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                <title>faculty - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एसएमएस मेडिकल कॉलेज : महिला फैकल्टी ने अपने ही विभाग में काम करने वाले प्रोफेसर पर लगाया बदसलूकी और छेड़छाड़ का आरोप, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में एक प्रोफेसर पर महिला फेकल्टी ने बदसलूकी और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने जांच के लिए कमेटी गठित की। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने रिपोर्ट तलब की है। कमेटी की रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी गई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sms-medical-college-women-faculty-accused-the-professor-working-in/article-144267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/sms-medical-college.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में एक प्रोफेसर पर उन्हीं के विभाग में काम करने वाली महिला फेकल्टी ने बदसलूकी और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। मामले की शिकायत आने के बाद जांच के लिए कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने इसके लिए एक जांच कमेटी बनाई है। वहीं, इस मामले में प्रमुख शासन सचिव मेडिकल डिपार्टमेंट गायत्री राठौड़ ने भी रिपोर्ट तलब की है। शिकायत मिलने पर इसकी जांच के लिए प्रिंसिपल ने सीनियर प्रोफेसर डॉ. एस.एम. शर्मा की निगरानी में एक जांच कमेटी बनाई।</p>
<p>इस मामले में प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि शिकायत मिली थी, जिसकी जांच के लिए कमेटी बनाई थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पीएचएस को भेज दी है। रिपोर्ट के आधार पर उच्च स्तर पर जो निर्णय होगा, उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p><strong>यह होंगे कमेटी में :</strong></p>
<p>कमेटी में दो एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. आर. के. जैन, डॉ. मोनिका जैन के अलावा एक पूर्व अतिरिक्त प्रिंसिपल बी.एल. कुमावल, स्टडेंट वेलफेयर डीन डॉ. अनिता सिंघल के अलावा दो अन्य अधिकारी और विभाग के अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष को नियुक्त किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 15:22:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाड़ौती के 19 कॉलेजों में 316 शिक्षकों के पद खाली, बारां गवर्नमेंट कॉलेज की अजीब स्थिति, 60% से ज्यादा पद रिक्त </title>
                                    <description><![CDATA[विद्यार्थी बोले-भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा उच्च शिक्षा विभाग ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/316-teacher-positions-vacant-in-19-colleges-of-hadoti--dire-situation-at-baran-government-college--more-than-60--of-positions-vacant/article-131982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(20).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के 19 राजकीय महाविद्यालयों में  300 से ज्यादा शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। फैकल्टी के अभाव में शिक्षा से गुणवत्ता दूर होती जा रही है। हालात यह हैं, गणित से लेकर संस्कृत तक की कक्षाएं तक नहीं लग रही। नतीजन, विद्यार्थी बिना पढेÞ ही परीक्षा देने को मजबूर हो रहे हैं। जिसका असर गत वर्षों में परीक्षा परिणामों पर देखने को मिल चुका है। उच्च शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण कई विद्यार्थी बैक की मार झेल रहे हैं। इधर, शिक्षाविदें का कहना है कि जब पढ़ाने को शिक्षक ही नहीं होंगे तो विद्यार्थी में विषयों की समझ विकसित होना संभव नहीं हो पाएगा। गणित, राजनेतिक विज्ञान जैसे विषयों की कक्षाएं नहीं लगना चिंता का विषय है। </p>
<p><strong>संभाग में सबसे ज्यादा बूंदी गवर्नमेंट कॉलेज में पद खाली</strong><br />कोटा संभाग में सबसे ज्यादा शिक्षकों के पद राजकीय महाविद्यालय बूंदी में खाली हैं। यहां कुल 107 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से मात्र 53 कार्यरत हैं। जबकि, 54 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। जिससे मौजूद शिक्षकों पर वर्कलोड बढ़ रहा है। दो सेशनों के बच्चों को एक साथ बिठाकर पढ़ाने पढ़ता है। नतीजन, यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार, 40 बच्चों पर एक शिक्षक होना संभव नहीं हो पा रहा। शिक्षकों की आवाज क्लास में बैठे आखिरी बच्चों तक नहीं पहुंच पाती। जिससे उन्हें विषय के टॉपिक समझने में परेशानी होती है। </p>
<p><strong>बारां कॉलेज की अजीब स्थिति : 63 में 44 शिक्षक ही नहीं</strong><br />हाड़ौती में उच्च शिक्षा की सबसे ज्यादा स्थिति गवर्नमेंट  बारां कॉलेज की है। यहां शिक्षकों के 63 पद स्वीकृत है, जिसमें से 44 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग प्रतिनियुक्ति निरस्त नहीं कर रहा। जबकि, बारां कॉलेज में आर्ट्स, साइंस व वाणिज्य संकाय संचालित हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं, हर छह की जगह तीन माह में सेमेस्टर एग्जाम हो रहे हैं। लेकिन, शिक्षकों के अभाव में कोर्स ही पूरा नहीं हो पा रहा। </p>
<p><strong>महत्वपूर्ण विषयों की नहीं लगती कक्षाएं</strong><br />जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बारां कॉलेज में गणित की शिक्षिका पिछले 2 साल से कोटा गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। जबकि, बारां कॉलेज में गणित का एक ही शिक्षक था, जिनके डेपुडेशन पर चले जाने से वह पद भी खाली हो गया। ऐसे में वहां गणित की कक्षाएं तक नहीं लगती। इसी तरह कोटा ग्रामीण के इटावा महाविद्यालय में लंबे वर्षों से 3 शिक्षक राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी और संस्कृत के शिक्षक चुरू, मेडता सिटी और बस्सी जयपुर गवर्नमेंट कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यहां इन विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। ऐसे में रे-सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है। </p>
<p><strong>6 दिन कोटा से इटावा-सांगोद में आती फैकल्टी तो लगती क्लास</strong><br />शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय  पर एक रे-सेंटर बनाया गया है। यह सेंटर जिले में मौजूद सभी गवर्नमेंट कॉलेजों में से एक महाविद्यालय को रे-सेंटर बनाया जाता है। जिससे अन्य राजकीय महाविद्यालय जुड़े रहते हैं।   ऐसे में जिन कॉलेजों में सब्जेक्ट टीचर नहीं होता वहां प्राचार्य के आग्रह पर एक माह में 6 दिन के लिए शिक्षक भेजा जाता है। लेकिन, कोटा के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इटावा, सांगोद कॉलेजों में तीन से चार महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। ऐसे में 6-6 दिन के लिए यहां रे-सेंटर से शिक्षक भेजे  जाते हैं। नतीजन, अधिकांश कॉलेजों में शिक्षक नहीं है, ऐसे में रे-सेंटर पर शिक्षक भेजने का भार बढ़ जाता है। जिसकी वजह से संबंधित कॉलेजोें को शिक्षकों के लिए 2 से 3 महीने तक का इंतजार करना पड़ जाता है। </p>
<p><strong>गणित से राजनीतिक विज्ञान तक की कक्षाएं खाली</strong><br />कॉलेज शिक्षा सहायक निदेशक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बारां कॉलेज में गणित की शिक्षिका पिछले 2 साल से कोटा गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। जबकि, बारां कॉलेज में गणित का एक ही शिक्षक था, जिनके डेपुडेशन पर चले जाने से वह पद भी खाली हो गया। ऐसे में वहां गणित की कक्षाएं तक नहीं लगती। इसी तरह कोटा ग्रामीण के इटावा महाविद्यालय में लंबे वर्षों से 3 शिक्षक राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी और संस्कृत के शिक्षक चुरू, मेडता सिटी और बस्सी जयपुर गवर्नमेंट कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यहां इन विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। हालांकि, रे-सेंटर से 6 दिन के लिए कोटा से फेकल्टी बुलानी पड़ती है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कॉलेज में पिछले दो साल से राजनेतिक विज्ञान व हिन्दी की नियमित कक्षाएं नहीं लगी। सेमेस्टर प्रणाली के तहत हर तीन माह में एग्जाम हो रहे हैं। लेकिन, शिक्षकों के अभाव में न तो परीक्षा की तैयारी होती है और न ही सिलेबस समझाया जाता है। मजबूरन, ट्यूशन व वन वीक सीरीज का सहारा लेना पड़ रहा है। <br /><strong>- लोकेश मेहरा, प्रवीण छात्र, इटावा कॉलेज</strong></p>
<p>एडमिशन व एग्जाम फीस देने के बाद भी राजनेतिक विज्ञान जैसे मुख्य विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं मिल रहे। बिना पढेÞ ही परीक्षा देने को मजबूर हो रहे हैं। परीक्षा में नम्बर कम आते हैं। शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम में भुगतना पड़ा है।  <br /><strong>- गौरव नायर, अंकित मीणा,  छात्र  सांगोद </strong></p>
<p>गवर्नमेंट आटर्Þ्स कॉलेज कोटा में शिक्षकों के 111 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 45 शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। जबकि, यह कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा महाविद्यालय है। इसके बावजूद विभाग द्वारा शिक्षकों के पदों को नहीं भरा जा रहा। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरकार को जल्द से जल्द रिक्त पद भरकर शिक्षण व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।<br /><strong>- रिद्धम शर्मा, छात्र नेता, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आरपीएससी के माध्यम से दिसम्बर में शिक्षक भर्ती परीक्षा है। जिसमें सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के बाद सरकार द्वारा कॉलेजों में ज्वाइनिंग दी जाएगी। जिससे रिक्त पद भर सकेंगे। रही बात, महत्वपूर्ण विषयों की क्लास नहीं लगने की तो जिन महाविद्यालयों में यह समस्या है, वहां के प्राचार्य के आग्रह पर रे-सेंटर से 6-6 दिन के लिए शिक्षण कार्य के लिए शिक्षक लगा दिए जाते हैं।  सरकार की ओर से क्वालिटी एजुकेशन देने के प्रयास लगातार जारी है।<br /><strong>- डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 16:34:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> हाड़ौती के दो बड़े कॉलेजों में 37 शिक्षकों के पद रिक्त, दो सेशन के विद्यार्थियों को एक साथ बिठाकर लगानी पड़ती है क्लास</title>
                                    <description><![CDATA[सेमेस्टर के तहत हर 6 माह में एग्जाम होते हैं लेकिन शैक्षणिक सत्र लेट चलने से ढाई से तीन माह में ही परीक्षा हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thirty-seven-teaching-positions-are-vacant-in-two-major-colleges-in-hadoti--forcing-students-from-two-semesters-to-sit-together-for-classes/article-129639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(25).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के दो बड़े गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज में स्टूडेंट्स ही नहीं फैकल्टीज की भी आधी से ज्यादा सीटें खाली हैं। वाणिज्य महाविद्यालयों में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों  के मुकाबले आधे से ज्यादा पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। जिससे विद्यार्थियों पढ़ाई में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। समय पर कक्षाएं नहीं लगने सहित अन्य समस्याओं के कारण विद्यार्थियों का भी नियमित कॉलेज आने में रुझान घटने लगा है। इधर, विशेषज्ञों का तर्क है कि वर्तमान दौर आर्टिफिशल इंटेलीजेंस से रुबरू हो रहा है लेकिन कॉमर्स के पाठ्यक्रम में एआई की उपयोगिता को शामिल नहीं किया गया। साथ ही महाविद्यालयों में थ्यौरी के अलावा प्रेक्टिकली नॉलेज का अभाव भी घटते रुझान का बड़ा कारण है। क्योंकि, कॉमर्स पढ़ने वाले छात्रों की कमी का असर आगामी वर्षों में फैकल्टीज के रूप में नजर आएगा।  यही वजह है कि कॉलेजों में आज स्वीकृत पदों के विपरीत  रिक्त पदों की संख्या अधिक है। </p>
<p><strong>बॉयज में 7.50 तो गर्ल्स कॉलेज में 5.50 सौ स्टूडेंट्स ने एडमिशन नहीं लिया  </strong><br />वाणिज्य उच्च शिक्षा में घटते रुझान का सबसे बड़ा उदारहण  बयॉज व गर्ल्स कॉमर्स कॉलेज की प्रथम वर्ष की सीटों के आंकड़ों से स्पष्ट होते हैं। गवर्नमेंट कॉमर्स में बीकॉम फर्स्ट ईयर में 1400 सीटें हैं, जिन पर 6.50 ही एडमिशन हुए हैं। शेष 7.50 सौ विद्यार्थियों ने दाखिला लेने में ही रुचि नहीं दिखाई। इसी तरह गर्ल्स कॉलेज में 800 सीटों के मुकाबले 250 छात्राओं ने ही एडमिशन लिया है और 5.50 सौ सीटें खाली रह गई। </p>
<p><strong>शिक्षा से दूर हो रही क्वालिटी</strong><br />विषयवार प्रोफेसरों के पद रिक्त होने का विपरीत असर कॉलेज शिक्षा में देखने को मिल रहा है। उच्च शिक्षा से क्वालिटी दूर होती जा रही है। हालात यह है, यहां बच्चे सालभर में बहुत ही कम समय कॉलेज आते हैं। जिसमें पहली बार कॉलेज में नामांकन कराने, दूसरी बार परीक्षा फार्म भरने व तीसरी बार परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड लेने और चौथी बार परीक्षा देने के लिए पहुंचते हैं। क्योंकि, कॉलेज में विषयवार शिक्षकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई प्रभावित रहती है।  विद्यार्थी अखिलेश नागर, दीपांशु मेहरा ने बताया कि सेमेस्टर प्रणाली के तहत हर 6 माह में एग्जाम होते हैं लेकिन शैक्षणिक सत्र लेट चलने से ढाई से तीन माह में ही परीक्षा हो रही है। ऐसे में शिक्षकों की कमी से कोर्स भी पूरा नहीं हो पाता। </p>
<p><strong>दोनों कॉलेजों में 67 में से 37 शिक्षकों के पद रिक्त </strong><br />आयुक्तालय के क्षेत्रिय सहायक निदेशक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बयॉज व गर्ल्स कॉलेजों में  शिक्षकों के कुल 67 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 30 ही कार्यरत हैं। ऐसे में 37 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इनमें अकाउंटिंग, अर्थशास्त्र तथा बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्ल्स कॉलेज में अकाउंटिंग में शिक्षकों के 8 पद स्वीकृत हैं, जिसके मुकाबले 2 , बीएडीएम में 8 के विपरीत 4 तथा इकोनोमिक्स में 7 के मुकाबले 4 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।</p>
<p><strong>कॉमर्स के प्रति घटते रुझानके प्रमुख कारण</strong><br />कोटा विश्वविद्यालय में वाणिज्य एवं प्रबंध विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. मीनू माहेश्वरी बतातीं हैं, कोटा सहित प्रदेश में लगातार कॉमर्स के प्रति रुझान घट रहा है। जिसका विपरीत असर फैकल्टीज की उपलब्धता में कमी के रूप में भी देखे जा रहे हैं। हालांकि, रुझान घटने के कई प्रमुख कारण हैं,जो इस प्रकार हैं। <br />- वर्तमान में विद्यार्थी 11वीं-12वीं में कॉमर्स विषय का चयन करते हैं, जबकि कई वर्षों पहले 9वीं कक्षा से ही वाणिज्य शिक्षा शुरू हो जाती थी और सीनियर सैकंडरी तक विद्यार्थी कॉमर्स में कॅरियर के विकल्पों से परिचित हो जाते और उच्च शिक्षा में स्पेशलाइजेशन कर किस क्षेत्र में कॅरियर बनाना है, इससे भलीभांती परिचित हो सकते हैं।  <br />- स्कूल शिक्षा में कॉमर्स अभ्यर्थियों को केवल फर्स्ट ग्रेड शिक्षक बनने का आॅप्शन रहता है। हालांकि, थर्ड ग्रेड में भी शिक्षक बन सकते हैं लेकिन सैकंड ग्रेड में कॉमर्स विषय नहीं मिलता।<br />- जूनियर अकाउंटेंट परीक्षा के लिए साइंस-आर्ट्स के अभ्यर्थी भी पात्र होते हैं, जबकि यह क्षेत्र कॉमर्स का है फिर भी वरियता नहीं है। </p>
<p><strong>यूं बढ़ सकता है वाणिज्य के प्रति रुझान</strong><br />- लेखांकन, वित्त, अंकेक्षण, बीमा, इनकम टैक्स, इंश्योरेंस के अध्यापन को बढ़ावा देने के लिए स्कूली शिक्षा में कक्षा-6 से ही हिन्दी, अंगे्रजी, सामाजिक विज्ञान सहित अन्य विषयों के साथ वाणिज्य शिक्षा को भी शुरू किया जाना चाहिए।<br />- प्राथमिक कक्षाओं से ही वाणिज्य पढ़ाया जाए  तो न केवल विद्यार्थियों का रुझान बढ़ेगा बल्कि शिक्षकों की आवश्यकता भी बढ़ेगी। जिससे नए पद सजृन होंगे और आगे जाकर विद्यार्थी शिक्षक बन कॅरियर बना सकेंगे। <br />- प्रतियोगी परीक्षा जूनियर अकाउंटेंट, अकाउंटेंट जैसी परीक्षाओं में कॉमर्स अभ्यर्थियों को वरियता दी जानी चाहिए। इन परीक्षाओं के सिलेबस में 80% प्रश्न वाणिज्य से संबंधित होने चाहिए। <br />- यूजीसी की नेट परीक्षा कॉमर्स से संबंधित अन्य विषयों में भी करवाई जानी चाहिए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br />कॉलेजों में अकाउंट्स, अर्थशास्त्र व बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन के शिक्षकों के पद पिछले चार-पांच सालों से चल रहे हैं। जो टीचर्स कार्यरत हैं, उनमें से कुछ को गैर शैक्षणिक कार्य एनएसएस, छात्रवृति, स्पोर्ट्स कई गतिविधियों में लगा रखा है। ऐसे में यह शिक्षक अपनी क्लास नहीं ले पाते। नतीजन, पढ़ाई का नुकसान होता है। <br /><strong>-अर्पित जैन, निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p>कॉलेजों में पहले ही सब्जेक्ट टीचर्स की कमी है और प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर भी बना दिया जाता है। जिससे पढ़ाई ठप हो जाती है। क्योंकि, पेपर तक महाविद्यालय में छुट्टियां लगी होती है। वहीं, दो-दो सेशन के बच्चों को एक साथ बिठाकर पढ़ाना मजबूरी बन जाती है। <br /><strong>-सतीश कुमार, बलवीर, छात्र कॉमर्स कॉलेज </strong></p>
<p>कॉमर्स कॉलेजों में फैकल्टीज के पद व प्रथम वर्ष की सीटें आधी से ज्यादा खाली हैं। वर्तमान में आरपीएससी से शिक्षकों की चयन प्रक्रिया चल रही है। आर्ट्स-साइंस के शिक्षक मिल चुके हैं। जल्द ही कॉमर्स के भी मिलने की संभावना है। सरकार रिक्त पदों को भरने की पूरा प्रयास कर रही है। वहीं, विद्यार्थियों में रुझान बढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम में जॉब आॅरियंटेड टॉपिक को शामिल किए जा रहे हैं। <br /><strong>-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 16:48:53 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - विज्ञान संकाय खुला, छात्र-छात्राओं को नहीं जाना पड़ेगा बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[ दैनिक नवज्योति ने खबर प्रकाशित कर उठाया था मामला ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-news---science-faculty-opened--students-will-not-have-to-go-outside/article-119356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news8.png" alt=""></a><br /><p>पेच की बावड़ी। कस्बे के राउमावि में विज्ञान एवं कृषि संकाय की मांग को लेकर विगत एक वर्ष से जारी प्रयास को बुधवार को विराम लग गया। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर द्वारा राजस्थान में कुल 93 विद्यालयों में इसी सत्र में 11 कक्षा के लिए विज्ञान, कला, कृषि, वाणिज्य संकाय शुरू करने की स्वीकृति प्रदान की गई। जिसमें बूंदी जिले के दो तलवास और पेच की बावड़ी विद्यालय में संकाय खोले जाने की स्वीकृति प्राप्त हुई। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने स्थानीय छात्र-छात्राओं की परेशानी देखते हुए प्रमुखता के साथ स्टोरी प्रकाशित कर इस मामले को उठाया था।  राउमावि पेच की बावड़ी में विज्ञान, कृषि संकाय नहीं होने की वजह से क्षेत्र के छात्र-छात्राएं मजबूरन देवली, कोटा व बूंदी जाकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर थे। इस समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति ने सबसे प्रथम जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर छात्र छात्राओं की आवाज को बुलंद करने का काम किया। एक वर्ष के निरंतर प्रयास की वजह से स्थानीय विद्यालय को विज्ञान संकाय का तोहफा मिला। जिसमें 11 कक्षा में इसी सत्र में छात्र छात्राएं जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान में प्रवेश लेकर अध्ययन कर सकेंगे।</p>
<p><strong>डॉक्टर बनने का सपना अब हो सकेगा साकार </strong><br />स्थानीय विद्यालय में विज्ञान संकाय की स्वीकृति मिलने पर अब कस्बे सहित आसपास के गांवों के सैंकड़ों छात्र-छात्राओं को अब विज्ञान विषय पढ़कर डॉक्टर बनने का सपना संजोए बैठे युवाओं का अब सपना साकार हो सकेगा। बुधवार को ज्योंहि विज्ञान संकाय स्वीकृति आदेश प्राप्त होते ही स्कूल प्राचार्य शंकर लाल मीना सहित विद्यालय स्टाफ एवं ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय विद्यालय में जनप्रतिनिधियों, विद्यालय स्टाफ सहित छात्र छात्राओं ने मुंह मीठा करवा कर खुशियां मनाई। स्थानीय विद्यालय में बुधवार को प्राचार्य शंकर लाल मीना द्वारा भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष शौकीन राठौर, भाजपा मंडल अध्यक्ष बाबूलाल मीना, समाजसेवी सीपी योगी का तिलक एवं माला पहनाकर मुंह मीठा कराकर आभार जताया।</p>
<p><strong>एक वर्ष से नहीं बनाई दाढ़ी </strong><br />स्थानीय विद्यालय में विज्ञान संकाय की मांग को लेकर भाजपा मंडल अध्यक्ष बाबूलाल मीना ने एक वर्ष से अपनी दाढ़ी नहीं बनाई। उन्होंने दृढ़ संकल्पित होकर पिछले वर्ष जुलाई में कहा था कि जब तक विज्ञान संकाय नहीं खुलता में दाढ़ी नहीं बनाऊंगा। अब स्वीकृति प्राप्त हुई हे जल्द ही अपना संकल्प पूरा करेंगे।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति का जताया आभार</strong><br />भाजपा मंडल अध्यक्ष बाबूलाल मीना ने स्थानीय विद्यालय में विज्ञान संकाय खुलने की स्वीकृति प्राप्त होने पर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष प्रभुलाल सैनी, मोतीलाल मीना, सांसद दामोदर अग्रवाल, भाजपा जिला अध्यक्ष रामेश्वर मीना व दैनिक नवज्योति का आभार प्रकट किया। रमेशचंद वर्मा, सतीश तोषनीवाल, मधुबाला मीना, ओमप्रकाश प्रजापत, सीताराम कुमावत, शिवांगी दाधीच, रामराज मीना, धर्मसिंह मीना, अशोक लाठी, चंद्रशेखर स्वर्णकार सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कस्बे के राउमावि में विज्ञान संकाय खुलवाने की मांग को लेकर विगत एक वर्ष से प्रयासरत थे। हम सब लोगों का प्रयास एवं मेहनत रंग लाई। अब क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को देवली, कोटा या बूंदी नहीं जाना पड़ेगा।<br /><strong>-सीमा मीणा, प्रशासक, ग्राम पंचायत पेच की बावड़ी </strong></p>
<p>स्थानीय विद्यालय में विज्ञान संकाय में जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान विषय में अब छात्र-छात्राएं इसी सत्र में 11 वीं कक्षा में प्रवेश ले सकेंगे। क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को अन्यत्र नहीं जाना पड़ेगा।<br /><strong>-शंकरलाल मीना, प्राचार्य, राउमावि, पेच की बावड़ी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Jul 2025 17:48:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एलन कोचिंग के फैकल्टी ने फांसी का फंदा लगाकर की आत्महत्या </title>
                                    <description><![CDATA[हालत गंभीर होने पर निजी अस्पताल में रैफर किया था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/allen-coaching-faculty-commits-suicide-by-hanging-himself/article-95244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(10).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में एलन कोचिंग संस्थान के एक फैकल्टी ने फंसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने रविवार को शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले में पुलिस ने परिजनों की रिपोर्ट पर संदिग्ध मौत का मुकदमा दर्ज किया गया है। फैकल्टी हेमंत चौधरी (46) पुत्र रवि शंकर निवासी विवेकानंद नगर हाल लैंड मार्क सिटी पैराडायज रेजीडेंसी कुन्हाड़ी के ब्लॉक नं. छह ने 14 नवंबर की रात को अपने फ्लैट में फंसी का फंदा लगा लिया था। जिससे अचेत हो गया था। पत्नी ने शोर मचाया तो  पड़ोस में रहने वालों ने उसे फंदे से नीचे उतारा था और एमबीएस अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां से हालत गंभीर होने पर निजी अस्पताल में रैफर किया था। वहां शनिवार अल सुबह 4 बजे उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस निरीक्षक अरविंद कुमार भारद्वाज ने बताया कि 14 नवंबर रात करीब 11 साढ़े 11 बजे सूचना मिली थी कि लैंड मार्क सिटी पैराडाइज रेजीडेंसी में एक एलन कोचिंग संस्थान के फैकल्टी हेमंत चौधरी ने चुन्नी से फांसी का फंदा लगा लिया है। इससे उनकी हालत गंभीर है और निजी अस्पताल में ले जाया गया है। इस पर निजी अस्पताल गए और हेमंत का बयान लेने का प्रयास किया, लेकिन बोलने की स्थिति में नहीं थे। बाद में उन्हें वहां से झालावाड़ रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उनकी मौत हो गई। मामले में भतीजे देवेन्द्र चौधरी की रिपोर्ट पर संदिग्ध मौत का मुकदमा दर्ज किया गया। मामले में अनुसंधान किया जा रहा है। </p>
<p><strong>25 साल से पढ़ा रहा था एलन में </strong><br />रिश्तेदार कुलदीप ने बताया कि हेमंत चौधरी पिछले 25 साल से एलन कोचिंग संस्थान में 10वीं,11वी तथा 12 वीं के बच्चों को कैमिस्ट्री पढ़ाता था। वह शादी के बाद से परेशान रहता था। पत्नी से नहीं बनती थी। पिता रविशंकर चौधरी एग्री कल्चर विभाग में अधिकारी थे और उनकी करोना काल में मौत हो गई थी। इसके बाद से उनकी मां को पेंशन मिल रही थी। और मां विवेकानंद नगर के मकान में रहती है और दो बहनों की शादी हो गई। शादी के बाद से पत्नी की उनकी मां से भी नहीं बनती थी, तो हेमंत चौधरी ने पैराडायज में फ्लैट लिया था। इसके बाद से वह पत्नी के साथ रहते थे। </p>
<p><strong>पत्नी है फर्स्ट ग्रेड टीचर</strong><br /> जीजा वीरेंद्र ने बताया कि हेमंत का परिवार विवेकानंद नगर क्षेत्र बने मकान में रहता है। 10 महीने पहले ही हेमंत की शादी हुई थी, हेमंत की पत्नी फर्स्ट ग्रेड टीचर है, उसने हेमंत से दूसरी शादी की थी, शादी के बाद से दोनों लैंडमार्क इलाके में फ्लेट में रह रहे थे। 14 नवंबर को विवेकानंद नगर में हेमंत शादी समारोह में आया था और  खाना खाने के बाद साढ़े 9 बजे लौट गया था।  रात 10 बजे करीब उसके द्वारा फंसी का फंदा लगाने की जानकारी मिली थी। </p>
<p><strong>फरवरी 2023 में हुई थी शादी</strong><br />एसआई भंवर सिंह ने बताया कि मामले में जानकारी मिली है कि हेमंत चौधरी की फरवरी 2023 में शादी हुई थी और पति-पत्नी दोनों पैराडाइज में रहते थे तथा मां विवेकानंद नगर स्थित मकान में रहती हैं। परिजनों ने पुलिस को जानकारी दी कि हेमंत की शादी के बाद से पत्नी से अनबन रहती थी तथा लड़ाई झगड़ा होता रहता था, लेकिन किस कारण से होता था, इस बात की स्पष्ट जानकारी अभी नहीं मिली है। जांच के बाद ही आत्महत्या के कारण को पता चल सकेगा, अभी तक कोई पता नहीं चला है। अनुसंधान जारी है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मामले में एलन कोचिंग संस्थान के निदेशक नवीन माहेश्वरी, गोविंद माहेश्वरी तथा राजेश माहेश्वरी प्रबंधक नीतेश शर्मा को फोन किया गया। इसके बाद भी उन्होंने अपना पक्ष रखने के लिए फोन को रिसीव नहीं किया तथा उन्हें वाट्सएप और टैक्स मैसेज भी  दिया गया, लेकिन उसके बाद भी अपना पक्ष नहीं दिया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 11:31:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>डेढ़ माह में परीक्षा, कक्षाएं खाली, बढ़ी धड़कनें</title>
                                    <description><![CDATA[विद्या संबल पर भी नहीं लगा पा रहे फैकल्टी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exams-in-one-and-a-half-month--classes-empty--heartbeats-increased/article-94951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>क ोटा। स्नातक प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का काउंट-डाउन शुरू हो गया है। इसी के साथ विद्यार्थियों की धड़कनें भी तेज हो गई है। क्योंकि, डेढ़ माह बाद सेमेस्टर एग्जाम शुरू होने हैं लेकिन संभाग के दस राजकीय महाविद्यालयों में आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं नहीं लग रही। ऐसे में परीक्षा से पहले सिलेबस पूरे नहीं होने की चिंता से विद्यार्थी तनाव से गुजर रही है।  दरअसल, हाड़ौती के चारों जिलों में करीब 44 सरकारी महाविद्यालय हैं। जिनमें से 10 ऐसे हैं जहां आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं है। मजबूरन, विद्यार्थियों को महंगे दामों पर टयूशन का सहारा लेना पड़ता है। सरकार की अनदेखी का खामियाजा हर साल विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>भूगोल से अर्थशास्त्र तक पढ़ाने वाला कोई नहीं</strong><br />संभाग के 10 राजकीय महाविद्यालयों में आधा दर्जन विषयों के शिक्षक नहीं है। जिसकी वजह से उनकी कक्षाएं नहीं लगती है। जबकि, कॉलेज प्रशासन  द्वारा छात्रों से एडमिशन व एग्जाम फीस पूरी वसूली जाती है।  हालात यह हैं, प्रायोगिक विषयों के प्रेक्टिल करवाने से लेकर पेपर पैटर्न समझाने वाला तक कोई नहीं है। भूगोल से लेकर अर्थशास्त्र तक जैसे कठिन विषयों को पढ़ाने वाला नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सता रहा है।</p>
<p><strong>यहां इन विषयों की नहीं लगती कक्षाएं </strong><br />कोटा जिले के राजकीय महाविद्यालय इटावा में राजनेतिक राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी, संस्कृत, सांगोद में राजनेतिक विज्ञान, ज्योग्राफी, रामगंजमंडी में अंगे्रजी, अटरू में भूगोल, अंगे्रजी, बारां गवर्नमेंट कॉलेज में इतिहास, केलवाड़ा में अंग्रेजी, शाहबाद में अर्थशास्त्र,गवर्नमेंट कॉलेज बारां में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन व इतिहास, अटरू व शाहबाद कन्या महाविद्यालय में अंगे्रजी तथा राजकीय कला महाविद्यालय मांगरोल में भी अंगे्रजी के शिक्षक नहीं होने से कक्षाएं नहीं लग पाती।</p>
<p><strong>नियमों की पेचीदगी ने बिगाड़ा शिक्षा का गणित</strong><br />राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों का कहना है, अधिकतर महाविद्यालयों में उन्हीं विषयों के पद खाली हैं, जिनके शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर कहीं दूसरे जिलों के कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में संकट यह है कि उनकी जगह पर संबंधित महाविद्यालय विद्या संबल पर शिक्षक भी नहीं लगा सकते। क्योंकि, प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों की जगह खाली होती हुई भी सरकार की नजरों में खाली नहीं है। ऐसे में आयुक्तालय से उनकी जगहों पर विद्या संबल पर शिक्षक लगाने का भी मंजूरी नहीं मिल रही। ऐसे में संभाग के इन दस कॉलेजों में राजनेतिक विज्ञान से लेकर संस्कृत तक की कक्षाएं खाली रहती हैं, यहां विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला कोई नहीं है। </p>
<p><strong>एक माह में 6 दिन ही मिलती उधार की फैकल्टी</strong><br />राजकीय महाविद्यालय इटावा के प्राचार्य डॉ. रामदेव मीणा ने बताया कि गवर्नमेंट कॉलेज कोटा को आयुक्तालय द्वारा रेस-सेंटर का नोडल बनाया गया है। जिन महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी होती है, वहां उस कॉलेज की डिमांड पर रेस-सेंटर से मात्र 6 दिन के लिए फैकल्टी भेजी जाती है। इसके बाद उस कॉलेज का दोबारा से नम्बर आने में करीब दो से तीन माह तक लग जाते हैं। ऐसे में एक कॉलेज को एक माह में एक बार ही 6 दिन के लिए फैकल्टी मिल पाती है। क्योंकि, रेस-सेंटर को रोटेशन के आधार पर दूसरे कॉलेजों में भी फैकल्टी भेजनी होती है। </p>
<p><strong>हर स्तर पर शिकायत, समाधान कहीं नहीं</strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज बारां के प्राचार्य भगवान कुमार ने बताया कि यहां शिक्षकों के 60 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 12 ही कार्यरत हैं। वहीं, कॉमर्स में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन व इतिहास के शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर होने से उनकी जगह विद्या संबल पर भी शिक्षक नहीं लगा सकते। वहीं, कार्यरत शिक्षकों को जिले के अन्य कॉलेजों की व्यवस्था का भी चार्ज है।  शिक्षकों के अभाव से सेमेस्टर स्कीम में और परेशानी हो गई है। समाधान के लिए आयुक्तालय, उच्च शिक्षा विभाग,  जिला कलक्टर तक पत्र भेज गुहार लगाई लेकिन समाधान  कहीं से नहीं मिला। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />राजकीय महाविद्यालय सांगोद की प्राचार्य अनिता वर्मा का कहना है, करीब 7-8 माह से हमारे यहां से दो शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर बाहर हैं, जिनकी खाली जगहों पर हम चाहकर भी विद्या संबल पर शिक्षक नहीं लगा सकते। हालांकि, आयुक्तालय को इस संबंध में लिखा भी है। ऐसे में रेस-सेंटर से फैकल्टी मांगनी पड़ती है। वहीं, अटरू कॉलेज के प्राचार्य बुद्धि प्रकाश मीणा ने बताया कि अटरू ब्यॉय में ज्योग्राफी व अंग्रेजी के शिक्षक नहीं है। ऐसे में राजसेस के अधीन अटरू गर्ल्स कॉलेज में अंगे्रजी के शिक्षक हैं, ऐसे में दोनों कॉलेजों के विद्यार्थियों की संयुक्त कक्षाएं लगानी पड़ती है लेकिन इसमें काफी परेशानी होती है। इधर, भूगोल की तो कक्षाएं लगाना ही चुनौतिपूर्ण है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br />महाविद्यालय में राजनीति विज्ञान और भूगोल के शिक्षक नहीं हैं। कक्षाएं खाली रहती हैं, सिलेबस पूरा नहीं हो पाने से परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सताता है। वहीं, प्रेक्टिकल विषय के मिडटर्म करने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।  <br /><strong>- हिमांशु कुमार, छात्र सांगोद</strong></p>
<p>रेस-सेंटर कोटा से कभी कबार 6 दिन के लिए टीचर आते हैं लेकिन 6 दिन में कोर्स पूरा होना  एक तिहाई सिलेबस भी पूरा नहीं हो पाता। इसके बाद अगली बार नंबर आने में ही 3 से 4 माह लग जाते हैं, जब तक तो एग्जाम ही शुरू हो जाते हैं। पूर्व में भी बिना पढ़े ही परीक्षा देनी पड़ी थी। <br /><strong>- अंजलि, छात्रा </strong></p>
<p>कॉलेज में इतिहास व इंग्लिश साहित्य विषय नहीं है। जबकि, विद्यार्थी इन विषयों लेना चाहते हैं। पूर्व में इसकी मांग भी कर चुके हैं, फिर भी यह विषय आवंटित नहीं हो रहे। रिक्त पदों को भरने की व्यवस्था करनी चाहिए। <br /><strong>- खुशी मीणा, छात्रा </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />महाविद्यालयों में जिन विषयों के शिक्षक नहीं है, वहां रेस-सेंटर से शिक्षक की व्यवस्था कर शिक्षण व्यवस्था सुचारू करवा रहे हैं। विद्यार्थियों का कोर्स समय पर पूरा करवाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, प्रनियुक्ति निरस्त करने या इनकी खाली जगहों पर विद्या संबल शिक्षक लगाने का मामला सरकार के स्तर का है। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Nov 2024 14:58:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिक्षण को प्रभावी किए जाने में फैकल्टी डवलपमेंट कार्यक्रम महत्वपूर्ण : राज्यपाल</title>
                                    <description><![CDATA[मिश्र ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य तकनीक का समावेश करते हुए चिकित्सा प्रशासन, शोधकर्ता की भूमिका आदि से जुड़े कौशल विकसित करने की ओर भी ध्यान दिया जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governor-says-faculty-development-program-important-in-making-teaching-effective/article-76132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/6633-copy53.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि फैकल्टी डवलपमेंट के अंतर्गत शिक्षण की बोझिलता को दूर करने के लिए कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में जो नवीनतम परिवर्तन हो रहे हैं उनको सम्मिलित करते हुए नई शिक्षा नीति के आलोक में शिक्षण को प्रभावी किया जाए। मिश्र शनिवार को महात्मा गांधी चिकित्सा विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय में नेशनल बोर्ड आॅफ  एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस द्वारा फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सक्षम और प्रभावी शिक्षक ही विद्यार्थियों को भविष्य की नई दिशाएं प्रदान कर सकता है। </p>
<p>मिश्र ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य तकनीक का समावेश करते हुए चिकित्सा प्रशासन, शोधकर्ता की भूमिका आदि से जुड़े कौशल विकसित करने की ओर भी ध्यान दिया जाए। नेशनल बोर्ड आॅफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत सेठ ने बताया कि अच्छे चिकित्सकों को अच्छे शिक्षक बनाकर डॉक्टर्स की नई पीढ़ी तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। हर साल ऐसे दो लाख डॉक्टर्स उपलब्ध कराए जाने की योजना है। इस अवसर पर महात्मा गांधी मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉ. एम एल स्वर्णकार, यूनिवर्सिटी चेयरमैन डॉ. विकास चंद्र स्वर्णकार सहित कई लोग उपस्थित रहे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Apr 2024 15:21:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा के 11 सरकारी स्कूलों में खुला विज्ञान संकाय</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने जिले के 6 ब्लॉक में 11 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान संकाय और 2 में कृषि विज्ञान संकाय खोला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/science-faculty-opened-in-11-government-schools-of-kota/article-50465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/kota-k-11-sarkari-school-me-khula-vigyan-sankaye...kota-news-30-06-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए खुश खबरी है। सरकार ने कोटा जिले के 13 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान और कृषि संकाय खोलने की स्वीकृति जारी कर दी है। इनमें अधिकतर विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों के शामिल हैं। अब विद्यार्थियों को जहां विज्ञान व कृषि की पढ़ाई के लिए निजी विद्यालयों की महंगी फीस से राहत मिलेगी वहीं, 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए शहर व अपने कस्बे से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। साथ ही दसवीं के बाद विद्यार्थियों को साइंस व एग्रीकल्चर संकाय चुनना आसान हो जाएगा। दरअसल, शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने प्रदेश के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में से 85 में विज्ञान व 15 में आर्ट्स तथा 6 में कॉमर्स के अतिरिक्त संकाय खोलने की मंजूरी प्रदान की है। इसके तहत कोटा जिले में 13 स्कूलों में से 11 में विज्ञान और 2 में कृषि विज्ञान संकाय खोले गए हैं। </p>
<p><strong>11 में विज्ञान, 2 में खुली कृषि संकाय</strong><br />सरकार ने जिले के 6 ब्लॉक में 11 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान संकाय और 2 में कृषि विज्ञान संकाय खोला है। जहां गणित और बायोलॉजी विषयों में सत्र 2023-24 से ही विद्यार्थियों को एडमिशन दिए जाएंगे। साथ  ही  प्रायोगिक  शिक्षा के लिए लैब तैयार होगी। वहीं, कृषि विज्ञान में भी सुविधायुक्त प्रयोगशाला और व्याख्याताओं के पद स्वीकृत किए जाएंगे। विद्यार्थियों को दसवीं की के बाद एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए अब शहर या निजी स्कूलों में नहीं जाना पड़ेगा। </p>
<p><strong>विज्ञान में व्याख्याताओं की स्थिति</strong><br />संकाय        स्वीकृत     कार्यरत    रिक्त पद<br />फिजिक्स    39    31    8<br />कैमेस्ट्री        39    37    2<br />बायोलॉजी    18    18    0<br />गणित        29    26    3</p>
<p><strong>40 से बढ़कर 51 हुए साइंस के स्कूल</strong><br />जिले में सीनियर सैकंडरी के कुल 325 स्कूल हैं। जिनमें से वर्तमान में 40 स्कूलों में विज्ञान संकाय चल रहा है। यहां हर वर्ष विद्यार्थियों का नामांकन में बढ़ोतरी हो रही है। क्षेत्रवासियों की मांग के अनुरूप सरकार ने 11 और स्कूलों में विज्ञान संकाय खोल दिए हैं। ऐसे में विज्ञान संचालित किए जाने वाले स्कूलों की संख्या 40 से बढ़कर 51 हो गई है। अधिकतर ग्रामीण इलाकों के स्कूल शामिल हैं। ऐसे में बच्चों को 10वीं के बाद अपने ही क्षेत्र में साइंस, गणित और बायोलॉजी पढ़ने का मौका मिल सकेगा। वहीं, निजी विद्यालयों की महंगी फीस से निजात मिल सकेगी।</p>
<p><strong>विज्ञान में भरमार, कृषि में व्याख्याताओं का टोटा</strong><br />शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में 11 कृषि विज्ञान व्याख्याता के पद स्वीकृत हैं। जिनमें से लंबे समय से 7 पद रिक्त चल रहे हैं। जबकि, वर्तमान में 4 शिक्षक ही कार्यरत हैं। जबकि, विज्ञान व्याख्याताओं के 125 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 112 पद भरे हुए हैं। वहीं, 13 पद ही रिक्त चल रहे हैं। कृषि में शिक्षकों का टोटा होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। इधर, साइंस वाले स्कूलों में फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलॉजी की तीन लैब बनेगी।</p>
<p><strong>यहां खुले साइंस और एग्रीकल्चर</strong><br />जिले के राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूल रावतभाटा रोड, केशवपुरा -6 सेक्टर, कुन्हाड़ी, महात्मा गांधी राजकीय स्कूल इटावा, महात्मा गांधी राजकीय स्कूल खैराबाद, महात्मा गांधी सुल्तानपुर, महात्मा गांधी वोकेशनल स्कूल नयापुरा, महात्मा गांधी कैथून व सांगोद तथा राजकीय सीनियर सैकंडी स्कूल सीमल्यिा तथा राजकीय इंद्रा गांधी नगर स्कूल में विज्ञान संकाय खोले जाने की स्वीकृति मिली है। इसी तरह राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूल दीगोद और आवां में कृषि विज्ञान संकाय खोला गया है। इन स्कूलों में इसी सत्र से विद्यार्थियों को 11वीं कक्षा में दाखिला दिया जाएगा। </p>
<p><strong>अब 6 स्कूलों में संचालित होगी कृषि विज्ञान</strong><br />कृषि विज्ञान संकाय अब तक लाडपुरा ब्लॉक के कैथून, खैराबाद के  रामगंजमंडी ब्यॉज व मोड़क गांव और कोटा ब्लॉक में दादाबाड़ी घोड़ा स्कूल में ही संचालित किया जा रहा है, लेकिन अब सुल्तानपुर ब्लॉक के दीगोद और सांगोद ब्लॉक के आवां  राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूल में कृषि विज्ञान पढ़ने को मिलेगी। कृषि प्रधान इलाका होने के कारण क्षेत्र के स्कूलों में कृषि संकायों को खोलने की मांग लगातार उठ रही थी। ऐसे में सरकार ने मंजूरी देते हुए यह संकाय खोल दिया। जहां सत्र 2023-24 से ही दाखिला दिया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शिक्षा विभाग निदेशालय ने कोटा जिले के 13 राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों में विज्ञान व कृषि संकाय शुरू करने की स्वीकृति दी है। इनमें से अधिकतर स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। वहीं, निजी स्कूलों की महंगी शिक्षा से राहत मिलेगी। सत्र 2023-24 से इन संकाय में एडमिशन दिए जाएंगे। कृषि और विज्ञान के क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं, जिनमें रोजगार के ढेरों अवसर उपलब्ध हैं। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए राज्य सरकार का यह कमद सराहनीय है। <br /><strong>- प्रदीप चौधरी, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक कोटा</strong></p>
<p><strong>महंगी शिक्षा सेमिलेगी निजात</strong><br />सरकारी स्कूलों में विज्ञान व कृषि संकाय खुलने से ग्रामीण इलाकों के बच्चों को अब घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही प्राइवेट स्कूलों की महंगी शिक्षा से भी अभिभावकोें को निजात मिलेगी। कृषि की दुनिया में बढ़ती टेक्नोलॉजी से बच्चे रुबरू होंगे। साथ ही 11वीं-12वीं करने के बाद कृषि में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की राह आसान होगी। वहीं, विद्यालयों में नामांकन का स्तर बढ़ेगा। सरकार के निर्णय से बालिकाओं को घर के पास ही क्वालिटी एजुकेशन मिलेगी। <br /><strong>- राजेश कुमार मीणा, अतिरिक्त जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 16:04:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुविवि : इंजीनियरिंग का बिगड़ा ‘आर्किटेक्चर’, 6 स्टूडेंट्स पर 3 फैकल्टी</title>
                                    <description><![CDATA[सुखाड़िया विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग कॉलेज का पहला बैच उधार के भवन और जुगाड़ की फैकल्टी के साथ गिने-चुने स्टूडेंट्स संग चल रहा है। यह प्रदेश का एकमात्र कॉलेज है, जहां आर्किटेक्चर इंजीनियरिंग में निर्धारित 40 सीटों पर महज 6 स्टूडेंट्स ने प्रवेश लिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news--sukhadia-university--engineering-s--architecture--deteriorated--3-faculty-per-6-students/article-8467"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/mohanlal-sukhadia-university-.jpg" alt=""></a><br /><p><br /> उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग कॉलेज का पहला बैच उधार के भवन और जुगाड़ की फैकल्टी के साथ गिने-चुने स्टूडेंट्स संग चल रहा है। यह प्रदेश का एकमात्र कॉलेज है, जहां आर्किटेक्चर इंजीनियरिंग में निर्धारित 40 सीटों पर महज 6 स्टूडेंट्स ने प्रवेश लिया है। इतना ही नहीं, कॉलेज में फैकल्टी का भी टोटा है। सुविवि प्रबंधन ने फैकल्टी के लिए जब पहली बार इंटरव्यू कॉल किया गया तो एक भी आवेदन नहीं आया, वहीं दूसरी बार में एक अभ्यर्थी ने हिस्सा लिया। ऐसे में पहला बैच संचालित करने के लिए सुविवि प्रबंधन को जुगाड़ करना पड़ा है। आर्किटेक्चर इंजीनियरिंग के 6 स्टूडेंट्स पर 3 फैकल्टी लगाई गई है। <br /><br />सुविवि प्रबंधन को कुल मिलाकर इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने में जल्दबाजी भारी पड़ गई है। इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए करोड़ों रुपए का फंड जारी कर दिया गया है, जबकि कॉलेज बिल्डिंग अब तक तैयार भी नहीं हुई है। स्थिति यह है कि कॉलेज की विभिन्न ब्रांचों में उपकरण खरीदने के लिए भी उधारी में कार्य चलाना पड़ गया है। सुविवि ने संघटक साइंस कॉलेज को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश में कहा ‘विभिन्न ब्रांचों के लिए उपकरण खरीदने होंगे, जिसकी जिम्मेदारी साइंस कॉलेज को दी जाती है। ऐसे में साइंस कॉलेज उसके स्थानीय निधि में से 15 लाख रुपए के उपकरण खरीदें। यह राशि संकाय से प्राप्त होने वाली आय से वापस लौटा दी जाएगी।’<br /><br /><strong>आईआईएम-यू ने भी किया तीन साल इंतजार</strong><br />नियमों की माने तो किसी भी कॉलेज भवन के लिए तीन वर्ष का इंतजार करना होता है, जब संबंधित कॉलेज में निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित हो जाते हैं तभी बिल्डिंग को लेकर कार्य होता है। प्रदेश के पहले आईआईएम उदयपुर भी तीन साल तक सुविवि परिसर में चला, उसके बाद बलीचा में कैंपस बनाया गया। इतना ही नहीं सुविवि के संघटक लॉ कॉलेज में बीए एलएलबी की तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद भवन बनाया गया। वर्तमान में इंजीनियरिंग कॉलेज शिक्षा संकाय के पुराने भवन में संचालित किया जा रहा है। राजस्थान विद्यापीठ में कृषि संकाय शुरू किया, लेकिन वर्तमान में विभिन्न संकायों भवनों का उपयोग किया जा रहा है तथा फैकल्टी सदस्यों की भर्ती की जा रही है।<br /><br /> </p>
<table>
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;" colspan="3"><strong>महज 26 फीसदी सीटों पर प्रवेश</strong></td>
</tr>
<tr>
<td>ब्रांच </td>
<td>कुल सीट</td>
<td>इतने प्रवेश</td>
</tr>
<tr>
<td>कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग                        </td>
<td>60                         </td>
<td>60</td>
</tr>
<tr>
<td>सिविल इंजीनियरिंग                                      </td>
<td>60                        </td>
<td>09</td>
</tr>
<tr>
<td>मैकेनिकल इंजीनियरिंग                                 </td>
<td>60                        </td>
<td>05</td>
</tr>
<tr>
<td>इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्युनिकेशन                      </td>
<td>60                         </td>
<td>03</td>
</tr>
<tr>
<td>इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग                                   </td>
<td>60        </td>
<td>07</td>
</tr>
<tr>
<td>आर्किटेक्चर        </td>
<td>40       </td>
<td>06</td>
</tr>
<tr>
<td>योग            </td>
<td>340        </td>
<td>90</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>                                                             <br /><br /><br /><br /></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news--sukhadia-university--engineering-s--architecture--deteriorated--3-faculty-per-6-students/article-8467</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Apr 2022 11:36:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[udaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एलन कोचिंग संस्थान के फैकल्टी की संदिग्धावस्था में मौत</title>
                                    <description><![CDATA[एलन कोचिंग संस्थान के कोचिंग छात्र-छात्राओं व फैकल्टी द्वारा आत्महत्या करने के बढ़ते मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसा क्या कारण रहता है कि संस्थान के छात्र-छात्राओं को ऐसा कदम उठाना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/faculty-of-allen-coaching-institute-dies-in-suspicious-condition/article-4565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/2022-02-17~2eg9l_nt.jpg" alt=""></a><br /><p> कोटा । एलन कोचिंग संस्थान के कोचिंग छात्र-छात्राओं व फैकल्टी द्वारा आत्महत्या करने के बढ़ते मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसा क्या कारण रहता है कि संस्थान के छात्र-छात्राओं को ऐसा कदम उठाना पड़ रहा है। इस बात को आज तक पुलिस प्रशासन ने तलाशने का प्रयास नहीं किया। इसके लिए कौन दोषी है? ऐसे ही बुधवार रात जवाहर नगर थाना क्षेत्र में  एलन कोचिंग संस्थान के एक फैकल्टी की संदिग्धावथा में मौत होने का मामला सामने आया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवाया है। साथ ही उसके परिजनों को सूचना दी गई है। परिजनों के आने के बाद ही फैकल्टी के शव का पोस्टमार्टम होगा। </p>
<div> </div>
<div> पुलिस निरीक्षक रामकिशन ने बताया कि ईशान संत पुत्र अनूप जीवन संत निवासी लखनऊ  हाल राजीव गांधी नगर निवासी का शव कमरे में पलंग पर पड़ा मिला। संजय रूग्टा का टू बीएच का फ्लैट किराए से लेकर पिछले ढाई साल से रह रहा था। ईशान पंत एलन कोचिंग संस्थान में फैकल्टी था। फ्लैट में अकेला ही रहता था। वह फ्लैट से बहुत कम बाहर निकलता था, ज्यादातर कमरे में ही रहता था। कोराना काल के कारण पिछले कई महीनों से आॅन लाइन कोचिंग ले रहा था। लखनऊ से परिवार के सदस्यों का फोन नहीं उठाया था, जिससे परिजनों ने मकान मालिक को फोनकर बताया था, इसके बाद मकान मालिक ने कमरे पर आवाज दी तो अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं होने पर पुलिस को सूचना दी। सूचना पहुंची पुलिस ने फोटो ग्राफर को बुलाया और फोटोग्राफी तथा वीडियो करवाई तथा कमरे का ताला तोड़ा तो अंदर कमरे में पलंग पर अचेतावस्था  में पड़ा था। पुलिस ने उसे तुरंत एमबीएस अस्पताल भिजवाया था, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित किया। शव को मोर्चरी में रखवाया गया है। परिजनों को सूचना दे दी गई है। कमरे में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है उसके पास कमरे में कुछ दवाईयां मिली है, जिससे संभत: उसका कोई उपचार चल रहा होगा। मामले जांच की जाएगी। एलन कोचिंग संस्थान से पूछताछ में बताया गया कि वह उनके यहां दो तीन महीने से कार्य नहीं कर रहा था। अपने घर ही पढ़ाता था।</div>
<div> </div>
<div> एलन में था फैकल्टी, अकेला रहता था </div>
<div> मकान मालिक संजय रुग्टा ने बताया कि ईशान ने दो साल पहले मकान किराए पर लिया था। वह एलन में फैक्ल्टी था। अविवाहित था और उसके माता-पिता कभी कभी आते जाते रहते थे। उनके पिता को  बुधवार रात करीब आठ बजे फोन आया था। इसके बाद ऊपर कमरे में जाकर देखा तो कमरे की लाइट जली हुई थी तथा कमरा बंद था। इसके बाद साढ़े नौ बजे पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वीडियो व फोटा ग्राफी करवाई। इसके बाद पुलिस ने ही कार्रवाई की है। वह ज्यादातर कमरे में ही रहता था। अभी फिर हाल क्या करता था पता नहीं, लेकिन हमने कमरा दिया था उस समय एलन में ही फैकल्टी ही था। </div>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 14:31:14 +0530</pubDate>
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                <title>JOB Alert : विभिन्न पदों पर 250 से ज्यादा भर्तियां</title>
                                    <description><![CDATA[यूपीएससी ने फैकल्टी व अन्य सीनियर पदों पर भर्ती के लिए मांगे आवेदन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/job-alert---%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-250-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82/article-2484"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/job4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महाराष्ट्र सर्कल में डाक विभाग ने 250 से अधिक रिक्तियों की घोषणा की है और योग्य भारतीय उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। महाराष्ट्र पोस्टल सर्कल में वर्ष 2020 तक के रिक्त पदों को भरने के लिए स्पोर्ट्स कोटा  के तहत मेधावी खिलाड़ियों की सीधी भर्ती हो रही है।</p>
<p><br /> इस स्पोर्ट्स कोटे के तहत पोस्टल असिस्टेंट, सॉर्टिंग असिस्टेंट, पोस्टमैन और मल्टी टास्किंग स्टाफ की सीधी भर्ती के लिए 257 रिक्तियों की घोषणा की है। यदि कोई अभ्यर्थी इन पदों के लिए आवेदन करना चाहता है तो आधिकारिक वेबसाइट पर इस संबंध में विस्तृत जानकारी हासिल कर सकता है</p>
<p><br /> <strong>इन पदों के लिए</strong><br />  डाकघरों/एसबीसीओ/प्रशासनिक कार्यालयों/सब ऑर्डिनेट कार्यालयों में डाक सहायक पीए<br />  रेलवे मेल सेवा कार्यालयों में छंटनी सहायक एसए <br /> डाकघरों में डाकिया पीएम मेल सेवा कार्यालयों में मेल गार्ड<br />   प्रशासनिक कार्यालयों /डाकघरों /रेलवे मेल सेवा कार्यालयों में मल्टी.टास्किंग स्टाफ एमटीएस <br /> डाक सहायक - 93 पद<br /> छंटाई सहायक -09 पद<br /> डाकिया- 113 पद<br /> मल्टी.टास्किंग स्टाफ - 42 पद</p>
<p><br /> <strong>आयु सीमा</strong><br /> पोस्टल असिस्टेंट/सॉर्टिंग असिस्टेंट पद के लिए 27 नवंबर 2021 को उम्मीदवार की आयु 18 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। डाकिया पद के लिए 27 नवंबर 2021 को उम्मीदवार की आयु 18 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। वहीं मल्टी.टास्किंग स्टाफ पद के लिए 27 नवंबर 2021 को उम्मीदवार की आयु 18 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए।</p>
<p><br /> <strong>यूपीएससी ने फैकल्टी व अन्य सीनियर पदों पर भर्ती के लिए मांगे आवेदन</strong><br /> संघ लोक सेवा आयोग यूपीएससी ने फैकल्टी व अन्य सीनियर पदों पर भर्ती के लिए अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। योग्य अभ्यर्थी यूपीएससी की आॅफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन डिटेल्स देख सकते हैं। यूपीएससी की इस भर्ती के जरिए कुल 36 पदों को भरा जाना है जिसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 2 दिसंबर 2021 है।<br /> कम्प्लीट आवेदन फॉर्म 03 दिसंबर 2021 तक डाउनलोड किए जा सकेंगे। अभ्यर्थियों को यूपीएससी की वेबसाइट   से ऑनलाइन आवेदन करना होगा।<br /> रिक्तियों का विवरण <br /> प्रोफेसर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग- 1 पद<br /> एसोसिएट प्रोफेसर 6 पद<br /> असिस्टेंट प्रोफेसर 12 पद<br /> संयुक्त सहायक निदेशक 3 पद<br /> डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एम्प्लॉयमेंट 6 पद<br /> सीनियर असिस्टेंट कंट्रोलर 8 पद<br /> आवेदन शुल्क <br /> यूपीएससी की इस भर्ती के लिए अभ्यर्थियों को मात्र 25 रुपए आवेदन शुल्क के रूप में एसबीआई के जरिए जमा कराने होंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Nov 2021 10:35:00 +0530</pubDate>
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