदेव महादेव के बारे में की गई अभद्र एंव आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष गिरीराज गौतम के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल द्वारा शिकायत दर्ज कराई एवं  देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा ।<br /><br /> गिर्राज गौतम ने कहा कि हम सभी धर्मो का सम्मान करते है लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कोई भी  हमारे आराध्य देवी - देवताओं के विरुद्ध कुछ भी अनर्गल अपमानजनक टिप्पणी करेगा तो उसे कानूनी रूप से सजा मिलनी चाहिए । इस देश में सभी को अपने धर्म को मानने का अधिकार है परंतु यह नहीं भूलना चाहिए कि सनातन संस्कृति हजारों वर्षों से भारत की पहचान रही है। शिव से ही संपूर्ण ब्रह्मांड का उदय हुआ है और सभी शिव में समाप्त हो जाते है। बिना शब्दों के अर्थों को जाने कुछ भी कह देने से देश ही नहीं बल्कि दुनिया में रहने वाले प्रत्येक हिंदू की आस्था को ठेस पहुंचती है । ऐसे व्यक्ति देश में सांप्रदायिक वातावरण को बिगाड़ने का भी काम करते हैं । ऐसे लोगों पर सरकार एवं प्रशासन को कठोर कार्रवाई करनी चाहिए । रावत ने कहा कि उन्हें उम्मीद है उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई करेगी। गौतम ने बताया कि परिवाद के माध्यम से  शिकायत दर्ज करवाई है । इस व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से समस्त राष्ट्र से माफी मांगने चाहिए । प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह भानावत, युवा नेता रवि चौधरी, किशोर सिंह राठौड़, शुभम सैनी, देव गौतम, दीपक सोनी आदि उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 18:43:48 +0530</pubDate>
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                <title>भंदे बालाजी में उमड़ा आस्था का सैलाब , बालाजी महाराज की भव्य झांकी व आरती </title>
                                    <description><![CDATA[भंदे बालाजी स्थल पर बालाजी के मुख्य मेले में श्रद्धालुओं द्वारा अपने आराध्य देवता बालाजी के चरणों में धोक लगाकर मनोकामना पूरी होने की कामना की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/influx--faith--in-bhande-balaji--grand--tableau--aarti--performed/article-10971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/hanumanj.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>फुलेरा।</strong> भंदे बालाजी स्थल पर मंगलवार को बालाजी के मुख्य मेले में श्रद्धालुओं द्वारा अपने आराध्य देवता बालाजी के चरणों में धोक लगाकर मनोकामना पूरी होने की कामना की। मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पुजारी रामदयाल शर्मा अशोक शर्मा के द्वारा सुबह बालाजी के भोग की भव्य झांकी व आरती की गई। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश पूनिया, मंत्री हनुमान बालोदिया, कोषाध्यक्ष हरजीराम चौधरी, सत्यनारायण कुमावत, रामजीलाल पापटवान, सवाई सिंह बारेठ, धनसिंह खंगारोत, बालूराम जॉखड़, हंसराज कुमावत भागचंद भटेश्वर, दीनदयाल शर्मा, कालूराम कुमावत, जगदीश कुमावत, समेत अन्य सदस्य मौजूद थे।</p>
<p><strong> पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संदेश</strong></p>
<p>मेले में फुलेरा के नो-ऑब्जेक्शन ग्रुप व अन्य  समाजसेवी  शिक्षण संगठनों की ओर से धर्मप्रेमियों को लस्सी, नींबू पानी, कैरी की छाछ, मिल्क रोज, शरबत, पोदीने का पानी, नोदलों की ढ़ाणी के नोदल परिवार द्वारा छाछ राबड़ी आदि की व्यवस्था की गई।  नो-आब्जेक्शन ग्रुप की और से नीम्बू पानी पिलाने के कार्य में निर्मल शर्मा, जितेन्द्र अग्रवाल, अशोक सोनी, इंद्रचंद शर्मा, सुनिल शर्मा,  महेश यादव, कैलाश निठारवाल, राकेश रूंथला, शेखर, विनोद सोनी, विमल सोनी, शेलेन्द्र शर्मा, रमेश सैनी, टीकम जाली, मूलचन्द देवन्दा, मेघराज कुमावत, दीपक कुमावत, नेमीचंद लाटा, ब्रिजेश कुमावत, दौलत कुमावत, रमेश जाखड़, बाबू सिंधी, राधा मोहन दाधीच, राजकुमार सैनी, केसर लाल, अमित सोनी, दीपक लाटा, मनीष शर्मा, शुभम खांडल सहित कई जनों ने सहयोग किया। नो-ऑबजेक्शन ग्रुप के द्वारा मेले में श्रद्धालुओं को प्लास्टिक के गिलास की जगह स्टील के गिलास से नींबू पानी व पानी पिला कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संदेश दिया।</p>
<p><strong>सम्मान समारोह</strong></p>
<p>भंदे हनुमान सेवा समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश  पूनिया द्वारा  मेले में सहयोग करने वाले भामाशाहों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह मे प्रहलाद शर्मा गोपाल लाल शर्मा गजानंद नागा भंवरलाल मामोडिया भगवान बाना सीताराम सहित अन्य लोग मौजूद थे। मंदिर के पास ही बीती रात श्री भंदे हनुमान सेवा समिति की और से रखे गए जागरण में परबतसर से पधारे कलाकार डालूराम सैनी, राजू सैनी के द्वारा भगवान गणेश की वंदना के साथ बालाजी महाराज के कई भजनो की मधुर प्रस्तुतियां दी गई। टीसीरिज गायक कमलेश शर्मा के द्वारा भी बालाजी के भजनो की प्रस्तुति दी गई। रात 12 बजे मुख्य गायक के रूप मे संत प्रकाश दास जी महाराज ने कई सुरीले भजनों की प्रस्तुतियां देकर रंग जमाया।  कार्यक्रम मे कलाकार गणेश जावला ने आर्गन, श्रीराम किशनगढ़  ने पेड, मीनू सिरस्ला ने ढोलक पर संगत की। मंच का संचालन समिति के पदाधिकारी रामजीलाल पापटवान ने किया। हनुमान सेवा समिति के रामजीलाल पापटवान, सत्यनारायण कुमावत, दीनदयाल शर्मा, हंसराज कुमावत, जगदीश कुमावत ने गायकों का सम्मान किया।</p>
<p><strong>युवाओं ने भंदे बालाजी स्थल तक पदयात्रा कर धर्मलाभ प्राप्त किया</strong></p>
<p>मेले में तेज धूप होने के बावजूद भी भक्तों की दर्शन के लिए रेलम पेल बनी रही। मेले में राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिचून के द्वारा 100 से अधिक लोगों को चिकित्सा का लाभ दिया गया। मेले का समापन बुधवार को आरती व प्रसाद वितरण के साथ होगा। ग्राम पंचायत काचरोदा यूथ कांग्रेसध्यक्ष मुकेश सैन के सानिध्य में सुबह 5 बजे युवाओं ने भंदे बालाजी स्थल तक पदयात्रा कर धर्मलाभ प्राप्त किया। समिति कोषाध्यक्ष हरजीराम चौधरी ने बताया कि वर्षो पूर्व बिणजारा अपनी नमक से भरी बेलगाडी में एक काले पत्थर की मूर्ति रखकर जा रहा था। भंदे के जंगल में मूर्ति गाड़ी से नीचे गिर गई तत्पश्चात बिणजारा व कई लोगों ने इस मूर्ति को पुन: बैलगाड़ी में रखने का पूरा प्रयास किया पर मूर्ति टस से मस तक भी नहीं हुई। लोगों व बिणजारे द्वारा मूर्ती को घुमटीनुमा चबूतरा बनाकर स्थापित कर दिया गया तथा लोग इस मूर्ति को भंदे बालाजी महाराज मानकर पूजा करने लगे।     </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 14:15:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हैप्पी मदर्स डे: बेटियों की जुबानी- मां विश्वास है, मां लड़ने की ताकत है और मां जीत की प्रेरणा है</title>
                                    <description><![CDATA[ यह कहना है जयपुर में खेली जा रही राष्ट्रीय अमेच्योर शतरंज प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आई बेटियों का। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--happy-mother-s-day--daughter-s-words---mother-is-faith--mother-is-the-strength-to-fight-and-mother-is-the-inspiration-to-win/article-9335"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/16.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। मां सिर्फ ममता, वात्सल्य और त्याग की मूरत ही नहीं बल्कि एक विश्वास है, लड़ने की ताकत है और जीत की प्रेरणा है। यह कहना है जयपुर में खेली जा रही राष्ट्रीय अमेच्योर शतरंज प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आई बेटियों का। प्रतियोगिता में आठ दौर की समाप्ति के बाद ये बेटियां इस मुकाम पर हैं कि रविवार को मदर्स डे के दिन अपनी मां को जीत का तोहफा दे सकती हैं। दिल्ली से अपनी मां रीना गुप्ता के साथ आई प्रीशिता गुप्ता अंडर-11 की नेशनल चैंपियन और दिल्ली की स्टेट चैंपियन हैं और यहां अंडर-1700 रेटिंग वर्ग में खिताब की प्रबल दावेदार बनी हैं। अंडर-12 की नेशनल चैंपियन गाजियाबाद (उप्र) की सुरभि गुप्ता भी अंडर-2000 रेटिंग वर्ग में जीत की मजबूत दावेदार हैं और मां उर्मिला गुप्ता को जीत का तोहफा देंगी। गुड़वांग (हरियाणा) से मां विभूति अग्रवाल को साथ आई इश्वी अग्रवाल अंडर-2300 रेटिंग वर्ग में पहली बार राष्ट्रीय खिताब के करीब पहुंच गई हैं। बड़ौदा की प्रियंका शाह प्रतियोगिता में अपनी बेटी श्रेया शाह को लेकर आई हैं। देशभर में कहीं भी प्रतियोगिता हो, प्रियंका बेटी के साथ ही रहती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 May 2022 13:22:11 +0530</pubDate>
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